Full transcript
0:00[संगीत]
0:29स
0:30सीताराम चरित अति
0:36पावन मधुर सरस अरु अति मन
0:50भावन पुनि पुनि केतने हो सुने सुनाए
1:00की प्यास बुझत न
1:07[संगीत]
1:25बुझाए
1:27रघुनंदन मैं जानता हूं कि आपको प्राणों से
1:30अधिक प्यारी है और आप यह भी जानते हैं कि
1:33सीता सर्वथा शुद्ध
1:39है तथापि लोका पाद से कलुषित चित होकर
1:43आपने उसका त्याग किया
1:48है हे राघव मैं आपको विश्वास दिलाता हूं
1:52मैंने अपनी पांचों इंद्रियों और मन बुद्धि
1:55के द्वारा सीता की शुद्धता का भली भाति
1:58निश्चय करके ही उसे अपने संरक्षण में लिया
2:02[संगीत]
2:08था महाराज मैंने दिव्य दृष्टि से यह जान
2:12लिया था कि सीता का भाव और विचार परम
2:15पवित्र है इसीलिए य मेरे आश्रम में प्रवेश
2:18पा सकी
2:21है इसका आचरण सर्वथा शुद्ध है पाप इसे छू
2:25भी नहीं सकता है तथा यह पति को ही देवता
2:28मानती है
2:36यदि आपको मेरी बात पर विश्वास हो तो इसे
2:39पूर्ण आदर के साथ ग्रहण करें और इसे राज
2:42सिंहासन पर स्थान दे
2:52[संगीत]
3:00[संगीत]
3:13प्रभु आप जो कहते हैं उस पर मुझे पूर्ण
3:17विश्वास
3:20है महा भाग आप धर्म के ज्ञाता
3:24है आप सीता के संबंध में जो भी कह रहे हैं
3:28वो सब ठीक है
3:34भगवन मुझे आपके निर्दोष वचनों से जनक
3:38नंदिनी की शुद्धता पर पूरा विश्वास हो गया
3:47है एक बार पहले भी देवताओं के समीप
3:51मिथिलेश कुमारी की शुद्धता का विश्वास
3:54मुझे प्राप्त हो चुका
3:56है उस समय सीता अपनी शुद्धि प्रमाणित करने
4:01के लिए शपथ ली थी जिसके कारण मैंने इन्हें
4:06अपने भवन में स्थान
4:11दिया किंतु आगे चलकर फिर बड़े जोर का लोकप
4:15अवाद उठा जिससे विवश
4:19होकर मुझे इनका त्याग करना
4:22[संगीत]
4:26पड़ा
4:28ब्रह्मण यह जानते हुए भी कि सीता सर्वथा
4:31निष्पाप
4:32है मैंने समाज के भय से इन्हें छोड़
4:38दिया अतः आप मेरे इस अपराध को क्षमा
4:45करें मैं यह भी जानता
4:47हूं कि यह जड़ कुमार कुश और
4:52लव दोनों मेरे ही पुत्र हैं
4:57[संगीत]
5:02तथापि
5:03जन समुदाय में शुद्ध प्रमाणित हो जाने पर
5:06ही मिथिलेश कुमारी में मेरा प्रेम हो सकता
5:22है यद्यपि महर्षि वाल्मीकि के निर्दोष
5:26वचनों से ही मुझे पूरा विश्वास हो गया है
5:30तथापि
5:31जन समुदाय के बीच मिथिलेश कुमारी के
5:35विशुद्ध प्रमाणित होने पर मुझे अधिक
5:39प्रसन्नता होगी
5:43[संगीत]
7:01[संगीत]
7:11[संगीत]
7:23[संगीत]
8:04[संगीत]
8:07आ
8:09[संगीत]
8:43[संगीत]
8:48मैं श्री रघुनाथ जी के सिवा किसी दूसरे
8:52पुरुष का मन से भी चिंतन नहीं करती यदि यह
8:56सत्य है तो आज भगवती पृथ्वी देवी मुझे
9:01अपनी गोद में स्थान
9:09दे यदि मैं मन वचन और कर्म द्वारा केवल
9:15श्री राम की ही आराधना करती हूं तो आज
9:18भगवती पृथ्वी देवी मुझे अपनी गोद में
9:21स्थान दे
9:32[संगीत]
9:37भगवान श्री राम को छोड़कर मैं किसी दूसरे
9:41पुरुष को नहीं
9:45जानती मेरा कहना यदि सत्य हो तो भगवती
9:49पृथ्वी देवी इसी श मुझे अपनी गोद में
9:52स्थान दे
10:05[संगीत]
10:08ब
10:15[संगीत]
10:29[संगीत]
10:36[संगीत]
11:06[संगीत]
11:08क
11:15[संगीत]
11:23[संगीत]
11:24[प्रशंसा]
11:25[संगीत]
11:36[संगीत]
12:01[संगीत]
12:08धरती मां इस धरती पर परीक्षा देते देते अब
12:13मैं थक गई हूं अब मुझे अपने साथ ले चल
12:18मुझे अपने साथ ले चल
12:22मां यहां नारी का आदर नहीं होता
12:26मां मुझे यहां से ले जा
12:29[संगीत]
12:31आओ मेरी
12:32पुत्री मां की गोत तो पुत्री के लिए सदा
12:35खुली रहती
12:36है
12:38आओ आओ वहां तेरा कोई अपमान नहीं
12:42[संगीत]
12:45करेगा
12:56आ आ
12:59आओ
13:00पुत्री मेरे पास
13:04आओ
13:06आओ आ
13:08[संगीत]
13:26[संगीत]
13:29चिंता मत करो
13:31पुत्री हम अपने लोक में
13:36चलेंगे माता जीी माता जी आप हमें छोड़कर
13:40कहां जा रही
13:53है मैं तुम दोनों
13:56को तुम्हारे पिता श्री के हाथ स रही
14:01हूं मनुष्य के लिए पिता ही सबसे बड़ा
14:05देवता है और पिता की सेवा ही सबसे बड़ा
14:12[संगीत]
14:21धर्म उकी सेवा करना मां मां हमें क्षमा कर
14:26दो मां हमें क्षमा कर दो मां हमने जो आप
14:30मि लगाकर पाप किया है उसके लिए हमें क्षमा
14:32कर दो
14:33माता
14:35करमा
14:37करमा कर दो मामा कर दो मा
14:43[संगीत]
14:51[संगीत]
14:56[संगीत]
15:00भगवान तुम लोगों को सर्वदा सुखी
15:07रखे महाराज से इतनी प्रार्थना
15:11है इनके दोष भूलकर
15:14समस्त प्रजा जनों को लव कुश की भाति
15:22[संगीत]
15:30[संगीत]
15:39[संगीत]
15:47समस्त
15:49गुरुजन माताएं
15:52[संगीत]
16:01पिता मेरा प्रणाम स्वीकार
16:05[संगीत]
16:24करें
16:27रघुनंदन यद मेरे और भी जन्म हो तो मेरे
16:31समस्त जन्मों में मुझे आप ही पति रूप में
16:35प्राप्त
16:39हो परंतु किसी जन्म
16:42में फिर ऐसी स्थिति ना
16:46लाना फ ऐसी स्थिति ना लाना
16:54प्रभु आपके श्री चरणों
16:57में मेरा प्रणाम स्वीकार
17:01[संगीत]
17:11करें अब मुझे आगे दे नहीं सीते त मुझे
17:17छोड़कर नहीं जा
17:19सकती मेरा समय पूरा हो गया
17:22है भगवान अब मेरा मार्ग ना
17:26रोके पुत्री अब चलो यहां से यह संसार
17:30तुम्हारी योग्य नहीं
17:32है
17:46चलो नहीं
17:54[संगीत]
18:00[संगीत]
18:04नहीं सी नहीं मैं तुम्हे नहीं जाने दूंगा
18:08सी
18:11स स
18:14[संगीत]
18:56[संगीत]
19:26नहीं ऐसा नहीं हो सकता
19:29धरती माता तुम मेरी सीता को अपने साथ नहीं
19:32ले जा
19:38सकती हे पूजनीय भगवती
19:42वसुंधरे मुझे मेरी सीता को लौटा
19:46दो लौटा दो मुझे मेरी सीता
19:50को लौटा दो मुझे मेरी सीता को अन्यथा मैं
19:54अपना क्रोध दिखाऊंगा
20:02मेरा प्रभाव कैसा है यह तुम जानती
20:06[संगीत]
20:09हो यदि तुमने पृथ्वी पर उसी रूप में मेरी
20:13सीता को मुझे वापस नहीं लौटाया तो मैं
20:16पर्वत और वन सहित तुम्हारी समस्त स्थिति
20:18को ने कर डालूंगा सारी भूमि का विनाश कर
20:21दूंगा चाहे फिर भले ही सब कुछ जलम क्यों
20:25ना हो जाए
20:29हे
20:31राम आपके लिए ऐसा उचित नहीं
20:37है शत्र सूदन आप अपने भगवत स्वरूप का
20:41स्मरण
20:44करें
20:46महाबा मैं यह अनुरोध कर रहा
20:48हूं कि इस समय आप ध्यान के द्वारा अपने
20:53वैष्णव स्वरूप का स्मरण
20:57करें अवी सीता अपने तपोबल के प्रभाव
21:02से सुख पूर्वक नाग लोक के मार्ग से आपके
21:07परमधाम में चली गई
21:10है अब पुन साकी धाम में ही आपकी उनसे भेंट
21:15होगी इसमें संशय नहीं
21:20है आप मन में कोई संताप ना करे
21:27[संगीत]
21:57महाराज परमपिता ब्रह्मा ठीक कह रहे
22:02हैं भगवन आपने वराह रूप में जिस पृथ्वी का
22:07उद्धार किया
22:08था उसी का संहार आप कैसे कर सकते
22:14हैं यह जो हुआ वोह होनी का खेल
22:22है भगवान वाल्मीकि को देखिए ये इस होनी को
22:27जानते थे इन्होंने बहुत प्रयास
22:31किया परंतु विधि को यह भी टाल ना
22:54सके
22:55राजन महर्षि वशिष्ठ सत्य कह रहे विधना
23:00स्वयं मनुष्य की जीवा पर आकर बैठ जाती है
23:04और वही कहलाती है जो भाग्य में लिखित होता
23:10है सीता और आपका मिलन फिर साकेत धाम में
23:18होगा प्रभु अब आप सीता की धरोहर अपने इन
23:23पुत्रों को स्वीकार
23:25कीजिए इन्हें आपके स्नेह की आवश्यकता है
23:30गुरुदेव हमारी माता जी हमें छोड़कर क्यों
23:34चली
23:36गई
23:38ब वह केवल तुम्हारी ही माता नहीं सारे जगत
23:42की माता
23:43है जगत जन्नी है
23:48वह वह कहीं नहीं गई व तुम्हारे हृदयं में
23:53वास करती
23:54[संगीत]
23:57है जब अत मुख होकर देखोगे तो तुम्हें उनके
24:01दर्शन
24:04होंगे यह तो उनकी धरती पर केवल एक लीला
24:08थी यह लीला समाप्त करके आज वह पाताल मार्ग
24:12से अपने वैकुंठ धाम की ओर चली
24:18गई अब वह तीनों लोकों में प्रतिष्ठित होकर
24:22पूजी जाएंगी
24:23[संगीत]
24:28अब इस धरती पर तुम्हारे पिता ही तुम्हें
24:31माता का स्नेह
24:37[संगीत]
24:41देंगे हे राम पुत्री सीता की यह रोहर मैं
24:46आज तुम्हें सपता
24:47हूं इन्ह अपनी गोद में ले लो
24:51[संगीत]
25:06[संगीत]
25:25[संगीत]
25:40पुत्र
25:41कुश पस
25:45[संगीत]
25:47लव आपके जीवन में आज हमारा उत्तरदायित्व
25:50पूर्ण हो
25:52[संगीत]
25:56गया राजन
25:59हमें आज्ञा
26:01[संगीत]
26:16दीजिए आपका कल्याण हो
26:21[संगीत]
27:14[संगीत]
27:45मंगल भवन
27:48अमंगल
27:52हारी प्रव हो सु
27:55दशरथ अजर बिहारी
28:00[संगीत]
28:08सीताराम चरित अति
28:14पावन मधुर सरस अरु अति मन भावन
28:29पुनि पुनि कितने हो सुने
28:35सुनाए य की प्यास बुझत ना बुझाए
28:44[संगीत]
28:59उत्तर रामायण प्रस्तुत करता अनेक्स प्रे