Full transcript
0:01[संगीत]
0:05पुराने जमाने की बात है जब बादशाहों का
0:07राज था और लोग सादा जिंदगी गुजारा करते
0:10थे। एक छोटे से गांव में एक गरीब लकड़हारा
0:13रहता था जिसका नाम यूसुफ था। वो हर रोज
0:16जंगल में जाकर लकड़ियां काटता और बाजार
0:19में बेचकर अपने खानदान का पेट पालता था।
0:21यूसुफ की बीवी फातिमा और घर में दो छोटे
0:24बच्चे थे। घर में खाने के लिए कुछ खास
0:26नहीं था। लेकिन यूसुफ फिर भी कभी शिकायत
0:29नहीं करता था। वो हमेशा कहता था कि अल्लाह
0:32ताला जो भी देता है उसी में बरकत होती है।
0:35फातिमा भी सब्र से काम लेती थी। एक दिन
0:37यूसुफ जंगल में लकड़ियां काटने गया। उसने
0:40देखा कि आसमान में बादल छाए हुए हैं। वह
0:43जल्दी-जल्दी लकड़ियां काटने लगा ताकि
0:45बारिश आने से पहले घर पहुंच सके। लेकिन
0:47अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। वो एक दरख्त
0:50के नीचे छुप गया। लेकिन बारिश इतनी तेज थी
0:53कि उसकी कटी हुई लकड़ियां बारिश में भीग
0:55गई। एक बार तो वह परेशान हो गया कि यह
0:58गीली लकड़ियां अब कौन खरीदेगा। लेकिन फिर
1:01उसने अपने आप से कहा कि यह सब अल्लाह की
1:03मशीत है। इसमें भी जरूर कोई हिकमत होगी।
1:06इसलिए सबर करना चाहिए। जब बारिश रुकी
1:10यूसुफ अपनी लकड़ियां उठाकर बाजार की तरफ
1:12चल पड़ा। रास्ते में वह ख्यालों में डूबा
1:14हुआ था और फिकरमंद था कि आज शायद लकड़ियां
1:18नहीं बिकेंगी। बीवी इंतजार में होगी और
1:20बच्चे भी भूखे होंगे। बाजार पहुंचकर यूसुफ
1:23ने अपनी लकड़ियां नीचे रख दी। तमाम
1:26दुकानदार और खरीदार यूसुफ की गीली
1:28लकड़ियां देखकर मुंह बनाने लगे। कोई कहने
1:31लगा, "यह कैसी लकड़ियां हैं? पानी में
1:33भीगी हुई और किसी ने कहा, "यह तो जलेंग भी
1:36नहीं।" यूसुफ यह सुनकर उदास हो गया और
1:39दोपहर हो गई। लेकिन यूसुफ की एक भी लकड़ी
1:42नहीं बिकी। एक-एक करके ग्राहक आते और
1:44लकड़ियां देखकर वापस चले जाते। यूसुफ की
1:47परेशानी बढ़ती जा रही थी। लेकिन वो दिल ही
1:50दिल में अल्लाह से दुआ कर रहा था। वो कहता
1:52कि ऐ अल्लाह तू बेहतर जानता है कि मेरे हक
1:55में क्या होना चाहिए। जब शाम हुई तो यूसुफ
1:58ने सोचा कि अब घर लौट जाना चाहिए। यूसुफ
2:01अपना सामान बांधने लगा कि अचानक उसके पास
2:04एक बूढ़ा आदमी आया। उसका उम्दा लिबास था
2:07और वो यूं मालूम होता था जैसे कोई अमीर
2:10आदमी हो। उस बूढ़े ने यूसुफ के करीब आकर
2:12यूसुफ से पूछा कि यह लकड़ियां गीली क्यों
2:15है? यूसुफ ने सब कुछ सच-सच बताते हुए कहा
2:18कि आज बारिश की वजह से यह लकड़ियां भीग
2:20गई। बूढ़े हकीम ने यह सुना तो खुशी से
2:22कहने लगा कि यह तो बहुत अच्छी बात है। मैं
2:25एक हकीम हूं। जो दवा गीली लकड़ी से बनती
2:28है वो सूखी लकड़ियों से नहीं बनती। बूढ़े
2:31हकीम ने यूसुफ की सारी लकड़ियां खरीद ली
2:33और उसे दुगनी कीमत दी। यूसुफ की खुशी का
2:36ठिकाना नहीं रहा। वह समझ गया कि जो चीज
2:39उसे नुकसान लग रही थी, वही उसके लिए फायदा
2:42बन गई। अल्लाह ताला ने उसके सब्र और उसकी
2:45ईमानदारी का उसे अच्छा बदला दिया था।
2:47यूसुफ खुशी-खुशी घर वापस आ गया तो फातिमा
2:50और उसके बच्चे दरवाजे पर ही उसका इंतजार
2:53कर रहे थे। जब उसने ज्यादा पैसे दिखाए तो
2:55वह सब हैरान हो गए। छोटा बेटा अहमद बोला
2:59अब्बा आज इतने सारे पैसे कहां से आए?
3:02यूसुफ मुस्कुरा कर बोला कि बेटा यह सब
3:05अल्लाह की रहमत है। अगले दिन यूसुफ
3:07लकड़ियां काटने के लिए घर से निकलने लगा
3:09तो उसके दिल में एक ख्याल आया कि अगर वह
3:12अपनी सारी लकड़ियां पानी में भिगो दे तो
3:14क्या उसे दुगनी कीमत मिल सकती है? फिर
3:16उसने अपने आप से कहा कि नहीं यह अल्लाह की
3:19आजमाइश हो सकती है। मुझे अपने आप से धोखा
3:22नहीं करना चाहिए। जंगल में पहुंचकर यूसुफ
3:25ने देखा कि आज बहुत खूबसूरत धूप निकली हुई
3:27है। यूसुफ ने अपनी कुल्हाड़ी तेज की और
3:30लकड़ियां काटने में मशरूफ हो गया। यूसुफ
3:33लकड़ियां काटते-काटते अल्लाह का नाम भी
3:35लेता जाता था। उसके दिमाग में हकीम वाली
3:38बात भी घूम रही थी कि गीली लकड़ियों का
3:40क्या फायदा होता है। दोपहर होते ही यूसुफ
3:44खाना खाने के लिए एक दरख्त के नीचे बैठ
3:46गया। वह अभी खाना खाने के लिए बैठा ही था
3:48कि उसने सुना जंगल में शोर मच रहा है और
3:52कुछ लोग उसकी तरफ भागते हुए आ रहे हैं।
3:54यूसुफ ने उन भागते हुए आदमियों से पूछा कि
3:57क्या बात है? एक आदमी ने कहा जंगल में
4:00डाकू आ गए हैं और वह लोगों का सामान लूट
4:02रहे हैं। यह सुनकर यूसुफ के दिल में डर
4:05पैदा हुआ क्योंकि उसके पास कल वाले ज्यादा
4:08पैसे थे। अगर डाकू उससे वह पैसे छीन लें
4:11तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। लेकिन फिर वह
4:13अपने आप से कहने लगा कि जो कुछ भी होता है
4:16उसमें अल्लाह की हिकमत होती है। अगर वह बच
4:19जाए तो अल्लाह की मेहरबानी। अगर वह छीन
4:21जाए तो इसमें भी अल्लाह की हिकमत। फिर
4:24यूसुफ ने फैसला किया कि वो घर भाग जाए।
4:27यूसुफ भागने के लिए अभी उठा ही था कि उसने
4:29देखा कि एक दरख्त के पीछे एक बूढ़ा आदमी
4:32छुपा हुआ है। वो बहुत घबराया हुआ है।
4:35यूसुफ ने उस बूढ़े आदमी से पूछा कि तुम
4:38कौन हो? बूढ़ा आदमी कहने लगा कि मैं कल
4:41वाला हकीम हूं और मैं डाकुओं से छुप कर
4:43यहां पर बैठा हूं। हकीम ने बताया कि डाकू
4:46उसका सारा सामान लूट चुके हैं जिसमें
4:48कीमती दवाइयां थी और अब वो शहर जाने से डर
4:51रहा है। यूसुफ ने कहा कि आप परेशान ना हो।
4:55मैं आपको महफूज़ रास्ते से शहर पहुंचा
4:57दूंगा। अल्लाह ताला हमें बचाएगा। यूसुफ और
5:00उस बूढ़े हकीम ने जंगल के छुपे हुए
5:03रास्तों में से सफर शुरू किया। यूसुफ अपनी
5:05लकड़ियां छोड़ आया था और उसे कोई फिक्र
5:08नहीं थी क्योंकि वह सोच रहा था कि इंसान
5:11की मदद करना अल्लाह को पसंद है। चलते-चलते
5:14बूढ़े आदमी ने यूसुफ से पूछा कि तुम इतने
5:16नेक क्यों हो? तुम मेरे लिए अपनी लकड़ियां
5:19क्यों छोड़ आए और मेरी मदद क्यों कर रहे
5:21हो? यूसुफ ने कहा कि इंसानों की मदद करना
5:24अल्लाह ताला को पसंद है कि अल्लाह ताला ने
5:27हमें एक दूसरे की मदद करने का हुक्म दिया
5:29है। जब कोई किसी की मदद करता है तो अल्लाह
5:32ताला उसकी मदद करता है। कल आपने मेरी मदद
5:35की और आज मैं आपकी कर रहा हूं। हकीम बहुत
5:38मुतासिर हुआ और कहने लगा कि तुम्हारा ईमान
5:41और तुम्हारा इखलाक देखकर मैं बहुत खुश हुआ
5:44हूं। मुझे बहुत खुशी हुई है। शहर पहुंचकर
5:47बूढ़ा हकीम कहने लगा कि मैं तुम्हें कुछ
5:50इनाम देना चाहता हूं। लेकिन यूसुफ ने कहा
5:53मुझे किसी इनाम की जरूरत नहीं। मैंने
5:55इंसानियत की खिदमत की है। बूढ़े ने इसरार
5:58किया और एक छोटा सा थैला निकाल कर देते
6:00हुए कहा कि इसमें जादुई बीज हैं। इन्हें
6:03ले जाकर अपने घर के आसपास कहीं बो देना।
6:06यह तुम्हारी किस्मत बदल देंगे। यूसुफ घर
6:09पहुंचा तो उसके हाथ में छोटा सा बीजों का
6:11एक थैला था। लेकिन आज के दिन की उसके पास
6:14कोई कमाई नहीं थी। फातिमा ने पूछा कि आज
6:17क्या हुआ? यूसुफ ने आज के दिन का सारा
6:19वाक्या उसे सुना दिया और कहा कि उस बूढ़े
6:22हकीम की मदद करना जरूरी था। फातिमा ने कहा
6:26बहुत अच्छा किया। अल्लाह ताला हमारा रिज़्क
6:28कहीं और से भेज देगा। रात को खाने के वक्त
6:31घर में थोड़ा सा आटा और नमक था। बच्चे
6:34भूखे थे लेकिन शिकायत नहीं कर रहे थे।
6:37यूसुफ ने उन बीजों को देखा और सोचा कि
6:40हकीम ने कहा था यह तुम्हारी किस्मत बदल
6:43देंगे। फिर सोचने लगा कि पहले अल्लाह ताला
6:46से दुआ मांगनी चाहिए। फिर मेहनत करनी
6:48चाहिए। उसने अल्लाह से दुआ की और अगले दिन
6:52घर के पिछवाड़े में थोड़ी सी जगह साफ की
6:54और वह अजीबोगरीब बीज बोने लगा। बीज
6:57बिल्कुल आम लग रहे थे। उनमें कोई खास बात
7:00नजर नहीं आ रही थी। यूसुफ ने बीज लगाने के
7:02बाद उन्हें पानी दिया और अल्लाह से दुआ की
7:05कि अल्लाह पाक अगर इनमें कोई हिकमत है तो
7:08तू बरकत अता फरमा। फिर यूसुफ कुल्हाड़ी
7:11लेकर जंगल वाले रास्ते पर गया। आज वह दूर
7:14निकल गया ताकि डाकुओं से महफूज़ रह सके।
7:17वहां पहुंचकर उसने देखा कि बहुत से नए
7:19दरख्त नजर आ रहे हैं। जिनकी लकड़ियां बहुत
7:22ही अच्छी थी। उसने शुक्र किया और काम शुरू
7:25किया। दोपहर के वक्त जब यूसुफ वापस आया तो
7:28उसने देखा कि जहां उसने बीज बोए थे वहां
7:32छोटे-छोटे पौधे निकल आए हैं। यूसुफ यह
7:34देखकर हैरान रह गया क्योंकि आमतौर पर बीज
7:37उगने में दो-ती दिन लेते हैं। फातिमा भी
7:40यह देखकर बहुत हैरान हुई कि यह तो कमाल हो
7:43गया। यह बीज एक दिन में कैसे उग गए? फिर
7:45यूसुफ ने अपनी लकड़ियां ले जाकर बाजार में
7:48बेच दी। आज की लकड़ियां बहुत अच्छी थी।
7:50इसलिए अच्छी कीमत पर बिक गई और यूसुफ ने
7:53वापसी पर खाने-पीने का कुछ सामान खरीद
7:56लिया। घर पहुंचकर यूसुफ ने देखा तो पौधे
7:59और भी बड़े हो गए थे और उनमें छोटे-छोटे
8:02फूल भी लग गए थे। तीसरे दिन यूसुफ ने देखा
8:05कि पौधों में छोटे-छोटे फल आ गए हैं। यह
8:08फल सुनहरी रंग के थे और बिल्कुल अनोखे लग
8:10रहे थे। यूसुफ ने एक फल तोड़कर जब देखा तो
8:14उसके अंदर से एक मोती जैसी कोई चीज निकली।
8:17यह देखकर यूसुफ के समझ में नहीं आया कि यह
8:19क्या चीज है। फिर उसने फैसला किया कि वह
8:22यह फल लेकर शहर के बड़े बाजार में जाएगा।
8:25वहां जो बड़े ताजर और जोहरी होते हैं वो
8:28बता देंगे कि यह क्या चीज है। फिर उसने
8:31कुछ फल तोड़कर एक झोले में रख लिए। फातिमा
8:34से कहा कि मैं शहर जा रहा हूं। यह फल
8:37बेचने के लिए। यूसुफ ने फिर बाजार पहुंचकर
8:40शहर के सबसे बड़े जहरी को यह फल दिखाए।
8:42जोहरी ने यह देखते ही आंखें फाड़ दी। यह
8:45तो बहुत कीमती हीरे हैं। यह तुम्हें कहां
8:47से मिले? यूसुफ ने बताया कि यह मेरे घर
8:50में पौधों में लगे हैं। जोहरी ने कहा कि
8:53यह तो बहुत अजीब बात है। मैंने ऐसा पहले
8:56कभी नहीं देखा। जोहरी ने यूसुफ के तमाम
8:58हीरे खरीद लिए और उसे इतनी दौलत दी कि
9:01यूसुफ की खुशी की कोई इंतहा ना रही। वापस
9:03आते वक्त यूसुफ के दिल में खुशी और हैरत
9:06थी। उसने समझ लिया कि यह उसके सब्र और
9:09नेकी का सिला है। लेकिन फिर उसके दिल में
9:12एक और फिक्र पैदा हो गई कि यह अचानक से
9:14आने वाली दौलत उसे सीधे राह से ना भटका
9:17दे। जब यूसुफ घर पहुंचा तो उसके हाथ में
9:20बहुत सारी दौलत थी। फातिमा और उसके बच्चे
9:23यह देखकर बहुत हैरान हुए। यूसुफ ने बताया
9:26कि वह फल दरअसल कीमती हीरे थे। लेकिन फिर
9:30उसने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि
9:33यह सब अल्लाह का दिया हुआ है। क्योंकि
9:35दौलत इंसान को मुतकबिर बना देती है। हमें
9:38एहतियात करना चाहिए। अगले दिन यह खबर पूरे
9:41गांव में फैल गई कि यूसुफ लकड़हारा अचानक
9:44अमीर हो गया। लोग उसके घर आने लगे और
9:47तरह-तरह के सवाल पूछने लगे। किसी ने कहा
9:50कि इसे खजाना मिला है। किसी ने कहा कि
9:53इसने चोरी की है। लेकिन यूसुफ ने सबको
9:56सच-सच बता दिया। लेकिन लोग यकीन नहीं कर
9:59रहे थे। गांव का जमींदार मंसूर भी यूसुफ
10:01के घर आया और हसद भरी निगाहों से युसुफ को
10:04देखने लगा और यूसुफ से कहने लगा कि यूसुफ
10:07तुमने इतना सारा पैसा कहां से पाया है?
10:10जरूर तुमने कोई गलत काम किया है। लेकिन
10:12यूसुफ ने दिल की सफाई से कहा कि यह सब
10:15अल्लाह का दिया हुआ है। लेकिन मंसूर को
10:18यकीन नहीं आया और कहने लगा कि अगर यह पौधे
10:21वाकई हीरे देते हैं तो मुझे भी कुछ बीज
10:24दो। यूसुफ ने कहा कि मेरे पास बस वही बीज
10:27थे जो हकीम ने दिए थे। यह सुनकर मंसूर
10:30गुस्से से बोला कि तुम झूठ बोल रहे हो।
10:32तुम सिर्फ खुद अमीर होना चाहते हो। यूसुफ
10:35को यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि लोग उसकी बात
10:38पर यकीन नहीं कर रहे। रात को यूसुफ जब
10:40नमाज पढ़ के फारग हुआ तो उसने घर के बाहर
10:43शोर सुना। कुछ लोग चीख रहे थे। आग लग गई
10:46है। यूसुफ ने घर से बाहर निकल कर देखा तो
10:49कुछ घरों में आग लगी हुई थी और हवा तेज
10:51होने की वजह से आग तेजी से फैलती हुई जा
10:54रही है। लोग अपना सामान बचाने में मशरूफ
10:57थे। यह देखकर यूसुफ ने फैसला किया कि वह
11:00लोगों की मदद करेगा। यूसुफ ने अपने पैसों
11:02से पानी के लिए बड़े बर्तन मंगवाए। जिन
11:05लोगों के घर जल चुके थे। यूसुफ ने उन्हें
11:08अपने घर में ठहराया और फातिमा ने उनके लिए
11:10खाना पकाया। आग बुझने के बाद यूसुफ ने
11:13देखा कि बहुत से लोगों के घर जल चुके थे।
11:16उन्हें नए घरों के लिए पैसों की जरूरत थी।
11:19यूसुफ ने बगैर कुछ सोचे समझे अपने हीरों
11:22से मिले गए पैसे सब के सब उनमें बांट दिए।
11:25मंसूर सरदार भी वहां पर मौजूद था और वह
11:27यूसुफ की सखावत देखकर शर्मिंदा हो गया और
11:30फिर यूसुफ से कहने लगा कि मैंने तुम पर
11:33गलत इल्जाम लगाया मुझे माफ कर दो। यूसुफ
11:36ने कहा कोई बात नहीं। अल्लाह ताला हम सबको
11:39माफ करे। मंसूर ने पूछा कि तुमने अपना
11:43सारा पैसा लोगों में क्यों बांट दिया?
11:45यूसुफ ने कहा कि जब अल्लाह देता है तो
11:48बेहिसब देता है। हमें भी लोगों की मदद
11:51करनी चाहिए। अगले दिन यूसुफ ने देखा कि
11:54उसके वह पौधे मर चुके हैं जहां पहले फल
11:56लगते थे। अब वहां कुछ नहीं था। फातिमा ने
12:00पूछा क्या आपको अफसोस है? यूसुफ कहने लगा
12:03बिल्कुल नहीं। अल्लाह ने मुझे यह दौलत
12:06इसलिए दी थी ताकि मैं लोगों की मदद कर
12:08सकूं। मकसद पूरा हो गया तो यह खत्म हो गए।
12:11अब यूसुफ फिर से वही गरीब लकड़हारा था।
12:15लेकिन उसके दिल में एक अजीब सा सुकून था।
12:18पूरे गांव के लोग उसे इज्जत की नजर से
12:20देखते थे और गांव के सारे बच्चे उसके पास
12:23आकर कहते कि चाचा तुमने हमारी बहुत मदद की
12:26है। यूसुफ समझ गया था कि असल दौलत लोगों
12:30के दिलों में मोहब्बत और अल्लाह की रजा
12:32है। फिर कई महीने गुजर गए और यूसुफ अपनी
12:35पुरानी जिंदगी में वापस आ गया। यूसुफ जंगल
12:38में जाता और लकड़ियां काट कर ले आता और अब
12:40गांव के सारे लोग उसकी बहुत इज्जत करते
12:43थे। जब भी कोई मुश्किल में होता तो वह
12:46यूसुफ से मदद मांगता और यूसुफ खुशी से
12:48उसकी मदद करता था। एक दिन यूसुफ जंगल से
12:51लकड़ियां काटकर वापस आ रहा था तो उसने
12:53किसी की आवाज सुनी। जब उसने आवाज की तरफ
12:56जाकर देखा तो एक कुएं में एक शख्स गिरा
12:59हुआ था। उसकी आवाज बहुत डरी हुई लग रही
13:02थी। यूसुफ ने अपनी लकड़ियों को एक तरफ रखा
13:04और कुएं के पास गया। यूसुफ ने कुएं में
13:07देखा कि एक नौजवान कुएं में डूब रहा था।
13:10कुआं बहुत गहरा था और उसमें उतरना खतरनाक
13:14था। यूसुफ ने अपनी रस्सी निकाली और बिना
13:16कुछ सोचे समझे कुएं में उतर गया ताकि उस
13:19नौजवान लड़के को बचा सके। कुएं में पानी
13:22बहुत ठंडा था। यूसुफ ने उसे सहारा दिया और
13:25उसकी जान बचाने की कोशिश की। लड़का बहुत
13:28कमजोर हो चुका था और उसका सांस उखड़ रहा
13:30था। यूसुफ ने पूरी ताकत लगाई और अल्लाह से
13:34दुआ मांगी और फिर बड़ी मुश्किल से उस
13:36लड़के को लेकर कुएं से बाहर निकल आया।
13:38बाहर निकलकर यूसुफ ने लड़के की देखभाल की
13:41और उसे होश में लाया। लड़का खांसा। पानी
13:44बाहर निकाला और फिर आंखें खोली। उसने
13:47यूसुफ का शुक्रिया अदा किया और कहा आपने
13:50मेरी जान बचाई है। मेरा नाम अली है और मैं
13:54दूसरे गांव से आया था। मैं रास्ता भटक कर
13:56यहां आ गया और कुएं में गिर गया। फिर
13:58यूसुफ उस लड़के को अपने घर ले गया और
14:01फातिमा से कहा कि वह इसकी देखभाल करें। उस
14:04लड़के के कपड़े गीले थे और वह बुखार में
14:06था। फिर कई दिन तक उस लड़के का यूसुफ के
14:09घर में इलाज चला और यूसुफ अपने पैसों से
14:12उस लड़के के लिए दवा खरीदता रहा और उसे
14:15बेहतरीन खाना खिलाता रहा। जब अली सेहतमंद
14:17हो गया तो उसने यूसुफ का शुक्रिया अदा
14:20किया और कहने लगा कि मैं आपका एहसान
14:22जिंदगी भर नहीं भूलूंगा। लेकिन पहले मैं
14:25आपको सच बताना चाहता हूं। मैं कोई आम
14:28लड़का नहीं हूं बल्कि मैं बादशाह का बेटा
14:30हूं। यूसुफ यह सुनकर हैरान हो गया कि उसने
14:33किसी शहजादे की जान बचाई है। फिर वह कहने
14:36लगा कि अगर आप मेरी जान ना बचाते तो मैं
14:39मर जाता। अब मैं आपको इनाम देना चाहता
14:42हूं। लेकिन यूसुफ ने कहा मुझे किसी इनाम
14:45की जरूरत नहीं। मैंने इंसानियत के नाते
14:47आपकी मदद की है। किसी दौलत के लालच में
14:50नहीं। शहजादे ने इसरार किया और कहा कि
14:53मेरे अब्बा बादशाह सलामत आपसे मिलना चाहते
14:56हैं। आप मेरे साथ दरबार चलें। यूसुफ ने
14:59कहा कि मैं एक सादा आदमी हूं। मैं बादशाह
15:02से क्या मिलूंगा? अली ने कहा कि आप जैसे
15:05नेक लोगों से मिलना भी बादशाहों के लिए
15:07इज्जत की बात है। आखिरकार यूसुफ राजी हो
15:10गया। अगले दिन महल से उसके लिए घोड़ों की
15:13सवारी आई। यूसुफ और अली उन पर सवार होकर
15:16महल की तरफ चल पड़े। रास्ते में अली ने
15:18बताया कि मेरे वालिद साहब बादशाह बहुत नेक
15:22आदमी हैं। यूसुफ के दिल में खुशी भी थी और
15:25खौफ भी। उसे लग रहा था कि अल्लाह ताला
15:28उसकी जिंदगी में कोई नया मोड़ लाने वाला
15:30है। महल पहुंचकर यूसुफ ने देखा कि बादशाह
15:33का महल सोने चांदी से भरा हुआ है। लेकिन
15:37उसका दिल बिल्कुल भी लालची नहीं था। अली
15:39ने बादशाह को यूसुफ का तारुफ करवाया।
15:42बादशाह ने कहा कि तुमने मेरे बेटे की जान
15:45बचाई है। तुमने हम पर बहुत बड़ा एहसान
15:48किया है। बताओ तुम्हें क्या चाहिए? सोना,
15:51जमीन या मेरे दरबार में कोई बड़ा ओहदा।
15:54यूसुफ ने इत्मीनान भरे लहजे में कहा कि
15:57बादशाह सलामत मैंने यह सब अल्लाह की रजा
16:00के लिए किया। किसी इनाम के लालच में नहीं।
16:02बादशाह यूसुफ की बातों से बहुत मुतासिर
16:05हुआ। बादशाह ने कहा कि ऐसे नेक लोग बहुत
16:08कम होते हैं। लेकिन मैं तुम्हें खाली हाथ
16:10नहीं जाने दूंगा। फिर यूसुफ ने कहा कि अगर
16:13आप कुछ करना ही चाहते हैं तो मेरे गांव
16:16में एक पानी का कुआं खद दीजिए। वहां के
16:19लोग पानी के लिए बहुत परेशान रहते हैं।
16:22बादशाह ने यह सुनकर फौरन हुक्म दिया कि ना
16:25सिर्फ एक बल्कि तीन-तीन पानी के कुएं
16:27खदवाए जाएं और साथ ही मस्जिद और बच्चों के
16:30लिए मदरसा भी बनवाया जाए। यूसुफ की आंखों
16:33में खुशी के आंसू आ गए और साथ ही बादशाह
16:36ने एक छोटा सा संदूक यूसुफ को दिया और कहा
16:39इसे घर जाकर खोलना। यूसुफ ने घर जाकर उसे
16:42खोला। संदूक में कुछ दौलत और एक खत था। खत
16:46पर लिखा था कि यह तुम्हारी जरूरत के लिए
16:49है। अगले दिन दरवाजे पर दस्तख हुई। यूसुफ
16:51ने दरवाजा खोला तो दरवाजे पर वही बूढ़ा
16:54हकीम था जिसने उसे जादुई बीज दिए थे। वो
16:58कहने लगा यूसुफ तुम हर इम्तिहान में
17:00कामयाब हुए। मैंने पहले तुम्हें दौलत देकर
17:03आजमाया और फिर खतरे में डालकर तुमने ना
17:06खुदग्रजी की और ना लालच किया। अब अल्लाह
17:09तुम्हें हमेशा की बरकत देगा। इतना कहकर
17:12हकीम गायब हो गया। उस दिन के बाद यूसुफ की
17:15हर मेहनत में बरकत होती और गांव के लोग
17:18उससे और भी ज्यादा मोहब्बत करने लगे और जब
17:21भी उससे कोई कामयाबी का सबब पूछता तो वह
17:23कहता सिर्फ अल्लाह पर भरोसा रखो और सबर
17:27करो और लोगों की मदद करते रहो। अल्लाह
17:30अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
17:32प्यारे दोस्तों, उम्मीद करता हूं कि यह
17:34वीडियो आपको पसंद आई होगी। अगर वीडियो
17:37अच्छी लगी हो, तो कमेंट्स में अपनी राय का
17:38इज़हार जरूर कीजिएगा। हमारे चैनल को
17:41सब्सक्राइब कर दीजिएगा। वीडियो देखने का
17:43बहुत-बहुत शुक्रिया।
17:45[संगीत]
17:57[प्रशंसा]
17:58[संगीत]