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Why Does Cheap Sell More? | The Demand Secret

Anish Academy 11th & 12th · 2,384 words · 11 min read

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0:08एक सेकंड के लिए इमेजिन करो अभी iPhone 17

0:11Pro Max का प्राइस कितना है? 1.5 लाख 1.5

0:15लाख। मान लो कि Apple रातोंरात एक ऑफर

0:20निकाल देता है कि कल सुबह से वही सेम मॉडल

0:23का प्राइस 500 हो जाता है। हमें पता है वो

0:26ऐसा नहीं करेंगे। एक बारी के लिए इमेजिन

0:28करो। अगर वो ऐसा करते हैं तो बताओ कमेंट

0:31करके कितने लोग खरीदने को तैयार हो जाओगे?

0:33बहुत सारे। ठीक है? अगर iPhone ने अपना

0:37प्राइस एकदम से अपना ₹1.5 लाख का जो

0:39आर्टिकल है वो 500 करा तो बहुत सारे लोग

0:42खरीदने को तैयार हो जाएंगे। नंबर वन बात।

0:44नंबर टू जो लोग पहले हल्का सा बजट अपना कम

0:48होने के कारण अदर अल्टरनेटिव्स लेने वाले

0:51थे कि भाई फॉर एग्जांपल Samsung की सीरीज

0:55देख रहे थे। प्रॉपर iPhone 17 Pro Max पर

0:57ही नहीं जा रहे थे। वो लोग भी कि अबे परे

1:00चल Samsung वो भी iPhone ही खरीदने आ

1:02जाएंगे। है ना? क्या हुआ ये? प्राइस हल्का

1:05सा कम हुआ और डिमांड एकदम से बढ़ गई। बेटा

1:08यही लॉ ऑफ़ डिमांड भी होता है। इसी को लॉ

1:11ऑफ़ डिमांड कहते हैं कि जब किसी चीज का

1:13प्राइस ज्यादा होता है ना, तो उसकी डिमांड

1:15थोड़ी कम होती है। लेकिन जैसे ही प्राइस कम

1:18होता है, उसकी डिमांड क्या हो जाती है?

1:20बढ़ जाती है। इस उल्टे रिलेशन को ही

1:22इनवर्स रिलेशनशिप कहते हैं। और इसी कारण

1:25की वजह से बेटा ये जो डिमांड का कर्व है

1:28ना ये जो डिमांड का ग्राफ है ये ऐसे नीचे

1:30की तरफ स्लोप करता है। डाउनवर्ड स्लोपिंग

1:32बनता है। ऐसे नीचे की तरफ। क्वेश्चन क्या

1:35है हमारा कि क्यों किसी गुड को ज्यादा

1:38खरीदा जाता है? जब उसका प्राइस गिर जाता

1:40है। व्हाई मोर ऑफ अ गुड इज बोट व्हेन इट्स

1:44प्राइस फॉल्स। क्यों किसी गुड को ज्यादा

1:46खरीदते हो? जब उसका प्राइस गिर जाता है या

1:49फिर ये डिमांड का कर्व ऐसा नेगेटिव क्यों

1:52बनता है? क्योंकि भाई प्राइस और डिमांड

1:54में एक इनवर्स रिलेशनशिप होता है। और यही

1:57रिलेशन लॉ ऑफ़ डिमांड भी समझाता है। जो

1:59अभी-अभी आपने जस्ट जो एग्जांपल इमेजिन करा

2:02था कि भाई अगर iPhone ने अपना प्राइस

2:04गिराया तो बहुत सारे लोग उसको खरीदने आ

2:06जाएंगे। अब बेटा इसके रीज़ंस क्या है? आज

2:09की वीडियो में हम ये कवर करेंगे। और इस

2:11वीडियो के अंदर हम सारे लाइव रियल लाइफ

2:13एग्जांपल्स डिस्कस करेंगे। और इस वीडियो

2:15के एंड तक ये टॉपिक आपका पक्का होगा। ठीक

2:18है? अब ऐसा होने के बेटा पांच मेजर कारण्स

2:21होते हैं। पांच मेजर कारण। नंबर वन इज़ लॉ

2:25ऑफ डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी। लॉ ऑफ

2:28डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी। बेटा ये

2:31क्या कहता है कि जैसे-जैसे आप कंजमशन

2:33बढ़ाते हो ना किसी चीज की उससे मिलने वाली

2:36सेटिस्फेक्शन हो जाती है कम। इसलिए

2:38कंज्यूमर ज्यादा पैसे खर्चने को इच्छा

2:41नहीं रखता। एग्जांपल से समझो। आप भाई सारा

2:44दिन से भूखे हो। आपने कुछ नहीं खा रखा।

2:46शाम को आपको भाई लेट इट बी का ही एक बर्गर

2:50मिला। आपने जैसे ही वो फर्स्ट बर्गर खाया।

2:53उसकी फर्स्ट बाइट खाई। आपको सबसे ज्यादा

2:55संतुष्टि, सेटिस्फेक्शन, यूटिलिटी वहां से

2:58मिली। आपने पैसे खर्चे, जितने मर्जी भी

3:00खर्चे हो भाई, सारा दिन से आप भूखे थे।

3:02आपने वो बर्गर खाया। आपको सेटिस्फेक्शन

3:04मिली। सारा दिन के भूखे थे। आपने एक पूरा

3:06बर्गर खा लिया। अब थोड़ी आपकी जो

3:10सेटिस्फेक्शन थी वो फुलफिल होगी। आपकी

3:12थोड़ी जो इतने टाइम की हंगर थी वो फुलफिल

3:15होगी। अब दूसरा बर्गर क्या बेटा बताओ उतनी

3:18सेटिस्फेक्शन देगा या उससे कम

3:19सेटिस्फेक्शन देगा? कम ही देगा ना। पहले

3:22बर्गर ने आपको बहुत सेटिस्फेक्शन दी

3:24क्योंकि आप सुबह से भूखे थे यार। अब जो

3:26दूसरा बर्गर है वो आपको थोड़ी सी कम

3:28सेटिस्फेक्शन देगा। उसके लिए ना आप वो

3:31प्राइस पे करने को राजी नहीं हो रहेगे जो

3:34आपने पहले बर्गर के लिए शायद कर दिया होगा

3:36क्योंकि आप सुबह से भूखे क्योंकि अब तो

3:38आपका पेट थोड़ा सा भर गया ना और तीसरे

3:40बर्गर के लिए तो उससे भी कम पैसे देने को

3:42राजी होगे। यही चीज को लॉ ऑफ़ डिमिनिशन

3:45मार्जिनल यूटिलिटी कहते हैं कि जैसे-जैसे

3:47कंसमशन बढ़ती है ना जो यूटिलिटी होती है

3:50यानी सेटिस्फेक्शन वो गिरने लग जाती है।

3:53ठीक है? ऑब्वियस सी बात है बेटा पहला

3:54गिलास पानी ज्यादा सेटिस्फेक्शन देता है

3:56एज़ कंपेयर टू थर्ड ग्लास। ठीक है? पहला

3:59बर्गर बच्चे को ज्यादा सेटिस्फेक्शन दे

4:00रहा होगा एज कंपेयर टू थर्ड या सेकंड

4:02बर्गर। तो जो कंज्यूमर है ना फिर वो चाह

4:06रहा होता है कि वो कम प्राइस पे करे

4:08प्रोडक्ट के लिए। ठीक है? तो एक तो रीज़ हो

4:10गया ये। नंबर टू रीज़न है बेटा इनकम

4:13इफेक्ट। जब किसी चीज के प्राइसेस गिरते

4:16हैं ना तो एक तरीके से एक कंज्यूमर की

4:19रियल इनकम बढ़ जाती है। एग्जांपल से समझो।

4:21मान लो पहले आप ₹10 की चॉकलेट खरीदते थे

4:26और आपके पास बजट था ₹100। आपका बजट कितना

4:29था भाई? ₹100 का आपका बजट था। अब इस ₹100

4:32के बजट में आप क्या करते थे? जी 10

4:34चॉकलेट्स खरीद लेते थे। अब बेटा अगर यही

4:37100% सेम साइज की सेम क्वालिटी की सेम

4:40ब्रांड की चॉकलेट

4:42जो ₹10 की आती थी 10 ईच ये 10 से हटकर ₹5

4:48की हो जाए। अगर यही चॉकलेट ₹5 की होगी

4:51बेटा तो अब शायद आप कितनी खरीद पाओगे ₹100

4:54में? अब आपके पास है तो ₹100 पहले आप 10

4:58खरीद पाते थे ₹10 की एक थी। अब आप कितनी

5:00खरीद पाओगे? 20 एक तरीके से क्या हुआ?

5:04प्राइस कम होने की वजह से ना कंज्यूमर को

5:06ऐसा लगता है कि उसकी थोड़ी सी इनकम बढ़

5:08गई। ठीक है? तो वो ज्यादा खरीदता है।

5:10दूसरा कारण ये है कि जब प्राइसेस गिरते

5:12हैं ना इससे कंज्यूमर की रियल इनकम जो है

5:14वो थोड़ी सी बढ़ जाती है। इसलिए वो ज्यादा

5:17खरीदने लग जाता है। ठीक है? दूसरा

5:19एग्जांपल ऐसे समझ सकते हो कि कोई फैमिली

5:21है मान लो भाई उनका मंथली इनकम है 25000

5:25और 10,000 का उनके घर में राशन आता है। अब

5:27अगर वही राशन 8,000 में आने लग जाए

5:30बिल्कुल सेम क्वालिटी कोई कॉम्प्रोमाइज

5:31नहीं कर रहे तो बेटा उसके पास वो 20,000

5:34एक्स्ट्रा ही बचेगा ना। वो उसकी एक

5:35एक्स्ट्रा इनकम होगी जिससे वो और खर्चा

5:38करेगा। इसके बाद बेटा आता है सब्सीट्यूशन

5:40इफ़ेक्ट। सब्सीट्यूशन इफ़ेक्ट के लिए आपको

5:43सबसे पहले समझना जरूरी है सब्स्टट्यूट

5:45गुड्स कौन सी होती है? जो एक दूसरे के

5:47बिल्कुल कॉम्पिटिट है। कोका कोला और

5:49पेप्सी ऐसे एग्जांपल वाले गुड्स। ठीक है?

5:52अब अगर प्राइस गिरता है ना आपके प्रोडक्ट

5:54का तो आपका गुड जो है वो सस्ता पड़ता है

5:57अपने सब्सीट्यूट्स के मुताबिक तो लोग आपके

6:00प्रोडक्ट की तरफ शिफ्ट हो जाते हैं।

6:02एग्जांपल से समझो भाई अभी कोका कोला और

6:04पेप्सी दोनों ₹20 की है। मान लेते हैं 2

6:07मिनट के लिए कि अभी कोका कोला और पेप्सी

6:11दोनों ही 250 ml ऑफर कर रहे हैं ₹20 में।

6:15कोक भी और पेप्सी भी। अब अगर

6:19कोका कोला यही 250 ml

6:22₹15 में ऑफर करनी स्टार्ट कर दे तो बेटा

6:26पहले तो ना डिमांड बटी हुई थी। बहुत लोग

6:28कोका कोला पीते थे। बहुत लोग पेप्सी भी

6:30पीते थे। ठीक है? अब बहुत सारे पेप्सी

6:33पीने वाले लोग भी कोका कोला की तरफ आ

6:36जाएंगे कि यार ये तो सस्ती पड़ रही है।

6:38ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट बराबर सी है। ठीक है?

6:40दोनों ब्लैक कलर की फजी ड्रिंक्स हैं। ठीक

6:43है? ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट टेस्ट सिमिलर भी है।

6:46तो बहुत सारे लोग जो पहले पेप्सी पीते थे

6:48वो कोका कोला पीने आ जाएंगे बेटा क्योंकि

6:51उनको अपनी जो वो पेप्सी पेप्सी करते रहते

6:53थे उससे सस्ती आपकी कोका कोला मिल गई। तो

6:56ये होता है सब्सीट्यूशन इफेक्ट कि जब

6:57प्राइस गिरता है ना तो जो हमारा गुड है वो

7:01अपने सब्स्टट्यूट्स के मुताबिक थोड़ा

7:02सस्ता बढ़ता है तो उसकी डिमांड बढ़ जाती

7:05है। तीन पॉइंट हो गए बेटा ये। इसके बाद

7:08फोर्थ पॉइंट है साइज ऑफ कंज्यूमर गुड।

7:10बेटा बहुत सारे ऐसे कंज्यूमर्स होते हैं

7:13जो पहले शायद हमारा प्रोडक्ट इसलिए नहीं

7:15खरीद पा रहे थे क्योंकि वो उनके बजट में

7:17नहीं आ रहा था। मान लो फॉर एग्जांपल एक

7:19कोई ऑनलाइन कोर्स है एजुकेशनल कोर्स है और

7:22उसका प्राइस है ₹10,000। अब कुछ नंबर ऑफ

7:26पर्सनंस उसको खरीदते भी हैं। अगर वही

7:28कोर्स बेटा ₹500 का हो गया तो कितने सारे

7:31कंज्यूमर्स के बजट में वो आ जाएगा। वो

7:33फटाफट से भाग के आएंगे वो हमारा वाला

7:35कोर्स खरीदने। तो वो कंज्यूमर ग्रुप के

7:38साइज की वजह से डिमांड जो है वो बढ़

7:40जाएगी। जब प्राइस गिरता है ना बहुत सारे

7:44न्यू बयरर्स अट्रैक्ट होते हैं जो पहले

7:46अपनी किसी मजबूरी के कारण हु वर नॉट एबल

7:49टू बाय एट द प्रीवियस प्राइसेस तो डिमांड

7:52बढ़ जाती है। जैसे मैंने अभी आपको बताया

7:54कि भाई अगर एक कोई कोर्स है एजुकेशनल

7:56कोर्स वो 10,000 का बिकता है। अगर वही सेम

7:59कोर्स ₹500 का हो जाए एक लिमिटेड टाइम ऑफर

8:02तो बहुत सारे लोग उसको खरीदने आ जाएंगे

8:05जिनके वो बजट में लाई कर रहा है कि भाई वो

8:07लिमिटेड टाइम ऑफर है। उसकी वजह से भी

8:09हमारे प्रोडक्ट की जो डिमांड होगी वो बढ़

8:11जाएगी। इसके बाद बेटा आखिरी पॉइंट आता है

8:14डिफरेंट यूज वाले गुड्स। कई गुड्स ऐसे

8:16होते हैं बेटा जिसके एक से ज्यादा यूजज़

8:18होते हैं। जैसे दूध दूध से बेटा कर्ड हो

8:21गया, पनीर हो गया, घी हो गया, मलाई हो गई।

8:24ठीक है? बहुत कुछ बनता है। इलेक्ट्रिसिटी।

8:26इलेक्ट्रिसिटी के कितने सारे यूज हैं। अब

8:29जब चीज महंगी होती है ना तो वो सिर्फ अपने

8:32प्राइम यूज के लिए ही प्रयोग की जाती है।

8:35जैसे अगर बिजली बहुत महंगी होगी ना तो

8:37उसका जो मेन प्राइम यूज़ है कि फॉर

8:39एग्जांपल लाइटिंग और फैन बेसिक में आ गया

8:42वो उसके लिए यूज़ होगी। लेकिन अगर बेटा ये

8:44बिजली सस्ती होगी तो उसके अलग-अलग यूजज़ बन

8:47जाएंगे। बहुत सारे चीजों पर जहां लोग

8:49अलग-अलग ऑप्शंस यूज़ करते थे ना लोग शिफ्ट

8:52हो जाएंगे भाई बिजली की तरफ। फॉर एग्जांपल

8:54कि भाई पेट्रोल डीजल महंगे पड़ रहे हैं।

8:55चलो इलेक्ट्रिक ले लो बिजली सस्ती है। फॉर

8:57एग्जांपल घर पे गैस स्टो महंगा पड़ रहा

8:59है। कोई बात नहीं जी हम इंडक्शन लगा

9:01लेंगे। माइक्रोवेव लगा लेंगे। एक्सट्रा

9:03एक्सट्रा यही ये पॉइंट है कि कुछ गुड्स

9:05होते हैं जैसे बिजली हो गया, दूध हो गया

9:07जिनके मल्टीपल यूजज़ होते हैं। जब प्राइस

9:10गिरता है ना तो ये गुड का बहुत सारे

9:14पर्पससेस के लिए प्रयोग होना स्टार्ट हो

9:15जाता है। सिंपल सी बात है ना यार? अगर भाई

9:18मान लो आपके एरिया में बिजली आती है ₹8 पर

9:20यूनिट। अगर यही बिजली सरकार ने ₹1 पर

9:23यूनिट कर दी। आपको तो बिल्कुल ही यू फील

9:25है कि यार ये तो मिट्टी भाव पड़ रहा है।

9:27कितना सस्ता सामान है। आप क्या करोगे भाई?

9:29आप भाई एसी भी खरीदोगे। वाशिंग मशीन भी

9:32आपकी फुल्ली ऑटोमेटिक चलेगी। ठीक है भाई।

9:34सर्दियों में हीटर भी चल रहा है। गर्मियों

9:36में एसी भी पूरा पूरा दिन चल रहे है। कोई

9:38परवाह नहीं। ठीक है। दिवाली आ रही है तो

9:3910-10 दिन तुम लड़िया ही लगा के रख रहे

9:41हो। कोई परवाह नहीं। जी सस्ती बिजली है।

9:43ये क्या करा आपने? लाइट का मेन यूज़ तो

9:45रोशनी देना था। जब वो चीज सस्ती होती है

9:48ना उसके कई अन्य यूज़ स्टार्ट हो जाते हैं

9:50तो उसकी डिमांड मार्केट में बेटा बनी रहती

9:52है। यही हमारा टॉपिक था। एक बार दोबारा

9:55फटाफट से जरा क्विक रिककैप करते हैं। पांच

9:57कारण है जिसकी वजह से डिमांड कर्व

10:00डाउनवर्ड स्लोप करता है या फिर किसी चीज

10:02को ज्यादा खरीदा जाता है जब उसका प्राइस

10:04गिर जाता है। पहला कारण लॉ ऑफ़ डिमिनिशिंग

10:07मार्जिनल यूटिलिटी कि जब कंज्यूमर ज्यादा

10:10कंज्यूम करता है तो सेटिस्फेक्शन कम हो

10:12जाती है। इसलिए वो ज्यादा प्राइस पे करने

10:15को तैयार नहीं हो रहा होता। ये इनवर्स

10:16रिलेशन समझाया है यहां पर। दूसरा पॉइंट

10:19आपका इनकम इफेक्ट। जब चीजों के प्राइस कम

10:22होते हैं ना तो एक तरीके से वो कंज्यूमर

10:24के लिए एक विनविन सिचुएशन होती है। उसको

10:26लगता है यार कि अ मेरी इनकम बढ़ गई एक

10:29तरीके से कि पहले भाई मेरे पास ₹100 का

10:31बजट था। ₹10 की एक चॉकलेट थी। 10 चॉकलेट

10:33सी खरीद पाता था। अब वही सेम चॉकलेट ₹5 की

10:36होगी। तो अब वो ज्यादा खरीद पाएगा। शायद

10:39अब वो 20 खरीद ले। ठीक है? वो चीज। तीसरा

10:41होता है सब्स्टट्यूशन इफेक्ट। बहुत सारे

10:44ऐसे लोग होते हैं बेटा जो मान लो अगर मैं

10:46बिजनेस के पॉइंट ऑफ व्यू से बात करूं तो

10:48हमारे कॉम्पिटिट से सामान खरीद रहे होते

10:50हैं कि जैसे कोका कोला का कॉम्पिटिट हो

10:51गया। कोका कोला का सब्स्टट्यूट हो गया

10:53पेप्सी। दोनों 2020 की 250 ml बेचते हैं।

10:56अब अगर कोका कोलाa वालों ने अपना 250 ml

11:00का प्राइस 20 से काट के 15 कर दिया तो

11:02बहुत सारे लोग जो पहले पेप्सी खरीदते थे

11:04ना वो दो मिनट नहीं लगाएंगे गद्दारी करने

11:07में। बेटा वो सीधा हमारे प्रोडक्ट की तरफ

11:09शिफ्ट हो जाएंगे। वो लोग भी कोका कोला

11:11पीने आ जाएंगे कि यार ₹5 बच रहे हैं। चार

11:14के पीछे एक बोतल फ्री होगी तो उससे डिमांड

11:17बनी रहेगी। उसके बाद आता है बेटा साइज ऑफ़

11:19कंज्यूमर गुड कि जो भी आपको एग्जांपल

11:21बताया कि पहले कोई गुड था वो ₹10,000 का

11:24था। अगर वही गुड, वही सर्विस, वही कोर्स

11:26₹500 का हो गया। तो भाई वो तो बहुत सारे

11:28लोगों के बजट में आ जाएगा ना। जो लोग पहले

11:30खरीद नहीं पा रहे थे किसी कारणवश, अपनी

11:32मजबूरी वश वो उनके बजट में आएगा। वो फटाफट

11:35से आएंगे खरीदने। डिमांड बनी रहेगी। और

11:37पांचवा है पॉइंट डिफरेंट यूज। बहुत सारे

11:40गुड्स के डिफरेंट यूज होते हैं। जैसे

11:42इलेक्ट्रिसिटी जब प्राइस गिरता है ना बेटा

11:44तो उसके कई यूज स्टार्ट हो जाते हैं। अब

11:46जैसे मान लो कोई फैमिली है जो फॉर

11:49एग्जांपल दूध नहीं भी पीती। अगर दूध का

11:52प्राइस बेटा बहुत सस्ता हो गया ना। मान लो

11:54फैमिली लैक्टोस इनटोलरेंट है उनको दूध

11:56डाइजेस्ट नहीं होता। अगर दूध का प्राइस

11:59बहुत कम हो गया ना तो बेटा अगर वो दूध पिए

12:02ना पिए उसके मल्टीपल यूज शायद स्टार्ट हो

12:04जाएंगे। जरूरी तो नहीं है ना कि दूध नहीं

12:06डाइजेस्ट हो रहा है तो दूध के सारे

12:07प्रोडक्ट्स ही ना हो। क्या पता भाई फिर वो

12:09उस दूध से घी भी बनाएंगे, पनीर भी

12:11बनाएंगे। ठीक है? कर्ड भी जमाएंगे और अन्य

12:14कई चीजें सारी। ठीक है? तो ये होता है

12:16भाई। दैट्स ऑल। यही पांच पॉइंट्स हैं

12:18जिनकी वजह से डिमांड कर्व हमेशा डाउनवर्ड

12:21स्लोप करता है नॉर्मल सिचुएशंस में। ठीक

12:23है? थैंक यू।

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