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रामायण कथा | हनुमान जी ने रावण को दी चेतावनी और नहीं माना तो जलायी लंका

Tilak · 2,501 words · 12 min read

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0:00यह हमारी संस्कृति हमारे संस्कार सदा रहें

0:03हमारे साथ सब्सक्राइब करें दिलाते हैं तो

0:06यह देखने की लालसा से चला आया कि महर्षि

0:09पुलस्त्य

0:11जिनका यश निर्मल चंद्रमा के समान है उनके

0:16वश में उनकी कीर्ति को कलंकित करने वाला

0:19ऐसा कौन सा मूत है जो श्री राम से बैर

0:22करने का

0:24आ सकता है

0:24[संगीत]

0:26घृत रखना जी की शक्ति का अधीन है न पाए

0:31हैं

0:32कि तुम्हें कुछ मंत्रों की शक्ति से रावण

0:36को डराया है रावण जिसे ब्रह्मा और स्वयं

0:40भगवान शिव से शक्तियां प्राप्त होती है

0:44कि यदि मैं भगवान शिव होता तो इस समय आपको

0:48यही खुद देता कि वक़्त मेरी शक्तियों और

0:52मेरी अनुकंपा का दुरुपयोग ना करो तूने

0:56धर्मपूर्वक तपस्या के द्वारा जो शक्तियां

1:00मुझसे पाए हैं उनका प्रयोग विनम्रता से

1:04धर्म के कार्यों में ही करो यदि उनके कारण

1:08अपने अंदर पाप अहंकार और अधर्म की प्रबलता

1:14आने दोगे तो उसका एक ही परिणाम होगा विनाश

1:19समूल विनाश अ

1:23कर दो

1:29कर दो

1:33अजय को

1:37कर दो

1:47कर दो

1:50कर दो

1:56[संगीत]

1:57[प्रशंसा]

1:58[संगीत]

2:02कर दो

2:05लुट

2:14कर दो

2:16[संगीत]

2:22अपने पैरों

2:26अजय को

2:31अजय को

2:36में नवग्रह

2:39एबीईएस जयदेव

2:42नार्मल ओम और सर्कल

2:47चिकपाल

2:49सब

2:51अदृश्य भय भी तुझ

2:56मुद्दे खेड़ हनुमत

3:01लामोंट

3:04बैकुंठ हम मजा लिया है

3:09[संगीत]

3:15वॉइस मेल सुनें

3:19ए मांउड मीडियम आनंद सुनना को किया हुआ था

3:26तब हम अंध

3:30प्रणाम

3:32मुक्त कि

3:35निराशा अवधि

3:38ओम सूर्य भोले जय

3:43राम

3:45जय हनुमान

3:47[संगीत]

3:48अधेर राम

3:50[संगीत]

3:52इस वंश डर रहे थे इसमें से कौन से विशेषता

3:57है जिससे न केवल हमारे सैनिकों का इजहार

4:00किया है राज कुमार अक्षय कुमार जैसे महा

4:04नियुक्त किया है

4:07कि महाराज यह क्षेत्र में जितना सीधा है

4:10वास्तव में उसका सीधा फायदा नहीं है यह

4:13परम मायावी है अरे प्रकार की छविग्रह

4:16जानता इसलिए किसी के वश में नहीं आ सकता

4:19इसके साथ युद्ध करते समय एक बार तो मैं भी

4:23विचलित हो गया फिर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग

4:25करके मैंने इसे अपने फर्स्ट पिक है

4:28कि इसके लिए तुम्हें ब्रह्म से चलाना पड़ा

4:31ही धुंध

4:33और भी

4:36और अब तो यह अवश्य हमारे सामने लाए जाने

4:38योग्य है

4:40हुआ है

4:42हां बोल वानर किस के बलबूते पर तूने हमारे

4:45सुंदर ओपन पोर्स और दिया है

4:47कि हमारे राक्षस जो वहां के रक्षक है तूने

4:51उन्हें किस अपराध के कारण मारा था

4:54कि प्रभु अपने शरीर को स्वस्थ रखना और

4:58उसकी रक्षा करना प्राणी का पहला धर्म है

5:01इस धर्म के अनुसार जब शरीर अत्यंत भूखा हो

5:05और खाने का पदार्थ सामने हो तो उसे खा

5:09लेने में धर्म और न्याय की दृष्टि से कोई

5:12कोशिश नहीं की

5:14कि

5:15मैं सौ योजन समुद्र लांघकर आया था इस

5:18परिश्रम से मैं बहुत थक गया था और भूख भी

5:22लगी थी

5:23इसीलिए उस अशोक वाटिका के फलों पर अपना

5:27अधिकार समझ कर खा गया

5:30कि महाराज रात्रि के समय जब वृक्ष सो रहे

5:35हो तो उनके फल और पत्ते आदि तोड़ना वर्जित

5:38है इसी लिए मैं पहले उन्हें हिला-हिलाकर

5:42जगाता था उनको हिलाने-डुलाने में कुछ

5:45वृक्ष की जड़ें बाहर निकल आएंगे

5:49तो बस फिर आपके सैनिकों ने मेरे शरीर पर

5:52प्रहार किया अपने शरीर की रक्षा के धर्म

5:55के लिए मुझे उनसे लड़ना पड़ा

5:59महाराज व उन्होंने मुझ पर प्रहार नहीं

6:02किया मैंने उन पर कुछ नहीं कहा बस केवल

6:06मैंने उन्हीं को मारा तूने मुझे मारने की

6:08चीज ताकि इसी लिए आपके पुत्र रामकुमार

6:12आकाश को मुझे पर लो भेजना पड़ता है

6:18महाराज व जो युद्ध की इच्छा से आए उसे

6:22मारना अथवा नहीं

6:24आज हमारे प्रिय पुत्र राज कुमार अक्षय

6:27कुमार का वर्क करते समय तुम्हें हमारी

6:30शक्ति का कोई भय नहीं था

6:32108 उलझन धाम और हमारे कीर्ति अभी तक नहीं

6:36सुनी सुनी है बाहर आज आप कीर्ति और आपके

6:41कारनामों की इस गाथा सुनिए

6:43कैसे सहस्त्रबाहु के साथ आपने वीरता

6:47पूर्वक युद्ध किया था था

6:51है और फिर कैसे वानरराज बालि आपको अपनी

6:55कांख में दबाए दबाए छह महीने तक घूमते रहे

7:00आपकी वीरता के चर्चे तो तीनों लोकों में

7:04सुनाई दे रहे हैं महाराज विट्ठल से भिखारी

7:08का वेश बनाकर किसी अ के लिए अप्लाई स्त्री

7:11को चोरों की भांति उठा लें ऐसा परमवीर

7:15आपकी अतिरिक्त और कौन हो सकता है बहर हाल

7:18है

7:23हुआ है

7:26के दरबार में ऐसी सदृशता से बात करने का

7:29साहस कोई नहीं कर सकता पहले जय महाराज जी

7:34हां अभी काट दी जाए

7:36[संगीत]

7:41ऐसा पति ने

7:44वो मस्ती प्रभात आप हमारी आज्ञा आपूर्ति

7:47में रुकावट डाल रहे हैं महाराज ऐसा साहस

7:52नहीं कर सकता परंतु आप किया गया पूर्ति से

7:55पहले मैं आपकी सेवा में एक विनम्र निवेदन

7:58करने किया गया चाहता हूं कहां हो

8:02में ही लंकेश्वर यह कोई साधारण मानव दिखाई

8:04नहीं देता और उसका यहां पर आना भी कोई

8:07साधारण से बात नहीं लगती यह वानर रुपी

8:10इसका छत में में दिखाई देता है क्योंकि

8:12जितना तेज इसमें है उन्होंने नहीं होता हो

8:16सकता है यह इंदौर के कहने पर यहां आया हूं

8:18या कुबेर अथवा यम वरुण का दूध हो या विश्व

8:23नहीं इसे यहां भेजा हो सबसे पहले यह जान

8:26लेना परम आवश्यक है

8:27[संगीत]

8:31कर दो

8:33कर दो

8:35कि

8:37महाराज मंत्री व प्रस्तुत का कहना ठीक है

8:41यह जानना परम आवश्यक है कि किसने भेजा है

8:45और उसके पीछे कितनी क्षत्रुओं या स्वयं

8:48देवताओं का क्या संयंत्र है यह सारी

8:51जानकारी जो इसके द्वारा मिल सकती है इसकी

8:54जिप कार्ड देने से उसका अवसर खो जाएगा

8:57सेनापति सबसे पहले इसे सारी जानकारी लें

9:00और यदि अच्छी तरह से ना बताएं तो इसे ऐसे

9:03यातनाएं दी जाएं जिससे यह सब कुछ बताने पर

9:05विवश हो जाए तो

9:09आज हम आपके लिए की प्रशंसा करते हैं चना

9:13पत्ते एक हम आपसे प्रश्न किया गया का पालन

9:16हो

9:18कर दो

9:19कि इतने बड़े कार्यक्रम की आवश्यकता नहीं

9:23है महाराज इतनी सी बात तो मैं स्वयं बता

9:26देता हूं

9:30कि मैं वायुदेवता का औरस पुत्र हनुमान

9:36कि मुझे

9:38कि भगवान विष्णु ने भेजा है और ना

9:41इंद्रादि देवताओं ने अ

9:43कि मैं तीनों लोकों के स्वामी अमित

9:46तेजस्वी रघुकुल शिरोमणि भगवान श्रीराम का

9:50दूध है

9:54कर दो कर दो

9:59थे जिनकी भारी हात सीता माता को तुम छल से

10:03हर लाए हो

10:06कि मैं उन्हें सीता माता का पता लगाने और

10:09आपको मिलने सौ योजन समुद्र लांघकर आया हूं

10:15कर दो

10:16कि मैंने सीता माता के दर्शन कर लिए हैं

10:19मैं अब आपसे मिलने के लिए ही

10:21मैंने इस प्रकार बांधा जाना तो यह स्वीकार

10:26किया है

10:28क्यों नहीं तो देवता और असुर तक अ कि मुझे

10:31किसी भी अस्त अथवा पाश में बांध नहीं सकते

10:34क्योंकि मुझे ब्रह्मा जी से ऐसा बर्तन में

10:38चुका है

10:42अभी तो यह देखने की लालसा से चला आया कि

10:45महर्षि पुलस्त्य

10:46जिनका यश निर्मल चंद्रमा के समान है उनके

10:51वश में उनकी कीर्ति को कलंकित करने वाला

10:54ऐसा कौन सा मूत है जो श्री राम से बैर

10:58करने का साहस होता है

11:00[संगीत]

11:03चीज रखना जो कि शक्ति का अधीन है न भाए

11:08तुझे कुछ मंत्रों की शक्ति से रावण को

11:11डराया है रावण जिसे ब्रह्मा और स्वयं

11:16भगवान शिव से शक्तियां प्राप्त होती है

11:20कि यदि मैं भगवान शिव होता तो इस समय आपको

11:24यही खुद देता कि वक़्त मेरी शक्तियों और

11:28मेरी अनुकंपा का दुरुपयोग न करो तूने

11:32धर्मपूर्वक तपस्या के द्वारा जो शक्तियां

11:36मुझसे पाए हैं उनका प्रयोग विनम्रता से

11:39धर्म के कार्यों में ही करो यदि उनके कारण

11:43अपने अंदर पाप अहंकार और अधर्म की प्रबलता

11:49आने दोगे तो उसका एक ही परिणाम होगा विनाश

11:54समूल विनाश

12:00अतः विनाश का मार्ग छोड़कर श्रीराम की शरण

12:04में चले जाओ

12:05से जुड़े एक ही बाण से महाबली बाली को मार

12:09डाला और खर-दूषण का सेना समेत अंत कर दिया

12:13था

12:19कि उन्हें पहचानो उस सारे जगत के स्वामी

12:23है

12:23आप तीनो लोको में उन्हें टक्कर लेने वाला

12:26कोई नहीं है

12:30कि समस्त देवता ब्रह्मा स्वयं मैं भी उनके

12:35सामने नतमस्तक रहते हैं एक सुत्र अभी समय

12:40है जानकी जी को लेकर उन शरणागतवत्सल की

12:44शरण में चले जाओ चप्पल वानर यह भगवान शिव

12:49के व्याख्या केरी प्रिंट बुद्धि के प्रणाम

12:53वाह अब जरनल जैसे अधम प्राणी भी रावण को

12:58गुरु के प्रति शिक्षा देंगे अच्छी शिक्षा

13:01कहीं से भी मिले ग्रह मित्र रैली चाहिए

13:06कि राज्य आपका रूप और धैर्य अद्भुत आपका

13:11साहस अनोखा और कांति निराली है

13:15आप एक महान राजा के सभी लक्षण विद्यमान है

13:20कि केवल मन की मृत्यु बदलने से ही आप वह

13:23स्थान प्राप्त कर सकते हैं

13:25है जहां देवता आपकी पूजा करें

13:30है याद रखिए धर्म विरुद्ध कार्य से सदा

13:34अनर्थ उत्पन्न होगा अ और पासवर्ड भी अपने

13:38करता को जड़मूल से नष्ट कर देता है

13:42है अतः जैसे बुद्धिमान को दूसरे की स्त्री

13:46को घर में कैद रखने जैसा निंदित कार्य

13:50शोभा नहीं देता है

13:56और सुनाइए पाप आपकी समस्त शक्तियों और

13:59सोने के महिलाओं समेत 20 लंका कांड नष्ट

14:03कर देगा और

14:04कि इस हंसते-गाते देश में चित्रकार के

14:07सिवा कुछ नहीं बचेगा

14:09मिलता आत्माओं को पानी पिलाने वाला भी कोई

14:13नहीं बचाएगा बॉस 7

14:17को

14:18[संगीत]

14:21भूल चुकी है सर्कल बात पर अपने बता अपना

14:25कुछ पानी देने वाले की चिंता करो हमारे

14:28लिए तुम्हें सोचने की कोई आवश्यकता नहीं

14:30ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से देव दानव और

14:34यक्ष-गंधर्व किन्नर नाग असुर यहां तक कि

14:38कोई भी यूनिक प्राणी हमें नहीं मार सकता

14:41और उस वरदान में नर और वानर से आपको

14:45निर्भर नहीं किया गया था

14:47[संगीत]

14:51कि

14:52भगवान श्री राम इस समय न रूप में है और

14:57सुग्रीव वानर

14:59राजन मैं फिर हाथ जोड़कर कहता हूं

15:03कि चुनाव के साथ ग्रो करने वाले को स्वयं

15:06शंकर विष्णु ब्रह्मा भी नहीं बचा सकते हैं

15:13कि गांव से विमुख होकर लाखों करोड़ों की

15:16संपत्ति भी ऐसे ही श्री कृष्ण है जैसे एक

15:20नारी का शरीर सोने के आभूषण पहनकर भी

15:23वस्त्रों के बिना मर्यादा ही रहता है

15:28कि

15:29महाराज ब्राह्मण मैं आपको अंतिम चेतावनी

15:32देता हूं कि जिन्हें आप सीता समझ रहे हैं

15:36वह बीच मिले भोजन के समान आपकी मृत्यु का

15:40संदेश है

15:45सीता का रूप धारण करके आपके पास कल की

15:50फांसी आ पहुंची है

15:53कि

15:54महाराज ब्राह्मण या अंतिम चेतावनी है नहीं

15:58तो मरने के लिए तैयार रहो मैं स्वयं भी तो

16:02मृत्यु दंड देने की शक्ति रखता हूं परंतु

16:05मुझे श्री राम की आज्ञा नहीं वैसे भी यह

16:09गौरव श्री राम को ही मिलना चाहिए मृत्यु

16:13दंड देने की शक्ति किसमें है

16:15इस स्थल को यह बता दो

16:18मैं इसी समय सिर काट दो तो

16:25कर दो

16:30कर दो

16:31[संगीत]

16:37कि न्यू

16:42को राक्षसराज क्षमा कीजिए

16:46कि यदि आपको नित्य हों तो से कुछ विनती

16:48करें कहां हो महाराज यह वाला दूध बनकर आया

16:54है इस वंश का वध करना धर्म के विरुद्ध है

16:57और लोकाचार की दृष्टि से भी निंदित है

17:02और अब तो राजधर्म के विशेषज्ञ हैं

17:05कि आप जैसे वीर के लिए यह कदापि उचित नहीं

17:08बैठक प्रस्ताव से सहमत हैं माइकल धूप में

17:15पिंप

17:16कि आप ही शत्रुओं की भांति हमारे शहीद अब

17:19बात किया इससे एक गुप्तचर विभाग जजमेंट

17:22किया है

17:23हाथ में आए हुए शत्रु या उसके कुछ तक छोड़

17:28देना बुद्धिमानी नहीं है महाराज

17:31बाद में पछताना पड़ता है

17:34ए बॉयफ्रेंड मृत्यु दंड देने का अनुमोदन

17:37करता हूं इंद्रजीत का कथन सत्य है पापियों

17:41का व्रत करने में कोई पाप रही इस वर्णन

17:44में राजू भाटी का दोष करके राजकुमार अक्स

17:48और महाबली जामुन मालिक का वध किया है इसका

17:52भर न्यायोचित है लक्ष्य

17:55सत्पुरुषों का कथन है कि दूध कहीं भी किसी

17:59भी समय किसी भी अवस्था में बात करने योग्य

18:01नहीं होते हैं मैं इसमें संदेह नहीं कि

18:05इसने सब कार्य शत्रुओं वाले किए हैं तथापि

18:07दूध का वध करना उचित नहीं कह सकता इस

18:10वॉर्नर को मारने में मुझे कोई लाभ दिखाई

18:12नहीं देता यह ने यह भेजा है उन्हीं को

18:15प्राण दंड देना चाहिए

18:18कि नीति और धर्म के मर्मज्ञ हमारे

18:21मंत्रीगण का क्या मत है

18:24कि महाराज व मुझे क्षमा करें

18:27है परंतु मैंने किसी दोस्त के लिए

18:29मृत्युदंड कभी नहीं सुना यदि दोस्त

18:32मर्यादा का उल्लंघन करता है तो उसके लिए

18:34दूसरे प्रकार के बहुत से धन उच्च बतलाए गए

18:37हैं जैसे अनुभव कर देना या सर्व देना या

18:42उसके शरीर में कोई चंद रख देना मॉरल्स

18:4812 सदा अपने स्वामी के अधीन होता है इसलिए

18:51वह अपने स्वामी के हित की ही बात करता है

18:53इसलिए वह शत्रु की भांति व्यवहार करें तो

18:57भी वध के योग्य नहीं होता आ

18:59कि मेरे मत में इसे कोई और दंड दिया जाना

19:01चाहिए

19:03कर दो

19:05[संगीत]

19:08कि अ

19:12और भी

19:14कि हम आप सब के मत को स्वीकार करते हैं

19:16परंतु इस तुष्ट वानर को कोई न कोई दंड

19:20देना आवश्यक है

19:24वानरों को अपनी पूछ से बड़ी ममता होती है

19:27वहीं उनका आभूषण है अगर इसकी पूरी जला दी

19:31जाए

19:33कि

19:34चली पूछ लेकर हफ्ते स्वामी के पास जाए और

19:38वह इसके मित्र और कुटुंब में जन्मा इससे

19:41दींदौर पीड़ित अवस्था में देख कर दुखी को

19:44रक्षस गण इसकी पूंछ में आग लगाकर इसे नगर

19:49की सड़कों चौराहे पर घुमाएं जिससे लक्ष्य

19:52सूखे बच्चे जलती हुई पूंछ वाले वानर को

19:55देखकर प्रसन्न हो यह हमारी आज्ञा है घ्र

20:02[संगीत]

20:07कर दो

20:09कर दो

20:10[संगीत]

20:21कर दो

20:26लुट

20:27[संगीत]

20:33लुट हरी सुना है महाराष्ट्र से जीवित दंड

20:38देने वाले थे परंतु मंत्रियों के कहने से

20:41कि दूध अवधि विरुद्ध उन्होंने आज्ञा दी है

20:44कि उसकी पूंछ जलाकर अंग-भंग कर दो वानरों

20:49को तो अपने पुत्र से बहुत ममता होती है

20:51बहुत दुख होगा जो कि क्या होगा भरपूर

20:55जलेगी तो मछली की भांति तड़प के गाने सुना

20:57दो

20:59[प्रशंसा]

21:00[संगीत]

21:08[संगीत]

21:10कि अ

21:14अजय को

21:22अजय को

21:31लुट हो अब बहुत ग

21:45[संगीत]

21:46कर दो

21:53[संगीत]

21:54[प्रशंसा]

21:58अजय को

22:03कर दो

22:05[संगीत]

22:10झाल

22:14कि कोई बड़ा माया भी वानर है जैसे-जैसे

22:16उसकी पूंछ पर तेल से भी कोई वस्त्र बांध

22:19रहे हैं वैसे-वैसे उसकी पूंछ लंबी से लंबी

22:22होती जा रही है जितनी पूछ लंबी करेगा उतनी

22:25ही आग अधिकतर लेगी उतना ही अधिक तड़पेगा

22:28कितना भूत है वानर जो ठहरा मोड तो होगा ही

22:33[संगीत]

22:35तो

22:36फिर अपनी 23 कि यदि मैंने स्पेसिफिक

22:40प्लेलिस्ट से व की है यदि मेरे पति पर कोई

22:44खोज नहीं होती मुझ पर तपस्या अथवा पति

22:48प्रथम खबर है

22:50मेरे पुत्र हनुमान के लिए आप शक्कर हो

22:53चाहिए अ

22:59कर दो

23:02[संगीत]

23:11के

23:12महंत श्री राम

23:16कर दो

23:22[संगीत]

23:23कर दो

23:31हुआ था

23:35कर दो

23:40[संगीत]

23:47अजय को

23:49कर दो

23:59कर दो

24:11कर दो

24:19और सुनाओ

24:23वॉइस

24:24मेल मतलब दोनों करके जगह हैं हमारे घर आकर

24:28यहां पहुंच गई है हमारी फ्रंट नैक पूरा

24:35लुट

24:47कर दो

24:49[संगीत]

24:56कर दो

24:59अजय को

25:03कर दो

25:11कर दो

25:23कर दो

25:27कर दो

25:35अजय को

25:38हुआ है

25:47हुआ है

25:53कर दो

25:58[संगीत]

25:59कर दो

26:10[संगीत]

26:12कर दो

26:15[संगीत]

26:23शो मोर

26:27[संगीत]

26:29अशीष सोनी

26:31हैं जिनका एक दूध अकेले ही आपके सारी लंका

26:35नगरी को जलाकर राख कर सकता है वह मुकेश

26:39शक्ति का विचार कीजिए

26:43कि यह सकून अच्छा नहीं है नाथ

26:46कि मैं आपसे फिर कहती हूं कि सीता सारी

26:49लंका के सर्वनाश करने आई है

26:52में उस एग्जाम के पास वापस भेज दीजिए ना

26:57में अभी समय है नाच मंदोधरी

27:00वीर पुरुषों की पत्नियां उन्हें कायरता की

27:04शिक्षा नहीं देती से एक बार यह शिकार मार

27:07लेता है फिर उसे किसी के डर से वापस नहीं

27:11करता है

27:16[संगीत]

27:20अजय को

27:24कर दो

27:27[संगीत]

27:39लुट लो

27:48[संगीत]

27:51हुआ है

27:54[संगीत]

27:58[प्रशंसा]

28:00[संगीत]

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