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0:06शहर की बहू आई गांव में।
0:14सुबह 5:00 बजे उठकर चंदा अपने घर की सफाई
0:17में लग जाती है कि तभी चंदा की पड़ोसन
0:19कुंती उसके दरवाजे पर आती है और कहती है,
0:22क्या बात है चंदा बहन आज सुबह-सुबह ही
0:25तुम्हारे घर का सारा काम हो गया। बड़ी
0:27फुर्ती में दिख रही हो और नहीं तो क्या?
0:30अरे ना सिर्फ घर का काम बल्कि मैंने अपने
0:33बेटे बहू के लिए खाना भी बना दिया है। आज
0:36मेरा मन बहुत खुश है। बेटा बहू हां कुंती
0:39तुम्हें पता है मेरी शहर में रहने वाली
0:41बहू मोहिनी और बेटा मोहित आज गांव में
0:44मुझसे यानी अपनी सास से मिलने आ रहे हैं।
0:47उन्होंने कहा है कि वह मुझे अपने साथ शहर
0:49ले जाएंगे। ना सिर्फ मुझे बल्कि वो इन्हें
0:52भी अपने शहर ले जाएंगे। फिर हमारा पूरा
0:55परिवार एक हो जाएगा। जरा ध्यान से चंदा
0:58बहन शहरी बहुएं बड़ी चालाक होती है।
1:01चमक-धमक देखकर कहीं धोखा ना खा जाना। क्या
1:04यार कुंती तू भी ना कुछ भी सोचती है। ऐसा
1:07कुछ नहीं है। मेरी जो बहू है ना वो लाखों
1:10में नहीं करोड़ों में एक है। उसने फोन पर
1:13कितने प्यार से बात की थी। अगर ऐसी बहू है
1:16बहन तो बहुत अच्छी बात। लेकिन मेरी बात को
1:19गांठ बांध लेना। अगर वो तुझे या भाई साहब
1:21को अलग होने को कहे तो कभी मत मानना। आजकल
1:24की बहुएं ऐसा ही करती हैं। जब उन्हें
1:27जरूरत होती है तो अपनी सास को शहर ले जाती
1:29हैं और वहां उन्हें नौकरानी बनाकर रखती
1:32हैं। खैर अगर तेरी बहू अच्छी है तो बहुत
1:35अच्छी बात है। अच्छा बहन मैं चलती हूं।
1:37मुझे जंगल से लकड़ियां लानी है। इतना
1:40बोलकर कुंती वहां से चली जाती।
1:43लेकिन कुंती की बातें चंदा के दिमाग में
1:45घर कर जाती हैं कि तभी घर के बाहर एक काली
1:48कार आकर रुकती है। कार से बहू मोहिनी और
1:51बेटा मोहित बाहर आते हैं। मोहिनी
1:53प्रेग्नेंट होती है इसलिए वो झुक कर पैर
1:55नहीं छूती। ओह गॉड यहां कितनी दूर और
1:58गर्मी है। मम्मी जी आपका गांव अभी भी वैसे
2:01ही पिछड़ा हुआ है। ओ हो हो मेरी तो गाड़ी
2:04से उतरते ही तबियत खराब होने लगी है। अरे
2:06बहू आ बैठ। इस कुर्सी पर बैठ जा। यह गांव
2:09की ताजी हवा है। इससे कोई बीमार नहीं
2:12होता। मोहित बेटा तू कैसा है? शहर में
2:15खाना पीना ठीक से तो खाता है ना?
2:17हां मां सब ठीक है। बस काम का थोड़ा
2:19प्रेशर रहता है। मोहिनी को डॉक्टर ने आराम
2:22करने को कहा है। इसीलिए सोचा कुछ दिन आपके
2:24पास गांव में रहकर आए और फिर आपको अपने
2:26साथ शहर ले चलें। देखो बहू बेटों को यहां
2:29आए हुए देरी हो गई है। लेकिन तुम सिर्फ
2:31यहां पर बातें बना रही हो। जाओ जाकर बहू
2:33के लिए कुछ लेकर आओ।
2:34जी आपने बिल्कुल सही कहा। मैं अभी लाती
2:37हूं। इतना बोलकर चंदा अब किचन में जाती है
2:40और बहू के लिए जूस और नाश्ता लाती है।
2:42मम्मी जी यह क्या है? क्या यह घर का निकला
2:45हुआ जूस है? इसमें तो मक्खियां भिनभिना
2:47रही होंगी। मुझे पैकेट वाला जूस चाहिए।
2:50मोहित तुम मुझे कहां ले आए? यहां तो ढंग
2:52का पानी भी नहीं मिल रहा। बहू यह तो ताजे
2:54फलों का जूस है। अभी निकाला है। अच्छा
2:57तुझे पसंद नहीं तो मैं तेरे लिए नारियल
2:59पानी मंगवाती हूं। तू आराम कर। इतना बोलकर
3:02चंदा नारियल का पानी मंगवाने के लिए बाहर
3:04की ओर निकल जाती है। तो वहीं मोहिनी सीधा
3:07अपने कमरे में पहुंच जाती है। कमरों को
3:09देखकर अपनी नाक सिकोड़ती है। मोहित देख
3:12रहे हो यह घर कितना छोटा और पुराना है और
3:14यह बिस्तर मुझे नहीं लगता कि मैं यहां रात
3:16भी सो पाऊंगी। हमने इन्हें शहर ले जाने का
3:19फैसला किया है ताकि ये घर का काम और बच्चे
3:21संभाल सके। लेकिन मुझे डर है कि ये मेरी
3:23मॉडर्न लाइफ स्टाइल में फिट हो भी पाएंगे
3:25या नहीं।
3:26धीरे बोलो मोहिनी मां सुन लेगी। बस कुछ
3:28दिन की बात है। एक बार यह शहर चलने को
3:30तैयार हो जाए। फिर हम अपनी मर्जी से चीजें
3:32करेंगे।
3:33मोहित की बात सुनकर मोहिनी कुछ नहीं बोलती
3:35और चुप हो जाती है। अब शाम होती है और
3:38चंदा ने बड़े चाव से बहू के लिए चूल्हे पर
3:40रोटियां और साग बनाया होता है। आ बहू गरमा
3:43गरम खाना खा ले। चूल्हे की रोटी है। शहर
3:46में तो नसीब भी नहीं होती होगी। छी मम्मी
3:49जी। आपको पता है डॉक्टर ने मुझे ऑयली और
3:51ऐसा भारी खाना खाने से मना किया है? मैं
3:53यह सब नहीं खा सकती। मोहित मुझे अभी के
3:56अभी शहर से कुछ मंगवा कर दो। वरना मैं
3:57भूखी रहूंगी।
4:00बहु गांव में शहर जैसा खाना कहां मिलेगा?
4:03तेरी सास ने कितनी मेहनत से बनाया है।
4:05थोड़ा तो चख ले।
4:07पापा जी मेहनत तो गधा भी करता है। इसका
4:09मतलब यह नहीं कि मैं कुछ भी खा लूं और
4:11वैसे भी मुझे शहर जाने की जल्दी है। यहां
4:13की ये पुरानी सोच और ये मिट्टी के बर्तन
4:16मेरे बस की बात नहीं है।
4:18मोहिनी ये तुम क्या कह रही हो? चुप नहीं
4:20रह सकती तुम। मां पापा मोहिनी की तरफ से
4:22मैं आप लोगों से माफी मांगता हूं। इस तरह
4:24मोहित की डांट सुनकर मोहिनी चुप हो जाती
4:27है। तो वहीं चंदा का दिल टूट जाता है।
4:29लेकिन वह कुछ नहीं कहती।
4:32अगले दिन सुबह मोहिनी सोकर उठती है और
4:34चंदा से कहती है मम्मी जी कल रात के लिए
4:36मैं आपसे माफी मांगना चाहूंगी। मुझे माफ
4:39कर दीजिए। कोई बात नहीं बहू तू यहां गांव
4:42में नहीं रहती ना इसलिए तुझे गांव की आदत
4:44नहीं है। मम्मी जी मुझे कुछ बताना है। वो
4:48बात यह है कि कल हम शहर निकल रहे हैं।
4:50हमने तय किया है कि आप हमारे साथ चलेंगी।
4:52लेकिन पापा जी को भी गांव में ही रहना
4:54चाहिए। शहर में हमारा फ्लैट छोटा है और
4:56वहां दो बड़े लोगों की जगह नहीं है। ये
4:59क्या कह रही है बहू? मैंने तो सोचा था कि
5:02हम सब साथ रहेंगे। तेरे ससुर को यहां
5:04अकेले छोड़कर मैं कैसे जा सकती हूं। देखिए
5:07मम्मी जी इमोशनल होने की जरूरत नहीं है।
5:09मुझे शहर में काम करने के लिए और बच्चे के
5:11लिए एक भरोसेमंद हाथ चाहिए। अगर आप आएंगी
5:14तो मेरा काम आसान हो जाएगा। पापा जी यहां
5:16रहकर खेती देख सकते हैं। वैसे भी शहर में
5:19उनका मन नहीं लगेगा। मोहित अपनी पत्नी की
5:22बात सुनकर खामोश रहता है। चंदा अपने पति
5:24की तरफ देखती है जिनकी आंखों में आंसू आ
5:27जाते हैं। तभी कुंती वहां से गुजरती है और
5:29यह सब सुन लेती है। देखा चंदा बहन मैंने
5:33कहा था ना कि ये शहरी बहुएं सिर्फ अपना
5:35फायदा देखती हैं। यह तुझे शहर मां बनाकर
5:38नहीं बल्कि एक मुफ्त की नौकरानी बनाकर ले
5:41जाना चाहती है जो इसके बच्चे के गंदे
5:43कपड़े धोए और इसके नखरे सहे। ए औरत तू कौन
5:46होती है हमारे बीच में बोलने वाली? मम्मी
5:48जी अगर आपको चलना है तो आज ही आज हां
5:51बोलिए वरना हम अकेले जा रहे हैं और याद
5:54रखिए अगर आप नहीं आई तो मैं आपको कभी आपका
5:56पोता नहीं देखने दूंगी और तो और हम कल की
5:59जगह आज के आज निकलेंगे इस घर से बस बहू
6:02बहुत बोल लिया तूने मैं अब तक चुप थी
6:05क्योंकि तू प्रेग्नेंट है और मेरे बेटे की
6:07पसंद है। लेकिन तू तो मेरे सुहाग को ही
6:09मुझसे अलग करना चाहती है। जिस पति ने मेरा
6:12उम्र भर साथ दिया उसे मैं अकेला छोड़कर
6:14तेरे साथ चली जाऊं। शहर वो भी तेरी गुलामी
6:18करने के लिए।
6:19माई आप कैसी बातें कर रही हो? आप हमारी
6:21गुलामी थोड़ी ना करोगी। आप हमारी मां हो।
6:23वहां आप आराम से रहोगी। मां मोहिनी की बात
6:25मान लो ना। शहर में वैसे भी पापा क्या
6:27करेंगे? वहां पार्क में बैठने के अलावा
6:29कोई काम नहीं है। बेटा मोहित मुझे काम की
6:32चिंता नहीं है। मुझे तो इस बात का दुख है
6:35कि तू अपनी पत्नी की गलत बातों में इतना
6:37दब गया है कि तुझे अपने बूढ़े मां-बाप का
6:40अकेलापन नहीं दिख रहा। चंदा तू जा इसके
6:42साथ। मैं यहां रह लूंगा। नहीं मोहन जी मैं
6:45कहीं नहीं जा रही। बहू तू जिस शहर की अकड़
6:48दिखा रही है ना वो शहर तेरे पास ही रख।
6:50मुझे मेरे गांव की सूखी रोटी मंजूर है पर
6:53तेरे घर की वो गुलामी नहीं जहां रिश्तों
6:55की कोई कदर नहीं है। ठीक है तो फिर सड़ते
6:58रहिए इसी गांव में। मोहित चलो यहां से।
7:00मुझे एक पल भी यहां नहीं रुकना। मोहिनी
7:02गुस्से में पैर पटकते हुए गाड़ी की तरफ
7:04जाती है। मोहित बेबस होकर अपने मां-बाप को
7:07देखता है लेकिन मोहिनी के डर से कुछ नहीं
7:09बोल पाता और चुपचाप गाड़ी में बैठ जाता है
7:12और वो शहर की तरफ निकल जाती है।
7:14चंदा तूने बहुत बड़ा मौका छोड़ दिया। शहर
7:17जाती तो पोते-पोते का सुख मिलता।
7:20पोते का सुख तो तब मिलता ना जब मेरी बहू
7:22के दिल में मेरे लिए प्यार होता। वो तो
7:25मुझे सिर्फ एक दाई बनाकर ले जाना चाहती
7:27थी। कुंती सही कह रही थी। यह लोग रिश्तों
7:31को सौदा समझते हैं। साहस दिखाया तूने चंदा
7:34बहन। ऐसे बच्चों के पीछे अपना स्वाभिमान
7:37नहीं खोना चाहिए। चल अब जो खाना बनाया है
7:40वह हमें भी खिला। बड़ी भूख लगी है। कुंती
7:43की ऐसी बातें सुनकर अब चंदा मुस्कुराती
7:45हैं और अपनी पड़ोसन के साथ बैठकर खाना
7:47खाने लगती है। उसे एहसास होता है कि असली
7:50शांति शहर के बड़े फ्लैट में नहीं बल्कि
7:53अपने घर के सुकून और अपनों के साथ में है।
8:03पापा मैं शिखर से प्यार करती हूं और उसी
8:06से शादी करूंगी।
8:07ठीक है फिर अगर तुझे उस गरीब लड़के से ही
8:10शादी करनी है तो निकल जा मेरे घर से और आज
8:12के बाद कभी यहां मत आना समझी।
8:14रुचि ने अपना बैग उठाया और अपने अमीर पिता
8:17की हवेली छोड़कर शिखर से ब्याह कर उसके
8:19गांव आ गई।
8:21हे शिखर ये गांव में पहुंचते ही कैसी गंदी
8:24सी स्मेल आ रही है।
8:26अरे ये बदबू नहीं बल्कि गांव की पहचान है।
8:29मतलब गौ माता के गोबर की खुशबू। वो देखो
8:32वहां देखो कैसे वो काकी गोबर के उबले बना
8:34रही है।
8:35छी छी ये अपने हाथों में गोबर कैसे उठा
8:38रही है? ये गाय की पॉटी को हाथ से कौन
8:41छूता है। ये गांव के लोग कितने गंदे हैं।
8:43फिर कुछ देर बाद उनकी कार एक घर के बाहर
8:46आकर रुकती है। अरे ये कार यहां क्यों रोक
8:49दी? डार्लिंग यही तो तुम्हारा ससुराल है।
8:51चलो उतरो।
8:52रुचि जैसे ही कार से उतरती है तो उसके
8:54सैंडल कीचड़ में फंस जाती है। ओह नो ये
8:57क्या हो गया? शिखर डार्लिंग हेल्प मी।
9:00शिखर उसकी मदद करके उसका पैर बाहर निकालता
9:03है। ओह नो मेरी ₹1,000 की सैलरी खराब हो
9:07गई। लेकिन ये तो अब ₹10 की भी नहीं रही।
9:12यू शट अप हैं। शट अप भैया ये भाभी कौन सा
9:16शटर अप करने के लिए कह रही है? शटर तो फिर
9:18जुका की दुकान में लगा है। शिखर कौन है ये
9:21बदतमीज लड़की?
9:22अरे यह मेरी छोटी बहन शीतल है। थोड़ी
9:25पगलेट है। कब कहां क्या बोलना है इसकी समझ
9:27नहीं है इसे।
9:28तभी हाथों में थाली शिखर की मां आशा आती
9:31है। आओ आओ मेरी शहरी सुंदर बहू अंदर आओ।
9:34तेरे ससुराल में तेरा स्वागत है। कुछ ही
9:37देर में सारे गांव में यह बात पता चल जाती
9:39है कि शिखर कोई शहरी बहू लाया है। अगले
9:42दिन गांव की कुछ औरतें उसके मुंह दिखाई के
9:44लिए आती हैं। रुचि बहू बाहर आ जाओ। मुंह
9:47दिखाई के लिए गांव की औरतें आ गई हैं।
9:50रुचि शॉर्ट ड्रेस पहन कर बाहर आती है। अरे
9:52आशा बहन इसकी मुंह दिखाई है या टांग
9:55दिखाई? इसके मुंह से ज्यादा तो इसकी टांगे
9:58दिख रही हैं। पहले पता होता टांग दिखाई है
10:01तो इसकी टांगे ढकने के लिए तोहफे में कोई
10:02कपड़ा ले आते। अब मुंह दिखाई हो बहन या
10:05फिर टांग दिखाई। सच तो यह है कि दिख सब
10:08कुछ ही रहा है। जितनी इसकी टांगे गोरी है
10:11ना इतना गोरा तो तुम सबका मुंह भी नहीं
10:13है। अब जो काम करने आई हो वो करो। और बहू
10:16यह दर्जी मुए ने जरूर तुम्हारा आधा कपड़ा
10:19बचा लिया होगा। तभी तो इतनी छोटी सी फ्रॉक
10:21सिल दी है। कोई बात नहीं। फिलहाल तू यह
10:24चुन्नी सर पर ओढ़ ले और फिर कल से साड़ी
10:26ही पहनना। फिर सब उसके मुंह दिखाई करती
10:28हैं और वहां से चली जाती है। तभी आशा अपनी
10:31बहू से बहू इससे बड़े कपड़े तो मेरी गोरा
10:34पहनती है। कौन गोरा मां जी? हमारी बछिया
10:38अभी कुछ दिन पहले ही जन्म लिया है उसने।
10:40मां जी ये डिजाइनर कपड़े हैं और इसे कोई
10:43दर्जी नहीं सिलता बल्कि फैशन डिजाइनर
10:45बनाता है और आगे से मेरी तुलना उस बछिया
10:47से नहीं करना। यह कहकर रुचि अपने कमरे में
10:50चली जाती है। शाम को रुचि अपने हील्स हर
10:52जगह ढूंढती है लेकिन वो उसे कहीं नहीं
10:54मिलती। उफ ना जाने कहां चली गई। यहीं तो
10:57रखी थी।
10:59क्या हुआ रुचि? क्या ढूंढ रही हो?
11:01वो मेरी रेड वाली हील्स नहीं मिल रही है।
11:04कल ही निकाली थी बैग से। पता नहीं कहां
11:06गई।
11:07भाभी पहले यह बताओ वो कितने की थी? पूरे
11:1015,000 की। लेकिन तुम ये क्यों पूछ रही
11:12हो? क्योंकि आपकी वो 15,000 की हील्स
11:15हमारी गोरा पहन कर घूम रही है। मां ने उसे
11:17वो हील पहना दी है।
11:20रुचि, शिखर और शीतल बाहर आते हैं तो गोरा
11:22हील पहने खड़ी थी। ओह गॉड मेरी 15,000 की
11:25हील्स का सत्यानाश कर दिया। अरे बहरिया
11:28तुम्हारी ये हील तो बहुत अच्छी है। देखो
11:31ना गोरा बार-बार खुटिया से भाग जाती है।
11:34अब हमने तुम्हारी खुटिया से इसे बांध
11:36दिया। अब मजा है वो कहीं भाग पाए। ओ मैं
11:40परेशान हो गई हूं इन देहातियों से। ऐ
11:42बहरिया जुबान संभाल कर हमको देहाती बोली।
11:45अंग्रेजी चिड़िया अंग्रेज की बेटी अगले
11:48दिन। अरे शीतल ये सब औरतें सुबह-सुबह लोटा
11:50लेकर कहां जा रही हैं? झाड़े। हं? झाड़ी
11:53मतलब? मतलब हगन करने। अब आप भी जल्दी चलो
11:57नहीं तो पूरी तरह सवेरा हो गया, तो फिर जा
11:58नहीं पाओगी। ओह गॉड उसे फ्रेश होना कहते
12:01हैं। और मैं बाहर यूं खुले में नहीं
12:03जाऊंगी। मेरे लिए बाथरूम बनवाओ।
12:06अरे ओ सहरी तितली। तुझे इतना पता नहीं
12:09क्या कि आंगन में तुलसी की जगह होती है
12:11शौचालय बनाने की? नहीं। अब एक बार फिर से
12:13रुचि की बहस अपनी सास से होती है। इस तरह
12:16घर में दोनों की सोच को लेकर झगड़ा बढ़ता
12:19ही जाता है। फिर रात को रुचि शिखर से शिखर
12:22मैं अब और इस गांव में नहीं रह सकती। दो
12:24कमरों के इस झोपड़ी वाले ससुराल में कहां
12:27पहले मैं मायके में महारानी बनकर रहती थी
12:29लेकिन यहां तो मेरी हालत नौकरानी जैसी हो
12:31गई है। ऊपर से यहां के लोग कितने गंदे से
12:34रहते हैं। हाथ से गोबर उठाना, गोबर से घर
12:36लिपना, उपले बनाना, छी छी और ना जाने
12:39क्या-क्या। देखो रुचि मैंने तुम्हें पहले
12:41ही सब कुछ बता दिया था कि मेरा घर गांव
12:43में है लेकिन तुम ही ने कहा कि तुम सब
12:45एडजस्ट कर लोगी और जैसे कपड़े तुम यहां
12:48पहनती हो ना रुचि वो सब शोभा नहीं देता
12:50समझी अब तुम गांव में रहती हो तो यहां के
12:52तौर तरीकों से ही रहना होगा
12:54यह बात सुनकर रुचि रोने लगती है
12:56तुम्हारे लिए मैंने अपना इतना बड़ा घर
12:58छोड़ा अपने लोगों को छोड़ा और तुम मुझे ही
13:00एडजस्ट करने को कह रहे हो
13:02अरे मेरी मां मैं भी तो तुम्हारे लिए ही
13:03यह सब कह रहा हूं।
13:04क्या मतलब? मतलब यह कि मेरे परदादा की एक
13:07बहुत बड़ी और पुरानी हवेली है जो कि मां
13:09ने रेंट पर दे रखी है और वहां से हर महीने
13:12किराया आता है।
13:13क्या हवेली? तो फिर हम वहां क्यों नहीं रह
13:15सकते हैं?
13:16रह सकते हैं लेकिन उसके लिए हमें मां को
13:17खुश करना होगा और इसका एक ही तरीका है।
13:20जरा अपने कान इधर लाओ। शिखर रुचि के कानों
13:23में कुछ कहता है। फिर रुचि पहले तो उसकी
13:25बात मानने के लिए मना कर देती है लेकिन
13:27बाद में मान जाती है। अगले दिन से रुचि
13:29वेस्टर्न कपड़े छोड़ साड़ी पहन लेती है और
13:32अपनी सास के पांव छूती है। यह देख आशा
13:35बहुत खुश होती है। वाह वाह वाह कितनी
13:37प्यारी लग रही है। बिल्कुल ठीक कहते हैं
13:40लोग। भारतीय नारी की असली खूबसूरती तो
13:43साड़ी में ही झलकती है। थैंक यू मां जी।
13:45हवेली के लालच में अब रुचि अपनी सास की
13:48खूब सेवा करती है। वो उनको खुश करने के
13:50लिए चूल्हे पर खाना बनाती है। गाय का दूध
13:53निकालना सीखती है और झाड़ा करने खेतों में
13:55लोटा लेकर जाती। तो वहीं अपनी बहू की सेवा
13:57से खुश होकर आशा भी बदलने की सोचती है। जब
14:01यह बहू इतने अमीर घर की होकर हमारे लिए
14:03इतना कुछ कर सकती है तो फिर हम क्यों नहीं
14:06इसके लिए अपना रहन-सहन बदल सकते हैं। अब
14:08आशा देवी अपनी उस हवेली को खाली करवाती
14:11हैं और उसमें सुख सुविधा की हर चीज लाकर
14:14रख देती हैं। उसमें मॉड्यूलर किचन बनवा
14:16देती है। साथ ही शौचालय भी जिससे उसकी बहू
14:19को कोई परेशानी ना हो। यह देख रुचि भी
14:22बहुत खुश होती है। कुछ समय बाद वह गांव
14:24में एक डेयरी फर्म का बिजनेस खोल लेते हैं
14:27और उनका यह बिजनेस खूब चलने लगता है। अब
14:30वो गांव में रहकर ही अच्छे खासे पैसे
14:32कमाने लगते हैं और खुशी-खुशी रहने लगते
14:34हैं।
14:36थैंक्स फॉर वाचिंग।