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0:00बेहतर होना है तो जिंदगी को थोड़ा कठिन
0:04रहने दो। आराम तलब मत बनो। कुछ कष्टों का
0:08वरण स्वयं ही करो।
0:11जूझते हुए आदमी में एक गरिमा होती है।
0:14संघर्षशील रहने पर एक तेज विकसित होता है
0:17और आराम में प्रमाद में
0:20चेतना सिकुड़ जाती है। जीवन संकुचित हो
0:23जाता है। कठिनाइयां
0:26पहले से ही मौजूद है। उनको दबाव छुपाओ मत।
0:30और अगर कभी लगने लगे कि कठिनाई तो कोई है
0:32ही नहीं तो समझ लो जीवन में कुछ गड़बड़ हो
0:34रही है। कठिनाई ढूंढो होगी। तुम्हें दिख
0:38नहीं रही