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0:00मणिपुर गांव में सुरेश अपनी पत्नी ममता के
0:02साथ एक छोटे से मिट्टी के घर में रहता था।
0:05दोनों बहुत गरीब थे। उनकी आमदनी इतनी कम
0:08थी कि कई बार घर का चूल्हा जलाना भी
0:10मुश्किल हो जाता था।
0:13उनके मिट्टी के घर के आंगन में जामुन का
0:15एक पुराना पेड़ लगा था। हर साल उस पेड़ पर
0:18ढेर सारे जामुन लगते थे। सुरेश उसी पेड़
0:21के ताजे जामुन तोड़कर बाजार में बेचता था।
0:24और जो थोड़े बहुत पैसे [संगीत] मिलते
0:26उन्हीं से घर का खर्च चलाता था। लेकिन
0:28जामुन बेचकर होने वाली कमाई इतनी नहीं
0:30[संगीत] थी कि सुरेश और ममता दिन में दो
0:33वक्त भी अच्छी तरह खाना खा सकें। एक सुबह
0:36सूरज निकलते [संगीत] ही सुरेश जामुन के
0:38पेड़ के नीचे पहुंच गया।
0:44उसने पेड़ की डालियों से पके हुए ताजे और
0:47मीठे जामुन तोड़ने शुरू किए। कुछ ही देर
0:49में उसकी टोकरी काले-काले चमकदार जामुनों
0:52से भर गई। सुरेश ने टोकरी उठाई और घर के
0:55अंदर आया। ममता उस समय घर में रखे थोड़े
0:57से राशन से खाना बनाने में लगी थी। सुरेश
1:00ने कहा
1:01ममता मैं जामुन लेकर बाजार जा रहा हूं। आज
1:05अगर सारे जामुन अच्छे दाम में बिक गए तो
1:07शाम को शाम को थोड़ा राशन और सब्जी लेता
1:09आऊंगा।
1:10हम
1:11ममता ने चूल्हे पर रखे बर्तन को देखते हुए
1:13कहा
1:14हां जी आज घर में राशन भी बहुत कम बचा है।
1:18कोशिश करना कि जामुन अच्छे दाम में बिक
1:20जाए। सुरेश ने मुस्कुराने की कोशिश की और
1:23बोला,
1:24तुम चिंता मत करो। आज भगवान ने चाहा तो
1:27अच्छी कमाई हो जाएगी।
1:29इतना कहकर सुरेश अपनी टोकरी लेकर बाजार की
1:32ओर निकल पड़ा। कुछ देर बाद वह गांव के
1:35बाजार में पहुंचा। उसने एक साफ जगह पर
1:37अपनी टोकरी रख दी। टोकरी में रखे [संगीत]
1:40ताजे जामुन देखकर वे काफी अच्छे लग रहे
1:42थे। सुरेश जोर से आवाज लगाने लगा।
1:46ताजे और मीठे जामुन ले लो। अभी-अभी पेड़
1:49से तोड़ कर लाया हूं। वह ग्राहकों का
1:52इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद एक आदमी
1:54सुरेश के पास आया। उसने जामुनों को ध्यान
1:57से देखा और पूछा,
1:59कितने रुपए किलो दे रहे हो?
2:01सुरेश ने कहा,
2:03₹50 किलो।
2:05आदमी ने हैरानी से कहा,
2:07₹50? हां। इतना महंगा क्यों? जामुन है,
2:11सोना थोड़े ही है।
2:13सुरेश ने शांत होकर कहा,
2:15भाई साहब, यह बाजार से खरीदे हुए जामुन
2:18नहीं है। मैंने इन्हें आज सुबह अपने पेड़
2:20से ताजे तोड़ कर लाया हूं। बहुत मीठे हैं।
2:24आदमी ने टोकरी से कुछ जामुन उठाकर देखे और
2:27बोला,
2:28मैं तो ₹20 किलो दूंगा। देना है तो बताओ।
2:32₹20 में तो मेरा खर्च भी नहीं निकलेगा।
2:34इतने कम में मैं नहीं दे सकता। तो रहने
2:36दो।
2:38यह कहकर वह वहां से चला गया। सुरेश चुपचाप
2:41अपनी टोकरी के पास बैठ गया। उसने बाजार की
2:44तरफ देखा। लोग आ जा रहे थे, लेकिन कोई भी
2:47उसके जामुन खरीदने के लिए नहीं रुक रहा
2:48था। धीरे-धीरे दोपहर बीत गई। सुरेश की
2:51चिंता बढ़ने लगी। वह मन ही मन सोचने लगा।
2:55अगर आज भी जामुन नहीं बिके, तो घर में
2:57खाना कैसे बनेगा? ममता सुबह से थोड़े से
3:00राशन में खाना बना रही होगी। मुझे किसी भी
3:03तरह आज यह जामुन बेचने [संगीत] होंगे। समय
3:06बीतता गया और शाम होने लगी। तभी गांव के
3:09मुखिया की पत्नी प्रभा बाजार की तरफ से
3:11आती हुई सुरेश के पास रुकी। प्रभा ने
3:14सुरेश को उदास बैठे देखा तो पूछा
3:17क्या हुआ सुरेश तुम इतने परेशान क्यों
3:19बैठे हो?
3:22सुरेश ने सिर उठाया और कहा,
3:24क्या बताऊं प्रभा जी? सुबह से बैठा हूं।
3:26यह सारे जामुन अभी तक नहीं बिके। लोग दाम
3:29बहुत कम लगा रहे हैं।
3:31प्रभा [संगीत] ने टोकरी में रखे जामुनों
3:33को देखा। जामुन ताजे, काले और चमकदार थे।
3:36प्रभा ने मन ही मन सोचा,
3:38जामुन तो देखने में बहुत अच्छे हैं। अगर
3:41इतने ताजे जामुन हैं तो घर में बच्चों और
3:44मुखिया जी के लिए भी ले जाना अच्छा रहेगा।
3:48फिर उसने सुरेश से कहा,
3:50अगर मैं ₹30 किलो दूं तो क्या तुम मुझे
3:53जामुन दे दोगे?
3:55सुरेश कुछ पल चुप रहा। उसने आसमान की तरफ
3:58देखा। सूरज ढलने वाला था और रात होने में
4:01ज्यादा समय नहीं बचा था। सुरेश ने मन में
4:04सोचा ₹30 भी कम है।
4:07लेकिन अगर आज यह जामुन नहीं बिके तो कल तक
4:09खराब भी हो सकते हैं। घर में राशन भी खत्म
4:12होने वाला है।
4:13आखिरकार उसने कहा
4:15ठीक है प्रभा जी ₹30 किलो में ले जाइए।
4:18मुझे 10 किलो जामुन चाहिए।
4:20सुरेश ने जल्दी-जल्दी 10 किलो जामुन तौल
4:23कर प्रभा को दे दिए। प्रभा ने पैसे सुरेश
4:26के हाथ में रखे और जामुन लेकर वहां से चली
4:28गई। सुरेश ने पैसे गिने। उसकी कमाई बहुत
4:31ज्यादा नहीं हुई थी। लेकिन आज कम से कम घर
4:34में खाना बनाने के लिए कुछ सामान तो आ ही
4:36सकता था। उसने खाली होती टोकरी उठाई और घर
4:40की ओर चल पड़ा। उधर ममता भी मिट्टी के घर
4:43में सुरेश का इंतजार कर रही थी। शाम ढल
4:45चुकी थी। सुरेश अपनी खाली टोकरी लेकर
4:48धीरे-धीरे अपने मिट्टी के घर की ओर बढ़
4:50रहा था। उसके चेहरे पर थकान साफ दिखाई दे
4:53रही थी। हाथ में कुछ पैसे थे। लेकिन आज
4:56उसकी कमाई उम्मीद से बहुत कम हुई थी। घर
4:59पहुंचते ही ममता ने दरवाजे पर आकर पूछा,
5:04आ गए जी आज जामुन कैसे बिके?
5:07सुरेश ने अंदर आते हुए अपनी जेब से पैसे
5:09निकाले और ममता के हाथ में रखते हुए कहा,
5:13पूरे जामुन तो नहीं बिके लेकिन प्रभा जी
5:15ने 10 किलो जामुन ₹30 किलो के हिसाब से
5:18खरीद लिए।
5:19ममता ने पैसे देखते हुए कहा,
5:23इतने ही पैसे मिले?
5:25सुरेश ने उदास होकर कहा,
5:27हां, सुबह से शाम तक बाजार में बैठा रहा।
5:30लोग जामुन का बहुत कम दाम लगा रहे थे।
5:32आखिर शाम होने लगी तो ₹30 किलो में ही
5:35देने पड़े।
5:37ममता कुछ पल चुप रही। फिर उसने धीरे से
5:39कहा,
5:41कोई बात नहीं जी जितना मिला है उसी में आज
5:44का काम चला लेते हैं।
5:46ममता ने घर में रखा थोड़ा सा खाना सुरेश
5:49के सामने परोस दिया। खाना बहुत साधारण था।
5:52लेकिन दोनों ने बिना किसी शिकायत के साथ
5:54बैठकर खाना खाया। खाना खाने के बाद ममता
5:57ने कहा,
5:58[गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
5:59आप बहुत थक गए होंगे। चलिए अब सो जाइए।
6:04सुरेश ने भी सिर हिलाया। दोनों अपनी छोटी
6:07सी मिट्टी की झोपड़ी में जाकर सो गए।
6:09लेकिन उन्हें क्या पता था कि रात अभी बाकी
6:11थी। आधी रात का समय था। अचानक ममता की
6:14[संगीत] तबीयत बिगड़ने लगी। उसका शरीर
6:16बहुत गर्म हो गया और उसे तेज बुखार चढ़
6:19गया। ममता ने घबराकर सुरेश को आवाज दी।
6:23जी
6:24सुरेश जी
6:26सुरेश की नींद खुल गई। उसने ममता को देखा
6:29तो घबरा गया।
6:30ममता तुम्हें क्या हो गया?
6:33मुझे बहुत तेज बुखार लग रहा है। मेरा पूरा
6:36शरीर तप रहा है।
6:38[गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
6:39सुरेश ने उसके माथे पर हाथ रखा। माथा आग
6:42की तरह गर्म था। सुरेश घबरा गया।
6:47उसने तुरंत अपनी चादर उठाई और घर से बाहर
6:50निकल पड़ा। रात के अंधेरे में वह गांव के
6:52वैद्य जी के घर पहुंचा और दरवाजा खटखटाने
6:55लगा।
6:56वैद्य जी
6:58वैद्य जी जल्दी चलिए। मेरी पत्नी की तबीयत
7:01बहुत खराब है। वैद्य जी बाहर आए और सुरेश
7:04के साथ तुरंत उसके घर पहुंच गए। उन्होंने
7:06ममता को देखा और उसकी नब्ज जांचने के बाद
7:09कहा इन्हें बहुत तेज बुखार है। दवाई देनी
7:13पड़ेगी लेकिन दवाई और इलाज में थोड़ा खर्च
7:15आएगा। वैद्य जी ने सुरेश की तरफ देखते हुए
7:18पूछा।
7:19पैसे हैं तो मैं अभी दवाई दे देता हूं।
7:22सुरेश ने बिना कुछ सोचे कहा। आप दवाई दे
7:25दीजिए वैद्य जी। पैसे की चिंता मत कीजिए।
7:28मैं आपको पैसे दे दूंगा। वैद्य जी ने ममता
7:31को दवाई दी और समझाया। इन्हें यह दवाई समय
7:34पर देना, आराम करने देना। अगर बुखार कम ना
7:37हो तो फिर मुझे बताना। जी वैद्य जी। वैद्य
7:41जी वहां से चले गए। सुरेश ने ममता को दवाई
7:44खिलाई। कुछ देर बाद ममता को नींद आ गई।
7:47सुरेश पूरी रात उसके पास बैठा रहा। वह
7:49बार-बार ममता के माथे पर हाथ रखकर देखता
7:52कि बुखार कम हुआ या नहीं। सुबह होते-होते
7:56ममता का बुखार काफी कम हो चुका था। कुछ
7:58देर बाद उसकी आंख खुली। ममता ने देखा कि
8:01सुरेश उसके पास ही बैठा [संगीत] हुआ था।
8:03वह धीरे से उठी और बोली
8:06अब मेरी तबीयत ठीक लग रही है।
8:10सुरेश के चेहरे पर राहत की मुस्कान आ गई।
8:14भगवान का शुक्र है कि तुम्हारा बुखार कम
8:16हो गया।
8:18जी आपने वैद्य जी को पैसे दे दिए।
8:22सुरेश कुछ पल चुप रहा। ममता ने फिर पूछा।
8:26आपने कल की सारी कमाई मेरी दवाई में क्यों
8:28लगा दी? सुरेश ने हल्की मुस्कान के साथ
8:31कहा,
8:32हां, मैंने दे दिए।
8:34ममता की आंखें भर आई। वह बोली,
8:37हमारे पास पहले ही इतने कम पैसे हैं। अब
8:39घर का राशन कैसे आएगा?
8:41सुरेश [संगीत] ने ममता का हाथ पकड़ कर
8:43कहा,
8:44ममता, पैसे तुमसे ज्यादा जरूरी नहीं है।
8:48ममता चुप होकर सुरेश को देखने लगी। सुरेश
8:51ने कहा,
8:52"पैसे फिर आ जाएंगे। मैं मेहनत करूंगा तो
8:55दोबारा कमा लूंगा। लेकिन अगर तुम्हें कुछ
8:58हो जाता तो मैं क्या करता?
8:59ममता की [नाक से की जाने वाली आवाज़]
9:00आंखों से आंसू निकल पड़े। वह बोली
9:03आप मेरे लिए इतना कुछ कर देते हैं और मैं
9:06आपके लिए कुछ भी नहीं कर पाती।
9:08सुरेश ने कहा
9:10ऐसा मत बोलो ममता। हम गरीब जरूर हैं लेकिन
9:13जब तक हम दोनों एक दूसरे के साथ हैं तब तक
9:17हम सबसे [संगीत] अमीर हैं।
9:18दोनों कुछ देर एक दूसरे को देखते रहे।
9:20लेकिन घर में [गला साफ़ करने की आवाज़] अब
9:21राशन लगभग खत्म हो चुका था। अगली सुबह
9:24सुरेश फिर अपनी टोकरी लेकर जामुन के पेड़
9:27के पास पहुंचा। उसने पेड़ से बचे हुए ताजे
9:29जामुन तोड़े और टोकरी भरकर बाजार की ओर
9:32निकल पड़ा। सुरेश को उम्मीद थी कि आज शायद
9:35जामुन अच्छे दाम में बिक जाएंगे। वह बाजार
9:38पहुंचा और अपनी टोकरी लगाकर आवाज लगाने
9:40लगा।
9:41ताजे और मीठे जामुन ले लो। अभी पेड़ से
9:43तोड़कर लाया हूं।
9:45कुछ लोग उसके पास आए। लेकिन फिर वही हुआ।
9:48कोई बहुत कम दाम लगाने लगा तो कोई [संगीत]
9:50जामुन देखकर आगे बढ़ गया। एक आदमी ने कहा
9:54भाई ₹30 किलो से ज्यादा नहीं दूंगा भाई
9:58साहब इतने कम में तो मेरी मेहनत भी नहीं
10:00निकलेगी
10:02लेकिन आदमी वहां से चला गया सुरेश सुबह से
10:04शाम तक बाजार में बैठा रहा फिर भी उसकी कल
10:07से भी कम कमाई हुई शाम को वह मायूस होकर
10:10अपनी टोकरी लेकर घर लौट आया ममता ने उसे
10:13देखते ही पूछा
10:14क्या हुआ जी आज इतने उदास क्यों है
10:17क्या बताऊं ममता आज तो कल से भी कम पैसे
10:19मिले सुबह से शाम तक बैठा रहा फिर भी जाम
10:22जामुन सही दाम में नहीं बिके।
10:24ममता ने टोकरी में बचे हुए जामुनों को
10:26देखा। उसने कुछ जामुन हाथ में लेकर कहा,
10:29"जी, यह तो बहुत सारे जामुन अभी भी बचे
10:32हैं।"
10:34सुरेश ने मायूस होकर कहा,
10:36हां, अब इन्हें कल तक बेचने की कोशिश
10:39करूंगा। लेकिन अगर कल तक भी नहीं बिके, तो
10:42यह खराब हो जाएंगे।"
10:44ममता ने कुछ जामुन उठाए और बोली,
10:46"क्यों ना इनका शरबत बना दूं। कम से कम
10:48जामुन खराब तो नहीं होंगे।
10:50हां, बना लो। घर में हम दोनों भी पी
10:52लेंगे।
10:53ममता जामुन लेकर रसोई में चली गई। उसने
10:56जामुनों को अच्छी तरह धोया और उनका गुदा
10:59निकालकर पानी और चीनी मिलाई। कुछ देर बाद
11:01उसने स्वादिष्ट जामुन का शरबत तैयार कर
11:04लिया। ममता ने एक गिलास सुरेश को दिया।
11:07सुरेश ने शरबत पीकर कहा,
11:10"अरे ममता, यह तो बहुत अच्छा बना है।"
11:13तभी उनके घर के बाहर किसी के आने की आवाज
11:16सुनाई दी।
11:17सुरेश घर पे हो क्या? सुरेश बाहर आया तो
11:20सामने गांव के मुखिया खड़े थे। सुरेश ने
11:23हाथ जोड़कर कहा,
11:25आइए मुखिया जी कल मेरे बेटे का जन्मदिन
11:28है। उसी का बुलावा देने आया हूं। तुम
11:32दोनों कल जरूर आना।
11:34सुरेश ने कहा,
11:35जी मुखिया जी, हम जरूर आएंगे।
11:38तभी ममता ने सोचा कि मुखिया जी को भी शरबत
11:40[संगीत] पिला देती हूं। वह अंदर गई और एक
11:43गिलास जामुन का शरबत लेकर आई। ममता ने कहा
11:46मुखिया जी यह शरबत पीकर देखिए आज घर में
11:50बचे जामुन से बनाया है।
11:52मुखिया ने गिलास लिया और शरबत पीने लगे।
11:55पहला घूंट पीते ही उन्होंने कहा अरे वाह
12:00बहुत स्वादिष्ट है। मुखिया ने फिर शरबत
12:03पिया और बोले [नाक से की जाने वाली आवाज़]
12:06ऐसा शरबत मेरी मां मुझे बचपन में पिलाया
12:08करती थी। उसी की याद आ गई। यह बहुत
12:11स्वादिष्ट है।
12:12ममता ने कहा,
12:14धन्यवाद मुखिया जी।
12:15मुखिया ने कहा,
12:17अगर तुम लोग कल मेरे बेटे के जन्मदिन पर
12:19ऐसे शरबत बनाकर अपना ठेला लगाओ तो मुझे
12:22बहुत खुशी होगी और मैं तुम्हें उसके अच्छे
12:24पैसे दूंगा।
12:25सुरेश ने हैरानी से पूछा, ठेला? मुखिया
12:28बोले, हां।
12:30कल मेरे बेटे के जन्मदिन पर गांव के बहुत
12:32सारे लोग आएंगे। वहां खाने-पीने की बहुत
12:35सारी चीजें होंगी। तुम अपना जामुन का शरबत
12:37का ठेला भी लगा सकते हो।
12:39सुरेश और ममता एक दूसरे की तरफ देखने लगे।
12:42सुरेश के चेहरे पर खुशी आ गई। वह बोला
12:45जी मुखिया जी हम जरूर ऐसा करेंगे।
12:49ममता ने [संगीत] भी कहा
12:51जी मुखिया जी कल हम शरबत जरूर बनाएंगे।
12:54तो फिर कल मिलते हैं।
12:56इतना कहकर मुखिया वहां से चले गए। मुखिया
12:59के जाते ही सुरेश ने खुशी से ममता की तरफ
13:01देखा।
13:03ममता देखो हमने तो सोचा भी नहीं था कि यह
13:06शरबत किसी काम आ जाएगा।
13:09ममता मुस्कुरा कर बोली
13:11मैंने तो बस जामुन खराब होने से बचाने के
13:14लिए बनाया था। अब देखते हैं कल क्या होता
13:17है।
13:18सुरेश ने कहा
13:19कल अगर शरबत अच्छा बिक गया तो शायद हमारी
13:22थोड़ी मदद हो जाए।
13:23हां जी। लेकिन हमें कल बहुत मेहनत करनी
13:25पड़ेगी।
13:28अगले दिन सुरेश और ममता सुबह से ही मुखिया
13:31के [संगीत] बेटे के जन्मदिन की तैयारी में
13:33लग गए। ममता ने घर में बचे हुए जामुनों से
13:36खूब सारा शरबत तैयार किया। सुरेश ने
13:38मिट्टी के घड़े और गिलासों का इंतजाम
13:40किया। दोनों शरबत लेकर मुखिया के घर
13:43पहुंचे और एक छोटी सी जगह पर अपना शरबत का
13:46ठेला लगा लिया। धीरे-धीरे जन्मदिन में
13:49गांव के लोग आने लगे। एक आदमी ने सुरेश से
13:52पूछा।
13:54क्या बेच रहे हो? हम जामुन का ठंडा शरबत
13:57है। एक गिलास पीकर देखिए।
14:00आदमी ने शरबत लिया और पीते ही बोला,
14:03"अरे वाह, बहुत स्वादिष्ट है।"
14:06उसके बाद एक-एक करके दूसरे लोग भी शरबत
14:08पीने लगे। जिसने भी शरबत पिया, उसने ममता
14:11की तारीफ की। बहुत बढ़िया शरबत है। ऐसा
14:15शरबत तो पहली बार पिया है। एक गिलास और
14:17देना। देखते ही देखते उनके पास लोगों की
14:20भीड़ लग गई। ममता लगातार शरबत बनाती रही
14:23और सुरेश लोगों को गिलास देता रहा। कुछ ही
14:27समय में उनके सारे शरबत खत्म हो गए। ममता
14:30ने खुशी से सुरेश की तरफ देखा। सुरेश भी
14:32मुस्कुरा रहा था। शाम तक जन्मदिन का
14:35कार्यक्रम खत्म हो गया। रात को मुखिया ने
14:37सुरेश और ममता को अपने पास बुलाया।
14:40उन्होंने कहा,
14:41तुम दोनों ने आज बहुत अच्छा शरबत बनाया
14:44था। सभी लोगों को बहुत पसंद आया।
14:47फिर मुखिया ने उन्हें मेहनत के अच्छे पैसे
14:49दिए। सुरेश ने पैसे हाथ में लिए और खुशी
14:52से कहा
14:53बहुत-बहुत धन्यवाद मुखिया जी मेहनत करते
14:56रहना तुम्हारे हाथ में हुनर है।
14:59सुरेश और ममता खुशी-खुशी अपने घर लौट आए।
15:03रात में दोनों खाना खाने के बाद आंगन में
15:05बैठे थे। सुरेश ने आज मिले पैसे निकाल कर
15:07ममता के सामने रख दिए।
15:09वह बोला
15:10ममता आज पहली बार लगा कि हमारी मेहनत से
15:13अच्छी कमाई भी हो सकती है।
15:15हां जी आज तो लोगों ने हमारे शरबत को बहुत
15:18पसंद किया।
15:20सुरेश कुछ देर सोचता रहा। फिर बोला, तो
15:23क्यों ना हम कल से बाजार में जामुन बेचने
15:26के बजाय जामुन का शरबत ही बेचें।
15:29ममता ने कहा,
15:30मुझे भी यही ठीक लग रहा है। जामुन वैसे
15:32बेचने पर हमें कम पैसे मिलते हैं। लेकिन
15:35शरबत बनाकर बेचेंगे तो मेहनत का अच्छा
15:38पैसा मिल सकता है।
15:39फिर तय रहा कल से हम दोनों मिलकर शरबत
15:42बेचेंगे।
15:44अगली सुबह ममता सूरज निकलने से पहले ही उठ
15:46गई।
15:49उसने ताजे जामुन निकाले और बहुत सारा
15:52जामुन का शरबत तैयार करने लगी। सुरेश ने
15:55भी उसकी मदद की। कुछ देर बाद कई घड़ों में
15:57ठंडा जामुन का शरबत तैयार हो गया। दोनों
16:00घड़े लेकर बाजार पहुंचे। सुरेश ने एक जगह
16:03अपना ठेला लगाया और आवाज लगाने लगा।
16:06ठंडा-ठंडा जामुन का शरबत। एक बार पी कर
16:09देखिए। शुरुआत में कुछ गांव वाले उनके पास
16:12आए। एक आदमी ने शरबत पीकर कहा।
16:15अरे [नाक से की जाने वाली आवाज़] यह तो
16:16वही शरबत है जो मुखिया जी के बेटे के
16:18जन्मदिन पर मिला था।
16:20सुरेश ने मुस्कुरा कर कहा,
16:22जी वही है।
16:23आदमी ने तुरंत कहा,
16:25फिर तो एक गिलास और देना।
16:27धीरे-धीरे दूसरे लोग भी आने लगे। जिसने भी
16:30शरबत पिया, उसे उसका स्वाद बहुत अच्छा
16:33लगा। कुछ ही देर में उनके ठेले के पास
16:35लोगों की भीड़ लग गई। ममता लगातार शरबत
16:38भरती जा रही थी और सुरेश ग्राहकों को
16:41गिलास दे रहा था। दोपहर तक उनके कई घड़े
16:44खाली हो चुके थे। सुरेश ने कमाई के पैसे
16:46गिने तो उसकी आंखों में खुशी आ गई। वह
16:49ममता से बोला
16:51ममता आज तो जामुन बेचने से कई गुना ज्यादा
16:54कमाई हो गई। [हंसी]
16:56ममता मुस्कुरा कर बोली
16:58क्योंकि हमने अपने जामुन को सिर्फ बेचा
17:00नहीं उससे कुछ नया बनाया है।
17:02हम अगर रोज ऐसा ही चलता रहा तो शायद हम
17:05अपने घर की हालत भी सुधार पाएंगे।
17:08दोनों खुशी से एक दूसरे को देखने लगे।
17:10अगले कुछ दिनों तक सुरेश और ममता रोज
17:13बाजार में जामुन का शरबत बेचने लगे। अब
17:16उनके ठेले पर गांव के लोगों की भीड़ लगने
17:18लगी थी। लोग दूर से ही आवाज लगाते
17:21सुरेश भाई दो गिलास जामुन का शरबत देना।
17:25ममता शरबत तैयार करती और सुरेश ग्राहकों
17:28को गिलास में भर कर देता। धीरे-धीरे उनकी
17:30कमाई पहले से काफी बेहतर होने लगी। एक दिन
17:33ममता ने घर में बचे कुछ जामुनों को देखते
17:36हुए सुरेश से कहा,
17:37"जी, अब हमारे शरबत को तो लोग पसंद करने
17:40लगे हैं। क्यों ना जामुन से कोई मिठाई भी
17:43बनाकर देखें।"
17:44सुरेश ने कहा,
17:46हां लेकिन कैसी मिठाई?
17:49वही तो आज सोच कर देखेंगे।
17:52ममता ने जामुनों से एक नई तरह की मीठी चीज
17:55तैयार की। उसने थोड़ा सा बनाकर सुरेश को
17:58छकाया। सुरेश ने खाते ही कहा,
18:01अरे ममता, यह तो बहुत स्वादिष्ट है।
18:04[हंसी]
18:05ममता खुश होकर बोली,
18:06तो कल से इसे भी ठेले पर बेचेंगे।
18:09हम अगले दिन उनके ठेले पर शरबत के साथ
18:12जामुन की मिठाई भी रखी थी। एक ग्राहक ने
18:15मिठाई देखकर पूछा,
18:16"यह क्या है?
18:20जामुन की मिठाई है। एक बार खाकर देखिए।"
18:23ग्राहक ने मिठाई खाई और मुस्कुराते हुए
18:26बोला,
18:26बहुत बढ़िया। एक डिब्बा घर के लिए भी दे
18:28देना।
18:29उस दिन कई लोगों ने शरबत के साथ जामुन की
18:32मिठाई भी खरीदी। धीरे-धीरे उनकी मिठाई की
18:35भी पहचान बनने लगी। अब सुरेश और ममता सुबह
18:38से ही तैयारी करने लगते। ममता घर पर शरबत
18:42और मिठाई तैयार करती और सुरेश बाजार में
18:44ठेला लगाता। कुछ ही महीनों में उनकी कमाई
18:47इतनी बढ़ गई कि घर का राशन आराम से आने
18:50लगा। उन्होंने अपने मिट्टी के घर की
18:52मरम्मत भी करवाई। टपकती हुई छत ठीक हो गई
18:56और आंगन भी साफ सुथरा हो गया। एक शाम
18:59दोनों अपने आंगन में जामुन के पेड़ के
19:01नीचे बैठे थे। सुरेश ने मुस्कुरा कर कहा
19:04याद है जब हम इन्हीं जामुनों को बाजार में
19:06बेचने जाते थे और लोग ₹2030 किलो से
19:10ज्यादा देने को तैयार नहीं होते थे।
19:13ममता हंसते हुए बोली
19:14हां जी। तब हमें लगता था कि यह जामुन
19:17हमारे लिए हमारे लिए कोई फायदा नहीं कर
19:19रहे। सुरेश ने पेड़ की तरफ देखते हुए कहा,
19:23लेकिन असली कमी जामुन में नहीं हमारे
19:26सोचने के तरीके में थी।
19:28ममता ने कहा सही कहा आपने।
19:31अगर उस दिन बचे हुए जामुनों से मैंने शरबत
19:33नहीं बनाया होता तो शायद हमें अपना यह काम
19:36शुरू करने का मौका भी नहीं मिलता।
19:38सुरेश ने कहा
19:40और उस दिन मुखिया जी हमारे घर नहीं आते तो
19:42हमें पता भी नहीं चलता कि हमारे हाथ का
19:44बनाया शरबत इतना अच्छा है।
19:47दोनों मुस्कुराने लगे। अब उनके घर में
19:50पहले जैसी चिंता नहीं थी। रसोई में
19:52पर्याप्त राशन रहता था। घर की हालत सुधर
19:55गई थी और दोनों मेहनत करके खुशी से अपना
19:58जीवन जी रहे थे। सुरेश ने जामुन के पेड़
20:01की ओर देखकर कहा
20:02इस पेड़ ने हमें सिर्फ जामुन नहीं दिए
20:04ममता।
20:07इसने हमें अपनी मेहनत से आगे बढ़ने का
20:09रास्ता दिया है।
20:10ममता मुस्कुरा कर बोली और हमें यह भी
20:13सिखाया है कि मुसीबत चाहे कितनी भी बड़ी
20:15हो अगर इंसान मेहनत और समझदारी से काम करे
20:19तो रास्ता जरूर निकलता है। दोनों ने एक
20:21दूसरे की तरफ देखा और मुस्कुरा दिया। उस
20:24दिन के बाद सुरेश और ममता का जामुन का
20:26शरबत और मिठाई का काम पूरे इलाके में
20:29मशहूर हो गया। सीख मुश्किल समय में हार
20:32मानने के बजाय अगर हम अपनी मेहनत और हुनर
20:35का सही इस्तेमाल करें तो छोटी सी शुरुआत
20:38भी एक दिन बड़ी सफलता बन सकती है। दोस्तों
20:41आपको हमारी आज की कहानी कैसी लगी? कमेंट
20:44में जरूर बताएं। वीडियो पसंद आई हो तो
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20:53[घंटी की आवाज़]