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Allah Se Rabta Kaise Hota Hai? Ek Aisi Kahani Jo Dil Badal De | Sabaq Amoz Kahani | Moral Story

Asim voice · 1,862 words · 9 min read

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0:00बाबा दिल को सुकून क्यों नहीं मिलता

0:03बेटा? क्योंकि दिल दुनिया में उलझा है।

0:06अल्लाह से जुड़ा नहीं।

0:08तो अल्लाह से राबता कैसे हो? सच्चे दिल से

0:11उसे पुकारो रास्ता खुद खुल जाएगा। आखिर हम

0:15दुनिया के पीछे इतना [संगीत] क्यों भागते

0:17हैं हमें? हमें दौलत चाहिए, इज्जत चाहिए,

0:21लोगों की मोहब्बत चाहिए।

0:23लेकिन जिस जात के पास दिलों का सुकून है,

0:26हम उसी से दूर होते जा रहे हैं। हम लोगों

0:29के सामने अपनी परेशानियां बयान करते हैं,

0:31मगर अपने [संगीत] रब के सामने बैठने के

0:33लिए वक्त नहीं निकालते। हम दुनिया के

0:35दरवाजे बार-बार खटखटाते हैं। हालांकि

0:38अल्लाह का दरवाजा कभी बंद नहीं होता। हम

0:41समझते हैं कि हमारा सहारा, हमारी ताकत,

0:43हमारा माल और हमारे [संगीत] ताल्लुकात

0:45हैं। हालांकि एक लम्हा ऐसा भी आता है जब

0:48यह सब कुछ इंसान को छोड़ देता है। तब

0:51सिर्फ एक जात बाकी रहती है। अल्लाह। लेकिन

0:55खुशनसीब वो है जो मुसीबत आने से पहले ही

0:57अपने रब से ताल्लुक मजबूत कर ले।

1:01आओ मैं आप एक अल्लाह वाले नजावा की कहानी

1:04सुनाता हूं।

1:06यह एक ऐसे जमाने की बात है जब बड़े-बड़े

1:09शहर किलों से पहचाने जाते थे। बादशाह तख्त

1:12पर बैठते थे और आम लोग अपनी छोटी-छोटी

1:14बस्तियों में सादा जिंदगी गुजारते थे।

1:17इन्हीं बस्तियों में एक नौजवान रहता था

1:19जिसका नाम हारिस था। हारिस एक गरीब

1:22लकड़ाहारी का बेटा था। उसका अंदर मिट्टी

1:24का था। लिबास सादा था। और खाने के लिए

1:27अक्सर सिर्फ खुश्क रोटी और थोड़ा सा दूध

1:30होता था।

1:31लेकिन उसके घर में एक ऐसी दौलत थी जो शहर

1:34के बड़े [संगीत] ताजों के पास भी नहीं थी।

1:36अल्लाह पर यकीन। हारिस की मां हर सुबह उसे

1:39उठाते हुए कहती बेटा रिज़्क दरवाजे से नहीं

1:43आसमान [संगीत] से आता है। हारिस मुस्कुरा

1:46कर पूछता अम्मा अगर रिज़्क अल्लाह देता है

1:50तो लोग इतनी [संगीत] मेहनत क्यों करते

1:51हैं? मां कहती मेहनत इसलिए करो कि अल्लाह

1:55ने तुम्हें हाथ दिए हैं। मगर दिल का भरोसा

1:58हाथों पर नहीं हाथ बनाने वाले पर रखो। यह

2:02बात हारिस के दिल में बैठ [संगीत] गई थी।

2:04वो सुबह जंगल में लकड़ियां काटने जाता और

2:06शाम को वापस आता। रास्ते में जब कभी थक

2:10जाता तो एक दरख्त के साए [संगीत] में

2:11बैठकर आसमान को देखता और कहता या अल्लाह

2:15मैं कमजोर हूं तू ताकत वाला है। मैं

2:18मोहताज हूं तू बेनियाज है। बस मुझे अपने

2:22से दूर ना करना। हारिस के पास बहुत कुछ

2:25नहीं था। लेकिन वो अपने रब से बात करता था

2:28और यही उसकी असल दौलत थी। एक दिन उस बस्ती

2:32में एक अजीब खबर फैली। करीब की सल्तनत का

2:35बादशाह [संगीत] बीमार हो गया था। हकीम,

2:38तबीब, आमिल सब बुलाए गए। मगर बादशाह की

2:41बीमारी कम ना हुई। बादशाह ने ऐलान करवाया

2:45जो शख्स मेरी बीमारी का इलाज कर देगा, उसे

2:47इतना इनाम दिया जाएगा कि उसकी सात नस्लें

2:50[संगीत] आराम से जिंदगी गुजारेंगी।

2:53बहुत से लोग महल पहुंचे। किसी ने दवा दी।

2:56किसी ने जुड़ी बोटियां दी। किसी ने दुआएं

2:58पढ़ी। मगर बादशाह की हालत वैसी [संगीत] ही

3:01रही। एक दिन बादशाह के एक बूढ़े वजीर ने

3:04कहा हुजूर कभी-कभी जिस्म की बीमारी दवा से

3:08नहीं दिल की इस्लाह से दूर होती है।

3:11बादशाह ने [संगीत] गुस्से से पूछा तो फिर

3:13मुझे क्या करना चाहिए? वजीर ने कहा किसी

3:17ऐसे शख्स को तलाश कीजिए जिसका दिल अल्लाह

3:20के करीब हो। [संगीत] बादशाह ने हुक्म दिया

3:22कि पूरी सल्तनत में ऐसे शख्स को तलाश किया

3:25जाए। सिपाही बस्ती बस्ती घूमने लगे। आखिर

3:29एक दिन वह हारिस की बस्ती [संगीत] में

3:30पहुंचे। लोगों ने कहा यहां तो बहुत गरीब

3:34लोग हैं लेकिन एक नौजवान है जो हर वक्त

3:36अल्लाह [संगीत] को याद करता है। सिपाही

3:39हारिस के घर पहुंचे। हारिस उस वक्त अपनी

3:42मां के पास बैठा था। सिपाही ने कहा

3:44[संगीत] तुम्हें बादशाह ने महल में बुलाया

3:46है। हारिस घबरा गया। उसने पूछा मुझसे क्या

3:51गलती हो गई? सिपाही हंस कर बोला। [संगीत]

3:54गलती नहीं हुई। तुम्हें बादशाह के सामने

3:56ले जाना है। हारिस ने अपनी मां की तरफ

3:59देखा। मां ने कहा जाओ बेटा मगर याद रखना

4:03बादशाह के महल में दाखिल होना अपने रब के

4:06दरबार [संगीत] से निकलना नहीं होता। हारिस

4:09ने यह बात दिल में बिठा ली। वो सिपाहियों

4:12के साथ महल पहुंच [संगीत] गया। महल में

4:14दाखिल हुआ तो हर तरफ शानो शौकत थी।

4:16संगमरमर के फर्श तेमती परदे सोने के बर्तन

4:20और तर्जनो खादिम। हारिस ने दिल में सोचा

4:24यह सब देखकर [संगीत] भी इंसान अगर अल्लाह

4:26को भूल जाए तो इससे बड़ा नुकसान क्या

4:28होगा? उसे बादशाह [संगीत] के सामने ले

4:30जाया गया। बादशाह कमजोर हालत में तख्त पर

4:33बैठा था। उसने हारिस को देखा और हैरत से

4:35पूछा। [संगीत] क्या यही वो शख्स है? वजीर

4:39ने कहा जी हुजूर। बादशाह ने हारिस से पूछा

4:42[संगीत] क्या तुम मुझे शिफा दे सकते हो?

4:44हारिस ने सर झुका कर जवाब दिया। हुजूर

4:48शिफा मेरे हाथ में नहीं। बादशाह ने पूछा

4:51फिर तुम यहां क्यों आए हो? हारिस ने कहा

4:54क्योंकि शायद अल्लाह ने मुझे यहां भेजकर

4:56आपको एक ऐसी चीज [संगीत] याद दिलानी है जो

4:59हम सब भूल जाते हैं। बादशाह खामोश हो गया।

5:02हारिस ने आहिस्ता से कहा बादशाह सलामत

5:06इंसान सारी दुनिया का मालिक बन जाए लेकिन

5:09अगर उसका अल्लाह से राब्ता टूट जाए तो वो

5:12अंदर से फकीर [संगीत] ही रहता है। दरबार

5:15में खामोशी छा गई। बादशाह ने पहली बार गौर

5:18से उस नौजवान को देखा। फिर उसने [संगीत]

5:20पूछा और अगर अल्लाह से राब्ता टूट जाए तो

5:23उसे दोबारा कैसे कायम किया जाए? हारिस ने

5:26जवाब देने के बजाय सिर्फ इतना कहा हुजूर

5:29इसके लिए बादशाह बनना जरूरी नहीं सिर्फ

5:32बंदा बनना जरूरी है। यह अल्फाज़ बादशाह के

5:36दिल पर ऐसे लगे [संगीत] जैसे किसी ने

5:37बरसों से बंद दरवाजे पर दस्तक दी हो। मगर

5:40हारिस को अभी मालूम नहीं था कि इस रात महल

5:43में एक ऐसा वाकया होने वाला है जो ना

5:45सिर्फ बादशाह की जिंदगी [संगीत] बदल देगा

5:47बल्कि खुद हारिस को भी यह सिखा देगा कि

5:50अल्लाह से राबता [संगीत] सिर्फ जुबान से

5:52अल्लाह का नाम लेने का नहीं बल्कि हर हाल

5:55में अपने रब पर भरोसा रखने का नाम है। रात

5:58गहरी हो चुकी थी। माल के तमाम चिराग रोशन

6:02थे। मगर बादशाह की आंखों में नींद नहीं

6:04थी। हारिस के अल्फाज़ बार-बार उसके कानों

6:07में गूंज रहे थे। बादशाह बनना जरूरी नहीं

6:10सिर्फ बंदा बनना जरूरी है। [संगीत] आधी

6:13रात के करीब बादशाह ने अपने सब खादिमों को

6:15जाने का हुक्म दिया। वो पहली बार अपने वसी

6:18महल में बिल्कुल अकेला बैठा था। उसने

6:21आसमान की तरफ देखा और आहिस्ता से कहा या

6:24अल्लाह अगर मैंने तुझे [संगीत] भुला दिया

6:27तो क्या तू मुझे अब भी याद रखता है? उसकी

6:31आंखों से आंसू निकल आए। उसी वक्त हारिस

6:33दरवाजे के बाहर खड़ा था। [संगीत] बादशाह

6:35ने उसे अंदर बुलाया और कहा हारिस मुझे दुआ

6:39करना नहीं [संगीत] आती। हारिस ने जवाब

6:42दिया दुआ के लिए खूबसूरत अल्फाज नहीं

6:45[संगीत] सच्चा दिल चाहिए। बादशाह ने हाथ

6:48उठाए। कई लम्हे खामोश रहा। फिर बोला या

6:52अल्लाह मैंने सारी जिंदगी लोगों से इज्जत

6:55मांगी। तुझसे नहीं। [संगीत]

6:57मैंने अपने खजाने भरे। मगर अपना दिल खाली

7:00छोड़ दिया। आज पहली बार तेरे सामने कुछ

7:04मांग रहा हूं। मुझे अपने करीब कर ले।

7:07हारिस खामोशी से खड़ा रहा। रात गुजर

7:10[संगीत] गई। सुबह हुई तो बादशाह ने आंख

7:12खोली। उसके जिस्म की कमजोरी अभी मुकम्मल

7:15खत्म नहीं हुई थी। लेकिन दिल में अजीब सा

7:17इत्मीनान था। उसने कहा हारिस आज मुझे शिफा

7:22[संगीत] मिले या ना मिले। मुझे लगता है

7:25मैंने वो चीज पाली है जिसे मैं पर बरसों

7:28से तलाश कर रहा था। हारिस ने कहा हुजूर

7:31[संगीत]

7:32शायद यही अल्लाह से राबते की पहली निशानी

7:35है कि इंसान अपनी मुश्किल [संगीत] में भी

7:37अपने रब को पहचान ले। बादशाह ने उसी दिन

7:40हुक्म दिया कि माल के खजाने से गरीबों के

7:42लिए राशन तकसीम किया जाए। मगर कहानी अभी

7:45खत्म नहीं हुई थी। [संगीत] चंद दिन बादशाह

7:47सेहतियाब हो गया। उसने हारिस को बहुत

7:50संभाल देना चाहा। हारिस ने सिर्फ इतना

7:53कहा। हुजूर मुझे इतना [संगीत] ही दीजिए

7:56जिससे मेरी जरूरत पूरी हो जाए। बाकी किसी

7:59यतीम बेवा या मोहताज को दे दीजिए। बादशाह

8:02हैरान रह गया। उसने पूछा तुम्हें दौलत की

8:06ख्वाहिश नहीं? [संगीत] हारिस मुस्कुराया

8:09दौलत बुरी नहीं हुजूर लेकिन अगर दौलत दिल

8:12में आ जाए तो इंसान अपने रब को भूल जाता

8:15है। बादशाह ने सर झुका लिया। उस दिन उसे

8:19समझ आ गया कि अल्लाह से राब्ता मजबूत हो

8:21जाए तो इंसान दुनिया को छोड़ता नहीं बल्कि

8:24दुनिया को अपने दिल [संगीत] से निकाल देता

8:26है। और हारिस जब वापस अपनी बस्ती की तरफ

8:29रवाना हुआ तो उसे अपनी मां के अल्फाज

8:31[संगीत] याद आ रहे थे। दिल का भरोसा हाथों

8:34पर नहीं हाथ बनाने वाले पर रखो। [संगीत]

8:38मगर हारिस नहीं जानता था कि वापसी के

8:40रास्ते में उसे एक ऐसी आजमाइश का सामना

8:42[संगीत] करना है जहां उसे अपने उसी यकीन

8:45को साबित करना होगा। हारिस अभी अपनी बस्ती

8:47से कुछ दूर ही पहुंचा था कि उसे रास्ते

8:49में एक बूढ़ा फकीर नजर आया। फकीर भूख से

8:52कमजोर था। हारिस के पास बादशाह की तरफ से

8:55दिया हुआ

8:55[संगीत]

8:55थोड़ा सा माल था। उसने बगैर सोचे अपना

8:58खाना और उस माल का बड़ा हिस्सा फकीर को दे

9:01दिया। फकीर ने हैरत से पूछा बेटा तुमने

9:05अपना हिस्सा भी दे दिया। अब तुम क्या

9:07खाओगे? [संगीत] हारिस मुस्कुराया और बोला

9:10जिस अल्लाह ने आज तक मुझे खिलाया है वो कल

9:13भी खिला देगा। वो आगे बढ़ गया। [संगीत]

9:16कुछ ही देर बाद बस्ती के एक शख्स ने उसे

9:18आवाज दी। आरिस तुम्हारे घर में तुम्हारी

9:21मां बहुत बीमार है। फौरन चलो। हारिस

9:23[संगीत] के कदम रुक गए। वो आसमान की तरफ

9:26देखकर बोला या अल्लाह अब मेरा सहारा भी तो

9:30है और उम्मीद भी दो। [संगीत] वो घर पहुंचा

9:33तो मां बिस्तर पर थी। हारिस उनके पास बैठ

9:36गया। मां [संगीत] ने कमजोर सी मुस्कुराहट

9:38के साथ कहा बेटा घबराना नहीं याद रखो।

9:43अल्लाह से [संगीत] राब्ता सिर्फ उस वक्त

9:45नहीं होता जब हमें कुछ चाहिए हो। असल

9:47राब्ता यह है कि जो [संगीत] भी फैसला

9:49अल्लाह करे दिल उसे कबूल कर ले। हारिस की

9:53आंखों में आंसू आ गए। उसने मां का हाथ

9:55पकड़ कर कहा अम्मा आज आपने मुझे सबसे बड़ी

9:59दौलत [संगीत] दे दी। और उस दिन हारिस को

10:02समझ आ गया। जिस इंसान का ताल्लुक अल्लाह

10:04से मजबूत हो वो मुश्किल में भी टूटता

10:07नहीं। क्योंकि उसे मालूम होता है कि उसका

10:09रब उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। दुनिया की

10:13दौलत खत्म हो सकती है। लोग साथ छोड़

10:15[संगीत] सकते हैं। हालात बदल सकते हैं।

10:18लेकिन अल्लाह से राब्ता कायम हो जाए तो

10:20दिल के अंदर एक ऐसी दौलत पैदा हो जाती है

10:23जिसे दुनिया की [संगीत] कोई ताकत छीन नहीं

10:25सकती। इस कहानी से हमें यह सबक मिलता है

10:28कि दुनिया को छोड़ना नहीं। [संगीत] मगर

10:30उसे अपनी जिंदगी का मकसद भी नहीं बनाना

10:32चाहिए। हमें दुनिया के काम करते हुए अपने

10:35दिल को अल्लाह से जोड़कर [संगीत] रखना

10:37चाहिए। दौलत, इज्जत और कामयाबी सब आरजी

10:41है। असल कामयाबी अल्लाह की रजा है।

10:43[संगीत]

10:44खुशी हो या गम हर हाल में अल्लाह को याद

10:47करना चाहिए। अगर हम अल्लाह से दूर हो गए

10:50हैं तो मायूस ना हो। उसकी तरफ वापसी का

10:52दरवाजा हमेशा खुला है। क्योंकि दुनिया

10:55खत्म हो जाएगी। मगर अल्लाह से कायम किया

10:58हुआ ताल्लुक ही हमारी असल दौलत है।

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