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31/01/26

Anish Dhammi · 1,054 words · 5 min read

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0:01हां जी 12th बिजनेस आपका टॉपिक है

0:04फैक्टर्स अफेक्टिंग प्राइिंग डिसीजंस। यह

0:07आपका प्राइस मिक्स का टॉपिक है कि भाई

0:09क्या-क्या फैक्टर्स आपके प्राइिंग डिसीजंस

0:12को इफेक्ट करते हैं। आपने कॉलेज की तरह

0:14लिखना है अलग-अलग ब्रांचेस बना के इंटरनल

0:17और एक्सटर्नल। ठीक है? नॉर्मल अपने स्कूल

0:20लेवल पे नहीं लिखना। अलग-अलग ब्रांचेस बना

0:21के लिखना है। इंटरनल और एक्सटर्नल। इंटरनल

0:25फैक्टर्स वह होते हैं इंटरनल एनवायरमेंट

0:27की तरह जो थोड़ा बहुत कंपनी के कंट्रोल

0:29में होते हैं और एक्सटर्नल फैक्टर्स ऐसे

0:32होते हैं जिसको कंपनी कुछ नहीं कर सकती।

0:33अनकंट्रोलेबल फैक्टर्स हैं। ठीक है?

0:36इंटरनल फैक्टर में आता है कंपनी के

0:38प्राइिंग ऑब्जेक्टिव्स क्या हैं? ठीक है?

0:41कंपनी की कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन क्या है?

0:43मार्केटिंग मिक्स कैसे अडॉप्ट कर रखा है?

0:45प्रोडक्ट लाइफ साइकिल के हिसाब से

0:47प्रोडक्ट अभी किस स्टेज पे है? प्रोडक्ट

0:49बाकी कॉम्पिटिटर्स के प्रोडक्ट से कितना

0:51अलग है? एक्सटर्नल फैक्टर में आपके

0:53प्रोडक्ट की डिमांड कितनी है? गवर्नमेंट

0:54की पॉलिसी सपोर्टिव है कि नहीं? कंपटीशन

0:56लेवल्स क्या है? इकोनमी के हालात क्या है?

0:58कंज्यूमर बिहेवियर टुवर्ड्स योर प्रोडक्ट

1:00क्या है? आपके प्रोडक्ट की इलास्टिसिटी ऑफ़

1:03डिमांड कितनी है? सप्लायर्स कैसे हैं?

1:05मार्केट में आपकी पोजीशन क्या है? उस

1:07हिसाब से। ठीक है? अब एक-एक करके। इंटरनल

1:11फैक्टर्स बेटा वो होते हैं जो कंपनी के

1:12कंट्रोल में होते हैं। सबसे पहले आ जाता

1:15है प्राइसिंग ऑब्जेक्टिव्स। सबसे पहले

1:16क्या है? प्राइसिंग ऑब्जेक्टिव्स।

1:18प्राइजिंग ऑब्जेक्टिव बहुत इंपॉर्टेंट रोल

1:20निभाते हैं प्राइस सेट करने में। ठीक है?

1:23आपका कोई भी ऑब्जेक्टिव हो सकता है। या तो

1:25आपका ऑब्जेक्टिव होगा सेल्स मैक्सिमाइजेशन

1:27कि नया-नया काम है। आपको सेल्स बढ़ानी है।

1:30वो तो बेटा आप प्राइस लो रख सकते हो। और

1:32अगर प्रॉफिट बढ़ाना है तो हाई प्राइस

1:34चार्ज करो जिससे आप ज्यादा प्रॉफिटेबल

1:35निकलो। यह आपकी इंटरनल पॉलिसी है भाई कि

1:38आपका ऑब्जेक्टिव फिलहाल क्या है? सेल्स

1:40बढ़ाना या प्रॉफिट बढ़ाना। नेक्स्ट आपका आ

1:42जाता है बेटा कॉस्ट। कॉस्ट होती है लागत।

1:46कोई चीज कितने में बनी? कॉस्ट प्लेस अ

1:48मेजर रोल इन इफेक्टिंग प्राइिंग डिसीजन।

1:50कॉस्ट एक बेस की तरह काम करती है प्राइस

1:52सेटिंग के लिए। कि फॉर एग्जांपल ₹8 की

1:55कॉस्ट है। ₹2 का प्रॉफिट रखा। तभी तो बेटा

1:588 + 2 मिलके 10 हुआ। कॉस्ट प्लस प्रॉफिट

2:01इक्वल टू सेल्स प्राइस। 8 + 2 = 10 तभी तो

2:06हुआ। अब मार्केटिंग मिक्स कैसे हैं?

2:09मार्केटिंग मिक्स आपके फोर पीस ऑफ़

2:10मार्केटिंग।

2:12मार्केटिंग में एक मिक्स एक बहुत

2:14इंपॉर्टेंट रोल निभाता है। फॉर एग्जांपल

2:16अगर एक कंपनी को प्राइस बढ़ाना है तो भाई

2:18वह अपना पैकेज बढ़िया कर दे, कुछ न्यू ऐड

2:21कर दे तो वो प्राइस बढ़ा भी सकती है।

2:22मार्केटिंग मिक्स कैसा यूज़ कर रहे हो

2:24उससे फर्क पड़ता है। अब अगर कंपनी के

2:26मार्केटिंग मिक्स में प्रमोशन के तहत आप

2:28सेलिब्रिटी से प्रमोशन करा रहे हो तो भाई

2:30सस्ता चार्ज करना थोड़ा मुश्किल होगा

2:32क्योंकि आपको उतना खर्चा भी तो निकालना

2:34है। नेक्स्ट आपका आ जाता है प्रोडक्ट लाइफ

2:37साइकिल।

2:39प्रोडक्ट लाइफ साइकिल। भाई प्रोडक्ट लाइफ

2:41साइकिल का सिंपल रोल होता है आई जी एम डी

2:45इंट्रोडक्शन ग्रोथ मैच्योरिटी और डिक्लाइन

2:48अगर आपका प्रोडक्ट बिल्कुल इंट्रोड्यूस ही

2:50हुआ है अभी-अभी तो आप प्राइिस को लो सेट

2:52कर सकते हो ताकि कस्टमर्स उसको खरीदें फिर

2:54जैसे-जैसे ग्रो होगी मैच्योरिटी होगी

2:56ग्रोथ होगी आपके प्रोडक्ट की ठीक-ठाक तो

2:58आप ज्यादा प्राइस भी चार्ज कर सकते हैं।

3:00देन आपका आता है प्रोडक्ट डिफरेंशिएशन।

3:03नेक्स्ट इज़ योर प्रोडक्ट डिफरेंशिएशन।

3:05बेटा अगर आपका प्रोडक्ट कस्टमर्स के

3:07कॉम्पिटिटर्स के प्रोडक्ट से थोड़ा अलग

3:09है। ठीक है? आपका प्रोडक्ट आपके

3:12कॉम्पिटिटर्स के प्रोडक्ट से काफी अलग है।

3:13क्वालिटी में, साइज में, कलर में, पैकेज

3:15में तो आप अलग प्राइस चार्ज कर सकते हो।

3:17इवन ज्यादा भी कर सकते हो। उसके बाद

3:20एक्सटर्नल फैक्टर्स आते हैं जो बेटा हमारी

3:22कम कंपनी के कंट्रोल में ही नहीं है। जैसे

3:26कि आपके प्रोडक्ट की डिमांड कैसी है? या

3:28डिमांड तो कस्टमर्स की होती है ना। हम तो

3:30बनाने वाले हैं। प्रोडक्ट डिमांड अगर

3:32ज्यादा होगी आप ज्यादा प्राइस चार्ज कर

3:34सकते हो और अगर कम होगी तो कम। गवर्नमेंट

3:37पॉलिसी फेवरेबल है कि नहीं? अगर गवर्नमेंट

3:39पॉलिसी वो पॉलिटिकल एनवायरमेंट का जो रोल

3:41होता है बिज़नेस में अगर गवर्नमेंट पॉलिसी

3:43फेवरेबल है आप ज्यादा प्राइस चार्ज कर

3:45सकते हो। और अगर नहीं है तो आपको मजबूरी

3:48वर्ष प्राइस लो चार्ज करना पड़ेगा।

3:50कंपटीशन लेवल कैसे है? अगर आपकी इकॉनमी

3:53में कंपटीशन ज्यादा है तो प्राइस आपको

3:56मैचिंग रखना पड़ेगा। ठीक है? कंपटीशन से

3:58बहुत रोल प्ले होता है इसके अंदर। ठीक है?

4:00फॉर एग्जांपल अगर एक्टिवा का प्राइस बढ़

4:02गया तो बाइक की डिमांड ऑटोमेटिकली बढ़

4:04जाएगी। भाई आप इस टाइम पर बाइक ज्यादा

4:07महंगे में बेच सकते हो क्योंकि हर कोई

4:09बाइक खरीद रहा है। कॉम्पिटिट के प्राइस से

4:11थोड़ा बेटर डील रेट में आपको और कुछ नहीं।

4:14कंज्यूमर का बिहेवियर क्या है? आपके

4:16प्रोडक्ट को लेके। अगर आपका प्रोडक्ट ये

4:18बहुतेंट पॉइंट है बेटा। अगर आपका प्रोडक्ट

4:21फ्रीक्वेंटली बार-बार खरीदा जाता है तो लो

4:24प्राइस चार्ज करो। ठीक है? फॉर एग्जांपल

4:26जनरल स्टोर वाली आइटम्स ये दूध, ब्रेड,

4:28बिस्किट यह कस्टमर बार-बार खरीदेगा।

4:31मल्टीपल विजिट करेगा आपके पास। तो आप लो

4:34प्राइस चार्ज कर लो। लेकिन अगर आपका

4:37प्रोडक्ट कभी-कभी बिकता है जैसे आप

4:38ज्वेलरी बिज़नेस में हो मान लो रोज तो नहीं

4:40खरीद रहे हो कोई ज्वेलरी तो आप ज्यादा

4:42प्राइस चार्ज कर सकते हो। इलास्टिसिटी ऑफ़

4:44डिमांड।

4:46इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड मतलब डिमांड में

4:48कितना चेंज आ रहा है। अब घर ध्यान से सुने

4:51हो तो इकोनॉमिक्स की नहीं है। अगर

4:53इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड इनइलास्टिक है।

4:55मतलब डिमांड में कोई चेंज ही नहीं आ रहा।

4:57प्राइस से फर्क नहीं पड़ रहा डिमांड पे।

4:59एग्जांपल मेडिसिंस के केस में महंगी भी हो

5:01जाए तो भी लोग दवाई तो खाएंगे ही खाएंगे।

5:03वो थोड़ी कम ज्यादा कर सकते हैं। तो अगर

5:05आपके प्रोडक्ट की इनलास्टिक डिमांड है तो

5:07आप हाई प्राइसेस चार्ज कर सकते हो। लेकिन

5:10अगर आपके प्रोडक्ट की इलास्टिक डिमांड है

5:12मतलब फटाफट से चेंज हो जाती है। हल्का सा

5:14प्राइस बदलने पर लोग फटाफट से खरीदना कम

5:17कर देते हैं। तो आपको लो प्राइस ही चार्ज

5:19करने पड़ेंगे मार्केट में टिके रहने के

5:21लिए। देन आ जाता है मार्केट पोजीशन क्या

5:23है आपकी फर्म की अभी? गुडविल एमडीए वाला

5:26एग्जांपल डाल सकते हो यहां पर Tata का God

5:29का। अगर मार्केट पोजीशन अच्छी है Tata

5:31Godraj Maruti गुडविल अच्छी बन रखी है तो

5:34आप ज्यादा प्राइिस भी चार्ज कर सकते हैं।

5:36दैट्स ऑल भाई इसी रेफरेंस में आपने इसे

5:39लिखना है। ठीक है?

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