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0:01हां जी ऋषभ आज हम कॉस्ट अकाउंटिंग का एक
0:04टॉपिक कवर करेंगे। कॉस्ट अकाउंटिंग का
0:06चैप्टर है। चैप्टर का नाम ही ओवरहेड्स है।
0:09ओवरहेड्स सिंपली इसके अंदर अगर हम एक वर्ड
0:12पर फोकस करें दैट इट्स हेड्स।
0:16कॉस्ट की अलग-अलग हेडिंग्स होती है।
0:18अलग-अलग हेडिंग्स जिसके अंदर अलग-अलग
0:21कॉस्ट्स को डाला जाता है। ठीक है? अगर हम
0:24एक बिजनेस कर रहे हैं तो सिर्फ एक ही
0:25प्रकार की कॉस्ट नहीं है। हमारे पास
0:27अलग-अलग प्रकार की कॉस्ट है। फैक्ट्री में
0:30जो अपने वर्कर्स को वेजेस सैलरी देने हैं
0:33वो भी कॉस्ट है। फैक्ट्री में जो लाइट पिन
0:35चलेगी, बिजली चलेगी वो भी कॉस्ट है।
0:37मशीनंस को चलाने की भी कॉस्ट है। फैक्ट्री
0:39का रेंट भी कॉस्ट आएगी और ऐसी बहुत है।
0:43इवन कुछ कॉस्ट तो ऐसी है जो अनअवॉयडेबल भी
0:46है कि अगर हमारा कोई काम चल रहा है मान लो
0:50उसके बीच में मान लो लेट इट बी हमारा कोई
0:52ऑइल से रिलेटेड काम है या कुछ सीमेंट
0:56इंडस्ट्री समझ लो ईंटों की इंडस्ट्री समझ
0:59लो तो वेस्टेज वगैरह भी होगी थोड़ा बहुत
1:02चूरा बनेगा पेट्रोलियम का काम है तो
1:04पेट्रोल थोड़ा बहुत उड़ेगा भी इवापोरेट भी
1:07होगा तो अलग-अलग कॉस्ट को कहां डाला जाता
1:09है अब ध्यान से देखना बड़ा सिंपल सा टॉपिक
1:12इंट्रोडक्शन।
1:14इंट्रोडक्शन क्या है? हर बिजनेस में बहुत
1:17सारे खर्चे होते हैं जो डायरेक्टली कनेक्ट
1:20नहीं होते प्रोडक्शन से। बट ये बहुत जरूरी
1:22होते हैं इनको ध्यान में रखना ताकि बिज़नेस
1:25अच्छे से चलते रहे और आपको लॉसेस ना हो।
1:27बेफालतू में। क्या टॉपिक है? हर बिज़नेस
1:30में इन एव्री बिज़नेस। देयर आर मेनी
1:32एक्सपेंसेस व्हिच आर नॉट डायरेक्टली
1:34कनेक्टेड विथ द प्रोडक्शन ऑफ़ गुड्स। हर
1:37बिजनेस में बहुत सारे ऐसे खर्चे होते हैं
1:40जो डायरेक्टली कनेक्ट नहीं होते हमारे
1:42गुड्स की प्रोडक्शन से। बट ये वाले खर्चे
1:45जरूरी बहुत होते हैं। नेसेसरी होते हैं,
1:47जरूरी होते हैं जिससे हमारा बिजनेस अच्छे
1:49से चलता रहे। इन्हीं खर्चों को ओवरहेड्स
1:52बोलते हैं। एग्जांपल के तौर पर अब अगर हम
1:55फैक्ट्री में प्रोडक्शन कर रहे हैं भाई तो
1:57फैक्ट्री का रेंट भी जाएगा। फैक्ट्री के
2:00अंदर जो इतनी हैवी हेवी मशीनें चल रही है
2:02उसके लिए पावर लाइट भी लगेगी। जो
2:04सुपरवाइजर वर्कर्स पर नजर रख रहा है उसकी
2:07सैलरी भी देनी पड़ेगी। मशीन थोड़े टाइम
2:09में डेप्रिशिएट भी होगी। डेप्रिशिएट का
2:11मतलब है उसकी वैल्यू भी कम होएगी। ये हमने
2:13पहले भी पढ़ा हुआ है। डेप्रिसिएशन का मतलब
2:15क्या होता है? वैल्यू कम होना। याद करो जब
2:18हम ऑफलाइन में पढ़ रहे थे तो आपके रूम में
2:20आपको बताया था ना कि आपका जो एसी
2:2410 साल पहले जिस रेट पे आया था। आज उतनी
2:27वैल्यू थोड़ी रह गई है उसकी। डेप्रिशिएट
2:29तो हो रहा है। वैल्यू तो घट रही है।
2:32अब मीनिंग
2:34ओवरहेड्स क्या होते हैं? ओवरहेड्स का मतलब
2:37है सारी इनडायरेक्ट कॉस्ट जो डायरेक्टली
2:40इनडायरेक्ट बोल इस ले रहे हैं जिसको
2:41डायरेक्टली हम किसी एक प्रोडक्ट पे चार्ज
2:43नहीं कर सकते। किसी एक जॉब पे चार्ज नहीं
2:45कर सकते। किसी एक डिपार्टमेंट पे चार्ज
2:47नहीं कर सकते। ये ओवरहेड्स होते हैं।
2:50एग्जांपल के तौर पे भाई अब अगर एक वर्कर
2:53की मैं सैलरी की बात करूं। मैं मान लो या
2:56एक वर्कर के मान लो सिर्फ वेजेस की बात
2:58करूं। एक वर्कर है जिसको पर डे हम ₹500
3:00देते हैं। तो क्या वो ₹500 मैं एक ही
3:03प्रोडक्ट में डाल सकता हूं? नहीं ना भाई।
3:05उस 500 के बदले तो वो कई सारे प्रोडक्ट्स
3:07बनाएगा। जिस मशीन पे प्रोडक्शन हो रही है
3:10वो मशीन मान लो 20 लाख की आई। एक ही
3:13प्रोडक्ट में थोड़ी चार्ज कर लूंगा मैं उस
3:14मशीन को उसके खर्चे को। तो बहुत सारे
3:17प्रोडक्ट्स में जाएंगी ना। तो यही तो बोला
3:20कि ओवरहेड्स क्या है? सारे इनडायरेक्ट
3:22खर्चे। ओवरहेड मीन ऑल इनडायरेक्ट कॉस्ट्स
3:25व्हिच कैन नॉट बी डायरेक्टली आइडेंटिफाइड
3:27विद अ पर्टिकुलर प्रोडक्ट, जॉब और
3:30डिपार्टमेंट। मतलब वो सारे इनडायरेक्ट
3:32छोटे-छोटे खर्चे जो डायरेक्टली किसी एक
3:34जगह पर नहीं जाते
3:36वो चीज।
3:39यही कॉस्ट, यही खर्चे हमारी ओवरऑल
3:41प्रोडक्शन को सपोर्ट कराते हैं और बिजनेस
3:43के ऑपरेशंस को चलवाते हैं। तो हम कह सकते
3:46हैं कि सारे खर्चे मेन खर्चों के अलावा ऑल
3:50एक्सपेंसेस अदर दन
3:53डायरेक्ट मटेरियल, डायरेक्ट लेबर और
3:56डायरेक्ट एक्सपेंसेस ओवरहेड कहलाते हैं।
3:58क्योंकि ओवरहेड का मतलब यही है भाई सारे
4:01इनडायरेक्ट खर्चे जो डायरेक्ट नहीं है। तो
4:04जितने भी खर्चे हमारे पास हो रहे हैं
4:06हमारी फैक्ट्री में, हमारे ऑफिस में
4:08डायरेक्ट मटेरियल के अलावा, डायरेक्ट लेबर
4:11के अलावा और डायरेक्ट खर्चों के अलावा अगर
4:14डायरेक्ट वाले आपने मटेरियल, लेबर और
4:16खर्चे काट दिए तो इनडायरेक्ट जितने भी बचे
4:18वो सारे क्या कहलाएंगे? ओवरहेड। एग्ज़ांपल
4:20से समझो थोड़ा और क्लियर होगा।
4:23एग्ज़ांपल के तौर पे भाई
4:30रेंट ऑफ फैक्ट्री और ऑफिस। अब इसको
4:33इनडायरेक्ट क्यों बोला जा रहा है? क्योंकि
4:35मैं किसी एक प्रोडक्ट में थोड़ी चार्ज कर
4:37सकता हूं इसको। भाई हर एक प्रोडक्ट में
4:38इसका कहीं ना कहीं हिस्सा आ जाएगा।
4:40इनडायरेक्टली। मैनेजर की सैलरी एक
4:42प्रोडक्ट से थोड़ी कवर होती है। सुपरवाइजर
4:44की सैलरी किसी एक प्रोडक्ट में थोड़ी ऐड
4:46करी जाती है। मशीन की डेप्रिसिएशन होना,
4:48फर्नीचर की वैल्यू गिरना, स्टेशनरी के
4:51खर्चे, टेलीफोन एक्सपेंसेस, बिजली के
4:53चार्जेस, ऐड करने के खर्चे, रिपेयर और
4:55मेंटेनेंस ये कभी भी किसी एक से चार्ज
4:59थोड़ी होते हैं। चलो दूसरा एग्जांपल समझ
5:01लो आप। फैक्ट्री के अलावा जरा सर्विस
5:03कॉस्टिंग के एग्जांपल से समझा देता हूं
5:04मैं आपको। सर्विस तो आपने थोड़ा सा पढ़ा
5:06हुआ है ना? मुझे बताओ आपने सर्विस
5:08कॉस्टिंग में ट्रांसपोर्ट कॉस्टिंग पढ़ा
5:10था। अगर आज हम लोग एक बस खरीद लाए नई बस
5:14एक बस ले आए वो बस आई मान लो ₹40 लाख की
5:19तो क्या जो पहले 10 पैसेंजर बैठेंगे उनसे
5:21ही ले लेंगे क्या वो 44 लाख करके ₹40 लाख
5:24नहीं ना वो तो धीरे-धीरे एडजस्ट होगा
5:28धीरे-धीरे उसका खर्चा जो है वो बाकी लोगों
5:30के फेयर चार्जेस में से निकलेगा जो भाड़ा
5:32होगा उसमें से निकलेगा वो चीज होगी
5:35क्लासिफिकेशन ऑफ़ ओवरहेड्स में मैं आपको
5:37रिकमेंड करूंगा आप ये वाला फ्लो चार्ट ना
5:39बनाना आप अपना खुद का बनाना। छोड़ दो
5:42इसको। यह मत बनाना। आप खुद से फ्लो चार्ट
5:45बनाना अपना।
5:48अब ऑन द बेसिस ऑफ़ फंक्शनंस। फंक्शन जो जो
5:53आपके ऑर्गेनाइजेशन में परफॉर्म हो रहे
5:55हैं। कैसे-कैसे ओवरहेड्स होते हैं? एक तो
5:58फैक्ट्री ओवरहेड या मैन्युफैक्चरिंग
6:00ओवरहेड। फैक्ट्री ओवरहेड को
6:02मैन्युफैक्चरिंग ओवरहेड क्यों बोला गया
6:03है? क्योंकि फैक्ट्री में ही तो प्रोडक्शन
6:05होती है। फैक्ट्री में ही तो
6:06मैन्युफैक्चरिंग होती है। ये वो
6:09इनडायरेक्ट खर्चे हैं जो फैक्ट्री से या
6:11प्रोडक्शन से रिलेटेड है। जैसे कि
6:14फैक्ट्री का किराया जो जाएगा। फैक्ट्री
6:16में जो लाइटनिंग, पावर, इलेक्ट्रिसिटी यूज़
6:18होगी। फैक्ट्री के जो सुपरवाइजर होंगे
6:20उनकी सैलरी।
6:22नेक्स्ट आ जाता है
6:24ऑफिस या एडमिनिस्ट्रेशन ओवरहेड। अगर आपकी
6:27फैक्ट्री नहीं है, आपका ऑफिस वगैरह कुछ है
6:30तो यह वो वाले खर्चे हैं जो जनरल
6:32मैनेजमेंट से और ऑफिस वर्क से रिलेटेड
6:34होते हैं। जैसे ऑफिस में जो एम्प्लाइज काम
6:36कर रहे हैं उनकी हर महीने सैलरीज आएगी।
6:38स्टेशनरी लगेगी ऑफिस में। ऑफिस का रेंट
6:41लगेगा। ये सब चीजें फिर बेचने के जो खर्चे
6:44होते हैं सेलिंग ओवरहेड कहलाते हैं।
6:48ऐसे खर्चे, ऐसे एक्सपेंसेस जो गुड्स की
6:51सेलिंग से रिलेटेड होते हैं। जैसे हम ऐड
6:53करवाएंगे ऐड का खर्चा। सेल्स करते टाइम
6:56कमीशन देंगे। उसका खर्चा, पैकेजिंग
6:58एक्सपेंसेस यह सब चीजें असली कॉस्ट
7:01अकाउंटिंग तो यही है ना अगर हम इन सबको
7:03कंसीडर करें क्योंकि ये भी तो खर्चे हैं।
7:05ये भी तो हमारे प्रॉफिट्स को कम कर रहे
7:06हैं। इनको भी कहीं ना कहीं तो कंसीडर करना
7:08है। अब
7:12एग्जांपल के तौर पर देख लो कि जैसे हम फॉर
7:16एग्जांपल के तौर पे
7:18अ हमने हमारा कोई प्रोडक्ट है। हमने कोई
7:21ऐड कराई।
7:23मान लो मैंने किसी सेलिब्रिटी से ऐड करा
7:25ली। मैं पढ़ा रहा हूं और मैंने किसी
7:27सेलिब्रिटी से
7:30₹ लाख खर्च के ऐड कराई। तो क्या ₹5 लाख
7:33मैं एक ही बच्चे से वसूल लूंगा क्या फीस
7:34में? ऑब्वियसली कोई देगा भी नहीं भाई। वो
7:37धीरे-धीरे मेरे को एडजस्ट करने पड़ेंगे।
7:39बहुत सारी फीसेस में बांट बांट के वो
7:40धीरे-धीरे कवर होएगा वो चीज। ये चीज। इसके
7:44अलावा डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ ओवरहेड्स।
7:47डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ ओवरहेड्स क्या होता है
7:48भाई?
7:51कुछ खर्चे जो डिस्ट्रीब्यूशन यानी डिलीवर
7:54करने से रिलेटेड होते हैं कि जब हमने
7:56कस्टमर को गुड्स डिलीवर करने हैं तो उसके
7:58जो खर्चे आएंगे जैसे कि
8:01कैरज आउटवर्ड वर्ड हटा देना कोई दिक्कत
8:04नहीं है भाई ये आउटवर्ड वर्ड मैं ही काट
8:05देता हूं आपके लिए
8:10कैरज और फ्रेट दोनों वर्ड जो है ना और ये
8:14डिलीवरी बैन एक्सपेंसेस इनका मतलब होता है
8:16भाड़े से भाड़ा
8:20भाड़ा किसको कहा जाता है भाई?
8:23अगर फॉर एग्जांपल मैं कोई सामान अंबाला से
8:28जयपुर भिजवा रहा हूं तो भाई भिजवाने का
8:30चार्ज तो लगेगा ना। उसको भाड़ा कहा जाता
8:32है जो डिलीवरी एक्सपेंसेस होंगे।
8:36तो ऑन द बेसिस ऑफ़ फंक्शन में क्या है भाई?
8:38फैक्ट्री या मैन्युफैक्चरिंग ओवरहेड कौन
8:40से हैं? दीज़ आर द एक्सपेंसेस रिलेटेड टू
8:43फैक्ट्री और प्रोडक्शन। ऑफिस
8:45एडमिनिस्ट्रेशन ओवरहेड कौन से हैं? दीज़ आर
8:48द एक्सपेंसेस रिलेटेड टू जनरल मैनेजमेंट
8:50एंड ऑफिस बुक। सेलिंग ओवरहेड कौन से हैं?
8:53दीज़ आर द एक्सपेंसेस रिलेटेड टू सेलिंग ऑफ
8:55गुड्स। डिस्ट्रीब्यूशन ओवरहेड्स कौन से
8:57हैं? डिस्ट्रीब्यूशन वाले। एक्सपेंसेस
8:59रिलेटेड टू डिलीवरिंग गुड्स टू द
9:01कस्टमर्स।
9:05ठीक है जी। इसके बाद
9:09नेक्स्ट आ जाते हैं भाई बिहेवियर के हिसाब
9:11से ऑन द बेसिस ऑफ बिहेवियर। बिहेवियर वाइज
9:15एक होते हैं फिक्स्ड खर्चे।
9:17एक होते हैं वेरिएबल,
9:21एक होते हैं सेमी वेरिएबल।
9:26अब फिक्स्ड खर्चे कौन से हैं भाई?
9:32जो जाने ही जाने हैं भाई। ऐसे खर्चे दीज़
9:35ओवरहेड्स रिमेन कास्टेंट। इवन व्हेन द
9:37लेवल ऑफ़ प्रोडक्शन चेंजेस। आप प्रोडक्शन
9:40करो, ना करो, कम करो, ज्यादा करो।
9:44फैक्ट्री का रेंट और मैनेजर की सैलरी तो
9:46जाएगी ही जाएगी। एग्जांपल के तौर पर अगर
9:48मैं भाड़े पे एक किराए की दुकान ही ले
9:50लेता हूं ना मैं उस दुकान में कुछ करूं या
9:53ना करूं। अगर मैंने एक तारीख को मान लो 1
9:56सितंबर को मैंने कोई शॉप ले ली रेंट पर।
9:59अब आज मैं थोड़ा मान लो बीमार हूं। आज 21
10:01सितंबर आ गई है। अभी तक मैं उस दुकान में
10:03कुछ कर नहीं पाया। लेकिन भाई मैं
10:05प्रोडक्शन करूं ना करूं। मैं कुछ उसमें
10:07बेचूं ना बेचूं। मैं दुकान खोलूं ना
10:10खोलूं। मुझे उसका रेंट तो देना ही पड़ रहा
10:11है भाई। अगली एक तारीख को वो यह थोड़ी
10:13कहेगा कि मैं बीमार था। मुझे देना ही
10:15पड़ेगा उसको रेंट। मैनेजर की सैलरी
10:17प्रोडक्शन कम हो या ज्यादा हो जाएगी तो
10:18जाएगी जाएगी। यह खर्चे कांस्टेंट रहते
10:21हैं। कांस्टेंट का मतलब क्या होता है भाई?
10:22लिख लेना अपने पास। सेम रहते हैं। जाना ही
10:25जाना है। कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रोडक्शन
10:27कम हो या ज्यादा हो। दूसरे खर्चे आते हैं
10:30वेरिएबल। वेरिएबल वर्ड का भाई खुद का मतलब
10:32ही यही है जो बदलते रहे। जो चेंज होते
10:34रहे। यहां पर अंडरलाइन ही कर दिया मैंने
10:36क्या अलग से लिखूं। चेंज लिखा ही हुआ है।
10:39दीज़ ओवरहेड्स चेंज अकॉर्डिंग टू द लेवल ऑफ़
10:41प्रोडक्शन। एग्जांपल के तौर पे जैसे लगा
10:44लो आप पावर यूसेज और इनडायरेक्ट
10:46मटेरियल्स। कैसे भी हम कैसे समझे? ये रहे।
10:50अब मान लो आपके घर पे एसी है। एग्जांपल के
10:52तौर पे अगर आप एसी ज्यादा चलाओगे तो उसका
10:54बिल ज्यादा आएगा। कम चलाओगे तो बिल कम
10:57आएगा। ठीक है? मान लेते हैं हम कुर्सियां
11:00बनाते हैं। कुर्सी बनाने के लिए एक रॉ
11:02मटेरियल लगेगा। इनडायरेक्ट मटेरियल के
11:04ब्रैकेट में ना आप रॉ मटेरियल लिख लेना।
11:06ठीक है? रॉ मटेरियल्स। अब अगर ऋषभ आप
11:10कुर्सी ज्यादा बनाओगे तो प्लास्टिक ज्यादा
11:12लगेगा। कम बनाओगे तो प्लास्टिक कम लगेगा।
11:14सिंपल सी बात।
11:17मान लो मैं पढ़ा रहा हूं। ठीक है? अगर मैं
11:19ज्यादा पढ़ाऊंगा तो मार्कर ज्यादा लगेंगे।
11:21कम पढ़ाऊंगा तो थोड़े कम लगेंगे। वो चीज
11:24सेमी वेरिएबल जो आधे फिक्स्ड है और आधे
11:26वेरिएबल है। ऐसे ओवरहेड्स जिसके अंदर
11:29फिक्स्ड वाले भी है और वेरिएबल वाले भी
11:31है। इसका ऋषभ बेस्ट एग्जांपल होता है।
11:33बाकी सब छोड़ भी दूं ना अगर मैं तो
11:35टेलीफोन बिल इवन आज की डेट में आपके
11:38मोबाइल फोन का अगर आप अपने घर पे नहीं हो,
11:41आप अपने होटल में नहीं हो और आपके पास
11:43वाई-फाई अवेलेबल नहीं है। हम सबको पता है
11:45आज की डेट में अगर हमें एक अपने नॉर्मल
11:46सिम को रिचार्ज कराना है तो ₹300 से ₹350
11:50का तो एक फिक्स्ड रिचार्ज होगा ही होगा।
11:52जिसके दम पर दिन का डेली का कुछ एक डेढ़
11:54GB नेट मिलेगा और कॉलिंग कर सकते हैं हम।
11:57लेकिन भाई अगर मान लो वाई-फाई की फैसिलिटी
11:59अवेलेबल नहीं है। वाई-फाई अवेलेबल नहीं
12:01है। ये क्या लिखा था? 300 फिक्स लिखा था
12:03भाई
12:05कि ₹300 का रिचार्ज तो फिक्स होना ही होना
12:07है। मेरा भी हर महीने हो रहा है 300 350
12:09का किसी एक सिम का। अब लेकिन अगर मैं कहीं
12:12बाहर हूं जहां वाई-फाई फैसिलिटी अवेलेबल
12:14नहीं है। मुझे वहां पे ऑनलाइन कोई शूट
12:16करना है भाई। तो मेरे को वो 1GB, 2GB,
12:213GB, 5GB पर डे का एक्स्ट्रा डलवाना
12:24पड़ेगा। जितना मेरा काम होगा उतने उस
12:27हिसाब से। तो ऐसे खर्चे आते हैं सेमी
12:29वेरिएबल में कि थोड़ा फिक्स्ड भी हो गया
12:31और फिर वेरिएबल भी हो गया। जिसमें एक
12:34फिक्स्ड चार्ज भी है और वेरिएबल चार्ज भी
12:36है यूसेज के हिसाब से। नेक्स्ट आ जाता है
12:39ऋषभ ऑन द बेसिस ऑफ़ कंट्रोल। कंट्रोल के
12:42हिसाब से दो प्रकार के ओवरहेड्स होते हैं।
12:44कंट्रोलेबल
12:46और अनकंट्रोलेबल। फर्क क्या है? देखो
12:50कंट्रोलेबल ओवरहेड वो है भाई नाम से पता
12:52लग रहा है जिसको मैनेजमेंट कंट्रोल कर
12:54सकती है। जैसे
12:56ओवरटाइम एक्सपेंसेस और स्टेशनरी
12:58एक्सपेंसेस। कुछ हद तक इनको हम कंट्रोल कर
13:00सकते हैं भाई ओवरटाइ के खर्चों को कि भाई
13:03कोशिश करें कि वर्कर से सारा काम उनके
13:05नॉर्मल टाइम में ही करा लिया जाए ताकि
13:07ओवरटाइम ना करवाना पड़े क्योंकि ओवरटाइम
13:09में ज्यादा सैलरी देनी पड़ती है ज्यादा
13:10वेजेस देनी पड़ती है अनकंट्रोलेबल जो
13:13हमारे कंट्रोल में नहीं है भाई व्हिच कैन
13:15नॉट बी कंट्रोल बाय मैनेजमेंट स्पेशली
13:18शॉर्ट टर्म में एग्जांपल रेंट यार रेंट तो
13:21जो देना है देना ही पड़ेगा इंश्योरेंस जो
13:24होएगी वो होएगी ही होएगी गवर्नमेंट के जो
13:26टैक्सेस जाएंगे अगर सरकार किसी चीज पे 5%
13:29जीएसटी दे रही है। हम ये तो नहीं कह सकते
13:31ना 4% ले लो भैया। हमारे बस की बात ही
13:34नहीं है। कंट्रोलबल ही नहीं है। हमारे बस
13:35में नहीं है भाई वो चीज। इसलिए
13:36अनकंट्रोलेबल बोला गया।
13:39फिर
13:42नॉर्मलिटी के हिसाब से नॉर्मलिटी के हिसाब
13:45से नॉर्मल है या एबनॉर्मल है?
13:50नॉर्मल ओवरहेड है या एबनॉर्मल है? देखो
13:53नॉर्मल ओवरहेड। नॉर्मल जो पता है यार
13:55होएंगे ही होएंगे। एक्सपेक्टेड और रेगुलर
13:58खर्चे जो नॉर्मल हमारे बिजनेस के दौरान
14:01आएंगे ही आएंगे। पता है यार काम कर रहे
14:02हैं। बिजली का बिल आएगा, मेंटेनेंस का
14:04खर्चा आएगा। एबनॉर्मल जो सडन शॉक आ जाते
14:07हैं एकदम से एकदम से आ गया कोई खर्चा।
14:10अनएक्सेक्टेड अनयूजुअल एक्सपेंसेस जो
14:12नॉर्मली नहीं होते। जैसे भाई फैक्ट्री में
14:14आग लग गई। पता थोड़ी था एकदम से लग गई।
14:16वर्कर्स हड़ताल पर बैठ गए। स्ट्राइक का
14:19मतलब क्या होता है? ऋषभ हड़ताल।
14:23धरने पर बैठ गए। धरने पर हड़ताल पर बैठ के
14:27मशीन खराब होगी एकदम से यह एबनॉर्मल खर्चे
14:30यह सब भी कंसीडर करने ही होते हैं भाई जब
14:31आप काम करते हो तो 100 खर्चे और आते हैं
14:34बस भाई कंक्लूजन तो हम कह सकते हैं कि
14:36ओवरहेड इनडायरेक्ट खर्चे हैं जो जरूरी
14:38होते हैं लेकिन इनमें से कोई भी खर्चा ऋषभ
14:40फिजूल का नहीं था
14:42दैट्स इट भाई ये 14-15 मिनट की वीडियो दो
14:45से तीन बार देखिए इसके नोट्स बनाइए वीडियो
14:49में ऐसी ही पॉज कर करके बना लेना क्या मैं
14:50अलग से वीडियो दूंगा आपको पहले दो बार
14:52देखो तीसरी बारी जब वीडियो देख रहेगे तो
14:55पॉज़ कर करके वीडियो को इसी में से नोट्स
14:57बना लेना। जो काटी हुई है चीज़ वह मत लिखना
14:59भाई। ठीक है? दैट्स इट।