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0:01हां जी 12th बिजनेस आपका टॉपिक है
0:04फैक्टर्स अफेक्टिंग प्राइिंग डिसीजंस। यह
0:07आपका प्राइस मिक्स का टॉपिक है कि भाई
0:09क्या-क्या फैक्टर्स आपके प्राइिंग डिसीजंस
0:12को इफेक्ट करते हैं। आपने कॉलेज की तरह
0:14लिखना है अलग-अलग ब्रांचेस बना के इंटरनल
0:17और एक्सटर्नल। ठीक है? नॉर्मल अपने स्कूल
0:20लेवल पे नहीं लिखना। अलग-अलग ब्रांचेस बना
0:21के लिखना है। इंटरनल और एक्सटर्नल। इंटरनल
0:25फैक्टर्स वह होते हैं इंटरनल एनवायरमेंट
0:27की तरह जो थोड़ा बहुत कंपनी के कंट्रोल
0:29में होते हैं और एक्सटर्नल फैक्टर्स ऐसे
0:32होते हैं जिसको कंपनी कुछ नहीं कर सकती।
0:33अनकंट्रोलेबल फैक्टर्स हैं। ठीक है?
0:36इंटरनल फैक्टर में आता है कंपनी के
0:38प्राइिंग ऑब्जेक्टिव्स क्या हैं? ठीक है?
0:41कंपनी की कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन क्या है?
0:43मार्केटिंग मिक्स कैसे अडॉप्ट कर रखा है?
0:45प्रोडक्ट लाइफ साइकिल के हिसाब से
0:47प्रोडक्ट अभी किस स्टेज पे है? प्रोडक्ट
0:49बाकी कॉम्पिटिटर्स के प्रोडक्ट से कितना
0:51अलग है? एक्सटर्नल फैक्टर में आपके
0:53प्रोडक्ट की डिमांड कितनी है? गवर्नमेंट
0:54की पॉलिसी सपोर्टिव है कि नहीं? कंपटीशन
0:56लेवल्स क्या है? इकोनमी के हालात क्या है?
0:58कंज्यूमर बिहेवियर टुवर्ड्स योर प्रोडक्ट
1:00क्या है? आपके प्रोडक्ट की इलास्टिसिटी ऑफ़
1:03डिमांड कितनी है? सप्लायर्स कैसे हैं?
1:05मार्केट में आपकी पोजीशन क्या है? उस
1:07हिसाब से। ठीक है? अब एक-एक करके। इंटरनल
1:11फैक्टर्स बेटा वो होते हैं जो कंपनी के
1:12कंट्रोल में होते हैं। सबसे पहले आ जाता
1:15है प्राइसिंग ऑब्जेक्टिव्स। सबसे पहले
1:16क्या है? प्राइसिंग ऑब्जेक्टिव्स।
1:18प्राइजिंग ऑब्जेक्टिव बहुत इंपॉर्टेंट रोल
1:20निभाते हैं प्राइस सेट करने में। ठीक है?
1:23आपका कोई भी ऑब्जेक्टिव हो सकता है। या तो
1:25आपका ऑब्जेक्टिव होगा सेल्स मैक्सिमाइजेशन
1:27कि नया-नया काम है। आपको सेल्स बढ़ानी है।
1:30वो तो बेटा आप प्राइस लो रख सकते हो। और
1:32अगर प्रॉफिट बढ़ाना है तो हाई प्राइस
1:34चार्ज करो जिससे आप ज्यादा प्रॉफिटेबल
1:35निकलो। यह आपकी इंटरनल पॉलिसी है भाई कि
1:38आपका ऑब्जेक्टिव फिलहाल क्या है? सेल्स
1:40बढ़ाना या प्रॉफिट बढ़ाना। नेक्स्ट आपका आ
1:42जाता है बेटा कॉस्ट। कॉस्ट होती है लागत।
1:46कोई चीज कितने में बनी? कॉस्ट प्लेस अ
1:48मेजर रोल इन इफेक्टिंग प्राइिंग डिसीजन।
1:50कॉस्ट एक बेस की तरह काम करती है प्राइस
1:52सेटिंग के लिए। कि फॉर एग्जांपल ₹8 की
1:55कॉस्ट है। ₹2 का प्रॉफिट रखा। तभी तो बेटा
1:588 + 2 मिलके 10 हुआ। कॉस्ट प्लस प्रॉफिट
2:01इक्वल टू सेल्स प्राइस। 8 + 2 = 10 तभी तो
2:06हुआ। अब मार्केटिंग मिक्स कैसे हैं?
2:09मार्केटिंग मिक्स आपके फोर पीस ऑफ़
2:10मार्केटिंग।
2:12मार्केटिंग में एक मिक्स एक बहुत
2:14इंपॉर्टेंट रोल निभाता है। फॉर एग्जांपल
2:16अगर एक कंपनी को प्राइस बढ़ाना है तो भाई
2:18वह अपना पैकेज बढ़िया कर दे, कुछ न्यू ऐड
2:21कर दे तो वो प्राइस बढ़ा भी सकती है।
2:22मार्केटिंग मिक्स कैसा यूज़ कर रहे हो
2:24उससे फर्क पड़ता है। अब अगर कंपनी के
2:26मार्केटिंग मिक्स में प्रमोशन के तहत आप
2:28सेलिब्रिटी से प्रमोशन करा रहे हो तो भाई
2:30सस्ता चार्ज करना थोड़ा मुश्किल होगा
2:32क्योंकि आपको उतना खर्चा भी तो निकालना
2:34है। नेक्स्ट आपका आ जाता है प्रोडक्ट लाइफ
2:37साइकिल।
2:39प्रोडक्ट लाइफ साइकिल। भाई प्रोडक्ट लाइफ
2:41साइकिल का सिंपल रोल होता है आई जी एम डी
2:45इंट्रोडक्शन ग्रोथ मैच्योरिटी और डिक्लाइन
2:48अगर आपका प्रोडक्ट बिल्कुल इंट्रोड्यूस ही
2:50हुआ है अभी-अभी तो आप प्राइिस को लो सेट
2:52कर सकते हो ताकि कस्टमर्स उसको खरीदें फिर
2:54जैसे-जैसे ग्रो होगी मैच्योरिटी होगी
2:56ग्रोथ होगी आपके प्रोडक्ट की ठीक-ठाक तो
2:58आप ज्यादा प्राइस भी चार्ज कर सकते हैं।
3:00देन आपका आता है प्रोडक्ट डिफरेंशिएशन।
3:03नेक्स्ट इज़ योर प्रोडक्ट डिफरेंशिएशन।
3:05बेटा अगर आपका प्रोडक्ट कस्टमर्स के
3:07कॉम्पिटिटर्स के प्रोडक्ट से थोड़ा अलग
3:09है। ठीक है? आपका प्रोडक्ट आपके
3:12कॉम्पिटिटर्स के प्रोडक्ट से काफी अलग है।
3:13क्वालिटी में, साइज में, कलर में, पैकेज
3:15में तो आप अलग प्राइस चार्ज कर सकते हो।
3:17इवन ज्यादा भी कर सकते हो। उसके बाद
3:20एक्सटर्नल फैक्टर्स आते हैं जो बेटा हमारी
3:22कम कंपनी के कंट्रोल में ही नहीं है। जैसे
3:26कि आपके प्रोडक्ट की डिमांड कैसी है? या
3:28डिमांड तो कस्टमर्स की होती है ना। हम तो
3:30बनाने वाले हैं। प्रोडक्ट डिमांड अगर
3:32ज्यादा होगी आप ज्यादा प्राइस चार्ज कर
3:34सकते हो और अगर कम होगी तो कम। गवर्नमेंट
3:37पॉलिसी फेवरेबल है कि नहीं? अगर गवर्नमेंट
3:39पॉलिसी वो पॉलिटिकल एनवायरमेंट का जो रोल
3:41होता है बिज़नेस में अगर गवर्नमेंट पॉलिसी
3:43फेवरेबल है आप ज्यादा प्राइस चार्ज कर
3:45सकते हो। और अगर नहीं है तो आपको मजबूरी
3:48वर्ष प्राइस लो चार्ज करना पड़ेगा।
3:50कंपटीशन लेवल कैसे है? अगर आपकी इकॉनमी
3:53में कंपटीशन ज्यादा है तो प्राइस आपको
3:56मैचिंग रखना पड़ेगा। ठीक है? कंपटीशन से
3:58बहुत रोल प्ले होता है इसके अंदर। ठीक है?
4:00फॉर एग्जांपल अगर एक्टिवा का प्राइस बढ़
4:02गया तो बाइक की डिमांड ऑटोमेटिकली बढ़
4:04जाएगी। भाई आप इस टाइम पर बाइक ज्यादा
4:07महंगे में बेच सकते हो क्योंकि हर कोई
4:09बाइक खरीद रहा है। कॉम्पिटिट के प्राइस से
4:11थोड़ा बेटर डील रेट में आपको और कुछ नहीं।
4:14कंज्यूमर का बिहेवियर क्या है? आपके
4:16प्रोडक्ट को लेके। अगर आपका प्रोडक्ट ये
4:18बहुतेंट पॉइंट है बेटा। अगर आपका प्रोडक्ट
4:21फ्रीक्वेंटली बार-बार खरीदा जाता है तो लो
4:24प्राइस चार्ज करो। ठीक है? फॉर एग्जांपल
4:26जनरल स्टोर वाली आइटम्स ये दूध, ब्रेड,
4:28बिस्किट यह कस्टमर बार-बार खरीदेगा।
4:31मल्टीपल विजिट करेगा आपके पास। तो आप लो
4:34प्राइस चार्ज कर लो। लेकिन अगर आपका
4:37प्रोडक्ट कभी-कभी बिकता है जैसे आप
4:38ज्वेलरी बिज़नेस में हो मान लो रोज तो नहीं
4:40खरीद रहे हो कोई ज्वेलरी तो आप ज्यादा
4:42प्राइस चार्ज कर सकते हो। इलास्टिसिटी ऑफ़
4:44डिमांड।
4:46इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड मतलब डिमांड में
4:48कितना चेंज आ रहा है। अब घर ध्यान से सुने
4:51हो तो इकोनॉमिक्स की नहीं है। अगर
4:53इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड इनइलास्टिक है।
4:55मतलब डिमांड में कोई चेंज ही नहीं आ रहा।
4:57प्राइस से फर्क नहीं पड़ रहा डिमांड पे।
4:59एग्जांपल मेडिसिंस के केस में महंगी भी हो
5:01जाए तो भी लोग दवाई तो खाएंगे ही खाएंगे।
5:03वो थोड़ी कम ज्यादा कर सकते हैं। तो अगर
5:05आपके प्रोडक्ट की इनलास्टिक डिमांड है तो
5:07आप हाई प्राइसेस चार्ज कर सकते हो। लेकिन
5:10अगर आपके प्रोडक्ट की इलास्टिक डिमांड है
5:12मतलब फटाफट से चेंज हो जाती है। हल्का सा
5:14प्राइस बदलने पर लोग फटाफट से खरीदना कम
5:17कर देते हैं। तो आपको लो प्राइस ही चार्ज
5:19करने पड़ेंगे मार्केट में टिके रहने के
5:21लिए। देन आ जाता है मार्केट पोजीशन क्या
5:23है आपकी फर्म की अभी? गुडविल एमडीए वाला
5:26एग्जांपल डाल सकते हो यहां पर Tata का God
5:29का। अगर मार्केट पोजीशन अच्छी है Tata
5:31Godraj Maruti गुडविल अच्छी बन रखी है तो
5:34आप ज्यादा प्राइिस भी चार्ज कर सकते हैं।
5:36दैट्स ऑल भाई इसी रेफरेंस में आपने इसे
5:39लिखना है। ठीक है?