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0:00हेलो 11th बिनेस। आज का जो आपका टॉपिक है
0:03दैट विल बी आउटसोर्सिंग ऑफ सर्विज। ठीक
0:06है? यार सर्विज को आउटसोर्स करना क्या
0:08होता है? आउटसोर्सिंग का मतलब होता है
0:10आउटसोर्स करना। वाह जी वाह क्या मतलब
0:12बताया है? आउटसोर्स करना मतलब
0:17बाहर से ऑब्टेन करना। बाहर से ऑब्टेन
0:22करना। मतलब क्या होता है यार? बिनेस में
0:26हम हर एक काम खुद भी नहीं कर सकते भाई।
0:28उसमें टाइम भी जाएगा, एफर्ट्स भी जाएंगे।
0:31आपकी नॉर्मल कंज्यूमर जिंदगी में और
0:34बिजनेस जिंदगी में बहुत फर्क है। ठीक है?
0:36आप लोगों को घर पे सिखाया जाता है हर चीज
0:38घर पे बनाओ, सस्ती पड़ती है। बाहर से मत
0:41मंगाओ, घर पे बनाओ सस्ता पड़ेगा। ये है वो
0:43है। लेकिन बिनेसेस अक्सर कई चीजें क्या?
0:46मेजॉरिटी चीजें मेजॉरिटी सर्विसेस बाहर से
0:50ही ऑब्टेन करते हैं ताकि उनका बिज़नेस
0:52स्मूथली चलता रहे। एक छोटे से एग्जांपल से
0:54समझते हैं। मान लो मेरा खुद का काम अ
0:57टीचिंग है। ठीक है? तो अब यार मेरा काम
1:00पढ़ाने से है। अब अगर मैं कहूं कि यार
1:03पढ़ाने के लिए जो बोर्ड लग रहा है वो भी
1:05मैं ही बनाऊंगा। जो मार्कर लग रहा है वो
1:07भी मैं ही बनाऊंगा। ठीक है? बच्चों को
1:09बिाने के लिए जो चेयर्स है वो भी मैं ही
1:11सेटअप करूंगा। खुद से ही बनाऊंगा। मैं ही
1:13फर्नीचर का काम भी मैं करूंगा। तो भाई मैं
1:15कुछ भी नहीं कर पाऊंगा उस हिसाब से। पैसे
1:17बहुत वेस्ट हो जाएंगे। टाइम वेस्ट होगा,
1:19एफर्ट्स वेस्ट होंगे और बढ़िया कर भी नहीं
1:21पाएंगे। क्योंकि हम उस चीज के एक्सपर्ट
1:22नहीं है कि हम कुर्सियां बनाने लग जाए,
1:24मार्कर बनाने लग जाए। तो बाहर से तो
1:27ऑब्टेन कर ही रहे हैं ना। शॉर्ट में बोले
1:30तो इट रेफर्स टू ऑब्टेनिंग सम सर्विसेस।
1:36इट रेफर्स टू ऑब्टेनिंग सम सर्विसेस
1:41फ्रॉम
1:43आउटसाइड द ऑर्गेनाइजेशन।
1:46अपनी ऑर्गेनाइजेशन के बाहर से कुछ सर्विज
1:49ऑब्टेन करना ही आउटसोर्सिंग कहलाता है।
1:53अपनी ऑर्गेनाइजेशन के बाहर से सर्विज
1:56अरेंज करना, मंगवाना, ऑब्टेन करना ही
1:59आउटसोर्सिंग कहलाता है। ठीक है? एग्जांपल
2:02से समझे तो भाई मान लो एक ब्रांड है जो
2:05गाड़ियां बना रहा है। ठीक है? लेटेड भी
2:07कार का ब्रांड हम बात कर लेते हैं Maruti
2:09Suzuki।
2:11तो यार Maruti Suzuki एक्सपर्ट है गाड़ियां
2:13बनाने में। इंजन वो बना रहा होगा। डिज़ाइन
2:15में भी वो बना रहा होगा। लेकिन इसी गाड़ी
2:17का एक मेजर पार्ट है जिसके बिना गाड़ी की
2:20कैसे चलेगी? दैट इज टायर। क्या टायर भी ये
2:22लोग अपना Maruti Suzuki का बनाते हैं।
2:24आपने देखा है टायर पे Maruti Suzuki लिखा
2:26हुआ टायर ये लोग किसी बढ़िया ब्रांड का CAT
2:29का, MRF का, अपोलो का ऐसे ऑब्टेन करते
2:34हैं। इसी चीज़ को तो आउटसोर्स करना कहते
2:36हैं कि नो डाउट गाड़ी बनाना हमारा काम है।
2:38लेकिन गाड़ी में लगने वाला हर एक पार्ट हम
2:40बनाए ऐसा जरूरी नहीं है। हम उसको बाहर से
2:42ऑब्टेन कर लेंगे। जो भी उसका खर्चा होगा
2:44उसको अपने प्रोडक्ट में जोड़ लेंगे। लॉस
2:46थोड़ी खाएंगे। इस कांसेप्ट को आउटसोर्सिंग
2:48कहा जाता है। ठीक है? अब यार इसके फीचर्स
2:52और नीड जब पढ़ोगे ना तो उसमें सारा आ
2:54जाएगा कि इसका फायदा क्या है? ठीक है?
2:56इसका फायदा क्या है? अब भाई अगर हम बात
3:00करें आउटसोर्सिंग की तो दो तरह के
3:02कांसेप्ट्स आएंगे हमारे पास चैप्टर में।
3:04केपीओ दैट स्टैंड्स फॉर नॉलेज प्रोसेस
3:08आउटसोर्सिंग और बीपीओ दैट स्टैंड्स फॉर
3:11बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग। बीपीपीओ में
3:14नॉर्मल लोगों को लगता है सिर्फ वो आता है
3:17कस्टमर सर्विस आता है कॉल सेंटर आता है और
3:19भी बहुत कुछ आता है बीपीपीओ में। कोई भी
3:21अगर बिनेस सर्विस बाहर से ऑब्टेन करी जा
3:23रही है। दैट इज़ बीपीओ। वो बेशक कॉल सेंटर
3:25वाली हो या किसी और भी चीज की हो। और
3:28केपीओ होता है नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग।
3:30जब हाई एंड नॉलेज वर्क को बाहर से ऑब्टेन
3:33किया जाता है किसी एक्सपर्ट से दैट इज
3:36केपीओ। तो हम शुरुआत करते हैं भाई बीपीपीओ
3:39से। बीपीपीओ स्टैंड्स फॉर बिनेस प्रोसेस
3:43आउटसोर्सिंग। बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग।
3:48बिनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग।
3:52अब बच्चों इसके अंदर आता क्या है भाई?
3:54सिंपल अगर हम आसान भाषा में बोल तो इट
3:56रेफर्स टू ऑब्टेनिंग सर्विसेस फ्रॉम
3:59आउटसाइड द ऑर्गेनाइजेशन। भैया यही तो
4:01आउटसोर्सिंग की डेफिनेशन थी। यहां भी यही
4:03आएगा। बस आगे थोड़ा सा लाइन ऐड ऑन कर
4:05देंगे इन ऑर्डर टू रन द बिनेस सक्सेसफुली।
4:08तो बीपीओ क्या होता है? बीपीओ
4:12रेफर्स टू
4:14बीपीओ रेफर्स टू ऑब्टेनिंग सम सर्विसेस।
4:19ऑब्टेनिंग सम सर्विसेस फ्रॉम
4:25आउटसाइड द ऑर्गेनाइजेशन। आपकी अपनी
4:28ऑर्गेनाइजेशन, अपने बिजनेस के बाहर से कुछ
4:31ऑब्टेन करना। और ये सब क्यों कर रहे हैं?
4:35इन ऑर्डर टू रन द बिनेस सक्सेसफुली।
4:40अगर हम इसके एग्जांपल की बात करें ना भाई,
4:43हर जगह आउटसोर्सिंग होती है हर बिज़नेस
4:45में। एक बिजली वाला बिजली की फिटिंग करता
4:48है। हो सकता है वो पंखे-पंखे भी बना देता
4:51हो छोटे-मोटे फराटे टाइप। लेकिन क्या तारे
4:53भी वो घर पे बनाते हैं क्या? बाहर से ही
4:55ऑब्टेन करते हैं ना। ठीक है? एक कारपेंटर
4:58लकड़ी की आर्ट में माहिर है। लेकिन यार वो
5:01उस लकड़ी को तो कहीं से खरीदता ही है ना।
5:04वो भी तो देखो आप कई से कच्ची लकड़ी तो
5:06खरीदता है। मिठाई वाला मिठाई बनाता है।
5:09लेकिन वह उसके लिए खोया, दूध ये सब कहीं
5:12ना कहीं से तो ऑब्टेन करता ही है। तुम कहो
5:14भैया उसकी खुद की डेरी है। चलो मान लो
5:16डेरी है। फिर भी यार जो फ्लेवर्स वगैरह
5:18होते हैं वो सब तो ऑब्टेन कर रही है। जिस
5:21बंदे की बेकरी है वो केक खुद बना रही है।
5:23लेकिन केक का कच्चा सामान तो कहीं से
5:25ऑब्टेन कर ही रहे हैं ना। कहीं से तो आपका
5:28जो टॉपिंग्स होती है केक की वो सारी चीजें
5:30क्रीम वो सब आ रहा है। ब्रेड आ ही नहीं
5:33रही है। वो सब चीजें ये होता है
5:35आउटसोर्सिंग में। अब इसका फटाफट से
5:37स्क्रीनशॉट लो जल्दी से। हां। अब बेटा
5:41बीपीओ के फीचर्स क्या है? बीपीओ में
5:43क्या-क्या आ जाते हैं? इसके फायदे क्या
5:45है? वो सब हम पढ़ेंगे एक-एक करके। अगर आपके
5:47पास पेपर में टॉपिक आता है इनमें से कुछ
5:51भी फीचर्स
5:54सश नेचर या इवन कररेक्टरिस्टिक्स ऑफ बिनेस
5:59प्रोसेस आउटसोर्सिंग कि आपको इसके बारे
6:01में क्या पता है इसके फीचर्स इसके नेचर
6:04उसके कररेक्टरिस्टिक्स मतलब व्हाट यू नो
6:06अबाउट द टॉपिक तो सबसे पहले भाई
6:10अवेलेबिलिटी ऑफ सर्विस
6:13अवेलेबिलिटी ऑफ सर्विस
6:17आउटसाइड द ऑर्गेनाइजेशन। भाई बीपीओ आपकी
6:21कंपनी के बाहर से भी आपको कोई सर्विस
6:23ऑब्टेन करवा के दे देता है। जो चीज आपके
6:26बिनेस की है भी नहीं वो भी चीज आप बाहर से
6:28ऑब्टेन कर सकते हो विद द हेल्प ऑफ़ बीपीओ।
6:31सेकंड एक तो हो गया ये। इसके अलावा यार
6:34हमें ना सबसे बड़ी बात स्पेशलाइजेशन का
6:37बेनिफिट मिलता है। हर बंदा हर चीज में
6:40प्रो नहीं हो सकता भाई।
6:43मेरा काम पढ़ाने का है। मैं पढ़ा दूंगा।
6:45लेकिन अगर मैं कहूं मैं मार्कर भी खुद बना
6:47दूं तो क्या मेरे को मार्कर बनाना आता है
6:49या क्या मैं डोम्स जैसा मार्कर बना
6:51पाऊंगा? बिल्कुल भी नहीं यार। बिल्कुल भी
6:53नहीं। कदापि नहीं। तो अगर आपको
6:55स्पेशलाइजेशन का बेनिफिट ऑब्टेन करना है
6:57तो भी आपको कुछ चीजें बाहर से ही ऑब्टेन
7:00कर लेनी चाहिए। इसके अलावा भाई बहुत
7:02इंपॉर्टेंट पॉइंट जो आप लोगों को बड़ा वहम
7:04है कि बाहर से महंगा पड़ता है। बाहर से
7:06सस्ता भी पड़ता है। भाई ये चीपर सोर्स है।
7:10सर्विज का चीपर सोर्स है। इसकी वजह सुनो।
7:13अगर मैं आपको बोलूं कि कच्ची मैgi भी आप
7:15लोग ही बनाओगे। आपको लगता है आप ₹8 में
7:18बना पाओगे एक पैकेट। आप ₹100 फूंक दोगे और
7:20वो भी बेकार बनेगी। क्योंकि मैगी वाले
7:22nसle वाले आर एक्सपर्ट्स। दे आर प्रोब्स।
7:25वो बल्क में बनाते हैं। उनको बनाना आता
7:27है। उन्होंने ह्यूज क्वांटिटी में बनाना
7:29है। उन पे सालों की एक्सपर्टीज है। इतने
7:31साल हो गए उनको बनाते बनाते। दे आर
7:33एक्सपर्ट। ठीक है? डोम्स हैं, मार्कर बना
7:35रहे हैं। दे आर एक्सपर्ट। हम उस काम में
7:37घुसेंगे। हम वो चीज़ उतनी अच्छी से कर ही
7:38नहीं पाएंगे। और सबसे बड़ी बात उस काम पे
7:41एंटर भी तो तब करें जब हमने वो काम करना
7:43हो। हमारा काम पढ़ाने अब सब कुछ थोड़ी
7:45ऑब्टेन करते रहेंगे बाहर से। मतलब सब कुछ
7:47थोड़ी खुद ही बनाते रहेंगे। तो भाई ये
7:49सस्ता पड़ता है। और इसका एक लॉजिक भी है।
7:53अवॉइड्स
7:55इन्वेस्टमेंट
7:58इन फिक्स्ड एसेट्स।
8:01बेटा अगर 2 मिनट के लिए मैं मान लूं कि
8:03मैं मार्कर बनाना भी चालू कर दूं तो यार
8:05ये हाथ से तो बनेगा नहीं। मुझे बहुत
8:07बड़े-बड़े फिक्स्ड एसेट्स लगाने पड़ेंगे।
8:09मशीन वगैरह, फैक्ट्री, ठीक है? प्लांट,
8:11फिर लेबर रखनी पड़ेगी। उसमें मेरा खर्चा
8:13ज़्यादा ही पड़ेगा। तो, ये एक पॉइंट। और
8:16भाई, अगर आप बाहर से ऑब्टेन करते हो ना,
8:19इससे आपके बिज़नेस की एफिशिएंसी बढ़ेगी ही
8:21बढ़ेगी।
8:23बिकॉज़ अगर आप बाहर से कुछ ऑब्टेन कर रहे
8:26हो, तो वी कैन फोकस ऑन मेन बिज़नेस
8:30एक्टिविटीज़। तो, हम अपने मेन बिज़नेस पे
8:32अच्छे से फोकस कर पाएंगे। सुना है ना दो
8:34नाव का सवारी हमेशा डूबता है। ऐसा तो हर
8:37नाव का सवारी बन जाओगे आप तो डूबोगे ही
8:39डूबोगे। मेन काम पर फोकस ही नहीं कर
8:40पाओगे। इधर-उधर ही उलझते रहोगे या हर
8:42सारा। तो भाई ये है इसके कुछ फीचर्स।
8:44फटाफट से इसका लीजिए स्क्रीनशॉट।
8:49आगे
8:52नीड या फिरेंस ऑफ़ बीपीओ अगर आपके पास आता
8:55है एग्जाम में, तो क्या लिखेंगे? नीड या
8:58फिरेंस ऑफ़ बीपीयू। यह देखो।
9:03नीड याेंस
9:05ऑफ बीपीओ
9:09बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग की जरूरत क्या
9:11है या इसकी नीड क्या है तो भाई सबसे पहला
9:15पॉइंट आपको बढ़िया क्वालिटी का सामान मिल
9:17सकता है जो खुद आप बनाने बैठोगे तो आप
9:19नहीं बना पाओगे शायद तो ऑब्टेनिंग
9:22क्योंकि बाहर जो बंदा उस चीज में डील कर
9:24रहा है वो उसका एक्सपर्ट है ही नोस हाउ टू
9:26मेक इट हाउ टू डील विद इट ऑब्टेनिंग गुड
9:29क्वालिटी प्रोडक्ट्स बाहर से ऑब्टेन करोगे
9:32वो एक्सपर्ट होगा। उसका काम ही वही है। तो
9:34वो चीज तो बढ़िया से ही करेगा ना। वो वाली
9:36बात होती है। अब आप बोलो यार कि हम खुद को
9:39खुद ही पढ़ाना शुरू कर दे। तो आज की डेट
9:41में यार इतना पॉसिबल नहीं है। आप लोग खुद
9:42को खुद नहीं पढ़ा सकते। तभी तो आप बाहर से
9:44ऑब्टेन कर रहे हो वो सर्विस। ठीक है?
9:47ऑब्टेनिंग गुड क्वालिटी प्रोडक्ट्स। इसके
9:49अलावा स्मूथ रनिंग ऑफ़ बिज़नेस। आपका फोकस
9:52आप ही के बिज़नेस पे रहेगा क्योंकि फालतू
9:54की चीज़ आप बाहर से ऑब्टेन कर लोगे तो आपका
9:57बिज़नेस स्मूथली रन करेगा। स्मूथ रनिंग ऑफ
10:00बिजनेस।
10:02इसमें कोई दिक्कत भाई। इसके अलावा
10:06अवॉयडिंग
10:09फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट
10:12जो मैंने अभी आपको मशीन वाला एग्जांपल
10:14दिया था कि अगर मैं बोलूं यार मैं मार्कर
10:16भी खुद ही बनाऊंगा तो मुझे उसके लिए मशीन
10:18लगानी पड़ेगी। फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट बहुत
10:20होएगी। कितने सालों में जाके वो कवर होगा
10:22वो भी पता नहीं हो ना हो क्योंकि वी आर
10:24नॉट एक्सपर्ट एट मेकिंग द मार्कर्स।
10:27ठीक है भाई चीप पड़ेगा सस्ता पड़ेगा वो भी
10:30देखो आप बाहर से ऑब्टेन करना बिजनेस को और
10:34आपको स्पेशलाइजेशन बेनिफिट मिलेगा पॉइंट्स
10:36थोड़े एक दूसरे से इंटरलिंक्ड ही है अगर
10:39मैं बाहर से कोई चीज ऑब्टेन करूंगा ना भाई
10:41तो वो बंदा उस काम को बहुत बढ़िया से
10:43करेगा शॉर्ट में एग्जांपल बताऊं आपके घर
10:45वाले एग्जांपल लेट इट बी आप
10:49घर पे कुकिंग करते हो घर की आप लोगों को
10:51पसंद नहीं है आप बाहर से मंगाते हो बाहर
10:53से ऑब्टेन कर रहे हो ठीक है आप वो बेचने
10:55के लिए नहीं करते इसलिए इसलिए आपको महंगा
10:57पड़ता है। कंसमशन के लिए कर रहे हो तो
10:58सारी कॉस्ट का बर्डन आपके ऊपर पड़ता है।
11:00अगर यही बाहर से ऑब्टेन किया जाएगा तो आप
11:03बिनेस के पॉइंट ऑफ व्यू से आप उसको आगे
11:05बेचोगे तो कस्टमर से तो कवर कर ही लोगे वो
11:07खर्चा। अब अगर मान लो भाई बाहर से आपको ही
11:10पता है आप अगर घर पे बनाओ और बाहर बनाओ तो
11:13बाहर आपको बेटर मिलेगा। क्योंकि उनका मेन
11:15आपके घर का या आपके पेरेंट्स का मेन काम
11:17खाना बनाना नहीं है। वो बाहर वाले किसी
11:19रेस्टोरेंट ढाबे का है। तो वो तो उस पे
11:21अपना पूरा फोकस डालेगा ही ना। वो तो उसी
11:23का माहिर है। वो बात हो गई है इसके अंदर।
11:25कोई दिक्कत? दैट्स ऑल फॉर इट। इसको फटाफट
11:28से पढ़ो। अगले लेक्चर में हम पढ़ेंगे इसके
11:30टाइप्स। अगले लेक्चर में हम पढ़ेंगे इसके
11:33टाइप्स।
11:35ठीक है? इसको फटाफट पढ़ो, नोट्स बनाओ,
11:38डाउट्स मैसेज करो। देन