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0:05नमस्कार साथियों नक्षत्र तक के एक और रोचक
0:08वीडियो में आपका स्वागत है। जन्म कुंडली
0:11के भावों की एक संज्ञा दी गई है। केंद्र
0:14भाव, त्रिकोण भाव, उपचय भाव, त्रिक भाव,
0:17त्रिशडाय भाव, अपोकलम और पनफड़ भाव। तो आज
0:21हम बात करेंगे पफड़ भावों की चर्चा करने
0:24वाले हैं। इसे आप अपनी कुंडली में कैसे
0:26समझ सकते हैं? वास्तव में पप पफर भाव ऐसे
0:30भाव है जिसके बारे में बहुत कम चर्चा की
0:32गई है। लेकिन आज मैं इसके रहस्य को भी
0:35समझाऊंगा और इससे जुड़े हुए कुछ बहुत
0:37शानदार सूत्र दूंगा। लेकिन शुरू के वीडियो
0:40में मैं थोड़ा सा आपको जो है पफड़ भावों
0:44के कार्य प्रकृति के बारे में समझाऊंगा।
0:47फिर बाद में आपको इसके फलादेश के सूत्र दे
0:49दूंगा जिसे आप सीधे अपनी कुंडली पर अप्लाई
0:52कर सकते हैं। तो पफड़ भाव जो होते हैं यह
0:56बहुत ध्यान से देखिएगा। यह कुंडली के
0:58चारों केंद्र होते हैं। हर केंद्र के बाद
1:02अगला भाव जो होता है, वह पफड़ में आता है।
1:05इसलिए, आप समझ सकते हैं इन भावों का
1:08कुंडली में महत्व कितना है। हर केंद्र के
1:11बाद यह आते हैं। अब अगर आपको पफड़ भावों
1:15का अध्ययन करना है, इसका महत्व समझना, तो
1:18पहले केंद्र का महत्व समझिए। सोचिएगा,
1:20द्वितीय भाव किस चीज का होता है? द्वितीय
1:23भाव होता है पोषण का, संसाधनों का होता
1:26है। तो अगर जो है यहां पर द्वितीय भाव धन
1:31का है ना जो भी चीजें आपका पोषण करती हैं
1:34लगन का। लगन से आप किस चीज का विचार करते
1:37हैं? लगन आप कौन है? आप खुद हैं। चतुर्थ
1:40भाव क्या है? आपका परिवार है और आपकी पूरी
1:43मानसिक स्थिति है। और यह सप्तम क्या होता
1:47है? आपका जीवन साथी होता है और जीवन में
1:50जो भी लोग आपके आते हैं जो भी पार्टनर आते
1:53हैं जीवन में आप अपना लाइफ जिन लोगों से
1:56भी शेयर करते हैं वो सबका भाव यह है और
1:59दशम भाव आपका क्या है? प्रतिष्ठा है। दशम
2:02भाव आपका क्या है? कर्म है। अब यह बताइए,
2:05मनुष्य का पूरा जीवन इन्हीं चारों चीज़ों
2:08पर निर्भर है। मनुष्य पूरे जीवन भर इन्हीं
2:11चार, चारों चीजों को इकट्ठा करके इन्हीं
2:15चारों चीजों के लिए संघर्ष करता है।
2:17इन्हीं चारों चीजों के लिए सब कुछ पाना
2:19चाहता। अगर ये चार भाव निकाल दे कुंडली
2:22से, तो इंसान जीवित ही नहीं रहना पसंद
2:25करेगा। तो इसी बात से समझ जाइए कि जो पूरे
2:28जीवन का अस्थायित्व केंद्र है उससे दूसरा
2:32भाव उस भाव से दूसरा क्या है? प फर भाव
2:37है। पफड़ भाव की कार्य प्रकृति को अब मैं
2:40समझाता हूं। देखिएगा केंद्र आपका पूरा
2:43जीवन संचालित करता है और पफड़ यानी दूसरा
2:46भाव जो है उसे क्या दे रहा है? पोषण। लगन
2:49आप खुद हैं। आपका अस्तित्व है। जब आप पैदा
2:52हुए ना तुरंत आपका सबसे पहले कौन सा भाव
2:54बनता है? लगन तो जैसे आप पैदा होंगे उसके
2:57बाद आपको क्या जरूरत पड़ती है? पोषण की।
3:00पोषण कौन करेगा? द्वितीय भाव इसीलिए मुख
3:02का है। खाने-पीने का है। पोषण कौन करेगा?
3:05परिवार करेगा। कहां से होगा? व्यर्थ से
3:08होगा। यानी लग्न को जो चीजें सुरक्षित
3:10रखती हैं, वह क्या होता है? द्वितीय भाव
3:13होता है। इसीलिए हर केंद्र से द्वितीय भाव
3:16क्या करता है? उस केंद्र को सुरक्षा
3:18प्रदान करता है। उसका पोषण करता है। इन
3:21भावों के सूत्रों को समझना बहुत ही
3:24इंपॉर्टेंट हो जाता है। केंद्र भाव जीवन
3:27में किसी विषय की स्थापना करते हैं और
3:30पफड़ जो है यानी केंद्र से दूसरा जो भाव
3:33होता है। अपने उस केंद्र वाले भाव को को
3:36क्या करता है? उसके परिणाम को संभालता है,
3:40सुरक्षित रखता है, आगे बढ़ाता है। अगली
3:43अवस्था में लेकर के जाता है। आप ऐसे समझ
3:46लीजिए अगर केंद्र भावों को पहले, चौथे,
3:49सातवें और दसवें को आप एक कारखाना मान
3:52लीजिए। जीवन का कारखाना आपका यही चार भाव
3:55होते हैं। ये चारों भाव आपके कारखाने हैं।
3:59तो इसमें क्या होगा? कारखाने में कोई
4:01प्रोडक्ट तैयार होता है तो जो पफड़ भाव है
4:04यानी हर केंद्र से दूसरा जो भाव है उस
4:07कारखाने से निकले हुए प्रोडक्ट का क्या
4:10करता है भंडारण उस प्रोडक्ट की वितरण
4:13व्यवस्था को देखता है यानी यह देखा जाता
4:17है कि तैयार वस्तु कैसे सुरक्षित रहेगी
4:20कैसे नष्ट होगी उसका मूल्य कितना होगा
4:23संवर्धन कितना होगा वास्तविक लाभ मिलेगा
4:26नहीं मिलेगा इन सारी चीजों का भाव होता है
4:29पड़फड़ भाव होता है। केंद्र स्थानों का
4:31पोषण करने वाले भावों को पफड़ कहते हैं।
4:34यह आप समझ गए होंगे। दूसरा सिद्धांत आप यह
4:37समझ लीजिएगा कि पपड़ भाव जो होते हैं,
4:40पड़पड़ भाव जो होते हैं, वह यह नहीं बताते
4:43हैं कि व्यक्ति जीवन में क्या प्राप्त
4:45करेगा। सिर्फ यह नहीं बताएंगे। यह बताते
4:48हैं कि व्यक्ति जीवन में जो प्राप्त करता
4:50है, उस वस्तु का व्यक्ति के वर्तमान जीवन
4:55में उपभोग कैसा होगा और वह वस्तु व्यक्ति
4:58के जीवन में आगे कैसे चलेगी। प्रथम भाव ने
5:02व्यक्तित्व दिया तो दूसरे भाव ने उस
5:04व्यक्तित्व को क्या बना दिया? साधन दे
5:07दिया। संसाधन दे दिया कि इस संसाधनों से
5:11लगन आप हो गए। आपका व्यक्तित्व हो गया। तो
5:13द्वितीय भाव ने उसका पोषण कर दिया।
5:15व्यक्तित्व का पोषण कर दिया। अब एक विशेष
5:18सूत्र मैं बताता हूं आपको। अगर आपकी
5:20कुंडली में पड़फड़ भाव मजबूत हैं, तो यह
5:23समझ लीजिएगा कि आपके जीवन में ना सिर्फ
5:27अवसर आएंगे बल्कि आप उन अवसरों को जीवन
5:31में अस्थाई भी कर सकेंगे। यानी कि पपड़
5:35भाव आपका जो केंद्र स्थान है यह आपको अवसर
5:38उपलब्ध कराएगा और अगर केंद्र के अगले भाव
5:42यानी पड़फड़ भाव मजबूत है तो उन अवसरों को
5:45आप उपलब्धियों में बदल पाएंगे। अगर आपके
5:48यह पड़फड़ भाव पीड़ित होते हैं तो आपके
5:51जीवन में कई बार अवसर आता है। परिश्रम भी
5:54आप करते हैं। बावजूद उसके परिणाम आप अपने
5:58जीवन में सुरक्षित नहीं रख पाते हैं। इस
6:00प्रकार पड़फड़ भाव जो है जीवन में किसी ना
6:03किसी रूप में आपके सुख समृद्धि व्यक्ति
6:07वस्तु चीजों को रोकना आपके जीवन में आपके
6:10जीवन में चीजों को संभालना आपको आगे
6:13बढ़ाने का भाव होता है। यानी पड़फड़ भाव
6:16आपके जीवन में निरंतरता को व्यक्त करता
6:18है। अगर पफड़ भाव नहीं रहेगा तो जीवन ठहरा
6:22हुआ प्रतीत होगा। कैसे? इस लॉजिक को समझ
6:25लीजिए। द्वितीय भाव क्या होता है? कुटुंब
6:27का होता है। द्वितीय भाव क्या होता है? धन
6:30का होता है। आपके कुटुंब की वृद्धि ना हो
6:33तो भी आपको लगेगा कि जीवन में बढ़ नहीं
6:35रहा कुछ। धन नहीं बढ़ेगा तो भी स्थिरता आ
6:38जाएगी। पंचम भाव क्या है? आपकी रचनात्मकता
6:41है। आप जो सोचते हैं, जो आपका विचार है,
6:44जो आपकी क्रिएटिविटी है, जो आपके अंदर
6:47सृजन शक्ति है, उसे आप लगातार क्या करना
6:50चाहते हैं? आगे बढ़ाना चाहते हैं। अगर
6:52आपका पंचम भाव यानी यह जो चतुर्थ भाव का
6:56पड़फड़ है, यह मजबूत नहीं होगा, तो क्या
6:58होगा? यह भी रुक जाएगा। आपकी संतान नहीं
7:01बढ़ेगी। जीवन रुका हुआ महसूस होगा ना।
7:04अष्टम भाव किस चीज का है? परिवर्तन का है।
7:07अगर जीवन में परिवर्तन ही नहीं होगा तो भी
7:09जीवन ठहरा ठहरा सा महसूस होगा। एकादश भाव
7:12क्या है? उपलब्धियों का भाव है।
7:15उपलब्धियां हमेशा एक के बाद दूसरी व्यक्ति
7:17ना प्राप्त करें। उस तरफ ना बढ़े तो भी
7:19जीवन क्या महसूस होगा? रुका हुआ महसूस
7:22होता है। यानी कि जो पड़फड़ भाव हैं, यह
7:25जीवन की निरंतरता को भी समझाने का प्रयास
7:29करते हैं। यह हमें हमेशा महसूस कराते हैं
7:32कि अब हमें जो मिल गया है, हमें अब उससे
7:35कहां चलना है? आगे चलना है। एकादश भाव
7:38मित्रों का है, संस्थानों का है, लाभ के
7:41का जो माध्यम होता है, वह कर्म से होता
7:44है। यानी कर्म आपने यहां किया और यह कर्म
7:46से दूसरा भाव है। यानी कर्मों का क्या है?
7:49पूंजी यहां पर है। यहां आप कर्म करते हैं
7:52और उसके बदले में लाभ आप यहां लेते हैं।
7:55तो इस प्रकार से यह पता चल जाता है कि
7:58कुंडली में जो है पड़फड़ भाव बहुत मजबूत
8:01पकड़ रखते हैं। इस शास्त्र क्या कहता है?
8:04इसको समझिएगा। एक विशेष नियम मैं आपको दे
8:07रहा हूं। कोई भी ग्रह भाव वाइज सबसे अधिक
8:11बलवान कब होता है? जब वह केंद्र में होता
8:14है। केंद्र में बैठे हुए ग्रह की पकड़
8:17कुंडली पर ज्यादा हो जाती है।
8:19फिर अगर केंद्र स्थानों को छोड़ दें तो
8:22केंद्र के बाद पफड़ भाव में ही बैठा हुआ
8:26जो ग्रह होता है उसकी पकड़ सबसे ज्यादा
8:29मजबूत होती है। अगर त्रिकोण की बात करें
8:32लग्न, पंचम, नवम तो इन भावों के स्वामियों
8:35की पकड़ नहीं मजबूत होती है बल्कि इन
8:38भावों के स्वामी शुभ होते हैं। त्रिकोण
8:40स्थान के स्वामी कुंडली में सर्वदा शुभ
8:43माने जाते हैं। अब आप ऐसे समझ लीजिए सबसे
8:46ज्यादा पकड़ किन ग्रहों की होती है पूरी
8:48कुंडली पर? केंद्र वाले ग्रहों की। उसके
8:51बाद दूसरे नंबर पे पड़फड़ भाव के ही ग्रह
8:54आते हैं क्योंकि केंद्र से अगला भाव यही
8:57होता है। तो पड़फड़ भाव में बैठा हुआ ग्रह
9:00आपकी कुंडली में सेकंड दूसरे स्थान का वह
9:04ग्रह है जिसकी पकड़ कुंडली में सबसे अधिक
9:07मजबूत है। तो आप ये देख लीजिए कि कौन-कौन
9:10से ग्रह आपके केंद्र में है। समझ जाइए कि
9:13उन ग्रहों की पकड़ आपकी कुंडली पर कहां
9:15है। नंबर एक स्थिति पे है। जो ग्रह आपके
9:18पड़फड़ में बैठे हैं वो आपकी कुंडली में
9:21पकड़ नंबर दो पर है। उनका दूसरा दबदबा
9:24आपकी कुंडली में कायम है। यदि कोई ग्रह
9:27आपके इन पड़फड़ भावों में अपनी राशि में
9:30होगा, उच्च राशि में होगा, मित्र राशि में
9:33होगा तो यह भाव और भी मजबूत हो जाएंगे।
9:36अगर इन भावों में पड़फड़ भावों में बैठा
9:38हुआ ग्रह पीड़ित होगा तो ज्यादा परेशानी
9:41होगी। अब आ जाते हैं फलादेश पर। फलादेश के
9:45लिए मैं पहले यहां पर शुभ और क्रूर ग्रहों
9:47के कार्य करने की प्रवृत्ति को बताना
9:50चाहता हूं। फिर उसके बाद स्पेशल सूत्रों
9:52पर मैं चलूंगा। अगर आपके पफड़ भावों में
9:55शुभ ग्रह बैठे होंगे। शुभ ग्रह में
9:57कौन-कौन से आएंगे? एक तो बृहस्पति आ
10:00जाएगा। पहले नंबर का शुभ ग्रह दूसरे पे
10:02कौन आएगा? शुक्र चंद्रमा आएगा और फिर बुध
10:05आएगा। अगर चंद्रमा पक्ष बली हो तो ज्यादा
10:09शुभता आ जाती है। अब देखिए पड़फड़ भाव
10:12क्या करते हैं? जीवन में निरंतरता को
10:14बनाते हैं। उपलब्धियां देने में मदद करते
10:17हैं। तो अगर आपके द्वितीय भाव में या पंचम
10:21भाव में अष्टम भाव में या एकादश भाव में
10:23पफड़ भाव में शुभ ग्रह होते हैं तो जीवन
10:26की जो निरंतरता है, लगातार आगे बढ़ने का
10:30जो जीवन में क्रम है, जो जीवन में विकास
10:32का क्रम है, सब कुछ वो थोड़ा आपके जीवन
10:35में बहुत इजी गोइंग हो जाता है। बहुत
10:38ज्यादा जो है वह तनावपूर्ण नहीं होता है।
10:41शुभ ग्रह पड़पड़ भाव में होते हैं, तो आप यह
10:44समझ रख रखिए कि केंद्र स्थानों के फलों को
10:48सुरक्षित रखने में वे ज्यादा संघर्ष नहीं
10:52उत्पन्न देते हैं। संतुष्टि पूर्वक आप जो
10:55है भावों को संरक्षित कर ले जाते हैं।
10:58आराम से आपसे चीजों को जोड़ देते हैं।
11:02आराम से आपके जीवन में चीजों को संरक्षित
11:04रखते हैं। सहयोग दिलाते रहते हैं। समाधान
11:07देते रहते हैं। कठिनाइयों की तीव्रता कम
11:10करते हैं। तो यह पहला सूत्र आप नोट कर
11:12लीजिएगा। जिसकी भी कुंडली में द्वितीय,
11:15पंचम, अष्टम, एकादश में शुभ ग्रह हो या
11:19ग्रह
11:21कोई ज़रूरी नहीं कि सभी भावों में शुभ ग्रह
11:23मिल जाए। हो सकता है खाली द्वितीय में हो।
11:25अन्य तीन घर खाली हो। अगर शुभ ग्रह किसी
11:28भी प्रकार से मिल रहे हैं तो समझिएगा
11:30क्या? कि जीवन में जो है बहुत ज्यादा
11:33उठापटक नहीं होने वाली है। बहुत कम
11:37कठिनाइयों से ही आप अपने जीवन की
11:39कार्यप्रणाली को संरक्षित रख पाएंगे।
11:42लेकिन परिणाम भी थोड़ा सीमित मात्रा में
11:45मिलते हैं। क्योंकि जब परिणाम बढ़ेगा
11:48क्वांटिटी बढ़ेगी तो संघर्ष बढ़ जाएगा।
11:51इसीलिए क्रूर ग्रह जब इन भावों में होते
11:54हैं मंगल हो गया, शनि हो गया, राहु हो
11:56गया, केतु हो गया या के पक्ष एकदम अस्त
12:00चंद्रमा हो गया। तब क्या होता है? ये जो
12:03है आपके जीवन में दबाव, संघर्ष, परिश्रम,
12:06असंतोष, देरी, कठोरता और टूट-फूट के
12:10माध्यम से परिणाम संपन्न करवाते हैं। यानी
12:14दबाव बढ़ेगा। अगर द्वितीय भाव में, पंचम
12:16भाव में, अष्टम और एकादश में खाली चारों
12:19में क्रूर ग्रह हो गए तो आप देखिए उस
12:21व्यक्ति को जीवन में कोई भी उपलब्धि कोई
12:25भी चीज चाहे वो अपने व्यक्तित्व अपने
12:28स्वास्थ्य की बात हो, पारिवारिक सुख शांति
12:30या भौतिक उन्नति की बात हो, जीवन में
12:33वैवाहिक स्थिति की बात हो या साझेदारी की
12:36बात हो, पद प्रतिष्ठा पाने की बात हो, वो
12:39चीज उसने बड़े दबाव के साथ हासिल किया
12:42होगा। बहुत संघर्ष के साथ बहुत असंतोष
12:46असंतोष की भावना उत्पन्न हो जाने के बाद
12:49देर से मिला होगा। कठोरता पूर्वक श्रम
12:52करने के बाद मिला होगा। वहीं अगर शुभ ग्रह
12:55होंगे तो थोड़ी आसानी से मिल गया होगा।
12:57लेकिन यह मत समझिएगा कि क्रूर ग्रह होने
13:00का मतलब हानिक करना है। क्रूर ग्रह आपको
13:02दबाव संघर्ष देने के बाद देगा। लेकिन आप
13:05यह भी समझिएगा क्रूर ग्राही इन भावों में
13:08है जो सीमाओं को तोड़ करके प्रतिस्पर्धा
13:11करा करके जोखिम उठा करके कठिन निर्णय आपसे
13:15करवा करके विपरीत परिस्थितियों में आपको
13:18टिकाए रख करके परिणाम देने की क्षमता रखता
13:21है। शुभ ग्रह होगा तो इजी गोइंग मिल जाएगा
13:24सब कुछ लेकिन बहुत बड़ा नहीं मिलेगा।
13:26क्रूर ग्रह होगा तो बहुत तकलीफ से बहुत
13:28संघर्ष से स्ट्रगल से मिलेगा लेकिन बड़ा
13:32भी मिल सकता है। तो इसलिए अब मैं आपको
13:35उपचय भावों से जुड़े हुए कुछ अब आगे सूत्र
13:38दे रहा हूं। उपचय भाव का महत्व मैंने समझा
13:41दिया। उपचय भाव में बैठे हुए क्रूर और शुभ
13:43ग्रहों को समझा दिया। अब सूत्र देता हूं
13:46बारी-बारी से। पहले मैं सूत्र आपको बोलता
13:49हूं। आप सुन लीजिए। फिर मैं उसे आपको समझा
13:51दूंगा। याद भी कर लीजिएगा। द्वितीय भाव और
13:54एकादश भाव दोनों मजबूत हो। दोनों क्या है?
13:57पफड़ हैं। ये दोनों पड़फड़ है। द्वितीय
13:59क्या होता है? धन का होता है। और एकादश
14:02किसका होता है? लाभ का होता है। अगर आपके
14:05ये दोनों पड़फड़ भाव मजबूत होंगे कुंडली
14:09में तो क्या होगा? धन भी अच्छा आएगा और धन
14:13संचय भी अच्छा होगा। दोनों अच्छा हो
14:16जाएगा। यानी जीवन में धन का फ्लो भी
14:20बढ़िया बना रहेगा और उस आय को आप जो है
14:24बचत में भी कन्वर्ट कर पाएंगे। ठीक है?
14:27दशम भाव क्या देता है आपको? काम देगा।
14:29ठीक? आपसे कर्म करवाएगा। दशम भाव। एकादश
14:32भाव उस कर्म के बदले में आपको क्या देता
14:35है? लाभ देता है और द्वितीय भाव उस लाभ का
14:38हिस्सा बचाने का काम करता है। तो द्वितीय
14:41एकादश दोनों ठीक होगा। तो आप जीवन में
14:44पूंजी को एसेट को धन का मतलब सिर्फ नगद
14:48बैंक बैलेंस मत समझिएगा। एसेट में बदल
14:51लेते हैं लोग धन को धन से जमीन ले लिए
14:54गोल्ड ले लिए। अब इसको दूसरे सूत्र पे
14:57चलते हैं। एकादश भाव मजबूत हो। यह मजबूत
15:00हो लेकिन यह कमजोर हो तब क्या होगा? धन का
15:04फ्लो तो अच्छा रहेगा लेकिन आप उसे बचत में
15:08कंट्रोल बदल नहीं पाएंगे। कन्वर्ट नहीं कर
15:11पाएंगे। बड़ा धन आने के बावजूद भी कुछ ऐसे
15:14खर्चे आएंगे कि आप पैसों को टिका नहीं
15:17पाएंगे। पैसे को दूसरी चीजों में लगा नहीं
15:21पाएंगे। पैसे का स्वरूप कन्वर्ट नहीं कर
15:24पाएंगे। आय बढ़नी बढ़ेगी तो खर्चे भी बढ़
15:28जाएंगे। पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़
15:30जाएंगी। गलत आर्थिक निर्णय आ सकते हैं। तो
15:33इसलिए अगर यह द्वितीय कमजोर एकादश पड़फड़
15:37मजबूत है तो धन तो आएगा लेकिन हमेशा कमी
15:41जो है बनी रहेगी बचत नहीं हो पाएगी। अब
15:44दूसरा सूत्र है एकादश भाव कमजोर हो और
15:48द्वितीय मजबूत हो तो क्या होता है? यानी
15:51एकादश कमजोर होने का मतलब फ्लो कम है। उस
15:55कम फ्लो में भी आप क्या कर ले जाएंगे? बचत
15:59कर ले जाते हैं। यानी अगर द्वितीय भाव
16:01मजबूत हो लेकिन एकादश भाव कमजोर हो तो
16:04जातक सीमित आय में भी बचत कर सकता है।
16:07हालांकि बचत भी जो होगा वो सीमित मात्रा
16:10में होगा लेकिन बचत करने का गुण आपके अंदर
16:14है। बलवान का मतलब क्या है? कोई भी ग्रह
16:17इन भाव में क्या बैठा हो? अपनी राशि में
16:19हो। स्वरा राशि में हो तो उसे आप बलवान
16:22मान करके चलिएगा। बिनोपक बल के अनुसार
16:25चलना है। कोई ग्रह इन भावों में क्या हो?
16:27उच्च हो कोई भी ग्रह इन भावों में क्या हो
16:30मित्र राशि में हो इन भावों में कोई भी
16:33शुभ ग्रह हो इन भावों में शुभ ग्रह की
16:36क्या होनी चाहिए दृष्टि होनी चाहिए कमजोर
16:40कब मानेंगे जब इन भावों में कोई नीच का
16:42ग्रह हो जब इन भावों में कोई शत्रु राशि
16:46वाला ग्रह हो इन भावों में कोई ग्रह अस्त
16:48हो के बैठा हो इन भावों में कोई पाप ग्रह
16:52बैठा हो लेकिन वह स्वर राशि उच्च राशि का
16:55ना हो मित्र राशि का ना हो पाप ग्रह बैठा
16:58हो और उसके ऊपर दूसरे पाप ग्रह की दृष्टि
17:01आ जाएगी तब यह भाव कमजोर माने जाएंगे।
17:05भाव के आगे पीछे पाप ग्रह हो पाप कर्तरी
17:08हो। यहां पर शनि हो गया। यहां पर मंगल हो
17:10गया तो यह पाप करतरी हो गया। भाव बलवान भी
17:14होगा। अगर क्या होगा? शुभ कर्तरी। इधर हो
17:17गया गुरु। इधर हो गया चंद्रमा। दो शुभ
17:19ग्रह आगे पीछे किसी के भाव भाव के हो जाए
17:22तो शुभ कर्तरी होता है। अगले सूत्र पे
17:25चलते हैं। पंचम और एकादश भाव का संबंध बन
17:28जाए। यानी आपके जो दो पफड़ भाव है पांचवा
17:32और एकादश पांचव भाव का स्वामी एकादश में आ
17:36जाए। एकादश का स्वामी पांचव में आ जाए या
17:39इन दोनों भावों के स्वामी जो भी ग्रह आपकी
17:42कुंडली में हैं वह एक साथ बैठे हो या राशि
17:46परिवर्तन कर लिए हो तो संबंध बन जाएगा।
17:49अगर पंचम और एकादश पड़पड़ का संबंध बनेगा।
17:53तो ऐसे जातक अपने ज्ञान, शिक्षा देने की
17:58क्षमता, सलाह देने की क्षमता, लेखन,
18:02प्रशिक्षण, रचनात्मकता
18:05इन सारी अपने मतलब जो उनके अंदर कोई ना
18:08कोई सॉफ्ट स्किल होगी जिसको वो अपनी आय
18:12में बदल पाएंगे। आपको ऐसा योग शिक्षक,
18:14सलाहकार, लेखक, ज्योतिषी, कलाकार,
18:18प्रशिक्षक, बौद्धिक व्यवसाय करने वाला बना
18:21सकता है। तो अगर पड़फड़ में पंचम और एकादश
18:24का संबंध होगा तो लाभ बौद्धिक कार्यों से
18:27आने का योग बन जाएगा। पंचम भाव मजबूत हो
18:31लेकिन एकादश भाव कमजोर हो। अब आप खुद
18:34निष्कर्ष निकालने में सक्षम हैं। मान
18:37लीजिए पंचम भाव मजबूत है लेकिन एकादश
18:39कमजोर है तो पंचम मजबूत मतलब आपके पास
18:43मजबूत बौद्धिक क्षमताएं हैं। लेकिन एकादश
18:48कमजोर है तो उन बौद्धिक क्षमताओं से पंचम
18:51भाव किसका होता है? प्रतिभा का होता है।
18:54क्रिएटिविटी का होता है। तो पंचम मजबूत है
18:57तो आपके अंदर प्रतिभा अच्छी है। लेकिन
19:00एकादश वाला अगर कमजोर है पड़फड़ तो प्रतिभा
19:03और बौद्धिक क्षमता होने के बावजूद भी आप
19:06उसे लाभ में कन्वर्ट नहीं कर पाते हैं।
19:10इसी का अपोजिट कर लीजिए। अगर किसी का
19:12एकादश भाव मजबूत हो गया लेकिन पंचम थोड़ा
19:16सा पीड़ित हो गया तो क्या होगा कि बौद्धिक
19:20क्षमता कम होने के बावजूद भी व्यक्ति लाभ
19:23बना लेता है। आप अपनी कुंडली में देखिएगा
19:26अगर पंचम भाव पंचम भाव का स्वामी क किसी
19:30का कमजोर है, लेकिन लाभ भाव लाभ भाव का
19:32स्वामी मजबूत है, तो कम बुद्धिमान होने के
19:35बावजूद कम हुनरमंद होने के बावजूद भी वह
19:39व्यक्ति लाभ अपने अनुसार पर्याप्त बना
19:42लेगा। वहीं अगर पंचम मजबूत होगा लेकिन लाभ
19:46कमजोर होगा तो बुद्धिमान होने के बावजूद
19:48भी वह उचित लाभ जीवन में नहीं कमा पाता
19:52है। उचित उपलब्धियां नहीं बना पाता। वहीं
19:55अगर दो के दोनों मजबूत हो गए। पंचम भी
19:58मजबूत हो गया। एकादश भाव भी मजबूत हो गया।
20:01तब पूछना ही क्या है? वो पर्याप्त
20:04बुद्धिमान है, पर्याप्त हुनरमंद है और
20:08पर्याप्त उसके पास में उपलब्धियां भी आने
20:12वाली है। दोनों ही कमजोर हो गए तो बुद्धि
20:14भी कमजोर है, स्किल भी कमजोर है,
20:18क्रिएटिविटी कमजोर है और अवसर भी कमजोर हो
20:21जाएंगे उसके लिए। तो, यह आपका अगला सूत्र
20:24मैं दे रहा हूं। सातवां सूत्र द्वितीय और
20:27पंचम भाव से ले लेते हैं। क्योंकि यह
20:29दोनों भी क्या है? पड़पड़ भाव है। अब
20:32द्वितीय और पंचम भाव का संबंध अच्छा बना
20:34हो। दोनों एक दूसरे की राशि में बैठे, एक
20:37दूसरे के साथ बैठे, एक दूसरे को पूर्ण
20:39दृष्टि से देख रहे हो तो क्या होगा?
20:42परिवार में शिक्षा, संस्कार और ज्ञान की
20:45परंपरा आगे बढ़ती रहेगी। जातक अपनी बुद्धि
20:49और वाणी से लोगों को प्रभावित करेगा। अगर
20:52आप यह जानना चाहते हैं किसी भी व्यक्ति की
20:54कुंडली देख के कि क्या यह व्यक्ति ऐसी
20:57वाणी बोलना जानता है कि अगले को मोह ले
21:00मंत्रमुग्ध कर ले तो द्वितीय और पंचम का
21:03संबंध देखना होगा। यह बुद्धि हो गया। यह
21:05वाणी हो गई। बुद्धि और वाणी के संयोजन से
21:08वह अपने जीवन में लोगों को अपने कुटुंब
21:11को, परिवार को या धन का भी होता है तो
21:14बुद्धि और वाणी से वह धन बहुत निकालने में
21:18सक्षम हो जाएगा। आठवां सूत्र है। अगर पंचम
21:21और अष्टम भाव का संबंध हो जाए तब क्या
21:23होगा? पंचम आपकी बुद्धि क्रिएटिविटी हो
21:26गई। अष्टम भाव क्या हो गया? शोध का हो
21:29गया। रहस्यों का हो गया। ज्योतिष का,
21:31मनोविज्ञान का, चिकित्सा का, विरासत का
21:35है। रहस्यमई विषयों का भाव अष्टम भाव होता
21:38है। यदि इन दोनों का संबंध होगा तो आपकी
21:42बुद्धि जो है वह गोपनीय चीजों में, किसी
21:46विषय के रहस्य को खोलने में, गुप्त चीजों
21:50में, विरासत वाली चीजों में, ज्योतिष में,
21:54शोध में इन सब चीजों चीजों में आपकी रुचि
21:57गहरी बनेगी। और संतान से जुड़े हुए विषयों
22:01में संतान कहीं ना कहीं भूमिका निभाएगा
22:04आपके आपको आपके जीवन में रहस्यों को खोलने
22:07में। लेकिन अगर पीड़ित होगा तब तब दिक्कत
22:10होगी। पंचम भाव प्रेम का भी होता। अगर
22:12पंचम भाव का अष्टम से संबंध बनेगा। यानी
22:15इस पड़फड़ का इस पड़फड़ से तो ऐसे लोग
22:18जीवन में गुप्त प्रेम रखने वाले होते हैं।
22:20ऐसे लोगों के प्रेम का कभी खुलासा नहीं हो
22:24पाता है जीवन में। यह भी हो सकता है और वह
22:26प्रेम किसी स्त्री से ही हो यह जरूरी नहीं
22:29है। किसी विषय से, किसी वस्तु से कहीं ना
22:32कहीं गोपनीय रूप से उनके इमोशन किसी भी
22:35चीज के साथ जुड़े हुए हो सकते हैं। नौवा
22:39सूत्र ले लीजिए। अष्टम भाव और एकादश भाव
22:42का संबंध हो। एकादश और अष्टम। एकादश लाभ।
22:45अष्टम क्या हो गया? विरासत या बीमा का कर
22:49का शोध का जीवन साथी के परिवार का जीवन
22:53साथी का कुटुंब हो गया तो अगर शुभ स्थिति
22:57में एकादश भाव और अष्टम भाव का संबंध
23:00बनेगा तो ऐसे व्यक्ति को किसी के मृत्यु
23:03होने से लाभ मिल सकता है। मृत्यु होने के
23:06बाद बीमा मिल गया, विरासत मिल गया, बीमा
23:08का पैसा मिल गया, किसी के हानि होने से जो
23:12आपको लाभ मिलेगा, वह योग यह बनाएगा।
23:15ससुराल से आपको लाभ मिल जाएगा क्योंकि यह
23:19आपका जीवन साथी है तो यह उसका क्या होता
23:21है? कुटुंब होता है और इसका संबंध लाभ
23:24वाले पफड़ से बन गया है। तो जीवन साथी के
23:27संसाधन से अष्टम भाव खनन का है, चिकित्सा
23:30का है, गुप्त कार्यों का है, संकट प्रबंधन
23:33का है। तो अगर एकादश और अष्टम का संबंध
23:36बनेगा तो इन सारे चीजों से किसी के ऊपर
23:41संकट आने से अब उस संकट को आप मैनेज कर
23:44लें या क्या करें? उससे वह प्रसन्न हो के
23:47लाभ दे दे। संभावनाएं बन जाती हैं। लेकिन
23:50अगर पीड़ित होगा या दोनों का संबंध तो
23:53अवसर हाथ में आते-आते फिर निकल भी जा सकते
23:57हैं। अगला सूत्र ले लेते हैं। देखिए अगर
24:00सप्तम भाव मजबूत है तो क्या होगा? सप्तम
24:04भाव है। आपके जीवन में जो लोग आते हैं,
24:06जुड़ते हैं। देखिएगा बहुत ध्यान से
24:09समझिएगा लॉजिक पूरा। यह आप है लगन पैदा
24:13हुए तो आपके पास क्या है? कुटुंब है, भाई
24:16हैं, माता हैं, आपके पास पिता हैं। लेकिन
24:20कुछ चीजें हम बाद में अपने जीवन में
24:22जोड़ते हैं। कुछ रिश्ते हमारे जीवन में
24:26जन्म से ही जुड़ जाते हैं। बुआ, मौसी ये
24:29सब। लेकिन कुछ रिश्ते बाद में हम खुद
24:32जोड़ते हैं। किस चीज के लिए? हम अपना जीवन
24:36उनसे शेयर करते हैं और उन्हें अपने जीवन
24:40में शामिल करते हैं। तो इन चीजों का भाव
24:43कौन सा होता है? सप्तम भाव होता है और
24:46एकादश भाव होता है। सप्तम भाव किस चीज का
24:49है? विवाह का। तो विवाह होने पर कोई आपके
24:52पास किस लिए आ रहा? आपकी अब क्या करेगा?
24:54वो लाइफ आपकी शेयर करेगा। ऐसे सप्तम भाव
24:58पार्टनरशिप का है। आप कोई बिजनेस कर रहे
25:00हैं, कोई काम कर रहे हैं। कोई ऐसा यह डील
25:04का भाव है। हमेशा डील में क्या होता है कि
25:07पैसा हो तभी डील नहीं होता है। कहीं भी आप
25:10अपने जीवन में किसी को शामिल कर रहे हैं
25:13या किसी के जीवन में शामिल हो रहे हैं तो
25:15सप्तम भाव है। तो सप्तम भाव क्या हो गया?
25:18जीवन को शेयर करने का भाव हो गया। और इसी
25:22सेंस में यह विवाह का भी भाव है। पत्नी या
25:25पति का भी भाव है। तो विवाह या विवाह के
25:30बाद जो आपको मिलता है यह द्वितीय भाव उसका
25:33क्या होता है? कुटुंब होता है। उसकी
25:35वैल्यू होती है। तो सप्तम भाव अगर ठीक
25:38होगा तो विवाह और पार्टनरशिप आपके जीवन
25:42में अच्छी आ सकती है, जल्दी आ सकती है,
25:44मनमाफिक आ सकती है। लेकिन अष्टम भाव अगर
25:48पीड़ित होगा तो यह उसकी पूंजी है। तो क्या
25:51होगा? अष्टम भाव अगर पीड़ित होगा तो विवाह
25:54हो जाएगा। पार्टनर्स मिल जाएंगे। लेकिन
25:58बाद में संयुक्त रूप से जो धन गोपनीयता,
26:02ससुराल या विश्वास से संबंधित चीजें हैं
26:06उनमें समस्याएं आने लग जाएंगी। इसीलिए
26:08ध्यान रखिएगा कि अगर अष्टम भाव अच्छा है
26:12तो ससुराल से आपको विश्वास मिलेगा। ससुराल
26:16आपके लिए खड़ा है। आपके पार्टनर्स जिनके
26:20साथ आपने लाइफ शेयर किया है। जन्म के बाद
26:23बाहरी दुनिया से जिन लोगों को आपने अपने
26:26जीवन में शामिल किया वे लोग आपके लिए
26:29अच्छा काम करेंगे। अगर पीड़ित होगा तो
26:31आपको धोखा मिलेगा। दशम भाव मजबूत हो लेकिन
26:34एकादश भाव कमजोर हो। अब इन दोनों उपचेय
26:37भाव की तुलना अगले केंद्र से कर लेते हैं।
26:39दशम भाव मजबूत है। ठीक है? तो कर्म आप
26:42बहुत अच्छा करेंगे। बहुत बड़ी-बड़ी
26:44जिम्मेदारी निभा सकते हैं। लेकिन एकादश
26:47कमजोर है तो बड़ी जिम्मेदारी के बावजूद
26:50उसका जो आउटपुट होगा उससे जो आपको उपलब्धि
26:53और लाभ मिल रहा होगा वो उतनी बड़ी नहीं
26:56होने वाली है। दशम भाव थोड़ा सा कमजोर है
27:00लेकिन एकादश भाव क्या है? बलवान है। कर्म
27:03थोड़ा कम भी करेंगे तो भी उससे बड़ी
27:05उपलब्धि आपके जीवन में आ जाएगी। तो यह एक
27:09सेंस होता है सभी भावों का सूत्र निकालने
27:12का। अब आप यह समझ लीजिएगा कि चारों पफड़
27:16भावों के स्वामियों को भाव को देख लीजिए।
27:19उनके स्वामियों को देख लीजिए। वे जितने
27:23अधिक शुभ प्रभाव में होंगे।
27:26जीवन आपका उतना ही इजी गोइंग चलेगा।
27:29अवसरों की प्राप्ति और उसे जल्दी और आसान
27:33तरीके से उपलब्धि में आप बदल ले जाएंगे।
27:36लेकिन अगर आपके चारों पफड़ भाव में क्रूर
27:39ग्रह होंगे तो अवसरों को उपलब्धियों में
27:42बदलने में आपको समय लगेगा। ज्यादा मेहनत
27:46ज्यादा दबाव ज्यादा संघर्ष झेलना पड़ेगा।
27:49लेकिन हो सकता है बहुत बड़ी जो है उपलब्धि
27:54आपको मिल जाए। इस प्रकार से हमने आपको
27:57यहां पर पड़पड़ भावों के कुछ सूत्र दे दिए
28:00हैं और यह लॉजिक आपको क्लियर हो गया होगा
28:03कि केंद्र स्थानों के बाद में सबसे ज्यादा
28:06बलवान पकड़ कुंडली पर रखने वाले ग्रह कौन
28:09से होते हैं? पफड़ भाव ही होते हैं।
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