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4th Khalifa
0:00इस्लाम का चौथा खलीफा
0:03अमीरुल मोमिनीन अली।
0:08इस्लाम का सबसे बड़ा चीफ जस्टिस इस्लाम का
0:13सबसे बहादुर वॉरियर।
0:17[संगीत]
0:18जैसे ही इस्लाम के तीसरे खलीफा, खलीफा
0:21उस्मान रजिला को उन्हीं के घर में शहीद कर
0:24दिया गया।
0:26पूरी खिलाफत में एक खौफ फैल गया।
0:31हर तरफ गुस्सा और गम फैला हुआ था।
0:36मुसलमानों की इस खिलाफत में जो इस वक्त
0:39हिंदुस्तान से लेकर यूरोप के समंदरों तक
0:42फैली हुई थी। [संगीत]
0:43पहली बार ऐसा वक्त आया था कि इस इतनी बड़ी
0:47खिलाफत का कोई खलीफा नहीं था। और फॉर
0:50[संगीत] द फर्स्ट टाइम ऐसा लग रहा था कि
0:52अब फाइनली मुसलमानों की ये खिलाफत टूट
0:56जाएगी।
0:58लेकिन अब जब खिलाफत के हालात इतने खराब हो
1:01चुके थे। मदीना के सारे मुसलमानों को
1:04अच्छी तरह पता था कि अब इस खिलाफत को
1:07सिर्फ एक ही आदमी बचा सकता है। रसूल्लाह
1:11सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दामाद
1:15जिनकी तरबियत खुद रसूल्लाह सल्लल्लाहु
1:17अलैहि वसल्लम के घर में हुई थी।
1:20खैबर को फतह करने वाले [संगीत]
1:25हजरत अली रज अल्लाह
1:30इसीलिए हजरत उस्मान को दफनाने के फौरन बाद
1:33कुछ लोग हजरत अली रज अल्लाह अनू के पास गए
1:35और उन्हें कहा कि हम आपको मुसलमानों का
1:38नया खलीफा बनाना चाहते हैं। [संगीत]
1:41लेकिन हजरत अली ने कहा नहीं मेरी खिलाफत
1:43ऐसे छुप कर सीक्रेटली नहीं होगी बल्कि जाओ
1:48और सबको मदीना की मस्जिद में जमा करो।
1:52[संगीत]
1:52जिसके बाद हजरत अली खुद रसूल अल्लाह
1:55सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मिंबर पर खड़े
1:57हुए। [संगीत]
1:59जहां बिल्कुल पहले खलीफा अबू बकर दूसरे
2:02खलीफा उमर और तीसरे खलीफा उस्मान की तरह।
2:08सारे मुसलमानों ने चौथे खलीफा हजरत अली रज़
2:11अल्लाह अनहु के हाथ पर बैत की।
2:15जिसके बाद अमीरुल मोमिनीन खलीफा अली रज़
2:18अल्लाह अनहु ने अपनी खिलाफत की पहली स्पीच
2:22शुरू की।
2:24पर वेट आखिर खलीफा अली रज़ अल्लाह अनहु
2:28यहां तक पहुंचे कैसे?
2:31इसके लिए हमें पीछे जाना होगा। हजरत अली
2:35की खिलाफत से बहुत साल पहले मक्का
2:39जो अरब की एक बहुत बड़ी सिटी थी पर हमला
2:43हुआ
2:46और मक्का पर हमला करने वाला यमन का सबसे
2:49बड़ा बादशाह अब रहा था
2:53जैसे ही वो अपनी 60 हजार की फौज लेकर
2:57मक्का के करीब पहुंचा।
3:00मक्का के सारे लोग डर गए और उन्होंने
3:03अब्राह से मुकाबले के लिए अपना सबसे बड़ा
3:06सरदार आगे किया
3:09जिसका नाम था अब्दुल मुतलिब
3:13जिसने काबा के खिलाफ को पकड़ कर अल्लाह से
3:16दुआ की कि या अल्लाह अपने इस घर काबा को
3:21अब्राह से बचा
3:24[संगीत] जिसके बाद अल्लाह ने एक मिरेकल से
3:26अब्राह और उसकी सारी फौज को तबाह कर दिया
3:30[संगीत]
3:31और मक्का ये जंग जीत गया।
3:36ये जंग जीतने के बाद मक्का और स्पेशली
3:38अब्दुल मुतलिब का नाम पूरे अरब में फैल
3:41गया। और पूरा अरब अब्दुल मुतलब को एक बड़ा
3:46सरदार मानने लगा।
3:49लेकिन इसके कुछ ही अरसे बाद अब्दुल मुतलब
Birth
3:52इस [संगीत] दुनिया से चले गए।
3:55जिसके बाद उनका बेटा उनके कबीले बनू हाशिम
3:59का नया सरदार बना। हजरत अबू तालिब।
4:04एक दिन अबू तालिब अपने किसी काम से मक्का
4:07से बाहर किसी और जगह गए हुए थे और जैसे ही
4:09अपने सारे काम खत्म करके वो वापस मक्का
4:12में अपने घर पहुंचे। उन्हें बताया गया कि
4:15मुबारक हो आपका बेटा पैदा हुआ। जिसका नाम
4:19आपकी बीवी फातिमा ने हैदर रखा है जिसका
4:22मतलब है शेर।
4:25लेकिन अबू तालिब ने कहा नहीं
4:28और उन्होंने अपने बेटे का नाम हैदर से बदल
4:31दिया और उसका नाम रखा आली।
4:34इस वक्त [संगीत] अबू तालिब मक्का के सबसे
4:37बड़े सरदारों में से एक थे। और हजरत अली
4:40मक्का के बड़े सरदार के सबसे छोटे बेटे
4:44थे। जब हजरत अली की ऐज 5 साल हुई। अचानक
4:48उसी साल अरब में एक बहुत बड़ा कहता था
4:51आया।
4:52जिसकी वजह से अरब के साथ-साथ मक्का की
4:55इकॉनमी भी तेजी से गिरने लगी और मक्का के
4:59बड़े-बड़े सरदारों का बिजनेस बिल्कुल खराब
5:02हो गया। [संगीत]
5:04इन्हीं सरदारों में एक हजरत अली के वालिद
5:07अबू तालिब भी थे। बल्कि अबू तालिब के घर
5:11के हालात इतने खराब हुए कि उनके लिए अब
5:14अपने घर वालों का ख्याल रखना भी मुश्किल
5:16हो गया था।
5:18अब जब इन सख्त हालात में अबू तालिब को मदद
5:22की जरूरत थी। उस वक्त उनकी मदद के लिए
5:24उन्हीं का भतीजा आगे बढ़ा। हजरत मोहम्मद
5:27सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम। आप सल्लल्लाहु
5:30अलैहि वसल्लम अपने चाचा अबू तालिब को इस
5:33मुश्किल टाइम में अकेला नहीं छोड़ सकते
5:35थे। [संगीत] क्योंकि इससे बहुत साल पहले
5:38जब आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के मां-बाप
5:40दोनों इस दुनिया से चले गए थे। उसके बाद 8
5:43या 9 साल की उम्र तक अपने दादा अब्दुल
5:46मुतलिब के साथ रहे। [संगीत]
5:47और फिर वो भी जब दुनिया से चले गए उसके
5:50बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 9 साल की
5:53उम्र से लेकर 25 साल की उम्र तक अपने इसी
5:56चाचा अबू तालिब के घर में रहे। मतलब हजरत
6:00अबू तालिब ने 17 साल तक आप सल्लल्लाहु
6:03अलैहि वसल्लम को अपने घर में अपने बेटों
6:06की तरह पाला। तो अब जब आप सल्लल्लाहु
6:08अलैहि वसल्लम एक स्टेबल बिजनेसमैन थे और
6:12उनके चाचा अबू तालिब को मदद की जरूरत थी
6:14तो यह देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
6:16आगे बढ़े और अपने चाचा अब्बास [संगीत] को
6:18लेकर अबू तालिब के घर पहुंचे। इस वक्त अबू
6:22तालिब के तीन छोटे बेटे थे। अकील, जाफर और
6:26अली। अकील को अबू तालिब ने अपने पास रखा।
6:30हजरत अब्बास जाफर रज़ अल्लाह अनहु को अपने
6:32साथ लेकर गए। और रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह
6:35वसल्लम ने अली जिनकी उम्र [संगीत] उस वक्त
6:37सिर्फ 5 साल थी अपने साथ अपने घर लेकर गए।
6:415 साल के छोटे से अली को देखकर आप
6:45सल्लल्लाहु अलह वसल्लम की बीवी हजरत खदीजा
6:47रज अल्लाह अन्हा बहुत खुश हुई होंगी
6:50क्योंकि इससे कुछ ही साल पहले हजरत खदीजा
6:52रज अल्लाह अन्हा का बेटा कासिम बिन
6:54मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फौत हो
6:56चुके [संगीत] थे और अगर इस दिन वो जिंदा
7:00होते तो उनकी उम्र आज इतनी ही होती जितनी
7:03इस वक्त अली रज अल्लाह अनहु की उम्र थी तो
7:06अब अली के रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
7:08वसल्लम के घर आने से कासिम के जाने का गम
7:11थोड़ा कम होने लगा। जिसके बाद आप
7:14सल्लल्लाहु अलह वसल्लम और खदीजा रज अल्लाह
7:16अन्हा हजरत अली की तरबियत बिल्कुल अपने
7:19बेटों की तरह करने लगे। और यहां से इस्लाम
7:23के सबसे बड़े आलिम और इस्लाम के सबसे बड़े
7:27वॉरियर की तरबियत शुरू हुई।
7:30हजरत अली रज अल्लाह अनो दुनिया के वो
7:33अकेले आदमी हैं जिनकी तरबियत बचपन से रसूल
7:36अल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने खुद की
7:38थी और हजरत अली की जिंदगी को देखकर यह
7:41अंदाजा लगाया जा सकता है कि दुनिया की
7:43सबसे बेस्ट पर्सनालिटी रसूल अल्लाह
7:46सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अगर किसी की
7:48तरबियत करें तो वो आदमी कैसा होगा। आप
7:51सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अली की
7:52तरबियत का बचपन से खास ख्याल रखते थे।
7:55हजरत अली रज़ अल्लाह अनू को उन्होंने बचपन
7:58से ही लिखना और पढ़ना सिखा दिया था। लेकिन
8:01पढ़ने लिखने के साथ-साथ कुछ और स्किल्स भी
8:04सीख रहे थे। [संगीत] इसी तरह आप
8:07सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर में 5 साल
8:09गुजारने के बाद जब हजरत अली की उम्र 10
8:11साल हुई। कभी-कभी रसूल्लाह सल्लल्लाहु
8:14अलैहि वसल्लम अपने घर से बहुत दूर मक्का
8:16के एक पहाड़ में एक गार की तरफ जाने लगे।
8:20और आखिर उसी गार में एक दिन रसूल्लाह
8:23सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर अल्लाह की वही
8:25नाजिल हुई।
8:28[संगीत]
8:29जिसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
8:31सीधा अपने घर आए और दुनिया में सबसे पहले
8:34उनकी बीवी खदीजा रज अल्लाह अन्हा ने
8:36इस्लाम कबूल किया। जिनके बाद उन्हीं के घर
8:39में रहने वाले 10 साल की उम्र में अली रज़
8:42अल्लाह अनो ने इस्लाम कबूल कर लिया। और
8:45फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बेस्ट
8:47फ्रेंड अबू बकर रज़ अल्लाह अनो ने इस्लाम
8:49कबूल किया। जिसके बाद एक दिन आप
8:52सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम हजरत अली के साथ
8:54नमाज पढ़ रहे थे। अचानक [संगीत] हजरत अली
8:57के बाप अबू तालिब वहां से गुजरे और
9:00उन्होंने अली से पूछा कि ये तुम क्या कर
9:02रहे हो? जिस पर हजरत अली ने उन्हें बताया
9:05कि मैं मुसलमान हो चुका हूं।
9:08यह सुनकर अबू तालिब ने हजरत अली से कहा कि
9:10मुझे पता है मोहम्मद तुम्हें कभी भी किसी
9:13भी गलत चीज की तरफ नहीं बुलाएगा। तो तुम
9:16जाओ और उसी को फॉलो करो। जिसके बाद हजरत
9:20अली इस्लाम के वो पहले आदमी थे जिन्होंने
9:24आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के साथ काबा के
9:26पास पहली नमाज पढ़ी। एक दिन आप सल्लल्लाहु
9:30अलैहि वसल्लम काबा के पास हजरत खदीजा और
9:34अली रज अल्लाह अनहु के साथ नमाज पढ़ रहे
9:37थे। इन्हें देखकर वहां खड़े एक आदमी ने आप
9:40सल्ला अलैहि वसल्लम के चाचा से पूछा कि
9:42आखिर ये तीन लोग कर क्या रहे हैं? जिस पर
9:46आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा ने इस
9:48आदमी को बताया कि यह मेरा भतीजा मोहम्मद
9:51है। जो कहता है मैं इस पूरी दुनिया में
9:54अल्लाह का आखिरी रसूल हूं।
9:58इस वक्त इस पूरी दुनिया में इस औरत और इस
10:01बच्चे के अलावा कोई भी इसकी बात मानने को
10:05तैयार नहीं है। लेकिन यह मेरा भतीजा कहता
10:07है कि बहुत जल्द दुनिया के बड़े-बड़े सुपर
10:11पावर
10:13रोमन और परर्शियन एंपायर
10:16ये सारे खजाने हमारे रिलजन के कंट्रोल में
10:20होंगे। उस वक्त तो इस आदमी ने इस्लाम कबूल
10:24नहीं किया। लेकिन आगे जाकर जब वाकई में
10:26मुसलमानों ने रोमन और परर्शियन एंपायर फतह
10:29कर ली [संगीत]
10:31तब इस आदमी ने कहा कि काश मैं उस दिन
10:34इस्लाम कबूल कर लेता तो मैं दुनिया का
10:38चौथा मुसलमान होता इसी तरह आने वाले काफी
10:42अरसे तक इस्लाम मक्का में सीक्रेट रहा
10:46और सिर्फ कुछ ही लोग मुसलमान हुए लेकिन
10:49आखिर कुछ ही अरसे बाद आप सल्लल्लाहु अलह
10:52वसल्लम की तरफ अल्लाह की एक वही आई जिसमें
10:56अल्लाह ने आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम को
10:58हुकुम दिया कि अपने पूरे खानदान को इस्लाम
11:01की दावत दो। जिसके बाद आप सल्लाहु अलैहि
11:04वसल्लम ने अपने घर में अपने खानदान के 40
11:07मेंबर्स को खाने की दावत पर बुलाया।
11:10इस्लाम की इस पहली दावत में आप सल्लल्लाहु
11:13अलैहि वसल्लम की मदद के लिए सिर्फ हजरत
11:16अली खड़े थे। इसीलिए खाने पीने की सारी
11:19जिम्मेदारी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
11:21अली रज़ अल्लाह अनहु को दी। जिन्होंने कहा
11:23जाता है बहुत अच्छी तरह खाने का इंतजाम
11:26[संगीत] किया जिसमें कहा जाता है बकरी के
11:29पाए और दूध भी शामिल था। इस वक्त [संगीत]
11:33हजरत अली की उम्र सिर्फ 13 साल थी और इसी
11:37ऐज से आहिस्ता-आहिस्ता हजरत अली के आंखों
11:40में [संगीत] एक एलर्जी भी शुरू हुई थी।
11:42कंजेक्टिवाइटिस
11:44जो उनकी जिंदगी में काफी अरसे तक रही।
11:47जैसे ही सारों ने मजे से यह खाना खाया। आप
11:51सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने खानदान के
11:53सामने खड़े हुए और पहली बार पब्लिकली
11:56इस्लाम की दावत दी और अपने खानदान के
12:00लोगों से कहा कि कौन इस मिशन में मेरा साथ
12:03देगा लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के
12:06बार-बार कहने के बाद भी कोई भी उनका साथ
12:09देने के लिए खड़ा नहीं हुआ। जब हजरत अली
12:12[संगीत] ने देखा कि कोई भी आप सल्ला अलह
12:15वसल्लम का साथ देने के लिए खड़ा नहीं हो
12:17रहा तो सिर्फ 13 साल की उम्र में हजरत अली
12:20खड़े हुए और वहां बैठे सबके सामने कहा ऐ
12:23अल्लाह के रसूल मेरी टांगे कमजोर है
12:26[संगीत]
12:27और मेरी आंखें दुखती है लेकिन फिर भी मैं
12:31हमेशा आपके साथ खड़ा रहूंगा जब आप
12:35सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अपने खानदान
12:38ने उनका साथ नहीं दिया फिर भी आप
12:40सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रुके नहीं बल्कि
12:42आहिस्ताआहिस्ता मक्का में इस्लाम फैलाते
12:44रहे और आप सल्ला अलह वसल्लम के साथ हजरत
12:47अली भी लोगों तक इस्लाम पहुंचाते रहे और
12:50उन्हीं दिनों हजरत अली की वजह से एक बहुत
12:52बड़े सहाबी ने भी इस्लाम कबूल किया जिनका
12:56नाम था अबूजर गफ्फारी
12:59लेकिन अब जब इस्लाम आहिस्ताआहिस्ता फैलने
13:01लगा मक्का के सरदार आप सल्लल्लाहु अलैहि
13:04वसल्लम से नफरत करने लगे यहां तक कि कुछ
13:08सरदार तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को
13:10टॉर्चर करने मक्का में गद्दारों के लिए
13:12कोई पनाह नहीं।
13:13इन सब में एक सरदार ऐसा था जिसने आप
13:15सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर बहुत ज्यादा
13:18जुल्म किया था। बनू उमैया खानदान का ओकबा
13:21नहीं छोडूंगा उसे।
13:23एक दिन जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
13:25नमाज पढ़ रहे थे। इसी ओकबा ने उनके सर के
13:28ऊपर ऊंट की ओजरी डाल दी। जिसे फिर आप
13:31सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सबसे छोटी
13:33बेटी हजरत फातिमा रज अल्लाह अन्हा ने
13:36हटाया। और आखिर एक दिन जब आप सल्लल्लाहु
13:39अलैहि वसल्लम नमाज पढ़ रहे थे। यही उकमाबा
13:41पीछे से आया। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
13:43के गले में अपनी चादर डाली और उसे जोर से
13:46खींचने लगा जिससे आप सल्लल्लाहु अलैहि
13:50वसल्लम की सांस बिल्कुल बंद हो गई। और आप
13:53सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जमीन पर गिर गए।
13:57ये देखकर आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम को
13:58बचाने के लिए अबू बकर रहु पहुंचे और आप
14:02सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को छुड़ाकर उकबा
14:04और उनके दोस्तों से लड़ने लगे। लेकिन उन
14:06सब ने मिलकर अबू बकर रज़ अल्लाह अनो को भी
14:09बहुत मारा।
14:10क्या कहा तुमने? इतना मारा कि वो बेहोश हो
14:13गए। ये आप सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम की
14:16जिंदगी का बहुत ही सख्त दिन था। और जब भी
14:19अली रज़ अल्लाह अनहु इस दिन को याद करते
14:21थे। वो इस दिन की कहानी रो कर सुनाते थे।
14:25क्योंकि इस वक्त हजरत अली की ऐज बहुत ही
14:27कम थी। और वो छोटे होने की वजह से अपनी
14:30ताकत से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को
14:32डिफेंड नहीं कर सकते थे। लेकिन मक्का के
14:35एक-एक सरदार का किया हुआ जुल्म उन्हें
14:39अच्छी तरह याद था और ये सारे चेहरे उनके
14:43ज़हन में नक्श हो गए थे। इसी तरह सख्त
14:47हालात में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के
14:49साथ हजरत अली भी मक्का में मुश्किल जिंदगी
14:52गुजारते रहे। लेकिन आहिस्ताआहिस्ता हालात
14:55ठीक होने के बजाय और भी ज्यादा खराब होने
14:57लगे। क्योंकि अचानक [संगीत] एक साल मक्का
15:00में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को डिफेंड
15:03करने वाले दो सबसे बड़े लोग एक ही साल में
15:06दुनिया से चले गए। [संगीत]
15:08हजरत अली के वालिद अबू तालिब और रसूल्लाह
15:12सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवी खदीजा रज
15:14अल्लाह अन्हा ये साल आप सल्लल्लाहु अलैहि
15:17वसल्लम के साथ-साथ हजरत अली के लिए भी
15:20बहुत मुश्किल था। क्योंकि एक ही साल में
15:22उनके बाप अबू तालिब और खदीजा रज अल्लाह
15:26अन्हा जिन्होंने बचपन से एक मां की तरह
15:29हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु को पाला था। इन
Hijrat
15:32दोनों की वफात के बाद अब मुसलमानों का
15:35मक्का में रहना इंपॉसिबल हो चुका [संगीत]
15:37था। इसीलिए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के
15:40हुक्म पर मुसलमान आहिस्ताआहिस्ता मक्का को
15:42छोड़कर मदीना की तरफ हिजरत करने लगे।
15:46मक्का में सिर्फ आप सल्लल्लाहु अलह
15:48वसल्लम, अबू बकर और अली रज़ अल्लाह अनहु रह
15:51गए। अब जब [संगीत] मक्का के सरदारों ने
15:53देखा कि मुसलमान आहिस्ता-आहिस्ता मक्का को
15:56छोड़कर जा रहे हैं तो उन्होंने आप
15:58सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को रोकने के लिए
16:00एक बहुत ही खतरनाक प्लान बनाया कि मक्का
16:04के हर कबीले से एक-एक आदमी जमा होकर रात
16:08को आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर हमला कर
16:10दे और उन्हें शहीद कर दे। और यह प्लान ऑफ
16:15कोर्स इस्लाम के सबसे बड़े दुश्मन अबू जहल
16:18का था। तो अब हिजरत से पहले 40 लोग तलवारे
16:23लेकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर के
16:25दरवाजे के बाहर छुप कर खड़े हो गए।
16:28लेकिन इस सबका आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम
16:31को पहले ही पता चल चुका था और उन्होंने
16:33अपनी जगह अपने बिस्तर पर हजरत अली रज़
16:36अल्लाह अनो को लिटाया और उन्हें हुकुम
16:39दिया कि मक्का के सारे लोगों की अमानतें
16:41लौटाकर ही तुम सबसे आखिर में मदीना हिजरत
16:44करना जिसके बाद आप सल्ला अलह वसल्लम किसी
16:48तरह अपने घर से निकल कर अबू बकर रज़ अल्लाह
16:51अनो के साथ रात के अंधेरे में हिजरत करके
16:54मदीना की तरफ रवाना हुए। अब जैसे ही मक्का
16:57के ये असेस आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को
17:00मारने के लिए उनके घर के अंदर गए वो ये
17:03देखकर हैरान रह गए कि आप सल्लल्लाहु अलैहि
17:06वसल्लम के बिस्तर पर हजरत अली रज़ अल्लाह
17:08अनहु लेटे हुए थे। ये देखकर उन्हें इतना
17:11गुस्सा आया कि वो सब हजरत अली से लड़ने
17:14लगे और उन्हें घर से निकाल कर मक्का के
17:17जेल में बंद कर दिया और बार-बार हजरत अली
17:20से पूछने लगे कि हमें बताओ
17:22मोहम्मद और अबू बकर कहां हैं? लेकिन जब
17:24हजरत अली ने उन्हें कोई भी हिंट नहीं
17:27दिया। उन्होंने मायूस होकर हजरत अली को
17:30छोड़ दिया। जिसके बाद अगले तीन दिन तक
17:34हजरत अली रज़ अल्लाह अनू ने आप सल्लल्लाहु
17:36अलैहि वसल्लम की सारी अमानतें लोगों को
17:38वापस कर दी और खुद सबसे आखिर में अकेले
17:42बगैर किसी ऊंट और घोड़े के पैदल मदीना की
17:45तरफ रवाना हुए। मक्का से मदीना कोई आम सफर
17:49नहीं था बल्कि यह 450 कि.मी. का लंबा
17:53रास्ता था।
17:55450 कि.मी. वो भी अरब के गर्म डेजर्ट में।
18:00और सबसे मुश्किल बात तो यह थी कि ये जुलाई
18:04का महीना था। जहां इस महीने में 50 डिग्री
18:09से भी ज्यादा गर्मी होती है। लेकिन अरब की
18:13यह सख्त गर्मी भी हजरत अली को उनके मिशन
18:16से नहीं रोक सकी। और हजरत अली पैदल अकेले
18:21इस्लाम के नए घर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम
18:24के शहर मदीना की तरफ चलते रहे।
18:29यहां तक कि अरब के रेगिस्तान की तेज हवाएं
18:32भी उन्हें नहीं रोक सकी और वो आगे बढ़ते
18:35रहे। हजरत अली के इस मुश्किल सफर को देखकर
18:39एक और सफर की भी याद आती है कि जब इससे
18:42हजारों साल पहले मूसा अल सलाम अकेले फिरौन
18:46के शहर से निकल कर
18:49मिस्र के गरम डेजर्ट में पैदल चल रहे थे।
18:53क्योंकि इन दो जर्नीज में एक बात कॉमन है
18:56कि ये दोनों ऑलमोस्ट 450 कि.मी. ही थे। इस
19:01दिन हजरत अली अकेले मदीना की तरफ बढ़ रहे
19:04थे और इतना [संगीत] पैदल चलने की वजह से
19:06उनके पैर बिल्कुल सूझ गए थे। लेकिन
19:09उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिस
19:12मदीना की तरफ वो इतने मुश्किल में बढ़ रहे
19:14हैं, एक दिन इसी मदीना में पूरे खिलाफत की
19:17बैत उन्हीं के हाथ पर होगी। वो खिलाफत जो
19:22हिंदुस्तान से लेकर यूरोप के समंदरों तक
19:25फैली हुई थी। जिसके [संगीत] बाद आज ये
19:28अकेले चलने वाले अली उस दिन दुनिया के
19:31सबसे ताकतवर इंसान बनेंगे। अब जब हजरत अली
19:35सफर में थे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
19:37और अबू बकर रज़ अल्लाह अनो इससे पहले ही
19:39मदीना के करीब पहुंच चुके थे। लेकिन आप
19:43सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना एंटर नहीं
19:45हुए। बल्कि वह मदीना से पहले एक गांव कुबा
19:48में कई दिन तक हजरत अली का बेसब्री से
19:50इंतजार कर रहे थे और जैसे ही उन्हें पता
19:53चला कि हजरत अली अकेले पूरे डेजर्ट को
19:57क्रॉस करके पहुंच चुके हैं तो वो [संगीत]
19:59बहुत खुश हुए और उन्होंने हुक्म दिया कि
20:02अली को मेरे पास बुलाया जाए। लेकिन सहाबा
20:04ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा कि
20:06हजरत अली की हालत [संगीत] ऐसे हो गई है कि
20:09अब वो एक कदम भी और नहीं ले सकते और उनके
20:12पैर अब चलने के काबिल ही नहीं है। यह
20:15सुनकर आप सल्ला अलैहि वसल्लम खुद हजरत अली
20:17के पास [संगीत] गए। उन्हें गले से लगाया
20:19और उनके पैरों के जख्मों को देखकर रोने
20:22लगे और उनके पैरों पर अपना हाथ फेरा जिससे
20:26हजरत अली को थोड़ा सुकून मिला। जिसके बाद
20:29फाइनली आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत
20:31अली रज़ अल्लाह अनो और बाकी सहाबा के साथ
20:34पहली बार मदीना एंटर हुए।
20:38[संगीत]
20:43और मदीना इस्लाम का पहला हेड क्वार्टर
20:46बना। अकबर।
20:48अब जब मक्का से सारे मुसलमान मदीना पहुंच
20:51गए तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इनके
20:54खानेपीने और रहने का मसला हल करने के लिए
20:57मक्का के एक-एक मुसलमान को मदीना के एक-एक
21:00मुसलमान का भाई बनाया। आप सल्लल्लाह
21:03वसल्लम खड़े होकर दो-दो मुसलमानों का नाम
21:06लेने लगे और उन्हें भाई बनाने लगे और सों
21:11के नाम लेकर सबसे आखिर में जब हजरत अली रज
21:14अल्लाह अनू की बाई आई [संगीत]
21:16तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनका
21:17नाम नहीं लिया ये देखकर हजरत अली परेशान
21:21हो गए कि अब मैं मदीना में कैसे रहूंगा और
21:24वो सीधा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के
21:26पास गए और उन्हें कहा कि आपने सबको किसी
21:29का भाई बना दिया सिर्फ मुझे अकेला छोड़
21:32जिस पर आप सल्ला अलह वसल्लम ने हजरत अली
21:34से कहा कि ए अली तुम दुनिया और आखिरत में
21:38मेरे भाई हो। यहां पर एक और रिवायत भी है
21:42कि आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने मदीना में
21:44हजरत अली [संगीत] का भाई साहल बिन हुनैफ
21:47रज़ अल्लाह अनहु को बनाया था। इसी तरह हजरत
21:50अली रज़ अल्लाह अनहु इसके बाद मदीना में एक
21:52आम इंसान की तरह अपनी जिंदगी गुजारते रहे।
21:55और इसके कुछ ही अरसे बाद मदीना के
Badar
21:58मुसलमानों पर एक बहुत ही खतरनाक वक्त आया।
22:01[संगीत]
22:02इस्लाम की पहली जंग
22:05जंग बदर
22:10जिसमें मुसलमानों की 313 की फौज के सामने
22:141000 काफिर खड़े थे। [संगीत] मतलब मुसलमान
22:18अपने से तीन गुना बड़ी फौज से लड़ने आए
22:22थे। जैसे ये दोनों फौजें एक दूसरे के
22:25आमने-सामने हुई।
22:29सबसे पहले मक्का के तीन सरदार आगे बढ़े।
22:33जिनमें से एक जोरजोर से कहने लगा, ऐ मदीना
22:37वालों
22:37मदीना वालों
22:38जिसमें इतनी गैरत है कि वो हमसे आकर लड़े।
22:42ये सुनकर मुसलमानों की फौज से तीन अंसार
22:45आगे बढ़े। [संगीत]
22:48लेकिन ये देखकर मक्का का सरदार कहने लगा
22:50कि तुम कौन हो? वापस जाओ और हमारे पास
22:54हमारे इक्वल
22:56मक्का के भाइयों को भेजो।
22:58ये सुनकर रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
22:59वसल्लम ने अपने तीन मुसलमानों को वापस
23:02बुलाया और इन सरदारों से लड़ने के लिए
23:05मुसलमानों के तीन सरदार भेजे।
23:08और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हुकुम
23:10दिया उबैदा उठो। उबैदा मक्का के पुराने
23:14सरदार अब्दुल मुतलिब के पोते थे। जिसके
23:18बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर
23:19हुक्म दिया हमजा उठो
23:23हमजा भी मक्का के पुराने सरदार अब्दुल
23:25मुतलिब के बेटे थे और आखिर आप सल्लल्लाहु
23:28अलह वसल्लम ने सबके सामने हुक्म दिया कि
23:32अली उठो
23:34अली मक्का के एक शहजादे थे [संगीत]
23:36क्योंकि उनके वालिद अबू तालिब और उनके
23:39दादा अब्दुल मुतलब दोनों मक्का के बड़े
23:42सरदार रहे थे। तो आप सल्ला अलह वसल्लम के
23:45हुक्म से मुसलमानों के ये तीन वॉरियर्स
23:48आगे बढ़े।
23:50अचानक लड़ाई शुरू हुई। सबसे पहले हजरत अली
23:53ने एक ही वार में अपने दुश्मन को मार
23:57डाला।
24:00जिसके बाद हजरत हमजा ने भी अपने अपोनेंट
24:03को मार डाला।
24:05और फिर हजरत अली और हमजा ने मिलकर तीसरे
24:08सरदार को भी मार दिया।
24:12[संगीत]
24:13ये देखकर मुसलमानों की फौज जोर-जोर से
24:16नारे लगाने लगी।
24:19मक्का के ये तीन सरदार कोई आम लोग नहीं थे
24:22बल्कि ये मक्का के सबसे ताकतवर [संगीत]
24:24औरत हिदा के बाप, चाचा और भाई थे। जैसे ही
24:32मक्का वालों ने अपने तीन बड़े सरदारों को
24:35इस तरह आसानी से गिरते हुए देखा। मक्का की
24:39सारी फौज ने मुसलमानों पर हमला कर दिया।
24:43और इस तरह इस्लाम की पहली जंग जंग बदर
24:46शुरू हुई। हजरत अली भी वापस जाकर
24:50मुसलमानों की फौज के फ्रंट पर खड़े हुए और
24:53दुश्मनों का इंतजार करने लगे। [संगीत]
24:56इस वक्त हजरत अली की एज सिर्फ 23 साल थी
25:00और यह हजरत अली की जिंदगी की सबसे पहली
25:03जंग थी और फाइनली अब उन्हें यह मौका मिल
25:07चुका था। जिसका उन्हें बेसब्री से इंतजार
25:09था क्योंकि हजरत अली ने इन सारे मक्का के
25:13सरदारों को बचपन में आप सल्ला अलह वसल्लम
25:16पर जुल्म करते हुए बार-बार देखा था। और अब
25:20फाइनली हजरत अली एक-एक से बदला लेने के
25:23लिए बिल्कुल तैयार थे। और जैसे ही जंग
25:27शुरू हुई हजरत अली सीधा काफिरों की फौज के
25:30अंदर घुस गए।
25:33और जो तलवार चलाने का तरीका वो बचपन से
25:36सीख रहे थे। अब पहली बार हजरत अली अपनी
25:39तलवार सबके सामने यूज करने लगे।
25:43हजरत अली को जंग में इस तरह लड़ते हुए
25:46देखकर मुसलमानों और मक्का वालों दोनों को
25:49समझ आ गई कि अली के जैसा वॉरियर पूरे अरब
25:53में कोई नहीं है। और यह बात बिल्कुल सही
25:57थी क्योंकि इस जंग जंग बदर से लेकर अपनी
26:00जिंदगी की आखिरी जंग जंगहरवान तक। हजरत
26:05अली अपनी पूरी जिंदगी में कोई भी जंग नहीं
26:08हारा। बदर में मुसलमानों की फौज कम होने
26:11के बाद भी मुसलमान ऐसा लड़े कि
26:14आहिस्ता-आहिस्ता मक्का वालों की फौज पीछे
26:16हटने लगी। और इस तरह मुसलमान इस्लाम की
26:20पहली जंग जंग बदर जीत गए।
26:24लेकिन अब जब मक्का वाले भाग ही रहे थे।
26:26मुसलमानों ने उनका पीछा करते हुए उनका एक
26:28और सरदार पकड़ लिया। और यह कोई आम सरदार
26:32नहीं था बल्कि यह वही उमैया खानदान का
26:35उकबा था। यह वही उबा था जिसने इससे कुछ
26:38साल पहले मक्का में आप सल्ला अलह वसल्लम
26:41के गले को अपनी चादर से जोर से दबाया था
26:45और इसकी शक्ल हजरत अली बचपन से जानते थे।
26:48इसीलिए जैसे ही ये पकड़ा गया हजरत अली
26:51सीधा आगे बढ़े और [संगीत] अपनी तलवार से
26:55इसकी गर्दन उड़ा दी। इस जंग में मुसलमानों
26:59ने 70 काफिरों को मारा था। और कहा जाता है
27:02हजरत अली ने अकेले इन 70 में से 25 या 30
27:06लोगों को मारा था। इसमें थोड़ी कंफ्यूजन
27:09है कि हजरत अली ने एक्सजेक्टली कितने
27:11लोगों को मारा था। लेकिन यह बात क्लियर है
27:13कि बदर में सबसे ज्यादा लोग हजरत अली ने
27:16ही मारे थे। जैसे ही मुसलमान बदर की जंग
27:19के बाद वापस मदीना पहुंचे। मदीना में हर
27:22तरफ खुशी और सेलिब्रेशन का माहौल था और
27:25लोग इस जीत पर अल्लाह का शुक्र अदा कर रहे
27:28थे।
27:29लेकिन जैसे ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
27:32खुशी से अपने घर पहुंचे और अपनी बेटियों
27:36के बारे में पूछा। यहां आप सल्लल्लाहु
27:38अलैहि वसल्लम को एक बहुत ही शॉकिंग खबर
27:41सुनाई गई। [संगीत] उन्हें बताया गया कि जब
27:44आप बदर के मैदान में लड़ रहे थे। उसी वक्त
27:47यहां मदीना में आपकी बेटी रुकैया अपनी
27:50आखिरी सांसे ले रही थी और अब वो इस दुनिया
27:53में नहीं रही। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
Shaadi
27:56की चार बेटियां थी। बड़ी बेटी ज़ैनब जो इस
27:59वक्त मक्का में रहती थी। दूसरी बेटी
28:03रुकैया जो हजरत उस्मान की बीवी थी जो अब
28:06फौत हो चुकी थी।
28:08तीसरी बेटी उम्मे कलसूम रज़ अल्लाह अन्हा
28:10जिनकी शादी भी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
28:12ने रुकैया के बाद हजरत उस्मान रज़ अल्लाह
28:15अन से करा दी थी। और आप सल्लल्लाहु अलैहि
28:18वसल्लम की चौथी और सबसे छोटी बेटी जिनसे
28:21वो सबसे ज्यादा प्यार करते थे। हजरत
28:24फातिमा रज अल्लाह अन्हा बदर की जंग जीतने
28:28के बाद आहिस्ताआहिस्ता जब मुसलमानों के
28:29हालात ठीक होने लगे तो अब मदीना में आप
28:32सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास हजरत
28:34फातिमा रज़ अल्लाह अन्हा की शादी के लिए
28:36रिश्ते आने लगे जिनमें हजरत अबू बकर और
28:39उमर रज़ अल्लाह अनू भी शामिल [संगीत] थे।
28:42लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इन सारे
28:44रिश्तों को रिजेक्ट करते गए। अब जब हजरत
28:47फातिमा के लिए यह सारे रिश्ते आ रहे थे।
28:49उस वक्त हजरत अली आराम से अपने घर में
28:52बैठे हुए थे। और उन्होंने आप सल्ला अलह
28:54वसल्लम से रिश्ते की कोई बात नहीं की थी।
28:58यह देखकर हजरत अली को उन्हीं के खानदान की
29:00एक औरत ने कहा कि आप भी जाकर आप
29:03सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उनकी बेटी
29:04फातिमा का रिश्ता मांगे। लेकिन हजरत अली
29:07ने कहा कि मैं मेरे पास क्या है? मैं कैसे
29:11रिश्ता भेजूं? लेकिन उस औरत ने हजरत अली
29:14से कहा कि मुझे यकीन है कि अगर आप
29:16रसूल्लाह सल्ला अलह वसल्लम के पास जाएंगे
29:19वो आपको कभी इंकार नहीं करेंगे।
29:23यह सुनकर हजरत अली को भी थोड़ा हौसला मिला
29:26और आखिर वो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से
29:28उनकी आखिरी बेटी फातिमा का हाथ मांगने आप
29:31सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर गए लेकिन
29:35जैसे ही वो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के
29:37सामने आकर बैठे आप सल्लल्लाहु अलैहि
29:39वसल्लम के रोब और ओरा को देखकर हजरत अली
29:43की जुबान से एक लफ्ज भी नहीं निकला। अब
29:46हजरत अली को इस तरह घबराते देखकर आप
29:49सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद हजरत अली
29:51से पूछा कि अली क्या बात [संगीत] है क्या
29:54कहना चाहते हो लेकिन हजरत अली बिल्कुल उसी
29:56तरह खामोश बैठे रहे और कुछ ना कह सके ये
30:00देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
30:01दोबारा पूछा कि अली बताओ क्या बात है
30:04लेकिन इस बार भी हजरत अली की जुबान से एक
30:06लफ्ज भी नहीं निकला ये देखकर आप
30:08सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद हजरत अली
30:10से कहा अली क्या तुम फातिमा [संगीत] के
30:13रिश्ते के लिए आए हो यह सुनकर हजरत अली ने
30:16ऊपर देखा और एक घबराई हुई आवाज में कहा कि
30:19हां लेकिन या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु
30:22अलैहि वसल्लम मेरे पास कुछ भी नहीं है। तो
30:25आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा क्या
30:27तुम्हारे पास जंग की वो शील्ड नहीं है?
30:30जाओ और उसे बाजार में बेच कर आओ। वही मेरी
30:33बेटी फातिमा का मेहर होगा।
30:36जिसके बाद हजरत अली यह शील्ड लेकर [संगीत]
30:38सीधा बाजार की तरफ गए और आप सल्लाहु अलैहि
30:41वसल्लम अपनी बेटी फातिमा के पास गए।
30:43उन्हें हजरत अली के रिश्ते का बताया और
30:45उनसे पूछा कि क्या वह इस रिश्ते पर राजी
30:48हैं या नहीं। जैसे ही आप सल्लल्लाहु अलैहि
30:51वसल्लम ने फातिमा रज अल्लाह अन्हा से पूछा
30:53कहा जाता है हजरत फातिमा खामोश रही और आप
30:56सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनकी खामोशी को
30:58देखकर समझ गए। अब दूसरी तरफ जब हजरत अली
31:01अपनी शील लेकर बाजार पहुंचे और वहां ये
31:04शील बेचने की कोशिश करने लगे। अचानक इसी
31:07बाजार में हजरत अली के पास मदीना का सबसे
31:11अमीर आदमी आया। आप सल्लल्लाहु अलैहि
31:13वसल्लम के दामाद हजरत उस्मान रज अल्लाह अन
31:16[संगीत]
31:17हजरत उस्मान हजरत अली को देखते ही समझ गए
31:20कि वह यह शील्ड क्यों बेच रहे हैं तो
31:22उन्होंने खुद हजरत अली से यह शील्ड खरीद
31:24ली और इसके बदले हजरत अली को 400 सिल्वर
31:27कॉइंस दिए जिसके बाद हजरत अली खुश होकर जब
31:31वापस जाने लगे तो हजरत उस्मान ने उन्हें
31:33रोक दी और उन्हें यह शील्ड एज अ गिफ्ट
31:36वापस कर दी और कहा तुम्हें इस शील्ड की
31:39आगे भी जरूरत पड़ेगी।
31:42हजरत अली इस तरह कुछ और पैसे भी जमा करके
31:45ऑलमोस्ट 500 सिल्वर कॉइंस लेकर आप
31:48सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के पास आए और यही
31:50उनकी शादी का महर था। इस वक्त हजरत अली के
31:54वालिद फौत हो चुके थे और उनका कोई भी भाई
31:57मदीना में नहीं था। इसीलिए इस शादी में
32:00हजरत अली की मदद के लिए मदीना के सहाबा
32:04आगे बढ़े। और हजरत अली और फातिमा की शादी
32:07की तैयारी करने लगे।
32:10एक सहाबी ने हजरत अली को मदीना में एक
32:12छोटा सा घर दिया। हजरत बिलाल रज अल्लाह
32:15अनहु बाजार जाकर परफ्यूम्स और खुशबू
32:18खरीदने लगे। हजरत अबू बकर और अमार बिन
32:22यासिर र बाजार में फर्नीचर खरीदने लगे।
32:26जिसके बाद सारे सहाबा मस्जिद नबवी में जमा
32:29हुए और आप सल्ला अल वसल्लम ने खुद हजरत
32:33अली का निकाह पढ़ाया [संगीत] और सारे
32:35सहाबा में खजूर तकसीम किए गए। उधर कुछ
32:39सहाबियात ने हजरत [संगीत] फातिमा को
32:42दुल्हन की तरह तैयार किया। आप सल्लल्लाहु
32:45अलैहि वसल्लम ने अपनी बेटी फातिमा [संगीत]
32:46को कुछ गिफ्ट्स भी दिए। जिसमें कुछ कपड़े
32:50खजूर के पत्तों से बने हुए तकिए।
32:53दो आटे की चक्कियां
32:56और दो मिट्टी के बर्तन लिए।
32:59इस तरह इस्लाम के फ्यूचर खलीफा हजरत अली
33:03रज अल्लाह अन और आप सल्ला अलह वसल्लम की
33:06सबसे छोटी बेटी फातिमा रज अल्लाह अन्हा की
33:09शादी हुई। [संगीत]
33:11ये इस्लाम की तारीख की सबसे इंपॉर्टेंट और
33:15सबसे सिंपल शादी थी।
33:18जैसे ही यह शादी हो गई उसके कुछ ही दिन
33:20बाद एक दिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
33:22अपनी बेटी फातिमा के घर गए और आप
33:24सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी बेटी से
33:26कहा फातिमा मैंने तुम्हारी शादी अपने
33:30खानदान के ऐसे शख्स से कराई है जिससे मैं
33:32अपने पूरे अहलेबत में सबसे ज्यादा मोहब्बत
33:36करता हूं। अब मदीना में हजरत अली की शादी
Uhud
33:39तो हो गई और मदीना के हालात भी बिल्कुल
33:41नॉर्मल थे।
33:43लेकिन मदीना से दूर मक्का के हर घर में
33:46बदर की हार का मातम छाया हुआ था और मक्का
33:50के लोग अपने बड़े-बड़े सरदारों के मौत पर
33:54चीख-चीख कर रो रहे थे। और मक्का के लोग अब
33:57अपने सबसे बड़े सरदार के घर जमा हो रहे
34:00थे। अबू सुफियान और उनकी बीवी हिदा। जंग
34:05बदर में अबू सुफियान का अपना बेटा हमला
34:07मारा गया था।
34:09और उनकी बीवी हिंदा के बाप, चाचा और भाई
34:12भी मारे गए थे। तो अब मक्का के सारे लोग
34:16मुसलमानों से बदला लेने के लिए बदर से तीन
34:19गुना बड़ी फौज जमा करने लगे। और बदर के
34:22सिर्फ एक साल बाद 3000 की फौज लेकर मदीना
34:26की तरफ रवाना हुए। यह देखकर आप सल्ला अलह
34:29वसल्लम भी मुसलमानों की 1000 की फौज लेकर
34:32ओहद के मैदान की तरफ रवाना हुए। जैसे ये
34:36दोनों फौजें आमने-सामने हुई, अचानक
34:38मुसलमानों की फौज से 300 मुनाफिक
34:40मुसलमानों को धोखा देकर जंग छोड़कर भाग
34:44गए। मतलब अब मुसलमान सिर्फ 700 रह गए और
34:48उनके सामने 3000 की फौज खड़ी थी। मतलब अब
34:52मुसलमानों ने अपने से चार गुना बड़ी फौज
34:55से लड़ना था।
34:58बल्कि इस बार मक्का वालों की फौज में एक
35:01नया जनरल भी था खालिद बिन वलीद।
35:04मतलब यह जंग जंग औध बदर की जंग से भी
35:08ज्यादा खतरनाक थी। अब जब इस इंपॉसिबल जंग
35:11में दोनों फौजे आमने-सामने हुई मक्का
35:15वालों की फौज से एक बार फिर उनका चैंपियन
35:18तल्हा आगे बढ़ा। और जोर-जोर से मुसलमानों
35:22को लड़ाई का चैलेंज देने लगा।
35:26तल्हा के इस गुरूर को देखकर ऑफ कोर्स
35:29मुसलमानों का चैंपियन भी आगे बढ़ा। जो अब
35:32आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम का दामाद भी था।
35:3625 साल की उम्र का आली। सब ने अपनी
35:39तलवारें निकाली और हजरत अली ने भी ऐसा ही
35:43किया। लेकिन उनकी तलवार बाकियों से
35:46डिफरेंट थी। उनकी तलवार के एक नहीं बल्कि
35:50दो ब्लेड्स थे। ये तलवार जंग से पहले आप
35:53सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद हजरत अली
35:56को गिफ्ट में दी थी। और यह बाकी सारी
35:59तलवारों से ज्यादा लंबी और भारी थी। और
36:03इसका नाम था जुल्फिकार।
36:07जैसे ये लड़ाई शुरू हुई बस थोड़ी सी ही
36:10देर में हजरत अली ने अपनी तलवार से एक ही
36:13वार में तल्हा की टांग काट दी और वो जमीन
36:17पर गिर पड़ा और रेंगते हुए दूर भागने की
36:21कोशिश करने लगा। और हजरत अली अपनी तलवार
36:24के साथ आहिस्ता-आहिस्ता उसकी तरफ बढ़ने
36:26लगे। अब यहां पर मक्का का यह चैंपियन जो
36:30इससे पहले बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था। अब
36:33यहां सबके सामने हजरत अली से अपनी जिंदगी
36:36की भीख मांगने लगा।
36:39लेकिन हजरत अली ने अपनी तलवार उठाई
36:41[संगीत]
36:42जिसे देखकर मुसलमानों की फौज नारे लगाने
36:45लगी। और हजरत अली ने अपनी तलवार चला दी।
36:50और वापस मुसलमानों की तरफ जाने लगे। लेकिन
36:54जब मुसलमानों ने गौर से देखा उन्हें पता
36:56चला कि जब यह बंदा हजरत अली से भीख मांगने
36:59लगा था। हजरत अली ने इसे मारा नहीं बल्कि
37:02जंग के मैदान में माफ कर दिया था और इसी
37:05के साथ इस्लाम की दूसरी जंग जंग ओहद शुरू।
37:12मुसलमानों की फौज में इतना जज्बा था कि वो
37:15कुछ ही देर में अपने से चार गुना बड़ी फौज
37:18को आसानी से पीछे धकेलने लगे।
37:22और आखिर बिल्कुल बदर की तरह मक्का की फौज
37:25एक बार फिर जंग छोड़कर पीछे [संगीत] भागने
37:28लगी। यह देखकर इस पहाड़ के आर्चरर्स भी
37:31नीचे उतर गए। और मक्का वालों का छोड़ा हुआ
37:34माल जमा करने लगे। लेकिन इसी एग्जैक्ट
37:38वक्त का मक्का के जनरल खालिद बिन वलीद
37:41इंतजार कर रहे थे। जैसे ही ये आर्चरर्स
37:44नीचे उतरे, खालिद बिन वलीद फुल स्पीड अपने
37:47घोड़ों [संगीत] के साथ पहाड़ के पीछे से
37:49छुपकर मुसलमानों पर हमले के लिए रवाना
37:52हुए। और पहाड़ के पीछे से मुसलमानों पर
37:56हमला कर दिया। ये देखकर मक्का की फौज भी
37:59पलट गई। मतलब अब मुसलमान इन दोनों फौजों
38:03के दरमियान फंस गए थे। बल्कि हालात इतने
38:06खराब हुए कि कुछ लोगों ने रसूल्लाह
38:08सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कैंप पर भी
38:10हमला कर दिया। और सबसे खतरनाक बात ओहद में
38:14यह थी कि अचानक जंग के मैदान में ही एक
38:17बहुत ही अजीब अफवाह फैली। लोग हर तरफ
38:20चीखने लगे कि रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
38:22वसल्लम को शहीद कर दिया गया। अब तक
38:26मुसलमान फुल जज्बे से लड़ रहे थे। लेकिन
38:28जब उन्होंने यह खबर सुनी, कुछ मुसलमान जंग
38:31छोड़कर पीछे हटने लगे। कुछ आप सल्ला अलह
38:34वसल्लम के वफात होने की खबर सुनकर जमीन पर
38:37बैठ गए और रोने लगे और कुछ अपनी जगह पर ही
38:40खड़े रहे।
38:42लेकिन यह देखकर हजरत अली रज़ अल्लाह अनो ने
38:44मुसलमानों की फौज का झंडा उठाया और जोरजोर
38:47से कहने लगे कि अब जब रसूल्लाह सल्ला अलह
38:50वसल्लम ही दुनिया में नहीं रहे तो फिर
38:52हमारा इस दुनिया में रहने का क्या फायदा
38:54है? इसी के साथ हजरत अली ने अपनी तलवार की
38:57नयाम तोड़ कर फेंक दी। और अपनी तलवार
39:01जुल्फिकार के साथ काफिरों की फौज के
39:03[संगीत]
39:04अंदर घुस गई।
39:06लेकिन कुछ ही देर बाद पता चला कि यह सब
39:08बिल्कुल एक अफवाह थी और आप सल्लल्लाहु
39:10अलैहि वसल्लम अब भी पहाड़ पर मजबूती से
39:13खड़े थे। यह देखकर हजरत अली बाकी सहाबा के
39:16साथ फुल स्पीड आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
39:18के पास पहुंचे और उन्हें बहादुरी से
39:20डिफेंड करने लगे। इस तरह मुसलमान दोबारा
39:23इस पहाड़ पर मजबूती से खड़े हुए और पहाड़
39:26के ऊपर से मक्का वालों पर पत्थर बरसाने
39:29लगे। मुसलमानों को पहाड़ के ऊपर ऐसे
39:32स्टेबल देखकर मक्का वालों को समझ आ गई कि
39:35अब वो और कुछ भी नहीं कर सकते। इसीलिए वो
39:37अपनी सारी फौज के साथ ओद छोड़कर वापस
39:40मक्का की तरफ चले गए। इस तरह इस्लाम की
39:43दूसरी जंग जंग ओद ना काफिर जीते और ना
39:47मुसलमान। [संगीत]
39:48ओद रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की
39:50जिंदगी सबसे मुश्किल जंग क्योंकि इसमें
39:54सबसे ज्यादा 70 मुसलमान शहीद हुए थे।
39:58जिनमें रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
40:00के चाचा हजरत हमजा रज अल्लाह अनहु भी
40:02शामिल थे और इस जंग में हजरत अली रज
40:04अल्लाह अनहु को तलवारों के 16 जख्म लगे
40:07थे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सारे
40:09शहीदों को ओद में दफन करने का हुक्म दिया
40:12जिसके बाद सारे मुसलमान वापस मदीना आए।
40:16[संगीत] मदीना वापस आने के बाद
40:19आहिस्ताआहिस्ता जब मदीना के हालात ठीक
40:21होने लगे। सही मुस्लिम की हदीस है कि एक
40:24दिन आप सल्लल्लाह अलह वसल्लम अपनी बेटी
40:27फातिमा रज अल्लाह अन्हा के घर गए और वहां
40:29उन्होंने देखा कि अली तो घर में है ही
40:32नहीं तो आप सल्ला अलह वसल्लम ने अपनी बेटी
40:34से पूछा कि अली कहां है? जिस पर हजरत
40:36फातिमा ने आप सल्ला वसल्लम से कहा कि मेरी
40:38और उनकी किसी बात पर बहस हुई थी और वो घर
40:42से कहीं बाहर चले गए हैं। जिसके बाद आप
40:44सल्ला अलह वसल्लम भी हजरत अली को ढूंढने
40:46के लिए घर से बाहर निकले और जब वो मस्जिद
40:49नबवी पहुंचे। उन्होंने देखा कि हजरत अली
40:51जमीन पर लेटे हुए हैं और उनके जिस्म पर
40:55मस्जिद नबवी की जमीन की मिट्टी लगी हुई
40:57थी। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अली
41:00के पास आए और खुद अपने हाथों से उनके
41:02जिस्म से मिट्टी हटाने लगे और फरमाया उठो
41:06ए अबू तुराब उठो। तुराब अरबी में मिट्टी
41:10को कहते [संगीत] हैं। और यहीं से हजरत अली
41:12का नाम अबू तुराब पड़ा। और कहा जाता है
41:15हजरत अली अपनी जिंदगी के आखिर तक अबू
41:17तुराब नाम को बहुत पसंद करते थे और जब भी
41:20कोई उन्हें [संगीत] अबू तुराब कहकर
41:22पुकारता था उन्हें इस दिन की याद आती थी
41:24और वो बहुत खुश होते थे।
41:27[संगीत]
41:27लेकिन अफसोस की बात यह है आने वाले जमाने
41:29में कुछ लोग ऐसे भी थे जो हजरत अली के इस
41:32नाम अबू तुराब से उनका मजाक उड़ाया करते
Hassan
41:35थे। इस वाक्य के बाद एक दिन आप सल्ला अलह
41:38वसल्लम सहाबा के साथ मस्जिद में बैठे हुए
41:41थे। तो एक शख्स दूर से खुशी-खुशी आप सल्ला
41:44अलह वसल्लम के पास [संगीत] आया और उनसे
41:46कहा या रसूल अल्लाह मुबारक हो आपकी बेटी
41:49फातिमा के घर बेटा पैदा हुआ है। यह सुनकर
41:53आप सल्ला अलह वसल्लम सीधा हजरत अली के घर
41:56पहुंचे। [संगीत] अपने नवासे को गोद में
41:59उठाया और उन्हें गले से लगाया। जिसके बाद
42:02आप सल्ला अलैहि वसल्लम ने हजरत अली से
42:04पूछा कि तुमने इस बच्चे का क्या नाम रखा
42:06है?
42:07[संगीत]
42:07जिस पर हजरत अली ने कहा कि मैंने इसका नाम
42:10हर्ब रखा है जिसका इंग्लिश में मतलब है
42:13वॉर।
42:15लेकिन आप सल्ला अलैहि वसल्लम ने हजरत अली
42:17से कहा कि नहीं बल्कि इस बच्चे का नाम हसन
42:20होगा। इस वक्त हजरत हसन अकेले मेल नवासे
42:25थे। इसीलिए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
42:27अपने इस नवासे हसन से बहुत मोहब्बत करते
42:30थे। जैसे-जैसे हजरत हसन बड़े होते गए। कहा
42:34जाता है वह बिल्कुल अपने नाना आप
42:36सल्लल्लाहु अलह वसल्लम की तरह दिखते थे
42:38[संगीत] और आप सल्ला अलह वसल्लम उस जमाने
42:41के सख्त अरब सोसाइटी में भी [संगीत] अपने
42:44नवासे हसन रज अल्लाह अनहु को मदीना की
42:46गलियों में अपने कंधों पर बिठाकर घुमाया
42:49करते थे जिसे देखकर एक दिन एक सहाबी ने आप
42:53सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से यह तक कहा कि
42:55मेरे मदीना में 10 पोते और नवासे हैं।
42:58लेकिन मैंने कभी किसी से ऐसी मोहब्बत नहीं
43:00की जिस तरह आप हसन से करते हैं। और एक दिन
43:04जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हजरत
43:05हसन को अपने कंधे पर बिठाया हुआ था। एक
43:08सहाबी ने यह देखकर हजरत हसन से कहा कि या
43:11हसन तुमने क्या जबरदस्त सवारी पाई है। जिस
43:16पर आप सल्ला अलह वसल्लम ने जवाब दिया कि
43:18सवार भी तो देखो कितना जबरदस्त है। और एक
43:22दिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हजरत
43:23हसन को अपनी गोद में उठाया और अल्लाह से
43:26दुआ की ऐ अल्लाह उससे मोहब्बत रख जो हसन
43:31से मोहब्बत रखता है। और हजरत हसन के बारे
43:34में सबसे बड़ी बात आप सल्लल्लाहु अलह
43:36वसल्लम ने यह कही कि मेरा यह बेटा हसन
43:39सैयद मतलब लीडर है और ये एक दिन मुसलमानों
43:44के दो बड़े ग्रुप्स के दरमियान सुलह
43:47कराएगा और बिल्कुल ऐसा ही हुआ। हजरत हसन
43:51रज़ अल्लाह अनो आगे जाकर मुसलमानों के
43:53आखिरी खलीफा-ए राशिद बने। और मुसलमानों की
43:57जानों को बचाने के लिए उन्होंने अपनी
43:59खिलाफत अपनी मर्जी से छोड़ दी। इसी तरह
44:02हजरत हसन आहिस्ता-आहिस्ता मदीना में बड़े
44:05हो रहे थे। लेकिन मदीना से बहुत दूर मक्का
44:09वालों का कॉन्फिडेंस ओद की जंग के बाद और
44:12भी ज्यादा बढ़ गया था। और वो इस बार
44:1510,000 की फौज के साथ मदीना पर हमले के
Khandaq
44:19लिए रवाना हो चुके थे।
44:2610,000 की फौज मतलब मदीना की पूरी आबादी
44:30से भी ज्यादा बड़ी फौज मदीना पर हमले के
44:35लिए आ रही थी।
44:37जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसका
44:39पता चला। उन्होंने सारे सहाबा की एक
44:41मीटिंग बुलाई जिसमें फैसला किया गया कि
44:44मुसलमान मदीना के अंदर ही रहकर मक्का
44:47वालों से जंग करेंगे।
44:49और मदीना के फ्रंट पर दो पहाड़ों के
44:52दरमियान एक बहुत बड़ी खंदक बनाएंगे।
44:56जैसे ही मक्का वालों की 10,000 की फौज
44:59मदीना के करीब पहुंची वो ये खंदक देखकर
45:02हैरान रह गए क्योंकि ये इतनी बड़ी खंदक थी
45:06कि इसे क्रॉस करना ऑलमोस्ट इंपॉसिबल था और
45:10कोई भी इसे क्रॉस करने की कोशिश करता
45:12मुसलमान उन्हें अपनी तीरों से भगा देते।
45:1615 दिन तक दोनों साइड्स अपनी-अपनी जगह पर
45:18उसी तरह खड़ी रही। लेकिन आखिर 15 दिन बाद
45:22मक्का के कुछ वॉरियर्स फ्रस्ट्रेट होकर
45:25आगे बढ़े। और किसी तरह इस खंदक को क्रॉस
45:29करके मुसलमानों की साइड पर पहुंच गए। जैसे
45:32ही ये ग्रुप मुसलमानों के सामने आया,
45:35मक्का का सबसे बड़ा वॉरियर अमर बिन अबदेव
45:38आगे बढ़ा और जोर-जोर से मुसलमानों को
45:42चैलेंज देने लगा और कहने लगा
45:45तुम में से कौन अकेला मुझसे लड़ेगा?
45:49अमर कोई आम वॉरियर नहीं था। इसकी हाइट आम
45:53लोगों से बहुत ज्यादा थी। और ये पूरे
45:56मक्का में अपनी ताकत की वजह से मशहूर था।
46:00जब उसने इतने गुरूर के साथ मुसलमानों को
46:03लड़ने का चैलेंज दिया।
46:04ए मुसलमानों
46:05तो ऑफकोर्स मुसलमानों में से किसने आगे
46:08जाना था? हजरत अली मुसलमानों की फौज से
46:10आगे बढ़े। अमर ने हजरत अली को देखकर कहा
46:13कि भतीजे तुम अभी छोटे हो वापस जाओ मैं
46:17तुम्हें नहीं मारना चाहता
46:19जवान हो वापस जाओ
46:20लेकिन हजरत अली ने कहा कि मैं तो तुम्हें
46:23मारना चाहता हूं इस पर अमर को गुस्सा आया
46:27और अपने घोड़े से उतर कर हजरत अली की तरफ
46:30भागने लगा और अपना स्पीयर उठाकर जोर से
46:34हजरत अली पर हमला किया। हजरत अली ने अपने
46:37आप को बचाने के लिए अपनी शील्ड सामने रखी।
46:41लेकिन यह स्पेयर इतना तेजी से आ रहा था कि
46:44वो हजरत अली के शील्ड को फाड़ कर शील्ड के
46:47अंदर घुस गए।
46:49थोड़ा सा हजरत अली के चेहरे पर भी लगा।
46:52हजरत अली जैसे वॉरियर को जख्मी करना बड़ी
46:56बात थी। लेकिन ये अमर की जिंदगी की सबसे
46:59बड़ी और आखिरी गलती हुई। [संगीत]
47:02हजरत अली ने तेजी से अपनी शील्ड हटाई और
47:04अपनी तलवार से एक ही वार में उसकी गर्दन
47:08उड़ा ली। यह देखकर मुसलमान जोर-जोर से
47:11नारे लगाने लगे और मक्का वालों की फौज
47:14वापस खंदक को क्रॉस करके पीछे भाग गई।
47:18मक्का वालों ने इसके बाद दोबारा मुसलमानों
47:21पर हमला करने की गलती नहीं की। और आखिर कई
47:24दिन मदीना के बाहर बैठने के बाद एक बहुत
47:27तेज तूफान आया जिससे मक्का के सारे कैंप्स
47:30उखड़ गए। और ये सारी 10,000 की फौज मदीना
47:35को छोड़कर वापस चली गई। इस तरह मुसलमान
47:38अपनी तीसरी जंग जंग खंदक [संगीत] जीत गए।
Husayn
47:43खंदक की जंग से पहले या कुछ ही अरसे बाद
47:46मदीना में हजरत अली के घर उनके दूसरे बेटे
47:49पैदा हुए। [संगीत] जिनका नाम भी रसूल्लाह
47:52सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद रखा
47:54हुसैन। और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
47:58खुद हजरत हुसैन के कान में अजान दी। और
48:01बिल्कुल हजरत हसन की तरह आप सल्लल्लाहु
48:03अलैहि वसल्लम हजरत हुसैन से भी बहुत
48:05मोहब्बत करते थे। एक दिन मदीना में आप
48:08सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सहाबा के साथ
48:10कहीं जा रहे थे। तो रास्ते में आप
48:12सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नजर छोटे से
48:14हुसैन पर पड़ी जो कुछ खेल रहे [संगीत] थे।
48:17ये देखकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आगे
48:19बढ़े और हुसैन रज़ अल्लाह अनहु को पकड़ने
48:21की कोशिश की। लेकिन हजरत हुसैन इधर-उधर
48:25भागने लगे। [संगीत]
48:26आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत हुसैन के
48:28साथ खेलने लगे और उन्हें हंसाते रहे। और
48:32आखिर आप सल्ला अलह वसल्लम ने छोटे से
48:34हुसैन को पकड़ लिया।
48:36[संगीत]
48:36उनके माथे को किस किया और हुसैन को देखकर
48:40फरमाया हुसैन मुझसे है और मैं [संगीत]
48:44हुसैन से हूं। ऐ अल्लाह उससे मोहब्बत कर
48:48जो हुसैन से मोहब्बत करे। हजरत हुसैन अपने
48:51बड़े भाई हसन रज अल्लाह अनो से सिर्फ एक
48:54साल छोटे थे। और आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम
48:56दोनों से बहुत मोहब्बत करते थे। और इन्हें
48:59देखकर फरमाते थे हसन और हुसैन मेरी दुनिया
49:02के दो फूल हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है
49:06आगे जाकर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के इन
49:08दोनों फूलों के साथ जो हुआ [संगीत] उसे आज
49:12तक पूरी दुनिया के मुसलमान नहीं भुला सके।
49:16हसन रज़ अल्लाह अनहु को जहर देकर शहीद कर
49:20दिया गया। और इमाम हुसैन रज़ अल्लाह अनो को
49:23उनकी पूरी फैमिली के साथ कर्बला के मैदान
49:26में बेदर्दी से [संगीत] शहीद कर दिया गया।
49:30जिस साल मदीना में हजरत हुसैन रज़ अल्लाह
49:33अनहु पैदा हुए। उसी साल हजरत अली पर एक
49:37बहुत बड़ा गम भी आया। मदीना में हजरत अली
49:40की मां अबू तालिब [संगीत] की बीवी फातिमा
49:43बिंते असद इस दुनिया से चली गई और मदीना
49:47के लोग उन्हें दफनाने की तैयारी करने लगे।
49:50[संगीत] यह हजरत अली की जिंदगी का एक बहुत
49:52ही मुश्किल दिन था। लेकिन हजरत अली से भी
49:55ज्यादा इस दिन रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
49:57वसल्लम खफा थे। क्योंकि हजरत अली ने तो
49:59अपनी सारी जिंदगी आप सल्लल्लाहु अलैहि
50:01वसल्लम के घर में गुजारी थी। लेकिन आप
50:03सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपना सारा
50:04बचपन अबू तालिब के घर गुजारा था। जहां
50:07हमेशा हजरत अली की वालदा ही आप सल्लल्लाहु
50:10अलैहि वसल्लम का ख्याल रखती थी। इसीलिए
50:13जैसे ही आप सल्ला अलह वसल्लम को पता चला
50:15वो सीधा हजरत अली के मां के पास पहुंचे और
50:18उन्हें देखकर फरमाया ऐ मेरी मां अल्लाह आप
50:21पर रहम करे। आप मेरी मां के बाद मेरी मां
50:25थी। आप खुद भूखी रहती थी लेकिन हमेशा मुझे
50:28खिलाती थी। आपको खुद अच्छे लिबास की जरूरत
50:32होती थी। लेकिन आप हमेशा मुझे पहनाती थी।
50:36[संगीत] जब उन्हें दफनाने का वक्त आया। आप
50:39सल्लल्लाह अलह वसल्लम खुद उनकी कब्र के
50:42अंदर गए और वहां अल्लाह से दुआ की ऐ
50:46अल्लाह मेरी मां को बखश दे जिसके बाद आप
50:50सल्ला अलह वसल्लम ने उनके कफ़न के लिए अपनी
50:52कमीज उतार कर दी जिसके बाद उन्हें दफन कर
50:56दिया गया। अब ये सब तो हजरत अली के फैमिली
50:59मैटर्स थे। लेकिन वहां मदीना की रियासत
Sulah Hudaibiya
51:02में मुसलमान एक नई प्लानिंग कर रहे
51:04[संगीत] थे। खंदक की जंग के बाद मुसलमान
51:07आप सल्लल्लाह अलह वसल्लम के हुक्म से पहली
51:10बार उमरा करने के लिए मक्का की तरफ रवाना
51:14हुए और मुसलमानों ने पहले ही मक्का वालों
51:16को बता दिया था कि हम कोई जंग वंग नहीं
51:19करना चाहते। हम सिर्फ उमरा करने के लिए आ
51:21रहे हैं।
51:24लेकिन जैसे ही मुसलमान मक्का के करीब
51:26पहुंचे मक्का वालों ने उनका रास्ता रोक
51:29दिया। जिसके बाद मुसलमान कई दिन तक मक्का
51:32के बाहर ही बैठे रहे। और जब कोई हल नहीं
51:36निकला आखिर मुसलमानों ने और मक्का वालों
51:38ने आपस में एक एग्रीमेंट कर ली सुलह
51:41हुबिया रसूल्लाह सल्ला अलह वसल्लम हजरत
51:45अली और कुछ सहाबा मक्का वालों से
51:47एग्रीमेंट के लिए एक कैंप में जमा हुए इस
51:50इतने इंपॉर्टेंट एग्रीमेंट को लिखने की
51:53जिम्मेदारी मदीना के सबसे बेस्ट राइटर को
51:56मिली हजरत अली रज अल्लाह और हजरत अली ने
51:59यह एग्रीमेंट लिखना शुरू की और हजरत अली
52:03ने लिखा मोहम्मद मोहम्मद अल्लाह के रसूल
52:06के नाम से। जैसे ही हजरत अली ने ये लिखा
52:08मक्का वालों का एक शख्स गुस्से से खड़ा
52:11हुआ और कहा ये क्या है? हम तो इन्हें रसूल
52:14मानते ही नहीं है। रसूल
52:16और उसने हजरत अली से कहा इस एग्रीमेंट से
52:18मोहम्मद अल्लाह का रसूल मिटाकर मोहम्मद
52:21बिन अब्दुल्लाह लिखो। इस बंदे की बातें
52:24सुनकर हजरत अली ने रसूल्लाह सल्लल्लाहु
52:26अलैहि वसल्लम की तरफ देखा और आप
52:28सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हजरत अली से
52:30कहा कि ठीक है जैसा ये कह रहा है वैसा ही
52:32लिखो। लेकिन यहां पहली बार एक बहुत ही
52:35अजीब मोमेंट आया। वो अली जो बचपन से हमेशा
52:39आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ खड़े
52:41थे और अपने हाथों से हर जंग में आप
52:44सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए तलवार
52:46चलाते थे। आज अपने कलम से अल्लाह का रसूल
52:50लिखा हुआ नहीं मिटा सके। और आप सल्ला अलह
52:53वसल्लम के कहने के बाद भी हजरत अली अपना
52:56हाथ नहीं हिला पा रहे थे। यह देखकर आप
52:59सल्ला अलह वसल्लम ने खुद यह एग्रीमेंट
53:01हजरत अली से और पूछा कहां लिखा है? और फिर
53:05खुद अपने हाथों से मोहम्मद रसूल्लाह को
53:08मिटाया और हुकुम दिया कि इसकी जगह मोहम्मद
53:11बिन अब्दुल्लाह लिखा जाए। और इस तरह पहली
53:15बार मुसलमानों और मक्का वालों के दरमियान
53:18सुलह हुबिया की एग्रीमेंट हुई और मुसलमान
53:21वापस मदीना आ गए। पहले पहले तो मुसलमान इस
53:24एग्रीमेंट से खुश नहीं थे। लेकिन
53:26आहिस्ता-आहिस्ता उन्हें समझ आने लगी कि
53:28आखिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह
53:30सुलह [संगीत] क्यों की है? क्योंकि इस
53:32सुलह में एक पॉइंट यह था कि मुसलमान और
53:35मक्का वाले अगले 10 साल के लिए कोई भी जंग
53:39नहीं करेंगे। अब जब जंगे खत्म हो चुकी थी
Life Style
53:42मुसलमान मदीना में रहने लगे। लेकिन मदीना
53:45की इकॉनमी अब भी बहुत ही ज्यादा खराब थी
53:49और सारे सहाबा मदीना में बहुत ही गुर्बत
53:52की जिंदगी गुजारते थे। [संगीत] और सिर्फ
53:54सहाबा नहीं बल्कि खुद आप सल्ला अलह वसल्लम
53:57की फैमिली हजरत अली और फातिमा रज अल्लाह
53:59अन्हा भी बहुत गरीब जिंदगी गुजारते थे। एक
54:02दिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी बेटी
54:04फातिमा के घर गए और उन्होंने देखा कि घर
54:07में अली और हसन और हुसैन है ही नहीं। जब
54:11आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा तो
54:13उन्हें हजरत फातिमा ने बताया कि हमारे घर
54:15में खाने और पीने की कोई भी चीज नहीं थी
54:18और बच्चे भूख से रो रहे थे।
54:22तो हजरत अली हसन और हुसैन को अपने साथ
54:24कहीं बाहर ले गए हैं ताकि वो भूख से रोएं
54:28ना। जिसके बाद आप सल्ला अलह वसल्लम उन्हें
54:30ढूंढने लगे और देखा कि हजरत अली किसी के
54:33बाग में उसके लिए बहुत ही मुश्किल मजदूरी
54:36कर रहे हैं और हसन और हुसैन उनके पास बैठे
54:39खेल रहे हैं।
54:41सारा दिन हजरत अली ने इसी तरह बहुत ही
54:44मेहनत से इस बाग में मजदूरी की। जिससे
54:47उनके हाथ जख्मी भी हो गए थे और इस सारे के
54:50एंड में उन्हें सिर्फ 16 खजूर मिले
54:53[संगीत]
54:54जो हजरत अली ने अपने बच्चों को भी दिए और
54:56अपनी बीवी फातिमा को भी। यह मदीना के लीडर
55:00रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अपनी
55:03फैमिली का लाइफस्ट था। और सिर्फ यही नहीं
55:06इसी तरह हजरत अली और फातिमा रज़ अल्लाह
55:08अन्हा सारा काम खुद किया करते थे। और उनकी
55:11हेल्प के लिए कोई भी नहीं था। बल्कि कहा
55:14जाता है हजरत फातिमा खाना कम होने की वजह
55:17से इतनी कमजोर हो चुकी थी कि जब भी वह आटा
55:20घूमती थी बार-बार उनका हाथ बर्तन से गिर
55:23जाता था और उन्हें चोट लगती थी और हजरत
55:27अली भी मजदूरी कर कर के बहुत कमजोर हो
55:30चुके थे। यह देखकर एक दिन हजरत अली ने
55:33हजरत फातिमा रज अल्लाह अन्हा से कहा कि आप
55:35जाकर आप सल्ला अलहि वसल्लम से एक गुलाम की
55:38रिक्वेस्ट करें।
55:40तो हजरत फातिमा ने जाकर अपने वालिद आप
55:42सल्ला अलह वसल्लम से एक गुलाम की
55:45रिक्वेस्ट की। लेकिन आप सल्ला अलह वसल्लम
55:47अपनी फैमिली को मदीना के आम लोगों से बड़ा
55:50नहीं समझते थे।
55:52इसीलिए उन्होंने अपनी बेटी फातिमा के इतने
55:55सख्त हालात को देखने के बाद भी उन्हें
55:57गुलाम नहीं दिया। अब यह बात तो क्लियर थी
56:01कि इस तरह गुरबत में मुसलमान और जिंदगी
56:04नहीं गुजार सकते।
56:06[संगीत]
56:06तो यहां पर मुसलमानों की जिंदगी का एक
56:09बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट आया जिससे मदीना
56:12के हालात हमेशा के लिए बदल
Khayber
56:15जंग खैबर
56:26अब तक सारी जंग हमेशा मक्का और मदीना के
56:29दरमियान होती थी। लेकिन सुलेह हुबिया के
56:32बाद अब मक्का वालों से 10 साल तक कोई
56:35लड़ाई नहीं हो सकती थी। तो मुसलमानों ने
56:39अपना रुख मक्का से हटाकर अरब की एक और
56:41बड़ी सिटी की तरफ किया जिसका नाम था खैबर।
56:47खैबर मदीना के करीब ही एक बहुत बड़ा शहर
56:50था और यह कोई आम शहर नहीं था बल्कि ये उस
56:53जमाने में पूरे अरब के यहूदियों का सबसे
56:57बड़ा हेड क्वार्टर था। और [संगीत] यहूदी
56:59उस जमाने में भी बिल्कुल आज की तरह बहुत
57:02ही बड़े बिजनेसमैन थे जिनका बिजनेस पूरी
57:05दुनिया में फैला हुआ था। और इन सारे
57:08बिजनेसेस से यहूदी जितना माल कमाते थे
57:11उसका सबसे बड़ा हिस्सा उन्होंने इसी खैबर
57:14के किले में स्टोर किया हुआ था। मतलब खैबर
57:18के किले के अंदर अनलिमिटेड गोल्ड, सिल्वर
57:21और लग्जरी चीजें पड़ी हुई थी। और इस बात
57:24का यहूदियों को अच्छी तरह पता था। इसीलिए
57:27उन्होंने इस खजाने को सेफ रखने के लिए
57:30खैबर के बाहर लंबी-लंबी दीवारें बनाई थी
57:34और बड़े-बड़े टावर्स खड़े किए थे। और खैबर
57:37का हर किला जमीन से काफी ऊपर हिल्स पर बना
57:41हुआ था। इसीलिए पिछले कई 100 साल से कोई
57:44भी यहूदियों से खैबर का किला नहीं छीन सका
57:48था। इन शॉर्ट खैबर इतना मजबूत किला था कि
57:51आज तक उसकी लंबी-लंबी दीवारें और टावर्स
57:55अपनी जगह पर मजबूती से खड़े हैं। आज खैबर
57:59ऐसा दिखता है और इसे देखकर सोचें उस जमाने
58:02में खैबर कैसा दिखता होगा। मतलब खैबर को
58:06फतह करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन।
58:09और मुसलमानों का भी खैबर को फतह करने का
58:11कोई प्लान नहीं था। लेकिन एक दिन
58:14मुसलमानों को खबर मिली कि खैबर के यहूदी
58:16एक बहुत बड़ी फौज जमा कर रहे हैं और
58:19मुसलमानों के कैपिटल मदीना पर हमला करने
58:22की तैयारी कर रहे हैं। ये देखकर आप
58:24सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सहाबा को जंग
58:27के लिए तैयार होने का हुक्म दिया और फिर
58:301400 मुसलमानों के साथ इससे पहले कि खैबर
58:33मुसलमानों पर हमला करे आप सल्लल्लाहु
58:35अलैहि वसल्लम खैबर पर हमले के लिए रवाना
58:37हो।
58:40जैसे ही खैबर के लोगों ने मुसलमानों की
58:43फौज को देखा वो सब अपने किलों के अंदर गए
58:46और सारी गेट्स बंद करके जंग के लिए तैयार
58:49हुए। जिसके बाद मुसलमानों ने खैबर के किले
58:52पर हमला कर दिया।
58:55लेकिन जैसे ही मुसलमान करीब पहुंचे यहूदी
58:58मुसलमानों पर तीर और पत्थर बरसाने लगे। और
59:01इवन किले के अंदर से मुसलमानों पर तोपें
59:04भी जलने लगी। जिससे मुसलमान पीछे हट गए।
59:10जिसके [संगीत] बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि
59:11वसल्लम एक-एक जनरल के साथ मुसलमानों की
59:14फौज को भेजते रहे। लेकिन यहूदियों का
59:16डिफेंस इतना सख्त था कि हर बार मुसलमानों
59:19को पीछे हटना पड़ा। कहा जाता है एक बार
59:22अबू बकर और उमर रज अल्लाह अनो ने भी
59:24मुसलमानों की फौज के साथ हमला किया।
59:28और मुसलमान खैबर की दीवार तक पहुंच गए।
59:31लेकिन यह देखकर यहूदियों ने दीवार के ऊपर
59:33से बड़े-बड़े भत्तर मुसलमानों पर फेंके और
59:36मुसलमानों को दोबारा पीछे हटना पड़ा। आखिर
59:40इतने हमलों के बाद ऐसा लगने लगा था कि
59:43मुसलमान खैबर को फतह नहीं कर पाएंगे और
59:46यहूदी ये जंग मुसलमानों से जीत जाएंगे। तो
59:50अब जब मुसलमानों का मोराल डाउन हो रहा था
59:52तो आखिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
59:54मुसलमानों को जमा किया और उन सब से कहा कल
59:57मैं झंडा ऐसे शख्स को दूंगा जो अल्लाह और
1:00:01उसके रसूल से मोहब्बत करता है और अल्लाह
1:00:04और उसके रसूल उससे मोहब्बत करते हैं और
1:00:07अल्लाह उसी आदमी के हाथ पर खैबर के किले
1:00:10को फतह करेंगे।
1:00:14यह सुनकर सारे सहाबा हैरान रह गए कि आखिर
1:00:17वो लीडर कौन होगा जिससे अल्लाह भी मोहब्बत
1:00:20करता है। जैसे ही अगली सुबह हुई सारे
1:00:24सहाबा दूर-दूर से आकर आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:00:27वसल्लम के कैंप के पास जमा होने लगे और आप
1:00:30सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इंतजार करने
1:00:32लगे [संगीत]
1:00:34और आपस में डिस्कस करने लगे कि वो लीडर
1:00:36आखिर कौन होगा। इस दिन ऑलमोस्ट हर सहाबी
1:00:40की ख्वाहिश थी कि आप सल्लल्लाहु अलह
1:00:42वसल्लम झंडा उसे दें और वो खैबर को फतह
1:00:46करें। हजरत उमर कहते हैं कि मुझे कभी भी
1:00:49लीडर बनने की ख्वाहिश नहीं हुई सिवाय खैबर
1:00:52के उस दिन के कि उस दिन मैं भी यह चाहता
1:00:55था कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुझे
1:00:57मुसलमानों की फौज का लीडर बनाए। अब जब
1:01:00सारे मुसलमान जमा हो गए। सब गौर से उस जगह
1:01:04की तरफ देख रहे थे जहां से आप सल्लल्लाहु
1:01:06अलैहि वसल्लम ने आना था।
1:01:08और आखिर आप सल्ला अलह वसल्लम आगे आए और आप
1:01:12सल्ला अलह वसल्लम को देखते ही सारी फौज
1:01:14बिल्कुल खामोश हो गए।
1:01:16अली का नाम सुनकर अपनी खैबर [संगीत] कांप
1:01:20जाता है।
1:01:22आखिर आप सल्ला अलह वसल्लम मुसलमानों के
1:01:24सामने खड़े हुए और कहा अली कहां है? शाह
1:01:28है मरता
1:01:32[संगीत]
1:01:33है
1:01:34अली का नाम सुनकर सहाबा इधर-उधर देखने लगे
1:01:37और हजरत अली को ढूंढने लगे लेकिन हजरत अली
1:01:40उस दिन वहां थे ही नहीं हजरत अली की आंखों
1:01:44में बचपन से जो एलर्जी थी कंजेक्टिवाइटिस
1:01:48इस दिन दोबारा हजरत अली की आंखों में वही
1:01:51एलर्जी थी जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:01:54को इसका बताया गया तो आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:01:55वसल्लम ने हुक्म दिया कि अली को यहां लाया
1:01:58जाए और सहाबा भाग-भाग कर हजरत अली के कैंप
1:02:02पहुंचे और हजरत अली से कहा कि जल्दी आए आप
1:02:06ही वो लीडर हैं जिनसे अल्लाह मोहब्बत करते
1:02:09हैं [संगीत]
1:02:10और आप ही खैबर को फतह करें।
1:02:14जिसके बाद हजरत अली सारी मुसलमानों की फौज
1:02:17को क्रॉस करते हुए आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:02:19वसल्लम के सामने हाजिर हुए। आप सल्लल्लाहु
1:02:23अलैह वसल्लम ने हजरत अली की आंखों पर अपना
1:02:25हाथ फेरा। जिससे उनकी यह एलर्जी हमेशा के
1:02:29लिए खत्म हो गई। और फिर आप सल्ला अलह
1:02:32वसल्लम ने सबके सामने हजरत अली को
1:02:35मुसलमानों की फौज का झंडा पकड़ाया और
1:02:39उन्हें हुकुम दिया कि जाओ और हमला करो।
1:02:43लेकिन हमले से पहले उन्हें इस्लाम की दावत
1:02:46जरूर देना। हजरत अली मुसलमानों का झंडा
1:02:49लेकर पूरी फौज के साथ खैबर के किले की तरफ
1:02:53बढ़े।
1:02:55और इस बार हजरत अली की लीडरशिप में यह
1:02:58हमला इतना सख्त था कि मुसलमान किले के
1:03:01बिल्कुल करीब पहुंचने लगे। और जब यहूदियों
1:03:05ने ये देखा उन्हें समझ आ गई कि अब उनका
1:03:07डिफेंस टूटने वाला है। और आखिर जब कोई भी
1:03:11रास्ता नहीं था यहूदियों का लीडर और उनका
1:03:15सबसे बड़ा वॉरियर।
1:03:18मरहब किले से बाहर आया। [संगीत]
1:03:21मरहब कोई आम वॉरियर नहीं था। वो बहुत ही
1:03:26लंबा और मस्कुलर आदमी था। और खैबर के लोग
1:03:30कहा करते थे कि हमारा एक मरहब हजार
1:03:34आदमियों के बराबर था। और कहा जाता है इस
1:03:37दिन मरहब ने सर से लेकर पांव तक स्टील का
1:03:41आर्मर पहना हुआ था।
1:03:43मरहब मुसलमानों की फौज के सामने आया और
1:03:46जोरजोर से मुसलमानों के लीडर को अकेले जंग
1:03:49के लिए चैलेंज [संगीत] करने लगा। तो
1:03:52ऑफकोर्स मरहब से लड़ने के लिए मुसलमानों
1:03:56का लीडर [संगीत]
1:03:57सिर्फ 28 साल के अली रज़ अल्लाह अनो आगे
1:04:00आए। हजरत अली को देखकर मरहब ने कहा मैं
1:04:04हूं मरहब।
1:04:05जिसे पूरा खैबर जानता है।
1:04:09और जंग के वक्त में मैं ही सबसे बहादुर
1:04:12हूं।
1:04:15जिस पर हजरत अली ने उसे जवाब दिया और कहा
1:04:18मैं वो हूं जिसकी मां ने उसका नाम हैदर
1:04:23रखा
1:04:26जंगल के शेर की तरह खतरनाक
1:04:32जिसे देखकर दिलों में खौफ बैठ जाता है।
1:04:37ये सुनकर मरहब हजरत अली की तरफ भागने लगा।
1:04:42और जोर से हजरत अली पर अपनी तलवार से हमला
1:04:45कर दिया। लेकिन हजरत अली साइड पर हुए और
1:04:48फिर अपनी तलवार जुल्फिकार के एक ही वार
1:04:52में मरहब के सर पर इतना जोर से मारा कि
1:04:57हजरत अली की तलवार उसके स्टील के हेलमेट
1:05:00को तोड़कर [संगीत]
1:05:01उसके सर पर लगी और खैबर का चैंपियन मरहब
1:05:06पूरे खैबर के सामने गिर गया।
1:05:12मरहब के गिरते ही मुसलमानों ने हजरत अली
1:05:15की लीडरशिप खैबर पर ऐसा हमला किया कि
1:05:19मुसलमानों की फौज खैबर के किले के अंदर
1:05:22घुस गई और किले के अंदर ही जंग शुरू हुई
1:05:26और इस तरह मुसलमानों ने खैबर का यह किला
1:05:28फतह कर लिया और इस फतह के बाद मुसलमान
1:05:33खैबर का एक-एक किला फतह करते गए और आखिर
1:05:37पूरा खैबर फतह हो गया।
1:05:40खैबर के किले के अंदर यहूदियों के सारे
1:05:42खजाने मुसलमानों के कंट्रोल में आए। इन
1:05:46खजानों में इतना ज्यादा सोना था कि इससे
1:05:48पहली बार मुसलमानों के हालात हमेशा के लिए
1:05:52बदल गए। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ये
1:05:55सारा सोना मुसलमानों में डिवाइड कर दिया।
1:05:58और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खैबर की
1:06:00बड़ी-बड़ी जमीनें जो खजूर के दरख्तों से
1:06:03भरी हुई थी। मुसलमानों में बांड थे। और
1:06:06इसी खैबर को फतह करने के बाद पहली बार
1:06:08मदीना एक प्रॉपर और मजबूत स्टेट बनने लगी।
1:06:13और मुसलमानों के हालात इतने बदले कि हजरत
1:06:16उमर फरमाते हैं कि हिजरत से लेकर खैबर की
1:06:18फतह तक मैंने [संगीत] कभी पेट भरकर खाना
1:06:22नहीं खाया था। मतलब खैबर की फतह के बाद
1:06:25मुसलमानों के हालात बिल्कुल बदल चुके थे।
1:06:29अब खैबर में हजरत अली इस बात के लिए मशहूर
1:06:32है कि उन्होंने खैबर में एक बहुत भारी
1:06:34दरवाजा उठाया था। लेकिन सिर्फ यह दरवाजा
1:06:37नहीं बल्कि हजरत अली ने खैबर को फतह करके
1:06:40मदीना की पूरी इकॉनमी भी उठा दी थी। खैबर
1:06:44हजरत अली की जिंदगी की आखिरी जंग नहीं थी।
1:06:46क्योंकि रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:06:48ने पहले यह बता दिया था कि आगे जाकर हजरत
1:06:51अली मुसलमानों के एक बहुत बड़े लीडर
1:06:53बनेंगे। एक दिन आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम
1:06:56सहाबा के साथ कहीं जा रहे [संगीत] थे।
1:06:58अचानक आप सल्ला अलह वसल्लम का जूता फट
1:07:01गया। तो हजरत अली आप सल्ला अलह वसल्लम का
1:07:04जूता लेकर [संगीत] उसे ठीक करने लगे और आप
1:07:06सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सहाबा के साथ
1:07:08थोड़ा आगे चले और फिर सहाबा से कहा कि तुम
1:07:11सब में एक आदमी ऐसा होगा जो कुरान की
1:07:14तफसीर के लिए ऐसे ही लड़ेगा जिस तरह
1:07:17[संगीत] मैं कुरान के लिए लड़ा हूं। जिस
1:07:19पर अबू बकर रहु ने पूछा कि क्या वो मैं
1:07:22हूं? आप सल्ला अल वसल्लम ने कहा नहीं
1:07:24बल्कि यह शख्स वो होगा जो इस वक्त मेरा
1:07:26जूता ठीक कर रहा है और आगे जाकर बिल्कुल
1:07:29ऐसा ही हुआ। खैबर की फतह इतनी बड़ी थी कि
1:07:32इस फतह के बाद आहिस्ता-आहिस्ता अरब के
1:07:34कबीले मुसलमानों के सामने अपना सर झुकाने
1:07:37लगे और आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम अरब के
1:07:40सबसे ताकतवर लीडर बनने लगे। और आखिर खैबर
Fatḥ Makkah
1:07:44के सिर्फ एक साल बाद मक्का वालों ने
1:07:46मुसलमानों के साथ सुलह हुबिया तोड़ दी। और
1:07:50अब मुसलमान इतने स्ट्रांग थे कि आप
1:07:52सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 10,000 की फौज
1:07:54लेकर मक्का को फतह करने के लिए रवाना हुए।
1:07:59इससे सिर्फ 8 साल पहले एक ऐसा दिन भी आया
1:08:02था जब हजरत अली अकेले मक्का से हिजरत करके
1:08:06मदीना गए थे। और अब आप सल्लल्लाहु अलह
1:08:08वसल्लम के साथ 10,000 की फौज लेकर हजरत
1:08:12अली भी दोबारा मक्का एंटर हुए और मक्का को
1:08:15फतह करके हजरत अली और बाकी सहाबा ने वहां
1:08:18के काबा के अंदर सारे बुतों को तोड़ दिया।
1:08:23और इस तरह मुसलमानों ने आखिर मक्का को फतह
1:08:26कर लिया।
1:08:28मक्का को फतह करने के बाद हजरत अली इस्लाम
1:08:31की अगली जंग जंग हुनैन में भी आप
1:08:34सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के साथ मजबूती से
1:08:36खड़े रहे और ये जंग भी मुसलमान जीत गए।
1:08:40जिसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:08:42वापस अपने कैपिटल मदीना चले गए और अब
1:08:46मक्का को फतह करने के बाद पूरा अरब मदीना
1:08:49को अपना कैपिटल मानने लगा। और हर तरफ से
1:08:52लोग आकर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के हाथ
1:08:55पर बैत करने लगे। अब जब आप सल्लल्लाहु अलह
1:08:58वसल्लम ने पूरे अरब को यूनाइट कर दिया था।
1:09:01यह देखकर उस वक्त की सुपर पावर
1:09:04आहिस्ताआहिस्ता मदीना की ताकत से डरने
1:09:06लगी। द ग्रेट रोमन एंपायर।
1:09:13इसीलिए मुसलमानों की ताकत और भी ज्यादा
1:09:16बढ़ने [संगीत] से रोकने के लिए अब रोमन
1:09:18एंपायर मुसलमानों पर हमले की तैयारी करने
1:09:21लगे। जब रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:09:23को इसकी खबर मिली। आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:09:25वसल्लम ने भी रोमन एंपायर से जंग के लिए
1:09:283000 मुसलमानों की फौज जमा की जिसके बाद
1:09:31मुसलमान तबूक की तरफ रवाना हुए।
1:09:37इस जंग में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
1:09:39एक ऐलान किया था कि जो भी मुसलमान इस फौज
1:09:42में शामिल नहीं होगा, उसे मुनाफिक
1:09:45डिक्लेअर कर दिया जाएगा।
1:09:47[संगीत]
1:09:47जैसे ही मुसलमानों की फौज मदीना से रवाना
1:09:50हुई, पहली बार आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:09:52ने मुसलमानों के सबसे बड़े वॉरियर हजरत
1:09:55अली को हुक्म दिया कि वो इस जंग में शामिल
1:09:58नहीं होंगे। बल्कि वो मदीना में रहकर
1:10:01मुसलमानों के कैपिटल की हिफाजत करेंगे।
1:10:04जिसके [संगीत] बाद मुसलमानों की फौज जंग
1:10:06के लिए रवाना हुई। पहली बार ऐसा हुआ था कि
1:10:09हजरत अली आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के साथ
1:10:12किसी जंग में शामिल नहीं हुए हो। यह देखकर
1:10:16मदीना [संगीत] के कुछ मुनाफिक हजरत अली के
1:10:18खिलाफ अजीब-अजीब बातें बनाने लगे। लेकिन
1:10:21जब हजरत अली को इन बातों का पता चला वो
1:10:23सीधा मदीना से मुसलमानों की फौज की तरफ
1:10:25रवाना हुए और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:10:27के पास पहुंचकर पूछा या रसूल अल्लाह आप
1:10:30क्यों मुझे मदीना के बच्चों और औरतों के
1:10:32साथ छोड़ रहे हैं? हजरत अली को इस तरह
1:10:35परेशान देखकर [संगीत] आप सल्लल्लाहु अलह
1:10:37वसल्लम ने उन्हें कहा ए अली क्या तुम इस
1:10:40बात से खुश नहीं हो कि तुम्हारी हैसियत
1:10:42मेरे लिए ऐसी ही है जैसे मूसा अल सलाम के
1:10:45लिए हारून अल सलाम की थी लेकिन मेरे बाद
1:10:50कोई नबी नहीं होगा इसीलिए ये सुनकर हजरत
1:10:53अली रज़ अल्लाह अनहो बहुत खुश हुए और वापस
1:10:56मदीना आ गए जिसके बाद मुसलमानों की फौज
1:11:00तबूक पहुंची लेकिन वहां से रोमंस पहले ही
1:11:03भाग चुके चुके थे। इसीलिए कोई भी जंग नहीं
1:11:06हुई और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:11:08मुसलमानों के साथ वापस मदीना आ गए। तबूक
1:11:11[संगीत] की जंग के बाद पूरे अरब से और भी
1:11:14तेजी से लोग इस्लाम की तरफ आने लगे। लेकिन
1:11:17[संगीत] अरब में कुछ लोग अभी भी ऐसे थे जो
1:11:19इस्लाम एक्सेप्ट करने के लिए बिल्कुल
1:11:22तैयार नहीं थे। [संगीत] एक दिन अरब के
Mubahala
1:11:24क्रिश्चियन कबीले के लोग मदीना आप
1:11:27सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलने के लिए
1:11:29आए। इन क्रिश्चियंस को पता था कि वो अरब
1:11:32के लीडर के साथ मिलने जा रहे हैं। इसीलिए
1:11:34उन्होंने बहुत ही महंगे-महंगे कपड़े पहने
1:11:37थे और इसके साथ हाथों में सोने की रिंग्स
1:11:39भी पहनी हुई थी और उनका ख्याल था कि यह सब
1:11:42देखकर [संगीत] अरब का बादशाह उन्हें इज्जत
1:11:44देगा। लेकिन जैसे ही ये लोग आप सल्लाहु
1:11:47अलैहि वसल्लम के पास पहुंचे और आप
1:11:49सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सलाम किया। आप
1:11:51सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनके सलाम का
1:11:53जवाब नहीं दिया। बल्कि इसके बाद उनकी किसी
1:11:56भी बात का जवाब नहीं दिया। यह देखकर ये
1:11:59लोग हैरान हो गए और वहां से बाहर निकल आए
1:12:02और सहाबा से पूछने लगे कि हमें क्या करना
1:12:05चाहिए? आखिर हजरत अली ने आकर इन्हें बताया
1:12:07कि ये जो तुमने महंगे-महंगे कपड़े पहने
1:12:10हैं और सोने की अंगूठियां पहनी है यह सब
1:12:12उतार दो और बिल्कुल आम लोगों की तरह कपड़े
1:12:15पहनकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास
1:12:17जाओ। इन लोगों ने ऐसा ही किया और दोबारा
1:12:21सादा कपड़े पहनकर आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:12:23वसल्लम के पास गए और फिर उन्हें सलाम
1:12:25किया। इस बार आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:12:27ने उन्हें देखा और उनके सलाम का जवाब
1:12:30दिया। और इस तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:12:32वसल्लम और इन क्रिश्चियंस की डिबेट शुरू
1:12:34हुई। ये क्रिश्चियंस बार-बार आप सल्ला अलह
1:12:37वसल्लम से कह रहे थे कि ईसा अल सलाम
1:12:39अल्लाह के बेटे हैं और हम सबके खुदा हैं।
1:12:43लेकिन आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम उन्हें
1:12:45बता रहे थे कि ईसा अल सलाम अल्लाह के
1:12:47पैगंबर और सिर्फ अल्लाह के बंदे हैं। जिस
1:12:51पर उन्होंने आप सल्ला अल वसल्लम से कहा कि
1:12:53फिर हमें बताएं कौन ऐसा आदमी है जो बगैर
1:12:56किसी बाप के पैदा हुआ हो। और उनकी इसी बात
1:13:00पर कुरान की आयत नाजिल हुई। जिसमें अल्लाह
1:13:03ने फरमाया कि ईसा की मिसाल ऐसी ही है जैसे
1:13:07आदम की है। अब कुरान की इस आयत का इन
1:13:11क्रिश्चियंस के पास कोई जवाब नहीं था
1:13:13क्योंकि अगर ईसा अल सलाम बगैर बाप के पैदा
1:13:15हुए हैं तो आदम अली सलाम बगैर मांबाप के
1:13:18पैदा हुए थे। लेकिन फिर भी ये क्रिश्चियंस
1:13:20अपनी बात पर खड़े रहे। जिस पर आखिर आप
1:13:23सल्ला अलह वसल्लम ने इन क्रिश्चियंस को
1:13:25मुबाहला का चैलेंज दिया कि तुम अपने
1:13:28फैमिली को लेकर आओ और मैं भी अपनी फैमिली
1:13:31अहले बैत को लेकर आऊंगा और फिर हम मिलकर
1:13:34अल्लाह से दुआ करेंगे कि जो भी हम में गलत
1:13:36है उस पर अल्लाह की लानत हो और सबको अच्छी
1:13:41तरह पता था कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:13:43के अहले बैत कौन है। क्योंकि इससे पहले एक
1:13:46दिन आप सल्लल्लाह अलह वसल्लम घर गए और एक
1:13:48चादर के नीचे हजरत फातिमा, हसन, हुसैन और
1:13:52अली रज़ अल्लाह अनो को बिठाया और अल्लाह से
1:13:54कहा कि यही लोग मेरे अहले बैत हैं। जब आप
1:13:59सल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत फातिमा, हसन,
1:14:01हुसैन और अली रज़ अल्लाह अनो के साथ
1:14:03मुबाहला के चैलेंज के लिए पहुंचे। वहां
1:14:05सारे क्रिश्चियंस ने आप सल्लाहु अलैहि
1:14:07वसल्लम से कहा कि आप हमारे बारे में जो भी
1:14:10फैसला करना चाहे कर लें। लेकिन यह मुबाहला
1:14:13का चैलेंज हम आपके साथ नहीं कर सकते और यह
1:14:16क्रिश्चियंस वहां से चले गए। यहां से हजरत
Yemen
1:14:19अली की जिंदगी में एक बहुत बड़ा चेंज आया
1:14:23क्योंकि अब रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
1:14:24वसल्लम हजरत अली को एक वॉरियर से इस्लाम
1:14:27का बहुत बड़ा जज बनाना चाहते थे। असल में
1:14:31जब पूरा अरब इस्लाम की तरफ आ रहा था। यमन
1:14:35का एक बहुत बड़ा कबीला अब भी मुसलमान होने
1:14:38के लिए तैयार नहीं था।
1:14:40इसीलिए आप सल्ला अलह वसल्लम ने अपने एक
1:14:42जनरल खालिद बिन वलीद रज अल्लाह अनहु को
1:14:45[संगीत]
1:14:46यमन की तरफ भेजा ताकि वो इन लोगों को
1:14:49इस्लाम की दावत दें। [संगीत]
1:14:51लेकिन आप सल्ला अलह वसल्लम काफी अरसे तक
1:14:54इंतजार करते रहे। लेकिन यमन के मुसलमान
1:14:56होने की कोई खबर नहीं आई। [संगीत] तो आखिर
1:15:00आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खालिद बिन
1:15:01वलीद को वापस मदीना बुलाया और फिर आप
1:15:04सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हुक्म दिया कि
1:15:06अली को मेरे पास लाया जाए। हजरत अली ने
1:15:09आकर आप सल्ला अलह वसल्लम से पूछा कि या
1:15:11रसूल अल्लाह आप मुझे बहुत दूर एक दूसरे
1:15:14मुल्क भेज रहे हैं और मेरी उम्र तो अभी
1:15:17बहुत कम है और वहां मुझसे बड़ी उम्र के
1:15:20लोग मेरी बात क्यों मानेंगे और मैं उनके
1:15:22दरमियान सही फैसला कैसे करूंगा क्योंकि इस
1:15:26वक्त हजरत अली की ऐज सिर्फ 3032 साल थी
1:15:29जिस पर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
1:15:30हजरत अली के सीने पर अपना हाथ फेरा और
1:15:34हजरत अली को दुआ दी ऐ अल्लाह अली की जुबान
1:15:38को सच के साथ रख और इसके दिल को हिदायत
1:15:41दे। और फिर हजरत अली से कहा ए अली जब भी
1:15:45तुम दो ग्रुप्स के दरमियान फैसला करना
1:15:47पहले दोनों ग्रुप्स की हर बात गौर से
1:15:50सुनना और तभी फैसला करना। आप सल्लल्लाहु
1:15:53अलैहि वसल्लम ने हजरत अली को अपने हाथों
1:15:56से उनके सर पर एक अमा पहनाया।
1:16:00और उनके हाथ में काला झंडा दिया और इस तरह
1:16:03हजरत अली यमन की तरफ रवाना हुए।
1:16:08[संगीत]
1:16:08एक जनरल की तरह नहीं बल्कि यमन के गवर्नर
1:16:11और जज की तरह। जैसे ही हजरत अली यमन
1:16:14पहुंचे उन्होंने वहां सारे लोगों को जमा
1:16:17किया। उनके सामने आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:16:19वसल्लम का लेटर पढ़कर सुनाया। और फिर एक
1:16:23जबरदस्त स्पीच की। और इस तरह हजरत अली की
1:16:27ही बातों से इंस्पायर होकर पूरे यमन ने
1:16:30इस्लाम कबूल कर लिया। और हजरत अली के जाने
1:16:33के कुछ ही दिन बाद आप सल्ला अलह वसल्लम तक
1:16:35खबर पहुंची कि यमन इस्लाम कबूल कर चुका
1:16:39है। जिसके बाद हजरत अली यमन के लीडर बने।
1:16:44और यमन के सारे फैसले हजरत अली ही करने
1:16:47लगे। यह वही यमन था जहां से बहुत साल पहले
1:16:51एक बादशाह ने मक्का पर हमला किया था।
1:16:54जिसका नाम था अब्राहम।
1:16:56अब्राहम।
1:16:58और अब मक्का का ही एक आदमी पूरे यमन का
1:17:01लीडर था। कुछ महीने यमन में रहने के बाद
Ghadir Khumm
1:17:04हजरत अली को पता चला कि आप सल्लल्लाहु
1:17:06अलैहि वसल्लम अपनी [संगीत] जिंदगी के पहले
1:17:08हज के लिए मदीना से मक्का आ रहे हैं।
1:17:12[संगीत]
1:17:13जिसके बाद हजरत अली यमन से मक्का की तरफ
1:17:16रवाना हुए और जाकर आप सल्लल्लाहु अलह
1:17:18वसल्लम के साथ इस हज में हिस्सा लिया। यह
1:17:22आप सल्लल्लाह वसल्लम की जिंदगी का पहला और
1:17:24आखिरी हज था। और हज करने के बाद रसूल्लाह
1:17:28सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अली और
1:17:30हजारों सहाबा के साथ वापस मदीना की तरफ
1:17:33रवाना हुए। अब जब ये हजारों मुसलमान आप
1:17:37सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ मक्का से
1:17:39मदीना जा रहे थे। रास्ते में एक [संगीत]
1:17:41जगह खून के मकाम पर स्टे किया। मुसलमानों
1:17:47ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए कुछ
1:17:49दरख्तों के नीचे स्पीच की जगह बनाई। जहां
1:17:52आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सारे
1:17:53मुसलमानों के सामने आए। सही मुस्लिम और
1:17:56हदीस की इन किताबों में आप सल्ला अलह
1:17:59वसल्लम की यह स्पीच कुछ इस तरह है।
1:18:02आप सल्ला अलह वसल्लम सारे मुसलमानों के
1:18:05सामने आए और फरमाया
1:18:07ऐ लोगों सुन लो मैं भी एक इंसान हूं। बहुत
1:18:12जल्द एक फरिश्ता अल्लाह का पैगाम लेकर
1:18:15मेरे पास आएगा और मैं उसका हुकुम मान
1:18:18लूंगा। ए लोगों मैं तुम्हारे पास दो बहुत
1:18:23बड़ी चीजें छोड़कर जा रहा हूं। एक अल्लाह
1:18:26की किताब कुरान इसको हमेशा मजबूती से पकड़
1:18:31कर रखना [संगीत] और दूसरा मेरे अहले बैत।
1:18:37मैं तुम्हें अपने अहले बैत के बारे में
1:18:40अल्लाह से डराता हूं।
1:18:43लेकिन आगे जाकर आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम
1:18:45के अहले बैत में हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु
1:18:48को नमाज पढ़ते हुए कूफा की ग्रैंड मस्जिद
1:18:51में शहीद कर दिया गया। जिसके बाद आप
1:18:54सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दोबारा फरमाया
1:18:57मैं तुम्हें अपने अहले बैत के बारे में
1:19:00अल्लाह से डराता हूं। [संगीत]
1:19:02लेकिन आगे जाकर आप सल्ला अलह वसल्लम के
1:19:04अहले बैत में हजरत हसन रज़ अल्लाह अनू को
1:19:08ज़हर देकर शहीद कर दिया गया। जिसके बाद आप
1:19:11सल्ला अलह वसल्लम ने तीसरी बार कहा मैं
1:19:14तुम्हें अपने अहले बैत के मामले में
1:19:17अल्लाह से डराता हूं।
1:19:20लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अहले
1:19:23बैत ने हजरत हुसैन रज़ अल्लाह अनो को भी
1:19:26कर्बला के मैदान में बेरहमी से शहीद कर
1:19:30दिया।
1:19:32[संगीत]
1:19:32इसी तरह यह बात तीन बार कहने के बाद आप
1:19:35सल्ला अलह वसल्लम ने सहाबा से पूछा
1:19:37[संगीत] क्या तुम लोगों को नहीं पता कि
1:19:40मेरा मुसलमानों पर उनकी जानों से भी
1:19:43ज्यादा हक है?
1:19:46जिस पर सहाबा ने जवाब दिया कि बिल्कुल हम
1:19:49मानते हैं। तो आप सल्ला अलह वसल्लम ने
1:19:52हजरत अली का हाथ पकड़ा [संगीत] और उसे
1:19:54उठाकर फरमाया जिसका मौला मैं उसका मौला
1:19:58अली।
1:20:00ऐ अल्लाह उससे मोहब्बत रख जो अली से
1:20:03मोहब्बत रखे और उससे दुश्मनी कर जो अली से
1:20:07दुश्मनी करे। यह कोई पहली दफा नहीं था कि
1:20:10आप सल्ला अलह वसल्लम ने मौला अली कीेंस के
1:20:13बारे में मुसलमानों को बताया हो। इससे
1:20:15पहले भी एक बार आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम
1:20:17ने फरमाया था कि ऐ अली तुमसे मोमिन ही
1:20:20मोहब्बत करेगा और तुमसे मुनाफिक ही बोगज़
1:20:24रखेगा। एक और जगह आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:20:27ने फरमाया था कुरान अली के [संगीत] साथ है
1:20:30और अली कुरान के साथ है। और एक और बार आप
1:20:33सल्ला अलह वसल्लम ने फरमाया अली मुझसे है
1:20:35और मैं अली से हूं। हजरत अली उन 10 सहाबा
1:20:39में से भी थे जिन्हें रसूल्लाह सल्ला अलह
1:20:41वसल्लम ने दुनिया में जन्नत की खुशखबरी दी
1:20:45थी। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक और
1:20:47जगह फरमाया जिसने अली को गाली दी उसने
1:20:50मुझे गाली दी और जिसने मुझे गाली दी उसने
1:20:53अल्लाह को गाली दी। और कहा जिसने अली को
1:20:57तकलीफ पहुंचाई उसने मुझे तकलीफ पहुंचाई।
1:21:01और एक दिन आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने
1:21:02फरमाया जिसने मेरी बात मानी उसने अल्लाह
1:21:05की बात [संगीत] मानी और जिसने अली की बात
1:21:07मानी उसने मेरी बात मानी और आखिर एक दिन
1:21:11आप सल्ला अलह वसल्लम ने हजरत अली से यह भी
1:21:14कहा कि मेरी उम्मत का सबसे बुरा आदमी वो
1:21:18होगा जो तुम्हारी दाढ़ी को तुम्हारे खून
1:21:21से लाल कर देगा। मतलब तुम्हें शहीद कर
1:21:25देगा। मतलब जो आदमी हजरत अली को शहीद
1:21:29करेगा वो कयामत तक इस उम्मत का सबसे
1:21:34बदबख्त आदमी होगा।
Muhammad SAW Wafat
1:21:36इस स्पीच के बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:21:38वसल्लम सारे मुसलमानों के साथ वापस मदीना
1:21:41पहुंचे। और मदीना पहुंचते ही आप
1:21:44सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार फिर उस
1:21:47वक्त की सुपर पावर रोमन एंपायर पर हमला
1:21:50करने की प्लानिंग करने लगे। और इस हमले के
1:21:53लिए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
1:21:55मुसलमानों की एक नई फौज बनाई और उन्हें
1:21:58रोमन एंपायर पर हमले के लिए रवाना कर
1:22:01दिया। लेकिन जैसे ही ये फौज रवाना हुई
1:22:05आहिस्ता-आहिस्ता [संगीत] मदीना में आप
1:22:07सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तबीयत खराब
1:22:10होने लगी और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:22:12की जिंदगी के आखिरी दिन करीब आने लगे।
1:22:16आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी के
1:22:18आखिरी दिनों में हजरत अली हर वक्त आप
1:22:22सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास रहने लगे
1:22:24और उनका ख्याल रखने लगे बल्कि आप
1:22:27सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मस्जिद में
1:22:29आखिरी नमाज के लिए हजरत अली और अब्बास रज
1:22:32अल्लाह अनो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को
1:22:34सहारा देकर उन्हें मस्जिद तक लेकर आए जहां
1:22:38आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुसलमानों
1:22:40के साथ मस्जिद में नमाज पढ़ी लेकिन
1:22:43आहिस्ताआहिस्ता आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:22:45वसल्लम की तबीयत और भी बिगड़ने लगी जिसके
1:22:47बाद वो नमाज के लिए भी मस्जिद नहीं जा
1:22:50सकते थे और आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के
1:22:53हुक्म पर अबू बकर रज़ अल्लाह अनहु मस्जिद
1:22:55में मुसलमानों को नमाज पढ़ाने लगे। इन
1:22:58आखिरी दिनों में हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु
1:23:01मदीना के सारे मर्दों में आप सल्लल्लाहु
1:23:03अलैहि वसल्लम के सबसे क्लोज रहते थे।
1:23:05इसीलिए जब भी हजरत अली बाहर निकलते थे
1:23:08सारे मुसलमान उनके गिर्द जमा होकर उनसे
1:23:11पूछते थे कि हमें बताएं आप सल्ला अलह
1:23:13वसल्लम की तबीयत अब कैसी है? एक दिन जब
1:23:16हजरत अली बाहर आए सारे मुसलमान उनके पास
1:23:19जमा हुए और उनसे पूछने लगे तो हजरत अली ने
1:23:22सबको बताया कि अब आप सल्ला अलह वसल्लम ठीक
1:23:25है और उनकी तबीयत आहिस्ता-आहिस्ता बेहतर
1:23:27हो रही है। लेकिन हजरत अली के चाचा अब्बास
1:23:30रज अल्लाह अनो ने उनसे कहा कि नहीं मैं
1:23:32अब्दुल मुतलिब के बेटों के चेहरों को
1:23:35अच्छी तरह पहचान लेता हूं। मतलब अब
1:23:38रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के
1:23:40आखिरी दिन करीब आ चुके हैं। और फिर हजरत
1:23:43अब्बास ने हजरत अली से कहा कि चलो हम जाकर
1:23:47आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूरे
1:23:49मुसलमानों की खिलाफत की रिक्वेस्ट करते
1:23:52हैं। लेकिन हजरत अली ने कहा कि नहीं अगर
1:23:55आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें इंकार
1:23:57कर दिया तो फिर कभी भी उनके खानदान बनू
1:24:00हाशिम को खिलाफत नहीं मिल सकेगी। आप
1:24:03सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खानदान बनू
1:24:05हाशिम से आज तक मुसलमानों के सबसे ज्यादा
1:24:08खलीफा रहे हैं। बनू हाशिम खानदान के लोग
1:24:12ऑलमोस्ट 650 साल तक मुसलमानों के खलीफा
1:24:15रहे हैं। और आगे जाकर इसी बनू हाशिम
1:24:18खानदान के दौर को ही इस्लामिक गोल्डन एज
1:24:21कहा जाता है।
1:24:24बल्कि आगे जाकर बनू हाशिम के सबसे बड़े
1:24:27खलीफा खुद हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु ही
1:24:29बने। आहिस्ताआहिस्ता मदीना में रसूल्लाह
1:24:32सल्लल्लाहु अलह वसल्लम की तबीयत खराब होती
1:24:34गई। जिसके कुछ ही दिन बाद अल्लाह के आखिरी
1:24:38रसूल हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलह वसल्लम
1:24:41इस दुनिया से चले गए। आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:24:44वसल्लम की वफात की खबर एक आग की तरह पूरे
1:24:47मदीना में फैली। और मदीना के हर घर में
1:24:51लोग रो रहे थे। और हर तरफ मदीना में गम
1:24:54फैला हुआ था।
1:24:56लेकिन यह दिन सबसे मुश्किल हजरत अली रज़
1:24:59अल्लाह अनो और उनकी फैमिली के लिए था।
1:25:01[संगीत]
1:25:02क्योंकि मौला अली के लिए रसूल्लाह सल्ला
1:25:05अलह वसल्लम सिर्फ एक लीडर नहीं बल्कि उनके
1:25:08बाप की तरह थे। जो इससे बहुत साल पहले
1:25:11सिर्फ 5 साल के अली रज़ अल्लाह अनहु को खुद
1:25:14अपने घर लेकर आए थे। और हजरत अली का अपने
1:25:18ही घर में बिल्कुल अपने बेटे की तरह ख्याल
1:25:21रखते थे। हजरत अली ने आप सल्लल्लाहु अलह
1:25:24वसल्लम के ही घर में लिखना और पढ़ना सीखा
1:25:26था। और सिर्फ यही नहीं बल्कि अरब के सबसे
1:25:30बड़े वॉरियर भी हजरत अली आप सल्लल्लाहु
1:25:33अलैहि वसल्लम के घर से ही बने। और आप
1:25:35सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी इस छोटी
1:25:37बेटी हजरत फातिमा रज़ अल्लाह अन्हा की शादी
1:25:39भी हजरत अली रज़ अल्लाह अनहु से कराई थी।
1:25:42हजरत अली के बेटों हसन और हुसैन से आप
1:25:45सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सबसे ज्यादा
1:25:47मोहब्बत करते थे। और जाने से पहले आप
1:25:49सल्ला अलह वसल्लम ने सारे मुसलमानों से
1:25:51कहा था कि मैं दो चीजें तुम्हारे पास
1:25:54छोड़कर जा रहा हूं। अल्लाह की किताब और
1:25:57अपने अहले बैत आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
1:26:01की वफात के बाद हजरत अली आप सल्लल्लाहु
1:26:03अलह वसल्लम की मयत के पास आए और कहा या
1:26:08रसूल अल्लाह आपसे पहले भी अल्लाह के रसूल
1:26:12दुनिया से जा चुके हैं।
1:26:19लेकिन आपका दुनिया से जाना उन सारे
1:26:22पैगंबरों से बिल्कुल अलग है। क्योंकि आपके
1:26:26जाने के बाद आसमान और जमीन का रिश्ता
1:26:30हमेशा के लिए टूट चुका है। जो किसी भी और
1:26:33पैगंबर के जाने से कभी नहीं हुआ। या रसूल
1:26:37अल्लाह अगर आपने हमें ना रोका होता तो आज
1:26:41हम अपने सारे आंसू यही आपके सामने बहा
1:26:45देते लेकिन आपने हमें ऐसा करने से रोका है
1:26:49या रसूल अल्लाह मेरे मां-बाप आप पर
1:26:52कुर्बान हो और जब आप अपने रब के पास पहुंच
1:26:55जाए हम सबको जरूर याद रखिएगा
1:27:01दुनिया के [संगीत] सबसे अजीम इंसान
1:27:03रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम हजरत अली
1:27:06ने गुसल दिया और इस इतने मुश्किल दिन में
1:27:10इतने गम में होने के बावजूद भी हजरत अली
1:27:13ने ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को
1:27:15दफनाने की सारी तैयारी की। इसी तरह आखिरी
1:27:19वक्त तक हजरत अली आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:27:21वसल्लम के साथ रहे। अब इस्लाम की तारीख
1:27:25में एक नया दौर शुरू हो चुका था।
1:27:30और आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के जाने के
1:27:32बाद मुसलमानों ने अपना पहला खलीफा अबू बकर
1:27:35रज़ अल्लाह अनहु को बनाया। और अब वक्त आ
1:27:38चुका था कि मुसलमान आप सल्लल्लाहु अलैहि
1:27:40वसल्लम की कही हुई बातों को पूरा कर और उस
1:27:44वक्त की सुपर पावर्स रोमन और परर्शियन
1:27:47एंपायर
1:27:52क्रश कर दिया।
1:27:55[संगीत]
1:27:56इसीलिए अबू बकर रज़ अल्लाह अनो ने एक ही
1:27:59टाइम पर दोनों सुपर पावर्स पर हमला कर
1:28:02दिया
1:28:05और मुसलमान एक के बाद एक शहर को फतह करने
1:28:08लगे और यहां से हजरत अली की जिंदगी में भी
1:28:12एक नया दौर आया
1:28:14द चीफ जस्टिस ऑफ इस्लाम
1:28:19सब्सक्राइब