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0:00आपने बहुत बार न्यूज़ में या फिर अपने
0:02आसपास जीडीपी के बारे में सुना होगा ग्रॉस
0:04डोमेस्टिक प्रोडक्ट तो आखिर ये है क्या
0:06देखिए ग्रॉस मतलब टोटल और डोमेस्टिक मतलब
0:09इंडिया की पॉलिटिकल बाउंड्री के अंदर और
0:11प्रोडक्ट में आते हैं गुड्स एंड सर्विसेस
0:14जो एक साल के अंदर प्रोड्यूस हुए हैं
0:15देखिए आप पैसा सिर्फ दो ही तरीके से कमा
0:17सकते हैं या तो आप कुछ प्रोड्यूस करिए
0:18जैसे कि कुछ लोग कार्स प्रोड्यूस कर रहे
0:20हैं बॉटल्स प्रोड्यूस कर रहे हैं टॉयज
0:21मोबाइल वगैरह या फिर आप कोई सर्विसेस
0:24दीजिए जैसे कि डॉक्टर वकील ये लोग
0:26सर्विसेस देते हैं या फिर कोई कंपनी में
0:27काम करके सर्विस देता है या फिर एक है जो
0:30बाल काट के सर्विसेस देता है इन सारे
0:32गुड्स एंड सर्विसेस की जो वैल्यू होती है
0:34वैल्यू मतलब आपने ₹1 में बाल काटे हैं तो
0:37₹1 उसकी वैल्यू हो गई आपने ₹10 में कोई
0:39बॉटल खरीदी है तो ₹10 उसकी वैल्यू हो गई
0:42तो 1 साल के अंदर ये जितने भी गुड्स एंड
0:44सर्विसेस की वैल्यू होती है विद इन अ
0:46कंट्री उसको जीडीपी बोलते हैं अगर यूएसए
0:49की कंपनी इंडिया में आके कुछ मैन्युफैक्चर
0:51करेगी या बनाएगी तो वो इंडिया के जीडीपी
0:53में काउंट होगा वो यूएसए के जीडीपी में
0:55काउंट नहीं होगा इसीलिए हम लोग इतना फोकस
0:57करते हैं मेक इन इंडिया के अंदर इसको एक
0:59एग्जांपल से समझते हैं मान लीजिए कोई एक
1:01मॉल है उसमें कोई शॉप कपड़े बेच रही है
1:03कोई शॉप बाल काट रही है कोई रो कार्ड रीडर
1:06भविष्य बता रहा है सर्विसेस दे रहा है कोई
1:08बर्तन बेच रहा है और हर फ्लोर पे गुड्स
1:10एंड सर्विसेस बेचे जा रहे हैं अगर उस मॉल
1:12में हम हर बिकी हुई चीज की कीमत नोट कर
1:14लें और 1 साल तक करते रहे और लास्ट में उन
1:17सारी चीजों को ऐड कर दें तो वो उस मॉल की
1:19जीडीपी होगी ठीक इसी तरीके से देश में 1
1:22साल के अंदर कितने गुड्स एंड सर्विसेस
1:24प्रोड्यूस हुए हैं वो उसका जीडीपी होता है
1:26तो पहली चीज तो यह है कि जीडीपी कैलकुलेट
1:28करने की जरूरत ही क्यों पड़ रही है क्यों
1:30इतने एफर्ट्स लगाए जा रहे हैं इसको
1:31कैलकुलेट करने के लिए देखिए अगर जीडीपी हर
1:33साल ऊपर जा रहा है इसका मतलब कि प्रोडक्शन
1:35कंट्री के अंदर ज़्यादा हो रहा है देश की
1:37इकोनॉमी अच्छी है और अगर जीडीपी हर साल
1:40नीचे जा रहा है तो इसका मतलब कि देश के
1:41अंदर गुड्स एंड सर्विसेस कम प्रोड्यूस हो
1:43रहे हैं जब कम प्रोडक्शन होता है तो
1:45सेलिंग भी कम होती है और जब कम सेलिंग
1:48होगी तो इसका मतलब कि जो बिजनेसेस हैं वह
1:50कम पैसा कमाएंगे और कम पैसा कमाने का मतलब
1:53है कि लोगों की परचेसिंग पावर कम हो रही
1:54है इकोनॉमी डाउन हो रही है जीडीपी से हमें
1:57अपने देश की इकनॉमिक हेल्थ का पता चलता है
1:59उसी के बेसिस जिस पे गवर्नमेंट्स अपनी
2:00पॉलिसीज बनाती है जब जीडीपी का डाटा आता
2:02है तो हमें अपनी शॉर्ट कमिंग्स का पता
2:04चलता है और बिना शॉर्टकमिंग्स को पता करे
2:06हम उनको सुधार नहीं सकते हैं पूरे वर्ल्ड
2:08में यूएसए की जीडीपी नंबर वन पे है यूएसए
2:10की जीडीपी अराउंड 22.99 ट्रिलियन डॉलर है
2:13और सेकंड पे चाइना है विद द इकोनॉमी ऑफ 18
2:16ट्रिलियन डॉलर और इंडिया की इकोनॉमी 2.6
2:19ट्रिलियन डॉलर है और ये चेंज भी होती रहती
2:21है अब आप सोच रहे होंगे कि ये कैलकुलेट
2:23कैसे होता है अब कोई कंपनी है उसने एक जगह
2:25से बैटरी खरीदी दूसरी जगह से चिप खरीदी और
2:27मोबाइल बना के बेच दिया तो वो जो बैटरी
2:30खरीदी है उसका प्राइस जीडीपी में ऐड होगा
2:32कि नहीं और अगर उसका प्राइस ऐड होगा तो जो
2:34फाइनल मोबाइल बेचा जाएगा उस पर्टिकुलर
2:36मोबाइल का प्राइस जीडीपी में ऐड होगा कि
2:38नहीं और अगर दोनों का प्राइस जीडीपी में
2:40ऐड होगा तो एक बैटरी का प्राइस दो बार
2:43काउंट हो रहा है जीडीपी में तो इससे जो
2:45हमारी जीडीपी के थ्रू प्रोडक्शन कैलकुलेट
2:47करने का जो प्रोसेस है वो गलत हो जाएगा एक
2:49एग्जांपल से आपको समझाता हूं मान लीजिए
2:51मुझे ऑमलेट खाना है मैं मार्केट में जाके
2:53एग खरीदता हूं तो उसका जो प्राइस होगा वो
2:55जीडीपी में ऐड होगा लेकिन वहीं पे अगर एक
2:58कोई बेकरी वाला है वो वो जाके एग खरीदता
3:00है क्योंकि उसको केक बनाना है बेचने के
3:02लिए तो वो जो एग का प्राइस होगा वो ऐड
3:04नहीं होगा बल्कि वो जो फाइनल प्रोडक्ट है
3:07जो फिनिश प्रोडक्ट है केक उसका प्राइस
3:09जीडीपी में ऐड होगा इसी तरीके से हर
3:11प्रोडक्ट के लिए होता है इन सारी चीजों का
3:13हिसाब सेंट्रल स्टेटिस्टिक्स ऑफिस रखता है
3:15कि कौन सी चीज बिजनेस ओनर पे करके ले रहा
3:17है और कौन कंज्यूमर खरीद रहा है इसमें वो
3:20प्रोडक्ट काउंट होते हैं जो प्रोड्यूस
3:22होके बिके हैं अब मैं अपने घर प लकड़ी का
3:24कोई प्रोडक्ट बना लूं और अपने घर प रख लूं
3:26तो वो जीडी के प्रोडक्शन में काउंट नहीं
3:28होगा जीडीपी में गुड्स एंड सर्विसेस के
3:30साथ-साथ इन्वेस्टमेंट भी काउंट होता है और
3:32इन्वेस्टमेंट हमेशा से रिस्की और
3:34कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस लगता है क्योंकि
3:36इसमें सबसे बड़ा क्वेश्चन यह होता है कि
3:37कहां इन्वेस्टमेंट करें कि हमें प्रॉफिट
3:39हो और इसके लिए काफी रिसर्च चाहिए होती है
3:42और ये डिसाइड करना और भी ज्यादा मुश्किल
3:44हो जाता है जब कुछ अनएक्सपेक्टेड चीजें आ
3:45जाती हैं जैसे कि कोरोना कोविड के चलते
3:48मार्केट एकदम से चेंज हो गया इस टाइम में
3:49काफी कंपनीज बंद हो गई और इन्वेस्टमेंट और
3:51भी ज्यादा रिस्की हो गया बट ऐसे टाइम पे
3:53भी काफी कंपनीज ऐसी थी जो ना सिर्फ सस्टेन
3:55कर पाई बल्कि उन्होंने काफी ग्रोथ भी देखी
3:58और बहुत कंपनीज इतनी स्टेबल थी कि उन्हें
4:00बहुत ज्यादा इफेक्ट नहीं हुआ इस चेंज से
4:02स्मॉल केस आपको ऐसा ही एक पोर्टफोलियो में
4:04इन्वेस्ट करने का ऑप्शन देता है जिसका नाम
4:06है टॉप 100 स्टॉक्स जिसमें इंडिया की
4:08बिगेस्ट कंपनी आपको एक बास्केट में
4:10कैटेगरी इज मिलेंगी स्मॉल केस की रिसर्च
4:12के हिसाब से बड़ी कंपनीज के बर्स होने के
4:14चांसेस काफी कम होते हैं और यह आपके
4:16पोर्टफोलियो की स्टेबिलिटी बढ़ा देने में
4:18मदद करती है स्मॉल केस आपको इन कंपनीज की
4:20ग्रोथ रिपोर्ट पास्ट परफॉर्मेंस रिव्यूज
4:23सारी डिटेल्स देता है जो आपको अपने
4:24एनालिसिस में हेल्प करता है इसी तरीके से
4:27स्मॉल केस में अलग बास्केट ऑफ स्टॉक्स हैं
4:29जिनसे आप अपनी चॉइस के हिसाब से इन्वेस्ट
4:31कर सकते हैं तो यूज कीजिए इस सिंपल
4:33प्लेटफॉर्म का टू इन्वेस्ट लिंक इज इन द
4:35डिस्क्रिप्शन बॉक्स और ये कोई प्रोफेशनल
4:37एडवाइस नहीं है तो आप अपनी समझ से
4:39इन्वेस्ट करें जीडीपी दो ही केस में बढ़ता
4:41है पहला तो यह है कि प्रोडक्शन ज्यादा से
4:43ज्यादा हुआ हो गुड्स एंड सर्विसेस का और
4:45दूसरा केस ये भी हो सकता है कि प्रोडक्शन
4:47उतना ना हुआ हो लेकिन प्राइसेस बढ़ गए हो
4:50तो जो पहला केस है उसको हम कहते हैं रियल
4:52जीडीपी और जो दूसरा केस है जहां पे प्राइस
4:54बढ़ने की वजह से जीडीपी बढ़ा है उसको हम
4:56कहते हैं नॉमिनल जीडीपी इसलिए जब गवर्मेंट
4:59गवर्मेंट आपके सामने जीडीपी का डाटा रखती
5:01है तो आपको ध्यान देना है कि वह रियल
5:02जीडीपी है या फिर नॉमिनल जीडीपी है जीडीपी
5:05का जो मेन पर्पस है वो कंट्री के गुड्स
5:07एंड सर्विसेस का प्रोडक्शन बता सके इसलिए
5:09जो दूसरा केस है जिसमें प्राइस की वजह से
5:11जीडीपी बढ़ रहा है अगर हम उसको कंसीडर
5:13करेंगे तो देश की एक्चुअल इकोनॉमी नहीं
5:15पता चल पाएगी इस चीज का सलूशन निकालने के
5:17लिए एक बेस ईयर लिया गया जैसे कि इंडिया
5:19में जो जीडीपी निकाला गया है वो 2011 2012
5:22को बेस ईयर लेके निकाला जाता है जब आप
5:24न्यूज़ में जीडीपी का डाटा देखते होंगे तो
5:26दो तरीके से जीडीपी का डाटा लिखा होता है
5:28एक लिखा होता है जीडी एट कांस्टेंट प्राइस
5:31एंड दूसरा लिखा होता है जीडीपी एट करंट
5:33प्राइस जीडीपी एट कांस्टेंट प्राइस जहां
5:35लिखा होता है उसका मतलब कि 2011 को बेस
5:38ईयर लिया गया है जीडीपी एट करंट प्राइसेस
5:40का मतलब होता है कि उसमें जो बेस ईयर है
5:42वो करंट ईयर लिया गया है फैक्ट्री के अंदर
5:44जब कोई प्रोडक्ट बनता है तो उस टाइम पे
5:46उसमें टैक्स इंक्लूड नहीं होता है उस समय
5:48जो उसका प्राइस होता है उसको फैक्टर
5:50प्राइस बोलते हैं और जब उसमें टैक्स ऐड हो
5:51जाता है तो उसको मार्केट प्राइस कहते हैं
5:532015 से पहले जीडीपी फैक्टर प्राइस से
5:55कैलकुलेट होता था और उसके बाद से मार्केट
5:58प्राइस से कैलकुलेट हो रहा है एक एक घर है
5:59जिसमें चार लोग हैं और उस घर की आमदनी ₹1
6:02है और दूसरा घर है जिसकी आमदनी ₹10 है
6:05लेकिन घर में 20 लोग हैं तो भले ही दूसरे
6:07घर की ज्यादा आमदनी हो लेकिन पहला घर
6:10ज्यादा अच्छे से चल पाएगा यूके और इंडिया
6:12का जीडीपी ऑलमोस्ट सेम है लेकिन आईएमएफ और
6:14वर्ल्ड बैंक पॉपुलेशन की वजह से यूके को
6:16ज्यादा अच्छा मानता है यूके और इंडिया का
6:18जीडीपी तो सेम है लेकिन जीडीपी पर कैपिटा
6:20में बहुत ज्यादा फर्क है यूके का पर
6:23कैपिटा 40000 तक जाता है और इंडिया का पर
6:26कैपिटा 1900 के अराउंड रहता है जीडीपी
6:28कैलकुलेट करने के लिए कई सारे फॉर्मूले
6:30हैं जीडीपी बाय एक्सपेंडिचर बाय इनकम बाय
6:33प्रोडक्शन लेकिन इन सब चीजों में आपको
6:35घुसने की जरूरत नहीं है वो फाइनेंशियल
6:36एक्सपर्ट्स का काम है लेकिन गवर्नमेंट जब
6:38आपके सामने जीडीपी का डाटा रखती है तो कुछ
6:40चीजों का ध्यान आपको रखना है जैसे कि
6:42नॉमिनल जीडीपी रियल जीडीपी जीडीपी एट
6:45कांस्टेंट प्राइस है या फिर जीडीपी एट
6:46करंट प्राइस है जीडीपी दो तरीके से
6:49कैलकुलेट होता है एक एनुअली और एक
6:50क्वार्टरली एक साल में चार क्वार्टर होते
6:53हैं और जो पहला क्वार्टर होगा वो पिछले
6:55साल के पहले क्वार्टर से कंपेयर होगा ताकि
6:57हम बरसात के प्रोडक्शन को ला लास्ट ईयर के
6:59बरसात के प्रोडक्शन से कंपेयर कर सकें अब
7:022020 में कोरोना की वजह से थर्ड क्वार्टर
7:04का जीडीपी रेट बहुत नीचे चला गया था 0.4
7:07पर तक अब नेक्स्ट ईयर थर्ड क्वार्टर को
7:09सेम मं से कंपेयर करा जाएगा तो थोड़े से
7:11भी प्रोडक्शन से जीडीपी रेट ऊपर पहुंच
7:13जाएगा क्योंकि कोरोना टाइम में बहुत नीचे
7:15था तो जरूरी नहीं है कि हर बार प्रोडक्शन
7:17की वजह से ही जीडीपी ग्रोथ रेट ऊपर जाए
7:19जीडीपी रेट एक बहुत ही सिंपल तरीके से
7:21कैलकुलेट होता है अगर पिछले साल थर्ड
7:23क्वार्टर में जीडीपी 100 था और फिर इस साल
7:26थर्ड क्वार्टर में जीडीपी 105 है तो
7:28जीडीपी रेट ट होगा 5 पर देखिए जीडीपी की
7:31लिमिटेशंस भी है इसमें इनफॉर्मल सेक्टर के
7:33डाटा को जोड़ना बहुत ही मुश्किल है और
7:35इंडिया में मैक्सिमम सेक्टर अन
7:36ऑर्गेनाइज्ड है दूसरी दिक्कत इसमें ये
7:38रहती है शेल कंपनीज जो एक्चुअल में गुड्स
7:40और सर्विसेस प्रोड्यूस नहीं करती हैं
7:42सिर्फ मनी लरिंग और टैक्स बचाने के लिए ही
7:44खुलती हैं जिन्हें शेल कंपनी कहते हैं
7:46जीडीपी में काउंट हो जाती है और क्योंकि
7:48गवर्नमेंट का फायदा होता है इसे ऐड करने
7:50में तो वो इसको ऐड कर लेती है इसपे कारवाई
7:53नहीं करती हैं 2019 में एमसीए की रिपोर्ट
7:55आई तो पता चला कि 36 पर कंपनीज शेल कंपनीज
7:58हैं मतलब कि ये बस टैक्स दिखा रही है मनी
8:00लरिंग कर रही है और एक्चुअल में कोई
8:02सर्विसेस या फिर गुड्स प्रोड्यूस नहीं कर
8:04रही हैं लेकिन इनका डाटा फिर भी जीडीपी
8:06में काउंट हुआ तो इस तरीके की ट्रिक्स हर
8:08गवर्नमेंट करती है अपने जीडीपी के डाटा को
8:10ऊपर करने के लिए अगर जीडीपी बढ़ेगा तो
8:13अनइंप्लॉयमेंट कम होगा और क्योंकि
8:15गवर्नमेंट जीडीपी डाटा को सही से नहीं
8:16रखती हैं और यही रीजन है कि इंडिया पहली
8:19ऐसी कंट्री है जहां पे जीडीपी का रेट भी
8:21बढ़ रहा है और अनइंप्लॉयमेंट रेट भी बढ़
8:23रहा है