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Intro
0:00कहां अपॉर्चुनिटीज देखते हो जहां पे
0:01इंडिविजुअल पैसे कमा सकें? [संगीत]
0:03अपॉर्चुनिटीज हर फील्ड में है। सर्विसेज
0:06चाहे एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स,
0:08रेस्टोरेंट्स हैं खेतों को हम प्रोडक्शन
0:10इंप्रूव कर सकते हैं। [संगीत]
0:13डू यू थिंक कि हम बाहर की कंपनीज़ को
0:15अट्रैक्ट नहीं कर पाते हैं कि इंडिया में
0:17ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस नहीं है।
0:18लेबर की स्ट्राइक है, रेट्रोस्पेक्टिव
0:20टैक्सेशन है, पॉलिसी अनसर्टेनिटी है। इन
0:22सब चीजों के कारण से हम इन्वेस्टमेंट नहीं
0:24कर पाते। गवर्नमेंट बड़े प्लेयर्स के लिए
0:27ज्यादा बेनिफिशियल होती है देन स्मॉल
0:29प्लेयर्स।
0:30बड़े बिजनेस को पैसा ज्यादा मिलता है और
0:31छोटे बिजनेस को बात ज्यादा मिलती है।
0:33रेलवे पे ढाई लाख करोड़ खर्च करेंगे।
0:35रोड्स, मेट्रोस, डिफेंस। किसके पास जा रहा
0:38है? बड़े बिज़नेस के पास जा [संगीत] रहा है।
0:41जितने आप बड़े-बड़े नाम सुनते हो, सब बोल
0:43रहे हैं। नेक्स्ट डेकेड इज ऑफ़ इंडियास
0:45डेकेड।
0:45भारत द नेक्स्ट डेकेड। यह ज्यादा हवा है।
0:48जो चीज जो ड्राइव कर रही है ग्लोबल ग्रोथ
0:51को वो हमारे पास नहीं है। तो हम आगे
0:54ज्यादा कैसे बढ़ेंगे?
0:55चाइना से बिजनेस करने में नुकसान
0:57क्या-क्या है हमारे पास?
0:58नुकसान पॉलिटिकल साइड है। इकोनॉमिक साइड
1:00में नहीं
1:02सुभाष गर्ग इंडिया के फॉर्मर फाइनेंस
1:04सेक्रेटरी। हमने उनसे जाना एक कंट्री कैसे
1:07पैसे कमाती है? कैसे पॉलिसी और फाइनेंस के
1:09डिसीजन देश की ग्रोथ को शेप करते हैं? कौन
1:11सी ऐसी चीज है जहां पे गवर्नमेंट आज बहुत
1:14खर्चा करती है? एंड वहन नहीं करना चाहिए
1:16उन्हें।
1:16पीएम किसान हुआ या फ़ूड सब्सिडी हुई। हमारे
1:1948 लाख करोड़ के बजट में 11-12 लाख करोड़
1:22इन इस तरह के चीजों पे खर्च होता है।
1:24इसमें भी काफी स्कोप है उसको कम करने का।
1:27[संगीत]
1:28एक कंट्री पैसे कैसे कमाती है।
1:29टेक्नोलॉजी, स्किल लेबर, इंटरनल डिमांड,
1:32एक्सटर्नल एक्सपोर्ट जो ड्राइव करते हैं
1:35गवर्नमेंट का जो पैसा आता है उसको इस
1:37तरीके से हम यूज़ करते हैं जिससे वोट्स आए
1:39कि उसको इस तरीके से यूज करते हैं जिससे
1:41कंट्री की ग्रोथ हो जाए। [हंसी]
1:47आगे बढ़ने से पहले इस चैनल को सब्सक्राइब
1:49कर लीजिए ताकि हम आपके लिए इसी तरह से और
1:52इंसाइटफुल और बेहतर पडकास्ट बनाते रहें।
1:55एंड इस पूरे शो का ऑडियो एक्सपीरियंस
1:57स्पॉटफाई पे अवेलेबल है। जहां पे आप हमें
1:59फॉलो कर सकते हैं। एंजॉय द शो।
2:05[संगीत]
Understanding India's economy
2:06तो आप फाइनेंस के ऊपर बहुत बात करते हो।
2:09आपका एरिया और डोमेन ऑफ़ एक्सपर्टीज
2:12फाइनेंस रह चुका है। इकोनॉमिक्स रह चुका
2:14है। आप
2:14इसके बारे में किताबें लिखते हो। आपका
2:16एक्सपीरियंस पूरा वहां है। फाइनेंस
2:17सेक्रेटरी में थे।
2:19राइट? तो यू हैव लिव्ड दिस।
2:22तो मेरा ऑब्जेक्टिव ना अब यहां से आगे
2:25चलते हुए पॉडकास्ट में ये है
2:26हम
2:26कि मैं आपसे समझने की कोशिश करूं कि अपने
2:28कंट्री की इकॉनमी कैसी है।
2:30ठीक है?
2:30ठीक है? उधर क्या हो रहा है? कैसे हो रहा
2:32है? पैसे कैसे बनते हैं? खर्चा कैसे होते
2:34हैं? कहां सही जगह खर्च हो रहे हैं? कहां
2:35गलत हो रहे हैं। राइट? मैं आपसे ये समझने
2:37की कोशिश करूंगा। पॉलिसी कितनाेंट होती
2:39है।
2:40तो आप ये मानो कि मैं एक स्टूडेंट हूं।
2:42ओके?
2:43और मैं एक इंडिया का यंग बच्चा हूं 20 में
2:46अपने जो देश को समझने की कोशिश कर रहा है।
2:49यहां पे ओपोरर्चुनिटीज समझने की कोशिश कर
2:51रहा है और कहां पैसे बन सकते हैं, कहां
2:52खर्चे हो सकते हैं ये सब समझ।
2:53राइट।
2:54तो मैं उस हिसाब से आपसे क्वेश्चंस
2:55पूछूंगा। एकदम बेसिक्स पे अपन बात करेंगे।
2:58इट्स लाइक अ मास्टर क्लास। एंड ये मेरे
3:02मेरे ख्याल से ये हम सब लोगों का मेरे
3:05मैं और मेरे सारी ऑडियंस का ये प्रिविलेज
3:08रहेगा कि हम इंडिया के फॉर्मर फाइनेंस
3:11सेक्रेटरी से फाइनेंस सीख रहे हैं। देश का
3:13राइट [हंसी] इट्स अ प्रिविलेज शायद ही कुछ
3:16लोगों को ये मौका मिलेगा। सो इसलिए मैं उस
3:18हिसाब से आपको डीप कोशिश करता हूं। प्री
3:20इंडिपेंडेंस से देखें तो प्री इंडिपेंडेंस
3:22से 1900 से 1947 तक आपको मालूम है देश की
3:27आर्थिक
3:29वृद्धि विकास की वृद्धि दर क्या थी 1% पर
3:32इन्हें
3:34अब ये 1% से 44 साल में 4% रखे तो 1% के
3:39मुकाबले तो 4% बहुत लगता
3:42लेकिन उसी समय जो दुनिया भर में और देश
3:44आजाद हुए वो कोई 9% पे पहुंचा कोई 10% पे
3:47पहुंचा कोई और सब आगे आगे निकल चलते रह
3:49गए। हम धीरे-धीरे बढ़े
3:52और पूरे देश की आर्थिक जगत को हमने बांध
3:56दिया। लाइसेंस परमिट, कोटा, फलानाड़ा,
3:59इंपोर्ट सब कुछ कंट्रोल। राइट?
4:02तो उसका रिजल्ट वाज़ है होपलेस
4:04परफॉर्मेंस में 45
4:06अब 91 में फिर रियलाइज हुआ, खोला।
4:09हम
4:09सारा लिबरलाइजेशन हुआ, सब कंट्रोल्स हटाए।
4:12तो 91 से अगर वो भी कांग्रेस का पीरियड
4:15अगर मानते हैं 5 साल तक कम से कम उनका
4:18सरकार रही उसके बाद बीच में और भी दो चार
4:22दो टर्म आए। सो वो पीरियड इज मच बेटर देन
4:26प्री 90
4:28राइट दैट पीरियड इज़ मच बेटर। अब उसके बाद
4:322014 तक बीच में कुछ खिचड़ी सरकार वगैरह
4:34वो छोड़ दो तो भी आपका ये ये सरकार दिस
4:38परफॉर्मेंस इज मच बेटर। राइट? फिर आप 2014
4:43के बाद देखें तो पहले टर्म में 5 साल वास
4:48मच बेटर। सेकंड टर्म होपलेस एंड द थर्ड
4:51टर्म नाउ व्हिच वी अ बिगिनिंग
4:53ये तो और भी मुश्किलात की तरफ आता है।
India's economic state today
4:56एकदम फाउंडेशन बेसिस पे बताओ
4:59कि आज हमारी कंट्री की इकॉनमिक स्टेट क्या
5:02है? हम कहां पर हैं? आज इकॉनमी की स्टेट
5:04क्या है? आज हम क्या है? कैसे हैं? क्या
5:08करते हैं? क्या इंडिकेटर्स हैं जिससे आप
5:10जज करते हो? टेल मी वेरी बेसिक।
5:12आप या कोई भी व्यक्ति
5:15के लिए सबसे इंपॉर्टेंट इकोनॉमिक पैरामीटर
5:18क्या होता है?
5:20जीडीपी हम लोग बात करते हैं।
5:21नहीं जीडीपी तो देश के लिए
5:23देश के लिए
5:23व्यक्ति के लिए
5:24पैसे कमा रहा हूं। मैं कितने कमा रहा हूं?
5:26मैं कितना कमा रहा हूं?
5:26इनकम मेरी क्या है?
5:27हम
5:28इनकम।
5:29हां। मेरी इनकम कितनी है? मैं पैसे कितने
5:31कमाता हूं? घर कितने? वजह से तो जीडीपी
5:34एक तरह से देश के सारे 140 करोड़ लोगों की
5:38कुल मिला के इनकम है।
5:40ओके
5:41राइट
5:43तो ये तो आज देश के सारे लोगों की इनकम
5:46कुल मिला के
5:48ये
5:49आज कितनी है?
5:50आज के दिन इसको अब यह नंबर भी बहुत बड़े हो
5:54जाते हैं। लाख करोड़ हम
5:57राइट
5:58लाख करोड़
5:59तो देश की इस समय जो
6:0223 24 की देश की कुल मिला के जीडीपी है
6:07टोटल इनकम वो रफली है 300
6:1225 लाख करोड़ 325
6:14325 ट्रिलियन
6:16इन रुपीस
6:16हां
6:18डॉलर्स में कितनी होगी हमारी
6:20डॉलर में हमारी इनकम पिछले साल की थी 3.57
6:247 या 3.6 हम
6:26ट्रिलियन
6:28तो 10 ट्रिलियन का संदर्भ या पांच
6:30ट्रिलियन का संदर्भ इस तरह से देख सकते
6:33हैं।
6:33ओके तो आज हम जहां पर हैं
6:35वो 36
6:37ट्रिलियन
6:383.6 ट्रिलियन डॉलर्स पे है
6:40और हम सोचते हैं कि ये 10 तक लेके जाना
6:41है।
6:4210 तक लेके जाना या पांच तक ले कहां से
6:44चले थे? 181 बेस है। 19 में 19-20 में
6:48पहली बार अनाउंसमेंट हुआ। उस समय हमारी
6:51देश की पूरी जीडीपी इन डॉलर टन्स 2.7
6:55ट्रिलियन थी।
6:57कौन से ईयर में?
6:5818
6:59181 में। हां।
7:00राइट। क्योंकि ये जो अनाउंसमेंट था 10
7:02ट्रिलियन का पहली बार 1920 के बजट में हुआ
7:05था।
7:05हम
7:06उस समय में भारत सरकार में था। वो शब्द
7:09मेरे लिखे हुए।
7:10अच्छा।
7:10ठीक है। पीयूष गोयल ने पढ़े थे।
7:12हम
7:13राइट?
7:15और सहमति के बाद पढ़े प्राइम मिनिस्टर ने
7:18भी कहा कि भाई ये हमारी एंबिशन एस्टैब्लिश
7:20होनी चाहिए।
7:21तो 10 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी का
7:24हम
7:25अनाउंसमेंट
7:26एंबिशन पहली बार 2000 1920 के इंट्रिम बजट
7:32में 1 फरवरी वाले बजट में कहा गया था।
7:34ठीक है?
7:35तो उसमें 18-19 था। 19 चल रहा था। फरवरी
7:3819 की बात कर रहे हैं तो 18-19 को अगर हम
7:40बेस ले तो उस समय हमारी इनकम या जीडीपी
7:442.7
7:46ट्रिलियन थी
7:47तो आपने सोचा चार गुना अब हमको हमारी इनकम
7:49बढ़ानी है
7:5010 10
7:5110 ट्रिलियन के लिए
7:5210 ट्रिलियन के लिए चार तो गुना लगभग 3
7:55तीन तीन गुना
7:56होनी चाहिए और कब तक मिडिल ऑफ 2030
8:01ओके
8:02ये कब एक दिन में तो होती नहीं
8:04हां तो 10 11 साल 15 साल में कितने साल
8:07हां तो 15 साल में रफली तो शब्द वहां पे
8:09जो इस्तेमाल हुआ था मिडिल ऑफ़ 2030
8:12ओके
8:12सो लेट अस टेक 2035
8:14हम
8:15मिडिल मानने में 2035 तो 2019 में आप चल
8:19रहे हैं 2035 में आप पहुंच रहे हैं 16 साल
8:22में आप 2.7 ट्रिलियन से 10 ट्रिलियन
8:26पहुंचे
8:27ये आपने बोला था
8:28ये उसमें अनाउंसमेंट हुआ हम
8:31फिर दूसरा अनाउंसमेंट हुआ उसी साल जब
8:34जुलाई में बजट हुआ उससे पहले
8:37नीति आयोग की जो बैठक हुई उसमें प्राइम
8:40मिनिस्टर ने यह मानते हुए कि भाई 2035 दूर
8:44है पहले का भी बताओ तो 2000 2425 तक
8:49जिसमें इनका दूसरा टर्म खत्म होगा उसके
8:53आसपास तक हम 5 ट्रिलियन पे पहुंचेंगे
8:58ओके
8:58सो 2.7 से 5 ट्रिलियन
9:01डबल
9:01छ साल
9:02ऑलमोस्ट
9:02छ साल में डबल तो नहीं हां
9:04ऑलमोस्ट
9:0580% ऊपर मान लीजिए 5 साल में ये उसके
9:09मुकाबले ज्यादा एंबिशियस है
9:11हम
9:12लेकिन रियलिस्टिक है हो सकता है छ साल में
9:15अगर आप कोई भी चीज डबल करने के लिए एक अगर
9:20रेट ऑफ ग्रोथ आप अस्यूम करें तो अगर आप
9:23रफली लेट अस से 9% से ग्रो कर रहे हो तो 8
9:29साल में डबल कर लेते हैं। आप 10% से ग्रो
9:32कर रहे हो लगभग 7 साल में डबल हो जाती है।
9:35अगर आप 11% से ग्रो कर रहे हो तो लगभग छ
9:38साल में डबल हो जाती है।
9:39तो अगर आप 11% में ये सेम प्रिंसिपल आप
9:43अपनी एफडी के लिए भी लगा सकते हो।
9:45राइट? डॉलर टर्म्स में आप तय कर रहे हो
9:47तो डॉलर टर्म्स में दो चीजें
9:51दो दो चीज़ चीजें मिक्स हो जाती है।
9:54हम
9:54एक तो आपकी ग्रोथ क्या है?
9:56हम
9:56ग्रोथ में नॉमिनल ग्रोथ। नॉमिनल ग्रोथ
9:59कहते हैं कि आपकी जो करंट प्राइस है और
10:01रियल ग्रोथ कहते हैं जिसमें आप एक
10:03बेंचमार्क जैसे 2011 का अगर उसकी समय की
10:07प्राइसेस लेके चलो तो आप उस टर्म्स में
10:09कितना तो ये जो ग्रोथ डॉलर में है वो
10:11नॉमिनल टर्म्स में गिनी जाती है। तो
10:14नॉमिनल टर्म्स में इनफ्लेशन शामिल होता
10:16है। तो आज भी हमारी 9 10% की ग्रोथ आज भी
10:19है। राइट? ग्रोथ रियल ग्रोथ पिछले साल
10:23जैसे थी 8% थी। इस बार अभी 6% की बात हो
10:27रही है। आपने पढ़ा होगा राइट।
10:30सो इस बार 6% लेकिन नॉमिनल ग्रोथ जो है वो
10:339%
10:34हम
10:35तो 11% 9% से ज्यादा मुश्किल दूर नहीं है।
10:39ओके। दूसरा
10:41अगर आपका
10:43रुपया डॉलर के मुकाबले अप्रिशिएट हो जाए
10:46तो वह ग्रोथ में जुड़ जाता है।
10:47हम
10:48और डॉलर के मुकाबले रुपया डेप्रिशिएट हो
10:51जाए तो आपकी ग्रोथ घट जाती है।
10:52हम
10:53तो अगर मान लीजिए 2% आपका रुपया एप्रिशिएट
10:57हो गया तो दो और 9% आपकी नॉमिनल ग्रोथ हुई
11:00तो 11% भी ग्रोथ हो जाती है। 11% की ग्रोथ
11:04जो है
11:04इतनी डिफिकल्ट नहीं है।
11:05इतनी डिफिकल्ट नहीं है। 2000
11:09चार से और 2014 के बीच में हमारी 14% की
11:13ग्रोथ थी। डॉलर टर्म्स
11:162004 से 2014
11:1714 के बीच में डॉलर टर्म्स में
11:191314%
11:212014 के बाद ये कभी देखने वाले
11:232014 के बाद हम 7% के आसपास से ग्रो किए
11:27हुए हैं।
11:27डॉलर टर्म्स में सात तो आधी क्यों हो गई
11:29है?
11:30हो गई। बिकॉज़
11:32डॉलर के मुकाबले रुपया घट रहा है। दूसरा
11:36हमारी नॉमिनल ग्रोथ ही कम हो गई। दोनों
11:39चीजें कम हो गई। उसका अब जैसे इस साल का
11:41अगर आप लोगे
11:43तो इस साल मान लीजिए 10%
11:46नॉमिनल ग्रोथ होती है। लेकिन अब आजकल
11:48रुपया गिर रहा है। अगर मान लीजिए साल भर
11:50में 4% रुपया गिर जाता है डॉलर के मुकाबले
11:53तो डॉलर में हमारी ग्रोथ कितनी होगी? 6%
11:58अगर यह उलट जाए 4% आपका रुपया अप्रिशिएट
12:02हो जाए तो वो 14% हो जाए। तो दोनों का जो
12:05है मिलिया फैक्टर
12:08काम
12:10ओके
12:10तो एक तो फैक्टर जो आप पूछ रहे थे जो
12:13लोगों को सबसे इकोनॉमिक्स में ये कि मेरी
12:16आमदनी कितनी है व्हिच इज इक्विवेलेंट टू
12:18जीडीपी
12:18हम
12:19दूसरा लोगों को सबसे ज्यादा ये चीज
12:22इंटरेस्ट करती है कि एंप्लॉयमेंट मेरी
12:24नौकरी है या नहीं
12:25हम
12:27राइट तो नौकरी नौकरी क्यों होती है? नौकरी
12:33केवल नौकरी के लिए कोई आपको सरकार ही दे
12:36पाती है नौकरी बाकी प्राइवेट सेक्टर आपको
12:38नौकरी के लिए नौकरी नहीं देता। आप भी नहीं
12:39रखेंगे किसी को भी। ठीक? रखते इसलिए हैं
12:43कि वो कुछ ना कुछ
12:44आउटपुट।
12:45आउटपुट करने में मदद करता है। अगर आउटपुट
12:47करने में मदद नहीं दे करेगा तो आप उसको
12:51नहीं रखेंगे। हम
12:52और आजकल आउटपुट आदमी से भी होता है जो
12:56लेबर और मशीनों से भी होता है।
12:58हम
12:59राइट और मशीनों का चलन ज्यादा भी बढ़ रहा
13:01है जो कैपिटल समझ लीजिए।
13:03तो अगर कैपिटल
13:05से आउटपुट ज्यादा हो जाए और लोगों की
13:08जरूरत ना हो
13:09तो फिजिकल लेबर ऑटोमेशन से काफी कम होता
13:13चला जाएगा।
13:14आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से
13:15इंटेलिजेंट लेबर भी कम होता चला जाएगा।
13:17राइट? तो लेबर की क्या स्थिति है?
13:20एंप्लॉयमेंट की स्थिति है वो लोगों को
13:22काफी एक और फिनोमिनन जिसको लोग काफी
13:27परेशान रहते हैं या इंटरेस्टेड रहते हैं
13:29वो इनफ्लेशन है।
How does a country make money?
13:30एक कंट्री पैसे कैसे कमाती है?
13:33क्योंकि अगर देश को आगे बढ़ना है तो बहुत
13:36पैसा चाहिए। राइट? अब वो पैसा या तो देश
13:39उधार ले सकता है या देश खुद में कमा सकता
13:42है कुछ आउटपुट करके या वो बाहर के लोगों
13:45से इन्वेस्ट करा सकता है। राइट? यही तीन
13:47तरीके होते हैं मेजरली कि और भी कोई तरीके
13:49होते हैं। आप जो देखिए तीन चीजों में अंतर
13:53समझना जरूरी है।
13:54एक तो पैसा जिसका इंग्लिश में मनी हम
13:59राइट दूसरा विनियोजन जिसका मतलब
14:03इन्वेस्टमेंट
14:04हम
14:05ठीक है और तीसरा वैल्यू एडिशन या उत्पाद
14:09हम
14:10आउटपुट
14:11आउटपुट दोनों में थोड़ा सा फर्क है बट
14:14वैल्यू एडिशन कुल मिला के कितनी
14:17वैल्यू ऐड हुई
14:18ठीक है
14:18राइट ये तीन चीजें
14:20में कई बार लोग मिक्स अप करते हैं
14:22वो सब पैसा जो है वह करेंसी या मनी है।
14:27राइट दैट इज नॉट इक्विवेलेंट टू इनकम और
14:29आउटपुट।
14:31पैसे रिजर्व बैंक छाप सकता है। करेंसी और
14:35इशू कर सकता है। मनी और इशू कर सकता है।
14:37मनी आप बाहर से उधार भी ले सकते हैं। इन
14:40वो भी वो आपके पास आ सकता है। तो पैसा इज
14:44नॉट इक्विवेलेंट टू आउटपुट।
14:48दैट इज द डिफरेंस वी शुड अंडरस्टैंड।
14:51दूसरा इन्वेस्टमेंट।
14:53इन्वेस्टमेंट आप जितना कमाते हैं अभी
14:55थोड़ी देर पहले अपन ने बात की कितनी इनकम
14:58है। राइट? अब इनकम में से एक हिस्सा आप
15:02खर्च कर देते हैं। कंजमशन जिसको कहते हैं।
15:04ठीक है? आप खाने पे, कपड़ों पे, आपके रहने
15:07पे, मकानों का उस भी आपका आप कंजमशन पे आप
15:10खर्च कर देते हैं। एक परस एक हिस्सा आप
15:13बचाते हैं।
15:14हम
15:15और जो हिस्सा बचाते हैं और उसको या तो आप
15:18सीधे इन्वेस्ट करते हैं या फिर आपके बिहाफ
15:21पे कोई बैंक या इन्वेस्टमेंट या कोई कंपनी
15:24जो है वो इन्वेस्ट करती है। आप उसको दे
15:26देते हैं और वो इन्वेस्ट कर देती है नई
15:29फैक्ट्री नई चीज में। राइट? और उसी
15:33इन्वेस्टमेंट के लिए विदेशी भी आपके पास
15:35जो आता है तो फॉरेन इन्वेस्टमेंट या
15:37तो वो इन्वेस्टमेंट है। इन्वेस्टमेंट से
15:39नई कैपेसिटी क्रिएट होती है। बट
15:41अल्टीमेटली उसका ऑब्जेक्टिव भी वही है कि
15:44गुड्स एंड सर्विज पैदा करना। सो रियल थिंग
15:48इज कि गुड्स एंड सर्विज प्रोडक्शन और उसका
15:52कंजमशन में कितना वृद्धि हो रही है। पैसा
15:55है सच अगर आप वैसे पहले इनफ्लेशन की का
15:59कारण ये मान रिजर्व बैंक ने बहुत पैसे छाप
16:01दिए। हम
16:02अब वो पैसे छाप के आपको दे दिए बट उत्पादन
16:04बढ़ा नहीं तो फिर क्या है उत्पादन के दाम
16:07बढ़ जाएंगे
How does a country grow?
16:08ओके तो कंट्री आगे कैसे बढ़ती है ये आपने
16:10समझा दिया है कंट्री पैसे कैसे कमाती है
16:13राइट और ये अगर ये एडिशन होते जाएगा तो
16:15कंट्री की ग्रोथ होगी राइट
16:17हम
16:18कंट्री की ग्रोथ होती कैसे है क्यों कुछ
16:20कंट्रीज बहुत आगे चली जाती है और कुछ
16:21कंट्रीज नहीं ग्रो कर पाती है
16:23देखिए दिस इज फैसनेटिंग अगर आप
16:26एक
16:291940
16:31जिसमें हम भी आजाद हुए 47 में और 47 40
16:35में 50 में
16:38लगभग सारी दुनिया भी और आजाद हुई। ठीक है?
16:42लोग अलग-अलग रास्ते चले। चाइना कम्युनिस्ट
16:46रास्ते पे चला गया। कई सारी और कंट्रीज
16:48कम्युनिस्ट रास्ते पे चली गई। हिंदुस्तान
16:50मिक्स्ड इकॉनमी के रास्ते पे चला गया।
16:53राइट? जापान जो डेवस्टेटेड हो गया था।
16:56जापान, कोरिया, ताइवान ये दूसरे रास्ते पे
17:01चले। कैपिटलिज्म के रास्ते पे चले।
17:03अलग-अलग लोगों का अलग-अलग मौके सबके पास
17:06थे। मौके कहां से आए थे के एक तो उनकी खुद
17:10की जो जनता थी वो पहले गरीब थी। उनको
17:14कंजमशन उनका बहुत कम होता था। उनके पास
17:16खानेपीने के साधन कम थे। तो आप अगर
17:20उत्पादन बढ़ा देंगे तो आपकी खुद की जो
17:22जनता है उसको बेहतर कंजमशन करने में मदद
17:26मिलेगी। एक तो आपके पास वहां से डिमांड
17:28आती थी। उससे आपको ग्रोथ आती थी और दूसरा
17:32जो ये जो इंडस्ट्रियलिस्ट कंट्री थे
17:37अमेरिका, यूरोप वगैरह इनके यहां पे बहुत
17:41प्रोस्पेरिटी बढ़ने लगी तो बहुत उनके यहां
17:44से डिमांड आने लगी।
17:45तो आप उनको एक्सपोर्ट कर सकते थे। ठीक है?
17:48तो दो मुख्य
17:51ऑब्जेक्टिव होते हैं, माध्यम होते हैं।
17:53जैसे कंट्री का इनर कंसमशन या एक्सपोर्ट
17:56और या एक्सपोर्ट दो चीजों पे आप अपना
17:59ग्रोथ ला सकते हैं।
18:01अब ग्रोथ कैसे लाएं हम? उसमें सबसे बड़े
18:06दो साधन होते हैं।
18:07हम
18:07एक तो साधन ये रहता है कि आपके पास
18:09टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस है। राइट? अब आप
18:15टेक्सटाइल इंडस्ट्री जो पहली इंडस्ट्री थी
18:17दुनिया में जिसने अ टेक्नोलॉजिकल इनोवेशंस
18:22और बहुत हुआ वो इंग्लैंड में हुआ तो
18:25इंग्लैंड में अब उससे पहले कपड़ा बनने का
18:28हम लोग हैंडलूम्स में और इन पे बनाते थे
18:30बड़े स्लो प्रोसेस से बनाते थे अच्छा
18:32बनाते थे लेकिन हम बनाते थे हिंदुस्तान
18:34बनाता था ज्यादातर अब उसके बाद जो ब्रिटेन
18:38वगैरह में ये सारे इनोवेशंस हुए
18:41तो उससे से आप विश्वास करिए 250 300 गुना
18:46फास्ट और चीपर चीजें बनने लगी तो निश्चित
18:51रूप से वो कमपीट आउटपीट कर देंगे
18:54उन्हीं का उत्पादन होगा वो बिकेगा वही
18:56जाएगा दुनिया भर में आपका नहीं जाएगा ठीक
18:58है तो इसी तरह बाद में स्टील
19:02के प्रोडक्शन में एलुमिनियम के प्रोडक्शन
19:04में इसमें टेक्नोलॉजी जिसने भी बढ़ाई फिर
19:07कंप्यूटरटर्स वगैरह जो लेके आए इनेशन
19:10टेक्नोलॉजी वगैरह उसमें आजकल सेमीकंडक्टर,
19:12सोलर। सो अलग-अलग समय में अलग-अलग
19:15टेक्नोलॉजिकल इनोवेशंस होते हैं जो ड्राइव
19:19करते हैं ग्रोथ को।
19:20अगर आप उसमें आगे हैं, आप उसके उसमें लीडर
19:23हैं तो आपको आप ग्रो करेंगे। और अगर आप
19:27उसमें लीडर नहीं है तो आप नहीं ग्रो
19:29करेंगे। और दूसरा आपकी लेबर का है। आपकी
19:33लेबर कितनी स्किल्ड है, आपकी कितनी ट्रेंड
19:36है, कितनी बेहतर है, उसके मुकाबले जो लेबर
19:39प्रोडक्टिविटी
19:41है उस उस हिसाब से आपकी आपकी ग्रोथ होती
19:44है। इन्वेस्टमेंट वगैरह जो है वो
19:48इन इंटरमीडिएट साधन है। उन इन्वेस्टमेंट
19:50से आप टेक्नोलॉजी खरीदते हैं।
19:52आप इन्वेस्टमेंट से फैक्ट्रियां बनाते
19:54हैं, मशीन लगाते हैं और तो ये मेन
20:01ड्राइवर्स हैं। टेक्नोलॉजी, स्किल लेबर,
20:05अह डिमांड, इंटरनल डिमांड, एक्सटर्नल
20:09एक्सपोर्ट। इसमें हम अनफॉर्चूनेटली
20:13हमने जो पॉलिसीज अपनाते गए। अब हमने कहा
20:16कि हम तो सेल्फ रिलायंस की पॉलिसी रखेंगे।
20:20इंपोर्ट सब्सीट्यूशन की सब चीजें देश में
20:22पैदा करेंगे। हमारे पास टेक्नोलॉजी
20:25टेक्नोलॉजिकल इंस्टीटशंस नहीं थे। हमने
20:28टेक्नोलॉजी इजाद नहीं की। लोगों ने दुनिया
20:30ने तो टेक्नोलॉजी इजाद किए गए। आप किसी भी
20:34एक इंडस्ट्री का उदाहरण ले चले जाएंगे तो
20:37आपको पता लगेगा कि हम टेक्नोलॉजी के लिए
20:39एडवांस नहीं हुए तो हम हम फिर दूसरों से
20:42कमट नहीं कर पाएंगे। अ लोग रिवर्स
20:45इंजीनियरिंग करके टेक्नोलॉजी अपना लेते
20:47हैं। तो धीरे-धीरे आपने देखा अब 50ज से
20:51पहले हमारे देश में भी मिल्स आ गई थी।
20:55कपड़े की मिल जापान वगैरह हमसे पीछे थे।
20:58हम
20:59इवन टेक्सटाइल में हम
21:00जापान आगे निकला फिर उसके बाद साउथ कोरिया
21:03आगे निकला फिर उसके बाद ताइवान आगे निकल
21:06गए ये साउथ ईस्ट एशिया में लोग आगे निकल
21:10गए फिर बाद में चाइना आगे निकलता हम आगे
21:12मारे सो अगर हम एडवांसमेंट नहीं करेंगे
21:16ओपनमेंट ओपन रह के नहीं करेंगे टेक्नोलॉजी
21:20को नहीं बढ़ाएंगे आज आज अगर आप देखोगे
21:24तो आज
21:26कंप्यूटरटर्स हैं जिसमें सेमीकंडक्टर्स
21:29हैं डिजिटल साइड है जिसमें टेक्नोलॉजी
21:32बहुत फास्ट विकसित हो रही है। दूसरे साइड
21:35में एनवायरमेंटल
21:37चीजें हैं, सोलर सेल्स हैं जिसे आप
21:40रिन्यूएबल एनर्जी पैदा करते हैं। वो उसकी
21:44टेक्नोलॉजी किसके पास है?
21:47हमारे पास नहीं है।
21:48हमारे पास नहीं है।
21:49तो हम कैसे दूसरों को कमपीट करेंगे?
Is lack in technological advancement holding us back?
21:53तो टुडे यू फील क्योंकि हम टेक्नोलॉजिकली
21:55पीछे हैं। इसकी वजह से हम कमट नहीं कर
21:57सकते लोगों से। एंड इसकी वजह से हमारी
21:58ग्रोथ कम है।
21:59जिसमें है हमारे पास तो हमारे जैसे हमारे
22:01ब्रेन ब्रेन पावर हमारा बहुत बेहतर है।
22:04हमारा जो ह्यूमन टैलेंट है वो रिलेटिवली
22:06बहुत अच्छा है। उसकी उसकी कॉस्ट भी यहां
22:09पे रिलेटिवली कम है। तो आपने देखा कि 90ज
22:13के बाद इनेशन टेक्नोलॉजी सर्विज में और
22:15आजकल ये जीसीसी वगैरह में
22:18इन चीजों में फाइनशियल सर्विज में हमारा
22:21बहुत
22:22हम दुनिया से और लोगों से आगे हैं तो
22:25उसमें हम उसमें हम आगे बढ़ रहे हैं।
22:27बट ओवरऑल टेक्नोलॉजी में हम पीछे हैं।
22:29ओवरऑल टेक्नोलॉजी में पीछे हैं। आज अगर
22:31एनवायरमेंटल टेक्नोलॉजी सोलर वगैरह में या
22:35इलेक्ट्रिक व्हीकल्स वगैरह में जो आज के
22:37आज के दिन की नई नई दिशा है या क्रिटिकल
22:41केमिकल्स वगैरह में इसमें चाइना इज फार
22:45अहेड ऑफ इवन द वेस्ट।
22:48लेकिन अगर हम यह तय करें कि हम चाइना के
22:50साथ बिजनेस नहीं करें।
22:53तो फिर ठीक है आप छोड़ते
Business with China - our losses
22:57पर चाइना से बिजनेस करने में नुकसान
23:00क्या-क्या है हमारे पास
23:02मेरे हिसाब देखिए दो दृष्टिकोण से देखेंगे
23:04देखना
23:04क्योंकि कोई नुकसान होगा तभी इतने टेरेस
23:06लग रहे हैं
23:06वो हमारा नुकसान पॉलिटिकल साइड में है
23:09इकोनॉमिक साइड में नहीं
23:12एक्सप्लेन
23:13इकोनॉमिक साइड में अब देखो आज देश में हम
23:16भी बहुत इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं सोलर
23:18पावर को बढ़ा बढ़ाने के लिए ठीक है सोलर
23:21पावर पावर सोलर प्लांट्स हमारे देश में भी
23:23बहुत इन्वेस्टमेंट बन रहे हैं। लेकिन सोलर
23:28सेल्स और मॉड्यूल्स कहां से आते हैं? अभी
23:32भी हम चाइना से 80% हमारा इंपोर्ट करते
23:36हैं।
23:36हम
23:37और हम ये भी बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि
23:40सोलर सेल्स और ये देश में ही बने। हमने
23:42पीएलआई में इनमें कई सारी स्कीम्स बढ़ाने
23:45की कोशिश की।
23:47लेकिन वहां हो नहीं रहा है क्योंकि आपके
23:50पास टेक्नोलॉजी नहीं है। आप आपके पास आप
23:54उस टेक्नोलॉजी को इवॉल्व नहीं करते। इसमें
23:56देखिए सोलर में किलर चीज क्या है? किलर
24:00चीज यह है कि आप जो सोलर इंसुलेशन होता है
24:05जो लाइट के माध्यम से आपके उस पे सेल पे
24:08गिरता है उसका कितना प्रतिशत आप बिजली में
24:12कन्वर्ट कर सकते हैं।
24:13हम
24:14ये मुख्य चीज है। ठीक है? और ये उस
24:17टेक्नोलॉजी पे डिपेंड करता है जो डिफरेंट
24:20मटेरियल्स को और इस चीजों को इस्तेमाल
24:22करते हुए इवॉल्व होती है।
24:24हम
24:24वो टेक्नोलॉजी चाइना के पास है। राइट? तो
24:28अगर आप सोलर सेल बनाने की फैक्ट्री लगा भी
24:32लेंगे। सोलर प्लांट की पावर जनरेशन का
24:36प्लांट की बात नहीं कर रहा हूं। सोलर सेल
24:38बनाने की फैक्ट्री लगा लेंगे तो उस बनाने
24:40के लिए टेक्नोलॉजी तो आपको वहीं से लानी
24:42पड़ेगी क्योंकि आपके पास तो नहीं है।
24:44और वो आपको टेक्नोलॉजी उस दाम पे देगा जिस
24:47दाम पे आप उससे कमपीट नहीं कर सकते। और जो
24:50अगले विकास करके और बेहतर टेक्नोलॉजी
24:52बनेगी वो आपके पास नहीं होगी तो आप फिर
24:54आउटपीट हो जाएंगे।
24:55तो इस पे कैसे हमारे पास टेक्नोलॉजी आ
24:58सकती है? क्या करना चाहिए हमें?
25:00टेक्नोलॉजी लाने के मेरी समझ में दो ही
25:02तरीके होते हैं। एक तो आप रिवर्स
25:05इंजीनियरिंग करके थोड़े समय में आगे निकल
25:08जाइए दूसरे से। राइट? उसके लिए आपके पास
25:11बहुत ब्राइटनेस और बहुत
25:15एक्सपेरिमेंटेशन और रिवर्स उतना ही रिसर्च
25:19एंड डेवलपमेंट आपको करने की जरूरत होती
25:21है।
25:22जो बहुत कुछ
25:24कोरिया में हुआ, चाइना में भी हुआ। शुरू
25:26में रिवर्स इंजीनियरिंग करके वेस्ट की जो
25:28टेक्नोलॉजी थी उसको रिवर्स इंजीनियरिंग
25:30करके आगे आगे बढ़े
25:32हमारे यहां पे भी कहते हैं भटिंडा वगैरह
25:34में कई लोग बट वो बहुत बेसिक मशीनों का
25:37करते हैं इतने हाई टेक्नोलॉजी एरिया में
25:40उसका उसका नहीं कर पाते
25:43एक तो ये दूसरा आपका ओरिजिनल रिसर्च है
25:45जैसे मैं अभी आपको सोलर का उदाहरण दे रहा
25:48था
25:49दुनिया में अगर आप देखें तो तकरीबन अभी
25:52शायद 28 या 29 या 30% के आसपास सोलर और
25:55इंसुलेशन को कैच करके इलेक्ट्रिसिटी बनाते
25:59हैं। वो टेक्नोलॉजी वहां तक पहुंच गई। अ
26:02जो मेरी जानकारी है उसमें तकरीबन 22 23%
26:05तक जब डेवलपमेंट हो रहा था शुरू तो हम 7
26:098% से ही कर रहे थे। राइट? वो
26:11ऑस्ट्रेलियंस लीड कर रहे हैं। लेकिन अब
26:14चाइनीस लीड कर रहे हैं।
26:15क्यों?
26:17उन्होंने उसमें उसमें बहुत मेहनत की है।
26:19ने लगाया है सारा अपना साइंटिफिक
26:21एस्टैब्लिशमेंट उसका वो तो
26:24रिसोर्सेज पैसे और रिसोर्सेज लगाए
26:26पैसे रिसोर्सेज दिमाग और क्या आता है
26:28टेक्नोलॉजी
China's growth stratergy
26:30ओके
26:30रिसोर्सेज
26:31तो लेट्स ब्रेक दिस डाउन फर्स्ट इज़ जैसे
26:34चाइना की आपने बात करी
26:36डोंट यू थिंक चाइना का सबसे बड़ा एडवांटेज
26:39ये था कि उन्होंने भी इंपोर्ट्स बंद रखे
26:43बिकॉज़ उन्होंने दूसरी कंट्रीज की दूसरी
26:46कंपनीज़ को आने नहीं दिया दूसरे लोगों को
26:49चाइना में इतने फ्रीली काम नहीं करने
26:50दिया। इसी की वजह से चाइनीस एंटरप्रेन्योर
26:52को एक एडवांटेज मिला कि चाइना की जो
26:54पॉपुलेशन है उन लोगों के लिए वो कॉपी
26:58प्रोडक्ट्स बना दें। भले वो चाहे अमेरिका
27:00से टेक्नोलॉजी उठाई या ऑस्ट्रेलिया से
27:02उठाए या किसी भी देश से उठाए वो
27:04टेक्नोलॉजी उठाएं वैसी टाइप की कंपनी
27:05समझे। उन वो उठाएं रिवर्स इंजीनियर करें।
27:07अपनी कंट्री में डाल दें। और क्योंकि
27:10अमेरिकन कंपनी का इतना बड़ा एडवांटेज नहीं
27:11है चाइना में चलने का। चाइनीस के पास वो
27:13एडवांटेज है। एंड उन्होंने वो एक तरीके से
27:15एक लेयर बना के रखा। एंड फिर वो चाइनीस
27:17एंटरप्रेन्योर थ्राइव करा लोकल कंसमशन पे
27:19बड़ा जब वो बड़ा बन गया वो पूरी दुनिया में
27:21बेच रहा है सस्ते में
27:23देखिए दैट वास देर स्ट्रेटजी तो अगर ये
27:25इंडिया भी स्ट्रेटजी अपनाने की कोशिश कर
27:26रहा है सो इट्स गुड ना
27:28इसमें ये पूरा सत्य नहीं है अ मैं चाइना
27:32की का कोई अपोलॉजिस्ट नहीं हूं मैं आई एम
27:36आई एम नॉट अ स्पीकर फॉर चाइना
27:38हां क्योंकि हम कंपेयर कर रहे थे
27:40हमें फैक्ट फैक्ट पे रहना चाहिए
27:43चाइनीस हम तो सोशलिस्ट तरीके से गए थे
27:46जिसमें फिर भी दुनिया के साथ हमारा रिश्ता
27:48ओपन था।
27:49हम
27:49चाइनीस तो कम्युनिस्ट तरीके से चले गए
27:52और उन्होंने तो बिल्कुल ही दुनिया के साथ
27:55अपने आप को खड़ा कर दिया।
27:57रिजल्ट क्या हुआ? रिजल्ट ये हुआ कि 7578
28:02में चाइना वाज़ इन अ वेरी वेरी बैड स्टेज।
28:05ट्रू
28:06राइट? वर्स देन एनीवेयर एल्स। हिंदुस्तान
28:09की जीडीपी 78 में थोड़ी सी चाइना से
28:12ज्यादा थी। राइट? और चाइना लर्न थ्रू वेरी
28:18बैड। और इस पूरे 40-50 साल के पीरियड में
28:21चाइना ने अपनी एंटरप्रेन्योरशिप
28:25डिस्ट्रॉय कर दी। चाइना ने अपनी कैपिटल
28:27डिस्ट्रॉय कर दी। चाइना के पास जीरो
28:29टेक्नोलॉजी थी। लिटरली कुछ मिलिट्री साइड
28:33को छोड़ के सारी चीजों में जीरो
28:34टेक्नोलॉजी दे नथिंग। राइट? सो उस स्थिति
28:39में अगर 78 में जहां हम थे अगर हम ओपननेस
28:43वाला रास्ता स्मार्टली अपनाते और जो चाइना
28:46ने अपनाया वो बिल्कुल अलग तो जिस देश के
28:49पास ना कैपिटल हो ना एंटरप्रेन्योरशिप हो
28:51ना टेक्नोलॉजी हो उसने क्या किया उसने ये
28:55किया कि जिसके पास टेक्नोलॉजी है उसको
28:57बुला के लाओ तो जो दुनिया के जो ऐसी जेट्स
29:00हैं जिनको आज हम भी बनाने जो स्पेशल
29:04इकोनमिक ज़ों्स चाइना में पहला 78 79 में
29:07शुरू हुआ और उन्होंने क्या किया? उन्होंने
29:10ये कहा कि दुनिया का जो भी एंटरप्रेन्योर
29:12जो भी कंपनी यहां पे आके इन्वेस्ट करेगी
29:14तो उसका स्वागत है। उसको जमीन भी सस्ती
29:17मिलेगी। उसको ये भी सस्ता मिलेगा। और सबसे
29:19ऊपर हमारे पास जबरदस्त संख्या में चीप
29:22लेबर है।
29:23हम
29:24वो चीप लेबर भी आपको मिलेगा। तो चाहे
29:26अमेरिकन कंपनीज़ हो, चाहे दूसरी और देशों
29:29की कंपनीज़ हो, उन लोगों को क्या लगा? उनको
29:31ये लगा कि अगर आप एक ही चीज
29:34हम
29:35जो अमेरिका में बनाएं और उसको अगर आप $
29:38में बना सकते हैं वही चीज उसी स्टैंडर्ड
29:41की चाइना में अगर आप 10 या $15 में बना
29:44सकते हैं तो मजा ही मजा है। फायदा ही
29:47फायदा है।
29:47तो उन्होंने वहां सारी फैक्ट्री लगा दी।
29:50राइट? ये इसलिए नहीं गए थे कि चाइनीस ने
29:52रिवर्स इंजीनियरिंग करके वो तो शुरू में
29:56दी चाइनीस गॉट दी लॉट ऑफ़ इन्वेस्टमेंट
29:59फ्रॉम ऑल ओवर द वर्ल्ड। राइट एंड ऑलमोस्ट
30:03एव्री चाइना को डब्ल्यूटीओ में शामिल
30:05कराया अमेरिका ने उससे पहले तो डब्ल्यूटीओ
30:08में भी नहीं था चाइना सो चाइना को मार
30:13चाइना का प्रोडक्शन दिया चाइना को मार्केट
30:15दिया कि आप एक्सपोर्ट करिए राइट एप्पल ले
30:18लीजिए कोई सी भी आप दुनिया की टेक्नोलॉजी
30:22सबका प्रोडक्शन वहां पे चाइना में होता है
30:24तो हम ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं
30:25तो हम
30:27आज
30:27ये सवाल ये सवाल आज हमने कब छोटे हम भी
30:31छोटे-छोटे स्तर पर शुरू कर रहे हैं। हमने
30:32भी एप्पल को बुलाया यहां पे। राइट? तो
30:35एप्पल को बुला के हमने क्या कहा? हमने
30:37एप्पल को बुला के ये कहा कि भ अच्छा
30:39तुम्हें जो भी प्रॉफिट आप कमाते हो ताइवान
30:42में या चाइना में अगर उतना प्रॉफिट में
30:45अगर आप यहां नहीं कमा पाते हमारी कॉस्ट और
30:47इसके कारण से तो हम आपको डिफरेंस दे
30:49देंगे। स्मार्ट
30:50हम
30:51तो चाह गया तो
30:52बट वही चीज हम ईवी में या सोलर में और
30:57वेस्ट वाली कंपनी को नहीं दे सकते। बिकॉज़
30:59उनके पास वो नहीं है। वो चाइनीस कंपनी को
31:02हम देने के लिए तैयार नहीं है।
31:04हम
31:04हम तो चाइनीस कंपनी को रोकते हैं। बीवाईडी
31:06को नहीं आने देते। सो टेस्ला ने ये कहा कि
31:09भाई हम आएंगे लेकिन हमें पहले तो इंपोर्ट
31:12करने दीजिए।
31:13इंपोर्ट करके बेचेंगे। मार्केट मार्केट
31:14बनाएं थोड़ा ये करें वो करें और फिर कुछ
31:17कंसेशंस मांगे। हम
31:19क्योंकि यहां पे बनाए उसकी उसके मुकाबले
31:23उनको दूसरी जगह से प्रॉफिट ज्यादा होता है
31:26या नहीं होता कोई भी देखिए नोबडी इस इन
31:28चैरिटी कोई चैरिटी करने के लिए दुनिया में
31:30नहीं बैठा बिनेस में बिनेस का वर्ल्ड अलग
31:32है
31:32हम
31:33राइट इसमें मोरालिटी चैरिटी इन चीजों का
31:36मतलब नहीं है इट्स अ हार्ड मार्केट कि
31:39इसमें मुझे यहां प्रोडक्शन करने में फायदा
31:41है या नहीं है
31:42हम
31:42राइट वो तब आता है तो अभी तक टेस्ला को
31:45मुझे लगता है उनको फायदा नजर नहीं आता
31:47इसलिए नहीं आया
31:47बट व्हाई आर वी नॉट डूइंग दिस विथ लेट्स
31:49से एन अमेरिकन कंपनी और सम अदर कंट्रीज
31:52कंपनी
31:52करेक्ट सो इफ यू हैव एन अल्टरनेटिव
31:55हम
31:56अगर आपके पास अल्टरनेटिव है तो अल्टरनेटिव
31:59के पास चले जाइए वीवाईडी नहीं चाहिए Tesla
32:02के पास चले जाइए Tesla को ले आइए
32:04तो हम क्यों नहीं कर रहे वो
32:05Apple को ले आए Tesla क्यों नहीं आए?
32:08दैट्स व्हाट आई एम आस्किंग।
32:09सो Apple
32:12मैंने कहा आपको कि Apple इज़ इन द बिज़नेस
32:17ऑफ़ प्रोड्यूसिंग। हम
32:18राइट
32:19iphonस आईपड्स उसका ये बिनेस है
32:22हम
32:22वो अपने बिनेस को बढ़ाना चाहेगा
32:24हम
32:25ये तो इट्स वै सिंपल इकोनमिक लॉजिक है
32:29राइट
32:30और वो
32:32वहां प्रोड्यूस करने के लिए भी उसको कोई
32:34यूज़र नहीं होनी चाहिए जहां उसको प्रॉफिट
32:36ज्यादा मिलता है। हम्।
32:38ठीक है? तो, हमने वह फ़िगर आउट कर दिया कि
32:41Apple का मामले में यह स्थिति चाहे पीएलआई
32:45के माध्यम से या अदरवाइज से जितना अभी
32:49स्टेट्स ने इन्वेस्टमेंट किए,
32:52लेबर कॉल
32:55हाउसेस बनाने में इनमें भी इस तरह की
32:57चीजों को करके Apple का मामला सुलट गया।
33:00अब एग्जजेक्टली
33:02टेस्ला के साथ क्या प्रॉब्लम है? क्यों
33:06टेस्ला नहीं आता? क्यों वो बारगेन फिट
33:10नहीं हो रहा वो मुझे नहीं मालूम है। बट यह
33:13मुझे मालूम है कि वो बारगेन नहीं बन पा
33:16रहा है।
33:18अब ये जो देश के जो प्लानर्स हैं जो देश
33:21के इंडस्ट्रियलिस्ट हैं वो
33:25उसको फिगर आउट करना। ये अगर आप बीवाईडी
33:29नहीं चाहते और टेस्ला ही चाहते हैं तो
33:31Tesla के साथ फिगर आउट करना पड़ेगा। अगर
33:34आपको ये लगता है कि टेस्ला ऐसे टर्म्स
33:37मांग रहा है जिससे आप जिसे आप नहीं दे
33:41सकते या जिसमें आपका बहुत ज्यादा खर्चा
33:43होगा
33:44और उसको ना आने से आप ज्यादा फायदे की
33:47स्थिति में है तो फिर आप नहीं करेंगे।
33:50सो आई वुड अस्यूम कि अभी स्थिति ये होगी
33:53कि देश के जो प्लानर्स हैं पॉलिसी मेकर्स
33:56हैं उनको ये लग रहा हो कि भाई टेस्ला जो
34:00मांग रहा है वो अनरीजबल नहीं दे सकते।
Attracting companies to grow our economy
34:02फेयर बट ऐसी और भी बहुत सारी कंपनीज़ होगी
34:04ना जिनको हम ला सकते हैं, इधर काम करवा
34:07सकते हैं। फॉर एग्जांपल अगर आप देखो कि
34:11इंडिया का एंड फॉरगेट इंडिया टॉप फाइव
34:13इकॉनमीज़ का वन ऑफ़ द लार्जेस्ट एक्सपेंसेस
34:15इज़ डिफेंस।
34:16हम
34:16राइट? अब हमारे पास अगर लेबर आबिट्राज हम
34:18लोग बहुत ज्यादा बना सकते हैं। तो व्हाई
34:20नॉट वी स्टार्ट मैन्युफैक्चरिंग वेपन्स
34:22हियर। व्हाई नॉट वी स्टार्ट
34:23मैन्युफैक्चरिंग डिफेंस मैकेन डिफेंस की
34:26सारी जो चीजें हैं वो हम इधर मैन्युफैक्चर
34:28करना स्टार्ट कर दें। वो टेक्नोलॉजी जो
34:29अमेरिका के पास है वो लेके इधर स्टार्ट
34:31करें। वर्ल्ड वाइड सेमीकंडक्टर्स व्हिच इज़
34:33अ फ्यूचर उसमें उसमें हम दूसरों से
34:36टेक्नोलॉजी ले और यहां पे कुछ स्टार्ट
34:38करें। लाइक व्हाई आर वी नॉट एबल टू
34:40अट्रैक्ट पीपल फ्रॉम द वर्ल्ड टू स्टार्ट
34:43डूइंग थिंग्स हियर।
34:44तो देखिए इन ये जो दो चीजों के उदाहरण
34:46आपने दिए ना
34:48जस्ट गिविंग एन एग्जांपल।
34:49नो
34:50कि जहां पे सबसे ज्यादा खर्चा होता है और
34:51जहां ज्यादा फ्यूचर दिख रहा है। दोनों के
34:52एग्जांपल दिए एक-ए में।
34:53बिल्कुल सही है। दीज़ आर वेरीेंट
34:55एग्जांपल्स। फ्यूचर इकॉनमी में
34:57सेमीकंडक्टर्स का बहुत बड़ा
34:59रोल रोल होने वाला है। हम इतना इंपोर्ट
35:01करते हैं
35:02इलेक्ट्रॉनिक्स का बेसिकली चिप्स का इतना
35:05इंपोर्ट करते हैं।
35:07राइट? तो वो हमारे लिएेंट है। इसी तरह से
35:09डिफेंस में हम भी बहुत भी इंपोर्ट करते
35:11हैं। डिफेंस का हमारा खर्चा भी ज्यादा है।
35:13हम बना लें। राइट?
35:16तो इन दोनों दोनों इंडस्ट्री में
35:23यह भी जो मैं आपको पहले सेल्स के लिए और
35:26उसके लिए कह रहा था। सो इसमें भी
35:28टेक्नोलॉजी का बहुत जबरदस्त इशू है।
35:32आप की जो डिफेंस टेक्नोलॉजी है बहुत सारी
35:36चीजें और अच्छा डिफेंस में तो और ज्यादा
35:39है बिकॉज़ ज्यादातर प्रोपराइटरी होती है।
35:41हम
35:41दीज़ आर नॉट कमर्शियल बिनेसेस राइट? डिफेंस
35:46स्ट्रेटेजिक है, सेंसिटिव है तो दुनिया
35:50में सरकार एंड डिफेंस टेक्नोलॉजी को
35:54ट्रांसफर करने में बहुत ज्यादा
35:56रिस्ट्रिक्शन लगती है। ठीक है?
35:58इट्स इट्स नॉट दैट इजी।
36:00सो इसमें डिफेंस में अगेन आपके लिए ये
36:04आसान नहीं है।
36:05हम
36:05कि आप कुछ भी प्रोड्यूस कर लो यहां। हम
36:08आप अगर मिसाइल्स हैं, आप एयरक्राफ्ट्स
36:11हैं, आप आपके हम Jaguar खरीदते हैं, आप ये
36:14रफाल खरीदते हैं। ये टेक्नोलॉजी हमारे पास
36:17है कि हम हेलीकॉप्टर बनाने लगे ध्रुव वो
36:21बनाया हमने काफी सालों की मेहनत के बाद।
36:24अभी फिर गिरगिराया तो फिर सारा का सारा
36:26ग्राउंडेड कर दिया। सो ये टेक्नोलॉजी भी
36:29बहुत हाई टेक्नोलॉजी है। आपके पास है
36:31क्या? सेमीकंडक्टर की टेक्नोलॉजी तो उससे
36:34भी ज्यादा गहरी गहरी टेक्नोलॉजी
36:38आप उसको सो अल्टीमेटली
36:42दिस टेक्नोलॉजिकल
36:44इशू जो है वो बहुत इंपॉर्टेंट है
36:47और दूसरा जो अनफॉर्चूनेट है जिसको हम ठीक
36:50कर सकते थे
36:51हम
36:52वो हमारी जो स्किल लेबर का एक हम हम बहुत
36:56बड़ा पॉपुलस कंट्री है
36:58बहुत सारे लोग हैं हमारा फाइनेंसियल में
37:00सर्विज में हमारा टैलेंट भी बहुत ज्यादा
37:03है। लेकिन हमारा
37:06जो लेबर इस टेक्नोलॉजी एक इसमें आप ज्यादा
37:10ब्लेम भी नहीं कर सकते क्योंकि टेक्नोलॉजी
37:14तो कोई इवॉल्व करेगा तभी तो लोग स्किल्ड
37:16होंगे उसमें जब वो टेक्नोलॉजी नहीं हो तो
37:18स्किल्ड भी कैसे होंगे? ट्रू
37:20तो हमारे पास ना इसकी स्किल है उन चीजों
37:23की ना टेक्नोलॉजी है तो आप रूटीन डिफेंस
37:27या जो आपने इवॉल्व कर लिया थोड़ा सा
37:29ब्रह्मोसिया ये उसको आप बना लीजिए उसके
37:32लिए बनने लग रही है सरकार कर रही है काफी
37:34हमारा डिफेंस का उत्पादन जो डोमेस्टिक है
37:36वो भी बढ़ने लगा है हम कुछ एक्सपोर्ट भी
37:39कर रहे हैं डिफेंस का बट वो उन्हीं आइटम
37:41का कर रहे हैं जिसकी जो हमारे पास बहुत
37:44सारी टेक्नोलॉजी नहीं है।
37:45डू यू थिंक कि हम बाहर की कंपनीज़ को
37:46अट्रैक्ट नहीं कर पाते हैं। इसका एक बहुत
37:49बड़ा रीजन है कि इंडिया में ई ऑफ डूइंग
37:52बिजनेस नहीं है। मैं पडकास्ट पे ही मॉर्गन
37:56स्टैनली के एक चीफ एग्जीक्यूटिव से बात कर
37:58रहा था।
37:58राइट?
37:58एंड मैंने उनसे पूछा कि इंडिया के चर्चे
38:02चल रहे हैं अराउंड द वर्ल्ड। हर कोई बोल
38:05रहा है चाइना प्लस वन इज अ स्ट्रेटजी
38:07व्हिच इज़ वर्किंग फॉर इंडिया। इंडिया रे
38:11डैलियो जो एक बहुत बड़ा है फंड मैनेज करते
38:13हैं। बिलिनेयर हैं। राइट? वो बोलते हैं कि
38:16नेक्स्ट डेकेड इज ऑफ इंडियास डेकेड। राइट?
38:18मतलब उससे इंडिया से ज्यादा बड़ी गोल्डन
38:20अपॉर्चुनिटी किसी के पास है नहीं। 6.5 से
38:237% के आसपास वो प्रेडिक्ट करते हैं कि
38:24इंडिया बढ़ेगा। एंड अराउंड द वर्ल्ड उनका
38:27बोलना है कि ये बढ़ेगा। सब लोग यही बातें
38:30कर रहे हैं। जेपी मॉ्गन बात करता है।
38:31मॉर्गन स्टैनली बात करता है। जितने आप
38:33बड़े-बड़े नाम सुनते हो सब बोल रहे हैं।
38:34राइट?
38:35तो जब इतना सेंटीमेंट है पॉजिटिव एंड यह
38:38आपका एक इमेज बनी हुई है देन आपके फॉरेन
38:42इन्वेस्टमेंट्स बहुत तेजी से बढ़ते क्यों
38:44नहीं है? सो आई हैज़ दिस क्वेश्चन एंड दे
38:47सेड कि ऑन अ बिजनेस लेवल किसी भी बड़े
38:50बिजनेस को इन्वेस्ट नहीं करना इंडिया में
38:52क्योंकि उनको डर लगता है पॉलिसीज से,
38:55ब्यूरोक्रेसी से, पॉलिटिक्स से, ई ऑफ
38:58डूइंग बिजनेस से और उन्हें लगता है कि जो
39:00प्रॉमिस होगा इधर इंडिया में वो कल चेंज
39:03हो जाएगा। इस बात का उनको डर है कि
39:05इन्होंने तो बोला कि यार ऐसा-ऐसा आपको
39:07करके देंगे। कल पता नहीं किसी लेबर की
39:10स्ट्राइक हो गई। कल पता नहीं किसी
39:12डिपार्टमेंट्स नोटिस आ गया। वो सब बहुत
39:14नाटक है। इसकी वजह से हमें थोड़ा डर लगता
39:16है कि लोकल इकॉनमी में चल क्या रहा है। हम
39:18नहीं एंटरटेन करेंगे। डू यू फील दैट्स अ
39:20बिग इशू?
39:22सो देखिए
39:23इसकी वजह से हम अट्रैक्ट नहीं कर पाते
39:24लोगों का पैसा?
39:25जो अभी तुमने डिस्क्राइब किया उसमें सवाल
39:29भी है और जवाब भी है काफी हद तक। ठीक है?
39:32और जिसको कहते हैं ना प्रूफ ऑफ ईटिंग
39:36पुटिंग इज इन ईटिंग राइट तो जो ये लोग
39:38बातें करते हैं कि इंडिया का डिकेड है
39:42इंडिया की सेंचुरी है ये है वो है बहुत
39:46बढ़िया तो वो वही आपको कहते हैं कि हम
39:50पैसे तो नहीं लाएंगे हम इन्वेस्टमेंट तो
39:52नहीं करेंगे क्यों फिर एक्सक्यूज दे देते
39:54हैं कि आप जो जो कह रहे थे कि भाई ये लेबर
39:58की स्ट्राइक है रेट्रोस्पेक्टिव टैक्सेशन
40:00है पॉलिसी अनसर्टेन है फलाना है डिकड़ा है
40:03राइट इन सब चीजों के कारण से हम
40:05इन्वेस्टमेंट नहीं करेंगे तो आपको क्या
40:08लगता है कि वो जो पहली भूमिका बनाते हैं
40:12वो ज्यादा सही है या दूसरी जो एक्सक्यूज
40:15देते हैं वो ज्यादा सही है या सत्य इन
40:17दोनों के बीच में गई है
40:20आप बताओ कहां पर है आपको क्या लगता है
40:23तो मुझे जो लगता है देखिए मेरा अपना
40:26असेसमेंट ये है कि ये ज्यादा हवा है क्या
40:31किए इंडिया का डेकेड है।
40:32हां ये अभी इतनी देर अभी तक आपसे बात करते
40:36रहे। अगर आप चार तीन या चार बड़ी
40:39इंडस्ट्री ले लो जो फ्यूचर की है।
40:40इलेक्ट्रॉनिक्स हो, सेमीकंडक्टर्स हो,
40:43सोलर हो ये हो ये टेक्नोलॉजी हमारे पास है
40:47क्या? तो अगर नहीं है तो फिर हमारा डिकेड
40:50कैसे होगा?
40:52जो चीज जो ड्राइव कर रही है ग्लोबल ग्रोथ
40:55को वह हमारे पास नहीं है तो हम आगे दूसरों
40:59के मुकाबले ज्यादा कैसे बढ़ेंगे?
41:02सो
41:05हमें हकीकत में रहना चाहिए। पैर हमारे
41:08जमीन पे रहने चाहिए। किसी दूसरे की बात पे
41:13ज्यादा हमें
41:15केवल बात ही बात को मान के नहीं करना।
41:18दूसरा
41:20एप्पल तो आ जाए आया है।
41:22एप्पल तो आ गया है। उसके लिए ई ऑफ डूइंग
41:26बिनेस की प्रॉब्लम नहीं है क्या? उसने तो
41:28इन्वेस्टमेंट कर दिया। ठीक है? और बढ़ा बढ़ा
41:31रहा है। अब दे 13 14% ये जो आप कह रहे थे
41:35चाइना प्लस वन मतलब दे इज़
41:39डिसकंफर्ट अमेरिकनंस में दूसरों में कि
41:42भाई चाइना में बहुत ज्यादा डिपेंडेंस हो
41:43गई है। इसको कम करना चाहिए। इसलिए कम से
41:48कम पूरी तरह से नहीं हटा सकते तो कहीं एक
41:50दूसरे और देश में तो ले जाओ अपना
41:52प्रोडक्शन। राइट?
41:54उस प्रोडक्शन को ले जाने के लिए
41:56हिंदुस्तान के पास काफी अपॉर्चुनिटी थी।
41:59राइट? लेकिन हिंदुस्तान के मुकाबले
42:01अपॉर्चुनिटी कौन ज्यादा यूज़ कर रहा है?
42:03वियतनाम ज्यादा यूज़ कर रहा है। कोरिया
42:05ज्यादा यूज़ कर रहा है। हिंदुस्तान तो उतना
42:08यूज़ नहीं कर पा रहा है। क्यों?
42:11सो तीन कारण मेरी जो समझ एक तो हम
42:19टेक्नोलॉजिकली उतने एडवांस नहीं है। दूसरी
42:21हमारी
42:23डिसिप्लिंड और स्किल्ड लेबर नहीं है।
42:25तीसरा हम
42:26अ ऐसी कंडीशंस पॉलिसी वगैरह जो आप भी कह
42:30रहे थे वो उसके बारे में लोगों को विश्वास
42:33नहीं है। और फाइनली
42:37एक्चुअली हम उतने कॉस्ट कॉम्पिटेटिव नहीं
42:40है। अगर आप सारी चीजों को एक साथ में
42:43हमारे यहां की लेबर कॉस्ट, इंटरेस्ट
42:45कॉस्ट, लैंड कॉस्ट, काम करने की कॉस्ट,
42:49टैक्सेस ये सब चीजों को देखते हैं। तो उसी
42:52से जो Apple को आप 6% दे रहे हैं। आप 6%
42:55क्यों दे रहे हैं? 4 5% 6% जो दे रहे हैं
42:58वो क्योंकि इतनी हमारी फाइनशियली हम नॉन
43:02कॉम्पिटिटिव थे। राइट। सो ये सारे
43:05फैक्टर्स मिलके
43:08एक्चुअली तय करते हैं कि फॉरेन
43:10इन्वेस्टमेंट देश में आएगा। देखिए एक और
43:13चीज है केवल हम फॉरेन इन्वेस्टमेंट भी
43:15बहुत ओवर एफेसाइज हमें नहीं करना चाहिए।
43:20हमारा
43:21रियल स्ट्रेंथ होनी चाहिए। हमारा
43:23डोमेस्टिक एंटरप्रेन्योर हमारी डोमेस्टिक
43:25इंडस्ट्री। हमारी डोमेस्टिक इंडस्ट्री कमट
43:28कर रही है या नहीं कर रही? डोमेस्टिक
43:30इंडस्ट्री ओपन है या नहीं? वो कितना एक-एक
43:35चीज में आप जा के अगर देखें अब टाटा ने अब
43:39शुरू कर दिया कि भाई ये सेमीकंडक्टर्स
43:42बनाने देश में शुरू कर दिए राइट तो अब
43:46बनने शुरू भी हो जाएंगे और दूसरों के साथ
43:48पार्टनरशिप करेंगे कुछ लेके आएंगे
43:50टेक्नोलॉजी धीरे-धीरे करेंगे
43:52राइट सो हमारे देश में जो और
43:57इंडस्ट्रियलिस्ट हैं वो इस चीज में
44:00इन्वेस्ट करके चाहे डिफेंस हो चाहे चाहे
44:02सेमीकंडक्टर्स हो, चाहे इसमें हो वो कर
44:05पाए। उसके लिए उनको जो एक सबसे बड़ी
44:08फ्रीडम जो मुझे लगता है वो चाहिए वो ये है
44:11कि वो दुनिया के जो टेक्नोलॉजिकल लीडर्स
44:14हैं उनके साथ फ्रीली कोलबोरेशन करके और
44:18देश में प्रोडक्शन का काम करें। वो नहीं
44:22कर पाते हैं फॉर वेरियस रीज़ंस।
44:26तो जब रियलिटी नहीं है तो क्यों बात कर
44:28रहे हैं सब लोग? कुछ तो होगा। ग्रोथ में
44:30हमने 10 ट्रिलियन 5 ट्रिलियन इसकी हवा
44:33बनाई। राइट? बट हमारी एक्चुअल ग्रोथ क्या
44:35हो रही थी? हमारी एक्चुअल ग्रोथ तो काफी
44:38कम है रिलेटिवली। हम क्यों ऐसा करते हैं?
44:40फिर भी
44:41कितनी हमारी रियल ग्रोथ आज क्या है?
Our real growth over 10 years
44:43देखिए रियल ग्रोथ अगर आप लेते हैं तो
44:47जो जो सेकंड टर्म था जिसके बारे में किताब
44:50लास्ट 10 सालों में बात करते हैं हम लोग।
44:52लास्ट 10 सालों में अगर डॉलर टर्म्स में
44:54ग्रोथ लेते हैं तो छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 छ
44:556 छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 छ
44:556 छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 छ 6 6% है
44:57इजंट दैट गुड दैट्स नॉट गुड।
45:00व्हाई?
45:02स्टिल दिस इज बेटर देन रिलेटिवली ऑल द अदर
45:04कंट्रीज इन द इन द वर्ल्ड राइट नाउ।
45:06वो भी सत्य नहीं है।
45:08क्यों?
45:09अगर आप देखिए जब जब आप डॉलर में ग्रोथ
45:12कंपैरिजन करें तो दूसरों की भी डॉलर में
45:14ही ग्रोथ कंपैरिजन करनी चाहिए। हम
45:16आपको
45:18आश्चर्य होगा कि अमेरिका की
45:22जो ग्रोथ हम
45:25काउंट करते हैं वो अमेरिका की रियल ग्रोथ
45:27काउंट करते हैं।
45:28हम
45:29और हम अपनी जो ग्रोथ काउंट करते हैं डॉलर
45:32में जो अमेरिका का डेप्रिशिएट डॉलर है
45:33उसमें काउंट करते हैं। तो अमेरिका में जो
45:36इनफ्लेशन है उसको लेके एक्चुअली अमेरिकन
45:39डॉलर में उनकी ग्रोथ तो इतनी हो रही है।
45:41मैंने एक लिखा है इस पे एक पीस कि अगर
45:432019 के बाद तीन चार साल का देखा जाए
45:46हम
45:47तो तीनचार साल में हम अगर 6.5% ग्रो किए
45:51डॉलर में तो अमेरिका भी 6.5% से ग्रो हुआ
45:54है। जबकि दुनिया में ये है कि 2 2.5% ही
45:56ग्रो करता है अमेरिका।
45:57हम
45:58उसका तीन- 4% इनफ्लेशन में हुआ इस दौरान।
46:01तो जो नॉमिनल डॉलर है अमेरिका का उसमें तो
46:04उसकी ग्रोथ भी 6.5%
46:06तीन साल में चार साल में अमेरिका ने एक
46:09हिंदुस्तान ऐड कर दिया जीडीपी चाइना में
46:12भी इसी इसी तरह से चाइना की तो रियल ग्रोथ
46:15भी ज्यादा रही रिलेटिवली और उनका डॉलर के
46:19मुकाबले डेप्रिसिएशन कम हुआ तो उनकी ग्रोथ
46:21भी हमसे कम नहीं है। एक ही चीज कंपैरिजन
46:24करिएगा जिससे तो आपको चीजें रिलेटिवली
46:27क्लियर हो जाएंगी
46:29कि जो डॉलर ग्रोथ है
46:31हम
46:33डॉलर ग्रोथ रिलेटिवली क्या है
46:36ओके
46:36देशों की
46:38तीन तीन तरह के ग्रोथ मेजर्स होते हैं
3 growth measurement metrics
46:40रियल ग्रोथ नॉमिनल ग्रोथ और डॉलर ग्रोथ
46:44सबसे इंपॉर्टेंट कौन सी होती है तीनों में
46:46से
46:46सभी इंपॉर्टेंट है
46:48क्योंकि तीनों के अलग-अलग बेंचमार्क को आप
46:50डॉलर ग्रोथ में आप दुनिया से कंपैरिजन
46:53करते हैं। रियल ग्रोथ में आप ये कंपैरिजन
46:55करते हैं कि आपकी लोकल करेंसी में आपकी
46:58ग्रोथ दुनिया के मुकाबले कैसे चल रही है।
47:00आपकी रियल करेंसी। ठीक है?
47:02और नॉमिनल में आपकी इनफ्लेशन के साथ में
47:05वो रिलेटिवली कमेंट होती है। बट वो रिलेट
47:08होती है डॉलर की ग्रोथ के साथ। अदरवाइज हम
47:11बात मैंने आपसे आपसे कहा कि 40ज में हम
47:15कहां शुरू हुए?
47:16एक-एक करके सारे निकलते गए। हम पिछड़
47:18क्यों गए?
47:22क्यों
47:22हम इसी इसलिए हम
47:25रियल जिंदगी में नहीं जी रहे
47:29हम अपनी रियल प्रॉब्लम्स को सॉल्व नहीं कर
47:31रहे
47:33हमारे लिए जो काम करता है करे करेगा उस
47:36चीज को नहीं कर रहे
47:41इट्स गुड टू बी बुलिश
47:43हम
47:44इट्स ऑलवेज गुड टू बी स्टॉक मार्केट के
47:46अलावा स्टॉक मार्केट में बुलिश करने के
47:48दूसरे कारण है यूएस पांच 5 साल की डॉलर
47:51ग्रोथ अगर इंडिया के बराबर है व्हिच इज अ
47:53मैच्योर इकॉनमी चाइना जो अब पपुलेशन में
47:57भी ग्रो कर नहीं रहा उसकी भी आपके बराबर
47:59है तो आप कहां है फास्टेस्ट
Whar is real GDP growth?
48:03तो फिर ये सारे डाटा वो कौन सी ग्रोथ आती
48:06है कौन से नंबर्स आते हैं जहां पर हमारे
48:08नंबर ज्यादा दिखते हैं बाकी सबके कम दिखते
48:10हैं
48:10वो है रियल जीडीपी ग्रोथ
48:13एंड वो क्या होता है
48:14जो रियल जीडीपी ग्रोथ आपकी करेंसी में आप
48:17कितना
48:19ग्रो ग्रो कर रहे हैं ऑन ए कास्टेंट
48:21प्राइस। एक आप बेंचमार्क ले लेते हैं किसी
48:24भी साल का। जैसे अभी हम हमारे देश में
48:262011-12 की प्राइस पे लेते हैं। तो 2011
48:30की प्राइस पे अगर हम कितना ग्रो कर रहे
48:32हैं वो अभी हम पिछले
48:35चार सालों पांच सालों में तो 4.5% बट अगर
48:38आप कोविड का पीरियड दो हटा दें तो हम 7
48:41सवा5% पे ग्रो किए। 20 21 से 2024 के बीच
48:46में 7 सवा5% उस दौरान चाइना 5% पे ग्रो
48:50किया अमेरिका 2ाई 3% पे ग्रो किया वहां हम
48:54सबसे ज्यादा हैं इनहीं इन्हीं चीज में
48:56तो फिर वो वही बेंचमार्क लेके लोग बुलिश
Difference between dollar growth and real growth
48:59होंगे ना इंडिया पे
49:01व्हाट इज अ डिफरेंस बिटवीन अ डॉलर ग्रोथ
49:03और रियल ग्रोथ
49:05सिंपल चीज ये है कि एक चीज में एक ही
49:08पैमाने पे अगर आप मेजर करें
49:10हम
49:11तो वो आपका कंपैरबल होगा। अलग-अलग पैमानों
49:15पे कंपैरिजन करें तो वह कंपैरिबल नहीं
49:17होगा।
49:18ओके?
49:18राइट? डॉलर अगर एक सिंगल करेंसी हम दुनिया
49:22की मान के चलते हैं और डॉलर में ग्रोथ
49:24कंपैरिजन करें तो वह सही कंपैरिजन है। और
49:28अगर आप कोई किसी की रुपए की ग्रोथ
49:30कंपैरिजन कर रहे हैं, किसी की युवान की
49:32ग्रोथ कंपैरिजन कर रहे हैं, किसी की रियल
49:35डॉलर की ग्रोथ कंपैरिजन कर रहे हैं तो वो
49:37फिर अलग-अलग बेंचमार्क है।
49:39तो आपके ख्याल से जो अलग-अलग है वो गलत
49:41तरीका है करने का। गलत सही कुछ नहीं है।
49:44वो भी सही है। बट उससे जो आप कंपैरेटिव जब
49:48भी नैरेटिव बनाते हैं कि भ दुनिया में कौन
49:51ज्यादा ग्रो कर रहा है। उसके लिए वो एक
49:53नैरेटिव होना चाहिए जिसमें हम एक ही तरह
49:55से सभी को एप्पल्स को एप्पल से कंपैरिजन
49:58करें ना कि ऑरेंजेस। पोटेंशियल अपने आप
Potential but slow growth
50:01सबसे ज्यादा है। पर पोटेंशियल होने के बाद
50:04भी हम और तेजी से ग्रो नहीं कर पा रहे
50:07हैं। आई वुड से कि हमारी नेसेसिटी हमारी
50:10जरूरत सबसे ज्यादा है। क्योंकि हम गरीब
50:13हैं। हमारा देश अभी भी अगर पर कैपिटा के
50:17हिसाब से लेते हैं तो हम 140 में आते हैं
50:20दुनिया में 180 190 देशों में। राइट? और
50:23अल्टीमेटली जो शुरू में हम बात कर रहे थे
50:26इनकम अगर क्राइटेरिया है जिंदगी का कि
50:30गुडनेस का, जिंदगी, प्रोस्पेरिटी का तो
50:32इनकम अगर कम है तो हमारे देश के लोग कम
50:35कमजोर है, पुअर है। देश समृद्ध नहीं है।
50:38तो हमें अब आज आप $00 पे हैं। चाइना
50:4210,000 पे है। अमेरिका तो 708,000 पे है।
50:46तो एक 708,000 की इनकम वाले से अगर हम को
50:51जितनी ग्रोथ की जरूरत है उसके मुकाबले जो
50:54$00 पे डॉलर पे है उसको ज्यादा ग्रोथ की
50:57जरूरत है। राइट? तभी तो वो बराबरी पे
51:00आएगा। राइट? इसलिए ग्रोथ को
51:04जरूरत के हिसाब से, जस्टिफिकेशन के हिसाब
51:06से हिंदुस्तान की सबसे ज्यादा जरूरत
51:08पोटेंशियल का जहां तक सवाल है, पोटेंशियल
51:11में ह्यूमन रिसोर्स के हिसाब से देखें तो
51:14हमारा पोटेंशियल काफी है। बट
51:16टेक्नोलॉजिकली देखें तो हमारा पोटेंशियल
51:18काफी कम है। इसलिए हम पोटेंशियल उतना
51:22हमारा नहीं है। बट हम उस पोटेंशियल को ठीक
51:26कर सकते हैं बाय मेकिंग राइट काइंड ऑफ
51:29स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप्स इंपोर्ट अदर
51:31थिंग्स टेक्नोलॉजिकल कोलबोरेशंस एंड अदर
51:34थिंग्स लाइक चाइना डड और अदर कंट्रीज ड
51:37वियतनाम हैज़ कम अप इन लास्ट 2025 इयर्स
51:40अदर्स है कम अप अब दुनिया में से दुनिया
51:45के 40 45% से ज्यादा सेमीकंडक्टर्स ताइवान
51:48में बनते हैं।
51:49क्यों एक छोटा सा देश में दुनिया के इतने
51:52बड़े सेमीकंडक्टर्स का उत्पादन होता है?
51:55उन्होंने दे फिगर इट आउट राइटली। आप
51:58फिगरिंग आउट फिगर आउट करने के लिए बैठे
52:00हैं। दे फिगर इट आउट। लेट अस आल्सो फिगर
52:02आउट।
How to increase per capita income?
52:04ओके। लेट्स टॉक ऑन दिस कि अब पर कैपिटा
52:07इनकम कि हर इंसान जो एक एवरेज पैसे कमाता
52:10है जो उसकी इनकम है।
52:12देश को आगे बढ़ना है तो हर इंसान को पैसे
52:14ज्यादा कमाने होंगे।
52:15ज्यादा इनकम कैसे कमा सकता है इंसान? क्या
52:19करें हम जिसमें हमारी पर कैपिटा इनकम
52:21बढ़ेगी?
52:22देखिए थिंग्स दैट वी शुड डू। पर कैपिटा
52:25इनकम को दो दो दृष्टिकोण से हम देख सकते
52:27हैं। एक तो किसी एक इंडिविजुअल की इनकम और
52:31एक नेशनल इनकम। तो नेशनल पर कैपिटा इनकम
52:34वो जो एवरेज है।
52:35दोनों पे बात करते हैं।
52:36दोनों पे बात करेंगे। तो अगर दोनों पे आप
52:38बात करना चाहते हैं तो लेट अस टेक फर्स्ट
52:40इंडिविजुअल।
52:41हम
52:41राइट? इंडिविजुअल आपने फिगर आउट कर दिया
52:44बहुत अच्छी तरह से। किस तरह से लॉन्ग
52:47पडकास्ट्स को इंटरेस्टिंग बनाया जा सकता
52:51है।
52:51राइट? एंड यू हैव क्रिएटेड सच ए मैसिव
52:54बिज़नेस। उसी तरह से इंडिविजुअल्स को अपनी
52:58ब्रिलियंस, अपनी मेहनत, अपनी टेक्नोलॉजी,
53:01अपनी दिमाग, अपना इनोवेशन को इस्तेमाल
53:04करके जो भी वो काम करते हैं उस काम को
53:07उनको आगे बढ़ाना होगा। अगर वो इंडिविजुअल
53:11जो लेबर है लेबर को अगर उसकी उसको अपनी
53:14टेक्नोलॉजिकली टूल्स को बेटर करके उसको
53:17ज्यादा अर्न कर सकता है तो उसको उस तरह से
53:20उस तरह से अर्न करना होगा इंडस्ट्रियलिस्ट
53:22है तो उसको बेटर प्रोड्यूस पैदा करके चाहे
53:25ई-कॉमर्स हो किसी भी नई तरीके से आप
53:29ज्यादा उत्पादन करें उस और जो भी उत्पादन
53:31करें उसकी ज्यादा वैल्यू हो लोग उसको पसंद
53:34करें लोग उसको खरीदें सो दैट इज द वे द
53:36इंडिविजुअल कैन प्रोसेस
53:37गॉट इट अब इसको ब्रेक करते हैं करेक्ट।
opportunities where an individual can earn more money
53:40कैसे? कहां ओपोरर्चुनिटीज़ देखते हो जहां
53:42पे इंडिविजुअल पैसे कमा सकता है? ये ये
53:44मुश्किल सवाल है इन द सेंस कि
53:47अपॉर्चुनिटीज हर फील्ड में है। अब आजकल आप
53:53ये ये सारा बदलाव हो रहा है के सर्विसेस
54:00चाहे एंटरटेनमेंट स्पोर्ट्स
54:03दुनिया में लोगों के पास बहुत समय है।
54:06रिलेटिवली पैसा है। तो बहुत सारी चीजों को
54:09लोग देखना चाहते हैं, समझना चाहते हैं।
54:11एंटरटेन करना चाहते हैं अपना तो हम
54:15एंटरटेन करने के लिए उस तरह की सर्विज को
54:19उस तरह फॉर एग्जांपल लेट अस टेक स्पोर्ट्स
54:22राइट अब हमने आईपीएल क्रिएट किया तो
54:24आईपीएल से काफी
54:27देश में क्रिकेट में
54:30ग्रोथ हुई लोगों को लोगों की आमदनी भी
54:33बढ़ने लगी इसी तरह से क्या हम दूसरे
54:35स्पोर्ट्स में भी और वो चीज ला सकते हैं
54:38गेमिंग फॉर एग्जांपल बड़ी जबरदस्त
54:41अपोरर्चुनिटी दुनिया में पैदा हो रही है।
54:43क्या हम गेमिंग को ठीक से अब हमारी पॉलिसी
54:46फ्रेमवर्क गेमिंग के लिए ठीक नहीं है? तो
54:48रिलेटिवली हम गेमिंग का हमारा उतना विकास
54:52नहीं होगा। आप
54:55ये जीसीसी में हमारी इतनी ज्यादा ये
54:58ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स दुनिया भर के
55:01जो बड़े
55:02बड़ी कंपनियां हैं Fortunन 500 ये कंपनी है
55:06ये उनका अपना कैपेबिलिटी सेंटर देश में
55:09पैदा कर रही है बना रही है क्योंकि यहां
55:11पे हमारे लोग उसमें खूब काम तो देयर आर इन
55:14एव्री विच वे आप
55:18जो रेस्टोरेंट्स हैं वो रेस्टोरेंट्स बेटर
55:21प्रोडक्शन पैदा कर रहे हैं उनकी की
55:22डिलीवरी सर्विसेस तो हर चीज का कोई भी खेत
55:27खेतों में काम है खेतों को हम प्रोडक्शन
55:30इंप्रूव कर सकते हैं उनको बेटर प्रोसेस कर
55:33तो हजारों जगह अपोरर्चुनिटी
55:34अग्री वी आल्सो मेक पॉलिसी में बहुत सारे
Why should one read 'We Also Make Policy'?
55:36सवाल है मेरे
55:38क्यों ऐसे उस उस किताब में ऐसे क्या खास
55:40है आपने बोला कि पढ़नी चाहिए
55:41बिकॉज़ आईएएस ऑफिसर के जो दो रोल होते हैं
55:44मुख्य थे
55:46एक तो ये कि आप देश की पॉलिसीज
55:50प्रोग्राम्स इनको इंप्लीमेंट करो वो जो आप
55:52करियर आपके फील्ड में करते हैं।
55:55और दूसरा एक जो रोल होता है पॉलिसी मेकिंग
55:57में देश की मदद करो। हम
55:59राइट? सो पॉलिसी मेकिंग के जो सारे
56:02चैलेंजेस हैं जो क्रॉस करंट्स हैं, जो
56:05टकराव है, जो इंटरेस्ट है, पॉलिटिकल बिकॉज़
56:08अल्टीमेटली वो पॉलिसीज पूरे देश को
56:11प्रभावित करती है।
56:12हां।
56:12राइट? तो उसका जो पूरा टेंशन है, उसका जो
56:17आनंद है वो सारा इस किताब में आ गया है।
56:20तो एंड टू एंड यू हैव रिटन एवरीथिंग।
56:23एंड प्रोबेबबली
56:25मैं पहला
56:27आदमी हूं जो फर्स्ट पर्सन में लिखता है इन
56:30द सेंस कि अगर प्राइम मिनिस्टर मोदी कुछ
56:33बात कह रहे हैं, कोई निर्णय ले रहे हैं तो
56:34प्राइम मिनिस्टर मोदी ने ये कहा और ये
56:36क्या निर्मला सीतारमण अगर कुछ कह रही है
56:39तो राइट? उर्जित पटेल के साथ अगर झगड़ा चल
56:43रहा है आरबीआई को लेके तो वो उसका स्टैंड
56:45क्या है? क्यों है? क्या है? उनके
56:47इंटरेस्ट क्या है? वो सारा। सो इट्स अ
56:50लिटरली अ रियल अकाउंट।
56:52तो
56:53एज इट हैपेंस एज इट हैप।
56:56लोग उस किस्म से लिखते नहीं है।
56:57हां।
56:58राइट?
56:58क्यों नहीं लिखते हैं लोग ऐसे?
57:00ये एक तो परंपरा सी बनी आई है के नहीं
57:06लोगों को दे आर थर्ड पर्सन।
57:09डिफेंडवर
57:11आप बता रहे थे पॉलिसी के बारे में और आप
57:13लिख रहे थे टेल मी कितनीस्टली लिखते हैं
57:16सारी चीजें
57:17मैं शत प्रतिशत हूं
57:19डर नहीं लगता फिर
57:20नहीं डर किस बात का है
57:21बट अब हैव यू मेट पीपल जो थोड़े फियरफुल
57:25होते हैं दूसरे ऑफिसर्स बहुत सारे
57:27यू नो
57:27हम
57:28फियरफुल भी होते हैं लोग
57:29हां
57:30वो कई लोग इस बात के लिए फियरफुल होते हैं
57:34कि उनके करियर का क्या होगा
57:35एक्सक्टली
57:36कई लोग फियर केयरफुल के बजाय इंटरेस्टेड
57:40रहते हैं कि भाई हमें आगे बढ़ना है। हम
57:42आगे बढ़ने के लिए जो पावरफुल है उसको उसके
57:45साथ चलना हो। हम
57:47सो कई कारण होते हैं जिसमें लोग पूरी तरह
57:50सेनेस्ट
57:52ऑनेस्ट नहीं होते।
57:53तो फिर आपने ऑनेस्टी से ये सब लिख दिया।
57:56मुझे
57:57100% सब आप लिख देते हो कि कुछ चीजें तो
57:59आप भी नहीं लिखते होगे। देयर हैज़ टू बी
58:01समी दैट यू आल्सो होल्ड। नहीं मैंने
58:02प्रयास तो यही किया है कि जो शत प्रतिशत
58:06हम
58:06सत्य जैसे मैंने देखा
58:08हम
58:09पूरा सत्य हो सकता है मैंने भी नहीं देखा
58:11हो
58:11हम
58:12कई कई सारे विषयों पे तो जैसा सत्य मैंने
58:16देखा
58:18वैसे समझा उसको वैसे ही लिख दिया
58:20बट एज एन आईएएस ऑफिसर जब आप सर्व कर रहे
58:22थे तब एंड आज भी कभी डर लगा है लाइफ में
58:27देखिए ईमानदारी से कह रहा हूं मुझे कभी डर
58:30नहीं लगता किसी भी चीज से किसी भी यस
58:35क्यों
58:36क्योंकि डर किस लिए लगना चाहिए अगर आप
58:39देखिए मेरी मान्यता ये है कि आप आईएएस में
58:44आते हैं आईएएस पब्लिक सर्विस है
58:46हम
58:46आप पब्लिक सर्वेंट हैं पब्लिक की सर्विस
58:49करने के हिसाब से आते हैं
58:50हम
58:51अगर आप जो भी कुछ करते हैं वो पब्लिक
58:55सर्विस को सामने रखते हुए गांधी जी का एक
58:59टेिलेसमैन है वो अलग है मैं उस उसमें
59:00इसमें मेरी बहुत सिंपथी नहीं है कि गरीब
59:03का चेहरा सामने रखिए। मेरा अपना
59:05टेलिसिममेंट ये है कि क्या चीज पब्लिक के
59:08इंटरेस्ट में है।
59:10वो पॉलिटिशियन के आपके बॉस के इंटरेस्ट
59:12में है या नहीं है
59:14वो सेकेंडरी है। अगर वो उसके भी इंटरेस्ट
59:17में है तो कोई दिक्कत नहीं है। अच्छा है।
59:20राइट? नहीं भी है तो मुझे जो सर्विस करनी
59:23है वो पब्लिक इंटरेस्ट की है। दैट इज
59:25व्हाट आई हैव बीन हायर्ड फॉर। राइट? सो एस
59:29लॉन्ग एज यू स्टिक टू कि क्या पब्लिक
59:32इंटरेस्ट है और आप उस हिसाब से काम कर रहे
59:34हैं।
59:35तो ना तो आपको ये याद रखने की जरूरत पड़ती
59:38है कि आपने उस समय क्या था क्या लिखा था।
59:41आप वो लिखिए जो सही है।
59:43वो हमेशा सही सही रहेगा।
59:44हम
59:45तो इस इसलिए अगर आप इस तरह की भावना के
59:49साथ इस तरह की
59:51परिपाटी के साथ आप सेवा कर रहे हैं तो फिर
59:54किस बात का डर? दूसरा एक इसलिए लोगों को
59:57रहता है कि भाई आपको एक अच्छी पोस्टिंग
1:00:00चाहिए या एक अच्छा
1:00:03प्रमोशन चाहिए फलाना। ठीक है? तो अगर आप
1:00:08ये मानते हैं कि अगर
1:00:11आपकी पोस्टिंग इस बात पे तय हो कि आपका
1:00:15काम आपका रिजल्ट कैसा है।
1:00:17हम
1:00:18राइट? और अगर उस रिजल्ट और उस काम के
1:00:20हिसाब से पोस्टिंग ना मिले तो अगर आपकी
1:00:23काबिलियत ऐसी हो कि आप छोड़ के चल तो जहां
1:00:26काम कर रहे हैं उसे बढ़िया काम करेंगे तो
1:00:28फिर आपको डर नहीं लगेगा।
1:00:29आप बता रहे थे आपने बुक आप बुक लिख रहे हो
Toughest decision he took
1:00:31जिसमें बहुत सारे ऐसे कहानियां और
1:00:33एग्जांपल्स हैं जहां पर आपने टफ डिसिशनंस
1:00:36लिए हैं।
1:00:36हम
1:00:36जहां पर गंभीर डिसीजंस थे कि आगे गोवा
1:00:39पीछे खाई वाला सिचुएशन हर जगह यू डोंट नो।
1:00:42एंड वहां से आपने रास्ते निकाल के यू हैव
1:00:44टेकन डिसिशनंस। राइट? हम
1:00:45सो मेरे को एक और एग्जांपल दो किसी
1:00:47सिचुएशन का जो बहुत ही डिफिकल्ट थी। सबसे
1:00:49डिफिकल्ट सिचुएशन आपके लिए कौन सी थी?
1:00:51तो ये देखिए रिजर्व बैंक है।
1:00:53हम
1:00:54राइट रिजर्व बैंक भारत सरकार का
1:00:57एस्टैब्लिश किया हुआ इंस्टीट्यूशन है।
1:01:00भारत सरकार का जो काम था करेंसी
1:01:04छापना, करेंसी बनाना वो काम रिजर्व बैंक
1:01:09को दिया।
1:01:10ठीक है? करेंसी बनाने और छापने के धंधे
1:01:12में प्रॉफिट होता है काफी
1:01:14क्योंकि करेंसी छापने की कॉस्ट जो होती है
1:01:17वो तो बहुत कम है लेकिन करेंसी की जो
1:01:19वैल्यू है वो काफी ज्यादा है
1:01:22तो उस वैल्यू के बदले में जब आप जारी कर
1:01:25देते हैं तो आपको जो ब्याज मिलता है उससे
1:01:27आपकी आमदनी काफी ज्यादा होती है
1:01:29उसके मुकाबले जो कि उसकी कॉस्ट है राइट तो
1:01:33उसका रिजल्ट ये रहता है कि रिजर्व बैंक जो
1:01:36है वो काफी पैसे कमाता प्रॉफिट बनाता।
1:01:40जैसे पिछले साल अगर आपने सुना हो तो करीब
1:01:42दोाई लाख करोड़ का सालाना प्रॉफिट होता
1:01:46है। फिर अगला इशू इसमें आता है कि ये जो
1:01:50प्रॉफिट कमाया वो कहां रहना चाहिए? रिजर्व
1:01:52बैंक के पास ही रहना चाहिए या सरकार में
1:01:55जाना चाहिए।
1:01:56ठीक है? देश का नियम ये है कि भाई अगर
1:01:58आपको अपने प्रोविजंस वगैरह बनाने के लिए
1:02:01जरूरी है उतना रख लीजिए। बाकी जो है वो
1:02:05सारा प्रॉफिट जो है सरकार में जाना चाहिए।
1:02:09तो एक स्थिति यह बनी वहां पर कि आप
1:02:15रिजर्व बैंक जो है वो ये
1:02:19करने लगा कि प्रॉफिट का काफी हिस्सा वो
1:02:23रिजर्व बैंक रख ले और सरकार को कम दे।
1:02:26विवाद बढ़ा।
1:02:28ठीक है? काफी पब्लिकली भी बहुत इसमें
1:02:32चर्चा हो गई। बहुत सारी एजेंसी ने एनीवे।
1:02:36सो उसके बाद फिर हमने जब ये मामला उठाया
1:02:40कि नहीं नहीं ये आप नहीं रख सकते ये पैसा
1:02:42तो भारत सरकार का है भारत सरकार के पास
1:02:44आना चाहिए तो कमेटियां बनी कमेटियां बनने
1:02:47के बाद विमल जालान ये सब कमेट बन गई कमेटी
1:02:50बनने के बाद वो एक स्टेज पे ऐसी आ गई थी
1:02:54उस समय के आप रिजर्व बैंक की तरफ से
1:02:59जो कमेटी के मेंबर्स थे वो भी रिजर्व बैंक
1:03:02की स्थिति को सपोर्ट कर रहे थे ज्यादा मेज
1:03:06मेजॉरिटी कमेटी में रिजर्व बैंक का जो
1:03:09व्यू था कि भाई इसमें इस तरह से हम पैसा
1:03:13ज्यादा रख रखना चाहते हैं तो उसकी वो
1:03:16सपोर्ट करना चाहते थे और मैं उसका मेंबर
1:03:18था
1:03:18हम
1:03:19तो आई वास वर्चुअली इन अ माइनॉरिटी। ठीक
1:03:21है? अब कोई बात नहीं। अगर जब माइनॉरिटी
1:03:23में है और आपको लगता है कि कोई चीज उचित
1:03:27नहीं हो रही तो आपके पास जो विकल्प रहता
1:03:30है वो ये रहता है कि आप अपना एक डिसेंट
1:03:32नोट लेते हैं।
1:03:33हम
1:03:34क्योंकि
1:03:36उचित तो यही है भाई अगर मेजॉरिटी कहती है
1:03:38तो निर्णय तो वही होगा ठीक है आप कर लीजिए
1:03:40मुझे कोई दिक्कत नहीं है
1:03:43तो मैंने कहा भाई इसमें फिर मैं अपना एक
1:03:46डिसेंट नोट लिखूंगा ठीक है तो शुरू शुरू
1:03:50में तो उन्होंने कहा ठीक है लिख दीजिए आप
1:03:51अपना डिसेंट बट फिर जब लिख के भेजा तो
1:03:54उनको लगा कि ये तो बड़ा मुश्किल डिसेंट
1:03:56नोट है इससे तो समस्या हो जाएगी अगर ये
1:03:59रहता है तो ठीक है तो उन्होंने वित्त
1:04:02मंत्री जी के पास ग्वार लगाई उन लोगों ने
1:04:06कि भाई वित्त मंत्री को समा उन्होंने
1:04:09पर्सड कर लिया। नई वित्त मंत्री आई थी
1:04:12राइट तो कि भाई इनको कहिए कि ये अपना
1:04:16डिसेंट नोट वापस
1:04:18ठीक है तो वो वित्त मंत्री जी ने मुझे कहा
1:04:22कि भाई आपको किसने कहा कि आप ऐसा इस तरह
1:04:25का डिसेंट नोट लिखिए तो मैंने कहा ये मेरी
1:04:27ड्यूटी है डिसेंट नोट जब मैं कमेटी का
1:04:32मेंबर हूं और मुझे मेंबर के हिसाब से कोई
1:04:35चीज उचित नहीं लग रही और ये परंपरा है देश
1:04:38की के अगर आप ओ मेजरिटी के विरोध में है
1:04:41तो आप अपना डिसेंट नोट दे। नहीं नहीं आप
1:04:44नहीं लिख लिख सकते। तो मैंने कहा
1:04:46फिर ये थोड़ा जब विवाद बढ़ा तो मैंने कहा
1:04:48मैडम
1:04:49आप अगर मुझे सरकार की तरफ से आदेश देती
1:04:52हैं कि ये डिसेंट नोट नहीं दिया जाना
1:04:56चाहिए।
1:04:57हम
1:04:57तो मैं ये लिख के डिसेंट नोट नहीं दूंगा
1:05:00कि मुझे सरकार ने ये निर्देश दिए हैं कि
1:05:02इसमें डिसेंट नोट
1:05:04नहीं दिया जाए
1:05:05तो मैं कर दूंगा। हम
1:05:07लेकिन अगर आप मुझे लिखित में यह आदेश नहीं
1:05:09देती
1:05:11राइट तो फिर मुझे डिसेंट नोट देना ही है
1:05:15और आप डिसेंट नोट से मुझे रोक नहीं सकती।
1:05:19हम
1:05:19ठीक है। अब वो वित्त मंत्री जी के लिए
1:05:22शायद थोड़ी सी परेशानी वाली स्थिति हो गई
1:05:25कि डिसेंट नोट नहीं दे उसको लिखित में दे।
1:05:28मैंने कहा आपके पास पत्रावली पड़ी है।
1:05:30फाइल पड़ी है। आप उसमें ऑर्डर कर दीजिए कि
1:05:32नो डिसेंट नोट फ्रॉम द गवर्नमेंट जो
1:05:35अब वो नहीं थे। वो प्राइम मिनिस्टर के पास
1:05:38प्राइम मिनिस्टर के पास पहुंची। प्राइम
1:05:40मिनिस्टर के यहां से मैसेज आया कि उनके
1:05:42प्रिंसिपल सेक्रेटरी का कि भाई क्यों लिख
1:05:45रहे हो? तो मैंने उनको भी बताया। उनको
1:05:47पहले भी मामला पता था। फिर एनीवे वो कमेटी
1:05:49वमेट बनी कुल मिला के। सो
1:05:53हुआ क्या?
1:05:54फाइनली
1:05:55जब ये तय हुआ हो गया उनका और एक एक आधे और
1:05:59मसले में कि भाई सुभाष को आप डिसेंट नोट
1:06:03करने से रोक नहीं सकते एंड सुभाष डिसेंट
1:06:06नोट लेने के लिए तैयार नहीं है
1:06:08हम
1:06:09तो इनका तबादला कर दिया जाए
1:06:11मेरा तबादला हो गया
1:06:12तबला कर दिया
1:06:14और मामले में एक नोट शीट बदलने की स्थिति
1:06:18बनी तो जब ये दो तीन मसले ऐसे हुए तो मेरा
1:06:22अपना निष्कर्ष पूरी तरह तरह से यह था कि
1:06:24अब सरकार में रहना भी उचित नहीं। तो फिर
1:06:28मेरा मानस बन गया था कि सरकार से
1:06:31रिटायरमेंट लेके ही वंट रिटायरमेंट लेके
1:06:33निकलना है। तो जब उन्होंने मुझे तबादले के
1:06:36लिए कहा तो मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई
1:06:37क्योंकि मुझे अपना निर्णय बन गया था कि अब
1:06:39सरकार को छोड़ना। सो मैं इस बात का पक्षधर
1:06:44नहीं हूं के
1:06:47आप
1:06:49मूल मुद्दों पे एसेंशियल प्रिंसिपल्स पे
1:06:53फंडामेंटल बातों पे कंप्रोमाइज करें इस
1:06:57होप के साथ या इस बिलीफ के साथ कि शायद आप
1:07:01रहे तो आप ज्यादा काम कर सकते
1:07:04आप बिलीव नहीं करते
1:07:05आई डोंट बिलीव इन दैट सो एक पॉइंट अगर आ
1:07:08जाता है तो यू हैव टू टेक अ कॉल।
team work when working on country level
1:07:11सी आई अग्री कि प्रिंसिपल्स के साथ
1:07:13सैक्रिफाइस नहीं करना चाहिए। खुद की जो
1:07:15वैल्यू सिस्टम है, खुद के जो प्रिंसिपल्स
1:07:17हैं, खुद को जो सही लगता है, गलत लगता है,
1:07:19उसके लिए जो प्राइस है वो पे करनी चाहिए।
1:07:20राइट? बट जब आप कंट्री लेवल पे हो व्हेन
1:07:23यू आर एट द टॉप एंड आप जो डिसीजन लोगे,
1:07:28आपकी कमेटी जो डिसीजन लोगे, वो 140 करोड़
1:07:32लोगों को इंपैक्ट करेगा इन सम ऑफ़ द अदर
1:07:33वे। एंड इट्स अ वेरी क्रूशियल पोजीशन। तो
1:07:36यहां पर मे बी ये भी जरूरी है कि हम
1:07:40दूसरों के साथ कैसे काम कर पाएं। नॉट जस्ट
1:07:42थिंकिंग कि मैं जैसे करता हूं वैसे ही
1:07:44करूं। डू यू थिंक सो
1:07:45नहीं ये बिल्कुल सही कह रहे हैं आप। यह जो
1:07:47मैं वाला सवाल है वह तो बिल्कुल अनचित है।
1:07:49यह बात मैं का नहीं है।
1:07:51हम
1:07:51यह बात उस चीज की है कि देयर इज ए पॉइंट
1:07:56जहां पे आपको लगता है कि आप जो पब्लिक
1:08:00इंटरेस्ट इसीलिए मैं इतनी देर से जो कह
1:08:02रहा हूं कि आप पब्लिक इंटरेस्ट को सर्व कर
1:08:04रहे हैं या नहीं कर रहे। बात ये नहीं है
1:08:06कि मैं कह रहा हूं या नहीं।
1:08:08बट मे बी जो उनका जो सोचने का तरीका हो
1:08:11वो भी पब्लिक इंटरेस्ट को ही सर्व कर रहा
1:08:12हो बट आपसे अलग हो।
1:08:14कोई बात नहीं बिल्कुल संभव है। तो बट एक
1:08:17समय आपको यह जजमेंट कॉल लेना है। लेने की
1:08:19स्थिति आ जाती है। बहुत समय 36 साल मैंने
1:08:23सेवा की। बहुत बहुत बार तबादले हुए। बहुत
1:08:25बार इधर-उधर हुआ। उसमें वो कोई बात नहीं
1:08:27है।
1:08:28उसके बाद भी काम करते रहे। लेकिन एक
1:08:30स्थिति जब अगर ये आ जाए कि आपको लगे कि
1:08:35नहीं अब नाउ चांसेस ऑफ
1:08:39डूइंग राइट थिंग्स, डूइंग थिंग्स इन
1:08:42पब्लिक इंटरेस्ट आर मच स्मॉलर। देन दी
1:08:45अदर। आई थिंक दैट इज द टाइम ए सिविल
1:08:47सर्वेंट। इट्स अ वेरी डिफिकल्ट डिसिशन।
1:08:49बहुत कम लोग ये डिसिशन ले पाते हैं। और
1:08:52बहुत लोग ये जस्टिफाई करते हैं कि आप
1:08:54उसमें बने रहिए। राइट? वो उसके लिए ये जो
1:08:58आर्गुमेंट है वो इसके लिए लिखा रहता है कि
1:09:00भ आप अपने आप को परपचुएट भी कर रहे हैं और
1:09:03बने भी रहे हैं।
1:09:05राइट? तो वो ऐसा ना हो कि आप केवल अपने आप
1:09:09को परपचुएट करने के लिए, अपने इंटरेस्ट को
1:09:11बनाए रखने के लिए, नौकरी बनाए रखने के लिए
1:09:14चले जा रहे हैं। चलाए जा रहे हैं और उसको
1:09:16आप एक्सक्यूज के लिए इस्तेमाल कर
1:09:18ऐसा क्या नोटिस किया? अपार्ट फ्रॉम जस्ट
1:09:20यू एंड योर सिचुएशन ऐसा क्या नोटिस किया?
1:09:22एक या दो चीज मुझे बताओ जहां पे आपका
1:09:24जजमेंट पक्का हो गया था कि यार अब मुझे
1:09:26लगता है कि पब्लिक इंटरेस्ट में जो चीजें
1:09:28होती है उसके चांसेस कम है।
1:09:30मैंने आपको बताया ना जैसे एक तो ये बड़ा
1:09:32मसला था।
1:09:32ये तो पर्सनल इसमें हो सकता है पर्सनल
1:09:34डायनामिक्स इनवॉल्वड हो। इसमें हो सकता है
1:09:36कि किसी एक इंसान का मैनपुलेशन इनवॉल्व्ड
1:09:40हो। हो सकता है कि उनके आसपास जो लोग हैं
1:09:42प्रॉब्ली उन्होंने सही गाइड नहीं किया हो।
1:09:43या यह भी हो सकता है कि उनका जस्ट सोचने
1:09:45का तरीका पूरा डिफरेंट हो। वी कैन गिव
1:09:48सर्टेन बेनिफिट ऑफ़ डाउट्स। आई डोंट थिंक
1:09:50कि एक सिचुएशन की वजह से आप ये बोलोगे कि
1:09:52यार जजमेंट मेरा हो गया। मैं हटा देता
1:09:54हूं। आप सही कह रहे हैं तो जैसे इसमें और
1:09:57अगर और लार्जर
1:10:00पॉइंट ऑफ से उसे देखें तो
1:10:03देखिए 2019 की बात कर रहे हैं।
1:10:05ये जून जुलाई 2019 की बात है।
1:10:09सरकार वापस आई थी मोदी जी की सेकंड
1:10:12गवर्नमेंट के लिए वापस आए।
1:10:15और पहली
1:10:18टर्म में जिसमें मैं दो साल उनके साथ
1:10:22आर्थिक कार्य विभाग के और फाइनेंस
1:10:25सेक्रेटरी के बतौर काम किया। इकोनमी के
1:10:28दृष्टिकोण से काफी बड़े डिसिशन भी हुए।
1:10:33और हम मुझे पूरी उम्मीद थी के दूसरे टर्म
1:10:39में और जब मेजॉरिटी और आ गई तो दूसरी टर्म
1:10:42में सरकार और ज्यादा बोल्डली देश के
1:10:47आर्थिक दृष्टिकोण से और काम करेगी।
1:10:52हम
1:10:52ठीक है? और बोल्ड डिसिशन लेगी और देश की
1:10:55जो आर्थिक
1:10:57विकास की दर है उसको भी और बढ़ाने के लिए
1:10:59उसके सारे फैसले
1:11:02बट संयोगवश जो हुआ 2019 में मई के एंड में
1:11:08जब सरकार वापस आ गई अगले डेढ़ दो महीने
1:11:12में
1:11:13मुझे ऐसे लगा कि बड़े डिसीजंस नहीं आ रहे
1:11:18छोटे डिसीजंस हो रहे हैं और आर्थिक
1:11:22मुद्दों
1:11:23के मुकाबले दूसरे और मुद्दों की तरफ
1:11:25ज्यादा सरकार का ध्यान जा रहा है।
1:11:27एग्जांपल
1:11:28आर्थिक मुद्दों में जैसे आप देखिए के
1:11:33प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम
1:11:35हम
1:11:35बहुत तेजी से बढ़ना चाहिए।
1:11:37हम
1:11:38ठीक है?
1:11:40हमें इकॉनमी को और लिबरलाइज करना चाहिए।
1:11:44फॉरेन इन्वेस्टमेंट के लिए, टेरिफ्स वगैरह
1:11:47को कंट्रोल करने के लिए। राइट? सरकार को
1:11:53कम ध्यान देके प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को
1:11:56बढ़ाने के लिए बहुत सारे कदम उठाने चाहिए।
1:11:59ये सब नहीं हो रहे।
1:12:00ये नहीं हो रहे थे। क्या हो रहे थे? जैसे
1:12:04आपके
1:12:07ट्रेडर्स के लिए इंश्योरेंस की स्कीम आ
1:12:10गई। पीएम किसान की स्कीम आ गई कि किसानों
1:12:14को 66000 दिए। ये सब अपनी जगह इंपॉर्टेंट
1:12:18है। मैं इसको वो नहीं कह रहा हूं। लेकिन
1:12:19देश की जो आर्थिक प्रगति के लिए इनका इतना
1:12:23बड़ा महत्व नहीं था। तो मुझे ऐसा
1:12:27इंक्रीजिंगली एहसास होने लगा उस समय कि जो
1:12:31सरकार का अटेंशन
1:12:34आर्थिक मुद्दों से थोड़ा हट रहा है। और
1:12:37मेरा इंटरेस्ट मेरा क्षेत्र जो है वो
1:12:40आर्थिक मुद्दों का आर्थिक वित्तीय मुद्दों
1:12:42का ज्यादा था।
1:12:45दूसरे कौन से मुद्दों पे ज्यादा ध्यान
1:12:47दिया जा रहा है? अगेन मैं आपको कह रहा हूं
1:12:50वो भी अपनी जगह इंपॉर्टेंट है। उनको उनमें
1:12:53मुझे उज्र नहीं है। कोई वो नहीं है। अब
1:12:55जैसे उसी समय जम्मू कश्मीर का मसला हुआ।
1:12:57अच्छा मसला अच्छे अच्छे डिसीजन हुए। ठीक
1:13:00है?
1:13:00लेकिन सरकार के ध्यान उस तरफ ज्यादा जा
1:13:03रहे थे और आर्थिक मुद्दों से कम हो रहे
1:13:06थे।
1:13:06तो ये हुए प्लस जो मैंने आपको बताया
1:13:09स्पेसिफिक केसेस हुए ये हुए। तो इन सब से
1:13:12मुझे लगा कि मुझे अपना शायद मेरा समय पूरा
1:13:17हो गया। इसलिए मुझे जल देना चाहिए।
1:13:18हर कोई जॉइ जब करता है ना सारे सारे
Expentation vs reality - IAS service
1:13:20ऑफिसिसेस जब जॉइ करते हैं या जो
1:13:22कैंडिडेट्स होते हैं उनके दिमाग में एक
1:13:24आइडियलिस्टिक एक्सपेक्टेशन होती है कि हम
1:13:27जाएंगे तो सर्विस ऐसी होगी आपके दिमाग में
1:13:30भी होगी राइट और जब आप आए तो हारश रियलिटी
1:13:33डिफरेंट होगी जो आपने एक्सपेक्ट किया था
1:13:36वर्सेस हारश रियलिटी वुड बी डिफरेंट
1:13:37मल्टीपल फैसेट्स में मल्टीपल फसेस में टेल
1:13:40मी डिफरेंसेस कि क्या एक्सपेक्ट करके आए
1:13:42थे सर्विस में और क्या रियलिटी निकली
1:13:44ईमानदारी से मेरी ख्याल से बहुत सारे जो
1:13:49ऑफिसर सिलेक्ट होते हैं उनको यह ज्ञान ही
1:13:52नहीं होता कि आईएएस में क्या करना है।
1:13:55उनको ऊपर ऊपर कुछ चीजें दिखती है कि भ
1:13:57कलेक्टर बन जाएगा या एसडीएम बन जाएगा उसके
1:14:00बाद कलेक्टर बन जाएगा और बड़ा अफसर बन
1:14:02जाएगा। इतना ही
1:14:04इतना ही समझ रहती है। उसको वो एक्चुअली
1:14:06क्या करता है? कलेक्टर क्या करता है?
1:14:08या आईएएस ऑफिसर्स क्या करते हैं? उतनी
1:14:11जानकारी उनको होती नहीं है। ये ब्रॉड
1:14:14मोटी-मोटी बात ही बस इतनी ध्यान में रहती
1:14:16है। तो अगर यही चीज के साथ आप जाएं तो जब
1:14:20आप पहुंचते हैं वहां पे सर्विस में अपना
1:14:23काम शुरू करते हैं। जब आपको जिम्मेवारी
1:14:25मिलनी शुरू होती है। आप पहले एसडीएम लगे
1:14:27या फिर एडीएम लगे फिर या कलेक्टर लगे
1:14:30या फिर बाद में सेक्रेटेरियट में काम करने
1:14:33लगे। विभाग अध्यक्ष हुए
1:14:34तो आप एक्चुअली वहां जाके पहले कुछ दिनों
1:14:38में तो सीखते हैं कि आपको काम क्या करना
1:14:40है।
1:14:40हां
1:14:41तब आप डिस्कवर करते हैं। लेकिन अगर आपके
1:14:44पास बेसिक इंग्रेडिएंट हो कि आप समझ लें
1:14:49बहुत जल्दी कि क्या काम है? उसमें क्या
1:14:52पब्लिक इंटरेस्ट का सवाल है? क्या क्या
1:14:55अपेक्षा है और उस हिसाब से फिर आप अपने को
1:14:59पूरा अपना कर्तव्य समझ के काम करने लगे और
1:15:03तब चैलेंजेस बहुत आते हैं। ऐसा नहीं
1:15:04चैलेंजेस नहीं आते तब आप उस समय मेरे
1:15:09ख्याल से मुझे तो ऐसी स्थिति कभी नजर नहीं
1:15:11आई कि मैं क्या एक्सपेक्टेशन लेके चला था।
1:15:13मुझे तो वो जो काम मिला उस काम में मुझे
1:15:17क्या करना है? उस
1:15:20तरीके से
1:15:22कैसे अपने पब्लिक इंटरेस्ट करना है कैसे
1:15:26एक्सेल करना है वो चीज तो उसमें फिर
1:15:28डिसपॉइंटमेंट नहीं होता
1:15:30ओके
1:15:30उसमें आप अगर ऐसे चैलेंजेस मिलते हैं आपको
1:15:34लगता है फॉर एग्जांपल जैसे मैं आपको बताऊं
1:15:35शुरू शुरू में एसडीएम की पोस्टिंग
1:15:38पोस्टिंग मिली राइट
1:15:41अब उस जमाने उस समय में काफी ये काम होता
1:15:45था भ जमीन एक्स्ट्रा है सर सरकार के पास
1:15:48सीलिंग में आई जेंनी आई जो सरकार के पास
1:15:51और जमीनें हैं वो गरीबों को आवंटित करते
1:15:53हैं हम
1:15:53राइट अब अच्छा काम है उससे फालतू जो सरकार
1:15:58की जमीन पड़ी है उसको अगर आप गरीबों गरीब
1:16:02किसानों को दे दो वो भी खेती कर लेंगे
1:16:04उनका भी फायदा हो जाएगा और साथ में देश का
1:16:07उत्पादन भी बढ़ेगा इसीलिए यही पब्लिक
1:16:09इंटरेस्ट है
1:16:10बहुत बढ़िया काम है
1:16:10राइट सभी इसमें नुकसान के
1:16:13अब हकीकत में जब आप पहुंचते हैं तो आप
1:16:15क्या देखते हैं कि कुछ जगह पे जो है वो
1:16:17बड़े बड़े किसान ने कब्जा कर रखा। राइट?
1:16:21और नियम के हिसाब से आप बड़े किसान को
1:16:23नहीं दे सकते। राइट? अब आप छोटे किसान को
1:16:27अगर वो दे दें तो आप उसको बड़े किसान का
1:16:29दुश्मन बना दे। उसको बजाय जमीन मिलने के
1:16:32वो कोर्ट कचहरी के चक्करों में लग जाएगा।
1:16:35अब ऐसी स्थिति में आप क्या करें?
1:16:39तो क्या करते हो?
1:16:40राइट? तो मैंने जो किया वो अनकन्वेंशनल
1:16:43था।
1:16:43क्या किया? मैंने मैंने ये देखा कि भाई
1:16:46इसमें देखिए खेती होने का पर्पस देश के
1:16:50उत्पादन का पर्पस तो वो भी सर्व हो जाएगा
1:16:52अगर बड़े किसान को भी मिल जाए।
1:16:54राइट अगर ये छोटे किसान को जमीन दें तो वो
1:16:57कोर्ट कचहरी में चक्कर खाएगा। उसके नुकसान
1:17:00होगा। उसको फायदा नहीं होगा।
1:17:02लेकिन जो जमीन इसको बड़े किसान को मिल रही
1:17:05है उसको अगर मुफ्त में जमीन अलॉट करने का
1:17:08नियम है केवल मुफ्त में देना।
1:17:09हम
1:17:10राइट? तो मैं मेरा अपना स्यूशन वो पूरी
1:17:13तरह से कानून सम्मत नहीं है। हम
1:17:15मेरा अपना स्यूशन ये था कि भ अगर हम इस
1:17:18बड़े किसान जो स्ट्रिप है केवल बाकी ना ये
1:17:21अगर जहां हम खाली करवा सकते हैं वहां खाली
1:17:23करवा दें।
1:17:24लेकिन जहां खाली नहीं करवा सकते या
1:17:25स्ट्रिप ऑफ लैंड है जो उसके पास जमीन में
1:17:27लगी हुई है। अगर हम उससे पूरा पैसा ले लें
1:17:31और उसको दे दें। राइट? और वो जो छोटे
1:17:34किसान को दूसरी जगह जमीन दे जो खाली है तो
1:17:37शायद सबसे बेहतर हो। अब ये
1:17:40नियम नहीं है कि आप उससे पैसे ले सकते
1:17:42हैं।
1:17:43तो क्या करें?
1:17:44क्या किया?
1:17:45तो मेरा अपना तरीका मैंने ये निकाला कि
1:17:48भाई आप ये पैसे जो है वो पंचायत में दान
1:17:50कर दीजिए।
1:17:51हम
1:17:52राइट? तो पंचायत फिर जनता के काम करा
1:17:56लेगी। तो ये तरीके से हमने अलॉटमेंट भी की
1:18:00और विवाद भी कम किए।
1:18:02बट फिर छोटे किसान को क्या मिला? कुछ भी
1:18:03नहीं।
1:18:03कुछ छोटे किसान को वो जमीन दो जो जमीन पे
1:18:06कब्जा नहीं है जो खाली नहीं। और अगर बाय द
1:18:09वे ना भी हो तो उस किसान को वो जमीन देने
1:18:11से कोई फायदा नहीं है जिसमें उसकी जो छोटी
1:18:14थोड़ी बहुत उसकी जो आमद वो भी खत्म हो
1:18:16जाए।
1:18:16बहुत लोग जब ये सुनेंगे
1:18:18तब वो बोलेंगे कि आपने छोटे किसान के साथ
1:18:20गलत किया क्योंकि उसको जो अच्छी जमीन मिल
1:18:22सकती थी वो आपने दी नहीं। आपका एज अ
1:18:25गवर्नमेंट एस समबडी जो जिसके पास कानून
1:18:28व्यवस्था सब चीजें हैं। वो इंसान चाहता तो
1:18:31किसी तरह से रोक सकता था एक बड़े किसान को
1:18:34और छोटे किसान की जो हक की जमीन थी उसे
1:18:36दिला सकता था। पर आपने वैसा नहीं किया।
1:18:39सी मैं आपको यही बता रहा हूं जो हकीकत में
1:18:43उसको और आइडियलिज्म में
1:18:45अगर आइडियलिज्म आप हकीकत में ट्रांसलेट
1:18:49नहीं कर सकते
1:18:50हम
1:18:50तो उस आइडियलिज्म को ट्रांसलेट नहीं करना
1:18:52चाहिए ये मेरा विश्वास है।
1:18:54अगर आइडियलिज्म को हकीकत में बदल सकते हैं
1:18:57तो उसको जरूर कर लीजिए। वो बहुत बार मैंने
1:18:59किए हैं अपनी जिंदगी में।
1:19:02नियमों के बाहर भी जाके किए हैं। ठीक है?
1:19:05लेकिन अगर नहीं कर सकते तो उसको और परेशान
1:19:09मत करिए। मैं आपको बताता हूं हमारे
1:19:11कोर्ट्स में बहुत सारे केसेस थे। बाद में
1:19:15जब मैं कलेक्टर बना उस समय भी कई सारे
1:19:16केसेस में दूसरे जिले में वहां पे भी कई
1:19:19सारे ऐसे केसेस आए कि किसान जो जिसको जमीन
1:19:22आपने आवंटित की है वो किसान को केस में
1:19:27उलझ गया है और वो आ रहा है कोर्ट कचहरी
1:19:29में उसके पास ना जमीन है उसके पैसे और
1:19:31खर्च हो गए। अब उसके पास ना वकील हायर
1:19:34करने के लिए पैसा है ना उसके उसकी और रोजी
1:19:37रोटी जो है वो भी खराब हो रही है। तो उस
1:19:40समय फिर मैंने ये तय किया कि भ इसका वकील
1:19:43मैं हूं
1:19:43हम
1:19:44जो परेशान हो रहा है। मुझे तय करना है बट
1:19:48इसका वकील भी मैं ही हूं।
1:19:49हां
1:19:49राइट? तो अब आप ये जिसने कब्जा कर रखा है
1:19:54वो बताएं कि उसको किस क्यों नहीं पनिश
1:19:57करके उसको हटाया नहीं जाए।
1:19:59और इस किसान को तो फ्री करिए कि जिसको
1:20:01जमीन नहीं है तो कोई बात नहीं उसको उसको
1:20:04कम से कम उसका और नुकसान करो।
1:20:06तो ये जो मैं कहने की कोशिश कर रहा हूं के
1:20:11आइडलिज्म और रियलिज्म
1:20:14एक बैलेंस बनाना एक पब्लिक सर्वेंट के लिए
Who makes the final yearly budget decision?
1:20:17बहुत जरूरी है।
1:20:18टेल मी
1:20:18जैसे जब बजट बनता है हम
1:20:20और ये हर साल डिसाइड होता है कि इतना
1:20:22खर्चा हम यहां करेंगे इतना इन्वेस्टमेंट
1:20:24हम यहां करेंगे इतना इन्वेस्टमेंट हम
1:20:26इंफ्रास्ट्रक्चर में करेंगे। एट्रा
1:20:29फाइनल डिसीजन फाइनेंस मिनिस्ट्री का होता
1:20:32है कि प्राइम मिनिस्टर का होता है?
1:20:34ये देखिए समय-समय पे बदलती है स्थिति
1:20:36बजट के लिए
1:20:37हर समय हां बजट की भी हर समय पे एक स्थिति
1:20:40नहीं रहती। अगर आप इसमें तीन मुख्य प्लेयर
1:20:43मान लीजिए प्राइम मिनिस्टर, फाइनेंस
1:20:46मिनिस्टर, फाइनेंस मिनिस्टर फाइनेंस
1:20:49मिनिस्टर, फाइनेंस मिनिस्ट्री में भी फर्क
1:20:51है। क्योंकि बजट का लगभग ये हकीकत है लगभग
1:20:5790 92%
1:20:59तो चला आता है। उसमें आप उसमें आप कुछ
1:21:03बदलाव नहीं करते।
1:21:04जो बदलाव करते हैं वो 5 से 7% में ही
1:21:07ज्यादातर बदलाव होता है और उस पे अभी जो
1:21:11स्थिति है पिछले कुछ समय से 810 साल से
1:21:14उसमें
1:21:16प्राइम मिनिस्टर ऑफिस का काफी ज्यादा रोल
1:21:20है। राइट? तो बड़े जो भी डिसीजंस होते हैं
1:21:25उसमें
1:21:26अगर वो फाइनेंस मिनिस्ट्री से भी प्रस्ताव
1:21:29शुरू हुए तो भी प्राइम मिनिस्टर ऑफिस की
1:21:32अप्रूवल जरूरी है। और अगर प्राइम मिनिस्टर
1:21:34ऑफिस से शुरू हुए तो फिर वो वैसे भी
1:21:37अप्रूवल हो जाएगा। तो आज के दिन में काफी
1:21:41ज्यादा और मैं तो दोद तीन-तीन बजट में
1:21:45मुझे बनाने का मौका मिला था। अ मुझे कोई
1:21:49कहने में हिचक नहीं। हमारा अपना
1:21:50कंट्रीब्यूशन भी बहुत था वित्त मंत्रालय
1:21:52का भी अपना था। लेकिन बहुत सारे मसलों में
1:21:55अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री ऑफिस की सहमति
1:21:58से या उनके हिसाब से
1:22:01ओके। लॉन्ग
1:22:02प्रोसेससेस हैं। अब
1:22:06यह प्राइम मिनिस्टर हैं एंड सो ऑन प्राइम
1:22:08मिनिस्टर हैं। वो काफी इंटरेस्ट लेते हैं
1:22:10हर चीज में। तो पांचप छह-छह मीटिंग प्राइम
1:22:13मिनिस्टर के लेवल पर बजट से पहले होती थी।
1:22:16अभी भी होती होंगी। मैं और हम लोग बजट की
1:22:22एक-एक बजट स्पीच की एक-एक लाइन पढ़ते थे।
1:22:24पांच छ चार पांच बार।
1:22:26डू यू थिंक इट्स गुड और बैड?
1:22:28इन माय जजमेंट इट्स गुड?
1:22:31क्योंकि देश का चीफ एग्जीक्यूटिव तो
1:22:34प्राइम मिनिस्टर है।
1:22:35यस राइट।
1:22:36सो जो पॉलिसी सेटिंग करता है
1:22:40बट उसके अपने चैलेंजेस भी हैं। अगर एक
1:22:45मानस बन गया कि इस तरफ जाना है
1:22:48और वो मानस सही नहीं है
1:22:51तो उसको चेंज कराना बहुत मुश्किल हो जाता
1:22:54है।
1:22:54हम
1:22:55राइट? सो अ
1:22:59आइडियली आई वुड बिलीव कि प्राइम मिनिस्टर
1:23:03का अंतिम निर्णय होना चाहिए बट प्राइम
1:23:05मिनिस्टर शुड बी ओपन
1:23:07ओके
1:23:08टू लिसन टू एवरीवन एल्स एंड देन टेक अ
Is our current Prime Minister receptive?
1:23:12डिसिशन राइट
1:23:13डू थिंक आवर कार प्राइम मिनिस्टर इज़ ओपन
1:23:14टू लिसन टू
1:23:15अब मैं आपको उस किताब में बहुत सारे मैंने
1:23:18इंस्टेंसेस दिए जिसमें एटलीस्ट मेरे मेरे
1:23:22उस समय दो साल में तो आई फाउंड हिम
1:23:24रिसेप्टिव बहुत सारी चीजों वो सुनते थे।
1:23:27अब उसके बाद पिछले 5 साल में क्या स्थिति
1:23:30बनी है वो मैं नहीं कह सकता। लेकिन ही वास
1:23:33वै रिसेप्टिव।
1:23:34कौन सी ऐसी चीज है जहां पे गवर्नमेंट आज
Things our government shouldn't spend much on
1:23:37बहुत खर्चा करती है एंड वहां नहीं करना
1:23:40चाहिए उन्हें।
1:23:40देखो सरकार के जो खर्चे हैं वो बेसिकली
1:23:43चार तरह के खर्चे होते हैं।
1:23:45राइट? एक तो खर्चे वो होते हैं जिस पे
1:23:47सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। वो तो
1:23:49करने हैं। बिकॉज़ आपने पहले लोन ले लिए तो
1:23:51इंटरेस्ट पेमेंट करना है।
1:23:52आपने सरकारी कर्मचारी रखे तो आपको पेमेंट
1:23:55पेंशन का पेमेंट करना है। तो ऐसे कुछ
1:23:58खर्चे हैं जिस पे आपका कोई नियंत्रण नहीं
1:23:59है। उनको आप शॉर्ट टर्म में कंट्रोल नहीं
1:24:02कर सकते। लॉन्ग टर्म में केवल कंट्रोल कर
1:24:04सकते हैं बाय रिड्यूसिंग द डे
1:24:07बर्डन। तो आप फिसिकल डेफिसिट इतना नहीं
1:24:09बढ़ा के चलें। तो दैट इज वन टाइप ऑफ़
1:24:12एक्सपेंडिचर। दूसरा तरह का खर्चा होता है
1:24:15जो अपन डिस्कस कर रहे थे। पब्लिक गुड्स
1:24:17एंड सर्विज, लॉ एंड ऑर्डर, सिक्योरिटी,
1:24:19मैकोनमिक स्टेबिलिटी, हेल्थ एजुकेशन।
1:24:22राइट?
1:24:24इस तरह के खर्चे बढ़ने चाहिए। कम नहीं
1:24:26होने चाहिए। तीसरे तरीके के खर्चे जो
1:24:28मैंने आपको बताए ग्रोथ कैपिटल एक्सपेंडिचर
1:24:30वगैरह बहुत सारे इसमें बहुत सारी जगह ऐसी
1:24:32है जिसमें आप काट सकते हैं। और चौथे जो
1:24:34खर्चे हैं वो जिनको आप कहते हैं सोशल
1:24:38वेलफेयर या रिस्ट्रीब्यूशन एक्सपेंडिचर
1:24:40जैसे पीएम किसान हुआ या फूड सब्सिडी हुई।
1:24:44इस पे अब हमारे 48 लाख करोड़ के बजट में
1:24:47तकरीबन 111 लाख करोड़ इन इस तरह के चीजों
1:24:50पर खर्च होता है। इसमें भी काफी स्कोप है
1:24:53उसको कम करने का।
1:24:55तो ये दो जगह यू फील जो कैपिटल
1:24:57एक्सपेंडिचर
1:24:58हां जो वेस्टफुल अननेसेसरी कैपिटल
1:25:00एक्सपेंडिचर है उसको कम करना चाहिए।
Things our government should spend money on
1:25:02कौन सी ऐसी जगह है जहां पे हम खर्चे
1:25:03बिल्कुल नहीं करते एंड हमें वहां करने
1:25:05चाहिए जिससे ग्रोथ होगी कंट्री की।
1:25:09मेरी अनुमान से पब्लिक गुड्स एंड सर्विज
1:25:11जो है स्पेशली हम एनवायरमेंट पर बहुत कम
1:25:14खर्चा करते हैं। पोल्यूशन पर बहुत कम
1:25:17खर्चा करते हैं। जिससे क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
1:25:19भी बहुत खराब हो रही है। बहुत अफेक्टेड हो
1:25:22रही है। उस एरिया में हमें खर्चे बहुत
1:25:24बढ़ाने चाहिए। राइट? दूसरा हमें ये पब्लिक
1:25:31इंफ्रास्ट्रक्चर है जिसकी हमने बात की। उस
1:25:33उस चीज पे मोर इमेजिनेटिवली
1:25:37करते हुए हमें खर्चा बढ़ाना चाहिए।
1:25:39इंफ्रास्ट्रक्चर वगैरह हमारा सिक्योरिटी
1:25:44पे हमें थोड़ा खर्चा बेहतर करना चाहिए। कम
1:25:49नियंत्रण नियंत्रण करना चाहिए। सो देयर आर
1:25:52एरियाज हम और डिटेल में बिकॉज़ वी विल नीड
1:25:56एक मैं एक और किताब लिखता हूं बाय द वे वो
1:25:59शायद आपके नजर में है। मैं हर साल बजट पे
1:26:01कमेंट्री लिखता हूं।
1:26:02दो साल से लिख रहा हूं। उसमें मैं हर एक
1:26:06आइटम जैसे अभी हमने सोशल वेलफेयर की बात
1:26:08की उसके तकरीबन 100 हेड्स हैं जिसमें वो
1:26:11खर्च करते हैं। मैं उन सबकी एनालिसिस करके
1:26:13बताता हूं कि इस पे क्या हो रहा है, क्यों
1:26:15नहीं होना चाहिए, कम होना चाहिए।
1:26:16एंप्लॉयमेंट के
1:26:18स्कॉलरशिप्स के 50ों तरह के खर्चे हम करते
1:26:21हैं। अब ये इस बार सरकार ने अनाउंस किया
1:26:24था। अगर आपने देखा हो पिछले बजट में
1:26:26एंप्लॉयमेंट में पांच बड़े प्रोग्राम
1:26:28अनाउंस किए थे कि भाई एंप्लॉयमेंट लिंक्ड
1:26:31इन इंसेंटिव स्कीम्स इंटर्नशिप स्कीम्स और
1:26:33ये आई आईटी आईआईटी आईटीआई को स्ट्रेंथन
1:26:37करने का उसप मैंने लिखा उसमें बताया ये
1:26:39एंप्लॉयमेंट प्रोग्राम बड़े बैडली कंसीव्ड
1:26:42है। बड़े बिना सोचे समझे बनाए हैं। सो
1:26:48बहुत गहराई में जाने की जरूरत है। एक-एक
1:26:51चीज बहुत स्कोप है। गवर्नमेंट यूजुअली डू
Does the government favor big players more?
1:26:55यू थिंक कि बड़े प्लेयर्स के लिए ज्यादा
1:26:59बेनिफिशियल होती है देन स्मॉल प्लेयर्स?
1:27:01देखिए बड़े बिज़नेस को ज्यादा बेनिफिट नहीं
1:27:03मिलता। गवर्नमेंट सारी पॉलिसीज,
1:27:05इंसेंटिव्स, सब्सिडीज, सारे फेवर्स बड़ी
1:27:09कंपनीज के लिए करती है।
1:27:11सो बड़े बिजनेस को पैसा ज्यादा मिलता है
1:27:13और छोटे बिनेस को बात ज्यादा मिलती है।
1:27:18तो बातें तो ज्यादा होती है छोटे बिनेस
1:27:20की। एमएसएमस की खूब बातें होती है।
1:27:22हां।
1:27:22राइट? और पैसा एक्चुअली बड़े बिज़नेस को मिल
1:27:25जाता है।
1:27:25हां। एक्सप्लेन करो थोड़ा डीप में दोनों
1:27:27को। [हंसी]
1:27:29सो अब आप अभी हमने कैपक्स की बात की। अगर
1:27:32आप इसको थोड़े और गहराई में देखिए कैपेक्स
1:27:34कहां जाता है?
1:27:36आपने रेलवे पे ढाई लाख करोड़ खर्च करेंगे।
1:27:39किसके पास जाएगा?
1:27:40बड़े बिनेस के पास।
1:27:41सारा बड़े बिज़नेस। रोड्स पे आप खर्च
1:27:43करेंगे। किसके पास जाएगा?
1:27:44बड़े बिनेसेस के पास।
1:27:46BSNL मेट्रोस
1:27:49डिफेंस किसके पास जा रहा है? सो
1:27:53इफेक्टिवली जो कैपेक्स है वो इफेक्टिवली
1:27:58बड़े बिजनेस के पास जाता है। अभी आपने अभी
1:28:01दो-ती दिन पहले सीआईआई ने अपना एक बड़ा
1:28:03रिप्रेजेंटेशन हर बार देते हैं।
1:28:05दिया है। उसमें वो कह रहे हैं कैपेक्स
1:28:07बढ़ाओ। कैपेक्स और
1:28:10वो सीधा
1:28:12उनको ही मिलता है। या वो कहेंगे कि भ आप
1:28:16ये
1:28:18टैक्स कम कर दो और कम टैक्स कर दो
1:28:20कंपनियों पे इन पे। राइट तो और वो उनके
1:28:23अगर कुछ भी निर्णय हो जाते हैं तो उनका
1:28:26इंप्लिकेशन बहुत ज्यादा होता है। उसको
1:28:28फायदा एमएसएमईस जो हैं वो संख्या में बहुत
1:28:33ज्यादा है।
1:28:34अब बड़े बिजनेस को अगर आप कंपनीज़ बड़ी
1:28:36कंपनी टोटल मिला के देश में करीब 15 16
1:28:39लाख ऑपरेटिंग कंपनीज़ हैं।
1:28:41बड़ी कंपनीज़ जो लिस्टेड है वो तो 34 हजार
1:28:44ही हैं। और आपके बीएस एनएससी ससेक्स और ये
1:28:48बीएस वाली जो इंडेक्स है उसमें तो 50 60
1:28:53कंपनियां जो है देश की 70 80% 60 70% का
1:28:57सारा टर्नओवर उनके वेरी फ्यू कंपनीज
1:29:00पीएलआई किसके पास जा रही है
1:29:0220% कंपनीज़ टेक्निकली जनरेट 80%
1:29:05पीएलआई किसके पास जा रही है सारी जो
1:29:08पीएलआई चला रहे हैं हम सोलर पे चला रहे
1:29:10हैं बैटरीज पे चला रहे हैं
1:29:12मोबाइल्स पे किसके पास बड़ी बड़ी कंपनी तो
1:29:14बड़ी कंपनी के पास पैसा चला जाता सरकार का
1:29:18और छोटी कंपनी मैंने कहा बात तो उनको ये
1:29:21प्रोग्राम है तुम्हारा वो प्रोग्राम है
1:29:23उनका बजट क्या है
1:29:26तो उन्हें कुछ मिलता ही नहीं तो बड़ी कैसे
1:29:28होंगी छोटी कंपनीज बड़ी कैसे होंगी
1:29:30वो वो वो दूसरा मुद्दा है बट छोटी कंपनी अ
1:29:36टेक्निकली नॉर्मली आर नॉट वेरी एडवांस्ड
1:29:39दे डोंट हैव एनी दे आर नियरर टू कस्टमर हम
1:29:43सो दे प्रोवाइड बेटर सर्विस आइडली जो छोटी
1:29:48कंपनी है वो
1:29:51वो भी कॉम्पिटिटिव होने चाहिए क्योंकि उस
1:29:53स्पेस में अब आप रेलवे से आपके घर नहीं जा
1:29:57सकते। रेलवे स्टेशन से अपने घर आप ऑटो में
1:29:59ही जाएंगे।
1:30:00हम
1:30:00सो
1:30:02बड़ा बिजनेस जो है वो बड़ा काम कर पाता
1:30:04है। छोटे बिजनेस का ऑटो भी प्रॉफिटेबल
1:30:07बिनेस है। राइट? तो स्मॉल जो एसएमईस हैं
1:30:11वो अगर अपने स्पेस में काम करती हैं ऑफ
1:30:14कोर्स वो छोटी उनकी संख्या बहुत ज्यादा
1:30:17है। देश में करीब आठ 9 करोड़ ये दुकानों
1:30:21से लेके सब छोटे-मोटे बड़े बिनेसे छोटे
1:30:24बिनेसेस हैं। तो वो जितनी सेवा करते हैं
1:30:28उनमें से काफी प्रॉफिटेबल भी हैं। वो वो
1:30:30लॉसेस में नहीं है।
1:30:31हम
1:30:32राइट? तो उनको मदद
1:30:36सरकार कर सकती है। देखिए उनकी तो उनकी जो
1:30:40समस्याएं उसको दूर करके फॉर एग्जांपल
1:30:44एक एक चीज म आप आश्चर्य करेंगे कि छोटे
1:30:50बिजनेस की आइडेंटिटी नहीं है।
1:30:52हम
1:30:54छोटे बिज़नेस की क्या आइडेंटिटी है?
1:30:57कुछ भी नहीं। सो और हमने देश में आज तक
1:31:00ऐसी व्यवस्था नहीं बनाई कि छोटे बिजनेस की
1:31:03सबकी एक आइडेंटिटी क्रिएट कर दे।
1:31:05आइडेंटिटी क्रिएट नहीं कर सकते तो उनको
1:31:08फिर लोनस भी नहीं मिलते और छोटे लोन से तो
1:31:12बैंक्स भी नहीं देते उनको। तो उनकी उनको
1:31:15फाइनेंस की अवेलेबिलिटी बहुत बहुत कमजोर
1:31:19है। उनके पास इक्विटी नहीं होती। सो देश
1:31:23में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि स्मॉल
1:31:26बिजनेसेस को कैपिटल मिल सके। सो ना
1:31:28आइडेंटिटी है ना कैपिटल है ना ढंग के लोंस
1:31:31हैं ना वर्किंग कैपिटल है। तो वो जो एरिया
1:31:35है
1:31:36हम
1:31:36अब कोरोना के टाइम में ये बहुत सारे
1:31:39बिनेसेस बंद हो गए। क्योंकि उनके पास तो
1:31:42कुछ वो तो रोज कमाते हैं ज्यादातर और रोज
1:31:44खाते हैं। अगर आप उनको कह दीजिए कि भाई आप
1:31:47काम नहीं करेंगे। आप घर से नहीं निकलेंगे
1:31:49तो वो ना तो वेंडर की काम करेगा ना दुकान
1:31:52पर बेच पाएगा ना कोई अपना छोटा-मोटा पकोड़े
1:31:54बनाएगा व्हाटएवर कुछ वो सब नहीं कर पाएगा
1:31:57तो उसका तो धंधा बंद और उसका वो काम बंद
1:32:00तो उसके पास कुछ भी खाने पीने
1:32:02सो आपकी सेंसिटिविटी
1:32:05इन बिनेसेस के प्रति और इनको
1:32:11मैंने कहा आइडेंटिटी कोई ऐसी व्यवस्था
1:32:13करें जिसे कैपिटल भी मिल सके जरूरत पड़े
1:32:16लोंस मिल सके वर्किंग िंग कैपिटल मिल सके
1:32:19और उनके उनको अपना बिजनेस करने का मौका
1:32:22दिया जाए। वो कोई पुलिसमैन ही आके उसको
1:32:25किसी को यहां से उठा देता है। कभी वहां
1:32:26भेज देता है। दे दे आर इन अ वेरी बैड शेप।
1:32:31वी शुड डू समथिंग अबाउट।
1:32:33एंड व्हाई आर वी नॉट? हमारी सेंसिटिविटी
1:32:35नहीं है। हम अभी भी बहुत कुछ फ्यूडल है।
1:32:40हम हमारा दिमाग जो है अभी भी ये जो छोटा
1:32:45वर्ग है या छोटे बिजनेसेस हैं उनको ना
1:32:49समझता है ना उनके साथ सिंपैथी रखता है।
1:32:53अ बहुत आसान है। एक वेंडर को उसके ठेले को
1:32:59हटा देना बिना समझे कि इसके इस इस पे क्या
1:33:02इसका इंपैक्ट होगा। हम क्यों इतनी स्लम्स
1:33:05हमारे देश में बनती है?
1:33:08यह स्लम्स कहां से शुरू होती है?
1:33:12क्यों हम
1:33:14ऐसी स्थिति नहीं क्रिएट करते कि आदमी अपनी
1:33:17बेरोजगारी
1:33:20अपना छोटा बिजनेस कर सकता है।
1:33:21क्यों नहीं करते? क्यों स्लम्स बनते हैं?
Increase in slums
1:33:25अब और बहुत डीपर हमारे सोशल स्ट्रक्चर है
1:33:29या हमारे प्रज है या हमने कितनी एजुकेशन
1:33:36स्टैंडर्ड क्या हमने इंस्टीटशंस क्रिएट
1:33:38किए उनके लिए नहीं किए ये जो अभी थोड़ी
1:33:41देर म दीज़ अ वेरी कॉम्प्लेक्स
1:33:44सिचुएशन बट जब तक हम इनको सो आउट नहीं
1:33:48करेंगे
1:33:49तो वो जो हम हवाहवा में बात करते रहते हैं
1:33:53कि भ ये हम तो इतनी बड़ी इकॉनमी हो गए
1:33:55थर्ड हो जाएंगे फोर्थ हो जाएंगे ये हो
1:33:57जाएगा वो हो जाएगा
1:34:00देश का जो एक बड़ा वर्ग है देश की जो
1:34:04मेजॉरिटी है उसकी लाइफ में उतना परिवर्तन
1:34:07नहीं आएगा जितना आना चाहिए
1:34:10गॉट इट हमारा फोकस
1:34:14कैपिटल जो हमारे गवर्नमेंट के जो रेवेन्यू
1:34:16आती है गवर्नमेंट के जो पैसा आता है
1:34:17हम
1:34:18उसको इस तरीके से हम यूज करते हैं जिससे
1:34:21वोट्स आए कि उसको इस तरीके से यूज़ करते
1:34:24हैं जिससे कंट्री की ग्रोथ हो। ज्यादा
1:34:26फोकस कहां होता है?
1:34:27पिटिकल लेंस इस बात को स्क्रूटनाइज करता
1:34:30है कि इससे पॉलिटिकली फायदा है नहीं। अगर
1:34:33कोई चीज की जाए जिससे पॉलिटिकली भी फायदा
1:34:37है और कंट्री को भी फायदा है तो वो उसमें
1:34:40कोई आपत्ति नहीं। प्रायोरिटी
1:34:42लेकिन जहां कॉन्फ्लिक्ट हो वहां पे अभी भी
1:34:44हम जो पिटिकली फायदे वाली चीज है उसको हम
1:34:49ज्यादा प्रेफरेंस देते हैं।
1:34:50हमको फाइनेंस इकोनॉमिक्स से कोई मतलब नहीं
1:34:53है।
1:34:53नहीं मतलब नहीं ऐसा नहीं कह रहा हूं। उसको
1:34:55प्रेफरेंस देते हैं।
1:34:56बट ऐसे ओवरऑल जब बजट प्रिपेयर करते हो
Main objective of budget
1:34:58बिकॉज़ यू हैव बीन पार्ट ऑफ़ बजट।
1:35:00हम
1:35:01मेन ऑब्जेक्टिव ये होता है कि सब लोग खुश
1:35:03होने चाहिए कि मेन ऑब्जेक्टिव ये होता है
1:35:05कि यार देश आगे इस तरीके से जाना चाहिए।
1:35:09होना तो यही चाहिए कि देश आगे जाए बट यह
1:35:11भी सत्य है कि
1:35:14जितने बहुजन सुखा है बहुजनता है तो वो
1:35:18वाला जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग आपसे
1:35:20इंप्रेस हो जाए
1:35:21तो आप लोगों को ये मैंडेट होता है कि ऐसा
1:35:23कुछ बनाओ जिससे लोग खुश हो
1:35:25आप अगर
1:35:27बजट स्पीच को पढ़ें तो बजट स्पीच तो सिर्फ
1:35:30इसी दृष्टिकोण से आजकल लिखी जाती है के
1:35:34ज्यादातर लोग आपसे खुश हो
1:35:37वो मैंडेट
1:35:39और जो देश की नीतिगत और वो सारे वो बाकी
1:35:42और बजट डॉक्यूमेंट्स में चले जाते हैं।
1:35:44छुपा के डाल देते हैं। [हंसी]
1:35:47पर सर
1:35:49पॉपकर्न पे जीएसटी लगना तो
1:35:52जीएसटी पॉपकॉर्न पे लगती है।
1:35:54जो डिस्टिंशन है
1:35:55डिस्टिंशन है। हां
1:35:56ए बी सी डी डी इतने तरह के पॉपकॉर्न में
1:35:59अलग-अलग
1:35:59हां कैरेमेल में अलग लगेगा। अर्थ में अलग
1:36:01लगेगा। दिस इज़ टेकिंग दी अह अह निट दिस इज़
1:36:06निट पिकिंग ऑफ़ हाईएस्ट ऑर्डर इफ आई से।
1:36:09नेट पिकिंग नहीं शुगर के ऊपर बढ़ाया तो
1:36:11दैट्स व्हाई इट जस्ट बीम अ थिंग राइट?
1:36:13हमें मूव करना चाहिए कि ज्यादातर चीज़ों पे
1:36:17एक रेट हो।
1:36:17हां।
1:36:18हम एक ही चीज पे पांच रेट करने की तरफ जा
1:36:20रहे हैं। दैट इज दे दैट इज प्रॉब्लम।
1:36:24गॉट इट। परफेक्ट सर। थैंक यू सो मच फॉर
1:36:27हैविंग अ कन्वर्सेशन विथ मी। मजा आया मुझे
1:36:29बहुत सारी चीजें बात करके।
1:36:31आई होप यू फाउंड इट इंटरेस्टिंग।
1:36:33या आई फाउंड इंटरेस्टिंग। दैट्स व्हाई
1:36:34इतनी देर तक चला ये मजा हो रहा।
1:36:38सो
1:36:39बट गुड। थैंक यू सो मच फॉर डूइंग दिस।
BTS
1:36:41थैंक यू।
1:36:41आई एंजॉय टॉकिंग टू स्पेशली आईएएस
1:36:44ऑफिसर्स। लाइक रियली बिकॉज़ ना
1:36:48हर बार उनसे बात करो। आपको फैसनेट करते
1:36:50हैं। हर आईएएस ऑफिसर फैसनेट्स यू बिकॉज़
1:36:52देयर [संगीत] नॉलेज लाइक श्योर नॉलेज
1:36:55ऑफ
1:36:57हाउ इन डेप्थ दे नो अबाउट सर्टेन थिंग्स
1:36:59इट्स अमेजिंग।
1:37:00आपको वो पढ़नी चाहिए थी मेरी किताब। वी
1:37:02आल्सो मेक पॉलिसी।
1:37:03हां नो जो वी आल्सो मेक पॉलिसी में बहुत
1:37:06सारे सवाल है मेरे। मैं पूछूंगा बीच में
Outro
1:37:08आपसे। थैंक यू सो मच ये एपिसोड एंड तक
1:37:10देखने के लिए। अब आपको तीन चीजें करनी है।
1:37:13सबसे पहले इस चैनल को सब्सक्राइब कर लो
1:37:15क्योंकि जितना आप सब्सक्राइब करोगे उतने
1:37:17ही बेहतर और वैल्यूुएबल गेस्ट हम ला
1:37:20पाएंगे आपके लिए। नंबर टू मुझे कमेंट्स
1:37:22में बताओ इस एपिसोड में आपको क्या अच्छा
1:37:24लगा और क्या गंदा लगा ताकि हम वो
1:37:25मिस्टेक्स रिपीट ना कर पाए। एंड कौन से
1:37:28ऐसे गेस्ट हैं जो आप देखना चाहते हो वापस
1:37:30हमारे पॉडकास्ट पे ताकि हम उन्हें लेके आए
1:37:33और आपको ज्यादा से ज्यादा वैल्यू दे पाए।
1:37:35एंड नंबर थ्री यह एपिसोड किसी एक इंसान के
1:37:37साथ जरूर शेयर करना क्योंकि वन
1:37:39कॉन्वर्सेशन कैन चेंज समवनस लाइफ। आई विल
1:37:42सी यू नेक्स्ट टाइम। अनटिल देन कीप
1:37:44फिगरिंग आउट।
1:37:46[संगीत]
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