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0:01[नाक से की जाने वाली आवाज़]
0:02हां जी 12th क्लास फटाफट से हम चैप्टर टू
0:04के कुछ इंपॉर्टेंट टॉपिक्स डिस्कस करेंगे।
0:06भाई यह इकोनॉमिक सिस्टम तो हमने आज ही
0:08पढ़ा था। सीधा इंपॉर्टेंट टॉपिक्स की तरफ
0:11चलते हैं।
0:14फाइव ईयर प्लांस इंडिया जब इंडिपेंडेंट
0:17हुआ तो उन्होंने सोचा कि यार हम ना
0:20क्योंकि ये जो आपका चैप्टर है चैप्टर टू
0:22ये डील करता है इंडियन इकॉनमी 1950 से
0:25मतलब 1947 के बाद से 1990 तक कैसी रही।
0:28आपको आज भी ये बात बताई थी। तो इंडियन
0:30इकॉनमी ने सोचा था कि हम ना पांच-प साल के
0:33प्लांस बनाएंगे। ज्यादा लंबे भी नहीं,
0:35ज्यादा छोटे भी नहीं। और उस पे वर्क
0:37करेंगे। अब इंपॉर्टेंट डाटा ये है पहला
0:41फाइव ईयर प्लान कब आया था? बेटा पहला फाइव
0:44ईयर प्लान जो था वो 1951 में आया था। उसके
0:47लिए इन्होंने क्या-क्या करा वो ध्यान से
0:49सुनना जरा।
0:50सबसे पहले फाइव ईयर प्लांस इंडिया ने सोचा
0:53कि हम फाइव-फाइव ईयर के प्लांस पे वर्क
0:54करेंगे आजादी के बाद। तो एक प्रॉपर
0:57ऑर्गेनाइजेशन को सेटअप करा गया जो इन सब
1:00चीजों से डील करी थी जिसका नाम था
1:02प्लानिंग कमीशन। प्लानिंग कमीशन कब सेटअप
1:05करी इन्होंने? 1950 में। डेटा पे ध्यान
1:07रखना बेटा। प्लानिंग कमीशन इन्होंने कब
1:10सेटअप करी? 1950 में। 1950 में इन्होंने
1:13प्लानिंग कमीशन बनाई कि भाई एक ऐसी एजेंसी
1:16होगी, एक ऐसी ऑर्गेनाइजेशन होगी जो
1:19अलग-अलग फाइव ईयर प्लांस बनाएगी। इनके हेड
1:22कौन थे उस टाइम के प्रधानमंत्री? पंडित
1:24जवाहरलाल नेहरू जी। अब
1:27अलग-अलग फाइव ईयर प्लांस बनाए। उनके
1:29अलग-अलग गोल्स थे। ठीक है? और पहला फाइव
1:31ईयर प्लान कब आया? 1951 में। तो अभी तक के
1:34यहां पे इसमें इंपॉर्टेंट डाटा क्या है?
1:36कि प्लानिंग कमीशन को सेटअप किया गया 1950
1:39में। ठीक है? पहला फाइव ईयर प्लान कब आया?
1:421951 में। और अलग-अलग फाइव ईयर प्लांस के
1:45अलग-अलग गोल्स थे। और 2015 में जैसे 2014
1:50में बीजेपी गवर्नमेंट आई थी ना तो 2015
1:52में प्लानिंग कमीशन का नाम चेंज कर दिया।
1:55उस टाइम पे अगर आपको ध्यान हो बेटा एक
1:56ट्रेंड चला था हर एक चीज का ना नाम बदल
1:58रहे थे जो करंट गवर्नमेंट थी। तो इन्होंने
2:01प्लानिंग कमीशन का नाम बदल के इसको नीति
2:04आयोग कर दिया था। नीति एक हिंदी वर्ड होता
2:07है और इन्होंने इसकी इंग्लिश बनाई थी
2:09नेशनल इंस्टट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग
2:12इंडिया। इंपॉर्टेंट है भाई। ठीक है? अब
2:15क्वेश्चन उठता है कि यार इंडिया में
2:16प्लानिंग की जरूरत क्या थी? क्योंकि
2:19ब्रिटिशर्स ने इंडिया को बिल्कुल जीरो
2:20रिजर्व्स के साथ छोड़ा था। सब कुछ तो ले
2:23गए थे भाई वो। कुछ नहीं बचा था देश में।
2:25तो प्लानिंग करके चलते तो ढंग से चलते।
2:27इंडिया की इकॉनमी बहुत ही बैकवर्ड और
2:29स्टेगनेंट छोड़ के गए थे ये लोग। ठीक है?
2:31जीडीपी भी बहुत कम था हमारा उस टाइम पर।
2:34तो इसलिए प्लानिंग की जरूरत लगी देश में।
2:36अब लास्ट फाइव ईयर प्लान बेटा 2012 में
2:39आया था। फर्स्ट कब आया था? 1951 में।
2:42दोबारा मैं बता रहा हूं। प्लानिंग कमीशन
2:44कब बनी?
2:461950 में। इसके हेड कौन थे? इस टाइम के
2:49प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू। पहला
2:51फाइव ईयर प्लान कब आया? 1951 में। आखिरी
2:54कब आया? 2012 में। वजह सुनो भाई। क्योंकि
2:572014 में हुई थी सरकार चेंज। उन्होंने
2:59उसके बाद सोचा कि यार हम फाइव-फाइव ईयर के
3:01प्लांस पे वर्क नहीं करेंगे। हम एक-एक साल
3:02के प्लान बनाएंगे। तो इसलिए आखिरी 5 साल
3:05का प्लान 2012 में आया था। उसके बाद कोई
3:08और प्लान फाइव ईयर का नहीं आया। एकेंट
3:10क्वेश्चन है कि व्हाट वर द कॉमन गोल्स ऑफ
3:13फाइव ईयर प्लांस? मैं मानता हूं इस बात को
3:15कि अलग-अलग ये देखो यहां भी लिखी हुई है
3:17लाइन। डिफरेंट फाइव ईयर प्लांस के अलग-अलग
3:20गोल्स थे। बट हर फाइव ईयर प्लान में एक
3:24कॉमन गोल था जिसकी ट्रिक थी जेम्स।
3:27सबसे पहला जेम्स में जी से आता है जीडीपी
3:30ग्रोथ। ई से इक्विटी, एम से मॉडर्नाइजेशन,
3:34एस से सेल्फ सफिशिएंसी एंड सेल्फ रिलायंस।
3:36अब एक-एक का मतलब क्या है भाई? जीडीपी
3:39ग्रोथ। अब जीडीपी ग्रोथ से पहले आपको
3:41जीडीपी का मतलब पता होना चाहिए। एक कंट्री
3:43में एक साल में कितने गुड्स एंड सर्विज
3:46प्रोड्यूस हो रही हैं। ठीक है? अब जीडीपी
3:50ग्रोथ इनका पहला टारगेट क्या था भाई? कि
3:52यार जीडीपी बढ़ेगा ना अगर ज्यादा गुड्स एंड
3:54सर्विज प्रोड्यूस होंगी तो उससे आउटपुट
3:56बढ़ेगा। और आउटपुट बढ़ेगा अगर यानी
3:59प्रोडक्शन ज्यादा होगी तो उससे नौकरियां
4:01ज्यादा मिलेगी लोगों को। और उससे देश में
4:04पैसा ज़्यादा आएगा। एंप्लॉयमेंट ज्यादा
4:05होगी तो। दूसरा था इक्विटी। इक्विटी को
4:08इक्विटेबल डिस्ट्रीब्यूशन भी कहते हैं
4:10बेटा। इक्विटी का मतलब क्या होता है? कि
4:12जो ग्रोथ का बेनिफिट है ना वो सारे
4:14सेक्शंस ऑफ़ सोसाइटी को मिले। अच्छा बेटा
4:16एक बात ध्यान रखना इक्विटी और इक्विटी में
4:18ना फर्क होता है। बच्चों को लगता है सेम।
4:21इक्विटी का मतलब क्या होता है यार? जिसको
4:23जितनी जरूरत है उसको उतने रिसोर्सेज मिले।
4:25देखो एक ऐसी इमेज बना रखी है कि यार ये
4:28बंदे की हाइट अच्छी है। इसको दीवार के उस
4:30पार दिख रहा है तो इसको कोई सीडी नहीं दी।
4:33इसकी हाइट थोड़ी सी कम थी। इसको एक सीढ़ी
4:34दी। ये बेचारा हाइट में छोटा था। इसको तीन
4:37सीढ़ी दे दी ताकि ये भी देख पाए। इसे
4:39इक्विटी कहते हैं और यही करना चाहिए।
4:40इक्वलिटी पता है क्या होती है कि यार आपने
4:44तीनों लोगों को बराबर रिसोर्सेज दे दिए।
4:46अब मुझे बताओ अगर आज आपके देश में हर बंदे
4:49को एक करोड़ दे दिए जाए। यार वो सुनने में
4:52अच्छा लग रहा है। उस बात का कोई मतलब नहीं
4:54बनता। क्योंकि यार बहुत सारे ऐसे लोग हैं
4:56जिनके लिए एक करोड़ कुछ भी नहीं है। अब उस
4:581 करोड़ में तो अंबानीज़ अडानीज़ भी
5:00आएंगे। क्या उनको आपके 1 करोड़ की जरूरत
5:02है? वो इक्वलिटी होती है। वो नहीं करना।
5:05क्या करना है? इक्विटी। इक्विटी का मतलब
5:07क्या भाई? कि यार जिसको जितनी जरूरत है ना
5:10उसको दो। वो ना करो कि अमीर अमीर होता रहे
5:12और गरीब गरीब होता रहे। बहुत इंपॉर्टेंट
5:15और बहुत अच्छी लाइन है कि ग्रोथ का कोई
5:17पर्पस ही नहीं रहता उस सोसाइटी में। जहां
5:19पर रिच रिचर होता जा रहा है और पुअर
5:21बेचारा अपनी बेसिक नेसेसिटीज के लिए भी
5:23स्ट्रगल कर रहा है। होना क्या चाहिए भाई?
5:25जिनके पास है उनको मत दो। लेकिन जिनके पास
5:28नहीं है ना उनको ज्यादा दे दो। वो ज्यादा
5:31बेटर है। एक इनका ग्रोथ था भाई थर्ड एम से
5:35मॉडर्नाइजेशन
5:36पहला जीडीपी ग्रोथ दूसरा इक्विटी थर्ड
5:39मॉडर्नाइजेशन कि भाई अपडेट करेंगे और
5:41अडॉप्ट करेंगे मॉडर्न टेक्नोलॉजी ग्रोथ की
5:44प्रोसेस में नई टेक्नोलॉजी साइंस आईटी
5:47आजकल तो आप एआई भी लिख सकते हो ठीक है
5:50जैसे उस दौरान जब ग्रीन रेवोल्यूशन करी तो
5:52भाई ये ट्रैक्टर थ्रेशर्स वो सारी
5:55बढ़िया-बढ़िया मशीनों का प्रयोग करा आईटी
5:57सेक्टर में इंडिया में बीपीओ वगैरह
5:59एस्टैब्लिश करे पिछले साल पढ़ते थे ना
6:01बिनेस में बिज़नेस प्रोसेस, आउटसोर्सिंग,
6:03कस्टमर केयर वो सब चीजें। इसके बाद भाई यह
6:06टॉपिक बाद में
6:09नेक्स्ट आपका गोल होता है सेल्फ रिलायंस
6:11एंड सेल्फ सफिशिएंसी। सेल्फ रिलायंस एंड
6:14सेल्फ सफिशिएंसी का मतलब क्या होता है
6:15भाई? दोनों वर्ड्स में फर्क जानो। सेल्फ
6:18रिलायंस का मतलब होता है देश में पैसे की
6:20दिक्कत ना हो। और सेल्फ सफिशिएंसी मतलब
6:22खाने की दिक्कत ना हो। याद रखने की ट्रिक
6:25क्या है बेटा? Reliance में आर आता है। आर
6:27फॉर रूपी कि भाई देश में पैसे की दिक्कत
6:30ना हो। सेल्फ रिलायंस मींस कि आपके देश को
6:33डिपेंड होने की जरूरत नहीं पड़ रही रेस्ट
6:35ऑफ द वर्ल्ड पे पैसों के लिए। और सेल्फ
6:37सफिशिएंसी का मतलब आपको डिपेंड होने की
6:40जरूरत नहीं पड़ रही बाकी कंट्रीज पे अपनी
6:42बेसिक सप्लाई जैसे कि फ़ूड के लिए क्योंकि
6:44यार अगर कोई कंट्री फ़ूड में सफिशिएंट नहीं
6:46होगी ना या सेल्फ रिलायंट नहीं होगी पैसों
6:48में। तो भाई उस पे बाकी कंट्रीज का
6:50पॉलिटिकल प्रेशर पड़ेगा ही। ठीक है? और
6:53ऐसा मैं क्यों बता रहा हूं? क्योंकि क्या
6:55हुआ था भाई? 1965 में ना एक वॉर हुई थी।
6:59इंडिया पाकिस्तान वॉर हमारे ऊपर पाकिस्तान
7:02ने अटैक करा था। मूवीस वगैरह भी बनी आपने
7:04काफी देखी होगी। अब पाकिस्तान ने हमारे पे
7:07हमला करा ऑब्वियस सी बात है इंडिया भी फिर
7:10उस पे अटैक वो करता जवाब देता। तो क्या
7:13करा भाई? यूएसए गवर्नमेंट ने बीच में आके
7:15इंडिया को धमकी दे दी। क्योंकि यूएसए ना
7:18हमने देखा शुरू से पाकिस्तान को सपोर्ट
7:20करता है। यूएसए ने आकर धमकी दे दी इंडिया
7:23को सीधा कि या तो वॉर रोक दो या हम आपका
7:25खाना रोक देंगे। अब देख लो क्या करना है।
7:28क्योंकि बेटा 1965 के टाइम पर ना हमारे
7:30देश में खाने की उतनी सेल्फ सफिशिएंसी
7:33नहीं थी। क्योंकि उससे पहले ब्रिटिशर्स गए
7:35थे। वो इंडिगो को आते थे। तो इंडिया में
7:37ना उतना खाना था नहीं उस टाइम पर। तो हम
7:39लोग यूएसए से फूड मंगाते थे अपना। तो
7:44इंडिया को ना रियलाइज हुआ यार कि हमारे से
7:46किसी ने पंगा लिया। हम उसका जवाब दे रहे
7:49हैं और हमें यूएसए आकर कह रहा है भाई कि
7:51या तो उनको मारना बंद कर दो या फिर हम
7:54आपका खाना रोक देंगे। तो इंडिया को
7:56रियलाइज हुआ यार कि सेल्फ सफिशिएंसी तो
7:58हमें पानी पड़ेगी। ध्यान रखना भाई। उसके
8:01बाद एक बहुतेंट क्वेश्चन भाई आर्किटेक्ट
8:04ऑफ इंडियन प्लानिंग किसको कहते हैं? पीसी
8:07महलनोबीस को। बेटा आपके पास देखो आना तो
8:10ये जो क्वेश्चन है ये एमसीयू में ही है तो
8:11मेरे को पता है अभी आपसे खड़े पैर तो याद
8:13होगा नहीं लेकिन ये तो देखो आप लोग गलती
8:16क्या करते हो आप लिख देते हो जवाहरलाल
8:18नेहरू मनमोहन सिंह जी महात्मा गांधी जी
8:20रजिंद्र प्रसाद ना भाई सबसे अजीब नाम जो
8:23आपको यहां पे दिख रहा है ना पीसी
8:24मैलेनोबीस इन्हीं सर को आर्किटेक्ट ऑफ
8:27इंडियन प्लानिंग कहा जाता है सारी इंडियन
8:29प्लानिंग की जो नीव थी इन्होंने रखी थी
8:32भाई पीसी मैलेनोबीस ने आप कहोगे भैया अभी
8:35तो जवाहरलाल नेहरू पढ़ा वो प्लानिंग कमीशन
8:37के यार हेड रेड थे लेकिन सारी आर्किटेक्चर
8:40जो था प्लानिंग का वो पीसी मेलेनोबीस कर
8:42रहे थे। उसके बाद भाई इंपॉर्टेंट क्वेश्चन
8:46एग्रीकल्चर सेक्टर के कुछ रिफॉर्म्स जो
8:48बहुत इंपॉर्टेंट थे जो इस दौरान आए। लैंड
8:51रिफॉर्म्स या इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स।
8:54क्या करा भाई? बहुत सारी चीजें जो पहले की
8:56लगा रखी थी ना जब ब्रिटिशर्स ने जमींदारी
8:58सिस्टम उनको बदला गया। सबसे पहले इन्होंने
9:01रेगुलेशन ऑफ एक्ट करा कि भाई कोई भी फसल
9:04का जो रेंट होगा वो उस खेत पे उगने वाली
9:08फसल के 1/3 वैल्यू से ज्यादा नहीं हो
9:10सकता। कि फॉर एग्जांपल अगर आज की डेट के
9:12एग्जांपल्स के हिसाब से बताऊं तो अगर
9:15₹90,000 की फसल बनी है ना तो उसका 1/3
9:18यानी ₹00 से ज्यादा का रेंट नहीं हो सकता।
9:21अगर ₹900 की फसल बनी है तो ₹300 से ज्यादा
9:24का रेंट नहीं हो सकता। कोऑपरेटिव
9:26कोऑपरेटिव फार्मिंग प्रमोट करी भाई कि यार
9:28आप लोग ना कलेक्टिव फार्मिंग करो मिलजुल
9:30के इकट्ठे इनपुट्स खरीदो बारगेनिंग होएगी
9:33आपकी और फिर कट्ठे बेचो तो आपको बेटर
9:35प्राइजिस मिलेंगे। एक बड़ा प्यारा
9:37कांसेप्ट करा कंसोलिडेशन ऑफ होल्डिंग्स।
9:40[गला साफ़ करने की आवाज़]
9:41जिन फार्मर्स के अलग-अलग जगह पे टुकड़ों
9:44में लैंड थे ना वो सारे लैंड गवर्नमेंट ने
9:47लेकर उन्हें एक जगह पर खेद दिया। जैसे मान
9:49लो आज के एग्जांपल से बताऊं तो मान लो यार
9:52किसी फार्मर के आधा किल्ला उगाड़ेवाड़े
9:55में है। आधा किल्ला बूढ़े में है। आधा
9:57किल्ला मछौड़े में है। आधा किला मान लो
10:00मोड़ी में है। टोटल आधे-आधे के चार सेट हो
10:02गए ना दो किल्ले। तो वो सारे टुकड़े लेकर
10:06उन्हें प्रॉपर एक जगह पर दो किल्ले दे दी।
10:09इससे उनकी कॉस्ट ऑफ कल्टीिवेशन भी कम हुई।
10:11एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज इन्होंने करी
10:13सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग्स।
10:16एक मैक्सिमम साइज फिक्स कर दिया भाई। कि
10:19इतनी लिमिट से ज्यादा किसी पर जमीन नहीं
10:21हो सकती। इससे इक्विटी प्रमोट होएगी। जो
10:23सरप्लस लैंड था ना ज्यादा लोगों के पास
10:25उसको रिीस्ट्रीब्यूट कर दिया गरीब
10:28फार्मर्स में और जिनके पास जमीन ही नहीं
10:30थी उन फार्मर्स में। भाई साहब 200 लाख
10:34किराएदारों को टेनेंट्स का मतलब होता है
10:36कामल किराएदार। 200 लाख किराएदारों को
10:39ओनरशिप राइट्स मिले थे कि जो किराए पे काम
10:42करते थे किसी खेत में उनको मालिक बना दिया
10:44गया था। अबोलिशन यानी खत्म कर देना
10:47इंटरमीडियरीज को। इंटरमीडियरीज कौन थे?
10:49दलाल भाई जमींदार उनको खत्म कर दिया गया।
10:52उनके ओनरशिप राइट्स ट्रांसफर कर दिए उनको
10:54जो एक्चुअली खेती किया करते थे जिससे
10:56एक्सप्लॉयटेशन ना हो। बट यार इतना सब कुछ
10:59देखो सुनने में आपको अच्छा लग रहा होगा।
11:01बावजूद उसके ये इतने अच्छे से इंप्लीमेंट
11:04नहीं हुए। सुनने में सब कुछ अच्छा लगता है
11:05बेटा। इतने अच्छे से इंप्लीमेंट नहीं हुए।
11:08क्यों? क्योंकि ये देखो अभी आपने एक पॉइंट
11:10पढ़ा कि सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग्स जिनके
11:14पास ज्यादा जमीन है उनकी जमीन छीन के बाकी
11:17लोगों को दे दी जाएगी। तो बेटा लोग उस
11:19जमाने में भी चालाक होते थे। जमींदार ने
11:22क्या करा? उन्होंने ना जैसे तैसे कन्विंस
11:26करा किराएदारों को कि यार आप शो कर दो कि
11:28आप ही मालिक हो और आप ही ओनर हो सइल के।
11:31उन्होंने उनकी बात मानी भी। दूसरा बहुत
11:34सारे लैंड लॉर्ड्स ने ना इस डिसीजन को
11:36कोर्ट में ले गए। अब आपको पता है कोर्ट
11:38में तो कितना टाइम लग जाता है केस को?
11:40जितने टाइम केस चला उतने टाइम उन्होंने ना
11:43अपने एक्स्ट्रा जमीन को अपने रिश्तेदारों
11:45के नाम कर दिया। और बाद में जब कोर्ट का
11:47रिजल्ट आया तो कह रहे हम पे तो है ही ना
11:49भाई। हां वो तो हमारे रिश्तेदार का हैं।
11:52तो बेटा इंडिया वाले लोग ना कुछ ना कुछ
11:55जुगाड़ ढूंढ लेते हैं। तो इन सब की वजह से
11:59लैंड रिफॉर्म्स फेल हो गए। फिर आए
12:01टेक्निकल रिफॉर्म्स। ये बहुत तगड़े थे
12:02भाई। ग्रीन रिवोल्यूशन वाले। एचवाईवी
12:05सीड्स का प्रयोग करना स्टार्ट कर दिया गया
12:07खेती में। एचवाईवी क्या होती है बेटा? हाई
12:10यील्डिंग वैरायटी वाली सीड्स। देसी सीड्स
12:12की जगह
12:14वो वाली सीड्स का प्रयोग करना जिससे
12:15ज्यादा रिटर्न आएगा।
12:18उस टाइम पर इंसेक्टिसाइड्स, पेस्टिसाइड्स,
12:20फर्टिलाइज़र्स, इरीगेशन टेक्निक्स इन सब का
12:22भी प्रयोग किया गया।
12:25अच्छा पेपर में क्वेश्चन आ जाता है। ग्रीन
12:27रेवोल्यूशन पे पूरा एक नोट ध्यान से
12:28सुनना।
12:30ग्रीन रेवोल्यूशन क्या था? एकदम से बड़ी थी
12:33क्रॉप प्रोडक्शन मॉडर्न फार्मिंग मेथड्स
12:36के यूज़ करने से जैसे एचवाईवी सीड्स,
12:38फर्टिलाइज़र्स, इंसेक्टिसाइड्स,
12:40पेस्टिसाइड्स, ट्रैक्टर, थ्रेशर्स, मशीनंस
12:43इन सब चीजों की वजह से। इसका पर्पस क्या
12:45था ग्रीन रेवोल्यूशन का कि इंडिया को
12:47दोबारा ऐसे अमेरिका जैसे देश आके ये ना
12:49बोल दे कि लड़ाई बंद करो वरना हम आपका खाना
12:52रोक देंगे। इंडिया को सेल्फ सफिशिएंट बना
12:54देना फूड ग्रेंस में। ये किसका पर्पस था?
12:56बेटा ग्रीन रेवोल्यूशन दो फज़ में आई थी।
12:58ध्यान रखना है आपने। फज़ वन और फज़ टू। डाटा
13:01इंपॉर्टेंट है। फज़ वन आया था मिड 60 से
13:04मिड 70ज में मतलब 1965 के बाद से। और ऐसा
13:08मैं क्यों बोल रहा हूं? ये ध्यान रखो। अभी
13:10उपहारा आपने पढ़ा था। अमेरिका ने इंडिया को
13:13धमकी कब दी थी कि आपका खाना रोक देंगे?
13:151965 में ना बेटा जब इंडिया पाकिस्तान वॉर
13:18हुई थी। तो 1965 को मैं मिड 1960 ही तो
13:22कहूंगा। तब से लेके मिड 70 तक मेन फोकस
13:26करा था वीट राइस पे और ना इंप्लीमेंट करा
13:29था मेन पंजाब, हरियाणा और यूपी के
13:30फार्मर्स ने और भाई उसी का रिजल्ट है कि
13:33पंजाब के जाटों पे, हरियाणा के जाटों पे
13:36और यूपी के गुर्जरों पे आज बहुत पैसा है।
13:39क्योंकि उन्होंने सबसे पहले वो फर्स्ट
13:41मूवर एडवांटेज लिया था ग्रीन रिवॉल्यूशन
13:43का। फिर इनको देख के फेज टू आया। मिड 70
13:46से मिड 80 में। बाकी क्रॉप्स को भी ऐसी
13:49करने की कोशिश की गई। और बाकी स्टेट्स ने
13:51भी इसमें साथ दिया। और इसमें कुछ खास भाई
13:56पेपर में क्वेश्चन आ जाता है पेंस एंड
13:58गेंस ऑफ ग्रीन रिवॉल्यूशन। बेटा गेंस का
14:01मतलब होता है पॉजिटिव। ग्रीन रिवॉल्यूशन
14:03से क्या हुआ? स्पर्ट हो गया क्रॉप
14:05प्रोडक्टिविटी में। स्पर्ट का मतलब होता
14:07है सडन इनक्रीस। जिस बच्चे को नहीं पता
14:09लिख लेना भाई। ठीक है? एक डाटा लिखा हुआ
14:12है कि 1955 में सिर्फ 660 पर किलो निकलता
14:15था हेक्टर से। लेकिन 21-22 का डाटा है।
14:18357 किलो की फसल निकलती है एक हेक्टर ऑफ
14:21लैंड से। सब्सिस्टेंस से कमर्शियल
14:23फार्मिंग पे आ गए। और फार्मर का आउटलुक
14:25बदल गया भाई। फार्मर सेल्फ सफिशिएंट हो गए
14:28फूड ग्रीन प्रोडक्शन में। बफर स्टॉक बन
14:30गया। एरिया बढ़ गया कल्टीिवेशन का। और इसके
14:33नुकसान क्या थे? सिर्फ लिमिटेड क्रॉप्स पे
14:35ग्रीन रेवोल्यूशन हुई। जूट कॉटन वगैरह पे
14:37नहीं मेन सिर्फ वीट राइस पे ही हुई थी।
14:39अनइवन स्प्रेड हुआ भाई। इंप्लीमेंट हुआ
14:42सिर्फ ये मेन हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र,
14:44यूपी वगैरह में बिहार वगैरह में नहीं हुआ
14:47भाई। लिमिटेड अच्छा किसी के मन में डाउट
14:49हो भैया आपने ईस्टर्न यूपी क्यों लिख
14:51दिया? यूपी बेटा बहुत बड़ा है। जो इस साइड
14:54ये दिल्ली टचिंग यूपी है ना इन्होंने तो
14:55ग्रीन रेवोल्यूशन कर ली। वो जो बिहार
14:58टचिंग यूपी है उन्होंने नहीं करी। तो वो
15:00गरीब रह गए।
15:02रिच फार्मर्स ने इसको इंप्लीमेंट कर लिया।
15:04गरीब फार्मर नहीं कर पाए। क्योंकि बेटा इन
15:06सब चीजों में पैसे लगने थे ना। ऑब्वियस सी
15:08बात है एचवाईवी सीड देसी सीड से महंगी
15:10आती। ये इंसेक्टिसाइड, पेस्टिसाइड,
15:12ट्रैक्टर, थ्रेशर, गरीब फार्मर कहां से
15:14लाता? एक इकोनॉमिक डिवाइड हो गया यार।
15:16अमीर और गरीब फार्मर्स हो गए। जिन्होंने
15:18ग्रीन रेवोल्यूशन कर ली वो अमीर हो गए।
15:20जिन्होंने नहीं करी वो गरीब ही रह गए।
15:23उसके बाद
15:26इंपॉर्टेंट क्वेश्चन।
15:31हमारे हमने देखा है यार इंडिया की
15:32इंडस्ट्री शुरू से वीक रही है। ठीक है?
15:35इंडस्ट्रीज को ना एपिसेंट ऑफ़ ग्रोथ माना
15:37जाता है कि जहां से देश की ग्रोथ होगी।
15:39जैसे चाइना को ही देख लो। अब क्या ऐसे
15:42कारण रहे जिसकी वजह से गवर्नमेंट को खुद
15:44पार्ट लेना पड़ गया इंडस्ट्रीज के
15:46डेवलपमेंट में? क्योंकि यार जब हम
15:48ब्रिटिशर्स से आजाद हुए थे ना हमारे यहां
15:51पे प्राइवेट सेक्टर के पास पैसा ही नहीं
15:52था। सिर्फ गिने-चुने ब्रांड्स थे Tata
15:55बिरला। और अगर था भी ना कुछ लोगों पे तो
15:57उनकी उसको खर्चने की नियत नहीं थी भाई।
16:00क्योंकि उनको पता था यार कमाई कम है।
16:02डिमांड भी कम है देश में। मार्केट का साइज
16:04छोटा है। लोगों पे पैसा नहीं है। हम चीज
16:06बना भी लेंगे तो लोग खरीदेंगे नहीं। उससे
16:08हमें फायदा क्या होगा? और ऐसे केस में ना
16:12सिर्फ एक बहुत बड़ी इन्वेस्टमेंट ही इस
16:16जाल को विशेस सर्कल का मतलब होता है एक
16:18जाल। ये गरीबी के जाल को खत्म कर सकती थी।
16:21और हमें ना यार सोशल जस्टिस वाली ग्रोथ की
16:23जरूरत थी। प्राइवेट सेक्टर अगर पैसा लगाता
16:26भी ना तो वो अपने लिए लगाता। प्रॉफिट
16:28मैक्सिमाइजेशन के लिए। उस टाइम पे जो देश
16:30के हालात थे ना हमें जरूरत थी ऐसी ग्रोथ
16:33की जिसमें सोशल वेलफेयर हो। एक बहुतेंट
16:35क्वेश्चन बेटा आईपीआर इंडस्ट्रियल पॉलिसी
16:38रेजोल्यूशन 1956 इसके अंदर क्या किया था
16:41गवर्नमेंट ने गवर्नमेंट ने इसके अंदर
16:43जितनी भी मेजर इंडस्ट्रीज थी ना उसको अपने
16:46कंट्रोल में ले लिया था गवर्नमेंट ने 1956
16:49में डिसाइड करा था कि देश की इंडस्ट्रीज
16:51को हम चलाएंगे उसके लिए इन्होंने
16:53क्या-क्या करा वो देखना मोटा-मोटा इसमें
16:55क्या था गवर्नमेंट रोल बढ़ा दिया था
16:57प्राइवेट रोल कम कर दिया था इन्होंने
16:59इंडस्ट्रीज की बहुतेंट क्वेश्चन है ये
17:01थ्री फोल्ड क्लासिफिकेशन करी
17:04इंडस्ट्रीज को तीन कैटेगरी में बांधना था।
17:06कह रहे पहली जो सिर्फ सरकार चलाएगी। दूसरी
17:09जिसको सरकार और प्राइवेट मिलके चलाएंगे और
17:12एक बची कुची इंडस्ट्रीज। अब
17:16पब्लिक सेक्टर में कौन-कौन आई उस टाइम पे?
17:18रेलवे, एटॉमिक एनर्जी, डिफेंस। प्राइवेट
17:20सेक्टर को 1% अलाउ नहीं था कि इसमें आप
17:23काम नहीं कर सकते। और जो प्राइवेट और
17:25पब्लिक दोनों वाली थी। जैसे माइनिंग या
17:27फर्टिलाइज़र्स। इसमें भी मेन रोल पब्लिक का
17:29ही था कि जो मेन काम करेगी वो पब्लिक
17:31सेक्टर यानी सरकार ही करेगी। और जो
17:33बिल्कुल चिल्लर बची कुची इंडस्ट्रीज थी वो
17:35प्राइवेट सेक्टर को दी थी। उसके अलावा
17:37इन्होंने और क्या करा भाई साहब सितारा
17:39इंडस्ट्रीज पर लाइसेंस लगा दिया था कि अगर
17:42आपने ये वाली इंडस्ट्रीज भाई सितारा
17:44इंडस्ट्रीज बहुत होती है। सितारा
17:46इंडस्ट्रीज से मेरा मतलब पता है क्या है?
17:48सारा पूरी वैरायटी जैसे मैं बोलूं
17:50टेक्सटाइल इंडस्ट्री तो कपड़े का सब कुछ आ
17:52गया उसमें।
17:53सारा इंडस्ट्रीज पर आपको अलग-अलग star
17:56इंडस्ट्रीज इन्होंने कर दी थी। जिसमें अगर
17:58आपको काम करना है तो ऐसे नहीं कर सकते।
18:00लाइसेंस लेना पड़ेगा। तो प्राइवेट इवन यह
18:03भी कह दिया था कि प्राइवेट सेक्टर की अगर
18:05कोई इंडस्ट्री है और उसको खुद को एक्सपेंड
18:07करना है या नई इंडस्ट्री इस्टैब्लिश करनी
18:09है तो हमसे लाइसेंस लेना पड़ेगा जो वो
18:11ईजीली देते नहीं थे। एक आधा एग्जांपल लिख
18:13सकते हो अल्कोहल, टोबैको यानी तंबाकू और
18:16मेडिकल इन इंडस्ट्रीज पर लाइसेंस लगा था।
18:21कुछ जगह पर इंडस्ट्रियल कंसेशन भी दी थी
18:23भाई कि बैकवर्ड एरिया में अगर प्राइवेट
18:25सेक्टर इंडस्ट्री लगाएगा तो हम उसको
18:26डिस्काउंट देंगे। टैक्स हॉलिडे देंगे।
18:28बेटा टैक्स हॉलिडे क्या होता हॉलिडे मतलब
18:30छुट्टी होता है ना तो टैक्स से थोड़े टाइम
18:33की छुट्टी दे देना। ये 42 इयर्स नहीं है
18:35बेटा। ये एकद साल है। ठीक है? 1 2 साल
18:40कि एकद साल तक आप टैक्स नहीं दोगे।
18:42सब्सिडी कम दामों पे बिजली, कम दामों पे
18:44पानी वो सब चीजें
18:47और इसमें काम का टॉपिक
18:50एक यार यहां पर ना बहुत इंपॉर्टेंट डाटा
18:52है। हमारे देश में स्माल स्केल इंडस्ट्रीज
18:54को डेवलप करने के लिए एक कमेटी बनाई जिसका
18:57नाम था कार्वे कमेटी। यह तभी आई थी बेटा
18:59जब एसबीआई आया था 1955 में। कारवे कमेटी
19:04को ही विलेज एंड स्मॉल स्केल इंडस्ट्री
19:06कहा जाता है। और इसके अलावा इंपॉर्टेंट
19:09टॉपिक
19:12ट्रेड का क्या हाल था हमारे देश का
19:13इंडिपेंडेंस के बाद? हमारे देश ने एक
19:15इनवर्ड लुकिंग ट्रेड स्ट्रेटजी अडॉप्ट करी
19:17कि भाई हम सिर्फ मेन अपने इंडिया में डील
19:20करेंगे। ठीक है? इंडिया ने एक इनवर्ड
19:23लुकिंग ट्रेड स्ट्रेटजी फॉलो करी आजादी के
19:25बाद कि भाई एक तो हम करेंगे इंपोर्ट
19:27सब्स्टट्यूशन। कहने का मतलब इससे हमारी
19:30लोकल इंडस्ट्रीज डेवलप होएंगी। जो भी
19:32चीजें हम इंपोर्ट करते हैं हम सोचेंगे कि
19:34क्या हम वो देश में खुद बना सकते हैं
19:36जिससे भाई हमारी लोकल इंडस्ट्रीज को
19:38सपोर्ट मिले और एक्सपोर्ट प्रमोशन जिससे
19:40फॉरेन एक्सचेंज आए। लेकिन बेटा ये सब ना
19:43सुनने में अच्छा लगता है। जब तक आप किसी
19:45कंट्री से इंपोर्ट नहीं करोगे तो वो आपका
19:47सामान थोड़ी खरीद लेंगे। तो यह फ्लॉप ही
19:49हुआ था बाद में।
19:52इंपोर्ट सब्स्टट्यूशन होता क्या है भाई?
19:54एक स्ट्रेटजी जिससे आप फॉरेन एक्सचेंज बचा
19:57सकते हो अपनी डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ा
19:59के कि जो [गला साफ़ करने की आवाज़] भी
20:01चीजें आप इंपोर्ट करते हो उनको आप अपने
20:02देश में ही बनाओ। एक कंट्री ट्राई करती है
20:05कि वो उन गुड्स को अपने देश में प्रोड्यूस
20:07करें जो वो पहले इंपोर्ट करा रहे थे।
20:10और भाई एक बड़ाेंट क्वेश्चन आता है भाई
20:13कोटा और टेरिफ पे। कोटा क्या होता है?
20:15टेरिफ क्या होता है? हमारी गवर्नमेंट ने
20:17हमारे देश की इंडस्ट्रीज को प्रोटेक्ट
20:19करने के लिए क्या-क्या करा? भाई साहब कोटे
20:22लगा दिए थे। कोटा का मतलब होता है
20:23मैक्सिमम क्वांटिटी। एक मैक्सिमम
20:25क्वांटिटी फिक्स कर दी थी कि इससे ज्यादा
20:27कोई इंपोर्ट ही नहीं करा सकता। अब मुझे
20:29बताओ यार अगर मान लो एक बच्चा मयंक है। वो
20:32बाहर से सिलाई मशीन मंगवाता है। अब अगर
20:37मैं उसको कह दूं भाई कि मयंक तू एक बारी
20:39में पांच से ज्यादा मशीन इंपोर्ट ही नहीं
20:40करा सकता। मुझे बताओ यार क्या वो ट्रेड
20:43करने लायक रहेगा? पांच मशीनंसं पे तो वो
20:45कुछ कमा भी नहीं पाएगा। उतना तो उसका भाड़ा
20:47लग जाएगा। तो ऐसे-ऐसे कोटा लगा दिए थे और
20:50टेरिफ यानी टैक्स लगा दिए थे। अगर आप बाहर
20:52से कुछ मंगाते हो तो। और भाई
20:56यह शॉर्ट था भाई इसके बारे में। इतनी
20:59बातें पढ़ के जाना। आपको कल हेल्प जरूर
21:00मिलेगी। ठीक है?