Full transcript
0:00बाबा दिल को सुकून क्यों नहीं मिलता
0:03बेटा? क्योंकि दिल दुनिया में उलझा है।
0:06अल्लाह से जुड़ा नहीं।
0:08तो अल्लाह से राबता कैसे हो? सच्चे दिल से
0:11उसे पुकारो रास्ता खुद खुल जाएगा। आखिर हम
0:15दुनिया के पीछे इतना [संगीत] क्यों भागते
0:17हैं हमें? हमें दौलत चाहिए, इज्जत चाहिए,
0:21लोगों की मोहब्बत चाहिए।
0:23लेकिन जिस जात के पास दिलों का सुकून है,
0:26हम उसी से दूर होते जा रहे हैं। हम लोगों
0:29के सामने अपनी परेशानियां बयान करते हैं,
0:31मगर अपने [संगीत] रब के सामने बैठने के
0:33लिए वक्त नहीं निकालते। हम दुनिया के
0:35दरवाजे बार-बार खटखटाते हैं। हालांकि
0:38अल्लाह का दरवाजा कभी बंद नहीं होता। हम
0:41समझते हैं कि हमारा सहारा, हमारी ताकत,
0:43हमारा माल और हमारे [संगीत] ताल्लुकात
0:45हैं। हालांकि एक लम्हा ऐसा भी आता है जब
0:48यह सब कुछ इंसान को छोड़ देता है। तब
0:51सिर्फ एक जात बाकी रहती है। अल्लाह। लेकिन
0:55खुशनसीब वो है जो मुसीबत आने से पहले ही
0:57अपने रब से ताल्लुक मजबूत कर ले।
1:01आओ मैं आप एक अल्लाह वाले नजावा की कहानी
1:04सुनाता हूं।
1:06यह एक ऐसे जमाने की बात है जब बड़े-बड़े
1:09शहर किलों से पहचाने जाते थे। बादशाह तख्त
1:12पर बैठते थे और आम लोग अपनी छोटी-छोटी
1:14बस्तियों में सादा जिंदगी गुजारते थे।
1:17इन्हीं बस्तियों में एक नौजवान रहता था
1:19जिसका नाम हारिस था। हारिस एक गरीब
1:22लकड़ाहारी का बेटा था। उसका अंदर मिट्टी
1:24का था। लिबास सादा था। और खाने के लिए
1:27अक्सर सिर्फ खुश्क रोटी और थोड़ा सा दूध
1:30होता था।
1:31लेकिन उसके घर में एक ऐसी दौलत थी जो शहर
1:34के बड़े [संगीत] ताजों के पास भी नहीं थी।
1:36अल्लाह पर यकीन। हारिस की मां हर सुबह उसे
1:39उठाते हुए कहती बेटा रिज़्क दरवाजे से नहीं
1:43आसमान [संगीत] से आता है। हारिस मुस्कुरा
1:46कर पूछता अम्मा अगर रिज़्क अल्लाह देता है
1:50तो लोग इतनी [संगीत] मेहनत क्यों करते
1:51हैं? मां कहती मेहनत इसलिए करो कि अल्लाह
1:55ने तुम्हें हाथ दिए हैं। मगर दिल का भरोसा
1:58हाथों पर नहीं हाथ बनाने वाले पर रखो। यह
2:02बात हारिस के दिल में बैठ [संगीत] गई थी।
2:04वो सुबह जंगल में लकड़ियां काटने जाता और
2:06शाम को वापस आता। रास्ते में जब कभी थक
2:10जाता तो एक दरख्त के साए [संगीत] में
2:11बैठकर आसमान को देखता और कहता या अल्लाह
2:15मैं कमजोर हूं तू ताकत वाला है। मैं
2:18मोहताज हूं तू बेनियाज है। बस मुझे अपने
2:22से दूर ना करना। हारिस के पास बहुत कुछ
2:25नहीं था। लेकिन वो अपने रब से बात करता था
2:28और यही उसकी असल दौलत थी। एक दिन उस बस्ती
2:32में एक अजीब खबर फैली। करीब की सल्तनत का
2:35बादशाह [संगीत] बीमार हो गया था। हकीम,
2:38तबीब, आमिल सब बुलाए गए। मगर बादशाह की
2:41बीमारी कम ना हुई। बादशाह ने ऐलान करवाया
2:45जो शख्स मेरी बीमारी का इलाज कर देगा, उसे
2:47इतना इनाम दिया जाएगा कि उसकी सात नस्लें
2:50[संगीत] आराम से जिंदगी गुजारेंगी।
2:53बहुत से लोग महल पहुंचे। किसी ने दवा दी।
2:56किसी ने जुड़ी बोटियां दी। किसी ने दुआएं
2:58पढ़ी। मगर बादशाह की हालत वैसी [संगीत] ही
3:01रही। एक दिन बादशाह के एक बूढ़े वजीर ने
3:04कहा हुजूर कभी-कभी जिस्म की बीमारी दवा से
3:08नहीं दिल की इस्लाह से दूर होती है।
3:11बादशाह ने [संगीत] गुस्से से पूछा तो फिर
3:13मुझे क्या करना चाहिए? वजीर ने कहा किसी
3:17ऐसे शख्स को तलाश कीजिए जिसका दिल अल्लाह
3:20के करीब हो। [संगीत] बादशाह ने हुक्म दिया
3:22कि पूरी सल्तनत में ऐसे शख्स को तलाश किया
3:25जाए। सिपाही बस्ती बस्ती घूमने लगे। आखिर
3:29एक दिन वह हारिस की बस्ती [संगीत] में
3:30पहुंचे। लोगों ने कहा यहां तो बहुत गरीब
3:34लोग हैं लेकिन एक नौजवान है जो हर वक्त
3:36अल्लाह [संगीत] को याद करता है। सिपाही
3:39हारिस के घर पहुंचे। हारिस उस वक्त अपनी
3:42मां के पास बैठा था। सिपाही ने कहा
3:44[संगीत] तुम्हें बादशाह ने महल में बुलाया
3:46है। हारिस घबरा गया। उसने पूछा मुझसे क्या
3:51गलती हो गई? सिपाही हंस कर बोला। [संगीत]
3:54गलती नहीं हुई। तुम्हें बादशाह के सामने
3:56ले जाना है। हारिस ने अपनी मां की तरफ
3:59देखा। मां ने कहा जाओ बेटा मगर याद रखना
4:03बादशाह के महल में दाखिल होना अपने रब के
4:06दरबार [संगीत] से निकलना नहीं होता। हारिस
4:09ने यह बात दिल में बिठा ली। वो सिपाहियों
4:12के साथ महल पहुंच [संगीत] गया। महल में
4:14दाखिल हुआ तो हर तरफ शानो शौकत थी।
4:16संगमरमर के फर्श तेमती परदे सोने के बर्तन
4:20और तर्जनो खादिम। हारिस ने दिल में सोचा
4:24यह सब देखकर [संगीत] भी इंसान अगर अल्लाह
4:26को भूल जाए तो इससे बड़ा नुकसान क्या
4:28होगा? उसे बादशाह [संगीत] के सामने ले
4:30जाया गया। बादशाह कमजोर हालत में तख्त पर
4:33बैठा था। उसने हारिस को देखा और हैरत से
4:35पूछा। [संगीत] क्या यही वो शख्स है? वजीर
4:39ने कहा जी हुजूर। बादशाह ने हारिस से पूछा
4:42[संगीत] क्या तुम मुझे शिफा दे सकते हो?
4:44हारिस ने सर झुका कर जवाब दिया। हुजूर
4:48शिफा मेरे हाथ में नहीं। बादशाह ने पूछा
4:51फिर तुम यहां क्यों आए हो? हारिस ने कहा
4:54क्योंकि शायद अल्लाह ने मुझे यहां भेजकर
4:56आपको एक ऐसी चीज [संगीत] याद दिलानी है जो
4:59हम सब भूल जाते हैं। बादशाह खामोश हो गया।
5:02हारिस ने आहिस्ता से कहा बादशाह सलामत
5:06इंसान सारी दुनिया का मालिक बन जाए लेकिन
5:09अगर उसका अल्लाह से राब्ता टूट जाए तो वो
5:12अंदर से फकीर [संगीत] ही रहता है। दरबार
5:15में खामोशी छा गई। बादशाह ने पहली बार गौर
5:18से उस नौजवान को देखा। फिर उसने [संगीत]
5:20पूछा और अगर अल्लाह से राब्ता टूट जाए तो
5:23उसे दोबारा कैसे कायम किया जाए? हारिस ने
5:26जवाब देने के बजाय सिर्फ इतना कहा हुजूर
5:29इसके लिए बादशाह बनना जरूरी नहीं सिर्फ
5:32बंदा बनना जरूरी है। यह अल्फाज़ बादशाह के
5:36दिल पर ऐसे लगे [संगीत] जैसे किसी ने
5:37बरसों से बंद दरवाजे पर दस्तक दी हो। मगर
5:40हारिस को अभी मालूम नहीं था कि इस रात महल
5:43में एक ऐसा वाकया होने वाला है जो ना
5:45सिर्फ बादशाह की जिंदगी [संगीत] बदल देगा
5:47बल्कि खुद हारिस को भी यह सिखा देगा कि
5:50अल्लाह से राबता [संगीत] सिर्फ जुबान से
5:52अल्लाह का नाम लेने का नहीं बल्कि हर हाल
5:55में अपने रब पर भरोसा रखने का नाम है। रात
5:58गहरी हो चुकी थी। माल के तमाम चिराग रोशन
6:02थे। मगर बादशाह की आंखों में नींद नहीं
6:04थी। हारिस के अल्फाज़ बार-बार उसके कानों
6:07में गूंज रहे थे। बादशाह बनना जरूरी नहीं
6:10सिर्फ बंदा बनना जरूरी है। [संगीत] आधी
6:13रात के करीब बादशाह ने अपने सब खादिमों को
6:15जाने का हुक्म दिया। वो पहली बार अपने वसी
6:18महल में बिल्कुल अकेला बैठा था। उसने
6:21आसमान की तरफ देखा और आहिस्ता से कहा या
6:24अल्लाह अगर मैंने तुझे [संगीत] भुला दिया
6:27तो क्या तू मुझे अब भी याद रखता है? उसकी
6:31आंखों से आंसू निकल आए। उसी वक्त हारिस
6:33दरवाजे के बाहर खड़ा था। [संगीत] बादशाह
6:35ने उसे अंदर बुलाया और कहा हारिस मुझे दुआ
6:39करना नहीं [संगीत] आती। हारिस ने जवाब
6:42दिया दुआ के लिए खूबसूरत अल्फाज नहीं
6:45[संगीत] सच्चा दिल चाहिए। बादशाह ने हाथ
6:48उठाए। कई लम्हे खामोश रहा। फिर बोला या
6:52अल्लाह मैंने सारी जिंदगी लोगों से इज्जत
6:55मांगी। तुझसे नहीं। [संगीत]
6:57मैंने अपने खजाने भरे। मगर अपना दिल खाली
7:00छोड़ दिया। आज पहली बार तेरे सामने कुछ
7:04मांग रहा हूं। मुझे अपने करीब कर ले।
7:07हारिस खामोशी से खड़ा रहा। रात गुजर
7:10[संगीत] गई। सुबह हुई तो बादशाह ने आंख
7:12खोली। उसके जिस्म की कमजोरी अभी मुकम्मल
7:15खत्म नहीं हुई थी। लेकिन दिल में अजीब सा
7:17इत्मीनान था। उसने कहा हारिस आज मुझे शिफा
7:22[संगीत] मिले या ना मिले। मुझे लगता है
7:25मैंने वो चीज पाली है जिसे मैं पर बरसों
7:28से तलाश कर रहा था। हारिस ने कहा हुजूर
7:31[संगीत]
7:32शायद यही अल्लाह से राबते की पहली निशानी
7:35है कि इंसान अपनी मुश्किल [संगीत] में भी
7:37अपने रब को पहचान ले। बादशाह ने उसी दिन
7:40हुक्म दिया कि माल के खजाने से गरीबों के
7:42लिए राशन तकसीम किया जाए। मगर कहानी अभी
7:45खत्म नहीं हुई थी। [संगीत] चंद दिन बादशाह
7:47सेहतियाब हो गया। उसने हारिस को बहुत
7:50संभाल देना चाहा। हारिस ने सिर्फ इतना
7:53कहा। हुजूर मुझे इतना [संगीत] ही दीजिए
7:56जिससे मेरी जरूरत पूरी हो जाए। बाकी किसी
7:59यतीम बेवा या मोहताज को दे दीजिए। बादशाह
8:02हैरान रह गया। उसने पूछा तुम्हें दौलत की
8:06ख्वाहिश नहीं? [संगीत] हारिस मुस्कुराया
8:09दौलत बुरी नहीं हुजूर लेकिन अगर दौलत दिल
8:12में आ जाए तो इंसान अपने रब को भूल जाता
8:15है। बादशाह ने सर झुका लिया। उस दिन उसे
8:19समझ आ गया कि अल्लाह से राब्ता मजबूत हो
8:21जाए तो इंसान दुनिया को छोड़ता नहीं बल्कि
8:24दुनिया को अपने दिल [संगीत] से निकाल देता
8:26है। और हारिस जब वापस अपनी बस्ती की तरफ
8:29रवाना हुआ तो उसे अपनी मां के अल्फाज
8:31[संगीत] याद आ रहे थे। दिल का भरोसा हाथों
8:34पर नहीं हाथ बनाने वाले पर रखो। [संगीत]
8:38मगर हारिस नहीं जानता था कि वापसी के
8:40रास्ते में उसे एक ऐसी आजमाइश का सामना
8:42[संगीत] करना है जहां उसे अपने उसी यकीन
8:45को साबित करना होगा। हारिस अभी अपनी बस्ती
8:47से कुछ दूर ही पहुंचा था कि उसे रास्ते
8:49में एक बूढ़ा फकीर नजर आया। फकीर भूख से
8:52कमजोर था। हारिस के पास बादशाह की तरफ से
8:55दिया हुआ
8:55[संगीत]
8:55थोड़ा सा माल था। उसने बगैर सोचे अपना
8:58खाना और उस माल का बड़ा हिस्सा फकीर को दे
9:01दिया। फकीर ने हैरत से पूछा बेटा तुमने
9:05अपना हिस्सा भी दे दिया। अब तुम क्या
9:07खाओगे? [संगीत] हारिस मुस्कुराया और बोला
9:10जिस अल्लाह ने आज तक मुझे खिलाया है वो कल
9:13भी खिला देगा। वो आगे बढ़ गया। [संगीत]
9:16कुछ ही देर बाद बस्ती के एक शख्स ने उसे
9:18आवाज दी। आरिस तुम्हारे घर में तुम्हारी
9:21मां बहुत बीमार है। फौरन चलो। हारिस
9:23[संगीत] के कदम रुक गए। वो आसमान की तरफ
9:26देखकर बोला या अल्लाह अब मेरा सहारा भी तो
9:30है और उम्मीद भी दो। [संगीत] वो घर पहुंचा
9:33तो मां बिस्तर पर थी। हारिस उनके पास बैठ
9:36गया। मां [संगीत] ने कमजोर सी मुस्कुराहट
9:38के साथ कहा बेटा घबराना नहीं याद रखो।
9:43अल्लाह से [संगीत] राब्ता सिर्फ उस वक्त
9:45नहीं होता जब हमें कुछ चाहिए हो। असल
9:47राब्ता यह है कि जो [संगीत] भी फैसला
9:49अल्लाह करे दिल उसे कबूल कर ले। हारिस की
9:53आंखों में आंसू आ गए। उसने मां का हाथ
9:55पकड़ कर कहा अम्मा आज आपने मुझे सबसे बड़ी
9:59दौलत [संगीत] दे दी। और उस दिन हारिस को
10:02समझ आ गया। जिस इंसान का ताल्लुक अल्लाह
10:04से मजबूत हो वो मुश्किल में भी टूटता
10:07नहीं। क्योंकि उसे मालूम होता है कि उसका
10:09रब उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। दुनिया की
10:13दौलत खत्म हो सकती है। लोग साथ छोड़
10:15[संगीत] सकते हैं। हालात बदल सकते हैं।
10:18लेकिन अल्लाह से राब्ता कायम हो जाए तो
10:20दिल के अंदर एक ऐसी दौलत पैदा हो जाती है
10:23जिसे दुनिया की [संगीत] कोई ताकत छीन नहीं
10:25सकती। इस कहानी से हमें यह सबक मिलता है
10:28कि दुनिया को छोड़ना नहीं। [संगीत] मगर
10:30उसे अपनी जिंदगी का मकसद भी नहीं बनाना
10:32चाहिए। हमें दुनिया के काम करते हुए अपने
10:35दिल को अल्लाह से जोड़कर [संगीत] रखना
10:37चाहिए। दौलत, इज्जत और कामयाबी सब आरजी
10:41है। असल कामयाबी अल्लाह की रजा है।
10:43[संगीत]
10:44खुशी हो या गम हर हाल में अल्लाह को याद
10:47करना चाहिए। अगर हम अल्लाह से दूर हो गए
10:50हैं तो मायूस ना हो। उसकी तरफ वापसी का
10:52दरवाजा हमेशा खुला है। क्योंकि दुनिया
10:55खत्म हो जाएगी। मगर अल्लाह से कायम किया
10:58हुआ ताल्लुक ही हमारी असल दौलत है।