Full transcript
0:01आज सुबह से कुछ भी खाने के लिए नहीं मिला
0:05और मेरे पेट में चूहे दौड़ रहे हैं। जय
0:09श्री कृष्णा हरे राम हरे राम।
0:19अरे बालक
0:21किसके पुत्र हो और यहां क्या कर रहे हो?
0:25बाबा जी मेरे माता-पिता नहीं है। मैं गंगा
0:28के किनारे ही रहता हूं।
0:31अच्छा तो बालक मेरे साथ मेरे आश्रम चल
0:36वहीं रहना तुम्हें अच्छा लगेगा।
0:42क्या हुआ बालक? क्या सोच रहे हो? और
0:46तुम्हारा नाम क्या है?
0:48बाबा जी मेरा नाम अढ़ैया है।
0:52अढ़ैया यह कैसा नाम है? हमारे देश में तो
0:55नाम नहीं पाया जाता है।
0:58बाबा जी इसमें कोई देश से मतलब नहीं है।
1:01इस उम्र में मैं 2ाई किलो की बाटी अकेला
1:04खाता हूं [संगीत] और उसके साथ शहांजी,
1:06दाल, चावल
1:08और मिठाई ये सब अलग से खाता हूं। इसी कारण
1:14से लोग मुझे अैया कहते हैं।
1:16अरे बालक हमारे आश्रम में अनाज के कोठार
1:20भरे हुए हैं। तुम भोजन की चिंता मत करो।
1:24तुम्हें जितना खाना है उतना खाना [संगीत]
1:27कोई कुछ नहीं कहेगा। और हां मुझे तुम्हारा
1:31अढ़ैया नाम भी पसंद आया है। तुम चलो आश्रम।
1:36ठीक है बाबा जी। बाबा जी आप जो काम कहोगे
1:40मैं वो काम करूंगा लेकिन खाना खिलाने में
1:43कटौती मत करना। 2ाई किलो की बाटी तो चाहिए
1:46ही मुझे। फिर खुराक बढ़ जाए तो कुछ कह
1:50नहीं सकता।
1:51अरे भाई तुझे जितना खाना है उतना खाना।
1:55कोई हिसाब नहीं रहेगा। तुम चिंता मत करो।
2:06अढ़ैया यह देखो यह हमारा आश्रम है। यहां
2:10यहां तुम्हें [संगीत] जितना खाना है उतना
2:12खाना। लेकिन हमारे आश्रम का एक नियम है कि
2:17एकादशी के दिन उपवास होता है।
2:20मतलब उपवास में क्या करना होता है?
2:23उस दिन आश्रम में चूल्हा नहीं जलता है। उस
2:27दिन भूखा ही रहना होगा।
2:29अच्छा वो महीने में कितनी बार आती है?
2:33महीने में दो बार। एक पूर्णिमा की एकादशी
2:37और दूसरी अमावस्या की।
2:39मतलब दो दिन भूखा रहना पड़ेगा।
2:42हां
2:43नमो नारायण मैं जा रहा हूं।
2:47अैया क्यों जा रहे हो?
2:50नहीं बाबा जी एकादशी का उपवास करना पड़े।
2:54यह मुझे पसंद नहीं है।
2:57अैया एकादशी 15 दिनों में एक बार आती है।
3:01उस दिन भर पेट फल खा लेना दूध ज्यादा पी
3:05लेना।
3:06नहीं बाबा जी बाटी तो चाहिए ही वो भी 2ाई
3:09किलो की।
3:11पर आश्रम का नियम है।
3:13वो जो भी नियम हो या तो नियम सुधारो या तो
3:17मुझे जाने दो।
3:18अच्छा ठीक है। तुम खाना लेकिन आश्रम में
3:22चूल्हा नहीं जलेगा।
3:24बाबा जी मुझे बचपन से ही गरीबी ने कई
3:28कलाएं सिखा दी हैं। मुझे रसोई बनाना आता
3:31है।
3:32फिर ठीक है आटा सब्जी [संगीत]
3:34लेकर आश्रम से दूर जंगल में जाके वहां
3:37रसोई बनाकर पा लेना। तुम एकादशी करता तो
3:40मुझे आनंद होता लेकिन तुम समझ नहीं रहे हो
3:43पर ठीक है। आश्रम में रसोई मत बनाना।
3:47ठीक है बाबा जी एकादशी के दिन आप रसोई का
3:51सामान दे देना। मैं जंगल में भोजन बनाकर
3:54ग्रहण कर लूंगा।
4:03अरे अढ़ैया कहां हो?
4:06हां बाबा जी क्या हुआ?
4:08अढ़ैया कल एकादशी है।
4:11ठीक है बाबा जी। [संगीत] आप मुझे रसोई का
4:13सामान देना। मैं बाहर जाकर खाऊंगा। आप
4:17यहां एकादशी करना। [संगीत]
4:19पर बेटा अभी भी कह रहा हूं
4:23आश्रम के नियम का उल्लंघन मत करो [संगीत]
4:27बाबा जी तो फिर आप मुझे जाने दो
4:46[संगीत]
4:46ओ अैया हमारे हमारे आश्रम में ऐसा नियम है
4:50कि ठाकुर जी को भोग लगाकर ही पाया जाता
4:53है। तू एकादशी के दिन यह सब कर रहा है।
4:56उसमें मैं मना नहीं करता। पर ठाकुर जी को
4:59भोग लगाकर ही पाना।
5:01ठाकुर जी मतलब कौन?
5:03अरे यार ठाकुर जी मतलब? भगवान, ईश्वर।
5:08मतलब भोग लगाने पे वो रूबरू आएंगे। तो फिर
5:12ज्यादा सामान दो। अरे तू मूर्ख है। तुझे
5:16कैसे समझाऊं? भगवान नहीं आते। सिर्फ तुझे
5:18भावना प्रकट करनी है।
5:20भावना प्रकट होते हैं। वो कैसे होता है
5:23बाबा जी? [संगीत]
5:24जब रसोई तैयार हो जाए तब थाली के सामने
5:27बैठकर दोनों हाथ जोड़कर ठाकुर जी को खाना
5:29खाने बुलाना। मेहरबानी करके इतना नियम का
5:33पालन करना।
5:34ठीक है बाबा जी। जो आप कहोगे मैं वो
5:37करूंगा।
5:38यह लड़का तो ठीक है लेकिन है बहुत जिद्दी।
5:41अगर एकादशी का व्रत करता तो कितना अच्छा
5:44होता। लेकिन चलो अब जाने दो।
5:55[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
6:03[संगीत]
6:07चलो अब गुरुदेव के ठाकुर को भोग लगा देता
6:10हूं।
6:12गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।
6:24स्वामी कहां जा रहे हो? इतनी जल्दी में
6:29देवी मेरा एक भक्त मुझे बुला रहा है। मैं
6:33अभी आया।
6:36[संगीत]
6:39गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।
6:53ओ भैया आप कौन हैं? तुम्हारे गुरुदेव का
6:57ठाकुर हूं।
6:59गुरुदेव के ठाकुर बाबा जी तो कहते थे
7:02ठाकुर जी नहीं आते और आप आ गए। यानी
7:07गुरुदेव ने मुझे ठगा और मुझसे झूठ बोला और
7:10आपने भी ठाकुर कुछ तो मर्यादा रखो। तुरंत
7:13दूसरे की बनाई रसोई में टपक पड़े।
7:18ठाकुर कुछ तो छोड़ दो। मेरे लिए मैं भी
7:21भूखा हूं।
7:33[संगीत]
7:40अैया
7:42[संगीत]
7:43तुमने एकादशी का व्रत नहीं किया? मुझे
7:47अच्छा नहीं लगा। इतना गुस्से में क्यों
7:50हो? खाना खाया पेट भर के
7:53खाने की बात मत करिए बाबा जी आपका वो
7:56ठाकुर सारी बाटी खा गया आपका ठाकुर मान
7:59मर्यादा या विवेक समझते हैं या समझ ही
8:02नहीं आता
8:04भगवान थोड़ी तेरे पास आएंगे एक तो खाना भी
8:08खा लिया और झूठ भी बोल रहा है
8:11मैं झूठ नहीं बोलता बाबा जी
8:14कल एकादशी है अढ़ैया
8:17बाबा जी मैंने कैलेंडर देख लिया है कल मैं
8:202ाई किलो किलो आटा नहीं लूंगा किलो लूंगा।
8:22किलो लूंगा क्योंकि आपका ठाकुर आता है।
8:252ाई किलो आपके ठाकुर [संगीत] की और 2ाई
8:27किलो मेरे लिए।
8:29जितना लेना हो उतना [संगीत] ले जाना।
8:36लगता है खुराक बढ़ गई होगी या कोई मित्र
8:39होगा और झूठ बोलते हुए यह ठाकुर जी का नाम
8:43ले रहा है।
9:11गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।
9:17[संगीत]
9:19स्वामी कहां जा रहे हो इतनी जल्दी में?
9:23देवी मेरा एक भक्त मुझे बुला रहा है। मैं
9:28अभी आया।
9:29स्वामी तो मैं भी चलूं आपके साथ।
9:32नहीं देवी वहां दो लोगों की व्यवस्था नहीं
9:36है।
9:36कोई बात नहीं [संगीत] स्वामी। जितना भी
9:38होगा हम आधा-आधा बांट लेंगे।
9:41ठीक है देवी। चलो। लेकिन ध्यान रहे कि वह
9:45लड़का कुछ भी बोले उसकी बात पर ध्यान मत
9:48देना और ना ही उसे कोई जवाब देना।
9:51ठीक है स्वामी [संगीत]
9:53आप जैसा कहो।
9:57[संगीत]
10:01गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।
10:11ठाकुर ये बहन कौन है तुम्हारे साथ?
10:16स्वामी यह मुझे बहन कह रहा है। इसकी बात
10:20पर ध्यान मत दो।
10:23भोजन पर ध्यान दो। ठाकुर यह कौन है? बोलो।
10:27यह मेरी पत्नी है। ठाकुर, इसका मतलब तुम
10:31शादीशुदा हो। अपने घर बनाकर नहीं पाते। इस
10:34तरह दूसरों की रसोई में टपक पड़े। खाओ खाओ
10:37और जल्दी-जल्दी खाओ। कोई भूखा है इससे
10:41तुम्हें क्या मतलब?
11:01[संगीत]
11:03अढ़ैया
11:05आज का दिन कैसा रहा?
11:07मुझसे कुछ बुलवाओ नहीं और इसका परिणाम
11:10अच्छा नहीं होगा बाबा जी।
11:13अरे भाई क्या [संगीत] हुआ? इतने गुस्से
11:15में क्यों हो?
11:17आपको मुझे बताना तो चाहिए। ठाकुर तो आया
11:21लेकिन वो शादीशुदा है।
11:23शादीशुदा है मतलब?
11:25दोनों पति-पत्नी आए थे भुक्कड़ कहीं के और
11:28आकर चुपचाप सारा भोजन खत्म कर दिया। मैं
11:32कितना भी गुस्सा करता हूं और दोनों
11:34मुस्कुराते हुए भोजन करके चले गए। वो बहन
11:38अपने घर में रसोई नहीं बनाती होगी।
11:41क्या बकवास कर रहा है? तुझे क्या हो गया
11:44है? ठाकुर तेरे पास थोड़ी आएंगे।
12:06बाबा जी आज एकादशी है और मैं इस बार 5
12:09किलो आटा नहीं 7 1/2 किलो आटा लूंगा। दो
12:12वो लोग और एक मैं
12:14तुझे जितना राशन ले जाना है ले जा। मैं कब
12:17मना करता हूं? लेकिन यह झूठा नाटक मत कर।
12:20मैं कोई नाटक नहीं करता हूं। मैं झूठ
12:23बोलता ही नहीं। आप ही खेल खेलते हो। दो
12:26एकादशी से भूखा हूं।
12:57गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।
13:02[संगीत]
13:08अरे कान्हा तुम दोनों कहां जा रहे हो?
13:13[संगीत] दाऊ दादा हम लोग जा रहे हैं एक
13:16भक्त के यहां भोजन पर तो मैं भी चलता हूं।
13:20दाऊ [संगीत] दादा वहां ज्यादा व्यवस्था
13:22नहीं है। कोई बात नहीं कान्हा। हम सभी
13:25थोड़ा-थोड़ा पा लेंगे। ठीक है दाऊ दादा।
13:28लेकिन आप बहुत गर्म स्वभाव के हैं। वो
13:31लड़का कुछ भी बोले उसकी बात पर ध्यान नहीं
13:33देना। चुपचाप भोजन करना है। वापस आना है।
13:37ठीक है कान्हा। [संगीत]
13:52गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।
14:00[संगीत]
14:05ओ भैया ये दूसरा भैया कौन है?
14:09ये मेरे बड़े भाई हैं।
14:11ठाकुर आप मुझे बताएंगे कि आपके घर में
14:14कितने लोग हैं? मुझे राशन की व्यवस्था
14:17करनी होती है।
14:18कान्हा यह इतना [संगीत] गुस्से में क्यों
14:20कह रहा है?
14:26दाऊ दादा चुप रहो। भोजन में [संगीत] ध्यान
14:28दो। हां हां खाओ और जल्दी खाओ। सारा भोजन
14:34खत्म कर दो।
14:57आज तो ठीक से खाना खाया ना।
15:00मुझे गुस्सा मत दिलाओ बाबा जी।
15:07पता नहीं इस लड़के की क्या समस्या है।
15:15[संगीत]
15:17बाबा जी आज मैं 10 किलो आटा लूंगा।
15:2010 नहीं 20 किलो ले जा। लेकिन तू झूठ बोल
15:23के ठाकुर ठाकुर को अपवाद मत कह।
15:28बाबा जी मैं झूठ नहीं बोलता।
15:32[संगीत]
16:02गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।
16:12[संगीत]
16:17प्रभु मैं भी आपके साथ भक्त के यहां भोजन
16:20करने चलूंगा।
16:22ठीक है हनुमान चलो लेकिन ध्यान रहे उस
16:25लड़के की बात पर ध्यान मत देना। [संगीत]
16:27चुपचाप भोजन करना।
16:29ठीक है प्रभु।
16:34[संगीत]
16:45गुरुदेव के ठाकुर अब आकर खाना खा लो।
16:53[संगीत]
16:58ठाकुर ये दूसरे भैया कौन है?
17:02यह मेरा सेवक है और सदा मेरे हृदय में
17:05रहता है।
17:08खा लो खा लो भुक्कड़ कहीं के।
17:16[संगीत]
17:34[संगीत]
17:41आज मैं 12 1/2 किलो आटा ले जाऊंगा। कुछ
17:44[नाक से की जाने वाली आवाज़] भी हो जाए
17:45मैं उन्हें छोडूंगा नहीं।
17:48[संगीत]
17:57[संगीत]
18:04गुरुदेव के ठाकुर आप आकर खाना खा लो।
18:11[संगीत]
18:21[संगीत]
18:23अढ़ैया आज तो तुमने कुछ बनाया ही नहीं है।
18:28अब से ऐसा ही होगा। अपने बड़े भैया से बोलो
18:31लकड़ी काट कर लाए। पवन पुत्र से बोलो आग
18:34जलाए और अपनी पत्नी से बोलो कि रसोई
18:37बनाएं। आप इनकी मदद करो जब भोजन तैयार हो
18:40जाए तो मेरी थाली अलग करके फिर अपना पाना।
18:43मैं उस पेड़ के नीचे बैठा हूं। अढ़ैया कोई
18:48बात नहीं। तुम्हारी बनाई रसोई हम पिछली
18:52चार एकादशी से पा रहे हैं।
18:55लेकिन आज हम तुझे बनाकर खिलाएंगे। हनुमान
18:58दाऊ दादा के साथ तुम लकड़ी लेकर आओ।
19:03जो आज्ञा प्रभु
19:12[संगीत]
19:46[संगीत]
19:59अढ़ैया
20:01आ जाओ। भोजन तैयार हो गया है। पहले मेरी
20:06थाली अलग कर दो। अढ़ैया तुझे [संगीत] जितना
20:09खाना हो उतना खाना।
20:12लेकिन पहले पहले हम ठाकुर जी को भोग लगा
20:15देते हैं। अब कौन से ठाकुर को भोग लगाना
20:19कहा बाकी है?
20:21आप ही तो ठाकुर हो जो हर एकादशी के दिन
20:24आते थे। अढ़ैया जैसे तेरे गुरुदेव का मैं
20:29ठाकुर हूं, वैसे ही मेरा भी कोई ठाकुर है।
20:32अच्छा, तो क्या वो आएगा?
20:36कोई नहीं आएगा।
20:38पर हमारा भी तो कोई नियम तो होगा।
20:42हां तो जल्दी करो। जोरों की भूख लगी है।
20:47हे अखिल ब्रह्मांड के ठाकुर आप पधारो
20:52पधारो।
21:09स्वामी बिना मौसम के बारिश हमें क्या
21:12संकेत दे रही हैं?
21:13देवी स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने भंडारा
21:17किया है और हमें बुलावा आया है।
21:21कृष्ण जी ने भंडारा किया है। यह तो अत्यंत
21:24सौभाग्य की बात है। हमें सभी को चलना
21:27चाहिए।
21:29हां देवी नंदी हमारे सभी गणों को बुलावा
21:32भेजो। सभी को श्री कृष्ण जी के भंडारे में
21:35जाने के लिए एकत्रित करो। जो नहीं आएगा
21:39मैं उसे अपना नहीं मानूंगा।
21:44जो आज्ञा प्रभु
21:58नंदी महाराज आप अचानक यहां बताइए क्या बात
22:02है?
22:03प्रभु का आदेश है हम सभी को श्री कृष्ण जी
22:06के भंडारे में इसी क्षण तुरंत चलना है।
22:10भंडारे में चलना है। श्री कृष्ण जी के और
22:14हमें हमारे प्रभु ने कहा है अरे चलो जल्दी
22:18चलो।
22:20[संगीत]
22:30नाम गोरे
22:33ओजे गुवर [संगीत] झा
22:38हे आखिल ब्राह्मण [संगीत] के स्वामी मुझ
22:41भक्त को अपने चरणों में स्थान दो
22:47[संगीत]
22:51अब ये सब कौन है? लगता है हो गई एकादशी।
22:55अब कुछ नहीं बचेगा। आइए प्रभु आसन ग्रहण
23:00कीजिए।
23:11[संगीत]
23:17आओ अढ़ैया तुम भी बैठो। मेरा आज एकादशी का
23:22उपवास है।
23:24अरे बैठ तो सही।
23:38[गहरी सांस लेने की आवाज़]
23:38ठाकुर आपने अपने-अपने लोगों की थाली भर दी
23:41और मुझे सुपारी के दाने एक टुकड़ा दिया।
23:44अैया तू चख तो सही। तेरी बनाई रसोई तो हम
23:48रोज खाते हैं। इस बार हमारी रसोई चख।
23:56[नाक से की जाने वाली आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
24:00ये क्या हो रहा है? बचाओ मुझे बाबा जी
24:03बचाओ। अरे अरे
24:14[संगीत]
24:19उठो अढ़ैया उठो।
24:22[संगीत]
24:27[संगीत]
24:28हे असंख्य जीवों के मालिक मुझे माफ कर दो।
24:32मैंने अनजाने में आपको बहुत भला बुरा कहा
24:35है। नहीं अढ़ैया तुम एक सरल और निश्चल भाव
24:40से मुझे बुलाते थे। [संगीत] तभी मैं
24:42तुम्हारे पास आता था। और तुम्हारे सभी
24:45बंधनों को काटना मेरी जिम्मे मेरी
24:48जिम्मेदारी थी। जाओ अब नई जिंदगी की
24:52शुरुआत करो।
24:58अभी आया तब तक आप कहीं मत जाना ठाकुर और
25:03ठाकुर के ठाकुर आप भी आपको राम दुहाई है
25:24बाबा जी मंदिर में कितने सालों से
25:27विराजमान हैं?
25:29100 सालों से।
25:32कभी ठाकुर ने रूबरू आकर भोजन पाया है? तो
25:36आओ ठाकुर भी खा रहा है और ठाकुर का ठाकुर
25:39भी खा रहा है।
25:41मुझे तंग करना कब छोड़ेगा? पांचप एकादशी
25:45से तू व्रत खंडित कर रहा है।
25:48बाबा जी मैं झूठ नहीं बोलता।
25:52मौका ना चुके।
25:55चल कहां ले जा रहा है?
25:58आओ बाबा जी जल्दी आओ।
26:14महान है। अढ़ैया तू महान है। वास्तव में
26:18मुझे मेरे ठाकुर के पैर पकड़ना चाहिए।
26:21[संगीत]
26:25लेकिन फिर भी मैं तेरे पैर पड़ता हूं
26:27क्योंकि तेरी इस क्रांति की वजह से मैंने
26:30अपने ठाकुर को पाया। तूने मुझे मेरे हरि
26:33से मिलाया। तू महान है।
26:37[संगीत]
26:46[संगीत]
26:55तो [संगीत] देखा दोस्तों जब भक्त इतना सरल
26:58हो होता है कि उसे पता ही नहीं कि मेरी
27:01बनाई रसोई कौन खाने आ रहा है। त्रिलोक के
27:05स्वामी स्वयं महादेव।
27:09साथ ही हनुमान जी सच ही कहा जाता है भक्त
27:13के वश में है भगवान। अब आप लोग कमेंट करके
27:16बताओ कि यह अद्भुत लीला कैसी लगी? एक
27:18प्यारे से कमेंट के साथ। मिलते हैं अगली
27:21कहानी में। जय श्री राम सभी