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Gross domestic product (GDP) Explained | Nitish Rajput official

REMIX BOLLYBOX · 1,922 words · 9 min read

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0:00आपने बहुत बार न्यूज़ में या फिर अपने

0:02आसपास जीडीपी के बारे में सुना होगा ग्रॉस

0:04डोमेस्टिक प्रोडक्ट तो आखिर ये है क्या

0:06देखिए ग्रॉस मतलब टोटल और डोमेस्टिक मतलब

0:09इंडिया की पॉलिटिकल बाउंड्री के अंदर और

0:11प्रोडक्ट में आते हैं गुड्स एंड सर्विसेस

0:14जो एक साल के अंदर प्रोड्यूस हुए हैं

0:15देखिए आप पैसा सिर्फ दो ही तरीके से कमा

0:17सकते हैं या तो आप कुछ प्रोड्यूस करिए

0:18जैसे कि कुछ लोग कार्स प्रोड्यूस कर रहे

0:20हैं बॉटल्स प्रोड्यूस कर रहे हैं टॉयज

0:21मोबाइल वगैरह या फिर आप कोई सर्विसेस

0:24दीजिए जैसे कि डॉक्टर वकील ये लोग

0:26सर्विसेस देते हैं या फिर कोई कंपनी में

0:27काम करके सर्विस देता है या फिर एक है जो

0:30बाल काट के सर्विसेस देता है इन सारे

0:32गुड्स एंड सर्विसेस की जो वैल्यू होती है

0:34वैल्यू मतलब आपने ₹1 में बाल काटे हैं तो

0:37₹1 उसकी वैल्यू हो गई आपने ₹10 में कोई

0:39बॉटल खरीदी है तो ₹10 उसकी वैल्यू हो गई

0:42तो 1 साल के अंदर ये जितने भी गुड्स एंड

0:44सर्विसेस की वैल्यू होती है विद इन अ

0:46कंट्री उसको जीडीपी बोलते हैं अगर यूएसए

0:49की कंपनी इंडिया में आके कुछ मैन्युफैक्चर

0:51करेगी या बनाएगी तो वो इंडिया के जीडीपी

0:53में काउंट होगा वो यूएसए के जीडीपी में

0:55काउंट नहीं होगा इसीलिए हम लोग इतना फोकस

0:57करते हैं मेक इन इंडिया के अंदर इसको एक

0:59एग्जांपल से समझते हैं मान लीजिए कोई एक

1:01मॉल है उसमें कोई शॉप कपड़े बेच रही है

1:03कोई शॉप बाल काट रही है कोई रो कार्ड रीडर

1:06भविष्य बता रहा है सर्विसेस दे रहा है कोई

1:08बर्तन बेच रहा है और हर फ्लोर पे गुड्स

1:10एंड सर्विसेस बेचे जा रहे हैं अगर उस मॉल

1:12में हम हर बिकी हुई चीज की कीमत नोट कर

1:14लें और 1 साल तक करते रहे और लास्ट में उन

1:17सारी चीजों को ऐड कर दें तो वो उस मॉल की

1:19जीडीपी होगी ठीक इसी तरीके से देश में 1

1:22साल के अंदर कितने गुड्स एंड सर्विसेस

1:24प्रोड्यूस हुए हैं वो उसका जीडीपी होता है

1:26तो पहली चीज तो यह है कि जीडीपी कैलकुलेट

1:28करने की जरूरत ही क्यों पड़ रही है क्यों

1:30इतने एफर्ट्स लगाए जा रहे हैं इसको

1:31कैलकुलेट करने के लिए देखिए अगर जीडीपी हर

1:33साल ऊपर जा रहा है इसका मतलब कि प्रोडक्शन

1:35कंट्री के अंदर ज़्यादा हो रहा है देश की

1:37इकोनॉमी अच्छी है और अगर जीडीपी हर साल

1:40नीचे जा रहा है तो इसका मतलब कि देश के

1:41अंदर गुड्स एंड सर्विसेस कम प्रोड्यूस हो

1:43रहे हैं जब कम प्रोडक्शन होता है तो

1:45सेलिंग भी कम होती है और जब कम सेलिंग

1:48होगी तो इसका मतलब कि जो बिजनेसेस हैं वह

1:50कम पैसा कमाएंगे और कम पैसा कमाने का मतलब

1:53है कि लोगों की परचेसिंग पावर कम हो रही

1:54है इकोनॉमी डाउन हो रही है जीडीपी से हमें

1:57अपने देश की इकनॉमिक हेल्थ का पता चलता है

1:59उसी के बेसिस जिस पे गवर्नमेंट्स अपनी

2:00पॉलिसीज बनाती है जब जीडीपी का डाटा आता

2:02है तो हमें अपनी शॉर्ट कमिंग्स का पता

2:04चलता है और बिना शॉर्टकमिंग्स को पता करे

2:06हम उनको सुधार नहीं सकते हैं पूरे वर्ल्ड

2:08में यूएसए की जीडीपी नंबर वन पे है यूएसए

2:10की जीडीपी अराउंड 22.99 ट्रिलियन डॉलर है

2:13और सेकंड पे चाइना है विद द इकोनॉमी ऑफ 18

2:16ट्रिलियन डॉलर और इंडिया की इकोनॉमी 2.6

2:19ट्रिलियन डॉलर है और ये चेंज भी होती रहती

2:21है अब आप सोच रहे होंगे कि ये कैलकुलेट

2:23कैसे होता है अब कोई कंपनी है उसने एक जगह

2:25से बैटरी खरीदी दूसरी जगह से चिप खरीदी और

2:27मोबाइल बना के बेच दिया तो वो जो बैटरी

2:30खरीदी है उसका प्राइस जीडीपी में ऐड होगा

2:32कि नहीं और अगर उसका प्राइस ऐड होगा तो जो

2:34फाइनल मोबाइल बेचा जाएगा उस पर्टिकुलर

2:36मोबाइल का प्राइस जीडीपी में ऐड होगा कि

2:38नहीं और अगर दोनों का प्राइस जीडीपी में

2:40ऐड होगा तो एक बैटरी का प्राइस दो बार

2:43काउंट हो रहा है जीडीपी में तो इससे जो

2:45हमारी जीडीपी के थ्रू प्रोडक्शन कैलकुलेट

2:47करने का जो प्रोसेस है वो गलत हो जाएगा एक

2:49एग्जांपल से आपको समझाता हूं मान लीजिए

2:51मुझे ऑमलेट खाना है मैं मार्केट में जाके

2:53एग खरीदता हूं तो उसका जो प्राइस होगा वो

2:55जीडीपी में ऐड होगा लेकिन वहीं पे अगर एक

2:58कोई बेकरी वाला है वो वो जाके एग खरीदता

3:00है क्योंकि उसको केक बनाना है बेचने के

3:02लिए तो वो जो एग का प्राइस होगा वो ऐड

3:04नहीं होगा बल्कि वो जो फाइनल प्रोडक्ट है

3:07जो फिनिश प्रोडक्ट है केक उसका प्राइस

3:09जीडीपी में ऐड होगा इसी तरीके से हर

3:11प्रोडक्ट के लिए होता है इन सारी चीजों का

3:13हिसाब सेंट्रल स्टेटिस्टिक्स ऑफिस रखता है

3:15कि कौन सी चीज बिजनेस ओनर पे करके ले रहा

3:17है और कौन कंज्यूमर खरीद रहा है इसमें वो

3:20प्रोडक्ट काउंट होते हैं जो प्रोड्यूस

3:22होके बिके हैं अब मैं अपने घर प लकड़ी का

3:24कोई प्रोडक्ट बना लूं और अपने घर प रख लूं

3:26तो वो जीडी के प्रोडक्शन में काउंट नहीं

3:28होगा जीडीपी में गुड्स एंड सर्विसेस के

3:30साथ-साथ इन्वेस्टमेंट भी काउंट होता है और

3:32इन्वेस्टमेंट हमेशा से रिस्की और

3:34कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस लगता है क्योंकि

3:36इसमें सबसे बड़ा क्वेश्चन यह होता है कि

3:37कहां इन्वेस्टमेंट करें कि हमें प्रॉफिट

3:39हो और इसके लिए काफी रिसर्च चाहिए होती है

3:42और ये डिसाइड करना और भी ज्यादा मुश्किल

3:44हो जाता है जब कुछ अनएक्सपेक्टेड चीजें आ

3:45जाती हैं जैसे कि कोरोना कोविड के चलते

3:48मार्केट एकदम से चेंज हो गया इस टाइम में

3:49काफी कंपनीज बंद हो गई और इन्वेस्टमेंट और

3:51भी ज्यादा रिस्की हो गया बट ऐसे टाइम पे

3:53भी काफी कंपनीज ऐसी थी जो ना सिर्फ सस्टेन

3:55कर पाई बल्कि उन्होंने काफी ग्रोथ भी देखी

3:58और बहुत कंपनीज इतनी स्टेबल थी कि उन्हें

4:00बहुत ज्यादा इफेक्ट नहीं हुआ इस चेंज से

4:02स्मॉल केस आपको ऐसा ही एक पोर्टफोलियो में

4:04इन्वेस्ट करने का ऑप्शन देता है जिसका नाम

4:06है टॉप 100 स्टॉक्स जिसमें इंडिया की

4:08बिगेस्ट कंपनी आपको एक बास्केट में

4:10कैटेगरी इज मिलेंगी स्मॉल केस की रिसर्च

4:12के हिसाब से बड़ी कंपनीज के बर्स होने के

4:14चांसेस काफी कम होते हैं और यह आपके

4:16पोर्टफोलियो की स्टेबिलिटी बढ़ा देने में

4:18मदद करती है स्मॉल केस आपको इन कंपनीज की

4:20ग्रोथ रिपोर्ट पास्ट परफॉर्मेंस रिव्यूज

4:23सारी डिटेल्स देता है जो आपको अपने

4:24एनालिसिस में हेल्प करता है इसी तरीके से

4:27स्मॉल केस में अलग बास्केट ऑफ स्टॉक्स हैं

4:29जिनसे आप अपनी चॉइस के हिसाब से इन्वेस्ट

4:31कर सकते हैं तो यूज कीजिए इस सिंपल

4:33प्लेटफॉर्म का टू इन्वेस्ट लिंक इज इन द

4:35डिस्क्रिप्शन बॉक्स और ये कोई प्रोफेशनल

4:37एडवाइस नहीं है तो आप अपनी समझ से

4:39इन्वेस्ट करें जीडीपी दो ही केस में बढ़ता

4:41है पहला तो यह है कि प्रोडक्शन ज्यादा से

4:43ज्यादा हुआ हो गुड्स एंड सर्विसेस का और

4:45दूसरा केस ये भी हो सकता है कि प्रोडक्शन

4:47उतना ना हुआ हो लेकिन प्राइसेस बढ़ गए हो

4:50तो जो पहला केस है उसको हम कहते हैं रियल

4:52जीडीपी और जो दूसरा केस है जहां पे प्राइस

4:54बढ़ने की वजह से जीडीपी बढ़ा है उसको हम

4:56कहते हैं नॉमिनल जीडीपी इसलिए जब गवर्मेंट

4:59गवर्मेंट आपके सामने जीडीपी का डाटा रखती

5:01है तो आपको ध्यान देना है कि वह रियल

5:02जीडीपी है या फिर नॉमिनल जीडीपी है जीडीपी

5:05का जो मेन पर्पस है वो कंट्री के गुड्स

5:07एंड सर्विसेस का प्रोडक्शन बता सके इसलिए

5:09जो दूसरा केस है जिसमें प्राइस की वजह से

5:11जीडीपी बढ़ रहा है अगर हम उसको कंसीडर

5:13करेंगे तो देश की एक्चुअल इकोनॉमी नहीं

5:15पता चल पाएगी इस चीज का सलूशन निकालने के

5:17लिए एक बेस ईयर लिया गया जैसे कि इंडिया

5:19में जो जीडीपी निकाला गया है वो 2011 2012

5:22को बेस ईयर लेके निकाला जाता है जब आप

5:24न्यूज़ में जीडीपी का डाटा देखते होंगे तो

5:26दो तरीके से जीडीपी का डाटा लिखा होता है

5:28एक लिखा होता है जीडी एट कांस्टेंट प्राइस

5:31एंड दूसरा लिखा होता है जीडीपी एट करंट

5:33प्राइस जीडीपी एट कांस्टेंट प्राइस जहां

5:35लिखा होता है उसका मतलब कि 2011 को बेस

5:38ईयर लिया गया है जीडीपी एट करंट प्राइसेस

5:40का मतलब होता है कि उसमें जो बेस ईयर है

5:42वो करंट ईयर लिया गया है फैक्ट्री के अंदर

5:44जब कोई प्रोडक्ट बनता है तो उस टाइम पे

5:46उसमें टैक्स इंक्लूड नहीं होता है उस समय

5:48जो उसका प्राइस होता है उसको फैक्टर

5:50प्राइस बोलते हैं और जब उसमें टैक्स ऐड हो

5:51जाता है तो उसको मार्केट प्राइस कहते हैं

5:532015 से पहले जीडीपी फैक्टर प्राइस से

5:55कैलकुलेट होता था और उसके बाद से मार्केट

5:58प्राइस से कैलकुलेट हो रहा है एक एक घर है

5:59जिसमें चार लोग हैं और उस घर की आमदनी ₹1

6:02है और दूसरा घर है जिसकी आमदनी ₹10 है

6:05लेकिन घर में 20 लोग हैं तो भले ही दूसरे

6:07घर की ज्यादा आमदनी हो लेकिन पहला घर

6:10ज्यादा अच्छे से चल पाएगा यूके और इंडिया

6:12का जीडीपी ऑलमोस्ट सेम है लेकिन आईएमएफ और

6:14वर्ल्ड बैंक पॉपुलेशन की वजह से यूके को

6:16ज्यादा अच्छा मानता है यूके और इंडिया का

6:18जीडीपी तो सेम है लेकिन जीडीपी पर कैपिटा

6:20में बहुत ज्यादा फर्क है यूके का पर

6:23कैपिटा 40000 तक जाता है और इंडिया का पर

6:26कैपिटा 1900 के अराउंड रहता है जीडीपी

6:28कैलकुलेट करने के लिए कई सारे फॉर्मूले

6:30हैं जीडीपी बाय एक्सपेंडिचर बाय इनकम बाय

6:33प्रोडक्शन लेकिन इन सब चीजों में आपको

6:35घुसने की जरूरत नहीं है वो फाइनेंशियल

6:36एक्सपर्ट्स का काम है लेकिन गवर्नमेंट जब

6:38आपके सामने जीडीपी का डाटा रखती है तो कुछ

6:40चीजों का ध्यान आपको रखना है जैसे कि

6:42नॉमिनल जीडीपी रियल जीडीपी जीडीपी एट

6:45कांस्टेंट प्राइस है या फिर जीडीपी एट

6:46करंट प्राइस है जीडीपी दो तरीके से

6:49कैलकुलेट होता है एक एनुअली और एक

6:50क्वार्टरली एक साल में चार क्वार्टर होते

6:53हैं और जो पहला क्वार्टर होगा वो पिछले

6:55साल के पहले क्वार्टर से कंपेयर होगा ताकि

6:57हम बरसात के प्रोडक्शन को ला लास्ट ईयर के

6:59बरसात के प्रोडक्शन से कंपेयर कर सकें अब

7:022020 में कोरोना की वजह से थर्ड क्वार्टर

7:04का जीडीपी रेट बहुत नीचे चला गया था 0.4

7:07पर तक अब नेक्स्ट ईयर थर्ड क्वार्टर को

7:09सेम मं से कंपेयर करा जाएगा तो थोड़े से

7:11भी प्रोडक्शन से जीडीपी रेट ऊपर पहुंच

7:13जाएगा क्योंकि कोरोना टाइम में बहुत नीचे

7:15था तो जरूरी नहीं है कि हर बार प्रोडक्शन

7:17की वजह से ही जीडीपी ग्रोथ रेट ऊपर जाए

7:19जीडीपी रेट एक बहुत ही सिंपल तरीके से

7:21कैलकुलेट होता है अगर पिछले साल थर्ड

7:23क्वार्टर में जीडीपी 100 था और फिर इस साल

7:26थर्ड क्वार्टर में जीडीपी 105 है तो

7:28जीडीपी रेट ट होगा 5 पर देखिए जीडीपी की

7:31लिमिटेशंस भी है इसमें इनफॉर्मल सेक्टर के

7:33डाटा को जोड़ना बहुत ही मुश्किल है और

7:35इंडिया में मैक्सिमम सेक्टर अन

7:36ऑर्गेनाइज्ड है दूसरी दिक्कत इसमें ये

7:38रहती है शेल कंपनीज जो एक्चुअल में गुड्स

7:40और सर्विसेस प्रोड्यूस नहीं करती हैं

7:42सिर्फ मनी लरिंग और टैक्स बचाने के लिए ही

7:44खुलती हैं जिन्हें शेल कंपनी कहते हैं

7:46जीडीपी में काउंट हो जाती है और क्योंकि

7:48गवर्नमेंट का फायदा होता है इसे ऐड करने

7:50में तो वो इसको ऐड कर लेती है इसपे कारवाई

7:53नहीं करती हैं 2019 में एमसीए की रिपोर्ट

7:55आई तो पता चला कि 36 पर कंपनीज शेल कंपनीज

7:58हैं मतलब कि ये बस टैक्स दिखा रही है मनी

8:00लरिंग कर रही है और एक्चुअल में कोई

8:02सर्विसेस या फिर गुड्स प्रोड्यूस नहीं कर

8:04रही हैं लेकिन इनका डाटा फिर भी जीडीपी

8:06में काउंट हुआ तो इस तरीके की ट्रिक्स हर

8:08गवर्नमेंट करती है अपने जीडीपी के डाटा को

8:10ऊपर करने के लिए अगर जीडीपी बढ़ेगा तो

8:13अनइंप्लॉयमेंट कम होगा और क्योंकि

8:15गवर्नमेंट जीडीपी डाटा को सही से नहीं

8:16रखती हैं और यही रीजन है कि इंडिया पहली

8:19ऐसी कंट्री है जहां पे जीडीपी का रेट भी

8:21बढ़ रहा है और अनइंप्लॉयमेंट रेट भी बढ़

8:23रहा है

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