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0:05[संगीत]
0:13क्या राहु वास्तव में किसी को अचानक से
0:16धनवान बना सकता है? क्या राहु की दशा में
0:19शेयर, लॉटरी, सट्टा, विदेशी व्यापार,
0:22ऑनलाइन व्यवसाय या गुप्त स्रोत के माध्यम
0:26से कमीशन हो गया, किसी क्षेत्र में विरासत
0:29अथवा किसी अप्रत्याशित घटना के माध्यम से
0:32क्या आपको अचानक से बड़ा धन प्राप्त हो
0:35सकता है? तो इसका उत्तर है हां। लेकिन
0:37प्रत्येक कुंडली में ऐसे योग बनते हैं। उन
0:41योगों का एनालिसिस करना होगा। अगर राहु का
0:44संबंध उन योगों से बनेगा तभी ऐसी घटनाएं
0:47राहु के द्वारा हो सकती हैं। कुंडली में
0:50केवल राहु का द्वितीय और पंचम अष्टम अथवा
0:54एकादश भाव में बैठ जाना ही पर्याप्त नहीं
0:56है कि राहु द्वितीय में हो गया, एकादश में
0:59हो गया, अष्टम में हो गया तो अचानक से धन
1:01मिल ही जाएगा या बड़ा धन मिल जाएगा अचानक
1:03से। अप्रत्याशित धन आ जाएगा। उसके लिए कुछ
1:07और भी नियम और शर्तें होती हैं। तो आज हम
1:10उन सभी नियम और शर्तों को लगा करके आपकी
1:14कुंडली पे सीधे सरल तरीके से राहु के इन
1:17सूत्रों को बताऊंगा जिससे आप निर्धारित कर
1:20सकते हैं कि क्या राहु के द्वारा आपको
1:22जीवन में कभी अचानक से ग्रोथ करने का अवसर
1:26दिया जाएगा कि नहीं दिया जाएगा। पांच छह
1:29सूत्रों पे मैं चर्चा करूंगा। चैनल को
1:31सब्सक्राइब कर दीजिए। वीडियो को लाइक कर
1:33दीजिए और परामर्श के लिए आप हमारे इन
1:36नंबरों पर हमसे संपर्क कर सकते हैं।
1:38एस्ट्रोलॉजी कोर्स के लिए भी आप संपर्क कर
1:41सकते हैं। वीडियो को अंत तक देखिएगा
1:43क्योंकि अक्सर कहा जाता है कि राहु जो धन
1:46देता है वह जाते-जाते ले भी लेता है। तो
1:49आज हम इस सूत्र पर भी चर्चा करेंगे कि
1:52राहु जो धन आपको देने वाला है क्या वह
1:55जीवन में अस्थाई रहेगा या समय के साथ आपसे
1:58छीन जाएगा। इस विषय पर भी मैं आपके साथ
2:01में चर्चा करने वाला हूं। सबसे पहले
2:04अप्रत्याशित धन किसे बोलते हैं? इसे हम
2:06जान लेते हैं। अप्रत्याशित धन या बड़ा धन
2:10अचानक मिलने वाला धन हो सकता है कि शेयर
2:12मार्केट से आप चार छ महीने पहले नहीं सोचे
2:16थे कि आपको इस तरीके से धन आ जाएगा। आप
2:18एंटर करते हो और वहां से चार छ महीने साल
2:22भर में आपको एक बड़ा धन मिल जाता है।
2:25दूसरा हो सकता है किसी बीमा के माध्यम से
2:27किसी विरासत के माध्यम से आपको मिल जाए।
2:30तीसरा हो सकता है कि आपके व्यापार में
2:32आपको अचानक से बड़े आर्डर मिल जाए। हो
2:35सकता है कि ऑनलाइन किसी भी चीज से आप जुड़
2:39जाए और वहां से आपका व्यापार बूस्ट हो
2:41जाए। तो राहु ऐसा नहीं है कि ला करके दे
2:44देगा। वह भी देगा तो कहीं ना कहीं कोई ना
2:47कोई स्रोत ही बनाएगा और वह स्रोत के
2:51माध्यम से ला के दे सकता है। बहुत बार
2:53मुआवजा मिल जाता है व्यक्ति को बहुत बार
2:56व्यक्ति को रॉयल्टी मिल जाती है। इस
2:59प्रकार से भी आय जो होती है अचानक राहु
3:02बढ़ाने का काम कर देता है। किसी का
3:06संपत्ति का मूल्य अचानक से बढ़ गया। मान
3:08लीजिए किसी ने कोई प्लॉट लेकर के रखा हुआ
3:11है। उधर से कोई सड़क गुजर गई। गवर्नमेंट
3:14हाईवे गुजर गया, कोई गवर्नमेंट का
3:16प्रोजेक्ट चला गया तो अचानक से संपत्ति की
3:18कीमत बढ़ गई। तो ये सारी चीजें जो अचानक
3:21से आपके जीवन में कोई चीज बहुत मूल्य बढ़ा
3:24करके आ जाती है। उसी के लिए आपको यह चीज
3:28देखना होता है। राहु ही ऐसे काम करता है।
3:31तो, मैं आपको अब पहला सूत्र देने वाला
3:33हूं। आप अपनी कुंडली में मिला लीजिएगा।
3:36बहुत सिंपल सा सूत्र है। इस सूत्र का
3:39मिलान मैं कर रहा हूं। आप सामने कुंडली पर
3:42देखेंगे और आपको समझ में आ जाएगा। हम सभी
3:46जानते हैं कि यह जो कुंडली के सारे भाव
3:48होते हैं, इनको हम त्रिकोणों में बांट
3:50सकते हैं। तो, यह धर्म का त्रिकोण है। यह
3:53अर्थ का त्रिकोण होता है। सबको पता है।
3:56दूसरा अर्थ का त्रिकोण आपका यह होता है और
3:59तीसरा अर्थ का त्रिकोण यह होता है। इस
4:02कुंडली में सबकी कुंडली में तीन घर अर्थ
4:05त्रिकोण के अंतर्गत आते हैं। दूसरा, छठा
4:08और दसवां घर अर्थ त्रिकोण का है। पहला
4:11सूत्र आपकी कुंडली में राहु अर्थ त्रिकोण
4:15के भावों में बैठा हो। अर्थ त्रिकोण के
4:18भावों में राहु बैठ करके अकेले काम नहीं
4:21करेगा। हालांकि अर्थ का त्रिकोण है। यह
4:24राहु इनमें बैठेगा तो आर्थिक मदद तो करेगा
4:27ही करेगा। लेकिन, स्पेशली अचानक और बड़ा
4:31धन आने की संभावना कहीं से तब बनेगी जब
4:34राहु इन घरों में बैठा हो। और इनके
4:37साथ-साथ इस राहु के साथ राहु आपका यहां
4:40हो, राहु यहां हो, यहां हो। अब आप यह
4:43देखिएगा कि आपके धन भाव का स्वामी कौन सा
4:46ग्रह है। धन भाव का स्वामी देख लीजिएगा।
4:49लाभ भाव का स्वामी देख लीजिएगा। अगर धन
4:52भाव के स्वामी के साथ या लाभ भाव के
4:54स्वामी के साथ राहु अर्थ त्रिकोण के भावों
4:58में बैठा होगा। दूसरे छठे या 11व भाव में
5:02तो यह आपको जीवन में बड़ा धन लाभ का अवसर
5:05देगा। अचानक से कुछ घटनाएं होंगी आपके
5:09जीवन में जिससे किसी भी प्रकार से आपकी
5:13संपत्ति में आपके टोटल एसेट में आपकी
5:16लिक्विडिटी में बड़ा उछाल आ जाएगा। यह
5:19संभावना आपकी बनती है। दूसरा यह है यह
5:21बताइए धन का कारक ग्रह कौन है? गुरु है।
5:24और वैभव का कारक ग्रह कौन है? शुक्र है।
5:28वैभव यानी आपका समाज में देखने में बहुत
5:32साल वैभवशाली बना देता है शुक्र और धन को
5:36बढ़ाता है गुरु। तो अगर अर्थ त्रिकोण के
5:38भावों में गुरु के साथ में या शुक्र के
5:40साथ में राहु होगा तो भी यह जीवन में योग
5:44बनाता है। कई बार अवसर लेकर के आने का यह
5:48काम राहु करता है। तो यह पहला सूत्र हो
5:51गया। मिला लीजिएगा। इसमें भी सबसे ज्यादा
5:54जो प्रमुख सूत्र है अगर राहु इन भाव में
5:58द्वितीय या लाभेश के साथ हो या शुक्र के
6:00साथ हो गुरु के साथ भी करता है। लेकिनकि
6:03आप जानते हैं गुरु के साथ राहु का चांडाल
6:06दोष भी चलता है। तो एक योग और एक दोष बनने
6:10के कारण उसमें पूर्ण रूप से शुद्धता नहीं
6:13आ पाती है। अब दूसरे सूत्र पे चलते हैं।
6:17इसको मैं पहले क्लियर कर देता हूं। दूसरा
6:19सूत्र राहु का बनेगा। पहले मैं सूत्र बता
6:22देता हूं। फिर उसको एक्सप्लेन करता हूं।
6:24अगर राहु का धन भाव और लाभ भाव से दोहरा
6:28संबंध बन जाए तब यह योग बन जाएगा। दोहरा
6:32संबंध का अर्थ क्या है? धन भाव यह है। लाभ
6:35भाव यह है। इन भावों से राहु का दोहरा
6:37संबंध होना चाहिए। तो आप देखिएगा मान लेते
6:41हैं राहु यहां पर धन भाव में बैठ गया। तो
6:43एक संबंध बन गया। दोनों भावों से एक साथ
6:47तो बैठेगा नहीं। किसी एक में ही बैठेगा।
6:49कोई कुंडली बना लीजिए। कर्क लग्न ले लेते
6:52हैं तो यहां पर पांच नंबर की गिनती पड़ेगी
6:55और यहां पर दो नंबर की गिनती पड़ेगी।
6:58शुक्र की राशि पड़ेगी। राहु चाहे आपके धन
7:01भाव में हो चाहे लाभ भाव में बैठा हो।
7:04दोहरा संबंध है इन भावों से निकल के आना
7:06चाहिए। अब मान लीजिए राहु यहां पर बैठा है
7:09और इसी के साथ शुक्र हो गया। अगर तो अब
7:12राहु का संबंध बन गया। धन भाव और लाभ भाव
7:17से दोहरा संबंध बनना चाहिए। तो धन भाव में
7:20बैठा है तो यह एक संबंध हो गया और लाभ भाव
7:24का स्वामी कौन है? शुक्र है। तो लाभ भाव
7:27से भी संबंध बन गया। यह दूसरा संबंध हो
7:29गया। तो इसको दोहरा संबंध बोलेंगे। इसी
7:32प्रकार से अगर सीधे भाव का स्वामी ना आया
7:35हो तो भी है नियम। इतने पे ही नहीं खत्म
7:38है। मान लेते हैं राहु यहां पर बैठा हुआ
7:41है। राहु यहां पर तीन नंबर की गिनती पर
7:43बैठा हुआ है। तो यहां क्या हो जाएगा? चार।
7:47यहां क्या हो जाएगा? पांच। यहां क्या हो
7:49जाएगा? छह। अब राहु यहां पर लाभ में तो
7:53है। धन का स्वामी कौन है? बुध। वह आकर के
7:55यहां बैठ गया। ये योग बन गया। लेकिन अभी
7:58इस योग में और भी विस्तार है। उसको समझ
8:00लेते हैं। मान लेते हैं कि राहु यहां पर
8:03बैठा हुआ है। ठीक है? यहां पर हमने तीन ले
8:06लिया। चार पांच और छ सिंह लग्न की कुंडली
8:10बुध इसके साथ नहीं बैठा है। लेकिन धन भाव
8:15में कौन सी गिनती है? छह। लाभ में छह। धन
8:17भाव का स्वामी कौन सा ग्रह है? उसे नोट कर
8:20लीजिए। लाभ भाव का स्वामी ग्रह जो है उसे
8:23नोट कर लीजिए। यहां पर कौन है? बुध। हमने
8:25लिख लिया बुध को। अब आप उस ग्रह को
8:29देखिएगा जो ग्रह बुध के नक्षत्र में बैठा
8:32होगा। जो ग्रह बुध के नक्षत्र में बैठा है
8:36या बुध जिसके नक्षत्र में बैठा है। ध्यान
8:39दीजिएगा। बुध जिसके नक्षत्र में बैठा है।
8:42मैं उदाहरण दे रहा हूं। आपको अपनी कुंडली
8:44में देखना है। बुध जिसके नक्षत्र में बैठा
8:48होगा यानी धनेश और लाभेश जिसके नक्षत्र
8:51में हो या जो ग्रह आपके धनेश या लाभेश के
8:54नक्षत्र में हो अगर वह भी राहु के साथ आ
8:57गए हो या राहु पर दृष्टि दे रहे हो तो भी
9:02यह योग बनेगा। यानी राहु का संबंध धन भाव
9:06और लाभ भाव से दोहरा है। दोहरा मतलब धन या
9:09लाभ में बैठा हो। धनेश लाभेश के साथ बैठ
9:12गया हो। दूसरा धन भाव या लाभ भाव से
9:16संबंधित जो ग्रह है उसके नक्षत्र को देख
9:19लेना है। धनेश या लाभेश के नक्षत्र में जो
9:23ग्रह स्थित होगा वो भी आपको यहां पर अचानक
9:28से धन के योग बनाने वाला काम करने वाला
9:31है। तीसरे सूत्र पर चलते हैं। तीसरा सूत्र
9:35क्या होता है कि मान लीजिए कि आपकी कुंडली
9:39में राहु उपचय भावों में बैठा हुआ है।
9:42उपचय भाव कुंडली में कौन से होते हैं?
9:44उपचय भाव कुंडली का होता है। तीसरा घर, यह
9:48वाला घर, यह वाला घर आपका उपचय है और यह
9:52घर आपका उपचय भाव होता है। ये चार घर
9:55कुंडली में उपचय भाव के अंतर्गत आ जाते
9:58हैं। जैसे तीसरा भाव पराक्रम का है तो
10:02व्यक्ति का पराक्रम समय और उम्र के हिसाब
10:05से ही बढ़ता है। छठा भाव क्या है? रूटीन
10:09का है, डेली नौकरी का है। तो नौकरी और
10:12डेली रूटीन धीरे-धीरे जैसे-जैसे आयु बढ़ती
10:16जाती है, वैसे-वैसे सुधरता जाता है। दशम
10:19भाव क्या है? पद और प्रतिष्ठा का। आयु के
10:22साथ पद और पद और प्रतिष्ठा का घनिष्ठ
10:25संबंध ऐसे लाभ का या इच्छा पूर्ति का भाव
10:29एकादश आयु के अनुसार चलता है। तो अगर इन
10:32भावों में आपका राहु बैठा होगा और उसके
10:36साथ में धन भाव का स्वामी या लाभ भाव का
10:39स्वामी आ करके बैठेगा तो उम्र के साथ-साथ
10:43जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है तो आप
10:48अपेक्षाकृत अपनी उम्र से थोड़ा अधिक कमाई
10:52कर रहे होते हैं या आपको अधिक अवसरों की
10:56प्राप्ति होती रहती है। मान लेते हैं तुला
10:59लग्न की कुंडली है। सात नंबर यहां पर लिखा
11:02गया है। तो यहां पर कौन सी गिनती हो
11:04जाएगी? नौ नंबर। राहु और मंगल यहां पर आ
11:08गए। अंगारक दोष भी बनता है। लेकिन भाव का
11:12सिद्धांत अलग तरीके से काम करता है। उसका
11:15रिजल्ट अपना अलग होता है। सात यहां है तो
11:18आठ यहां हो गया। मंगल राहु के साथ तीसरे
11:21भाव में कभी भी जल्दबाजी नहीं करना है।
11:25उम्र के साथ जैसे-जैसे आप मैच्योर होते
11:28जाते हैं, राहु अपने आप आपको ला के सब कुछ
11:32देने लग जाता है। अगले सूत्र पर चलते हैं।
11:36राहु का संबंध हमें निकाल लेना है अचानक
11:39धन योग से। तो इसके लिए राहु का भी तो
11:43नक्षत्र आप देखिए। राहु जिस नक्षत्र में
11:46बैठा हो उस नक्षत्र के स्वामी की स्थिति
11:50बताती है कि राहु अपना परिणाम किस प्रकार
11:53देगा। राहु आप अपनी कुंडली में नोट
11:56करेंगे। राहु का क्या नोट करेंगे? नक्षत्र
11:59स्वामी नोट करेंगे कि राहु किसके नक्षत्र
12:02में बैठा हुआ है। राहु जिसके नक्षत्र में
12:06बैठा हुआ है। अगर वह ग्रह यानी राहु का
12:09नक्षत्र लॉर्ड उसका संबंध कहीं से धन या
12:14लाभ भाव से जुड़ता है। उसका संबंध धनेश या
12:18लाभेश से जुड़ता है। तो भी राहु अपनी दशा
12:22में अन्य दशाओं की अपेक्षा बेहतर धन देने
12:26का काम कर जाता है। विशेष रूप से आप यह
12:29समझिएगा कि अगर राहु का नक्षत्र स्वामी
12:33कुंडली के द्वितीय भाव में क्योंकि यह धन
12:36का भाव है। पंचम भाव में पंचम भाव पूर्व
12:41जन्म के पुण्य और भाग्य का है। नवम भाव यह
12:45तो भाग्य है ही। दशम भाव पद प्रतिष्ठा से
12:48जुड़कर के धन एकादश भाव राहु का नक्षत्र
12:52स्वामी इन भावों में बैठा हो और मजबूत हो
12:56ठीक-ठाक हो मतलब अस्त ना हो नीच ना हो
12:58शत्रु राशि में ना हो अपनी राशि का हो
13:01मित्र राशि का हो उच्च का हो तो ज्यादा
13:05बेहतर धन आपको मिलेगा राहु का नक्षत्र
13:08स्वामी इन भावों में कहीं भी हो और राहु
13:11चाहे इन द्वितीय और लाभ में बैठा हो चाहे
13:14उसकी दृष्टि आ जा रही
13:16राहु की कभी भी सातवीं दृष्टि नहीं लेना
13:19है क्योंकि जहां राहु होता है ठीक उसी के
13:22सामने केतु होता है दोनों एक ही रस्सी के
13:25दो छोर हैं तो ये परस्पर एक दूसरे को नहीं
13:28देखते पांचवी और नौवीं दृष्टि राहु केतु
13:31की काम करती है होती तो है सातवीं भी
13:34लेकिन वो काम नहीं करती है तो यह आपका एक
13:37सूत्र हो गया कि कैसे राहु जो है राहु का
13:41नक्षत्र स्वामी भी राहु से धन निकालने में
13:45मदद मदद कर देता है। अगला सूत्र आपका राहु
13:48कुंडली के किसी भी भाव में बैठा हुआ हो।
13:52कहीं भी बैठा हो, किसी भी भाव में बैठा
13:54हुआ हो। कुछ चीजें देख लीजिए आप सिर्फ
13:57क्या-क्या देखना है। राहु कुंडली में कहीं
14:00भी बैठा मान लेते हैं आठवें में बैठा जहां
14:03सबसे खराब माना जाता है। राहु आठवें में
14:06बैठा ऐसे कहीं भी बैठा हो। राहु का जो
14:10राशिपति होगा राहु जिस राशि में बैठा हो
14:14मान लेते हैं वह 11 नंबर की गिनती पर बैठा
14:17है। राहु का राशिपति जो है वह धन भाव या
14:21लाभ भाव में आ गया हो। राहु का जो राशिपति
14:25है वह अर्थ त्रिकोण के किसी भाव में आ गया
14:29हो तो भी राहु धन दिलाएगा। यानी एक तो
14:33आपको राहु के राशि पति को देख लेना है।
14:36राहु के राशि पति का संबंध धन भाव या लाभ
14:40भाव से हो या धन त्रिकोण से हो यानी अर्थ
14:43त्रिकोण से हो तो भी राहु आपको धन दिलाता
14:46है। दूसरा राहु का नक्षत्र देखना है कि
14:49राहु किसके नक्षत्र में बैठा है। जिसके
14:53नक्षत्र में राहु बैठा है। अगर वह ग्रह
14:57द्वितीय भाव में एकादश भाव में गया हो या
15:00धन त्रिकोण में गया हो अर्थ त्रिकोण में
15:03गया हो तो भी राहु धन देता है और जीवन में
15:06कई बार अप्रत्याशित रूप से देता है या
15:10राहु शुक्र या गुरु के नक्षत्र में गया हो
15:13तो जीवन में अचानक से धन के सुंदर योग
15:17बनाने का काम करेगा। शुक्र क्यों बार-बार
15:20लिया जा रहा है काल पुरुष की कुंडली में
15:22शुक्र द्वितीय भाव का स्वामी होता है।
15:25इसलिए और गुरु को क्यों लिया जा रहा है?
15:28परासरी सिद्धांत में गुरु धन का नैसर्गिक
15:30कारक है। द्वितीय भाव का कारक कौन है?
15:33बृहस्पति। लाभ भाव का कारक कौन है?
15:36बृहस्पति है। अगर ये राहु शुक्र या गुरु
15:40के नक्षत्र में हो और अस्त वगैरह ना हो।
15:44गुरु शुक्र की स्थिति भी कुंडली में अच्छी
15:46हो तो बहुत बेहतर परिणाम आने की संभावनाएं
15:50बन जाती है। उम्मीद है राहु ग्रह से
15:53संबंधित कुछ धन योग वास्तव में यहां पे
15:56मैंने सिखाने का काम किया है कि राहु को
15:59आप कैसे धन से कनेक्ट कर सकते हैं। राहु
16:02का राशिपति देख के नक्षत्रपति देख के जो
16:06ग्रह राहु के नक्षत्र में है उन सबको
16:09कनेक्ट करना होता है। और अगर वो अर्थ
16:11त्रिकोण के भावों में हो, धन या लाभ में
16:14हो तो राहु अचानक से जीवन में उन्नति के
16:17मार्ग खोलने लग जाता है। विषय वस्तु आपको
16:20समझ में आ गया होगा। अगले कार्यक्रम में
16:22किसी और विषय के बारे में बात करेंगे।
16:24धन्यवाद।