Full transcript
0:01नाइंथ क्लास यह सेपरेशन एंड देयर
0:03मिक्सचर्स के कुछ इंपॉर्टेंट टॉपिक्स हैं।
0:05सबसे पहले इवापोरेशन और बॉइलिंग।
0:08सिमिलरिटी क्या है और फर्क क्या है?
0:10इवापोरेशन और बोइलिंग दोनों ही ऐसी
0:13प्रोसेससेस है जिसके अंदर एक लिक्विड गैस
0:17में कन्वर्ट होता है। इवापोरेशन में भी और
0:20बोइलिंग में भी। दोनों में फर्क क्या है?
0:22फिर डेफिनेशन पहली बात तो इवापोरेशन इज़ अ
0:26प्रोसेस इन व्हिच अ लिक्विड चेंजज़ इंटू
0:28गैसियस स्टेट। ये देखो
0:32ये चीज दोनों में सेम है। बोइलिंग इज द
0:36प्रोसेस इन व्हिच अ लिक्विड चेंजज़ इनू
0:38गैसियस स्टेट। तो फिर डिफरेंस क्या है?
0:41इवापोरेशन किसी भी टेंपरेचर पर होती है एट
0:44एनी टेंपरेचर बस उसके बॉइलिंग पॉइंट से
0:47नीचे-नीचे और बोइलिंग बॉईलिंग पॉइंट पर ही
0:50होती है। एग्जांपल से समझो। जैसे फॉर
0:52एग्जांपल अगर आप घर पर पानी को उबाल रहे
0:54हो किसी कंटेनर के अंदर तो अगर वह उबल रहा
0:57है वह बॉईल हो रहा है इसका मतलब वहां पर
0:59टेंपरेचर 100 डिग्री कम से कम हो चुका है
1:02उस बर्तन के अंदर तभी वो उबल रहा है ठीक
1:05है बट बाहर अगर सड़क पे पड़ा हुआ पानी
1:09एकदम से सूख रहा है तो ऐसा थोड़ी है कि
1:10बाहर 100° हो गया वो सूख रहा है तो वो
1:13क्या है इवापोरेशन दूसरा पॉइंट इवापोरेशन
1:16एक सरफेस फिनोमिना होता है सरफेस फिनोमिना
1:19यानी सरफेस की प्रोसेसें ऊपर ऊपर से होती
1:22बोइलिंग पूरे बल्क में होती है। बॉइलिंग
1:23इज अ बल्क फिनोमिना। पूरे बल्क में पूरे
1:25मीडियम में होती है। अच्छे से होती है।
1:27इवापोरेशन अपने आप होती है। बॉइलिंग को
1:30करना पड़ता है विलिंगली। इवापोरेशन ठंडक
1:33कॉज करती है। जैसे अगर हम आपके हाथ पे
1:35एसीटोन नेल पॉलिश रिवर डाले या पेट्रोल
1:37डालें तो वो फटाफट से अपने आप इवापोरेट हो
1:40जाएगा और आपके हाथ पे ठंडा इफेक्ट आएगा।
1:42बॉईलिंग से कूलिंग नहीं होती। इंपॉर्टेंट
1:44डिफरेंस है ध्यान रखना।
1:47नेक्स्ट इसके बाद होमोजनियस और
1:49हेटेरोजीनियस मिक्सचर्स के अंदर क्या
1:51डिफरेंस है वह देखते हैं। होमोजनियस
1:53मिक्सचर्स हेटेरोजीनियस मिक्सचर्स। फर्क
1:56क्या है? होमोजनियस मिक्सचर्स कौन से होते
1:58हैं?
2:00द मिक्सचर्स इन व्हिच सब्सटेंसेस आर
2:03कंप्लीटली मिक्स्ड टुगेदर। जिनके अंदर
2:06सब्सटेंसेस अच्छी तरीके से मिक्स हो जाए
2:08वो होमोजनियस है। और द मिक्सचर्स इन व्हिच
2:11सब्सटेंसेस रिमेन सेपरेट। जो सब्सटेंस है
2:13वो घुले ना अच्छे से वो अलग-अलग रहे वो
2:15हेटेरजेनियस होते हैं। होमोजनियस
2:18मिक्सचर्स की यूनिफॉर्म कंपोजशन होती है
2:20अपने पूरे मास में और हेटेरजेनियस की नॉन
2:23यूनिफॉर्म कंपोजशन इसका मतलब क्या है?
2:26यूनिफॉर्म कंपोजशन मतलब वो एक समान नजर
2:28आता है। जैसे कल हमने ट्राई करा था ना वो
2:30परसों एसीटोन और वाटर मिक्स करा था। तो
2:32मिक्स करने के बाद वो एक से नजर आ रहा था।
2:34वो होमोजनियस है। अगर हम चॉक पाउडर और
2:37वाटर को मिलाए वो घुलेगा नहीं एक दूसरे के
2:39साथ। वो नॉन यूनिफॉर्म दिखेगा आपको
2:40अलग-अलग दिखेगा वो चीज होमोजनियस
2:43मिक्सचर्स की कोई विज़िबल बाउंड्रीज नहीं
2:45होती हेटेरोजीनियस की होती है एग्जांपल आप
2:48ऑयल इन वाटर को एक साथ मिक्स कर दो तो ऑयल
2:50ऊपर अपनी अलग से बाउंड्री बना लेगा ना
2:52होमोजनियस की एग्जांपल शुगर का सॉल्यूशन
2:55साल्ट का सॉल्यूशन हेटेरोजीनियस के ऑयल इन
2:57वाटर मड इन वाटर चॉक पाउडर इन वाटर
2:59एसेट्रा किस मिक्सचर को सॉल्यूशन भी बोला
3:02जाता है होमोजनियस को भाई अच्छे से घुल
3:05जाता है ना वो
3:08उसके बाद एक इंपॉर्टेंट टॉपिक आ जाता है
3:10प्रॉपर्टीज ऑफ सॉल्यूशन। ट्रू सॉल्यूशन की
3:14क्या प्रॉपर्टीज होती है? इंपॉर्टेंट है।
3:17अभी-अभी ऊपर पढ़ा किस मिक्सचर को सॉल्यूशन
3:19कहते हैं? होमोजनियस को। तो पहली
3:21प्रॉपर्टी तो यही है। एक सॉल्यूशन
3:23होमोजनियस मिक्सचर होता है जो अच्छे से
3:25घुल चुका है। दूसरा क्योंकि वो अच्छे से
3:28घुल चुका है। पार्टिकल्स अच्छे से एक
3:30दूसरे में समा चुके हैं। तो जो सॉल्यूशन
3:34के पार्टिकल्स होते हैं वो एक नैनो मीटर
3:36से भी छोटे होते हैं। इतना छोटा पार्टिकल
3:39साइज आपकी नॉर्मल आंख से दिख नहीं सकता।
3:41वो माइक्रोस्कोप से ही दिखेगा।
3:44घुलने के बाद एक बार शुगर वाटर में डिॉल्व
3:47हो जाए तो आपको अलग से थोड़ी नजर आती है
3:49वो। और एक बेटा रूल याद रखना लाइट को ये
3:53थर्ड पॉइंट बहुत इंपॉर्टेंट है। लाइट को
3:54फैलने के लिए ना जगह चाहिए होती है।
3:58लाइट को फैलने के लिए कोई मीडियम चाहिए
4:00होता है। अब क्योंकि इनका पार्टिकल साइज
4:03है बहुत ही छोटा बिकॉज़ ऑफ वेरी स्मॉल साइज
4:06ऑफ़ पार्टिकल्स। पढ़ा ना 1 नैनोमीटर से भी
4:07कम है तो ये लाइट की बीम को फैलाते ही
4:10नहीं है। तो अगर आप एक सॉल्यूशन के अंदर
4:14ये ट्रू सॉल्यूशन के अंदर लाइट मारोगे भी
4:16ना तो आपको उसका पाथ नहीं दिखेगा। आर पर
4:20होती हुई दिखेगी वो पूरी।
4:22इसके बाद फोर्थ पॉइंट है जो सॉल्यूट के
4:25पार्टिकल्स हैं वो फिल्ट्रेशन से सेपरेट
4:27नहीं हो सकते। फिल्ट्रेशन इस लाइक छन्नी
4:29से छानना। अगर आप चीनी वाले पानी को छन्नी
4:32से छानोगे तो चीनी थोड़ी अलग हो जाएगी।
4:35चाय पर ती हो जाती है क्योंकि उसका
4:36पार्टिकल साइज बड़ा होता है। यह तो ट्रू
4:37सॉल्यूशन है।
4:40ट्रू सॉल्यूशन यूजली क्लीन और
4:42ट्रांसपेरेंट होते हैं। एग्जांपल साल्ट
4:43सॉल्यूशन या शुगर सॉल्यूशन। इसके बाद इस
4:46साल का एक इंपॉर्टेंट टॉपिक रहने वाला है
4:48कंसंट्रेशन ऑफ सॉल्यूशन। कंसंट्रेशन ऑफ
4:52सॉल्यूशन का मतलब होता है कितना सॉल्यूट
4:55डिॉल्व हो रहा है एक सॉल्यूशन में। इसको
4:58कंसंट्रेशन कहते हैं सॉल्यूशन की।
5:00एग्जांपल के तौर पर ओआरएस देख लो। ओआरएस
5:03की फुल फॉर्म क्या है? ओरल रिहाइड्रेशन
5:08सॉल्यूशन। यह फुल फॉर्म है। यह आजकल बहुत
5:11ट्रेंडिंग ड्रिंक है भाई। ओआरएस किससे
5:14बनता है? फिक्स्ड मात्रा में सॉल्ट को,
5:16शुगर को और वाटर को मिक्स करके बनता है।
5:18अगर ये अमाउंट कम ज्यादा होंगे तो वो जो
5:20लिक्विड बनेगा वो ओआरएस नहीं होगा। ये जो
5:23ओआरएस है ये डिहाइड्रेशन दूर करने के लिए
5:26यूज़ किया जाता है। ध्यान रखना। ओआरएस
5:29किसने डेवलप करा? एक इंडियन ने जिनका नेम
5:32था दिलीप महलन बीस इन्होंने ओआरएस डेवलप
5:35करा।
5:37नेक्स्ट टॉपिक आ जाता है सॉलबिलिटी।
5:42सॉलुबिलिटी का मतलब क्या है? कितना
5:45मैक्सिमम सॉल्यूट डिॉल्व हो सकता है, घुल
5:48सकता है एक सॉल्वेंट में किसी टेंपरेचर
5:50पर। उसको सॉलीबिलिटी कहते हैं। सॉल्यूट्स
5:54की सॉलीबिलिटी टेंपरेचर के साथ बढ़ती है।
5:56तभी तो आप लोगों ने गर्म पानी में ज्यादा
5:58चीनी घोल पाए थे।
6:00सैचुरेटेड सॉल्यूशन देन क्या होता है?
6:05एक सॉल्यूशन जिसके अंदर अब और गुंजाइश
6:07नहीं बची। अ सॉल्यूशन इन वि नो मोर
6:11सॉल्यूट कैन बी डिॉल्व एट अ गिवन टेंपरेचर
6:14इज कॉल्ड सैचुरेटेड सॉल्यूशन।
6:17ये आगे का टॉपिक देखो।
6:20ये देखना।
6:22सॉलिड्स की सॉलुबिलिटी बढ़ जाती है
6:25टेंपरेचर से। ठीक है? जैसे ज्यादा शुगर
6:28डिॉल्व हो जाती है हॉट वाटर में एज कंपेयर
6:31टू कोल्ड वाटर। लेकिन इंपॉर्टेंट पॉइंट यह
6:33है गैसेस की सॉलबिलिटी जो है ना गैसेस की
6:37गैसेस की सॉलुबिलिटी कम हो जाती है
6:40टेंपरेचर बढ़ने से। जैसे मान लो अगर आप
6:43कोल्ड ड्रिंक्स को हीट करोगे उसका
6:44टेंपरेचर बढ़ाओगे। उसकी गैस निकल जाएगी
6:46बाहर।
6:48ये इतने दिनों से आप फ्लो चार्ट बना रहे
6:50हो। होमोजेनियस मिक्सचर को सेपरेट करने के
6:52क्या-क्या मेथड्स हैं? तो क्रिस्टलाइजेशन,
6:55डिस्टिलेशन और क्रोमेटोग्राफी।
6:57अब यहां आगे क्रिस्टलाइजेशन पढ़ने से पहले
7:01एक बार यहां तक की 7 मिनट्स तक की वीडियो
7:04ये 7 मिनट्स तक की जो वीडियो है इसको
7:07दोबारा देखो। उसके बाद आगे आना।
7:13नेक्स्ट टॉपिक आ जाता है क्रिस्टलाइजेशन।
7:18क्रिस्टलाइजेशन क्या है भाई?
7:20क्रिस्टलाइजेशन एक प्रोसेस है जिससे आप
7:23प्योर सॉलिड के क्रिस्टल्स ऑब्टेन करते
7:26हो। प्योर सॉलिड क्रिस्टल्स एक सैचुरेटेड
7:30सॉल्यूशन से उसे धीरे-धीरे ठंडा करके। ठीक
7:33है? जैसे हमने पढ़ा था मान लो यार आपने एक
7:36x कंपाउंड का सैचुरेटेड सॉल्यूशन बना दिया
7:3860° सेल्सियस पर। ठीक है? थे वो इसके आगे
7:41की एग्जांपल की जरूरत नहीं है या इस
7:43वीडियो में नहीं है। वो क्या था आपके
7:44नोट्स में कि फिर जब अगर हमने टेंपरेचर
7:4748° करेंगे तो जो एक्सेस उसके अंदर सामान
7:50घुला हुआ है वो बाहर आ जाएगा क्रिस्टल्स
7:52के रूप में। इसी एक्टिविटी को
7:53क्रिस्टलाइजेशन कहते हैं। इसकी प्रोसेस को
7:56समझो। एक्सप्लेन द प्रोसेस ऑफ
7:59क्रिस्टलाइजेशन।
8:03पहले तो इसकी डेफिनेशन ही है। अब आगे सबसे
8:06पहले आप एक सैचुरेटेड सॉल्यूशन बनाओ हाई
8:09टेंपरेचर के साथ। अब सैचुरेटेड सॉल्यूशन
8:12कौन सा होता है जो आपने उसकी मैक्सिमम
8:14कैपेसिटी तक जिसमें सॉल्यूट डाला है कि
8:16भाई अब और इसके अंदर सॉल्यूट जा ही नहीं
8:18पा रहा ओवर डाल दिया
8:21फिर धीरे-धीरे उसे ठंडा होने के लिए छोड़
8:23दो।
8:26जैसे ही सॉल्यूशन ठंडा होगा वो सॉलिड था।
8:29उसकी सॉलीबिलिटी कम हो जाएगी तो प्योर
8:31क्रिस्टल्स अलग हो जाएंगे। फिर उसको
8:32कलेक्ट करके ड्राई कर लो।
8:36इसको ज्यादातर इंडस्ट्रीज और लैब्स में
8:38यूज किया जाता है प्यूरिफिकेशन करने के
8:40लिए। नेक्स्ट आ जाता है इसके यूजज़ सॉलिड्स
8:43को सेपरेट करना, प्यूरिफिकेशन ऑफ सॉलिड्स
8:46और प्योर क्रिस्टल्स ऑब्टेन करना।
8:49इसके बाद टॉपिक है प्रिंसिपल ऑफ
8:51क्रिस्टलाइजेशन। क्रिस्टलाइजेशन किस
8:54प्रिंसिपल पर काम करता है? किस बेसिस पर
8:56काम करता है? तो बड़ा सिंपल है भाई।
8:59सॉलबिलिटी में फर्क होता है। डिफरेंस इन
9:02सॉलबिलिटी ऑफ सब्सटेंसेस एट डिफरेंट
9:05टेंपरेचर। सॉलबिलिटी बदल जाती है भाई
9:08सब्सटेंसेस की अलग-अलग टेंपरेचर पर। ठीक
9:10है?
9:12100 डिग्री सेल्सियस पर या 80 डिग्री
9:14सेल्सियस पर पानी ज्यादा शुगर डिॉल्व कर
9:16सकता है। 40° पर उतनी नहीं करेगा। तो 80°
9:20पे ज्यादा डाल दो और 40° पे वो एक्सेस
9:22अपने आप बाहर आ जाएगा। ज्यादा सॉल्यूट जो
9:24है वो घुल जाता है हाई टेंपरेचर पर। जब
9:26ठंडा होता है तो वो एक्स्ट्रा बाहर आ जाता
9:28है क्रिस्टल्स के रूप में। यही टेक्निक
9:30है। इंपॉर्टेंट एक्टिविटी कॉपर सल्फेट के
9:34क्रिस्टल्स बनाना। प्रिपरेशन ऑफ कॉपर
9:36सल्फेट क्रिस्टल्स। एक्टिविटी का एम क्या
9:39है? टारगेट क्या है? टू प्रिपेयर
9:41क्रिस्टल्स ऑफ कॉपर सल्फेट।
9:44कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल्स ऑब्टेन करना।
9:48क्या-क्या मटेरियल्स रिक्वायर्ड है? कॉपर
9:50सल्फेट लगेगा। वाटर थोड़ा सा एसिड कंटेनर
9:54ग्लास की रोड घुमाने के लिए फनल वॉच ग्लास
9:57और बर्नर और स्टैंड डायग्राम आपने बड़ा
9:59सुंदर नोट्स में बनाया था। प्रोसीजर क्या
10:01है? 1 ग्राम कॉपर सल्फेट को एक बकर में
10:03रखो। पानी डालो और एक ड्रॉप एसिड की डाल
10:07दो। एसिड क्यों डाला? ताकि बेफालतू के
10:10रिएक्शंस ना हो। उसको भाई मिक्सचर को हीट
10:13करना स्टार्ट कर दो। कंटीन्यूअसली उसको
10:14घुमाते घुमाते घुमाते घुमाते।
10:17अब
10:19थोड़ा और कॉपर सल्फेट डाल कॉपर सल्फेट डालो
10:22जब तक वो सॉल्यूशन सैचुरेटेड ना बन जाए कि
10:24अब और कॉपर सल्फेट जा ही नहीं पा रहा। एक
10:27बार उसको फिल्टर कर लो ताकि अनवांटेड
10:29इनसॉलीबल चीजें बाहर आ जाए। जो क्लियर
10:32लिक्विड बचता है ना छन्नी से छानने के बाद
10:34उसको फिल्ट्रेट कहते हैं। अब उसको ठंडा
10:37होने के लिए छोड़ दो। बाद में ब्लू कलर के
10:39शाइनी कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल्स आ
10:41जाएंगे। फिल्ट्रेट क्या होता है? वो
10:43लिक्विड जो फिल्टर पेपर से पास होता है।
10:46आपकी भाषा में बोलूं तो जो चाय जो चाय
10:49आपके कप में जाती है ना कंटेनर से निकलने
10:51के बाद वो फिल्ट्रेट कहलाती है। नेक्स्ट
10:54टेक्निक डिस्टिलेशन।
10:56बहुत प्यारी टेक्निक है। कभी कबभार हम
10:59चाहते हैं कि हम एक सॉल्यूट को सेपरेट भी
11:01कर लें सॉल्यूशन से और सॉल्वेंट भी हमारा
11:04बचा रहे। एग्जांपल अगर आपको सॉल्ट चाहिए
11:07सॉल्ट सॉल्यूशन में से। इसमें अगर आप फॉर
11:10एग्जांपल क्रिस्टलाइजेशन करोगे ना
11:12इवापोरेशन की जगह क्रिस्टलाइजेशन भी लिख
11:14सकते हो। क्रिस्टलाइजेशन करोगे अगर तो
11:17वहां पर पानी चला जाता है। ठीक है?
11:20बट अगर हमें वो पानी भी चाहिए तो
11:22डिस्टिलेशन का यूज़ करो। डिस्टिलेशन की
11:25डेफिनेशन ध्यान से समझना।
11:28डिस्टिलेशन इज द प्रोसेस ऑफ सेपरेटिंग
11:31कॉमोनेंट्स ऑफ अ होमोजनियस मिक्सचर। जैसे
11:34मैंने तुम्हें बताया था वो एसिडोन और वाटर
11:36वाला एग्जांपल। एसिटोन और वाटर होमोजनियस
11:39मिक्सचर है। उसके कॉमोनेंट्स को एसीटोन और
11:41वाटर को अलग-अलग करने के लिए यूज किया जा
11:43सकता है। और कैसे? पहले हीट करके और फिर
11:46ठंडा करके ऑन द बेसिस ऑफ डिफरेंस इन देयर
11:49बॉइलिंग पॉइंट्स। ऑन द बेसिस ऑफ डिफरेंस
11:52इन देयर बोइलिंग पॉइंट्स। यही इसका
11:54प्रिंसिपल भी है।
11:57प्रिंसिपल क्या है? सिंपल सी बात है यार।
11:59जिस लिक्विड का लोअर बोइलिंग पॉइंट है, वह
12:01पहले उड़ जाएगा। जैसे एसीटोन 56° पे उड़
12:03जाएगा।
12:04उसके बाद आप हीट बंद कर दो। ठीक है? पावनी
12:07वाटर नीचे बचा रहेगा। और
12:11जो वेपर कूल हुआ है, जो वेपर आपका उड़ा
12:14था, उसको कूल करके वापस लिक्विड बना दो।
12:16प्रोसेस क्या है? ध्यान से समझो।
12:20यह आपने आज भी पढ़ी है ना? यही प्रोसेस
12:22ध्यान से समझो जरा।
12:26प्रोसेस ऑफ डिस्टिलेशन। हीटिंग। सबसे पहले
12:30तो मिक्सचर जो है उसको हीट किया जाता है
12:32एक डिस्टिलेशन फ्लास्क के अंदर कंटेनर के
12:35अंदर। जैसे भाई एसीटोन और वाटर। एसीटोन का
12:38लोअर बॉइलिंग पॉइंट है तो वो पहले उड़
12:40जाएगा। उसके बाद वेपर्स बनेंगे। पहले वेपर
12:43किसके बनेंगे? जिसका लोअर बॉइलिंग पॉइंट
12:45होगा। जैसे कि एसीटोन। फिर हम करेंगे
12:48कंडेंसेशन। मतलब उस वेपर्स को ठंडा
12:51करेंगे। कंडेंसर से पास करेंगे जिससे वो
12:53ठंडा हो जाएगा। कूलिंग से क्या होगा? वो
12:56वेपर वापस लिक्विड में आ जाएगा। इस
12:59प्रोसेस को कंडेंसेशन कहते हैं।
13:05नेक्स्ट कलेक्शन जो प्योर लिक्विड कलेक्ट
13:09कर रहा है कंडेंसेशन के बाद उसको
13:10डिस्टिलेट कहते हैं। डिस्टिलेट ई आएगा
13:13लास्ट में। क्लियर? और जो बचता है
13:16डिस्टिलेशन फ्लास्क में।
13:18आगे फंक्शनंस ऑफ पार्ट्स ऑफ डिस्टिलेशन।
13:22डिस्टिलेशन फ्लास्क का मतलब क्या है भाई?
13:24जो सारे मिक्सचर को रखेगा। बर्नर हीट
13:27देगा। थर्मामीटर टेंपरेचर चेक करेगा।
13:29कंडेंसर कूल करेगा वेपर्स को लिक्विड में।
13:31वाल लिखा नहीं हुआ तो पूरा लिक्विड आएगा।
13:33कोनिकल फ्लास्क प्योर लिक्विड को कलेक्ट
13:36करेगा। कंडेंसेशन एक प्रोसेस है जिसके
13:38अंदर वेपर से लिक्विड बनता है ठंडा करके।
13:40डिस्टिलेट वो प्योर लिक्विड है जो
13:42डिस्टिलेशन के बाद बचता है। मिज़िबल
13:44लिक्विड्स किनको कहते हैं जो प्रॉपर्ली
13:46मिक्स हो जाते हैं। जैसे अल्कोहल और वाटर,
13:48एसीटोन और वाटर वो सब। डिस्टिलेशन के यूज
13:52ऐसे मिसिबल लिक्विड्स को अलग करना जो
13:54अच्छे से घुल चुके हैं। जैसे कि रूब्जा
13:56वाटर, अल्कोहल वाटर वो सब सॉल्वेंट्स की
13:59भी रिकवरी हो जाती है और प्योर लिक्विड्स
14:01को ऑब्टेन करना। कंडीशन क्या है भाई?
14:04डिस्टिलेशन तभी वर्क करती है बढ़िया जब
14:06बॉइलिंग पॉइंट्स दोनों लिक्विड्स के कम से
14:09कम 25° सेल्सियस का डिफरेंस हो। उसमें अब
14:12जैसे एसीटोन और वाटर था। एसीटोन का 56°
14:15था। वाटर का 100° था। अच्छा खासा डिफरेंस
14:17था ना। एसीटोन उड़ गया। जब आपने देखा वह
14:19उड़ रहा है उतने में आपने वाटर वाली हीट
14:22बंद कर दी।