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Siya Ke Ram Episode 59 Part 1 | Lord Parashuram Rages | Reaction

JV DEVOTIONAL · 1,235 words · 6 min read

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0:00[संगीत]

0:01जय श्री राम मित्रों स्वागत है आपका हमारे

0:03चैनल जेबी वीडियोस में स्वयंवर हुआ समाप्त

0:05यानी कि विवाह के जो पश्चात के पहले रीति

0:09रिवाज होते हैं वो हो गए हैं पूरे वरमाला

0:12ग्रहण कर ली है हमारे प्रभु श्री राम जी

0:14ने और उन्होंने यह आग्रह किया है अनुमति

0:17मांगी है राजा जनक से कि आप मेरे पिता और

0:20माता को सूचना भिजवा दीजिए ताकि मैं आगे

0:23की प्रक्रिया कर सकूं शादी की क्योंकि

0:26विवाह से पहले बड़ों की अनुमति लेना

0:29आवश्यक होता है और उसके बिना मैं आगे नहीं

0:31बढ़ सकता।

0:32अंकल जरा वो फ़ देना। वो पापा को फ़ करके

0:34बताना था कि इधर कुछ कांड हो गया है।

0:36अब राजा जनक ने भाई आगे प्रस्तावित कर

0:40दिया है कि आप सूचना भिजवाइए जल्दी से। हम

0:43भी जानते हैं कितना समय लगता है। लेकिन

0:45वहां पे भगवान परशुराम आ चुके हैं।

0:48अभी बेचारी इतनी मीठी-मीठी बातें हो रही

0:50थी। इतनी प्यारी-प्यारी बातें हो रही थी।

0:51इतनी मर्यादा वाली बातें हो रही थी। आगे

0:53अभी रुको। किसने तोड़ा ये शिवधन? वरमाला

0:56ग्रहण के पश्चात और तुरंत ये रुकावट

1:00रुकावट के लिए खेद है। कुर्सी की पेटी

1:02बांध ले क्योंकि लक्ष्मण जी और प्रभु

1:06परशुराम परशुराम जी का संवाद आने वाला है।

1:09और बहुत ही बेहतरीन होने वाला है ये।

1:11चलिए बिना विलंब के शुरू करते हैं एपिसोड।

1:1259 51

1:16[संगीत]

1:24पिछले वाले एपिसोड में तो ऐसा कलर

1:28सियाराम

1:33[संगीत]

1:38[संगीत]

1:40श्री राम और देवी सीता के मिलन की दिव्यता

1:44से समस्त ब्रह्मांड आनंदित हो उठा है।

1:48सचमुच

1:50स्वामी

1:52पर एक प्रश्न है जो मैंने आपसे पहले भी

1:56पूछा था कि श्री राम ब्रह्म है। ज्ञान

2:01स्वरूप है। अविनाशी है। वो सबके हृदय में

2:06वास करने वाले हैं।

2:09फिर उन्होंने मनुष्य का शरीर क्यों धारण

2:11किया?

2:15[संगीत]

2:20कारण अनेक हो सकते हैं।

2:24और कुछ ऐसे भी हो सकते हैं।

2:27जिन्हें कोई नहीं जान सकता।

2:30जब जब धर्म का आकर्ष होता है

2:34अधम अभिमानी राक्षस प्रबल होने लगते हैं।

2:40ऐसे में सज्जनों की पीड़ा हरने के लिए

2:44नारायण अवतरित होते हैं।

2:47जो असुरों का विनाश कर

2:51धर्म की स्थापना करते हैं।

2:55श्री राम के अवतरण का भी यही कारण है

2:57पार्वती।

2:58पर इस श्री राम के रूप में अवतरित होने का

3:01कोई विशेष कारण तो होगा।

3:06नारायण मानव रूप में एक ऐसा आदर्श जीवन

3:09व्यतीत करने आए हैं

3:12जिसमें वो यह सिद्ध करेंगे

3:15कि जटिल से जटिल परिस्थितियों में भी

3:19सत्य नैतिकता और धर्म का अनुसरण करना संभव

3:23है।

3:25वो यह प्रदर्शित करने आए हैं

3:28कि ऐसे व्यक्ति की सहायता करने देवता,

3:32मनुष्य और अन्य प्राणी निरंतर रूप से

3:36उपस्थित रहते हैं

3:39और उसके विजय सुनिश्चित करते हैं।

3:43फिर तो श्री राम और देवी सीता के इस मिलन

3:46का भी कोई ना कोई कारण अवश्य होगा।

3:49[संगीत]

3:53अवश्य पार्वती

3:56ये दोनों मानव रूप में अपने दांपत्य से

4:00पृथ्वी लोक का

4:02उद्धार करने अवतरित हुए हैं।

4:07दोनों अपनी निस्वार्थता

4:10और त्याग से

4:12दांपत्य की एक नई परिभाषा स्थापित करेंगे।

4:17[संगीत]

4:25आपका विश्वास आपकी नियति बन चुका है दीदी।

4:29अब मुझे इस पर विश्वास हो गया है कि आप

4:32दोनों के मिलन में अब कोई भी बाधा उत्पन्न

4:34नहीं हो सकती।

4:38चलो चलो।

4:42मौसम बदलने वाला है।

4:48[संगीत]

5:16ये

5:42इस लोकेशन का सही इस्तेमाल

5:52दिखाया

6:40भगवान परशुराम

6:47मिथिला में आपका स्वागत है।

6:54आज बात नहीं करूंगा भाई।

7:22कौन है जिसने मेरे गुरु भगवान शिव के इस

7:25धनुष को भंग करने का पाप किया?

7:32सारे राजा। कौन है जिसके साथ दुस्साहस

7:34करके अपनी मां को निमंत्रण दिया।

7:46सामने आए मेरे

7:54हे भगवन आप ही के आदेश अनुसार मैंने सीता

7:58का स्वयंवर आयोजित किया था। आप ही ने कहा

8:01था

8:02कि जो भी भगवान शिव के धनुष को उठाकर उस

8:05पर प्रत चढ़ाएगा वो।

8:12प्रत्यंचा चढ़ाने की बात हुई थी।

8:16धनुष भंग करने की नहीं

8:18ये बाप है।

8:26कौन है वो अहंकारी?

8:29सामने आए मेरे।

8:39आज इसकी मृत्यु निश्चित है।

8:59इतने गुनि जनों, महाऋषियों और एक ब्रह्म

9:01ऋषि की उपस्थिति में ऐसी दृष्टता दिखाई गई

9:05और आप सब मौन रहे।

9:13कोई एक वीर नहीं इस पूरी सभा में जो मुझे

9:17सत्य कहने का साहस कर सके।

9:22मुनिवर

9:26आपके प्रश्न समाप्त ही नहीं होते

9:30तो कोई उत्तर कैसे दे?

9:37और इतने क्रोधित भी हैं आप।

9:39कौन है ये मूर्ख बालक?

9:42अरे मूर्ख बालक काल वक्त बोलत।

9:44तू नहीं जानता कि मैं कौन हूं।

9:46मुझे भलीभांति ज्ञात है कि आप कौन है।

9:50क्षत्रिय कुल नाशक बाल ब्रह्मचारी

9:55अत्यंत क्रोधी

9:57प्रभु परशुराम है।

10:04इतना तो जानने का भी बोल रहा हूं।

10:08परंतु प्रभु

10:10एक बहुत ही शुभ अवसर पर पधारे हैं आप और

10:14यहां इतना क्रोध उचित नहीं।

10:23[संगीत]

10:25ये बालक इतना अशिष्ट क्यों है?

10:34प्रतीत होता है ये मेरे प्रकोप से अनपि

10:38आपके प्रकोप से कोय अनिके कैसे हो सकता है

10:41प्रभु

10:44इस प्रकार एक कार्तवीर्य के दोष के कारण

10:47कई निर्दोष योद्धाओं का अंत किया आपने।

10:56तो योद्धा कैसे भूल सकता है?

11:06दशरथ नंदन को भगवान परशुराम के प्रकोप को

11:09सहन करना ही पड़ेगा। देवी भगवान परशुराम

11:13ने पहले भी क्रोधित होकर राजाओं का संहार

11:15किया है और जिस प्रकार आज वो क्रोधित है

11:18वो शांत कैसे होंगे?

11:21दंड बालक

11:25भार्गव परशुराम जी को नमन

11:28ये

11:29कौशल नरेश महाराज दशरथ के पुत्र हैं।

11:32जिस प्रकार का यहां पे वार्तालाप चल रहा

11:34है वो यही चल रहा है। तुम नहीं जानते मैं

11:35कौन हूं? क्या नहीं जानता जानता हूं आप

11:38क्षत्रिय कुल नाशक अत्यंत क्रोधी बाल

11:39ब्रह्मचारी प्रभु परशुराम

11:43जिन्होंने एक कार्त के कारण अनेकों

11:46निर्दोष लोगों की प्राण लिए योद्धाओं के

11:50प्राण खैर प्रभु लक्ष्मण और प्रभु परशुराम

11:53जी के बीच का यह संवाद जो है ना ये कहीं

11:56ना कहीं यह प्रतीकात्मकता भी दिखाता है कि

11:58कैसे प्रभु नारायण अपने क्रोधी स्वभाव और

12:01अपने सौम्य स्वभाव के बीच में एक ही

12:05व्यक्ति को आने देते

12:06वो है केवल और केवल लक्ष्मण जी कि किस

12:10तरीके से लक्ष्मण जी दोनों चीजों को

12:11सेग्रगेट करके रखे हुए हैं। मैं सौम्य का

12:15सौम्य दर्शन जो है यानी प्रभु श्री

12:17रामचंद्र जी के गुण और अवतार है उनका कवच

12:19हूं और जो बाहरी आवरण है आप यानी क्रोध

12:22मोह लोभ कैसा क्रोध अत्यंत बलशाली होने के

12:27कारण क्रोध कैसा मोह धनुष का मोह भगवान

12:30मेरे आराध्य मेरे आराध्य अरे केवल आपके

12:33आराध्य थोड़ी ना है पेटेंट करा रखे हैं आप

12:36ऐसा नहीं होता है कि आराध्य सबके लेकिन

12:39शिवधनुष भंजन करने का अच्छा यहां परशुराम

12:41जी के प्रोस्पेक्टिव से अगर बात हो तो

12:43शिवधनुष के भंजन होने का मतलब यह है कि

12:46कोई अपने आप कुछ ज्यादा ऐठन्य है कोई आज।

12:49सबसे बड़ी बात यह है कि राजा जनक को जब

12:52उन्होंने कहा उठाने की बात हुई थी।

12:55चटाचाने की बात हुई थी।

12:56तोड़ा

12:56तोड़ने की बात नहीं हुई थी। और सबसे बड़ी

12:58चीज मुझे अजीब ये लगा कि जैसे ही वो पधारे

13:01कौन है? कौन है? तो वो राजा जी ना कहे ये

13:05ये हमने तो कुछ किया ही नहीं। हम तो यही

13:07देख रहे हैं।

13:08हम कोशिश तो हमने छोड़ दिया।

13:10हम तो उठेगा कहां? यही है।

13:13और उसके बाद जब लक्ष्मण जी ने आक्रोश

13:15दिखाया कि हां हां

13:17पहले आप बोलना तो बंद करिए तब तो कोई

13:20उत्तर देगा।

13:20हां उसके बाद

13:21कौन है अनिष्टकारी कौन है? कौन है ये

13:23असिस्ट आज अपनी मृत्यु प्यारी है लग रहा

13:27है आज इसको अपने

13:28मजा बहुत आ रहा है जिस प्रकार से अभी देखा

13:30नहीं आपने महर्षि विश्वामित्र ने नमन नमन

13:33नमन डायवर्ट कर नमन

13:35चलिए देखते हैं आगे कैसे प्रकरण होंगे

13:37क्योंकि बहुत बोलना उचित नहीं है देखने

13:39में ज्यादा आनंद आएगा फिलहाल इस एपिसोड को

13:40करते हैं समाप्त शीघ्र ही मिलेंगे

13:42के साथ

13:42तब तक के लिए राधे

13:48[संगीत]

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