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0:00अस्सलाम वालेकुम स्टूडेंट। आज मैं आपको
0:02कोर्स कोड 8624 के यूनिट सेवन का रिव्यु
0:05दूंगी। कायदे आजम्स मैसेज 1947 में ऑल
0:10पाकिस्तान एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस कराची में
0:12हुई थी। जहां कायदेआज़म मोहम्मद अली जिला
0:14ने एक बहुत अहम तकरीब की। उस वक्त
0:16पाकिस्तान नया बना था और कायदेआज़म ने समझा
0:19कि अगर मुल्क को मजबूत बनाना है तो सबसे
0:21पहला कदम बेहतरीन तालीम का निजाम कायम
0:24करना होगा।
0:25ही हाईलाइटेड द नीड फॉर एजुकेशन अलाइन वि
0:28नेशनल करिकुलम हिस्ट्री एंड जीनियस। कायर
0:31आजम ने कहा कि पाकिस्तान का तालीमी निजाम
0:33बिल्कुल वैसा होना चाहिए जो हमारी कौमी
0:36कल्चर, हमारी तारीख और हमारी कौम की मिजाज
0:38के मुताबिक हो। नंबर टू उन्होंने बहुत जोर
0:41दिया कि तालीम सिर्फ किताबी मालूमात तक
0:42महदूद नहीं होनी चाहिए। तालीम का असल मकसद
0:45बच्चों का कररेक्टर बनाना है। जिसमें
0:48क्या-क्या आ जाता है? डिसिप्लिन,
0:49जिम्मेदारी और ईमानदारी। नंबर थर्ड कायदे
0:53आजम ने कहा कि अगर हम दुनिया के साथ कदम
0:55मिलाना चाहते हैं तो हमें अपने नौजवानों
0:57को साइंस और टेक्निकल स्किल्स सिखानी
0:59होंगी। कोर आईडिया कायदेआज़म का असल पैगाम
1:02यह था कि ऐसा फर्द बनाना जो सिर्फ अपनी
1:05जिंदगी नहीं बल्कि मुल्क की तरक्की में भी
1:07अपना किरदार अदा करें। तालीम का निजाम ऐसा
1:09होना चाहिए कि जवानों में ईमान, मेहनत और
1:12कौम की खिदमत का जज्बा पैदा हो। करंट
1:15रेलेवेंस। अगर हम आज पाकिस्तान के
1:17सेकेंडरी एजुकेशन सिस्टम को देखें तो कहीं
1:19ना कहीं कायदे आजम के विज़ का एक हिस्सा तो
1:21नजर आता है मगर मुकम्मल तौर पर उस विज़ पर
1:23अमल नहीं हुआ। आज कई इलाकों तक स्कूल और
1:25तालीम का दायरा बढ़ा है। ज्यादा बच्चे
1:27स्कूल्स तक पहुंच रहे हैं। तालीम की
1:29क्वालिटी अब भी कमजोर है। शहरी और देहाती
1:32इलाकों में फर्क है। अमीर और गरीब के
1:34बच्चों के लिए अलग-अलग सिस्टम्स हैं।
1:35सेकेंडरी एजुकेशन इट्स ड्यूल नेचर।
1:38सेकेंडरी एजुकेशन इन पाकिस्तान सर् टू
1:40पर्पससेस। नंबर वन टर्मिनल स्टेज। नंबर टू
1:43प्रिपरेटरी स्टेज। नंबर वन टर्मिनल
1:46स्ट्रिज। यह उन स्टूडेंट के लिए होती है
1:47जो मैट्रिक के बाद तालीम छोड़कर काम शुरू
1:49करते हैं। जैसे किसी ट्रेड, बिजनेस या
1:52टेक्निकल फील्ड में। नंबर टू है
1:54प्रिपरेटरी फेस। यह उन तलबा के लिए है जो
1:56मैट्रिक के बाद आगे तालीम जारी रखते हैं।
1:58टू फुलफिल दिस ड्यूल रोल द करिकुलम शुड।
2:01नंबर वन तालीम में बैलेंस होना चाहिए। 40%
2:04जनरल एजुकेशन और 60% टेक्निकल वोकेशनल
2:07एजुकेशन तक स्टूडेंट के पास दोनों स्किल्स
2:09हो। इल्म भी और काम करने की सलाहियत भी।
2:11नंबर टू, साइंस और मैथ के सब्जेक्ट को
2:13बेहतरीन बनाया जाए। इसके लिए अपडेट
2:16करिकुलम, लैबोरेटरीज़ और क्वालिफाइड टीचर्स
2:18की जरूरत है। नंबर थर्ड, हर स्कूल चाहे वो
2:22शहर का हो या गांव का। उसमें इक्वल
2:25फैसिलिटीज और बेहतरीन टीचर्स होने चाहिए।
2:27नंबर फोर, जो बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं
2:29उनके लिए भी ट्रेनिंग प्रोग्राम्स होने
2:31चाहिए। जहां वो किसी स्किल जैसे
2:33इलेक्ट्रिशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर का काम
2:35सीखकर रोजगार हासिल कर सकें।
2:38नीड एंड स्कोप। पाकिस्तान के लिए एक मजबूत
2:41सेकेंडरी एजुकेशन सिस्टम बहुत जरूरी है।
2:43क्योंकि यही वो स्टेज है जहां से नौजवान
2:46या तो आगे तालीम जारी रखते हैं या रोजगार
2:48की दुनिया में कदम रखते हैं। अगर इस स्टेज
2:51पर करिकुलम, प्रैक्टिकल, टेक्निकल और लाइफ
2:53स्किल्स पर फोकस करें तो बेरोजगारी कम हो
2:56सकती है। काबिल वर्क फ़ोर्स तैयार होगी और
2:59मुल्क की तरक्की ते हो सकती है।
3:02नेशनल एम्स ऑफ़ एजुकेशन एंड देयर
3:03रियलाइज़ेशन पॉलिसी 1979। नेशनल एजुकेशन
3:07पॉलिसी 1979 पाकिस्तान की तालीमी तारीख
3:10में एक अहम मौका था। जहां हुकूमत ने तालीम
3:12को इस्लामी आईडियोलॉजी और कौमी पहचान के
3:15मुताबिक ढालने की कोशिश की। इस पॉलिसी का
3:17मकसद था कि तालीम सिर्फ इल्म हासिल करने
3:19का जरिया ना रहे बल्कि अखलाक, मजहब और
3:21माशी तरक्की का भी सबब बने। मेम्स नंबर वन
3:25हर सिलेबस और करिकुलम में कुरानिक
3:27प्रिंसिपल्स और इस्लामिक वैल्यूस शामिल
3:29करना ताकि स्टूडेंट सिर्फ तालीमी या ही
3:32नहीं बल्कि अच्छे मुस्लिम और बेहतर इंसान
3:34बन सके। नंबर टू हर बच्चे तक तालीम
3:36पहुंचाना। खासतौर पर गांव में और फिर उनके
3:38लिए सेकेंडरी लेवल तक तालीम का इंतजाम
3:40करना। नंबर थर्ड लड़कों और लड़कियों दोनों
3:43के लिए तालीम की इक्वल अपोरर्चुनिटीज
3:44फराहम करना। नंबर फोर स्टूडेंट को सिर्फ
3:47किताबी तालीम नहीं बल्कि काम करने वाली
3:48स्किल्स भी सिखाना ताकि वो रोजगार हासिल
3:51कर सके और मुल्क के माशी निजाम में हिस्सा
3:53दे सके। नंबर फिफ्थ टीचर्स को ट्रेनिंग और
3:55मॉडर्न टीचिंग मेथड्स देना और सिलेबस को
3:58अपडेट और रेलेवेंट बनाना ताकि तालीम
4:00ज्यादा इफेक्टिव हो। नेक्स्ट है की
4:03इनिशिएटिव्स। नंबर वन मस्जिद स्कूल्स खोली
4:06गई जहां प्राइमरी लेवल की तालीम और
4:07इस्लामी तालीम दोनों दी जाती थी। नंबर टू
4:10औरतों की तालीम पर जोर दिया गया। सेपरेट
4:12वुमेन यूनिवर्सिटीज और इंस्टट्यूट बनाए
4:14गए। नंबर थर्ड एट क्लास तक अरेबिक और
4:16इस्लामियात को कंपलसरी सब्जेक्ट बनाया गया
4:18ताकि स्टूडेंट अपनी मजहबी पहचान से वाकिफ
4:21रहें। नंबर फोर प्राइवेट सेक्टर को तालीम
4:23के मैदान में शामिल होने की इजाजत दे दी
4:25ताकि हुकूमत का बोझ हल्का हो और तालीम का
4:28दायरा बढ़ सके। नंबर फिफ्थ जो बच्चे स्कूल
4:31छोड़ देते हैं उनके लिए वर्कशॉप स्कूल्स
4:33का निजाम बनाएगा। जहां वो कोई हुनर या
4:36स्किल सीखकर अपनी जिंदगी गुजारना सीखें।
4:38नेक्स्ट है इंपैक्ट एंड लिमिटेशन।
4:41नंबर वन हुकूमत ने गवर्नमेंट स्कूल्स में
4:44उर्दू को मीडियम ऑफ इंस्ट्रक्शन बनाया।
4:46इससे कौमी जुबान को फरोख मिला। नंबर टू
4:48प्राइवेट स्कूल को खोलने की इजाजत दी गई
4:51जिससे तालीम का निजाम ज्यादा फैल गया।
4:54नंबर थर्ड उर्दू मीडियम और इंग्लिश मीडियम
4:56के दरमियान फासला और इनकलिटी बढ़ गई।
4:59इंग्लिश मीडियम स्कूल ज्यादा बेहतर
5:00फैसिलिटीज और क्वालिटीज देते थे। जबकि
5:02उर्दू मीडियम स्कूल्स पीछे रह गए। नंबर
5:04फोर पॉलिसी अच्छी थी लेकिन अमली तौर पर
5:06असर दिखाने में नाकाम रहे। लेसन फ्रॉम द
5:09सिक्स्थ फाइव ईयर प्लान 1983 टू 1988। इस
5:13प्लान ने तालीम को मुल्क की तरक्की का
5:15सबसे अहम इन्वेस्टमेंट करार दिया। इस
5:18प्लान का मकसद था कि तालीम को हर फर्द तक
5:20पहुंचाया जाए ताकि पाकिस्तान अपनी माशी और
5:23समाजी बुनियादों को मजबूत बना सके। अब
5:25इसके गोल्स क्या थे? नंबर वन हर बच्चे को
5:27स्कूल भेजना और प्राइमरी तालीम को सबके
5:30लिए लाजमी बनाना। नंबर टू 15 मिलियन लोगों
5:33को पढ़ना लिखना सिखाना। नंबर थर्ड
5:36प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों लेवल पर
5:38ज्यादा बच्चों को तालीम के दायरे में
5:40लाना। नंबर फोर मस्जिद और लोकल कम्युनिटीज
5:42के जरिए स्कूलिंग फैसिलिटीज बढ़ाना ताकि
5:44उन इलाकों में भी तालीम पहुंच सके जहां
5:47स्कूल इमारतें नहीं थी। अचीवमेंट्स नंबर
5:50वन टारगेट 40,000 स्कूल्स का था मगर सिर्फ
5:5217,000 नई मस्जिद स्कूल्स खोली जा सकी।
5:55नंबर टू प्राइमरी तालीम में शामिल बच्चों
5:57का रेशियो 53% से बढ़कर 64% हो गया। नंबर
6:00थर्ड सेकेंडरी तालीम में शामिल बच्चों का
6:02रेशियो 22 से बढ़कर 26% हो गया। नंबर फोर
6:06थोड़ी सी बेहतरी जरूरी हुई लेकिन मैथ्स
6:08लिटरेसी प्रोग्राम अपने मकासद हासिल नहीं
6:10कर सका। लेसंस प्लान्स के गोल बहुत
6:14एंबिशियस थे। असल सुरतेहाल और रिसोर्सेज
6:17को मद्देनजर नहीं रखा गया। तालीम के लिए
6:19पैसे मुकम्मल नहीं थे। स्कूल और टीचर
6:21दोनों में शॉर्ट फॉल था। क्वालिफाइड
6:23टीचर्स की कमी ने तालीमी निजाम को वीक
6:26बनाया। प्रोग्राम को प्रोग्राम का प्रॉपर
6:29निजाम और मॉनिटरिंग नहीं थी। जिसकी वजह से
6:31एफिशिएंसी कम रही। पर्सपेक्टिव प्लान।
6:36पर्सपेक्टिव प्लान एक लंबी मुद्दत का
6:38मंसूबा था। जिसका मकसद पाकिस्तान के बड़े
6:40मसाइल जैसे कि आबादी का इजाफा, लिटरेसी,
6:43अनइंप्लॉयमेंट को दूर करना था। यह प्लान
6:46सिर्फ तालीम पर नहीं बल्कि मुल्क की ओवरऑल
6:48डेवलपमेंट पर फोकस करता था। मेजर
6:51ऑब्जेक्टिव्स नंबर वन आबादी का ग्रोथ
6:54रेशियो 3.1% से कम करके 2.6% तक लाना ताकि
6:58रिसोर्सेज पर बोझ कम हो। नंबर टू यूथ
7:00लिटरेसी बढ़ावाने का मकसद था। यानी नौजवान
7:03नस्ल को तालीम देकर मुल्क के लिए
7:05प्रोडक्टिव बनाना। नंबर थर्ड प्रूव असेस
7:07टू क्लीन वाटर, सनिटेशन, टेलीकम्युनिकेशन
7:09एंड हेल्थ सर्विज। नंबर फोर शहरी और
7:12देहाती इलाकों के दरमियान फर्क कम करना और
7:14दोनों में बराबर तरक्की लाना। पर्सपेक्टिव
7:17प्लान ने साबित किया कि अगर पाकिस्तान को
7:18तरक्की करनी है तो तालीम में इन्वेस्टमेंट
7:21सबसे जरूरी है। बिना तालीम के ना आबादी का
7:23मसला हल हो सकता है। ना बेरोजगारी और ना
7:25ही सेहत और इंफ्रास्ट्रक्चर में बेहतरी आ
7:27सकती है। सेवंथ फाइव ईयर प्लान
7:31सेवंथ फाइव ईयर प्लान ने तारीमी निजाम में
7:34काफी बेहतरी लाने की कोशिश की। लेकिन इसके
7:37बावजूद कई सीरियस डेफिशिएंसीज़ बरकरार हैं।
7:40नंबर वन
7:4240% ऑफ चिल्ड्रन स्टिल आउट ऑफ स्कूल। यानी
7:45हर 10 में से चार बच्चे तालीम हासिल नहीं
7:48कर रहे थे। नंबर टू 29,000 प्राइमरी स्कूल
7:51बिना इमारत के थे और कई स्कूल में सिर्फ
7:53एक क्लासरूम होता था। नंबर थर्ड रोड
7:56लर्निंग अब भी तालीमी अमल पर हावी था।
7:58जिससे तखलीकी सोच और प्रॉब्लम सॉल्विंग
8:01स्किल्स पैदा नहीं होती थी। की
8:04ऑब्जेक्टिव्स देख लेते हैं। नंबर वन हर
8:07बच्चे को तालीम का हक फराहम करना। नंबर टू
8:09एक्सपेंशन ऑफ़ सेकेंडरी स्कूल टू अब्सॉर्ब
8:11प्राइमरी ग्रेजुएट। नंबर थर्ड इंट्रोडक्शन
8:13ऑफ़ स्किल बेस्ड सब्जेक्ट एट मिडिल एंड
8:15सेकेंडरी लेवल। मिडिल और सेकेंडरी लेवल पर
8:17एग्रीकल्चर, होम इकोनॉमिक्स, मेटल वर्ल्ड
8:20जैसे सब्जेक्ट इंट्रोड्यूस करना ताकि
8:21स्टूडेंट काम सीख सकें। नंबर फोर हर
8:24डिस्ट्रिक्ट में एक लड़कों का और एक
8:26लड़कियों का मॉडल स्कूल बनाया गया ताकि
8:28बेहतरीन तालीम का स्टैंडर्ड प्रमोट हो।
8:30नंबर फिफ्थ सेकेंडरी लेवल पर बच्चों को
8:32दाखिला 30% से बढ़कर 41% तक लाना। अब
8:35अचीवमेंट मिडिल स्कूल को हाई लेवल तक
8:37प्रमोट किया गया। नंबर टू गर्ल्स
8:39इन्वॉल्वमेंट बढ़ा लेकिन अब लड़कों के
8:41मुकाबले में बहुत कम था। कंक्लूजन यह
8:45प्लान नंबर्स और इमारतों के लिहाज से
8:47कामयाब रहा। नए स्कूल्स, क्लासरूम और
8:49अपग्रेड्स हुए। लेकिन क्वालिटी ऑफ़
8:50एजुकेशन, टीचर ट्रेनिंग और जेंडर इक्वलिटी
8:53में कमियां बरकरार हैं। एट फाइव ईयर प्लान
8:57इस दौर में पाकिस्तान में तालीम का दारा
8:59काफी बढ़ गया था। नए स्कूल बने,
9:01इन्वॉल्वमेंट बढ़ा लेकिन इलिटरेसी और
9:03इनकलिटी अब भी बहुत बड़ा मसला था। फोकस
9:06एरियाज हर बच्चे के लिए तालीम कंपलसरी
9:09बनाने का निजाम। हर लड़का और लड़की को
9:11स्कूल भेजने का मकसद। नंबर टू, ऐसी तालीम
9:13जहां बच्चे काम और स्किल सीख सके ताकि वो
9:15अपनी जिंदगी में बेहतर काम कर सके। नंबर
9:17थर्ड लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए
9:18बराबर तालीमी मौका पैदा करना।
9:20यूनिवर्सिटीज में बेहतरीन मैनेजमेंट,
9:22बेहतर सिलेबस और स्टैंडर्ड एजुकेशन देने
9:24पर जोर दिया गया। टारगेट 2.4 मिलियन नए
9:28स्कूल्स को सेकेंडरी एजुकेशन में शामिल
9:29करना जिसमें 1 मिलियन लड़कियां शामिल हैं।
9:32नंबर टू, सेकेंडरी पार्टिसिपेशन रेट को
9:3438% से बढ़ाकर 43% तक लाना। नंबर थर्ड,
9:37प्राइवेट सेक्टर को इनकरेज करना कि वो 15%
9:40नए इन्वॉल्वमेंट का जिम्मा ले। नंबर फोर,
9:42हर डिस्ट्रिक्ट में एक मॉडल स्कूल बनाने
9:44का प्लान। अचीवमेंट तालीम की क्वालिटी अब
9:46भी वीक थी। टीचर ट्रेनिंग पे पूरा फोकस
9:49नहीं दिया गया। ना टारगेट पूरे नहीं हुए।
9:50खासतौर पर लड़कियों की पार्टिसिपेशन अब भी
9:52एक्सपेक्टेड लेवल से नीचे थी। नेशनल
9:55एजुकेशन पॉलिसी 1998 टू 2010 ये पॉलिसी
9:59पाकिस्तान की सबसे कॉम्प्रिहेंसिव और
10:00डिटेल तालीमी पॉलिसी मानी जाती है। 1979
10:03के बाद यह सबसे बड़ा रिफॉर्म डॉक्यूमेंट
10:04था जिसमें तालीम के हर पहलू को कवर किया
10:06गया था। एम्स नंबर वन तालीम में इस्लामी
10:10उसूलों को मॉडर्न साइंस और टेक्नोलॉजी के
10:12साथ मिलाकर ऐसा निजाम बनाना जो दीन और
10:14दुनिया दोनों में कामयाबी दे। नंबर टू
10:16पाकिस्तान से जहालत इलिटरेसी खत्म करना और
10:19सेकेंडरी लेवल तक मुफ्त और लाजमी तालीम
10:21देना। नंबर थर्ड लड़कों और लड़कियों के
10:23लिए बराबर तालीमी मौके पैदा करना। नंबर
10:24फोर ऐसे अफराद तैयार करना जो 21 सेंचुरी
10:27के चैलेंजेस और दुनिया के मुकाबले का
10:29सामना कर सके। ऑब्जेक्टिव्स। नंबर वन
10:31तालीम में कुरानी तालीमात टॉलरेंस को
10:33बढ़ावा देना ताकि तलबा सिर्फ इल्मी नहीं
10:36बल्कि अच्छे इंसान भी बने। नंबर टू तालीम
10:38ऐसी हो जो जो मार्केट की जरूरत के मुताबिक
10:40हो। नंबर थर्ड हर स्टूडेंट को टेक्निकल और
10:42कंप्यूटर स्किल्स सीखने पर जोर देना ताकि
10:44वो आज के डिजिटल दौर के साथ चल सके। नंबर
10:47फोर तालीमी निजाम में रेगुलर मॉनिटरिंग और
10:49इवैल्यूएशन सिस्टम बनाना। नंबर फिफ्थ
10:52प्राइवेट स्कूल्स को मोटिवेट करना कि वह
10:54गरीब और अंडर प्रिविलेज बच्चों को मुफ्त
10:56तालीम दें ताकि सब लोग तालीम के बराबर
10:59मौके हासिल कर सकें। उम्मीद है स्टूडेंट
11:01आपको यह चैप्टर अच्छे से समझ आ गया होगा।
11:03अगर आपका कोई क्वेश्चन हो तो आप कमेंट
11:05सेक्शन में पूछ सकते हैं। अल्लाह हाफिज।