Free YouTube Transcribe

Video transcript

Very Important lecture

Anish Dhammi · 4,766 words · 22 min read

Want to search this transcript, jump the video from any line, or download it as TXT, SRT, or VTT?

Open in the transcript tool

Full transcript

0:01हेलो नाइंथ क्लास। हम अपनी आगे की क्लासेस

0:03में कंटिन्यू करेंगे। एनसीआरटी का पेज

0:06नंबर 143 जो है उसके अंदर कुछ इंडेक्स

0:09क्वेश्चन है जो थॉमसन के मॉडल के आगे

0:11कंटिन्यू होते हैं। अब थॉमसन का मॉडल हमने

0:14लास्ट पढ़ा था। उसके आगे क्वेश्चन है कि

0:17मान लो आपने अपना खुद का एक एटम बनाया

0:20क्ले की मदद से। क्ले होती है ना जिससे

0:22छोटे बच्चे खेलते हैं। वही थॉमसन की तरह

0:24पॉजिटिव चार्ज के हिसाब से और छोटे-छोटे

0:27बीड्स बना दिए आपने। ऐसे डॉट डॉट डॉट डॉट

0:29से बना दिए इलेक्ट्रॉन्स के लिए। अच्छा

0:32क्या होगा अगर जो पॉजिटिव चार्ज है क्ले

0:36का वो कम होगा नेगेटिव चार्ज से? क्वेश्चन

0:39है मान लो आपने अपना खुद का एटम बनाया

0:42क्ले की सहायता से और पॉजिटिव चार्ज के

0:46लिए। क्योंकि थॉमसन जी तो बार-बार एक ही

0:47चीज चिल्ला रहे थे ना। एटम इज अ स्फीयर ऑफ़

0:50पॉजिटिव चार्ज। एटम इज़ अ स्फीयर फॉर

0:52पॉजिटिव चार्ज। तो

0:54और इलेक्ट्रॉन्स के लिए आपने छोटे-छोटे

0:56बीड्स बना दिए। बेसिकली वही ना ऐसे ऐसे

0:59ऐसे ऐसे अच्छा जी आगे की बात क्या होगा

1:03अगर पॉजिटिव चार्ज जो है क्ले पे वो कम

1:06होगा नेगेटिव चार्ज के मुताबिक तो भाई

1:10नॉर्मल सी कॉमन सेंस लगाओ। ये कह रही है

1:12क्या होगा? अगर पॉजिटिव चार्ज कम होगा

1:15नेगेटिव चार्ज के मुताबिक। तो यार नेगेटिव

1:17चार्ज ज्यादा होगा। ये तो बिल्कुल फोर्स

1:20वाली बात हुई ना। क्वेश्चन क्या कह रहा

1:22है? ध्यान से पढ़ो। आपने एक मॉडल बनाया एटम

1:25का थॉमसन जी के हिसाब से। कह रहे क्या

1:28होगा? अगर पॉजिटिव चार्ज जो है वो कम है

1:31नेगेटिव चार्ज के मुकाबिक। तो फिर तो

1:34सिंपल लॉजिक है भाई। अगर पॉजिटिव चार्ज कम

1:37है तो मॉडल का कैसा टोटल चार्ज रहेगा? नेट

1:39चार्ज नेगेटिव ही रहेगा। द मॉडल वुड हैव

1:42नेट नेगेटिव चार्ज। क्योंकि क्या हुआ भाई?

1:45टोटल नेगेटिव चार्जर जो है चार्ज जो है वो

1:47ज्यादा होगा एज़ कंपेयर टू पॉजिटिव चार्ज।

1:51सिंपल सा लॉजिक है ना? वो कह रही है अगर

1:54पॉजिटिव चार्ज कम होगा नेगेटिव चार्ज के

1:56मुताबिक तो क्या होगा? तो भाई जो मॉडल है

1:59उसका टोटल जो चार्ज निकलेगा वो नेगेटिव

2:01निकलेगा। मान लीजिए एग्जांपल के तौर पे कि

2:04पॉजिटिव चार्ज मान लो पांच का है और

2:07नेगेटिव चार्ज सात का है। तो नेट रिजल्ट

2:09क्या आएगा? नेट रिजल्ट तो -2 ही आएगा।

2:11नेगेटिव ही आएगा।

2:14तो इतना कह सकते हैं कि ये कोई न्यूट्रल

2:16एटम पक्का नहीं होगा। क्योंकि न्यूट्रल

2:19कौन सा होता है? जिसमें पॉजिटिव और

2:21नेगेटिव चार्जेस इक्वल होते हैं। अगला

2:23क्वेश्चन अगर क्ले में खुद ही जैसे आपने

2:26मॉडल बनाया अगर क्ले का खुद का चार्ज ही

2:28थोड़ा सा नेगेटिव है तो क्या न्यूट्रल एटम

2:31बनेगा? नहीं भाई। अगर क्ले पॉजिटिव चार्ज

2:35के लिए हम मान रहे हैं। हम तो ये बोलते

2:36रहते हैं ना। थॉमसन जी तो यही बोल रहे थे

2:38ना कि एटम इज अ स्फीयर ऑफ़ पॉजिटिव चार्ज।

2:42क्ले को तो माना गया था कि ये पॉजिटिव

2:44चार्ज दिखाएगी। अगर आपकी क्ले में भी

2:46नेगेटिव चार्ज है तो भाई फिर टोटल पॉजिटिव

2:49और नेगेटिव चार्जेस आपस में बैलेंस आउट

2:51नहीं होंगे। तो जरूरी नहीं है कि ये वाला

2:53मॉडल एक न्यूट्रल एटम दिखाएगा।

2:58उतना खैरेंट क्वेश्चन भी नहीं था ये बट

3:00स्टिल।

3:01अच्छा नेक्स्ट क्वेश्चन ज्यादाेंट है।

3:03ध्यान से देखिएगा।

3:06देखो

3:08क्या एक ऑरेंज या फिर लेमन जिसके अंदर

3:10सीड्स होते हैं, बीज होते हैं। क्या वो भी

3:14एक अच्छा कंपैरिजन है थॉमसन के मॉडल को

3:16दिखाने के लिए? जहां आप थॉमसन के मॉडल में

3:18कल पढ़ रहे थे कि इट इज़ लाइक सीड्स इन अ

3:21वाटरमेलन या फिर प्लम पुडिंग मॉडल। तो

3:24क्या जैसे मान लो एक लेमन है। उस लेमन के

3:28अंदर एग्जांपल के तौर पर मान लो यह लेमन

3:30है।

3:32यह

3:35इस नींबू के अंदर जो छोटे-छोटे छोटे-छोटे

3:38से बीज है इधर-उधर क्या यह भी एक अच्छा

3:40मॉडल है समझाने के लिए थॉमसन के मॉडल को?

3:43ये क्वेश्चन पूछ रहे हैं। तो भाई हां

3:46ऑरेंज और लेमन को भी एक सिंपल कंपैरिजन के

3:49लिए समझाया जा सकता है। बस जो उसका पल्प

3:51होगा अंदर का सारा वो पॉजिटिवली चार्ज

3:53स्फीयर दिखाएगा और जो सीड्स है बिल्कुल

3:56जैसे वाटरमेलन एग्जांपल था वो

3:57इलेक्ट्रॉन्स दिखाएंगे। सिंपल सा क्वेश्चन

4:00था। बट फिर भी भाई एग्जैक्ट कंपैरिजन नहीं

4:03है क्योंकि असली में एटम्स के ना तो भाई

4:05सीड होते हैं ना पल्प होते हैं। जेरिक सा

4:08आंसर था।

4:10बहुत अच्छा क्वेश्चन जो है ना इन तीन

4:12क्वेश्चनों में से जो इंपॉर्टेंट है वो यह

4:14वाला है। क्यू थॉमसन ने ये बात मान ली थी

4:17कि इलेक्ट्रॉन्स हर एटम में होते हैं। याद

4:20है कल हमने एक क्वेश्चन करा था कि अगर

4:22बच्चा वो कैथोड रे एक्सपेरिमेंट के अंदर

4:26गैस बदल दे तो भी उसको कैथोड रेज दिखी थी।

4:29क्योंकि कोई फर्क नहीं पड़ता भाई

4:30इलेक्ट्रॉन हर एटम में प्रेजेंट है। ये

4:33चीज इसका आंसर निकलेगी क्वेश्चन का।

4:35क्वेश्चन है क्यों थॉमसन ने ये माना था कि

4:37इलेक्ट्रॉन्स हर एटम के अंदर हैं। तो यार

4:40उसने जब कैथोड रे की गैस बदली भी थी ना द

4:43नेचर ऑफ कैथोड रेज उससे कोई फर्क नहीं पड़

4:46रहा था भाई कि जो से मर्जी मटेरियल की गैस

4:49हो जब उसने वो ट्यूब के अंदर गैस बदली थी

4:52तो कैथोड रेज फिर भी नेगेटिव ही दिखी। फिर

4:54भी वो नेगेटिव ही आई। तो थॉमसन को पता लग

4:57गया था कि इलेक्ट्रॉन्स फंडामेंटल

4:59कॉम्पोनेंट है हर एक एटम के। आसान शब्दों

5:02में इसका मतलब क्या है? कल एक क्वेश्चन

5:04आया था आपके पास। दोबारा से उस क्वेश्चन

5:05पर जाइएगा कि अगर बच्चा वो बदल दे, नेचर

5:09बदल दे कैथोड रे के अंदर वाली गैस का तो

5:12भी नेगेटिव ही निकली वो। मतलब तब भी पता

5:15लगा कि उसके अंदर इलेक्ट्रॉन है। तो थॉमसन

5:18को ये बात पता लग गई थी कि इलेक्ट्रॉन्स

5:20तो यार बेसिक चीज है। बेसिक कॉम्पोनेंट

5:23है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि जो सी मर्जी

5:26आप गैस लो। जब उसने कैथोड रेस्ट चेक करी

5:29सबके अंदर नेगेटिव चार्ज ही निकला।

5:32जब किसी दूसरी गैस से भी कैथोड रेज बनी थी

5:34तो उसमें नेगेटिव चार्ज ही था। तो इससे

5:37पता लगा था थॉमसन को कि भाई हर एक एटम के

5:40अंदर इलेक्ट्रॉन तो है ही है।

5:43अब हमारी आज की जो क्लास है ज्यादा आगे की

5:46वो यहां से स्टार्ट होती है। व्हाई वाज़

5:48थॉमसन मॉडल टेस्टेड?

5:51यहां तक तो मजाक था भाई। अब आगे का

5:53इंपॉर्टेंट काम है। थॉमसन के मॉडल को आगे

5:56फेल किया गया था। अभी तक चैप्टर की

5:58सीक्वेंस क्या थी यार? आचार्य कन्नड़ आए।

6:01फिर वॉल्यूम कीपर्स डेमोक्रेटस आए, जॉन

6:03डेल्टन आया। फिर आपका यह जे जे थॉमसन आया।

6:07तब यह भी फेल होने वाले हैं। थॉमसन के

6:10मॉडल की जब टेस्टिंग हुई और उसकी चोरी

6:12पकड़ी गई। ये टॉपिक है हमारा।

6:15अब पहले हम बात करते हैं थॉमसन के मॉडल ने

6:19क्या कहा था?

6:21थॉमसन के मॉडल ने कहा था कि पॉजिटिव चार्ज

6:24जो है वो यूनिफली पूरे एटम में फैला हुआ

6:27है और इलेक्ट्रॉन्स उसके अंदर पिरोए हुए

6:29हैं। डिस्ट्रीब्यूट हो रखे हैं। थॉमसन जी

6:31तो एक ही बात करने जा रहे थे ना एटम इज़ अ

6:33स्फीयर ऑफ़ पॉजिटिव चार्ज। एटम इज़ अ स्फीयर

6:35ऑफ़ पॉजिटिव चार्ज। एक ही बात की उन्होंने

6:37रट लगा रखी थी और इलेक्ट्रॉन्स उसके अंदर

6:40डिस्ट्रीब्यूट हो रखे हैं। साइंटिस्ट को

6:42बाद में हुआ कि यार एक बार हम टेस्टिंग तो

6:44जरूर करेंगे। तो अब देखो हमारे पास सिलेबस

6:48में मॉडल तो ई रुदरफोर्ड का है अर्नेनेस्ट

6:51रुदरफोर्ड का। फिर ये दो कार्टून कहां से

6:53आ गई? अब सुनो इनकी बात क्या है?

6:571911 के अंदर।

7:00ठीक है? 1911 के अंदर गाइजर एंड मास्टन

7:04गीगर ना बोल देना इसको। गजर एंड मास्टन

7:07प्रोनंसिएशन क्या है इनकी? गाइजर जीजर

7:10नहीं है ये। ठीक है ना? जीजा जी है ये

7:12आपके गाइजर एंड मार्शडन 1911 के अंदर

7:16गाइजर और मार्शडन ये लोग जो थे ना ये ई

7:19रुदरफोर्ड के अंडर काम कर रहे थे सीख रहे

7:22थे उनके शिष्य थे समझ लो इन्होंने

7:25टेस्टिंग कर दी अपना एक बड़ा फेमस गोल्ड

7:27फॉइल एक्सपेरिमेंट करके

7:30अब ये गोल्ड फॉइल का एक्सपेरिमेंट क्या था

7:33अब सुनना भाई एक क्वेश्चन जो जिनका भी अभी

7:36परसों दरसों में पेपर है पेपर में आता हुआ

7:38नजर आ सकता है वो ये है कि व्हाई गोल्ड

7:41फॉइल? गोल्ड फॉइल ही क्यों चूज़ किया गया

7:44एक्सपेरिमेंट के लिए? फॉइल पेपर चूज़ करना

7:46था ना आप लोगों के स्कूल के टिफिन का फॉइल

7:48पेपर तो एलुमिनियम का होता है। वो कर

7:51लेते। सिल्वर फॉइल पेपर होता है ये काजू

7:53कतली के ऊपर वो कर लेते। गोल्ड फॉइल ही

7:55क्यों चूज़ किया? क्या रीज़न था? ये

7:59क्वेश्चन बेटा यहां पे अभी लिखा हो ना

8:00लिखा हो। मैं बता रहा हूं। डिक्टेट कर रहा

8:02हूं। नोट कर लो। व्हाई डिड क्वेश्चन

8:04क्या-क्या आ सकता है? सुन लो। व्हाई डिड

8:08गजन एंड मारन? चोस गोल्ड फॉइल फॉर देयर

8:11एक्सपेरिमेंट या फिर इन्हीं का जो बॉस था

8:14रुदरफोर्ड व्हाई डिड रुदरफोर्ड चोज़ गोल्ड

8:18फॉइल फॉर ह एक्सपेरिमेंट तो आंसर लिखो

8:21बिकॉज़

8:24बिकॉज़

8:27गोल्ड इज़ द

8:31मोस्ट

8:34मिलिएबल

8:37एंड डक्टाइल

8:41मेटल गोल्ड को ही क्यों चूज किया गया?

8:44क्योंकि गोल्ड बहुत ही ज्यादा मिलिएबल और

8:47डक्टाइल मेटल होता है। बहुत ही ज्यादा

8:49मिलिएबल मेटल है। बहुत ही ज्यादा डक्टाइल

8:51मेटल है। इसलिए गोल्ड को चूज़ किया गया। अब

8:54बेटा जिन्हें नहीं पता मतलब क्या होता है

8:55मिलिएबल और डक्टाइल का। मिलिएबल का मतलब

8:58होता है जब हम उसे पीटेंगे उसकी शीट्स बट

9:01सकती है। शीट्स कट सकती है। क्रैक नहीं

9:03आएंगे। और डक्टाइल मतलब 1 ग्राम गोल्ड से

9:06भी बड़ी लंबी-लंबी तारें बन सकती है। 1

9:09ग्राम गोल्ड 2 कि.मी. लंबी तार बना सकता

9:11है। ये डक्टाइल का मतलब होता है। ठीक है

9:14जी। अब आगे काम की बात पे चलते हैं।

9:18अब ना ये गोल्ड फॉइल एक्सपेरिमेंट के लिए

9:19मैं आपको एक बार एक एनसीआरटी की ही फोटो

9:22दिखाता हूं। ध्यान से देखिएगा।

9:24ये देखना भाई। एनसीआरटी की फोटो है ये। ये

9:29बुक में बना हुआ है। गोल्ड फॉइल

9:30एक्सपेरिमेंट। ये येलो-यलो कलर से

9:32इन्होंने क्या दिखाया है? गोल्ड के एटम्स।

9:35ये क्या कर रहा है? ये इतनी सारी लाइनें

9:36क्या जा रही है? जो लाइनें जा रही है भैया

9:38ये क्या है? ध्यान से देखना। ये जो लाइनें

9:41जा रही है ना उस साइड पर ये एरोस डल रखे

9:42हैं। उस साइड पर कुछ लाइनें लाइनें ऐसी जा

9:45रही है। ये क्या है? इसने अल्फा पार्टिकल

9:49स्कैटरिंग एक्सपेरिमेंट करा था। इस

9:50एक्सपेरिमेंट में क्या था? इसने कुछ रेज

9:53को फिलहाल रेज़ समझ लो। कुछ किरणों को इस

9:56गोल्ड फॉइल पे पास कराया था।

9:59यह ई रुदरफोर्ड के शिष्यों ने और इन्होंने

10:02कुछ ऑब्जरर्वेशंस पाई थी। ऑब्जरर्वेशंस

10:04इनकी क्या थी? बहुत सारी गोल्ड ये जो थी

10:07ये स्ट्रेट पास कर गई थी। बहुत सारी रेस

10:10सीधी निकल गई। कुछ रेस जो थी वो थोड़ी

10:14बहुत ही टेढ़ी-मेढ़ी हुई और

10:17रेस्ट ऑफ द रेयर रेयर एक आधी रे ऐसी थी जो

10:21यू टर्न मार गई। अब ये क्या है भैया गंदा

10:24सा हमको समझ नहीं आया। अभी देखते हैं। चलो

10:27आप बस एक बार ये डायग्राम देखो जो

10:28एनसीआरटी में बने हुए हैं ताकि बेसिक पता

10:31रहे कि करा क्या था इन्होंने।

10:35एक बार डायग्राम देखो फटाफट।

10:40अब क्या था भाई? दोबारा सुनो। ये जो

10:44येलो-यलो कलर का आपको पार्ट दिख रहा है ना

10:46दिस इज गोल्ड फॉइल के एटम्स। अब इन्होंने

10:50क्या करा? यह जो ब्लैक ब्लैक लाइंस आपको

10:51आती हुई नजर आ रही होंगी। यह देखना।

10:55यह जो लाइंस आती हुई नजर आ रही है ना आपको

10:57यह यह जो लाइंस आ रही है

11:03ये और इन सारी लाइनों पे एक चीज कॉमन है

11:07एरो सारी आ रही है आने का एरो है वो इस

11:10तरीके का कुछ एरो बना हुआ है हर एक लाइन

11:12के ऊपर

11:15क्या करा था इन्होंने इन्होंने अल्फा

11:18पार्टिकल्स को क्या होते हैं वो भी

11:19पढ़ेंगे कुछ पार्टिकल्स होती हैं कुछ रे

11:21होती है कुछ किरणें समझ लो यार कुछ किरणों

11:24को इस गोल्ड फॉइल पेपर पर पास कराया।

11:27इन्होंने ऑब्जर्व क्या करा? यह जानना बहुत

11:29जरूरी है। भाई इन्होंने क्या ऑब्जर्व करा?

11:32बहुत सारी रेज ये देखो। ये देखना।

11:37बहुत सारी रेज सीधा निकल गई। ये देखो। दिख

11:40रही है? ये अभी जो मैं ऑरेंज ऑरेंज सी बना

11:42रहा हूं। बहुत सारी रेज सीधा निकल गई।

11:46इसकी हर एक ऑब्जरवेशन से ना एक-एक

11:48कंक्लूजन आ रहा था कि भाई इस बात से यह

11:51मतलब निकलता है। इस बात का यह मतलब निकलता

11:53है। बहुत सारी रेज सीधी निकल गई। इन्होंने

11:57इस बात का एक निचोड़ बनाया क्योंकि बहुत

12:00सारी रेज सीधा निकल गई। इसका मतलब एटम के

12:02अंदर ज्यादातर जगह खाली होती होगी। तभी तो

12:05जब हमने जब किरणों को इसके ऊपर गिराया तो

12:08बहुत सारी रेज सीधा निकल गई। क्योंकि इसका

12:11मतलब एटम के अंदर ज्यादातर जगह क्या है?

12:13खाली है। और

12:17ये देखना

12:20ये देखना एक सेकंड

12:26ये देखो एक आधी रे जो थी ना वो थोड़ी

12:29टेढ़ी-मेढ़ी हुई ये देखो ये हरी वाली रे दिख

12:31रही है आपको टेढ़ी-मेढ़ी हो गई एक आधी रे

12:34ऐसा भी नहीं है कि सारी सीधी निकल गई थी

12:36एक आधी रे टेढ़ी-मेढ़ी हुई

12:45ये

12:47इसका मतलब क्या निकाला इन्होंने? इस बात

12:50का इन्होंने मतलब निकाला कि भाई एटम के

12:53बीच में कुछ वजन सा है जिससे टकरा कर रे

12:56जो है वो टेढ़ी-मेढ़ी हो रही है। नॉर्मल सी

12:58बात है यार अगर कोई चीज सीधी जाती टेढ़ी

13:01होगी। अपने रास्ते से गुमराह होगी। मतलब

13:02वो कहीं पे टकराई है। इन्होंने इस बात से

13:05ये निचोड़ निकाली। ठीक है?

13:08यह एक-ए ऑब्जरवेशन जो इस गोल्ड फॉइल के

13:11एक्सपेरिमेंट पर किरणें गिरा के हो रही थी

13:13ना यह उन बातों को नोट कर रहे थे।

13:15साइंटिस्ट थे उठाए गिरे नहीं थे। याद रखना

13:18अब ये देखो क्या करा भाई इनका

13:21एक्सपेरिमेंट क्या था? देखते हैं। चलो एक

13:23पतली सी बीम अल्फा पार्टिकल्स की इन्होंने

13:26डायरेक्ट कराई बहुत ही पतली गोल्ड फॉइल

13:29पे।

13:31क्या करा? ठीक है? अब अल्फा पार्टिकल्स

13:33क्या होते हैं भाई? वैसे तो अल्फा

13:35पार्टिकल्स बहुत ही पतले पॉजिटिवली चार्ज

13:37पार्टिकल्स होते हैं जो कुछ रेडियो एक्टिव

13:40एलिमेंट्स छोड़ते हैं। जो पुरानी एनसीआरटी

13:43थी ना उसमें लिखा हुआ था हीलियम आयंस डबल

13:45चार्ज के। खैर छोड़ो काम की चीज ये है।

13:48अल्फा पार्टिकल्स क्या होते हैं?

13:50पतले-पतले से पॉजिटिवली चार्ज्ड

13:52पार्टिकल्स हैं जो एमिट करते हैं। एमिट

13:55यानी छोड़ते हैं। कौन? कुछ रेडियोएक्टिव

13:57एलिमेंट्स। रेडियो एक्टिव जो इनविज़िबल रेज

14:00वगैरह छोड़ते रहते हैं। बेटा मेरे को पता

14:02है यह चीज थोड़ी टेक्निकल है बट करनी तो

14:04पड़ेगी और यह तो नया भी नहीं है। पुराना ही

14:07है। अच्छा ला पर आ गया बेटा फिर वही बात।

14:12व्हाई ही चोज़ गोल्ड फॉइल? क्योंकि गोल्ड

14:14भाई बहुत मिलिएबल और डप्टाइल है। बहुत ही

14:16पतला होता है उसकी परत। तो इसलिए अल्फा

14:19पार्टिकल्स ईज़ली उससे पास कर जाएंगे।

14:21इंपॉर्टेंट है ये क्वेश्चन। व्हाई गोल्ड

14:23वाज़ चूज़न? अब यार इनका मेजर टारगेट था

14:27थॉमसन को फेल करना। अब थॉमसन भाई साहब

14:30क्या कह रहे थे? इनकी बात सुनो। थॉमसन ने

14:32क्या कहा था? थॉमसन जी तो एक ही बीच चीज

14:34के पीछे पड़े थे। एटम इज़ अ स्फीयर ऑफ़

14:36पॉजिटिव चार्ज। एटम इज़ अ स्फीयर ऑफ़

14:38पॉजिटिव चार्ज। तो अगर 2 मिनट के लिए मैं

14:41थॉमसन की बात को सच्चा मानूं। याद है ना

14:43वो? मैंने आपसे एक डायग्राम बनवाया था।

14:45थॉमसन के हिसाब से एटम कैसा बनता है? ये

14:47देखना। हमने एक ये डायग्राम सा बनाया था

14:49उस दिन वाइट बोर्ड पे कि थॉमसन जी के

14:51हिसाब से तो कुछ ऐसा सीन है भाई कि ये एटम

14:54है इसके अंदर

14:58इलेक्ट्रॉन्स इधर-उधर इधर उधर इधर उधर

15:00इधर-उधर है प्रेजेंट है थॉमसन जी के हिसाब

15:03से। अब हुआ क्या देखते हैं।

15:07पॉजिटिव चार्ज थॉमसन जी ने बोला था पूरे

15:09एटम में फैला हुआ है।

15:12ठीक है? तो साइंटिस्ट ने एक्सपेक्ट करा

15:15था। साइंटिस्ट ने एक्सपेक्ट करा था कि यार

15:17अगर पॉजिटिव चार्ज इतना ज्यादा है तो

15:20हमारे ज्यादातर अल्फा पार्टिकल्स जो है वो

15:22सीधे जाने चाहिए।

15:24कुछ अल्फा पार्टिकल्स थोड़े बहुत

15:26डिफ्लेक्ट होते हैं। बहुत बड़ा डिफ्लेक्शन

15:28पॉसिबल ही नहीं है। बट हुआ क्या? एक्चुअली

15:32हुआ क्या? साइंटिस्ट ने एक्सपेक्ट करा था

15:34कि थॉमसन जी क्या कह रहे हैं? थॉमसन जी कह

15:36रहे हैं कि एटम के अंदर एटम इज अ स्फीयर

15:38ऑफ़ पॉजिटिव चार्ज। एटम इज़ अ स्फीयर ऑफ़

15:40पॉजिटिव चार्ज। थॉमसन जी के हिसाब से एटम

15:42में तो पॉजिटिव ही पॉजिटिव चार्ज है। तो

15:45उनके हिसाब से बहुत सारे पार्टिकल्स को

15:48सीधा जाना चाहिए था। कुछ पार्टिकल्स थोड़े

15:50बहुत टेढ़े-मेढ़े हो सकते थे और बड़े-बड़े

15:54डिफ्लेक्शन वाले पार्टिकल्स तो

15:55एक्सपेक्टेड ही नहीं थे कि बहुत बड़ा कोई

15:56मेजर पार्टिकल ऐसे गया और ऐसे वापसी आ

15:59लिया यू टर्न ही मार गया। ऐसा तो पॉसिबल

16:01ही नहीं था। हुआ क्या? जब ये एक्सपेरिमेंट

16:04किया गया। एक्चुअल ऑब्जरवेशंस क्या निकली?

16:08रिजल्ट्स हैरानी वाले थे। काफी पार्टिकल्स

16:12तो बिल्कुल सही बात थी। सीधा चले गए। वो

16:14हमने अभी डायग्राम में भी देखा। बहुत सारे

16:15अल्फा पार्टिकल्स सीधा चले गए। लेकिन कुछ

16:19पार्टिकल्स ऐसे थे जो बहुत बड़े-बड़े

16:21एंगलों से टेढ़े-मेढ़े हो गए। अच्छा आपको

16:24नहीं यकीन ये देखिए। एक बारी के लिए सेकंड

16:27पॉइंट याद रखेंगे। सम अल्फा पार्टिकल्स वर

16:30डिफ्लेक्टेड थ्रू लार्ज एंगल्स।

16:33ये देखो वापस आ गए हम यहां पर।

16:36देखना जरा

16:40एंगल अच्छा खासा चेंज हुआ। यह देखो कितना

16:43ज्यादा एंगल चेंज हो गया। ओ भाई जी ये तो

16:46बिल्कुल यू टर्न सा ही मार गया। कुछ

16:49पार्टिकल्स का एंगल बहुत वाद चेंज आया है।

16:51जिसे कहते हैं ना आपकी भाषा में खासा चेंज

16:54आ गया। अच्छा खासा चेंज आया है। वो चीज

16:55दिखी कि अच्छा खासा चेंज आया। एंगल तो

16:58देखो ऐसे रे आई और ऐसे यूटर्न सी मार ली।

17:02थॉमसन जी तो कह रहे थे पॉजिटिव चार्ज है।

17:04मतलब ज्यादातर सीधी जानी चाहिए। ज्यादातर

17:06सीधी गई। बट बहुत ज्यादा मुड़ गई यार ये

17:09वाली रे। देखो ये रे कितनी ज्यादा यूटर्न

17:11मारी। टेढ़ी होगी, मेढ़ी होगी। ऐसा क्यों हो

17:14रहा है? अगर आपके हिसाब से थॉमसन जी के

17:16हिसाब से पॉजिटिव चार्ज है तो सीधी जानी

17:18चाहिए थी। ऐसे सारी री ऐसी जानी चाहिए थी।

17:20थोड़ी बहुत टेढ़ी हो जाती। इतना ज्यादा

17:22क्या हो गया भाई?

17:25और कुछ पार्टिकल्स तो बिल्कुल ही बाउंस

17:27बैक। वो जो एक कभी किनारे से भी बनाया था

17:29ना कि बिल्कुल ऐसा ही हो गया था। यूटर्न

17:30ही मार गया था। ऐसे से भी नजर आए।

17:34अच्छा ये जो डिफ्लेक्शन कराई थी ना

17:36इन्होंने जो टेढ़ा-मेढ़ा हो रहा था इसको

17:37स्कैटरिंग भी बोला गया। इस एक्सपेरिमेंट

17:39को याद रखना। अल्फा रे, अल्फा पार्टिकल

17:41स्कैटरिंग एक्सपेरिमेंट भी बोलते हैं।

17:43भैया ये क्या है बेटा? ये ना आगे मैथ्स

17:45में पढ़ोगे। अल्फा को ना मैथ्स के अंदर

17:49ऐसे डिनोट किया जाता है। इसलिए ये वाला

17:51साइन बनाया हुआ है।

17:53अब आगे की बात एक्सपेरिमेंट ने क्या

17:57दिखाया भाई? भाई जो एक्सपेरिमेंट के

17:59रिजल्ट आ रहे थे ना थॉमसन के मॉडल को वो

18:02समझा ही नहीं पाए।

18:04थॉमसन भाई से जब पूछा गया सिंपल सी बात है

18:07यार। तो सिंपल बात है। मजे लेने के लिए

18:08थॉमसन के पास गए। उससे पूछा गया कि बाऊजी

18:12आप तो कह रहे थे कि क्या होगा? एटम

18:16पॉजिटिव चार्ज है। कोई ज्यादातर रे सीधी

18:20जाएंगी। कोई टेढ़ी-मेढ़ी ज्यादा होएगी नहीं।

18:23तो क्यों कुछ पार्टिकल्स बड़े-बड़े एंगलों

18:26से बदले? थॉमसन जी से पूछा गया कि क्यों

18:29भाई जी कुछ पार्टिकल्स इतने बड़े-बड़े

18:31एंगलों से टेढ़े-मेढ़े हो गए? थॉमसन भाई चुप

18:33कोई जवाब नहीं। ठीक है?

18:37क्यों कुछ पार्टिकल्स डिफ्लेक्ट ही नहीं

18:39हुए? सीधे निकल गए। थॉमसन भाई अगेन चुप।

18:41कोई जवाब नहीं क्योंकि दोनों बातें एक

18:43दूसरे को काट जाती। थॉमसन भाई चुप। तो

18:46इसलिए एक मीम दिखाता हूं आपको। रुको।

18:52देखिए जरा इसको। ये थॉमसन भाई आगे जा रहे

18:55हैं। जब वो जवाब नहीं दे पाए ना तो इस

18:58तरीके से बाकी लोग उनके पीछे पड़े थे।

19:00जैसा इस मीम में दिखाया जा रहा है। ध्यान

19:02से देखिए जरा। यह यह हाल हुआ।

19:06कंक्लूजन ऑफ द टॉपिक क्या है भाई? अभी

19:08देखना जरा।

19:11सिंपल सी बात है यार। इसको इतना जलील

19:13क्यों किया गया थॉमसन भाई को? उसने कहा था

19:15एटम के अंदर एटम इज पॉजिटिव चार्ज का

19:18स्फीयर। पॉजिटिव चार्ज का स्फीयर। ठीक है

19:20भाई? पॉजिटिव चार्ज का स्फीयर।

19:22उम्मीद रखी गई थी। साइंटिस्ट ने एक्सपेक्ट

19:25करा था। यह देखो ये लाइन दोबारा पढ़ो कि

19:27अगर थॉमसन जी आप कह रहे हो कि एटम जो है

19:30वो पॉजिटिव चार्ज का है। पूरे एटम में

19:33पॉजिटिव चार्ज है। पॉजिटिव चार्ज है। तो

19:35ज्यादातर पार्टिकल्स जो थे ना मोस्ट अल्फा

19:38पार्टिकल्स टू पास स्ट्रेट थ्रू द गोल्ड

19:40फॉइल। ज्यादातर पार्टिकल स्ट्रेट जाने

19:42चाहिए थे। ये हुआ भी। ज्यादातर पार्टिकल

19:45स्ट्रेट गए भी। एग्री विद दिस पॉइंट। ओके?

19:48ठीक है? पहले पॉइंट में मेरे को कोई

19:49दिक्कत नहीं है। दूसरा पॉइंट कुछ

19:51पार्टिकल्स जो थे वो थोड़ा बहुत टेढ़े-मेढ़े

19:54होने चाहिए थोड़ा बहुत इस लाइक जैसे मैं

19:55रे बना रहा हूं ना ऐसे हो गया हल्का सा

19:58ऐसे हो गया सीधी की जगह ऐसे रे चलेगी

20:00थोड़ी बहुत ही इतना टेढ़ा होना चलता था

20:03कोई बहुत बड़ी डिफ्लेक्शन की उम्मीद नहीं

20:06थी अगर पॉजिटिव चार्ज से भरा हुआ है ना

20:08एटम लेकिन हुआ क्या एक्चुअल ऑब्जरवेशंस

20:10इतनी सरप्राइजिंग निकली पहला पॉइंट तो ठीक

20:12था ज्यादातर पार्टिकल सीधे चले गए लेकिन

20:15जो मुड़े ना वो बहुत ज्यादा ही मुड़ गए

20:17सेकंड पॉइंट देखो कुछ पार्टिकल्स बहुत

20:20बड़े-बड़े एंगलों पे मुड़े और कुछ तो बिल्कुल

20:22ही बाउंस बैक मार गए जरा एक डायग्राम पे

20:25वापस आते हैं हम।

20:27देखो मैं बेफालतू में बंदे को जलील नहीं

20:29करूंगा। ज्यादातर पार्टिकल स्ट्रेट गए

20:32हैं। ये देखना अभी

20:37ये देखो ज्यादातर पार्टिकल्स ना ये

20:40स्ट्रेट गए हैं। ये गए। पहला पॉइंट ओके

20:43था। काफी पार्टिकल स्ट्रेट गए। इस पॉइंट

20:45पे मैं कोई गाली नहीं दूंगा भाई थॉमसन जी

20:47को। बिल्कुल ठीक है कि जब हमने ऐसे रेस

20:50मारी तो बहुत सारे पार्टिकल स्ट्रेट गए भी

20:52हैं। ठीक है? ओके रिपोर्ट थॉमसन जी ने कहा

20:56अब थॉमसन जी कह रहे थे कि यार ये तो

20:58पॉजिटिव स्फीयर है पॉजिटिव स्फीयर है तो

21:02थोड़ा बहुत डिफ्लेक्शन आना चाहिए था यार

21:04अगर थोड़ा बहुत डिफ्लेक्शन आना चाहिए था

21:07क्या तुम इसको थोड़ा बहुत बोलते हो क्या

21:10तुम इसको थोड़ा बहुत बोलते हो हैं ये

21:14थोड़ा बहुत है इतना बड़ा डिफ्लेक्शन कहां

21:17से आ गया अगर ये सारा बराबर के चार्ज से

21:19बना हुआ है एटम मतलब कुछ गड़बड़ है और चलो

21:23मैं कह रहा फिर मान ली आपकी बात। आप कहते

21:25हो यह थोड़ा बहुत है। बेटा फिर मुझे एक

21:27बार बता दो क्या ये थोड़ा बहुत लग रहा है

21:30आपको? ये ये जो यू टर्न ही मार गया। ये जो

21:34आता आता यू टर्न मार गया। क्या ये थोड़ा

21:36बहुत डिफ्लेक्शन है? थॉमसन जी अभी तो आप

21:38कह रहे थे कि एटम पूरा का पूरा भर रखा है

21:41पॉजिटिव चार्ज से। अंदर से एक जैसा है। तो

21:43फिर ये इतना बड़ा डिफ्लेक्शन कहां से आ

21:45गया? थोड़ा बहुत समझ आता। ये कहां से हो

21:47गया? यहां इसको गाली पड़ी। जवाब नहीं।

21:49थॉमसन चुप। फिंगर ऑन द लिप्स। कोई जवाब

21:52नहीं था भाई जी पे

21:54तो उनका मॉडल फेल हुआ फिर

21:59तो क्या हुआ भाई

22:03थॉमसन के मॉडल को रिजेक्ट कर दिया गया और

22:07इसके बाद एक नई अंडरस्टैंडिंग हुई आगे आगे

22:10भाई कुछ क्वेश्चंस की बात करें क्वेश्चंस

22:13अ

22:14किसने करा गोल्ड फॉइल एक्सपेरिमेंट यार

22:16191 में हुआ था पहली बार अच्छा अर्नेनेस्ट

22:20रुदरफोर्ड न्यूजीलैंड के बंदे थे जी इनके

22:22ना स्टूडेंट्स समझ लो इनके अंडर काम करने

22:26वाले समझ लो ठीक है गाइजर और मार्शल

22:29इन्होंने करा था अल्फा पार्टिकल्स क्या

22:32होते हैं कुछ रेडियोएक्टिव एलिमेंट्स कुछ

22:35ना कुछ पॉजिटिवली चार्ज रेडिएशंस छोड़ते

22:37हैं वो अल्फा पार्टिकल्स होते हैं

22:41थॉमसन के हिसाब से क्या एक्सपेक्ट किया था

22:43थॉमसन के हिसाब से तो ये था ना ये देखो

22:46फिर से बेचारा थॉमसन जलील हो गया इस

22:48क्वेश्चन में देखो

22:51व्हाट वास एक्सपेक्टेड फ्रॉम द गोल्ड फॉइल

22:53एक्सपेरिमेंट अकॉर्डिंग टू थॉमसन मॉडल?

22:55थॉमसन जी के हिसाब से क्या था? थॉमसन जी

22:58के हिसाब से तो पॉजिटिव चार्ज पूरे एटम

23:00में भर रखा है। थॉमसन ने तो एक ही बात करी

23:02थी। पूरा एटम पॉजिटिवली चार्ज्ड स्फीयर

23:05है। पूरा एटम पॉजिटिवली चार्ज स्फीयर है।

23:07तो ज्यादातर पार्टिकल्स को तो सीधा निकल

23:09जाना था। और कुछ अगर थोड़ा बहुत मुड़ते भी

23:13तो छोटा-मोटा डिफ्लेक्शन आती। थॉमसन जी के

23:16हिसाब से तो ये एक्सपेक्ट करा था। थॉमसन

23:18को जलील ही तब किया गया जब नो डाउट बहुत

23:20सारे पार्टिकल सीधा तो निकल गए लेकिन जो

23:22टेढ़े-मेढ़े हुए ना वो इतनाइतना नहीं हुए वो

23:25ऐसे ही टेढ़े-मेढ़े हो गए थे कि पूरा

23:26टेढ़े-मेढ़े अच्छे खासे लेवल के ही हो गए

23:29मतलब एटम के अंदर कुछ था जो बता नहीं पाया

23:31वो

23:33अच्छा क्वेश्चन इंपॉर्टेंट क्या

23:35ऑब्जरवेशंस थी गोल्ड फॉइल एक्सपेरिमेंट की

23:37एक्चुअली हुआ क्या थॉमसन की ऐसी की तैसी

23:39उसने जो बोला छोड़ो हुआ क्या था ये बात सच

23:42है कि बहुत सारे पार्टिकल सीधा पास हो गए

23:44थे कुछ पार्टिकल्स बहुत बड़े-बड़े एंगलों से

23:46मुड़े थे और बहुत रेयर पार्टिकल ऐसे थे जो

23:49बाउंस बैक होते हुए नजर आए। बेटा सेकंड और

23:52थर्ड पॉइंट में फर्क क्या है?

23:54लार्ज एंगल मतलब ये बाउंस बैक का मतलब

23:57होता है ऐसे गया ना तो ऐसे ही यू टर्न मार

24:00के आ गया ऐसे। दोबारा देखो आप डायग्राम।

24:04लो भाई देख लो।

24:07बहुत सारे पार्टिकल्स तो दिख रहे हैं ना?

24:08स्ट्रेट चले गए।

24:11ये पहला पॉइंट हो गया कि मोस्ट ऑफ़ द

24:13पार्टिकल्स पास स्ट्रेट। और यह यह आपका

24:16दूसरा पॉइंट हो गया। सम पार्टिकल्स लार्ज

24:19एंगल पर डेविएट हो गए। और बहुत रेस्ट ऑफ द

24:23रेयर कोई पार्टिकल ऐसे भी थे। यहां पे बना

24:24नहीं हुआ। मैं बनाता हूं

24:27जो जैसे देखना अगर ऐसे आया है ना पार्टिकल

24:32ऐसे आया है। तो बीच में से यू टर्न मार

24:35गया वापस। यू टर्न वापस ऐसे गो बैक। बहुत

24:40रेयर ऐसा पार्टिकल भी था एक।

24:46अच्छा क्वेश्चन है व्हाट इज मेंट बाय

24:47स्कैटरिंग ऑफ अल्फा पार्टिकल्स क्या होता

24:49है भाई ये जो डिफ्लेक्शन हुई थी ना अल्फा

24:52पार्टिकल्स की डिफ्लेक्शन मतलब अपने राह

24:55से इधर-उधर हो जाना अपने ओरिजिनल स्ट्रेट

24:57रास्ते से जो अल्फा पार्टिकल इधर-उधर हो

24:59गए थे टेढ़ा-मेढ़ा हो गए थे इसी को

25:01स्कैटरिंग बोला गया है जब वो गोल्ड फॉइल

25:04से पास हुए थे और वो जो टेढ़े-मेढ़े हो गए

25:06ना अल्फा पार्टिकल्स ऐसे जाते-जाते ऐसे हो

25:08गए ऐसे हो गए इसको स्कैटरिंग बोला गया है

25:12थॉमसन का मॉडल फेल क्यों हो गया गोल्ड

25:14फॉइल का एक्सपेरिमेंट समझाने के लिए? ये

25:16आंसर देखिए।

25:18थॉमसन के मॉडल ने फिर वही बात अस्यूम किया

25:20था कि पॉजिटिव चार्ज ही पॉजिटिव चार्ज है।

25:22भाई जी वो समझा नहीं पाया था कि क्यों कुछ

25:25अल्फा पार्टिकल्स अंडरवेंट कितना प्यारा

25:28वर्ड लिखा हुआ है। लार्ज एंगल डिफ्लेक्शन

25:30और क्यों बहुत सारे बिना डिफ्लेक्शन के

25:33चले गए। जब थॉमसन देखो ना सिंपल सी बात है

25:35यार। थॉमसन कह रहा है एटम पॉजिटिव चार्ज

25:38से भरा हुआ है। एटम में पॉजिटिव ही

25:39पॉजिटिव चार्ज है। यार फिर या तो सबके साथ

25:42सेम चीज हो ना। या तो सारे सीधा निकल जाते

25:44या सारे मुड़ जाते। अगर उस एटम में एक ही

25:46जैसा चार्ज है। सिर्फ और सिर्फ पॉजिटिव

25:49चार्ज है तो क्यों भाई कुछ इतने बड़े एंगल

25:51पे बदल गए और बहुत सारे सीधा चले गए। कोई

25:54एक चीज होती ना। या तो सारे सीधा पास हो

25:56जाते या सारे मुड़ जाते। मतलब एक से

25:59ज्यादा कोई चीजें थी अंदर जो वो तू नहीं

26:01समझा पा रहा था। थॉमसन के मॉडल ने तो

26:03अस्यूम किया था ना कि पॉजिटिव चार्ज पूरे

26:05एटम में फैला हुआ है। थॉमसन तो बोल ही रहे

26:07था कि एटम इज अ स्फीयर ऑफ पॉजिटिव चार्ज।

26:10एटम इज अ स्फीयर ऑफ़ पॉजिटिव चार्ज।

26:15वो नहीं समझा पाया था कि क्यों काफी अल्फा

26:18पार्टिकल्स अंडरवेंट चले गए बहुत बड़े-बड़े

26:20एंगल डिफ्लेक्शंस पे और क्यों बहुत सारे

26:22सीधा निकल गए। क्योंकि ये बात एक थी नहीं।

26:25दोनों बातें रिलेटेबल है ही नहीं ना। या

26:27तो सारे के सारे सीधा जाते या सारे के

26:29सारे मुड़ जाते। टू कह रहा है अंदर से एक

26:31जैसा एटम तो फिर अलग-अलग रिजल्ट क्यों आ

26:34रहे हैं भाई? अच्छा गोल्ड फॉइल

26:36एक्सपेरिमेंट जरूरी क्या था भाई? एक तो

26:38थॉमसन की बेज़ती के लिए थॉमसन मॉडल

26:40इनएडीिक्वेट था। गोल्ड फॉइल की वजह से ही

26:42पता लगा था गोल्ड फॉइल के एक्सपेरिमेंट की

26:44वजह से कि थॉमसन मॉडल आधा अधूरा था। जिसके

26:47बाद एक नए मॉडल की डिस्कवरी हुई। अब कुछ

26:50इंपॉर्टेंट फैक्ट्स क्या है भाई? इस

26:52वीडियो को खत्म करेंगे। 191 में

26:54एक्सपेरिमेंट हुआ। इससे पहले थॉमसन का राज

26:56चल रहा था। ठीक है? साइंटिस्ट कौन थे?

26:59गाइजर और मारडन जो अर्नेस्ट रुदरफोर्ड के

27:02अंडर काम कर रहे थे। अल्फा पार्टिकल्स का

27:04इन्होंने यूज़ करा। अभी भी अगर पावनी को

27:06नहीं समझ आया अल्फा पार्टिकल्स क्या होते

27:08हैं तो कुछ रेडियोएक्टिव एलिमेंट्स कुछ

27:10रेडिएशंस छोड़ते हैं। उसको अल्फा पार्टिकल

27:12कहा गया है। अल्फा पार्टिकल पॉजिटिवली

27:14चार्ज्ड थे। इनका क्या था? टारगेट की एक

27:18बहुत पतली सी गोल्ड फॉइल ले। क्या रिजल्ट

27:20निकला? बहुत सारे पार्टिकल्स सीधा चले गए।

27:23कुछ पार्टिकल्स बहुत बड़े-बड़े एंगलों पे

27:25डिफ्लेक्ट हो गए। टेढ़ा-मेढ़ा हो गए। बहुत

27:27रेयर पार्टिकल बाउंस बैक ही मार गए। बाउंस

27:29बैक का मतलब ऐसे गए और ऐसे ही वापसी हो

27:32लिए। यू टर्न मार गए। इनकी डिफ्लेक्शन को

27:35स्कैटरिंग कहा गया और दिक्कत क्या निकली?

27:37थॉमसन का मॉडल समझा नहीं पाया। इस वीडियो

27:40में इतना ही भाई।

More from Anish Dhammi

Recently added transcripts

Browse the whole transcript library

This transcript was generated from the captions YouTube publishes for this video. Get the transcript of any YouTube video atfreeyoutubetranscribe.com, free, unlimited, no sign-up.