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0:0211th क्लास यह बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट
0:05टॉपिक है जो अभी हम इस वीडियो में कवर
0:07करेंगे। एमओए एओए का डिफरेंस वैसे ये
0:11टॉपिक मेरे को थोड़ा बाद में करवाना था बट
0:14सीएल कॉन्वेंट स्कूल का एग्जाम आ रहा है
0:16उसके लिए ये ओवरेंट है और 99.99%
0:21जो आप लोगों ने अभी एग्जाम देना है अपना
0:23मंडे ट्यूसडे में पेपर में आपको ये
0:25डिफरेंस देखने को मिलेगा ही मिलेगा। ठीक
0:28है? तो सिया और वंशिका स्पेशली इसको ध्यान
0:31से कर लेना ओवरेंट डिफरेंस है और बाकी
0:34स्कूलों के लिए भी ये होता क्या है और
0:37पहली बात एब्सोरेंट इसको मोई नहीं बोलना
0:41इट इज एम ओ ए ए ओ ए ये जो है ये दोनों ही
0:47कंपनी के बहुत इंपॉर्टेंट डॉक्यूमेंट्स
0:49होते हैं। एमओए भी और एओए भी ये दोनों के
0:54दोनों डॉक्यूमेंट्स एक कंपनी के बहुत
0:55ज्यादा इंपॉर्टेंट डॉक्यूमेंट्स होते हैं।
0:58तो पहले तो फुल फॉर्म की अगर मैं बात करूं
1:00एमओए की फुल फॉर्म आपको याद रखनी है
1:03मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन
1:06और एओए की आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन पहला पॉइंट
1:11तो सिंपल है ना फुल फॉर्म मेमोरेंडम ऑफ
1:13एसोसिएशन आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन ये एक
1:15एक्स्ट्रा पॉइंट ये है शुरुआत आप मीनिंग
1:18से करना फिलहाल नोट्स में लिख लेना फुल
1:19फॉर्म क्योंकि आपको नहीं पता फुल फॉर्म
1:21उसकी अब होता क्या है यार एमओए कंपनी का
1:26वो डॉक्यूमेंट होता है सबसे मेन
1:27डॉक्यूमेंट एओए से भी ज्यादा जरूरी
1:30डॉक्यूमेंट सबसे मेन ऐसे याद रख लेना बेटा
1:33एम फॉर मेमोरेंडम एम फॉर मेल ये कंपनी का
1:37सबसे मेन डॉक्यूमेंट होता है जो ये सब
1:40बताता है कि कंपनी क्यों खोली गई है। यही
1:43यहां पर कुछ लिखा भी हुआ है कि कंपनी के
1:44ऑब्जेक्टिव्स डिफाइन करता है। ठीक है?
1:47एमओए इज दैट डॉक्यूमेंट व्हिच डिफाइन द
1:51ऑब्जेक्टिव्स ऑफ द कंपनी। एमओए में
1:53साफ-साफ लिखा होता है कि हमने कंपनी क्यों
1:55खुलवाई है? हमारा पर्पस क्या है कंपनी को
1:58खुलवाने का? क्योंकि यार कंपनी खुलवाना एक
2:01आसान काम तो होता नहीं है। एमओए के अंदर
2:03सारी डिटेल्स लिखी होती है। मतलब ए टू जेड
2:06कंपनी की पूरी जैसे होता है ना हमारे यहां
2:09हिंदुस्तान में जन्म कुंडली कंपनी की जन्म
2:11कुंडली उसका एमओए होता है। उसमें सब कुछ
2:14लिखा होगा। कंपनी का नाम क्या है? क्यों
2:17है? कंपनी का हेड ऑफिस कहां पर है? कंपनी
2:20का क्या मकसद है? क्या ऑब्जेक्टिव है?
2:23कंपनी में क्या लायबिलिटी होगी? अब आपने
2:26तो एक वर्ड सीख लिया कि कंपनी की
2:28लायबिलिटी लिमिटेड होती है। बेटा लिमिट की
2:30भी तो एक लिमिट होती है ना। इतनी लिमिटेड
2:33बुक्स में लिखा होता है। ठीक है? कंपनी के
2:36कौन-कौन डायरेक्टर्स कंपनी को खुलवा रहे
2:38हैं? ऐसीऐसी चीजें होती है। कंपनी कितने
2:41के शेयर्स बेच सकती है? कितने पैसे के हो
2:43सकते। एमओ इज़ दैट डॉक्यूमेंट ऑफ द कंपनी
2:46व्हिच डिफाइन द ऑब्जेक्टिव्स ऑफ द कंपनी।
2:50और एओआई के बारे में हमने उस दिन थोड़ा सा
2:52पढ़ा था। याद करो एक चीज डिफरेंस जब हम
2:54प्राइवेट और पब्लिक कंपनी का कर रहे थे।
2:56वहां मैंने आपको एक चीज बोली थी कि एओए को
2:59ना अगर टू वर्ड में याद रखना है ना तो याद
3:02रख लो रूल बुक। एओए यानी आर्टिकल ऑफ
3:05एसोसिएशन ना कंपनी के सारे रूल्स वगैरह
3:08बताती है कि कंपनी अपने इन ऑब्जेक्टिव्स
3:11को यह जो अभीभी आपने एमओए में पढ़ा ना कि
3:13एमओए ऑब्जेक्टिव्स बताती है। ये जो ग्रे
3:15हुआ है अभीभी ऑब्जेक्टिव्स ऑफ द कंपनी
3:17बताती है। इन ऑब्जेक्टिव्स को प्राप्त
3:20करने के लिए कंपनी किन रूल्स को फॉलो
3:24करेगी वो सब। अब एओए की डेफिनेशन क्या है?
3:27एओ इज दैट डॉक्यूमेंट वि डिफाइन द रूल्स
3:31फॉर अटेनिंग द ऑब्जेक्टिव्स। यह अटेनिंग
3:35का मतलब होता है अचीविंग। अटेनिंग वर्ड
3:38जिस बच्चे ने नहीं लिखना है ना वो अचीविंग
3:40लिख लेना। अचीव की जगह अचीविंग लिख लेना
3:43कि एओए कंपनी का वो डॉक्यूमेंट होता है जो
3:46सारे के सारे रूल्स बताएगा। जिन रूल्स को
3:49फॉलो करके कंपनी अपने ऑब्जेक्टिव्स को
3:52पूरा करेगी। ठीक है जी। सेकंड पॉइंट नेचर।
3:57सेकंड पॉइंट क्या है? नेचर। एमओए इज द
4:01लीगल चार्टर ऑफ द कंपनी। चार्टर नहीं
4:04बोलना इसको। चार्टर बोलते हैं। चार्टर
4:06ऑलरेडी एक फॉर्मल डॉक्यूमेंट होता है।
4:08एमओए कंपनी का लीगल चार्टर है। लीगल
4:10चार्टर का मतलब कि कंपनी का सारा लीगल
4:12स्टेटस वगैरह इसमें दर्शाया जाता है। वही
4:15ना कि कंपनी क्यों खुली? उसका नाम क्या
4:16है? सारी उसका जो जैसे अभी बताया ना
4:19कुंडली समझ लो या जैसे हिंदुस्तानी के लिए
4:22आधार कार्ड बहुत जरूरी है। ऐसे ये कंपनी
4:25के लिए उसका एमओए हो गया जो उसका प्रूफ
4:27देता है हमें एओए क्या है? उस दिन भी लिखा
4:30था हमने एओए तो रूल बुक है कंपनी की। तो
4:32ये भी सिंपल पॉइंट था। थर्डेंस किसकी
4:35ज्यादा है? किसकी थोड़ी सी कम है? बेटा या
4:38अभी-अभी बताया आपको याद रखने का तरीका।
4:40एमओए में एम लिखा हुआ है। एम का मतलब क्या
4:43होता है? मेन
4:46एमओए मेन डॉक्यूमेंट है। एमओए फिर भी
4:49थोड़ा एक्स्ट्रा में आ जाता है। तोेंस
4:53एमओए इज द मोस्ट वाइटल डॉक्यूमेंट ऑफ द
4:56कंपनी। कंपनी का सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट
4:59है। एओए क्या है? एओए। एओए इज द सब्सिडरी
5:03डॉक्यूमेंट ऑफ द कंपनी। सब्सिडरी मतलब
5:06एक्स्ट्रा में इन एडिशन। ठीक है? इन एडिशन
5:10एक्स्ट्रा डॉक्यूमेंट जो होते हैं और अगर
5:13इसका लॉजिक चाहिए ना कि हम कैसे मान ले वो
5:15मोस्ट वाइटल है और वो सब्सिडरी है तो उसका
5:17जवाब इतना सा है भाई एमओए ना हर कंपनी को
5:20बनाना होता है तभी मैंने पब्लिक और
5:22प्राइवेट कंपनी के डिफरेंस में एमओए की
5:24कोई बात ही नहीं करी थी क्योंकि नो मैटर
5:26आपकी पब्लिक कंपनी हो प्राइवेट कंपनी हो
5:28एमओए उसको बनाना ही पड़ेगा इतना जरूरी है
5:31लेकिन याद रखो हमने डिफरेंस में लिखा था
5:33कि एओए सिर्फ प्राइवेट कंपनी बनाती है ना
5:36तो एओए एक तरीके का थोड़ा सब्सिडरी
5:38डॉक्यूमेंट हुआ ना जो एक्स्ट्रा है
5:41रिलेशनशिप
5:43रोना नहीं किसी बच्चे ने
5:46एमओए जो है एमओए डिफाइन द रिलेशंस ऑफ द
5:50कंपनी विद आउटसाइडर्स एमओए कंपनी के सारे
5:53संबंध बताता है बाहर वाले लोगों के साथ और
5:57एओए अपने लोगों के साथ एओए डिफाइन द
6:01रिलेशंस ऑफ द कंपनी एंड इट्स मेंबर्स
6:04कंपनी और उसके मेंबर्स के क्या रिलेशंस
6:06हैं और एमओए कंपनी के रिलेशन बताता है
6:09बाहर वालों के साथ। नेक्स्ट पॉइंट
6:12कंपल्शन।
6:13यार अभी-अभी पढ़ रहे हैं इतनी देर से कि
6:15एमओए जो है वो बहुत जरूरी डॉक्यूमेंट है।
6:18तो एमओए को बनाना क्या होता है? मैंडेटरी।
6:20मैंडेटरी मतलब कंपलसरी। जिस बच्चे को
6:23मैंडेटरी वर्ड नहीं लिखना ना मैंडेटरी
6:26वर्ड नहीं पसंद आ रहा तो वो वर्ड लिख सकता
6:28है। कंपलसरी।
6:30कंपलसरी
6:32मतलब जरूरी है। बनाना ही है।
6:36ये चीज। बहुत जरूरी होता है एमओए को
6:40बनाना। लेकिन
6:43एओए को बनाना जरूरी सिर्फ और सिर्फ किसके
6:46लिए होता है? प्राइवेट कंपनीज़ के लिए।
6:47बेटा ये कोई नया पॉइंट नहीं है कि उस दिन
6:49जो आपने पब्लिक और प्राइवेट कंपनी का
6:51डिफरेंस करा था वहां से ही तो उठाया है कि
6:53प्राइवेट कंपनीज़ को एओए बनाना होता है।
6:57नेक्स्ट
6:58सब्जेक्ट मैटर। सब्जेक्ट मैटर का मतलब
7:01होता है कि इसके अंदर क्या-क्या आएगा। तो
7:04जो मैं आपको मीनिंग के टाइम पर समझा रहा
7:05था ना हिंदी में वो सब एमओए के अंदर कंपनी
7:08के ऑब्जेक्टिव्स कंपनी का कितना कैपिटल है
7:11क्या नाम है क्या लोकेशन है ये सब चीजें
7:14आती है मेन डॉक्यूमेंट है ना और एओआई को
7:16तो रूल बुक बोलते हैं तो कंपनी के सारे
7:18रूल्स और रेगुलेशंस आते हैं इसके अंदर
7:21नेक्स्ट ऑल्टरेशन बेटा आपने ऑल्टरेशन वर्ड
7:24आखिरी बारी कहां सुना था कि आपने कोई
7:27क्लोथिंग स्टिच आपने कोई क्लोथिंग वगैरह
7:29बनवाई आपने उसको ऑल्टर कराना है टेलर से
7:32ऑल्टर का मतलब उसको उसकी फिटिंग करवानी
7:34है। उसमें चेंजेस करवाने हैं। लूज या टाइट
7:37करवाना है। है ना? ऑल्टरेशन का मतलब तो
7:39यही होता है ना। जैसे बोलते हैं कि किसी
7:41ने अपनी पट को ऑल्टर कराना है। मतलब उसकी
7:43फिटिंग चेंज करानी है। थोड़ा लूज टाइट
7:45कराना है वो सब। तो क्योंकि एमओए कंपनी का
7:48बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट डॉक्यूमेंट है। वो
7:51ईजीली ऑल्टर नहीं हो पाएगा। सिंस इट इज़
7:54वेरी वेरीरीेंट डॉक्यूमेंट। इट कांट बी
7:55इजीली ऑल्टर। बट एओए जो है फिर भी ऑल्टर
7:59किया जा सकता है। वो भी ऐसे नॉर्मली नहीं
8:02एक स्पेशल रेजोल्यूशन पास करके। तो भाई ये
8:05डिफरेंस काफी इंपॉर्टेंट है। पॉइंट्स आप
8:07देख लो टोटल कितने हैं यहां पर टोटल
8:10पॉइंट्स। ये तो फुल फॉर्म ही है। इसको ना
8:12भी गिनो तो एक ये दो ये तीन ये चार देन
8:18फिफ्थ सिक्स्थ सेवंथ। छह नंबर से बड़ा
8:22क्वेश्चन नहीं आएगा। हमारे पास स्टिल वहां
8:24पर सात पॉइंट है। कोई छह भी याद रह गए ना
8:28आपको फुल फॉर्म के अलावा तो मोर दन इनफ
8:30है। फुल फॉर्म मिलाकर तो आठ पॉइंट है।
8:32बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट डिफरेंस है। ऐसा
8:35नहीं होगा कि ये पूरे साल भर में किसी
8:37स्कूल में आए ही ना हो। ये बेटा वो वाले
8:39टॉपिकों में से हैं जो मतलब अंधे
8:42इंपॉर्टेंट टॉपिक्स है ना कि यार हर कोई
8:44तैयार करवाएगा कि आना ही आना है। यह उन
8:46टॉपिकों में से एक टॉपिक है। इतना
8:48इंपॉर्टेंट है इसका ध्यान रखना जरा। ठीक
8:51है?