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0:00किसी भी रिलेशन में बने रहना जस्ट किसी को
0:02दुख ना पहुंचे या चोट ना लगे ऐसा रहना
0:05क्या ईमानदारी होगी
0:07यह दिल क्या होता है वो वाली चीज कैसे दुख
0:10है उसको
0:12ये
0:13ये क्या है कुछ है ये अच्छा कितनों की
0:17जिंदगी में ऐसे लोग हैं जिनसे सच बोल दिया
0:19तो उनकी फीलिंग्स हर्ट हो जाएंगी इतने
0:22सारे हाथ ओ
0:28और इनमें से कई लोग एक दूसरे की जिंदगी
0:30में होंगे।
0:34ओ
0:38कोई रिश्ता है जो सच को झेल सके। बन रहे
0:41हैं बहुत क्रांतिकारी दुनिया में पर अपनी
0:43निजी जिंदगी में
0:50किसी भी रिलेशन में बने रहना जस्ट किसी को
0:53दुख ना पहुंचे या चोट ना लगे। ऐसा रहना
0:57क्या ईमानदारी होगी? क्या ये जो मोनोगैमी
1:01है लाइफ लॉन्ग मोनोगैमी ऐसा कुछ होता भी
1:04है या फिर जस्ट कन्वीनियंस या डर होता है?
1:08ये कुछ संशय बार-बार आते हैं।
1:11आप पूछ लो। आपने 1 मिनट में पूछ लिया। हम
1:14अब जो मैं आधे घंटे बोलूंगा उसकी गाली
1:16मुझे पड़ेगी। है ना?
1:20अरे जो पूछना था पूछ लेते हो। उसमें ये
1:21मोनोगैमी लाना जरूरी था। हम
1:27पूरे भारत भर के लोकधर्मी
1:31वैसे ही मरे जा रहे हैं हार्ट अटैक से कि
1:33ये हमारी सब महिलाओं को चरित्रहीन और
1:35भ्रष्ट करे दे रहा है। ऊपर से मोनोगैमी के
1:38खिलाफ और बुलवा दीजिए मुझसे।
1:44आप कह रहे हैं कि किसी का दिल ना टूटे
1:47इसके लिए क्या किसी रिश्ते में बने रहना
1:49ईमानदारी है। ईमानदारी या बेईमानी की बात
1:53तो तब आएगी ना जब पहले कोई घटना संभव हो
1:57वैसी
1:59आप अगर बदल गए हो
2:02तो आपका रिश्ता बदल गया।
2:06आप लाख कोशिश कर लो। रिश्ता वैसा रह ही
2:08नहीं जाएगा जैसा था अंधेरे में।
2:14रह ही नहीं जाएगा।
2:16जो देखने लग गया
2:20वो अंधेरे में बनाए रिश्ते को पुरानी तरह
2:23ही अब कैसे निभाएगा? कैसे?
2:27बोलो कैसे?
2:33अंधेरा कमरा था। आप घुस गई। वहां कोई था।
2:35आपको लगा पिया जी हैं और जाकर के लिपट गई।
2:39तभी किसी ने बत्ती जला दी।
2:43वो निकला टिंकू लाल।
2:45क्या रिश्ता वैसे ही रह जाएगा? प्रकाश सब
2:48बदल देता है।
2:51अंधेरे में बनाए गए रिश्ते प्रकाश की धार
2:56बर्दाश्त नहीं कर पाते।
3:01यह धमकी दी जा रही है मुझे।
3:08[प्रशंसा]
3:11ये सोच समझ के बोलो।
3:17अब दिल टूटने की बात कि हमें सब समझ में आ
3:20गया है।
3:23पर अगर समझदारी दिखाएंगे तो किसी का दिल
3:26टूट जाएगा।
3:28ये दिल क्या होता है?
3:31दिल क्या होता है?
3:33वो वाली चीज कैसे दिखाते हैं उसको?
3:37ये
3:38ये क्या है? कुछ है ये?
3:42ये क्या है?
3:44क्या है ये? कुछ है? कुछ है नहीं तो
3:48टूटेगा क्या?
3:50कहीं होता है?
3:53कहीं होता है?
3:56कुछ भी है क्या? ये
3:59तो दिल माने क्या? मान्यता है ना मान्यता
4:04मान्यता
4:05अहंकार जनित और अहंकार केंद्रित मान्यता
4:08जिसको आप दिल का नाम देते हो पर इतने
4:11फिल्मी गाने सुने इतनी शायरी पढ़ी कि लगा
4:14कि दिल भी कुछ होता है। दिल क्या होता है?
4:16गीता क्या बोल रही है? गीता में एक दिल भी
4:18आता है। आत्मा, अहम, दिल और प्रकृति।
4:23ऐसा सिखा है आपने।
4:25ये ये है। दो चार श्लोक बताइए जिसमें दिल
4:29का भी जिक्र हो। उर्दू का ही श्लोक बता
4:31दो।
4:36है कोई जहां पे दिल की भी बात हो।
4:40यह बॉलीवुड का कमाल है। दिल
4:47दिल ना टूटे माने आप बस यही कह रहे हो कि
4:50किसी ने मुझे लेकर कुछ धारणा बना रखी है।
4:54किसी की मुझको लेकर कोई बिलीफ है। जो कि
4:59जाहिर है झूठी है।
5:01पर मैं चाहती हूं ना टूटे। तो ले देकर आप
5:04क्या बोल रही हैं? आप कह रही है उसकी एक
5:07झूठी बिलीफ है।
5:09और मैं नहीं चाहती कि उसकी झूठी बिलीफ
5:12टूटे। आप उसकी दोस्त हैं कि दुश्मन हैं।
5:15जल्दी बोलिए।
5:17तो दिल का मतलब ही अगर झूठी मान्यता है और
5:20फालतू अरमान यही है ना? अगर दिल का मतलब
5:24ही यही है तो दिल तो जितनी जल्दी हो सके।
5:29सबसे पहले अपना
5:32सबसे पहले अपना। अध्यात्म का और काम ही
5:35क्या है? दिल तोड़ना। दिल विल प्यार मैं
5:38क्या जानू रे
5:41महावाक्य है ये अध्यात्म का
5:46तू मेरा दिल है तू मेरा जिगर है अध्यात्म
5:50में ये सब होता है जिगर
5:53अमलाशय मलाशय
5:55यकृत
5:57उपनिषद बोल रहे हैं
6:00कि तत्व मसी और तत माने किडनी
6:05है ऐसा
6:07हमारे गानों में यह सब होता है। उसमें सब
6:09कुछ आ जाता है। तू मेरा गला है, तू मेरी
6:11जुबान है।
6:15और अगर शरीर के अंगों से ही उसका नाता
6:17दिखाना है तो सचमुच शरीर के जिस अंग से
6:20उसका नाता है, उसका नाम कभी नहीं लेते।
6:24असली बात छुपाए बैठे हैं। बाकी सब कुछ तू
6:28मेरी मूछ का बाल है।
6:37दिल टूट जाएगा माने क्या अहंकार ना स्वयं
6:42को जानता ना दूसरे को जानता जैसे अपनी एक
6:46झूठी छवि बना रखी है वैसे ही उसकी भी एक
6:48झूठी छवि बना रखी है और आप चाहती हैं कि
6:51झूठी छवि चलती रहे
6:54इससे किसका लाभ हो रहा है
6:57किसका
7:00बोलो ना किसका
7:11जो अपनी सच्चाई को दूसरे से छुपा रहा है
7:21वो दूसरे का दिल टूटने से भले बचा रहा हो
7:24पर उसकी जिंदगी तोड़ रहा है।
7:31और रिश्ते हमारे सारे ही ऐसे होते हैं
7:33जिसमें अपनी सच्चाई बता दो तो दिल ही नहीं
7:35रिश्ता भी टूट जाए।
7:39हम सब जानते हैं कि हमारे संबंधों में कौन
7:42से सवाल हैं जो कभी नहीं पूछे जाने चाहिए।
7:46और वो सवाल अगर पूछ दिए गए वो मुद्दा वो
7:50चर्चा
7:52अगर छिड़ गई वो चर्चा तो गड़बड़ हो जाएगी।
7:55हो जाएगी ना? हम सब जानते हैं कि कौन सी
7:58बात कौन सी सच्चाई अगर दूसरे को बता दी तो
8:02उसका दिल टूटेगा तो बताओ ही मत। वास्तव
8:06में पेशेवर लोग ये जो रिलेशनशिप
8:08एक्सपर्ट्स होते हैं यह सलाह भी यही देते
8:10हैं कि कुछ बातें ना अपने पार्टनर को कहीं
8:12बतानी नहीं चाहिए। ना पार्टनर को ना
8:14पेरेंट्स को किसी को नहीं बतानी चाहिए। और
8:17कुछ बातें होती हैं जो पेरेंट्स को बता दो
8:19पर पार्टनर को नहीं बताओ। कुछ बातें हैं
8:20जो पार्टनर को बताओ। पेरेंट्स को कुछ
8:22बातें होती है सिर्फ फ्रेंड्स को बताओ और
8:23किसी को नहीं बताओ।
8:26माने कुल मिला के एक-एक रिश्ता
8:30झूठ पर ही टिका हुआ है।
8:38सचमुच किसी का भला चाहते हो।
8:42तो उसको गलतफहमी में मत रखो।
8:49तथ्य तथ्य है। यथार्थ यथार्थ है।
8:56वो न्यूट्रल होता है। ना किसी का अच्छा ना
8:59किसी का बुरा।
9:02वो बस है।
9:05वो सत्य के बिल्कुल निकट की चीज है। वो वो
9:08वो व्यवहार
9:11से ऊपर ले जाता है परमार्थ में।
9:18उसी को छुपा रहे हो। और इस छुपा छुपी को
9:21रिश्ते की बुनियाद बना रहे हो कि उसका दिल
9:25टूट जाएगा। उसकी भावनाएं आहत हो जाएंगी।
9:28क्या मेरी फीलिंग्स की कोई कदर नहीं?
9:32मत बताओ मुझे वो सच जिससे मेरी फीलिंग्स
9:35हर्ट होती हो। अच्छा कितने लोग ऐसे ही
9:37हैं? सही से हाथ खड़े करो। जल्दी से करो।
9:39मत बताओ मुझे वो सच जिससे मेरी फीलिंग्स
9:42हर्ट होती हो।
9:56मैं नहीं ले रहा गीता से। [हंसी]
10:08अच्छा छोड़ो। तुम ऐसे नहीं हो। ठीक है।
10:12तुम तो
10:14महामानव हो।
10:18देवाधिदेव हो। अच्छा कितनों की जिंदगी में
10:22ऐसे लोग हैं जिनसे सच बोल दिया तो उनकी
10:24फीलिंग्स हर्ट हो जाएंगी। इतने सारे हाथ
10:32और इनमें से कई लोग एक दूसरे की जिंदगी
10:34में होंगे।
10:38हम हर्ट नहीं होते पर हम झूठ इसलिए बोलते
10:40हैं क्योंकि वो हर्ट हो जाएगा। और यही बात
10:44वो भी बोल रहा है।
11:03एक कहानी थी अगिनखोर एक आध बार पहले भी
11:08उसका जिक्र करा है बंगाली की कहानी है
11:13तो उसमें एक
11:20फायर ब्रांड बिल्कुल क्रांतिकारी
11:23कम्युनिस्ट लड़का है वो यूनिवर्सिटी में
11:26पढ़ता है और कह रहा है यह कर दूंगा, वह कर
11:28दूंगा, क्रांतियां लाऊंगा। बिल्कुल आग लगा
11:31दूंगा सब जगह। यह दुनिया, इसके रीति-रिवाज
11:34यह सब सिर्फ गरीबों को, शोषितों को कुचलने
11:38का पाखंड मात्र है। मैं सब खत्म कर दूंगा।
11:41उसका जो बाप है वो बाप सीधा साधा बिल्कुल
11:45मृदुल इंसान है। कम बोलता है, चुप रहता
11:48है। यह जब उसके आगे जाकर के बेटा बहुत आग
11:52उगलता है कि दुनिया में इतना गलत है, ऐसा
11:54है, वैसा है। हमें सब तोड़ देना चाहिए।
11:56बाप चुपचाप रहता है। अपना बैठा अखबार
11:57पढ़ता रहता है।
12:00तो यह बेटा अपने बाप को बहुत ताने मारता
12:03है। बोलता है तुम्हारे भीतर कोई आग नहीं
12:06है। हम और उस बेटे का नाम उसके साथ के
12:09लोगों ने उसका जो पीियर ग्रुप है उसने ला
12:12दे दिया आग खाने वाला। हम वहीं से कहानी
12:16का नाम आया होगा। आग खाने वाला बोलता है
12:19तेरे दम नहीं है। अरे तुम्ही जैसे लोगों
12:23के कारण
12:25कभी क्रांतियां नहीं होने पाती।
12:28बुरजुआ भद्रजन
12:31तुम्हारे कारण ही यह दुनिया जैसी चल रही
12:36है वैसी है। तो एक दिन वो यही सब कुछ कर
12:39रहा होता है।
12:41बाप बैठा है। बाप ऐसे अखबार नीचे करता है
12:43और उसे बोलता है बेटा तुम्हें एक बात
12:45बतानी थी।
12:48बोलता है क्या?
12:51तो बोलता है कि
12:55तुम्हारी मां का किसी से अफेयर था। तुम
12:58मेरी औलाद नहीं हो।
13:04और ये अगेन खोर ऐसे सुनता है और फिर ऐसे
13:07लहराता हुआ गिर जाता है। कहानी खत्म।
13:13कोई रिश्ता है जो सच को झेल सके। कोई
13:16रिश्ता है। बन रहे हैं बहुत क्रांतिकारी
13:19दुनिया में। पर अपनी निजी जिंदगी में सब
13:22झूठ पर ही तो चल रहा है।
13:27कहानी में अतिशयोक्ति थी। आम घरों में ऐसा
13:30नहीं होता कि औलादें कहीं और से आ रही हो
13:32आमतौर पर।
13:35पर
13:37उतना बड़ा नहीं तो छोटा-मोटा झूठ तो होता
13:41ही है।
13:47झूठ
13:51हटाने का, सच झेलने का दम रखिए।
13:59जो रिश्ता लगातार झूठ की ही खुराक मांगता
14:02हो,
14:04उसको भूखा मरने दीजिए।
14:08उसकी डाइटिंग हो जाएगी। उसकी फास्टिंग है।
14:12वह कुछ बेहतर बनकर निकलेगा। अब वो
14:18और बेहतर माने यह नहीं होता कि प्रेम बढ़
14:21जाएगा या कुछ। बेहतर माने सम्यक हो जाएगा।
14:24एप्रोप्रियट हो जाएगा। वैसा हो जाएगा जैसा
14:27उसे होना चाहिए।
14:31इंसान और घोड़े का रिश्ता पति और पत्नी का
14:34नहीं हो सकता।
14:36आपने उसको जान लिया कि ये घोड़ा ही है। तो
14:39यह थोड़ी है कि अब दुश्मनी हो जाएगी या
14:41घृणा हो जाएगी। अब रिश्ता सम्यक हो जाएगा।
14:44वही रिश्ता जो एक इंसान में और एक पशु में
14:46होना चाहिए वो रिश्ता रहेगा।
14:50ये थोड़ी है कि डिवोर्स हो गया। रिश्ता
14:52अभी भी है। पर पहले लगता था इंसान और
14:54इंसान का है। अब मुझे पता है इंसान और
14:55घोड़े का है। तो रिश्ता तो अभी भी है।
14:58घोड़ा अभी भी घर में रहता है। पर उसके साथ
15:00अब हम व्यवहार घोड़े जैसा ही करते हैं। यह
15:04थोड़ी किया कि घोड़े को निकाल दिया है और
15:06कह रहे हैं कि अब संबंध विच्छेद। नहीं
15:09नहीं। बस हम जान गए हैं कि यह घोड़ा है।
15:15ठीक। अब घोड़े के साथ भी रिश्ता तो होता
15:17है ना? नहीं होता। है रिश्ता। घोड़े के
15:20साथ अभी भी रिश्ता है। कहीं ले जाना होता
15:23है तो घोड़ा काम आता है। अभी भी कहते हैं।
15:25चल तैयार हो जा। तड़पक तड़पक ले चल।
15:30जिस काम आ सकता है उसी काम आ।
15:40दिल विल की बहुत परवाह मत किया करिए।
15:42अध्यात्म का भी बहुत नाश इस दिलबाजी ने ही
15:45करा है।
15:47आप जिसको लोकधर्म कहते हो वो
15:51सेंटीमेंटलिज्म के अलावा कुछ है।
15:55आप इस पर आप नोट्स बना लीजिएगा और गौर
15:58करिएगा खुद। दो बातों के अलावा लोक धर्म
16:01में कुछ हो तो बताइएगा। एक एक कोरी
16:05भावनाएं सेंटीमेंटलिज्म
16:07और दूसरा परलोकवाद मिस्टिसिज्म
16:12बस यही दो बातें होती हैं कि या तो रो और
16:16बोलो कि यही तो भक्त और भगवान के बीच का
16:19रिश्ता है भावना
16:22भ
16:26और या फिर कहो कि बस अब देखो वहां
16:29मेरी आंखों से देखो तो तुमको वहां
16:33चंद्रमा के ऊपर बैठी परी दिखाई देगी।
16:45भावनाओं की बुराई नहीं कर रहे हैं। हम कह
16:48रहे हैं केंद्र पर भावना नहीं होनी चाहिए।
16:51केंद्र पर बोध होना चाहिए। और बोध
16:55से जो भावना उठती है वह बड़ी सुंदर होती
16:58है। बोध से भी आंसू आ सकते हैं। वो बड़े
17:01प्यारे आंसू होते हैं।
17:04तो आपको नहीं सोचना है कि अब रिश्ते का
17:07क्या होगा? रिश्ते का अब क्या होगा? यह
17:11ज्ञान खुद तय कर लेगा। और आपको अपनी ओर से
17:15जोर भी नहीं लगाना है कि इसको बनाए रखूं
17:18कि तोड़ दूं कि बदल दूं कि सवार दूं। 810
17:21तरह के विकल्प होते हैं रिश्तों को लेकर
17:23के। आपको किसी विकल्प की परवाह करनी नहीं
17:25है। अब जो होना होगा ज्ञान खुद करेगा।
17:29बल्कि वो तो करा भी मत करिए कि अब मैं
17:31ज्यादा समझदार हो गई हूं। तो अब मैं
17:33औपचारिक रूप से रिश्ता तोड़ रही हूं। ये
17:36औपचारिक रूप से जो फॉर्मल डिसोसिएशन होता
17:38है ये भी मुझे समझ में नहीं आता। औपचारिक
17:40रूप से क्या तोड़ना है? उसका जो होना था
17:43वो हो जाएगा। रिश्ता अपनी सम्यक जगह पा
17:48लेगा। सम्यक माने राइट उचित वो हो जाएगा।
17:53आपको खुशी होगी इस नाते जो हमारी अपनी ऐप
17:57है जिसमें हमारे गीता और बाकी सब
17:59कार्यक्रम चलते हैं। यहां पर बुद्ध हैं,
18:02गीता है, उपनिषद है, अष्टावक्र हैं। यह
18:04मुझे मिले, मेरी जिंदगी बदली। यह तुम्हें
18:07मिलेंगे तुम्हारी जिंदगी भी बदलेगी। सच
18:09पूछिए तो मतलब लाखों नहीं तो कम से कम
18:11हजारों जिंदगियां तो हैं जो बिल्कुल बदली
18:13हैं।
18:142 लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ
18:17जुड़े आचार्य प्रशांत ऐप पर। पहला महीना
18:20बिल्कुल फ्री गीता मिशन का पूरा एक्सेस।
18:23ऐप पर आपको मिलेंगे नियमित [संगीत] लाइव
18:26सत्र। हर दिन आचार्य प्रशांत के विशेष
18:29संवाद। गीता कम्युनिटी का एक्सेस, गीता
18:32परीक्षा, चयनित समाचार, ऑडियो बुक्स,
18:36कोर्ट्स और भी बहुत कुछ। Google Play
18:39स्टोर या Apple App स्टोर पर आचार्य
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