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0:00मैं
0:02गोभी मैं आज भी दरिया पर जा रहा हूं।
0:05अल्लाह ने चाहा तो कुछ अच्छा सामान
0:06मिलेगा। फिर शाम को बाजार से घर का राशन
0:09ले आऊंगा।
0:10एहतियात से जाना और कोशिश करना आज कुछ
0:13ज्यादा सामान मिल जाए ताकि घर का खर्चा
0:15आसानी से चल जाए।
0:17बस तुम दुआ करना।
0:20आज फिर दरिया की तरफ निकल पड़ा हूं। रोज
0:24की तरह मेहनत करूंगा। अल्लाह ने चाहा तो
0:26शाम तक घर का खर्च निकल आएगा।
0:30यही मेरा रोजगार है। जितना लोहा और सामान
0:33और सामान मिलेगा उतना ही घर का खर्च चलाने
0:36में आसानी होगी।
0:39हम बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
0:43अब थोड़ा इंतजार करते हैं। शायद अल्लाह
0:46कोई अच्छी सी चीज मेरे हाथ लगा दे।
1:01वाह आज तो खासा सामान निकला है। इनको भी
1:04बाजार ले जाकर बेचूंगा। घर का खर्च आसानी
1:06से चल जाएगा। चलो एक बार फिर कोशिश करते
1:10हैं। शायद इस बार कुछ और सिक्के और बड़े
1:13लोहे के टुकड़े मिल जाए।
1:18वाह आज तो अच्छी खासी चीजें इकट्ठी हो गई
1:21हैं। पहले इनमें से सिक्के अलग करूंगा फिर
1:24बाकी सामान मार्केट में जाकर बेच दूंगा।
1:27चलो पहले सिक्के अलग कर लेता हूं। फिर
1:29बाकी लोहा अलग कर दूंगा। हम यह तो हमारी
1:33कंट्री का नहीं लग रहा। चलो इसे भी लोहे
1:36के साथ बेच दूंगा। यह तो यहां की दुकानों
1:38पर चल जाएंगे। यह सारे सिक्के मेरे काम के
1:41हैं। बाकी सिक्के यहां नहीं चलेंगे।
1:43इन्हें भी कबाड़ में बेच दूंगा। अच्छे
1:45पैसे मिल जाएंगे।
1:51भाई, यह कुछ लोहा मुझे बेचना है।
1:57भाई, यह सामान बाल्टी से निकाल लेना और
1:59मेरी बाल्टी मुझे वापस कर देना। आलू भाई,
2:02फिर आपका वजन 3.5 किलो बनेगा और आपको ₹500
2:05मिलेंगे। ठीक है भाई।
2:09आज तो सही दिहाड़ी बन गई। 500 का लोहा बिक
2:12गया और ₹100 के सिक्के भी निकल आए। चलो घर
2:14के लिए थोड़ा बहुत राशन ले जाता हूं।
2:23भाई मुझे दाल, आटा और घी का एक छोटा पैक
2:25भी दे दो। जी।
2:27पापा आ गए। पापा आ गए।
2:30मेरा बेटा पूरा दिन मेरा इंतजार करता रहा
2:33होगा।
2:34ये लीजिए पानी पी लीजिए।
2:37पापा पापा आप मेरे लिए कॉपी और पेंसिल
2:39क्यों नहीं लेकर आए?
2:40ओहो बेटा आज मैं भूल गया। कल इंशाल्लाह ले
2:43आऊंगा।
2:44जी आज आपका काम कैसा रहा?
2:46रानी अल्लाह का बड़ा शुक्र है। अल्लाह ने
2:49जिस हाल में भी रखा है
2:51आलू हमारे हालात कब बदलेंगे?
2:53रानी हमें पता भी नहीं चलेगा और हमारे
2:55हालात बदल जाएंगे।
2:56अब्बू आप दरिया से सामान निकालते हैं तो
2:59कभी आपको कोई कीमती चीज नहीं मिली।
3:01बेटा मेहनत करने वाले को अल्लाह कभी मायूस
3:03नहीं करता। इंशाल्लाह अल्लाह एक दिन जरूर
3:05खैर करेगा।
3:09आलू जल्दी उठ जाओ। सुबह हो गई है। तुम्हें
3:12काम पर भी जाना है।
3:13ओहो आज तो लगता है मैं काफी लेट हो गया।
3:19ठीक है गोपी फिर हम शाम को मिलेंगे।
3:21ओहो नाश्ता तो करते जाओ आलू।
3:24नहीं अभी टाइम नहीं है मेरे पास। आज तो
3:27वाकई लेट हो गया।
3:31चलो अब जल्दी से रस्सी को मैग्नेट से
3:33बांधता हूं और काम शुरू करता हूं।
3:37या अल्लाह मेरे बच्चों की जरूररियात भी
3:40बहुत हैं। घर के खर्चे भी बहुत हैं। आज
3:43कोई करम कर दे।
3:46चलो देखते हैं। इंतजार करते हैं। दरिया ने
3:49अपने अंदर मेरे नसीब के लिए क्या छुपा रखा
3:52है। शायद आज अल्लाह मेरे नसीब में कुछ
3:55अच्छा लिख दे। चलो बहुत वक्त हो गया। अब
3:59रस्सी को ऊपर खींचता हूं। यह क्या हो गया?
4:02यह ऊपर क्यों नहीं आ रही?
4:09अब मुझे दरिया के अंदर जाकर देखना होगा कि
4:12मेरा मकनातीस कहां फंस गया है। अगर यह गुम
4:15गया तो मैं क्या करूंगा? या अल्लाह तूने
4:18मुझे किस इम्तिहान में डाल दिया। अब मुझे
4:21हर हाल में दरिया के अंदर जाकर अपना
4:23मैग्नेट वापस लेकर आना होगा।
4:27यह बाइक यहां कहां से आ गई? क्या अल्लाह
4:30ने मेरी दुआ कबूल कर ली?
4:33लेकिन मैं इसे ऊपर कैसे लेकर जाऊंगा?
4:36पहले मुझे मैकनातीस को उतारना होगा। उसके
4:39बाद बाइक को ऊपर ले जाने का इंतजाम
4:41करूंगा।
4:42चल उतर भी जा।
4:52[गहरी सांस लेने की आवाज़]
4:59मुझे इस राज के बारे में अभी किसी को नहीं
5:01बताना। मुझे खुद ही इस रस्सी की मदद से
5:03बाइक बाहर निकालनी होगी। हम पहले इसका एक
5:08किनारा दरख्त से बांध देता हूं। फिर दूसरे
5:10किनारे को बाइक से बांधकर इसे ऊपर
5:13खींचूंगा।
5:21बस थोड़ी देर और फिर यह और फिर यह बाइक
5:24दरिया के किनारे पर होगी।
5:31अब जल्दी से रस्सी खोलता हूं। फिर पूरी
5:34ताकत से बाइक ऊपर खींचूंगा।
5:37अम्मी अम्मी अब्बू अभी तक नहीं आए। दोपहर
5:40हो गई है।
5:41और वो खाना भी नहीं खा कर गए। बेटा तुम
5:43परेशान ना हो। वो अभी आ जाएंगे।
5:47[कराहने की आवाज़]
5:48बस थोड़ा सा और
5:54आखिरकार मैंने कर ही दिखाया।
5:58यह तो आज के लिहाज से बहुत पुरानी लग रही
6:00है। आखिर यह बाइक दरिया में आई कहां से?
6:07इतनी भारी बाइक को घर तक ले जाना भी अपने
6:10आप में एक इम्तिहान है। खैर, इसे ऐसे
6:12अकेला भी नहीं छोड़ सकता। इसे घर ले जाना
6:15ही होगा।
6:18आलू यह कहां से ले आए?
6:20गोभी ये अल्लाह का हम पर खास करम है। यह
6:22दरिया के अंदर मेरे मकनातीस के साथ चिपकी
6:24हुई मिली थी। [हंसी]
6:26आलू तुम इसे लोहे के रेट पर बेच आते अच्छे
6:29पैसे मिल जाते।
6:31नहीं गोभी मेरा दिल नहीं माना। मैंने सोचा
6:33इसे संवार कर बेचूंगा तो अच्छी कीमत
6:35मिलेगी। देखो गोभी नीचे से सुर्ख रंग
6:38कितना प्यारा लग रहा है। लगता है यह कभी
6:41सुर्ख रंग की हुआ करती थी।
6:43हां आलू तुम ठीक कहते अब तो यह अच्छे
6:45दामों बिक जाएगी।
6:46देखो गोभी अब हमारी बाइक कितनी प्यारी लग
6:49रही है। एक लम्हा गोभी यह सुनहरा रंग यहां
6:53से कैसे नजर आ रहा है। गोभी ना जाने क्यों
6:58दिल कहता है इसका रंग उतार कर देखना
7:00चाहिए।
7:00शायद कोई राज छुपा हो। देख लेते हैं आलू।
7:03शायद इस बाइक में हमारे लिए कोई भलाई छुपी
7:06हो।
7:06या अल्लाह पाक करम फरमा। गोभी यह तो सोना
7:10लग रहा है। हमें इसका सारा रंग उतारना
7:13होगा। हो सकता है पूरी बाइक ही सोने की
7:16हो।
7:20गोभी, हमें जल्दी नहीं करनी। किसी माहिर
7:23को बुलाकर पहले उसकी जांच करवानी चाहिए।
7:27आलू, यह तुम्हें कहां से मिली? यह तो कोई
7:30आम मोटरसाइकिल नहीं लगती। यह मुझे दरिया
7:32से मिली है। शुरू में तो यह जंग से भरी
7:34हुई बिल्कुल कबाड़ जैसी लग रही थी।
7:40आलू या आम मोटरसाइकिल नहीं यह नायाब और
7:43खालिस सोने से बनी है। इसे कम दामों में
7:45हरगिज़ ना बेचना।
7:53तो फिर मुझे अभी इसका काम करवाना चाहिए।
7:56भाई क्या तुम्हें पता है आलू को दरिया में
7:59से सोने की मोटरसाइकिल मिली है?
8:01भाई आलू की मोटरसाइकिल तो खालिस सोने की
8:04है। इसकी चमक तो आंखों को खीरा कर देती
8:06है।
8:07पापा मोटरसाइकिल ठीक हो जाए तो हम इसे रख
8:10लेंगे।
8:11बेटा पहले इसकी सही कीमत मालूम करेंगे।
8:14फिर समझदारी से फैसला करेंगे।
8:21अगर तुम यह मोटरसाइकिल बेचना चाहो तो मैं
8:23तुम्हें पूरे ₹5 लाख देने को तैयार हूं।
8:26बैगन ₹ लाख इस मोटरसाइकिल के लिए बहुत कम
8:30है। आलू मैं तुम्हें इस मोटरसाइकिल के
8:32पूरे ₹1 लाख देने को तैयार हूं।
8:34₹1 लाख
8:39आलू मैं तुम्हें इस मोटरसाइकिल की वो कीमत
8:42दूंगा जो इन सब में से कोई नहीं देगा।
8:45क्या?
8:49आलू यह तुम्हारी मोटरसाइकिल की पूरी ₹1
8:52करोड़ की कीमत है।
8:53आलू आलू [नाक से की जाने वाली आवाज़] आज
8:55अल्लाह ने हमारी सुन ली।
8:57हम इन पैसों को जाया नहीं करेंगे। हम इन
8:59पैसों से अपना छोटा घर ठीक करेंगे और मैं
9:01अपना नया कारोबार शुरू करूंगा।
9:04हां, हम मिलकर अपनी जिंदगी बेहतर बनाएंगे।
9:08[हंसी]
9:09मुझे यकीन नहीं आ रहा। मैंने सोचा भी नहीं
9:11था कि दरिया से मिलने वाली एक पुरानी बाइक
9:14हमें यहां तक पहुंचा देगी।
9:17मेहनत, सब्र और सही वक्त पर मिलने वाले
9:20मौका की कदर करो। क्योंकि किस्मत कभी भी
9:24जिंदगी बदलने वाला रास्ता दिखा सकती है।