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0:01हां जी 11th क्लास बेटा यह एक टॉपिक
0:04इंपॉर्टेंट रहेगा फैक्टर्स अफेक्टिंग
0:06इलास्टिसिटी ऑफ सप्लाई और फैक्टर्स
0:08अफेक्टिंग सप्लाई ये दोनों टॉपिक
0:10इंपॉर्टेंट है इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड के
0:13फैक्टर्स। ठीक है? और सप्लाई के नॉर्मल
0:16फैक्टर्स। ठीक है? इसको रटना नहीं है यार।
0:19लॉजिकली सोचो। सबसे पहले तो फैक्टर्स
0:22अफेक्टिंग इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड।
0:24इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड होता है कि आपकी
0:27डिमांड में कितना चेंज आएगा भाई? अलग-अलग
0:29कारणों से। ठीक है? यह तो चलो सबको पता है
0:32कि यार जब प्राइस बढ़ेगा तो डिमांड कम
0:34होएगी। कंज्यूमर की। प्राइस कम होगा तो
0:36डिमांड बढ़ेगी। कितना चेंज आएगा? थोड़ा
0:38ज्यादा, कम, 10%, 20%, 50%, 100% वो ये
0:43वाला टॉपिक हमें समझाता है। अब इस टॉपिक
0:45को करने से पहले आपको चारप बातें पता होनी
0:47चाहिए। ये देखो इलास्टिक का मतलब क्या
0:50होता है? चेंज आना। मोर इलास्टिक मतलब
0:52ज्यादा चेंज आ रहा है। लेस इलास्टिक मतलब
0:54कम चेंज आ रहा है। यूनिटरी इलास्टिक का
0:57मतलब होता है जैसे-तैसे एडजस्ट करके टोटल
0:59एक्सपेंडिचर सेम रखा। और इनइलास्टिक का
1:02मतलब होता है कोई चेंज ही नहीं आ रहा भाई।
1:04अब टाइम पीरियड सबसे पहला फैक्टर
1:07अफेक्टिंग इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड आता है
1:09टाइम पीरियड। बेटा शॉर्ट रन में आपकी
1:11डिमांड ना कम इलास्टिक होती है। ज्यादा
1:12चेंज नहीं हो सकती। लेकिन लॉन्ग पीरियड
1:14में डिमांड भी ज्यादा इलास्टिक होगी।
1:16क्योंकि लंबे समय में लॉन्ग पीरियड इज़
1:18लॉन्ग इनफ टू चेंज एवरीथिंग। लंबे समय में
1:21भाई आप की पसंदीदा चीज बदल सकती है। आपकी
1:24चीज नीड्स बदल सकती है। आपकी जरूरतें बदल
1:26सकती है। आपका खर्चा बदल सकता है। लॉन्ग
1:28रन में बहुत कुछ हो सकता है। ठीक है? अभी
1:31फॉर एग्जांपल सुखराज है भाई वो रोज मेंटोस
1:33खा रहा है। ठीक है? आने वाले 10 सालों में
1:36लॉन्ग पीरियड में मुझे नहीं लगता कि यार
1:38मेंटोस अगर आने वाले 10 साल बाद जो अभी ये
1:40₹10 की खा रहा है वो 5 की भी हो जाएगी तो
1:42वो शायद खाएगा क्योंकि वो शौक ही खत्म हो
1:44जाएगा ना। दूसरा प्राइस लेवल।
1:49अगर प्राइस चीज का महंगा है तो उसकी
1:51डिमांड में बहुत ज्यादा चेंज आते हैं
1:52क्योंकि यार सब पर पैसे पूरे सूर्य हैं।
1:54वह सोच समझ के खर्च करेंगे माइक्रो
1:56इकोनॉमिक्स में। और अगर प्राइस कम है तो
1:58डिमांड में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा।
2:02आपकी इनकम का कितना प्रपोर्शन कितना
2:04हिस्सा उस चीज पे खर्चा जाता है। इससे
2:06डिमांड में बहुत प्रभाव आता है। अगर आपकी
2:09कमाई का एक छोटा सा हिस्सा सिर्फ एक
2:10पर्टिकुलर चीज पे जाता है तो उसकी डिमांड
2:12लेस इलास्टिक होगी। आप ज्यादा नहीं
2:14बदलोगे। लेकिन अगर आपकी इनकम कम है या फिर
2:17आपकी इनकम का एक बहुत मेजर हिस्सा किसी
2:20चीज को खरीदने में जा रहा है तो उसकी
2:22डिमांड बहुत ज्यादा चेंज होगी भाई क्योंकि
2:24आपको बड़ा हिसाब से चलना पड़ेगा ना आपकी
2:26आधी ज्यादा इनकम जा रही है। नेक्स्ट पॉइंट
2:29बेटा आ जाता है हैबिट का।
2:31अगर आपको किसी चीज की हैबिट है ना तो आपके
2:34लिए डिमांड बहुत इनइलास्टिक या लेस
2:36इलास्टिक ही होगी। और अगर हैबिट नहीं है
2:38तो उसकी डिमांड इलास्टिक होगी। आप इजीली
2:40बदल सकते हो। ये हैबिट वाले पॉइंट को
2:42अक्सर काफी बुक्स में एडिकशंस वाले पॉइंट
2:44से लिखा जाता है कि भाई अगर किसी को किसी
2:47चीज की एडिक्शन है तो भाई फिर वो प्राइस
2:49वगैरह इतना उसके लिए मैटर नहीं करेगा। ठीक
2:51है? वो फिर उसको कंज्यूम करेगा ही करेगा।
2:54वो वाली बात आ जाती है। अब मान लो कोई
2:56ड्रग एडिक्ट है। अब बेशक ड्रग्स महंगे हैं
3:00जो भी है। तुमने मूवीज वगैरह में भी देखा
3:02होगा भाई वो चोरी करके ना लाए पैसे जहां
3:04मर्जी से लाएगा। अगर उसको हैबिट है ना तो
3:06उतनी डिमांड उसको चाहिए तो चाहिए ही चाहिए
3:08भाई। ठीक है? नेक्स्ट आ जाता है इनकम।
3:11इनकम को इकोनॉमिक्स में व से लिखा जाता
3:13है। आई से नहीं। आई से इकोनॉमिक्स में
3:15इन्वेस्टमेंट होती है। अगर आपकी इनकम
3:18ज्यादा है तो आप परवाह नहीं मारोगे।
3:20डिमांड लेस इलास्टिक ही रहेगी। ज्यादा
3:22चेंजेस नहीं आएंगे आपकी डिमांड में। लेकिन
3:24अगर आपकी कमाई कम है ना तो बेटा आपको बड़ा
3:26सोच-सच के कदम रखने पड़ेंगे। बड़ा सोच-सच
3:29के अपनी पूंजी कहीं खर्च करनी पड़ेगी।
3:32पैसा बड़ा सोच-सच के कहीं खर्चना पड़ेगा।
3:34तो डिमांड में बहुत ज्यादा चेंजेस आ सकते
3:36हैं।
3:38ये थोड़ा सा ब्लर है भाई। लिखा क्या हुआ
3:40है? पोस्टपोनमेंट ऑफ यूज़। अगर आप किसी
3:44चीज को भी पोस्टपोन कर सकते हो तो उसकी
3:46डिमांड में ज्यादा बदलाव आएगा। और अगर
3:48नहीं कर सकते तो भाई फिर तो मजबूरी है ना
3:51खड़े पैर आपको उस चीज को कंज्यूम करना ही
3:53पड़ेगा। फॉर एग्जांपल इमेजिन अ सिचुएशन आप
3:57किसी पहाड़ पे हो जहां पर ऑल ऑफ़ अ सडन भाई
4:01साहब बारिश आ गई भयंकर। अब उस टाइम पर
4:05आपको मान लो आप गाड़ी-गोड़ी में भी नहीं
4:07हो। आपको उस टाइम पर अंब्रेला चाहिए ही
4:09चाहिए भाई गुजारा करने के लिए। कितना भीग
4:12लोगे बीमार हो जाओगे। अब उस टाइम पर आप
4:15उसको पोस्टपोन नहीं कर सकते क्योंकि बारिश
4:17तो अभी आ रही है ना आने वाले 10 साल बाद
4:18की बात थोड़ी हो रही है। उस टाइम पर आप
4:20ज्यादा चेंजेस नहीं करोगे। थोड़ा महंगा भी
4:23मिलेगा ना छाता आप खरीद लोगे। लेकिन अगर
4:25ऐसी वेले बैठे सोचो यार घर में एक छाता तो
4:27होना चाहिए। छाता खरीदना है। तो वो फिर
4:29बैठी-बैठी चीज रह ही जाएगी कि चल यार अभी
4:31नहीं बाद में ले लेंगे। अभी पसंद नहीं
4:33आया। अभी बजट में नहीं है। बाद में
4:34देखेंगे।
4:36उसके बाद एक टॉपिक है। ये देखो
4:38अवेलेबिलिटी ऑफ़ सब्स्टट्यूट्स। इसी का
4:40पॉइंट है। सातवां पॉइंट कोई छह भी याद रहे
4:42ना आपको तो चलेगा। अगर जिस चीज की आप
4:45खरीदने वाले हो उसके सब्स्टट्यूट्स
4:48अवेलेबल है। मतलब उसके जैसे मार्केट में
4:50बहुत सारे हैं। तो डिमांड में ज्यादा
4:52चेंजज़ आएंगे। क्योंकि भाई आप पे अदर बेटर
4:54ऑप्शंस अवेलेबल है। लेकिन अगर आपकी वाली
4:56चीज का कोई सब्स्टट्यूट ही नहीं है तो
4:58आपकी मजबूरी है भाई वो महंगा मिले सस्ता
5:00मिले आपको खरीदना ही पड़ेगा।
5:04प्राइस इलास्टिसिटी के बेटा दो मेथड्स
5:06आपको ध्यान में रखने हैं। एक परसेंटेज
5:08मेथड और एक प्रपोर्शननेट मेथड। परसेंटेज
5:11मेथड का सिंपल फार्मूला होता है।
5:12इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड माइनस का साइन।
5:14अच्छा सप्लाई में यही न्यूमेरिकल में
5:16माइनस का साइन नहीं आता। क्यों नहीं आता
5:18भाई? क्योंकि सप्लाई का प्राइस के साथ
5:20पॉजिटिव रिलेशन होता है। डिमांड वाले
5:22चैप्टर में यहां पर नेगेटिव का साइन आता
5:24है। और क्यों आता है? क्योंकि डिमांड और
5:26प्राइस का इनवर्स यानी नेगेटिव रिलेशन
5:28होता है। अब इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड का
5:32फार्मूला क्या है? माइनस परसेंटेज चेंज इन
5:34क्वांटिटी डिमांडेड अपॉन परसेंटेज चेंज इन
5:36प्राइस। एग्जांपल भाई क्वेश्चन में कुछ
5:38ऐसा लिखा हुआ था कि प्राइस 20% कम हुआ।
5:41डिमांड 40% बढ़ गई। इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड
5:44निकाल लो। तो कुछ भी नहीं करा भाई। ध्यान
5:45से देखो। बाहर लगाया माइनस का साइन।
5:48परसेंटेज चेंज इन क्वांटिटी डिमांडेड ना
5:50कितना आया 40
5:55और डिमांड बढ़ी है तो प्लस का 40 ये थोड़ा
5:58रुक जाओ ढंग से लिखते हैं इसको
6:00ये देखना
6:05इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड इज़ इक्वल टू माइनस
6:08का साइन बाहर परसेंटेज मेथड में बेटा प्लस
6:12माइनस का बड़ा ध्यान रखना होता है। अगर
6:14डिमांड बड़ी है ना 40% तो + 40
6:19अपॉन प्राइस में क्या है? प्राइस घटा है
6:2120% तो -20 यह माइनस से माइनस कट जाएगा।
6:25यह भी कट जाएगा। इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड
6:27क्या आ जाएगी? जी प्लस का 2
6:30तो यहां पर करा हुआ है। ठीक है जी? ध्यान
6:33से इसको देख लेना। एक आधा न्यूमेरिकल इसका
6:36प्रैक्टिस कर लेना। नेक्स्ट आता है
6:38प्रपोर्शनल मेथड। यहां बस आपको बाहर एक
6:40माइनस डालना है। अंदर किसी जगह आपको माइनस
6:42या प्लस डालने की जरूरत नहीं है। वो
6:44ऑटोमेटिकली इसके फ़ूले में एडजस्ट हो
6:46जाएगा। इसमें किन बातों का ध्यान रखना है
6:48भाई आपको? P ओल्ड प्राइस, P1 न्यू प्राइस।
6:51चेंज इन P मतलब हमेशा न्यू माइनस ओल्ड
6:53करेंगे। P1 - P इसी तरीके से Q ओल्ड
6:56क्वांटिटी और Q1 न्यू क्वांटिटी। ओल्ड
7:00क्वांटिटी न्यू क्वांटिटी। चेंज इन Q कैसे
7:02निकलेगा? Q1 - Q। फिर आपने फार्मूला लगा
7:04देना है। अभी पिछली वीडियो में भी आपको
7:07बोला था AC और MC का रिलेशन बहुत
7:09इंपॉर्टेंट है। बहुत स्कूलों में आता है।
7:11कुछ नहीं। मीनिंग में एवरेज कॉस्ट का
7:13मीनिंग लिख देना, मार्जिनल कॉस्ट का
7:14मीनिंग लिख देना।
7:16दोनों के फार्मूले लिख देना। टेबल बना
7:18देना। आपको बताया था TC के दम पर बन जाएगा
7:20टेबल। VC आपको आपको आ गया। TC आपको मान लो
7:24याद है TC के दम पे बन जाएगा या VC से भी
7:27बना सकते हो। और क्या ध्यान रखना है? MC
7:29कट्स AC फ्रॉम बिलो। उस वीडियो में भी
7:31मैंने अभी आपको बोला था।
7:34MC AC को नीचे से काटता है। बहुत
7:36इंपॉर्टेंट बात है भाई।
7:40अगेन ये वाला टॉपिक इंपॉर्टेंट रहेगा।
7:43फैक्टर्स अफेक्टिंग सप्लाई। अक्सर ना यह
7:46वाला पैटर्न 11th क्लास में स्कूलों में
7:48बहुत रहता है कि इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड के
7:51फैक्टर्स और सप्लाई के खुद के फैक्टर्स
7:53पेपर में अक्सर आते हैं। अब रट्टा इसका भी
7:55नहीं मारना आपने। आप इमेजिन करिए जस्ट अ
7:58सेकंड।
8:00आप इमेजिन करिए कि भाई आपका कोई बिनेस है।
8:03आप कुछ सप्लाई करते हो। बेशक बना के बेचते
8:05हो या उठा के बेचते हो। जो मर्जी। आपकी
8:08कितनी सप्लाई होगी? किस-किस चीजों पर
8:10डिपेंड करेगा भाई? अब आप कितनी सप्लाई
8:13करोगे उस चीज को वो देखना है पॉइंट।
8:16फर्स्ट पॉइंट आ जाता है बेटा ओन प्राइस।
8:19अब प्राइस का सप्लाई के साथ डायरेक्ट
8:21रिलेशन होता है भाई क्योंकि सप्लाई होती
8:22है प्रोड्यूसर की। वो पैसे के लिए काम
8:25करता है। वो है पैसे का पक्का। अगर महंगा
8:27प्राइस होगा तो वो चाहेगा ज्यादा बिके
8:29ताकि मैं ज्यादा कमाऊं। ठीक है? और अगर कम
8:32प्राइस होगा तो वो भी यही कहेगा यार अभी
8:34इस टाइम पे कम बिके तो बेटर है या चुपचाप
8:36शायद से थोड़ा सामान भी दुकान से निकाल के
8:39घर में छुपा के रख ले कि जी हमारे पे है
8:40नहीं अभी क्योंकि उसको पता है कस्टमर आ
8:43जाएंगे सस्ते में खरीदने तो अगर प्राइस
8:46ज्यादा है तो सप्लाई भी ज्यादा करेगा
8:48प्राइस कम है तो सप्लाई भी कम करेगा
8:50प्रोड्यूसर नेक्स्ट पॉइंट है नंबर ऑफ़
8:52फर्म्स भाई डायरेक्ट रिलेशन है अगर
8:54मार्केट में फर्म्स ज्यादा होंगी बिज़नेसेस
8:55ज्यादा होंगे तो सप्लाई ज्यादा होगी अगर
8:57कम बिज़नेसेस होंगे तो सप्लाई भी क्या होगी
8:59कम एक बहुत इंपॉर्टेंट बिज़नेस का पॉइंट
9:02आता है भाई। आपका गोल या आपका ऑब्जेक्टिव
9:04क्या है? आप प्रॉफिट बढ़ाना चाहते हो ना तो
9:07सप्लाई कम रखो। जैसे Rolls Ryceता है। ठीक
9:11है? कि उन्हें प्रॉफिट बढ़ाना है। वो
9:13सप्लाई कम रखते हैं ताकि हमारी चीज थोड़ी
9:14लिमिटेड एडिशन हो। NKI का कोई जूता जो
9:17लिमिटेड एडिशन के नाम से आता है। वो महंगे
9:18में बिकेगा ना कि जी ये सिर्फ गिने-चुने
9:20लोगों के पास है। और अगर आपको सेल्स बढ़ानी
9:23है, नया-नया बिज़नेस है तो सप्लाई बढ़ा दो
9:25भाई ताकि हर हर दुकान पे हर गली नुक्कड़ पे
9:27आपका प्रोडक्ट मिले।
9:30इसके बाद गवर्नमेंट पॉलिसीज आपके एरिया
9:32में आपकी इकॉनमी में अगर आपके फेवर में है
9:34फेवरेबल मतलब आपके फेवर में है तो आपकी
9:36सप्लाई ज्यादा होगी और अगर अनफेवरेबल है
9:39तो सप्लाई क्या होगी कम टेक्नोलॉजी भाई
9:42अगर टेक्नोलॉजी आपकी न्यू है अपग्रेडेड है
9:45बेटर मशीनरी यूज़ कर रहे हो तो सप्लाई
9:46ज्यादा होगी पीपीसी में भी ये बात पढ़ी थी
9:49आपने और अगर टेक्नोलॉजी पुरानी ओल्ड
9:51आउटडेटेड होगी तो लिमिटेड सप्लाई ही आपकी
9:53होगी प्राइस ऑफ़ फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन भाई
9:57ऐसी कुछ भी नहीं बन जाता आपको चीज
9:59प्रोड्यूस करने के लिए भी पहले कुछ
10:00फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन खरीदने पड़ते हैं।
10:02रॉ मटेरियल, मशीन, लेबर ये सब। एफओपी का
10:07मतलब है फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन। या पेपर
10:08में ऐसे नहीं लिखेंगे, पूरा लिखेंगे। बेटा
10:11अगर फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन महंगे हैं।
10:13आपको चीज ही महंगी बहुत पड़ रही है, तो आप
10:15उसकी सप्लाई थोड़ी कम रखोगे। और अगर आपको
10:17ईजीली सस्ते में फैक्टर्स ऑफ़ प्रोडक्शन
10:19मिल रहे हैं। आप ज्यादा ज्यादा बनाओगे।
10:20सप्लाई भी क्या रखोगे? थोड़ी ज्यादा।
10:23ध्यान रखना।
10:26नेक्स्ट टॉपिक है शेप्स ऑफ सप्लाई कर्व।
10:28यहां भी वही बात दोबारा इलास्टिक मतलब
10:29चेंज मोर इलास्टिक मोर चेंज लेस इलास्टिक
10:31लेस चेंज इनलास्टिक नो चेंज और यूनिटरी
10:34इलास्टिक मतलब जैसे तैसे मैनेज करके टोटल
10:36एक्सपेंडिचर सेम रखा
10:39इलास्टिसिटी ऑफ़ सप्लाई अगर वन है सप्लाई
10:41का कर्व बेटा कैसा बनता है अपवर्ड
10:42स्लोपिंग ध्यान रखना अगर इलास्टिसिटी ऑफ़
10:44सप्लाई आपकी वन है तो ऐसा पॉजिटिव
10:47स्लोपिंग कर्व बन जाएगा स्ट्रेट लाइन
10:49स्ट्रेट लाइन अपवर्ड स्लोपिंग स्टार्टिंग
10:51फ्रॉम ओरिजिन अगर मोर दैन वन है थोड़ा ऊपर
10:54से ऐसे ही अगर लेस दैन वन है तो थोड़ा यहां
10:56x-एक्सिस से ज़ीरो है। इनइलास्टिक सप्लाई
10:59है भाई। एक ही सप्लाई रह रही है। सप्लाई
11:00चेंजज़ ही नहीं कर रहे हम कोई सप्लाई में।
11:02ऐसे परपेंडिकुलर बन जाएगा ग्राफ वर्टिकल
11:05स्ट्रेट लाइन।
11:09और अगर परफेक्टली इलास्टिक है मतलब सप्लाई
11:11में एक ही प्राइस पे बहुत ज्यादा चेंजज़ आ
11:13रहे हैं।
11:15ये भाई कुछ ग्राफ्स हैं जो आपके काम के
11:17रहेंगे। इसको पढ़ लेना। डिमांड का कर्व ऐसे
11:20डाउनवर्ड स्लोपिंग, सप्लाई का कर्व ऐसे
11:22पॉजिटिव स्लोपिंग। इनइलास्टिक डिमांड कैसी
11:25बनती है? इनइलास्टिक डिमांड
11:30ऐसे
11:32इनलास्टिक सप्लाई भी ऐसे दोनों में ही y
11:36एक्सिस पे प्राइस एक्स एक्सिस पे
11:37क्वांटिटी आएगी डिमांड के कर्व में d लिख
11:39देंगे सप्लाई के कर्व में s लिख देंगे
11:42इलास्टिक डिमांड भी ऐसे एक्स एक्सिस के
11:44पैरेलल इलास्टिक सप्लाई भी ऐसे एक्स
11:46एक्सिस के पैरेलल तो भाई 1 मिनट इसको
11:48रिवाइंड करना 10 20 सेकंड और दोबारा ध्यान
11:50रखना पेपर में बोले इनलास्टिक डिमांड या
11:53इनइलास्टिक सप्लाई आपने बनाना बनाना है
11:56स्ट्रेट लाइन सीधी लाइन वर्टिकल लाइन
11:58पैरेलल टू y एक्सिस ऐसे और अगर बोले
12:01इलास्टिक डिमांड या इलास्टिक सप्लाई तो
12:03ऐसे लेटी हुई लाइन पैरेलल टू x एक्सिस
12:06मार्केट इक्विलिब्रियम कहां रीच होता है
12:08भाई जहां पर सप्लाई और डिमांड एक दूसरे से
12:10मिलते हैं।
12:13राइटवर्ड फॉरवर्ड अपवर्ड शिफ्ट मतलब
12:16डिमांड का कर्व राइट की साइड शिफ्ट हो
12:17जाएगा। बढ़ रही है तो और अगर घट रही है तो
12:19लेफ्टवर्ड बैकवर्ड या डाउनवर्ड शिफ्ट
12:21मारेगा। डिमांड का भी सप्लाई का भी ध्यान
12:23रखना।