Full transcript
0:00[संगीत]
0:01जय श्री राम मित्रों स्वागत है आपका हमारे
0:03चैनल जेबी वीडियोस में स्वयंवर हुआ समाप्त
0:05यानी कि विवाह के जो पश्चात के पहले रीति
0:09रिवाज होते हैं वो हो गए हैं पूरे वरमाला
0:12ग्रहण कर ली है हमारे प्रभु श्री राम जी
0:14ने और उन्होंने यह आग्रह किया है अनुमति
0:17मांगी है राजा जनक से कि आप मेरे पिता और
0:20माता को सूचना भिजवा दीजिए ताकि मैं आगे
0:23की प्रक्रिया कर सकूं शादी की क्योंकि
0:26विवाह से पहले बड़ों की अनुमति लेना
0:29आवश्यक होता है और उसके बिना मैं आगे नहीं
0:31बढ़ सकता।
0:32अंकल जरा वो फ़ देना। वो पापा को फ़ करके
0:34बताना था कि इधर कुछ कांड हो गया है।
0:36अब राजा जनक ने भाई आगे प्रस्तावित कर
0:40दिया है कि आप सूचना भिजवाइए जल्दी से। हम
0:43भी जानते हैं कितना समय लगता है। लेकिन
0:45वहां पे भगवान परशुराम आ चुके हैं।
0:48अभी बेचारी इतनी मीठी-मीठी बातें हो रही
0:50थी। इतनी प्यारी-प्यारी बातें हो रही थी।
0:51इतनी मर्यादा वाली बातें हो रही थी। आगे
0:53अभी रुको। किसने तोड़ा ये शिवधन? वरमाला
0:56ग्रहण के पश्चात और तुरंत ये रुकावट
1:00रुकावट के लिए खेद है। कुर्सी की पेटी
1:02बांध ले क्योंकि लक्ष्मण जी और प्रभु
1:06परशुराम परशुराम जी का संवाद आने वाला है।
1:09और बहुत ही बेहतरीन होने वाला है ये।
1:11चलिए बिना विलंब के शुरू करते हैं एपिसोड।
1:1259 51
1:16[संगीत]
1:24पिछले वाले एपिसोड में तो ऐसा कलर
1:28सियाराम
1:33[संगीत]
1:38[संगीत]
1:40श्री राम और देवी सीता के मिलन की दिव्यता
1:44से समस्त ब्रह्मांड आनंदित हो उठा है।
1:48सचमुच
1:50स्वामी
1:52पर एक प्रश्न है जो मैंने आपसे पहले भी
1:56पूछा था कि श्री राम ब्रह्म है। ज्ञान
2:01स्वरूप है। अविनाशी है। वो सबके हृदय में
2:06वास करने वाले हैं।
2:09फिर उन्होंने मनुष्य का शरीर क्यों धारण
2:11किया?
2:15[संगीत]
2:20कारण अनेक हो सकते हैं।
2:24और कुछ ऐसे भी हो सकते हैं।
2:27जिन्हें कोई नहीं जान सकता।
2:30जब जब धर्म का आकर्ष होता है
2:34अधम अभिमानी राक्षस प्रबल होने लगते हैं।
2:40ऐसे में सज्जनों की पीड़ा हरने के लिए
2:44नारायण अवतरित होते हैं।
2:47जो असुरों का विनाश कर
2:51धर्म की स्थापना करते हैं।
2:55श्री राम के अवतरण का भी यही कारण है
2:57पार्वती।
2:58पर इस श्री राम के रूप में अवतरित होने का
3:01कोई विशेष कारण तो होगा।
3:06नारायण मानव रूप में एक ऐसा आदर्श जीवन
3:09व्यतीत करने आए हैं
3:12जिसमें वो यह सिद्ध करेंगे
3:15कि जटिल से जटिल परिस्थितियों में भी
3:19सत्य नैतिकता और धर्म का अनुसरण करना संभव
3:23है।
3:25वो यह प्रदर्शित करने आए हैं
3:28कि ऐसे व्यक्ति की सहायता करने देवता,
3:32मनुष्य और अन्य प्राणी निरंतर रूप से
3:36उपस्थित रहते हैं
3:39और उसके विजय सुनिश्चित करते हैं।
3:43फिर तो श्री राम और देवी सीता के इस मिलन
3:46का भी कोई ना कोई कारण अवश्य होगा।
3:49[संगीत]
3:53अवश्य पार्वती
3:56ये दोनों मानव रूप में अपने दांपत्य से
4:00पृथ्वी लोक का
4:02उद्धार करने अवतरित हुए हैं।
4:07दोनों अपनी निस्वार्थता
4:10और त्याग से
4:12दांपत्य की एक नई परिभाषा स्थापित करेंगे।
4:17[संगीत]
4:25आपका विश्वास आपकी नियति बन चुका है दीदी।
4:29अब मुझे इस पर विश्वास हो गया है कि आप
4:32दोनों के मिलन में अब कोई भी बाधा उत्पन्न
4:34नहीं हो सकती।
4:38चलो चलो।
4:42मौसम बदलने वाला है।
4:48[संगीत]
5:16ये
5:42इस लोकेशन का सही इस्तेमाल
5:52दिखाया
6:40भगवान परशुराम
6:47मिथिला में आपका स्वागत है।
6:54आज बात नहीं करूंगा भाई।
7:22कौन है जिसने मेरे गुरु भगवान शिव के इस
7:25धनुष को भंग करने का पाप किया?
7:32सारे राजा। कौन है जिसके साथ दुस्साहस
7:34करके अपनी मां को निमंत्रण दिया।
7:46सामने आए मेरे
7:54हे भगवन आप ही के आदेश अनुसार मैंने सीता
7:58का स्वयंवर आयोजित किया था। आप ही ने कहा
8:01था
8:02कि जो भी भगवान शिव के धनुष को उठाकर उस
8:05पर प्रत चढ़ाएगा वो।
8:12प्रत्यंचा चढ़ाने की बात हुई थी।
8:16धनुष भंग करने की नहीं
8:18ये बाप है।
8:26कौन है वो अहंकारी?
8:29सामने आए मेरे।
8:39आज इसकी मृत्यु निश्चित है।
8:59इतने गुनि जनों, महाऋषियों और एक ब्रह्म
9:01ऋषि की उपस्थिति में ऐसी दृष्टता दिखाई गई
9:05और आप सब मौन रहे।
9:13कोई एक वीर नहीं इस पूरी सभा में जो मुझे
9:17सत्य कहने का साहस कर सके।
9:22मुनिवर
9:26आपके प्रश्न समाप्त ही नहीं होते
9:30तो कोई उत्तर कैसे दे?
9:37और इतने क्रोधित भी हैं आप।
9:39कौन है ये मूर्ख बालक?
9:42अरे मूर्ख बालक काल वक्त बोलत।
9:44तू नहीं जानता कि मैं कौन हूं।
9:46मुझे भलीभांति ज्ञात है कि आप कौन है।
9:50क्षत्रिय कुल नाशक बाल ब्रह्मचारी
9:55अत्यंत क्रोधी
9:57प्रभु परशुराम है।
10:04इतना तो जानने का भी बोल रहा हूं।
10:08परंतु प्रभु
10:10एक बहुत ही शुभ अवसर पर पधारे हैं आप और
10:14यहां इतना क्रोध उचित नहीं।
10:23[संगीत]
10:25ये बालक इतना अशिष्ट क्यों है?
10:34प्रतीत होता है ये मेरे प्रकोप से अनपि
10:38आपके प्रकोप से कोय अनिके कैसे हो सकता है
10:41प्रभु
10:44इस प्रकार एक कार्तवीर्य के दोष के कारण
10:47कई निर्दोष योद्धाओं का अंत किया आपने।
10:56तो योद्धा कैसे भूल सकता है?
11:06दशरथ नंदन को भगवान परशुराम के प्रकोप को
11:09सहन करना ही पड़ेगा। देवी भगवान परशुराम
11:13ने पहले भी क्रोधित होकर राजाओं का संहार
11:15किया है और जिस प्रकार आज वो क्रोधित है
11:18वो शांत कैसे होंगे?
11:21दंड बालक
11:25भार्गव परशुराम जी को नमन
11:28ये
11:29कौशल नरेश महाराज दशरथ के पुत्र हैं।
11:32जिस प्रकार का यहां पे वार्तालाप चल रहा
11:34है वो यही चल रहा है। तुम नहीं जानते मैं
11:35कौन हूं? क्या नहीं जानता जानता हूं आप
11:38क्षत्रिय कुल नाशक अत्यंत क्रोधी बाल
11:39ब्रह्मचारी प्रभु परशुराम
11:43जिन्होंने एक कार्त के कारण अनेकों
11:46निर्दोष लोगों की प्राण लिए योद्धाओं के
11:50प्राण खैर प्रभु लक्ष्मण और प्रभु परशुराम
11:53जी के बीच का यह संवाद जो है ना ये कहीं
11:56ना कहीं यह प्रतीकात्मकता भी दिखाता है कि
11:58कैसे प्रभु नारायण अपने क्रोधी स्वभाव और
12:01अपने सौम्य स्वभाव के बीच में एक ही
12:05व्यक्ति को आने देते
12:06वो है केवल और केवल लक्ष्मण जी कि किस
12:10तरीके से लक्ष्मण जी दोनों चीजों को
12:11सेग्रगेट करके रखे हुए हैं। मैं सौम्य का
12:15सौम्य दर्शन जो है यानी प्रभु श्री
12:17रामचंद्र जी के गुण और अवतार है उनका कवच
12:19हूं और जो बाहरी आवरण है आप यानी क्रोध
12:22मोह लोभ कैसा क्रोध अत्यंत बलशाली होने के
12:27कारण क्रोध कैसा मोह धनुष का मोह भगवान
12:30मेरे आराध्य मेरे आराध्य अरे केवल आपके
12:33आराध्य थोड़ी ना है पेटेंट करा रखे हैं आप
12:36ऐसा नहीं होता है कि आराध्य सबके लेकिन
12:39शिवधनुष भंजन करने का अच्छा यहां परशुराम
12:41जी के प्रोस्पेक्टिव से अगर बात हो तो
12:43शिवधनुष के भंजन होने का मतलब यह है कि
12:46कोई अपने आप कुछ ज्यादा ऐठन्य है कोई आज।
12:49सबसे बड़ी बात यह है कि राजा जनक को जब
12:52उन्होंने कहा उठाने की बात हुई थी।
12:55चटाचाने की बात हुई थी।
12:56तोड़ा
12:56तोड़ने की बात नहीं हुई थी। और सबसे बड़ी
12:58चीज मुझे अजीब ये लगा कि जैसे ही वो पधारे
13:01कौन है? कौन है? तो वो राजा जी ना कहे ये
13:05ये हमने तो कुछ किया ही नहीं। हम तो यही
13:07देख रहे हैं।
13:08हम कोशिश तो हमने छोड़ दिया।
13:10हम तो उठेगा कहां? यही है।
13:13और उसके बाद जब लक्ष्मण जी ने आक्रोश
13:15दिखाया कि हां हां
13:17पहले आप बोलना तो बंद करिए तब तो कोई
13:20उत्तर देगा।
13:20हां उसके बाद
13:21कौन है अनिष्टकारी कौन है? कौन है ये
13:23असिस्ट आज अपनी मृत्यु प्यारी है लग रहा
13:27है आज इसको अपने
13:28मजा बहुत आ रहा है जिस प्रकार से अभी देखा
13:30नहीं आपने महर्षि विश्वामित्र ने नमन नमन
13:33नमन डायवर्ट कर नमन
13:35चलिए देखते हैं आगे कैसे प्रकरण होंगे
13:37क्योंकि बहुत बोलना उचित नहीं है देखने
13:39में ज्यादा आनंद आएगा फिलहाल इस एपिसोड को
13:40करते हैं समाप्त शीघ्र ही मिलेंगे
13:42के साथ
13:42तब तक के लिए राधे
13:48[संगीत]