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Anish Dhammi · 2,286 words · 11 min read

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0:01हां जी 11th क्लास बेटा यह एक टॉपिक

0:04इंपॉर्टेंट रहेगा फैक्टर्स अफेक्टिंग

0:06इलास्टिसिटी ऑफ सप्लाई और फैक्टर्स

0:08अफेक्टिंग सप्लाई ये दोनों टॉपिक

0:10इंपॉर्टेंट है इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड के

0:13फैक्टर्स। ठीक है? और सप्लाई के नॉर्मल

0:16फैक्टर्स। ठीक है? इसको रटना नहीं है यार।

0:19लॉजिकली सोचो। सबसे पहले तो फैक्टर्स

0:22अफेक्टिंग इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड।

0:24इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड होता है कि आपकी

0:27डिमांड में कितना चेंज आएगा भाई? अलग-अलग

0:29कारणों से। ठीक है? यह तो चलो सबको पता है

0:32कि यार जब प्राइस बढ़ेगा तो डिमांड कम

0:34होएगी। कंज्यूमर की। प्राइस कम होगा तो

0:36डिमांड बढ़ेगी। कितना चेंज आएगा? थोड़ा

0:38ज्यादा, कम, 10%, 20%, 50%, 100% वो ये

0:43वाला टॉपिक हमें समझाता है। अब इस टॉपिक

0:45को करने से पहले आपको चारप बातें पता होनी

0:47चाहिए। ये देखो इलास्टिक का मतलब क्या

0:50होता है? चेंज आना। मोर इलास्टिक मतलब

0:52ज्यादा चेंज आ रहा है। लेस इलास्टिक मतलब

0:54कम चेंज आ रहा है। यूनिटरी इलास्टिक का

0:57मतलब होता है जैसे-तैसे एडजस्ट करके टोटल

0:59एक्सपेंडिचर सेम रखा। और इनइलास्टिक का

1:02मतलब होता है कोई चेंज ही नहीं आ रहा भाई।

1:04अब टाइम पीरियड सबसे पहला फैक्टर

1:07अफेक्टिंग इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड आता है

1:09टाइम पीरियड। बेटा शॉर्ट रन में आपकी

1:11डिमांड ना कम इलास्टिक होती है। ज्यादा

1:12चेंज नहीं हो सकती। लेकिन लॉन्ग पीरियड

1:14में डिमांड भी ज्यादा इलास्टिक होगी।

1:16क्योंकि लंबे समय में लॉन्ग पीरियड इज़

1:18लॉन्ग इनफ टू चेंज एवरीथिंग। लंबे समय में

1:21भाई आप की पसंदीदा चीज बदल सकती है। आपकी

1:24चीज नीड्स बदल सकती है। आपकी जरूरतें बदल

1:26सकती है। आपका खर्चा बदल सकता है। लॉन्ग

1:28रन में बहुत कुछ हो सकता है। ठीक है? अभी

1:31फॉर एग्जांपल सुखराज है भाई वो रोज मेंटोस

1:33खा रहा है। ठीक है? आने वाले 10 सालों में

1:36लॉन्ग पीरियड में मुझे नहीं लगता कि यार

1:38मेंटोस अगर आने वाले 10 साल बाद जो अभी ये

1:40₹10 की खा रहा है वो 5 की भी हो जाएगी तो

1:42वो शायद खाएगा क्योंकि वो शौक ही खत्म हो

1:44जाएगा ना। दूसरा प्राइस लेवल।

1:49अगर प्राइस चीज का महंगा है तो उसकी

1:51डिमांड में बहुत ज्यादा चेंज आते हैं

1:52क्योंकि यार सब पर पैसे पूरे सूर्य हैं।

1:54वह सोच समझ के खर्च करेंगे माइक्रो

1:56इकोनॉमिक्स में। और अगर प्राइस कम है तो

1:58डिमांड में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा।

2:02आपकी इनकम का कितना प्रपोर्शन कितना

2:04हिस्सा उस चीज पे खर्चा जाता है। इससे

2:06डिमांड में बहुत प्रभाव आता है। अगर आपकी

2:09कमाई का एक छोटा सा हिस्सा सिर्फ एक

2:10पर्टिकुलर चीज पे जाता है तो उसकी डिमांड

2:12लेस इलास्टिक होगी। आप ज्यादा नहीं

2:14बदलोगे। लेकिन अगर आपकी इनकम कम है या फिर

2:17आपकी इनकम का एक बहुत मेजर हिस्सा किसी

2:20चीज को खरीदने में जा रहा है तो उसकी

2:22डिमांड बहुत ज्यादा चेंज होगी भाई क्योंकि

2:24आपको बड़ा हिसाब से चलना पड़ेगा ना आपकी

2:26आधी ज्यादा इनकम जा रही है। नेक्स्ट पॉइंट

2:29बेटा आ जाता है हैबिट का।

2:31अगर आपको किसी चीज की हैबिट है ना तो आपके

2:34लिए डिमांड बहुत इनइलास्टिक या लेस

2:36इलास्टिक ही होगी। और अगर हैबिट नहीं है

2:38तो उसकी डिमांड इलास्टिक होगी। आप इजीली

2:40बदल सकते हो। ये हैबिट वाले पॉइंट को

2:42अक्सर काफी बुक्स में एडिकशंस वाले पॉइंट

2:44से लिखा जाता है कि भाई अगर किसी को किसी

2:47चीज की एडिक्शन है तो भाई फिर वो प्राइस

2:49वगैरह इतना उसके लिए मैटर नहीं करेगा। ठीक

2:51है? वो फिर उसको कंज्यूम करेगा ही करेगा।

2:54वो वाली बात आ जाती है। अब मान लो कोई

2:56ड्रग एडिक्ट है। अब बेशक ड्रग्स महंगे हैं

3:00जो भी है। तुमने मूवीज वगैरह में भी देखा

3:02होगा भाई वो चोरी करके ना लाए पैसे जहां

3:04मर्जी से लाएगा। अगर उसको हैबिट है ना तो

3:06उतनी डिमांड उसको चाहिए तो चाहिए ही चाहिए

3:08भाई। ठीक है? नेक्स्ट आ जाता है इनकम।

3:11इनकम को इकोनॉमिक्स में व से लिखा जाता

3:13है। आई से नहीं। आई से इकोनॉमिक्स में

3:15इन्वेस्टमेंट होती है। अगर आपकी इनकम

3:18ज्यादा है तो आप परवाह नहीं मारोगे।

3:20डिमांड लेस इलास्टिक ही रहेगी। ज्यादा

3:22चेंजेस नहीं आएंगे आपकी डिमांड में। लेकिन

3:24अगर आपकी कमाई कम है ना तो बेटा आपको बड़ा

3:26सोच-सच के कदम रखने पड़ेंगे। बड़ा सोच-सच

3:29के अपनी पूंजी कहीं खर्च करनी पड़ेगी।

3:32पैसा बड़ा सोच-सच के कहीं खर्चना पड़ेगा।

3:34तो डिमांड में बहुत ज्यादा चेंजेस आ सकते

3:36हैं।

3:38ये थोड़ा सा ब्लर है भाई। लिखा क्या हुआ

3:40है? पोस्टपोनमेंट ऑफ यूज़। अगर आप किसी

3:44चीज को भी पोस्टपोन कर सकते हो तो उसकी

3:46डिमांड में ज्यादा बदलाव आएगा। और अगर

3:48नहीं कर सकते तो भाई फिर तो मजबूरी है ना

3:51खड़े पैर आपको उस चीज को कंज्यूम करना ही

3:53पड़ेगा। फॉर एग्जांपल इमेजिन अ सिचुएशन आप

3:57किसी पहाड़ पे हो जहां पर ऑल ऑफ़ अ सडन भाई

4:01साहब बारिश आ गई भयंकर। अब उस टाइम पर

4:05आपको मान लो आप गाड़ी-गोड़ी में भी नहीं

4:07हो। आपको उस टाइम पर अंब्रेला चाहिए ही

4:09चाहिए भाई गुजारा करने के लिए। कितना भीग

4:12लोगे बीमार हो जाओगे। अब उस टाइम पर आप

4:15उसको पोस्टपोन नहीं कर सकते क्योंकि बारिश

4:17तो अभी आ रही है ना आने वाले 10 साल बाद

4:18की बात थोड़ी हो रही है। उस टाइम पर आप

4:20ज्यादा चेंजेस नहीं करोगे। थोड़ा महंगा भी

4:23मिलेगा ना छाता आप खरीद लोगे। लेकिन अगर

4:25ऐसी वेले बैठे सोचो यार घर में एक छाता तो

4:27होना चाहिए। छाता खरीदना है। तो वो फिर

4:29बैठी-बैठी चीज रह ही जाएगी कि चल यार अभी

4:31नहीं बाद में ले लेंगे। अभी पसंद नहीं

4:33आया। अभी बजट में नहीं है। बाद में

4:34देखेंगे।

4:36उसके बाद एक टॉपिक है। ये देखो

4:38अवेलेबिलिटी ऑफ़ सब्स्टट्यूट्स। इसी का

4:40पॉइंट है। सातवां पॉइंट कोई छह भी याद रहे

4:42ना आपको तो चलेगा। अगर जिस चीज की आप

4:45खरीदने वाले हो उसके सब्स्टट्यूट्स

4:48अवेलेबल है। मतलब उसके जैसे मार्केट में

4:50बहुत सारे हैं। तो डिमांड में ज्यादा

4:52चेंजज़ आएंगे। क्योंकि भाई आप पे अदर बेटर

4:54ऑप्शंस अवेलेबल है। लेकिन अगर आपकी वाली

4:56चीज का कोई सब्स्टट्यूट ही नहीं है तो

4:58आपकी मजबूरी है भाई वो महंगा मिले सस्ता

5:00मिले आपको खरीदना ही पड़ेगा।

5:04प्राइस इलास्टिसिटी के बेटा दो मेथड्स

5:06आपको ध्यान में रखने हैं। एक परसेंटेज

5:08मेथड और एक प्रपोर्शननेट मेथड। परसेंटेज

5:11मेथड का सिंपल फार्मूला होता है।

5:12इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड माइनस का साइन।

5:14अच्छा सप्लाई में यही न्यूमेरिकल में

5:16माइनस का साइन नहीं आता। क्यों नहीं आता

5:18भाई? क्योंकि सप्लाई का प्राइस के साथ

5:20पॉजिटिव रिलेशन होता है। डिमांड वाले

5:22चैप्टर में यहां पर नेगेटिव का साइन आता

5:24है। और क्यों आता है? क्योंकि डिमांड और

5:26प्राइस का इनवर्स यानी नेगेटिव रिलेशन

5:28होता है। अब इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड का

5:32फार्मूला क्या है? माइनस परसेंटेज चेंज इन

5:34क्वांटिटी डिमांडेड अपॉन परसेंटेज चेंज इन

5:36प्राइस। एग्जांपल भाई क्वेश्चन में कुछ

5:38ऐसा लिखा हुआ था कि प्राइस 20% कम हुआ।

5:41डिमांड 40% बढ़ गई। इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड

5:44निकाल लो। तो कुछ भी नहीं करा भाई। ध्यान

5:45से देखो। बाहर लगाया माइनस का साइन।

5:48परसेंटेज चेंज इन क्वांटिटी डिमांडेड ना

5:50कितना आया 40

5:55और डिमांड बढ़ी है तो प्लस का 40 ये थोड़ा

5:58रुक जाओ ढंग से लिखते हैं इसको

6:00ये देखना

6:05इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड इज़ इक्वल टू माइनस

6:08का साइन बाहर परसेंटेज मेथड में बेटा प्लस

6:12माइनस का बड़ा ध्यान रखना होता है। अगर

6:14डिमांड बड़ी है ना 40% तो + 40

6:19अपॉन प्राइस में क्या है? प्राइस घटा है

6:2120% तो -20 यह माइनस से माइनस कट जाएगा।

6:25यह भी कट जाएगा। इलास्टिसिटी ऑफ़ डिमांड

6:27क्या आ जाएगी? जी प्लस का 2

6:30तो यहां पर करा हुआ है। ठीक है जी? ध्यान

6:33से इसको देख लेना। एक आधा न्यूमेरिकल इसका

6:36प्रैक्टिस कर लेना। नेक्स्ट आता है

6:38प्रपोर्शनल मेथड। यहां बस आपको बाहर एक

6:40माइनस डालना है। अंदर किसी जगह आपको माइनस

6:42या प्लस डालने की जरूरत नहीं है। वो

6:44ऑटोमेटिकली इसके फ़ूले में एडजस्ट हो

6:46जाएगा। इसमें किन बातों का ध्यान रखना है

6:48भाई आपको? P ओल्ड प्राइस, P1 न्यू प्राइस।

6:51चेंज इन P मतलब हमेशा न्यू माइनस ओल्ड

6:53करेंगे। P1 - P इसी तरीके से Q ओल्ड

6:56क्वांटिटी और Q1 न्यू क्वांटिटी। ओल्ड

7:00क्वांटिटी न्यू क्वांटिटी। चेंज इन Q कैसे

7:02निकलेगा? Q1 - Q। फिर आपने फार्मूला लगा

7:04देना है। अभी पिछली वीडियो में भी आपको

7:07बोला था AC और MC का रिलेशन बहुत

7:09इंपॉर्टेंट है। बहुत स्कूलों में आता है।

7:11कुछ नहीं। मीनिंग में एवरेज कॉस्ट का

7:13मीनिंग लिख देना, मार्जिनल कॉस्ट का

7:14मीनिंग लिख देना।

7:16दोनों के फार्मूले लिख देना। टेबल बना

7:18देना। आपको बताया था TC के दम पर बन जाएगा

7:20टेबल। VC आपको आपको आ गया। TC आपको मान लो

7:24याद है TC के दम पे बन जाएगा या VC से भी

7:27बना सकते हो। और क्या ध्यान रखना है? MC

7:29कट्स AC फ्रॉम बिलो। उस वीडियो में भी

7:31मैंने अभी आपको बोला था।

7:34MC AC को नीचे से काटता है। बहुत

7:36इंपॉर्टेंट बात है भाई।

7:40अगेन ये वाला टॉपिक इंपॉर्टेंट रहेगा।

7:43फैक्टर्स अफेक्टिंग सप्लाई। अक्सर ना यह

7:46वाला पैटर्न 11th क्लास में स्कूलों में

7:48बहुत रहता है कि इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड के

7:51फैक्टर्स और सप्लाई के खुद के फैक्टर्स

7:53पेपर में अक्सर आते हैं। अब रट्टा इसका भी

7:55नहीं मारना आपने। आप इमेजिन करिए जस्ट अ

7:58सेकंड।

8:00आप इमेजिन करिए कि भाई आपका कोई बिनेस है।

8:03आप कुछ सप्लाई करते हो। बेशक बना के बेचते

8:05हो या उठा के बेचते हो। जो मर्जी। आपकी

8:08कितनी सप्लाई होगी? किस-किस चीजों पर

8:10डिपेंड करेगा भाई? अब आप कितनी सप्लाई

8:13करोगे उस चीज को वो देखना है पॉइंट।

8:16फर्स्ट पॉइंट आ जाता है बेटा ओन प्राइस।

8:19अब प्राइस का सप्लाई के साथ डायरेक्ट

8:21रिलेशन होता है भाई क्योंकि सप्लाई होती

8:22है प्रोड्यूसर की। वो पैसे के लिए काम

8:25करता है। वो है पैसे का पक्का। अगर महंगा

8:27प्राइस होगा तो वो चाहेगा ज्यादा बिके

8:29ताकि मैं ज्यादा कमाऊं। ठीक है? और अगर कम

8:32प्राइस होगा तो वो भी यही कहेगा यार अभी

8:34इस टाइम पे कम बिके तो बेटर है या चुपचाप

8:36शायद से थोड़ा सामान भी दुकान से निकाल के

8:39घर में छुपा के रख ले कि जी हमारे पे है

8:40नहीं अभी क्योंकि उसको पता है कस्टमर आ

8:43जाएंगे सस्ते में खरीदने तो अगर प्राइस

8:46ज्यादा है तो सप्लाई भी ज्यादा करेगा

8:48प्राइस कम है तो सप्लाई भी कम करेगा

8:50प्रोड्यूसर नेक्स्ट पॉइंट है नंबर ऑफ़

8:52फर्म्स भाई डायरेक्ट रिलेशन है अगर

8:54मार्केट में फर्म्स ज्यादा होंगी बिज़नेसेस

8:55ज्यादा होंगे तो सप्लाई ज्यादा होगी अगर

8:57कम बिज़नेसेस होंगे तो सप्लाई भी क्या होगी

8:59कम एक बहुत इंपॉर्टेंट बिज़नेस का पॉइंट

9:02आता है भाई। आपका गोल या आपका ऑब्जेक्टिव

9:04क्या है? आप प्रॉफिट बढ़ाना चाहते हो ना तो

9:07सप्लाई कम रखो। जैसे Rolls Ryceता है। ठीक

9:11है? कि उन्हें प्रॉफिट बढ़ाना है। वो

9:13सप्लाई कम रखते हैं ताकि हमारी चीज थोड़ी

9:14लिमिटेड एडिशन हो। NKI का कोई जूता जो

9:17लिमिटेड एडिशन के नाम से आता है। वो महंगे

9:18में बिकेगा ना कि जी ये सिर्फ गिने-चुने

9:20लोगों के पास है। और अगर आपको सेल्स बढ़ानी

9:23है, नया-नया बिज़नेस है तो सप्लाई बढ़ा दो

9:25भाई ताकि हर हर दुकान पे हर गली नुक्कड़ पे

9:27आपका प्रोडक्ट मिले।

9:30इसके बाद गवर्नमेंट पॉलिसीज आपके एरिया

9:32में आपकी इकॉनमी में अगर आपके फेवर में है

9:34फेवरेबल मतलब आपके फेवर में है तो आपकी

9:36सप्लाई ज्यादा होगी और अगर अनफेवरेबल है

9:39तो सप्लाई क्या होगी कम टेक्नोलॉजी भाई

9:42अगर टेक्नोलॉजी आपकी न्यू है अपग्रेडेड है

9:45बेटर मशीनरी यूज़ कर रहे हो तो सप्लाई

9:46ज्यादा होगी पीपीसी में भी ये बात पढ़ी थी

9:49आपने और अगर टेक्नोलॉजी पुरानी ओल्ड

9:51आउटडेटेड होगी तो लिमिटेड सप्लाई ही आपकी

9:53होगी प्राइस ऑफ़ फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन भाई

9:57ऐसी कुछ भी नहीं बन जाता आपको चीज

9:59प्रोड्यूस करने के लिए भी पहले कुछ

10:00फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन खरीदने पड़ते हैं।

10:02रॉ मटेरियल, मशीन, लेबर ये सब। एफओपी का

10:07मतलब है फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन। या पेपर

10:08में ऐसे नहीं लिखेंगे, पूरा लिखेंगे। बेटा

10:11अगर फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन महंगे हैं।

10:13आपको चीज ही महंगी बहुत पड़ रही है, तो आप

10:15उसकी सप्लाई थोड़ी कम रखोगे। और अगर आपको

10:17ईजीली सस्ते में फैक्टर्स ऑफ़ प्रोडक्शन

10:19मिल रहे हैं। आप ज्यादा ज्यादा बनाओगे।

10:20सप्लाई भी क्या रखोगे? थोड़ी ज्यादा।

10:23ध्यान रखना।

10:26नेक्स्ट टॉपिक है शेप्स ऑफ सप्लाई कर्व।

10:28यहां भी वही बात दोबारा इलास्टिक मतलब

10:29चेंज मोर इलास्टिक मोर चेंज लेस इलास्टिक

10:31लेस चेंज इनलास्टिक नो चेंज और यूनिटरी

10:34इलास्टिक मतलब जैसे तैसे मैनेज करके टोटल

10:36एक्सपेंडिचर सेम रखा

10:39इलास्टिसिटी ऑफ़ सप्लाई अगर वन है सप्लाई

10:41का कर्व बेटा कैसा बनता है अपवर्ड

10:42स्लोपिंग ध्यान रखना अगर इलास्टिसिटी ऑफ़

10:44सप्लाई आपकी वन है तो ऐसा पॉजिटिव

10:47स्लोपिंग कर्व बन जाएगा स्ट्रेट लाइन

10:49स्ट्रेट लाइन अपवर्ड स्लोपिंग स्टार्टिंग

10:51फ्रॉम ओरिजिन अगर मोर दैन वन है थोड़ा ऊपर

10:54से ऐसे ही अगर लेस दैन वन है तो थोड़ा यहां

10:56x-एक्सिस से ज़ीरो है। इनइलास्टिक सप्लाई

10:59है भाई। एक ही सप्लाई रह रही है। सप्लाई

11:00चेंजज़ ही नहीं कर रहे हम कोई सप्लाई में।

11:02ऐसे परपेंडिकुलर बन जाएगा ग्राफ वर्टिकल

11:05स्ट्रेट लाइन।

11:09और अगर परफेक्टली इलास्टिक है मतलब सप्लाई

11:11में एक ही प्राइस पे बहुत ज्यादा चेंजज़ आ

11:13रहे हैं।

11:15ये भाई कुछ ग्राफ्स हैं जो आपके काम के

11:17रहेंगे। इसको पढ़ लेना। डिमांड का कर्व ऐसे

11:20डाउनवर्ड स्लोपिंग, सप्लाई का कर्व ऐसे

11:22पॉजिटिव स्लोपिंग। इनइलास्टिक डिमांड कैसी

11:25बनती है? इनइलास्टिक डिमांड

11:30ऐसे

11:32इनलास्टिक सप्लाई भी ऐसे दोनों में ही y

11:36एक्सिस पे प्राइस एक्स एक्सिस पे

11:37क्वांटिटी आएगी डिमांड के कर्व में d लिख

11:39देंगे सप्लाई के कर्व में s लिख देंगे

11:42इलास्टिक डिमांड भी ऐसे एक्स एक्सिस के

11:44पैरेलल इलास्टिक सप्लाई भी ऐसे एक्स

11:46एक्सिस के पैरेलल तो भाई 1 मिनट इसको

11:48रिवाइंड करना 10 20 सेकंड और दोबारा ध्यान

11:50रखना पेपर में बोले इनलास्टिक डिमांड या

11:53इनइलास्टिक सप्लाई आपने बनाना बनाना है

11:56स्ट्रेट लाइन सीधी लाइन वर्टिकल लाइन

11:58पैरेलल टू y एक्सिस ऐसे और अगर बोले

12:01इलास्टिक डिमांड या इलास्टिक सप्लाई तो

12:03ऐसे लेटी हुई लाइन पैरेलल टू x एक्सिस

12:06मार्केट इक्विलिब्रियम कहां रीच होता है

12:08भाई जहां पर सप्लाई और डिमांड एक दूसरे से

12:10मिलते हैं।

12:13राइटवर्ड फॉरवर्ड अपवर्ड शिफ्ट मतलब

12:16डिमांड का कर्व राइट की साइड शिफ्ट हो

12:17जाएगा। बढ़ रही है तो और अगर घट रही है तो

12:19लेफ्टवर्ड बैकवर्ड या डाउनवर्ड शिफ्ट

12:21मारेगा। डिमांड का भी सप्लाई का भी ध्यान

12:23रखना।

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