Full transcript
0:01हेलो 12th क्लास। इस वीडियो में हम कवर
0:03करेंगे रैपिड रिवीजन ऑफ कंज्यूमर
0:06प्रोटेक्शन और वो भी सारे इंपॉर्टेंट
0:08टॉपिक्स ओनली। कंज्यूमर प्रोटेक्शन है
0:10क्या? पहली बात तो बेटा ये बहुत ही ज्यादा
0:12बेसिक चैप्टर है जो बच्चा अपनी खुद की
0:15लैंग्वेज में लिख सकता है। सिर्फ कुछ मेन
0:17बातों का ध्यान रखना है आपने। कंज्यूमर
0:19प्रोटेक्शन का मतलब है जो भी स्टेप्स लिए
0:22जाते हैं कंज्यूमर के को प्रोटेक्ट करने
0:24के लिए जो भी उसके अगेंस्ट अनफेयर
0:27प्रैक्टिससेस प्रोड्यूसर्स और सेलर्स कर
0:29देते हैं उसके अगेंस्ट उसकी प्रोटेक्शन के
0:32जो स्टेप्स लिए जाते हैं। चैप्टर में काफी
0:35कुछ है बेटा। एक थ्री टायर मैकेनिज्म है।
0:37थ्री टायर मैकेनिज्म डील करता है जो
0:40अलग-अलग लेवल पर बॉडीज बनी हुई है।
0:42डिस्ट्रिक्ट लेवल कोर्ट्स, स्टेट लेवल,
0:44नेशनल लेवल पे। एक कंज्यूमर प्रोटेक्शन
0:47एक्ट है बुरी कंज्यूमर की डेफिनेशन है।
0:50कंज्यूमर की क्या ड्यूटीज बनती है? इसके
0:52क्या राइट्स हैं? अगर उसके साथ कुछ गड़बड़
0:54हो जाए तो कौन सी कौन सी रेमेडीज अवेलेबल
0:56है? ये सब इस चैप्टर में डील होता है।
0:59सबसे पहले तो हम डिस्कस करते हैं कौन सी
1:02कुछ अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है। ये बच्ची
1:04ने अनफेयर्ड लिखा हुआ है। अनफेयर आएगा।
1:06कौन सी गलत प्रैक्टिस कंज्यूमर के साथ हो
1:09रही है इंडिया में जो हम देखते हैं।
1:11एडल्टरेशन भाई मिलावट वाला माल मिलावटी
1:14माल मिल रहा है। आप देखो अक्सर बड़े-बड़े
1:16ब्रांड्स एक्सपोज होते रहते हैं। अमूल के
1:18दूध में गड़बड़ निकली। अमूल के पनीर में
1:20गड़बड़ निकली। उससे बड़ा ब्रांड तो क्या
1:22लोगे यार आप इंडिया में पैकेज फूड में
1:24डेरी प्रोडक्ट्स में। पतंजलि के घी में
1:27मिलावट निकली। ये चीज कि मिलावटी माल बेच
1:30रहे हैं। प्रोड्यूसर्स, सेलर्स। ठीक है?
1:33अपने चंद पैसे बनाने के चक्कर में पुअर
1:35क्वालिटी के गुड्स दे रहे हैं। मिसलीडिंग
1:38एडवर्टाइजमेंट करते हैं। जैसे रेड बुल की
1:39ऐड थी। रेड बुल पी ऑफ़ विंग्स लग जाएंगे।
1:41माउंटेन ड्यू पी के कूद जो डर के आगे जीत
1:44ऐसी की तैसी
1:46अंडरवेट गुड्स बेचते हैं। ये तो बेटा मैं
1:48आपको बताऊं इंडिया में 90% किराने वाले
1:51काम करते हैं। जितने भी किराने वालों पे
1:5590% पे ये आप देखोगे कभी दाल वगैरह के
1:59पैकेट ने ये बना के रखते हैं। 500 ग्राम
2:02का आधा किलो का पैक बोलोगे ना वो 500
2:04ग्राम देंगे। अगर आपने उसका वजन कर लिया
2:06भाई वो 435 ग्राम 420 ग्राम ऐसे निकलेगा।
2:10अंडरवेट गुड्स बेचते हैं और बड़े-बड़े
2:13प्रोड्यूसर्स जो बड़े लेवल के प्लेयर्स
2:15होते हैं, वह आर्टिफिशियल स्क्सिटी कर
2:17देते हैं। इसी कांसेप्ट को होर्डिंग कहा
2:19जाता है। मार्केट में सप्लाई है।
2:22बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स अक्सर बड़े-बड़े
2:24लेवल के रिटेलर्स और होलसेलर मिलके काम
2:26करते हैं।
2:29जैसे मान लो चीनी जैसी या नमक जैसी कोई
2:31एसेंशियल कमोडिटी है।
2:34बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स ने मार्केट में
2:36अफवाह फैला दी कि भाई बड़े-बड़े सेलर्स ने
2:39कि चीनी खत्म हो गई। चीनी आ नहीं रही पीछे
2:40से। इतना फेक पैनिकिक क्रिएट हो जाएगा कि
2:42₹40 वाली चीनी ₹200 किलो चली जाएगी। फिर
2:45उस टाइम पे बेचेंगे। ये बहुत चीजें ऐसी
2:48होती है जिससे कंज्यूमर को लूटते हैं।
2:51कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट की अगर हम बात
2:53करें बेटा 2019 की जो है इस एक्ट में
2:56ग्राउंड्स बता रखे हैं। किन-किन बेसिस पर
2:58आप कंप्लेंट फाइल कर सकते हो। कंज्यूमर की
3:00डेफिनेशन बता रखी है। ये एक्ट क्या-क्या
3:03कवर करती है? कौन से गुड्स कौन सी सर्विज
3:05कौन से कौन से सेक्टर के अगेंस्ट कंप्लेंट
3:08कवर करती है पब्लिक सेक्टर प्राइवेट
3:09सेक्टर वो सब एक्ट का एक कंपनसेटरी नेचर
3:13है कि कंपनसेशन मिले छह राइट एक्ट के अंदर
3:15बताए गए हैं और कौन से कौन से रिलीफ या
3:18रेमेडीज अवेलेबल है और ये जो यहां पे हाइड
3:20हो रहा है चीज ये है थ्री टायर मैकेनिज्म
3:24थ्री टायर मैकेनिज्म में बेटा वो है कौन
3:26से कौन से कोर्ट्स वगैरह अवेलेबल है
3:27कंज्यूमर की कंप्लेंट्स के लिए और ये एक्ट
3:30का ना एक चीज खास है कि ये एक्ट आप कभी
3:33आजमा के देख लेना। मैं आपको बताऊंगा। टाइम
3:35बाउंड्री रेसल दिलवाती है। ऐसा नहीं है कि
3:38डवोर्स केसेस की तरह दो-द साल आपका केस
3:40लटकेगा। एक लिमिटेड टाइम के अंदर आपके केस
3:42को सॉल्व करवाया जाएगा।
3:45अब कंज्यूमर प्रोटेक्शन कीेंस क्या है
3:47यार? सिंपल सी बात है। मार्केट में से अगर
3:50कंज्यूमर हटा दो तो जीरो है भाई। कंज्यूमर
3:52इज द किंग ऑफ द मार्केट। उसके लिए तो कम
3:55से कम लॉयल रहो। ग्राहक भगवान होता है।
3:58इंडिया में ऐसे नहीं बोला जाता।
4:01अब कंज्यूमर प्रोटेक्शन कीेंस कंज्यूमर के
4:05पॉइंट ऑफ व्यू से क्यों जरूरी है और
4:06बिजनेस के पॉइंट ऑफ व्यू से क्यों जरूरी
4:08है? देखो बेटा कंज्यूमर के पॉइंट ऑफ व्यू
4:11से तो ये है कि कंज्यूमर्स के साथ
4:13इग्नोरेंस हो रही है। कंज्यूमर को पता ही
4:15नहीं है। उसको अपने राइट्स के बारे में,
4:17रेमेडीज के बारे में नहीं पता। हमारे यहां
4:19इंडिया में बड़ा अनऑर्गेनाइज्ड कंज्यूमर है
4:21जो एकजुट होके नहीं लड़ता। ठीक है? सिंगल
4:23कंज्यूमर है। ऑब्वियस सी बात है अगर ये
4:25ऑर्गेनाइज हो जाएंगे, एक साथ मिलके लड़ेंगे
4:27तो बढ़िया होएगा। कंज्यूमर की आए दिन
4:29एक्सप्लइटेशन होती है। कभी उसको मिलावटी
4:32माल बेचा जाता है। कभी उसे झूठी ऐड दिखाई
4:34जाती है। कभी अंडरवेट गुड्स मिलते हैं।
4:36कभी बेफालतू में उसको ₹40 की चीनी ₹100
4:39किलो लेनी पड़ जाती है। एक्सपायरी डेट तक
4:41चेंज करके बेच देते हैं भाई ये लोग सामान।
4:43इतना स्कैम होता है। और
4:48बिजनेस के पॉइंट ऑफ व्यू से क्यों जरूरी
4:50है कंज्यूमर प्रोटेक्शन? भाई अगर आपको
4:52अपने धंधे को अपने बिजनेस को लॉन्ग टर्म
4:54चलाना है ना लॉन्ग टर्म में अगर आपके
4:56कस्टमर सेटिसफाई होंगे ना तभी आपका बिजनेस
4:59ग्रो करेगा आप एक बार किसी का पागल बना
5:02सकते हो बार-बार नहीं भाई एक बार आपने
5:04किसी को लूट लिया दोबारा वो आएगा आपकी
5:06दुकान पे ना किसी को आने देगा बल्कि
5:09ठीक है और ये एक सोशल रिस्पांसिबिलिटी भी
5:11तो है 11th में पढ़ते रहे कंज्यूमर्स के
5:13प्रति एक सोशल सी रिस्पांसिबिलिटी है और
5:16अगर आप चाहते हो आपके बिजनेस में बेफालतू
5:18की गवर्नमेंट इंटरवेंशन ना हो सरकार
5:20बार-बार रेड वगैरह ना मारे तो भी और यार
5:23एक मोरल जस्टिफिकेशन तो है ना यार मोरल
5:27वैल्यूस कहां गई आपकी आपके मन में नहीं
5:29आता कुछ कि यार हमने उससे पैसे लिए हम
5:32उसका गलत ना करें और कायदे से बिजनेस इसी
5:36समाज के रिसोर्सेज यूज़ कर रहे हैं इसी की
5:37ऐसी तैसी कर दोगे और बिजनेस और कंज्यूमर
5:40प्रोटेक्शन इसलिए करते हैं अपनी गुडविल और
5:43रेपुटेशन बढ़ाने के लिए क्योंकि जो भी
5:45बिजनेस कंज्यूमर प्रोटेक्शन करेगा वह
5:48ज्यादा गुडविल एंजॉय करेगा
5:51अब कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के बारे में
5:53पढ़ना है। सबसे पहले तो बेटा कंज्यूमर कौन
5:57है? कंज्यूमर की डेफिनेशन क्या है? ये ना
5:59सोचना कि ये टच्चा सा क्वेश्चन कहां से आ
6:01गया? भाई एक्ट में बहुत कुछ लिखा हुआ है।
6:03कोई भी बंदा जो कोई गुड्स खरीदता है या
6:07कोई सर्विज खरीदता है। किसी कंसीडरेशन के
6:09बदले बेटा यह बहुत जरूरी है। बदले में
6:12उसने कुछ दे रखा हो। या तो पैसे दे दिए हो
6:15व्हिच हैज़ बीन पेड या फिर उधार भी चलेगा।
6:17प्रॉमिस तो करा हुआ है कि पेमेंट दूंगा।
6:19वो कंज्यूमर के अंदर कवर होता है और हर
6:23तरह के गुड्स का यूजर आ जाता है। अगर उसने
6:26यूज़ अप्रूवल ऑफ द बायर से लेकर करा है।
6:30एग्जांपल के तौर पे आपके पेरेंट्स आपके
6:32लिए कोई चिप्स का पैकेट लेके आए। आपने
6:34खाया चोरी थोड़ी करी आपने। आपने जो बायर था
6:37बायर आप ऑब्वियसली आप अर्न नहीं कर रहे
6:39हो। आपने अपने पेरेंट्स के थ्रू उस चीज को
6:42लिया। बायर आपके पेरेंट्स हैं लेकिन
6:44कंज्यूमर में आप भी कवर हो गए। क्योंकि
6:46आपने वो यूज़ अप्रूवल से लिया है। हां कौन
6:50कंज्यूमर नहीं है। अब मान लो चोर है कोई
6:52चोर थीफ। उसने बिना अप्रूवल से आपसे कोई
6:54चीज चुरा ली और उसके साथ कुछ गड़बड़ होगी।
6:56वो केस नहीं कर सकता। मान लो कल को आप
6:59बच्चे बड़े हो गए। आप जाओगे मान लो
7:01हॉस्टल।
7:04मान लो गर्ल्स हॉस्टल के अंदर कोई लड़की
7:06चली गई। उसका हेयर ड्रायर किसी लड़की ने
7:08चुरा लिया बिना उससे पूछे और उसको उससे
7:10करंट लग गया। शॉक लग गया। वो क्लेम नहीं
7:12ले सकती भाई क्योंकि वो चोरी का है।
7:17होलसेलर, रिटेलर और एजेंट नहीं कवर होते
7:20इसमें। क्योंकि भाई यह कंज्यूमर्स थोड़ी
7:21है। दे आर नॉट कंज्यूमिंग। दे आर जस्ट
7:23रिसेलर्स।
7:26कंप्लेंट कौन-कौन कर सकता है? कंज्यूमर
7:28खुद कर सकता है। उसकी फैमिली कर सकती है।
7:31कंज्यूमर एसोसिएशंस है बहुत सारी। एनजीओस
7:33वगैरह यह कर सकते हैं। कंज्यूमर्स का
7:35ग्रुप कर सकता है। सेंटर या स्टेट की
7:37गवर्नमेंट कर सकती है। जैसे मैगी का केस
7:39इतना बड़ा हो गया था तो मैगी में लेड
7:41टेस्टिंग के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट से
7:43अप्रूवल आया हुआ था।
7:45और अगर आप लोग हो मान लो माइनर हो तो आपके
7:47पेरेंट्स या गार्डियन जो है वो कर सकते
7:49हैं। और अगर मान लो किसी बंदे की डेथ होगी
7:52तो उसका जो लीगल रिप्रेजेंटेटिव है जिसको
7:54वारिस बोलते हैं बच्चे-बच्चे वो कर सकते
7:57हैं।
7:59कंज्यूमर
8:01किसके अगेंस्ट कंप्लेंट फाइल कर सकता है?
8:03भाई गुड्स के अगेंस्ट भी और सर्विज के
8:05अगेंस्ट भी। बस एक बात याद रखना बहुत
8:08इंपॉर्टेंट एक कांसेप्ट है चैप्टर का। का
8:09मैं बता रहा हूं। गुड्स में गड़बड़ हो तो
8:12उसको डिफेक्टिव बोला जाता है। सर्विज में
8:15गड़बड़ हो ना तो वर्ड यूज़ होता है
8:16डेफिशिएंसी इन सर्विस या डेफिशिएंसी ऑफ
8:18सर्विस।
8:22कौन सी-कौ सी आइटम्स कवर होती है भाई?
8:25सारे प्रोडक्ट कवर होते हैं इस वाली ऐप
8:26में। ऑफलाइन खरीदी हो चाहे ऑनलाइन आपने
8:28Amazon से खरीदी हो। कौन से सेक्टर कवर
8:31है? पब्लिक सेक्टर के द्वारा कोई स्कैम
8:33हुआ है वो भी कवर होगा। प्राइवेट सेक्टर
8:35वाला भी और कोपरेटिव वाला भी। अब Amul
8:37कोपरेटिव सोसाइटी के अंदर आती है। वो
8:39स्कैम करेंगे वो भी कवर होगा। रेलवेेज के
8:41साथ रेल्वेज आपके साथ स्कैम करेगी वह भी
8:43कवर होगा। प्राइवेट सेक्टर का कोई करेगा
8:45अंबानी अडानी उनके साथ भी वो भी कवर होंगे
8:47इस एक्ट के तहत कोई नहीं बचेगा।
8:50नेक्स्ट टॉपिक है किन-किन ग्राउंड्स पर
8:52कंप्लेंट कर सकते हैं किन-किन बेसिस पर
8:53कंप्लेंट कर सकते हैं अनफेयर ट्रेड
8:56प्रैक्टिससेस के अगेंस्ट। एग्जांपल रॉन्ग
8:58इनफो मान लो कि गलत इन कंज्यूमर को दी जा
9:02रही है कि भाई अगर आपको सिलेंडर चाहिए तो
9:05सिलेंडर के साथ चूल्हा खरीदना पड़ेगा।
9:08डिफेक्टिव गुड्स अगर उसको दिए सर्विज में
9:10डेफिशिएंसी हुई है। एग्जांपल लोन देने में
9:13किसी बैंक ने बेफालतू का डिले करा। सरकारी
9:16हॉस्पिटल में 3 घंटे तक ट्रीटमेंट ही नहीं
9:18हो पाया। इमरजेंसी के बावजूद जरूरत से
9:21ज्यादा प्राइस चार्ज करे। मान लो एमआरपी
9:22से ऊपर किसी ने बेच दिया। हज़ार्डस गुड्स
9:25बेचे हैं। इसके अगेंस्ट कंप्लेंट हो सकती
9:27है। डेंजरस गुड्स।
9:30और कंप्लेंट डिस्पोजल पीरियड क्या है भाई?
9:32यह आपको भी पता होना चाहिए। अगर आपके साथ
9:35कुछ गड़बड़ हुआ है ना अगर उस चीज में
9:37टेस्ट की रिक्वायरमेंट नहीं है तो 3 महीने
9:39के अंदर-अंदर आपको कंप्लेंट फाइल करनी है
9:41उसके बाद की वैलिड नहीं है और अगर टेस्ट
9:43रिक्वायर्ड है तो 5 महीने
9:47कंप्लेंट की फीस जो भी प्रिस्राइब्ड फी
9:49होगी आपको देनी पड़ेगी और इंपॉर्टेंट
9:52टॉपिक है अभी ये कौन से रिलीफ या रेमेडीज
9:54अवेलेबल है कंज्यूमर को अगर उसके साथ कुछ
9:56गड़बड़ हो जाती है। एक तो अगर उसके गुड्स
9:59में कोई डिफेक्ट है तो उसको रिमूव करा
10:01जाए। गुड्स में गड़बड़ है तो गुड्स को
10:03रिप्लेस कर दिया जाए। उसको रिफंड मिल
10:05जाएगी। पूरे 500 के ₹500 वापस मिल गए। कुछ
10:08कंपनसेशन मिले एक्स्ट्रा में। उस
10:10डेफिशिएंसी इन सर्विज को रिमूव कर दिया
10:12जाए। जो भी एडिक्वेट कॉस्ट बनती है वो
10:14उसको दे दी जाए। मान लो ₹500 का कुछ हां
10:18उसमें ₹100 के गड़बड़ है तो ₹100 उसको दे
10:20दिए।
10:22एग्जांपल के तौर पे चलो इस पॉइंट को मैं
10:23समझाता हूं। मान लो मैंने एक Zomato ऑर्डर
10:25करा ₹500 का। मेरे पे खाना आया। ठीक है।
10:30आधा घंटा लेट आया। खाना ठंडा हो गया। तो
10:32पूरे 500 तो वो वापस नहीं करेंगे लेकिन
10:34100 तो दे ही सकता है। अगर मार्केट में
10:37हज़ार्डस डेंजरस गुड्स बेच रहे हैं तो उनको
10:39बेचना बंद कर दे। अनफेयर ट्रेड एक्सपेंसेस
10:43लिखा हुआ है। इस इंटेलिजेंट लड़की ने
10:44प्रैक्टिससेस आएगा।
10:48अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिससेस को रोक दे।
10:51अगर कोई मिसलीडिंग ऐड चलाई है तो उसको
10:53करेक्ट करने की एक ऐड चला दे। डेंजरस
10:56गुड्स को मार्केट से हटा ले। अब बेटा
10:58चैप्टर का सबसे इंपॉर्टेंट टॉपिक है। इससे
11:00क्वेश्चन आएगा ही आएगा। कंज्यूमर के राइट
11:02केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन आएगा। या तो ऐसा
11:04कि कंज्यूमर ने कौन सा राइट एक्सरसाइज करा
11:06या कौन सा नहीं करा? ऐसा क्वेश्चन
11:10कौन सा राइट वायलेट हुआ या तो ऐसा
11:12क्वेश्चन आएगा केस स्टडी में या उसने कौन
11:14सा राइट एक्सरसाइज करा वो आएगा। सबसे पहला
11:17है बेटा राइट टू सेफ्टी। राइट टू सेफ्टी।
11:21सबसे तगड़ा है भाई। सबसे तगड़ा क्लेम
11:23इसमें मिलता है राइट टू सेफ्टी के तहत कि
11:26भाई एक कंज्यूमर पे पूरा राइट है कि वो
11:28सेफ हो कम से कम जो भी गुड्स और सर्विज वो
11:32यूज़ कर रहा है उसके उससे कोई डेंजर नहीं
11:35होना चाहिए उसकी लाइफ या हेल्थ पे ठीक है
11:38अब किसकी केस स्टडी कुछ ऐसी सी आ सकती है
11:40कि भाई कोई गुड्स कंज्यूम करके हेल्थ खराब
11:42होगी लाइफ खराब होगी कौन सा राइट
11:44एक्सरसाइज किया जा सकता है मान लो एक
11:47इलेक्ट्रिकल एप्लायंस था किसी बच्चे ने
11:49यूज़ करा उसको शॉक लग गया तो राइट टू
11:52सेफ्टी वो एक्सरसाइज करवा सकता है। अगला
11:55है राइट टू चूस। राइट टू चूस का मतलब है
11:58कोई भी सेलर कंज्यूमर को फोर्स नहीं कर
12:00सकता कि तू यही खरीद। एक कंज्यूमर पे पूरा
12:03राइट है कि वो कोई भी गुड्स या सर्विज
12:06खरीदेगा अपनी पसंद की। कोई सेलर उसको
12:08फोर्स नहीं कर सकता कि तू यह वाला
12:10प्रोडक्ट ही खरीद। इसकी केस स्टडी होती है
12:12कि वैरायटी चॉइस मिल रही है। फोर्स नहीं
12:14कर रहे।
12:16अगला है राइट टू इंफॉर्मेशन।
12:19राइट टू इंफॉर्मेशन जो होती है ना बेटा
12:21ध्यान रखना बच्चे इसमें और
12:24राइट टू कंज्यूमर एजुकेशन में कंफ्यूज हो
12:26जाते हैं। राइट टू इनेशन का मतलब है
12:29कंज्यूमर को प्रोडक्ट के बारे में पूरी
12:30जानकारी लेने का राइट है। पूरा राइट है
12:33उसके पास कि वो सारी इंफॉर्मेशन ले
12:35प्रोडक्ट के बारे में जो वो खरीदना चाह
12:37रहा है व्हिच ही इंटेंड्स टू बाय।
12:41और याद रखना इनफो मतलब प्रोडक्ट की इनफो।
12:44जैसे क्या डेट है मैन्युफैक्चरिंग की?
12:46एक्सपायरी कब की है? हाउ टू यूज़ वार्निंग
12:48ये सब
12:50राइट टू बी हर्ड क्या है कि कंज्यूमर की
12:52सुनवाई हो। हिंदी में भी लिखा हुआ है
12:54कंज्यूमर की क्या हो? सुनवाई हो। एक
12:57कंज्यूमर पे राइट है भाई कि वो कंप्लेंट
12:59कर सकता है और उसकी सुनवाई होगी कम से कम
13:02अगर उसको डिसटिस्फेक्शन हुई है। किसी
13:04गुड्स या सर्विज के अगेंस्ट। इसके लिए यह
13:07पेपर में याद रखना कि स्टडी है। यहां से
13:10कंपनीज ने अपने कस्टमर केयर सेटअप करे
13:12हैं। कस्टमर केयर और कंप्लेंट सेल्स ताकि
13:14कस्टमर को कोई प्रॉब्लम हो तो वो उस पर
13:16कंप्लेंट कर सकता है। याद रखना।
13:22अगला है राइट टू सीक्रेट रेसल। यह सबसे
13:24इंपॉर्टेंट राइट है भाई।
13:26कि कंज्यूमर के पास राइट है कि वह रिलीफ
13:29ले सकता है। कंपनसेशन मांग सकता है। अगर
13:32उसके साथ कुछ गड़बड़ हुई है। कोई
13:33एक्सप्लइटेशन हुई है। कौन से कौन से रिलीफ
13:36दे देती है भाई? कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट
13:38डिफेक्ट हटा देंगे। कंपनसेशन दे देंगे।
13:40रिफंड दे देंगे ये सब।
13:44एक और राइट है भाई। यहां पे लिखा नहीं हुआ
13:46इस बच्ची ने।
13:48हां वो राइट है भाई। यहां पर मैं लिख देता
13:51हूं।
13:54राइट टू
13:59कंज्यूमर एजुकेशन
14:05कंज्यूमर का एक राइट है भाई कि उसको वो
14:07अपने जो राइट्स है ना उसके बारे में अवेयर
14:10हो ये एक राइट
14:14सिनेरियो क्या है भाई राही बच्चे ने बर्गर
14:17खरीदा बर्गर किंग से
14:20अच्छा
14:22उसका दोस्त अरुण है उसने वो कंज्यूम करा
14:25उसकी परमिशन से और उनको लूज मोशंस हो गई
14:27और उल्टियां लग गई। बर्गर किंग को
14:30उन्होंने कॉल करा कंप्लेंट करने के लिए।
14:32बर्गर किंग ने रिसोंड नहीं करा कॉल पे। तो
14:35उन्होंने फिर डिसाइड करा कि वो केस
14:37करेंगे। तो पहली बात कौन कंप्लेंट कर सकता
14:40है? भाई यहां पर कंप्लेंट राही अरुण दोनों
14:42कर सकते हैं। दोनों
14:45कंज्यूमर कर सकता है। राही और अरुण दोनों
14:47ही कंप्लेंट कर सकते हैं। क्योंकि अरुण ने
14:49भी राही के अप्रूवल से ही गुड्स खरीदे
14:51हैं। क्या अरुण कंप्लेंट फाइल कर सकता है?
14:53हां भाई क्योंकि अरुण ने अप्रूवल से रही
14:55कि वो बर्गर खाया।
14:58कौन से राइट्स वायलेट है भाई? अगले की
15:00तबीयत खराब होगी, हेल्थ खराब होगी। राइट
15:02टू सेफ्टी और फिर जब बर्गर किंग ने उनका
15:04फोन नहीं उठवाया तो राइट टू बी हर्ड
15:06वायलेट हुआ।
15:11इन्होंने कौन सा राइट उपयोग करने का ट्राई
15:13किया था? राइट टू हर्ड। जब इन्होंने बर्गर
15:16किंग को कॉल करा। अगला क्वेश्चन।
15:20कौन सा राइट बर्गर किंग नहीं टिक पाया किस
15:22राइट पे? राइट टू बी हर्ट पे भाई कंज्यूमर
15:24की सुनवाई नहीं करी इन्होंने।
15:27लास्ट में इन्होंने कौन सा राइट एक्सरसाइज
15:28करा? जब ये केस पे ही चले गए लास्ट में तो
15:30वो राइट टू सीक्रेट रेस चला। कौन से कोर्ट
15:33में जाएंगे भाई? यार याद रखना छोटे केसेस
15:36जो होते हैं ना एक करोड़ से कम के वो
15:37डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जाते हैं।
15:41ये लिखा हुआ है राइट टू कंज्यूमर एजुकेशन।
15:43हां। अच्छा बहुत इंपॉर्टेंट बात बेटा राइट
15:46टू इनफेशन और राइट टू कंज्यूमर एजुकेशन
15:48में फर्क क्या है? राइट टू इन कहता है कि
15:50कंज्यूमर पर इंफॉर्मेशन होनी चाहिए
15:52प्रोडक्ट के बारे में और कंज्यूमर एजुकेशन
15:54कहता है उसको उसके राइट्स ड्यूटीज वगैरह
15:56की इन नॉलेज होनी चाहिए।
16:00एक आधा बेसिक क्वेश्चन याद रखना भाई
16:02कंज्यूमर डे 15 मार्च को हर साल मनाया
16:04जाता है।
16:06अच्छा भाई कंज्यूमर की भी कुछ
16:08जिम्मेवारियां बनती है। भाई सारा भांडा आप
16:10सेलर पे नहीं फोड़ सकते। कंज्यूमर को अपने
16:13राइट्स को एक्सरसाइज करना है। जो भी उसके
16:16राइट है उसके राइट्स के बारे में उसे पता
16:17होना चाहिए। उसको यूज़ करना चाहिए।
16:19अंधाधुंध नहीं खरीदना। क्वालिटी क्वांटिटी
16:22प्राइस सब चेक करनी है। कंप्लेंट करनी है।
16:24अगर कुछ गड़बड़ हुई है। बेशक छोटी भी हो।
16:27फॉल्स एडवर्टाइजमेंट से बच के रहना है।
16:29जल्दी में कभी नहीं खरीदना। कभी भी रसीद
16:31लेनी, वारंटी कार्ड लेना नहीं भूलना वरना
16:33प्रूफ नहीं रहेगा। और क्वालिटी कोशस
16:36प्रोडक्ट ही खरीदने चाहिए उसको।
16:37स्टैंडर्डाइज्ड प्रोडक्ट ही खरीद।
16:39स्टैंडर्डाइज्ड का ध्यान रखना।
16:42आपके पास पेपर के अंदर एक बार ना बुक के
16:45अंदर चैप्टर खोलना। कुछ लोगोस बने हुए
16:48हैं। उन लोगोस का क्वेश्चन पेपर में आ
16:50जाता है। किसका लोगो है? जैसे फूड बेवरेज
16:52पे फसाई का या एफएसआई का मार्क,
16:53इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पे आईएसआई मार्क,
16:56एग्रीकल्चरल पे एग मार्क, गोल्ड ज्वेलरी
16:58पे हॉलमार्क, फ्रूट वेजिटेबल पे एफपीओ का
17:01मार्क। ये एक आधा मार्क देख लो। आईएसआई का
17:03ये लोगो होता है।
17:06इसके बाद चैप्टर के अंदर आता है लास्ट
17:08टॉपिक्स की तरफ हम चल रहे हैं। ये थ्री
17:11टायर मैकेनिज्म क्या है? थ्री टायर
17:13मैकेनिज्म कंज्यूमर के दुख तकलीफ सुनने के
17:16लिए कौन सी कौन सी एजेंसी है भाई? एक
17:18डिस्ट्रिक्ट फोरम, एक स्टेट फोरम, एक
17:20नेशनल फोरम। डिस्ट्रिक्ट फोरम से अगर आपका
17:23केस सेटिस्फाई आप नहीं होते हो, आप 45 दिन
17:26के अंदर-अंदर स्टेट फोरम में उस केस को
17:27लगा सकते हो। अगर वहां से भी सेटिस्फाई
17:29नहीं हुए तो 30 दिन के अंदर-अंदर नेशनल
17:31फॉर्म में। याद रखना 1 करोड़ तक के केसेस
17:35डिस्ट्रिक्ट फॉर्म में जाएंगे। एक से 10
17:36करोड़ के स्टेट फॉर्म में और 10 करोड़ और
17:38उससे ऊपर के नेशनल फॉर्म में। डिस्ट्रिक्ट
17:40फॉर्म क्यों बोला जाता है? क्योंकि हर
17:42डिस्ट्रिक्ट में एक होता है। स्टेट फोरम
17:44हर स्टेट में एक होगा और नेशनल फोरम देश
17:46में एक ही होगा। वो आगे टाइम लिमिट लिखी
17:50हुई है। एफएसएसएसआई की फुल फॉर्म क्या है?
17:53हर चिप्स वगैरह के बैगर पे लगा होता है।
17:54फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ
17:56इंडिया।
17:58एक बेटा बड़ा तगड़ा सिस्टम है मेडिएशन। यह
18:01पिछले कुछ सालों में इंपॉर्टेंट रहा है।
18:04यह ना डिस्प्यूट सेटलमेंट का एक तरीका है।
18:07एक ऐसी एक्ट जिसके अंदर चार पांच लोगों
18:10में बैठ के ही मामले को सॉल्व करवा दिया
18:12जाता है। मेडिएटर होता है एक इंटरमीडियरी
18:15दलाल जो दो लोगों के बीच में बैठ के मैटर
18:17को सॉल्व करवाता है। प्रॉपर लंबे-लंबे
18:19क्योंकि सबको पता है कोर्ट में केस जाएगा
18:20लंबा जाएगा। इससे बढ़िया चुपचाप बैठ के एक
18:24वकील आपका एक वकील उनका आपस में सेटलमेंट
18:26कर लो।
18:28दो चार एनजीओ के नाम पता होने चाहिए आपको।
18:30वो कॉमन कॉज न्यू दिल्ली कंज्यूमर एक्शन
18:32फोरम दिल्ली मुंबई ग्राहक पंचायत मुंबई
18:35में ही है। वॉइस कट्स एक आधी फुल फॉर्म
18:38पता होनी चाहिए वॉइस की वंटरी
18:39ऑर्गेनाइजेशन इन इंटरेस्ट ऑफ कंज्यूमर
18:41एजुकेशन और कट्स की कंज्यूमर यूटिलिटी एंड
18:43ट्रस्ट सोसाइटी काफी है भाई। दैट्स इट।
18:47इतना ही पढ़ लो काफी है। गुजारा हो जाएगा।