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उत्तर रामायण - EP 38 - सीता ने दिया पतिव्रता होने का प्रमाण और धरती की गोद में समाना

Ramayan · 1,228 words · 6 min read

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0:00[संगीत]

0:29स

0:30सीताराम चरित अति

0:36पावन मधुर सरस अरु अति मन

0:50भावन पुनि पुनि केतने हो सुने सुनाए

1:00की प्यास बुझत न

1:07[संगीत]

1:25बुझाए

1:27रघुनंदन मैं जानता हूं कि आपको प्राणों से

1:30अधिक प्यारी है और आप यह भी जानते हैं कि

1:33सीता सर्वथा शुद्ध

1:39है तथापि लोका पाद से कलुषित चित होकर

1:43आपने उसका त्याग किया

1:48है हे राघव मैं आपको विश्वास दिलाता हूं

1:52मैंने अपनी पांचों इंद्रियों और मन बुद्धि

1:55के द्वारा सीता की शुद्धता का भली भाति

1:58निश्चय करके ही उसे अपने संरक्षण में लिया

2:02[संगीत]

2:08था महाराज मैंने दिव्य दृष्टि से यह जान

2:12लिया था कि सीता का भाव और विचार परम

2:15पवित्र है इसीलिए य मेरे आश्रम में प्रवेश

2:18पा सकी

2:21है इसका आचरण सर्वथा शुद्ध है पाप इसे छू

2:25भी नहीं सकता है तथा यह पति को ही देवता

2:28मानती है

2:36यदि आपको मेरी बात पर विश्वास हो तो इसे

2:39पूर्ण आदर के साथ ग्रहण करें और इसे राज

2:42सिंहासन पर स्थान दे

2:52[संगीत]

3:00[संगीत]

3:13प्रभु आप जो कहते हैं उस पर मुझे पूर्ण

3:17विश्वास

3:20है महा भाग आप धर्म के ज्ञाता

3:24है आप सीता के संबंध में जो भी कह रहे हैं

3:28वो सब ठीक है

3:34भगवन मुझे आपके निर्दोष वचनों से जनक

3:38नंदिनी की शुद्धता पर पूरा विश्वास हो गया

3:47है एक बार पहले भी देवताओं के समीप

3:51मिथिलेश कुमारी की शुद्धता का विश्वास

3:54मुझे प्राप्त हो चुका

3:56है उस समय सीता अपनी शुद्धि प्रमाणित करने

4:01के लिए शपथ ली थी जिसके कारण मैंने इन्हें

4:06अपने भवन में स्थान

4:11दिया किंतु आगे चलकर फिर बड़े जोर का लोकप

4:15अवाद उठा जिससे विवश

4:19होकर मुझे इनका त्याग करना

4:22[संगीत]

4:26पड़ा

4:28ब्रह्मण यह जानते हुए भी कि सीता सर्वथा

4:31निष्पाप

4:32है मैंने समाज के भय से इन्हें छोड़

4:38दिया अतः आप मेरे इस अपराध को क्षमा

4:45करें मैं यह भी जानता

4:47हूं कि यह जड़ कुमार कुश और

4:52लव दोनों मेरे ही पुत्र हैं

4:57[संगीत]

5:02तथापि

5:03जन समुदाय में शुद्ध प्रमाणित हो जाने पर

5:06ही मिथिलेश कुमारी में मेरा प्रेम हो सकता

5:22है यद्यपि महर्षि वाल्मीकि के निर्दोष

5:26वचनों से ही मुझे पूरा विश्वास हो गया है

5:30तथापि

5:31जन समुदाय के बीच मिथिलेश कुमारी के

5:35विशुद्ध प्रमाणित होने पर मुझे अधिक

5:39प्रसन्नता होगी

5:43[संगीत]

7:01[संगीत]

7:11[संगीत]

7:23[संगीत]

8:04[संगीत]

8:07आ

8:09[संगीत]

8:43[संगीत]

8:48मैं श्री रघुनाथ जी के सिवा किसी दूसरे

8:52पुरुष का मन से भी चिंतन नहीं करती यदि यह

8:56सत्य है तो आज भगवती पृथ्वी देवी मुझे

9:01अपनी गोद में स्थान

9:09दे यदि मैं मन वचन और कर्म द्वारा केवल

9:15श्री राम की ही आराधना करती हूं तो आज

9:18भगवती पृथ्वी देवी मुझे अपनी गोद में

9:21स्थान दे

9:32[संगीत]

9:37भगवान श्री राम को छोड़कर मैं किसी दूसरे

9:41पुरुष को नहीं

9:45जानती मेरा कहना यदि सत्य हो तो भगवती

9:49पृथ्वी देवी इसी श मुझे अपनी गोद में

9:52स्थान दे

10:05[संगीत]

10:08ब

10:15[संगीत]

10:29[संगीत]

10:36[संगीत]

11:06[संगीत]

11:08क

11:15[संगीत]

11:23[संगीत]

11:24[प्रशंसा]

11:25[संगीत]

11:36[संगीत]

12:01[संगीत]

12:08धरती मां इस धरती पर परीक्षा देते देते अब

12:13मैं थक गई हूं अब मुझे अपने साथ ले चल

12:18मुझे अपने साथ ले चल

12:22मां यहां नारी का आदर नहीं होता

12:26मां मुझे यहां से ले जा

12:29[संगीत]

12:31आओ मेरी

12:32पुत्री मां की गोत तो पुत्री के लिए सदा

12:35खुली रहती

12:36है

12:38आओ आओ वहां तेरा कोई अपमान नहीं

12:42[संगीत]

12:45करेगा

12:56आ आ

12:59आओ

13:00पुत्री मेरे पास

13:04आओ

13:06आओ आ

13:08[संगीत]

13:26[संगीत]

13:29चिंता मत करो

13:31पुत्री हम अपने लोक में

13:36चलेंगे माता जीी माता जी आप हमें छोड़कर

13:40कहां जा रही

13:53है मैं तुम दोनों

13:56को तुम्हारे पिता श्री के हाथ स रही

14:01हूं मनुष्य के लिए पिता ही सबसे बड़ा

14:05देवता है और पिता की सेवा ही सबसे बड़ा

14:12[संगीत]

14:21धर्म उकी सेवा करना मां मां हमें क्षमा कर

14:26दो मां हमें क्षमा कर दो मां हमने जो आप

14:30मि लगाकर पाप किया है उसके लिए हमें क्षमा

14:32कर दो

14:33माता

14:35करमा

14:37करमा कर दो मामा कर दो मा

14:43[संगीत]

14:51[संगीत]

14:56[संगीत]

15:00भगवान तुम लोगों को सर्वदा सुखी

15:07रखे महाराज से इतनी प्रार्थना

15:11है इनके दोष भूलकर

15:14समस्त प्रजा जनों को लव कुश की भाति

15:22[संगीत]

15:30[संगीत]

15:39[संगीत]

15:47समस्त

15:49गुरुजन माताएं

15:52[संगीत]

16:01पिता मेरा प्रणाम स्वीकार

16:05[संगीत]

16:24करें

16:27रघुनंदन यद मेरे और भी जन्म हो तो मेरे

16:31समस्त जन्मों में मुझे आप ही पति रूप में

16:35प्राप्त

16:39हो परंतु किसी जन्म

16:42में फिर ऐसी स्थिति ना

16:46लाना फ ऐसी स्थिति ना लाना

16:54प्रभु आपके श्री चरणों

16:57में मेरा प्रणाम स्वीकार

17:01[संगीत]

17:11करें अब मुझे आगे दे नहीं सीते त मुझे

17:17छोड़कर नहीं जा

17:19सकती मेरा समय पूरा हो गया

17:22है भगवान अब मेरा मार्ग ना

17:26रोके पुत्री अब चलो यहां से यह संसार

17:30तुम्हारी योग्य नहीं

17:32है

17:46चलो नहीं

17:54[संगीत]

18:00[संगीत]

18:04नहीं सी नहीं मैं तुम्हे नहीं जाने दूंगा

18:08सी

18:11स स

18:14[संगीत]

18:56[संगीत]

19:26नहीं ऐसा नहीं हो सकता

19:29धरती माता तुम मेरी सीता को अपने साथ नहीं

19:32ले जा

19:38सकती हे पूजनीय भगवती

19:42वसुंधरे मुझे मेरी सीता को लौटा

19:46दो लौटा दो मुझे मेरी सीता

19:50को लौटा दो मुझे मेरी सीता को अन्यथा मैं

19:54अपना क्रोध दिखाऊंगा

20:02मेरा प्रभाव कैसा है यह तुम जानती

20:06[संगीत]

20:09हो यदि तुमने पृथ्वी पर उसी रूप में मेरी

20:13सीता को मुझे वापस नहीं लौटाया तो मैं

20:16पर्वत और वन सहित तुम्हारी समस्त स्थिति

20:18को ने कर डालूंगा सारी भूमि का विनाश कर

20:21दूंगा चाहे फिर भले ही सब कुछ जलम क्यों

20:25ना हो जाए

20:29हे

20:31राम आपके लिए ऐसा उचित नहीं

20:37है शत्र सूदन आप अपने भगवत स्वरूप का

20:41स्मरण

20:44करें

20:46महाबा मैं यह अनुरोध कर रहा

20:48हूं कि इस समय आप ध्यान के द्वारा अपने

20:53वैष्णव स्वरूप का स्मरण

20:57करें अवी सीता अपने तपोबल के प्रभाव

21:02से सुख पूर्वक नाग लोक के मार्ग से आपके

21:07परमधाम में चली गई

21:10है अब पुन साकी धाम में ही आपकी उनसे भेंट

21:15होगी इसमें संशय नहीं

21:20है आप मन में कोई संताप ना करे

21:27[संगीत]

21:57महाराज परमपिता ब्रह्मा ठीक कह रहे

22:02हैं भगवन आपने वराह रूप में जिस पृथ्वी का

22:07उद्धार किया

22:08था उसी का संहार आप कैसे कर सकते

22:14हैं यह जो हुआ वोह होनी का खेल

22:22है भगवान वाल्मीकि को देखिए ये इस होनी को

22:27जानते थे इन्होंने बहुत प्रयास

22:31किया परंतु विधि को यह भी टाल ना

22:54सके

22:55राजन महर्षि वशिष्ठ सत्य कह रहे विधना

23:00स्वयं मनुष्य की जीवा पर आकर बैठ जाती है

23:04और वही कहलाती है जो भाग्य में लिखित होता

23:10है सीता और आपका मिलन फिर साकेत धाम में

23:18होगा प्रभु अब आप सीता की धरोहर अपने इन

23:23पुत्रों को स्वीकार

23:25कीजिए इन्हें आपके स्नेह की आवश्यकता है

23:30गुरुदेव हमारी माता जी हमें छोड़कर क्यों

23:34चली

23:36गई

23:38ब वह केवल तुम्हारी ही माता नहीं सारे जगत

23:42की माता

23:43है जगत जन्नी है

23:48वह वह कहीं नहीं गई व तुम्हारे हृदयं में

23:53वास करती

23:54[संगीत]

23:57है जब अत मुख होकर देखोगे तो तुम्हें उनके

24:01दर्शन

24:04होंगे यह तो उनकी धरती पर केवल एक लीला

24:08थी यह लीला समाप्त करके आज वह पाताल मार्ग

24:12से अपने वैकुंठ धाम की ओर चली

24:18गई अब वह तीनों लोकों में प्रतिष्ठित होकर

24:22पूजी जाएंगी

24:23[संगीत]

24:28अब इस धरती पर तुम्हारे पिता ही तुम्हें

24:31माता का स्नेह

24:37[संगीत]

24:41देंगे हे राम पुत्री सीता की यह रोहर मैं

24:46आज तुम्हें सपता

24:47हूं इन्ह अपनी गोद में ले लो

24:51[संगीत]

25:06[संगीत]

25:25[संगीत]

25:40पुत्र

25:41कुश पस

25:45[संगीत]

25:47लव आपके जीवन में आज हमारा उत्तरदायित्व

25:50पूर्ण हो

25:52[संगीत]

25:56गया राजन

25:59हमें आज्ञा

26:01[संगीत]

26:16दीजिए आपका कल्याण हो

26:21[संगीत]

27:14[संगीत]

27:45मंगल भवन

27:48अमंगल

27:52हारी प्रव हो सु

27:55दशरथ अजर बिहारी

28:00[संगीत]

28:08सीताराम चरित अति

28:14पावन मधुर सरस अरु अति मन भावन

28:29पुनि पुनि कितने हो सुने

28:35सुनाए य की प्यास बुझत ना बुझाए

28:44[संगीत]

28:59उत्तर रामायण प्रस्तुत करता अनेक्स प्रे

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