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डिग्री है…नौकरी कहां? बेरोजगार युवाओं का कड़वा सच | Paper Leak, BPSC Protest & AI Jobs

Deepak Chaurasia · 1,710 words · 8 min read

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0:00मंगलवार को पटना की सड़कों पर बीपीएससी और

0:04अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं [संगीत] के

0:07छात्रों ने प्रदर्शन किया। आज का मेरा

0:09सीधा सवाल है डिग्री हाथ में है लेकिन

0:13नौकरी कहां है? आज देश का हाल यह है कि

0:17अगर किसी सरकारी विभाग में 55,000 वैकेंसी

0:21निकलती है तो उसके लिए 1.86

0:24करोड़ से ज्यादा आवेदन आ जाते हैं। आज देश

0:28में 15 से 29 साल के करीब 8.7

0:32करोड़ युवा नीट कैटेगरी में है। यानी नॉट

0:36एन एजुकेशन, एंप्लॉयमेंट और ट्रेनिंग,

0:39बीटेक और पीएचडी होल्डर अगर चपरासी की

0:42नौकरी के लिए लाइन में खड़े हैं तो इस देश

0:45में ली गई डिग्रियों की असली वैल्यू क्या

0:49बची है? क्या केवल जोatो और ब्लिंकिट में

0:52डिलीवरी बॉय बना देना ही देश में रोजगार

0:56का सृजन माना जाएगा?

1:01बचपन से हमारे घरों में एक ही डायलॉग हमको

1:05घुट्टी की तरह पिलाया जाता है। बेटा बस

1:10दसवीं कर लो। लाइफ सेट है। 12वीं में

1:14अच्छे मार्क्स ले आओ। फिर सब कुछ बढ़िया

1:18हो जाएगा। एक बार कॉलेज से अच्छी डिग्री

1:21मिल जाए फिर तो पूरी लाइफ सेट हो जाएगी।

1:26पर कभी सोचा है कि उस लाइफ सेट होने वाले

1:30सपने के पीछे का असली सच क्या है? सच यह

1:35है दोस्तों कि आज के भारत में डिग्री

1:38सिर्फ कागज का एक टुकड़ा बनकर रह गई है और

1:42लाइफ सेट होने के बजाय देश का युवा

1:46डिप्रेशन, ए्जायटी और सरकारी दफ्तरों के

1:50चक्कर काट काट कर अंदर से टूट रहा है।

1:54इसी के चलते आप देश भर में छात्रों का

1:59गुस्सा देख रहे हैं। मंगलवार को पटना की

2:02सड़कों पर बीपीएससी और अन्य प्रतियोगी

2:06परीक्षाओं के छात्रों ने प्रदर्शन किया।

2:09यह छात्र परीक्षाओं में धांधली और भर्ती

2:13प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के लिए

2:17पटना की सड़कों पर थे। आपने जंतरमंतर का

2:21आंदोलन भी देखा। रांची के छात्रों का

2:24प्रदर्शन भी देखा। देश के कोनेकोने में यह

2:29क्यों हो रहा है? यह सबसे बड़ा सवाल है।

2:32क्योंकि एक अदत नौकरी के तलाश वाले यह लोग

2:36डिस्परेट हो रहे हैं। सरकारी व्यवस्था या

2:40तंत्र या प्राइवेट नौकरियों पर से भी

2:43विश्वास उठ रहा है। प्राइवेट में भी हालात

2:47खराब हैं। आज दोनों के सच से आपको रूबरू

2:51कराऊंगा।

2:53अगर आप 18 से 25 साल के बीच के हैं, कॉलेज

2:57में पढ़ रहे हैं या फिर कंपटीशन की तैयारी

3:01कर रहे हैं, तो आज का यह वीडियो आपके जीवन

3:04का सबसे बड़ा आई ओपनर होने वाला है। आज

3:09मैं बात करूंगा उस कड़वे सच पर जिसे ना तो

3:13आपका कॉलेज बताना चाहता है और ना ही कोई

3:17कोचिंग सेंटर।

3:20आज का मेरा सीधा सवाल है डिग्री हाथ में

3:23है लेकिन नौकरी कहां है? चलिए सबसे पहले

3:27भावनाओं को साइड में रखते हैं और सीधे

3:30आंकड़ों की बात करते हैं। नीति आयोग और

3:34हालिया स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 के

3:38रिपोर्ट के आंकड़े होश उड़ाने वाले हैं।

3:41हर साल हमारे देश में लगभग 1 करोड़ छात्र

3:45हाथ में डिग्री लेकर कॉलेजों से बाहर

3:49निकलते हैं। मतलब 1 करोड़ नए चेहरे हर साल

3:54नौकरी की लाइन में खड़े हो जाते हैं।

3:58लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से

4:00कितनों को असल में काम मिलता है। इसका

4:05पहला कड़वा सच जानना चाहेंगे। इस 1 करोड़

4:09में से सिर्फ 28 लाख युवाओं को ही किसी ना

4:13किसी तरीके का काम मिलता है। इसमें

4:16परमानेंट टेंपरेरी और Zomato sविg जैसे

4:20जिग वर्कर सब शामिल है। अब इसका दूसरा

4:26कड़वा सच भी सुनिए। अगर हम एक सुरक्षित,

4:30परमानेंट और फिक्स महीने की सैलरी वाली

4:33नौकरी की बात करें तो यह आंकड़ा घटकर सीधे

4:3817 लाख पर आ जाता है। अब तीसरा कड़वा सच

4:41सुनिए। जितने बच्चे पास होते हैं उनमें से

4:45सिर्फ 8.25%

4:48युवाओं को ही उनकी पढ़ाई और योग्यता के

4:51हिसाब से सही नौकरी मिल पाती है। बाकी बचे

4:5591.75%

4:58युवा वे या तो पूरी तरह बेरोजगार घूम रहे

5:02हैं या फिर लाखों रुपए खर्च करके ली गई

5:06इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की डिग्री को

5:09अलमारी में बंद करके डिलीवरी बॉय डाटा

5:12एंट्री ऑपरेटर या फील्ड सेल्स जैसी छोटी

5:16मोटी नौकरी करने को मजबूर हैं। अजीम प्रेम

5:20जी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट तो और भी

5:23डरावनी है। भारत में 25 साल से कम उम्र के

5:27पढ़े लिखे ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर

5:30लगभग 40%

5:33तक पहुंच चुकी है। यानी देश में आप जितना

5:36ज्यादा पढ़ते लिखते हैं आपके बेरोजगार

5:39होने की संभावना उतनी बढ़ जाती है। यह

5:43डरावना है। जब प्राइवेट सेक्टर में जॉब

5:46नहीं मिलती तो हमारे समाज का सबसे पसंदीदा

5:49जवाब होता है। बेटा सरकारी नौकरी की

5:53तैयारी कर लो। लेकिन क्या आपने कभी सरकारी

5:57नौकरी के इस दलदल की गहराई को मापा है? आज

6:02देश का हाल [नाक से की जाने वाली आवाज़]

6:04यह है कि अगर किसी सरकारी विभाग में

6:0755,000 वैकेंसी निकलती है तो उसके लिए

6:111.86

6:12करोड़ से ज्यादा आवेदन आ जाते हैं। कितने

6:15के लिए? मात्र 55 लाख नौकरियों के लिए 2

6:20करोड़ के आसपास आवेदन। एक सीट पर हजारों

6:24बच्चों का आपस में मुकाबला और हद तो तब हो

6:28जाती है जब यूपी, बिहार या मध्य प्रदेश

6:32जैसे राज्यों में चपरासी या प्यून के कुछ

6:36100 पदों के लिए फॉर्म निकलते हैं और वहां

6:39इंटरव्यू देने के लिए बीटेक, एमबीए और

6:43यहां तक कि पीएचडी होल्डर्स की लाइन लग

6:46जाती है। चलो मान लिया कि एक स्टूडेंट ने

6:50अपने कमरे में बंद होकर 14 घंटे पढ़ाई

6:54करके अपनी जवानी के सबसे खूबसूरत साल झोंक

6:59दिए। फिर क्या होता है? पहले साल

7:02नोटिफिकेशन आता है। दूसरे साल परीक्षा की

7:06तारीख चलती है। तीसरे साल जैसे तैसे

7:10परीक्षा होती है तो पता चलता है पेपर लीक

7:14हो गया। चौथे और पांचव साल कोर्ट कचहरी और

7:18प्रोटेस्ट 60 से ज्यादा 60% से ज्यादा

7:22बेरोजगार युवा ऐसे हैं जो एक साल से अधिक

7:26समय से सिर्फ एक परीक्षा के रिजल्ट का

7:29इंतजार कर रहे हैं। एक युवा के जीवन के

7:33सबसे कीमती 5 साल सिर्फ एक अद नौकरी के

7:38इंतजार में इस लेक्चर सिस्टम की बलि चढ़

7:41जाते हैं। और जब तक रिजल्ट आता है तब तक

7:45आधे बच्चों की तो एज ओवर हो चुकी होती है

7:49या निकल जाती है। अब बात करते हैं उस नए

7:53खतरे की जो हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुका

7:56है। लेकिन हमारा एजुकेशन सिस्टम इससे पूरी

8:00तरह से अनजान है। आईटी और टेक सेक्टर यानी

8:052026 में Amazon, डेल और मेटा जैसी बड़ी

8:09टेक कंपनियों ने 1.28

8:12लाख से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से

8:15बाहर निकाल दिया है। वजह पता है क्या बताई

8:18गई? ग्लोबल मंदी और तेजी से बढ़ता एआई

8:22ऑटोमेशन 90% से ज्यादा सीईओस का मानना है

8:27कि आने वाले समय में ऑफिसों में इंसानी

8:31वर्कर्स की जरूरत घट जाएगी। एमएसएमई को

8:35पूरा सपोर्ट ना मिलने के कारण हमारा

8:37मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर करोड़ों युवाओं को

8:40खपाने में नाकाम रहा है। देश की 45%

8:46वर्कफोर्स खेती से जुड़ी है। लेकिन जीडीपी

8:49में इसका योगदान लगातार गिर रहा है।

8:52मजबूरी में गांव का युवा शहर भागता है। पर

8:56शहर में उसे क्या मिलता है? शहर में उसे

9:00मिलती है गिग इकोनमी यानी आज का sविg

9:04जोatो ब्लिंकट और उबर जैसी कंपनियां

9:07जिनमें सबसे ज्यादा युवा काम कर रहे हैं।

9:11लेकिन याद रखिए दोस्तों यह कोई परमानेंट

9:14करियर नहीं है। ना यहां कोई मेडिकल

9:17इंश्योरेंस है ना पीएफ है और ना ही कोई

9:20फ्यूचर सिक्योरिटी। यह सिर्फ पेट पालने का

9:23एक अस्थाई जरिया है। आज देश में 15 से 29

9:28साल के करीब 8.7

9:31करोड़ युवा नीट कैटेगरी में है। यानी नॉट

9:35एन एजुकेशन, एंप्लॉयमेंट और ट्रेनिंग। 8.7

9:39करोड़ युवा ऐसे हैं जो ना पढ़ाई कर रहे

9:42हैं, ना नौकरी कर रहे हैं और ना ही कोई

9:45हुनर सीख पा रहे हैं। यह देश का सबसे बड़ा

9:50पोटेंशियल वेस्ट है। यानी हम इनकी जिंदगी

9:54खराब कर रहे हैं या इनके अंदर जो क्षमता

9:58है उसे वेस्ट कर रहे हैं यानी बर्बाद कर

10:01रहे हैं। दोस्तों इस पूरे सिस्टम को

10:05रातोंरात बदलना ना आपके हाथ में है ना

10:08मेरे। लेकिन इस डूबते सिस्टम के बीच खुद

10:12को बचाना 100सदी आपके हाथ में है। अगर आप

10:17आज भी सिर्फ इस भरोसे बैठे हैं कि कॉलेज

10:20से एक डिग्री मिलेगी और कोई कंपनी आपको

10:24लाखों का पैकेज दे देगी तो अपनी आंखें खोल

10:27लीजिए। आज की दुनिया डिग्री की नहीं

10:30स्किल्स की है। मार्केट की डिमांड

10:33पहचानिए। आज टेक कंपनियां आपकी डिग्री का

10:37कागज नहीं आपका काम देखती है। एआई और न्यू

10:41एज टूल सीखिए। भले ही एआई की वजह से

10:45पुरानी नौकरियां जा रही हैं, लेकिन भारत

10:48में 3.8

10:50लाख से ज्यादा नई नौकरियां सिर्फ एआई और

10:54मशीन लर्निंग की फील्ड में पैदा हो रही

10:57हैं। प्रैक्टिकल बनिए कोडिंग, डाटा

11:00एनालिसिस, डिजिटल मार्केटिंग, वीडियो

11:03एडिटिंग या एआई प्र्प्टिंग जैसी कोई स्किल

11:06सीखिए जिनकी मार्केट को आज जरूरत है।

11:10कॉलेज की थ्योरी आपको सिर्फ पास करा सकती

11:13है। लेकिन आपकी प्रैक्टिकल स्किल आपको

11:16नौकरी दिलाएगी। आखिर में मैं इस देश की

11:20व्यवस्था और समाज से सात सवाल सीधे और

11:25चुभते हुए सवाल पूछना चाहता हूं। पहला

11:28सवाल जब हर साल एक करोड़ बच्चे पास हो रहे

11:32हैं तो हमारा एजुकेशन सिस्टम उन्हें 20

11:35साल पुराना सिलेबस क्यों रटा रहा है?

11:39दूसरा सवाल 55,000 नौकरियों के लिए 1.8

11:44करोड़ फॉर्म भरे जाते हैं। क्या यह युवाओं

11:47का सरकारी नौकरी के प्रति प्यार है या

11:50प्राइवेट सेक्टर में सुरक्षा की भारी कमी?

11:55तीसरा सवाल बीटेक और पीएचडी होल्डर अगर

11:59चपरासी की नौकरी के लिए लाइन में खड़े हैं

12:02तो इस देश में ली गई डिग्रियों की असली

12:05वैल्यू क्या बची है?

12:08चौथा सवाल हर दूसरी परीक्षा का पेपर लीक

12:12हो जाता है। युवाओं के जीवन के पांचप साल

12:17बर्बाद करने वाले इस नेक्सेस पर नकेल कब

12:21कसी जाएगी? पांचवा सवाल 8.7 करोड़ युवा जो

12:26ना पढ़ रहे हैं और ना कमा रहे हैं उनके इस

12:29कीमती समय का नुकसान कौन भरेगा? छठा सवाल

12:33क्या केवल जोमato और ब्लिंकिट में डिलीवरी

12:37बॉय बना देना ही देश में रोजगार का सृजन

12:41माना जाएगा? और सातवां और सबसे बड़ा सवाल

12:45आखिर कब तक हमारे देश का युवा डिग्रियों

12:49का बोझ उठाए सड़कों पर भटकता रहेगा? आपकी

12:53इस पूरे मुद्दे पर क्या राय है? क्या आपको

12:56भी लगता है कि हमारी डिग्रियां आज बेकार

12:59हो रही हैं? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स

13:02में जरूर लिखें। आपकी आवाज उठना बहुत

13:06जरूरी है। अगर आपको यह एनालिसिस, यह

13:09वीडियो आंखें खोल देने वाला लगे तो इस

13:12वीडियो को अपने उन सभी दोस्तों के साथ

13:15शेयर करें जो आज कॉलेज में हैं या किसी

13:19नौकरी की तैयारी कर रहे हैं या कंपटीशन

13:22एग्जाम में बैठ रहे हैं। चैनल को

13:24सब्सक्राइब करें ताकि हम यह आवाज और बुलंद

13:29कर सकें। मिलते हैं अगले वीडियो में। जय

13:31हिंद।

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