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0:02नाइंथ क्लास हमने जो लास्ट टॉपिक पढ़ा था
0:05दैट वास द डिफरेंस बिटवीन ट्रू सॉल्यूशन
0:07कोलाइड एंड सस्पेंशन। एक बारी फटाफट से वो
0:10डिफरेंस निकालिए और उसमें ना एक चीज देखो
0:13फटाफट से पार्टिकल साइज। ट्रू सॉल्यूशन का
0:17पार्टिकल साइज बहुत छोटा था। डायग्राम भी
0:19दिख रहा होगा ऊपर। सस्पेंशन का बहुत ही
0:22बड़ा था। वो जो बीच वाली कैटेगरी थी वो
0:24किसकी थी? बीच वाली कैटेगरी किसकी थी?
0:27कोलाइड की। किसकी? कोलाइड थी। अब एक और
0:31बात जो वो वाला पॉइंट प्रॉब्लम कर रहा था
0:34लास्ट में वो स्कैटरिंग ऑफ लाइट का। ट्रू
0:37सॉल्यूशन का पार्टिकल साइज इतना छोटा था
0:39कि वो लाइट को फैलाता ही नहीं था। और
0:42सस्पेंशन का पार्टिकल साइज इतना बड़ा है
0:44कि वो लाइट को बड़े अच्छे से फैला देता
0:46है। क्योंकि लाइट तो टकरा टकरा के फैलेगी।
0:49फसता कौन है? बीच की कैटेगरी। बीच वाला
0:52कौन था? कोलाइडल। जिसका पार्टिकल साइज ना
0:55तो बहुत छोटा है ट्रू सॉल्यूशन की तरह। ना
0:58ही बहुत बड़ा है सस्पेंशन की तरह में क्या
1:02लिखा था पार्टिकल साइज देखो वन से 100 नैन
1:04मीटर और इसका डायग्राम भी देखो ना तो ये
1:08ट्रू सॉल्यूशन जितना छोटा है कि ये लाइट
1:10को फैलाएगा ही नहीं ना ही ये सस्पेंशन
1:14जितना बड़ा है कि बहुत अच्छे से फैलाएगा
1:16ये बेचारा भी फंस जाता है कोलाइट इसी वजह
1:20से ना ये लाइट को
1:23लाइट को
1:26आधा अधूरा फैला कहलाता है
1:30आधा
1:34अधूरा
1:38अधूरे में देख लेना छोटा ऊ आता है बड़ा ऊ
1:41आता है फैलाता है लाइट को पूरी तरीके से
1:44ना फैलाने की जगह आधा अधूरा फैलाता है। उस
1:47कांसेप्ट को बेटा टिंडल इफेक्ट बोला जाता
1:50है। जब लाइट आधी अधूरी फैलती है ना और एक
1:53और बात एक नंबर में एमसीक्यू बहुत स्कूलों
1:56में आता है कि टिंडल इफेक्ट कौन दिखाएगा?
1:59ट्रू सॉल्यूशन दिखाएगा, कोलाइड दिखाएगा या
2:02सस्पेंशन दिखाएगा? तो बेटा जवाब सिंपल है।
2:05ट्रू सॉल्यूशन तो लाइट को फैलाता ही नहीं
2:07है। इतना छोटा पार्टिकल साइज है। सस्पेंशन
2:10का पार्टिकल साइज इतना बड़ा है कि वो लाइट
2:12को बहुत अच्छे से फैला देता है। ये जो बीच
2:15की कैटेगरी है ना कोलाइडल की आधा अधूरा
2:18यही फैलाएगी। तो इसकी डेफिनेशन क्या है? द
2:22स्कैटरिंग ऑफ बीम ऑफ लाइट। लाइट की बीम का
2:27फैलना। स्कैटरिंग का मतलब क्या है? फैलना।
2:31थ्रू की जगह बाय भी लिख सकते हो। बाय द
2:34पार्टिकल्स ऑफ पोलाइट
2:36इज नोन एज टिंडल इफेक्ट। कहने का मतलब वो
2:39जो लाइट का आधा अधूरा फैलना होता है ना
2:42उसको टिंडल इफेक्ट बोलते हैं। स्कैटरिंग
2:44ऑफ बीम ऑफ लाइट थ्रू पार्टिकल्स ऑफ
2:48कोलाइड। अब भाई टिंडल इफेक्ट कहां-कहां
2:51दिखता है आपको आपके घर में वो सुन लो। फॉर
2:53एग्जांपल नंबर वन
2:56टिंडल इफेक्ट ऑब्जर्व किया जा सकता है जब
2:59एक पतली सी सनलाइट की रे एक डार्क रूम में
3:03आती है। अब क्या होता है बेटा? ये देखो
3:09कभी देखा है अपने घर में ऐसे
3:12कि बंद कमरा है अक्सर दोपहर के समय कमरे
3:16में पूरा अंधेरा है और हल्की सी धूप की
3:18किरण किसी खिड़की से आ रही है तो ये देखो
3:21ये मैंने डिजाइन नहीं पाया ये डॉट डॉट से
3:22जो मैं अभी मार्क कर रहा हूं कभी देखा है
3:25अपने घर में ऐसे ये डस्ट पार्टिकल्स आपको
3:27नजर आने लगे ऐसा तो है नहीं यार कि आपको
3:30कोई भगवान ने दृष्टि दे दी और आपको अभी
3:32अभी नजर आने लग गया
3:35है ना?
3:36यह डस्ट के पार्टिकल्स पहले से आपके कमरे
3:39में थे और कुदरत ही वहां पर और यह डस्ट
3:42पार्टिकल्स जो होते हैं ना ये भी तो
3:44कोलाइड की तरह है। देखने में आपको आपका
3:47कमरा खाली लग रहा है। ठीक है? लेकिन ये
3:49डस्ट पार्टिकल्स पूरे कमरे में फैल रखे
3:51हैं। जितना मर्जी झाड़ू लगा लो। हवा में
3:53फैल रखे हैं। ये आपको कब दिखे? जब एकदम से
3:57हल्की सी लाइट आपके कमरे के अंदर आई। तो
4:00आपको नजर आए कि यार ये सब भी है कमरे में
4:02तो। यह चीज इसको टिंडल इफेक्ट कहते हैं कि
4:07भाई जब एक डार्क रूम के अंदर हल्की सी बस
4:09सनलाइट आती है तो डस्ट पार्टिकल्स जो लाइट
4:12को आधा अधूरा फैला रहे हैं ना ये टिंडल
4:14इफेक्ट है।
4:17दूसरा एग्जांपल बेटा ये है ये जो बना रखा
4:20है कभी देखा है आपने बड़े घने जंगलों में
4:24जो बहुत डेंस फॉरेस्ट होते हैं वहां से
4:27हल्कीहल्की ऐसे लाइट फैल रही है ये चीज या
4:30फिर कभी यह नहीं देखा तो
4:33चलो यह तो डस्ट वाला ही था।
4:38कभी भी आपने ये चीज ऑब्जर्व करी हो कि भाई
4:41बहुत घना सा जंगल है और सनलाइट पूरी ऐसे
4:43एक-ए किरण दिख रही है। नॉर्मली तो दिखती
4:44नहीं आपको।
4:46ये चीज टिंडल इफेक्ट होता है। दूसरा
4:50एग्जांपल टिंडल इफेक्ट तब भी देखा जा सकता
4:53है जब सनलाइट पास करती है एक डेंस फॉरेस्ट
4:56की कैनोपी से। डेंस फॉरेस्ट यानी घना
4:59जंगल। कैनोपी मतलब जहां पर प्रॉपर वो पेड़
5:02से पेड़ आपस में कनेक्ट हो रखा है। ठीक
5:05है? वहां से जब सनलाइट पास करती है पूरा
5:07वहां शैडो वाला रीजन है। सिर्फ हल्कीहल्की
5:10सी लाइट वहां से जा रही है। ये क्यों हो
5:13रहा है भाई? घर के कमरे में तो समझ आ गया
5:16कि डस्ट पार्टिकल्स करा रही है। फॉरेस्ट
5:18में क्या होता है? फॉरेस्ट वगैरह में देखो
5:20यार अगर आप बारिश में भीगोगे आप तो अपनी
5:22बॉडी पोंछ लोगे। अगर बारिश आई पत्ते बूतों
5:26पे पानी पड़ा वो तो नहीं अपने आप को पहुंच
5:28सकते ना। अक्सर छोटे-छोटे जो वाटर
5:30ड्रॉपलेट्स होते हैं ना वाटर के वो पत्तों
5:33पर चिपके रह जाते हैं। इतनी तीखी धूप
5:35पड़ने पर वो इवापोरेट होते हैं। वो बाहर
5:38आते हैं जो कोलाइड के पार्टिकल्स की तरह
5:40एक्ट करते हैं और ये टिंडल इफेक्ट ऑब्जर्व
5:42कराते हैं। जो आपने ऐसा-सा कभी देखा होगा
5:45ये चीज। ये पिक्चर बेस्ड क्वेश्चन में आ
5:47गया। ये टिंडल इफेक्ट है। ये वाला आ गया।
5:50ये टिंडल इफेक्ट है। कमरे में कौन करा रहा
5:52है? डस्ट पार्टिकल्स। यहां पे जंगल में
5:54कौन करा रहा है? वाटर ड्रॉपलेट्स।
5:57ये चीज
5:59ठीक है। इसका थोड़ा ध्यान रखना। इंपॉर्टेंट
6:02टॉपिक है।
6:05नेक्स्ट भाई आपको एक कांसेप्ट सिखाते हैं।
6:07एडवांस्ड मेथड्स ऑफ सेपरेशन।
6:11हमने पढ़ा यार अगर बाय चांस मिट्टी वाला
6:13पानी आ जाए। पढ़ा था ना सेडेंटेशन कर सकते
6:15हो। उसको अनडिस्टर्ब छोड़ दो और वो बैठ
6:18जाएगी मिट्टी नीचे। और उस दिन आपको करके
6:21भी दिखाया था अगर सारी मिट्टी नहीं बैठ
6:22रही तो आप फिल्टर पेपर का प्रयोग कर लो।
6:25लेकिन अगर फिल्ट्रेशन भी काफी नहीं है तो
6:28हम सेंट्रीफ्यूगेशन और कोगुलेशन जैसी
6:31टेक्निक्स का प्रयोग करते हैं।
6:33प्रोनंसिएशन क्या है? सेंट्रीफ्यूगेशन।
6:37कोएगुलेशन।
6:38इस वीडियो में हम सेंट्रीफ्यूगेशन के बारे
6:41में इनमें से पढ़ेंगे क्योंकि दोनों
6:42टॉपिक्स एक दिन आपको तंग करेंगे। फिर
6:45सेंट्रीफ्यूगेशन क्या होता है? बेटा वर्ड
6:48इतना फैंसी चीज उतनी ही सिंपल। रेयरली आप
6:52में से किसी का घर होगा जिसके घर में
6:54सेंट्रीफगेशन की मशीन नहीं होगी। 90% घरों
6:58में पड़ी हुई है। महंगी नहीं है। सस्ती सी
7:01चीज है। 20 30 40 50 हार्ड उतनी
7:05फोटो दिखा दे। ये देखो
7:09ये ये पड़ा हुआ है घर पे। ये
7:13इसको देसी भाषा में मतना कह देते हैं शायद
7:15से। कुछ और कहते होंगे तो बताना।
7:18इसको इस जगह से पकड़ा जाता है
7:22और फिर ऐसेसे इसको मतलब प्रॉपर आवाज आती
7:24है जब आप इसको ऐसे घुमाते हो इससे किचन
7:28में जाके देखो ये चीज पड़ी होगी अक्सर लोग
7:30जैसे रायता बनाना होता है दही को पतला
7:33करने के लिए इसको यूज़ करते हैं ठीक है
7:37ये चीज और लैब्स वगैरह में ये तो तुच्चा
7:41लगेगा ना तो लैब्स वगैरह में ये मशीन पड़ी
7:44होती है आप कभी किसी इवन ब्लड टेस्ट वगैरह
7:47वाली वाली लैब में चले जाओ ना। वहां पर
7:49कुछ मिले ना मिले आपको ब्लड टेस्ट रिपोर्ट
7:51वाली लैब में यह मशीन जरूर मिलेगी। यह
7:54थोड़ी फैंसी होगी और हमारे यहां
7:56हिंदुस्तान में देसी तरीके से तो ये है
7:57ही। दोनों का काम क्या है? चीज को इतनी
8:00तेज इतनी तेज इतनी तेज स्पिन करना कि उसके
8:03जो पार्टिकल्स है वो बाहर आ जाए। इवन जो
8:07वाशिंग मशीन का ड्रायर होता है ना वो भी
8:10थोड़ा-थोड़ा इसी कांसेप्ट पे वर्क करता
8:12है। वाशिंग मशीन में आपने कपड़े धोए। नो
8:15डाउट उसके साथ में एक ड्रायर है वो उसको
8:18पूरा सुखाता तो नहीं है लेकिन उसके अंदर
8:21जो पानी रह जाता है ना उसको निचोड़ देता
8:24है। वो ड्रायर कभी आपने देखा होगा वो गोल
8:26गोल गोल गोल जिस तरीके से घूमता है ना वो
8:28हैवी स्पिनिंग जो होती है वो चीज ये
8:31सेंट्रीफ्यूगेशन है। सेंट्रीफ्यूगेशन क्या
8:34होता है? एक प्रोसेस है जिसमें आप बहुत
8:36हैवी हेवी पार्टिकल्स को सेपरेट कर लेते
8:38हो किसी लिक्विड से। उस मिक्सचर को स्पिन
8:41करके यानी घुमा के बहुत हाई स्पीड से जैसे
8:44दही को मथना जब आप दही को मथते हो कभी करा
8:48है किसी ने उसमें क्या होता है दही के
8:50अंदर जो हैवी हेवी पार्टिकल्स है फैट के
8:52क्रीम के जो भी है डेरी प्रोडक्ट है ना
8:56इतनी तेज उसे घुमाने से वो हैवी हेवी
8:58पार्टिकल सेपरेट हो जाते हैं और पतला दही
9:00नीचे रह जाता है फिर जिसका आप रायता या
9:02लस्सी बनाते हो ठीक है लस्सी वाले यार
9:04इसका यूज़ करते हैं रायते वाले करते हैं
9:07बड़े-बड़े लेवल पर आपने कभी देखा हो देखो
9:10हमारे एरियाज में कोई डेरी उतनी बड़ी नहीं
9:12है। मार्केट साइड में आपने कोई डेरी देखी
9:14हो बड़ी लेवल की। वहां पर एक सिल्वर कलर
9:16की बड़ी सी मशीन होती है जो घूमती रहती
9:18है। वो सेंट्रीफ्यूगेशन मशीन ही होती है।
9:21इसका प्रिंसिपल क्या है? बड़ा सिंपल है
9:23भाई। जिस टाइम पर आप इतनी तेजी से
9:25घुमाओगे, जिस टाइम आप स्पिनिंग करोगे, जो
9:28हैवी पार्टिकल्स है ना वो बाहर की तरफ
9:30जाएंगे। मूव आउटवर्ड्स और बाद में जाकर
9:34नीचे बैठ जाएंगे। और जो हल्का लिक्विड है
9:37ना लाइटर लिक्विड वो ऊपर रह जाएगा। जब आप
9:39इतनी तेज उसको स्पिन करोगे देखना अभी आवाज
9:42आ रही है सिर अभी की इतनी तेज अगर आप किसी
9:44चीज को स्पिन करोगे
9:47ऐसीसी आवाज आती है जब आप मथने वाली मशीन
9:49चला रहे होते हो ऐसी सी मतलब अगर हाथ में
9:52कोई रिंग एंड ऑल डाल के रखी है तो उससे वो
9:54टकराती है तो ऐसी आवाज आती है जब बहुत हाई
9:56स्पीड पे आप उसको स्पिन करते हो तो
9:58फिजिक्स की वजह से क्या होता है भाई जो
10:00हैवी पार्टिकल्स है ना वो फटाफट उससे अलग
10:03हो जाते हैं और नीचे की तरफ बैठ जाते हैं
10:05हल्के वाला लिक्विड ऊपर बचता है और फिर
10:07उसको यूज़ किया जाता है। यह क्यों होता है
10:10भाई? सेंट्रीफ्यूगल फोर्स की वजह से।
10:13सेंट्रीफ्यूगल फोर्स क्या होती है? वैसे
10:15तो बेटा अभी मैंने एक वर्ड यूज़ करा था ना
10:17फिजिक्स। सेंट्रीफ्यूगल फोर्स फिजिक्स का
10:20कांसेप्ट है। जब हम फोर्स वाला चैप्टर
10:22पढ़ेंगे ना जो हमने नेक्स्ट करना है। वहां
10:24पर हम इसके बारे में पढ़ेंगे। चैप्टर का
10:26नाम फोर्स ही है। ठीक है? हाउ फोर्स
10:28अफेक्ट्स मोशन। वहां पर हम इसके बारे में
10:30पढ़ेंगे। अभी मैं यहां पर बिल्कुल शॉर्ट
10:33में बता रहा हूं क्योंकि नेक्स्ट चैप्टर
10:34में पढ़ना ही है। सेंट्रीफ्यूगल फोर्स समझ
10:37आया तो ठीक नहीं भी नहीं भी आया ना तो कोई
10:40बहुत घबराने वाली बात नहीं है क्योंकि
10:41नेक्स्ट चैप्टर में हम बहुत डिटेल में
10:43पढ़ेंगे। यहां तो बस नाम है भाई उसका।
10:46सिर्फ नाम
10:47सेंट्रीफ्यूगल फोर्स क्या होती है? द
10:50आउटवर्ड फोर्स एक्टिंग ऑन अ बॉडी मूविंग
10:53इन अ सर्कुलर पाथ इज कॉल्ड सेंट्रीफ्यूगल
10:56फोर्स। डेफिनेशन तो इजी सी है। जो बाहर की
11:00तरफ फोर्स लग रही है किसी बॉडी पर, किसी
11:03ऑब्जेक्ट पर, जो सर्कुलर पाथ में चल रहा
11:06है, उसको सेंट्रीफ्यूगल फोर्स कहते हैं।
11:09अब होता क्या है भाई? जिस टाइम पर मान लो
11:11आपने ये इसका यूज़ करा घर पे ये मथने वाली
11:14मशीन का। ठीक है? आप मान लो इसको दही में
11:17घुमा रहे हो। ये हैंडल नीचे से पकड़ के
11:19इसको ऐसे गोल गोल गोल गोल ऐसेसे ऐसी आवाज
11:22आती है जब आप इसको कर रहे होते हो।
11:24ऐसी ऐसी आवाज आती है। ठीक है? आप इसको
11:27घुमा रहे हो। होगा क्या वहां पर? जिस टाइम
11:31इसको आप इतनी तेज पिन कर रहे हो ना, अब उस
11:33कर्ड के अंदर हैवी हेवी पार्टिकल्स भी थे।
11:35क्रीम के, मलाई के, जो मर्जी कह लो। डेली
11:38प्रोडक्ट है ना वो एकदम से बाहर की तरफ
11:41मूव होते हैं। उस पूरे लिक्विड में से
11:43हटते हैं और फिर नीचे बैठ जाते हैं। और जो
11:45हल्का सा लिक्विड होता है, हल्का लिक्विड
11:47वो ऊपर ऊपर रह जाता है। आपका दही का रायता
11:50बन गया। आप लस्सी बना रहे हो तो लस्सी बन
11:52गई। और ब्लड लैबोरेटरीज में भी इसका यूज़
11:55होता है। वहां पर ये मशीन पड़ी होती है।
11:57इसमें भी यही होता है। यह भी पढ़ेंगे कैसे
11:59होता है। ठीक है? यूज में पढ़ेंगे इसके
12:01बारे में। घर पे ये वाली मशीन नहीं है। ये
12:04देखना अगर मैं इसके यूजज़ की बात करूं। यूज
12:07ऑफ़ सेंट्रीफ्यूेशन।
12:09पहला ही आ गया सेपरेशन ऑफ ब्लड
12:11कॉम्पोनेंट्स। अब देखो इस वाली मशीन के
12:13बारे में मैं बताऊं। मैं कह रहा है यार आप
12:15तुच्छ से तुच्छ किसी भी लैब में चले जाना
12:17जब ब्लड टेस्ट होते हैं। आपको वहां ये
12:20मशीन मिलेगी ही मिलेगी। इसमें क्या होता
12:22है? आपने अपना ब्लड सैंपल दिया उन्हें।
12:24आपको कोई लग रहा है कि डिजीज हो सकती है।
12:26आपको थोड़ा डर है। आपने अपना ब्लड टेस्ट
12:28कराया। आपकी ब्लड का सैंपल ही इस मशीन में
12:31डालते हैं। और हमें पता है यार ब्लड में
12:34ना आगे टिश्यू चैप्टर में पढ़ोगे। ब्लड के
12:36अंदर ना काफी कुछ होता है। रेड ब्लड
12:38सेल्स, वाइट ब्लड सेल्स,
12:42प्लेटलेट्स वगैरह कुछ होता है यार ब्लड
12:44में। प्लाज्मा
12:46ये ब्लड के कॉम्पोनेंट्स कहलाते हैं।
12:50और अगर कोई बाय चांस आपकी कोई बीमारी है
12:53और ब्लड के अंदर कोई इनफेक्शन फैल गया तो
12:55वो भी इसी ब्लड में होगी। अब जब वो इस
12:58मशीन में आपके ब्लड के सैंपल को बहुत हाई
13:00स्पीड पे घुमाएंगे ना तो ब्लड के
13:02कॉम्पोनेंट्स अलग-अलग हो जाते हैं। उस
13:05टाइम पर फिर चेकिंग करके देखा जा सकता है
13:07आगे फदर टेस्ट में कि बच्चे को कोई
13:09प्रॉब्लम है कि नहीं।
13:11तो
13:13पहला यूज़ यह था ब्लड के कंपोनेंट्स को
13:15सेपरेट करने के लिए। दूध में से मलाई अलग
13:18करने के लिए। आपने देखा है कभी अपने घर पे
13:20आपने देखा होगा कि अपने मदर को वो ऐसे
13:22इसका यूज़ कर रहे हैं। केमिकल इंडस्ट्रीज
13:24में यूज़ होता है। लैब्स में इसका यूज़ होता
13:26है। ठीक है? ये इंपॉर्टेंट इस साल
13:28एनसीआरटी की लाइन है जो अभी बताया ना कि
13:30ब्लड को सेपरेट कर सकते हैं रेड ब्लड
13:31सेल्स में, प्लाज्मा में इस
13:33सेंट्रीफ्यूेशन को ही यूज़ करके। ठीक है?
13:36कांसेप्ट्स दोनों इसमें इंपॉर्टेंट है।
13:38सेंट्रीफ्यूेशन भी, टिंडल इफेक्ट भी।
13:40अप्रोक्स अप्रोक्स ये जो 14 मिनट की
13:42वीडियो है, इसको दो बारी जरूर देख लेना।
13:45क्वाइटेंट एक-एक चीज के नोट्स बनाने हैं।
13:48ठीक है? एक-एक चीज के बहुत ज्यादा
13:50इंपॉर्टेंट है। शॉर्ट में बता रहा हूं
13:53जरा। टिंडल इफेक्ट क्या था? लाइट का आधा
13:56अधूरा फैलना। द स्कैटरिंग ऑफ बीम ऑफ लाइट
13:58थ्रू द पार्टिकल्स ऑफ कोलाइट इज कॉल्ड
14:00टिंडल इफेक्ट। दो जगह ऑब्जर्व कर रहे हो।
14:03जब बंद कमरे में हल्की सी धूप की किरण आ
14:05रही है तो डस्ट पार्टिकल्स नजर आने लग
14:06जाते हैं। वो नंबर टू वो घने जंगल वाला।
14:09उसके बाद सेंट्रीफ्यूेशन का मतलब क्या है?
14:12सेंट्रीफिकेशन समझना हो ना तो आज कुछ ना
14:14करो। सिंपल सा काम कर लो। घर पे ना दही
14:18अगर पड़ा हुआ है ना और ये वाली चीज घर पे
14:21पड़ी हुई है। अगर मैं सही कह रहा हूं। अगर
14:23आपके घर पे नहीं है ना पड़ोसी के घर पूछ
14:24लेना। कहना मथना पड़ा है। पड़ा होगा। आपके
14:28घर नहीं पड़ा किचन में तो पड़ोसी के घर
14:29पक्का होगा। उससे जाके इसको मांगो और ना
14:33दही को रख के ऐसेसे स्पिन करते रहो 510
14:36मिनट हाइस मिनट अपने आप आपको पता लग जाएगा
14:38सेंट्रीफिकेशन क्या होती है क्योंकि यार
14:40सुनना अलग चीज है एक्सपेरिमेंट करना अलग
14:42चीज है आप दही को मत के देखो ऑब्वियसली आप
14:44देखोगे कि वो जो गाढ़ा था वो पतला हो गया
14:47ये चीज होती है भाई ठीक है