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Employment | Indian Economics | One shot Revision |

Anish Dhammi · 4,488 words · 21 min read

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0:03हां जी 12th क्लास एक चैप्टर आपका रिवीजन

0:06के लिए बचा है दैट इज एंप्लॉयमेंट वो इस

0:08वीडियो में कवर करेंगे फटाफट से ठीक है

0:10एंप्लॉयमेंट पढ़ने से पहले यार थोड़ी

0:12जल्दी-जल्दी से क्विक रीक आप करेंगे

0:14अनइंप्लॉयमेंट क्या होता है अनइंप्लॉयमेंट

0:16मतलब बेटा बेरोजगारी बेरोजगारी एक ऐसी

0:19सिचुएशन जब लोग काम करना चाहते हैं काम

0:23करने के काबिल है उस रेट पर काम करने को

0:26तैयार है जो रेट चल रहा है मार्केट में

0:28वेज रेट

0:30बट उन्हें फिर भी काम नहीं मिल रहा। यह

0:33चीज आप लिख के आओगे कि इट रेफर्स टू अ

0:35सिचुएशन व्हेन पीपल आर विलिंग टू वर्क।

0:38लोग काम करने को तैयार हैं। ठीक है? एबल

0:41टू वर्क है। विलिंग टू वर्क है कि

0:43एकिस्टिंग वेज रेट पे काम करने को तैयार

0:45है कि मार्केट में अगर ₹600 दहाड़ी मिलेगी

0:47ना तो वो ₹600 पे भी काम करने को तैयार

0:49है। काम करने के काबिल भी है। बट फिर भी

0:52उन्हें काम नहीं मिल रहा। दैट इज़

0:54अनइंप्लॉयमेंट।

0:55[नाक से की जाने वाली आवाज़] इसके कुछ

0:55कॉजज़ क्या है भाई? क्या कारण है

0:56अनइंप्लॉयमेंट के? यार इंडिया में

0:58पॉपुलेशन इतनी ज्यादा है कि हर एक को काम

1:01मिल ही नहीं पाता। मोस्ट ऑफ द आपकी

1:03जनसंख्या एग्रीकल्चर में है और एग्रीकल्चर

1:06तो अपने आप में एक सीजनल काम है भाई।

1:08जॉइंट फैमिली सिस्टम है जिससे डिसगाइस्ड

1:10अनइंप्लॉयमेंट हो जाती है। डिसगाइस्ड

1:12अनइंप्लॉयमेंट वगैरह क्या होती है सब आगे

1:14वीडियो में आएगा।

1:16लिमिटेड मोबिलिटी ऑफ़ लेबर है। लेबरर्स

1:18ज्यादा दूर जाते नहीं है। बेशक उनके पास

1:20ओपोरर्चुनिटी हो। होम सिकनेस है ना भाई वो

1:22कुएं की मेंढक वाली मेंटालिटी।

1:26इंडिया की कॉटेज और स्माल स्केल

1:27इंडस्ट्रीज तो काफी टाइम से डीके हो गई

1:29है। जिस और सिर्फ बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज

1:31मेजरली बची है जो काम करवाती है मशीनों

1:34से। पैसे वाली पार्टी है भाई। मशीनों से

1:36काम कराती है। जिसकी वजह से जॉबलेस ग्रोथ

1:39हो रही है। लो सेविंग्स और लो

1:40इन्वेस्टमेंट है। अब इससे क्या होता है

1:43भाई? लो सेविंग है, लो इन्वेस्टमेंट है।

1:45इससे प्रोडक्शन कम होगी और कम जॉब्स

1:47क्रिएट होंगी। इकोनॉमिक ग्रोथ बहुत स्लो

1:49है हमारी। हमारी इकॉनमी उतनी तेजी से ग्रो

1:53नहीं कर रही जितनी तेजी से करनी चाहिए थी।

1:55और एक्स्ट्रा में कुछ और पॉइंट्स लिखने

1:57हैं आपने। तो

2:00इनएडीिक्वेट वोकेशनलाइजेशन एचसीएफ का

2:02पॉइंट है भाई ये कि हमारे यहां पर वोकेशनल

2:05कोर्सर्सेस ज्यादा नहीं है। टेक्निकल

2:07प्रैक्टिकल कोर्सेस ज्यादा नहीं है। कोविड

2:08की वजह से लोग कहते हैं कि जॉब लॉस बहुत

2:10हुआ। करप्शन घपलेबाजी बहुत है। एजुकेशन

2:12लेवल कम है। सेल्फ एंप्लॉयमेंट का स्कोप

2:15बहुत कम है भाई। ठीक है? और

2:17इंडस्ट्रियलाइजेशन की भी कमी है देश में।

2:19अनइंप्लॉयमेंट के अलग-अलग टाइप्स क्या

2:21होते हैं भाई? दो कैटेगरीज रूरल और अर्बन।

2:24गांव में अक्सर कौन सी अनइंप्लॉयमेंट देखी

2:26जाती है? एक डिसगाइस्ड और एक सीजनल। अब

2:30शहरों में कौन सी देखी जाती है?

2:32इंडस्ट्रियल और एजुकेटेड। कुछ और टाइप्स

2:35कौन सी हैं? फीमेल्स को काम नहीं मिल रहा।

2:37वुमेन अनइंप्लॉयमेंट। यंगस्टर्स को काम

2:39नहीं मिल रहा। यूथ अनइंप्लॉयमेंट। एक जॉब

2:42से दूसरी जॉब के बीच में बेरोजगार हो।

2:44मतलब एक जॉब छोड़ दी दूसरी मिली नहीं।

2:46फ्रिक्शनल अनइंप्लॉयमेंट। इकॉनमी में

2:48फ्लक्चुएशन उसके चक्कर में बेरोजगारी

2:50होगी। साइक्लिकल अनइंप्लॉयमेंट ओपन तो फुल

2:53अनइंप्लॉयमेंट को कहते हैं। एक-एक करके

2:56सारी डिटेल में पढ़ते हैं। डिसगाइस्ड

2:58अनइंप्लॉयमेंट क्या होता है भाई? ध्यान से

2:59सुनिएगा।

3:01जब नंबर ऑफ़ वर्कर्स जो किसी जॉब में लगे

3:03हुए हैं वो ज्यादा हैं देन द वर्कर्स

3:06एक्चुअली रिक्वायर्ड। इंडिया में

3:07खेतीबाड़ी में सबसे ज्यादा यह होता है।

3:09बेटा ध्यान रखना डिसगाइस्ड अनइंप्लॉयमेंट

3:11को ही क्या बोला जाता है? हिडन

3:13अनइंप्लॉयमेंट। कि बाहर से दिख नहीं रही।

3:17लोगों को तो लग रहा है कि यार कि फलाने का

3:18लड़का खेत में जा रहा है, काम कर रहा है।

3:20बट एक्चुअल में वहां उसकी जरूरत ही नहीं

3:22है। वह सिर्फ टाइम पास के लिए वहां जा रहा

3:23है। उसको डिसगाइस्ड अनइंप्लॉयमेंट कहते

3:25हैं। और गांव में देखने को मिलती है बेटा

3:27सीजनल अनइंप्लॉयमेंट। एग्रीकल्चर ही देख

3:30लो आप। एक सीजनल ऑक्यूपेशन है। ठीक है?

3:32सीजनल नेचर है एग्रीकल्चर का। एंप्लॉयमेंट

3:35मिलती है लेकिन एक सीजन में सबसे ज्यादा

3:38आप लोगों के जो फार्म लेबरर्स आते हैं वो

3:40कब आते हैं? एक तो फसल बोते टाइम और एक

3:42उसकी कटाई के समय। बाकी टाइम तो

3:44अनइंप्लॉयड ही रहते हैं ना। शहरों में कौन

3:46सी अनइंप्लॉयमेंट देखी जाती है?

3:48इंडस्ट्रियल अनइंप्लॉयमेंट।

3:51एक ऐसी सिचुएशन जहां पर इलिटरेट पर्संस जो

3:54ज्यादा पढ़े लिखे नहीं है वो काम करने को

3:56तो तैयार हैं इंडस्ट्री में बट उन्हें

3:58इसलिए जॉब्स नहीं मिलती क्योंकि वो

4:00इलिटरेट है बेचारे। ऐसा क्यों भाई?

4:02क्योंकि आजकल इंडस्ट्री में ना मॉडर्न

4:04मशीनंस यूज़ हो रही है। अब यार जो बंदा

4:06अनपढ़ है वो कैसे चला लेगा? मान लो भाई

4:09आपको सिखा दिया कि यार ये मशीन है। इसके

4:11अंदर ना एक कोड है। आपने क्या करना है?

4:14तीन बार दो दबाना है। उसके बाद स्टार#

4:185 3 7 यह दबाना है। अब यार जो बंदा

4:22इलिटरेट है जिसको रीड और राइट करना नहीं

4:24आता वो तो इसमें भी गलत करेगा। सब चौपट कर

4:26देगा। तो दैट इज़ अ प्रॉब्लम। ठीक है? वहां

4:31प्रॉब्लम आ जाती है। एजुकेटेड

4:33अनइंप्लॉयमेंट क्या है भाई? जब पढ़े लिखे

4:34लोगों को नौकरियां नहीं मिलती।

4:37एजुकेटेड अनइंप्लॉयमेंट के कुछ कारण अगर

4:39हम पढ़े भाई हमारा एजुकेशन सिस्टम जॉब

4:42ओरिएंटेड नहीं है। पॉपुलेशन बहुत ज्यादा

4:44है। इसके अलावा कुछ और टाइप्स भाई यूथ

4:47अनइंप्लॉयमेंट जब यंगस्टर्स को काम नहीं

4:49मिलता। फीमेल अनइंप्लॉयमेंट जब भेदभाव की

4:51वजह से फीमेल्स को काम नहीं मिलता।

4:54ओपन अनइंप्लॉयमेंट भाई पेपर में बहुत बार

4:56आती है। ध्यान रखिएगा।

5:00जब लोग काम बेसिकली फुल अनइंप्लॉयमेंट जब

5:03लोग काम करने को तो तैयार हैं काम करने के

5:06काबिल भी है बट फिर भी बेचारों को काम

5:08नहीं मिल रहा सारा टाइम के लिए बेरोजगार

5:10है उसको ओपन अनइंप्लॉयमेंट कहते हैं।

5:13स्ट्रक्चरल अनइंप्लॉयमेंट किसको कहते हैं?

5:16जो इकॉनमी में स्ट्रक्चरल चेंजेस की वजह

5:18से होती है। ठीक है?

5:22जैसे कि इकॉनमी के अंदर टेक्नोलॉजी में

5:25बदलाव आया, पैटर्न्स ऑफ़ डिमांड में बदलाव

5:27आया। ठीक है? उसकी वजह से आपकी नौकरियां

5:29नौकरियां चलेगी। अंडर अनइंप्लॉयमेंट होती

5:32है भाई जो इतनी ईजीली दिख भी नहीं रही।

5:35काम है लेकिन कम मिल रहा है। वो चीज काम

5:38कम मिल रहा है। मतलब फॉर एग्जांपल एक बंदे

5:41को 8 घंटे काम करना है लेकिन काम उसे

5:43सिर्फ 2 घंटे का ही मिलता है। ये नहीं कि

5:452 घंटे में वो बहुत पैसे कमा लेता है।

5:47मुश्किल से 2 घंटे का काम मिल पा रहा है

5:49क्योंकि ज्यादा की गुंजाइश ही नहीं है।

5:52अंडर एइंप्लॉयमेंट के दो तरह की कैटेगरीज

5:54होती है। विज़िबल और इनविज़िबल। विजिबल भाई

5:57जो दिख जाए कि 7 घंटे के काम की जगह 4

6:00घंटे का ही काम मिल रहा है। तो पता लग रहा

6:01है यार और इनविज़िबल मतलब जो दिखाई नहीं

6:04देती यह भी बेटा इंडिया में बहुत है। बंदा

6:07एमबीए है लेकिन भाई चपड़ासी की नौकरी कर

6:09रहा है। मजबूरी होगी ना तभी कर रहा है। वो

6:13तो उससे बात करोगे तो पता लगेगा। इसके बाद

6:16फ्रिक्शनल अनइंप्लॉयमेंट भी इंपॉर्टेंट है

6:18कि भाई अक्टूबर 2025 में आपने जॉब एक

6:21क्विट कर दी। फरवरी तक आपको जॉब ही नहीं

6:24मिली। तो बीच के महीने में जो आप बेरोजगार

6:26रहे दो नौकरियों के बीच में उसको

6:28फ्रिक्शनल अनइंप्लॉयमेंट कहेंगे कि

6:30[नाक से की जाने वाली आवाज़] अनइंप्लॉयड

6:31फॉर द टाइम इन वि वन विश टू मूव फ्रॉम वन

6:33जॉब टू अनदर। साइक्लिकल अनइंप्लॉयमेंट

6:36किसको कहते हैं भाई? ऐसी अनइंप्लॉयमेंट जो

6:39साइक्लिकल फ्लक्चुएशनंस की वजह से आ रही

6:41है इकॉनमी में। जैसे कि बूम, डिप्रेशन,

6:44रिसेशन, रिकवरी। बिज़नेस साइकिल्स होती है

6:47ना? तो उस टाइम पर कि भाई जब रिसेशन चल

6:50रहा है, मार्केट डाउन चल रही है, उस टाइम

6:52पे लोगों को निकाल दिया नौकरी से। यहां तक

6:55की बात है भाई चैप्टर में अनइंप्लॉयमेंट

6:57की। इसके बाद असली चैप्टर की शुरुआत

6:59होएगी। दैट इज़ एंप्लॉयमेंट। आई विल

7:01रिकमेंड ये 7 मिनट की वीडियो एक बार पहले

7:04दोबारा से देखो। उसके बाद आगे स्टार्ट

7:06करिएगा।

7:08इसके बाद भाई एंप्लॉयमेंट।

7:12एक-एक करके कुछ डेफिनेशंस। वर्कर कौन होता

7:14है भाई? कोई भी बंदा जो किसी ना किसी

7:17प्रोडक्शन एक्टिविटी में इंगेज्ड है और

7:19जीडीपी में कंट्रीब्यूशन करता है ना भाई

7:21वही वर्कर कहलाने योग्य है। ठीक है? वर्कर

7:24दो तरीके के होते हैं। सेल्फ एंप्लॉयड जो

7:27खुद को खुद ही रोजगार देते हैं और दूसरे

7:29होते हैं हायर्ड जो दूसरों के लिए काम

7:31करते हैं। सेल्फ एंप्लॉयड कौन से होते हैं

7:33जो अपने खुद के बिज़नेस या प्रोफेशन में

7:35लगे हुए हैं। और हायर्ड जो दूसरों के लिए

7:37काम करते हैं। हायर्ड भी बेटा दो तरीके के

7:40होते हैं। कैजुअल हायर्ड या रेगुलर वाले।

7:43डिफरेंस क्या है कैजुअल और रेगुलर के बीच

7:44में भाई ध्यान से सुनिएगा कैजुअल जो डेली

7:47वेजेस पर दिहाड़ी पर काम करते हैं भाई

7:49रेगुलर जो परमानेंट पे रोल पे रोल का मतलब

7:52क्या होता है भाई सैलरी पे परमानेंट सैलरी

7:54पर काम करते हैं बेटा कैजुअल वाले वर्कर

7:57को दिहाड़ी वाले मजदूरों को ना कोई सोशल

7:59सिक्योरिटी बेनिफिट नहीं मिलते जैसे

8:01रिटायरमेंट बेनिफिट पेंशन वगैरह मेडिकल

8:04अलाउंस ये सब नहीं मिलता

8:06रेगुलर वालों को मिलता है ज्यादातर ऐसा

8:09देखा गया है कि भाई कैजुअल दिहाड़ी वाले

8:11लोग ना अनस्किल्ड होते हैं और रेगुलर र

8:13वर्कर स्किल्ड होते हैं। सॉफ्ट स्किल्स

8:15उनको आती होती है। उसके बाद भाई इंडिया का

8:18पार्टिसिपेशन रेट

8:22ये होमवर्क था। पार्टिसिपेशन रेट 2x इसके

8:25बाद

8:27भाई यहां पर कुछ न्यूमेरिकल आ जाते हैं।

8:29ध्यान से देखना। लेबर सप्लाई, लेबर फ़ोर्स,

8:31वर्क फ़ोर्स। बड़े ध्यान से देखना भाई। यहां

8:348:35 से जो स्टार्ट हो रहा है ना काम इसको

8:37दो बार देखना।

8:39लेबर सप्लाई हमेशा घंटों में मेजर होती

8:42है।

8:43कितने अमाउंट ऑफ लेबर आवर्स वर्कर्स रेडी

8:48हैं काम करने को उस वेज रेट पर कि भाई

8:51इंडिया में भी चलो एक एवरेज है कि अगर आप

8:54₹700 [नाक से की जाने वाली आवाज़] दिहाड़ी

8:55देते हो तो कोई बंदा 925 आपके लिए काम कर

8:57देगा 10 से छ कर देगा वो चीज कि भाई 8

9:00घंटे 7 से 9 घंटे कोई काम करेगा ₹700 ₹800

9:05दिहाड़ी के अंदर कितने घंटे लेबर आवर वर्ड

9:08लिखना यहां बहुत जरूरी है भाई वो लेबर

9:10सप्लाई होती है जैसे इंडिया में लेबर

9:12सप्लाई क्या है? अप्रोक्स 8 9 घंटे काम

9:14करने को तैयार हो जाते हैं लोग ₹00 ₹600

9:16की दहाड़ी में। अगली टर्म आती है बेटा

9:20लेबर फ़ और वर्क फ़ोर्स। ध्यान से देखना।

9:23लेबर फोर्स का मतलब कितने वर्कर्स

9:26एक्चुअली एबल टू वर्क है और विलिंग टू

9:28वर्क है। और उनमें से लेबर फोर्स में बेटा

9:31टोटल आगे कितने लोग काम करने को तैयार हैं

9:33काम करने के लिए एबल है। एबल टू वर्क भी

9:36हैं और विलिंग टू वर्क भी है। लेकिन बेटा

9:41विलिंग होने से क्या होता है? अगर आप काम

9:43करने को तैयार हैं तो गारंटी थोड़ी है कि

9:44काम मिल जाएगा। उनमें से जिनको काम मिला

9:47वह वर्क फ़ोर्स है। एक बार यह देखो यहां

9:49लिखा भी हुआ है। व लेबर फ़ोर्स क्या होती

9:51है? टोटल वर्क फ़ोर्स क्या होती है? जिनको

9:54काम मिल गया। ठीक है?

9:58एंप्लॉयड और अनइंप्लॉयड दोनों आते हैं

10:00लेबर फ़ोर्स में जिनको काम मिला और जिनको

10:02काम नहीं मिला। लेकिन वर्क फ़ोर्स में

10:04सिर्फ वो आते हैं जिनको काम मिल गया। नंबर

10:07ऑफ़ पर्संस एक्चुअली वर्किंग।

10:09ठीक है? एग्जांपल भाई

10:14फॉर एग्जांपल टोटल 100 लोग हैं जो काम

10:16करने को तैयार हैं। काम करने के लिए

10:18मिलेंगे। लेकिन 30 को ही काम मिला। तो 30

10:21होगी बेटा वर्क फोर्स और लेबर फोर्स होएगी

10:24टोटल 100 की जिसमें दोनों आ जाते हैं। एक

10:27न्यूमेरिकल से और अच्छे से समझ आएगा भाई।

10:29ये देखो मान लेते हैं एक इकॉनमी के अंदर 1

10:32लाख लेबर आवर्स हैं। लेबरर्स हैं सॉरी।

10:35ठीक है? लेबरर्स 1 लाख हैं। एंड दे आर ओके

10:38इन ऑफरिंग देयर से आवर्स पर डे। टोटल

10:41पॉपुलेशन 3 लाख है। रैंडम डे पे एक सर्वे

10:44हुआ जिससे पता लगा कि 70,000 लोगों को

10:47रेगुलरली काम मिल रहा है। तो ये तीनों

10:49चीजें निकालो भाई। तो बड़ा सिंपल है। सबसे

10:51पहले तो भाई लेबर सप्लाई घंटों में मेजर

10:54होती है। कितने घंटे काम करने को तैयार

10:56है? जी 7 आवर्स पर डे।

11:017 आवर्स पर डे। तो ये तो हो गई बेटा लीवर

11:04सप्लाई। अब डाउट ये उठता है यार कि हम 3

11:08लाख लिखें या फिर 1 लाख लिखें लेबर फोर्स

11:11को। बेटा 3 लाख तो बाकी पापुलेशन होगी ना।

11:14टोटल पापुलेशन वो तो सिर्फ कंफ्यूज करने

11:16के लिए है। टोटल कितने लेबर हैं यार? 1

11:19लाख। तो लेबर फोर्स होगी 1 लाख की। और

11:22उसमें से काम कितनों को मिल रहा है? 70000

11:25को। तो वो होगी वर्क फ़ोर्स। एक और

11:27एग्जांपल है। एक बार ये पढ़ लेना जो डाउट

11:29आएगा पूछ लेना। एक दो एग्जांपल्स।

11:33तीनों में डिफरेंस वही लेबर सप्लाई घंटों

11:35में मेजर होती है। लेबर फोर्स एंप्लॉयड

11:38अनइंप्लॉयड दोनों

11:40और वर्क फ़ोर्स जितनों को काम मिल गया। ठीक

11:43है?

11:45फार्मूला क्या है वर्क फ़ोर्स का? टोटल

11:47लेबर फ़ोर्स कितनी है? और उसमें से

11:49बेरोजगारों को हटा दो।

11:52ध्यान रखना लेबर फ़ोर्स एक ब्रॉडर टर्म है

11:54और वर्क फ़ोर्स एक नैरो टर्म है।

11:58उसके बाद भाई डाटा ही डाटा है चैप्टर में।

12:03साइज ऑफ वर्क फोर्स इन इंडिया। भाई साहब

12:05इंडिया में 47.1 करोड़ लोगों की वर्क

12:08फोर्स है। वर्क फोर्स बेटा दो तरीके से

12:10देखी जाती है। एक तो जेंडर वाइज और एक

12:14एरिया वाइज। जेंडर की अगर मैं बात करूं

12:16भाई 75% मेल वर्क फ़ोर्स है और 25% फीमेल

12:20वर्क फ़ोर्स हैं। और अगर एरिया की बात करें

12:22तो गांव के लोग एरियाज में 75% लोग काम

12:25करते हैं और शहरों में 25%।

12:28ठीक है? अब कुछ सवाल उठते हैं कि यार

12:30फीमेल परसेंटेज ऑफ वर्कर्स लो क्यों है?

12:34क्योंकि यार वुमेन सेफ्टी नहीं है इंडिया

12:35में। फैमिली डिसीजंस और बाउंडेशंस

12:37लड़कियों को काम करने नहीं देते। और

12:42भेदभाव ही बहुत है। फीमेल्स को लो सैलरी

12:45या लो वेजेस मिलते हैं। ज्यादातर वर्क

12:47फ़ोर्स रूरल बेस्ड क्यों है भाई? यार सबसे

12:49सिंपल बात पॉवर्टी उनको मजबूर करती है

12:53भाई। ठीक है?

12:55यहां पर एक बात जरूर लिखेंगे कि गांव के

12:58ज्यादा लोग काम क्यों करते हैं? यार

12:59पॉवर्टी कंपेल्स देम। उनकी गरीबी उनको

13:02मजबूर करती है यार कि काम करो। पॉवर्टी

13:05कंपेल्स देम।

13:09उसके बाद गांव के एरिया में

13:14ज्यादातर लोग खेती करते हैं और उनका

13:16कंट्रीब्यूशन टू जीडीपी कम है। इसलिए

13:18उन्हें सबको मिलके कुछ ना कुछ काम करना

13:20पड़ता है। दूसरा गांव के एरिया में लोग

13:23गरीब हैं। तो ऑलमोस्ट सारे मेंबर्स को

13:26लगना पड़ता है फैमिली से अपनी जिंदगी

13:28चलाने के लिए और गांव के एरिया पे लिमिटेड

13:31रिसोर्सेज हैं ज्यादा इनकम कमाने के। तो

13:35ओवरऑल उनकी गरीबी उनको मजबूर करती है भाई।

13:41इसके बाद अगर हम डाटा पढ़े भाई इंडिया में

13:43सेल्फ एंप्लॉयड कितने लोग हैं? हायर्ड

13:45कितने लोग हैं? शहरों में तुम्हें भी पता

13:47है भाई शहरों में ज्यादा लोग क्या करते

13:49हैं? नौकरी। शहरों में 62% हायर्ड लोग हैं

13:52जो दूसरों के लिए काम करते हैं। स्किल्ड

13:53जॉब्स करते हैं ऑफिस में। और 38% सेल्फ

13:57एंप्लॉयड है जो खुद का काम करते हैं। डाटा

13:59है भाई थोड़ा याद रख सकोगे तो बेटर है।

14:02गांव के एरिया में 58% जनसंख्या अपना खुद

14:05का काम करती है और 42% जनसंख्या लोगों के

14:07लिए नौकरियां करती है। जॉबलेस ग्रोथ बेटा

14:10बड़ा प्यारा कांसेप्ट है। जॉबलेस ग्रोथ दो

14:12वर्ड से बना हुआ है। ग्रोथ और जॉबलेस।

14:15ग्रोथ तो हो रही है मतलब जीडीपी तो बढ़

14:17रहा है। प्रोडक्शन तो बढ़ रही है बट

14:20विदाउट क्रिएटिंग इनफ जॉब्स। सारी वो

14:22ग्रोथ जो टेक्नोलॉजी की वजह से होती है।

14:25ठीक है? इसकी वजह से लंबे समय तक की

14:27अनइंप्लॉयमेंट आ सकती है। जिसको क्रॉनिक

14:29अनइंप्लॉयमेंट कहते हैं।

14:34जीडीपी और एंप्लॉयमेंट की अगर हम बात करें

14:35जैसे देखो भाई कितना प्यारा क्वेश्चन है।

14:37बोर्ड्स में कई बार आया हुआ है। एक टेबल

14:40बना रखा है। ये देखो भाई आपको टेबल से

14:42क्या समझ आता है। जीडीपी बढ़ गया। चलो

14:46लेकिन एंप्लॉयमेंट घट गई। दो चीजों को

14:49कंपेयर कर रहे हैं जीडीपी और को और

14:51एंप्लॉयमेंट को। ठीक है? अब क्वेश्चन कह

14:54रहा है इस चार्ट को पढ़ो और एनालाइज करो

14:58इन दो वेरिएबल्स को। वेरिएबल मतलब जिसकी

15:00वैल्यू बदले। एक जीडीपी और एक

15:02एंप्लॉयमेंट। यहां पर दो वेरिएबल्स हैं।

15:05तो भाई ये ग्राफ क्या शो करता है कि

15:07इंडिया में जॉबलेस ग्रोथ है। जॉबलेस ग्रोथ

15:09का मीनिंग वगैरह लिख दोगे सारा वही। ठीक

15:11है? उसके बाद हम क्यों ज्यादा टेक्नोलॉजी

15:14पर डिपेंड कर रहे हैं? क्योंकि यार हमारी

15:16ग्रोथ ना एमएसी ने हाईजैक कर ली।

15:20पहले ब्रिटिशर्स खा गए उसके बाद भाई

15:23एमएसीस की नकल करते हैं। ठीक है? हमारी

15:27ग्रोथ को हाईजैक कर लिया है एमएसी ने। जो

15:29एमएसीस करती है वो यहां के बड़े-बड़े

15:31बिज़नेसमैन भी करते हैं। ठीक है? इसके

15:34अलावा कुछ फेमस सीबीएसई के क्वेश्चंस क्या

15:36है इस चैप्टर के? एक इंडिया जैसी कंट्री

15:38में सेल्फ एंप्लॉयमेंट बहुत इंपॉर्टेंट है

15:40एंप्लॉयमेंट जनरेशन का। डिफेंड और

15:42रिफ्यूट। बेटा बहुत सही बात है। हम इसको

15:44ट्रू के फेवर में लिखेंगे, डिफेंड करेंगे

15:46क्योंकि इंडिया में ऑलरेडी अनइंप्लॉयमेंट

15:49है। तो सेल्फ एंप्लॉयमेंट एक बहुत

15:50इंपॉर्टेंट वेन्यू है भाई। ठीक है? डिफेंड

15:53करेंगे भाई हम इसको। ठीक है? डिफेंड

15:57करेंगे। क्यों? क्योंकि इतनी पॉपुलेशन है

15:59भाई। जॉब्स लिमिटेड है फॉर्मल सेक्टर में।

16:01सेल्फ एंप्लॉयमेंट कम से कम लोगों को अपना

16:03खुद का लाइवलीहुड कमाने का तो मौका देता

16:05है और सेल्फ एंप्लॉयमेंट से इनोवेशन वगैरह

16:07भी आती है जिससे आगे देश की तरक्की ही

16:10होगी।

16:12उसके बाद भाई दो चार क्वेश्चन एमसीक्यू के

16:14लिएेंट है। डिफाइन वर्कर पॉपुलेशन रेशो।

16:17वर्कर पापुलेशन रेशो क्या होती है? कितने

16:19टोटल वर्कर्स हैं? अपॉन कितनी पापुलेशन है

16:21इन 100? अभी कल परसों भी हम इसको कर रहे

16:24थे। ठीक है? क्वेश्चन है मिस्टर ऋषभ

16:28एजुकेशन कंप्लीट करने के बाद अपने फैमिली

16:30बिज़नेस में चला गया। उसकी मार्जिनल

16:33प्रोडक्ट प्रोडक्टिविटी ज़ीरो है। मतलब

16:35उसके जाने से कोई फर्क नहीं पड़ा। कैसी?

16:37क्या इसका एंप्लॉयमेंट स्टेटस है?

16:39डिसगाइस्ड अनइंप्लॉयड डिसगाइस्ड

16:41एंप्लॉयमेंट नहीं पढ़नी डिसगाइस्ड

16:44अनइंप्लॉयमेंट

16:48ठीक है ये सारी कहानी लिखी हुई है यहां

16:51उसके बाद

16:531990 के अंदर इंडिया का बहुत तगड़ा गैप

16:56आया ग्रोथ ऑफ

16:58जीडीपी और एंप्लॉयमेंट में ग्रोथ ऑफ गैप

17:00नहीं है ग्रोथ ऑफ जीडीपी है

17:04तो जॉबलेस ग्रोथ आ गई कि भाई उस जमाने में

17:07ग्लोबलाइजेशन आया नई-नई टेक्नोलॉजी आई

17:09कैपिटल गुड्स इंपोर्ट हुए देश में तो

17:11जॉबलेस ग्रोथ होने लग गई

17:17और 1990 ही वो वाला टाइम था जिस टाइम पे

17:20इंडिया में कंप्यूटर भी आया था। काव्या

17:22अपने फैमिली फार्म पर काम करती है और उसको

17:24कोई पैसे नहीं मिलते। क्या वो वर्कर

17:26कहलाएगी? यार फीमेल्स जैसे कि काव्या अपना

17:30खुद का काम हाउसहोल्ड काम भी करती है भाई।

17:33कुकिंग फैचिंग वाटर पानी खींचना। ठीक है?

17:39फार्म लेबर में भी थोड़ा बहुत काम कर रही

17:40है। बट इसके लिए इसको पैसे नहीं दिए जा

17:42रहे। तो इसको हम वर्कर नहीं कहेंगे भाई।

17:44राम एक सेलूून का ओनर है। इंजरी की वजह से

17:47वो टेंपरेरीली एब्सेंट हो गया। क्या वो

17:48वर्कर कहलाएगा? हां भाई बिल्कुल कमाएगा।

17:50अगर चोट की वजह से गायब है तो हम मान

17:52लेंगे कि वो लीफ पे है लेकिन वर्कर तो

17:54रहेगा ना। इंडिया में वुमेन पार्टिसिपेशन

17:57लोअर है। रीज़ंस हम ऑलरेडी सारे पढ़ चुके

17:59हैं भाई। सेफ्टी ये सारी चीजें हैं। मेल

18:01डोमिनेंट सोसाइटी वो सारी बातें।

18:05उसके बाद दोबारा वर्कर कौन होते हैं भाई

18:07जो जीडीपी में कंट्रीब्यूट करते हैं? दो

18:09तरह के होते हैं सेल्फ एंप्लॉयड और

18:10हायर्ड। हायर्ड में दो तरीके के आते हैं

18:12रेगुलर और कैजुअल। ये हम पढ़ चुके हैं।

18:15एक बात आप लिख के आ सकते हो भाई। रेगुलर

18:17वर्कर्स का स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग हाई होता

18:19है और कैजुअल वाले का लो होता है। ये सब

18:23तो हो गया।

18:27अगर हम सेक्टर्स की बात करें भाई, तीन तरह

18:29के सेक्टर हैं। प्राइमरी, सेकेंडरी,

18:30टर्शरी। रेट ऑफ पार्टिसिपेशन इन इंडिया भी

18:33पढ़ लिया भाई। इंडिया का पार्टिसिपेशन रेट

18:3635% है। ठीक है? क्या कह सकते हैं? इंडिया

18:40में भाई डिपेंडेंसी रेशियो ज्यादा है। 35%

18:43लोग ही एक्टिवली पार्टिसिपेट कर रहे हैं।

18:45मतलब बाकी 65% लोग डिपेंडेंट्स हुए।

18:49हाई रेट ऑफ़ पार्टिसिपेशन प्राइमरी सेक्टर

18:51में है। क्योंकि हमारी एग्रेरियन इकॉनमी

18:53है। और रूरल एरियाज में ज्यादा

18:55पार्टिसिपेशन क्यों है भाई? ज्यादा लोग

18:57काम क्यों करते हैं? गरीबी लिमिटेड

18:58रिसोर्सेज और अनस्किल्ड लोग हैं भाई वहां

19:01उनको बढ़िया जॉब्स नहीं मिलती हाई सैलरी

19:02वाली तो गरीबी उन्हें मजबूर करती है और एक

19:06बहुत इंपॉर्टेंट बात ये भी है कि फीमेल्स

19:09भी ज्यादा गांव में काम करती है क्योंकि

19:10यार गांव में ना फिर सेफ्टी है फीमेल्स की

19:13शहरों से ज्यादा

19:16उसके बाद ऑक्यूपेशनल स्ट्रक्चर या

19:18डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ वर्कफोर्स बाय

19:20इंडस्ट्री एस पर 2017-18 प्राइमरी सेक्टर

19:23सेकेंडरी सेक्टर टर्शरी सेक्टर इसमें क्या

19:25आता है एक बार पढ़ लेना अब हमारे यहां

19:28इंडिया में 45% ऑलमोस्ट जनसंख्या

19:30खेतीबाड़ी करती है। ऑलमोस्ट 25 इसको अगर

19:33नहीं आता तो ऐसे लिख देना। 45% 25%

19:38और 30% ठीक है?

19:43प्राइमरी सेक्टर में 45% जनसंख्या है।

19:46ऑलमोस्ट आधी। सेकेंडरी सेक्टर में कम है

19:4825 और सर्विस सेक्टर में 30। ठीक है?

19:5117-18 का ही डाटा है।

19:54क्या सारी डेवलप्ड इकॉनमी इंडस्ट्रियल

19:56इकॉनमीज़ होती है? ट्रू भाई क्योंकि जिस

19:58देश की इंडस्ट्री डेवलप हो जाती है वो

20:00तरक्की करती ही करती है। जैसे कि चाइना

20:06इसके बाद का भाई क्या क्वेश्चन है? अर्बन

20:08वर्क वर्क फ़ोर्स जो है वो टर्शरी सेक्टर

20:12की तरफ ज्यादा बेंट है। नौकरियां ज्यादा

20:13करती है भाई सर्विस सेक्टर में। और गांव

20:15के लोग ज्यादातर प्राइमरी सेक्टर की तरफ

20:17बेंट हैं। प्रॉपर आगे डाटा ही डाटा भाई

20:20अगर मैं एरिया की बात करूं दो तरह के

20:22एरिया होते हैं। गांव और शहर। गांव में

20:2460% जनसंख्या खेती करती है। 202% 20 21%

20:28लोगों की आपके यहां पे इंडस्ट्री है

20:31छोटी-मोटी और 20% लोग सर्विस सेक्टर में

20:33काम करती है। लेकिन शहरों में सबसे ज्यादा

20:35लोग ऑलमोस्ट 60% जनसंख्या जॉब्स करती है।

20:39ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट 35% जनसंख्या अपना कोई

20:43इंडस्ट्री वगैरह खोल के बैठी है और सिर्फ

20:456- 7% जनसंख्या शहरों में खेती करती है।

20:48क्योंकि शहरों में तो खेती नहीं होते उतने

20:50ज्यादा

20:59उसके बाद एक क्वेश्चन आता है कई बार

21:01एग्जाम में कि सिर्फ एक मॉडेस्ट चेंज ही

21:03आया है ऑक्यूपेशनल स्ट्रक्चर में। मॉडेस्ट

21:06का मतलब ज़रा सा। थोड़ा सा ही चेंज आया है

21:09भाई। इंडियन इकॉनमी आज भी एक एग्रेरियन

21:11इकॉनमी ही देखी जाती है।

21:14ठीक है? यह टेबल ही देख लो आप।

21:191950 से 1951 के टाइम पर इंडिपेंडेंस के

21:22दौरान हमारी ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट 73% पापुलेशन

21:26खेती करती थी। सबसे ज्यादा खेती ही होती

21:29थी। आज भी भाई 2017-18 की भी मैं अगर बात

21:32करूं तो भी बेशक ये कम हो के 44 45 हो

21:35गया। बट फिर भी सबसे ज्यादा लोग खेती ही

21:37करते हैं। तब भी इंडस्ट्रियल सेक्टर फ्लॉप

21:39था। आज भी फ्लॉप है। टर्शरी सेकंड नंबर पे

21:42था। आज भी सेकंड नंबर पे ही है। उसके बाद

21:45भाई कुछ टॉपिक्स कैजुअलाइजेशन क्या होता

21:47है? इसका ना पिक्चर बेस्ड क्वेश्चन बहुत

21:48बार आते हैं एग्जाम में।

21:52उसके बाद कैजुअलाइजेशन क्या होता है भाई?

21:55जब इकॉनमी में कैजुअल हायर्ड वर्कर्स की

21:57तादाद बढ़ जाए। एक सिचुएशन जब कैजुअल

21:59हायर्ड वर्कर्स की तादाद बढ़ जाए।

22:04इंडिया में 25% कैजुअल वर्कर्स हैं। 17 18

22:06के हिसाब से। इसके कॉजज़ बेटा बच्चे इग्नोर

22:09करके जाते हैं। पेपर के लिएेंट रहते हैं।

22:11अगर पिक्चर बेस्ड क्वेश्चन आए ना तो वो

22:13यही कहेंगे आइडेंटिफाई द कांसेप्ट एंड

22:16एक्सप्लेन इट्स कॉजज़।

22:18तो भाई कैजुअलाइजेशन क्या होता है?

22:20टेंपरेरी बेसिस पर लोगों को नौकरियों पे

22:22रखना। शहरों के अंदर कंपनी अपना बहुत सारा

22:25हायरिंग बहुत ज्यादा अपने पैसे बचा लेती

22:28है कैजुअल वर्कर्स को रख के। क्योंकि यार

22:31कैजुअल वर्कर्स के लिए फ्रीलांसर्स है ना

22:33भाई। कोई फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट नहीं

22:34चाहिए। लैपटॉप, कंप्यूटर, डेस्क ये सब

22:36लगाने की जरूरत नहीं है। और

22:41इंडिया में इतनी बेरोजगारी है कि कंपनीज़

22:44इसका फायदा उठा लेती है कि भाई कैजुअल

22:47बेसिस पर लोगों को रख लेगी कि परमानेंट तो

22:49नौकरी नहीं है भाई। करना है तो यही काम

22:50करो। और मेहनत उससे उनके बराबर की कराते

22:53हैं ये लोग। बस सैलरी कम होती है।

22:55इकोनॉमिक अनसर्टेनिटीज है भाई। इकोनॉमिक

22:58अनसर्टेनिटीज। कंपनीज को डर है भाई कि कभी

23:01दोबारा लॉकडाउन आ गया, रिसेशन आ गया तो

23:03बहुत पैसा देना पड़ेगा। आसान नहीं होता ना

23:06भाई। 50 एंप्लई भी काम कर रहे हैं

23:0730-30,000 पे तो 15 लाख तो और महीने देना

23:10ही देना है।

23:14इंडस्ट्रियल मॉडर्नाइजेशन।

23:18इंडस्ट्रीज में इतनी ज्यादा टेक्नोलॉजी आ

23:20गई कि इंडस्ट्रीज को अब जरूरत ही नहीं है

23:21परमानेंट एंप्लाइजज़ की। और गांव में भी

23:25कैजुअलाइजेशन बढ़ रही है। इनफॉर्मलाइजेशन

23:27क्या होती है भाई? जब इनफॉर्मल सेक्टर के

23:30लोग बढ़ जाते हैं।

23:32इनफॉर्मल वर्कर्स बढ़ जाते हैं। क्या फर्क

23:35होता है भाई? हमारे यहां इंडिया में ना

23:37सिर्फ 10% वर्क फ़ोर्स फॉर्मल सेक्टर में

23:39या ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में काम करती है।

23:41बाकी 90% जनसंख्या इनफॉर्मल या

23:43अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में ही है। दोनों का

23:46डिफरेंस पेपर के लिए इंपॉर्टेंट है भाई।

23:53अच्छा इसका क्वेश्चन ना ऐसे आ सकता है भाई

23:55कि दो लोग हैं दो लोग ठीक है एक बंदा कुछ

24:00ऐसी उसकी परिस्थिति दे रखी होगी भाई कि एक

24:02बंदा है जिसको सोशल सिक्योरिटी मिलती है

24:05वो ट्रेड यूनियन भी बना सकते हैं बहुत

24:06सारे लेबर लॉस है उनके लिए कंडीशंस अच्छी

24:09है और दूसरी पार्टी है जिनको कोई सोशल

24:11सिक्योरिटी बेनिफिट नहीं मिलते तो भाई

24:13फॉर्मल और इनफॉर्मल का डिफरेंस हो सकता है

24:15वो फॉर्मल वर्कर्स जो ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर

24:17में काम करते हैं इनफॉर्मल जो

24:19अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में काम करते हैं।

24:20फॉर्मल वालों को सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट

24:22मिलते हैं। इनको नहीं मिलते। यह अपने

24:25ट्रेड यूनियंस बना सकते हैं। जैसे

24:26एनआरएमयू, नॉर्दन रेलवे मैन यूनियन,

24:28नॉर्दन रेलवे मजदूर यूनियन क्योंकि फॉर्मल

24:30सेक्टर है ना रेलवेेज सरकारी जॉब और ये

24:33ऐसा कुछ नहीं बना सकते। फॉर्मल वर्कर्स को

24:37बहुत ज्यादा प्रोटेक्शन मिलती है लेबर लॉस

24:38से। इनको कुछ नहीं पूछता भाई कोई। फॉर्मल

24:41सेक्टर में कौन आता है भाई? कोई भी सेक्टर

24:43जिसने 10 से ज्यादा लोगों को हायर करा हुआ

24:45है ना, वह फॉर्मल में आता है। गवर्नमेंट

24:46[नाक से की जाने वाली आवाज़] और बड़ी-बड़ी

24:47प्राइवेट कंपनियां भी इसमें आती है। उसके

24:50बाद पेपर में क्वेश्चन आ जाए कि गवर्नमेंट

24:52ने ऐसा क्या-क्या करा है जिससे कि वो

24:54एंप्लॉयमेंट को बढ़ाए।

25:01एक तो भाई मगनरेगा 2005 महात्मा गांधी

25:04नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट। इस

25:07एक्ट के तहत जो लोग काम करने को तैयार हैं

25:09उनको कम से कम साल में 100 दिन का काम तो

25:11ये देते ही देते थे। ठीक है?

25:152018-19 के हिसाब से 7.77

25:19करोड़ लोगों ने इसके अंदर काम लिया है।

25:24दूसरा भाई मगनरेगा के बाद प्रधानमंत्री

25:27ग्राम सड़क योजना पीएम जीएसवाई 2000 में

25:30आई थी। ऑब्जेक्टिव था कि ऑल वेदर रोड

25:33बनानी है। पक्का रोड जो बनानी है गांव

25:34में। ठीक है? इससे बहुत रोजगार जनरेट हुआ

25:38है। उसके अलावा कुछ और रीसेंट इनिशिएटिव

25:41दो पुराने बता दिए फेमस।

25:43इसके बाद कुछ रीसेंट एबीआरवाई 2020

25:46आत्मनिर्भर भारत योजना इस स्कीम के अंदर

25:49एनकरेज करें एम्प्लाइजस को कि वो

25:51एंप्लॉयमेंट अपोरर्चुनिटीज दें कोविड-19

25:53के सफरर्स को उसके बाद

25:57पीएमजीकेआरए

25:592020 प्रधानमंत्री मोती लिखा हुआ है इसने

26:03प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान

26:052020 में आया था कि भाई जो भी रिटर्नी

26:08माइग्रेंट वर्कर्स थे जो गांव भाग गए थे

26:10बिहार भाग गए थे वहां से जो लोग वापस आए

26:12हैं उनको काम दो भाई पीएमएमवाई

26:15प्रधानमंत्री मुद्रा योजना इसके तहत 2015

26:17की योजना इंपॉर्टेंट है। एंटरप्रेन्योर को

26:20यह छोटे-मोटे बिज़नेसेस वालों को 10 लाख तक

26:23का लोन मिलता था। मेक इन इंडिया स्कीम

26:252014 में आई।

26:28इसने फोकस किस पे करा कि इंडिया को एक एपी

26:31सेंटर बनाना है इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन का।

26:33दैट्स ऑल भाई। 26 मिनट चैप्टर खत्म।

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