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कौन थे नीम करोली बाबा? क्या है कैची धाम की कहानी? Neem Karoli | Kainchi Dham | Shubhankar Mishra

BhaktiBook · 1,707 words · 8 min read

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0:00क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्या

0:02है उस छोटे से पहाड़ी आश्रम में जहां कदम

0:05रखते ही दुनिया के सबसे बड़े दिमागों की

0:09बेचैनी गायब हो जाती है।

0:12क्या सोचा आपने कि कैलिफोर्निया के टेक

0:15लैब में बैठकर कोड लिखने वाले अरबपति

0:18अचानक हिमालय की हवा में शांति खोजने

0:21क्यों लग जाते हैं?

0:23क्यों स्टीव जॉब्स जैसा जीनियस जिसका हर

0:26आईडिया दुनिया को बदल दिया करता था। वह यह

0:29कहता है कि मेरी सबसे महत्वपूर्ण यात्रा

0:32भारत की है।

0:34कैंची धाम की है।

0:37क्यू मार्क ज़करबर्ग जैसा इंसान जिसका हर

0:40सेकंड करोड़ों में तोला जाता है। अपनी

0:42सबसे निजी कमजोरी प्रधानमंत्री मोदी के

0:45सामने यूं खोलता है और कहता है कि जब मैं

0:48टूट गया था तो स्टीव जॉब्स ने मुझसे कहा

0:50था कि भारत जाओ नीम करौली बाबा के पास

0:53जाओ।

0:55और यहीं से असली सवाल उठता है कि वो

0:58कौन सा बाबा था

1:02जिसने कभी टीवी पर उपदेश तो नहीं दिया।

1:05कभी मीडिया के सामने सिर नहीं उठाया, कभी

1:07प्रचार का एक पोस्टर तक नहीं लगाया।

1:10लेकिन फिर भी दुनिया के कोनेकोने में बैठे

1:13करोड़ों लोग उसे भगवान के रूप में मान रहे

1:16हैं। नतमस्तक है। पूर्ण समर्पण किए बैठे

1:20हैं।

1:23वो कौन से बाबा थे जो

1:26जीते जी

1:29तो प्रसिद्ध थे ही लेकिन शायद जब इस श्लोक

1:32से उस श्लोक गए

1:34तो उनको मानने वालों की संख्या और असंख्य

1:36बढ़ गई।

1:39और यह संख्या सिर्फ देसी लोगों की नहीं

1:41है। यह उनकी है जो दुनिया को चलाते हैं।

1:45दुनिया पर राज करते हैं।

1:47जिनको कुछ लेना नहीं है। सब कुछ जिनके पास

1:50है।

1:53वो कौन से बाबा थे?

1:56जिनके पास ना कोई तिलक का भारी भरकम

1:59प्रतीक था, ना चमत्कारी डंडा, ना सिंहासन,

2:01ना चमत्कार का चोला।

2:04फिर भी लोग कह देते थे बाबा जो कह दे वही

2:06हो जाता है।

2:09आज ये कहानी सिर्फ एक संत की नहीं है। यह

2:11उस रहस्य की कहानी है जो हर तर्क को

2:13चुनौती देता है। जिसे ना विज्ञान समझ पाया

2:16ना इतिहास पकड़ पाया। ना ही धर्म

2:18शास्त्रों में जिसका पूरा वर्णन होता है।

2:21एक ऐसा संत जो जितना साधारण दिखता उतना ही

2:24असाधारण था। जिसने कभी खुद को भगवान नहीं

2:27कहा। लेकिन दुनिया ने भगवान का संदेशवाहक

2:30माना। यह कहानी है हमारे नीम करौली बाबा

2:34की। एक ऐसा नाम जो चमत्कार से बड़ा है।

2:37चमत्कारों की दुनिया के लिए एक ऐसी पहेली

2:40है जिसका समाधान आज तक कोई नहीं खोज पाया।

2:44यह कहते हैं कि नीमकरली बाबा का श्री राम

2:47लक्ष्मीारायण शर्मा था। उत्तर प्रदेश के

2:50अकबरपुर गांव में जन्मे लगभग 1900 के

2:53आसपास। तारीख स्पष्ट नहीं है। बचपन साधारण

2:57था। स्वभाव असाधारण। कोई ढोंग नहीं, कोई

3:00चमत्कार दिखाने की कोशिश नहीं। कोई आश्रम

3:03का साम्राज्य नहीं। 11 सितंबर साल 1973 को

3:06जब शरीर त्यागा उसी दिन से उनका प्रभाव

3:09बढ़ता चला गया। दुनिया में शायद यह पहला

3:12उदाहरण है जब किसी संत की शक्ति उसके जाने

3:15के बाद कई गुना बढ़ी। इतना की मौत के बाद

3:19कैलिफोर्निया के टिक साम्राज्यों की दिशा

3:21निर्धारित हो गई। यही भूमिका, यही रहस्य

3:23है और यही दरवाजा है जहां से नीम करौली

3:25बाबा की अद्भुत कथा की शुरुआत होती है।

3:28अकबरपुर का साधारण सा लड़का जो आगे चलकर

3:30दुनिया की दिशा बदलने वाला था। ये कहते

3:33हैं कि बचपन से ही उनमें एक अजीब सी

3:34ऊर्जा, एक स्थिरता, एक गहराई थी। कई बार

3:37बिना बोले लोगों के मन की बात कह देते थे।

3:40कई बार ऐसी बातें कहते थे जो बाद में सच

3:42होती थी। पर इस पर कभी ध्यान नहीं गया

3:44क्योंकि अपने भीतर किसी शक्ति का प्रदर्शन

3:46नहीं कर रहे थे।

3:50समय बीता, बड़े हुए, घर छोड़ा। सामान्य

3:52जीवन से दूर गए। किसी को बताया नहीं कि वह

3:54कौन है, क्या बनने आए हैं। चुपचाप भारत की

3:57गलियों, खेतों, गांवों में घूमते रहे और

3:59इसी दौरान धीरे-धीरे लोगों को एहसास हुआ

4:02कि आदमी साधारण नहीं है। अब शुद्ध सवाल

4:05होगा कि कैंची धाम कैसे आया? 1950 के दशक

4:08की बात है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के पास

4:10एक शांत घाटी धूप शांति प्रकृति की गोद

4:13में बैठा एक संत नीम करौली बाबा सड़क

4:16किनारे बैठे हैं। चुप। तभी सामने पहाड़ी

4:19पर एक युवक दिखाई पड़ता है। बाबा दूर से

4:21चिल्लाते हैं। पूरन नीचे आओ। पूरन चौंक

4:23जाता है। उसकी धड़कन थी। कौन है? नाम कैसे

4:26जानता है? पर आवाज इतनी सच्चाई से भरी थी

4:29कि नीचे उतरता है। बाबा मुस्कुराते हैं।

4:31कहते हैं मैं तुम्हें कई जन्मों से जानता

4:33हूं। खाना लाओ। पूरन घर जाता है। गरीब

4:35परिवार बस दाल रोटी लाकर बाबा को देता है।

4:38बाबा खाते हैं। फिर अचानक कहते हैं 24

4:40घरों के लिए चावल लाओ। गांव के लोग इकट्ठा

4:43हो जाते हैं। बाबा उन्हें जंगल की ओर ले

4:45जाते हैं। एक विशाल पत्थर की ओर इशारा

4:47करते हैं। कहते हैं हटाओ। लोग हंसते हैं।

4:49कहते हैं सदियों से पड़ा है। हिल नहीं

4:51सकता। पर जैसे ही सब मिलकर धक्का देते हैं

4:54पत्थर हट जाता है। पीछे एक गुफा दिखाई

4:56पड़ती है। इतनी साफ कि जैसे किसी ने

4:59अभी-अभी इस्तेमाल की हो। अंदर धनी जल रही

5:02थी। गर्म राख ताजा लकड़ियां। जैसे कोई अभी

5:05उठाओ। गांव वाले हैरान बाबा शर्त। वो कहते

5:08हैं कि यह हनुमान जी की जगह है। उनकी

5:11तपोभूमि इसे पवित्र करो। लोगों ने पानी

5:15लाकर जगह को पवित्र किया और यही स्थान बाद

5:18में बन गया कैंची धाम। जहां से बाबा की

5:21अंतरराष्ट्रीय पहचान की शुरुआत हुई। जहां

5:23आज लाखों लोग आते हैं। जहां स्टीव जॉब्स,

5:26मार्क ज़करबर्ग और दुनिया की सैकड़ों

5:28हस्तियां अपनी जिंदगी का नया पन्ना लिखने

5:30आती हैं। एक बार बाबा दिल्ली में बिरला

5:33मंदिर परिसर में थे। कई भक्त मिलने आए।

5:35उन्हीं में एक युवक उदास था। चेहरा उदास

5:37मन बेबस वो कुछ बोल पाता उससे पहले ही

5:40बाबा ने कहा तुम्हारा भाई जेल से निकलेगा

5:42देश का शासक बनेगा जाओ तैयारी करो युवक

5:45रोता हुआ बोला कि बाबा आप क्या कह रहे हैं

5:47मेरे भाई को पाकिस्तान में सजाए मौत दी गई

5:50है मियांवाली जेल में कभी भी फांसी हो

5:52सकती है बाबा मुस्कुराए कह जाओ समय बदल

5:55चुका है सत्य वही हुआ पाकिस्तान

5:57बांग्लादेश युद्ध हुआ बांग्लादेश अस्तित्व

6:00में आया और वहीं से इतिहास रचा गया उस

6:03युवक का भाई बना बांग्लादेश का पहला

6:05राष्ट्रपति शेख मुजीब उर रहमान यह कोई

6:08भविष्यवाणी नहीं थी। यह किसी शक्ति का खेल

6:10था। एक ऐसी शक्ति जो नियमों से नहीं भावों

6:13से चल रही थी। और ऐसी अनगिनत कहानियां है।

6:15एक कहानी बुलेट प्रूफ कंबल की जिससे सैनिक

6:18की जान बचाई। यह कहानी दुनिया में सबसे

6:21ज्यादा सुनाई जाती है क्योंकि तर्क से परे

6:23है लेकिन सत्य है। फतेहगढ़ उत्तर प्रदेश

6:25में एक बुजुर्ग दंपत्ति बाबा के भक्त एक

6:28शाम बाबा पहुंचे। दरवाजे पर गरीब लोग थे

6:30पर श्रद्धा समृद्ध थी। जो भी था खिलाया।

6:33एक पुरानी चारपाई पर कंबल डालकर बाबा को

6:35सुला दिया। रात गहराई उसके साथ बाबा की

6:38करहटें शुरू हुई। दंपत्ति ने देखा बाबा

6:40जैसे किसी अदृश्य हमले से बचने की कोशिश

6:43कर रहे हो। करवटें, दर्द, पीड़ा, चोट की

6:46आवाज। जैसे उन्हें गोलियां आर-पार कर रही

6:49हो। जैसे कोई युद्ध चल रहा हो। दंपति डर

6:53गए पर नजदीक जाने की हिम्मत नहीं हुई।

6:55सुबह बाबा उठे, कंबल दंपति को दिया। कहा,

6:57"इसे खोलना नहीं, गंगा में छोड़ना, खुश हो

7:00जाओ। एक महीने बाद तुम्हारा बेटा लौट

7:03आएगा।

7:04दंपति ने कंबल उठाया महसूस हुआ अंदर कोई

7:07लोहे की चीज है। मनुआ खोलें पर आदेश कमान

7:09रखा। गंगा में प्रभावित कर दिया। ठीक एक

7:12महीने बाद दरवाजे पर दस्तक हुई। उनका बेटा

7:15जो बर्मा फ्रंट पर जापानी सेना से लड़ रहा

7:17था जिंदा लौटा। उसने बताया कि उस रात

7:20गोलियां इतनी चली कि सारे साथी मारे गए।

7:23उसने कहा कि मुझे लग रहा था कि मौत तय है।

7:25लेकिन ना जाने कैसे हर गोली मेरे पास से

7:27गुजरती रही। कुछ हुआ नहीं।

7:30दंपत्ति खामोश उन्हें बस उसी रात की याद

7:33आई जब बाबा करवट बदल रहे थे। ऐसा लग रहा

7:35था जैसे मानो खुद लड़ रहे हो। कैसे-कैसे

7:38अदृश्य युद्ध की चोटें अपने ऊपर ले रहे

7:40हो।

7:42ये कहानी विज्ञान शायद सवाल खड़े करे

7:45लेकिन आस्था तर्कों से ऊपर होती है। ऐसी

7:48ही कहानी है स्टीव जॉब्स जकरबर्ग की। 1974

7:52में स्टीव जॉब्स भारत आए। वो टूटे हुए थे

7:55अंदर से, बाहर से, जीवन से। जॉब्स बाद में

7:58कहते हैं कि मैंने अपने जीवन का अर्थ

8:00कैंची धाम में पाया। उसे लगा जैसे किसी ने

8:02उसके भीतर बसी बेचैनी को निकालकर शांत जल

8:05की तरह रख दिया और कई साल बाद जब मार्क

8:07ज़करबर्ग अपने करियर के कठिन दौर में थे।

8:09Facebook टूट रहा था। आलोचनाएं बढ़ रही

8:11थी। दिशा खो चुके थे। तब जॉब्स ने सलाह दी

8:14कि भारत जाओ। कैची धाम जाओ। ज़करबर्ग भारत

8:16आए। एक दिन रुकना था। मौसम खराब हुआ। दो

8:19दिन फंस गए। जब लौटे तो कहा मेरी सोच बदल

8:22गई। जीवन बदल गया। यही वजह है कि आज

8:24विसलकॉन वैली में नीम करौली बाबा की

8:26तस्वीरें जगह-जगह मिलेंग। लोग कहते हैं

8:29उनकी ऊर्जा कोड नहीं बनाती पर कोड बनाने

8:31वालों का मन बदल देती है। बाबा के बारे

8:34में कई कहानियां है। बाबा का असली रहस्य

8:38क्या था जो दुनिया को बांध लिया गया।

8:39देखिए बाबा ने कभी प्रचार नहीं किया। कभी

8:41चमत्कार दिखाने की कोशिश नहीं की। खुद को

8:44भगवान नहीं कहा। अपनी शक्तियों का

8:46प्रदर्शन नहीं किया। हमेशा यही कहा कि मैं

8:48कुछ नहीं हूं। जो है वह हनुमान जी है। यही

8:51उनकी सबसे बड़ी शक्ति थी। पूर्ण

8:53अहंकारहीनता जब दुनिया के बड़े से बड़े

8:56लोग टूट जा रहे थे, निराश हो रहे थे, दिशा

8:58खो रहे थे, बाबा सिर्फ एक बात कह रहे थे

9:01कि सब प्रेम से करो बाकी खुद हो जाएगा।

9:04उनके पास समाधान नहीं था। उनके पास

9:06उपस्थिति थी। किसी के जीवन में जादू इसी

9:10से आता है। उपस्थिति से ना कि दिखावे से।

9:13आज भी कैंची धाम में वही ऊर्जा बहती है।

9:15उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसा वह स्थान

9:18आज सिर्फ एक मंदिर नहीं एक अनुभव है। लोग

9:20कहते हैं वहां जाने से पहले मन में जो

9:22सवाल आता है, जवाब भीतर से निकलता है।

9:24जैसे बाबा वहीं बैठे हो। आज भी कंबल ओढ़े,

9:28मुस्कुराते कुछ कहे बिना सब कुछ नहीं जाने

9:32वाले।

9:33ये कहानी नीमकरली बाबा की थी। कैंची धाम

9:37की थी। कहानी अच्छी लगी हो तो अपनों से

9:39शेयर कीजिएगा। हमारे भक्ति बुक से नहीं

9:43जुड़े हो तो जुड़िएगा

9:45और हमारे चैनल को सब्सक्राइब भी कीजिएगा।

9:48हमारा आपका रिश्ता मजबूत होगा। ऐसी और

9:49कहानियां हम आप तक लाते रहेंगे। जय हिंद

9:52जय भारत नमस्कार।

9:54[संगीत]

9:57नहीं

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