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Ques Ans 17th Sep

Anish Dhammi · 1,695 words · 8 min read

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0:00[संगीत]

0:09हेलो नाइंथ क्लास। इस वीडियो में हम अपनी

0:11कल वाली क्लास आगे कंटिन्यू करेंगे। ठीक

0:13है? कल हमने क्या पढ़ा था? आचार्य कन्वर्ड

0:16जी के बारे में पढ़ा था और आगे वो ग्रीक

0:19ब्रदर्स के बारे में पढ़ा था। थोड़ा सा

0:21डेल्टन के बारे में पढ़ा था। अब टॉपिक क्या

0:24है हमारा? व्हाट डड आचार्य कन्नड़ प्रपोज

0:27अबाउट मैटर? आचार्य कन्नड़ ने मैटर के

0:30बारे में क्या बोला था भाई? सिंपल सा है

0:32भाई। हमें हम जिसको आज की डेट में मैटर

0:35बोलते हैं। ठीक है? आचार्य कन्नड़ ने उनको

0:38क्या बोला था? द्रव्य बोला था। क्या वर्ड

0:41यूज़ किया था? द्रव्य। इन्होंने बोला था

0:44आचार्य कन्नड़ प्रपोज्ड दैट। प्रपोज दैट

0:47का मतलब क्या होता है? ऑफर्ड दैट। आचार्य

0:50कन्नड़ ने ऑफर करा अपनी बात पेशाई कि मैटर

0:54या फिर द्रव्य कैन बी डिवाइडेड रिपीटेडली।

0:58उसको हम डिवाइड कर सकते हैं जब तक कि हम

1:01उन पार्टिकल्स तक नहीं पहुंच जाते जो आगे

1:03डिवाइड नहीं हो सकते। और वो पार्टिकल्स जो

1:06आगे डिवाइड नहीं हो सकते उनके लिए

1:08इन्होंने क्या वर्ड यूज़ किया था? परमाणु

1:11जिसको हम आज की डेट में क्या बोल देते

1:13हैं? एटम। अब दोबारा सुनो भाई क्या

1:16सिनेरियो है? आचार्य कन्नड ने क्या प्रपोज

1:20किया था कि मैटर। आज की डेट में जिसको हम

1:23लोग मैटर बोलते हैं उसको उन्होंने क्या

1:25बोला था? द्रव्य इन्होंने क्या बोला यह

1:28वाली लाइन दोबारा देखना सेकंड वाली तो

1:31देखो इन्होंने बोला कि जो मैटर है यानी जो

1:35द्रव्य है कैन बी डिवाइडेड रिपीटेटिवली

1:39उसको बार-बार बार-बार डिवाइड किया जा सकता

1:42है कब तक अंटिल वी रीच एक्सट्रीमली स्मॉल

1:46पार्टिकल्स जब तक कि हम बेहद छोटे-छोटे

1:48पार्टिकल्स तक ना पहुंच जाए जिनको आगे

1:51डिवाइड नहीं किया जाता और वो वाले

1:53पार्टिकल्स जो बेहद एक्सट्रीमली स्मॉल

1:56पार्टिकल्स है जिनको हम लोग एटम बोल देते

1:59हैं। इन्होंने उनके लिए क्या वर्ड यूज़

2:01किया था? परमाणु यूज़ किया था। तभी

2:04हिंदुस्तान में लोग एटम को परमाणु के नाम

2:06से भी जानते हैं। आचार्य कन्नड़ ने ये बोला

2:10था।

2:11आचार्य कन्नड़ प्रपोज दैट मैटर और द्रव्य

2:14कैन बी डिवाइडेड रिपीटेडली अंटिल वी रीच

2:18एक्सट्रीमली स्मॉल पार्टिकल्स दैट कैन नॉट

2:21बी डिवाइडेड फदर। ही कॉल्ड दिस पार्टिकल्स

2:24परमात्मा। सेकंड क्वेश्चन

2:27परमाणु होते क्या है? एटम क्या होता है?

2:30अब सिंपल सा आंसर है भाई। आचार्य कन्नड़

2:34ने वर्ड दिया था तो इनको क्रेडिट तो देना

2:36ही देना है। आचार्य कन्नड़ ने प्रपोज किया

2:39था कि परमाणुस वर एक्सट्रीमली स्मॉल एंड

2:43इंडिविजिबल पार्टिकल्स ऑफ मैटर। मैटर या

2:46द्रव्य जो मर्जी कह लो कि परमाणु क्या है?

2:49बेहद छोटे और इंडिविजिबल पार्टिकल्स है जो

2:52फदर डिवाइड नहीं हो सकते। ये बात

2:54किन्होंने करी थी? ये लैंग्वेज किसकी थी?

2:56परमाणु या द्रव्य वाली। ठीक है? ये द्रव्य

3:00हो गया या परमाणु हो गई। की बात किसने करी

3:03थी? आचार्य कन्नड ने करी थी। ठीक है? आगे

3:06देखो क्या लिखा हुआ है? दे वर कंसीडर्ड टू

3:10स्मॉल टू बी पर्सव्ड बाय आवर सेंसेस। इस

3:13लाइन का मतलब क्या होता है? कि परमाणु को

3:16इतना छोटा माना गया था कि उसको हम अपनी

3:18सेंसेस से, अपनी सूझबूझ से ऐसे डिटेक्ट भी

3:22नहीं कर सकते। अब बेटा जिस बच्चे को

3:24पर्सव्ड का मतलब ना पता लगे ये देखना

3:28पर्सव्ड को आप ऐसे लिख सकते हो कहीं पर

3:31पर्स लाइक डिटेक्टेड

3:34ऐसे लिख लेते हो ये जो पर्सव्ड वर्ड है ना

3:41डिटेक्टेड

3:45कि इतना छोटा है ये परमाणु इसको हम हमारे

3:48सेंसेस से डिटेक्ट भी नहीं कर सकते

3:52वही वाली बात आ जाती है। अच्छा जी आगे

3:57बेसिकली कल की क्लास की रिवीजन की है ये

4:00कुछ क्वेश्चन आंसर्स की। उसके बाद दयाद और

4:03त्रयात क्या थी? इंग्लिश में तो जो मर्जी

4:05ऐसे निकले आसान शब्दों में दयाद और त्रयाद

4:09क्या थी? ये वर्ड्स भी आचार्य कन्नड ने

4:11यूज़ करे थे। उन्होंने सिंपल बोला था अगर

4:15दो परमाणु मिलेंगे परमाणु वन और परमाणु टू

4:19तो क्या बनेगा? ब्याज बनेगा। और अगर तीन

4:23परमाणु परमाणु वन परमाणु टू परमाणु तीन तो

4:27क्या बनेगा? त्रयाग बनेगा। इसी को पढ़ते

4:30हैं जरा देखते हैं।

4:33क्या सिनेरियो

4:35अकॉर्डिंग टू आचार्य कन्नर कॉम्बिनेशन ऑफ

4:38टू परमाणुस फॉर्म द। अगर दो परमाणु कंबाइन

4:42होंगे। दो परमाणु कंबाइन होकर क्या

4:45बनाएंगे? प्रयाग व्हाइल कॉम्बिनेशन ऑफ

4:48थ्री परमाणु तीन परमाणु अगर मिलेंगे तो

4:51क्या बनेगा? प्रयाग ये बेटा तीन क्वेश्चन

4:55आगे कंटिन्यू करते हैं इसको।

4:58ये भाई जी ल्यूकीपर्स और डेमोक्रेट है

5:00सारे वो ग्रीक वाले जो थे इन्होंने क्या

5:04योगदान दिया था? मैटर की फील्ड के अंदर

5:06देखते हैं।

5:15व्हाट डड ल्यूकीपस एंड डेमोक्रेटस प्रपोज

5:19ल्यूकिपस और डेमोक्रेटस ने क्या प्रपोज

5:21करा? क्या ऑफर करा? क्या बात पेशाइ? तो

5:24सिंपल है भाई। ल्यूकिपस और डेमोक्रेटस ने

5:27प्रपोज किया था कि मैटर बेहद छोटे

5:30पार्टिकल से बना हुआ है जो फदर डिवाइड हुई

5:33है। इनकी बात भी आचार्य कन्नड़ की तरह ही

5:36थी। फर्क ये था। आचार्य कन्नड़ अपनी

5:38संस्कृत में अपनी हिंदी लैंग्वेज में बोल

5:40रहे थे। हमारी लैंग्वेज में बोल रहे थे।

5:42ये लोग अपनी भाषा में बात कर रहे थे।

5:45इन्होंने भी यही बातें करी थी दोनों ने कि

5:47मैटर जो है वो बेहद छोटे पार्टिकल से बना

5:50हुआ है जो डिवाइड में है। अच्छा इनका

5:53क्रेडिट क्या है? इन्होंने इन पार्टिकल्स

5:55को एटमस बोला था। और ये अगला क्वेश्चन

5:58इससे रिलेटेड ही है। एटमस वर्ड का मतलब

6:01क्या होता है? बेटा इंडिविजुअल।

6:04ये जो एटमस वर्ड है इसका क्या मीनिंग निकल

6:08के आता है? एटमस का मतलब होता है

6:10इंडिविजिबल। व्हाट इज द मीनिंग ऑफ द वर्ड

6:12एटमस? सिंपल एक ग्रीक वर्ड है जिसका मतलब

6:16है इंडिविजिबल जो डिवाइड नहीं हो सकता।

6:19याद रखिएगा।

6:29ये देखो।

6:33हाउ वाज़ डेल्टनस आईडिया डिफरेंट फ्रॉम द

6:37अर्लियर आइडियाज अबाउट एटम? डेल्टन ने फिर

6:40ऐसा क्या खास करा था जो आचार्य कन्नड़ या

6:44न्यू कीपर्स और डेमोक्रेटर्स ने नहीं करा

6:46था। क्या खास बात थी डेल्टन की थ्योरी

6:48में? बेटा आपको कल भी बताया था। ये देखो

6:52जॉन की जो डेल्टन एटॉमिक थ्योरी थी ना वो

6:55सिर्फ फिलोसफी पर बिलीफ पर मान्यता

6:59मान्यताओं पर नहीं थी प्रॉपर साइंटिफिक

7:01एक्सपेरिमेंट्स थे उस समय के जो भी

7:04अवेलेबल थे उस समय पर उसके दम पे डेल्टन

7:07ने थ्योरी बताई थी इसलिए डेल्टन की इज्जत

7:09ज्यादा है ये सिंपल रीज़न है ऐसा नहीं वो

7:12बाहर का था बाहर के तो फिर इससे पहले वाले

7:14वो लकीपर्स और डेमोक्रेट्स भी थे सिंपल सी

7:17बात है भाई जो एंशिएंट थिंकर्स थे ना

7:20एंशिएंट मतलब पुरानी जैसे आचार्य कन्नड़

7:23वगैरह इनका सारा जो भी आइडियाज थे ना वो

7:26थोड़ी फिलोसफी पर थे मान्यताओं पर थे

7:29ट्रेडिशंस पर थे रीति रिवाजों पर थे थोड़ा

7:33वो माइथोलॉजिकल पॉइंट ऑफ व्यू पर थे बट

7:36जॉन डेल्टन ने क्या करा था यहां पर

7:39साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट्स और ऑब्जरवेशंस

7:42के दम पर अपनी थ्योरी निकाली थी इसलिए

7:44डेल्टन ने इज्जत कमाई थी जॉन द डॉन याद

7:47रखना ठीक है भाई द आइडियाज ऑफ एंशिएंट

7:50थिंकर्स यानी कि एचआर वगैरह के जो आइडियाज

7:53थे वो फिलोसफिकल थे रीजनिंग थे लेकिन

7:56जॉर्ज टन डेल्टन की जो एटॉमिक थ्योरी थी

7:59ये साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट्स के ऊपर थी और

8:02ऑब्जरवेशंस के ऊपर जो उस समय पर अवेलेबल

8:05थी अच्छा डेल्टन ने अपनी थ्योरी कब प्रपोज

8:08करी 1808

8:11डेल्टन की थ्योरीेंट क्यों है भाई क्योंकि

8:14कल पढ़ा था ना ये बेस बनी फाउंडेशन बनी

8:17फाउंडेशन का मतलब क्या होता है बेटा बेस

8:21जैसे हम बोल सकते हैं अभी आप नाइंथ में

8:23हो। नाइंथ इज अ बेस फॉर योर 10थ क्लास।

8:27फाउंडेशन फॉर योर 10थ क्लास बेस। क्या हुआ

8:31भाई? डेल्टन की एटॉमिक थ्योरी पहली

8:33साइंटिफिक डिस्क्रिप्शन थी। ये बहुत

8:35इंपॉर्टेंट बात है। पहली साइंटिफिक

8:38डिस्क्रिप्शन कि किस प्रकार से मैटर बना

8:40हुआ है। ये एक बेस बनी। फिर जिसके बाद आगे

8:43आगे फदर स्टडीज भी होती है।

8:47यह वाला क्वेश्चन अभी पढ़ेंगे हम रेडिएशन

8:49वाला।

8:51अभी इसको पढ़ेंगे। ठीक है?

8:56व्हाट चेंज्ड साइंटिस्ट्स बिलीव दैट एटम्स

8:59वर इंडिविजिबल? देखो शुरू में आचार्य

9:02कन्नड़ ने बोला कि एटम इंडिविजिबल है। जो

9:05परमाणु है वो डिवाइड नहीं होता। सबसे छोटा

9:07पार्टिकल परमाणु वो ल्यूकीपस और

9:10डेमोक्रेटस ने भी बोला कि एटमस मतलब

9:12इंडिविजिबल डिवाइड नहीं हो सकता। डेल्टन

9:15ने भी यही बोला कि एटम डिवाइड नहीं होता।

9:17फिर ऐसा भी क्या हो गया कि साइंटिस्ट का

9:20बिलीफ बदल गया कि एटम इंडिविजिबल है। तो

9:24भाई क्या हुआ? ये रेडिएशंस वाला ही आंसर

9:26है। कि ना कुछ रेडिएशंस वगैरह के बारे में

9:29पता लगा। ये अभी हम डिस्कस करेंगे। टेंशन

9:31ना लो। इस वाले को अभी मैं स्किप कर रहा

9:33हूं। रेडिएशन वाला भी हम करेंगे डिस्कस।

9:36नाइंथ और 10थ फिलहाल के लिए स्किप करें।

9:40यह देखो कॉम्पिटेंसी बेस्ड क्वेश्चन।

9:43एक स्टूडेंट ने कहा कि आईडिया ऑफ़ एटम्स

9:46सबसे पहली बार जॉन डेल्टन ने दिया था।

9:48क्या ये सही है? नहीं भाई ये सही नहीं है।

9:52आचार्य कन्नड़ ने पहले अपनी बात करी थी।

9:54उन्होंने भी तो यही कहा था ना कि जो ये

9:57मैटर है अपनी भाषा में यह परमाणु से बना

9:59हुआ है जिसको हम एटम बोल देते हैं और ये

10:02जो ग्रीक फिलॉसफर्स थे ल्यूकीपस और

10:04डेमोक्रेटस इन्होंने भी यही बोला था एटमस

10:07के बारे में कुछ बस डेल्टन का क्या था

10:10डेल्टन ने साइंटिफिक बेसिस पर थ्योरी दी

10:12थी इनकी थोड़ी कहानी थी डेल्टन ने

10:14साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट से प्रूफ देके

10:16देखी थी तभी डेल्टन ने ज्यादा इज्जत की

10:19तो ये बच्चा बोल रहा है कि पहली बारी

10:21एटम्स की बात डेल्टन ने करी थी तो यार

10:23नहीं बच्चा ठीक नहीं है। बात तो आचार्य

10:26कन्नड़ और ये यूकीपर्स और डेमोक्रेटिस भी

10:28कर चुके थे। बस डेल्टन ने पहला साइंटिफिक

10:32एक्सपेरिमेंट ये करा था इसलिए डेल्टन की।

10:36ये देखो सिमिलर सा क्वेश्चन। अगर डेल्टन

10:39ने माना था कि एटम इंडिविजिबल है। तो

10:42क्यों इस आईडिया को चेंज कर दिया गया? और

10:44आज की डेट में आप बोलते हो कि एटम डिवाइड

10:47नहीं होते। तो सिंपल है भाई। टेल्टन मर

10:49गया जब बाद में जो एक्सपेरिमेंट्स हुए

10:52उससे यह एविडेंस मिला। एविडेंस का मतलब

10:54क्या होता है? एविडेंस रेफर्स टू प्रूफ।

11:00एविडेंस वर्ड का मतलब क्या होता है?

11:02प्रूफ।

11:04लेटर एक्सपेरिमेंट से प्रूफ बना कि एटम के

11:06अंदर और छोटे-छोटे पार्टिकल्स हैं। तो फिर

11:09इसलिए डेल्टन की बात को मॉडिफाई कर दिया

11:12गया कि डेल्टन ने जो बोला था ना कि एटम्स

11:15इंडिविजिबल है। इस बात को मॉडिफाई कर दिया

11:18गया। अब बेटा इस वीडियो में मैंने दो

11:20क्वेश्चंस डिस्कस नहीं करे। टोटल यहां पर

11:22क्वेश्चंस थे 10 और दो 12। मैंने दो

11:26क्वेश्चंस डिस्कस करे। क्वेश्चन नंबर नाइन

11:28और क्वेश्चन नंबर 10। क्यों नहीं करे?

11:31क्योंकि रेडिएशन की अभी स्लाइड हम

11:33पढ़ेंगे।

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