Full transcript
0:00[संगीत]
0:01हमारी संस्कृति हमारे
0:04संस्कार सदा रहे हमारे
0:07साथ भारत के महान ग्रंथों और काव्यों का
0:10संपूर्ण
0:12संकलन सब्सक्राइब करें
0:15तिलक कई तरीके की एलईडी लाइट्स आपके घर और
0:18ऑफिस के लिए जीआर एलईडी लाइट्स मेक इंडिया
0:20ब्राइट कौन हो तुम लंकेश्वर
0:28रावण हां रावण जिसे तुम्हारी कामना ने
0:33इतना आतुर कर दिया है कि स्वयं तुम्हारे
0:36द्वार पर भिक्षा मांगने आया तुम्हारा यह
0:39साहस एक गीदड़ होकर सिंघनी की कामना कर
0:42रहे हो तुम्हारा अंत समय आ गया है यदि
0:46प्राण प्यारे हो तो अभी समय है चला जा
0:49यहां
0:49से तेरा ही नहीं तेरे सारे कुल का सर्वनाश
0:53हो
0:56[संगीत]
0:58जाएगा i
1:01[प्रशंसा]
1:06[संगीत]
1:47[संगीत]
1:50अरे पुत्र अरे पुत्र लक्ष्मण लक्ष्म
1:54भैया आइए जल्दी आइए एक अद्भुत दृश्य देखा
1:59है क्या हुआ सीते एक अलौकिक मृग हमारे
2:02आश्रम के पास घूम रहा है अलौकिक मृग हां
2:06कहां है आइए जल्दी आइए आइए स्वामी आइए
2:09जल्दी
2:11आइए देखिए देखिए वो प्रकृति के अद्भुत
2:15कार्य कररी वह अनोखा हिरण
2:21[संगीत]
2:30ऐसा विचित्र मृग कभी देखा है इसके सिंग
2:34देखिए लगता है सोने के हैं उसकी खाल भी
2:39सुनहरी है सचमुच अद्भुत
2:42विलक्षण देखा लक्ष्मण देख रहा हूं
2:46भैया स्वामी इसे किसी प्रकार पकड़ लीजिए
2:50ना
2:52ओहो कितना मन भावन वृ है
2:56पकड़ने क्या करोगी
2:58कल्याणी इसे अयोध्या ले जाएंगे देखकर सब
3:02विस्मय से चकित रह
3:04जाएंगे इसके पैरों में घुंगरू बांध दूंगी
3:08जब महल में छम छम चलेगा तो माताएं कितनी
3:12प्रसन्न होगी नहीं तो बनवास की स्मृति
3:15स्वरूप भरत भैया को फेर दे दूंगी जाइए ना
3:20जल्दी पकड़ लाइए लक्ष्मण तुम्हारी भाभी की
3:24इच्छा पूरी करनी ही
3:26पड़ेगी वास्तव में यह है भी बहुत सुंदर
3:31इसका रूप अनूप ही इसका शत्रु बन रहा
3:35है
3:37भैया इसके प्रति भाभी का मोह हमें किसी
3:41संकट में ना डाल
3:43दे मुझे तो यह स्मग माय जैसे जान पड़ता है
3:48य प्रकृति के विरुद्ध है अप्रकृतिक है
3:50असंभव
3:52है इस सृष्टि में असंभव कुछ नहीं है
3:55लक्ष्मण जो कुछ भी तुम कल्पना कर सकते हो
3:59वो इस में कहीं ना कहीं खड़ा जा चुका है
4:02ज्ञानी और विज्ञानी भी सृष्टि का सारा
4:05रहस्य नहीं जानते इससे यह सृष्टि मिथ्या
4:08नहीं हो जाती परंतु भैया जो प्रकृति के
4:11विरुद्ध है प्रकृति के विरुद्ध कुछ नहीं
4:13होता
4:14लक्ष्मण भरद्वाज मुनि के घर में पुत्र रूप
4:18में स्वर्ण शरीर वाले साथ हंस पैदा नहीं
4:21हुए थे इसी प्रकार सहस्त्र कोटि रूपों में
4:25जीव मिलते हैं
4:26लक्ष्मण भगवान की माया के सामने जन
4:29विज्ञान का तर्क काम नहीं करता भगवान की
4:32माया हो सकती है परंतु यह तो मुझे कोई
4:35राक्षसी माया जान पड़ती
4:37है याद है भैया एक बार दंडक वन में कई
4:41राक्षस इसी तरह मृग बन के आए थे ओहो अब
4:45दोनों भाई इसी तरह तर्क करते रहेंगे तो
4:47इतने में हिरण भाग जाएगा आप मेरी इतनी सी
4:50इच्छा पूरी नहीं कर
4:52सकते
4:54लक्ष्मण लगता है सीता मृग को पाए बिना
4:56मानेगी नहीं मैं भी चाहता हूं
5:02[संगीत]
5:13यदि मृग जीवित हाथ ना आया तो तो क्या
5:18हुआ उसकी मृग चम कितनी सुंदर है आपकी पूजा
5:22में आसन के काम आएगी
5:29[संगीत]
5:31भैया मुझे अब भी संदेह है कि कोई राक्षसी
5:35माया ना हो यदि राक्षस ही हुआ तो उसका अंत
5:39होना भी आवश्यक
5:43है लक्ष्मण तुम प कुटी में सीता के साथ
5:47सावधानी से इनकी रक्षा में रहना कहीं
5:50तुम्हारा संदेह सत्य ना हो मैं जान की
5:53इच्छा पूरी करने के लिए इस कांचन रख के
5:55पीछे जाता हूं जीवित अथवा मारकर शीख लौट
5:58आऊंगा लेकिन सावधान लक्ष्मण वन में कई
6:01राक्षस घूमते रहते हैं इसलिए किसी भी
6:04स्थिति में सीता को अकेली मत
6:06छोड़ना जो आज्ञा
6:11[संगीत]
6:18भैया निगम
6:22नेत शिव
6:25ध्यान ना पावा
6:31माया
6:33मृग
6:35पाछ सो धावा
6:40[संगीत]
8:05[संगीत]
9:19हाय
9:20लक्ष्मण हाय
9:23लक्ष्मण हाय
9:25लक्ष्मण हाय सीते
9:29फ सते फ
9:33सते
9:35लक्ष्मण लक्ष्मण लक्ष्मण तुमने सुना
9:40बचाओ बचाओ
9:44[संगीत]
10:07[प्रशंसा]
10:08[संगीत]
10:14तुम्हारे भैया बड़े अर्थ से हमें बुला रहे
10:16हैं व अवश्य किसी संकट में फस गए होंगे
10:20उनकी आवाज में कितनी करुणा है लता है बहुत
10:23सार राक्षी से खे लिया
10:25होगा लक्षमण तुमने नहीं सुनी उनकी पुकार
10:28सुनी है अी त तुम यही पर खड़े
10:32हो जाओ लक्ष्मण जाओ जाके उनको
10:37बचाओ लक्ष्मण क्या हुआ तुम जाते क्यों
10:42नहीं क्योंकि मैं जानता हूं भैया किसी
10:44संकट में फस ही नहीं
10:47सकते भाभी आपके स्वामी को देव असुर नाथ
10:51दानव कोई परास्त नहीं कर सकता ये कदाचित
10:53भैया की आवाज नहीं है ये कोई धोखा है आप
10:56इतने अधीर ना हो भाभी धीरज रखिए
11:00जिसका पति संकट में हो और सहायता के लिए
11:03पुकार रहा हो उसको तुम धीरज ति की बात
11:06सिखा रहे
11:07हो लक्ष्मण क्या तुम राक्षसों के डर के
11:11बारे अपने प्राण बचाने के लिए नहीं जा
11:14रहे मैंने तुम्ह इतना कार कभी नहीं समझा
11:17था भाभी अपने भाई के सामने धनुष उठा उठाकर
11:21अपनी वीरता के ंगे मारते रहते हो और आज आज
11:24सचमुच वीरता दिखाने का अवसर आया डरे हुए
11:28चहे की भाती अपने बिल से निकलना नहीं
11:30चाहते
11:32भाभी भाभी आप ऐसी बात ना कहिए आप नहीं
11:36जानती आप क्या कह रही है मैं अच्छी तरह
11:39जानती हूं तुम्हे जिस भाई ने तुम्हे अपने
11:41पुत्र की भाति पाला है आज उनके प्राण संकट
11:45में आ गए तो तुम डर के मारे अपनी भाभी के
11:47आचरण में आकर छुप
11:49गए क्या इसी समय यही तुम्हारा कर्तव्य है
11:52मेरा एक ही कर्तव्य है अपने बड़े भाई
11:55श्रीराम की आज्ञा का पालन करना और वो मुझे
11:57कह गए हैं कि मैं आपकी रक्षा के लिए ही
11:59रहू इसलिए मैं आपको किसी भी स्थिति में
12:01अकेला छोड़ के नहीं जा सकता मेरी रक्षा
12:04जिसके लिए मैं सारा संसार त्याग कर इस वन
12:07में रहने आई हूं जिसके बगैर मैं एक परल भी
12:10जीवित नहीं रह सकती आज जब उनके प्राम संकट
12:14में आ गए तो मेरी रक्षा करने से क्या लाभ
12:18लक्ष्मण अगर उनको कुछ हो गया तो मैं एक पल
12:21भी जीवित नहीं रह
12:25सकूंगी फिर मेरे मृत शरीर की रक्षा करते
12:27रहना और पालते रहना ने भाई की आ क्या भाभी
12:30आप समझती क्यों नहीं भैया पर कोई आज आ ही
12:33नहीं सकती तीनों लोगों में कोई ऐसा वीर
12:36नहीं जो उन्हे परास कर
12:39सके किस दुर्भाग्य के कारण आपकी बुद्धि
12:41इतनी हीन हो गई है जिसके पति के प्राण
12:44संकट में हो उस नारी के लिए इससे बड़ा
12:47दुर्भाग्य और क्या हो सकता
12:50है आज तुम हर धर्मी पर उतर आए
12:54हो सिद्धि तो तुम सदा से ही रहे हो परंतु
12:58अपनी काता कारण मेरी अवज्ञा भी करोगे इसकी
13:02मुझे आशा नहीं थी भाभी आप मुझे कायर मत
13:06कहिए कायर नहीं तो मेरी आज्ञा का पालन करो
13:10भाभी आप हट मत कीजिए कुछ अमंगल हो जाएगा
13:14तुम नहीं गए तो अमंगल हो ही जाएगा लक्ष्मण
13:19बातो में समय मत गवा
13:22[संगीत]
13:25हो ठीक है तुम नहीं जा सकते
13:29तो धनुष मुझे दे दो हर आर्य स्ती अपने पति
13:33की रक्षा करना अच्छी तरह से जानती
13:35[संगीत]
13:38है
13:41ला धनुष बान मुझे नहीं दे
13:46सकते ठीक है मैं ऐसे ही चली जाती हूं तुम
13:49यही रहो भाभी मुझे इतना विवश मत कीजिए बात
13:52ना करो कर्म करो
13:56कर्म अच्छी बात है
13:59आपकी आज्ञा का पालन करने के लिए आज पहली
14:02बार लक्ष्मण अपने प्रभु श्री राम की आज्ञा
14:05का उल्लंघन करता
14:07है आप कुटिया में चली
14:10[संगीत]
14:15जाइए
14:16माता आप ऊपर चली
14:21[संगीत]
14:24जाइए
14:25भैया मुझे क्षमा करना और
14:33[संगीत]
14:44[संगीत]
14:59माता गुरु की दी हुई मंत्र शक्ति से मैंने
15:02यहां एक अदृश्य दीवार बना दी
15:04है कोई भी इस लक्ष्मण रेखा को पार करके
15:07अंदर आने का साहस करेगा तो जलकर भस्म हो
15:10जाएगा इसलिए माता मेरी आपसे विनती है किसी
15:15भी परिस्थिति में राम भैया के आने तक आप
15:18अपने चरण इस रेखा से बाहर ना
15:19[संगीत]
15:25रखें हे वन के देवताओं समस्त प्राण
15:29मैं माता सीता को आपकी सुरक्षा में छोड़े
15:33जा रहा हूं इनकी रक्षा करना
15:40[संगीत]
16:00[प्रशंसा]
16:07[संगीत]
16:29[प्रशंसा]
16:29[संगीत]
17:14[संगीत]
17:16हो
17:29[प्रशंसा]
17:39इच्छा
17:41[संगीत]
17:44देही
17:46ान
17:47[संगीत]
17:52देही भिक्षा देही
17:58[संगीत]
17:59भिक्षा
18:01[संगीत]
18:03देही भिक्षा
18:08देही प्रणाम महत् मन कल्याण
18:12हो देवी हम बहुत दूर से आए हैं और भूखे
18:17हैं तुम्हारी कुटिया देखकर इस आशा से यहां
18:21आए हैं कि हमें कुछ खाने को मिल जाएगा
18:24अवश्य महात्म आप यही ठहरे मैं आपके लिए
18:28संभव भोजन लाती हूं
18:32देवी हम यात्रा से क्लांत है हमें विश्राम
18:36की भी आवश्यकता है क्षमा करें इस समय मेरे
18:39पति कुटिया में नहीं है इसलिए मैं आपका
18:42स्वागत नहीं कर सकती
18:46परंतु कृपा करके आप वही ठहरी मैं आपके लिए
18:51भोजन लाती हूं
18:59[संगीत]
19:06[प्रशंसा]
19:06[संगीत]
19:19[प्रशंसा]
19:20[संगीत]
19:57a अ
20:04[संगीत]
20:17[संगीत]
20:45ओम
20:48[संगीत]
21:00मेरी आपसे विनती है किसी भी परिस्थिति में
21:03राम भैया के आने तक आप अपने चरण इस रेखा
21:06से बाहर ना
21:09रखे
21:13मुनिराज मैं आपके लिए भोजन लाई हूं यह
21:20लीजिए ले आओ
21:23देवी कृपया आप ही को यहां आना होगा
21:29अब तो हमने आसन जमा लिया है यात्रा से थके
21:32हुए हैं बार-बार उठा नहीं जाता जो कुछ
21:36देना है यही ले आ भगवान मैं इस सीमा से
21:41बाहर नहीं आ सकती आप ही को कष्ट करना होगा
21:45देवी तुमको आर्य कन्या नहीं लगती द्वार पर
21:49आया हुआ अतिथि भगवान का रूप होता
21:53है और तुम हमारा तिरस्कार कर रही हो नहीं
21:56नहीं अतिथि देवता मेरे वहां ना आने का
22:00कारण आपका तिरस्कार करना नहीं वास्तव में
22:04मेरे देवर मेरी सुरक्षा के लिए एक सीमा की
22:07रेखा खींच गए
22:10हैं और अपनी शपथ देकर कह गए हैं मर्यादा
22:15की सीमा को त्याग कर बाहर ना जाना इसलिए
22:19मैं बाहर नहीं आ
22:20सकती कृपा करके अपनी बात का बुरा ना माने
22:24बस बहुत हो चुका तुम बारबार तिरस्कार कर
22:29रही हो पहले हमें कुटिया के अंदर आने से
22:32रोक दिया और अब दूर से खाना दे रही हो
22:35जैसे हम कोई पशु पक्षी हो ऐसा व्यवहार नी
22:39जाति के लोगों से किया जाता है कोई संत
22:42महात्मा द्वार पर आ जाए तो बड़े आदर से
22:45स्वयं उसके पास जाकर उसके चरण छूकर भिक्षा
22:48दी जाती
22:50है ठीक है हम तुम्हारे द्वार से भूखे ही
22:54चले जाएंगे लेकिन इस अपमान के बदले हम
22:58तुम्हें श्राप देंगे नहीं नहीं मुनिराज
23:02मुझ पर दया कीजिए मुझे अपनी पुत्री के
23:05समान समझकर मेरी समस्या और विवश को समझने
23:09की चेना कीजिए हम सब समझते हैं सब कुछ
23:13जानते हैं हम त्रिकाल दर्शी है मूर्ख
23:16स्त्री हम सब देख रहे हैं तुम्हारा पति इस
23:20समय एक सुवर्ण मृग का शिकार करने वन में
23:24भागा भागा फिर रहा है वह स्वर्ण मृग अपने
23:28सिंह से तुम्हारे पति को एक बार आहत कर
23:31चुका है फिर भी तुम्हारा पति उसके पीछे
23:34भाग रहा है हम श्राप देते हैं वही सुवर्ण
23:38मृग अपने तीखे सिंघो द्वारा तुम्हारे पति
23:41को नहीं नहीं अबने श्राप मत दीजिए मैं वही
23:45आती हूं आप मेरे पति को श्राप मत
23:48दीजिए श्राप मत दीजिए मुझ पर दया कीजिए
23:52मुझसे भूल हो गई है मैंने आपकी शक्ति को
23:55नहीं पहचाना था मुझे क्षमा कर दीजिए
24:00जाओ कन्या हमने तुम्हे क्षमा कर
24:03दिया हम तुम जैसी सुंदर नारी के अश्रु
24:07नहीं देख
24:08[संगीत]
24:12सकते मैं मिथिला नरेश महाराज जनक की
24:15पुत्री
24:16हूं मिथिला की
24:19राजकुमारी और इस अवस्था में ये कैसा दर्दे
24:24है जिस कांचन काया को देख देवता भी
24:29लालायित हो जाए उसे तुम इस घास फूस की
24:32कुटिया में नष्ट कर रही हो अ ऐसे नारी
24:36रत्न को तो किसी त्रिलोकी के राजा की
24:39पत्नी होना चाहिए
24:40था मेरे लिए तो मेरे पति ही त्रिलोकी के
24:44राजा है उनसे बढ़कर और कोई हो सकता है
24:48क्या अवश्य हो सकता
24:52है हम तुम्ह बताते हैं
25:01जिसके नाम से देवता नाग किन्नर असुर
25:04राक्षस अर्थात संसार के संपूर्ण प्राणी
25:08थर्र उठते हैं सूर्य चंद्र आदि नवग्रह
25:12जिसकी इच्छा से चलायमान होते हैं जो संसार
25:15के समस्त चराचर प्राणियों का स्वामी है
25:19जिसे देख वृक्षों के पत्ते भी भय से
25:21स्तब्ध हो जाते हैं अरे वायु भी जिसके
25:25सामने सांस नहीं ले सकती तुम तुम तो उस
25:28लंकाधिपति रावण की पत्नी होने योग्य हो
25:32ऐसे पाप पूण वचन कहते हुए तुम्ह लज्जा
25:35नहीं आती कोई महात्मा के वेश में तुम
25:38दुरात्मा हो कौन हो तुम तुम्हारा
25:42दास वही लंकेश्वर
25:53रावण हा रावण जिसे तुम्हारे कामना ने इतना
25:59आतुर कर दिया है कि स्वयं तुम्हारे द्वार
26:01पर भिक्षा मांगने आया है सीते आज तुम्हारा
26:05भाग्य उदय हो गया कल से हमारे राज महल में
26:095000 स्त्रिया पटने की भाति तुम्हारी सेवा
26:13करेंगी धूर्त तुमने यह कैसे सोच लिया कि
26:17तुम अपने वैभव का बखान करोगे और सीता
26:20तुम्हारे साथ चल देगी तुम इसी समय यहां से
26:23चले जाओ नहीं तो मेरे पति एक ही बाण में
26:26तुम्ह तुम्हारी लंका स भस्म कर
26:29देगी तुम जिस पति का मान करती हो वह तो
26:33धरती पर रंगने वाला एक मानव मात्र है हम
26:36जिन राक्षसों के राजा हैं वह तो इन मानवों
26:39को फल मूल की भाति अपना आहार समझते हैं
26:43तुम हम लोगों की शक्ति को नहीं
26:46जानती जानती हूं खर और दूषण भी तुम्हारे
26:50ही भाई थे ना जिन्ह रघुवर ने आन की आन में
26:53समाप्त कर दिया
26:55था तुम्हारा यह साहस एक गीदड़ होकर सिंघनी
26:59की कामना कर रहे हो तुम्हारा अंत समय आ
27:02गया है यदि प्राण प्यारे हो तो अभी समय है
27:06चला जा यहां से हमारा ऐसा अपमान करने का
27:09साहस आज तक किसी ने नहीं किया इसका परिणाम
27:12जानती हो और एक पतिव्रता सती की ओर ऐसी
27:16कुदृष्टि डालने की मूर्खता भी किसी ने
27:19नहीं की होगी इसका परिणाम जानते
27:22हो तेरा ही नहीं तेरे सारे कुल का सर्वनाश
27:25हो जाएगा मूर्ख हट जा सामने से फिर से उस
27:29रेखा के अंदर जाना चाहती
27:33है स्त्री एक बार अपनी मर्यादा की रेखा से
27:36बाहर आ जाए फिर उसका वापस जाना असंभव हो
27:40जाता
27:41है सीते अब तुम्हें रावण के हाथों कोई
27:45नहीं बचा
27:47सकता इसलिए चुपचाप अपनी सम्मति से मेरे
27:50साथ
27:52चलो लक्ष्मण आ
27:58मैया
27:59[हंसी]
28:00[संगीत]
28:02लक्ष्मण पुकार ले और
28:06पुकार लक्षमण इस समय व र में बहुत दूर है
28:10तुम्हारी पुकार उन तक नहीं पहुंच सकती
28:13सीते
28:28[संगीत]
28:30आ ल
28:33आ बचा रावण के हाथों तु कोई नहीं ब
28:37सकता बचा लक्ष्मण
28:43लक्ष्मण भैया
28:46[संगीत]
29:17भैया
29:18[संगीत]
29:22लक्ष्मण लक्ष्मण या आप लक्ष्मण तुम यहां
29:26क्यों चले आए सीता को अकेली छोड़कर
29:28तुम्ह मेरी आज्ञा का ध्यान नहीं मुझे
29:30क्षमा करें भैया आपकी पुकार सुनकर भाभी ने
29:33मुझे जोर देकर यहां भेज दिया जब मैंने
29:35इंकार किया तो उन्होने ऐसे मम वचन कहे कि
29:38मुझे विवश होकर य आना पड़ा य अच्छा नहीं
29:41हुआ भाई तुम्हारा कहना सत्य था व मृग के
29:44रूप में वही मारीच राक्षस था मरते मरते जब
29:47उसने मेरी आवाज बनाकर तुम्ह सहायता के लिए
29:49पुकारा तो उसके उसी प्रपंच से मैं समझ गया
29:52कि हमारे साथ छल किया गया है सीता अवश्य
29:55किसी विपत्ति में फस गई होगी लगता है व
29:58में हमें नहीं मिलेगी नहीं भैया ऐसा ना
30:00कहिए भाभी वहीं पर होंगी भगवान करे ऐसा ही
30:04हो चलो
30:09लक्ष्मण
30:11आ लक्षमण
30:14आलिया
30:17लक्ष्मण सीते मेरी बेटी सीते मैं आ रहा
30:21हूं आलिया कोई बचाओ लक्ष्मण कोई बचाओ बचाओ
30:27रुको
30:29रुको रावन
30:31रुको सीते सीते मैं आ रहा हू
30:35सीते इस पापी रावण से रक्षा कीजिए यदि आप
30:39नहीं लड़ सकते तो वन में जाक आर्य पुत्र
30:42रघुवीर और भैया लक्ष्मण को मेरी सूचना
30:44दीजिए जाइए जल्दी जाइए मेरी सहायता कीजिए
30:48तुम चिंता ना करो पुत्री मेरे जीते जी यह
30:52तुम्हे नहीं ले जा सकता रावण तुम तो बड़े
30:56वीर और पराक्रमी कहलाते हो एक निहाय
30:59स्त्री को इस प्रकार चोरों की भांती उठाने
31:02का नित करम तुम्ह शोभा नहीं देता तुम विद
31:06कुमारी को छोड़ दो य धर्म प्रायन और प्रति
31:09वता स् है इसका बलपूर्वक अपहरण करने से
31:13तुम निश्चित विनाश को प्राप्त करोगे बूढ़े
31:16जटाय रावण को शिक्षा देने आए हो जा किसी
31:20पेड़ पर बैठकर आराम कर मेरे रास्ते में
31:23मता आओ कहीं मुझे क्रोध ना आ जाए ती मैं
31:28बूढ़ा अवश्य हूं परंतु अब भी तुम जैसे
31:31अभिमानी का मान भंग कर सकता हूं सीता मेरी
31:34पुत्र वधु समान है मैं अपने प्राण देकर भी
31:37इसकी रक्षा करूंगा आज तू मेरे पंजों से
31:40मारा जाएगा
31:55[संगीत]
32:13कर
32:15[संगीत]
32:23[संगीत]
32:30[संगीत]
32:38[संगीत]
32:58[संगीत]
33:23[संगीत]
33:27आ
33:45[संगीत]
33:56[संगीत]
34:04इस पूरे निरपराध पक्षी के पर काटकर तुम
34:07अपने आप को भी समझते हो तुम्ह लज्जा आनी
34:11[हंसी]
34:17[संगीत]
34:24चाहिए सीधे
34:27[संगीत]
34:29भादी
34:32भा
34:35[संगीत]
34:40भा लक्षमण र नहीं है हो सकता हैना पर गई
34:45हो परंतु वो अकेली तो कभी नहीं जाती हो
34:47सकता है उद्यान में फूल चने गई ठीक है तुम
34:50नदी पर देखो मैं उद्यान में देखता हूं
34:53[संगीत]
35:03सीते
35:07भदी
35:11सीते
35:16हभी
35:18[प्रशंसा]
35:21सते
35:25भ सीते
35:27[संगीत]
35:41हनी
35:43सीते
35:46सीते
35:50सीते भाभी मैं जानता था लक्ष्मण कुछ अनौनी
35:55हो गई है
35:58[संगीत]
36:02[प्रशंसा]
36:09[संगीत]
36:10[प्रशंसा]
36:12[संगीत]
36:15[प्रशंसा]
36:18हे वन के वासियों यदि मेरे पति मुझे
36:22ढूंढते यहां आए न्हें आभूषण दिखा देना और
36:26कह देना मुझे रावण उठाकर ले गया
36:30है इससे कोई लाभ नहीं होगा जहां रावण
36:34तुम्हें ले जा रहा है उस स्थान का पता
36:36उन्हे कौन
36:38बताएगा निर्लज अपने ऊंचे कुल और अपनी
36:42वीरता की बड़ी बड़ी ंगे मारते थे क्या वीर
36:45पुरुष के यही लक्षण होते हैं जब पति घर
36:49में ना हो तो उसकी पत्नी को चोरों की भाती
36:51आकर चुरा कर ले जाए एक अकेली स्त्री पर
36:54आक्रमण करना ही तुम्हारी शूर वरता है
36:59मेरे स्वामी तुम्हारी तरह कार भीरो नहीं
37:02तुम मुझे आकाश पाताल कहीं पर भी छुपा लो
37:05मेरे स्वामी मेरी सहायता के लिए अवश्य
37:07आएंगे मेरे राक्षसों के सिवा किसी को आज
37:10तक यह भी पता नहीं कि लंका है कहां वहां
37:14पहुंचने से पहले तेरा पति रास्ते में भटक
37:17भटक कर मर जाएगा जिस प्रकार एक सांप की
37:21आंखें अंधेरे में भी दिखाई देती है उसी
37:23प्रकार पापी का पाप छुपाने से नहीं छिपता
37:26वृक्षों के के पत्ते पर्वतों के पत्थर और
37:29वायु की लहरें प्रकृति का कण कण मेरे
37:33रघुवर को तुम्हारे पाप मार्ग का पता
37:35बताएगी और जहां सीता होगी उसके स्वामी
37:38अवश्य वहां पहुंचेंगे इसका मुझे पूरा
37:41विश्वास है
37:43[संगीत]