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0:00यह हमारी संस्कृति हमारे संस्कार सदा रहें
0:03हमारे साथ सब्सक्राइब करें दिलाते हैं तो
0:06यह देखने की लालसा से चला आया कि महर्षि
0:09पुलस्त्य
0:11जिनका यश निर्मल चंद्रमा के समान है उनके
0:16वश में उनकी कीर्ति को कलंकित करने वाला
0:19ऐसा कौन सा मूत है जो श्री राम से बैर
0:22करने का
0:24आ सकता है
0:24[संगीत]
0:26घृत रखना जी की शक्ति का अधीन है न पाए
0:31हैं
0:32कि तुम्हें कुछ मंत्रों की शक्ति से रावण
0:36को डराया है रावण जिसे ब्रह्मा और स्वयं
0:40भगवान शिव से शक्तियां प्राप्त होती है
0:44कि यदि मैं भगवान शिव होता तो इस समय आपको
0:48यही खुद देता कि वक़्त मेरी शक्तियों और
0:52मेरी अनुकंपा का दुरुपयोग ना करो तूने
0:56धर्मपूर्वक तपस्या के द्वारा जो शक्तियां
1:00मुझसे पाए हैं उनका प्रयोग विनम्रता से
1:04धर्म के कार्यों में ही करो यदि उनके कारण
1:08अपने अंदर पाप अहंकार और अधर्म की प्रबलता
1:14आने दोगे तो उसका एक ही परिणाम होगा विनाश
1:19समूल विनाश अ
1:23कर दो
1:29कर दो
1:33अजय को
1:37कर दो
1:47कर दो
1:50कर दो
1:56[संगीत]
1:57[प्रशंसा]
1:58[संगीत]
2:02कर दो
2:05लुट
2:14कर दो
2:16[संगीत]
2:22अपने पैरों
2:26अजय को
2:31अजय को
2:36में नवग्रह
2:39एबीईएस जयदेव
2:42नार्मल ओम और सर्कल
2:47चिकपाल
2:49सब
2:51अदृश्य भय भी तुझ
2:56मुद्दे खेड़ हनुमत
3:01लामोंट
3:04बैकुंठ हम मजा लिया है
3:09[संगीत]
3:15वॉइस मेल सुनें
3:19ए मांउड मीडियम आनंद सुनना को किया हुआ था
3:26तब हम अंध
3:30प्रणाम
3:32मुक्त कि
3:35निराशा अवधि
3:38ओम सूर्य भोले जय
3:43राम
3:45जय हनुमान
3:47[संगीत]
3:48अधेर राम
3:50[संगीत]
3:52इस वंश डर रहे थे इसमें से कौन से विशेषता
3:57है जिससे न केवल हमारे सैनिकों का इजहार
4:00किया है राज कुमार अक्षय कुमार जैसे महा
4:04नियुक्त किया है
4:07कि महाराज यह क्षेत्र में जितना सीधा है
4:10वास्तव में उसका सीधा फायदा नहीं है यह
4:13परम मायावी है अरे प्रकार की छविग्रह
4:16जानता इसलिए किसी के वश में नहीं आ सकता
4:19इसके साथ युद्ध करते समय एक बार तो मैं भी
4:23विचलित हो गया फिर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग
4:25करके मैंने इसे अपने फर्स्ट पिक है
4:28कि इसके लिए तुम्हें ब्रह्म से चलाना पड़ा
4:31ही धुंध
4:33और भी
4:36और अब तो यह अवश्य हमारे सामने लाए जाने
4:38योग्य है
4:40हुआ है
4:42हां बोल वानर किस के बलबूते पर तूने हमारे
4:45सुंदर ओपन पोर्स और दिया है
4:47कि हमारे राक्षस जो वहां के रक्षक है तूने
4:51उन्हें किस अपराध के कारण मारा था
4:54कि प्रभु अपने शरीर को स्वस्थ रखना और
4:58उसकी रक्षा करना प्राणी का पहला धर्म है
5:01इस धर्म के अनुसार जब शरीर अत्यंत भूखा हो
5:05और खाने का पदार्थ सामने हो तो उसे खा
5:09लेने में धर्म और न्याय की दृष्टि से कोई
5:12कोशिश नहीं की
5:14कि
5:15मैं सौ योजन समुद्र लांघकर आया था इस
5:18परिश्रम से मैं बहुत थक गया था और भूख भी
5:22लगी थी
5:23इसीलिए उस अशोक वाटिका के फलों पर अपना
5:27अधिकार समझ कर खा गया
5:30कि महाराज रात्रि के समय जब वृक्ष सो रहे
5:35हो तो उनके फल और पत्ते आदि तोड़ना वर्जित
5:38है इसी लिए मैं पहले उन्हें हिला-हिलाकर
5:42जगाता था उनको हिलाने-डुलाने में कुछ
5:45वृक्ष की जड़ें बाहर निकल आएंगे
5:49तो बस फिर आपके सैनिकों ने मेरे शरीर पर
5:52प्रहार किया अपने शरीर की रक्षा के धर्म
5:55के लिए मुझे उनसे लड़ना पड़ा
5:59महाराज व उन्होंने मुझ पर प्रहार नहीं
6:02किया मैंने उन पर कुछ नहीं कहा बस केवल
6:06मैंने उन्हीं को मारा तूने मुझे मारने की
6:08चीज ताकि इसी लिए आपके पुत्र रामकुमार
6:12आकाश को मुझे पर लो भेजना पड़ता है
6:18महाराज व जो युद्ध की इच्छा से आए उसे
6:22मारना अथवा नहीं
6:24आज हमारे प्रिय पुत्र राज कुमार अक्षय
6:27कुमार का वर्क करते समय तुम्हें हमारी
6:30शक्ति का कोई भय नहीं था
6:32108 उलझन धाम और हमारे कीर्ति अभी तक नहीं
6:36सुनी सुनी है बाहर आज आप कीर्ति और आपके
6:41कारनामों की इस गाथा सुनिए
6:43कैसे सहस्त्रबाहु के साथ आपने वीरता
6:47पूर्वक युद्ध किया था था
6:51है और फिर कैसे वानरराज बालि आपको अपनी
6:55कांख में दबाए दबाए छह महीने तक घूमते रहे
7:00आपकी वीरता के चर्चे तो तीनों लोकों में
7:04सुनाई दे रहे हैं महाराज विट्ठल से भिखारी
7:08का वेश बनाकर किसी अ के लिए अप्लाई स्त्री
7:11को चोरों की भांति उठा लें ऐसा परमवीर
7:15आपकी अतिरिक्त और कौन हो सकता है बहर हाल
7:18है
7:23हुआ है
7:26के दरबार में ऐसी सदृशता से बात करने का
7:29साहस कोई नहीं कर सकता पहले जय महाराज जी
7:34हां अभी काट दी जाए
7:36[संगीत]
7:41ऐसा पति ने
7:44वो मस्ती प्रभात आप हमारी आज्ञा आपूर्ति
7:47में रुकावट डाल रहे हैं महाराज ऐसा साहस
7:52नहीं कर सकता परंतु आप किया गया पूर्ति से
7:55पहले मैं आपकी सेवा में एक विनम्र निवेदन
7:58करने किया गया चाहता हूं कहां हो
8:02में ही लंकेश्वर यह कोई साधारण मानव दिखाई
8:04नहीं देता और उसका यहां पर आना भी कोई
8:07साधारण से बात नहीं लगती यह वानर रुपी
8:10इसका छत में में दिखाई देता है क्योंकि
8:12जितना तेज इसमें है उन्होंने नहीं होता हो
8:16सकता है यह इंदौर के कहने पर यहां आया हूं
8:18या कुबेर अथवा यम वरुण का दूध हो या विश्व
8:23नहीं इसे यहां भेजा हो सबसे पहले यह जान
8:26लेना परम आवश्यक है
8:27[संगीत]
8:31कर दो
8:33कर दो
8:35कि
8:37महाराज मंत्री व प्रस्तुत का कहना ठीक है
8:41यह जानना परम आवश्यक है कि किसने भेजा है
8:45और उसके पीछे कितनी क्षत्रुओं या स्वयं
8:48देवताओं का क्या संयंत्र है यह सारी
8:51जानकारी जो इसके द्वारा मिल सकती है इसकी
8:54जिप कार्ड देने से उसका अवसर खो जाएगा
8:57सेनापति सबसे पहले इसे सारी जानकारी लें
9:00और यदि अच्छी तरह से ना बताएं तो इसे ऐसे
9:03यातनाएं दी जाएं जिससे यह सब कुछ बताने पर
9:05विवश हो जाए तो
9:09आज हम आपके लिए की प्रशंसा करते हैं चना
9:13पत्ते एक हम आपसे प्रश्न किया गया का पालन
9:16हो
9:18कर दो
9:19कि इतने बड़े कार्यक्रम की आवश्यकता नहीं
9:23है महाराज इतनी सी बात तो मैं स्वयं बता
9:26देता हूं
9:30कि मैं वायुदेवता का औरस पुत्र हनुमान
9:36कि मुझे
9:38कि भगवान विष्णु ने भेजा है और ना
9:41इंद्रादि देवताओं ने अ
9:43कि मैं तीनों लोकों के स्वामी अमित
9:46तेजस्वी रघुकुल शिरोमणि भगवान श्रीराम का
9:50दूध है
9:54कर दो कर दो
9:59थे जिनकी भारी हात सीता माता को तुम छल से
10:03हर लाए हो
10:06कि मैं उन्हें सीता माता का पता लगाने और
10:09आपको मिलने सौ योजन समुद्र लांघकर आया हूं
10:15कर दो
10:16कि मैंने सीता माता के दर्शन कर लिए हैं
10:19मैं अब आपसे मिलने के लिए ही
10:21मैंने इस प्रकार बांधा जाना तो यह स्वीकार
10:26किया है
10:28क्यों नहीं तो देवता और असुर तक अ कि मुझे
10:31किसी भी अस्त अथवा पाश में बांध नहीं सकते
10:34क्योंकि मुझे ब्रह्मा जी से ऐसा बर्तन में
10:38चुका है
10:42अभी तो यह देखने की लालसा से चला आया कि
10:45महर्षि पुलस्त्य
10:46जिनका यश निर्मल चंद्रमा के समान है उनके
10:51वश में उनकी कीर्ति को कलंकित करने वाला
10:54ऐसा कौन सा मूत है जो श्री राम से बैर
10:58करने का साहस होता है
11:00[संगीत]
11:03चीज रखना जो कि शक्ति का अधीन है न भाए
11:08तुझे कुछ मंत्रों की शक्ति से रावण को
11:11डराया है रावण जिसे ब्रह्मा और स्वयं
11:16भगवान शिव से शक्तियां प्राप्त होती है
11:20कि यदि मैं भगवान शिव होता तो इस समय आपको
11:24यही खुद देता कि वक़्त मेरी शक्तियों और
11:28मेरी अनुकंपा का दुरुपयोग न करो तूने
11:32धर्मपूर्वक तपस्या के द्वारा जो शक्तियां
11:36मुझसे पाए हैं उनका प्रयोग विनम्रता से
11:39धर्म के कार्यों में ही करो यदि उनके कारण
11:43अपने अंदर पाप अहंकार और अधर्म की प्रबलता
11:49आने दोगे तो उसका एक ही परिणाम होगा विनाश
11:54समूल विनाश
12:00अतः विनाश का मार्ग छोड़कर श्रीराम की शरण
12:04में चले जाओ
12:05से जुड़े एक ही बाण से महाबली बाली को मार
12:09डाला और खर-दूषण का सेना समेत अंत कर दिया
12:13था
12:19कि उन्हें पहचानो उस सारे जगत के स्वामी
12:23है
12:23आप तीनो लोको में उन्हें टक्कर लेने वाला
12:26कोई नहीं है
12:30कि समस्त देवता ब्रह्मा स्वयं मैं भी उनके
12:35सामने नतमस्तक रहते हैं एक सुत्र अभी समय
12:40है जानकी जी को लेकर उन शरणागतवत्सल की
12:44शरण में चले जाओ चप्पल वानर यह भगवान शिव
12:49के व्याख्या केरी प्रिंट बुद्धि के प्रणाम
12:53वाह अब जरनल जैसे अधम प्राणी भी रावण को
12:58गुरु के प्रति शिक्षा देंगे अच्छी शिक्षा
13:01कहीं से भी मिले ग्रह मित्र रैली चाहिए
13:06कि राज्य आपका रूप और धैर्य अद्भुत आपका
13:11साहस अनोखा और कांति निराली है
13:15आप एक महान राजा के सभी लक्षण विद्यमान है
13:20कि केवल मन की मृत्यु बदलने से ही आप वह
13:23स्थान प्राप्त कर सकते हैं
13:25है जहां देवता आपकी पूजा करें
13:30है याद रखिए धर्म विरुद्ध कार्य से सदा
13:34अनर्थ उत्पन्न होगा अ और पासवर्ड भी अपने
13:38करता को जड़मूल से नष्ट कर देता है
13:42है अतः जैसे बुद्धिमान को दूसरे की स्त्री
13:46को घर में कैद रखने जैसा निंदित कार्य
13:50शोभा नहीं देता है
13:56और सुनाइए पाप आपकी समस्त शक्तियों और
13:59सोने के महिलाओं समेत 20 लंका कांड नष्ट
14:03कर देगा और
14:04कि इस हंसते-गाते देश में चित्रकार के
14:07सिवा कुछ नहीं बचेगा
14:09मिलता आत्माओं को पानी पिलाने वाला भी कोई
14:13नहीं बचाएगा बॉस 7
14:17को
14:18[संगीत]
14:21भूल चुकी है सर्कल बात पर अपने बता अपना
14:25कुछ पानी देने वाले की चिंता करो हमारे
14:28लिए तुम्हें सोचने की कोई आवश्यकता नहीं
14:30ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से देव दानव और
14:34यक्ष-गंधर्व किन्नर नाग असुर यहां तक कि
14:38कोई भी यूनिक प्राणी हमें नहीं मार सकता
14:41और उस वरदान में नर और वानर से आपको
14:45निर्भर नहीं किया गया था
14:47[संगीत]
14:51कि
14:52भगवान श्री राम इस समय न रूप में है और
14:57सुग्रीव वानर
14:59राजन मैं फिर हाथ जोड़कर कहता हूं
15:03कि चुनाव के साथ ग्रो करने वाले को स्वयं
15:06शंकर विष्णु ब्रह्मा भी नहीं बचा सकते हैं
15:13कि गांव से विमुख होकर लाखों करोड़ों की
15:16संपत्ति भी ऐसे ही श्री कृष्ण है जैसे एक
15:20नारी का शरीर सोने के आभूषण पहनकर भी
15:23वस्त्रों के बिना मर्यादा ही रहता है
15:28कि
15:29महाराज ब्राह्मण मैं आपको अंतिम चेतावनी
15:32देता हूं कि जिन्हें आप सीता समझ रहे हैं
15:36वह बीच मिले भोजन के समान आपकी मृत्यु का
15:40संदेश है
15:45सीता का रूप धारण करके आपके पास कल की
15:50फांसी आ पहुंची है
15:53कि
15:54महाराज ब्राह्मण या अंतिम चेतावनी है नहीं
15:58तो मरने के लिए तैयार रहो मैं स्वयं भी तो
16:02मृत्यु दंड देने की शक्ति रखता हूं परंतु
16:05मुझे श्री राम की आज्ञा नहीं वैसे भी यह
16:09गौरव श्री राम को ही मिलना चाहिए मृत्यु
16:13दंड देने की शक्ति किसमें है
16:15इस स्थल को यह बता दो
16:18मैं इसी समय सिर काट दो तो
16:25कर दो
16:30कर दो
16:31[संगीत]
16:37कि न्यू
16:42को राक्षसराज क्षमा कीजिए
16:46कि यदि आपको नित्य हों तो से कुछ विनती
16:48करें कहां हो महाराज यह वाला दूध बनकर आया
16:54है इस वंश का वध करना धर्म के विरुद्ध है
16:57और लोकाचार की दृष्टि से भी निंदित है
17:02और अब तो राजधर्म के विशेषज्ञ हैं
17:05कि आप जैसे वीर के लिए यह कदापि उचित नहीं
17:08बैठक प्रस्ताव से सहमत हैं माइकल धूप में
17:15पिंप
17:16कि आप ही शत्रुओं की भांति हमारे शहीद अब
17:19बात किया इससे एक गुप्तचर विभाग जजमेंट
17:22किया है
17:23हाथ में आए हुए शत्रु या उसके कुछ तक छोड़
17:28देना बुद्धिमानी नहीं है महाराज
17:31बाद में पछताना पड़ता है
17:34ए बॉयफ्रेंड मृत्यु दंड देने का अनुमोदन
17:37करता हूं इंद्रजीत का कथन सत्य है पापियों
17:41का व्रत करने में कोई पाप रही इस वर्णन
17:44में राजू भाटी का दोष करके राजकुमार अक्स
17:48और महाबली जामुन मालिक का वध किया है इसका
17:52भर न्यायोचित है लक्ष्य
17:55सत्पुरुषों का कथन है कि दूध कहीं भी किसी
17:59भी समय किसी भी अवस्था में बात करने योग्य
18:01नहीं होते हैं मैं इसमें संदेह नहीं कि
18:05इसने सब कार्य शत्रुओं वाले किए हैं तथापि
18:07दूध का वध करना उचित नहीं कह सकता इस
18:10वॉर्नर को मारने में मुझे कोई लाभ दिखाई
18:12नहीं देता यह ने यह भेजा है उन्हीं को
18:15प्राण दंड देना चाहिए
18:18कि नीति और धर्म के मर्मज्ञ हमारे
18:21मंत्रीगण का क्या मत है
18:24कि महाराज व मुझे क्षमा करें
18:27है परंतु मैंने किसी दोस्त के लिए
18:29मृत्युदंड कभी नहीं सुना यदि दोस्त
18:32मर्यादा का उल्लंघन करता है तो उसके लिए
18:34दूसरे प्रकार के बहुत से धन उच्च बतलाए गए
18:37हैं जैसे अनुभव कर देना या सर्व देना या
18:42उसके शरीर में कोई चंद रख देना मॉरल्स
18:4812 सदा अपने स्वामी के अधीन होता है इसलिए
18:51वह अपने स्वामी के हित की ही बात करता है
18:53इसलिए वह शत्रु की भांति व्यवहार करें तो
18:57भी वध के योग्य नहीं होता आ
18:59कि मेरे मत में इसे कोई और दंड दिया जाना
19:01चाहिए
19:03कर दो
19:05[संगीत]
19:08कि अ
19:12और भी
19:14कि हम आप सब के मत को स्वीकार करते हैं
19:16परंतु इस तुष्ट वानर को कोई न कोई दंड
19:20देना आवश्यक है
19:24वानरों को अपनी पूछ से बड़ी ममता होती है
19:27वहीं उनका आभूषण है अगर इसकी पूरी जला दी
19:31जाए
19:33कि
19:34चली पूछ लेकर हफ्ते स्वामी के पास जाए और
19:38वह इसके मित्र और कुटुंब में जन्मा इससे
19:41दींदौर पीड़ित अवस्था में देख कर दुखी को
19:44रक्षस गण इसकी पूंछ में आग लगाकर इसे नगर
19:49की सड़कों चौराहे पर घुमाएं जिससे लक्ष्य
19:52सूखे बच्चे जलती हुई पूंछ वाले वानर को
19:55देखकर प्रसन्न हो यह हमारी आज्ञा है घ्र
20:02[संगीत]
20:07कर दो
20:09कर दो
20:10[संगीत]
20:21कर दो
20:26लुट
20:27[संगीत]
20:33लुट हरी सुना है महाराष्ट्र से जीवित दंड
20:38देने वाले थे परंतु मंत्रियों के कहने से
20:41कि दूध अवधि विरुद्ध उन्होंने आज्ञा दी है
20:44कि उसकी पूंछ जलाकर अंग-भंग कर दो वानरों
20:49को तो अपने पुत्र से बहुत ममता होती है
20:51बहुत दुख होगा जो कि क्या होगा भरपूर
20:55जलेगी तो मछली की भांति तड़प के गाने सुना
20:57दो
20:59[प्रशंसा]
21:00[संगीत]
21:08[संगीत]
21:10कि अ
21:14अजय को
21:22अजय को
21:31लुट हो अब बहुत ग
21:45[संगीत]
21:46कर दो
21:53[संगीत]
21:54[प्रशंसा]
21:58अजय को
22:03कर दो
22:05[संगीत]
22:10झाल
22:14कि कोई बड़ा माया भी वानर है जैसे-जैसे
22:16उसकी पूंछ पर तेल से भी कोई वस्त्र बांध
22:19रहे हैं वैसे-वैसे उसकी पूंछ लंबी से लंबी
22:22होती जा रही है जितनी पूछ लंबी करेगा उतनी
22:25ही आग अधिकतर लेगी उतना ही अधिक तड़पेगा
22:28कितना भूत है वानर जो ठहरा मोड तो होगा ही
22:33[संगीत]
22:35तो
22:36फिर अपनी 23 कि यदि मैंने स्पेसिफिक
22:40प्लेलिस्ट से व की है यदि मेरे पति पर कोई
22:44खोज नहीं होती मुझ पर तपस्या अथवा पति
22:48प्रथम खबर है
22:50मेरे पुत्र हनुमान के लिए आप शक्कर हो
22:53चाहिए अ
22:59कर दो
23:02[संगीत]
23:11के
23:12महंत श्री राम
23:16कर दो
23:22[संगीत]
23:23कर दो
23:31हुआ था
23:35कर दो
23:40[संगीत]
23:47अजय को
23:49कर दो
23:59कर दो
24:11कर दो
24:19और सुनाओ
24:23वॉइस
24:24मेल मतलब दोनों करके जगह हैं हमारे घर आकर
24:28यहां पहुंच गई है हमारी फ्रंट नैक पूरा
24:35लुट
24:47कर दो
24:49[संगीत]
24:56कर दो
24:59अजय को
25:03कर दो
25:11कर दो
25:23कर दो
25:27कर दो
25:35अजय को
25:38हुआ है
25:47हुआ है
25:53कर दो
25:58[संगीत]
25:59कर दो
26:10[संगीत]
26:12कर दो
26:15[संगीत]
26:23शो मोर
26:27[संगीत]
26:29अशीष सोनी
26:31हैं जिनका एक दूध अकेले ही आपके सारी लंका
26:35नगरी को जलाकर राख कर सकता है वह मुकेश
26:39शक्ति का विचार कीजिए
26:43कि यह सकून अच्छा नहीं है नाथ
26:46कि मैं आपसे फिर कहती हूं कि सीता सारी
26:49लंका के सर्वनाश करने आई है
26:52में उस एग्जाम के पास वापस भेज दीजिए ना
26:57में अभी समय है नाच मंदोधरी
27:00वीर पुरुषों की पत्नियां उन्हें कायरता की
27:04शिक्षा नहीं देती से एक बार यह शिकार मार
27:07लेता है फिर उसे किसी के डर से वापस नहीं
27:11करता है
27:16[संगीत]
27:20अजय को
27:24कर दो
27:27[संगीत]
27:39लुट लो
27:48[संगीत]
27:51हुआ है
27:54[संगीत]
27:58[प्रशंसा]
28:00[संगीत]