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पितृ दोष से मुक्ति का चमत्कारी उपाय? सिर्फ 16 दिन करें ये उपाय | @Maneezaahuja | Pitra Paksha | SKT

SKT PODCAST HITS · 6,300 words · 29 min read

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0:00हेलो एवरीवन, आप देखना शुरू कर चुके हैं

0:02एसकेडी पडकास्ट हिट्स। मैं हूं आपके साथ

0:04शालिनी कपूर तिवारी। आज का पडकास्ट

0:06स्पों्सर्ड है श्री मंदिर द्वारा। चर्चा

0:09हम पॉडकास्ट में करेंगे पितृ पक्ष की।

0:12क्यों इसे मनाया जाता है? इसके पीछे का

0:14क्या विधान है? आपको कैसे रहना है इन 15

0:18दिनों में। सारी बातें आपको समझाएंगी।

0:20प्रख्यात ज्योतिषी मनीजा, आहूजा जी। पार्ट

0:23वन आप देख रहे हैं। पार्ट टू भी बहुत जल्द

0:25आपके सामने आएगा। लेकिन वो मिस ना हो जाए।

0:27इसके लिए चैनल आप कीजिए फटाफट से

0:29सब्सक्राइब। बेल आइकन दबाइए और अब देखिए

0:31इस पडकास्ट का पार्ट वन। श्राद्ध पक्ष

0:34क्या है? और इसमें पितरों को याद क्यों

0:37किया जाता है? गणपति प्रथम देव है और

0:40गणपति गौर भैरव भी हैं। जब वो पृथ्वी तत्व

0:44से यानी कि मूल चक्र से उठते हैं तब यह जो

0:46मूल चक्र से नीचे की आत्माएं हैं ये बाहर

0:48आती हैं और श्राद्ध पक्ष आता है। मुझे ऐसा

0:50लगता है कि इस साल या उसके अगले साल या

0:52उसके अगले साल जब मैंने बाह्य ऊर्जा

0:54क्रिएट की तो अब तक तो उनको मुक्ति मिल

0:56जानी चाहिए थी। तुम खाओ। तुम्हारे खाने से

0:59जो तृप्ति तुम्हें होगी ना वो मुझे होगी।

1:01यह भाव अगर आपने ले लिया भाव से सब कुछ हो

1:04जाता है। नदी का तट कुछ ऐसे पवित्र स्थान

1:07वहां पर किया गया श्राद्ध बहुत ऊंचा माना

1:10गया है। जो मेरा डीएनए है जो मेरा गोत्र

1:12है मैं क्यों ना करूं उसका उत्थान। अब

1:14जिन्होंने बहुत कुकर्म किए हैं। ऐसे

1:17पितरों का श्राद्ध

1:19ये जो 16 दिन रहते हैं इनमें मेरी कैसी

1:23दिनचर्या रहे। विष्णु सहस्त्रनाम हर रोज

1:25ना कर सके। सात हनुमान चालीसा हर रोज ना

1:28कर सके। तीन तो कर लीजिए हनुमान चालीसा

1:30रोज जब चंद्रमा और सूर्य का संगम होता है

1:34ना वो श्राद्ध बड़ा इंपॉर्टेंट है। माघ का

1:37भी माघ अमावस्या का श्राद्ध बड़ा

1:39इंपॉर्टेंट है। लोग बहुत मेट्रो सिटीज में

1:41क्या करते हैं? श्राद्ध वाले दिन ब्राह्मण

1:43को बुला के या उसको भोजन कराने और उसको

1:47दान दक्षिणा देने और पूजा पाठ के बजाय

1:50किसी जरूरतमंद को दे देते हैं। खिलाते तो

1:52हम पंडित जी को हैं। तो वो भोजन वहां कैसे

1:55पहुंच जाता है? और क्यों हम साल में फिर

1:57एक ही बार खिलाते हैं? जो मेल्स हैं जिनका

2:01विवाह नहीं हो रहा वो पुनर्वसु नक्षत्र का

2:04श्राद्ध करें तो स्त्री की प्राप्ति होती

2:06है। ऐसा ब्रह्म वैवर्त पुराण कहता है। जिस

2:10स्त्री का विवाह नहीं हो रहा। अगर आपकी

2:12पुत्री है, आपकी बहन है जिसका विवाह नहीं

2:15हो रहा।

2:17आपने जाकर के खुद शादी किया है।

2:21ऐसी परिस्थिति में उन परिवार में जहां पर

2:24पुत्र है ही नहीं। आपके हस्बैंड कर सकते

2:26हैं।

2:26क्या कुंडली से देख के मालूम चलता है कि

2:29पितृदष है और उसका निवारण फिर पितृ पक्ष

2:31में श्राद्ध के द्वारा हो सकता है क्या?

2:33हर अमावस्या को करना चाहिए जिसको पितृदोष

2:36है। अब मैं आपको एक और बात बताती हूं।

2:38जिनकी अकाल मृत्यु हो जाती है। उनके लिए

2:40श्राद्ध का तरीका बिल्कुल अलग बताया गया

2:42था। और खासकर उसमें कुछ बलि की बात भी थी।

2:45नारायण बलि एक ऐसा श्राद्ध है। तर्पण के

2:48लिए वैसे भी किसी की जरूरत नहीं है। मैं

2:49एक मंत्र भी बता दूंगी। वो आप कमेंट

2:51सेक्शन में शेयर कर देना। पहला तो यह है

2:52कि पितृ पक्ष जब आता है ना तो घर में बहुत

2:55से लोग मायूस हो जाते हैं। उनको ये लगता

2:57है कि आप तो नए कपड़े नहीं खरीद सकते।

2:59खरीद लें तो पहन नहीं सकते। अब तो नॉनवेज

3:01नहीं खाना है। अब तो 15 दिन के लिए अंडे

3:03भी बंद हो जाएंगे। जिद्दी बच्चे हैं जो

3:06अभी तक बड़े नहीं हुए हैं। जिनको यह नहीं

3:07पता कि मर्यादा के लिए क्या-क्या करना

3:10पड़ता है।

3:15नमस्ते प्रणाम। जय श्री कृष्ण राधे-राधे।

3:17आप देखना शुरू कर चुके हैं चिंतामणि विद

3:19एसकेटी। एसकेटी यानी कि मैं शालिनी कपूर

3:22तिवारी। आज का पडकास्ट आप तक पहुंचाने में

3:25हमारी मदद की है श्री मंदिर ऐप ने। श्री

3:28मंदिर वो ऐप, वो वेबसाइट जहां अपना नाम,

3:32अपना गोत्र बताकर आप देश के प्रमुख

3:35मंदिरों में धार्मिक स्थलों पर पूजा करवा

3:39सकते हैं। जिसका बाकायदा आपको प्रसाद भी

3:42मिलेगा और वीडियो रिकॉर्डिंग भी मिलेगी।

3:45तो आज का पडकास्ट स्पॉन्सर्ड है श्री

3:48मंदिर द्वारा। चर्चा हम करने वाले हैं

3:51खासकर पितृ पक्ष की। पितृ पक्ष को ले बहुत

3:55से सवाल लोगों के मन में है। पितृ पक्ष

3:58क्या है? पितृ पक्ष में क्या करना चाहिए?

4:01हम अपने पितरों की पूजा क्यों करते हैं?

4:05और विधि विधान क्या है? यह सब बताने के

4:08लिए पडकास्ट में जो ज्योतिषी मेरे साथ

4:11हैं, मैं कहूंगी ज्ञान का अथा भंडार है।

4:15ज्ञान का वो सागर है और उस सागर को अपने

4:19गागर में भरने की एक छोटी सी कोशिश अगले

4:22कुछ मिनटों में मैं करने वाली हूं। आप

4:25मिलने वाले हैं प्रख्यात ज्योतिषी मनीजा

4:28आूजा जी से। मैम बहुत स्वागत है आपका।

4:31थैंक यू शालिनी। थैंक यू। सबसे पहले तो

4:34मैं एक्साइटेड इसलिए हूं क्योंकि आज के

4:36पहले मैंने श्राद्ध को लेकर जितने भी

4:38पॉडकास्ट किए हैं उसमें बहुत साइंटिफिक

4:40जवाब नहीं मिला है और मैं पॉडकास्ट शुरू

4:43होने के पहले ही आश्वस्त हूं कि आज जो

4:45बातें हमें मालूम चलने वाली हैं वो शायद

4:47एक नए दृष्टिकोण से पता चले। तो शुरुआत

4:50बहुत बेसिक के साथ में कर रही हूं। आजकल

4:52के बच्चे शायद समझते ही नहीं है कि

4:54श्राद्ध पक्ष क्या है? ज्यादातर लोगों को

4:56तो पक्ष भी नहीं मालूम कि क्या होता है।

4:59तो श्राद्ध पक्ष क्या है? और इसमें पितरों

5:02को याद क्यों किया जाता है? देखिए हमारा

5:05सबसे पहले तो मैं यह बोलूंगी कि हमारा

5:06जितना भी रिचुअल है, जितना भी हमारा यह है

5:10कि पहले गणेश चतुर्थी आती है, फिर 10 दिन

5:13हम गणपति को भजते हैं। फिर विसर्जन करते

5:15हैं और विसर्जन के बाद ही क्यों श्राद्ध

5:17आते हैं? पहले तो मैं यह आपको आपके साथ

5:19डिस्कस करना चाहूंगी और उसके बाद ही

5:21श्राद्ध के बाद ही क्यों शक्ति उठती है और

5:24नवरात्रि आती है। यह ऐसे ही नहीं है कि

5:26किसी ने डिसाइड किया और बन गया ऐसे ही। यह

5:29क्रम जो है यह बहुत टेक्निकल है और जैसा

5:32सत्य आपको ब्रह्मांड की ऊर्जा में या

5:36ब्रह्मांड के क्षेत्र में या कॉस्मिक

5:39पैरेलल जो आपको वो सत्य है वो आपको पिंड

5:42में दिखता है। है ना? हम उसी प्रक्रिया को

5:46बढ़ाते हुए इसको डिस्कस करते हैं कि ये इस

5:48क्रम में ही क्यों है? गणपति प्रथम देव

5:51हैं। ठीक है?

5:52मूलाधार चक्र पर हैं। ठीक है? आपने उनको

5:56वरशिप किया और आपने जब उनको वरशिप किया तो

6:00आपने उनको 10 दिन वरशिप करने के बाद विलीन

6:03किया अगले तत्व में मेरुदंड में स्पाइनल

6:06कॉर्ड में पृथ्वी तत्व के बाद अगला तत्व

6:09जल तत्व है। तो प्रथम देव को जो कि गणपति

6:14हैं और गणपति गौर भैरव भी हैं। आप वो

6:18कहानी जानती हैं? पार्वती जी ने अपने शरीर

6:22की मिट्टी से बनाए और कहा तुम यहां खड़े

6:24रहो मैं स्नान करती हूं। किसी को आने मत

6:26देना। कुंडालिनी जो आपके मेरुदंड में बैठी

6:30है उसको भी गौर भैरव रक्षा करें उसकी खड़े

6:34हैं। उठने नहीं देंगे उसको जब तक आप गणपति

6:38को अगले तत्व में विलीन नहीं करेंगे। यानी

6:39कि मां पार्वती को शक्ति को शिव से मिलने

6:43देंगे ही नहीं। रास्ते में खड़े हैं ना

6:45भैरव गौर भैरव

6:48गौरा के भैरव बने हुए हैं छोटे से

6:51हम

6:52ठीक है अब आप गणपति को वरशिप करते हैं

6:54पृथ्वी तत्व से उन्हें जल तत्व में विलीन

6:57करते हैं मैं विलीन शब्द इस्तेमाल करती

7:00हूं किसी वजह से आप फाइबर के ले आए देखिए

7:04सत्य ये है कि पृथ्वी तत्व पूर्णतया विलीन

7:07होना चाहिए जल में यानी घुल जाएं वो गणपति

7:10जो आपने स्थापित किए हैं वो घुल जाए जल

7:14में वो आकार में रह गए तो गौर भैरव विलीन

7:18ही नहीं हुए। अगले तत्व पे जाएंगे तो अपना

7:20बेस छोड़ेंगे। जब वो पृथ्वी तत्व से यानी

7:23कि मूल चक्र से उठते हैं तब यह जो मूल

7:26चक्र से नीचे की आत्माएं हैं यह बाहर आती

7:28हैं और श्राद्ध पक्ष आता है। जब आप इनको

7:32शांत करते हैं फिर शक्ति शिव से मिलने के

7:35लिए उर्ध्वागामी होती है। यह आपको साधक ही

7:41बता सकता है। दो किताब पढ़े पंडित नहीं

7:44बता सकते। मैं यहां पर मेरा रेफरेंस पंडित

7:47या ब्राह्मण से नहीं है। वह पूजनीय है।

7:49मैं वैसे एक बात कह रही हूं कि आजकल तो दो

7:52किताब पढ़ के रिमिक्स करके लोग पंडित बन

7:54जाते हैं। यह वो सत्य है जो मैंने आपको अब

7:58यहां बताया। इसलिए वो शक्ति आपने जब गौर

8:03भैरव को आपने आकार में ही अगर छोड़ दिया

8:05वो फॉर्म में रह गए। विलीन हुए ही नहीं जल

8:08तत्व में तो फिर वो पृथ्वी चक्र से उठे ही

8:11नहीं। क्योंकि वो पृथ्वी तत्व में ही रह

8:13गए। फॉर्म मतलब पृथ्वी तत्व थ्री

8:15डायमेंशनल हां

8:16जल तत्व में भी विलीन होना मतलब जलीय हो

8:19जाना अब बिल्कुल आपका आकार ही खत्म हो गया

8:21ना जल तत्व में तो

8:22हम

8:22करेक्ट आप समझ गए

8:25हां हां

8:25तो ये प्रक्रिया इंपॉर्टेंट है इसलिए

8:28गणपति हम काली मिट्टी से बनाते हैं जो

8:30पुराने हैं ना हम साधक हमें पता है कि

8:34उसको फिर अपने हाथ से बनाते हैं या अगर

8:37आपने बाजार से भी खरीदने हैं फिर बिल्कुल

8:38मिट्टी के खरीदना है तत्व विलीन होना

8:42चाहिए

8:42ठीक

8:43तो जब गणपति अपने स्थान से उठेंगे, मूल

8:46चक्र से उठेंगे तो अधोगति की जो आत्माएं

8:49हैं वो आ जाती हैं पृथ्वी की कक्षा में।

8:52अब यह पृथ्वी की कक्षा में क्यों आती हैं?

8:56अब जैसे ही गणपति को आप उठाएंगे तो वो जिस

8:58जगह पे बैठे हैं आदिपति लेके कि यहां अब

9:01वो स्थान से विलीन हुए हैं क्योंकि शक्ति

9:03को उठना है। पर उसका एक सप्लीमेंट्री या

9:05सेकेंडरी एक प्रॉब्लम वही है। प्रॉब्लम

9:06समझे या ओपॉर्चुनिटी समझे कि गणपति उठेंगे

9:10तो यह आत्माएं आ जाएंगी। अब पृथ्वी की

9:13कक्षा में यह जो पित्र हैं या यह जो

9:16आत्माएं हैं जिनमें इतनी ऊर्जा नहीं थी कि

9:20वो पितृ को पार कर पाती पार करके आगे निकल

9:23जाती। ये वो फंसी हुई है वहां पर।

9:26उन्होंने क्रूर कर्म किए।

9:28जो बहुत क्रूर कर्म करते हैं वो तो

9:30पितृलोक भी नहीं जाते। वो तो अधोगति में

9:32पिशाच योनि में

9:35चले जाते हैं और प्रेत आत्माएं बन जाते

9:37हैं। वो भी होता है। ठीक है? अब आप हम

9:40नॉर्मल लोगों की बात कर रहे हैं जो बहुत

9:43वासनात्मक जिनकी जिनकी इच्छाएं बहुत थी ये

9:47पूरी नहीं हुई वो वासनाएं हैं बहुत तो यह

9:50जो वासनात्मक पिंड है इसमें ग्रेविटेशनल

9:54पुल है।

9:56पाप भूमि से भारी पाप में ग्रेविटेशनल पुल

9:58है। ग्रेविटेशनल पुल का क्या मतलब है? कि

10:01पृथ्वी या मृत्यु लोक या कोई भी और लोकों

10:03में आपका आवागमन चलता रहेगा। आपको पार पार

10:07करने के लिए टेंजेंट चाहिए होता है। ऊर्जा

10:09का टेंजेंट चाहिए। मैथमेटिक्स में लोग समझ

10:12जाएंगे सर्कल से टेंजेंट निकाल के आप बाहर

10:14जाएंगे। ये आवागमन का सर्कल है। इससे

10:16टेंजेंट चाहिए। ये टेंजेंट के लिए पुण्य

10:18कर्म इतना ज्यादा कि आप टेंजेंट निकल के

10:22सर्कल से बाहर चले गए। आपने वो जो प्रथा

10:26है आवागमन की उसी से आप छूट गए। यह जो

10:29वासनात्मक कोष है इसमें ग्रेविटेशनल पुल

10:34है।

10:36ठीक है? यह तामसिक है। यह नीचे आ जाते

10:40हैं। जैसे ही गौर भैरव उठते हैं तो यह

10:43नीचे आ जाते हैं और यह तामसिक होते हैं।

10:45इनमें इच्छाएं जो अपूर्ण इच्छाएं, अपूर्ण

10:51ऐसी गहरी वासनाएं

10:56या ऐसे कर्म के आगे नहीं पार कर पाए। रुक

10:59गए पितृक में।

11:02सूर्य सिद्धांत कहता है कि पितृक चंद्रमा

11:06के ऊपर का एरिया है। ठीक है? और पुराण

11:10कहते हैं कि यह भूलोक और भूवर लोक के बीच

11:12का जो डायमेंशन है वो है। ठीक है? अब ये

11:15इस प्रकार का डायमेंशन है कि गणपति मूल

11:17चक्र जो कि स्थापित पृथ्वी तत्व के देवता

11:22के उठने से यह अधो योनि की आत्माएं या

11:25अधोगति इनकी पूर्ण तो अभी हुई नहीं।

11:28यह उठ जाती हैं। ठीक है? अब जब यह पृथ्वी

11:32की कक्षा में आती हैं। क्योंकि अब इनका वो

11:35जो स्टॉपर था वह निकल गया। स्टॉपर मतलब

11:38मैं ले मैनस लैंग्वेज में बोल रही हूं वो

11:40गणपति हैं। स्टॉपर निकल गया तो अब वो सब आ

11:42जाती हैं यहां पे।

11:43हम

11:44अब वो उस टाइम अपेक्षा करती हैं कि हम तो

11:47ऊपर नहीं जा सके। अभी हम फंसे हुए हैं

11:49पितृक में। यह जो पित हैं इनमें इतनी

11:53ऊर्जा नहीं है वासनाओं के कारण या पुराने

11:58किए गए कुकर्मों के कारण इतनी ऊर्जा नहीं

12:01है कि ये मृत्यु लोक की कक्षा को पूर्णतया

12:04पास कर जाएं। तो ये पृथ्वी लोक में फंस

12:07जाते हैं। अब जब स्टॉपर और माफ़ कीजिएगा

12:12गणपति मेरे लिए मतलब मैं क्या कहूं? हां

12:16हां मतलब मेरे लिए प्रिय है मैं बता नहीं

12:19सकती लेकिन यह हम समझ पाए इसलिए हमारे

12:22इसलिए मैंने यह शब्द इस्तेमाल किया तो ये

12:25जो आत्माएं हैं ये भारी तामसिक आत्माएं या

12:31कोष ये लिंग देह है अब सिर्फ लिंग देह ठीक

12:35है क्योंकि सूक्ष्म शरीर तो इनका जा चुका

12:38है

12:38अब ये लिंग देह के रूप में वहां अटकी पड़ी

12:41है लिंग देह तो ये जो लिंग देह हैं ये आ

12:45जाते हैं यहां पे पृथ्वी की कक्षा में अब

12:47क्योंकि ये वासनात्मक क्रूर कर्मों वाले

12:50जो आगे ना जा सके इसलिए हम कहते हैं कि आप

12:53मंदिर में जाती हैं आप कहते हैं सत्वगुण

12:55के रजतम सत्वगुण परमाणु अणु परमाणु कैसे

12:58हैं उस स्थान के उस हिसाब से आपकी पूजा

13:02प्रार्थना उपासना उस स्थान में ज्यादा

13:05फलती है या नहीं फलती है इट इज नॉट कि

13:07मैंने एक अगरबत्ती लगा दी उस स्थान का

13:10वातावरण कैसा है अगर वहां के अणु परमाणु

13:14तामसिक तो आप हम कहते हैं ना कि जब हम

13:17साधना करते हैं तो हम कहते हैं कि आप ऐसी

13:20जगहों में भी मत जाइए। चाहे आप यू डोंट

13:22ड्रिंक मगर आप ऐसी जगह में जाते हैं जो एक

13:26वहां तम बढ़ी हुई है। तमस बढ़ी हुई है।

13:29आप उस वातावरण में अपने देह को लेकर

13:31जाएंगे तो तामसिक होगा। आपकी बुद्धि

13:34तामसिक हो जाएगी। आप कहेंगे मैंने तो कुछ

13:35नहीं खाया पिया था। तो जो लोग कहते हैं कि

13:38हम तो नहीं खा रहे हैं। हम तो नहीं पर हम

13:41जाते हैं अपने मित्रों के साथ। तो आप एक

13:43तामसिक वातावरण में अगर एक सत्वगुण की चीज

13:46को लेकर जाएंगे तो वो तामसिक उसको इफेक्ट

13:48करेगा उसके ओरा पे। पूजा भी आप ऐसी जगह

13:51करें जहां पर ऐसे अणु परमाणु हैं। यह बहुत

13:54सूक्ष्म चीजें हैं। मगर जो योगी है या जो

13:58साधक है वह इन सूक्ष्म चीजों को समझता है।

14:01अब आपकी जो ज्ञानेंद्रियां हैं जो पर्सीव

14:05करती हैं इस विश्व को है ना यानी कि

14:08जिह्वा, नासिका,

14:11आंखें, त्वचा, क्ण ज्ञानेंद्रियां। आपके

14:15पांच ज्ञानेंद्र हैं जो कपाल कुंडला में

14:17हैं। आपकी कुल कुंडला है और आपकी कपाल

14:20कुंडला है। है ना? कुल कुंडला बेस ऑफ द

14:22स्पाइन कपाल कुंडला जो कपाल क्रिया की

14:24जाती है। आप इसको भी कहते हैं कि खत्म हो

14:27जब आप मृत शरीर को जलाते हैं आप कपाल

14:30क्रिया करते हैं।

14:31क्योंकि कपाल कुंडला बैठी रहेगी तो उसे

14:34कोई ले जाएगा उस कल को और कोई जला देगा

14:37उसे। तो इसलिए कपाल कुंडला ज्ञानेंद्रियां

14:41कपाल कुंडला के अंतर्गत आती हैं।

14:43ज्ञानेंद्रियों से आप यह सारी कहानी नहीं

14:46समझ सकते क्योंकि एक यह स्थूल विश्व एक

14:49सूक्ष्म विश्व है। सूक्ष्म विश्व को जानने

14:52के लिए या तो साधना चाहिए या गहरा योग

14:55चाहिए तो सूक्ष्म विश्व को समझा जा सकता

14:58है। अंतरिक्ष में चित्र देखे जा सकते हैं

15:00और समझा जा सकता है कि वातावरण तामसिक हो

15:03गया है। क्योंकि पृथ्वी की कक्षा में यह

15:06लिंग देह जो भारी हैं पार नहीं कर पाए

15:10क्योंकि ऊर्जा नहीं है। यह आते हैं और

15:13आपसे अपेक्षा करते हैं कि आप अब बाह्य

15:16ऊर्जा क्रिएट करें जो इनको दें ताकि यह अब

15:20लिंग दें पार करें उस कक्षा को भी और आगे

15:23जाएं। अब आप बाह्य ऊर्जा क्रिएट ना करें।

15:27वो अपेक्षा अपेक्षा इंतजार इंतजार इंतजार

15:30करते करते

15:32फिर आपको कर्स करके जाते हैं। जब आप कहते

15:34हो तुम कौन जाओ। आपके दरवाजे पर कोई आए

15:36कहे भाई मुझे अब दो मैं तो तुम्हारा ही

15:38हूं। आप तू कौन? मैं बिलीव नहीं करता।

15:41क्यों? क्योंकि व्हाट व्हाट इज सनातन

15:44धर्म? थोड़े दिन पहले तो सनातन धर्म

15:46मुर्दाबाद कर रहे थे। क्या सनातन धर्म इज

15:48द कॉस्मिक ट्रुथ? इज सनातन धर्म। अब ये

15:52ऐसे गणेश जी उठ रहे हैं। ऐसे ये हो रहा

15:54है। ऐसे हो रहा है। अब आप इसको मुर्दाबाद

15:55कह दे मगर प्रक्रिया तो चेंज नहीं होगी।

15:57ठीक बात है। अब आप कहे शक्ति शिव से मिलने

16:00ना जाए। मेरुदंड में वो तो जाएगी। स्पाइनल

16:02कॉर्ड की प्रक्रिया को आप बदल नहीं सकते।

16:03कपाल कुंडला की प्रक्रिया को आप बदल नहीं

16:05सकते। इट डजंट मैटर वेदर यू आर अ जेंजी और

16:09अ मिलेनियल और अ और अ हुएवर

16:13यू माइट बी यू हैव द सेम स्पाइनल कॉर्ड

16:17उसमें तत्वों की प्रक्रिया वही है। वो

16:19वैसे ही पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश वो

16:22वैसे ही आएगा और वैसे ही बाह्य काम उस पर

16:26इफेक्ट करेंगे।

16:27आप कहे मैं नहीं मानता। फिर स्पाइनल कॉर्ड

16:30है ना आपका।

16:31हां। उससे आपके धर्म रिलजनति का कोई लेना

16:35देना।

16:35अब ये जो आपने इतनी साइंटिफिक लैंग्वेज

16:37में बताया उसके बाद अगला सवाल जो रहता है

16:40वो फिर वही बचकाना रहता है जो मेरे मन में

16:44भी है और ज्यादातर लोगों के मन में होगा।

16:46आपने इसको बहुत साइंटिफिक तरीके से और

16:48अच्छे शब्दों के साथ बताया कि कैसे वो

16:50लिंग देह हो चुकी है।

16:52हम लिंग देह को पितृ पक्ष में पूजा कर रहे

16:56हैं। ये नहीं मानते। हम तो ये समझते हैं

16:59हमारे दादाजी हमारे पिताजी हमारी दादी जी

17:01हमारी नानी हां तो लिंग देह है ना वो नानी

17:04जी अब लिंग देह हो गई हां अगर वो ऊर्जा से

17:07पार नहीं गई तो मैं मैं उन्हीं शब्दों पे

17:10इसीलिए आ रही हूं जो शायद आप लोगों को समझ

17:12आता है कि हम हम ये मानते हैं कि हम अगर

17:14पितृ पक्ष में पूजा कर रहे हैं तो मतलब

17:17हमारे दादाजी नाना जी दादी पिताजी हम हम

17:21इनके लिए वो पूजा कर रहे हैं। अब सवाल

17:23मेरा यह है कि आपने कहा, हमें बाह्य ऊर्जा

17:26क्रिएट करनी पड़ती है। तो, यह बाह्य ऊर्जा

17:28हम हर साल क्यों क्रिएट कर रहे हैं? मेरे

17:30तो एक दादाजी थे, मेरी तो एक दादी थी, एक

17:32नाना जी, नानी जी। तो, मुझे ऐसा लगता है

17:34कि इस साल या उसके अगले साल या उसके अगले

17:37साल जब मैंने बाह्य ऊर्जा क्रिएट की, तो

17:39अब तक तो उनको मुक्ति मिल जानी चाहिए थी।

17:42मैं ये हर साल क्यों प्रोसेस रिपीट करती

17:44चली जा रही हूं? क्या वो उतनी इतनी आसक्त

17:48आत्माएं थी जो हम कभी मानती ये आप जानती

17:51हैं कि वो कितनी आसक्त हमारा दिल नहीं

17:53होता प्रक्रिया बताती

17:55आपकी तो 22 पीढ़ियां हैं आपको सिर्फ नाना

17:58जी ही पता है अपने पर नाना जी के भी नाना

18:00जी थे नाना जी के पिताजी थे उनके नाना जी

18:03थे उनको उनको कौन पूछ रहा है वो नहीं

18:05इंपॉर्टेंट है उनको नहीं आपने श्राद्ध

18:06करना

18:07पर उनके बच्चों ने तो उनके लिए ऐसी बाह्य

18:09ऊर्जा क्रिएट

18:10वी डोंट नो वी डोंट नो आपको यह भी नहीं

18:13पता है कि जब हम पिछले साल श्राद्ध करते

18:15हैं तो इस साल के पिछले साल और इस साल के

18:17बीच में कोई रिश्तेदार चला गया। सिर्फ

18:20नाना जी नानी जी ना आपका कज़ वो कर रहा है

18:22उसके पापा कर रहे होंगे ये कर रहा होगा।

18:25एक और बात जानिए हां कि श्राद्ध जब

18:28व्यक्ति करता है आपको जी मेरे आपको किसी

18:31ने ऊपर से चिट्ठी भेज दी है कि हमारा हो

18:33गया जी हम चले गए हैं पार। हम आपको कैसे

18:35पता कि आपके गोत्र का अभी नहीं फंसा हुआ

18:38ऊपर। कैसे पता आपको? आप जो इतनी गारंटी दे

18:41रही हैं कि अब तक तो वह निकल गए होंगे।

18:43आपको क्या पता उनके कर्मों का लेखाजोखा

18:45क्या था और जिनकी आप बात कर रही हैं आप तो

18:47नानी जी तक ही हैं वो नानी जी की नानी जी

18:49को कौन देखेगा फिर आपको तो 22 पीढ़ियां

18:52आकर पूछेंगी हां जी क्या हुआ योगी ये

18:55बताते हैं कि जब आप गंगा जी भी जाते हैं

18:57ना तो आपके साथ आपके पितृ लेते हैं उस समय

19:01श्राद्ध ना भी हो आ जाते हैं वो जा रही है

19:04हमारी गंगा जी तो यह भी होता है कि वो जो

19:07नेबर्स होते हैं आपके दादा जी के वो जो जा

19:10चुके हैं जिनके नहीं जा रहे अब पौत्र

19:13उनके संतति नहीं जा रही गंगा जी वो

19:16नेगोशिएट करते हैं आपके दादा जी से कि

19:20आपकी जा रही है मुझे साथ ले जाओगे आप फिर

19:22आपके दादा जी सोचते हैं मेरा अच्छा दोस्त

19:24था या नहीं मैं आपको एक बात बताई एग्री

19:26करते हैं कि तुम चल सकते हो तो मित्र

19:29नेबर्स आपके दादा जी के आपके नाना जी के

19:31आपके साथ लग लेते हैं आप जब गंगा जी जाते

19:34हैं गंगा जी जाना भी एक साधारण कर्म नहीं

19:37है आप किसके साथ जाते हैं कैसे जाते हैं

19:40वहां क्या करते हैं आपके साथ तो ये सारे

19:42सारे लोग बैठे हैं या चल पड़े हैं। ये

19:44सूक्ष्म देह में

19:46अगर आपको लगता है कि यह जो दिख रहा है यही

19:49सत्य है तो फिर इससे बड़ी गलती कोई नहीं।

19:51जो हमारी ज्ञानेंद्रियां देख सकती हैं वो

19:53स्थूल विश्व है। सूक्ष्म विश्व को तो देख

19:55ही नहीं रहे। आप नाना जी तक क्यों हैं? 22

19:57पीढ़ी हैं। आपको नहीं पता वो गए नहीं गए।

19:59आप क्रिएट करते हो ये कर्म कि अगर आप नहीं

20:02भी गए तो यह आपके लिए जिनको मैं नहीं भी

20:05जानता ये उनके लिए मैं नहीं जानता। हम

20:09मेरी 22 पीढ़ियों में कौन फंसा है? यह

20:12उसके लिए जिसका मैं नाम भी नहीं जानता।

20:15यह उसके लिए। इसलिए कर्तव्य तो यह है कि

20:19आप सारे श्राद्ध 16 के 16 श्राद्ध करें।

20:23ब्रह्म वैवर्त पुराण तो यह भी बताती है कि

20:25इस नक्षत्र में किए गए श्राद्ध से आपका

20:27क्या लाभ होगा? बताती है अगर आपको संतान

20:29उत्पत्ति नहीं हो रही तो रोहिणी के

20:31नक्षत्र में आप संतति की उत्पत्ति के लिए

20:35श्राद्ध कीजिए। मघा की नक्षत्र में आप

20:38श्राद्ध कीजिए। यह ब्रह्म वैवर्त पुराण

20:40बता रही है। मैं पौराणिक रेफरेंस देती हूं

20:42आपको इस बात का। हम तो यह ऐसे ही नहीं है।

20:46ठीक बात है।

20:47तो ऐसे अलग-अलग नक्षत्रों में किया गया

20:50श्राद्ध क्या करता है? अब जिन लोगों का

20:52विवाह नहीं हो रहा जैसे जो मेल्स हैं

20:55जिनका विवाह नहीं हो रहा वो पुनर्वसु

20:58नक्षत्र का श्राद्ध करें तो स्त्री की

21:00प्राप्ति होती है। ऐसा ब्रह्म वैवर्त

21:03पुराण कहता है। जिस स्त्री का विवाह नहीं

21:06हो रहा। अगर आपकी पुत्री है, आपकी बहन है

21:08जिसका विवाह नहीं हो रहा तो पूर्व

21:11फाल्गुनी नक्षत्र में किया गया श्राद्ध

21:14सौभाग्य प्रदान करेगा उसे। सौभाग्य की

21:17वृद्धि होगी। तो कई बार सौभाग्य की वृद्धि

21:20सिर्फ पुत्री के लिए नहीं है। आपके घर में

21:22भी सौभाग्य की वृद्धि।

21:25अब जिन्होंने बहुत कुकर्म किए हैं।

21:28हम

21:28ऐसे पितरों का श्राद्ध आर्द्रा नक्षत्र

21:31में भी किया जाता है। पता नहीं कब। पर हम

21:34कहते हैं बहुत कुकर्म करके गया था वह

21:35व्यक्ति आर्द्रा नक्षत्र। अब इसमें तिथि

21:38एक तो है कि आप जिस तिथि पर गए मैंने वह

21:41तिथि पकड़ी उस पे श्राद्ध किया। एक है

21:43आपने श्राद्ध किया क्योंकि अब संतान

21:45उत्पत्ति चाहिए। कैसे लिंक आएगा? तो

21:47रोहिणी नक्षत्र में आपको देखना है कौन-कौन

21:50से नक्षत्र कैसे बैठ रहे हैं। नक्षत्रों

21:52का शत्रु नाश जिसे करना होता है वह

21:54चतुर्थी का श्राद्ध करता है। इससे यह भी

21:56काम्य श्राद्ध भी है। यह ब्रह्म वैवर्त

21:59पुराण बताता है। मत्स्य पुराण ब्रह्म

22:01वैवर्त पुराण कुर्म पुराण यह श्राद्ध के

22:04बारे में बहुत डिटेल में बताते हैं।

22:06ब्रह्म वैवर्त पुराण में श्राद्ध कल्प है

22:09जिसे आप सभी लोग पढ़ सकते हैं। जो इसे

22:12क्वेश्चन करते हैं वो उसे पढ़ें। हम

22:15अब मैं तो आपको यह भी बताऊं कि इस इन

22:17श्राद्धों में जो आपके घर आए हां

22:19वो लिंग दे किस तरीके से किस रूप में आपके

22:22सामने आ जाए इसलिए वैसे भी अतिथि देवो भव

22:26है

22:26हां

22:26मगर इस समय जो आता है आपसे कैसे भी

22:29मुलाकात करे आपके ऑफिस में मिले

22:32आपके घर आ जाए अचानक से कोई आए

22:34हम

22:34उसका वैसे भी तिरस्कार नहीं करना चाहिए

22:37मगर इस पक्ष में ध्यान से देखना चाहिए

22:39क्या कुछ स्पेसिफिक खाने के लिए किसी ने

22:42बोला कोई बात हुई ऐसी जी बहुत आदर सत्कार

22:45से कौन कौन सा लिंग देह किस रूप में कैसे

22:48आ जाए वैसे भी इसके लिए सिर्फ श्राद्ध की

22:50जरूरत नहीं होती कौन किस रूप में कब आपसे

22:53कैसे मिलने आ जाए आपको खुद नहीं पता

22:56इसलिए अन्न जिसको आप खिला सकें सो अच्छा

23:00साफ मन से अगर आपने सोचा ये क्यों आया है

23:02इसको चाय पिलानी पड़ेगी अगर आपने यह सोचा

23:05फिर तो आप अपना कर्म खराब करेंगे आप कभी

23:07देखें कि आप खुले मन से लोगों को खाना

23:10खिला के देखें आपके कितने काम बन जाएंगे

23:12खुले मन

23:13चाहे उसमें एक ब्रेड पकौड़ा और चाय है मगर

23:15आपने खुले मन से खिलाई कि तुम खाओ

23:17तुम्हारे खाने से जो तृप्ति तुम्हें होगी

23:19ना वो मुझे होगी कि यह भाव अगर आपने ले

23:21लिया भाव से सब कुछ हो जाता है जब आप कहते

23:25हैं कि अंतगति वो जो तुम्हारी जिसने

23:28तुम्हारा स्मरण किया प्रभु उसकी अंत गति

23:30तो लोग आते हैं कई ये रावसर को भी कहा

23:32करते थे कि तो क्या पूरी जिंदगी करने की

23:34क्या जरूरत है अंत में याद कर लेंगे हम

23:37भगवान को अंत गति में बुद्धि मुड़ेगी ही

23:39नहीं उसकी तरफ आपके हाथ में ही नहीं होगा

23:42इसको मोड़ना उसकी तरफ आसान नहीं है। यह तो

23:46जीवन पर्यंत की तपस्या होती है जो आखिर

23:50में आपको उठा देती है। भाव है ना वो भाव

23:53आपकी गति बदल देता है।

23:54तो जब आप किसी के आने पे कहते हैं तुम चाय

23:57पियो तुम्हें अच्छी लगे। ये जल पियो

24:00तुम्हें तृप्ति प्रदान हो। तुम खाना खाओ

24:02तुम्हें भूख लगी है। ये भाव अगर आपके पहले

24:05ही आपके अंदर ये घुमा हुआ है कि हम

24:07तुम्हें खिलाना पड़ेगा। तुम्हें क्यों

24:09खिलाएं? फिर आप आप वैसे भी अधोगति को आपकी

24:12हरकतें ठीक है नहीं फिर इसका यह मतलब है

24:14मुझे ऐसा लग रहा है साक्षात देवी स्वरूप

24:17आप सामने बैठ के और मुझे ये बातें समझा

24:19रही हैं और बता रही हैं मतलब मेरी आंखों

24:22में पानी वाकई आ रहा है मुझे ऐसा लग रहा

24:24है मुझे नए ज्ञान की प्राप्ति हो रही एक

24:26सवाल क्योंकि आपने अभी कुछ कहा था तो मुझे

24:28याद आया आपने कहा गंगा किनारे भी हम जाते

24:31हैं गंगा स्नान भी करते हैं तो वहां पे भी

24:33पितर हमारे साथ आने को हो सकते हैं

24:35क्योंकि मैं छोरी गंगा किनारे वाली हूं

24:38काशी की हूं और कई बार हमने गंगा स्नान

24:41किया है। अभी भी जब मैं बनारस हाल में एक

24:43बार जाती हूं तो हम गंगा स्नान जरूर करते

24:45हैं। मैं समझना ये चाहती हूं कि क्या पितृ

24:47पक्ष में यही वो वजह है कि हरिद्वार, गया

24:50या काशी या कहीं नदी किनारे अगर क्योंकि

24:54गंगा तो बेल्ट अलग है। लेकिन हम गोकर्ण की

24:58अगर बात कर लें कर्नाटका में तो क्या ये

24:59खास वजह है जैसा आपने अभी बताया कि जो नदी

25:03किनारे की जगह है उसको ज्यादा उपयुक्त

25:07माना जाता है कि वहां पर श्राद्ध किया

25:09जाए? नदी का जो तट है ना वो यह राहु को

25:12दर्शाता है। नदी का तट हम

25:15आप नदी के होली नदी पवित्र नदी के तट पर

25:19जब आप बैठ के जाप करते हैं तो आप इनको एक

25:22ये सर्प दोष सर्प दोष राहु केतु की तकलीफ

25:27से भी आपको शांति मिलेगी। नदी तट अब

25:30श्राद्ध पे श्राद्ध की बात करें। पवित्र

25:33मंदिर

25:35नदी का तट

25:38कुछ ऐसे पवित्र स्थान

25:41वहां पर किया गया श्राद्ध बहुत ऊंचा माना

25:43गया है। ब्रह्म कपाल का श्राद्ध बद्रीनाथ

25:47में ब्रह्म कपाल का श्राद्ध मैंने खुद

25:49किया है। मैं खुद एज एन अनमैरिड लेडी वहां

25:53पर ब्राह्मणों ने गोष्ठी करी कि यह अब 4

25:57उस समय मैं 42 की थी। 4042 उन्होंने कहा

26:01मैंने कहा मैं अविवाहित हूं। मेरा गोत्र

26:03यह है मेरे पिता तो अब नहीं आएंगे यहां पर

26:06श्राद्ध करने। हम

26:07वहां पर उन्होंने फिर गोष्ठी करी और अलव

26:09किया और मैंने श्राद्ध किया ब्रह्म कपाल

26:11पे और यह कहा जाता है कि ब्रह्म कपाल पे

26:14श्राद्ध किया जाए और यहां पर मैं एक

26:16पर्सनल बात आपके साथ शेयर करूंगी। मैंने

26:18उस ब्रह्म कपाल पे अपने घर फोन किया। सबको

26:22फोन किया। आए गए पुराने जितने दूरदराज के

26:25संबंधी जिनका मैंने नाम भी नहीं सुना था।

26:27जिनका पता किया उन सबका श्राद्ध किया।

26:31सबका श्राद्ध किया और मैंने सोचा मैंने सब

26:33बुला दिए। मैं जो कर सकती थी इस जीवंत

26:36शरीर में क्योंकि यह एक अपॉर्चुनिटी है कि

26:39मैं आज जीवित हूं। इस गोत्र की कन्या हूं।

26:42मैं कर सकती हूं और मैं अविवाहित हूं और

26:46एक साधक हूं। सिर्फ यह अविवाहित नहीं है

26:48यहां पर। एक कि आपकी मंशा है। आप अविवाहित

26:51हैं। आप एक साधक हैं। मतलब आप डिसाइडेडली

26:55इस रास्ते पर चल रहे हैं। फिर उसमें नियम

26:58होता है। हमारे जीवन का नियम है। यह जीवन

27:01बस ऐसे नहीं कि आप बस वो बाय द वे आप यू

27:03आर अनमैरिड। यह ऐसा नहीं है। तभी वह अलव

27:05करते हैं। नहीं तो स्त्री को नहीं अलव

27:07करेंगे वो ये करना। तो उसके बाद मैं जाकर

27:11मैं और मेरी एक सहेली गए थे। वो मैरिड है।

27:13उसने नहीं किया। मैंने किए मैंने श्राद्ध

27:15किया। उसके बाद जाकर हम रात्रि में

27:18विश्राम किया। मुझे स्वप्न आया। मेरा एक

27:21कजिन

27:22मेरी

27:24एक हमारी एक रिश्तेदार का बेटा जिसके कर्म

27:27थोड़े थे वो अल्पायु थी उसकी। मुझे स्वप्न

27:31आया। उसने कहा मेरे अलावा तूने सबका

27:33श्राद्ध किया।

27:36सबका श्राद्ध कराई तू मेरा नहीं किया।

27:39सुबह मैं उठी और मुझे याद आया एक्चुअली

27:41मैंने उसका श्राद्ध नहीं किया।

27:44मुझे तो याद भी नहीं था कि ये मिस हो गया।

27:46मुझे स्वप्न आया बद्रीनाथ में कि सबका

27:49श्राद्ध करके आई है। मेरा नहीं किया।

27:54तो इसको साधारण मत समझें इस पीरियड में

27:57बहुत केयरफुल मोनी बाबा होते थे उज्जैन

28:01में वह कहते थे नवरात्रों में भी केयरफुल

28:03भगवती कैसे कौन सा मोड़ ले ले समझ नहीं

28:06आएगा बहुत केयरफुल

28:09अब लोग कह रहे हैं कुछ भी करो ये भी करो

28:11वो भी करो श्राद्ध में भी केयरफुल वेट

28:13करते हैं ये पित वेट करते हैं वेट करते

28:16हैं वेट करते हैं आप कुछ नहीं करते फिर

28:19आता है आपकी तरफ एक कर्स फिर आप मुझे

28:21बताइए आखिर जीवन का लक्ष्य क्या है?

28:24आवागमन को बंद करना ना।

28:26ठीक बात है।

28:26यहां पर तो आप कितना भी समेट ले यहां तो

28:28सबका रह गया। हम

28:29कौन लेकर गया आपसे पहले जो आप ले जाएंगे?

28:32किसी का नहीं गया ऊपर। कोई भी नहीं ले जा

28:35सका। आप ऐसा क्या कर लेंगे? जो 100 साल

28:38पहले था वो आज नहीं है। तो जो आज है वो

28:40100 साल बाद होगा या 150 साल बाद होगा?

28:43कहानी बदली जा चुकी होगी। हम इसलिए मेरे

28:46जीवंत शरीर में ये अपॉर्चुनिटी है। मैं

28:48सांस लेती हूं। मैं ये कर सकती हूं। ये

28:49श्राद्ध पक्ष मेरे जीवन में उतने ही

28:51आएंगे। ज्यादा नहीं आएंगे। जितने साल में

28:53जीवित हूं। कितने साल का जीवन है?

28:56ठीक बात है। मेक द मोस्ट ऑफ दिस

28:59ओपोरर्चुनिटी। हम

29:00वो भी ब्लेस करेंगे और जो आप कर सके। आप

29:03बहुत लोग कहते हैं कर्म योगी हूं। मैं

29:05कर्म योगी हूं। निष्काम कर्म इससे बड़ा

29:07कर्म क्या करेंगे आप?

29:09ठीक बात।

29:09किसी और के लिए कुछ करेंगे। ये कर्म योग

29:12है। आप खड़े हैं। आपके गोत्र के आपके पित

29:15आपके ननिहाल के खड़े हैं। आपके आगे

29:18सूक्ष्म फॉर्म में और आप ना दें। हम तो

29:22ऐसा नहीं कर सकते। हमें उनका विचार लेना

29:25ही होगा। उस पक्ष में हम उनके विचार के

29:27साथ हैं। हम उनके विचार के साथ ऐसा क्या

29:30करें जो आपको शांति मिले। मैं कर सकती

29:32हूं। सक्षम हूं आज करने के लिए।

29:35क्यों ना करूं? क्यों ना करूं? मेरी

29:38उत्पत्ति का जो जो मेरा डीएनए है, जो मेरा

29:42गोत्र है, मैं क्यों ना करूं उसका उत्थान?

29:45भगीरथ ने किया। इतने और उच्च कोटि के लोग

29:49हुए। आज हमें कोई ना भी जाने पर हमें हमें

29:53हमारे कर्म से हमारे पितृ जानते हैं ना।

29:57ठीक बात है।

29:57तो मेरा जन्म सफल है। मैंने जन्म सिद्ध

29:59किया अपना। हम

30:01ये भगीरथ वाली बात पे तो मुझे लगता है कि

30:03हम अगर वैसे जीते जी ना बन सके तो कम से

30:06कम कर्म से तो भगीरथ बन ही सकते हैं।

30:08जो कर सकते जो कर सके सो करें। गंगा जी को

30:12ला नहीं सकते ना। जो कर सकते हैं वो तो कर

30:14सकते हैं ना।

30:15ईश्वर साक्षी है ना मेरे कर्म का। गंगा जी

30:17के पास तो जा सकते हैं। उन्हें लाया भले

30:19नहीं उनके पास तो जा ही सकते हैं। कम से

30:21कम। मैं कह रही हूं अपने घर में बैठ के

30:23गंगा जी मिश्रित करके जल से तर्पण तो कर

30:25सकते हैं।

30:26हम एक आपने जो बद्रीनाथ वाली बात बताई

30:30क्योंकि हमारे घर में भी

30:31ये मेरा एक बड़ा पर्सनल वो था। यह मैंने

30:34कहीं नहीं यह मैंने बस आके अपने फादर से

30:36बोला था एक बार कि ऐसा हुआ और अपनी मित्र

30:39जो मेरे साथ गई थी उसको बताया कि यह देखिए

30:42कैसी बात हुई है। फिर उसके बाद मैं गया तो

30:46नहीं जा सकी आज के बाद उसके बाद मैं कभी

30:48गया नहीं गई हूं। सोचती भी हूं कई बार

30:51जाने के लिए पर ब्रह्म कपाल पे किया गया

30:52श्राद्ध पर उसके बावजूद मैं करती हूं।

30:55उसके बावजूद मैं रिचुअल फॉलो करती हूं उन

30:5816 दिनों का। बनारस में जरूर मैंने अपने

31:01उस एक कजिन का किया और आप जानते हैं बनारस

31:06में पूरी एक वो है पिशाच कुंड पे आप करिए

31:10जो बिल्कुल जो पितृलोक भी नहीं जो पिशाच

31:13योनि के हैं वो भी वहां पर मुक्ति पा लेते

31:15हैं सारे तो पितृलोक नहीं गए ना

31:16कई तो नीचे चले गए होंगे और उनका ऐसे

31:18क्रूर कर्म रहे होंगे आजकल आप देखिए आप

31:20न्यूज़ में इतना जो

31:23कार्यक्रम कर रहे हैं ये लोग उससे कोई

31:26फर्क नहीं पड़ता आपका किस कुल में जन्म है

31:28आपका किसी किसी भी कुल में जन्म है। आप

31:30किसी स्त्री के साथ बदतमीजी करते हैं। आप

31:32बड़े-बड़े कांड हो रहे हैं। तो अब जब आप

31:35इसके बाद क्या योनि धारण करेंगे?

31:38ठीक बात है।

31:38और आपके तो शायद कुल में कोई परवाह ही

31:40नहीं करेगा। फिर आप प्रेत योनि में बैठे

31:42रहेंगे। फिर वो आपका कर्म होगा। फिर वो अब

31:44हम क्या कर सकते हैं? इसलिए आज भी जो आप

31:47कर्म कर रहे हैं उससे बचें। क्योंकि हम

31:48उन्हीं पितरों की बात कर रहे हैं ना जिनके

31:50वासनात्मक कोष हैं। जो पितर लोग पार नहीं

31:53कर सके। जिनका इतना कुकर्म है तो आप अगर

31:55आज उतना कुकर्म क्रिएट करेंगे आप अपना भी

31:58फ्यूचर जान लें फिर बैठे रहेंगे फिर आप

32:00कहीं फंस गए हम ये बद्रीनाथ वाली बात पे

32:04मेरा अगला सवाल है क्योंकि हमारे यहां भी

32:06बद्रीनाथ में ही श्राद्ध होता है और वहां

32:08तो बाकायदा पंडित जी के पास एक पुस्तक है

32:11जिसमें आज नहीं आज के 10 पीढ़ी पहले तक का

32:14जो हमारा वंश है वो उनके पास लिखित रूप

32:16में वहां पर अवेलेबल है। मैं समझना यह

32:18चाहती हूं जब लोग गया श्राद्ध एक बार कर

32:20देते हैं, जब लोग हरिद्वार श्राद्ध एक बार

32:22कर देते हैं या बद्रीनाथ में श्राद्ध

32:25कराते हैं तो वह यह कहते हैं यह बड़ा

32:27श्राद्ध है। अब यह हो गया तो अब उसके बाद

32:30पितृ पक्ष में जो 16 दिन हैं अभी तो आपने

32:33बताया कि अगर संभव है तो 15 16 दिन लगातार

32:35हर श्राद्ध को करो। तो मैं यह समझना चाहती

32:38हूं कि अगर कोई गया श्राद्ध कर आया, अगर

32:41कोई बद्रीनाथ में जाके श्राद्ध कर आया तो

32:44क्या उसके बाद भी हमें उन 15 दिन तक 16

32:47दिन तक लगातार पितृ पक्ष में क्या श्राद्ध

32:50करते ही रहना है क्या?

32:52देखिए कुछ ऐसे लोग होंगे जिनका आपको पता

32:56ही नहीं होगा और उनका आपको नाम ही नहीं

32:57आएगा। जैसे मेरा ये मैंने आपको बताया मेरा

33:01एक भाई कजिन

33:04कुछ लोगों के आप जो इस पॉइंट पर आ जाएंगे

33:07ना जिनको ब्रह्म कपाल का श्राद्ध मिलना

33:09होगा

33:10हम

33:10वो आपको उन्हीं के सबका याद आएगा और आप

33:13उनका कर देंगे पर कई ऐसे होते हैं जो या

33:17तो मिस हो जाएंगे या उसके बावजूद हम कहते

33:20हैं कि अगर आप पूर्णतया हर श्राद्ध को ना

33:23भी करें तो मंत्र तो कर सकते हैं ना

33:26तो हम ये मैं बहुतों को कहती हूं कि इस

33:29चीज का उच्चारण करिए सारे 16 के 16

33:31श्राद्ध यह भी तो भाई ऊर्जा क्रिएट करेंगे

33:33आप। आप यह मंत्र उच्चारण करेंगे। आप

33:35कहेंगे यह मंत्र मैं संकल्पित रूप से अपने

33:37पितरों को देता हूं। यह श्राद्ध में आपको

33:40करना ही करना है। आप यह नहीं कह सकते और

33:42फिर आप जो सर्वपित्री अमावस्या है

33:46उसमें आप श्राद्ध जरूर करिए। जो रह गए जो

33:49नहीं पता जो हमें नहीं पता जो सारे उसी

33:51में आप पार लगाइए। देखिए जब चंद्रमा और

33:55सूर्य का संगम होता है ना वो अमावस्या का

33:59दिन है। संगम है वो चंद्रमा और सूर्य का

34:02वो श्राद्ध बड़ा इंपॉर्टेंट है। जैसे माघ

34:06का भी माघ अमावस्या का श्राद्ध बड़ा

34:08इंपॉर्टेंट है। जो श्राद्ध पक्ष मिस हो

34:11जाते हैं तो वैसे तो आप किसी भी अमावस को

34:12कर सकते हैं। पर माघ ही अमावस्या भी बड़ी

34:15इंपॉर्टेंट मानी गई है इसके लिए।

34:17संक्रांति तिथि बहुत इंपॉर्टेंट है तर्पण

34:20के लिए। यहां पर आप पिंडदान नहीं कर सकते।

34:22संक्रांति को आप पिंडदान नहीं कर सकते मगर

34:25तर्पण कर सकते हैं। संक्रांति बड़ा

34:27इंपॉर्टेंट डे है। आप हर महीने संक्रांति

34:29आती है करें उसको। अब आप यह ना सोचे मेरे

34:31तो चले गए थे। कोई रह गया होगा। वैसे भी

34:34इस कर्म का इफेक्ट आएगा कि वो मेरी कौन सी

34:37पीढ़ी में कौन रह गया। मैंने उसको भी

34:38तर्पण दे दिया।

34:40हम ये कहूंगी मैं। और कई ऐसे होते हैं जो

34:43एक बार से पार ही नहीं लगते। उनका इतना

34:46खराब होता है हिसाब कि वो एक बार के

34:48श्राद्ध से पार नहीं लगते। फिर अब आप क्या

34:51नेगोशिएशन में पड़ेंगे? रजिस्टर तो है

34:53नहीं कि वह पहाड़ लगानी है। तो आप जब तक

34:55जीवित हैं करते रहिए। करते रहिए, करते

34:56रहिए। ज्यादा मत सोचिए। कुछ-कुछ

34:58थोड़ा-थोड़ा तो हम सब कर सकते हैं। उसमें

35:00मैंने नहीं कहा कि बहुत कोई मनो खाना आप

35:02किसी को दे दें। थोड़ा-थोड़ा करते रहिए।

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