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0:01हेलो 11th क्लास। हम लोगों ने कल स्टार्ट
0:04करा था बजट लाइन के बारे में। तो यार
0:06सिंपली कंक्लूजन ऑफ द टॉपिक क्या है कि जो
0:09एक कंज्यूमर का बजट होता है ना एक
0:12कंज्यूमर का जो बजट है वो मैं यह नहीं कह
0:14सकता सिर्फ और सिर्फ प्राइसेस पर डिपेंड
0:17करता है। कंज्यूमर्स बजट डिपेंड करता है
0:20दो चीजों पर।
0:22कंज्यूमर्स बजट एक कस्टमर का एक कंज्यूमर
0:25का जो बजट होगा ना वह दो चीजों पर डिपेंड
0:28करता है। कंज्यूमर बजट डिपेंड्स अपॉन
0:34डिपेंड्स
0:36अपॉन टू आस्पेक्ट्स। दो चीजों पर किसी
0:39कंज्यूमर का बजट जो है वो डिपेंड होता है।
0:42वो दो चीजें क्या है भाई? एक तो उसकी खुद
0:47की आय कितनी है? आय का मतलब उसकी इनकम
0:50कितनी है भाई? ऑब्वियस सी बात है। अगर मैं
0:53माइक्रोइकोनॉमिक्स के एग्जांपल भी लूं ना
0:55तो इंडिविजुअल को अगर कंपेयर करें तो मुझे
0:57बता दो भाई आपका बजट ज्यादा है या मुकेश
1:00अंबानी का बजट ज्यादा है। ठीक है? और
1:03दूसरी चीज प्राइस कि जो गुड्स और सर्विज
1:07की बात हो रही है उसका प्राइस क्या है? तो
1:10कंज्यूमर बजट जो है वो दो चीजों पर डिपेंड
1:12होता है। एक इनकम पर और एक प्राइस पर। एक
1:15कांसेप्ट तो ये हो गया बेटा साथ-साथ नोट
1:17करते चलना। एक बात तो होगी ये। इसके अलावा
1:21अगर हम आगे चलें
1:24दो चीजें जो बजट से रिलेटेड इंपॉर्टेंट
1:26है। जो बजट का टेबल है ना जो आप ये
1:31कंज्यूमर के बजट का टेबल बनाओगे। अगर आप
1:34कंज्यूमर के बजट को टेबल के रूप में
1:36समझाओगे जो बजट का टेबल बनाया जाएगा। उस
1:40टेबल को बोला जाता है
1:47बजट
1:49सेट।
1:51जो बजट का टेबल बनेगा ना उसको बजट सेट
1:54बोला जाता है। बजट सेट
1:57और
1:59जो बजट का ग्राफ बनेगा बजट का डायग्राम
2:02बनेगा बजट का जो आप ग्राफ प्लॉट कर रहे हो
2:06ना वो जो लाइंस ही बना रहे थे उस ग्राफ को
2:09बजट लाइन बोला जाता है। वो जो आप ग्राफ सा
2:12बनाते हो या वो लाइंस ही जो बना रहे थे ना
2:14कल अभी दोबारा भी बनाएंगे। उसको बोला जाता
2:17है बजट लाइन।
2:20ठीक है? यह याद रखना। जो बजट का टेबल बन
2:23रहा है, वह बजट सेट कहलाता है। जो बजट का
2:26ग्राफ बनेगा, दैट इज नोन एज बजट लाइन।
2:28एग्जांपल के तौर पे ये जो आपने कल बनाया
2:31था ना ये ये क्या था? ये ग्राफ था। तो ये
2:34बजट लाइन कहलाएगी। ठीक है जी? इसका एक तो
2:37ध्यान रखिएगा।
2:40[नाक से की जाने वाली आवाज़]
2:42तो अभी तक देखो क्या-क्या पढ़ा अभी आज
2:44हमने कि कंज्यूमर का जो बजट है ध्यान से
2:46देखना वो दो चीजों पर डिपेंड करता है।
2:48कंज्यूमर बजट डिपेंड्स ऑन इनकम एंड
2:51प्राइस। और बजट का जो टेबल बनता है उसको
2:54बजट सेट बोलते हैं। बजट के ग्राफ को क्या
2:56बोला जाता है? बजट लाइन। इसके अलावा अगर
3:00प्रॉपर्ली डिफाइन करना हो तो क्या होगा?
3:05एक डेफिनेशन आप लिख सकते हैं। यह देखना।
3:15[नाक से की जाने वाली आवाज़]
3:19बजट सेट
3:22बजट सेट के बारे में एक डेफिनेशन आप लिख
3:24सकते हैं।
3:26डेफिनेशन क्या लिखनी है? ये देखना। बजट
3:29सेट रेफर्स टू बजट सेट रेफर्स टू अटेनेबल
3:37कॉम्बिनेशंस।
3:39अटेनेबल
3:42कॉम्बिनेशंस
3:46ऑफ टू गुड्स
3:50कॉमा
3:52गिवन
3:54द प्राइसेस ऑफ द गुड्स
4:00एंड
4:03इनकम ऑफ द कंज्यूमर।
4:07इसका मतलब क्या निकल के आता है? अब ध्यान
4:09से देखते हैं। यह जो लिखी है कहानी सी
4:12इसका मतलब क्या है? बजट सेट का मतलब क्या
4:15है भाई? ये जो बजट सेट होता है, जो बजट का
4:18टेबल होता है, इसका मतलब क्या है? अटेनेबल
4:21कॉम्बिनेशंस। अटेनेबल कॉम्बिनेशंस का मतलब
4:23जो अचीवेबल है भाई। प्रैक्टिकली पॉसिबल
4:26है। अटेनेबल वर्ड का खुद का मतलब क्या
4:29होता है? जो पॉसिबल हो। प्रैक्टिकल हो,
4:32पॉसिबल हो। प्रैक्टिकली पॉसिबल हो। ठीक
4:34है? पॉसिबल कॉम्बिनेशन किस चीज के? दो
4:38गुड्स के। जो एक कंज्यूमर बाय कर सकता है
4:41किनसे? मार्केट में जो गुड्स का प्राइस है
4:44उनको ध्यान में रखते हुए और अपनी इनकम को,
4:46अपनी आय को ध्यान में रखते हुए। वो बजट
4:48सेट होता है। अब आसान शब्दों के लिए में
4:51हम ऐसा भी बोल सकते हैं कि किसी दो चीजों
4:54पे कितने रुपए वह स्पेंड करेगा। यह उसका
4:56बजट है यार। कॉम्बिनेशन कल भी हम यह चीज
4:58डिस्कस कर रहे थे बजट सेट के बारे में।
5:02ठीक है? एक ना बहुत इंपॉर्टेंट खास रिलेशन
5:05मैं बताऊं इस चैप्टर में अभी तक आपने देखा
5:08होगा आप डिस्कस करते थे आईसी के बारे में
5:10क्या खास फर्क है आईसी में और बजट लाइन
5:13में और क्या दोनों का रिलेशन है
5:16IC ना हमें ये बताता था कि कंज्यूमर को
5:19क्या पसंद आ रहा है इनडिफरेंस कर्व एक बड़ा
5:22इंपॉर्टेंट नोट है ध्यान से देखिएगा इसको
5:24ये देखना IC क्या करता था अगर मैं एक बहुत
5:28खास लाइन लिखूं ना तो IC टेल्स अस
5:33अबाउट
5:36आईसी टेल्स अस अबाउट
5:41परसेप्शन
5:44ऑफ द कंज्यूमर
5:48आईसी टेल्स अस अबाउट द परसेप्शन ऑफ द
5:51कंज्यूमर
5:54फॉर
5:56ह चॉइस।
5:58इस लाइन का मतलब क्या बनता है? यह जो लाइन
6:01लिखी है फैंसीसी इसका मतलब क्या है? इस
6:04लाइन का मतलब है यार आईसी हमें ना बताता
6:06था [नाक से की जाने वाली आवाज़] कि
6:07कंज्यूमर अपनी चॉइस में किस चीज को लेकर
6:10उसको क्या पसंद आ रहा है? कौन सा कॉम्बो
6:11उसको पसंद आ रहा है? उसको सेम लेवल ऑफ़
6:13सेटिस्फेक्शन मिलेगी। ठीक है? वो बात हम
6:15पढ़ते थे। आईसी हमें ये बताता था कि उसको
6:18कौन सा कॉम्बो पसंद आएगा।
6:20[नाक से की जाने वाली आवाज़]
6:20कौन सा कॉम्बो उसको सेम लेवल ऑफ़
6:22सेटिस्फेक्शंस दिलवा रही है। बट इन
6:24ग्राउंड रियलिटी हकीकत के अंदर कोई चीज वो
6:28खरीद पाएगा या नहीं खरीद पाएगा ना ये यार
6:31उसका बजट बताता है। ठीक है?
6:35बट ये देखो आगे की लाइन। द रियलिटी चेक
6:40बट द रियलिटी चेक
6:44टू ह परसेप्शन
6:47[नाक से की जाने वाली आवाज़]
6:49इज गिवन बाय
6:54ह बजट असली में जो कंज्यूमर इक्विलिब्रियम
6:58है यार उसके अंदर आप सारी दुनिया भर की
7:00कहानी कर गए अभी तक कि यार यह होता है वो
7:02होता है यूटिलिटी होती है ठीक है भाई
7:04यूटिलिटी तो आज आपके पास नहीं भी है तो भी
7:07आपको इतना पता है कि अगर आज आप Mercedes
7:09ले आओगे तो
7:12आपको यूटिलिटी मिलेगी उससे। ठीक है? यह
7:15आपको भी पता है। बट क्या रियलिटी में आपके
7:18पास उसका बजट है? डिपेंड लेके आओगे या
7:21नहीं लाओगे Mercedes? वो तो डिपेंड आपके
7:23बजट पर ही कर रहा है ना भाई। ऐसे थोड़ी ये
7:26जो लाइन है इसका मतलब क्या है? दोबारा
7:28समझते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़]
7:32लाइन क्या लिखी आपने? आईसी टेल्स अस अबाउट
7:35द परसेप्शन ऑफ द कंज्यूमर।
7:39आईसी टेल्स अस अबाउट द परसेप्शन ऑफ द
7:42कंज्यूमर फॉर ह चॉइस। आईसी हमें यह बता
7:44देती है। आईसी हमें बताती है कि क्या
7:47परसेप्शन है एक कंज्यूमर की उसकी चॉइस को
7:50लेकर। उसको कौन सा कॉम्बो अच्छा लग रहा
7:52है, क्या चीज खरीदेगा, क्या नहीं खरीदेगा।
7:54बट रियलिटी में जो भी उसकी परसेप्शन है
7:57भाई, उसका रियलिटी चेक जो मिलेगा ना,
7:59रियलिटी चेक कि वह खरीद भी पाएगा या नहीं।
8:02वो उसका बजट बताएगा भाई। ऐसे तो आप
8:04नॉर्मली अपना IC बनाते रहो। माइंड में
8:07ख्याल ही पुलाव बनाते रहो कि दो Mercedes
8:09रखूंगा, एक BMW रखूंगा या फिर एक Mercedes
8:13रखूंगा, दो BMW रखूंगा या फिर फॉर
8:15एग्जांपल
8:18एक BMW दो Mercedes रखूंगा। अलग-अलग
8:20कॉम्बोज़ आप सोच सकते हो। बट रियलिटी में
8:22तो यार ये सब चीजें आपके बजट पे डिपेंड
8:24करती है ना। ठीक है? बजट लाइन ही हमारी वो
8:27मॉनिटरी बाउंडेशन बनाएगी। यह देखना आगे की
8:30बात।
8:33इंपॉर्टेंट कांसेप्ट जो है आगे का
8:36[नाक से की जाने वाली आवाज़] वो यह है भाई
8:37कि एक मॉनिटरी बाउंडेशन हमारे ऊपर कि क्या
8:40हम वो चीज खरीद भी पाएंगे या नहीं।
8:43मॉनिटरी बाउंडेशन मतलब मनी की टर्म्स में
8:45जो बाउंडेशन है ना हमारे ऊपर कि हम किसी
8:48कॉम्बो को खरीद भी पाएंगे या नहीं।
8:50यह देखना मॉनिटरी बाउंडेशन कि वेदर
8:57अ कंज्यूमर
9:00वेदर अ कंज्यूमर विल बी
9:05एबल टू
9:07बाय
9:09अ डिजायर्ड कॉम्बो
9:13और नॉट
9:16ये तो भाई बजट ही बताएगा। ठीक है? आपने IC
9:19में ये सब तो बता दिया कि कंज्यूमर को
9:21कॉम्बोज़ IC क्या दिखाता है? इन डिफरेंस
9:23कर्व क्या दिखाता है कि भाई अलग-अलग
9:26कॉम्बोज़ जो कंज्यूमर को सेम लेवल ऑफ़
9:28सेटिस्फेक्शन देंगे। ओआ IC होता है।
9:30कंज्यूमर को कॉम्बो पसंद है। एक रैशन
9:32कंज्यूमर हमेशा कॉम्बो चूज़ करता है। उसके
9:35अंदर उन गुड्स का कॉम्बो होता है जो उसको
9:36सेम लेवल ऑफ़ सेटिस्फेक्शन दिलवाएगा। बट
9:39क्या वो कंज्यूमर उस कॉम्बो को खरीद भी
9:42पाएगा या नहीं खरीद पाएगा? इस बात का जवाब
9:45बेटा ना आप दोगे ना मैं दूंगा। इस बात का
9:48जवाब उस कंज्यूमर का बजट देगा। इस बात का
9:52इस इंडिकेटेड बाय यह जो बात अभी लिखी है
9:54ना इसको बताएगा उसका बजट। और वही बात जहां
9:59से आज का लेक्चर अभी स्टार्ट करा आपने 10
10:01मिनट पहले कि ये जो बजट है ये डिपेंड किस
10:05पे करता है? इनकम और प्राइस पे। एक बार
10:08बेटा फटाफट से रिकॉल करते हैं। अभी अभी
10:09हमने क्या-क्या पढ़ा है?
10:11[नाक से की जाने वाली आवाज़]
10:12एक कंज्यूमर का जो बजट है सिंपल दोबारा
10:14देखना। कंज्यूमर का बजट दो चीजों पर
10:17डिपेंड करता है। उसकी खुद की इनकम कितनी
10:19है और गुड्स का प्राइस क्या है? गुड्स और
10:21सर्विज का प्राइस क्या है? इनकम ज्यादा
10:24होगी तो बजट बढ़ जाएगा या गुड्स का प्राइस
10:26कम हो जाएगा तो बजट बढ़ जाएगा। और ऐसे ही
10:28उल्टा केस न्यू कांसेप्ट जो इंपॉर्टेंट है
10:31एक नंबर के लिए। बजट के टेबल जो होता है
10:33ना बजट का टेबल उसको बजट सेट बोला जाता
10:36है। और बजट के ग्राफ को बजट लाइन बोला
10:39जाता है। आगे
10:41बजट सेट की डेफिनेशन क्या है? बजट सेट
10:44रेफर्स टू
10:46द अटेनेबल कॉम्बिनेशन। अटेनेबल का मतलब
10:48क्या है बेटा? अचीवेबल। प्रैक्टिकली
10:50पॉसिबल जो है
10:54अटेनेबल कॉम्बिनेशन ऑफ टू गुड्स जो एक
10:57कंज्यूमर बाय करेगा गुड्स के कुछ प्राइसेस
11:01के हिसाब से और अपनी इनकम के हिसाब से। एक
11:03इंपॉर्टेंट रिलेशन IC और बजट के बीच में।
11:06मतलब ना अगर आप इसको नोट कर रहे हो ना तो
11:08यहां पर एक हेडिंग डाल सकते हो। यह जो
11:10लाइन लिखी हुई है ना IC वाली इससे पहले एक
11:12हेडिंग डाल सकते हो।
11:16हेडिंग बन जाएगी रिलेशन बिटवीन
11:25बजट लाइन
11:28एंड IC। IC में और कंज्यूमर के बजट लाइन
11:31में क्या रिलेशन है? तो IC ना हमें
11:33परसेप्शन बता देता है। परसेप्शन का मतलब
11:35कि कंज्यूमर को क्या पसंद आ रहा है, क्या
11:37नहीं आ रहा? उसकी एक पॉइंट ऑफ व्यू बता
11:39देता है कि कंज्यूमर को कौन सा कॉम्बो
11:42पसंद आ रहा है। IC के अंदर यही था ना
11:43अलग-अलग गुड्स का कॉम्बो जो सेम लेवल ऑफ़
11:45सेटिस्फेक्शन दिलाएगा। आईसी ये चीज तो
11:47बताने में सक्षम है। बट जो रियलिटी चेक है
11:51ये वर्ड कट गया था। यहां पे चेक आएगा। बट
11:54जो रियलिटी चेक है कि उसकी वो जो परसेप्शन
11:57है, उसका जो ड्रीम है, उसका जो कॉम्बो वो
12:00चाह रहा है, वो उसका बजट है। भाई बजट एक
12:02मॉनिटरी बाउंडेशन देता है कि क्या वो
12:05कंज्यूमर अपनी पसंद का कॉम्बो जो IC में
12:08पड़ा है, वह खरीद भी पाएगा या नहीं। इसके
12:11बारे में बजट ही बताता है और कोई बात
12:13नहीं। [नाक से की जाने वाली आवाज़]
12:15ठीक है जी। इसके बाद एक बार दोबारा से आज
12:18हम एक बजट सेट पढ़ेंगे और एक बजट सेट के
12:22बारे में पढ़ेंगे।
12:27ये देखना
12:40एक बजट सेट सेट का मतलब क्या होता है भाई?
12:43अभी-अभी पढ़ा टेबल बनाएंगे मतलब हम इस
12:45टॉपिक के अंदर अभी-अभी अब मैं मान के चलता
12:48हूं कुछ एजम्पशंस ताकि कल वाला कांसेप्ट
12:51थोड़ा स्ट्रांग हो जाए। हम मान के चलते हैं
12:53कंज्यूमर की जो इनकम है या बजट है ना किसी
12:55चीज पर खर्चने के लिए मैं मान के चल रहा
12:58हूं वो है ₹ चलो ₹60 है खर्चने को कल ₹100
13:04वाला एग्जांपल था ना आज ₹60 है
13:07जो px है px का मतलब आपको नाम से ही पता
13:11लग रहा होगा प्राइस ऑफ़ गुड x मैं मान के
13:13चल रहा हूं वह ₹2 का आता है और जो py है
13:16प्राइस ऑफ़ गुड y आज मान के चल रहे हैं
13:19उसको वह ₹1 का आ रहा है कल का थोड़ा उल्टा
13:21क्वेश्चन
13:22कल भी एक एग्जांपल था। है आज भी एग्जांपल
13:24ही बेटे।
13:26अब देखते हैं
13:37इस एग्जांपल के हिसाब से अगर हम चलें ये
13:41देखना।
13:45दोबारा देखो ये चीज क्या करके चलना है आज
13:48हमने? मान के चल रहे हैं कि एक कंज्यूमर
13:51है जिसके पास इनकम जो है वह एग्जांपल के
13:54तौर पर ₹60 है या खर्चने को ₹60 उसके पास
13:56है और जो पहली चीज है वो ₹2 की आती है। जो
14:00दूसरी चीज है वो ₹1 की आती है। अब हम इसके
14:03कॉम्बोस वगैरह देखते हैं कैसे क्या
14:05बनेंगे।
14:08इसको ध्यान में रखते हुए दो गुड्स x और y
14:10हम कॉम्बोस बनाते हैं।
14:13इस बात को ध्यान में रख के चलना बस कि
14:15इसके पास खर्चने के लिए कितने रुपए हैं और
14:18x गुड कितने का आता है? y कितने का आता
14:20है। अब
14:23एक हम बना लेंगे यहां पे कॉम्बो।
14:26कॉम्बोस
14:29लेट इट बी पहला कॉम्बो।
14:31दूसरा कॉम्बो।
14:34तीसरा कॉम्बो,
14:36चौथा कॉम्बो ये बना दिए कॉम्बिनेशंस।
14:42ये हो गया यहां पर गुड x की यूनिट्स कि
14:45गुड x कितना खरीदेगा? ये सामने हो गया गुड
14:50y कितना खरीद पाएगा? और एक चीज इसका खुद
14:53का इनकम या इसका बजट क्या है? इसकी इनकम
14:57क्या है? या इसका बजट क्या है? कंज्यूमर्स
14:59बजट क्या है?
15:01[नाक से की जाने वाली आवाज़]
15:02कुछ भी डिसाइड करने से पहले एक चीज जो
15:04हमें पहले से पता है वो है इसकी इनकम या
15:06इसका बजट कि इसकी औकात कितनी है। फिलहाल
15:09जो हमने मान के चले क्वेश्चन में देखते
15:11हैं इस क्वेश्चन के अंदर हमने मान के चल
15:14रहे हैं इसका जो बजट है ऊपर भी लिखा हुआ
15:17था
15:18वो कितना है ₹60 का। 60 से ज्यादा नहीं जा
15:21सकता।
15:2460
15:2760 से ज्यादा रुपए नहीं खर्चेगा।
15:30[नाक से की जाने वाली आवाज़]
15:30गुड हैक्स हम कितने का मान के चल रहे हैं?
15:37गुडx हमने माना था ₹2 का। आई गेस
15:40हां प्राइस ऑफ़ x ₹2 प्राइस ऑफ़ y ₹1 x वाला
15:45जो गुड है ये हमने माना है। यह ₹2 का आता
15:48है और y जो है वो ₹1 का आता है। अब देखते
15:52हैं भाई। अलग-अलग कॉम्बिनेशंस बनाओ। चलो।
15:56अगर यह कंज्यूमर एक
15:58[नाक से की जाने वाली आवाज़] भी गुड एक्स
15:59ना खरीदे और ₹60 खर्चने को तैयार है। गुड
16:03व कितने खरीद पाएगा भाई? 60 के 60 पीस गुड
16:05व के खरीद पाएगा। ऐसा क्यों? क्योंकि गुड
16:08व कितने का आता है? ₹1 का। 60 1 ₹ अगर यह
16:12बंदा 10 पीस गुड x के ले आया। अब बेटा गुड
16:16x कितने का था? ₹2 का। 10 * 2 ₹20 चले गए।
16:19अब कितने बचे हैं गुड बाय के? ₹40। ₹1 का
16:22पीस है तो 40 पीसेस के ला सकता है। अगर यह
16:24गुड एक्स की 20 यूनिट्स ले आया। अगर मान
16:26लो तो इसने कितने पैसे खर्च दिए अपने x पे
16:3020 पीस ले आया x के। x 20 ₹2 का था ₹40
16:34खर्च दिए। अब इसके पास सिर्फ ₹20 बचे हैं
16:36तो 20 पीस ही ला पाएगा यह गुड y के। और
16:39अगर यह गलती से 30 पीस ले आया गुड x के तो
16:43y के लिए बजट ही नहीं बचेगा भाई। क्योंकि
16:46गुड x कितने का था? ₹2 का। यह जो हमने एक
16:48टेबल सा बनाया ना, यह इसका बजट है।
16:53यह [नाक से की जाने वाली आवाज़] जो टेबल
16:53सा आपने बनाया है ना, यह इसका एक बजट सेट
16:56है जो बनाया
16:59अलग-अलग चीजों को ध्यान में रखते हुए कि
17:01भाई क्या-क्या हिसाब किताब रहेगा ये वो।
17:06और अगर इसी बजट को हम आज प्लॉट कर दें तो
17:09वो बजट लाइन कहलाएगी। और क्या है? यही तो
17:11टॉपिक है बस कंज्यूमर्स बजट का। इसी को
17:14अगर आज हम प्लॉट कर देते हैं। ये देखो
17:17एग्जांपल के तौर पे इसको ही अगर आप प्लॉट
17:20कर दो।
17:31[नाक से की जाने वाली आवाज़]
17:51ये देखना
18:10ये रहा। इसको अगर हम आज प्लॉट कर देते
18:13हैं। यहां पर हम 2 मिनट के लिए कंसीडर कर
18:15लेते हैं। यह हो गया आपका x एक्सिस पर गुड
18:18x
18:22गुड x और y एक्सिस पर आपका गुड y
18:28इसको अगर हम अलग-अलग कॉम्बो बेटा ग्राफ ना
18:31आप खुद बनाना। ठीक है? ये जो भी अभी हमने
18:34डिसाइड करा था ना पूरा का पूरा टेबल जो था
18:37कि एक बार मैं डिक्टेट कर देता हूं। गुड x
18:400 गुड व 60 एक कॉम्बो था फिर गुड x 10 गुड
18:45व 40 एक कॉम्बो था ये जो भी आपने भी बनाया
18:49था ना टेबल इसको जब आप प्लॉट करेंगे
18:54तो जो एक आपके पास ऐसे लाइन निकल के आएगी
18:56ना ये लाइन जो होगी ये लाइन बजट लाइन
18:59कहलाएगी ये जो लाइन बन के आएगी ना ये लाइन
19:02कहलाएगी बजट लाइन
19:08ग्राफ तो तो आप प्लॉट कर ही सकते हो ना?
19:09एक बार बस ग्राफ प्लॉट करना। ऐसा-ऐसा जो
19:11ग्राफ बनेगा वो बजट लाइन है। और जो पीडीएफ
19:13भेजोगे उसके अंदर ये होना चाहिए। याद
19:15रखना।
19:18[नाक से की जाने वाली आवाज़]
19:22एक बार आपको टेक्स्ट कॉपी में भी दिखा
19:23देते हैं। ये देखो ये जो नोटबुक में बनाया
19:27हुआ है ना कुछ इस तरीके से कि भाई ये आपने
19:30गुड y पहले बना दिया। गुड y के लिए
19:32एक्सिस। ये गुड x के लिए एक्सिस। ये
19:34कॉम्बो सा प्लॉट करा है। ये बजट लाइन है।
19:36और जितने जितने पॉइंट्स इस कॉम्बो के ऊपर
19:39या अंदर आते हैं ये अटेनेबल है। ये तो कल
19:41भी पढ़ा था ना। और बाहर वाले पॉइंट्स क्या
19:43है? नॉन अटनेबल। यह बनाना है आपने। दैट्स
19:45इट व्हाई। बस इतना करो।