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0:01फिर लिबरलाइजेशन में क्या-क्या रिफॉर्म्स
0:03आए भाई? वो लिबरलाइजेशन में क्या-क्या
0:06रिफॉर्म्स आए? इंडस्ट्रियल सेक्टर के
0:08रिफॉर्म्स, फाइनेंशियल सेक्टर के, फिसिकल
0:11सेक्टर के और एक्सटर्नल सेक्टर के। पेपर
0:13में अक्सर जब ये समझाने को आते हैं, शॉर्ट
0:15में तो कोई एक आ जाता है। ठीक है? शॉर्ट
0:17में जब ये आता है कोई एक भी आ जाता है। अब
0:19इंडस्ट्रियल सेक्टर के रिफॉर्म्स क्या थे?
0:21देखते हैं।
0:23सबसे पहले इंडस्ट्रियल सेक्टर के
0:25रिफॉर्म्स। गवर्नमेंट ने बेटा डी
0:27लाइसेंसिंग करी थी। क्या करी थी? डी
0:28लाइसेंसिंग। वो जितने लाइसेंसेस लगा रखे
0:31थे सारे के सारे लाइसेंसेस हटा दिए थे।
0:33अभी आपने ऊपर पढ़ा ये देखो कि कितनी
0:35इंडस्ट्रीज पर लाइसेंस लगा रखा था
0:36गवर्नमेंट ने? 17 इंडस्ट्रीज पर। ये आ रहा
0:4017 इंडस्ट्रीज पर लाइसेंस था। अर्लियर 17
0:43इंडस्ट्रीज पर लाइसेंस था। उसको गवर्नमेंट
0:46ने कम करके आठ करा और फिर लास्ट क्या कर
0:49दिया? पांच इंडस्ट्रीज। जिसमें से कुछ दो
0:51चार कौन सी है? लिककर पर लाइसेंस लगता है
0:53टोबैको पर डेंजरस केमिकल्स पर एक्सट्रा
0:56कॉन्ट्रैक्ट करा भाई पब्लिक सेक्टर को
0:59जहां पहले बहुत सारी आपकी अर्लियर क्या
1:03होता था या तो देखो तीन और दो लिख रखा है
1:05अर्लियर बहुत सारी इंडस्ट्रीज थी जो सरकार
1:07ने अपने लिए रिजर्व कर रखी थी उसको कम
1:09करके उस जमाने में सिर्फ तीन करा कि सिर्फ
1:12रेलवे डिफेंस और एटॉमिक एनर्जी में सरकार
1:14काम करेगी बाकी सेक्टर्स में प्राइवेट
1:16सेक्टर डील कर सकता है पहले बहुत सारी थी
1:18फिर उसके बाद ये नाउ लिखा हुआ है दो फिर
1:21गवर्नमेंट गवर्नमेंट ने सिर्फ रेल्वेज और
1:22एटॉमिक एनर्जी करी और अब तो यह भी बात चल
1:24रही है कि एटॉमिक एनर्जी भी सरकार ने
1:25प्राइवेट को अलव कर दिया। अब सरकार पे मेन
1:27एक रेलवे रेलवे है करली।
1:32उसके बाद एक्सपेंशन ऑफ प्रोडक्शन
1:34कैपेसिटी। पहले क्या बेसिकली फ्रीडम दी
1:36भाई प्रोडक्शन करने की। पहले क्या होता
1:38था? पहले व्हाट टू प्रोड्यूस, हाउ टू
1:40प्रोड्यूस, फॉर हुम टू प्रोड्यूस, हाउ मच
1:42टू प्रोड्यूस। ये सब सरकार बताती थी। अब
1:45ये प्रोड्यूसर के हाथ में था भाई कि उसको
1:48क्या बनाना है, कैसे बनाना है, कितना
1:50बनाना है। सिर्फ प्रोड्यूसर के हाथ में
1:52था। अब ये फ्रीडम टू इंपोर्ट कैपिटल
1:55गुड्स।
1:57कैपिटल गुड्स में क्या आता है भाई? जितनी
1:59भी आपकी हैवी मशीनंस वगैरह आती है जो
2:02प्रोडक्शन यूज़ के लिए यूज़ होंगी। ये क्या
2:03लिखा हुआ है? मशीन फॉर प्रोडक्शन।
2:05प्रोडक्शन वाले यूज़ के लिए जो मशीनंस यूज़
2:07होंगी उनको कैपिटल गुड्स कहते हैं। इन सब
2:10में फॉर्मेलिटीज़ कम कर दी थी। कोई स्पेशल
2:12परमिशन नहीं लगती थी। आप इजीली अगर आप कोई
2:14इंडस्ट्री चला रहे हो और
2:18आपको प्रोडक्शन के लिए कोई मशीन मंगवानी
2:20है बाहर से आप बहुत कम फॉर्मेलिटीज में
2:22उसको मंगा के अपना काम बढ़िया तरीके से
2:23चला सकते हो।
2:26डीरिजर्वेशन ऑफ़ प्रोडक्शन एरियाज इसका
2:28मतलब क्या था भाई? पहले सरकार ने ना बहुत
2:30सारे एरियाज मेनी एरियाज व्हिच वर
2:33रिजर्व्ड बाय द गवर्नमेंट अर्लियर। बहुत
2:35सारे एरियाज पहले सरकार ने रिजर्व कर रखे
2:37थे। खाली छोड़ रखे थे भाई। ना खुद कुछ
2:39करते थे ना किसी को करने देते थे। ऐसी
2:41बहुत बड़ी जमीन खाली छोड़ दी जी या हम कल
2:44को स्कूल खोलेंगे या हम कल को अपनी कोई
2:46ऑफिस खोलेंगे और भाई वो बोलते रहते थे
2:48खोलते खोलते थे नहीं तो वही बात होगी ना
2:50खुद करेंगे ना किसी को करने देंगे सरकार
2:52ना खुद उस टाइम पे वहां काम कर रही थी और
2:54ना वो किसी प्राइवेट सेक्टर को बेचती थी
2:56इतनी बड़ी जगह और सबसे ज्यादा जगह भी
2:58क्योंकि पहले लैंड सीलिंग्स वगैरह भी आपने
3:00पढ़ा था करी थी तो सबसे ज्यादा जगह जगह उस
3:02टाइम पे सरकार पे होती थी तो बहुत सारे
3:04एरिया सरकार ने पहले रिजर्व कर रखे थे उन
3:06सबको भी सेल करा प्राइवेट सेक्टर को ताकि
3:09वो अपनी इंडस्ट्रीज वगैरह वहां लगा सके
3:11यार अब इंडस्ट्री है। इंडस्ट्री कोई 100
3:13गज जगह में थोड़ी आ जाएगी। उसके लिए तो
3:15ज्यादा जगह ही चाहिए होगी। ज्यादा जगह
3:16होती थी सरकार पे। पहले सरकार बेचती नहीं
3:18थी उसे। फिर सरकार ने उसको भी बेचना
3:20स्टार्ट करा। ये थे बेटा आपके इंडस्ट्रियल
3:23सेक्टर के रिफॉर्म्स।
3:25उसके बाद फाइनेंशियल सेक्टर के क्या
3:27रिफॉर्म्स थे भाई? फाइनेंसियल सेक्टर के
3:29रिफॉर्म्स। इसमें इंपॉर्टेंट बात है
3:31आरबीआई का रोल चेंज करा। आरबीआई का रोल
3:34चेंज हुआ फ्रॉम रेगुलेटर टू फैसिलिटेटर।
3:38आरबीआई का रोल चेंज कर दिया भाई। पहले
3:40आरबीआई रेगुलेटर था। हर चीज रेगुलेट करता
3:43था। फिर उसका रोल फैसिलिटेटर कर दिया भाई
3:45कि तू एक रेंज दे दे। एग्जांपल पहले
3:47आरबीआई पूरा रेट सेट करता था भाई कि एक-एक
3:50बैंक फॉर एग्जांपल एट कोई रेट है बैंक
3:52रेपो, कोई भी रिवर्स रेपो, कोई भी रेट है
3:54उसको अगर 8.1 है तो 8.1 ही होना चाहिए। अब
3:57आरबीआई रेंज देने लग गया भाई कि 8 से 10%
4:00आप अपने हिसाब से रख सकते हो। इस रेंज में
4:02थोड़ी फ्रीडम मिल गई बैंक्स को भी। एफआईआई
4:05फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट अलाउ
4:07होंगी कि भाई वो पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट
4:09जो होती है कि भाई फॉरेन इन्वेस्टर्स अब
4:12इंडियन स्टॉक मार्केट में इंडियन
4:14फाइनेंसियल मार्केट में इंडियन शेयर
4:16मार्केट में इंडियन स्टॉक्स में शेयर्स
4:17में म्यूच्यूल फंड्स में इन्वेस्ट कर सकते
4:19हैं। बैंक्स को अलाउ कर दिया कि वो अपनी
4:22नई ब्रांचेस खोल सकते हैं। बहुत कम
4:23फॉर्मेलिटीज से। फॉरेन इन्वेस्टमेंट लिमिट
4:26जो थी इंडियन बैंक्स की उसको बढ़ा के 74%
4:29कर दिया। ठीक है? कंप्लीटली फ्रीडम आ रही
4:32थी भाई हर तरफ से। फिस्कल सेक्टर
4:34रिफॉर्म्स बेटा फिसिकल गवर्नमेंट से
4:36रिलेटेड होते हैं। गवर्नमेंट के टैक्स
4:37रिफॉर्म्स कि गवर्नमेंट की फिस्कल पॉलिसी
4:39जो गवर्नमेंट की रेवेन्यू एक्सपेंडिचर
4:41पॉलिसी होती है ना टैक्स वगैरह वाली उससे
4:43डील करते हैं। तो इसमें इन्होंने क्या करा
4:45भाई? टैक्सेस वर मेड सिंपल। टैक्सेस को
4:47सिंपल बना दिया। गवर्नमेंट ने सिंपल-सिंपल
4:50सबको बताया यार ऐसा है भैया। दो पहले
4:52लोगों को समझ ही नहीं आता था कि डायरेक्ट
4:54टैक्स क्या है? इनडायरेक्ट टैक्स क्या है?
4:55सिंपल समझाया भाई। देखो ऐसा है। दो तरह के
4:57टैक्स होंगे जो आपको देने पड़ेंगे। एक
4:59डायरेक्ट टैक्स और एक इनडायरेक्ट टैक्स।
5:02डायरेक्ट टैक्स आपको डायरेक्टली सरकार को
5:03जमा कराना है। इनडायरेक्ट टैक्स
5:05इनडायरेक्टली पे होगा गवर्नमेंट को।
5:07डायरेक्ट टैक्स आपकी इनकम और वेल्थ पे
5:09लगेगा। इनडायरेक्ट टैक्स गुड्स और सर्विज
5:11पे लगेगा। जीएसटी अब आया उस जमाने में
5:13जीएसटी नहीं था। वट वगैरह चलता था वैल्यू
5:15एडेड टैक्स।
5:17और डायरेक्ट टैक्स का एग्जांपल हो गया
5:19इनकम टैक्स या वेल्थ टैक्स। यहां पर एक और
5:21एग्जांपल आप लिख सकते हो वेल्थ टैक्स।
5:25वेल्थ टैक्स। ठीक है?
5:29प्रायर टू 1991 टैक्सेस वर वेरी
5:31कॉम्प्लेक्स जिससे टैक्स इवेशन बहुत
5:33ज्यादा होती थी। टैक्स इवेजशन मतलब टैक्स
5:34की चोरी। 1991 से पहले टैक्सेस इतने
5:37कॉम्प्लेक्स थे कि हर इंसान ऑलमोस्ट चोरी
5:39करता था टैक्स की। अब हुआ क्या भाई?
5:42फिस्कल रिफॉर्म्स के बाद टैक्स इवेशन कम
5:44हो गई। क्योंकि जब लोगों को समझ आया कि
5:47यार टैक्सेस सिंपल है। लोगों को समझाया
5:49गया कि यार ऐसे-ऐसे टैक्सेस हैं। तो फिर
5:50यार लोगों ने कहा क्या ही बेईमानी करनी
5:52है। ठीक है ना? जो लोग भर सकते थे
5:54उन्होंने इज़ली भरे। हां 100% टैक्स डिवीज़
5:57कभी गायब नहीं हुई। कम हो गई थी। लेकिन
5:59उसके बाद टैक्स रेट्स को थोड़ा रिड्यूस भी
6:02करा था जिससे टैक्स इवेशन कम हो। उसके बाद
6:04भाई थोड़ा रिसेंट का 2017 में जीएसटी आया
6:07था वन नेशन वन टैक्स।
6:09उसके बाद बेटा आपके एक्सटर्नल सेक्टर के
6:11रिफॉर्म्स। इसके अंदर भाई एक तो फॉरेन
6:14एक्सचेंज के रिफॉर्म्स आए थे। इसी में आते
6:15हैं कवर और एक फॉरेन ट्रेड पॉलिसी आई थी
6:18बड़ी तगड़ी। क्या-क्या था अभी देखते हैं।
6:20फॉरेन एक्सचेंज रिफॉर्म्स में फॉरेन
6:23करेंसी से रिलेटेड। फॉरेन एक्सचेंज मतलब
6:24फॉरेन करेंसी। उस टाइम पर ये बताया था।
6:26था। अब तो आप पूरा चैप्टर पढ़ के बैठे हो
6:28कि फॉरेन एक्सचेंज मतलब फॉरेन करेंसी। आज
6:31ही डिस्कस कर रहे थे। डीवैल्यूएशन ऑफ़
6:33आईएआर कर दिया था। डीवैल्यूएशन क्या होता
6:35है? जब गवर्नमेंट खुद अपनी वैल्यू गिराती
6:37है। ठीक है? बाय गवर्नमेंट।
6:40इंडियन रूपीस को आईएआर को डीवैल्यू कर
6:42दिया था। उसकी वैल्यू सरकार ने खुद ही
6:43गिरा दी थी फॉरेन करेंसीज के अगेंस्ट ताकि
6:46हमारे गुड्स चीपर पड़े और हमारे गुड्स जो
6:48इतने साल से बंद हो रखे थे एक्सपोर्ट्स वो
6:50एक बार के लिए चालू हो जाए।
6:53उसके बाद फॉरेन ट्रेड पॉलिसी में क्या था
6:55जो टेरिफ थे जो आजकल दोबारा बातों में आ
6:57रहे हैं। टेरिफ्स को हटा दिया था। जो
7:00टैक्स होता था ना इंपोर्टेड आइटम्स पे
7:01उसको हटा दिया था। कोटास को कम भी करा था
7:04और रिड्यूस भी करा था। बेसिकली रिमूव भी
7:06करा था और रिड्यूस भी करा था काफी केसेस
7:08में। कोटा क्या होता है बेटा?
7:09क्वांटिटेटिव रिस्ट्रिक्शंस। उसके बाद
7:12एक्सपोर्ट ड्यूटीज वगैरह हटा दी थी। अब
7:14एक्सपोर्ट्स को टैक्स फ्री कर दिया था
7:16जिससे कि आपके देश के एक्सपोर्ट्स भी बढ़े।
7:26उसके बाद यहां पर कुछ क्वेश्चंस
7:29डिस्कस एनी टू मेजर्स
7:33परटेनिंग टू द फाइनेंशियल सेक्टर
7:35इंट्रोड्यूस्ड बाय द गवर्नमेंट ऑफ इंडिया।
7:37बेसिकली यहां पर क्या बताने हैं?
7:38फाइनेंसियल सेक्टर रिफॉर्म्स। ये जो
7:40क्वेश्चन लिखा हुआ है कि कोई दो
7:42लिबरलाइजेशन मेजर्स बताओ जो फाइनेंसियल
7:44सेक्टर से रिलेटेड थे। यहां पर आपको
7:46फाइनेंशियल सेक्टर रिफॉर्म्स बतानी है।
7:48ठीक है? दूसरा
7:51इवैलुएट द टैक्स रिफॉर्म्स अंडर द न्यू
7:53इकोनमिक पॉलिसी। टैक्स रिफॉर्म्स फिस्कल
7:55रिफॉर्म्स बताने हैं। ठीक है?
7:59इसके बाद एक्सप्लेन द वेरियस एक्सप्लेन द
8:02रीज़ंस व्हाई द इंडस्ट्रियल सेक्टर वाज़ हैज़
8:06परफॉर्म्ड वेल इन द रिफॉर्म पीरियड।
8:08इंडस्ट्रियल सेक्टर रिफॉर्म्स बताने हैं
8:09यहां पर अगर ऐसे-ऐसे क्वेश्चन आए। बाकी ये
8:12क्वेश्चन कई स्कूलों में भी आया हुआ है।
8:13भाई टेरिफ और नॉन टेरिफ बैरियर्स में फर्क
8:15बताओ। टेरिफ बैरियर्स बेटा आपके टैक्स
8:17वाले बैरियर्स और नॉन टेरिफ बैरियर्स मतलब
8:20टैक्स वाले नहीं कोटास जैसे क्वांटिटेटिव
8:22रिस्ट्रिकशंस
8:24तो यह बेटा इसमें था लिबरलाइजेशन ठीक है।