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Anish Dhammi · 4,257 words · 20 min read

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0:01हां जी 11th इकोनॉमिक्स आप लोगों का थोड़ा

0:04रिवाइज कर दिया सिंस एग्जाम्स आर अपकमिंग

0:07पीपीसी पीपीसी बेटा आपका

0:09माइक्रोइकोनॉमिक्स का चैप्टर टू का टॉपिक

0:11है दैट इज प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व

0:13प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व अब इसका क्या

0:16है भाई एक-एक करके पढ़ना स्टार्ट करते हैं

0:18जस्ट अ सेकंड

0:22हां जी

0:24पीपीसी क्या है भाई मीनिंग सबसे पहले

0:27पीपीसी ना आईसी का जस्ट अपोजिट है। ये एक

0:30प्रोड्यूसर के पॉइंट ऑफ व्यू से पढ़ने

0:32वाला चैप्टर है। ठीक है? पीपीसी चैप्टर

0:34में क्या पढ़ा जाता है? प्रोड्यूसर का

0:36पॉइंट ऑफ व्यू। पीपीसी के चैप्टर को किससे

0:39पढ़ा जाता है? प्रोड्यूसर के पॉइंट ऑफ

0:40व्यू से कि व्हाट आर द डिफरेंट पॉसिबल

0:44केसेस? अलग-अलग तरीके से अलग-अलग कॉम्बोस

0:47में प्रोड्यूसर गिवन रिसोर्सेज को यूज़

0:50करके क्या-क्या उगा सकता है, बना सकता है।

0:53ठीक है? अब टॉपिक क्या है? ध्यान से

0:56देखिएगा।

0:58पीपीसी प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व एक कर्व

1:01है। ठीक है? नाम से ही आ रहे हैं उसके

1:02कर्व जो क्या दिखाता है? कैमल अलग-अलग

1:05कॉम्बिनेशन ऑफ टू और मोर गुड्स डिफरेंट

1:10कॉम्बिनेशंस ऑफ टू और मोर गुड्स दैट कैन

1:13बी प्रोड्यूस्ड यूजिंग गिवन रिसोर्सेज एंड

1:15टेक्नोलॉजी। अलग-अलग कॉम्बिनेशंस दिखाता

1:18है। अलग-अलग कॉम्बो दिखाता है दो या दो से

1:22ज्यादा गुड्स के जो गिवन रिसोर्सेज और

1:24टेक्नोलॉजी को यूज़ करके बनाए जा सकते हैं।

1:27एजम्पशनंस में पहले तो ये दो चीजें ही

1:29हैं। रिसोर्सेज कांस्टेंट रहेंगे,

1:32टेक्नोलॉजी कांस्टेंट रहेंगी। बेटा ऐसा

1:34क्यों? क्योंकि रिसोर्सेज बढ़ गए तो या

1:36टेक्नोलॉजी बढ़ गई तो आप ज्यादा बना पाओगे।

1:38फिर इसलिए स्टडी करने के लिए इन्हें

1:40कांस्टेंट माना जाता है। और एक ये चीज भी

1:42मानी जाती है कि जो आपके रिसोर्सेज है वो

1:44फुल्ली यूटिलाइज्ड है। इसका मतलब क्या हो

1:46सकता है भाई? कि फॉर एग्जांपल अगर आपके

1:49पास इतना खेत है ना तो इसमें सारे में

1:51खेती हो रही है। सारे में जितने में

1:54पॉसिबल है उतने में खेती हो रही है। ये

1:56नहीं कि आपने थोड़ी सी जगह ऐसी खाली छोड़

1:57दी अपनी मंजी डालने के लिए। ऐसे नहीं।

2:01इसके बाद बेटा आ जाता है इसका टेबल। टेबल

2:04की बड़ी सिंपल ट्रिक थी। कॉम्बिनेशंस यह

2:07टेबल IC का उल्टा है। ए बी सी डी ई

2:11अलग-अलग गुड्स उगाने हैं। तो गुड एक्स और

2:13गुड व गुड एक्स और गुड व ये बेटा गुड एक्स

2:16और गुड व कुछ भी हो सकते हैं। वीट राइस हो

2:19सकते हैं। एप्पल ऑरेंज हो सकते हैं।

2:20एनीथिंग

2:22ठीक है? अब गुड एक्स का ट्रिक यहां पर

2:24क्या है भाई? ज़ीरो से स्टार्ट करो और 10

2:2710 बढ़ाते चलो। ज़ीरो में 10 बढ़ाए 10। 10

2:30में 10 बढ़ाए 20। 20 में 10 बढ़ाए 30। 30

2:32में 10 बढ़ाए 40। गुड बाय। इसको 100 से

2:36स्टार्ट करो और घटाते चलो। कैसे? पहले 10

2:39घटाओ, फिर 20 घटाओ, फिर 30 घटाओ। एंड सो

2:41ऑन। 100 है। पहले माइनस 10 करो। क्या आ

2:44जाएगा? 90 फिर 10 घटाने के बाद 20 घटाओ।

2:4870 20 घटाने के बाद 30 घटाओ। तो 70 में से

2:51जब आप 30 घटाओगे तो क्या आएगा? 40। फिर 40

2:54घटाओ। 40 में से 40 घटाओगे क्या आ जाएगा?

2:57ज़ीरो। इस तरीके से अलग-अलग कॉम्बो है कि

3:01भाई अगर आप गुड x को बढ़ा रहे हो। अगर आप

3:03गुड एक्स को बढ़ा रहे हो तो गुड व कम होता

3:06जा रहा है। इसी को भाई आप प्लॉट कर दो।

3:09यहां से क्यों रट्टा मारते हो? प्लॉट करो

3:11इसको अपने तरीके से।

3:13अपने स्टाइल से प्लॉट करो। ये फिर भी

3:15थोड़ा पॉइंटेड है। एक्चुअल में थोड़ा कर्व

3:17बनेगा। ऐसे कर्व्ड शेप बनेगी इसकी। अब एक

3:21बार प्लॉट करके देखना। यहां से ना चेपो।

3:23अपने आप प्लॉट करो।

3:25बस इस सारे को एक्सिस, y एक्सिस और x

3:27एक्सिस पे प्लॉट कर लेना है। 10, 20, 30,

3:3040, 50 इधर भी y एक्सिस पे जो है प्लॉट कर

3:33दो। 0 पे 100 ये वाला पॉइंट

3:37ये देखना। 0 पे 100 मतलब ये a वाला पॉइंट।

3:42फिर 10 पे 90

3:44x 10 y 90 b वाला पॉइंट। फिर 20 पे 70 x

3:4920 और y क्या है? 70

3:54ये वाला C वाला पॉइंट। फिर ऐसे ही 30 पे

3:5640, D वाला पॉइंट और E पे 40 पे ज़ीरो। इन

3:59पॉइंट्स को आप कर्व में प्लॉट कर दो। ये

4:01आपका प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व बन जाएगा।

4:04इसमें कुछ एक्स्ट्रा भी लिखा हुआ है भैया

4:05ये भी बता दो वो सुन लो।

4:08जो जो इस ग्राफ में पॉइंट A B C D E F G A

4:13B C D जो इस कर्व के ऊपर आ रहे हैं। FG जो

4:17इस कर्व के अंदर-अंदर आ रहे हैं। ये वाले

4:20सारे कॉम्बो जो इस कर्व के अंदर-अंदर आ

4:22रहे हैं या कर्व के ऊपर ऊपर आ रहे हैं। ये

4:24अटेनेबल कॉम्बिनेशंस है कि ये पॉसिबल

4:26अचीवेबल कॉम्बिनेशंस हैं। और अगर कोई

4:29कॉम्बिनेशन इसके बाहर आ रहे हैं जैसे एज

4:30पॉइंट तो वो नॉन अटेनेबल है कि जी इसको तो

4:33हम अचीव ही नहीं कर सकते। अब

4:36एक्सप्लेनेशन में भाई आपको अब लिखनी आ गई

4:38है। क्या करना होता है? जनरली पहले तो

4:40थोड़ा मीनिंग घुमा फिरा के दोबारा से लिख

4:42दो। टेबल रेफरेंस दे दो कि भाई वो x पे

4:44ज़ीरो था, y पे 100 था एंड सो ऑन दो तीन

4:46समझा के ये आपको आते हैं। ग्राफ में x

4:48एक्सिस y एक्सिस समझा दो। x एक्सिस पे गुड

4:50x की नंबर ऑफ केसेस लिए हैं। y एक्सिस पर

4:53गुड y ग्राफ में समझा देना। जी अटेनेबल वो

4:56कॉम्बिनेशन है जो पॉसिबल है नॉन अटेनेबल

4:58जो नहीं हो सकते। इसको अच्छे से देखो।

5:01अगला आपका स्टार्ट से टॉपिक है

5:04क्यूमुलेटिव फ्रीक्वेंसी सीरीज। सीएफ वाली

5:07जो सीरीज होती है इसमें आप बहुत बार

5:08कंफ्यूज्ड होते हो। ध्यान से देखना भाई

5:10क्या है? कन्वर्शन क्या रहती है? अगर आपको

5:13फ्रीक्वेंसी से क्यूमुलेटिव फ्रीक्वेंसी

5:15में जाना है तो डायगोनली प्लस किया जाता

5:17है। और अगर सीएफ से एफ जाना है तो माइनस

5:20किया जाता है स्ट्रेट। क्यों जरूरी है

5:22भाई? स्टैट्स के कुछ बेसिक चैप्टर्स के

5:24लिए फिफ्थ चैप्टर के लिए, सेवंथ चैप्टर के

5:26लिए। इलावा उसके फिर मीडियन वगैरह में भी

5:28तो इसका यूज़ आ जाता है। इसीलिए भी

5:31दो चार जनरल बातें जो आपको ध्यान रखनी है।

5:33क्लास इंटरवल्स के साथ फ्रीक्वेंसी चलती

5:35है। लेस दैन या मोर देन के साथ

5:37क्यूमुलेटिव फ्रीक्वेंसी चल रही है। ये

5:39बहुत इंपॉर्टेंट फैक्ट है। लेस दैन में

5:41क्या होता है बेटा? लेस दैन में आप लोग

5:44ऊपर से नीचे जाते हो। ऊपर से स्टार्ट

5:46करोगे नीचे की तरफ। ऊपर से शुरुआत करेंगे

5:48तो सबसे पहले फर्स्ट f और फर्स्ट cf बराबर

5:51होगा। और फ्रीक्वेंसी का टोटल लास्ट CF के

5:54बराबर आएगा। मोर दैन में आपने नीचे से ऊपर

5:57स्टार्ट करना है। तो इसलिए जब नीचे से

5:59स्टार्ट करोगे तो लास्ट f और लास्ट सीएफ

6:02बराबर पहले और फ्रीक्वेंसी का टोटल फर्स्ट

6:04एफ फर्स्ट सीएफ के बराबर आएगा। थोड़ा सा

6:08अगर माइक्रो पोर्शन की तरफ दोबारा जाएं।

6:10व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन डिमांड एंड

6:12क्वांटिटी डिमांडेड। डिमांड होती है बेटा

6:15ओवरऑल कि अलग-अलग पॉसिबल प्राइसेस पर क्या

6:18अलग-अलग क्वांटिटीज एक कंज्यूमर विलिंग है

6:20खरीदने के लिए। और क्वांटिटी डिमांडेड

6:24होती है स्पेसिफिक कि एक पर्टिकुलर प्राइस

6:27पर कितनी पर्टिकुलर क्वांटिटी एक कंज्यूमर

6:29खरीदने को तैयार है। समझ नहीं आया? अब ये

6:32देखना एग्जांपल से डिमांड क्या लिखा है

6:34आपने? ओवरऑल। डिमांड में क्या लिखा है?

6:36ओवरऑल ये देखना कि भाई एक के प्राइस पर 30

6:40यूनिट, दो के प्राइस पर 20 यूनिट, तीन के

6:43प्राइस पर 10 यूनिट।

6:45ओवरऑल भाई क्या अलग-अलग प्राइसेस पर

6:47अलग-अलग क्वांटिटीज एक कंज्यूमर खरीदने को

6:50तैयार है कि जी एक पर 30 खरीदूंगा दो पर

6:5220 तीन पर 10 इसको डिमांड बोलते हैं कि

6:55भाई ओवरऑल डिमांड क्या है क्वांटिटी

6:58डिमांडेड होती है एक स्पेसिफिक केस एक

7:00पर्टिकुलर प्राइस पर कितनी पर्टिकुलर

7:02क्वांटिटी वो खरीद लेगा कि जी फॉर

7:04एग्जांपल दो के प्राइस पर अगर दो प्राइस

7:06हो तो कितनी खरीदेगा पर्टिकुलरली एट दिस

7:08लेवल कि दो पर जी 20 यूनिट्स खरीदूंगा ये

7:12होती है क्वांटिटी डिमांड इसको इसको पढ़ो।

7:16इसके बाद मूवमेंट इन डिमांड कर्व और शिफ्ट

7:19इन डिमांड कर्व। मूवमेंट इन डिमांड कर्व

7:22और शिफ्ट इन डिमांड कर्व। ये वाला डिफरेंस

7:24इंपॉर्टेंट है भाई। मूवमेंट ये इसलिए ऊपर

7:27समझाया था डिमांड और क्वांटिटी डिमांडेड

7:29में फर्क क्या होता है? यार मूवमेंट होती

7:30है छोटी-मोटी चीज़। सिर्फ अगर क्वांटिटी

7:33डिमांडेड में चेंज आ रहा है और शिफ्ट होता

7:35है अच्छा खासा चेंज कि भाई डिमांड का कर्व

7:37यहां से यहां शिफ्ट हो गया। लेफ्टवर्ड या

7:39राइटवर्ड शिफ्ट हो गया। मतलब पूरी की पूरी

7:42डिमांड में ही बहुत ज्यादा चेंज आ गया।

7:44मूवमेंट इन डिमांड का मतलब जरा सा चेंज आ

7:46रहा है भाई। सिर्फ क्वांटिटी डिमांडेड में

7:48चेंज आ रहा है। शिफ्ट इन डिमांड का मतलब

7:50पूरी की पूरी डिमांड ही चेंज होगी भैया।

7:53अब मूवमेंट यानी छोटा-मोटा चेंज। यार

7:55छोटा-मोटा डिमांड में चेंज आता है चीज के

7:56प्राइस बदलने से। थोड़ा क्योंकि वो पता ही

7:59है हमें डिमांड और प्राइस में इनवर्स

8:00रिलेशन होता है। थोड़ा प्राइस बढ़ा। ठीक

8:02है? थोड़ा सा प्राइस बढ़ा तो कंज्यूमर ने

8:05डिमांड कम कर दी। थोड़ा प्राइस घटा तो

8:08डिमांड बढ़ा दी। थोड़ा थोड़ा बहुत चेंज।

8:10ठीक है?

8:13शिफ्ट जो होता है वह बाकी अदर फैक्टर्स जो

8:16होते हैं ना जो डिमांड को इफेक्ट कर रहे

8:17होते हैं उसकी वजह से होता है। टेक्स

8:20प्लेस ड्यू टू चेंज इन अदर फैक्टर्स। जैसे

8:23भाई एकदम से टेस्ट एंड प्रेफरेंसेस बदल

8:25गए, इनकम बदल गई, रिलेटेड गुड्स में कुछ

8:27ना कुछ चीजों में फर्क आ गया। कुछ तगड़े

8:29फैक्टर्स में ओन प्राइस के अलावा भी जो

8:31चीजें कि भाई फॉर एग्जांपल अब किसी

8:34पर्टिकुलर चीज का फैशन चला गया मार्केट से

8:36वो सस्ती भी मिल रही है तो लोग नहीं ले

8:38रहे भाई क्योंकि किसी को वो पसंद ही नहीं

8:39आ रही वो चीज फिर प्राइस वाली बात थोड़ी

8:42रह जाती है ये बेटा जो मूवमेंट एंड डिमांड

8:45कर्व्ड है इसमें आप सेम कर्व पे रहते हो

8:47बस हल्की सी मूवमेंट होती है लाइक इस

8:49पॉइंट से इस पॉइंट पे आ गए

8:52या फिर ऊपर की तरफ चले गए यह देखो इसको

8:56नोट करना साथ-साथ कि बेसिकली पहले यहां पर

8:59डिमांड थी। अब यहां पर आ गई। ठीक है?

9:02थोड़ा बहुत चेंज आया। यहां से इधर आ गए।

9:05क्योंकि ये ऑन प्राइस की वजह से होती है।

9:07तो अदर फैक्टर्स रिमेंस कांस्टेंट। ये अदर

9:09फैक्टर्स की वजह से होती है। तो ओन प्राइस

9:12रिमेंस कांस्टेंट। इसका ग्राफ भी समझ लो

9:14भैया। शिफ्ट ही हो गया। क्या टॉपिक पढ़

9:16रहे हो आप? शिफ्ट इन डिमांड कर्व। तो भाई

9:19यहां पहले डिमांड थी। अब पूरी डिमांड ही

9:20आगे शिफ्ट होगी। या पहले यहां डिमांड थी।

9:22अब पूरी डिमांड ही ऐसे पीछे शिफ्ट होगी।

9:26आगे बढ़ने को यहां पर एक्सटेंशन कहते हैं

9:28मूवमेंट में और घटने को कॉन्ट्रक्शन। और

9:31यह जो शिफ्ट आप पढ़ रहे थे अभी मार्केट

9:32इक्विलिब्रियम में अगर बढ़ रहा है तो

9:34अपवर्ड शिफ्ट, राइटवर्ड शिफ्ट या फिर एक

9:36और वर्ड आता है यहां लिखा नहीं हुआ

9:37फॉरवर्ड शिफ्ट।

9:40अपवर्ड शिफ्ट, राइटवर्ड शिफ्ट या फॉरवर्ड

9:44शिफ्ट बोला जाता है। और घटने को क्या बोला

9:46जाता है? डाउनवर्ड शिफ्ट, लेफ्टवर्ड शिफ्ट

9:49या बैकवर्ड शिफ्ट।

9:53बैकवर्ड शिफ्ट। यह भी लिख लेना। ये

9:55डिफरेंस बहुत इंपॉर्टेंट है भाई। इसको

9:57अच्छे से पढ़ो। यहां तक की वीडियो इस वाले

9:59पार्ट को दोबारा ध्यान से देखना।

10:02इसके बाद आपका इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड से

10:04टॉपिक है। अलग-अलग डिमांड क्रॉप्स कैसे

10:06बनती है? उससे पहले बेटा मीनिंग समझ लेना।

10:09इलास्टिक का मतलब क्या होता है? इलास्टिक

10:12का मतलब होता है चेंज आना। कोई चीज में

10:14कितना बदलाव आता है? इलास्टिक का मतलब

10:17क्या होता है? चेंज आना। इलास्टिक मतलब

10:20चेंज आ रहा है। जी। इलास्टिक का मतलब क्या

10:22होता है? चेंज आना। इनइलास्टिक का मतलब

10:25क्या होगा? नो चेंज। इनइलास्टिक डिमांड का

10:28फिर मतलब क्या होगा? अगर इलास्टिक का मतलब

10:29चेंज होता है तो सुखराज इनइलास्टिक का

10:32मतलब क्या होगा? नो चेंज। कोई चेंज ही

10:34नहीं आ रहा भाई डिमांड में। व्हेन द

10:37डिमांड रिमेन सेम नो मैटर व्हाट द प्राइस

10:40इज़। कुछ ऐसे गुड्स भी होते हैं। कुछ ऐसे

10:42केसेस भी होते हैं जहां प्राइस के बदलने

10:44से डिमांड में कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा।

10:46भाई जैसे भाई फॉर एग्जांपल किसी

10:48माइक्रोइकोनॉमिक्स के एग्जांपल में समझ

10:50लो। आपको जीवित रहने के लिए कोई मेडिसिन

10:52डेली खानी है। ठीक है? अगर जीवित रहना है

10:55तो मेडिसिन डेली खानी पड़ेगी। अब भाई वो

10:58मेडिसिन जितनी मर्जी महंगी हो जाए आप उसकी

11:01डिमांड और ना ज्यादा कर सकते हो ना कम कर

11:03सकते हो भाई। ठीक है? ज्यादा भी नहीं कर

11:05सकते उसकी डिमांड को। तो मेडिसिन है डबल

11:07थोड़ी खा लोगे।

11:09ओवर तो खा नहीं सकते ना कम खा सकते हो।

11:12जितना मर्जी प्राइस हो आपको वो गोली खानी

11:14है तो खानी पड़ेगी। ग्राफ कैसा बनेगा भाई

11:16इसका? ऐसे परपेंडिकुलर

11:19परपेंडिकुलर टू x एक्सिस या ऐसे भी कह

11:21सकते हैं x एक्सिस के परपेंडिकुलर या y

11:24एक्सिस के पैरेलल इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड

11:27जीरो मतलब कोई मूवमेंट ही नहीं आ रही

11:29पैरेलल टू y एक्सिस ये मेडिसिन वगैरह के

11:32केस में हो सकता है कि भाई फॉर एग्जांपल

11:35₹10 का प्राइस है तो भी दो यूनिट्स डिमांड

11:37हो रही है ₹20 के प्राइस पे भी दो 30 पे

11:39भी दो 40 हो गया तो भी दो 100 होगा तो भी

11:41दो कोई चेंज नहीं आ रहा डिमांड में ये

11:43होता है इनइलास्टिक डिमांड

11:46इसके बाद इसी का जस्ट अपोजिट केस होता है

11:48परफेक्टली इलास्टिक डिमांड। मतलब डिमांड

11:50में अच्छा खासा चेंज आ रहा है भाई। बड़ा

11:53तगड़ा इलास्टिक चेंज आ रहा है। बहुत

11:54ज्यादा इलास्टिक है डिमांड। ठीक-ठाक चेंज

11:56आ रहा है।

11:59थ्योरी क्या है बेटा इसकी? व्हेन द डिमांड

12:01कैन चेंज अप टू एनी लिमिट एट द सेम

12:03प्राइस। इसका जस्ट अपोजिट केस कि डिमांड

12:06बहुत ज्यादा बदल सकती है सेम प्राइस पर

12:09ही। यहां पर इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड

12:11इनफिनिटी है भाई। ग्राफ कैसा बन रहा है यह

12:14देखो।

12:17हम इसे बोल सकते हैं इट इज पैरेलल टू x

12:19एक्सिस। फुल चेंज आ रहा है भाई। फुल चेंज

12:23ये देखना

12:28पूरा चेंज इंफिनिटी तक कोई भी चेंज आ रहा

12:30है इसमें।

12:34ठीक है? इसको परफेक्टली इलास्टिक बोलते

12:37हैं। और रियल लाइफ में एक्सिस्ट बहुत कम

12:38जगहों पर करती है। एक्सिस्ट नहीं करती।

12:40परफेक्टली इलास्टिक डिमांड। ठीक है? बहुत

12:43रेयर केसेस में करती है।

12:47इसके बाद बेटा इको का एक बड़ा इंपॉर्टेंट

12:48कांसेप्ट है यूनिटरी इलास्टिक डिमांड। कौन

12:51सी डिमांड? यूनिटरी इलास्टिक डिमांड।

12:54इसमें भाई बंदा जैसे तैसे मैनेज करके ना

12:57टोटल एक्सपेंडिचर सेम रख लेता है अपना।

13:00मैनेजेस सम हाउ एंड कीप द टोटल

13:02एक्सपेंडिचर सेम। क्या लिखा हुआ है?

13:04मैनेजेस सम हाउ एंड कीप्स द टोटल

13:06एक्सपेंडिचर सेम। जैसे-तैसे मैनेज करके

13:09बंदा अपने टोटल क्योंकि ना यह होते हैं

13:11बेटा उसके कंफर्ट गुड्स। ये कहां पर होती

13:14है? कंफर्टेबल गुड्स में। जो कंफर्ट के

13:16गुड्स हैं ना उसमें। अब कंफर्ट गुड्स कौन

13:18से होते हैं? जो बहुत नेसेसिटी भी नहीं है

13:20बट जीने के लिए शौक भी पूरे कर रहे हो आप।

13:23तो बंदा जैसे तैसे मैनेज करके अपना टोटल

13:25खर्चा सेम रखता है। फॉर एग्जांपल भाई अ

13:29अस्यूम कर लो कि एक बंदे का किसी

13:32पर्टिकुलर चीज पे खर्चने का बजट था ना

13:34₹1000 है। अब जब वो चीज़ ₹200 की थी तो वह

13:37पांच खरीद लेता था। ₹1000 खर्च दिए। जब

13:41250 की हुई तो चार खर्चने लग गया कि जी

13:43टोटल खर्चा 1000 ही रहे। 333 की होगी तो

13:47तीन खर्च तीन लेने लग गया ताकि टोटल खर्चा

13:49फिर भी 999 यानी 1000 ही रहे। ऐसा अक्सर

13:53भाई माइक्रोइकोनॉमिक्स में देखा जाता है।

13:54अगर मान लो कोई बंदा शौकिया तौर पर कोई

13:56चीज पर खर्चा करता है तो शौक है भाई बंदे

13:59का किसी चीज पर तो अगर उसने उसके उस पर

14:01रोज के000 या महीने के000 खर्च नहीं है तो

14:04वो क्या कर रहा है कि भाई जब वो चीज 200

14:06की आती है तो पांच खरीद लेता है 250 की

14:08आती है तो चार 333 की होगी तो तीन खरीदेगा

14:11टोटल अपना बजट नहीं बिगाड़ेगा टोटल अगर

14:13उसने उस चीज पे ₹1000 खर्चने हैं तो 1000

14:15ही खर्चेगा यह बंदे के कंफर्ट गुड्स के

14:17केस में होता है अक्सर जैसे तैसे मैनेज

14:20करके टोटल खर्चा सेम रखता है इसका कर्व

14:22बेटा ऐसा बनता है ऐसा ऐसा

14:26इस तरीके का रेक्टेंगुलर हाइपरबोला जैसे

14:29IC बनता है।

14:34इसके बाद बेटा क्या आता है? लेस दैन

14:36यूनिटरी इलास्टिक और मोर दैन यूनिटरी

14:37इलास्टिक।

14:39लेस दैन यूनिटरी इलास्टिक और मोर दैन

14:42यूनिटरी इलास्टिक। ये क्या था भाई? लेस

14:44दैन यूनिटरी इलास्टिक मतलब यूनिटरी

14:46इलास्टिक का मतलब क्या था? वन। लेस दैन

14:48यूनिटरी इलास्टिक मतलब वन से कम। ये साइन

14:50पता है ना? इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड इज़ लेस

14:52दैन वन। तो मोर दैन यूनिटरी इलास्टिक क्या

14:54होगा? मोर दैन वन। सिंपल नाम से ही पता लग

14:57रहा है। अच्छा मतलब क्या है जी इसका? वो

14:59भी देख लो।

15:01मतलब क्या है? लेस दैन यूनिटरी इलास्टिक

15:04मतलब जब प्राइस में ज्यादा चेंज आने से

15:07डिमांड में कम चेंज आ रहा है। प्राइस में

15:09ज्यादा बदलाव आ रहा है। बट आप डिमांड में

15:10ज्यादा चेंज कर नहीं पा रहे।

15:13प्राइस में ज्यादा चेंज आ रहा है। बट

15:15डिमांड में कम चेंज आया।

15:18मतलब गुड्स थोड़े आपके नेसेसिटीज थे। इसका

15:21कर्व कैसा बनेगा यह देखो।

15:26यह देखना

15:28थोड़ा ऐसे दबा हुआ सा या ऐसे की तरफ थोड़ा

15:32पूरा परपेंडिकुलर भी नहीं ऐसा सा कर्व है

15:34भाई इनलास्टिक का तो ऐसा होता है

15:36परफेक्टली इलास्टिक का ऐसा होता है इसका

15:38कैसे बनना है थोड़ा टाइट सा कर्व

15:42ये नेसेसिटी इसके केस में होता है भाई अब

15:44जो बेसिक आपकी वीट राइस है अगर वो ज्यादा

15:46महंगे हो भी गए तो डिमांड में आप बहुत

15:48ज्यादा चेंज तो नहीं ला सकते ना ये मोर दन

15:52यूनिट्री इलास्टिक क्या होता है भाई? ये

15:53लग्जरी गुड्स वगैरह में होता है कि प्राइस

15:56में थोड़ा सा ही चेंज आया लेकिन डिमांड

15:57में बहुत चेंज आ गया। प्राइस में कम चेंज

16:00आया लेकिन डिमांड में ज्यादा बदल गई। ये

16:03होता है लग्जरीज के केस में कि भाई छोड़

16:05ना अगर फॉर एग्जांपल थोड़ा सा भी महंगा हो

16:08रहा है तो क्यों इतना फालतू पैसा कुछ है?

16:10तो वैसे ही लग्जरी चीज थी। बहुत ज्यादा

16:12देखो फ्लैटर हो के बन रखा है कफ। बहुत ही

16:15ज्यादा ऐसे चौड़ा करके बना रखा है। ये ऐसे

16:18करके पूरा ये भाई पांच टॉपिक्स अच्छे से

16:21पढ़ो। तो इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड की शेप्स

16:23इंपॉर्टेंट होती है। इसके बाद आता है ये

16:26क्रॉस प्राइस इफेक्ट। ये इसका एक क्वेश्चन

16:28लिखा हुआ है। अभी यहां पे रिवाइज भी

16:30करेंगे। क्रॉस प्राइस इफेक्ट क्या होता

16:32है? इससे पहले जरा हल्का सा क्वेश्चन ही

16:34देख लेते हैं। पहले क्वेश्चन में कुछ

16:36ऐसा-सा लिखा हुआ था भाई कि अगर गुड x का

16:40प्राइस कम होता है तो गुड y की डिमांड बढ़

16:42जाती है। अगर गुड x का ऐसे क्वेश्चन लिख

16:46लो तुम लोग कि इफ द प्राइस ऑफ गुड x फॉल्स

16:50देन द डिमांड फॉर गुड y राइज़ेस। ये कैसे

16:54गुड्स हैं भाई? तो भाई ये पक्का

16:56कॉम्प्लीमेंट्री गुड्स होंगे। एग्जांपल

16:58गाड़ी का प्राइस अगर कम होता है तो

17:01पेट्रोल की डिमांड बढ़ जाती है।

17:02कॉम्प्लीमेंट्री गुड्स मतलब जो एक साथ

17:04चलते हैं। क्योंकि नॉर्मल सी बात है जब

17:06गाड़ियां सस्ती होंगी लोग ज्यादा गाड़ियां

17:08खरीदेंगे। अगर लोग ज्यादा गाड़ियां

17:10खरीदेंगे तो पेट्रोल की डिमांड तो

17:12ऑटोमेटिकली बढ़ जाएगी वो चीज।

17:15इसके बाद अगला क्वेश्चन है। क्वेश्चन में

17:19कुछ ऐसा लिखा हुआ है कि जब इनकम कम होती

17:21है, इनकम कम होती है तो नॉर्मल गुड्स जो

17:26है इनकी डिमांड क्या होती है? यार इनकी

17:28डिमांड कम हो जाती है। इनका कर्व कहां

17:29शिफ्ट होता है? ये क्वेश्चन था। इनका कर्व

17:31लेफ्टवर्ड शिफ्ट मारता है। क्योंकि यार जब

17:33बंदे की कमाई कम होगी। पहले वो इतनी

17:35डिमांड कर रहा था। अब वो थोड़ी सी कम

17:37करेगा। लेकिन इंफीरियर गुड्स की डिमांड जो

17:40है वो बढ़ जाती है क्योंकि यार गुजारा तो

17:41करना ही है। सस्ते गुड्स खरीदने लग जाएगा

17:43कम कमाई पे वो तो उसका कर्व कहां शिफ्ट

17:46होगा? राइट। क्योंकि जो सस्ती चीजें हैं

17:48फिर वो उनको ज्यादा खरीदने लग जाएगा अपने

17:50बजट के हिसाब से। वो जरा भाई अब अच्छे से

17:53पढ़ते हैं। क्रॉस प्राइस इफेक्ट।

17:56क्रॉस प्राइस इफेक्ट क्या होता है भाई? कि

17:58भाई किसी और गुड के प्राइस में चेंज आने

18:01से, किसी और गुड की डिमांड में चेंज आना।

18:03पेपर के लिए बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है। और

18:05छह नंबर वाला टॉपिक है भाई ये। जितना लॉ

18:07ऑफ डिमांड इंपॉर्टेंट है डिमांड चैप्टर

18:09में उतना ही यह भी इंपॉर्टेंट है।

18:12क्रॉस प्राइस इफेक्ट में दो तरह के गुड्स

18:15की बात करी गई है। नंबर वन सब्स्टट्यूट

18:18गुड्स। सब्स्टट्यूट गुड्स कौन से होते

18:20हैं? जो एक दूसरे के स्थान पर यूज किए जा

18:22सकते हैं। नंबर वन सब्स्टट्यूट गुड्स। कौन

18:26से? द गुड्स व्हिच कैन बी यूज्ड इन प्लेस

18:29ऑफ़ अदर। जैसे कोक और पेप्सी। कोक नहीं

18:31मिली तो पेप्सी से भी काम चल जाएगा। हां

18:34100% सब्स्टट्यूट नहीं है लेकिन क्लोज

18:36सब्स्टट्यूट है। हम अक्सर इंडिया में ऐसे

18:38ही बोलते हैं जी काली वाली कोल्ड ड्रिंक

18:39चाहिए। कोक नहीं मिली तो पेप्सी, पेप्सी

18:41नहीं मिली तो थम्स अप। सब्स्टट्यूट गुड्स

18:43व्हिच कैन बी यूज्ड इन प्लेस ऑफ़ अदर जो एक

18:46दूसरे के स्थान पर यूज़ हो सकते हैं। और

18:49कॉम्प्लीमेंट्री गुड्स कौन से होते हैं

18:50भाई? अभी जैसे ऊपर पढ़ रहे थे गाड़ी और

18:53पेट्रोल। गुड्स व्हिच कंप्लीट्स द डिमांड

18:56फॉर ईच अदर। जो मिलकर चलते हैं। जैसे गाड़ी

18:58और पेट्रोल। अब मिलके ही चलेंगे यार।

19:01गाड़ी चलाने के लिए पेट्रोल लगेगा, डीजल

19:03लगेगा। वो सब चीजें। अब अगर इनके बारे में

19:07पढ़े भाई, अगर आपके पेपर में क्रॉस प्राइस

19:09इफेक्ट आया, आप दोनों समझाओगे। पहले तो

19:12सब्स्टट्यूट गुड्स।

19:14सब्स्टट्यूट गुड्स क्या होते हैं? कोक और

19:16पेप्सी। फॉर एग्जांपल इसके एग्जांपल से

19:18समझते हैं। अगर भाई सोचना अगर

19:23कोला का प्राइस बढ़ गया। पेप्सी की डिमांड

19:26छोड़ो पहले। कोका कोला की बात करते हैं।

19:28अगर कोका कोला महंगी हुई तो लोग कोका कोला

19:32की डिमांड क्या कर देंगे? कम। उसकी जगह

19:34लोग कहां शिफ्ट हो जाएंगे? उसके

19:35सब्स्टट्यूट पे जो कौन है? पेप्सी। अगर

19:38कोका कोला का प्राइस बढ़ा तो लोग कोका

19:40कोला कम पी के कहां शिफ्ट हो जाएंगे?

19:42पेप्सी पे। तो उससे पेप्सी की डिमांड बढ़

19:44जाएगी। तो पेप्सी का डिमांड कर्व कहां

19:46शिफ्ट होएगा? राइटवर्ड। पेप्सी का डिमांड

19:48कर्व कहां शिफ्ट होगा? राइटवर्ड। पहले यह

19:51डिमांड थी। फिर यह बढ़ती हुई हो जाएगी।

19:54Pepsi का डिमांड कब राइटवर्ड शिफ्ट हो

19:56जाएगा। और अगर हम Pepsi वाले हैं। मान लो

19:59C कोलाa ने अपना प्राइस गिरा दिया तो

20:01हमारी डिमांड ऑटोमेटिकली गिर जाएगी। भाई

20:03क्यों? क्योंकि पहले मान लो हमारी डिमांड

20:05ये थी। CocaC कोलाa ने अपना प्राइस गिरा

20:08दिया। CocaC कोलाa ने अपना प्राइस गिरा

20:10दिया। तो लोग जो है वो Cocoका कोला खरीदने

20:13लग गए। हमारी डिमांड ऑटोमेटिकली क्या

20:16होगी? कम होगी।

20:20ये चीज।

20:23इसके बाद आ जाते हैं भाई आपके

20:24कॉम्प्लीमेंट्री गुड्स। कॉम्प्लीमेंट्री

20:26गुड्स कौन से होते हैं जो एक साथ चलते

20:28हैं। जो एक साथ चलते हैं। गाड़ी के

20:32साथ-साथ पेट्रोल लगेगा लगेगा भाई। ठीक है?

20:35पेन और इंक बुक में लिखा हुआ है वो चीजें।

20:38अब

20:40इनका क्या सिनेरियो होता है भाई? जैसे कार

20:42और पेट्रोल के एग्जांपल से हम समझते हैं।

20:45अगर बेटा गाड़ी का प्राइस कार का प्राइस

20:48बढ़े। अगर गाड़ी का प्राइस बढ़े तो भाई

20:52पहले सोचो ये पेट्रोल डिमांड नीचे सीधा

20:54ऐसे देखो ना समझो अगर गाड़ी का प्राइस

20:56बढ़ता है अगर गाड़ियां महंगी होती है तो

20:59भाई प्राइस और डिमांड का डायरेक्टली मतलब

21:02जो होता है रिलेशन वो इनवर्स होता है

21:04सीधा-सीधा जो रिलेशन होता है प्राइस और

21:06डिमांड का वो इनवर्स होता है अगर गाड़ियां

21:08महंगी होंगी लोग गाड़ियां कम खरीदेंगे कम

21:11खरीदेंगे तो चलो पेट्रोल डीजल इन सब चीजों

21:13की डिमांड क्या हो जाएगी कम वो एग्जांपल

21:16है कि भाई अगर गाड़ियां महंगी हुई लोग

21:19गाड़ियां कम खरीदेंगे तो ये पेट्रोल वगैरह

21:21की डिमांड थोड़ी सी क्या हो जाएगी?

21:22पेट्रोल, डीजल वगैरह की डिमांड कम हो

21:24जाएगी। तो भाई हम मान लो हमारी पेट्रोल

21:26पंप था। गाड़ियों ने प्राइस महंगा करा।

21:28ऑटोमेटिकली हमारी जो डिमांड है वो क्या

21:30होगी? जी कम हो गई। वो चीज

21:34कि हमारा क्या था? जी हमारा पेट्रोल पंप

21:36था। गाड़ी वालों ने अपना प्राइस महंगा

21:38करा। हम बेचारों की वैसे डिमांड क्या

21:40होगी? कम। क्योंकि लोगों ने गाड़ियां

21:42खरीदनी कम कर दी। वो चीज और अगर गाड़ियों

21:45का प्राइस सस्ता हो जाए भाई। अगर गाड़ियों

21:49का प्राइस सस्ता हो जाए। यह देखो।

21:51गाड़ियों का प्राइस कम हो जाए। तो भाई हर

21:53बंदा जो पहले गाड़ी खरीदना चाहता था, खरीद

21:55नहीं पा रहा था, महंगे बजट से, वह खरीद

21:57लेगा तो पेट्रोल वगैरह की डिमांड बढ़

22:00जाएगी। पहले यहां डिमांड थी, फिर डिमांड

22:02कहां शिफ्ट हो जाएगी? आगे को।

22:06ठीक है भाई? इसको अच्छे से पढ़ना। इसको तो

22:07रिवाइंड करके दोबारा देखो। क्रॉस प्राइस

22:09इफेक्ट को बहुत इंपॉर्टेंट है।

22:13अब 11th क्लास यहां पे क्या करना है? 11th

22:16पेज नहीं पढ़ना अभी। ठीक है?

22:18यहां तक करने के बाद ये जो 22 मिनट वीडियो

22:20के बीते हैं ना 10थ पेज 10 पेज आपके कवर

22:24हुए हैं। इन 22 के 22 मिनट वाली वीडियो

22:27साथ-साथ नोट्स में भी आपने बनाए होंगे।

22:29नहीं बनाए अब दोबारा देखो नोट्स बनाओ इसके

22:32यहां तक पहले 10 पेजेस दोबारा। उसके बाद

22:35क्या करना है? उसके बाद 11वां पेज शुरू

22:38करने से पहले 11वां पेज स्टार्ट करने से

22:41पहले नहीं है लिंक मांग लो YouTube से

22:46जो वीडियो आपके ग्रुप में आ रखी है मेरी

22:47अपलोडेड वीडियो है लॉ ऑफ डीएमय लॉ ऑफ

22:52डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी की वीडियो

22:54जो है उसको देखो यहां पर उसके नोट्स बनाओ

22:59लॉ ऑफ डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी की

23:01वीडियो देखो उसके नोट्स बनाओ वह करने के

23:04बाद यह जो एक्सप्लेनेशन है यह

23:06एक्सप्लेनेशन उसी की है भाई। इट इज द

23:09एक्सप्लेनेशन ऑफ

23:13लॉ ऑफ डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी। उसी

23:18की ही ये एक्सप्लेनेशन है। तो एक बार पहले

23:21फटाफट से यहां तक कर लिया आपने। आप ये 10

23:24पेजेस वाले पहले काम दोबारा देखो। इसके

23:26नोट्स बनाओ। इसको पक्का करने के बाद

23:28YouTube वाली वीडियो उठाओ। लॉ ऑफ़

23:29डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी की। उसको

23:31देखकर उसके नोट्स बनाओ और फिर ये

23:33एक्सप्लेनेशन पे आएंगे हम। ठीक है। उसके

23:37बाद इस एक्सप्लेनेशन पर आएंगे।

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