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Aloo Found a Golden Bike | Emotional & Inspirational Animated Story | The Story Cafe |

The Story Cafe · 1,276 words · 6 min read

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0:00मैं

0:02गोभी मैं आज भी दरिया पर जा रहा हूं।

0:05अल्लाह ने चाहा तो कुछ अच्छा सामान

0:06मिलेगा। फिर शाम को बाजार से घर का राशन

0:09ले आऊंगा।

0:10एहतियात से जाना और कोशिश करना आज कुछ

0:13ज्यादा सामान मिल जाए ताकि घर का खर्चा

0:15आसानी से चल जाए।

0:17बस तुम दुआ करना।

0:20आज फिर दरिया की तरफ निकल पड़ा हूं। रोज

0:24की तरह मेहनत करूंगा। अल्लाह ने चाहा तो

0:26शाम तक घर का खर्च निकल आएगा।

0:30यही मेरा रोजगार है। जितना लोहा और सामान

0:33और सामान मिलेगा उतना ही घर का खर्च चलाने

0:36में आसानी होगी।

0:39हम बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।

0:43अब थोड़ा इंतजार करते हैं। शायद अल्लाह

0:46कोई अच्छी सी चीज मेरे हाथ लगा दे।

1:01वाह आज तो खासा सामान निकला है। इनको भी

1:04बाजार ले जाकर बेचूंगा। घर का खर्च आसानी

1:06से चल जाएगा। चलो एक बार फिर कोशिश करते

1:10हैं। शायद इस बार कुछ और सिक्के और बड़े

1:13लोहे के टुकड़े मिल जाए।

1:18वाह आज तो अच्छी खासी चीजें इकट्ठी हो गई

1:21हैं। पहले इनमें से सिक्के अलग करूंगा फिर

1:24बाकी सामान मार्केट में जाकर बेच दूंगा।

1:27चलो पहले सिक्के अलग कर लेता हूं। फिर

1:29बाकी लोहा अलग कर दूंगा। हम यह तो हमारी

1:33कंट्री का नहीं लग रहा। चलो इसे भी लोहे

1:36के साथ बेच दूंगा। यह तो यहां की दुकानों

1:38पर चल जाएंगे। यह सारे सिक्के मेरे काम के

1:41हैं। बाकी सिक्के यहां नहीं चलेंगे।

1:43इन्हें भी कबाड़ में बेच दूंगा। अच्छे

1:45पैसे मिल जाएंगे।

1:51भाई, यह कुछ लोहा मुझे बेचना है।

1:57भाई, यह सामान बाल्टी से निकाल लेना और

1:59मेरी बाल्टी मुझे वापस कर देना। आलू भाई,

2:02फिर आपका वजन 3.5 किलो बनेगा और आपको ₹500

2:05मिलेंगे। ठीक है भाई।

2:09आज तो सही दिहाड़ी बन गई। 500 का लोहा बिक

2:12गया और ₹100 के सिक्के भी निकल आए। चलो घर

2:14के लिए थोड़ा बहुत राशन ले जाता हूं।

2:23भाई मुझे दाल, आटा और घी का एक छोटा पैक

2:25भी दे दो। जी।

2:27पापा आ गए। पापा आ गए।

2:30मेरा बेटा पूरा दिन मेरा इंतजार करता रहा

2:33होगा।

2:34ये लीजिए पानी पी लीजिए।

2:37पापा पापा आप मेरे लिए कॉपी और पेंसिल

2:39क्यों नहीं लेकर आए?

2:40ओहो बेटा आज मैं भूल गया। कल इंशाल्लाह ले

2:43आऊंगा।

2:44जी आज आपका काम कैसा रहा?

2:46रानी अल्लाह का बड़ा शुक्र है। अल्लाह ने

2:49जिस हाल में भी रखा है

2:51आलू हमारे हालात कब बदलेंगे?

2:53रानी हमें पता भी नहीं चलेगा और हमारे

2:55हालात बदल जाएंगे।

2:56अब्बू आप दरिया से सामान निकालते हैं तो

2:59कभी आपको कोई कीमती चीज नहीं मिली।

3:01बेटा मेहनत करने वाले को अल्लाह कभी मायूस

3:03नहीं करता। इंशाल्लाह अल्लाह एक दिन जरूर

3:05खैर करेगा।

3:09आलू जल्दी उठ जाओ। सुबह हो गई है। तुम्हें

3:12काम पर भी जाना है।

3:13ओहो आज तो लगता है मैं काफी लेट हो गया।

3:19ठीक है गोपी फिर हम शाम को मिलेंगे।

3:21ओहो नाश्ता तो करते जाओ आलू।

3:24नहीं अभी टाइम नहीं है मेरे पास। आज तो

3:27वाकई लेट हो गया।

3:31चलो अब जल्दी से रस्सी को मैग्नेट से

3:33बांधता हूं और काम शुरू करता हूं।

3:37या अल्लाह मेरे बच्चों की जरूररियात भी

3:40बहुत हैं। घर के खर्चे भी बहुत हैं। आज

3:43कोई करम कर दे।

3:46चलो देखते हैं। इंतजार करते हैं। दरिया ने

3:49अपने अंदर मेरे नसीब के लिए क्या छुपा रखा

3:52है। शायद आज अल्लाह मेरे नसीब में कुछ

3:55अच्छा लिख दे। चलो बहुत वक्त हो गया। अब

3:59रस्सी को ऊपर खींचता हूं। यह क्या हो गया?

4:02यह ऊपर क्यों नहीं आ रही?

4:09अब मुझे दरिया के अंदर जाकर देखना होगा कि

4:12मेरा मकनातीस कहां फंस गया है। अगर यह गुम

4:15गया तो मैं क्या करूंगा? या अल्लाह तूने

4:18मुझे किस इम्तिहान में डाल दिया। अब मुझे

4:21हर हाल में दरिया के अंदर जाकर अपना

4:23मैग्नेट वापस लेकर आना होगा।

4:27यह बाइक यहां कहां से आ गई? क्या अल्लाह

4:30ने मेरी दुआ कबूल कर ली?

4:33लेकिन मैं इसे ऊपर कैसे लेकर जाऊंगा?

4:36पहले मुझे मैकनातीस को उतारना होगा। उसके

4:39बाद बाइक को ऊपर ले जाने का इंतजाम

4:41करूंगा।

4:42चल उतर भी जा।

4:52[गहरी सांस लेने की आवाज़]

4:59मुझे इस राज के बारे में अभी किसी को नहीं

5:01बताना। मुझे खुद ही इस रस्सी की मदद से

5:03बाइक बाहर निकालनी होगी। हम पहले इसका एक

5:08किनारा दरख्त से बांध देता हूं। फिर दूसरे

5:10किनारे को बाइक से बांधकर इसे ऊपर

5:13खींचूंगा।

5:21बस थोड़ी देर और फिर यह और फिर यह बाइक

5:24दरिया के किनारे पर होगी।

5:31अब जल्दी से रस्सी खोलता हूं। फिर पूरी

5:34ताकत से बाइक ऊपर खींचूंगा।

5:37अम्मी अम्मी अब्बू अभी तक नहीं आए। दोपहर

5:40हो गई है।

5:41और वो खाना भी नहीं खा कर गए। बेटा तुम

5:43परेशान ना हो। वो अभी आ जाएंगे।

5:47[कराहने की आवाज़]

5:48बस थोड़ा सा और

5:54आखिरकार मैंने कर ही दिखाया।

5:58यह तो आज के लिहाज से बहुत पुरानी लग रही

6:00है। आखिर यह बाइक दरिया में आई कहां से?

6:07इतनी भारी बाइक को घर तक ले जाना भी अपने

6:10आप में एक इम्तिहान है। खैर, इसे ऐसे

6:12अकेला भी नहीं छोड़ सकता। इसे घर ले जाना

6:15ही होगा।

6:18आलू यह कहां से ले आए?

6:20गोभी ये अल्लाह का हम पर खास करम है। यह

6:22दरिया के अंदर मेरे मकनातीस के साथ चिपकी

6:24हुई मिली थी। [हंसी]

6:26आलू तुम इसे लोहे के रेट पर बेच आते अच्छे

6:29पैसे मिल जाते।

6:31नहीं गोभी मेरा दिल नहीं माना। मैंने सोचा

6:33इसे संवार कर बेचूंगा तो अच्छी कीमत

6:35मिलेगी। देखो गोभी नीचे से सुर्ख रंग

6:38कितना प्यारा लग रहा है। लगता है यह कभी

6:41सुर्ख रंग की हुआ करती थी।

6:43हां आलू तुम ठीक कहते अब तो यह अच्छे

6:45दामों बिक जाएगी।

6:46देखो गोभी अब हमारी बाइक कितनी प्यारी लग

6:49रही है। एक लम्हा गोभी यह सुनहरा रंग यहां

6:53से कैसे नजर आ रहा है। गोभी ना जाने क्यों

6:58दिल कहता है इसका रंग उतार कर देखना

7:00चाहिए।

7:00शायद कोई राज छुपा हो। देख लेते हैं आलू।

7:03शायद इस बाइक में हमारे लिए कोई भलाई छुपी

7:06हो।

7:06या अल्लाह पाक करम फरमा। गोभी यह तो सोना

7:10लग रहा है। हमें इसका सारा रंग उतारना

7:13होगा। हो सकता है पूरी बाइक ही सोने की

7:16हो।

7:20गोभी, हमें जल्दी नहीं करनी। किसी माहिर

7:23को बुलाकर पहले उसकी जांच करवानी चाहिए।

7:27आलू, यह तुम्हें कहां से मिली? यह तो कोई

7:30आम मोटरसाइकिल नहीं लगती। यह मुझे दरिया

7:32से मिली है। शुरू में तो यह जंग से भरी

7:34हुई बिल्कुल कबाड़ जैसी लग रही थी।

7:40आलू या आम मोटरसाइकिल नहीं यह नायाब और

7:43खालिस सोने से बनी है। इसे कम दामों में

7:45हरगिज़ ना बेचना।

7:53तो फिर मुझे अभी इसका काम करवाना चाहिए।

7:56भाई क्या तुम्हें पता है आलू को दरिया में

7:59से सोने की मोटरसाइकिल मिली है?

8:01भाई आलू की मोटरसाइकिल तो खालिस सोने की

8:04है। इसकी चमक तो आंखों को खीरा कर देती

8:06है।

8:07पापा मोटरसाइकिल ठीक हो जाए तो हम इसे रख

8:10लेंगे।

8:11बेटा पहले इसकी सही कीमत मालूम करेंगे।

8:14फिर समझदारी से फैसला करेंगे।

8:21अगर तुम यह मोटरसाइकिल बेचना चाहो तो मैं

8:23तुम्हें पूरे ₹5 लाख देने को तैयार हूं।

8:26बैगन ₹ लाख इस मोटरसाइकिल के लिए बहुत कम

8:30है। आलू मैं तुम्हें इस मोटरसाइकिल के

8:32पूरे ₹1 लाख देने को तैयार हूं।

8:34₹1 लाख

8:39आलू मैं तुम्हें इस मोटरसाइकिल की वो कीमत

8:42दूंगा जो इन सब में से कोई नहीं देगा।

8:45क्या?

8:49आलू यह तुम्हारी मोटरसाइकिल की पूरी ₹1

8:52करोड़ की कीमत है।

8:53आलू आलू [नाक से की जाने वाली आवाज़] आज

8:55अल्लाह ने हमारी सुन ली।

8:57हम इन पैसों को जाया नहीं करेंगे। हम इन

8:59पैसों से अपना छोटा घर ठीक करेंगे और मैं

9:01अपना नया कारोबार शुरू करूंगा।

9:04हां, हम मिलकर अपनी जिंदगी बेहतर बनाएंगे।

9:08[हंसी]

9:09मुझे यकीन नहीं आ रहा। मैंने सोचा भी नहीं

9:11था कि दरिया से मिलने वाली एक पुरानी बाइक

9:14हमें यहां तक पहुंचा देगी।

9:17मेहनत, सब्र और सही वक्त पर मिलने वाले

9:20मौका की कदर करो। क्योंकि किस्मत कभी भी

9:24जिंदगी बदलने वाला रास्ता दिखा सकती है।

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