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जब अढ़ैया की बनाई रसोई पाने सभी आ गए, फिर हुआ चमत्कार, 😱 | Moral Stories | 3D Animation #09

Dharmik Film · 2,291 words · 11 min read

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0:01आज सुबह से कुछ भी खाने के लिए नहीं मिला

0:05और मेरे पेट में चूहे दौड़ रहे हैं। जय

0:09श्री कृष्णा हरे राम हरे राम।

0:19अरे बालक

0:21किसके पुत्र हो और यहां क्या कर रहे हो?

0:25बाबा जी मेरे माता-पिता नहीं है। मैं गंगा

0:28के किनारे ही रहता हूं।

0:31अच्छा तो बालक मेरे साथ मेरे आश्रम चल

0:36वहीं रहना तुम्हें अच्छा लगेगा।

0:42क्या हुआ बालक? क्या सोच रहे हो? और

0:46तुम्हारा नाम क्या है?

0:48बाबा जी मेरा नाम अढ़ैया है।

0:52अढ़ैया यह कैसा नाम है? हमारे देश में तो

0:55नाम नहीं पाया जाता है।

0:58बाबा जी इसमें कोई देश से मतलब नहीं है।

1:01इस उम्र में मैं 2ाई किलो की बाटी अकेला

1:04खाता हूं [संगीत] और उसके साथ शहांजी,

1:06दाल, चावल

1:08और मिठाई ये सब अलग से खाता हूं। इसी कारण

1:14से लोग मुझे अैया कहते हैं।

1:16अरे बालक हमारे आश्रम में अनाज के कोठार

1:20भरे हुए हैं। तुम भोजन की चिंता मत करो।

1:24तुम्हें जितना खाना है उतना खाना [संगीत]

1:27कोई कुछ नहीं कहेगा। और हां मुझे तुम्हारा

1:31अढ़ैया नाम भी पसंद आया है। तुम चलो आश्रम।

1:36ठीक है बाबा जी। बाबा जी आप जो काम कहोगे

1:40मैं वो काम करूंगा लेकिन खाना खिलाने में

1:43कटौती मत करना। 2ाई किलो की बाटी तो चाहिए

1:46ही मुझे। फिर खुराक बढ़ जाए तो कुछ कह

1:50नहीं सकता।

1:51अरे भाई तुझे जितना खाना है उतना खाना।

1:55कोई हिसाब नहीं रहेगा। तुम चिंता मत करो।

2:06अढ़ैया यह देखो यह हमारा आश्रम है। यहां

2:10यहां तुम्हें [संगीत] जितना खाना है उतना

2:12खाना। लेकिन हमारे आश्रम का एक नियम है कि

2:17एकादशी के दिन उपवास होता है।

2:20मतलब उपवास में क्या करना होता है?

2:23उस दिन आश्रम में चूल्हा नहीं जलता है। उस

2:27दिन भूखा ही रहना होगा।

2:29अच्छा वो महीने में कितनी बार आती है?

2:33महीने में दो बार। एक पूर्णिमा की एकादशी

2:37और दूसरी अमावस्या की।

2:39मतलब दो दिन भूखा रहना पड़ेगा।

2:42हां

2:43नमो नारायण मैं जा रहा हूं।

2:47अैया क्यों जा रहे हो?

2:50नहीं बाबा जी एकादशी का उपवास करना पड़े।

2:54यह मुझे पसंद नहीं है।

2:57अैया एकादशी 15 दिनों में एक बार आती है।

3:01उस दिन भर पेट फल खा लेना दूध ज्यादा पी

3:05लेना।

3:06नहीं बाबा जी बाटी तो चाहिए ही वो भी 2ाई

3:09किलो की।

3:11पर आश्रम का नियम है।

3:13वो जो भी नियम हो या तो नियम सुधारो या तो

3:17मुझे जाने दो।

3:18अच्छा ठीक है। तुम खाना लेकिन आश्रम में

3:22चूल्हा नहीं जलेगा।

3:24बाबा जी मुझे बचपन से ही गरीबी ने कई

3:28कलाएं सिखा दी हैं। मुझे रसोई बनाना आता

3:31है।

3:32फिर ठीक है आटा सब्जी [संगीत]

3:34लेकर आश्रम से दूर जंगल में जाके वहां

3:37रसोई बनाकर पा लेना। तुम एकादशी करता तो

3:40मुझे आनंद होता लेकिन तुम समझ नहीं रहे हो

3:43पर ठीक है। आश्रम में रसोई मत बनाना।

3:47ठीक है बाबा जी एकादशी के दिन आप रसोई का

3:51सामान दे देना। मैं जंगल में भोजन बनाकर

3:54ग्रहण कर लूंगा।

4:03अरे अढ़ैया कहां हो?

4:06हां बाबा जी क्या हुआ?

4:08अढ़ैया कल एकादशी है।

4:11ठीक है बाबा जी। [संगीत] आप मुझे रसोई का

4:13सामान देना। मैं बाहर जाकर खाऊंगा। आप

4:17यहां एकादशी करना। [संगीत]

4:19पर बेटा अभी भी कह रहा हूं

4:23आश्रम के नियम का उल्लंघन मत करो [संगीत]

4:27बाबा जी तो फिर आप मुझे जाने दो

4:46[संगीत]

4:46ओ अैया हमारे हमारे आश्रम में ऐसा नियम है

4:50कि ठाकुर जी को भोग लगाकर ही पाया जाता

4:53है। तू एकादशी के दिन यह सब कर रहा है।

4:56उसमें मैं मना नहीं करता। पर ठाकुर जी को

4:59भोग लगाकर ही पाना।

5:01ठाकुर जी मतलब कौन?

5:03अरे यार ठाकुर जी मतलब? भगवान, ईश्वर।

5:08मतलब भोग लगाने पे वो रूबरू आएंगे। तो फिर

5:12ज्यादा सामान दो। अरे तू मूर्ख है। तुझे

5:16कैसे समझाऊं? भगवान नहीं आते। सिर्फ तुझे

5:18भावना प्रकट करनी है।

5:20भावना प्रकट होते हैं। वो कैसे होता है

5:23बाबा जी? [संगीत]

5:24जब रसोई तैयार हो जाए तब थाली के सामने

5:27बैठकर दोनों हाथ जोड़कर ठाकुर जी को खाना

5:29खाने बुलाना। मेहरबानी करके इतना नियम का

5:33पालन करना।

5:34ठीक है बाबा जी। जो आप कहोगे मैं वो

5:37करूंगा।

5:38यह लड़का तो ठीक है लेकिन है बहुत जिद्दी।

5:41अगर एकादशी का व्रत करता तो कितना अच्छा

5:44होता। लेकिन चलो अब जाने दो।

5:55[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]

6:03[संगीत]

6:07चलो अब गुरुदेव के ठाकुर को भोग लगा देता

6:10हूं।

6:12गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।

6:24स्वामी कहां जा रहे हो? इतनी जल्दी में

6:29देवी मेरा एक भक्त मुझे बुला रहा है। मैं

6:33अभी आया।

6:36[संगीत]

6:39गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।

6:53ओ भैया आप कौन हैं? तुम्हारे गुरुदेव का

6:57ठाकुर हूं।

6:59गुरुदेव के ठाकुर बाबा जी तो कहते थे

7:02ठाकुर जी नहीं आते और आप आ गए। यानी

7:07गुरुदेव ने मुझे ठगा और मुझसे झूठ बोला और

7:10आपने भी ठाकुर कुछ तो मर्यादा रखो। तुरंत

7:13दूसरे की बनाई रसोई में टपक पड़े।

7:18ठाकुर कुछ तो छोड़ दो। मेरे लिए मैं भी

7:21भूखा हूं।

7:33[संगीत]

7:40अैया

7:42[संगीत]

7:43तुमने एकादशी का व्रत नहीं किया? मुझे

7:47अच्छा नहीं लगा। इतना गुस्से में क्यों

7:50हो? खाना खाया पेट भर के

7:53खाने की बात मत करिए बाबा जी आपका वो

7:56ठाकुर सारी बाटी खा गया आपका ठाकुर मान

7:59मर्यादा या विवेक समझते हैं या समझ ही

8:02नहीं आता

8:04भगवान थोड़ी तेरे पास आएंगे एक तो खाना भी

8:08खा लिया और झूठ भी बोल रहा है

8:11मैं झूठ नहीं बोलता बाबा जी

8:14कल एकादशी है अढ़ैया

8:17बाबा जी मैंने कैलेंडर देख लिया है कल मैं

8:202ाई किलो किलो आटा नहीं लूंगा किलो लूंगा।

8:22किलो लूंगा क्योंकि आपका ठाकुर आता है।

8:252ाई किलो आपके ठाकुर [संगीत] की और 2ाई

8:27किलो मेरे लिए।

8:29जितना लेना हो उतना [संगीत] ले जाना।

8:36लगता है खुराक बढ़ गई होगी या कोई मित्र

8:39होगा और झूठ बोलते हुए यह ठाकुर जी का नाम

8:43ले रहा है।

9:11गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।

9:17[संगीत]

9:19स्वामी कहां जा रहे हो इतनी जल्दी में?

9:23देवी मेरा एक भक्त मुझे बुला रहा है। मैं

9:28अभी आया।

9:29स्वामी तो मैं भी चलूं आपके साथ।

9:32नहीं देवी वहां दो लोगों की व्यवस्था नहीं

9:36है।

9:36कोई बात नहीं [संगीत] स्वामी। जितना भी

9:38होगा हम आधा-आधा बांट लेंगे।

9:41ठीक है देवी। चलो। लेकिन ध्यान रहे कि वह

9:45लड़का कुछ भी बोले उसकी बात पर ध्यान मत

9:48देना और ना ही उसे कोई जवाब देना।

9:51ठीक है स्वामी [संगीत]

9:53आप जैसा कहो।

9:57[संगीत]

10:01गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।

10:11ठाकुर ये बहन कौन है तुम्हारे साथ?

10:16स्वामी यह मुझे बहन कह रहा है। इसकी बात

10:20पर ध्यान मत दो।

10:23भोजन पर ध्यान दो। ठाकुर यह कौन है? बोलो।

10:27यह मेरी पत्नी है। ठाकुर, इसका मतलब तुम

10:31शादीशुदा हो। अपने घर बनाकर नहीं पाते। इस

10:34तरह दूसरों की रसोई में टपक पड़े। खाओ खाओ

10:37और जल्दी-जल्दी खाओ। कोई भूखा है इससे

10:41तुम्हें क्या मतलब?

11:01[संगीत]

11:03अढ़ैया

11:05आज का दिन कैसा रहा?

11:07मुझसे कुछ बुलवाओ नहीं और इसका परिणाम

11:10अच्छा नहीं होगा बाबा जी।

11:13अरे भाई क्या [संगीत] हुआ? इतने गुस्से

11:15में क्यों हो?

11:17आपको मुझे बताना तो चाहिए। ठाकुर तो आया

11:21लेकिन वो शादीशुदा है।

11:23शादीशुदा है मतलब?

11:25दोनों पति-पत्नी आए थे भुक्कड़ कहीं के और

11:28आकर चुपचाप सारा भोजन खत्म कर दिया। मैं

11:32कितना भी गुस्सा करता हूं और दोनों

11:34मुस्कुराते हुए भोजन करके चले गए। वो बहन

11:38अपने घर में रसोई नहीं बनाती होगी।

11:41क्या बकवास कर रहा है? तुझे क्या हो गया

11:44है? ठाकुर तेरे पास थोड़ी आएंगे।

12:06बाबा जी आज एकादशी है और मैं इस बार 5

12:09किलो आटा नहीं 7 1/2 किलो आटा लूंगा। दो

12:12वो लोग और एक मैं

12:14तुझे जितना राशन ले जाना है ले जा। मैं कब

12:17मना करता हूं? लेकिन यह झूठा नाटक मत कर।

12:20मैं कोई नाटक नहीं करता हूं। मैं झूठ

12:23बोलता ही नहीं। आप ही खेल खेलते हो। दो

12:26एकादशी से भूखा हूं।

12:57गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।

13:02[संगीत]

13:08अरे कान्हा तुम दोनों कहां जा रहे हो?

13:13[संगीत] दाऊ दादा हम लोग जा रहे हैं एक

13:16भक्त के यहां भोजन पर तो मैं भी चलता हूं।

13:20दाऊ [संगीत] दादा वहां ज्यादा व्यवस्था

13:22नहीं है। कोई बात नहीं कान्हा। हम सभी

13:25थोड़ा-थोड़ा पा लेंगे। ठीक है दाऊ दादा।

13:28लेकिन आप बहुत गर्म स्वभाव के हैं। वो

13:31लड़का कुछ भी बोले उसकी बात पर ध्यान नहीं

13:33देना। चुपचाप भोजन करना है। वापस आना है।

13:37ठीक है कान्हा। [संगीत]

13:52गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।

14:00[संगीत]

14:05ओ भैया ये दूसरा भैया कौन है?

14:09ये मेरे बड़े भाई हैं।

14:11ठाकुर आप मुझे बताएंगे कि आपके घर में

14:14कितने लोग हैं? मुझे राशन की व्यवस्था

14:17करनी होती है।

14:18कान्हा यह इतना [संगीत] गुस्से में क्यों

14:20कह रहा है?

14:26दाऊ दादा चुप रहो। भोजन में [संगीत] ध्यान

14:28दो। हां हां खाओ और जल्दी खाओ। सारा भोजन

14:34खत्म कर दो।

14:57आज तो ठीक से खाना खाया ना।

15:00मुझे गुस्सा मत दिलाओ बाबा जी।

15:07पता नहीं इस लड़के की क्या समस्या है।

15:15[संगीत]

15:17बाबा जी आज मैं 10 किलो आटा लूंगा।

15:2010 नहीं 20 किलो ले जा। लेकिन तू झूठ बोल

15:23के ठाकुर ठाकुर को अपवाद मत कह।

15:28बाबा जी मैं झूठ नहीं बोलता।

15:32[संगीत]

16:02गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।

16:12[संगीत]

16:17प्रभु मैं भी आपके साथ भक्त के यहां भोजन

16:20करने चलूंगा।

16:22ठीक है हनुमान चलो लेकिन ध्यान रहे उस

16:25लड़के की बात पर ध्यान मत देना। [संगीत]

16:27चुपचाप भोजन करना।

16:29ठीक है प्रभु।

16:34[संगीत]

16:45गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।

16:53[संगीत]

16:58ठाकुर ये दूसरे भैया कौन है?

17:02यह मेरा सेवक है और सदा मेरे हृदय में

17:05रहता है।

17:08खा लो खा लो भुक्कड़ कहीं के।

17:16[संगीत]

17:34[संगीत]

17:41आज मैं 12 1/2 किलो आटा ले जाऊंगा। कुछ

17:44[नाक से की जाने वाली आवाज़] भी हो जाए

17:45मैं उन्हें छोडूंगा नहीं।

17:48[संगीत]

17:57[संगीत]

18:04गुरुदेव के ठाकुर आप आकर खाना खा लो।

18:11[संगीत]

18:21[संगीत]

18:23अढ़ैया आज तो तुमने कुछ बनाया ही नहीं है।

18:28अब से ऐसा ही होगा। अपने बड़े भैया से बोलो

18:31लकड़ी काट कर लाए। पवन पुत्र से बोलो आग

18:34जलाए और अपनी पत्नी से बोलो कि रसोई

18:37बनाएं। आप इनकी मदद करो जब भोजन तैयार हो

18:40जाए तो मेरी थाली अलग करके फिर अपना पाना।

18:43मैं उस पेड़ के नीचे बैठा हूं। अढ़ैया कोई

18:48बात नहीं। तुम्हारी बनाई रसोई हम पिछली

18:52चार एकादशी से पा रहे हैं।

18:55लेकिन आज हम तुझे बनाकर खिलाएंगे। हनुमान

18:58दाऊ दादा के साथ तुम लकड़ी लेकर आओ।

19:03जो आज्ञा प्रभु

19:12[संगीत]

19:46[संगीत]

19:59अढ़ैया

20:01आ जाओ। भोजन तैयार हो गया है। पहले मेरी

20:06थाली अलग कर दो। अढ़ैया तुझे [संगीत] जितना

20:09खाना हो उतना खाना।

20:12लेकिन पहले पहले हम ठाकुर जी को भोग लगा

20:15देते हैं। अब कौन से ठाकुर को भोग लगाना

20:19कहा बाकी है?

20:21आप ही तो ठाकुर हो जो हर एकादशी के दिन

20:24आते थे। अढ़ैया जैसे तेरे गुरुदेव का मैं

20:29ठाकुर हूं, वैसे ही मेरा भी कोई ठाकुर है।

20:32अच्छा, तो क्या वो आएगा?

20:36कोई नहीं आएगा।

20:38पर हमारा भी तो कोई नियम तो होगा।

20:42हां तो जल्दी करो। जोरों की भूख लगी है।

20:47हे अखिल ब्रह्मांड के ठाकुर आप पधारो

20:52पधारो।

21:09स्वामी बिना मौसम के बारिश हमें क्या

21:12संकेत दे रही हैं?

21:13देवी स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने भंडारा

21:17किया है और हमें बुलावा आया है।

21:21कृष्ण जी ने भंडारा किया है। यह तो अत्यंत

21:24सौभाग्य की बात है। हमें सभी को चलना

21:27चाहिए।

21:29हां देवी नंदी हमारे सभी गणों को बुलावा

21:32भेजो। सभी को श्री कृष्ण जी के भंडारे में

21:35जाने के लिए एकत्रित करो। जो नहीं आएगा

21:39मैं उसे अपना नहीं मानूंगा।

21:44जो आज्ञा प्रभु

21:58नंदी महाराज आप अचानक यहां बताइए क्या बात

22:02है?

22:03प्रभु का आदेश है हम सभी को श्री कृष्ण जी

22:06के भंडारे में इसी क्षण तुरंत चलना है।

22:10भंडारे में चलना है। श्री कृष्ण जी के और

22:14हमें हमारे प्रभु ने कहा है अरे चलो जल्दी

22:18चलो।

22:20[संगीत]

22:30नाम गोरे

22:33ओजे गुवर [संगीत] झा

22:38हे आखिल ब्राह्मण [संगीत] के स्वामी मुझ

22:41भक्त को अपने चरणों में स्थान दो

22:47[संगीत]

22:51अब ये सब कौन है? लगता है हो गई एकादशी।

22:55अब कुछ नहीं बचेगा। आइए प्रभु आसन ग्रहण

23:00कीजिए।

23:11[संगीत]

23:17आओ अढ़ैया तुम भी बैठो। मेरा आज एकादशी का

23:22उपवास है।

23:24अरे बैठ तो सही।

23:38[गहरी सांस लेने की आवाज़]

23:38ठाकुर आपने अपने-अपने लोगों की थाली भर दी

23:41और मुझे सुपारी के दाने एक टुकड़ा दिया।

23:44अैया तू चख तो सही। तेरी बनाई रसोई तो हम

23:48रोज खाते हैं। इस बार हमारी रसोई चख।

23:56[नाक से की जाने वाली आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]

24:00ये क्या हो रहा है? बचाओ मुझे बाबा जी

24:03बचाओ। अरे अरे

24:14[संगीत]

24:19उठो अढ़ैया उठो।

24:22[संगीत]

24:27[संगीत]

24:28हे असंख्य जीवों के मालिक मुझे माफ कर दो।

24:32मैंने अनजाने में आपको बहुत भला बुरा कहा

24:35है। नहीं अढ़ैया तुम एक सरल और निश्चल भाव

24:40से मुझे बुलाते थे। [संगीत] तभी मैं

24:42तुम्हारे पास आता था। और तुम्हारे सभी

24:45बंधनों को काटना मेरी जिम्मे मेरी

24:48जिम्मेदारी थी। जाओ अब नई जिंदगी की

24:52शुरुआत करो।

24:58अभी आया तब तक आप कहीं मत जाना ठाकुर और

25:03ठाकुर के ठाकुर आप भी आपको राम दुहाई है

25:24बाबा जी मंदिर में कितने सालों से

25:27विराजमान हैं?

25:29100 सालों से।

25:32कभी ठाकुर ने रूबरू आकर भोजन पाया है? तो

25:36आओ ठाकुर भी खा रहा है और ठाकुर का ठाकुर

25:39भी खा रहा है।

25:41मुझे तंग करना कब छोड़ेगा? पांचप एकादशी

25:45से तू व्रत खंडित कर रहा है।

25:48बाबा जी मैं झूठ नहीं बोलता।

25:52मौका ना चुके।

25:55चल कहां ले जा रहा है?

25:58आओ बाबा जी जल्दी आओ।

26:14महान है। अढ़ैया तू महान है। वास्तव में

26:18मुझे मेरे ठाकुर के पैर पकड़ना चाहिए।

26:21[संगीत]

26:25लेकिन फिर भी मैं तेरे पैर पड़ता हूं

26:27क्योंकि तेरी इस क्रांति की वजह से मैंने

26:30अपने ठाकुर को पाया। तूने मुझे मेरे हरि

26:33से मिलाया। तू महान है।

26:37[संगीत]

26:46[संगीत]

26:55तो [संगीत] देखा दोस्तों जब भक्त इतना सरल

26:58हो होता है कि उसे पता ही नहीं कि मेरी

27:01बनाई रसोई कौन खाने आ रहा है। त्रिलोक के

27:05स्वामी स्वयं महादेव।

27:09साथ ही हनुमान जी सच ही कहा जाता है भक्त

27:13के वश में है भगवान। अब आप लोग कमेंट करके

27:16बताओ कि यह अद्भुत लीला कैसी लगी? एक

27:18प्यारे से कमेंट के साथ। मिलते हैं अगली

27:21कहानी में। जय श्री राम सभी

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