Full transcript
0:00[संगीत] लुट हमारी संस्कृति
0:03कि हमारे संस्कार मैं सदा रहे हो
0:08कि भारत के महान ग्रंथों और काव्यों का शो को सब्सक्राइब करें तिलक कई तरीके की LED
0:17लाइट आपके घर ऑफिस के लिए रिलाई इट्स इंडिया प्राइस है लंकेश यदि आपको अपने
0:24युद्धों की शक्ति पर बड़ा मान है तो मैं श्री राम की ओर से आपके समस्त योद्धाओं को
0:29चुनौती देता हूं मैं अपने पेन आपके इस तरह बार में जवाब देता हूं यदि आपका कोई
0:36योद्धा इस कार को धरती से उठा सके तो मैं अपने स्वामी की ओर से यह वचन देता हूं यह
0:42वह अपनी हार मान कर इस लंका से ऑफिस चले जाएंगे इस
0:48की जय श्री राम जय
0:54हुआ था कर दो
1:01हुआ है कर दो
1:08कर दो हुआ है
1:20[संगीत] कर दो
1:25कर दो के अधीन है
1:35और कूल्हों राजपूत जिसका राजपूत अपने स्वामी श्री राम प्रभु का दूध और एक
1:42उद्देश्य लंका नरेश रावण को अपने स्वामी श्री राम प्रभु का संदेश देने कोई गणेश
1:50गणपति की अनुमति मिले पानी आगे बढ़ सका गए बाल उधर
1:56एक फोन है शत्रु का दूध है कि सुधीर वंचित कर दो शत्रु का दूसरा
2:05पैनकेक को सूचित कर दो शत्रुघ्न कोशिश करो सचिव गर्म दूध है चैनल है को सूचित कर दो
2:21कि अ हुआ है
2:37कर दो
2:412018 शत्रु का दूध है अंदर आने की आज्ञा चाहता है आधा हो परंतु उससे कहा कि आप
2:49अपनी सेना को पीछे लौटा दे तब पत्ता द्वार खोले जाएंगे यहां पर सैनिक बल से कहा कि
2:56पीछे हट जाएं फिर नगर का द्वार खुलेगा तब यह सब पीछे हट जाए और
3:11कर दो [संगीत]
3:17हुआ था
3:24झाल
3:30कर दो शो मोर
3:35और सुनाओ
3:43है और खोले गए हैं कि अ
3:59कर दो कर दो
4:10कि अ [संगीत]
4:18कि चांद सिध्दू ने राख लाल धीर व शांति संधि रौशनी हनक थ्रू अनिल नीति के गढ़ में
4:38एक तिहाई प्रवेश निषेध गर्भ में नौकरियां पीर विशेष तुम्हारा शर्मिला चाहते हो झूठ
4:53को शास्त्र की आवश्यकता नहीं होती अपनी गधा यही 2 ऊ
4:59मैं जय श्री राम जी
5:08मैं जीतू राज कुमार एंड की जगह इसका क्या संकेत है मुझे दूध से अपने शस्त्र छोड़ने
5:15के लिए कहा होगा इसलिए राजकुमार ने अपनी ददाहू लेना देकर अपनी सेना के बाद भेज दी
5:22है हुआ है
5:27कर दो को महाशक्तिमान को त्यौहार रहे शेयर
5:37पृथ्वी में वृद्धि था विरुधुनगर हो कोई ना का अलार्म अरे जग में और बुने कोई निर्मल
5:56सुनहरे कुंठा बहन अध्यू थीम शरीर को हम सुनो पृथ्वी धंस जाए रसातल में रिजवी पर
6:19जो धर्म को पुनः कि अ कर दो
6:31[संगीत] कर दो
6:35कि अक्षय शक्तिदल बीच अंगद चला है ऐसे निर्भय सिंह जैसे हाथियों के दल में साहस
6:45सफर लिए राम का आधार लिए खुद पढ़ जैसे कोई सागर तनमोय देर रुक न किसी करो कि बढ़ता
6:55ही चला गया है सूर्य का प्रकाश जैसे घने जंगल में राम जी की जन्म है बड़े बड़े
7:01दबंग दिशा 19 विवेक बुद्धि बल में राम जी की जन्म है बड़े-बड़े जोधा अकबर खान गत्ता
7:09एक लंबी अवधि में है हुआ है
7:16कि अ हुआ है
7:32हुआ है हुआ है
7:39कि लंकेश्वर की जय हो ए क्या है महाराज शत्रु का एक भूत आया है
7:46उसका कहना है कि ऐसा प्रस्ताव लाया है जिससे युद्ध करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी
7:51और लंका में शांति बनी रहेगी ओम शांति का प्रस्ताव लाया है वह और आप
8:00इधर से पहले शांतिदूत भेज दिया अभी तो परिचय दास की चमक तुमने देखी नहीं पहले ही
8:08डर गए थे कि म्यूचुअल को
8:17कि जो आज्ञा महाराज जी
8:22हुआ है
8:25हुआ है
8:29कर दो
8:33कर दो
8:36कर दो
8:40कर दो
8:48लुट
8:52कि आप राजा की बात करते हैं लंकेश्वर मार्जिन का दूध हूं तो राजाओं के राजा है
9:06राजेश्वर है वह केवल भूमिखंड कई नहीं व्रत तीनों लोकों के स्वामी है देवताओं वेदों
9:14और विधि कभी वहीं है मैं उन्हें त्रिलोकेश्वर का श्री राम का राय दूध
9:20बाहरी है हर है या ब्रह्म है कौन है वह तुम इतने बड़े-बड़े वार्तालाप जिसके लिए
9:27सुना रहे हो उस तुम्हारे राम की वास्तविकता केवल इतनी ही है कि वह एक
9:33भटकता हुआ वनवास है जिसे अब तरह से निकाल दिया गया है
9:37और बताओ उस भिखारी लिखकर पसंद देकर भेजा है तुम्हें
9:42कि महाराज रावण आपने मेरे स्वामी राज राजेश्वर श्री राम का अपमान किया है इसलिए
9:49मुझे नियमानुसार सभा से चला जाना चाहिए कि गाय दूध का सम्मान उसके राजा का सम्मान
9:56होता है इसलिए राजपूत का प्रथम कर्तव्य हैं कि वह अपने सम्मान की रक्षा करें
10:02क्योंकि मेरे अपमान का घूंट होगा मेरे स्वामी राज राजेश्वर श्री राम का अपमान
10:08इसलिए मेरे लिए अब दो ही रास्ते हैं पहला तो यह कि जहां मुझे सम्मानपूर्वक पसंद
10:14नहीं दिया गया तो सब ही चला जाऊं परंतु जो मैं संदेश लाया हूं वह इतना महत्वपूर्ण है
10:21यह उस पर लंका लंका निवासियों और सारी राक्षस जाति का जीवन और मरण निर्भर है
10:29इसलिए मेरे लिए दूसरा रास्ता यही है कि मैं इस महाराज रावण आपने मेरे स्वामी राज
10:37राजेश्वर श्री राम का अपमान किया है इसलिए मुझे नियमानुसार सभा से चला जाना चाहिए
10:44कि गाय दूध का सम्मान उसके राजा का सम्मान होता है इसलिए राजपूत का प्रथम कर्तव्य है
10:51कि वह अपने सम्मान की रक्षा करें क्योंकि मेरे अपमान का अर्थ होगा मेरे स्वामी राज
10:57राजेश्वर श्री राम का अपमान इसलिए मेरे लिए अब दो ही रास्ते हैं पहला तो यह कि
11:04जहां मुझे सम्मानपूर्वक आसन नहीं दिया गया वह सब ही चला जाऊं परंतु जो मैं संदेश
11:10लाया हूं वह इतना महत्वपूर्ण है कि उस पर लंका लंका निवासियों और सारी राक्षस जाति
11:18का जीवन और मरण निर्भर है इसलिए मेरे लिए दूसरा रास्ता यही है कि वह इस सभा में
11:25अपने लिए एक राज्य उचित आसन स्वयं ही निर्माण कर लो जिस पर सम्मानपूर्वक बैठकर
11:32मैं अपने राजा का संदेश आप तक पहुंचा सकूं
11:37जय श्री राम जी
11:45[संगीत] लुट
11:56[संगीत]
12:02लुट [संगीत]
12:04[प्रशंसा] [संगीत]
12:13कि वीरवार को
12:20अ प्रेगनेंसी
12:24की प्रॉब्लम सैमसंग अंश कहीं देखे कि ऐसा
12:34ए राजा ऐश्वर्या-अभिषेक पेशेंस दिन तीनों लोकों के राजा के कछुए को बैठन को नहीं
12:52भेद तजुर्बा सन आधी लगी अनगिनत कि फेंग हुए दुर्लभ दीवार भरे शुभ एक्शन हु विन ना
13:11कहीं कूर्च रहो 300 दाढ़ी लिए आइडिया निभ का वासन डायरियो नीलभ का टो सनम रे
13:31[संगीत] कि हे दशग्रीव अब मेरे आने का कारण सुनो ओ
13:39आज मैं आपके हित और भलाई के लिए श्रीरघुवीर का दूत बनकर आया हूं बाहर आज
13:46मेरे पिता से आपके मित्रता थी इसलिए भी मैं आपको भले समृद्धि देने आया हूं
13:53कि आपका उत्तम कुल है आप 19th ऋषि के पौत्र है आपने शिवजी और ब्रह्माजी की पूजा
14:02करके उन्हें बहुत से भर पाए हैं और आपने सब काम सिद्ध की है
14:08है उसी शक्ति से आपने समस्त लोकपालों की जीत लिया है परंतु फिर आपने किसी संदेश
14:16अथवा कमेटी के कारण उन शक्तियों का दुरुपयोग करके ऋषि देवता गंधर्व अप्सरा
14:23नाग यश और राजाओं का बड़ा अपराध किया है उसी राज्य से अंधे होकर आप अब जगतजननी
14:31सीताजी को हर लाए हैं कि जब पाप कार इस प्रकार अपनी पराकाष्ठा
14:37को पहुंच जाते हैं तो दैवी शक्तियों को पाप का नाश करना ही पड़ता है परंतु उस नाश
14:45के साथ ही पापी के घोर दुर्गति होती है उसका अंत बड़ा भयानक होता है
14:52है और मृत्योपरांत उसकी दशा अत्यंत दुखदाई होती है
14:57कि आपके पाप आज आपको उसी सीमा पर ले आए हैं
15:04आज मैं आपके हित के लिए आपको यही प्रमाण देने आया हूं यह एक ऐसा क्षण है जब आप
15:11चाहे तो श्रीराम से क्षमा मांगकर उनकी शरण में चले जाए तो
15:17ओम श्री राम सियाग कि सच्चे हृदय से चरण में आने वाले के दोस्तों को नहीं देखते
15:23इसने शरण में आकर पुकारा कि मेरी रक्षा कीजिए प्रभु मिल रक्षा कीजिए ऐसी आई पुकार
15:30सुनते ही प्रभु अपने शरणागत को अभय प्रदान कर संसार के समस्त दुखों से मुक्त कर देते
15:36हैं और उनके बारे में तीनों को एक साथ भस्म कर
15:41देने की शक्ति होते हुए भी एक सच्चे भी की भांति मैं आपको नहीं छोड़ते इसलिए आप मेरी
15:48मानिए इसी समय गले में कुल्हाड़ी डालकर और दांतों में तिनका दबाकर अपने समर्थकों के
15:55साथ श्री राम की शरण में जाकर माता जानकी को बड़े आदर के साथ उनके पति को लौटा दें
16:01[संगीत] श्री राम से उदार और कृपालु है कि आपके
16:06शमा शब्द कहने से पहले ही वह आपको क्षमा कर देंगे अ
16:10एक अच्छा कि हमारे क्षमा मांगने पर वह क्षमा कर
16:15देंगे कि इस बात का तुम हमें विश्वास दिलाते हो
16:20कि हम चीता को लेकर अब तक तुम सहित दान तो मीटिंग के दबाएं उनसे क्षमा मांगने के लिए
16:28इतनी दूर उनके शिविर तक जाएं और वह हमेशा ध्यान रखें और बंदी बना लें तो सारा जग हम
16:35पर हंसेगा अ को इस बात का विश्वास हमे कैसे हो
16:40कि महाराज रावण कब ऊपर विश्वास रखना ही पड़ता है इससे प्रभु पर पूर्ण विश्वास
16:46नहीं होता उसे प्रभु की प्राथमिक कभी नहीं हो सकती आप को आश्वस्त करने के लिए मैं
16:52इतना बता दूं कि जब वानर सेना ने तो सज्जित होकर लंका को चारों ओर से घेर लिया
16:58और सब लंका पर धावा बोलने के लिए श्री राम प्रभु की आज्ञा की प्रतीक्षा कर रहे थे तो
17:06उस समय उन करुणा के सागर ने मुझे बुलाकर स्वयं कहा कि जाओ रावण से जाकर कहो कि मैं
17:13युद्ध की ज्वाला में लंका के निर्देश प्रदान किया होती नहीं देना चाहता यदि वह
17:19जानती को पूरे सम्मान के साथ मेरे हवाले करते तो मैं अभी उसे क्षमा कर दूंगा और
17:25लंका से वापस चला जाऊंगा वहां शांति चाहता हूं तो मेरे शांतिदूत बनकर महाराज रावण के
17:32पास जाओ कि यह बहुत राम ने स्वयं कहीं तुम मुझे
17:38मेरी सीता दे दो मैं वापस चला जाऊं हां भाई युद्ध नहीं करूंगा
17:44कि मुझे शांति चाहिए जी महाराज उन्होंने स्वयं कहा था आधार यही बात तो हम तुम्हारे
17:52मुंह से सुनना चाहते थे यही बात राम में कहीं कि मैं युद्ध नहीं करूंगा आ मुझे
17:58शांति चाहिए मूर्ख इस वक्त जयराम की करुणा दिखाई दी उसका भय दिखाई नहीं दिया कि
18:06रणक्षेत्र में रावण के सामने आने के विचार से उद्धारे के हाथ-पांव कांपने लगे जिसकी
18:14प्रिय पत्नी को कोई हर के ले गया हो उस शत्रु के लिए इतने महीनों से उसके रक्त
18:20में प्रतिशोध की कोई ज्वाला नहीं बढ़ती तो फिर वह शक्ति का रक्त नहीं होगा
18:26इस मुद्दे पर गंभीर चोट भिखारियों की भांति हम तेल सीता की भीख मांग रहा है
18:32उससे जाकर कह दो इस सीता कोई बिछा में देने वाली वस्तु नहीं है वैसे अनमोल रतन
18:38को तो अब तक बाहुबल से जीता पड़ता है माता सीता को उन्होंने अपने बाहुबल से ही जीता
18:44था महाराज शायद आप भूल गए कि वह शिव धनुष जिसे श्री राम प्रभु ने तीन के की भांति
18:50उठाकर तोड़ दिया था उसी धनुष पर अपने बाहुबल की परीक्षा करने कभी आप भी गए थे
18:57और सुना है वह आपसे उठाया भी नहीं गया था
19:03प्रतिशोध वीरता की निशानी नहीं होता और कार में शत्रु को जमा करने का साहस नहीं
19:09होता इन दंतकथाओं में क्या रखा है मूर्ख वानर तुमने कहा था तुम्हारे पिता हमारे
19:16विकल्प है परंतु अपने कुल का परिचय नहीं दिया तुमने महाराज देवराज इंद्र के पुत्र
19:23महाराज बालिका में पुत्र मेरे एवं अन्य
19:29तो बड़े अजीब एकदम तथा सुनी है कि मेरे पिता महाराज बाली ने एक बार रावण नाम के
19:36किसी प्राणी को अपनी पूंछ में बांधकर कई पर्वतों पर घूमते रहते थे यही वाली है
19:43जिन्होंने अमृत मंत्र के समय समु्द्र को मथने में सहायता की थी तुम वानरराज बालि
19:49के पुत्र हो उनकी हमारी को मित्रता की संधि हमें यह देखकर अत्यंत दुख हो रहा है
19:56गैस से महाबली के पुत्र होकर एक उच्च नरखेड़ तुम दूध बनकर स्थिति प्रसन्नता
20:02दिखा रहे हो जो तुम्हारे पिता का हत्यारा है उसके पीछे सेवकों की भांति हाथ जोड़ पर
20:09चल रहे हो तुमने अपने वश को लक्षित कर दिया है अगर हो सकता है बाली के मरने के
20:17बाद तो भी के डर से किसी ने विचार यंग तथा दिया हो और यह निशान व्यवस्था में अपने का
20:24का और पितृहंता की सेव लाइक करने पर विवश हो गया हो कि
20:29अपनी बात है तो हमारे वक्त हुए तुम अपने आप को निशान मत संभोग अंगन तुम हमारे
20:36पुत्र समान हो हम्म तुम्हें तुम्हारा राज्य वापस दिलायेंगे तुम्हारे पिता की
20:44गति पर तुम्हारा ही अधिकार है तुम अपने आपको व्यस्त मत समझिए अब मैं हृदय में
20:50प्रतिशोध की ज्वाला को कुछ रहमत तुम राम के विश्वस्तरीय उसका लाभ अकेले में चुपचाप
20:59उसका वध करके अपने पिता की हत्या का बदला ले यही एक वीर पुत्र का कर्तव्य है
21:13ब्लुटूथ [संगीत]
21:18कर दो
21:27हुआ है दशानन आप बार-बार वीरता का बखान कर रहे हैं परंतु सच्ची वीरता के दून नहीं
21:33जानते महाराज प्रतिशोध पिता की निशानी नहीं होता और कर सभी शत्रुओं को क्षमा
21:40करने का साहस नहीं कर सकता कि यदि श्री राम प्रभु आपके अपराधों को
21:48भूलकर आपको अपनी शरण में आश्रय प्रदान कर दे तो यह उनकी महानता है
21:54कि उनकी उदारता है उनकी परमवीर तय करता नहीं
22:00अजय को थे जिन्होंने अपने बाणों से आपकी नानी
22:04ताड़का आपके मामा मारीच आपके भाई खर दूषण गधों को आप की विशाल सेना समेत अकेले ही
22:13मार दिया उन्हें शक्तिहीन मत समझिए वह तीनों लोकों के स्वामी है
22:19कि मेरे महाबली पिता ने मरते समय मुझे यह खुद बताया था और आज्ञा दी थी कि मैं उनके
22:26श्री चरणों की सेवा करता रहूंगा इसलिए आप को मुझ पर दया करके मेरी सहायता की
22:33आवश्यकता नहीं अब अपने आप पर दया कीजिए और हो सके तो श्री राम की शरण में जाकर अपने
22:40देश और राज्य जाति का नाश होने से बचा लीजिए पार्ट
22:49हुआ है
22:52इस पुनीत खोज चुका यह प्रणाम मतिमंद तूने रावण की शक्तियों को नहीं पहचाना तरह की
23:01ओर जाता है तो आकाश में लोकपाल भय से कांपने लगते हैं
23:06और पिंग और स्वयं कैलाश उठा लिया था उन हिस्सों के फड़कने बात रखे देवता गंधर्व
23:13और नक्षत्र भी भय से सांस रोक लेते हैं मैं तुम्हारी तनाव में था यह युद्ध तो
23:20बताओ किसके साथ युद्ध करने में रावण को आनंद मिले थे
23:25कि आपने सत्य कहा हमारी सेना में ऐसा कोई नहीं जो आप से लड़ने में शोभा पाए ठीक
23:33कहती है कि प्रीति और बराबर वालों से करना उचित है आप जैसा पापी कामी किसी आलू छुपकर
23:43धोखे से पराई स्त्री को तुरंत फिर ऐसे नीच के साथ दूध करके इसकी शोभा बढ़ेगी सावधान
23:51अनुरोध यह मत समझो कि तुम दूध बनकर आए हो इसलिए कुछ भी कहो हमारे आंखों बच्चे लगे
24:03थे कुछ दिल की कुछ बड़ी बाधा होती है यदि
24:08रावण के स्थान स्थित इमरती आगे बढ़ा तो यही तेरा शर्ट खराब होता है
24:15है भाग्य यदि तुझे रावण की सहायता नहीं चाहिए तो उसके क्लॉक सेट करो रावण रावण
24:22कितने बार इस्लाम को दोहराएंगे महाराज मैं यह जानना चाहता हूं कि जगत में कितने रावण
24:28पर एक तेरा उन लोगों के नाम अपने कानो से सून रखे हैं महाराज इनमें से आप कौन से
24:35रावण है एक रावण तो मैंने सुना है कि और राजा बलि को जीते अस्पताल में गया था वहां
24:43बच्चों ने उसे गुस्सा में फांसकर बहुत पीटा था तब वाली नहीं उसे दया करके छुड़वा
24:50दिया है है और एक रावण के विषय में मैंने सुना है
24:54कि सशस्त्र बलों ने एक जंतु की भांति कीड़ा समझकर पकड़ लिया था तब पुलिस ने उसे
25:03छुड़वा लिया था मैं एक और रावण की बात कहने में संकोच
25:08लगता है क्योंकि कहते हैं मेरे पिताश्री उसे अपनी का ख्याल दबाकर अपनी पूजा करते
25:15रहे ऐसे शिविरों में से आप कौन से रावण है महाराज बुजुर्ग हम वही बलवान रावण है कि
25:29गुर्जरों की लीला कैलाश पर्वत जानता है हमारी शूरवीरता को उमापति महादेव की जय
25:35जयकार अब शेषा रूपी पुष्प चढ़ाकर शेष हमने जी की पूजा के भारी भुजाओं का पराक्रम
25:42दिगपाल जानते हैं कि हमारी छाती की कठोरता को शो दिशाओं के
25:49प्रति जानते हैं उन दिग्गजों के डार्क पिस्ता की से टकरा टकरा कर तू हम वही
25:55जगप्रसिद्ध प्रतापी रावण है इसके चलने से पृथ्वी इस प्रकार डोलती कैसे नाव में कोई
26:02था कि सवाल कुछ रावण के सामने पुष्प के दाम की बात करता है चार्ट वानरों की
26:10सहायता से कुत्ते समुद्र पर सेतु बांध दिया यही उसकी पड़ता है
26:17है समुद्र को तो पक्षी भी लॉन्ग लेते हैं कुत्ते में सभी शूरवीर रही हो जाते हैं
26:21यदि तेरा स्वामी ऐसा ही होता है तो दूध किसलिए भेजता है शत्रु से संबोधित करते
26:28उसे लात नहीं आती महाराज लग जाए तो केवल आपका ही गुण है इसी लज्जा के मारे आप
26:35बार-बार अपने गुण गाते नहीं थकते है लंकेश सामने डरकर मुझे दूध बनाकर संधि करने नहीं
26:42भेजा श्रीरघुबीर ने यह सोच कर भेजा है कि शनिवार को मारने से शेयर की शोभा नहीं
26:49होती इस कारण वह तुम पर ध्यान करना चाहते हैं परंतु तुम दया के पात्र नहीं हो
26:58कि अब श्री राम के अंतिम चेतावनी तुम्हें सुनाता हूं उन्होंने कहा है कि मैं
27:04तुम्हारे अपराधों का दंड देने के द्वार पर आ गया हूं ब्रह्म के के कारण जो भी उस के
27:13नष्ट होने का अब समय आ गया है राघवं सीता को लेकर मेरी शरण में नहीं आए तो मैं इस
27:23पृथ्वी को लक्षित कर दूंगा मैं कि जिस पल के भरोसे तुमने छल से सीता का
27:30हरण किया है उस फल को आज युद्धभूमि में दिखाओ मैं मंत्री पुत्र और बंधु-बांधवों
27:38सहित तुम्हारा व्रत करूंगा क्योंकि तुम्हारे मारे जाने से तीनों लोक निश्चित
27:44हो जाएंगे कि इस रावण रूपी जहाज के डिब्बे का समय आ
27:50गया है कि अब भी समय है इसे अच्छी तरह की शरण में
27:55आना हो वहां जाए तो हराम है
28:05कि अब उसने अपने जीने का अधिकार खो दिया है
28:09कि किसी सभा में स्थित घटनास्थल झेल रावण की शक्ति का बहुत खराब है
28:16की हत्या का पालन हो हेलो महाराज यह बेचारे आपकी शक्ति मुझे क्या दिखाएंगे
28:30आपको अपनी शक्ति दिखाता हूं जय श्री राम जय श्री राम दो
28:44[संगीत] [प्रशंसा]
28:48कर दो कर दो
28:56कर दो कर दो
29:02[संगीत]
29:09हुआ है लंकेश यदि आपको अपने युद्धों की शक्ति पर बड़ा मान है तो मैं श्री राम की
29:15ओर से आपके समस्त योद्धाओं को चुनौती देता हूं मैं अपना पैन आपके इस तरह बार में
29:22जवाब देता हूं यदि आपका कोई योद्धा इस कार्य को धरती से उठा सके तो मैं अपने
29:28स्वामी की ओर से यह वचन देता हूं यह वह अपनी हार मान कर इस लंका से ऑफिस चले
29:34जाएंगे अ की जय श्री राम जय हो
29:45मैं समझी प्रताप प्रणाम कपिल को पास संभावना माझी पान करि पद रोपा था
30:02कि आज हम चरन सकसि तट पाड़ा बारे में तो फिर आप ही राम सीता मैं हार हुई ए
30:23कि मैं कामों घड़ी गया खंबा हमारा हिम्मत हो तो यह नुस्खा रोहन गज्जर बीच समाचारों
30:49को रे राम जी की जय शंकर दिशा हमेशा तारों को खोलो
30:57लुटेरे ने पिछली डिफिकल्ट है है कि के
31:23में पिछोला वे अपनी सारी सजदी लगावैं पद नहीं जी के पीर मुस्कावे मोर राम जी की जय
31:36हो अब भज दादी नहीं दीजिए वीर मुद्दा वे बोले राम जी की जय हो
31:57[संगीत]
32:03कर दो MP3
32:15कर दो कर दो
32:27कर दो
32:35[संगीत]
32:39कर दो कर दो
32:51कर दो कर दो
33:11कर दो
33:16लुट
33:23शो मोर
33:28कर दो कि अ
33:44[संगीत]
33:54MP3
34:00कि अ कर दो
34:29कि एक व्यक्ति जो लावै अपनी सारी शक्ति लगा विपदा नहीं दिखे पीर मुस्क़ा ब्रॉड और
34:41राम जी की जय हो भगत नहीं दीजिए वीर सुनावै भोले राम जी की जय हो
35:03नींद
35:07प्रॉब्लम आना हर्षित हो उठे जुड़ी हुई घटना सख्त नहीं दो ले देते सतवंती नारी को
35:21मन नहीं टिके रहते साधु ब्रह्मचारी को अटल विश्वास जैसे प्रभु के पुजारी को पग्ग है
35:35अटल यह अंगूर और बलधारी को तमाचे अमृत सवारियां ओम शुभेच सारी नहीं पढ़ाई आइकॉन
35:53रामभरोश भोले राम जी की जय राम जी [संगीत]
36:02कर दो
36:08MP3 डीजे
36:12कि जू [संगीत]
36:18अजय को
36:24कर दो कि अ
37:05लुट
37:08कर दो
37:16कर दो कि अ
37:33[संगीत] कर दो
37:46कर दो अजय को
37:52कर दो कर दो
37:58[प्रशंसा]
38:04और सुनाओ [प्रशंसा]
38:16कर दो
38:21मैं भूत जन पकड़ने हैं तो जाकर श्रीराम के चरण पकड़ इनके चरणों में मुक्ति का द्वार
38:28है मेरा कार्य करता है
38:33कि मेरी चुनौती आपको योद्धाओं को थी आपको नहीं आपको तो फिर यही कहूंगा श्रीराम के
38:40चरण पकड़ लीजिए तो आप का कल्याण हो जाएगा कि मैं कल सूर्योदय तक का समय देता हूं
38:46उसके पश्चात लंका पर चढ़ाई कर दी जाएगी
38:53कर दो [संगीत]
39:03कि यह इसका मुकुट है यह तो वह राजा का मुकुट है तो पंखा जी
39:15के प्रमुख जनरल वी [संगीत]
39:29कर दो अजय को
39:37[प्रशंसा]
39:41अजय को