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0:01दोस्तों अगर आपने कैप्टन ब्रूनो का
0:03ऑफिशियल ट्रेलर अभी तक नहीं देखा तो अभी
0:06और मोकीमो टीवी को सब्सक्राइब करें। लिंक
0:08डिस्क्रिप्शन में है।
0:14आलू बेटा आज जरा तुम दुकान पर खड़े हो
0:17जाओ। मेरी तबीयत पहले जैसी ठीक नहीं लग
0:21रही।
0:25आप बिल्कुल फिक्र ना करें। अब मैं आपके
0:27साथ दुकान का हर काम दिल से संभालूंगा।
0:33बेटा मेहनत करना जरूर मगर इस दुकान की
0:37सबसे बड़ी पहचान हमेशा हमारी ईमानदारी
0:41होनी चाहिए।
0:43दादू मैं आपको कभी मायूस नहीं करूंगा। मैं
0:46पूरी कोशिश करूंगा कि आपकी दुकान का नाम
0:50हमेशा इज्जत के साथ आगे बढ़ाऊं।
0:56दादू आपके गोश्त का मयार हमेशा अच्छा रहता
0:59है। इसीलिए हम बरसों से यहीं आते हैं।
1:06दद्दू आप आराम से बैठे और आराम करें। मैं
1:09सारा काम कर रहा हूं। आप बेफिक्र हो जाएं।
1:16यह लीजिए सर आपका 1 किलो गोश्त।
1:26दद्दू की दुकान अच्छी है, लेकिन अगर यह
1:29बड़ी हो जाए तो हमारी कमाई भी कई गुना बढ़
1:31सकती है।
1:37अगर हम अपनी दुकान को बड़ा करें और ज्यादा
1:40सामान रखें तो हमारी कमाई भी ज्यादा होगी।
1:42बेटा, दुकान बड़ी करने का ख्वाब अच्छा है,
1:48लेकिन तरक्की हमेशा सही रास्ते और
1:50ईमानदारी से ही हासिल करना हो। अच्छा।
1:56दद्दू, बाहर वाली बड़ी दुकान पर कितना
1:58ज्यादा रश है। अब हमें भी कुछ ऐसा ही करना
2:01होगा।
2:03आलू भाई, मुझे 1 किलो ताजा और जबरदस्त
2:06चिकन दे दो।
2:07हां हां गाजर भाई अभी देता हूं।
2:18हम इस तरह तो रोजाना की कमाई में थोड़ी
2:21इजाफी बचत हो जाएगी। आलू ग्राहक के हक में
2:24कमी मत करना। थोड़ा फायदा आखिरकार बड़े
2:27नुकसान का सबब बनता है।
2:33जी भाई, आपको कितना गोश्त चाहिए? भाई,
2:35मुझे 2 किलो गोश्त कर दो। मगर गोश्त ताजा
2:37और साफ होना चाहिए। 2 किलो गोश्त, 2 किलो
2:40गोश्त अपना मुनाफे रखकर 1 1/2 किलो देना
2:43पड़ेगा।
2:45बहुत शुक्रिया सर आपका। शुक्रिया सर।
2:48आइंदा भी जरूर आइएगा।
2:54हम
2:56आज तो गोश्त भी काफी बच गया है।
2:59बेटा जो गोश्त बच गया है वो कल मत बेचना।
3:03गांव का ऐतबार हमसे उठ जाएगा।
3:04दद्दू फिक्र ना करें। सस्ता बेचेंगे गोश्त
3:07भी बिक जाएगा और हमारा फायदा होगा।
3:23आज से यह चीज मेरी कमाई दुगनी करेगी।
3:26ग्राहक आएंगे और मेरा मुनाफा भी बढ़ेगा।
3:29ग्राहक कैसे आएंगे? कम रेट देखकर आएंगे और
3:33मैं उनका फायदा उठाकर खूब मुनाफा कमाऊंगा।
3:36हम भाई मुझे 2 किलो गोश्त दे दो।
3:40भाई मुझे 1 किलो गोश्त चाहिए। अच्छे-अच्छे
3:42दोस्तों सबको मिलेगा।
3:54वाह आज का काम कल से बहुत जबरदस्त है।
3:59आलू की दुकान पे इतना रश कैसे है? यह ₹450
4:03किलो गोश्त कैसे दे रहा है? मुझे तो दाल
4:05में कुछ काला लग रहा है। वाह, आज तो वक्त
4:08से पहले ही मेरा गोश्त खत्म होने वाला है।
4:12यह नादान जानते ही नहीं कि मैं उन्हें वजन
4:15में कम गोश्त दे रहा।
4:19आज तो पहले से बहुत ज्यादा अच्छी कमाई हुई
4:22है। क्यों ना मैं सुबह खुद मार्केट विजिट
4:24करूं। हो सकता है मुझे मजीद सस्ती
4:26मुर्गियां मिल जाएं।
4:29वाह! आज तो बहुत ज्यादा माल आया है। मुझे
4:32यहां से कोई सस्ता माल ढूंढना पड़ेगा।
4:34वरना फिर कोई नया जुगाड़ लगाना पड़ेगा।
4:41और सुना भाई मिर्च कैसा है? यार आज मुझे
4:44माल तो माल तो चाहिए मगर तुझसे एक पर्सनल
4:46बात करनी है। यार दोस्त जैसे कि तुझे पता
4:49है मैं अपने दुदो का कारोबार संभाल रहा
4:51हूं। दुकान बढ़ाना चाहता हूं। मुनाफा
4:53चाहिए मुझे कोई सस्ता माल दिखाओ। दोस्त
4:56मेरे साथ चलो।
4:59दोस्त यह माल खराब है। इसे बिल्कुल फरोख्त
5:02नहीं करना चाहिए। मगर मिर्च ये तो मरी हुई
5:04मुर्गियां हैं और कुछ बहुत बीमार हैं। आलू
5:08घबराओ मत। यह माल तुम ले जाओगे तो चंद ही
5:10दिनों में खूब मुनाफा कमाओगे। हां, अब तो
5:13मैं यही माल ले जाऊंगा और चंद ही दिनों
5:15में अपनी दुकान डबल कर लूंगा। सबसे पहले
5:18खराब गोश्त अलग करके पीछे रखता हूं।
5:20मुनासिब मौके मौके पर उसे बाकी सामान के
5:22साथ निकाल दूंगा।
5:29दद्दू आप आ गए? आलू तुमने यह गोश्त पीछे
5:33क्यों रखा हुआ है? और आज इतना सारा गोश्त
5:35कहां से आया? नहीं दद्दू, यह भी अच्छा
5:36गोश्त है।
5:41और भाई लहसुन कैसे हो? बैंगन तुम? अरे
5:44वाह, तुम तो बड़ी देर बाद नजर आए। और भाई
5:48आज कैसे आना हुआ? कुछ नहीं यार बस बेटे की
5:51शादी है। उसके लिए गोश्त चाहिए था। तो
5:54सोचा अपने दोस्त लहसन के पास ही चलते हैं।
5:58लहसन भाई मुझे जरा जल्दी है। आपको मेरे घर
6:01का पता तो है ही। कल दोपहर 1:00 बजे तक 70
6:04किलो गोश्त मेरे घर भिजवा देना। 70 किलो
6:08बेटा कल बैंगन के घर गोश्त पहुंचाना है।
6:11मार्केट से अच्छी ताजा मुर्गियां लाना। कल
6:14मैं दुकान पर नहीं आ सकता।
6:15दद्दू आप बेफिक्र हो जाएं। मिर्च भाई आज
6:19जरा काम ज्यादा है। कल वाली मुर्गियों के
6:21तकरीबन 35 पीस मेरी दुकान पर भेज देना।
6:24भाई बेफिक्र हो जाइए।
6:32आलू भाई आपका पूरा माल आ गया है। अब बताएं
6:34क्या करना है? मिर्च भाई माल आराम से
6:36दुकान के अंदर रख दें। कोई देखे ना आज तो
6:38कम मेहनत में ही अच्छा खासा मुनाफा हो
6:40जाएगा। बस जल्दी से यह गोश्त तैयार करके
6:43बैंगन के घर पहुंचाता हूं। फिर आराम से घर
6:46जाऊंगा। आज तो खूब कमाई होगी। दद्दू ने तो
6:49यही घर बताया था। हां, यहां शादी भी है।
6:52यही होगा।
6:58शुक्रिया आलू भाई। उम्मीद है आपने वही साफ
7:01और मयारी गोश्त दिया होगा जो आपके दद्दू
7:03की पहचान रही है। हां हां भाई बिल्कुल ऐसा
7:05ही है। बस आप मुझे पेमेंट कर दें।
7:11जल्दी करो। मेहमानों को जल्दी खाना खिलाना
7:14है। तुमने बहुत देर कर दी है। जी भाई बस
7:17थोड़ी ही देर रह गई है।
7:21अगर कोई और चीज चाहिए हो तो जरूर आवाज लगा
7:23देना। जी आप आराम से खाना खाएं। जो चाहिए
7:26हो हमें बता दीजिएगा।
7:29हम बस आज का आर्डर भी कामयाब हो गया। अब
7:32जितना मुनाफा हुआ है उससे मैं आराम से
7:34अपनी दुकान को और बड़ा कर लूंगा।
7:38हम मेरी तबीयत बहुत खराब हो रही है। मुझे
7:41बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही है। पता नहीं
7:43क्या हो गया।
7:51जल्दी करो। कई लोगों की तबीयत खराब हो गई
7:54है। उन्हें फौरन अस्पताल लेकर जाना होगा।
8:00डॉक्टर साहब, यह ठीक तो हो जाएंगे ना। आप
8:03फिक्र ना करें। हम इनका मुआयना कर रहे
8:05हैं। पहले यह मालूम करना जरूरी है कि मसला
8:07क्या है।
8:12इन सबकी अलामात एक जैसी। गालिबन खुराक में
8:15खराब गोश्त इस्तेमाल होने की वजह से यह
8:17मसला पैदा हुआ है। पता नहीं अचानक
8:19मेहमानों को क्या हो गया। बैंगन भाई बैंगन
8:22भाई आपको पता है जो आलू गोश्त गया था वो
8:25सारा खराब था। उसी की वजह से सारे मेहमान
8:27बीमार हो गए। बैंगन भाई हमें आलू से जरूर
8:30निपटना होगा। नहीं गाजर हमें कानूनी
8:33रास्ता इख्तियार करना होगा। पुलिस को इतला
8:36देकर एफआईआर दर्ज करवानी होगी। [संगीत]
8:42पुलिस ये क्यों आ गई? कहीं
8:48सर क्या हुआ? इंस्पेक्टर साहब क्या हो
8:52गया? जवानों जल्दी से सारे गोश्त की तलाशी
8:55लो।
8:56सर यह गोश्त कुछ सही नहीं लग रहा है।
8:58सर [नाक से की जाने वाली आवाज़] यहां से
9:00तो बहुत ज्यादा बदबू आ रही है। अच्छी तरह
9:02चेक करो। हमें कोई पुख्ता सबूत जरूर मिलना
9:04चाहिए।
9:07[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
9:10तुम यहां मेरी मुर्गियों का गोश्त बेच रहे
9:12हो? तुम यहां मेरी मुर लोगों की जिंदगियों
9:14के साथ खेल रहे हो।
9:18बेटा मैंने तुम्हें कहा था कि दुकान बड़ी
9:21करने के चक्कर में गलत रास्ता इख्तियार ना
9:23करना। मगर तुमने मेरी बात नहीं मानी। देखा
9:25ना गलत काम का अंजाम हमेशा गलत ही होता
9:28है।
9:30लालच वक्त ही फायदा दे सकता है। मगर
9:32ईमानदारी और सही रास्ता ही इंसान को हकीकी
9:35कामयाबी तक पहुंचाते हैं।