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शहर की बहु आई गांव में | Hindi Cartoon | Hindi Kahani | Moral Stories | Cartoon Story |Kahani |Story

Best Story TV · 2,868 words · 14 min read

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0:06शहर की बहू आई गांव में।

0:14सुबह 5:00 बजे उठकर चंदा अपने घर की सफाई

0:17में लग जाती है कि तभी चंदा की पड़ोसन

0:19कुंती उसके दरवाजे पर आती है और कहती है,

0:22क्या बात है चंदा बहन आज सुबह-सुबह ही

0:25तुम्हारे घर का सारा काम हो गया। बड़ी

0:27फुर्ती में दिख रही हो और नहीं तो क्या?

0:30अरे ना सिर्फ घर का काम बल्कि मैंने अपने

0:33बेटे बहू के लिए खाना भी बना दिया है। आज

0:36मेरा मन बहुत खुश है। बेटा बहू हां कुंती

0:39तुम्हें पता है मेरी शहर में रहने वाली

0:41बहू मोहिनी और बेटा मोहित आज गांव में

0:44मुझसे यानी अपनी सास से मिलने आ रहे हैं।

0:47उन्होंने कहा है कि वह मुझे अपने साथ शहर

0:49ले जाएंगे। ना सिर्फ मुझे बल्कि वो इन्हें

0:52भी अपने शहर ले जाएंगे। फिर हमारा पूरा

0:55परिवार एक हो जाएगा। जरा ध्यान से चंदा

0:58बहन शहरी बहुएं बड़ी चालाक होती है।

1:01चमक-धमक देखकर कहीं धोखा ना खा जाना। क्या

1:04यार कुंती तू भी ना कुछ भी सोचती है। ऐसा

1:07कुछ नहीं है। मेरी जो बहू है ना वो लाखों

1:10में नहीं करोड़ों में एक है। उसने फोन पर

1:13कितने प्यार से बात की थी। अगर ऐसी बहू है

1:16बहन तो बहुत अच्छी बात। लेकिन मेरी बात को

1:19गांठ बांध लेना। अगर वो तुझे या भाई साहब

1:21को अलग होने को कहे तो कभी मत मानना। आजकल

1:24की बहुएं ऐसा ही करती हैं। जब उन्हें

1:27जरूरत होती है तो अपनी सास को शहर ले जाती

1:29हैं और वहां उन्हें नौकरानी बनाकर रखती

1:32हैं। खैर अगर तेरी बहू अच्छी है तो बहुत

1:35अच्छी बात है। अच्छा बहन मैं चलती हूं।

1:37मुझे जंगल से लकड़ियां लानी है। इतना

1:40बोलकर कुंती वहां से चली जाती।

1:43लेकिन कुंती की बातें चंदा के दिमाग में

1:45घर कर जाती हैं कि तभी घर के बाहर एक काली

1:48कार आकर रुकती है। कार से बहू मोहिनी और

1:51बेटा मोहित बाहर आते हैं। मोहिनी

1:53प्रेग्नेंट होती है इसलिए वो झुक कर पैर

1:55नहीं छूती। ओह गॉड यहां कितनी दूर और

1:58गर्मी है। मम्मी जी आपका गांव अभी भी वैसे

2:01ही पिछड़ा हुआ है। ओ हो हो मेरी तो गाड़ी

2:04से उतरते ही तबियत खराब होने लगी है। अरे

2:06बहू आ बैठ। इस कुर्सी पर बैठ जा। यह गांव

2:09की ताजी हवा है। इससे कोई बीमार नहीं

2:12होता। मोहित बेटा तू कैसा है? शहर में

2:15खाना पीना ठीक से तो खाता है ना?

2:17हां मां सब ठीक है। बस काम का थोड़ा

2:19प्रेशर रहता है। मोहिनी को डॉक्टर ने आराम

2:22करने को कहा है। इसीलिए सोचा कुछ दिन आपके

2:24पास गांव में रहकर आए और फिर आपको अपने

2:26साथ शहर ले चलें। देखो बहू बेटों को यहां

2:29आए हुए देरी हो गई है। लेकिन तुम सिर्फ

2:31यहां पर बातें बना रही हो। जाओ जाकर बहू

2:33के लिए कुछ लेकर आओ।

2:34जी आपने बिल्कुल सही कहा। मैं अभी लाती

2:37हूं। इतना बोलकर चंदा अब किचन में जाती है

2:40और बहू के लिए जूस और नाश्ता लाती है।

2:42मम्मी जी यह क्या है? क्या यह घर का निकला

2:45हुआ जूस है? इसमें तो मक्खियां भिनभिना

2:47रही होंगी। मुझे पैकेट वाला जूस चाहिए।

2:50मोहित तुम मुझे कहां ले आए? यहां तो ढंग

2:52का पानी भी नहीं मिल रहा। बहू यह तो ताजे

2:54फलों का जूस है। अभी निकाला है। अच्छा

2:57तुझे पसंद नहीं तो मैं तेरे लिए नारियल

2:59पानी मंगवाती हूं। तू आराम कर। इतना बोलकर

3:02चंदा नारियल का पानी मंगवाने के लिए बाहर

3:04की ओर निकल जाती है। तो वहीं मोहिनी सीधा

3:07अपने कमरे में पहुंच जाती है। कमरों को

3:09देखकर अपनी नाक सिकोड़ती है। मोहित देख

3:12रहे हो यह घर कितना छोटा और पुराना है और

3:14यह बिस्तर मुझे नहीं लगता कि मैं यहां रात

3:16भी सो पाऊंगी। हमने इन्हें शहर ले जाने का

3:19फैसला किया है ताकि ये घर का काम और बच्चे

3:21संभाल सके। लेकिन मुझे डर है कि ये मेरी

3:23मॉडर्न लाइफ स्टाइल में फिट हो भी पाएंगे

3:25या नहीं।

3:26धीरे बोलो मोहिनी मां सुन लेगी। बस कुछ

3:28दिन की बात है। एक बार यह शहर चलने को

3:30तैयार हो जाए। फिर हम अपनी मर्जी से चीजें

3:32करेंगे।

3:33मोहित की बात सुनकर मोहिनी कुछ नहीं बोलती

3:35और चुप हो जाती है। अब शाम होती है और

3:38चंदा ने बड़े चाव से बहू के लिए चूल्हे पर

3:40रोटियां और साग बनाया होता है। आ बहू गरमा

3:43गरम खाना खा ले। चूल्हे की रोटी है। शहर

3:46में तो नसीब भी नहीं होती होगी। छी मम्मी

3:49जी। आपको पता है डॉक्टर ने मुझे ऑयली और

3:51ऐसा भारी खाना खाने से मना किया है? मैं

3:53यह सब नहीं खा सकती। मोहित मुझे अभी के

3:56अभी शहर से कुछ मंगवा कर दो। वरना मैं

3:57भूखी रहूंगी।

4:00बहु गांव में शहर जैसा खाना कहां मिलेगा?

4:03तेरी सास ने कितनी मेहनत से बनाया है।

4:05थोड़ा तो चख ले।

4:07पापा जी मेहनत तो गधा भी करता है। इसका

4:09मतलब यह नहीं कि मैं कुछ भी खा लूं और

4:11वैसे भी मुझे शहर जाने की जल्दी है। यहां

4:13की ये पुरानी सोच और ये मिट्टी के बर्तन

4:16मेरे बस की बात नहीं है।

4:18मोहिनी ये तुम क्या कह रही हो? चुप नहीं

4:20रह सकती तुम। मां पापा मोहिनी की तरफ से

4:22मैं आप लोगों से माफी मांगता हूं। इस तरह

4:24मोहित की डांट सुनकर मोहिनी चुप हो जाती

4:27है। तो वहीं चंदा का दिल टूट जाता है।

4:29लेकिन वह कुछ नहीं कहती।

4:32अगले दिन सुबह मोहिनी सोकर उठती है और

4:34चंदा से कहती है मम्मी जी कल रात के लिए

4:36मैं आपसे माफी मांगना चाहूंगी। मुझे माफ

4:39कर दीजिए। कोई बात नहीं बहू तू यहां गांव

4:42में नहीं रहती ना इसलिए तुझे गांव की आदत

4:44नहीं है। मम्मी जी मुझे कुछ बताना है। वो

4:48बात यह है कि कल हम शहर निकल रहे हैं।

4:50हमने तय किया है कि आप हमारे साथ चलेंगी।

4:52लेकिन पापा जी को भी गांव में ही रहना

4:54चाहिए। शहर में हमारा फ्लैट छोटा है और

4:56वहां दो बड़े लोगों की जगह नहीं है। ये

4:59क्या कह रही है बहू? मैंने तो सोचा था कि

5:02हम सब साथ रहेंगे। तेरे ससुर को यहां

5:04अकेले छोड़कर मैं कैसे जा सकती हूं। देखिए

5:07मम्मी जी इमोशनल होने की जरूरत नहीं है।

5:09मुझे शहर में काम करने के लिए और बच्चे के

5:11लिए एक भरोसेमंद हाथ चाहिए। अगर आप आएंगी

5:14तो मेरा काम आसान हो जाएगा। पापा जी यहां

5:16रहकर खेती देख सकते हैं। वैसे भी शहर में

5:19उनका मन नहीं लगेगा। मोहित अपनी पत्नी की

5:22बात सुनकर खामोश रहता है। चंदा अपने पति

5:24की तरफ देखती है जिनकी आंखों में आंसू आ

5:27जाते हैं। तभी कुंती वहां से गुजरती है और

5:29यह सब सुन लेती है। देखा चंदा बहन मैंने

5:33कहा था ना कि ये शहरी बहुएं सिर्फ अपना

5:35फायदा देखती हैं। यह तुझे शहर मां बनाकर

5:38नहीं बल्कि एक मुफ्त की नौकरानी बनाकर ले

5:41जाना चाहती है जो इसके बच्चे के गंदे

5:43कपड़े धोए और इसके नखरे सहे। ए औरत तू कौन

5:46होती है हमारे बीच में बोलने वाली? मम्मी

5:48जी अगर आपको चलना है तो आज ही आज हां

5:51बोलिए वरना हम अकेले जा रहे हैं और याद

5:54रखिए अगर आप नहीं आई तो मैं आपको कभी आपका

5:56पोता नहीं देखने दूंगी और तो और हम कल की

5:59जगह आज के आज निकलेंगे इस घर से बस बहू

6:02बहुत बोल लिया तूने मैं अब तक चुप थी

6:05क्योंकि तू प्रेग्नेंट है और मेरे बेटे की

6:07पसंद है। लेकिन तू तो मेरे सुहाग को ही

6:09मुझसे अलग करना चाहती है। जिस पति ने मेरा

6:12उम्र भर साथ दिया उसे मैं अकेला छोड़कर

6:14तेरे साथ चली जाऊं। शहर वो भी तेरी गुलामी

6:18करने के लिए।

6:19माई आप कैसी बातें कर रही हो? आप हमारी

6:21गुलामी थोड़ी ना करोगी। आप हमारी मां हो।

6:23वहां आप आराम से रहोगी। मां मोहिनी की बात

6:25मान लो ना। शहर में वैसे भी पापा क्या

6:27करेंगे? वहां पार्क में बैठने के अलावा

6:29कोई काम नहीं है। बेटा मोहित मुझे काम की

6:32चिंता नहीं है। मुझे तो इस बात का दुख है

6:35कि तू अपनी पत्नी की गलत बातों में इतना

6:37दब गया है कि तुझे अपने बूढ़े मां-बाप का

6:40अकेलापन नहीं दिख रहा। चंदा तू जा इसके

6:42साथ। मैं यहां रह लूंगा। नहीं मोहन जी मैं

6:45कहीं नहीं जा रही। बहू तू जिस शहर की अकड़

6:48दिखा रही है ना वो शहर तेरे पास ही रख।

6:50मुझे मेरे गांव की सूखी रोटी मंजूर है पर

6:53तेरे घर की वो गुलामी नहीं जहां रिश्तों

6:55की कोई कदर नहीं है। ठीक है तो फिर सड़ते

6:58रहिए इसी गांव में। मोहित चलो यहां से।

7:00मुझे एक पल भी यहां नहीं रुकना। मोहिनी

7:02गुस्से में पैर पटकते हुए गाड़ी की तरफ

7:04जाती है। मोहित बेबस होकर अपने मां-बाप को

7:07देखता है लेकिन मोहिनी के डर से कुछ नहीं

7:09बोल पाता और चुपचाप गाड़ी में बैठ जाता है

7:12और वो शहर की तरफ निकल जाती है।

7:14चंदा तूने बहुत बड़ा मौका छोड़ दिया। शहर

7:17जाती तो पोते-पोते का सुख मिलता।

7:20पोते का सुख तो तब मिलता ना जब मेरी बहू

7:22के दिल में मेरे लिए प्यार होता। वो तो

7:25मुझे सिर्फ एक दाई बनाकर ले जाना चाहती

7:27थी। कुंती सही कह रही थी। यह लोग रिश्तों

7:31को सौदा समझते हैं। साहस दिखाया तूने चंदा

7:34बहन। ऐसे बच्चों के पीछे अपना स्वाभिमान

7:37नहीं खोना चाहिए। चल अब जो खाना बनाया है

7:40वह हमें भी खिला। बड़ी भूख लगी है। कुंती

7:43की ऐसी बातें सुनकर अब चंदा मुस्कुराती

7:45हैं और अपनी पड़ोसन के साथ बैठकर खाना

7:47खाने लगती है। उसे एहसास होता है कि असली

7:50शांति शहर के बड़े फ्लैट में नहीं बल्कि

7:53अपने घर के सुकून और अपनों के साथ में है।

8:03पापा मैं शिखर से प्यार करती हूं और उसी

8:06से शादी करूंगी।

8:07ठीक है फिर अगर तुझे उस गरीब लड़के से ही

8:10शादी करनी है तो निकल जा मेरे घर से और आज

8:12के बाद कभी यहां मत आना समझी।

8:14रुचि ने अपना बैग उठाया और अपने अमीर पिता

8:17की हवेली छोड़कर शिखर से ब्याह कर उसके

8:19गांव आ गई।

8:21हे शिखर ये गांव में पहुंचते ही कैसी गंदी

8:24सी स्मेल आ रही है।

8:26अरे ये बदबू नहीं बल्कि गांव की पहचान है।

8:29मतलब गौ माता के गोबर की खुशबू। वो देखो

8:32वहां देखो कैसे वो काकी गोबर के उबले बना

8:34रही है।

8:35छी छी ये अपने हाथों में गोबर कैसे उठा

8:38रही है? ये गाय की पॉटी को हाथ से कौन

8:41छूता है। ये गांव के लोग कितने गंदे हैं।

8:43फिर कुछ देर बाद उनकी कार एक घर के बाहर

8:46आकर रुकती है। अरे ये कार यहां क्यों रोक

8:49दी? डार्लिंग यही तो तुम्हारा ससुराल है।

8:51चलो उतरो।

8:52रुचि जैसे ही कार से उतरती है तो उसके

8:54सैंडल कीचड़ में फंस जाती है। ओह नो ये

8:57क्या हो गया? शिखर डार्लिंग हेल्प मी।

9:00शिखर उसकी मदद करके उसका पैर बाहर निकालता

9:03है। ओह नो मेरी ₹1,000 की सैलरी खराब हो

9:07गई। लेकिन ये तो अब ₹10 की भी नहीं रही।

9:12यू शट अप हैं। शट अप भैया ये भाभी कौन सा

9:16शटर अप करने के लिए कह रही है? शटर तो फिर

9:18जुका की दुकान में लगा है। शिखर कौन है ये

9:21बदतमीज लड़की?

9:22अरे यह मेरी छोटी बहन शीतल है। थोड़ी

9:25पगलेट है। कब कहां क्या बोलना है इसकी समझ

9:27नहीं है इसे।

9:28तभी हाथों में थाली शिखर की मां आशा आती

9:31है। आओ आओ मेरी शहरी सुंदर बहू अंदर आओ।

9:34तेरे ससुराल में तेरा स्वागत है। कुछ ही

9:37देर में सारे गांव में यह बात पता चल जाती

9:39है कि शिखर कोई शहरी बहू लाया है। अगले

9:42दिन गांव की कुछ औरतें उसके मुंह दिखाई के

9:44लिए आती हैं। रुचि बहू बाहर आ जाओ। मुंह

9:47दिखाई के लिए गांव की औरतें आ गई हैं।

9:50रुचि शॉर्ट ड्रेस पहन कर बाहर आती है। अरे

9:52आशा बहन इसकी मुंह दिखाई है या टांग

9:55दिखाई? इसके मुंह से ज्यादा तो इसकी टांगे

9:58दिख रही हैं। पहले पता होता टांग दिखाई है

10:01तो इसकी टांगे ढकने के लिए तोहफे में कोई

10:02कपड़ा ले आते। अब मुंह दिखाई हो बहन या

10:05फिर टांग दिखाई। सच तो यह है कि दिख सब

10:08कुछ ही रहा है। जितनी इसकी टांगे गोरी है

10:11ना इतना गोरा तो तुम सबका मुंह भी नहीं

10:13है। अब जो काम करने आई हो वो करो। और बहू

10:16यह दर्जी मुए ने जरूर तुम्हारा आधा कपड़ा

10:19बचा लिया होगा। तभी तो इतनी छोटी सी फ्रॉक

10:21सिल दी है। कोई बात नहीं। फिलहाल तू यह

10:24चुन्नी सर पर ओढ़ ले और फिर कल से साड़ी

10:26ही पहनना। फिर सब उसके मुंह दिखाई करती

10:28हैं और वहां से चली जाती है। तभी आशा अपनी

10:31बहू से बहू इससे बड़े कपड़े तो मेरी गोरा

10:34पहनती है। कौन गोरा मां जी? हमारी बछिया

10:38अभी कुछ दिन पहले ही जन्म लिया है उसने।

10:40मां जी ये डिजाइनर कपड़े हैं और इसे कोई

10:43दर्जी नहीं सिलता बल्कि फैशन डिजाइनर

10:45बनाता है और आगे से मेरी तुलना उस बछिया

10:47से नहीं करना। यह कहकर रुचि अपने कमरे में

10:50चली जाती है। शाम को रुचि अपने हील्स हर

10:52जगह ढूंढती है लेकिन वो उसे कहीं नहीं

10:54मिलती। उफ ना जाने कहां चली गई। यहीं तो

10:57रखी थी।

10:59क्या हुआ रुचि? क्या ढूंढ रही हो?

11:01वो मेरी रेड वाली हील्स नहीं मिल रही है।

11:04कल ही निकाली थी बैग से। पता नहीं कहां

11:06गई।

11:07भाभी पहले यह बताओ वो कितने की थी? पूरे

11:1015,000 की। लेकिन तुम ये क्यों पूछ रही

11:12हो? क्योंकि आपकी वो 15,000 की हील्स

11:15हमारी गोरा पहन कर घूम रही है। मां ने उसे

11:17वो हील पहना दी है।

11:20रुचि, शिखर और शीतल बाहर आते हैं तो गोरा

11:22हील पहने खड़ी थी। ओह गॉड मेरी 15,000 की

11:25हील्स का सत्यानाश कर दिया। अरे बहरिया

11:28तुम्हारी ये हील तो बहुत अच्छी है। देखो

11:31ना गोरा बार-बार खुटिया से भाग जाती है।

11:34अब हमने तुम्हारी खुटिया से इसे बांध

11:36दिया। अब मजा है वो कहीं भाग पाए। ओ मैं

11:40परेशान हो गई हूं इन देहातियों से। ऐ

11:42बहरिया जुबान संभाल कर हमको देहाती बोली।

11:45अंग्रेजी चिड़िया अंग्रेज की बेटी अगले

11:48दिन। अरे शीतल ये सब औरतें सुबह-सुबह लोटा

11:50लेकर कहां जा रही हैं? झाड़े। हं? झाड़ी

11:53मतलब? मतलब हगन करने। अब आप भी जल्दी चलो

11:57नहीं तो पूरी तरह सवेरा हो गया, तो फिर जा

11:58नहीं पाओगी। ओह गॉड उसे फ्रेश होना कहते

12:01हैं। और मैं बाहर यूं खुले में नहीं

12:03जाऊंगी। मेरे लिए बाथरूम बनवाओ।

12:06अरे ओ सहरी तितली। तुझे इतना पता नहीं

12:09क्या कि आंगन में तुलसी की जगह होती है

12:11शौचालय बनाने की? नहीं। अब एक बार फिर से

12:13रुचि की बहस अपनी सास से होती है। इस तरह

12:16घर में दोनों की सोच को लेकर झगड़ा बढ़ता

12:19ही जाता है। फिर रात को रुचि शिखर से शिखर

12:22मैं अब और इस गांव में नहीं रह सकती। दो

12:24कमरों के इस झोपड़ी वाले ससुराल में कहां

12:27पहले मैं मायके में महारानी बनकर रहती थी

12:29लेकिन यहां तो मेरी हालत नौकरानी जैसी हो

12:31गई है। ऊपर से यहां के लोग कितने गंदे से

12:34रहते हैं। हाथ से गोबर उठाना, गोबर से घर

12:36लिपना, उपले बनाना, छी छी और ना जाने

12:39क्या-क्या। देखो रुचि मैंने तुम्हें पहले

12:41ही सब कुछ बता दिया था कि मेरा घर गांव

12:43में है लेकिन तुम ही ने कहा कि तुम सब

12:45एडजस्ट कर लोगी और जैसे कपड़े तुम यहां

12:48पहनती हो ना रुचि वो सब शोभा नहीं देता

12:50समझी अब तुम गांव में रहती हो तो यहां के

12:52तौर तरीकों से ही रहना होगा

12:54यह बात सुनकर रुचि रोने लगती है

12:56तुम्हारे लिए मैंने अपना इतना बड़ा घर

12:58छोड़ा अपने लोगों को छोड़ा और तुम मुझे ही

13:00एडजस्ट करने को कह रहे हो

13:02अरे मेरी मां मैं भी तो तुम्हारे लिए ही

13:03यह सब कह रहा हूं।

13:04क्या मतलब? मतलब यह कि मेरे परदादा की एक

13:07बहुत बड़ी और पुरानी हवेली है जो कि मां

13:09ने रेंट पर दे रखी है और वहां से हर महीने

13:12किराया आता है।

13:13क्या हवेली? तो फिर हम वहां क्यों नहीं रह

13:15सकते हैं?

13:16रह सकते हैं लेकिन उसके लिए हमें मां को

13:17खुश करना होगा और इसका एक ही तरीका है।

13:20जरा अपने कान इधर लाओ। शिखर रुचि के कानों

13:23में कुछ कहता है। फिर रुचि पहले तो उसकी

13:25बात मानने के लिए मना कर देती है लेकिन

13:27बाद में मान जाती है। अगले दिन से रुचि

13:29वेस्टर्न कपड़े छोड़ साड़ी पहन लेती है और

13:32अपनी सास के पांव छूती है। यह देख आशा

13:35बहुत खुश होती है। वाह वाह वाह कितनी

13:37प्यारी लग रही है। बिल्कुल ठीक कहते हैं

13:40लोग। भारतीय नारी की असली खूबसूरती तो

13:43साड़ी में ही झलकती है। थैंक यू मां जी।

13:45हवेली के लालच में अब रुचि अपनी सास की

13:48खूब सेवा करती है। वो उनको खुश करने के

13:50लिए चूल्हे पर खाना बनाती है। गाय का दूध

13:53निकालना सीखती है और झाड़ा करने खेतों में

13:55लोटा लेकर जाती। तो वहीं अपनी बहू की सेवा

13:57से खुश होकर आशा भी बदलने की सोचती है। जब

14:01यह बहू इतने अमीर घर की होकर हमारे लिए

14:03इतना कुछ कर सकती है तो फिर हम क्यों नहीं

14:06इसके लिए अपना रहन-सहन बदल सकते हैं। अब

14:08आशा देवी अपनी उस हवेली को खाली करवाती

14:11हैं और उसमें सुख सुविधा की हर चीज लाकर

14:14रख देती हैं। उसमें मॉड्यूलर किचन बनवा

14:16देती है। साथ ही शौचालय भी जिससे उसकी बहू

14:19को कोई परेशानी ना हो। यह देख रुचि भी

14:22बहुत खुश होती है। कुछ समय बाद वह गांव

14:24में एक डेयरी फर्म का बिजनेस खोल लेते हैं

14:27और उनका यह बिजनेस खूब चलने लगता है। अब

14:30वो गांव में रहकर ही अच्छे खासे पैसे

14:32कमाने लगते हैं और खुशी-खुशी रहने लगते

14:34हैं।

14:36थैंक्स फॉर वाचिंग।

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