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0:08एक सेकंड के लिए इमेजिन करो अभी iPhone 17
0:11Pro Max का प्राइस कितना है? 1.5 लाख 1.5
0:15लाख। मान लो कि Apple रातोंरात एक ऑफर
0:20निकाल देता है कि कल सुबह से वही सेम मॉडल
0:23का प्राइस 500 हो जाता है। हमें पता है वो
0:26ऐसा नहीं करेंगे। एक बारी के लिए इमेजिन
0:28करो। अगर वो ऐसा करते हैं तो बताओ कमेंट
0:31करके कितने लोग खरीदने को तैयार हो जाओगे?
0:33बहुत सारे। ठीक है? अगर iPhone ने अपना
0:37प्राइस एकदम से अपना ₹1.5 लाख का जो
0:39आर्टिकल है वो 500 करा तो बहुत सारे लोग
0:42खरीदने को तैयार हो जाएंगे। नंबर वन बात।
0:44नंबर टू जो लोग पहले हल्का सा बजट अपना कम
0:48होने के कारण अदर अल्टरनेटिव्स लेने वाले
0:51थे कि भाई फॉर एग्जांपल Samsung की सीरीज
0:55देख रहे थे। प्रॉपर iPhone 17 Pro Max पर
0:57ही नहीं जा रहे थे। वो लोग भी कि अबे परे
1:00चल Samsung वो भी iPhone ही खरीदने आ
1:02जाएंगे। है ना? क्या हुआ ये? प्राइस हल्का
1:05सा कम हुआ और डिमांड एकदम से बढ़ गई। बेटा
1:08यही लॉ ऑफ़ डिमांड भी होता है। इसी को लॉ
1:11ऑफ़ डिमांड कहते हैं कि जब किसी चीज का
1:13प्राइस ज्यादा होता है ना, तो उसकी डिमांड
1:15थोड़ी कम होती है। लेकिन जैसे ही प्राइस कम
1:18होता है, उसकी डिमांड क्या हो जाती है?
1:20बढ़ जाती है। इस उल्टे रिलेशन को ही
1:22इनवर्स रिलेशनशिप कहते हैं। और इसी कारण
1:25की वजह से बेटा ये जो डिमांड का कर्व है
1:28ना ये जो डिमांड का ग्राफ है ये ऐसे नीचे
1:30की तरफ स्लोप करता है। डाउनवर्ड स्लोपिंग
1:32बनता है। ऐसे नीचे की तरफ। क्वेश्चन क्या
1:35है हमारा कि क्यों किसी गुड को ज्यादा
1:38खरीदा जाता है? जब उसका प्राइस गिर जाता
1:40है। व्हाई मोर ऑफ अ गुड इज बोट व्हेन इट्स
1:44प्राइस फॉल्स। क्यों किसी गुड को ज्यादा
1:46खरीदते हो? जब उसका प्राइस गिर जाता है या
1:49फिर ये डिमांड का कर्व ऐसा नेगेटिव क्यों
1:52बनता है? क्योंकि भाई प्राइस और डिमांड
1:54में एक इनवर्स रिलेशनशिप होता है। और यही
1:57रिलेशन लॉ ऑफ़ डिमांड भी समझाता है। जो
1:59अभी-अभी आपने जस्ट जो एग्जांपल इमेजिन करा
2:02था कि भाई अगर iPhone ने अपना प्राइस
2:04गिराया तो बहुत सारे लोग उसको खरीदने आ
2:06जाएंगे। अब बेटा इसके रीज़ंस क्या है? आज
2:09की वीडियो में हम ये कवर करेंगे। और इस
2:11वीडियो के अंदर हम सारे लाइव रियल लाइफ
2:13एग्जांपल्स डिस्कस करेंगे। और इस वीडियो
2:15के एंड तक ये टॉपिक आपका पक्का होगा। ठीक
2:18है? अब ऐसा होने के बेटा पांच मेजर कारण्स
2:21होते हैं। पांच मेजर कारण। नंबर वन इज़ लॉ
2:25ऑफ डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी। लॉ ऑफ
2:28डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी। बेटा ये
2:31क्या कहता है कि जैसे-जैसे आप कंजमशन
2:33बढ़ाते हो ना किसी चीज की उससे मिलने वाली
2:36सेटिस्फेक्शन हो जाती है कम। इसलिए
2:38कंज्यूमर ज्यादा पैसे खर्चने को इच्छा
2:41नहीं रखता। एग्जांपल से समझो। आप भाई सारा
2:44दिन से भूखे हो। आपने कुछ नहीं खा रखा।
2:46शाम को आपको भाई लेट इट बी का ही एक बर्गर
2:50मिला। आपने जैसे ही वो फर्स्ट बर्गर खाया।
2:53उसकी फर्स्ट बाइट खाई। आपको सबसे ज्यादा
2:55संतुष्टि, सेटिस्फेक्शन, यूटिलिटी वहां से
2:58मिली। आपने पैसे खर्चे, जितने मर्जी भी
3:00खर्चे हो भाई, सारा दिन से आप भूखे थे।
3:02आपने वो बर्गर खाया। आपको सेटिस्फेक्शन
3:04मिली। सारा दिन के भूखे थे। आपने एक पूरा
3:06बर्गर खा लिया। अब थोड़ी आपकी जो
3:10सेटिस्फेक्शन थी वो फुलफिल होगी। आपकी
3:12थोड़ी जो इतने टाइम की हंगर थी वो फुलफिल
3:15होगी। अब दूसरा बर्गर क्या बेटा बताओ उतनी
3:18सेटिस्फेक्शन देगा या उससे कम
3:19सेटिस्फेक्शन देगा? कम ही देगा ना। पहले
3:22बर्गर ने आपको बहुत सेटिस्फेक्शन दी
3:24क्योंकि आप सुबह से भूखे थे यार। अब जो
3:26दूसरा बर्गर है वो आपको थोड़ी सी कम
3:28सेटिस्फेक्शन देगा। उसके लिए ना आप वो
3:31प्राइस पे करने को राजी नहीं हो रहेगे जो
3:34आपने पहले बर्गर के लिए शायद कर दिया होगा
3:36क्योंकि आप सुबह से भूखे क्योंकि अब तो
3:38आपका पेट थोड़ा सा भर गया ना और तीसरे
3:40बर्गर के लिए तो उससे भी कम पैसे देने को
3:42राजी होगे। यही चीज को लॉ ऑफ़ डिमिनिशन
3:45मार्जिनल यूटिलिटी कहते हैं कि जैसे-जैसे
3:47कंसमशन बढ़ती है ना जो यूटिलिटी होती है
3:50यानी सेटिस्फेक्शन वो गिरने लग जाती है।
3:53ठीक है? ऑब्वियस सी बात है बेटा पहला
3:54गिलास पानी ज्यादा सेटिस्फेक्शन देता है
3:56एज़ कंपेयर टू थर्ड ग्लास। ठीक है? पहला
3:59बर्गर बच्चे को ज्यादा सेटिस्फेक्शन दे
4:00रहा होगा एज कंपेयर टू थर्ड या सेकंड
4:02बर्गर। तो जो कंज्यूमर है ना फिर वो चाह
4:06रहा होता है कि वो कम प्राइस पे करे
4:08प्रोडक्ट के लिए। ठीक है? तो एक तो रीज़ हो
4:10गया ये। नंबर टू रीज़न है बेटा इनकम
4:13इफेक्ट। जब किसी चीज के प्राइसेस गिरते
4:16हैं ना तो एक तरीके से एक कंज्यूमर की
4:19रियल इनकम बढ़ जाती है। एग्जांपल से समझो।
4:21मान लो पहले आप ₹10 की चॉकलेट खरीदते थे
4:26और आपके पास बजट था ₹100। आपका बजट कितना
4:29था भाई? ₹100 का आपका बजट था। अब इस ₹100
4:32के बजट में आप क्या करते थे? जी 10
4:34चॉकलेट्स खरीद लेते थे। अब बेटा अगर यही
4:37100% सेम साइज की सेम क्वालिटी की सेम
4:40ब्रांड की चॉकलेट
4:42जो ₹10 की आती थी 10 ईच ये 10 से हटकर ₹5
4:48की हो जाए। अगर यही चॉकलेट ₹5 की होगी
4:51बेटा तो अब शायद आप कितनी खरीद पाओगे ₹100
4:54में? अब आपके पास है तो ₹100 पहले आप 10
4:58खरीद पाते थे ₹10 की एक थी। अब आप कितनी
5:00खरीद पाओगे? 20 एक तरीके से क्या हुआ?
5:04प्राइस कम होने की वजह से ना कंज्यूमर को
5:06ऐसा लगता है कि उसकी थोड़ी सी इनकम बढ़
5:08गई। ठीक है? तो वो ज्यादा खरीदता है।
5:10दूसरा कारण ये है कि जब प्राइसेस गिरते
5:12हैं ना इससे कंज्यूमर की रियल इनकम जो है
5:14वो थोड़ी सी बढ़ जाती है। इसलिए वो ज्यादा
5:17खरीदने लग जाता है। ठीक है? दूसरा
5:19एग्जांपल ऐसे समझ सकते हो कि कोई फैमिली
5:21है मान लो भाई उनका मंथली इनकम है 25000
5:25और 10,000 का उनके घर में राशन आता है। अब
5:27अगर वही राशन 8,000 में आने लग जाए
5:30बिल्कुल सेम क्वालिटी कोई कॉम्प्रोमाइज
5:31नहीं कर रहे तो बेटा उसके पास वो 20,000
5:34एक्स्ट्रा ही बचेगा ना। वो उसकी एक
5:35एक्स्ट्रा इनकम होगी जिससे वो और खर्चा
5:38करेगा। इसके बाद बेटा आता है सब्सीट्यूशन
5:40इफ़ेक्ट। सब्सीट्यूशन इफ़ेक्ट के लिए आपको
5:43सबसे पहले समझना जरूरी है सब्स्टट्यूट
5:45गुड्स कौन सी होती है? जो एक दूसरे के
5:47बिल्कुल कॉम्पिटिट है। कोका कोला और
5:49पेप्सी ऐसे एग्जांपल वाले गुड्स। ठीक है?
5:52अब अगर प्राइस गिरता है ना आपके प्रोडक्ट
5:54का तो आपका गुड जो है वो सस्ता पड़ता है
5:57अपने सब्सीट्यूट्स के मुताबिक तो लोग आपके
6:00प्रोडक्ट की तरफ शिफ्ट हो जाते हैं।
6:02एग्जांपल से समझो भाई अभी कोका कोला और
6:04पेप्सी दोनों ₹20 की है। मान लेते हैं 2
6:07मिनट के लिए कि अभी कोका कोला और पेप्सी
6:11दोनों ही 250 ml ऑफर कर रहे हैं ₹20 में।
6:15कोक भी और पेप्सी भी। अब अगर
6:19कोका कोला यही 250 ml
6:22₹15 में ऑफर करनी स्टार्ट कर दे तो बेटा
6:26पहले तो ना डिमांड बटी हुई थी। बहुत लोग
6:28कोका कोला पीते थे। बहुत लोग पेप्सी भी
6:30पीते थे। ठीक है? अब बहुत सारे पेप्सी
6:33पीने वाले लोग भी कोका कोला की तरफ आ
6:36जाएंगे कि यार ये तो सस्ती पड़ रही है।
6:38ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट बराबर सी है। ठीक है?
6:40दोनों ब्लैक कलर की फजी ड्रिंक्स हैं। ठीक
6:43है? ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट टेस्ट सिमिलर भी है।
6:46तो बहुत सारे लोग जो पहले पेप्सी पीते थे
6:48वो कोका कोला पीने आ जाएंगे बेटा क्योंकि
6:51उनको अपनी जो वो पेप्सी पेप्सी करते रहते
6:53थे उससे सस्ती आपकी कोका कोला मिल गई। तो
6:56ये होता है सब्सीट्यूशन इफेक्ट कि जब
6:57प्राइस गिरता है ना तो जो हमारा गुड है वो
7:01अपने सब्स्टट्यूट्स के मुताबिक थोड़ा
7:02सस्ता बढ़ता है तो उसकी डिमांड बढ़ जाती
7:05है। तीन पॉइंट हो गए बेटा ये। इसके बाद
7:08फोर्थ पॉइंट है साइज ऑफ कंज्यूमर गुड।
7:10बेटा बहुत सारे ऐसे कंज्यूमर्स होते हैं
7:13जो पहले शायद हमारा प्रोडक्ट इसलिए नहीं
7:15खरीद पा रहे थे क्योंकि वो उनके बजट में
7:17नहीं आ रहा था। मान लो फॉर एग्जांपल एक
7:19कोई ऑनलाइन कोर्स है एजुकेशनल कोर्स है और
7:22उसका प्राइस है ₹10,000। अब कुछ नंबर ऑफ
7:26पर्सनंस उसको खरीदते भी हैं। अगर वही
7:28कोर्स बेटा ₹500 का हो गया तो कितने सारे
7:31कंज्यूमर्स के बजट में वो आ जाएगा। वो
7:33फटाफट से भाग के आएंगे वो हमारा वाला
7:35कोर्स खरीदने। तो वो कंज्यूमर ग्रुप के
7:38साइज की वजह से डिमांड जो है वो बढ़
7:40जाएगी। जब प्राइस गिरता है ना बहुत सारे
7:44न्यू बयरर्स अट्रैक्ट होते हैं जो पहले
7:46अपनी किसी मजबूरी के कारण हु वर नॉट एबल
7:49टू बाय एट द प्रीवियस प्राइसेस तो डिमांड
7:52बढ़ जाती है। जैसे मैंने अभी आपको बताया
7:54कि भाई अगर एक कोई कोर्स है एजुकेशनल
7:56कोर्स वो 10,000 का बिकता है। अगर वही सेम
7:59कोर्स ₹500 का हो जाए एक लिमिटेड टाइम ऑफर
8:02तो बहुत सारे लोग उसको खरीदने आ जाएंगे
8:05जिनके वो बजट में लाई कर रहा है कि भाई वो
8:07लिमिटेड टाइम ऑफर है। उसकी वजह से भी
8:09हमारे प्रोडक्ट की जो डिमांड होगी वो बढ़
8:11जाएगी। इसके बाद बेटा आखिरी पॉइंट आता है
8:14डिफरेंट यूज वाले गुड्स। कई गुड्स ऐसे
8:16होते हैं बेटा जिसके एक से ज्यादा यूजज़
8:18होते हैं। जैसे दूध दूध से बेटा कर्ड हो
8:21गया, पनीर हो गया, घी हो गया, मलाई हो गई।
8:24ठीक है? बहुत कुछ बनता है। इलेक्ट्रिसिटी।
8:26इलेक्ट्रिसिटी के कितने सारे यूज हैं। अब
8:29जब चीज महंगी होती है ना तो वो सिर्फ अपने
8:32प्राइम यूज के लिए ही प्रयोग की जाती है।
8:35जैसे अगर बिजली बहुत महंगी होगी ना तो
8:37उसका जो मेन प्राइम यूज़ है कि फॉर
8:39एग्जांपल लाइटिंग और फैन बेसिक में आ गया
8:42वो उसके लिए यूज़ होगी। लेकिन अगर बेटा ये
8:44बिजली सस्ती होगी तो उसके अलग-अलग यूजज़ बन
8:47जाएंगे। बहुत सारे चीजों पर जहां लोग
8:49अलग-अलग ऑप्शंस यूज़ करते थे ना लोग शिफ्ट
8:52हो जाएंगे भाई बिजली की तरफ। फॉर एग्जांपल
8:54कि भाई पेट्रोल डीजल महंगे पड़ रहे हैं।
8:55चलो इलेक्ट्रिक ले लो बिजली सस्ती है। फॉर
8:57एग्जांपल घर पे गैस स्टो महंगा पड़ रहा
8:59है। कोई बात नहीं जी हम इंडक्शन लगा
9:01लेंगे। माइक्रोवेव लगा लेंगे। एक्सट्रा
9:03एक्सट्रा यही ये पॉइंट है कि कुछ गुड्स
9:05होते हैं जैसे बिजली हो गया, दूध हो गया
9:07जिनके मल्टीपल यूजज़ होते हैं। जब प्राइस
9:10गिरता है ना तो ये गुड का बहुत सारे
9:14पर्पससेस के लिए प्रयोग होना स्टार्ट हो
9:15जाता है। सिंपल सी बात है ना यार? अगर भाई
9:18मान लो आपके एरिया में बिजली आती है ₹8 पर
9:20यूनिट। अगर यही बिजली सरकार ने ₹1 पर
9:23यूनिट कर दी। आपको तो बिल्कुल ही यू फील
9:25है कि यार ये तो मिट्टी भाव पड़ रहा है।
9:27कितना सस्ता सामान है। आप क्या करोगे भाई?
9:29आप भाई एसी भी खरीदोगे। वाशिंग मशीन भी
9:32आपकी फुल्ली ऑटोमेटिक चलेगी। ठीक है भाई।
9:34सर्दियों में हीटर भी चल रहा है। गर्मियों
9:36में एसी भी पूरा पूरा दिन चल रहे है। कोई
9:38परवाह नहीं। ठीक है। दिवाली आ रही है तो
9:3910-10 दिन तुम लड़िया ही लगा के रख रहे
9:41हो। कोई परवाह नहीं। जी सस्ती बिजली है।
9:43ये क्या करा आपने? लाइट का मेन यूज़ तो
9:45रोशनी देना था। जब वो चीज सस्ती होती है
9:48ना उसके कई अन्य यूज़ स्टार्ट हो जाते हैं
9:50तो उसकी डिमांड मार्केट में बेटा बनी रहती
9:52है। यही हमारा टॉपिक था। एक बार दोबारा
9:55फटाफट से जरा क्विक रिककैप करते हैं। पांच
9:57कारण है जिसकी वजह से डिमांड कर्व
10:00डाउनवर्ड स्लोप करता है या फिर किसी चीज
10:02को ज्यादा खरीदा जाता है जब उसका प्राइस
10:04गिर जाता है। पहला कारण लॉ ऑफ़ डिमिनिशिंग
10:07मार्जिनल यूटिलिटी कि जब कंज्यूमर ज्यादा
10:10कंज्यूम करता है तो सेटिस्फेक्शन कम हो
10:12जाती है। इसलिए वो ज्यादा प्राइस पे करने
10:15को तैयार नहीं हो रहा होता। ये इनवर्स
10:16रिलेशन समझाया है यहां पर। दूसरा पॉइंट
10:19आपका इनकम इफेक्ट। जब चीजों के प्राइस कम
10:22होते हैं ना तो एक तरीके से वो कंज्यूमर
10:24के लिए एक विनविन सिचुएशन होती है। उसको
10:26लगता है यार कि अ मेरी इनकम बढ़ गई एक
10:29तरीके से कि पहले भाई मेरे पास ₹100 का
10:31बजट था। ₹10 की एक चॉकलेट थी। 10 चॉकलेट
10:33सी खरीद पाता था। अब वही सेम चॉकलेट ₹5 की
10:36होगी। तो अब वो ज्यादा खरीद पाएगा। शायद
10:39अब वो 20 खरीद ले। ठीक है? वो चीज। तीसरा
10:41होता है सब्स्टट्यूशन इफेक्ट। बहुत सारे
10:44ऐसे लोग होते हैं बेटा जो मान लो अगर मैं
10:46बिजनेस के पॉइंट ऑफ व्यू से बात करूं तो
10:48हमारे कॉम्पिटिट से सामान खरीद रहे होते
10:50हैं कि जैसे कोका कोला का कॉम्पिटिट हो
10:51गया। कोका कोला का सब्स्टट्यूट हो गया
10:53पेप्सी। दोनों 2020 की 250 ml बेचते हैं।
10:56अब अगर कोका कोलाa वालों ने अपना 250 ml
11:00का प्राइस 20 से काट के 15 कर दिया तो
11:02बहुत सारे लोग जो पहले पेप्सी खरीदते थे
11:04ना वो दो मिनट नहीं लगाएंगे गद्दारी करने
11:07में। बेटा वो सीधा हमारे प्रोडक्ट की तरफ
11:09शिफ्ट हो जाएंगे। वो लोग भी कोका कोला
11:11पीने आ जाएंगे कि यार ₹5 बच रहे हैं। चार
11:14के पीछे एक बोतल फ्री होगी तो उससे डिमांड
11:17बनी रहेगी। उसके बाद आता है बेटा साइज ऑफ़
11:19कंज्यूमर गुड कि जो भी आपको एग्जांपल
11:21बताया कि पहले कोई गुड था वो ₹10,000 का
11:24था। अगर वही गुड, वही सर्विस, वही कोर्स
11:26₹500 का हो गया। तो भाई वो तो बहुत सारे
11:28लोगों के बजट में आ जाएगा ना। जो लोग पहले
11:30खरीद नहीं पा रहे थे किसी कारणवश, अपनी
11:32मजबूरी वश वो उनके बजट में आएगा। वो फटाफट
11:35से आएंगे खरीदने। डिमांड बनी रहेगी। और
11:37पांचवा है पॉइंट डिफरेंट यूज। बहुत सारे
11:40गुड्स के डिफरेंट यूज होते हैं। जैसे
11:42इलेक्ट्रिसिटी जब प्राइस गिरता है ना बेटा
11:44तो उसके कई यूज स्टार्ट हो जाते हैं। अब
11:46जैसे मान लो कोई फैमिली है जो फॉर
11:49एग्जांपल दूध नहीं भी पीती। अगर दूध का
11:52प्राइस बेटा बहुत सस्ता हो गया ना। मान लो
11:54फैमिली लैक्टोस इनटोलरेंट है उनको दूध
11:56डाइजेस्ट नहीं होता। अगर दूध का प्राइस
11:59बहुत कम हो गया ना तो बेटा अगर वो दूध पिए
12:02ना पिए उसके मल्टीपल यूज शायद स्टार्ट हो
12:04जाएंगे। जरूरी तो नहीं है ना कि दूध नहीं
12:06डाइजेस्ट हो रहा है तो दूध के सारे
12:07प्रोडक्ट्स ही ना हो। क्या पता भाई फिर वो
12:09उस दूध से घी भी बनाएंगे, पनीर भी
12:11बनाएंगे। ठीक है? कर्ड भी जमाएंगे और अन्य
12:14कई चीजें सारी। ठीक है? तो ये होता है
12:16भाई। दैट्स ऑल। यही पांच पॉइंट्स हैं
12:18जिनकी वजह से डिमांड कर्व हमेशा डाउनवर्ड
12:21स्लोप करता है नॉर्मल सिचुएशंस में। ठीक
12:23है? थैंक यू।