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'ना' किन रिश्तों में कहना चाहिए? || आचार्य प्रशांत

शक्ति · 2,204 words · 11 min read

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0:00किसी भी रिलेशन में बने रहना जस्ट किसी को

0:02दुख ना पहुंचे या चोट ना लगे ऐसा रहना

0:05क्या ईमानदारी होगी

0:07यह दिल क्या होता है वो वाली चीज कैसे दुख

0:10है उसको

0:12ये

0:13ये क्या है कुछ है ये अच्छा कितनों की

0:17जिंदगी में ऐसे लोग हैं जिनसे सच बोल दिया

0:19तो उनकी फीलिंग्स हर्ट हो जाएंगी इतने

0:22सारे हाथ ओ

0:28और इनमें से कई लोग एक दूसरे की जिंदगी

0:30में होंगे।

0:34ओ

0:38कोई रिश्ता है जो सच को झेल सके। बन रहे

0:41हैं बहुत क्रांतिकारी दुनिया में पर अपनी

0:43निजी जिंदगी में

0:50किसी भी रिलेशन में बने रहना जस्ट किसी को

0:53दुख ना पहुंचे या चोट ना लगे। ऐसा रहना

0:57क्या ईमानदारी होगी? क्या ये जो मोनोगैमी

1:01है लाइफ लॉन्ग मोनोगैमी ऐसा कुछ होता भी

1:04है या फिर जस्ट कन्वीनियंस या डर होता है?

1:08ये कुछ संशय बार-बार आते हैं।

1:11आप पूछ लो। आपने 1 मिनट में पूछ लिया। हम

1:14अब जो मैं आधे घंटे बोलूंगा उसकी गाली

1:16मुझे पड़ेगी। है ना?

1:20अरे जो पूछना था पूछ लेते हो। उसमें ये

1:21मोनोगैमी लाना जरूरी था। हम

1:27पूरे भारत भर के लोकधर्मी

1:31वैसे ही मरे जा रहे हैं हार्ट अटैक से कि

1:33ये हमारी सब महिलाओं को चरित्रहीन और

1:35भ्रष्ट करे दे रहा है। ऊपर से मोनोगैमी के

1:38खिलाफ और बुलवा दीजिए मुझसे।

1:44आप कह रहे हैं कि किसी का दिल ना टूटे

1:47इसके लिए क्या किसी रिश्ते में बने रहना

1:49ईमानदारी है। ईमानदारी या बेईमानी की बात

1:53तो तब आएगी ना जब पहले कोई घटना संभव हो

1:57वैसी

1:59आप अगर बदल गए हो

2:02तो आपका रिश्ता बदल गया।

2:06आप लाख कोशिश कर लो। रिश्ता वैसा रह ही

2:08नहीं जाएगा जैसा था अंधेरे में।

2:14रह ही नहीं जाएगा।

2:16जो देखने लग गया

2:20वो अंधेरे में बनाए रिश्ते को पुरानी तरह

2:23ही अब कैसे निभाएगा? कैसे?

2:27बोलो कैसे?

2:33अंधेरा कमरा था। आप घुस गई। वहां कोई था।

2:35आपको लगा पिया जी हैं और जाकर के लिपट गई।

2:39तभी किसी ने बत्ती जला दी।

2:43वो निकला टिंकू लाल।

2:45क्या रिश्ता वैसे ही रह जाएगा? प्रकाश सब

2:48बदल देता है।

2:51अंधेरे में बनाए गए रिश्ते प्रकाश की धार

2:56बर्दाश्त नहीं कर पाते।

3:01यह धमकी दी जा रही है मुझे।

3:08[प्रशंसा]

3:11ये सोच समझ के बोलो।

3:17अब दिल टूटने की बात कि हमें सब समझ में आ

3:20गया है।

3:23पर अगर समझदारी दिखाएंगे तो किसी का दिल

3:26टूट जाएगा।

3:28ये दिल क्या होता है?

3:31दिल क्या होता है?

3:33वो वाली चीज कैसे दिखाते हैं उसको?

3:37ये

3:38ये क्या है? कुछ है ये?

3:42ये क्या है?

3:44क्या है ये? कुछ है? कुछ है नहीं तो

3:48टूटेगा क्या?

3:50कहीं होता है?

3:53कहीं होता है?

3:56कुछ भी है क्या? ये

3:59तो दिल माने क्या? मान्यता है ना मान्यता

4:04मान्यता

4:05अहंकार जनित और अहंकार केंद्रित मान्यता

4:08जिसको आप दिल का नाम देते हो पर इतने

4:11फिल्मी गाने सुने इतनी शायरी पढ़ी कि लगा

4:14कि दिल भी कुछ होता है। दिल क्या होता है?

4:16गीता क्या बोल रही है? गीता में एक दिल भी

4:18आता है। आत्मा, अहम, दिल और प्रकृति।

4:23ऐसा सिखा है आपने।

4:25ये ये है। दो चार श्लोक बताइए जिसमें दिल

4:29का भी जिक्र हो। उर्दू का ही श्लोक बता

4:31दो।

4:36है कोई जहां पे दिल की भी बात हो।

4:40यह बॉलीवुड का कमाल है। दिल

4:47दिल ना टूटे माने आप बस यही कह रहे हो कि

4:50किसी ने मुझे लेकर कुछ धारणा बना रखी है।

4:54किसी की मुझको लेकर कोई बिलीफ है। जो कि

4:59जाहिर है झूठी है।

5:01पर मैं चाहती हूं ना टूटे। तो ले देकर आप

5:04क्या बोल रही हैं? आप कह रही है उसकी एक

5:07झूठी बिलीफ है।

5:09और मैं नहीं चाहती कि उसकी झूठी बिलीफ

5:12टूटे। आप उसकी दोस्त हैं कि दुश्मन हैं।

5:15जल्दी बोलिए।

5:17तो दिल का मतलब ही अगर झूठी मान्यता है और

5:20फालतू अरमान यही है ना? अगर दिल का मतलब

5:24ही यही है तो दिल तो जितनी जल्दी हो सके।

5:29सबसे पहले अपना

5:32सबसे पहले अपना। अध्यात्म का और काम ही

5:35क्या है? दिल तोड़ना। दिल विल प्यार मैं

5:38क्या जानू रे

5:41महावाक्य है ये अध्यात्म का

5:46तू मेरा दिल है तू मेरा जिगर है अध्यात्म

5:50में ये सब होता है जिगर

5:53अमलाशय मलाशय

5:55यकृत

5:57उपनिषद बोल रहे हैं

6:00कि तत्व मसी और तत माने किडनी

6:05है ऐसा

6:07हमारे गानों में यह सब होता है। उसमें सब

6:09कुछ आ जाता है। तू मेरा गला है, तू मेरी

6:11जुबान है।

6:15और अगर शरीर के अंगों से ही उसका नाता

6:17दिखाना है तो सचमुच शरीर के जिस अंग से

6:20उसका नाता है, उसका नाम कभी नहीं लेते।

6:24असली बात छुपाए बैठे हैं। बाकी सब कुछ तू

6:28मेरी मूछ का बाल है।

6:37दिल टूट जाएगा माने क्या अहंकार ना स्वयं

6:42को जानता ना दूसरे को जानता जैसे अपनी एक

6:46झूठी छवि बना रखी है वैसे ही उसकी भी एक

6:48झूठी छवि बना रखी है और आप चाहती हैं कि

6:51झूठी छवि चलती रहे

6:54इससे किसका लाभ हो रहा है

6:57किसका

7:00बोलो ना किसका

7:11जो अपनी सच्चाई को दूसरे से छुपा रहा है

7:21वो दूसरे का दिल टूटने से भले बचा रहा हो

7:24पर उसकी जिंदगी तोड़ रहा है।

7:31और रिश्ते हमारे सारे ही ऐसे होते हैं

7:33जिसमें अपनी सच्चाई बता दो तो दिल ही नहीं

7:35रिश्ता भी टूट जाए।

7:39हम सब जानते हैं कि हमारे संबंधों में कौन

7:42से सवाल हैं जो कभी नहीं पूछे जाने चाहिए।

7:46और वो सवाल अगर पूछ दिए गए वो मुद्दा वो

7:50चर्चा

7:52अगर छिड़ गई वो चर्चा तो गड़बड़ हो जाएगी।

7:55हो जाएगी ना? हम सब जानते हैं कि कौन सी

7:58बात कौन सी सच्चाई अगर दूसरे को बता दी तो

8:02उसका दिल टूटेगा तो बताओ ही मत। वास्तव

8:06में पेशेवर लोग ये जो रिलेशनशिप

8:08एक्सपर्ट्स होते हैं यह सलाह भी यही देते

8:10हैं कि कुछ बातें ना अपने पार्टनर को कहीं

8:12बतानी नहीं चाहिए। ना पार्टनर को ना

8:14पेरेंट्स को किसी को नहीं बतानी चाहिए। और

8:17कुछ बातें होती हैं जो पेरेंट्स को बता दो

8:19पर पार्टनर को नहीं बताओ। कुछ बातें हैं

8:20जो पार्टनर को बताओ। पेरेंट्स को कुछ

8:22बातें होती है सिर्फ फ्रेंड्स को बताओ और

8:23किसी को नहीं बताओ।

8:26माने कुल मिला के एक-एक रिश्ता

8:30झूठ पर ही टिका हुआ है।

8:38सचमुच किसी का भला चाहते हो।

8:42तो उसको गलतफहमी में मत रखो।

8:49तथ्य तथ्य है। यथार्थ यथार्थ है।

8:56वो न्यूट्रल होता है। ना किसी का अच्छा ना

8:59किसी का बुरा।

9:02वो बस है।

9:05वो सत्य के बिल्कुल निकट की चीज है। वो वो

9:08वो व्यवहार

9:11से ऊपर ले जाता है परमार्थ में।

9:18उसी को छुपा रहे हो। और इस छुपा छुपी को

9:21रिश्ते की बुनियाद बना रहे हो कि उसका दिल

9:25टूट जाएगा। उसकी भावनाएं आहत हो जाएंगी।

9:28क्या मेरी फीलिंग्स की कोई कदर नहीं?

9:32मत बताओ मुझे वो सच जिससे मेरी फीलिंग्स

9:35हर्ट होती हो। अच्छा कितने लोग ऐसे ही

9:37हैं? सही से हाथ खड़े करो। जल्दी से करो।

9:39मत बताओ मुझे वो सच जिससे मेरी फीलिंग्स

9:42हर्ट होती हो।

9:56मैं नहीं ले रहा गीता से। [हंसी]

10:08अच्छा छोड़ो। तुम ऐसे नहीं हो। ठीक है।

10:12तुम तो

10:14महामानव हो।

10:18देवाधिदेव हो। अच्छा कितनों की जिंदगी में

10:22ऐसे लोग हैं जिनसे सच बोल दिया तो उनकी

10:24फीलिंग्स हर्ट हो जाएंगी। इतने सारे हाथ

10:32और इनमें से कई लोग एक दूसरे की जिंदगी

10:34में होंगे।

10:38हम हर्ट नहीं होते पर हम झूठ इसलिए बोलते

10:40हैं क्योंकि वो हर्ट हो जाएगा। और यही बात

10:44वो भी बोल रहा है।

11:03एक कहानी थी अगिनखोर एक आध बार पहले भी

11:08उसका जिक्र करा है बंगाली की कहानी है

11:13तो उसमें एक

11:20फायर ब्रांड बिल्कुल क्रांतिकारी

11:23कम्युनिस्ट लड़का है वो यूनिवर्सिटी में

11:26पढ़ता है और कह रहा है यह कर दूंगा, वह कर

11:28दूंगा, क्रांतियां लाऊंगा। बिल्कुल आग लगा

11:31दूंगा सब जगह। यह दुनिया, इसके रीति-रिवाज

11:34यह सब सिर्फ गरीबों को, शोषितों को कुचलने

11:38का पाखंड मात्र है। मैं सब खत्म कर दूंगा।

11:41उसका जो बाप है वो बाप सीधा साधा बिल्कुल

11:45मृदुल इंसान है। कम बोलता है, चुप रहता

11:48है। यह जब उसके आगे जाकर के बेटा बहुत आग

11:52उगलता है कि दुनिया में इतना गलत है, ऐसा

11:54है, वैसा है। हमें सब तोड़ देना चाहिए।

11:56बाप चुपचाप रहता है। अपना बैठा अखबार

11:57पढ़ता रहता है।

12:00तो यह बेटा अपने बाप को बहुत ताने मारता

12:03है। बोलता है तुम्हारे भीतर कोई आग नहीं

12:06है। हम और उस बेटे का नाम उसके साथ के

12:09लोगों ने उसका जो पीियर ग्रुप है उसने ला

12:12दे दिया आग खाने वाला। हम वहीं से कहानी

12:16का नाम आया होगा। आग खाने वाला बोलता है

12:19तेरे दम नहीं है। अरे तुम्ही जैसे लोगों

12:23के कारण

12:25कभी क्रांतियां नहीं होने पाती।

12:28बुरजुआ भद्रजन

12:31तुम्हारे कारण ही यह दुनिया जैसी चल रही

12:36है वैसी है। तो एक दिन वो यही सब कुछ कर

12:39रहा होता है।

12:41बाप बैठा है। बाप ऐसे अखबार नीचे करता है

12:43और उसे बोलता है बेटा तुम्हें एक बात

12:45बतानी थी।

12:48बोलता है क्या?

12:51तो बोलता है कि

12:55तुम्हारी मां का किसी से अफेयर था। तुम

12:58मेरी औलाद नहीं हो।

13:04और ये अगेन खोर ऐसे सुनता है और फिर ऐसे

13:07लहराता हुआ गिर जाता है। कहानी खत्म।

13:13कोई रिश्ता है जो सच को झेल सके। कोई

13:16रिश्ता है। बन रहे हैं बहुत क्रांतिकारी

13:19दुनिया में। पर अपनी निजी जिंदगी में सब

13:22झूठ पर ही तो चल रहा है।

13:27कहानी में अतिशयोक्ति थी। आम घरों में ऐसा

13:30नहीं होता कि औलादें कहीं और से आ रही हो

13:32आमतौर पर।

13:35पर

13:37उतना बड़ा नहीं तो छोटा-मोटा झूठ तो होता

13:41ही है।

13:47झूठ

13:51हटाने का, सच झेलने का दम रखिए।

13:59जो रिश्ता लगातार झूठ की ही खुराक मांगता

14:02हो,

14:04उसको भूखा मरने दीजिए।

14:08उसकी डाइटिंग हो जाएगी। उसकी फास्टिंग है।

14:12वह कुछ बेहतर बनकर निकलेगा। अब वो

14:18और बेहतर माने यह नहीं होता कि प्रेम बढ़

14:21जाएगा या कुछ। बेहतर माने सम्यक हो जाएगा।

14:24एप्रोप्रियट हो जाएगा। वैसा हो जाएगा जैसा

14:27उसे होना चाहिए।

14:31इंसान और घोड़े का रिश्ता पति और पत्नी का

14:34नहीं हो सकता।

14:36आपने उसको जान लिया कि ये घोड़ा ही है। तो

14:39यह थोड़ी है कि अब दुश्मनी हो जाएगी या

14:41घृणा हो जाएगी। अब रिश्ता सम्यक हो जाएगा।

14:44वही रिश्ता जो एक इंसान में और एक पशु में

14:46होना चाहिए वो रिश्ता रहेगा।

14:50ये थोड़ी है कि डिवोर्स हो गया। रिश्ता

14:52अभी भी है। पर पहले लगता था इंसान और

14:54इंसान का है। अब मुझे पता है इंसान और

14:55घोड़े का है। तो रिश्ता तो अभी भी है।

14:58घोड़ा अभी भी घर में रहता है। पर उसके साथ

15:00अब हम व्यवहार घोड़े जैसा ही करते हैं। यह

15:04थोड़ी किया कि घोड़े को निकाल दिया है और

15:06कह रहे हैं कि अब संबंध विच्छेद। नहीं

15:09नहीं। बस हम जान गए हैं कि यह घोड़ा है।

15:15ठीक। अब घोड़े के साथ भी रिश्ता तो होता

15:17है ना? नहीं होता। है रिश्ता। घोड़े के

15:20साथ अभी भी रिश्ता है। कहीं ले जाना होता

15:23है तो घोड़ा काम आता है। अभी भी कहते हैं।

15:25चल तैयार हो जा। तड़पक तड़पक ले चल।

15:30जिस काम आ सकता है उसी काम आ।

15:40दिल विल की बहुत परवाह मत किया करिए।

15:42अध्यात्म का भी बहुत नाश इस दिलबाजी ने ही

15:45करा है।

15:47आप जिसको लोकधर्म कहते हो वो

15:51सेंटीमेंटलिज्म के अलावा कुछ है।

15:55आप इस पर आप नोट्स बना लीजिएगा और गौर

15:58करिएगा खुद। दो बातों के अलावा लोक धर्म

16:01में कुछ हो तो बताइएगा। एक एक कोरी

16:05भावनाएं सेंटीमेंटलिज्म

16:07और दूसरा परलोकवाद मिस्टिसिज्म

16:12बस यही दो बातें होती हैं कि या तो रो और

16:16बोलो कि यही तो भक्त और भगवान के बीच का

16:19रिश्ता है भावना

16:22भ

16:26और या फिर कहो कि बस अब देखो वहां

16:29मेरी आंखों से देखो तो तुमको वहां

16:33चंद्रमा के ऊपर बैठी परी दिखाई देगी।

16:45भावनाओं की बुराई नहीं कर रहे हैं। हम कह

16:48रहे हैं केंद्र पर भावना नहीं होनी चाहिए।

16:51केंद्र पर बोध होना चाहिए। और बोध

16:55से जो भावना उठती है वह बड़ी सुंदर होती

16:58है। बोध से भी आंसू आ सकते हैं। वो बड़े

17:01प्यारे आंसू होते हैं।

17:04तो आपको नहीं सोचना है कि अब रिश्ते का

17:07क्या होगा? रिश्ते का अब क्या होगा? यह

17:11ज्ञान खुद तय कर लेगा। और आपको अपनी ओर से

17:15जोर भी नहीं लगाना है कि इसको बनाए रखूं

17:18कि तोड़ दूं कि बदल दूं कि सवार दूं। 810

17:21तरह के विकल्प होते हैं रिश्तों को लेकर

17:23के। आपको किसी विकल्प की परवाह करनी नहीं

17:25है। अब जो होना होगा ज्ञान खुद करेगा।

17:29बल्कि वो तो करा भी मत करिए कि अब मैं

17:31ज्यादा समझदार हो गई हूं। तो अब मैं

17:33औपचारिक रूप से रिश्ता तोड़ रही हूं। ये

17:36औपचारिक रूप से जो फॉर्मल डिसोसिएशन होता

17:38है ये भी मुझे समझ में नहीं आता। औपचारिक

17:40रूप से क्या तोड़ना है? उसका जो होना था

17:43वो हो जाएगा। रिश्ता अपनी सम्यक जगह पा

17:48लेगा। सम्यक माने राइट उचित वो हो जाएगा।

17:53आपको खुशी होगी इस नाते जो हमारी अपनी ऐप

17:57है जिसमें हमारे गीता और बाकी सब

17:59कार्यक्रम चलते हैं। यहां पर बुद्ध हैं,

18:02गीता है, उपनिषद है, अष्टावक्र हैं। यह

18:04मुझे मिले, मेरी जिंदगी बदली। यह तुम्हें

18:07मिलेंगे तुम्हारी जिंदगी भी बदलेगी। सच

18:09पूछिए तो मतलब लाखों नहीं तो कम से कम

18:11हजारों जिंदगियां तो हैं जो बिल्कुल बदली

18:13हैं।

18:142 लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ

18:17जुड़े आचार्य प्रशांत ऐप पर। पहला महीना

18:20बिल्कुल फ्री गीता मिशन का पूरा एक्सेस।

18:23ऐप पर आपको मिलेंगे नियमित [संगीत] लाइव

18:26सत्र। हर दिन आचार्य प्रशांत के विशेष

18:29संवाद। गीता कम्युनिटी का एक्सेस, गीता

18:32परीक्षा, चयनित समाचार, ऑडियो बुक्स,

18:36कोर्ट्स और भी बहुत कुछ। Google Play

18:39स्टोर या Apple App स्टोर पर आचार्य

18:41प्रशांत सर्च करें और अभी डाउनलोड करें।

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