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Kismat Ka Khel | Kabhi Khushi Kabhi Gham | Old Moral Stories | Purane Qisse

Purane Qisse · 3,011 words · 14 min read

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0:03जमाना कदीम में किसी रियासत पर एक बादशाह

0:06हुकूमत करता था। वह बादशाह एक अच्छा और

0:10नेक दिल इंसान था। लेकिन ज्यादा अक्लमंद

0:13ना था। इसीलिए उसे हमेशा होशियार और

0:16समझदार लोगों की तलाश रहती थी। ताकि उसकी

0:20रियाया बेहतर हो और मुल्क तरक्की करके

0:23दुश्मनों को अपना गुलाम बना सके। बादशाह

0:26की अपनी मौजूदा रियाया भी उसे कुछ खास

0:29कारामद महसूस ना होती थी। वह लोग सिर्फ

0:32मशवरे देते थे और उसके बदले तनख्वाहें

0:35वसूल करते थे। मगर उनके मशवरों में वह

0:39तासीर ना थी जो बादशाह चाहता था। यह सोच

0:43अक्सर उसे बेचैन रखती। एक दिन बादशाह ने

0:46इसी उलझन से निजात के लिए अपने दरबारियों

0:49के साथ जंगल की सेर का इरादा किया। शायद

0:52कुदरत ही उसे किसी जवाब तक ले जाए। बादशाह

0:55जंगल पहुंचे और खूब शेर व तफरीह के बाद

0:59वापसी का सफर शुरू किया तो रास्ते में

1:02उनकी नजर एक अजीब मंजर पर पड़ी। एक शख्स

1:06एक बड़े दरख्त के नीचे बैठा हुआ था और वह

1:09खुद से बातें कर रहा था जो दूर से पागल और

1:13अजीब सा लग रहा था। यह देखकर बादशाह रुक

1:16गए। उनके दिल में ख्याल आया कि या तो यह

1:19शख्स पागल है या फिर गैर मामूली जहानत का

1:22मालिक जो अपनी ही दुनिया में गुम रहता है।

1:26तजसुस के मारे बादशाह अपने दरबारियों समय

1:29उस शख्स के करीब जा पहुंचे और उससे

1:32गुफ्तगू शुरू कर दी। वो शख्स बजाहिर आधा

1:35पागल लगता था। लेकिन उसकी बातों में एक

1:38अजीब किशिश थी। बादशाह ने नरमी से सवाल

1:41किया। ए नौजवान क्या तुम पागल हो जो खुद

1:45से बातें कर रहे हो। यह पागल बादशाह की

1:48पूरी सल्तनत बचाएगी। इस बात का किसी को

1:51गुमान तक नहीं था। लिहाजा पागल शख्स ने

1:54मुस्कुरा कर जवाब दिया, पागल तुम हो और

1:57तुम्हारा सारा रियाया। मैं तो बिल्कुल ठीक

2:00हूं। मैं तो सिर्फ यह चाहता हूं कि इस

2:03जंगल को काटकर यहां शानदार महल्लात तामीर

2:06किए जाएं। और उन महलात का बादशाह मैं खुद

2:09बनूं। उसकी बात में अजीब एतमाद और बेबाकी

2:12थी जो किसी आम पागल के बस की बात ना लगती

2:15थी। बादशाह और दरबारी उसके जवाब पर हैरान

2:19रह गए क्योंकि ऐसे जुमले या तो किसी

2:22दीवाने के होते हैं या फिर किसी ऐसे शख्स

2:25के जो दलेर और गैर मामूली जहानत का मालिक

2:28हो। बादशाह कुछ देर तक खामोशी से उसे

2:31देखता रहा। फिर दरबारियों से उस शख्स के

2:34बारे में मशवरा किया तो उनके अंदर छिपे

2:37लालच ने फौरन सर उठा लिया। वह आपस में

2:40चुपकेच-चुपके बातें करने लगे। किसी के दिल

2:43में यह खतशा था कि अगर यह शख्स बादशाह का

2:46मुशीरे खास बन गया तो हम उसके ताबे बन

2:49जाएंगे और हमारी अहमियत भी कम हो जाएगी।

2:53धीमे से एक दरबारी ने कहा यह खतरा है।

2:56कहीं ऐसा ना हो कि यह हम सब पर हावी हो

2:59जाए। दूसरे ने जल्दी से बोला। नहीं यह तो

3:03आधे से ज्यादा पागल है। होशियारी की तो

3:05इससे बिल्कुल उम्मीद ना रखनी चाहिए।

3:08लिहाजा बादशाह को कहे कि उसे अपने साथ ले

3:10जाए। दरबारियों का मानना था कि यह शख्स

3:14हमारा क्या बिगाड़ लेगा। लेकिन खुदा को

3:16कुछ और ही मंजूर था। बिल आखिर दरबारियों

3:19ने बादशाह को यह मशवरा दिया कि उसे महल ले

3:22जाया जाए। अगर बहादुर निकला तो काम आएगा।

3:26और अगर वाकई पागल हुआ तो उसे बाद में छोड़

3:30देंगे। बादशाह ने दरबारियों की राय पर अमल

3:32करते हुए बिस्मिल्लाह कहा और कुछ दबाव

3:36डालकर उस शख्स को अपने साथ चलने पर आमादा

3:39कर लिया। मगर रास्ते में अचानक उस शख्स ने

3:42घोड़े को दूसरी सिम्मत मोड़ दिया और कोशिश

3:45की कि भाग जाए। बादशाह और उसके दरबारी

3:49फौरन उसके पीछे लगा दिए। ताकतब करते हुए

3:53वो उसे दोबारा काबू में ले आए और उसी

3:56रास्ते से महल की जानिब रवाना हो गए। जैसे

3:59ही वह महल पहुंचे तो हैरतंगेज तौर पर वहां

4:03लोगों की भीड़ जमा थी। सब खुशी से नारे

4:06लगा रहे थे और बादशाह को मुबारकबाद दे रहे

4:09थे। बादशाह और उसके दरबारी यह देखकर हैरान

4:13रह गए और पूछा यह किस बात की मुबारकबाद

4:17है? लोगों ने बताया बादशाह सलामत। जिस

4:21रास्ते से आप शेर के लिए गए थे, वहां

4:24दुश्मन की भारी फौज घात में बैठी थी।

4:27जबरदस्त असलहे के साथ। हमें तो यकीन हो

4:30गया था कि आप कभी वापस नहीं आएंगे। यह

4:34सुनकर सबकी आंखों में हैरत, शुक्र और

4:38फिक्र की मिलीजुली कैफियत नुमाया थी।

4:40लोगों ने फिर खुशी से कहा, बादशाह सलामत।

4:44आप तो बहुत होशियार निकले। आपने रास्ता

4:47बदल दिया। बादशाह ने खामोशी से उस पागल

4:50शख्स की तरफ देखा और दिल में सोचा कि यह

4:54शख्स वाकई मामूली नहीं कुछ खास है। फिर

4:58उसने दरबारियों की तरफ मुतवजे होकर हुक्म

5:00दिया। जल्दी करो इस शख्स के लिए एक

5:03बेहतरीन कुर्सी तैयार करो। आज से यह मेरे

5:06साथ रहेगा। दरबारी जो पहले ही दिल में डरे

5:10हुए थे। फौरन बोल पड़े। बादशाह सलामत। यह

5:14शख्स तो पागल है। ऐसा ना हो कि आपको

5:16नुकसान पहुंचा दे। आपके साथ तो हम जैसे

5:19अक्लमंद लोगों को होना चाहिए। मगर बादशाह

5:22ने उनकी बात को रद्द करते हुए संजीदगी से

5:24कहा, नहीं, यह शख्स तुम सबसे ज्यादा जहीन

5:28है। चुपचाप होकर हमें खतरनाक दुश्मन से

5:31बचाया। यह होता है ज्यादा जहीन लोगों की

5:35निशानी। अगर यह ना होता तो तुम में से

5:38किसी को खबर भी ना होती कि रास्ते में

5:40दुश्मन घात लगाए बैठा है। हमारी सलामती

5:43इसी की होशियारी की बदौलत है। यह सुनकर

5:46पागल मुस्कुराया और फक्र से बादशाह के

5:49पहलों में रखी कुर्सी पर बैठ गया। मगर इस

5:52लम्हे से महल में एक नया तनाजा जन्म लेने

5:55लगा। दरबारी जो सदियों से नस्ल दर नस्ल उन

6:00कुर्सियों पर बैठते आए थे। किसी सूरत यह

6:03गवारा ना कर सके कि एक अजनबी और वह भी

6:06पागल कहलाने वाला उनके बराबर आ बैठे। वह

6:10दिल ही दिल में जलने लगे और उस शख्स के

6:13खिलाफ साजिशों का जाल बनने लगे। लेकिन

6:16जिसे अल्लाह ताला इज्जत अता करे उसे

6:20दुनिया की कोई ताकत गिरा नहीं सकता। इज्जत

6:23व जिल्लत का इख्तियार सिर्फ उसी के हाथ

6:26में है। यह कहानी सुनकर आपका अल्लाह की

6:29कुदरत पर यकीन और भी पुख्ता हो जाएगा।

6:33अल्लाह बादशाह को गिराकर फकीर बना सकता है

6:37और पागल को बादशाह बना सकता है। और जब वह

6:40किसी को बुलंद करना चाहे तो दुनिया की

6:43सारी साजिशें नाकाम हो जाती हैं।

6:46दरबारियों की साजिशें, उनका हसद और

6:49मुखालफत उस पागल को इज्जत कैसे देता है?

6:52आइए जानते हैं। एक दिन सुबह जब महल में

6:55दरबार सजा हुआ था। रियाया के चंद अफराद

6:58आगे बढ़े और उस शख्स के पास पहुंचे जिसे

7:02सब पागल कहा करते थे। अदब से बोले भाई

7:06साहब आप पर सलामती हो। हम आपसे कुछ जरूरी

7:10बात करना चाहते हैं। रियाया ने बात करते

7:12हुए कहा भाई साहब आपको हमारे बादशाह के

7:16उसूलों और दरबारी आदाब का कुछ अंदाजा

7:19नहीं। हम तो बस यह चाहते हैं कि आप किसी

7:22गलतफहमी में कोई ऐसा कदम ना उठा लें जिसकी

7:26वजह से आपको सजा भुगतनी पड़े। पागल ने

7:29हैरत से कहा क्या मतलब? मुझे सजा मिलेगी।

7:33मैंने तो कभी नहीं कहा था कि मुझे यहां

7:35महल लाया जाए। यह कैसी मुसीबत है? मुझे

7:38वापस ले चलो। उसकी बात सुनते ही रियाया के

7:42चेहरे पर एक हल्की सी खुशी की लहर दौड़

7:45गई। उन्हें लगा कि उनकी चाल कामयाब हो रही

7:48है। लेकिन बादशाह की डर से उसे डराकर महल

7:52से निकाल नहीं सकता। बल्कि नरमी से अपनी

7:55बात मनवाने की कोशिश करते हुए बोले भाई

7:58साहब आपको अंदाजा नहीं है कि अगर आप हमारी

8:02बात मानेंगे तो आपको क्या कुछ मिल सकता

8:04है। पागल जो सजा के लफ्ज से वैसे ही

8:07खौफजदा था। फौरन घबरा कर बोला ठीक है।

8:11बताओ क्या करना है? मौका देखकर एक मुशीर

8:15जो खुद बादशाह का करीबी मुशीर खास था और

8:18जिसकी कुर्सी अब उस पागल के जेरे कब्जा थी

8:21आगे बढ़ा और मौकारी से बोला हमारे दरबार

8:24की रिवायत है कि दरबार का आगाज तभी होता

8:27है जब कोई शख्स बादशाह को थप्पड़ मारे या

8:31कोई ऐसा अमल करे जिससे दरबार बेदार हो जाए

8:34पागल जो अक्ल से बिल्कुल पैदल था वो फौरन

8:38बोला अरे यह तो कोई बड़ी बात नहीं तपड़

8:41किया मैं मैं तो बादशाह को लात भी मार

8:44सकता हूं। रियाया ने उसकी बेवकूफी पर हंसी

8:46छिपाते हुए उसे शाबाशी दी और खुशी से मजीद

8:50उकसाया। जब बादशाह कुर्सी पर बैठे तो तुम

8:54जाकर उसकी गर्दन पर जोरदार तपड़ रसीद करो।

8:58फिर देखना बादशाह इतना खुश होगा कि

9:02तुम्हें ढेर सारे इहामात से नवाजेगा। पागल

9:05ने भूलपन से बात मान ली। जब अगले दिन

9:08दरबार लगा और बादशाह तख्त पर विराजमान हुआ

9:11तो पागल निहायत सादगी से आगे बढ़ा और एक

9:15जोरदार थप्पड़ बादशाह की गर्दन पर दे

9:17मारा। इस जोर से बादशाह का ताज दूर जा

9:20गिरा। लेकिन जैसे ही ताज जमीन से टुकराया

9:24उसके नीचे से एक खतरनाक बिच्छू निकल आया।

9:27बादशाह फौरन चौंक कर खड़ा हुआ और उसे यह

9:31समझते देर ना लगी कि अगर वह ताज सर पर रख

9:34लेता तो बिच्छू उसे काट लेता। शुक्रगुजारी

9:38से भरे दिल के साथ बादशाह ने पागल को सीने

9:41से लगा लिया। बादशाह ने पागल को सीने से

9:43लगाते हुए खुशी से कहा मेरे अजीजू यह

9:47सिर्फ एक शख्स है जो मुझसे सच्ची मोहब्बत

9:50रखता है। अगर यह मुझे थप्पड़ ना मारता तो

9:53आज शायद मेरा आखिरी दिन होता। बादशाह के

9:57हुक्म पर पागल के लिए एक शानदार दावत का

9:59एहतमाम किया गया और साथ ही उसे एक खूबसूरत

10:03महल भी इहाम में दे दिया गया। रियाया जो

10:06पहले ही उससे हसद में मुब्तला थे अब और भी

10:09परेशान हो गए। उनके दिलों में खौफ बैठ गया

10:12कि अगर यूं ही सिलसिला चलता रहा तो यह

10:16पागल उन सबकी कुर्सियों का वारिस बन

10:18जाएगा। चुनांचा वह आपस में सरगोशियां करने

10:22लगे। यार यह बंदा तो बहुत तेजी से ऊपर जा

10:25रहा है। कुछ करना पड़ेगा। वरना हमारी सब

10:29इज्जतें और रुतबे खत्म हो जाएंगे। दूसरी

10:32तरफ वो आधा पागल दिल ही दिल में सोच रहा

10:35था। यह रियाया तो वाकई बड़े सच्चे और

10:38हमदर्द लोग हैं। देखो कितना जबरदस्त मशवरा

10:42दिया था। खुशी-खुशी उसने दिल में फैसला कर

10:46लिया कि अब से जो भी यह लोग कहेंगे वही

10:49मानूंगा। अगले दिन रियाया दोबारा मशवरा

10:52करके उस पागल के महल पहुंचे। वह सब अंदर

10:55से तप रहे थे। मगर जाहरी चेहरों पर

10:58मुस्कुराहट सजाए बैठे थे। एक मुशीर ने

11:01नरमी से बात शुरू की। भाई साहब कल की

11:04तरकीब कैसी लगी? अगर आप थप्पड़ ना मारते

11:08तो बादशाह आप पर शक करता और शायद आपको सजा

11:12भी हो जाती। पागल जो अब इत्मीनान से महल

11:14में रह रहा था। मुस्कुरा कर बोला हां

11:18बिल्कुल आप लोग बहुत अच्छे हो। आपकी तरकीब

11:21ने मेरी किस्मत बदल दी। रियाया ने मौका

11:24गनीमत जाना और अगला जाल बिछाया। लेकिन यह

11:27तो सच है कि जिसे अल्लाह रखे उसे कौन चखे।

11:31जितना मर्जी आपके खिलाफ कोई साजिश करे।

11:35लेकिन अगर तुम सच्चे हो और अल्लाह

11:37तुम्हारे साथ है तो कोई कुछ नहीं बिगाड़

11:40सकता। रियाया ने पागल को मुखातिब करते हुए

11:42कहा अब एक और बात सुनो। सुबह जब दरबार लगे

11:47और बादशाह कुर्सी पर बैठने लगे तो तुम

11:49फौरन उसकी कुर्सी पीछे से खींच लेना।

11:52देखना तुम्हें आधी बादशाहत मिलेगी। यह काम

11:56आसान नहीं लेकिन तुम तो बहादुर हो कर

11:59लोगे। पागल जल्दी से बोला एक क्या? मैं तो

12:03दो कुर्सियां भी खींच सकता हूं। रियाया

12:06हस्बे मामूल उसे शाबाशी देते हुए रुखसत

12:08हुए और सुबह दरबार में वही हुआ जिसकी

12:12उन्होंने पागल को करने को कहा था। जैसे ही

12:15बादशाह तख्त पर बैठने लगा, पागल ने मौका

12:18देखकर कुर्सी पीछे खींच ली। मगर बादशाह ने

12:22खुद पर काबू रखते हुए गिरने से पहले संभल

12:25कर खड़ा हो गया। जब उसने पीछे मुड़कर देखा

12:28तो हैरान रह गया कि कुर्सी का एक पांव

12:31अंदर से पहले ही टूट चुका था। बादशाह ने

12:34फौरन पागल की तरफ देखा। उसे गले लगाया और

12:38बुलंद आवाज में सबके सामने कहा। देखो यह

12:42शख्स कितना होशियार और वफादार है। अगर यह

12:45ना होता तो मैं कुर्सी समेत जमीन पर गिरकर

12:48जख्मी हो जाता। फिर उसे तमगा इम्तियाज

12:51देकर अपने फौज का जर्नल मुंतखब कर दिया और

12:54दरबार में एक बार फिर उसकी बहादुरी की दाद

12:56दी गई। यह देखकर रियाया सर पकड़ कर रह गए।

13:00वह जो हर बार उसे गिराने आते उसी की इज्जत

13:04में इजाफा होता रहा। अब वह तंग आकर एक

13:07दूसरे से कहने लगे यार यह कैसी मुसीबत है

13:10हम तो चाहते हैं कि उसे सजा हो बादशाह

13:13नाराज हो और वह फांसी चढ़े मगर यह हर बार

13:17बाजी मार जाता है। अब मामला हाथ से निकलता

13:20देखकर मुशीरों ने एक गहरा मंसूबा बनाया।

13:23ऐसा मंसूबा जो पूरी सल्तनत को हिला कर रख

13:26सकता था। सब ने मिलकर फैसला किया कि वो

13:29पड़ोसी बादशाह से खुफिया राब्ता करेंगे।

13:32उसे जंग पर उकसाएंगे और वादा करेंगे कि हम

13:36तुम पर हमला करेंगे। लेकिन बादशाह को

13:38इत्मीनान दिया गया कि रियाया सब आपके साथ

13:42है। सब हम संभालेंगे। बस तुमने सिर्फ

13:46हमारे जर्नल को मारना है। बाकी सब कुछ हम

13:49पर छोड़ दे। रियाया ने यह साजिशी खत भेजा

13:52और दूसरी बादशाहत की जांच पड़ताल के बाद

13:55वह राजी हो गया। अब रह गई सिर्फ एक बात

13:59अपने बादशाह को जंग पर आमादा करना।

14:01चुनांचा रियाया ने अपने चंद आदमी जख्मी कर

14:04लिए और बादशाह के सामने आकर कहने लगे

14:08बादशाह सलामत हम कब तक सब्र करें। अगर कल

14:12आपको कुछ हो गया तो पूरी सल्तनत रोएगी।

14:15दुश्मन हमला आवर हो रहा है। हमें अभी

14:18फैसला करना होगा। मुख्तसर यह कि बादशाह ने

14:21जंग की ढोल बजा दी और अपने फौज को रियाया

14:24समेत जंग के लिए रवाना कर दिए। अब लश्कर

14:28का सिपा सालार पागल है। लेकिन सब मिलकर भी

14:31पागल का कुछ नहीं कर सकता। सिर्फ पुश्त

14:34पीछे हंस रहे थे। जब वह दुश्मन मुल्क की

14:37सरहद पर पहुंचे तो वहां की फौज पूरी

14:40तैयारी के साथ मौजूद थी। दोनों जानिब की

14:43अफवाज जब जंगल में दाखिल हुए तो पागल ने

14:46हुक्म दिया सब रुक जाओ। सबसे पहले मैं

14:49बादशाह से खुद लडूंगा क्योंकि वह कमांडर

14:52था। पूरी फौज रुक गई। पागल ने जोर से आवाज

14:56दी। ए बादशाह बाहर आ। दुश्मन बादशाह आया

15:00और दोनों जंगल के बीचोंबीच आमने-सामने

15:02खड़े हो गए। अचानक एक खूनखार शेर झाड़ियों

15:06से निकला और दुश्मन बादशाह पर हमला कर

15:08दिया। पागल जो असल में सिर्फ तलवार चलाना

15:12चाहता था। दिल में कोई जाती दुश्मनी नहीं

15:14रखता था। फौरन आगे बढ़ा और शेर से लड़ने

15:17लगा। एक सख्त जंग के बाद उसने शेर को मार

15:21गिराया और बादशाह को जख्मी हालत में उठाकर

15:24लाया। दुश्मन बादशाह खून से लथपत था लेकिन

15:28जिंदा बच गया। अपनी फौज को देखकर इस

15:31बादशाह ने कहा, नहीं लड़ाई नहीं होगी। मैं

15:34उस कमांडर को माफ करता हूं। उसने मेरी जान

15:37बचाई है। यह निहायत बहादर और होशियार शख्स

15:40है। हम जंग नहीं चाहते। हां जो रियाया

15:44उसके साथ आए थे उन्हें गिरफ्तार करके कैद

15:47में डाल दो। यह सुनकर पागल ने फौरन तलवार

15:50निकाली और गरज कर बोला खबरदार अगर किसी एक

15:54मुशीर को हाथ लगाया तो बादशाह ने उसकी

15:57वफादारी देखकर दिल ही दिल में कहा क्या

16:00कमाल का बंदा है। दुश्मनों को बचाता है और

16:04खुद को भूल जाता है। अब पागल का चर्चा

16:07पूरी रियासत में होने लगा। उसकी बहादुरी

16:10और सच्चाई ने सबके दिलों को जीत लिया।

16:13यहां तक कि बादशाह ने उसे अपनी बेटी के

16:16निकाह में दे दिया। रियाया जो पहले ही

16:20अंदर से जले बैठे थे। यह मंजर देखकर चुप

16:23तो रहे लेकिन हर कदम पर जिल्लत का बदला

16:27उनका मकसद बन गया। अब तो दोनों रियासतें

16:30एक बनने लगे। दोनों की दुश्मनी दोस्ती में

16:32बदल गई। लेकिन रियाया ने एक और नया जाल

16:36बनने का फैसला किया। एक दूसरे से कहने लगे

16:39अगर इस पागल को हमने ना रोका तो कल हम सब

16:42उसके गुलाम बन जाएंगे। उसे खत्म करना

16:45जरूरी है। सब ने एक जबान होकर हां कर दी।

16:49लेकिन उनमें एक बूढ़ा मुशीर भी था।

16:51तजुर्बाकार और दिल का नरम उसने बड़ी कमाल

16:55की बात कर दी। वो उठा और निहायत संजीदगी

16:59से बोला। दोस्तों मेरी बात गौर से सुनो।

17:02दुनिया में हर शख्स को अल्लाह ने एक खास

17:05मकाम, हैसियत और सिफत अता की है। और याद

17:08रखो जिसे अल्लाह इज्जत देता है, दुनिया की

17:11कोई ताकत वो इज्जत छीन नहीं सकती। अगर

17:14तुमने उसे मार भी दिया तो याद रखो उसकी

17:17इज्जत और भी बढ़ जाएगी। और अगर तुम यह समझ

17:20रहे हो कि उसके मरने से तुम्हें तुम्हारी

17:23खोई हुई कुर्सी वापस मिल जाएगी तो तुम

17:25धोखे में हो। एक दिन सच सामने आ जाएगा और

17:29तुम सब अपने अंजाम को पहुंचोगे। लिहाजा

17:32अल्लाह की रजा पर रजा हो जाओ। इसी में

17:35हमारे लिए बेहतरी है। उसने सांस लिया और

17:38फिर नरमी से कहा, तुम सब सिर्फ एक बात समझ

17:41लो। वह बजाहिर पागल है, लेकिन अल्लाह ने

17:45उसे एक नायाब सिफत अता की है। किस्मत अगर

17:49पूरी रियासत भी उसके खिलाफ हो जाए तो वह

17:52अकेला ही जीत जाएगा। लिहाजा उससे उलझने के

17:56बजाय खुद सच्चाई इख्तियार करो। सारे

17:59रियाया ने अपने हसद पर तौबा किया और कुछ

18:02वक्त बाद पागल वफात हुआ और रियाया फिर से

18:06अपने रुतबू पर फायज हुए। तो दोस्तों यह

18:10कहानी बजाहिर एक फनी कहानी लगती है लेकिन

18:13इसमें एक हकीकी सच छुपा है जैसे हमें

18:16तस्लीम करना होगा और वह है सच्चाई। किस्मत

18:20और अल्लाह का करम। हमें भी कभी किसी से

18:23हसद नहीं करना चाहिए। क्योंकि अगर कोई

18:26किसी ओहदे या रुतबे पर फायज है और कामयाब

18:29हुआ है तो वह उनकी मेहनत का सिला हो सकता

18:32है। उसकी अच्छी किस्मत हो सकती है या

18:35उसमें ऐसे सिफात हो सकते हैं जिसकी वजह से

18:39अल्लाह ने उसे वह इज्जत दी है। कोशिश करें

18:42वह सिफात अपनाए मेहनत करे। सच्चाई

18:46इख्तियार करें। शायद वही इज्जत तुम्हें भी

18:48मिले। लेकिन हसद ना करें। तारीख इस बात का

18:52गवाह है मुनाफिक लोग और हसद करने वाले कभी

18:56कामयाब नहीं होते। हमेशा मैदान सच्चे

18:59लोगों का ही होता है। मुझे उम्मीद है आपने

19:02इस कहानी से बहुत कुछ सीखा होगा। हमारे

19:05चैनल पर बेहतरीन और सबक आमोस कहानियां

19:08मौजूद है। अगर आपको पसंद है तो उसे लाजमी

19:11देखें। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो

19:14लाइक करें। कमेंट में अपनी राय जरूर दें

19:18और मजीद ऐसी दिलचस्प वो सबक आमोस कहानियों

19:21के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके

19:24घंटी को दबाना ना भूलें। आपकी हिमायत का

19:28शुक्रिया। हम्म।

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