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0:00मंगलवार को पटना की सड़कों पर बीपीएससी और
0:04अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं [संगीत] के
0:07छात्रों ने प्रदर्शन किया। आज का मेरा
0:09सीधा सवाल है डिग्री हाथ में है लेकिन
0:13नौकरी कहां है? आज देश का हाल यह है कि
0:17अगर किसी सरकारी विभाग में 55,000 वैकेंसी
0:21निकलती है तो उसके लिए 1.86
0:24करोड़ से ज्यादा आवेदन आ जाते हैं। आज देश
0:28में 15 से 29 साल के करीब 8.7
0:32करोड़ युवा नीट कैटेगरी में है। यानी नॉट
0:36एन एजुकेशन, एंप्लॉयमेंट और ट्रेनिंग,
0:39बीटेक और पीएचडी होल्डर अगर चपरासी की
0:42नौकरी के लिए लाइन में खड़े हैं तो इस देश
0:45में ली गई डिग्रियों की असली वैल्यू क्या
0:49बची है? क्या केवल जोatो और ब्लिंकिट में
0:52डिलीवरी बॉय बना देना ही देश में रोजगार
0:56का सृजन माना जाएगा?
1:01बचपन से हमारे घरों में एक ही डायलॉग हमको
1:05घुट्टी की तरह पिलाया जाता है। बेटा बस
1:10दसवीं कर लो। लाइफ सेट है। 12वीं में
1:14अच्छे मार्क्स ले आओ। फिर सब कुछ बढ़िया
1:18हो जाएगा। एक बार कॉलेज से अच्छी डिग्री
1:21मिल जाए फिर तो पूरी लाइफ सेट हो जाएगी।
1:26पर कभी सोचा है कि उस लाइफ सेट होने वाले
1:30सपने के पीछे का असली सच क्या है? सच यह
1:35है दोस्तों कि आज के भारत में डिग्री
1:38सिर्फ कागज का एक टुकड़ा बनकर रह गई है और
1:42लाइफ सेट होने के बजाय देश का युवा
1:46डिप्रेशन, ए्जायटी और सरकारी दफ्तरों के
1:50चक्कर काट काट कर अंदर से टूट रहा है।
1:54इसी के चलते आप देश भर में छात्रों का
1:59गुस्सा देख रहे हैं। मंगलवार को पटना की
2:02सड़कों पर बीपीएससी और अन्य प्रतियोगी
2:06परीक्षाओं के छात्रों ने प्रदर्शन किया।
2:09यह छात्र परीक्षाओं में धांधली और भर्ती
2:13प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के लिए
2:17पटना की सड़कों पर थे। आपने जंतरमंतर का
2:21आंदोलन भी देखा। रांची के छात्रों का
2:24प्रदर्शन भी देखा। देश के कोनेकोने में यह
2:29क्यों हो रहा है? यह सबसे बड़ा सवाल है।
2:32क्योंकि एक अदत नौकरी के तलाश वाले यह लोग
2:36डिस्परेट हो रहे हैं। सरकारी व्यवस्था या
2:40तंत्र या प्राइवेट नौकरियों पर से भी
2:43विश्वास उठ रहा है। प्राइवेट में भी हालात
2:47खराब हैं। आज दोनों के सच से आपको रूबरू
2:51कराऊंगा।
2:53अगर आप 18 से 25 साल के बीच के हैं, कॉलेज
2:57में पढ़ रहे हैं या फिर कंपटीशन की तैयारी
3:01कर रहे हैं, तो आज का यह वीडियो आपके जीवन
3:04का सबसे बड़ा आई ओपनर होने वाला है। आज
3:09मैं बात करूंगा उस कड़वे सच पर जिसे ना तो
3:13आपका कॉलेज बताना चाहता है और ना ही कोई
3:17कोचिंग सेंटर।
3:20आज का मेरा सीधा सवाल है डिग्री हाथ में
3:23है लेकिन नौकरी कहां है? चलिए सबसे पहले
3:27भावनाओं को साइड में रखते हैं और सीधे
3:30आंकड़ों की बात करते हैं। नीति आयोग और
3:34हालिया स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 के
3:38रिपोर्ट के आंकड़े होश उड़ाने वाले हैं।
3:41हर साल हमारे देश में लगभग 1 करोड़ छात्र
3:45हाथ में डिग्री लेकर कॉलेजों से बाहर
3:49निकलते हैं। मतलब 1 करोड़ नए चेहरे हर साल
3:54नौकरी की लाइन में खड़े हो जाते हैं।
3:58लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से
4:00कितनों को असल में काम मिलता है। इसका
4:05पहला कड़वा सच जानना चाहेंगे। इस 1 करोड़
4:09में से सिर्फ 28 लाख युवाओं को ही किसी ना
4:13किसी तरीके का काम मिलता है। इसमें
4:16परमानेंट टेंपरेरी और Zomato sविg जैसे
4:20जिग वर्कर सब शामिल है। अब इसका दूसरा
4:26कड़वा सच भी सुनिए। अगर हम एक सुरक्षित,
4:30परमानेंट और फिक्स महीने की सैलरी वाली
4:33नौकरी की बात करें तो यह आंकड़ा घटकर सीधे
4:3817 लाख पर आ जाता है। अब तीसरा कड़वा सच
4:41सुनिए। जितने बच्चे पास होते हैं उनमें से
4:45सिर्फ 8.25%
4:48युवाओं को ही उनकी पढ़ाई और योग्यता के
4:51हिसाब से सही नौकरी मिल पाती है। बाकी बचे
4:5591.75%
4:58युवा वे या तो पूरी तरह बेरोजगार घूम रहे
5:02हैं या फिर लाखों रुपए खर्च करके ली गई
5:06इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की डिग्री को
5:09अलमारी में बंद करके डिलीवरी बॉय डाटा
5:12एंट्री ऑपरेटर या फील्ड सेल्स जैसी छोटी
5:16मोटी नौकरी करने को मजबूर हैं। अजीम प्रेम
5:20जी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट तो और भी
5:23डरावनी है। भारत में 25 साल से कम उम्र के
5:27पढ़े लिखे ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर
5:30लगभग 40%
5:33तक पहुंच चुकी है। यानी देश में आप जितना
5:36ज्यादा पढ़ते लिखते हैं आपके बेरोजगार
5:39होने की संभावना उतनी बढ़ जाती है। यह
5:43डरावना है। जब प्राइवेट सेक्टर में जॉब
5:46नहीं मिलती तो हमारे समाज का सबसे पसंदीदा
5:49जवाब होता है। बेटा सरकारी नौकरी की
5:53तैयारी कर लो। लेकिन क्या आपने कभी सरकारी
5:57नौकरी के इस दलदल की गहराई को मापा है? आज
6:02देश का हाल [नाक से की जाने वाली आवाज़]
6:04यह है कि अगर किसी सरकारी विभाग में
6:0755,000 वैकेंसी निकलती है तो उसके लिए
6:111.86
6:12करोड़ से ज्यादा आवेदन आ जाते हैं। कितने
6:15के लिए? मात्र 55 लाख नौकरियों के लिए 2
6:20करोड़ के आसपास आवेदन। एक सीट पर हजारों
6:24बच्चों का आपस में मुकाबला और हद तो तब हो
6:28जाती है जब यूपी, बिहार या मध्य प्रदेश
6:32जैसे राज्यों में चपरासी या प्यून के कुछ
6:36100 पदों के लिए फॉर्म निकलते हैं और वहां
6:39इंटरव्यू देने के लिए बीटेक, एमबीए और
6:43यहां तक कि पीएचडी होल्डर्स की लाइन लग
6:46जाती है। चलो मान लिया कि एक स्टूडेंट ने
6:50अपने कमरे में बंद होकर 14 घंटे पढ़ाई
6:54करके अपनी जवानी के सबसे खूबसूरत साल झोंक
6:59दिए। फिर क्या होता है? पहले साल
7:02नोटिफिकेशन आता है। दूसरे साल परीक्षा की
7:06तारीख चलती है। तीसरे साल जैसे तैसे
7:10परीक्षा होती है तो पता चलता है पेपर लीक
7:14हो गया। चौथे और पांचव साल कोर्ट कचहरी और
7:18प्रोटेस्ट 60 से ज्यादा 60% से ज्यादा
7:22बेरोजगार युवा ऐसे हैं जो एक साल से अधिक
7:26समय से सिर्फ एक परीक्षा के रिजल्ट का
7:29इंतजार कर रहे हैं। एक युवा के जीवन के
7:33सबसे कीमती 5 साल सिर्फ एक अद नौकरी के
7:38इंतजार में इस लेक्चर सिस्टम की बलि चढ़
7:41जाते हैं। और जब तक रिजल्ट आता है तब तक
7:45आधे बच्चों की तो एज ओवर हो चुकी होती है
7:49या निकल जाती है। अब बात करते हैं उस नए
7:53खतरे की जो हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुका
7:56है। लेकिन हमारा एजुकेशन सिस्टम इससे पूरी
8:00तरह से अनजान है। आईटी और टेक सेक्टर यानी
8:052026 में Amazon, डेल और मेटा जैसी बड़ी
8:09टेक कंपनियों ने 1.28
8:12लाख से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से
8:15बाहर निकाल दिया है। वजह पता है क्या बताई
8:18गई? ग्लोबल मंदी और तेजी से बढ़ता एआई
8:22ऑटोमेशन 90% से ज्यादा सीईओस का मानना है
8:27कि आने वाले समय में ऑफिसों में इंसानी
8:31वर्कर्स की जरूरत घट जाएगी। एमएसएमई को
8:35पूरा सपोर्ट ना मिलने के कारण हमारा
8:37मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर करोड़ों युवाओं को
8:40खपाने में नाकाम रहा है। देश की 45%
8:46वर्कफोर्स खेती से जुड़ी है। लेकिन जीडीपी
8:49में इसका योगदान लगातार गिर रहा है।
8:52मजबूरी में गांव का युवा शहर भागता है। पर
8:56शहर में उसे क्या मिलता है? शहर में उसे
9:00मिलती है गिग इकोनमी यानी आज का sविg
9:04जोatो ब्लिंकट और उबर जैसी कंपनियां
9:07जिनमें सबसे ज्यादा युवा काम कर रहे हैं।
9:11लेकिन याद रखिए दोस्तों यह कोई परमानेंट
9:14करियर नहीं है। ना यहां कोई मेडिकल
9:17इंश्योरेंस है ना पीएफ है और ना ही कोई
9:20फ्यूचर सिक्योरिटी। यह सिर्फ पेट पालने का
9:23एक अस्थाई जरिया है। आज देश में 15 से 29
9:28साल के करीब 8.7
9:31करोड़ युवा नीट कैटेगरी में है। यानी नॉट
9:35एन एजुकेशन, एंप्लॉयमेंट और ट्रेनिंग। 8.7
9:39करोड़ युवा ऐसे हैं जो ना पढ़ाई कर रहे
9:42हैं, ना नौकरी कर रहे हैं और ना ही कोई
9:45हुनर सीख पा रहे हैं। यह देश का सबसे बड़ा
9:50पोटेंशियल वेस्ट है। यानी हम इनकी जिंदगी
9:54खराब कर रहे हैं या इनके अंदर जो क्षमता
9:58है उसे वेस्ट कर रहे हैं यानी बर्बाद कर
10:01रहे हैं। दोस्तों इस पूरे सिस्टम को
10:05रातोंरात बदलना ना आपके हाथ में है ना
10:08मेरे। लेकिन इस डूबते सिस्टम के बीच खुद
10:12को बचाना 100सदी आपके हाथ में है। अगर आप
10:17आज भी सिर्फ इस भरोसे बैठे हैं कि कॉलेज
10:20से एक डिग्री मिलेगी और कोई कंपनी आपको
10:24लाखों का पैकेज दे देगी तो अपनी आंखें खोल
10:27लीजिए। आज की दुनिया डिग्री की नहीं
10:30स्किल्स की है। मार्केट की डिमांड
10:33पहचानिए। आज टेक कंपनियां आपकी डिग्री का
10:37कागज नहीं आपका काम देखती है। एआई और न्यू
10:41एज टूल सीखिए। भले ही एआई की वजह से
10:45पुरानी नौकरियां जा रही हैं, लेकिन भारत
10:48में 3.8
10:50लाख से ज्यादा नई नौकरियां सिर्फ एआई और
10:54मशीन लर्निंग की फील्ड में पैदा हो रही
10:57हैं। प्रैक्टिकल बनिए कोडिंग, डाटा
11:00एनालिसिस, डिजिटल मार्केटिंग, वीडियो
11:03एडिटिंग या एआई प्र्प्टिंग जैसी कोई स्किल
11:06सीखिए जिनकी मार्केट को आज जरूरत है।
11:10कॉलेज की थ्योरी आपको सिर्फ पास करा सकती
11:13है। लेकिन आपकी प्रैक्टिकल स्किल आपको
11:16नौकरी दिलाएगी। आखिर में मैं इस देश की
11:20व्यवस्था और समाज से सात सवाल सीधे और
11:25चुभते हुए सवाल पूछना चाहता हूं। पहला
11:28सवाल जब हर साल एक करोड़ बच्चे पास हो रहे
11:32हैं तो हमारा एजुकेशन सिस्टम उन्हें 20
11:35साल पुराना सिलेबस क्यों रटा रहा है?
11:39दूसरा सवाल 55,000 नौकरियों के लिए 1.8
11:44करोड़ फॉर्म भरे जाते हैं। क्या यह युवाओं
11:47का सरकारी नौकरी के प्रति प्यार है या
11:50प्राइवेट सेक्टर में सुरक्षा की भारी कमी?
11:55तीसरा सवाल बीटेक और पीएचडी होल्डर अगर
11:59चपरासी की नौकरी के लिए लाइन में खड़े हैं
12:02तो इस देश में ली गई डिग्रियों की असली
12:05वैल्यू क्या बची है?
12:08चौथा सवाल हर दूसरी परीक्षा का पेपर लीक
12:12हो जाता है। युवाओं के जीवन के पांचप साल
12:17बर्बाद करने वाले इस नेक्सेस पर नकेल कब
12:21कसी जाएगी? पांचवा सवाल 8.7 करोड़ युवा जो
12:26ना पढ़ रहे हैं और ना कमा रहे हैं उनके इस
12:29कीमती समय का नुकसान कौन भरेगा? छठा सवाल
12:33क्या केवल जोमato और ब्लिंकिट में डिलीवरी
12:37बॉय बना देना ही देश में रोजगार का सृजन
12:41माना जाएगा? और सातवां और सबसे बड़ा सवाल
12:45आखिर कब तक हमारे देश का युवा डिग्रियों
12:49का बोझ उठाए सड़कों पर भटकता रहेगा? आपकी
12:53इस पूरे मुद्दे पर क्या राय है? क्या आपको
12:56भी लगता है कि हमारी डिग्रियां आज बेकार
12:59हो रही हैं? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स
13:02में जरूर लिखें। आपकी आवाज उठना बहुत
13:06जरूरी है। अगर आपको यह एनालिसिस, यह
13:09वीडियो आंखें खोल देने वाला लगे तो इस
13:12वीडियो को अपने उन सभी दोस्तों के साथ
13:15शेयर करें जो आज कॉलेज में हैं या किसी
13:19नौकरी की तैयारी कर रहे हैं या कंपटीशन
13:22एग्जाम में बैठ रहे हैं। चैनल को
13:24सब्सक्राइब करें ताकि हम यह आवाज और बुलंद
13:29कर सकें। मिलते हैं अगले वीडियो में। जय
13:31हिंद।