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Asli Chor Kaun? | Behlol Dana Aur Lalchi Tajir Ka Qissa | Islamic Moral Story In Urdu Hindi Kahani

Ibrat Ke Qissey · 2,516 words · 12 min read

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0:02कदीम जमाने की बात है। बगदाद के एक मशहूर

0:05और जरखेज शहर में सत्तार नाम का एक बेहद

0:08अमीर और लालची ताज़िर रहता था। सत्तार के

0:12पास आलीशान हवेली, [संगीत] बेशुमार बाघात

0:15और कीमती तजारती सामान का जखीरा था। लेकिन

0:18उसका दिल हमेशा ज्यादा से ज्यादा दौलत की

0:21हवस में जलता रहता था। वह बाजार के गरीब

0:25और मजबूर लोगों को महंगे दामों सामान

0:28बेचता, नापतौल में चालाकी से कमी करता और

0:31लोगों के हक पर डाका डालता था। उसकी इस

0:34बदनियती और कंजूसी की वजह से पूरा शहर

0:37उससे नालाम था। लेकिन उसके इख्तियार और

0:40दौलत के घमंड के आगे कोई बोलने की जुर्रत

0:43नहीं करता था। सत्तार ने अपनी हवेली के एक

0:46खौफिया तहखाने में सोने के सिक्कों और

0:50कीमती हीरों से भरा एक भारी संदूक छुपा कर

0:54रखा था। जिस पर वह दिन रात पहरा देता था

0:56और हर शाम उन सिक्कों को गिनते हुए ही

1:00उसकी रात गुजरती थी। एक सुबह हवेली से

1:03सत्तार के चीखने और चिल्लाने की जोरदार

1:06आवाजें आने लगी। उसका खुफिया तहखाना खुला

1:09पड़ा था और सोने के सिक्कों से भरा संदूक

1:12गायब था। ताज़िर सत्तार गुस्से और गम में

1:15पागल हो चुका था। उसने अपने तमाम

1:18मुलाजिमों और हवेली के पहरेदारों को एक

1:21जगह इकट्ठा किया और उन पर चोरी का इल्जाम

1:23लगाने लगा। वह चीख-चीख कर बोल रहा था कि

1:26अगर मेरा संदूक ना मिला तो मैं तुम सबको

1:29सुल्तान के सिपाहियों के हवाले कर दूंगा

1:31और जेल की मिल्लत में डाल दूंगा। बाजार

1:34में एक धमाका सा हो गया और बेकसूर मजदूर

1:37और खादिम खौफ से कांपने लगे। उसी वक्त

1:40बाजार के एक कोने में पुराने दरख्त के साए

1:43तले बेहलोल दाना तस्बीह हाथ में लिए

1:46खामोशी से यह सब तमाशा देख रहे थे। बेहलोल

1:49दाना अपनी अनोखी हिकमत और अकलमंदी के लिए

1:52पूरे शहर में मशहूर थे जो जिंदगी की

1:54हकीकतों को अजीब लेकिन सबक आमोज तरीकों से

1:58लोगों के सामने लाते थे। ताज़िर सत्तार की

2:01चीखो पुकार सुनकर बेहलोल दाना

2:04आहिस्ता-आहिस्ता उसकी तरफ बढ़े। सत्तार ने

2:07जब बहलोल दाना को आते देखा तो गुस्से में

2:09बोला कि तुम यहां क्या करने आए हो? मेरा

2:12सब कुछ लुट गया है। लेकिन बहलोल दाना ने

2:15बेहद सुकून के साथ कहा कि दौलत का खोना

2:18जितना बड़ा दुख है उससे कहीं बड़ा दुख

2:21हकीकत से अंधा हो जाना है। सत्तार ने

2:24गिड़गिड़ाकर कहा कि अगर आप में कोई हिकमत

2:26है तो मेरा चोर ढूंढ निकाले। बेहलोल दाना

2:30ने अपनी लाठी पर टेक लगाई और मुस्कुराकर

2:33कहा कि चोर कहीं दूर नहीं। इसी बाजार और

2:37हवेली के साए में छुपा है और कल सुबह उसका

2:40चेहरा सबके सामने आएगा। अगले दिन की सुबह

2:44होते ही ताज़िर सत्तार की हवेली के बाहर

2:47लोगों का एक भारी मजमा जमा हो गया। बाजारी

2:50ताज़िर, किसान और हवेली के तमाम मुलाजमीन

2:54खौफ और तजसुस के आलम में खड़े थे। सबके

2:58दिल में एक ही सवाल था कि आखिर बहलोल दाना

3:02इतने बड़े चोर को कैसे ढूंढ [संगीत]

3:04निकालेंगे? ताजिर सत्तार अपनी दौलत के गम

3:07में निहाल हवेली के मुख्य दरवाजे पर टहल

3:10रहा था। उसकी आंखें लाल थी और चेहरे पर

3:13बेचैनी साफ नजर आ रही थी। उसने जैसे ही

3:16बहलोल दाना को आते देखा वह फौरन उनकी तरफ

3:19दौड़ा और गुस्से और इ्तराब से भरी आवाज

3:22में बोला कि बहलोल तुमने वादा किया था कि

3:26आज चोर का पता चल जाएगा। आखिर वह चोर कौन

3:29है और मेरी दौलत कहां है? अगर तुमने सिर्फ

3:32मेरा वक्त जाया किया है तो मैं सुल्तान के

3:34पास जाकर तुम्हारी शिकायत करूंगा। बेहलोल

3:37दाना ने बेहद संजीदा और सुकून भरी नजरों

3:40से सत्तार को देखा और आहिस्ता से कहा कि

3:44जितना सब्र तुमने दौलत जमा करने में

3:46दिखाया उतना ही सब्र इंसाफ के लिए भी रखो।

3:49इसके बाद बेहलोल दाना ने सब लोगों को

3:52हवेली के सबसे बड़े कमरे में जमा होने का

3:55हुक्म दिया। जब हवेली के तमाम नौकर,

3:58पहरेदार और सत्तार के नजदीकी लोग कमरे में

4:02दाखिल हो गए तो बेहलोल दाना ने अपने झोले

4:05से एक पुरानी काली और अजीब सी लकड़ी की

4:08लाठी निकाली। वह लाठी देखने में बहुत आम

4:11सी लगती थी। लेकिन बेहलोल दाना ने उसे

4:14इतने एहतराम से उठा रखा था जैसे वह कोई

4:16जाहिरी चीज हो। मजमे में एक सन्नाटा छा

4:19गया और लोग एक दूसरे को हैरत से देखने

4:22लगे। बेहलोल दाना ने तमाम लोगों के सामने

4:25खड़े होकर कहा कि यह कोई आम लाठी नहीं है

4:29बल्कि यह मेरे बुजुर्गों की हिकमत से भरी

4:32हुई एक मखसूस लाठी है। इस लाठी की एक खास

4:35बात यह है कि जब यह किसी सच्चे इंसान के

4:38हाथ में आती है तो उतनी ही रहती है। लेकिन

4:41जैसे ही यह किसी चोर या झूठे [संगीत]

4:43इंसान के हाथ में जाती है तो रात भर में

4:46इसकी लंबाई एक बालिश के बराबर बढ़ जाती

4:49है। यह सुनते ही कमरे में मौजूद सभी लोग

4:52दंग रह गए। सत्तार ने हैरान होकर कहा,

4:55[गला साफ़ करने की आवाज़] कि क्या लकड़ी

4:56भी कभी खुद ब खुद बढ़ सकती है? बहलोल दाना

4:59ने मुस्कुराकर कहा, कि कुदरत के इंसाफ के

5:02आगे हर चीज झुकती है और यह लाठी आज रात सच

5:05और झूठ का फैसला करेगी। इसके बाद बहलोल

5:09दाना ने एक-एक करके तमाम मुलाजिमों और

5:11पहरेदारों को एक बराबर नाप की एक-एक लकड़ी

5:14दी और कहा कि तुम सब लोग यह लकड़ी अपने

5:18पास रखो और कल सुबह मेरे पास लेकर आओ।

5:20जिनके दिल पाक हैं उनकी लकड़ी वैसी की

5:23वैसी रहेगी। लेकिन जिसने सत्तार की दौलत

5:26चुराई है, उसकी लकड़ी रात भर में एक बालिश

5:28बढ़ जाएगी। तमाम नौकर खौफ और घबराहट के

5:32आलम में अपनी-अपनी लकड़ियां लेकर अपने

5:35कमरों की तरफ चले गए। उन सब में एक नौकर

5:38जिसका नाम याकूब था बेहद घबराया हुआ लग

5:41रहा था। रात के अंधेरे में जब पूरी हवेली

5:45सो रही थी। याकूब अपने कमरे में अकेला

5:47बैठा उस लकड़ी को घूर रहा था। उसके दिल

5:50में चोर का डर बैठ गया था कि अगर यह लकड़ी

5:53वाकई बढ़ गई तो कल सुबह सबके सामने मेरी

5:57चोरी पकड़ ली जाएगी। रात का अंधेरा गहरा

6:00होता जा रहा था और पूरी हवेली पर एक अजीब

6:03सा सन्नाटा छाया हुआ था। सभी मुलाजमीन और

6:07पहरेदार अपने-अपने कमरों में सो रहे थे।

6:10लेकिन याकूब की आंखों से नींद गायब थी। वह

6:13वही नौकर था जिस पर किसी को शक नहीं था।

6:16क्योंकि वह बरसों से ताजिर सत्तार के यहां

6:19काम कर रहा था। लेकिन सच्चाई यह थी कि

6:22सत्तार की बेइंतहा दौलत और उसके जुल्म से

6:25तंग आकर याकूब के दिल में लालच ने जगह बना

6:29ली थी। उसी ने मौका देखकर तहखाने से सोने

6:31के सिक्कों से भरा संदूक चुराया था और

6:34हवेली के पीछे एक पुराने कुएं के करीब

6:37जमीन में दफन कर दिया था। याकूब अपने कमरे

6:40के कोने में बैठा बेहलोल दाना की दी हुई

6:43लकड़ी को बार-बार देख रहा था। उसके माथे

6:46पर पसीने के कतरे ढल रहे थे और दिल की

6:48धड़कन तेज हो चुकी थी। उसके जेहन में

6:50बेहलोल दाना की बात गूंज रही थी कि जब यह

6:54लकड़ी किसी चोर के हाथ में जाती है तो रात

6:57भर में इसकी लंबाई एक बालिश बढ़ जाती है।

7:00याकूब ने अपने दिल में सोचा कि बेहलोल

7:03दाना कोई आम आदमी नहीं है। वह एक वली और

7:08दानिशमंद इंसान है। अगर उनकी बात सच निकली

7:12और यह लकड़ी कल सुबह बढ़ गई तो पूरे शहर

7:15के सामने मेरी इज्जत का जनाज़ा निकल जाएगा

7:19और सुल्तान के सिपाही मुझे जिंदा नहीं

7:22छोड़ेंगे| घबराहट और डर के मारे याकूब की

7:25अकल पर पर्दा पड़ गया। उसने अपनी चालाकी

7:28दिखाने का फैसला किया। उसने सोचा कि अगर

7:31यह लकड़ी रात भर में एक बालिश बढ़ने वाली

7:34है तो क्यों ना मैं इसे अभी से ही एक

7:36बालिश के बराबर काट दूं। जब यह रात को एक

7:39बालिश पड़ेगी [संगीत] तो कल सुबह काटने के

7:41बाद यह वापस अपनी असली लंबाई पर आ जाएगी।

7:44इस तरह बेहलोल दाना और ताजिर सत्तार

7:47समझेंगे कि मैं बेकसूर हूं और मेरी लकड़ी

7:50बिल्कुल नहीं बढ़ी। उसने फौरन अपने कपड़ों

7:53से एक तेज छुरे निकाला और बहुत एहतियात के

7:57साथ उस लकड़ी को आगे से एक बालिश के बराबर

8:00काट दिया। उसने कांटे हुए लकड़ी के टुकड़े

8:04को आग में जलाकर राख कर दिया ताकि कोई

8:07सबूत ना बचे। इसके बाद वह अजीब सी खुशी और

8:11सुकून के साथ अपने बिस्तर पर लेट गया।

8:14उसने समझा कि उसने बहलोल दाना की हिकमत और

8:17हिकमत अमली को शिकस्त दे दी है और अब उसे

8:20कोई नहीं पकड़ सकता। वह नहीं जानता था कि

8:23बहलोल दाना ने यह सब सिर्फ चोर के दिल में

8:26खौफ और घबराहट पैदा करने के लिए किया था।

8:29याकूब अपनी ही चालाकी के जाल में फंस चुका

8:32था और सुबह का सूरज उसके जवाल की दास्तान

8:36लाने वाला था। अगली सुबह की पहली किरण के

8:39साथ ही ताज़िर सत्तार की हवेली के आंगन में

8:43एक बार फिर पूरे शहर का मजमा इकट्ठा हो

8:47गया। बाजरी लोग छोटे ताज़िर और हवेली के

8:51तमाम मुलाजमीन बेचैनी से बेहलोल दाना का

8:54इंतजार कर रहे थे। आफताब की रोशनी ढलने के

8:58साथ ही बेहलोल दाना अपनी वही पुरानी लाठी

9:01टेकते हुए आंगन में दाखिल हुए। उनके चेहरे

9:04पर एक अजीब सा सुकून और मुस्कुराहट थी।

9:07जैसे वह पहले से ही जानते हो कि आज क्या

9:10होने वाला है। ताजिर सत्तार फौरन उनके पास

9:13दौड़ा और बोला कि बहलोल आफताब निकल आया

9:16है। अब देर मत करो और सबके सामने उस चोर

9:19का नाम जाहिर करो जिसने मेरी जिंदगी भर की

9:22कमाई चुराई है। बेहलोल दाना ने बेहद धीमे

9:26लहजे में कहा कि सब्र का फल हमेशा मीठा

9:29होता है। सत्तार आज हक और बाततिल का फैसला

9:32सबके सामने होकर रहेगा। इसके बाद बहलोल

9:36दाना ने तमाम मुलाजिमों और पहरेदारों को

9:40एक कतार में खड़े होने का हुक्म दिया। वह

9:42एक-एक करके हर नौकर के पास गए और उनके हाथ

9:46से दी हुई लकड़ियां लेने लगे। बहलोल दाना

9:50हर लकड़ी को अपनी पहली वाली मखसूस लाठी के

9:54साथ मिलाकर नापते और उस नौकर को एक तरफ

9:57खड़ा कर देते। पहले, दूसरे और तीसरे नौकर

10:01की लकड़ियां बिल्कुल बराबर निकले और वह

10:04बेकसूर साबित होकर एक तरफ खड़े हो गए।

10:07उनके चेहरों पर सुकून की लहर दौड़ गई।

10:11आखिर में बहलोल दाना याकूब के सामने आकर

10:14रुक गए। याकूब का चेहरा जर्द पड़ चुका था

10:17और उसकी टांगे खौफ से कांप रही थी। उसने

10:21बुझते हुए दिल और कांपते हाथों से अपनी

10:24लकड़ी बेहलोल दाना को पकड़ा दी। बेहलोल

10:27दाना ने जैसे ही उस लकड़ी को अपनी मकसूस

10:30लाठी से मिलाया, वह लकड़ी बाकी तमाम

10:32लकड़ियों से पूरी एक बालिश छोटी निकली। यह

10:36देखते ही आंगन में मौजूद तमाम लोगों में

10:38एक हैरत की लहर दौड़ गई। ताज़िर सत्तार ने

10:41गुस्से से चीखते हुए कहा, कि बहलोल, यह

10:44क्या मजाक है? तुमने तो कहा था कि चोर की

10:46लकड़ी एक बालिश बढ़ जाएगी, लेकिन इसकी

10:49लकड़ी तो एक बालिश छोटी है। बहलोल दाना ने

10:52एक गहरी सांस ली और मुस्कुरा कर कहा कि

10:55सत्तार यह लकड़ी कभी बढ़ने वाली नहीं थी

10:58क्योंकि कोई भी आम लकड़ी खुद-ब खुद बड़ी

11:01नहीं हो सकती। यह सिर्फ एक आम लकड़ी थी जो

11:03मैंने सबको बराबर नाप कर दी थी। लेकिन

11:06जिसके दिल में चोरी का पाप और खौफ था,

11:09उसने समझा कि लकड़ी वाकई बढ़ जाएगी और

11:12अपनी चालाकी दिखाते [संगीत] हुए इसको पहले

11:14ही एक बालिश काट दिया। याकूब ने जब यह

11:18देखा कि उसकी अपनी ही चालाकी ने उसका

11:21राजफाश कर दिया है। तो वह बेहलोल दाना के

11:24कदमों में गिर पड़ा और झाड़ो कतार रोने

11:27लगा। उसने सबके सामने अपना जुर्म कबूल कर

11:31लिया कि उसने ही तहखाने से सोने का संदूक

11:34चुराया था और कुएं के पास दफन किया था।

11:39याकूब के एतराफे जुर्म के बाद पूरे आंगन

11:42में सन्नाटा छा गया। ताजिर सत्तार गुस्से

11:45से लाल पीला हो चुका था। उसने फौरन अपने

11:48पहरेदारों को हुक्म दिया कि याकूब को

11:50बांधकर कुएं के पास ले जाई और वहां से

11:53सोने के सिक्कों से भरा संदूक निकालें।

11:56सिपाही याकूब को घसीटते हुए हवेली के

11:59पिछले हिस्से में ले गए और जमीन खुदवाकर

12:03वहीं संदूक बहाल कर लिया। सत्तार ने जब

12:06अपना सोने से भरा संदूक देखा तो उसकी

12:09आंखों में चमक आ गई। उसने फौरन संदूक को

12:12खोलकर एक-एक सिक्का गिना और जब तमाम दौलत

12:15पूरी निकली, तो उसके चेहरे पर एक मगरूर

12:18मुस्कुराहट फैल गई। उसने बहलोल दाना की

12:22तरफ देखा और एहसानमंदी के बजाय घमंड से

12:25बोला कि बहलोल तुमने मेरा माल ढूंढकर

12:28अच्छा किया। अब मैं इस चोर को सुल्तान के

12:30हवाले कर दूंगा ताकि इसे फांसी की सजा दी

12:34जाए। यह सुनकर बहलोल दाना ने एक गहरी सांस

12:37ली और आहिस्ता से सत्तार के करीब आए।

12:39उन्होंने सत्तार के कंधे पर हाथ रखा और

12:42कहा कि सत्तार माल तो तुम्हें वापस मिल

12:44गया। लेकिन क्या तुमने इस पूरे ककीस्से से

12:46कोई सबक सीखा? सत्तार ने हैरान होकर देखा

12:49और बोला कि सबका क्या सीखना चोर पकड़ा गया

12:52और मेरी दौलत मुझे मिल गई। बहलोल दाना ने

12:56आंगन में मौजूद सभी लोगों की तरफ इशारा

12:59करते हुए कहा कि असली चोर सिर्फ याकूब

13:02नहीं है बल्कि असली चोर तुम भी हो। ताजिर

13:05सत्तार गुस्से से तैश में आ गया और बोला

13:07कि तुम्हारी यह जुर्रत कि तुम मुझे इस शहर

13:10के सबसे अमीर ताजिर को चोर कह रहे हो।

13:14बेहलोल दाना ने बेहद सुकून और दानिशमंदी

13:17से जवाब दिया कि याकूब ने तो सिर्फ

13:19तुम्हारा सोना चुराया था जो तुम्हें वापस

13:22मिल गया। लेकिन तुमने बरसों से इस शहर के

13:24गरीबों, मजदूरों और मजबूरों का हक चुराया

13:28है। तुम नापतल में कमी करते हो। महंगे

13:30दामो सामान बेचते हो और लोगों की मजबूरी

13:33का फायदा उठाते हो। तुमने लोगों की

13:35खोशियां और उनका सुकून चुराया है। याकूब

13:38का जुर्म एक बार का था। लेकिन तुम्हारा

13:40जुर्म रोजाना का है। इस आंगन में खड़े

13:42तमाम लोग तुम्हारे जुल्म के गवाह हैं।

13:45क्या तुमने कभी सोचा कि तुम्हारी बेइंतहा

13:48दौलत ने तुम्हें कितना तन्हा और बेरहम बना

13:51दिया है। बेहलोल दाना की यह बातें सुनकर

13:54ताज़िर सत्तार के होश ठिकाने आ गए। उसके

13:57पास बेहलोल दाना की बात का कोई जवाब नहीं

14:00था। बाजार के तमाम लोग खामोशी से यह सब

14:03सुन रहे थे और उनके चेहरों पर बेहलोल दाना

14:06की हिकमत के लिए बेहद इज्जत थी। सत्तार ने

14:10शर्मिंदगीगी से अपना सर झुका लिया। उसके

14:13दिल में पहली बार अपनी बदनियती और लालच का

14:16एहसास हुआ। उसने फ़ौरन बेहलोल दाना के

14:19सामने हाथ जोड़े और अपने गुनाहों की माफी

14:22मांगने लगा। उसने ऐलान किया कि वह अपनी

14:25दौलत का एक बड़ा हिस्सा शहर के गरीबों और

14:28जरूरतमंदों में तकसीम करेगा और आइंदा कभी

14:31किसी के साथ बेइंसाफी नहीं करेगा। याकूब

14:34को भी उसकी गलती की सजा के तौर पर हवेली

14:38से निकाल दिया गया। लेकिन उसकी जान बख्श

14:40दी गई। इस तरह बहलोल दाना की अनोखी हिकमत

14:43ने ना सिर्फ एक चोर को पकड़वाया बल्कि एक

14:46जालिम ताजिर को भी सीधे रास्ते पर ले आया।

14:49इस कहानी से हमें यह सबक मिलता है कि

14:52इंसान चाहे जितनी भी दौलत जमा कर ले अगर

14:55उसके दिल में लालच और घमंड हो तो वह कभी

14:59सुकून हासिल नहीं कर सकता। लालच इंसान से

15:02उसकी अकल और इज्जत दोनों छीन लेता है।

15:06प्यारे दोस्तों, यह कहानी आप लोगों को

15:08कैसी लगी? कमेंट में अपनी राय जरूर दें।

15:11वीडियो को लाइक करें और चैनल को

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15:17है। अल्लाह हाफिज।

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