Full transcript
0:03जमाना कदीम में किसी रियासत पर एक बादशाह
0:06हुकूमत करता था। वह बादशाह एक अच्छा और
0:10नेक दिल इंसान था। लेकिन ज्यादा अक्लमंद
0:13ना था। इसीलिए उसे हमेशा होशियार और
0:16समझदार लोगों की तलाश रहती थी। ताकि उसकी
0:20रियाया बेहतर हो और मुल्क तरक्की करके
0:23दुश्मनों को अपना गुलाम बना सके। बादशाह
0:26की अपनी मौजूदा रियाया भी उसे कुछ खास
0:29कारामद महसूस ना होती थी। वह लोग सिर्फ
0:32मशवरे देते थे और उसके बदले तनख्वाहें
0:35वसूल करते थे। मगर उनके मशवरों में वह
0:39तासीर ना थी जो बादशाह चाहता था। यह सोच
0:43अक्सर उसे बेचैन रखती। एक दिन बादशाह ने
0:46इसी उलझन से निजात के लिए अपने दरबारियों
0:49के साथ जंगल की सेर का इरादा किया। शायद
0:52कुदरत ही उसे किसी जवाब तक ले जाए। बादशाह
0:55जंगल पहुंचे और खूब शेर व तफरीह के बाद
0:59वापसी का सफर शुरू किया तो रास्ते में
1:02उनकी नजर एक अजीब मंजर पर पड़ी। एक शख्स
1:06एक बड़े दरख्त के नीचे बैठा हुआ था और वह
1:09खुद से बातें कर रहा था जो दूर से पागल और
1:13अजीब सा लग रहा था। यह देखकर बादशाह रुक
1:16गए। उनके दिल में ख्याल आया कि या तो यह
1:19शख्स पागल है या फिर गैर मामूली जहानत का
1:22मालिक जो अपनी ही दुनिया में गुम रहता है।
1:26तजसुस के मारे बादशाह अपने दरबारियों समय
1:29उस शख्स के करीब जा पहुंचे और उससे
1:32गुफ्तगू शुरू कर दी। वो शख्स बजाहिर आधा
1:35पागल लगता था। लेकिन उसकी बातों में एक
1:38अजीब किशिश थी। बादशाह ने नरमी से सवाल
1:41किया। ए नौजवान क्या तुम पागल हो जो खुद
1:45से बातें कर रहे हो। यह पागल बादशाह की
1:48पूरी सल्तनत बचाएगी। इस बात का किसी को
1:51गुमान तक नहीं था। लिहाजा पागल शख्स ने
1:54मुस्कुरा कर जवाब दिया, पागल तुम हो और
1:57तुम्हारा सारा रियाया। मैं तो बिल्कुल ठीक
2:00हूं। मैं तो सिर्फ यह चाहता हूं कि इस
2:03जंगल को काटकर यहां शानदार महल्लात तामीर
2:06किए जाएं। और उन महलात का बादशाह मैं खुद
2:09बनूं। उसकी बात में अजीब एतमाद और बेबाकी
2:12थी जो किसी आम पागल के बस की बात ना लगती
2:15थी। बादशाह और दरबारी उसके जवाब पर हैरान
2:19रह गए क्योंकि ऐसे जुमले या तो किसी
2:22दीवाने के होते हैं या फिर किसी ऐसे शख्स
2:25के जो दलेर और गैर मामूली जहानत का मालिक
2:28हो। बादशाह कुछ देर तक खामोशी से उसे
2:31देखता रहा। फिर दरबारियों से उस शख्स के
2:34बारे में मशवरा किया तो उनके अंदर छिपे
2:37लालच ने फौरन सर उठा लिया। वह आपस में
2:40चुपकेच-चुपके बातें करने लगे। किसी के दिल
2:43में यह खतशा था कि अगर यह शख्स बादशाह का
2:46मुशीरे खास बन गया तो हम उसके ताबे बन
2:49जाएंगे और हमारी अहमियत भी कम हो जाएगी।
2:53धीमे से एक दरबारी ने कहा यह खतरा है।
2:56कहीं ऐसा ना हो कि यह हम सब पर हावी हो
2:59जाए। दूसरे ने जल्दी से बोला। नहीं यह तो
3:03आधे से ज्यादा पागल है। होशियारी की तो
3:05इससे बिल्कुल उम्मीद ना रखनी चाहिए।
3:08लिहाजा बादशाह को कहे कि उसे अपने साथ ले
3:10जाए। दरबारियों का मानना था कि यह शख्स
3:14हमारा क्या बिगाड़ लेगा। लेकिन खुदा को
3:16कुछ और ही मंजूर था। बिल आखिर दरबारियों
3:19ने बादशाह को यह मशवरा दिया कि उसे महल ले
3:22जाया जाए। अगर बहादुर निकला तो काम आएगा।
3:26और अगर वाकई पागल हुआ तो उसे बाद में छोड़
3:30देंगे। बादशाह ने दरबारियों की राय पर अमल
3:32करते हुए बिस्मिल्लाह कहा और कुछ दबाव
3:36डालकर उस शख्स को अपने साथ चलने पर आमादा
3:39कर लिया। मगर रास्ते में अचानक उस शख्स ने
3:42घोड़े को दूसरी सिम्मत मोड़ दिया और कोशिश
3:45की कि भाग जाए। बादशाह और उसके दरबारी
3:49फौरन उसके पीछे लगा दिए। ताकतब करते हुए
3:53वो उसे दोबारा काबू में ले आए और उसी
3:56रास्ते से महल की जानिब रवाना हो गए। जैसे
3:59ही वह महल पहुंचे तो हैरतंगेज तौर पर वहां
4:03लोगों की भीड़ जमा थी। सब खुशी से नारे
4:06लगा रहे थे और बादशाह को मुबारकबाद दे रहे
4:09थे। बादशाह और उसके दरबारी यह देखकर हैरान
4:13रह गए और पूछा यह किस बात की मुबारकबाद
4:17है? लोगों ने बताया बादशाह सलामत। जिस
4:21रास्ते से आप शेर के लिए गए थे, वहां
4:24दुश्मन की भारी फौज घात में बैठी थी।
4:27जबरदस्त असलहे के साथ। हमें तो यकीन हो
4:30गया था कि आप कभी वापस नहीं आएंगे। यह
4:34सुनकर सबकी आंखों में हैरत, शुक्र और
4:38फिक्र की मिलीजुली कैफियत नुमाया थी।
4:40लोगों ने फिर खुशी से कहा, बादशाह सलामत।
4:44आप तो बहुत होशियार निकले। आपने रास्ता
4:47बदल दिया। बादशाह ने खामोशी से उस पागल
4:50शख्स की तरफ देखा और दिल में सोचा कि यह
4:54शख्स वाकई मामूली नहीं कुछ खास है। फिर
4:58उसने दरबारियों की तरफ मुतवजे होकर हुक्म
5:00दिया। जल्दी करो इस शख्स के लिए एक
5:03बेहतरीन कुर्सी तैयार करो। आज से यह मेरे
5:06साथ रहेगा। दरबारी जो पहले ही दिल में डरे
5:10हुए थे। फौरन बोल पड़े। बादशाह सलामत। यह
5:14शख्स तो पागल है। ऐसा ना हो कि आपको
5:16नुकसान पहुंचा दे। आपके साथ तो हम जैसे
5:19अक्लमंद लोगों को होना चाहिए। मगर बादशाह
5:22ने उनकी बात को रद्द करते हुए संजीदगी से
5:24कहा, नहीं, यह शख्स तुम सबसे ज्यादा जहीन
5:28है। चुपचाप होकर हमें खतरनाक दुश्मन से
5:31बचाया। यह होता है ज्यादा जहीन लोगों की
5:35निशानी। अगर यह ना होता तो तुम में से
5:38किसी को खबर भी ना होती कि रास्ते में
5:40दुश्मन घात लगाए बैठा है। हमारी सलामती
5:43इसी की होशियारी की बदौलत है। यह सुनकर
5:46पागल मुस्कुराया और फक्र से बादशाह के
5:49पहलों में रखी कुर्सी पर बैठ गया। मगर इस
5:52लम्हे से महल में एक नया तनाजा जन्म लेने
5:55लगा। दरबारी जो सदियों से नस्ल दर नस्ल उन
6:00कुर्सियों पर बैठते आए थे। किसी सूरत यह
6:03गवारा ना कर सके कि एक अजनबी और वह भी
6:06पागल कहलाने वाला उनके बराबर आ बैठे। वह
6:10दिल ही दिल में जलने लगे और उस शख्स के
6:13खिलाफ साजिशों का जाल बनने लगे। लेकिन
6:16जिसे अल्लाह ताला इज्जत अता करे उसे
6:20दुनिया की कोई ताकत गिरा नहीं सकता। इज्जत
6:23व जिल्लत का इख्तियार सिर्फ उसी के हाथ
6:26में है। यह कहानी सुनकर आपका अल्लाह की
6:29कुदरत पर यकीन और भी पुख्ता हो जाएगा।
6:33अल्लाह बादशाह को गिराकर फकीर बना सकता है
6:37और पागल को बादशाह बना सकता है। और जब वह
6:40किसी को बुलंद करना चाहे तो दुनिया की
6:43सारी साजिशें नाकाम हो जाती हैं।
6:46दरबारियों की साजिशें, उनका हसद और
6:49मुखालफत उस पागल को इज्जत कैसे देता है?
6:52आइए जानते हैं। एक दिन सुबह जब महल में
6:55दरबार सजा हुआ था। रियाया के चंद अफराद
6:58आगे बढ़े और उस शख्स के पास पहुंचे जिसे
7:02सब पागल कहा करते थे। अदब से बोले भाई
7:06साहब आप पर सलामती हो। हम आपसे कुछ जरूरी
7:10बात करना चाहते हैं। रियाया ने बात करते
7:12हुए कहा भाई साहब आपको हमारे बादशाह के
7:16उसूलों और दरबारी आदाब का कुछ अंदाजा
7:19नहीं। हम तो बस यह चाहते हैं कि आप किसी
7:22गलतफहमी में कोई ऐसा कदम ना उठा लें जिसकी
7:26वजह से आपको सजा भुगतनी पड़े। पागल ने
7:29हैरत से कहा क्या मतलब? मुझे सजा मिलेगी।
7:33मैंने तो कभी नहीं कहा था कि मुझे यहां
7:35महल लाया जाए। यह कैसी मुसीबत है? मुझे
7:38वापस ले चलो। उसकी बात सुनते ही रियाया के
7:42चेहरे पर एक हल्की सी खुशी की लहर दौड़
7:45गई। उन्हें लगा कि उनकी चाल कामयाब हो रही
7:48है। लेकिन बादशाह की डर से उसे डराकर महल
7:52से निकाल नहीं सकता। बल्कि नरमी से अपनी
7:55बात मनवाने की कोशिश करते हुए बोले भाई
7:58साहब आपको अंदाजा नहीं है कि अगर आप हमारी
8:02बात मानेंगे तो आपको क्या कुछ मिल सकता
8:04है। पागल जो सजा के लफ्ज से वैसे ही
8:07खौफजदा था। फौरन घबरा कर बोला ठीक है।
8:11बताओ क्या करना है? मौका देखकर एक मुशीर
8:15जो खुद बादशाह का करीबी मुशीर खास था और
8:18जिसकी कुर्सी अब उस पागल के जेरे कब्जा थी
8:21आगे बढ़ा और मौकारी से बोला हमारे दरबार
8:24की रिवायत है कि दरबार का आगाज तभी होता
8:27है जब कोई शख्स बादशाह को थप्पड़ मारे या
8:31कोई ऐसा अमल करे जिससे दरबार बेदार हो जाए
8:34पागल जो अक्ल से बिल्कुल पैदल था वो फौरन
8:38बोला अरे यह तो कोई बड़ी बात नहीं तपड़
8:41किया मैं मैं तो बादशाह को लात भी मार
8:44सकता हूं। रियाया ने उसकी बेवकूफी पर हंसी
8:46छिपाते हुए उसे शाबाशी दी और खुशी से मजीद
8:50उकसाया। जब बादशाह कुर्सी पर बैठे तो तुम
8:54जाकर उसकी गर्दन पर जोरदार तपड़ रसीद करो।
8:58फिर देखना बादशाह इतना खुश होगा कि
9:02तुम्हें ढेर सारे इहामात से नवाजेगा। पागल
9:05ने भूलपन से बात मान ली। जब अगले दिन
9:08दरबार लगा और बादशाह तख्त पर विराजमान हुआ
9:11तो पागल निहायत सादगी से आगे बढ़ा और एक
9:15जोरदार थप्पड़ बादशाह की गर्दन पर दे
9:17मारा। इस जोर से बादशाह का ताज दूर जा
9:20गिरा। लेकिन जैसे ही ताज जमीन से टुकराया
9:24उसके नीचे से एक खतरनाक बिच्छू निकल आया।
9:27बादशाह फौरन चौंक कर खड़ा हुआ और उसे यह
9:31समझते देर ना लगी कि अगर वह ताज सर पर रख
9:34लेता तो बिच्छू उसे काट लेता। शुक्रगुजारी
9:38से भरे दिल के साथ बादशाह ने पागल को सीने
9:41से लगा लिया। बादशाह ने पागल को सीने से
9:43लगाते हुए खुशी से कहा मेरे अजीजू यह
9:47सिर्फ एक शख्स है जो मुझसे सच्ची मोहब्बत
9:50रखता है। अगर यह मुझे थप्पड़ ना मारता तो
9:53आज शायद मेरा आखिरी दिन होता। बादशाह के
9:57हुक्म पर पागल के लिए एक शानदार दावत का
9:59एहतमाम किया गया और साथ ही उसे एक खूबसूरत
10:03महल भी इहाम में दे दिया गया। रियाया जो
10:06पहले ही उससे हसद में मुब्तला थे अब और भी
10:09परेशान हो गए। उनके दिलों में खौफ बैठ गया
10:12कि अगर यूं ही सिलसिला चलता रहा तो यह
10:16पागल उन सबकी कुर्सियों का वारिस बन
10:18जाएगा। चुनांचा वह आपस में सरगोशियां करने
10:22लगे। यार यह बंदा तो बहुत तेजी से ऊपर जा
10:25रहा है। कुछ करना पड़ेगा। वरना हमारी सब
10:29इज्जतें और रुतबे खत्म हो जाएंगे। दूसरी
10:32तरफ वो आधा पागल दिल ही दिल में सोच रहा
10:35था। यह रियाया तो वाकई बड़े सच्चे और
10:38हमदर्द लोग हैं। देखो कितना जबरदस्त मशवरा
10:42दिया था। खुशी-खुशी उसने दिल में फैसला कर
10:46लिया कि अब से जो भी यह लोग कहेंगे वही
10:49मानूंगा। अगले दिन रियाया दोबारा मशवरा
10:52करके उस पागल के महल पहुंचे। वह सब अंदर
10:55से तप रहे थे। मगर जाहरी चेहरों पर
10:58मुस्कुराहट सजाए बैठे थे। एक मुशीर ने
11:01नरमी से बात शुरू की। भाई साहब कल की
11:04तरकीब कैसी लगी? अगर आप थप्पड़ ना मारते
11:08तो बादशाह आप पर शक करता और शायद आपको सजा
11:12भी हो जाती। पागल जो अब इत्मीनान से महल
11:14में रह रहा था। मुस्कुरा कर बोला हां
11:18बिल्कुल आप लोग बहुत अच्छे हो। आपकी तरकीब
11:21ने मेरी किस्मत बदल दी। रियाया ने मौका
11:24गनीमत जाना और अगला जाल बिछाया। लेकिन यह
11:27तो सच है कि जिसे अल्लाह रखे उसे कौन चखे।
11:31जितना मर्जी आपके खिलाफ कोई साजिश करे।
11:35लेकिन अगर तुम सच्चे हो और अल्लाह
11:37तुम्हारे साथ है तो कोई कुछ नहीं बिगाड़
11:40सकता। रियाया ने पागल को मुखातिब करते हुए
11:42कहा अब एक और बात सुनो। सुबह जब दरबार लगे
11:47और बादशाह कुर्सी पर बैठने लगे तो तुम
11:49फौरन उसकी कुर्सी पीछे से खींच लेना।
11:52देखना तुम्हें आधी बादशाहत मिलेगी। यह काम
11:56आसान नहीं लेकिन तुम तो बहादुर हो कर
11:59लोगे। पागल जल्दी से बोला एक क्या? मैं तो
12:03दो कुर्सियां भी खींच सकता हूं। रियाया
12:06हस्बे मामूल उसे शाबाशी देते हुए रुखसत
12:08हुए और सुबह दरबार में वही हुआ जिसकी
12:12उन्होंने पागल को करने को कहा था। जैसे ही
12:15बादशाह तख्त पर बैठने लगा, पागल ने मौका
12:18देखकर कुर्सी पीछे खींच ली। मगर बादशाह ने
12:22खुद पर काबू रखते हुए गिरने से पहले संभल
12:25कर खड़ा हो गया। जब उसने पीछे मुड़कर देखा
12:28तो हैरान रह गया कि कुर्सी का एक पांव
12:31अंदर से पहले ही टूट चुका था। बादशाह ने
12:34फौरन पागल की तरफ देखा। उसे गले लगाया और
12:38बुलंद आवाज में सबके सामने कहा। देखो यह
12:42शख्स कितना होशियार और वफादार है। अगर यह
12:45ना होता तो मैं कुर्सी समेत जमीन पर गिरकर
12:48जख्मी हो जाता। फिर उसे तमगा इम्तियाज
12:51देकर अपने फौज का जर्नल मुंतखब कर दिया और
12:54दरबार में एक बार फिर उसकी बहादुरी की दाद
12:56दी गई। यह देखकर रियाया सर पकड़ कर रह गए।
13:00वह जो हर बार उसे गिराने आते उसी की इज्जत
13:04में इजाफा होता रहा। अब वह तंग आकर एक
13:07दूसरे से कहने लगे यार यह कैसी मुसीबत है
13:10हम तो चाहते हैं कि उसे सजा हो बादशाह
13:13नाराज हो और वह फांसी चढ़े मगर यह हर बार
13:17बाजी मार जाता है। अब मामला हाथ से निकलता
13:20देखकर मुशीरों ने एक गहरा मंसूबा बनाया।
13:23ऐसा मंसूबा जो पूरी सल्तनत को हिला कर रख
13:26सकता था। सब ने मिलकर फैसला किया कि वो
13:29पड़ोसी बादशाह से खुफिया राब्ता करेंगे।
13:32उसे जंग पर उकसाएंगे और वादा करेंगे कि हम
13:36तुम पर हमला करेंगे। लेकिन बादशाह को
13:38इत्मीनान दिया गया कि रियाया सब आपके साथ
13:42है। सब हम संभालेंगे। बस तुमने सिर्फ
13:46हमारे जर्नल को मारना है। बाकी सब कुछ हम
13:49पर छोड़ दे। रियाया ने यह साजिशी खत भेजा
13:52और दूसरी बादशाहत की जांच पड़ताल के बाद
13:55वह राजी हो गया। अब रह गई सिर्फ एक बात
13:59अपने बादशाह को जंग पर आमादा करना।
14:01चुनांचा रियाया ने अपने चंद आदमी जख्मी कर
14:04लिए और बादशाह के सामने आकर कहने लगे
14:08बादशाह सलामत हम कब तक सब्र करें। अगर कल
14:12आपको कुछ हो गया तो पूरी सल्तनत रोएगी।
14:15दुश्मन हमला आवर हो रहा है। हमें अभी
14:18फैसला करना होगा। मुख्तसर यह कि बादशाह ने
14:21जंग की ढोल बजा दी और अपने फौज को रियाया
14:24समेत जंग के लिए रवाना कर दिए। अब लश्कर
14:28का सिपा सालार पागल है। लेकिन सब मिलकर भी
14:31पागल का कुछ नहीं कर सकता। सिर्फ पुश्त
14:34पीछे हंस रहे थे। जब वह दुश्मन मुल्क की
14:37सरहद पर पहुंचे तो वहां की फौज पूरी
14:40तैयारी के साथ मौजूद थी। दोनों जानिब की
14:43अफवाज जब जंगल में दाखिल हुए तो पागल ने
14:46हुक्म दिया सब रुक जाओ। सबसे पहले मैं
14:49बादशाह से खुद लडूंगा क्योंकि वह कमांडर
14:52था। पूरी फौज रुक गई। पागल ने जोर से आवाज
14:56दी। ए बादशाह बाहर आ। दुश्मन बादशाह आया
15:00और दोनों जंगल के बीचोंबीच आमने-सामने
15:02खड़े हो गए। अचानक एक खूनखार शेर झाड़ियों
15:06से निकला और दुश्मन बादशाह पर हमला कर
15:08दिया। पागल जो असल में सिर्फ तलवार चलाना
15:12चाहता था। दिल में कोई जाती दुश्मनी नहीं
15:14रखता था। फौरन आगे बढ़ा और शेर से लड़ने
15:17लगा। एक सख्त जंग के बाद उसने शेर को मार
15:21गिराया और बादशाह को जख्मी हालत में उठाकर
15:24लाया। दुश्मन बादशाह खून से लथपत था लेकिन
15:28जिंदा बच गया। अपनी फौज को देखकर इस
15:31बादशाह ने कहा, नहीं लड़ाई नहीं होगी। मैं
15:34उस कमांडर को माफ करता हूं। उसने मेरी जान
15:37बचाई है। यह निहायत बहादर और होशियार शख्स
15:40है। हम जंग नहीं चाहते। हां जो रियाया
15:44उसके साथ आए थे उन्हें गिरफ्तार करके कैद
15:47में डाल दो। यह सुनकर पागल ने फौरन तलवार
15:50निकाली और गरज कर बोला खबरदार अगर किसी एक
15:54मुशीर को हाथ लगाया तो बादशाह ने उसकी
15:57वफादारी देखकर दिल ही दिल में कहा क्या
16:00कमाल का बंदा है। दुश्मनों को बचाता है और
16:04खुद को भूल जाता है। अब पागल का चर्चा
16:07पूरी रियासत में होने लगा। उसकी बहादुरी
16:10और सच्चाई ने सबके दिलों को जीत लिया।
16:13यहां तक कि बादशाह ने उसे अपनी बेटी के
16:16निकाह में दे दिया। रियाया जो पहले ही
16:20अंदर से जले बैठे थे। यह मंजर देखकर चुप
16:23तो रहे लेकिन हर कदम पर जिल्लत का बदला
16:27उनका मकसद बन गया। अब तो दोनों रियासतें
16:30एक बनने लगे। दोनों की दुश्मनी दोस्ती में
16:32बदल गई। लेकिन रियाया ने एक और नया जाल
16:36बनने का फैसला किया। एक दूसरे से कहने लगे
16:39अगर इस पागल को हमने ना रोका तो कल हम सब
16:42उसके गुलाम बन जाएंगे। उसे खत्म करना
16:45जरूरी है। सब ने एक जबान होकर हां कर दी।
16:49लेकिन उनमें एक बूढ़ा मुशीर भी था।
16:51तजुर्बाकार और दिल का नरम उसने बड़ी कमाल
16:55की बात कर दी। वो उठा और निहायत संजीदगी
16:59से बोला। दोस्तों मेरी बात गौर से सुनो।
17:02दुनिया में हर शख्स को अल्लाह ने एक खास
17:05मकाम, हैसियत और सिफत अता की है। और याद
17:08रखो जिसे अल्लाह इज्जत देता है, दुनिया की
17:11कोई ताकत वो इज्जत छीन नहीं सकती। अगर
17:14तुमने उसे मार भी दिया तो याद रखो उसकी
17:17इज्जत और भी बढ़ जाएगी। और अगर तुम यह समझ
17:20रहे हो कि उसके मरने से तुम्हें तुम्हारी
17:23खोई हुई कुर्सी वापस मिल जाएगी तो तुम
17:25धोखे में हो। एक दिन सच सामने आ जाएगा और
17:29तुम सब अपने अंजाम को पहुंचोगे। लिहाजा
17:32अल्लाह की रजा पर रजा हो जाओ। इसी में
17:35हमारे लिए बेहतरी है। उसने सांस लिया और
17:38फिर नरमी से कहा, तुम सब सिर्फ एक बात समझ
17:41लो। वह बजाहिर पागल है, लेकिन अल्लाह ने
17:45उसे एक नायाब सिफत अता की है। किस्मत अगर
17:49पूरी रियासत भी उसके खिलाफ हो जाए तो वह
17:52अकेला ही जीत जाएगा। लिहाजा उससे उलझने के
17:56बजाय खुद सच्चाई इख्तियार करो। सारे
17:59रियाया ने अपने हसद पर तौबा किया और कुछ
18:02वक्त बाद पागल वफात हुआ और रियाया फिर से
18:06अपने रुतबू पर फायज हुए। तो दोस्तों यह
18:10कहानी बजाहिर एक फनी कहानी लगती है लेकिन
18:13इसमें एक हकीकी सच छुपा है जैसे हमें
18:16तस्लीम करना होगा और वह है सच्चाई। किस्मत
18:20और अल्लाह का करम। हमें भी कभी किसी से
18:23हसद नहीं करना चाहिए। क्योंकि अगर कोई
18:26किसी ओहदे या रुतबे पर फायज है और कामयाब
18:29हुआ है तो वह उनकी मेहनत का सिला हो सकता
18:32है। उसकी अच्छी किस्मत हो सकती है या
18:35उसमें ऐसे सिफात हो सकते हैं जिसकी वजह से
18:39अल्लाह ने उसे वह इज्जत दी है। कोशिश करें
18:42वह सिफात अपनाए मेहनत करे। सच्चाई
18:46इख्तियार करें। शायद वही इज्जत तुम्हें भी
18:48मिले। लेकिन हसद ना करें। तारीख इस बात का
18:52गवाह है मुनाफिक लोग और हसद करने वाले कभी
18:56कामयाब नहीं होते। हमेशा मैदान सच्चे
18:59लोगों का ही होता है। मुझे उम्मीद है आपने
19:02इस कहानी से बहुत कुछ सीखा होगा। हमारे
19:05चैनल पर बेहतरीन और सबक आमोस कहानियां
19:08मौजूद है। अगर आपको पसंद है तो उसे लाजमी
19:11देखें। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो
19:14लाइक करें। कमेंट में अपनी राय जरूर दें
19:18और मजीद ऐसी दिलचस्प वो सबक आमोस कहानियों
19:21के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके
19:24घंटी को दबाना ना भूलें। आपकी हिमायत का
19:28शुक्रिया। हम्म।