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Mahajanapada Period | Ancient History of India | Crack UPSC CSE 22/23 With Madhukar Kotawe

Let's Crack UPSC CSE Hindi · 15,785 words · 72 min read

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0:00झाल

0:12झाल का

0:24झाल

0:36झाल

0:44फोटो गुड इवनिंग रेमिडी लेकर आया कि

0:46यूपीएससी हिंदी में आप सभी का भरपूर

0:51स्वागत है बहुत ही लंबा इंतजार और फाइनली

0:56वह समय आ गया जब हम प्राचीन भारत के

0:59इतिहास में महाजनपद काल तक पहुंच चुके हैं

1:04सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन धन्यवाद कि आपने

1:09इतिहास की घड़ी को इतना ज्यादा तरह इतना

1:13ज्यादा पसंद किया कि हमारी पूरी टीम

1:16निरंतर बेहतर से बेहतर करने का प्रयास कर

1:20रही है और करती रहेगी अपने प्राचीन भारत

1:25के इतिहास में सबसे पहले सिंधु घाटी

1:27सभ्यता को पूरी तरह से समझ चुके थे फिर

1:31हमने वैदिक काल को दो भागो में पढ़ाता रिग

1:34वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल के रूप में

1:38उत्तर वैदिक काल का समय वह समय था जहां पर

1:43नोएडा

1:44यो यो अब बढ़ गया था और लोहे के उपयोग के

1:49बढ़ने के कारण माना जाता है कि कभी-कभी एक

1:53धातु भी दुनिया बदल सकती हैं उसका एक

1:57बेहतरीन उदाहरण महाजनपद काल के रूप में

2:01मिलता है जो लाली पहली बार इस कक्षा से

2:05जुड़ेंगे मैं पहले पूरी बैकग्राउंड वाली

2:08स्टोरी जरूर बताऊंगा और फिर हम शुरुआत

2:10करेंगे महाजनपद काल के रूप में प्यारा

2:15चीजों को समझने की शुरुआत करते हैं बिलकुल

2:18जीरो से और इंटरनेट में यदि कुछ दिक्कत आ

2:21जाए तो घबराइए नहीं थोड़ा रिप्लेस करते

2:24चलिए का ये क्योंकि आज इंटरनेट की अवरोधों

2:27यह बाधाएं भी महाजनपद काल के इस पूरी

2:31कक्षा को रोक नहीं पाएगी इसी ऊर्जा के साथ

2:35आज हम महाजनपद काल के हर आयाम को समझने का

2:40प्रयास करेंगे शुरुआत करते हैं

2:44कि एग्जाम रस एक्सक्लूसिव चैनल है जिस पर

2:47आप लोग कदम कदम बढ़ाए जा मुख से जुड़ सकते

2:50हैं एक YouTube चैनल हैं जिस पर आप लोग अ

2:53आंसर राइटिंग के लिए हमारे साथ जुड़ सकते

2:55हैं अपनी तैयारी को भारत की सबसे बड़ी

2:59एजुकेटर टीम के साथ कर सकते हैं भारत की

3:02सबसे बड़ी एनर्जी टीम के साथ कर सकते हैं

3:05इस समय अनिकेत मी प्रॉमिस वीक सेलिब्रेट

3:09किया जा रहा है और जिसके बाद आपको 7 जुलाई

3:13जी हां कल तक कल आखिरी दिन है यदि आप

3:16सब्सक्रिप्शन लेते हैं तो अनेक रेडमी नोट

3:18इससे रिलेटिड मींस तक का सब्सक्रिप्शन

3:22आपको दिया जा रहा है वन ईयर का एसएससी और

3:25बैंक मे सब्सक्रिप्शन फ्री दिया जा रहा है

3:27वह यार उससे ज्यादा के सबमिशन पर प्रॉमिस

3:31वी के तक 2 साल या उससे अधिक सब्सक्रिप्शन

3:33में सलेक्शन होने पर वन ईयर का

3:35सब्सक्रिप्शन फ्री दिया जाएगा ₹3000 तक की

3:39टेस्ट सीरीज और कोंबो ऑफर भी दिए जा रहे

3:43हैं

3:44आज संडे के दिन जी हां 11 जुलाई को एक

3:48स्पेशल सुबह 11बजे कॉम्बैक्ट एस रखा जा

3:52रहा है मेगा कमबैक तेज जिसमें आप जीत सकते

3:55हैं कई सारे प्राइस और 500 एंकर भी अमेजॉन

4:01वाउचर प्राप्त कर सकेंगे इसके अलावा हम कह

4:05सकते हैं कि आपके पास इस समय एक बेहतरीन

4:08उस समय जिसमें आप सारी चीजों को एक ही बार

4:12में एक ही फीस के माध्यम से प्राप्त कर

4:18सकते टेस्ट सीरीज नोट्स लाइव क्लासेस

4:21रिकॉर्ड क्लासेस मल्टी एजूकेटर सारी चीजें

4:25लोन के माध्यम से भी आप अपनी तैयारी कर

4:28सकते हैं यदि आपको आर्थिक समस्या आ रही है

4:32तो लोन के माध्यम से भी आप अपनी तैयारी को

4:34बेहतर कर सकते हैं आईकॉनिक सब्सक्रिप्शन

4:37में आप चुन सकते हैं कि सबसे बेहतरीन न

4:42केवल आपको मेंटर

4:44आ जाएंगे बल्कि आपका लाइव टेस्ट और मींस

4:47क्वेश्चन आंसर प्रैक्टिस भी होगी एमपी

4:50लाइव रेफर कोड यूज करते चलिएगा इंस्टंट

4:53अधीन पड़ते डिस्काउंट के अलावा हमारे साथ

4:56जुड़ने के लिए आप एमके लाइव रेफर कोड

4:59उपयोग करते चलिए का या 7 जुलाई से कई सारे

5:02नए बैच बनाने जा रहे हैं हिस्सा बन सकते

5:05आप इन बीच का भी और आईए शुरुआत करते हैं

5:10महाजनपद काल शुरुआत करते हैं महाजनपद काल

5:14और महाजनपद काल में आज हम क्या-क्या

5:16पढेंगे हम पढेंगे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

5:20महाजनपदों के ऐतिहासिक स्त्रोत या क्या है

5:24राज्यतंत्र गणतंत्र पर आधारित महाजनपद

5:28सोलह महाजनपद के बारे में प्रमुख जानकारी

5:32महाजनपद की सामाजिक स्थिति महाजनपदों की

5:36आर्थिक स्थिति महाजनपदों की राजनीतिक

5:40स्थिति मदद का उत्कर्ष क्यों मगध महाजनपद

5:43इतने

5:44व्यक्ति शादी बना उसके कारण और परिणाम

5:47क्या हुए तो आइए सबसे पहले एक कहानी के

5:51रूप में चीजों को समझना मेरे हिसाब से

5:54कहानी के रूप में समझना कि नाना-नानी

5:57दादा-दादी बता देख राजा हुआ करता था उसके

5:59साथ ऐसा हुआ था हुआ और एक परिणाम जिंदगी

6:02भर के लिया तो कुछ कहानी से हम शुरुआत

6:05करेंगे बिलकुल ऐसी बातों से शुरुआत करेंगे

6:08कि आपको कहीं से कहीं तक उन चीजों को

6:12रत्ना पड़े कहानी की शुरुआत आज फिर लगभग

6:17300 साल पहले हमने करवाई थी सिंधु घाटी

6:21सभ्यता के रूप में कहानी की शुरुआत सिंधु

6:24घाटी सभ्यता के रूप में लगभग 300 साल पहले

6:27मतलब स्थित इस साल पहले नहीं जीरो टाइम से

6:3220 साल पहले मतलब आज का 21 जोड़ दीजिए और

6:352300 तो लगभग आप कह सकते हैं कि सारे 4

6:38हज़ार साल पहले की बातचीत थी सपने पहले तो

6:42हमें सिंधु घाटी सभ्यता एक का

6:44शौर्य सभ्यता के प्रमाण मिलते हैं और उस

6:47सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में आज तक पूरी

6:51तरह से स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं

6:53है जितनी विकसित सभ्यता उस दौर में आखिर

6:57इस जगह कैसे विकसित हुई कई सारी कल्पनाए

7:00कई सारी बातें कई सारी चीजें वहां से जो

7:04प्राप्त हुई उसके आधार पर में बहुत कुछ

7:06जानकारी सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में

7:09पता चलता है लेकिन सिंधु घाटी सभ्यता का

7:13पतन होता है सिंधु घाटी सभ्यता जिसे सैंधव

7:17सभ्यता सप्त नदी वाली जो सभ्यता थी मीणा

7:21वह सभ्यता के बारे में पता चलता है लेकिन

7:25वास्तविक रूप में इसका पतन होता है कई

7:28कारण बताए जाते हैं कि पतन हुआ जैसे

7:30डायनासोर के विलुप्त होने की बातों में कई

7:33सारे रीजन है वे सिंधु घाटी सभ्यता की

7:35विलुप्ति में समाप्ति में पतन में कई सारे

7:38कारण है वह बात वहां पर ख़त्म करते और

7:42उसके बाद कुछ वर्षों तक पता ही

7:44स्पाइक इतिहास कहा जा रहा है लोग उस

7:48इतिहास की खोज में लगे रहे हमें पता चलता

7:52है कि लगभग 1500 पूर्व दिशा पूर्व आर्य

8:01नामक कुछ लोगों के द्वारा उक्त स्थान से

8:04थोड़ा पूर्व की ओर एक विशेष प्रकार की

8:09खानाबदोश खानाबदोश मतलब कव्वाली कव्वाली

8:13कव्वाली सभ्यता का विकास होता है जिसमें

8:16लोग एक तरीके से एक जगह से दूसरी जगह जाना

8:20हम कह सकते हैं कि जो आदिमानव वाले थे

8:23लगभग वैसी ही कुछ बातें इस सभ्यता में

8:26मिलती हैं जिसे हम कहते हैं जिसमें मैंने

8:30दो थे ऋग्वेद ऋग्वेद ऋग्वेद से इसके बारे

8:36में जानकारी मिली कोई प्रमाणिक इतिहास की

8:39जानकारी नहीं है यह जानकारी एक ग्रंथों के

8:43रूप में प्राप्त होती है

8:44कि रिग वैदिक काल लगभग 1000 ईसा पूर्व तक

8:49चलता है उसके बाद जाता है उत्तर वैदिक काल

8:53लोहे की खोज होती हैं और लोहे की खोज 1000

8:56ईसा पूर्व में जब होती है पर इसका उपयोग

8:59बढ़ता है तो लगभग 600 ईसा पूर्व तक उत्तर

9:03वैदिक काल आता है

9:08कि यह इसका अगला ही शरण जिसमें कि धर्म

9:11धार्मिक कर्मकांड बहुत बढ़ जाते हैं कई

9:14प्रकार के रीति-रिवाज कई प्रकार की

9:17रूढ़ीवादिता कई प्रकार के अंधविश्वास कई

9:20सारी बातें इसमें इक्वल 600 ईसा पूर्व तक

9:26माना जाता है और फिर चार तो ईसा पूर्व तक

9:29मतलब अगर हम बात करें तो यह 2320 पूर्व से

9:33लेकर आप 1750 ईसा पूर्व तक मान लीजिए का

9:38या फिर यह लगभग 1500 ईसा पूर्व से लेकर

9:42हजार ईसा पूर्व तक मान लीजिए का यह प्रिय

9:45हजार ईसा पूर्व से लेकर 600 ईसा पूर्व तक

9:49मांग लीजिएगा का यह 600 ईसा पूर्व थे लेकर

9:5240 ईसा पूर्व तक की बात चल रही है जिसे

9:55महाजनपद काल कहते हैं तो सबसे पहले तो

9:59सिंधु घाटी सभ्यता फिर बीच में

10:01कनेक्टिविटी ब्रेक है हमें नहीं पता कि

10:04यहां क्या हुआ कैसे हुआ किस तरीके की घटना

10:07हुई

10:08के दिन टाइम मशीन बनेगी हम लोग आनंद लेंगे

10:10और देखेंगे कि सिंधु घाटी सभ्यता के बाद

10:13पतंग कैसे हुआ और वह 228 को साल इस भारत

10:18की भूमि पर या फिर उस जगह पर आखिर क्या

10:21हुआ फिर रिग वैदिक काल की बात आएगी उत्तर

10:26वैदिक काल की बात आएगी और फिर महाजनपद काल

10:28की बात आएगी महाजनपद काल के दौरान ही

10:31बौद्ध धर्म और जैन धर्म का भारत में विकास

10:34विस्तार उदय ही कई सारी बातें धर्म से भी

10:37जुड़ी हुई मिलती है उसे भी नहीं कक्षा में

10:40देखेंगे अब हम बात करने जा रहे हैं

10:42महाजनपद काल कि आपके मन में पहला सवाल

10:44होगा कि सब इसका नाम महाजनपद काल कहते हैं

10:47तो जैसे इकोलॉजी एनवायरमेंट में हम जानते

10:51हैं कि Jio से मिलकर बनता है समुद्र आएं

10:55समुदाय से मिलकर बनते हैं पारिस्थितिकी

10:58तंत्र पारिस्थितिकी तंत्रों से मिलकर बनते

11:01हैं जैवमंडल भाइयों भाइयों से मिलकर बनता

11:04है जैव मंडल बायोस्फीयर कुछ ऐसी कहानी समझ

11:08झाल हमें थोड़ा सा इमैजिनेशन कर रहा हूं

11:11ताकि विद्यार्थी जो पहली बार इतिहास पढ़

11:14रहे हैं उसको मजा आए कि हां यार मैं चीजे

11:16समझ रहा हूं और मुझे समझ में आ रहा है कि

11:18बोलना क्या चाहते हैं तो रिग वैदिक काल

11:22बिल्कुल एक तरीके से पुराना प्राचीन समाज

11:26कबीलाई समाज छोटी-छोटी ग्राम ग्राम परिवार

11:32का मुखिया ग्राम का मुखिया इस तरीके से

11:35थोड़ा-बहुत चेंजेस और फाइनल कुछ छोटी-छोटी

11:39चीजें शक्ति के रूप में दिख रही है मतलब

11:42हम कहेंगे कि गांव से थोड़ी बड़ी इकाई

11:45तहसील जैसी कई हम यहां पर मजबूती के साथ

11:48दिखती है तो हम कहते कि मैं यहां पर लोगों

11:51को आखिरी रूप में जो शक्तिशाली का मीणा वह

11:54सही धीर

11:57और फिर उत्तर वैदिक काल आते-आते हमें उन

12:01दिनों से भी कुछ बड़े दिमाग लीजिए कि अब

12:03इन्होंने क्या कर दिया कि इन पर आक्रमण

12:05किया कल्पना करिए इन पर आक्रमण किया इन पर

12:08आक्रमण कर दिया इन पर आक्रमण कर दिया एक

12:10बड़ा सा क्षेत्र बना दिया प्रिंसिपल

12:12आक्रमण किया इन पर आक्रमण किया एक बड़ा सा

12:14क्षेत्र बना दिया जैसे फिर जुड़ गए फिर यह

12:18जुड़ गए तो हमने उनसे कहा कि यह जेलों से

12:20मिलकर बने तो यह जनपद हैं अब यहां पर लोग

12:23का एक तरीके से इस ही बसने लगे इस कारण से

12:27इसका नाम जनपद रखा जहां पर लोग स्थाई बसने

12:30लगे थे अभी बड़े क्षेत्र थे और इन्हें भी

12:35फिर प्रतिस्पर्धा हुई अपनी शक्ति का

12:37विस्तार करने की में भी विचार आएं और इस

12:40तरीके से इनमें जब शक्ति विस्तार के लिए

12:43राजाओं ने या इनके जो भी शासक से इनके बीच

12:47में संघर्ष हुआ तो इन जनपदों से मिलकर बने

12:51महाजनपद और ऐसे सोलह महाजनपद ता

12:57पर न हमें ऐतिहासिक रूप में जैन और बौद्ध

13:01धर्म के किताबों में प्राप्त होता है हम

13:05देखेंगे कौन-सी किताब मिलता है वह अफेक्ट

13:07अपनी जगह पर पहली कहानी समझना अभिजित

13:11थोड़ा व्यावहारिक चलते भी ऐसा कैसे हुआ

13:13होगा बड़ा व्यावहारिक है आप अपने थोड़ा सा

13:18व्यावहारिक चीजों को देखते चलेगा आप जहां

13:20रहते थे वहां से लगभग 10 साल पहले 20 साल

13:23पहले की बात पूछेगा कि आपका गांव का शहर

13:26कितना छोटा था फिर आप के गांव का शहर का

13:29विस्तार हुआ था वहां पर साइड में कॉलोनी

13:32पड़ गई होगी दूसरी साइड में कॉलोनी बढ़ गई

13:35होगी तो एक विस्तार हुआ मान लीजिए कि एक

13:37शहर के बाद दूसरा शहर जुड़ने लग गया है तो

13:40वहां दोनों के शासन प्रकार आने लगेंगे तो

13:43कोई न कोई एक को शक्तिशाली बनना पड़ेगा का

13:46या तो इस तरीके से राजनीतिक विस्तार होते

13:50चले गए और राजनीतिक विचारों के कारण उनके

13:54नामों में भी बदलाव आता गया तो

13:57अपने पहले हमें जन्म मिलते हैं जंग से

14:00मिलते हैं जनपद बनते हैं जनपदों से मिलकर

14:03महाजनपद बनते हैं बोला महाजनपद तो इसे याद

14:08कैसे रखेंगे हम जब भी कोई बात कहते तो

14:10उनके बीच सोलह आने सही है धर्म 16 आनी

14:14चाहिए एक हमारे आर्थिक रूप में जो इकाई

14:17हुआ करती थी तो इसको ला महाजनपद पोला आने

14:20से याद रखना है उस अपने पहले में 16

14:23महाजनपदों के बारे में फेक्चुअल जानकारी

14:25जो भी अवेलेबल है इतिहास में उन पर चर्चा

14:28करेंगे लेकिन मैं आपको एक बात बता दूं कि

14:31यह 16 महाजनपद आप में से कई लोगों को आसान

14:34लगेंगे जिन्होंने महाभारत पुराने वाला

14:39महाव्रत मैंने नया mahabharat-19 लेकर

14:40जिसने महाभारत सीरियल पुराना देखा हुआ है

14:43तो मेरे सभी लाभों से रिक्वेस्ट है कि आप

14:47महाभारत जरूर देख लीजिए का ये क्योंकि

14:50महाभारत अगर देखोगे तो कई सारी चीजें आपको

14:53इसमें याद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी जैसे

14:55पांचाल मिलता है महान

14:57शपथ पांचाल मिलेगा तो आपको दिक्कत नहीं

15:00जाएगी कुरु मिलेगा पूरा जॉन्च वाला फिर

15:03छेदी मिलेगा शिशुपाल वाला शिशुपाल कृष्ण

15:08ने अवतार लिया माप की थी तो थोड़ी सी

15:11महाभारत की बातें कि बीच-बीच में बताते

15:13चलूं का यह क्योंकि कई सारी बातें कई सारे

15:16राजा कई सारे राजवंश फिर आपने अंगराज कर्ण

15:19का नाम सुना होगा अंगराज कर्ण वह अंग

15:23महाजनपद अंग महाजनपद खुसरो करेंगे महाभारत

15:28से मिल रहा है तो क्या महाभारत पूरा सकते

15:30हैं तो हमारा वह बिल्कुल भी नहीं उसकी

15:34सत्यता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा हूं

15:37मैं उपस्थित हुआ हूं कि वह महान इतिहासकार

15:40जिन्होंने इतिहास का वर्णन किया बातें

15:44बताते हैं इस इतिहास के बारे में तथ्यों

15:48को कई सारी चीजों को कई सारी जगह से गया

15:52है लेकिन कोई गलती मिल जाती है तो उसे

15:55मानवीय गलती के रूप में आप

15:57फेसबुक में सुधार देना बस हाथ जोड़कर मेरी

15:59इतनी विनती आप लोगों से हैं पर हमारी टीम

16:03ने हर चीज को बहुत बारीकी से जाता है पर

16:06इतिहास का विषय झगड़े का विषय होता है

16:09मेरे में ऐसा इसलिए कहता हूं मैं क्योंकि

16:12कहीं में कई सारी बातें बदलती चली जाती

16:15हैं कोई रात गिरी कहेगा कुछ राजगृह कहेंगे

16:18चलता रहता है जीवन चलने दीजिएगा ऐसे ही तो

16:22आइए आनंद लेते हुए पड़ेगा आज समझेगा कि आज

16:25महाजनपद काल में हम फ्राई मशीन में आप सभी

16:28लोगों को लेकर जा रहे हैं और सभी

16:30महाजनपदों के बारे में दिखाऊंगा कि हम

16:32अफगानिस्तान की सीमा तक जाएंगे पाकिस्तान

16:35अफगानिस्तान की बॉर्डर पड़ जाएंगे हम

16:37देखेंगे कंबोज को हम देखेंगे गांधार को हम

16:40आपको पश्चिम बंगाल की सीमा तक भी लेकर

16:42जाएंगे जहां अंगराज कर्ण का अंग महाजनपद

16:46है दक्षिण में भी लेकर जाएंगे जा आसन इस

16:49टाइप का महाजनपद भी हैं और राजस्थान में

16:52भी जाएंगे जाम मत्स्य महाजनपद की बात

16:54करेंगे तो आइए देखते हैं

16:57इन थिस टाइम मशीन में कैसे लिया जाएगा सभी

17:01लोग अपने कुर्सी की पेटियां बांधेंगे टाइम

17:04मशीन की रफ्तार थोड़ी बढ़ सकती है शुरुआत

17:07करते हैं जिंदगी खेलती भी उसी के साथ है

17:11जो खिलाड़ी बेहतरीन होता है दर्द सब देखते

17:15हैं मगर हौंसले सबके अलग-अलग है वह हताश

17:18होकर बिखर जाता है तो कोई संघर्ष करके

17:21निखर जाता है आईए शुरुआत के साथ ही मशीन

17:26का बटन दबाते हैं और शुरुआत करते हैं

17:29महाजनपद काल की सबसे पहले हम जानते हैं कि

17:34जो सिंधु घाटी सभ्यता का जगह थी वह यह कि

17:37बाउंड्री मानी जाती है जो वर्तमान में हम

17:40कह सकते हैं कि भारत का उत्तर पश्चिम भारत

17:43पाकिस्तान पूरा उसमें डाल दीजिए

17:44अफगानिस्तान का कुछ क्षेत्र और कुछ इरान

17:47का हिस्सा भी डाल दीजिए फिर उसके बाद

17:50वेदिक कल्चर में हमें उत्तर वैदिक काल और

17:52रिग वैदिक काल में रिग वैदिक काल का यह

17:55क्षेत्र मिलता है उत्तर वैदिक

17:57कि हम पूर्वकी ओर और आगे बढ़ते हैं

17:59महाजनपद काल में अभी हम पूर्व की ओर आगे

18:02बढ़ेंगे और अब यह हिस्सा थोड़ा सा इतना ही

18:06सिमट जाएगा तो लगातार पूर्व की ओर इतिहास

18:09गति कर रहा है यह मानकर चलेगा कि सिंधु

18:12घाटी सभ्यता से जो चलना हमने शुरू किया तो

18:15पूर्व की ओर लगातार प्रसंग चल रहा है

18:18सिंधु घाटी सभ्यता में जो सोलह महाजनपद

18:21हैं पिछली कक्षाओं में सिंधु घाटी सभ्यता

18:23और पूर्व वैदिक काल के बारे में उन्हें

18:26विस्तार से अध्ययन किया सिंधु घाटी सभ्यता

18:28के अज्ञात कारणों की वजह से पतन के बाद

18:31कुछ अवधि के लिए भारतीय इतिहास अव्यक्त

18:33रहता है इसके बाद लगभग 15 को ईसा पूर्व

18:36भारत में आर्यों द्वारा विकसित वैदिक

18:39सभ्यता का दृष्टांत मिलता है मतलब व

18:42आदमियों के द्वारा आर्य कहां से आए थे उस

18:44पर हमने चर्चा एक संक्षिप्त में की थी

18:46उक्त मेडिकल को रिग वैदिक और उत्तर वैदिक

18:49काल के रूप में दो भागों में विभक्त है

18:51वैदिक काल की अंतिम अवधि साफ 600 ईसा

18:54पूर्व मानी गई है और 600 इस आप

18:57भारतीय ऐतिहासिक पटल पर व्यापक परिवर्तन

18:59होते हैं सुधा सिंधु घाटी सभ्यता के प्रथम

19:02नागरिक क्रांति के बाद यह काल द्वितीय

19:05नगरीकरण का दौर माना जाता है कुर्सी की

19:08पेटियां बाद में के बाद यदि आप कभी हवाई

19:11यात्रा करेंगे और कर चुके होंगे तो फिर

19:13एयरहोस्टेस जाती है और आपको कुछ

19:15इंस्ट्रक्शन देती है तो समझ जाइएगा कि

19:18टाइम मशीन में पहला इंस्ट्रक्शन है इसके

19:20पहले हम लोगों ने जो यात्रा की थी वह

19:22सिंधु घाटी सभ्यता की थी हमें नहीं पता वह

19:24कैसे खत्म हुई कुछ समय के लिए कोई जानकारी

19:27नहीं फिल्म वैदिक काल में आते हैं वैदिक

19:29काल में पहले रिग वैदिक काल की यात्रा

19:31हमने कि टाइम मशीन में उसके बाद उत्तर

19:34वैदिक काल में हम पहुंचे थे लें अब हमारी

19:36टाइम मशीन आपको महाजनपद काल में लेकर जा

19:39रही हैं आप सभी लोग केवल बातों को सुनेंगे

19:42महाजनपद काल को ध्यान से पढ़ते समय गौर

19:45करेंगे कि हर महाजनपद काल का राजा कौन है

19:48राजधानी कौन है कौन शक्तिशाली था और कुछ

19:52महत्वपूर्ण बिंदु इस टाइम मशीन के द्वारा

19:55हम सब जगह आपको बताते

19:57हुआ है

19:59हैं तो इस काल में महाजनपदों का उदय होने

20:02के साथ जैन और बौद्ध धर्म का भी विकास

20:04होता है तो महाजनपद काल के दौरान ही हमारे

20:07इस क्षेत्र में हमें दो नए धर्म का उदय भी

20:10मिलता है यहां से भारतीय इतिहास को एक

20:13निश्चित और क्रमबद्ध दिशा प्राप्त होती

20:15हैं और आगे चलकर फिर भारत का इतिहास उत्तर

20:18भारत और दक्षिण भारत के रूप में बढ़ जाता

20:21है क्योंकि या पूर्व की ओर विस्तार खत्म

20:23हो जाने के बाद अब भारत में दक्षिण की ओर

20:26शासक अपना विस्तार करना प्रारंभ करते हैं

20:29फिर यहां से हम उत्तर भारत का इतिहास अलग

20:32पढेंगे दक्षिण भारत का इतिहास लक बढ़ेंगे

20:34जैन और बौद्ध धर्म की जानकारी के उपरांत

20:38इसलिए रिग वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल

20:40में विभाजन का एक प्रमुख आधार यह भी हैं

20:43600 ईसा पूर्व के बाद लोहे का व्यापक स्तर

20:46पर प्रयोग होने लगा और इसलिए 600 ईसा

20:49पूर्व को वैदिक काल की अंतिम अवधि माना

20:52जाता है अलग बात यह लोहे की जो खोज होते

20:55हैं वह रिग वैदिक काल की समाप्ति पर होती

20:58हैं और

20:59उत्तर वैदिक काल का शुभारंभ होता है लेकिन

21:02लोहा बिल्कुल अत्याधिक मात्रा में जो

21:04प्रयोग होता है वह हम कह सकते हैं कि

21:07महाजनपद काल में ही होता है और इसीलिए इसे

21:10कलयुग की शुरुआत कही गई होगी क्योंकि कल

21:13का तात्पर्य लोहे से होता है इसके बाद

21:16महाजनपद काल प्रारंभ होता है तो सिंधु

21:18घाटी सभ्यता लगभग 2350 से 1750 हिसाब

21:22पूर्व तक पूर्व वैदिक काल 15 उसे हजार ईसा

21:25पूर्व तक उत्तर वैदिक काल हजार से 600 ईसा

21:29पूर्व तक और 600 से चार थोड़ा सा पूर्व तक

21:32महाजनपद काल में केवल दोस्तों वर्षों का

21:35इतिहास अभी हम वर्णन करेंगे लेकिन इसका

21:37आधा हिस्सा भी बाकी रहेगा क्योंकि जैन और

21:39बौद्ध धर्म इसकी सारी कड़ियों को जोड़ेंगे

21:42उत्तरवैदिक काल लगभग पांच सौ वर्षो का

21:45इतिहास था खाओ चार सौ वर्षो का इतिहास था

21:49और लगभग पूर्व वैदिक काल या रिग वेदिक काल

21:52पांच सौ वर्षो का इतिहास था और क्योंकि

21:54सिंधु घाटी सभ्यता काफी लंबे समय तक रही

21:57थी तो हम यह कह सकते हैं

21:59लगभग छह सौ वर्षो का इतिहास इनका मिलता है

22:03तो छह सौ वर्षो का इतिहास लगभग साढे तीन

22:06घंटे लग गए थे समझने में पांच सौ वर्षो के

22:09इतिहास को भी लगभग ढाई घंटे लग गए थे चार

22:12सौ वर्षो के इतिहास को लगभग सवा 2 घंटे

22:14लगे थे तो दोस्तों वर्षों का इतिहास है

22:16मुझे उम्मीद है कि 2 घंटे के कक्षा बड़ी

22:19आनंदमई चलनी चाहिए तो हम जैसे कि जानते

22:23हैं तो उत्तर वैदिक काल आप लोगों ने उत्तर

22:26वैदिक काल अगर नहीं भी पड़ा हो तो घबराना

22:29नहीं उत्तर वैदिक काल के जमाने में टाइम

22:31मशीन में वेरी मोस्टेड सब की जगह पर

22:33शिक्षक आ रहा है और मैं आ रहा हूं आपके

22:35सामने अब मैं बता रहा हूं कि भई जैसे कि

22:38हम जानते हैं यह उत्तर वैदिक काल में कुल

22:41कुल का जो प्रमुख होता था कुरूप कहलाता था

22:43ग्राम का जो प्रमुखता ग्रामीण इलाका था

22:46विश्व की प्रमुख विशेषता पति कैलाश तथा

22:48जनता प्रमुख गणपति के लाता था और फिर जनपद

22:52का प्रमुख बनता था राजा अब ऐसे राज्यों के

22:56बीच में जब शक्ति का शक्ति संघ

22:59संयुक्त संघर्ष होता है और अपनी शक्ति

23:02विस्तार की बात करते हैं तो कई जनपदों से

23:05मिलकर एक महाजनपद बनते हैं फिर महाजनपद के

23:08बाद हम इसकी बात कर सकते राष्ट्रीय भी

23:11महाजनपद कि हम बात करेंगे जनपद और राष्ट्र

23:15के बीच में महाजन पर है

23:19कि पाते हैं महाजनपद आखिर बने कैसे बड़ा

23:22व्यावहारिक साथ जवाब है इसका कि महाजनपद

23:25बने कैसे महाजनपद बनने का सबसे बड़ा कारण

23:30था अपने स्टेशन का विस्तार राजनीतिक

23:35विस्तार अपने अंतर्गत आने वाली जो भूमि है

23:39उसको बढ़ाना निशक्त इसको युद्ध के माध्यम

23:44से अन्य तरीके से विस्तारित करना इसी कारण

23:47से धीमे-धीमे चीजें बड़ी होती चली गई समय

23:50के बढ़ने के साथ-साथ जिस तरीके से एक

23:53वृक्ष बड़ा होता है बिल्कुल वैसे ही गांव

23:56से बड़े बनने लग गए थे जन-जन से बड़े अलग

24:00बनने लग गए थे जनपद और जनपदों से भी बड़ी

24:03संरचना लाभ महाजनपदों की आने लगी थी

24:07महाजनपदों का जो मुख्य कार्यभार जिस जगह

24:10से उठता था पूरी राजनीतिक प्रक्रिया जहां

24:13से हुआ करती थी उसी को कहा जाता था

24:15राजधानी मतलब जहां पर शासक

24:19विश्वास करेगा और वहीं से वह अपने पूरे

24:22क्षेत्र के लिए नियमों का और सभी आदेशों

24:24का प्रस्तावना प्रस्तुत करेगा हम कहेंगे

24:27कि वह राजधानी रहेगी तो 16 महाजनपदों का

24:31उदय के वामन कारण कि आप सबसे पहले तो लोहे

24:35का व्यापक विस्तार होने लग गया था कृषि

24:37में लोहे की छुट्टियों के कारण अभिशेष

24:40पैदा होने लग गए थे व्यापार बढ़ने लग गया

24:43था शक्तियां बढ़ने लग गई थी आर्थिक रूप

24:46में और क्योंकि अब यह ग्रामीण और कबीलाई

24:49समाज अब एक सभ्य समाज की ओर या एक नगरीय

24:53समाज में बदल रहा था जहां पर पूरी तरह से

24:56एक का सिस्टेमेटिक धन से सारी चीजें फिर

25:00दिखाई देने लग रही थी जैसे सिंधु घाटी

25:02सभ्यता में दिखती हैं इसलिए इसको द्वितीय

25:04नगरीय क्रांति भी कहते हैं राजाओं के

25:07द्वारा साम्राज्य विस्तार कि आकांशा कृषि

25:10का विस्तार कृषि अधिशेष व्यापार और

25:13वाणिज्य का विस्तार हुआ प्रशासनिक स्तर पर

25:16रक्त संबंधों का ठंडक कई जगह

25:19अयोग्यता की बात आने लगी सामाजिक-धार्मिक

25:22मानदंड में स्थायित्व आया अब ज्यादा बदलाव

25:25नहीं हुए क्योंकि बोद्ध और जैन धर्म का

25:27विस्तार हो रहा था नए क्षेत्रों की खोज

25:29लगभग पूरी हो चुकी थी हम पश्चिम से लगभग

25:33पूर्वी किनारे पूर्वी किनारे तक पहुंच

25:35चुके थे

25:38अजय को

25:39अजय को

25:44कि आई एम 16 महाजनपद को एक नगर देखते हैं

25:49इधर गौर करेगा सभी लोग याद करना कैसे इन

25:53सोलह महाजनपदों पहले वह बता देते पहले तो

25:56कुछ इन फॉर जनपद महाजनपद वरी ई एम याद कर

25:59ले जाएंगे जैसे कि भारत से बाहर केवल दो

26:03महाजनपद हैं तो हम अपनी टाइम मशीन में

26:05सबसे पहले आपको लेकर जा रहे हैं पाकिस्तान

26:07और अफगानिस्तान की सीमा रेखा पर वहां पर

26:10एक महाजनपद है कंबोज कंबोज महाजनपद अगर हम

26:15बात करें तो कंबोज महाजनपद की राजधानी है

26:19वह राज कपूर थी राजकपूर पुतले की विस्तार

26:23कहां तथा महाजनपद के समय में और दूसरा है

26:26पाकिस्तान के भीतर गांधार जिसकी राजधानी

26:30तक्षशिला तो क्षेत्र का नाम है गांधा जैसे

26:34क्षेत्र मान लीजिए कई लोग नए विद्यार्थी

26:36कनफ्यूज हो जाए तो घबराना बीमा क्षेत्र का

26:39नाम है गांधार

26:41है और उस क्षेत्र में जो एक जगह ओगेत नगर

26:44होगा उसका नाम या जो राजधानी योग उसका नाम

26:47होगा तक्षशिला जिसे मध्य प्रदेश मध्य

26:51प्रदेश की राजधानी भोपाल महाराष्ट्र

26:53महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई वैसे तो दो

26:57जोन महाजनपद है वह भारत के बाहर है पर

27:01केवल इकलौता महाजनपदों विंध्य पर्वत के

27:04ठीक नीचे मिलता है क्योंकि थोड़े

27:06ज्योग्राफी के विद्यार्थी हैं आप लोग तो

27:09विंध्य पर्वत के ठीक नीचे मिलेगा या मैं

27:12कहूंगा कि इकलौता महाजनपद जो दक्षिण भारत

27:15में मिलता है न कहलाता है अक्षत कहलाता है

27:19ए अगर हम बात करें तो आप सब गोदावरी नदी

27:22के किनारे पर माना जाता है गोदावरी नदी के

27:26किनारे पर माना जाता है सबसे दक्षिणतम

27:28महाजनपद है तो 16 महाजनपदों में दो

27:32महाजनपद कंबोज कंबोज बीच और गांधार गांधार

27:39गांधार तक्षशिला

27:41प्रॉब्लम बहुत कुछ फिर हम बात करें तो

27:44तीसरा यह राजधानियां करवाऊंगा मैं घबराना

27:47नहीं फिर एक और महाजनपद जिसे आप याद रख

27:50सकते हैं या एक की जगह में को दो महाजनपद

27:53याद रख सकते तो मालवा के क्षेत्र में

27:56उज्जैनी का नाम आपने या उज्जैन का नाम

27:59सुना होगा का यह वहां का जो महाजनपद है वह

28:02अवंती है जिसकी राजधानी उज्जैन हुआ करती

28:05थी मीणा तो मालवा के क्षेत्र में उज्जैन

28:08फिफ्टी और मध्यप्रदेश का यह जो बिल्कुल

28:11मध्य भाग है वैसे तो अवंती भी जोहरा

28:15महाजनपदों भी मध्य प्रदेश के हिस्से में

28:17आएगा गुजरात का कुछ भाग जरूर आ सकता है वो

28:20यहां छेदी छेदी जो महाजनपद हैं यह शिशुपाल

28:24वाला है शिशुपाल कृष्ण ने इस पावडर

28:29गलतियां सौ गालियां माप की थी 101 पर

28:32गर्दन उड़ा दी थी वीण यह चड्डी हैं फिर

28:36थोड़ा सा राजस्थान की ओर याद रखना

28:39राजस्थान में क्लॉक

28:41कहां जनपद के रूप में को तमगा पूरी तरह से

28:43बाकि तो कुछ सीमा पर एक और तुम मत्स्य

28:46महाजनपद है मत्स्य महाजनपद कैसे याद

28:49रखेंगे राजस्थान वाले को राजस्थान

28:52रेगिस्तान वाली जगह आज तो वहां पानी तक

28:55नहीं है लेकिन उस जमाने में मछलियां रहे

28:57विदेशों से मदद से याद रखना हाथ से कर रहा

29:00हूं मैं तो मत्स्य महाजनपद मत सिर्फ महाजन

29:03व तो ऊपर दूर चले गए कंबोज बांध लाड नीचे

29:08आ सकता गया दक्षिण वाला मध्यप्रदेश में

29:12अवंति आ गया थे दिया गया और राजस्थान में

29:16आ गया मत राजस्थान में आ गया मत अब इसके

29:21बाद अधिकतर जो है वह उत्तर प्रदेश और

29:23बिहार में मिलते हैं तो पहले ऊपर वा

29:27कि इस तरीके से इस तरीके से आगे बढ़ते

29:30चलना फिर हम एक पूरा चक्र बनाएंगे इस

29:33तरीके से हम एक पूरा चक्र बनाएंगे तो फिर

29:36आएंगे कुरु पर कुरु कुरु राजवंश महाभारत

29:40की सबसे बड़ी सभा वहां जहां कई बार कहा

29:44जाता है क्या पूर्व राजवंश इस बात को झेल

29:47पाएगा का या तो वह जो पूर्व है जिसमें

29:49इंद्रप्रस्थ हस्तिनापुर हस्तिनापुर

29:53हस्तिनापुर इंद्रप्रस्थ स्तुति पांचाल

29:58पांचाल नरेश ई पंचाल-नरेश द्रुपद विधि तो

30:03कुरु कुरु राजवंश की जो एक बहुत ही पांचाल

30:08नरेश आदि फिर कौशल कौशल व जीवन जी में ही

30:14हम बात करते हैं कौशल हुआ वह जीवाराम जी

30:18वाला और वह जी मतलब सीता जी वाला पीर और

30:23मल मल मल हुआ था प्रयाग

30:27सुरेश वाला जो अमराज़ अंगराज कर्ण अंगों

30:30की ओर आएंगे तिरंगा से आ जाइए मदद की ओर

30:33मदद मदद से आ जाइए काठी काठी से आ जाए

30:38वक्त से व्हाट्सएप अधर्म असत्य इधर वक्त

30:41हैं फिर वक्त से आ जाइए छोड़ सेन की तरफ

30:44मथुरावाला कृष्ण जी का तोड़ सेम की तरफ तो

30:48फिर वापिस आते हैं तो कैसे याद रखेंगे

30:50कुरु कुरु से पांचाल पांचाल से कौशल कौशल

30:59सेवक जी वजह से मन ल अमल से अंग-अंग से

31:06मदद मदद से काशी काशी बनारस वाराणसी वहां

31:11की राजधानी मृत्य और फिर वस्त्र से आ

31:15जाएंगे तो और स्पेन में

31:19अच्छा सोर्स इन तो एक बार पहले याद करते

31:23क्योंकि चीजें याद होनी चाहिए भारत के

31:27बाहर कंबोज और गांधार दक्षिण भारत

31:33कि आप सभी को मैप दिख रहा होगा का यकीन

31:37भारत नक्शा मध्यप्रदेश भवन अतिथि राजस्थान

31:43उच्च से मत मुझे ऐसा याद हो गए राजस्थान

31:46वाला कि मछली मछली मछली फिर उसे चलिए

31:51पांचाल पांचाल से आ जाइए भगवान राम की

31:54नगरी पर कौशल कौशल से वजीर पर आ जाइए फिर

31:58वजह से आजाइए आप मल पर अमल मतलब एक तरीके

32:01से ऐसा सोचेगा कि मन ल या माल्या से याद

32:06रखना मेरे को मान लिया से थोड़ा सा यह याद

32:08आया मतलब है मैंने देखा मान लिया तो मन ल

32:11अमल से अंगराज कर्ण फिर रंग वापिस आ रहे

32:15हैं अब भारत की ओर तो मदद मिलेंगे सबसे

32:18महाशक्तिशाली महाजन पर मगत मदद से हमें

32:22मिलेगा फिर बनारस काशी वाराणसी वाराणसी

32:25घाट फिर ऑथर और व के बाद तोड़ से मथुरा

32:30वाला जो क्षेत्र है तो मुझे उम्मीद है कि

32:33इधर रोगों को पहले तो यहां तक की बातें

32:35याद हो गई होगी कुरु-पांचाल फिर कौशल व जी

32:41याद करते चलेगा उस लाइन से फिर मल्हूपुरा

32:45जमा लिया वाली जगह मल तिरंगा राज कर्ण तक

32:48चले जाना अंग फिर मदद लौटना मदद से काशी

32:52पर पहुंचना काशी से वक्त पर पहुंचना वक्त

32:56या फिर मथुरा चले जाना कृष्ण की नगरी में

33:04तो आइए पहले तो 16 महाजनपद सोलह महाजनपद

33:10कंबोज है

33:13कि गांधार कंबोज लगभग सुपर मिलेगा मतलब

33:17सिंधु घाटी के ठीक ऊपर हम कह सकते हैं कि

33:20हिंदूकुश पर्वत पर आसपास पर्स रखे अवंती

33:25और सीधी राजस्थान उच्च सिगरेट से चलते

33:29चलिए शुरुआत दिल्ली से चलते हुए पांचाल

33:34कौशल मलयज जी अंग मदद राशि व शोर से है

33:45कि अब सवाल यह है कि यह सारी जानकारी

33:48इतिहासकार कहां से लाते क्या उस समय कोई

33:51किताब लिखी गई थी कोई बता रहा था हमें ईजी

33:54नहीं भी अधिकतर जानकारी हमें साहित्य से

33:58प्राप्त हो रही है धार्मिक साहित्य से

34:01प्राप्त हो रही है अधिकतर जानकारी हमें

34:04मिल रही है वह धार्मिक साहित्य से मिल रही

34:06है क्योंकि इस दौरान बोद्ध और जैन धर्म का

34:10जो विकास हुआ था उसके कारण इन दोनों

34:14धर्मों की जो जानकारी हैं वह ज्यादातर

34:18सटीक मानी जाती हैं तो हमें यह जो जानकारी

34:22मिलती हैं बोद्ध धर्म के अंगुत्तरनिकाय

34:25लें ग्रंथ से अंगुत्तर निकाय ग्रंथ से और

34:30जैन धर्म के जैन धर्म के या जैन ग्रंथ में

34:35भगवती सूत्र से भगवती सूत्र से तो मैंने

34:39इसे ऐसे याद रखना है कि बौद्ध धर्म और

34:42अंगुत्तरनिकाय दें दिए

34:45है तो यहां पर दिए और यहां पर जेवी जैन

34:51धर्म के भगवती सूत्र से क्योंकि अगर वो

34:55धर्म रहेगा तो बोधक भगवती बीवी तो नहीं हो

34:58पाएगा का यह इसमें बीच-बीच में प्रतिकर्षण

35:01है विरोध होता है इसे याद रखने के लिए

35:04अपना अपनी कहानी बनाया क्योंकि फैक्ट है

35:06भाई रेट में बढ़ेंगे तो बुद्ध धर्म के

35:09अंगुत्तरनिकाय ग्रंथ से मिलेगा वहीं जैन

35:12धर्म के हैं हम कहेंगे कि भगवती सूत्र जैन

35:15ग्रंथ से मिलती हैं दोनों में इन सोलह

35:19महाजनपदों के नामों में थोड़ा बहुत अंतर

35:21है वास्तविक रूप में करेंगे कि नामों में

35:24अंतर की जगह पर इस तरीके से केवल उच्चारण

35:28में अंतर हैं पर लगभग अधिकतर जगह पर

35:31जानकारियां एक जैसी मिलती हैं तो मुख्य

35:35रूप से यहां पर हम जितनी बातें कर रहे हैं

35:38इतिहासकारों ने जब इन ग्रंथों का अध्ययन

35:41किया तब उन्हें इस समय के बारे में

35:45की जानकारी मिले और उन्होंने फिर कड़ियां

35:47जोड़ी है बस कि शायद फिर ऐसा रहा होगा

35:50वैसा हुआ होगा ऐसी बात हुई होगी तो यह

35:53साहित्य के माध्यम से हमें मैक्सिमम

35:56जानकारियां मिल रही हैं हां इस दौरान हमें

35:59कई सारे कुछ चीजें वास्तविक रूप में मिलती

36:02हैं जैसे गीत सिक्कों की बात करें तो उसकी

36:06अब यहां से हुए दिखाई देंगे अब

36:10कि महाजनपदों की सूची उपलब्ध हैं महाभारत

36:14में अंगुत्तर निकाय में छांदोग्य उपनिषद

36:18में संयुक्त निकाय में तो मुझे लगता है कि

36:21अब यह सवाल केवल नाम मात्र का सवाल है

36:24तेजी से आंसर देते चलिए का यह तेजी से

36:28आंसर देते चलिए का यह बोध जैन ग्रंथों में

36:33अलग-अलग महाजनपदों का उल्लेख है किंतु

36:36बोद्ध धर्म के बोद्ध धर्म के ग्रंथ

36:39अंगुत्तरनिकाय अधिक प्रमाणिक स्त्रोत है

36:43अंगुत्तरनिकाय क्योंकि तुलनात्मक रूप से

36:46अधिक स्पष्ट और व्यापक जानकारी है घर

36:50बोद्ध और जैन धर्म में अगर कहा जाए कि 19

36:55तो बोद्ध धर्म के बारे में या हम कहेंगे

36:58कि वो धर्म के अंगुत्तर निकाय के बारे में

37:01जो जानकारी उससे हमें प्राप्त होती हैं वह

37:04ज्यादा विस्तृत हैड ज्यादा प्रमाणों के

37:09साथ प्रस्तुत की गई है

37:10है इसलिए बौद्ध धर्म से जो प्राप्त होने

37:14वाली जानकारी है वह ज्यादा प्रकार की गई

37:17है वह का संक्रमण जैन ग्रंथों से पहले

37:21प्रारंभ हुआ था महाजनपदों के शासकों के

37:24द्वारा बोद्ध ग्रंथ के संकलन में सहायता

37:26भी की गई थी और बोद्ध ग्रंथ में लिखित

37:29जानकारी का अभिलेखीय साक्ष्य थे तालमेल

37:32होता है मतलब जो इस ग्रंथ में जानकारी दी

37:36गई हैं उसके हमें कुछ प्रमाण भी प्राप्त

37:38होते हैं और इसी कारण से हमें इन वस्त्रों

37:42में बोद्ध ग्रंथ की ओर झुकाव मिलता है तो

37:47इस टाइम मशीन में अभी तक हमें पता चला कि

37:49हमें 16 महाजनपदों की यात्रा करनी है भारत

37:53से बाहर भी जाना है दो जगह पर दक्षिण भारत

37:56में भी हम जाएंगे गोदावरी नदी तक राजस्थान

37:59में हम जाएंगे मस्से में मध्य प्रदेश में

38:02अवंतिका की बात करेंगे चेदि की बात करेंगे

38:04फिर शुरुआत करेंगे कुरु से लाइन से चलेंगे

38:07पूर्व से पांचाल चलेंगे पान

38:10क्वेश्चन चलेंगे कौशल से वर्दी चलेंगे वजह

38:13से मल न चलेंगे माल्या इसको हमने कहा कि

38:15माल्या के रूप में याद रखना फिर अंगराज

38:18कर्ण का दर्शन भी करेंगे अंग जाएंगे अंग

38:21फिर कार्टिज और मगर चले जाएंगे मगर फिर

38:23काशी चले जाएंगे फिर क्वांटिटी सेम ऊपर की

38:26ओर जाते हुए मथुरा पहुंचेंगे इस बीच में

38:29वक्त से भी आएगा वक्त पर मथुरा चले जाएंगे

38:32तो सभी को पहले तो याद हो जाना चाहिए

38:34ज्यादा जरूरी यह है

38:38कि मगध महाजनपद का उत्कर्ष अपने पहले तो

38:43जानते हैं इन महाजनपदों में आखिर मदद भी

38:47शक्तिशाली क्यों व तो आइए जरा एक ही समझते

38:51हैं आप लोगों को मैं थोड़ा व्यावहारिक

38:52समझाना चाहता हूं इतिहास को तो इतिहास की

38:55नजर से देखेंगे यहां जीवन तो देखें मुझे

38:59बताइएगा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद

39:02अमेरिका एक महान शक्ति के रूप में क्यों

39:05भरा क्योंकि उसकी प्रौद्योगिकी उसके अंदर

39:09शिक्षा उसका व्यापार उसके जो शिक्षक पिछले

39:13उसके जो राष्ट्रपति रहे जिन्होंने भी शासन

39:16चलाया उसका जो प्रशासन तथा उसकी जो

39:19लोकतांत्रिक व्यवस्था थी कहीं में कई

39:22सपोर्ट करती हैं या वर्तमान में चीन पर भी

39:25आ जाते हैं कि चीन आखिर इतना शक्तिशाली

39:28क्यों हो रहा है कई बार शासक रोल निभाते

39:32हैं कई बार परिस्थितियां रोल निभाती है कई

39:36बार हम कह सकते हैं कि

39:38व्यापार बहुत बड़ा भूमिका निभाता है तो

39:41कुछ अतिरिक्त नया कुछ नहीं है जो आज के

39:44दौर में आपको चीन की महाशक्ति के बनने के

39:47कारण लगते हैं कुछ वैसे ही कारण मदद के

39:51बीच थे जैसे कि अमेरिका की महाशक्ति के

39:55बनने के पीछे जो कारण थे लगभग वैसी कारण

39:59मदद के भी थे पथ उस जमाने के नजरिए से

40:02देखना है बाकी तो लगभग सारी बातें आप भी

40:06कहेंगे कि सर बिल्कुल यह बातें तो वहां पर

40:08भी है यहां पर भी हैं तो जो मदद हैं मदद

40:13करें जिसकी पहले राजधानी राजगिरा थी या

40:16राजगृह सीधी राजगृह के बाद यह पहाड़ों के

40:20बीच में मिलता है तो राजगृह जो राजधानी थी

40:23वह सुरक्षित थी चारों तरफ से पहाड़ी है एक

40:26तरीके से राजमहल की पहाड़ियों आप अगर

40:28देखेंगे आतिफ असलम राजमहल की पहाड़ियों

40:31करते वहीं ओर राजगृह है वहीं पर

40:34मैं सुरक्षित फिल्म तो हमले होने की कोई

40:37पॉसिबिलिटी नहीं थी पर यह हमला कर सकते थे

40:40यहां पर जो जंगल थे इनको हाथी बड़ी संख्या

40:44में मिल गए थे हाथी जैसे निर्मल को जिसने

40:47अपने वश में कर लिया तो वह तो Baahubali

40:50बन जाता है आपने मूवी देखी थी बाहुबली तो

40:53फिर यह तो Baahubali बंद नहीं थे फिर उसी

40:58रूप में अगर हम बात करें तो बाद में इनकी

41:01जो राजधानी बनती है वह पाटलिपुत्र बनती है

41:03वह नदी के संगम पर हैं नदी के कारण भी

41:07सुरक्षा है क्योंकि उस जमाने में नदी को

41:09पार करना और फिर आक्रमण करना बहुत बड़ी

41:12बात हो जाती थी तो सुरक्षित जगह ही

41:15व्यापार बड़ा विस्तार हुआ तेजी से कई

41:19प्रकार की सेना विशेष रूप से उनके पास थी

41:22मीणा और कुशल से भटक रहे ओबवियसली होता है

41:26तभी की सब परिस्थितियां ऐसी हैं जो ने

41:29महाशक्ति के रूप में उभरने में सहायता कर

41:31रही थी पर ऐसा नहीं हुआ केला मदद उतना

41:34शक्ति

41:34तक सबसे शक्तिशाली जरूर था लेकिन पुरूष जो

41:38था वह महाजनपद भी शक्तिशाली था उधर अगर हम

41:41बात करेंगे तो काशी महाजनपद भी शक्तिशाली

41:44था लेकिन और में कहें तो महाजनपदों में

41:47सबसे सबसे शक्तिशाली अगर कोई महाजनपद था

41:50तो वह मगधी था भी इसमें कोई डाउट नहीं है

41:55कि तुम मदद में शासन करने वाले जो वंश हैं

41:58मदद में जो शासन करने वाले वंश है वैसे तो

42:03हर्यक वंश से माना जाता है लेकिन महाभारत

42:07में एक ही जगह पर उगने रखें व्रत वंशिका

42:11व्यक्ति उसका राजा था ऐसा उल्लेख महाभारत

42:15में मिलता है लेकिन इतिहासकार हर्यक वंश

42:19ऐप को मदद के रूप में मदद की

42:24की मदद में शासन करने वाले वंश के

42:27संस्थापक के रूप में मानते हैं फिर

42:29शिशुनाग वंश बताएं फिर नंदवंश आता है और

42:33अंतिम रूप में मौर्य वंश और मौर्य वंश में

42:36अंत में आते हैं अशोक तो आप लोग थोड़ा का

42:41अपने दिमाग के दरवाजे खोलिएगा मैं आपको

42:44लेकर आ गया वो टाइम मशीन में मदद की ओर और

42:48उस समय आप करेंगे इधर हमने तो बाकी देखा

42:51नहीं लेकिन यह तो बिल्कुल अद्भुत बहुत

42:54शक्तिशाली यहां के जो शहर हैं बड़े आलीशान

42:58लग रहे हैं राजा भी बड़ा आमिर लग रहा है

43:00या कारण रहे होंगे तो उस पर हमने चर्चा है

43:03कि देखो ऐसा रहा होगा आ फिर टाइम मशीन

43:06मैंने कहा कि अगर आप पूरे समय ताल को

43:09देखेंगे तो कई सारे वंश यहां पर रहे हैं

43:12हर व्यक्ति के अंशदान नागवंश व नंद वंश और

43:16फिर मौर्य वंश की बात आती है तो यह थोड़ा

43:19कम मदद के बारे में वंश और राजाओं के बारे

43:21में तुम्हें बता दूं आप सभी लोग टाइम

43:24चीन के अंतर्गत बैठकर बस देखते चलेगा कि

43:27पहला वंश फिर उसके बाद किसने उसे खत्म

43:30किया फिर क्या बात हुई लेकिन सबसे पहले

43:34अगर बात करें तो हर्यक वंश में बिंबिसार

43:38भी तार शुरुआत बिंबिसार इधर ध्यान देना

43:43बिंबिसार बिंदूसार बहुत अलग है हर्यक वंश

43:48का पहला है यह और बिंदूसार मौर्य वंश में

43:52दूसरी बार आता है तो बिंबिसार अलग है और

43:55बिंदूसार अलग है तो पहले कैसे याद रखेंगे

43:59बिंबिसार और बिंदूसार में मात्रा के आधार

44:02पर अ यह पढ़ाई सभी ने सभी ने आई पड़ा इन

44:06अभी तो मुझे बताना पहले ही की मात्रा और

44:11उनकी मात्रा पहले ही की मात्रा आएगी तो

44:14बीसा और फिर ऊंट की मात्रा आएगी तो

44:17बिंदूसार बिंदूसार बाद में आएंगे बिंदु

44:20बाद में आता है और बी पहले आएंगे तो

44:24को भी साथ अजातशत्रु तब अपने पिता को

44:29मारते हैं यहां मैक्सिमम जो है वह अपने

44:32पिता को मारकर राजा बनते हैं कई लोगों को

44:35ऐसा लगता था कि विशिष्ट धर्म में ऐसा होता

44:37है हमारे भारत में यह इतिहास में पहले भी

44:41मिलता रहा है तो इतिहास को इतिहास के नजर

44:44से देखना धर्म के नजर से मत जोड़ना है

44:47तकनीकी लड़ाई अल्हा लिए हर कोई शक्तिशाली

44:50बनना चाहता है अरे कोई सिस्टम करना चाहता

44:53है और कोई विशिष्ट बनना चाहता है और हर

44:57कोई इतिहास में नाम दर्ज करना चाहता है तो

45:00बिंबिसार के पुत्र अजातशत्रु अजातशत्रु के

45:04बाद उदयभद्र या उदासीन उसके बाद अनिरुद्ध

45:08अनिरुद्ध के बाद मुद्दत और नाग तक्षक नाग

45:12दशक के फिर अच्छा धोखे से हत्या कर ली

45:15जाती हैं उनके उपराज्यपाल के द्वारा या

45:18मंत्री के द्वारा तो उनका जो वंश होता है

45:21वह शिशुनाग तो यहां वंश बदल गया शिशु ना

45:24मनुष्य फिर काला शोपियान क्व वर्ण महा जो

45:29शासक बनते हैं फिर भी ऐसी हत्याओं धोखे

45:33बाजी से फिर नंद वंश की स्थापना करता है

45:36महानंदी महा पद्य और घनानंद यही घनानंद है

45:41भाई जिन्ना के जिन्न से नाराज हो गए थे

45:45चाणक्य कौटिल्य और कहा था कि शिक्षक कभी

45:48साधारण नहीं होता राजन ऐसे व्यक्ति के तो

45:53घनानंद दूध घनानंद से नाराज होकर फिर

45:56चाणक्य अपने चाणक्य नीति कोटिंग नीति के

46:00माध्यम से चंद्रगुप्त मौर्य को भारत के

46:03इतिहास में प्रकट करते हैं और प्रकट करने

46:07के बाद चंद्रगुप्त मौर्य मौर्य राजवंश की

46:10स्थापना करते हैं फिर आते हैं बिंदूसार और

46:14बिंदुसार के बाद फिर अशोक और अशोक के बाद

46:17फिर कलिंग युद्ध और कलिंग युद्ध के बाद एक

46:21तरीके की शांति

46:27है तो क्या लालियों को थोड़ी सी कहानी अब

46:30समझ में आई है अब हम एक-एक को भी देखते

46:33चलेंगे लेकिन हम समझ रहे हैं कि हर व्यक्

46:36वंश व बिंबिसार से शुरू होगा और ना दशक तक

46:40चलता रहेगा शिशु ना तो देखना पैसे नाम याद

46:44रखना है बिंबिसारा भी से शुरू हुआ बिग बी

46:48से शुरू हुआ नाग में बदला उस नाग विशेष

46:52नाका उतार लिया पुश नाग ने काल काल

46:58शुक्रिया निकाल शोक प्लाजो क्षेद्द

47:03महानंदी नाया महानंद दिन घनानंद में बदला

47:08फिर घनानंद से चंद्रगुप्त मौर्य आए और यह

47:14बिंदूसार होते हुए अशोक लग गए बिंबिसार है

47:21है ना गांव फिर शिशु नाग नाग दत्त

47:27विश्वनाथ विश्वनाथ से नंदन नंदन से घनन

47:33घनन होते हुए चंद्रगुप्त मौर्य मौर्य से

47:38होते हुए आप जाएंगे अशोक कि आपको मदद

47:42राजवंश में या उन पर मगध महाजनपद में

47:46अलग-अलग राजवंश का आइडिया लग चुका है

47:52कि क्या आपको पता चल गया है कि कहानी वहां

47:55से शुरू होती हैं यह आगे बढ़ते हैं मगध

48:00महाजनपद के शक्तिशाली होने के कई कारण थे

48:03आर्थिक कारण भोगोलिक कारण राजनीतिक कारण

48:07सांस्कृतिक कारण अगर आज आपसे पूछा जाएगा

48:10कि अमेरिका की महाशक्ति होने के कारणों का

48:12विवेचना कीजिए तो भी यही कारण बताओगे टीम

48:16के महाशक्ति होने के कारणों की विवेचना

48:18कीजिए तो भी यही कारण बताओगे जो भी

48:22महाशक्ति बनता है उसके कारण यही रहते हैं

48:25इसलिए इतिहास का एक अच्छा फायदा लें एक

48:28बार पढ़ लो बार-बार बोलते चलो तो आज पढ़

48:32लेना कि महाशक्ति क्यों बने बस थोड़ा बहुत

48:35बदलाव होगा लेकिन कारण तो यही रहेंगे

48:39आर्थिक कारण सबसे पहले तो आप मदद को जरा

48:43देख लीजिएगा का यह कि मदद की अगर हम बात

48:46करें तो किस जगह पर हैं यही मदद राजगीर थे

48:51पाटलिपुत्र अट जाएगा

48:52है तो गंगा नदी का किनारा मिलेगा का यह

48:56गंगा-गंडक सोन पुनपुन जैसी नदियों के

48:59क्षेत्र में कृषि के लिए अनुकूल दशाएं

49:02अधिशेष कृषि अधिक से अधिक है मतलब हमें

49:06जितनी जरुरत है उससे ज्यादा भी अगर पैदा

49:08कर ले तो उसे कहते अधिशेष उसको बेचा जाएगा

49:12कमाई होगी

49:14को सिंचाई की सुविधा जलोढ़ मृदा का

49:17क्षेत्र धान की रोपनी रोपण पद्धति का

49:20विकास फसलों की डाइवर्सिटी लोहे का कृषि

49:24में व्यापक स्तर पर प्रयोग गहरी जुताई

49:26संभव होने से अतिरिक्त कृषि उत्पादन

49:28आयुक्त जमाने में वही बहुत बड़ी तकनीक की

49:32जो गहरी जुताई कर सके साथ बयान की

49:35उपलब्धता सुनिश्चित होने से लोगों में

49:36योग्यता का विकास हुआ अब लोग आराम से

49:39चिंतन करने लगे थे कृषि उत्पादन में

49:42वृद्धि से व्यापार वाणिज्य तू आधार

49:44निर्मित अथवा गंगावती तो नदी मार्ग अमित

49:48व्यापार के लिए धान की अधिक पैदावार ने

49:50प्रजनन क्षमता में वृद्धि की जनसंख्या

49:52वृद्धि हो गई सैन्य क्षमता में वृद्धि हुई

49:55विशेष गतिविधियों को बढ़ाया गया अधिक अनाज

49:59की पैदावार थे राज्य की आय बढ़ गई फल

50:01स्वरूप अच्छी प्रशासनिक व्यवस्था अब यहां

50:04प्रशासन भी अच्छा हो गया वह टाइम फिक्स

50:07कि पांचों उंगलियां घी में तो इधर पैदावार

50:10भी बढ़ रही है कृषि का विस्तार भी हो रहा

50:12है व्यापार भी बढ़ रहा है प्रशासन की मदद

50:14कर रहा है मगर क्षेत्र में लोहे और तांबे

50:17की खाने जिसमें शत्रुओं को बढ़ावा दिया और

50:20कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन तो मदद

50:23क्षेत्र में लोहे की खानी आप ले लीजिए

50:27छोटा नागपुर का पठार

50:30यह जंगली क्षेत्र की उपलब्धता होने से

50:32अच्छी किस्मत की लकड़ी मिली जिसका प्रयोग

50:34रथ बनाने से व्रत बनाने में हुआ लकड़ी और

50:38लकड़ी से निर्मित वस्तुओं में

50:39व्यापार-वाणिज्य को बढ़ाया तो लकड़ी की

50:42उपलब्धता के कारण मकान बन्ना मकान बनने के

50:45साथ रथ बन्ना कई सारी चीजें लकड़ी से

50:48निर्मित की जाने लगी मगर क्षेत्र में

50:51हाथियों की अधिकता होने से गज सेना का

50:53विकास हुआ और हाथी की सेना के सामने कई

50:57सारी सेना लड़ने से पहले ही भाग जाती थी

51:00अत सिक्कों के रूप में मुद्रा का प्रचलन

51:03प्रारंभ हुआ जिससे रे विनियमन प्रणाली का

51:06आधार मिला मतलब अब वाटर सिस्टम वहां पर

51:09मैं चलकर सिकुड़ चलने लगे व्यापारिक

51:12श्रेणियों का विकास हुआ व्यापार वाणिज्य

51:15के क्षेत्र में मजबूती मिली और अन्य

51:17महाजनपद में इस प्रकार की कोई विशेषता

51:20नहीं थी और इसी कारण से जो मगध महाजनपद

51:23हैं वह इतना शक्तिशाली हमें दिखता है

51:28है उल्लेखनीय है कि अवंती महाजनपद के अंतर

51:32भी अवंति मीणा उज्जैनी वाला वन थी वहां पर

51:35भी लोहे की खदान की लेकिन बाकी चीजें वहां

51:40उतनी नहीं थी समृद्ध अंतर्गत भी लोग एक की

51:43खामी मिली और यही कारण था कि अवंती के साथ

51:45मदद का संघर्ष काफी लंबे समय तक चला इन

51:49पुण्य मामले में अवंति मदद के समकक्ष नहीं

51:51था और अंतत मदद से पराजित हो गया हाथियों

51:55का मतलब होता है ऐसे सिक्के जिन पर कोई

51:57निशान मिलेंगे पंचमार्क सिक्कों के 500

52:01ईसा पूर्व इन सिक्कों का कोई नियमित आकार

52:04नहीं होता है प्रारंभ अमित चांदी के

52:06सिक्के मिलते थे हाथ से के धातु के टुकड़े

52:09पर विशेष ठप्पा मारकर बनाए जाते हैं तो

52:12विशेष ठप्पा मारकर बनाए गए सिक्के आहत

52:15सिक्के हैं जिसमें घाव किया जाता है इसके

52:18ऊपर इसलिए उसका नाम हाथ रख दिया है आर्थिक

52:21ऊपर चिन्हों के अवशेष भी मिलते हैं वृद्धि

52:24मतली पेड़ मोर यज्ञ वेदी हाथी पर शंख

52:28वॉइस मेल खरगोश ज्यामितीय व्रत का

52:30चतुर्भूज त्रिकोण जैसी संरचना मिलती हैं

52:33कुछ भोगोलिक कारण भी थे जैसे मैंने कहा कि

52:36यहां की जो राजधानी थी वह पहाड़ों से घिरी

52:39हुई थी जब पाटलिपुत्र बनी तो व नदियों से

52:42घिरी हुई थी क्योंकि पाटलिपुत्र भी गंगा

52:44और सोने के संगम पर मिलता है तो अगर बात

52:48करें मगध की राजधानी राजगृह सुरक्षित

52:51स्थान परिस्थितियों पांच बड़ी पहाड़ियों

52:53से घिरी हुई थी बाद में बनने वाली राजधानी

52:56पाटलिपुत्र भी नदी दुर्गा के क्षेत्र में

52:58स्थित थी और बाह्य आक्रमण से लगभग सुरक्षा

53:01स्थिति मदद मूलतः नदी जल मार्ग पर स्थित

53:04पहाड़ी नदी जल मार्गों पर मदद का पूरा

53:07अधिपत्य था जिस कारण न केवल व्यापार

53:10वाणिज्य को बढ़ावा मिला बल्कि से सैन्य

53:12दृष्टिकोण से भी सुरक्षा प्राप्त हुई इन

53:15नदी जल मार्गों का यातायात व्यापारिक

53:17गतिविधियों के साथ सैनिक के आवागमन के लिए

53:20भी प्रयोग किया जाता है इसके अलावा मगध

53:22महाजनपद की क्षेत्रीय स्थिति मानसूनी

53:25वर्षा की भी अनुकूल थी क्योंकि आप मैदानी

53:28व

53:28डू जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात थी कि

53:31जलोढ़ मिट्टी नहीं जलोढ़ मिट्टी थी मीणा

53:34हर साल मिट्टी नहीं होकर आती थी उत्पादन

53:37बहुत ज्यादा मिलता था परिणाम स्वरूप कृषि

53:40का जो विस्तार हुआ फिर उसके बाद लकड़ी की

53:43जो प्राप्ति हुई और उससे जो रथ के अलावा

53:46लकड़ी का व्यापार जो शुरू हुआ इसमें

53:49इन्हें अतिरिक्त आय के स्रोत उपलब्ध कराएं

53:51लोहे की खान में इसके व्यापार को मजबूती

53:55दी और कुशल प्रशिक्षक और बेहतर शासकों की

53:59उपस्थिति के कारण मदद को वह सब कुछ मिला

54:03जो एक महा शक्तिशाली या महाजनपद के महा

54:08शक्तिशाली बनने के लिए जरूरी था

54:12के अनुसार अजातशत्रु शिशुनाग महापद्मनंद

54:16जैसे योगी ओर महत्वकांशी शासकों की

54:18निरंतरता बहुआयामी कूटनीति का प्रयोग

54:21व्यावहारिक नीति मैत्री नीति युद्धनीति

54:24मतलब जहां उन्हें लगता था कि विस्तार करने

54:27के लिए युद्ध नहीं मित्रता करते हैं जाम

54:30मित्रता से आगे की बात होगी तो विवाह कर

54:32लेंगे या फिर अगर दोनों ही संभव न हो तो

54:35युद्ध करेंगे तो इस तरीके से हमने अपने

54:37शक्ति विस्तार के लिए साम-दाम-दंड-भेद सब

54:41अपनाया सुनिधि वक्त प्रकार दुर्घटना रन

54:44जैसे उच्च स्तरीय कूटनीतिज्ञों की

54:46उपलब्धता कुछ बड़े समझदार लोग भी यहां पर

54:49रहे और इसी कारण से हम कह सकते हैं कि

54:52सुनिधि वक्त कार दुर्घटना रन जैसे लोग

54:55सैन्य शक्ति को बढ़ाने की नीति पर बहुत

54:58विश्वास था इनका और सांस्कृतिक कारणों में

55:01मदद का वैदिक संस्कृति के प्रभाव में लंबे

55:03समय तक नहीं आना क्योंकि वैश्विक संस्कृति

55:06में कर्मकांड को बहुत प्रधानता दी गई थी

55:09व्यक्ति अपनी शक्ति बढ़ाने की जगह अपने

55:12युक्ति पर ध्यान देते थे इसी कारण से यह

55:15शक्ति विस्तार पर ज्यादा ध्यान देने लगे

55:18अमेरिका के विस्तार में भी या अमेरिका के

55:22शक्तिशाली होने में भी यह बहुत बड़ा कारण

55:24था कि उनकी धार्मिक आस्था है उतनी ज्यादा

55:27मजबूत नहीं रही जब तक कि वह अपने शक्ति

55:30विस्तार राजनीतिक और मैं आपको एक छोटी सी

55:32बात बताओ मैंने जो अनुभव किया पुरे इतिहास

55:35के दौरान कि जो भी साम्राज्य सहित धार्मिक

55:40की जगह राजनीतिक और आर्थिक कारकों पर गौर

55:43करता है

55:46कि अब वह महाशक्ति बन जाता है तुम वर्तमान

55:51में नहीं पुरे इतिहास में ढूंढ लेना कहीं

55:54पर भी जिस चिकित्सक ने जिस शासनकाल में

55:59आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का विस्तार किया

56:03वही महाशक्ति बनाने जो धर्म की ओर मुड़

56:06गया या तो उसे शांति का मार्ग अपनाना पड़ा

56:10या फिर उसका विनाश हो गया है अब हम इसे

56:14तालिबान से भी जोड़ सकते हो तुम इसे किसी

56:18भी कट्टरपंथी धार्मिक राज्य से भी जोड़

56:22सकते हो कि वह फ्रांस की क्रांति के बाद

56:25का परिणाम को या फिर ब्रिटेन की गौरवमई

56:28क्रांति की बात करो या फिर किसी भी अन्य

56:31क्रांति की बात व जोश सार्थक राजनीति और

56:35आर्थिक कारकों पर गौर करेगा वही वास्तव

56:39में देश को या शासन राज्य को विकास की ओर

56:44ले जाएगा और जो धर्म के रास्ते में आ जाए

56:46इस वक्त हम दूर पड़ता चला जाएगा धर्म

56:50व्यक्तिगत मुद्दा रहने दीजिए राज्य का

56:53मुद्दा बनने दीजिए तो

56:56कि आत्मगत लंबे समय तक यज्ञ धार्मिक

56:59कर्मकांड वर्ण जाति व्यवस्था आदि से दूर

57:02रहा इसका परिणाम यह हुआ कि मदद के साथियों

57:04के साथ ही जनता भी अधिक व्यावहारिक रही और

57:08परलोक के बजाय तीन लोक में इधर लूप में

57:11विश्वास केयर करने पर केंद्रित रही हैं वह

57:15कोई कल्पना नहीं करते देखिए मोक्ष प्राप्त

57:17होंगे वह कोई कल्पना नहीं करते थे कि हमें

57:20ऐसा कुछ मिलेगा स्वर्ग मिलेगा नरक मिलेगा

57:22वह 72 हूरे मिलेंगी ऐसा कोई कल्पना नहीं

57:26है वास्तविक काहे उनकी यही लोग है यही

57:30सत्य है और इसी लिए मदद का महाशक्ति बनना

57:33लाजमी था तो अगर हम बात करें सबसे पहला है

57:37व्रत वंश व पर व्रत वंश वास्तविक रूप में

57:41महाभारत में इसका केवल एक बार वर्णन मिलता

57:43है इतनी सी जानकारी मिलती है कि मदद का

57:46प्रथम शासक वृहद्रथ था बस पर इतिहासकार

57:50इसे स्वीकार नहीं करते हैं इतिहासकारों का

57:54मानना है कि हर व्यक्ति के अनचाहे

57:56कि हर्यक वंश को प्रीतू हनसा वंश पिता की

58:01हत्या करने वाले वंश के रूप में भी जाना

58:03जाता है क्योंकि इस वंश के अधिकांश

58:07यात्रियों ने अपने पिता की हत्या करके

58:09शासन प्राप्त किया था बिंबिसार अजातशत्रु

58:14उदाणी अनिरुद्घ मुंडक और नाग दिशा कोई

58:31ए बी यू ए गेम ऑन

58:41का कोई फिक्स बने आपके पास कोई ट्रिक हो

58:44तो कमेंट जरुर करेगा बट मुझे ऐसा लगता है

58:46कि मैंने ऐसे याद रख सकता हूं कि भी से

58:50शुरुआत होती हैं नाग दशक पर अंत होता है

58:53नाग दर्शकों उसके बाद फिर अगला वर्ष जो

58:57आएगा उसमें ना भी आएगा कोई राजा बिंबिसार

59:01बिंबिसार से अजातशत्रु अजातशत्रु से रुदाई

59:06रुदाई से अनिरुद्ध अनिरुद्ध से मुंडक और

59:12मुंडक से नागदशक मुंडक से नागदशक पिघला ली

59:17जिसके पास कोई ट्रिक होगी

59:23लुट ठीक है ठीक है यूपीएससी क्या स्वीकार

59:27करती है यूपीएससी का स्वीकार करती है

59:29यूपीएससी इन सभी कारणों को स्वीकार करते

59:31सीक्वेंस माई याद रखना न तो बिंबिसार

59:34बिंबिसार थे अजातशत्रु अजातशत्रु से

59:37उद्यान उद्यान से अनिरुद्ध अनिरुद्ध से

59:40मुंडक मुंडक शेषनाग दक्षता यह कहानी बना

59:43देते हैं एक कहानी बना लेते हैं बस मुझे

59:46थोड़ा समय दीजिए तो मैं एक कहानी का

59:48निर्माण करके आपको यह ट्रिक लाइव बता देता

59:51हूं कि भी वृक्ष ऐसे याद रखिएगा का या

59:55को देखे भैया सबसे पहले बी का निर्माण हुआ

1:00:00था इस बीच ने शत्रुता का निर्माण किया

1:00:06शत्रुता का निर्माण किया जिससे नई चीजें

1:00:10उदय युद्ध जिससे नई चीजें उदय युद्ध और

1:00:15पुरानी चीजों में अवरोध उत्पन्न हुआ अवरोध

1:00:19अवरोध मतलब अनिरुद्ध और इन अवरोधों से

1:00:23हमें मुंडक जैसे लोग या मुंडक जैसे लोगों

1:00:30से मुलाकात करनी पड़ी फाइनली दर्शकों के

1:00:34बाद नाग दर्शक आए तो शत्रुता भी से

1:00:40शत्रुता हुई भी से शत्रुता से उदयीमान हुए

1:00:44कई सारे अवरोध इन अवरोधों से निर्मित हुआ

1:00:47एक तरीके से मुंडक और मुंडक से अंतिम रूप

1:00:51में समापन हुआ था हम कह सकते हैं कि

1:00:55आधा ताकि आप अपनी कहानी याद रखिए का

1:00:59यह

1:01:02है बीयू अमन बीएचयू 5252 कुछ लोग तक बना

1:01:07रहे हैं ठीक है ठीक है कोई बात नहीं कहानी

1:01:11के रूप में समझ लेते हैं तो बिंदी से

1:01:14शत्रुता युद्ध से शत्रुता से उदयीमान हुआ

1:01:18विमान हुआ था से चतुरता से उदयीमान हुआ था

1:01:22विरोध और अवरोधों से मुंडक बने मुद्दत से

1:01:27ही अंतिम रूप में नाग दर्शक बनी अंतिम रूप

1:01:32में नाग दर्शक बने जैसे आप याद रख सकते

1:01:35हैं एक लाल तेरा बीच धार मना नहीं बीच

1:01:42उधार मांगना नहीं होगा बीड्स उधार मांगना

1:01:47नहीं ठीक है ठीक है यह सबसे पहले शुरुआत

1:01:51करते हुए लालू में बीच-बीच में इसकी

1:01:58स्थापना करता है तो हर्यक वंश का संस्थापक

1:02:02रॉबिन बिष्ट और हैं मत्स्य पुराण में

1:02:05मत्स्य पुराण साहित्य धार्मिक ग्रंथों से

1:02:07लिए गए हैं मत्स्य पुराण में बिंदुसार के

1:02:11लिए इस क्षेत्र ओजस तथा जैन साहित्य में

1:02:15वर्णित शब्द का उपयोग है बिंबिसार के लिए

1:02:19कुछ जगह क्षेत्रों जज या श्रोणिक शब्द का

1:02:22उपयोग है दी अनुसार के समय मगध की राजधानी

1:02:26राजगृह या गिरिव्रज ब्रज इसीलिए कहते थे

1:02:30क्योंकि गिरी मतलब पर्वत पांच पर्वतों के

1:02:33बीच में था इसीलिए गिरिव्रज या राज्य ग्रह

1:02:37उस समय मदद की राजधानी थी मीणा तो मदद की

1:02:41राजधानी बिंबिसार के दौरान हम कह सकते हैं

1:02:44कि राजगृह 30 25 पहाड़ों से घिरी हुई थी

1:02:47कि

1:02:48में मदद की प्रथम राजधानी कौन सी थी

1:02:51पाटलिपुत्र वैशाली गिरिव्रज चंपा मुझे

1:02:55नहीं लगता है कि इसमें किसी को आंसर देने

1:02:58में दिक्कत आएगी मदद के विस्तार के लिए भी

1:03:03सारणी तीन प्रकार की कूटनीति का सहारा

1:03:05लिया इतिहास में यह काफी महत्वपूर्ण माना

1:03:10जाता है कि यह पहला शासक था जो केवल युद्ध

1:03:14ही या केवल और केवल युद्ध को ही शासन का

1:03:19विस्तार का रीजन नहीं मानता था बल्कि वह

1:03:22मित्रता भी करता था वैवाहिक संबंध करता था

1:03:26तीन रास्ते अपनाता था मित्रता व्यवसायिक

1:03:30संबंध या फिर युद्ध तुम मैत्री कूटनीति

1:03:34पति नरेश चंद्रप्रद्योत की पीलिया की

1:03:38बीमारी को मतलब अवंतिका नरेश था उज्जैन

1:03:41अवंतिका उज्जयिनी था उनको बीमारी हो गई थी

1:03:45पीलिया जौंडिस की बीमारी हम कहते हैं

1:03:48में आ जिसमें लीवर खराब होता है ट्रेल बन

1:03:51कर दिया जाता है तो उस समय इनके दरबार में

1:03:55एक बहुत ही बड़े फेमस विद्यते जिनके बारे

1:04:00में भी आप लोगों ने कई बार सुना होगा जीवक

1:04:03जीवक नामक वैद्य जीवक नामक वैद्य जीवन

1:04:08देने वाला वैद्य जी वर्कर जीवक वैद्य को

1:04:13इन्होंने भेजा था साथ गांधार नरेश पुष्कर

1:04:16के दरबार में मैत्री दूत भेजे थे तो

1:04:20गांधार नरेश शानदार नरेश पाकिस्तान पिछला

1:04:25वहां पर भी मैत्री के लिए नरेश पुष्कर के

1:04:28दरबार में मैत्री दूत भेजे थे तो मैत्री

1:04:32दूध में इन्होंने मित्रता करने के कई

1:04:35प्रयास किया और उसके बाद उसके बेसिस पर भी

1:04:38कहा जाता है कि अपने शक्ति विस्तार में

1:04:41मदद ली इन लोगों की व्यावहारिक नीति

1:04:43इतिहास में बिंबिसार की 500 रानियां होने

1:04:46की चर्चा मिलती हैं

1:04:48कि ऐसी चर्चा मिलती है लेकिन दोबारा इसके

1:04:51तक प्रचलित है मतलब चर्चा में रहते हैं तो

1:04:56महाकौशल कौशल नरेश कौशल नरेश प्रोसेनजित

1:05:01की बहन और चेल्लम्मा चेल्लम्मा व जेई नरेश

1:05:05चेतक की पुत्री चेल्लम्मा व जी नरेश चेतक

1:05:11की पुत्री चेल्लम्मा इन दोनों के साथ

1:05:13वैवाहिक संबंध होते हुए यहां पर भी अपना

1:05:17प्रभाव डालते और युद्ध नीति में अंगराज

1:05:19कर्ण के अंग महाजनपद को अपने साम्राज्य

1:05:22में मिला बीते हैं बिंबिसार काफी समझदार

1:05:26शक पैटर्न विस्तार के लिए साम-दाम-दंड-भेद

1:05:30प्रत्येक प्रकार की नीति को अपनाया कई जगह

1:05:33पर मैत्रीपूर्ण संबंधों को स्थापित किया

1:05:36दूत भेजे या फिर जीवन जैसे वैद्य को भेजा

1:05:41अवंती में

1:05:43कि वैवाहिक संबंधों में भी दो वैवाहिक

1:05:46संबंध काफी चर्चा में है महाकौशल और

1:05:48चेल्लम्मा और युद्ध नीति के तहत अंग रात

1:05:52को भी या अंग महाजनपद को भी अपने कब्जे

1:05:55में कर लिया तो हम देख सकते हैं कि मदद ने

1:05:58अंग को भी अपने कब्जे में किया अवधि तक

1:06:02में अपनी मित्रता को जोड़ा यहां तक कि हम

1:06:06कह सकते हैं कि गांधार सबसे पूर्वी

1:06:09महाजनपद की ओर भी इन्होंने चीजों को अपने

1:06:13मित्रतापूर्ण चीजों के साथ जोड़ा फिर

1:06:16विवाह के रूप में कौशल की बात कर सकते हैं

1:06:19और चेंज ही बात कर सकते हैं

1:06:23तो फिर आए अजातशत्रु अपने पिता की हत्या

1:06:27करके अजातशत्रु अपने पिता आफ बाजार की

1:06:29हत्या करके सिंहासन पर बैठा और इसीलिए

1:06:32इनको पिता की हत्या करने वाला वंश भी कहते

1:06:36हैं इनका उपनाम कुनिक अजातशत्रु ने अवंती

1:06:40महाजनपद के भय से राजधानी राजगृह का

1:06:43दुर्गी करण चारदीवारी का निर्माण कर दिया

1:06:47मतलब राजगृह में इन्होंने पूरी तरह से

1:06:51दुर्ग का निर्माण किया तो यहां से राज

1:06:55दरबार में दुर्ग बनने की प्रक्रिया भी

1:06:58मिलती है और ऐसा क्यों क्योंकि पिता के

1:07:01मित्र थे तो जब उन तक खबर पहुंची होगी कि

1:07:04भई पिता की हत्या करके राजा बन गया है तो

1:07:07शायद वह नाराज हो और कि हम पर हमला करें

1:07:10तो इसके पहले उन्होंने अपनी राजधानी को

1:07:12सुरक्षित कर लिया

1:07:14के अध्यक्ष चतुर जल मार्ग के महत्व को

1:07:16समझते हुए नदी दुर्गा की संकल्पना के रूप

1:07:19में पाटलिपुत्र को मदद की राजधानी बनाना

1:07:22चाहता है इस प्रकार अजातशत्रु पहला मदद

1:07:25शासक था जिसमें पाटलिपुत्र के रणनीतिक

1:07:28महत्व को समझा था हर्यक वंश के किस शासक

1:07:32को पुणे कहा जाता है पुणे के उपनाम पुनित

1:07:36दिया जाता है तो कि से कुंठित कहां जाता

1:07:39है

1:07:42कि आप जो पितृहंता वंश है

1:07:54है तो आंसर आएगा आंसर आएगा ओबवियसली लिए

1:07:58बिंबिसार के पुत्र अजातशत्रु को हर्यक वंश

1:08:02के पुण्य के रूप में जाना जाता है यह शासक

1:08:06में सर्वप्रथम पाटलिपुत्र के राजधानी के

1:08:09रूप में रणनीतिक महत्व को समझ लिया था

1:08:13मतलब पाटलिपुत्र के महत्व को समझ लिया था

1:08:15खुर्रम कहेंगे कि अजातशत्रु ने अजातशत्रु

1:08:21ने अजातशत्रु के सिंहासन पर बैठने के

1:08:24आठवें वर्ष महात्मा बुद्ध का

1:08:27महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था जी हां

1:08:31महापरिनिर्वाण प्रगति और जाते हैं जो

1:08:35दिखाया जाता है वह धर्म में तो पूछा जाता

1:08:39है कि किस राजा के काल में मदद में कौन से

1:08:43सम राजा का काल था कौन से शासक थे जिस समय

1:08:46बोध अ मतलब महात्मा बुद्ध के

1:08:49महापरिनिर्वाण करते हैं तो आठवें बैठने के

1:08:54पृथ्वी वर्ष आठवें वर्ष इसलिए राज ग्रहों

1:08:57की शांत करनी गुफा में राज ग्रहों की शांत

1:09:01कर निभाने अजातशत्रु के संरक्षण में

1:09:05महाकश्यप की अध्यक्षता में प्रथम बौद्ध

1:09:09संगीति का आयोजन किया जाता है जैसे कि आज

1:09:13कल किसी व्यक्ति की पुण्यतिथि पर किसी

1:09:16व्यक्ति के जन्म दिवस के मौके पर कवि

1:09:19सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं कई सारी

1:09:22चीजें होती हैं मुझे ऐसा लगता है कि शायद

1:09:24उस समय आप इसी तरीके की अधिकतम जीती

1:09:28आयोजित की गई होगी आपको क्या लगता है

1:09:31लालियों तो इसमें रात ग्रहों की शांत करने

1:09:34गुफा में अजातशत्रु के संरक्षण में महर्षि

1:09:38कश्यप की अध्यक्षता में तो राज ग्रहों की

1:09:42शांत करनी गुहा जगह काना राजा शासक

1:09:47अजातशत्रु अध्यक्षता करते हैं महाकशप्पा

1:09:51और पहली बौद्ध दर्शन

1:09:54विपी बहुत सारे सवाल हैं जो लाली पीडीएफ

1:09:58की मांग कर रहे हैं घबराइए नहीं मैं

1:10:01पीडीएफ क्लास के बाद अवेलेबल करा दूंगा

1:10:03पीपीटी के रूप में नहीं हमारी टीम आपको

1:10:06पीड़ित बाकायदा ऐप और साइज के पेपर में दे

1:10:09देगी पर अभी आप पढ़ने पर गौर करा करिएगा

1:10:13कितनी बार समझाया है कि पहले कंसेप्ट पर

1:10:16लगे रहा करिए मास्क कर अजातशत्रु की बात

1:10:19कर रहा है बिंबिसार की बात कर रहा है

1:10:21प्रथम बौद्ध संगीति की बात कर रहा है

1:10:24राजधानी की बात कर रहा है और लाल ताली लगे

1:10:27है पीडि़त यह कुछ ऐसे नहीं लगता है जैसे

1:10:30कि मुन्ना भाई एमबीबीएस की क्लास में संजय

1:10:34दत्त बीच में खड़ा हो जाए और कहेगा क्या

1:10:36वह फॉर्म भरना जरूरी है तो वह इसी मेरा

1:10:40लाल है पीडीएफ पीडीएफ पीडीएफ पीडीएफ तो

1:10:44मेरे लाल मास्टर पीडीएफ दे देगा अभी पहले

1:10:47जरा इस पर गौर तो करो अभी टाइम मशीन में

1:10:50हम लेकर चल रहे हैं और देख रहे हैं कि

1:10:52देखो कैसे राजा

1:10:54कि मैं अपने पिता की हत्या की फिर राजा

1:10:57बना फिर उसके बाद आगे क्या हो रहा है तो

1:11:00अजातशत्रु के आठवें वर्ष में ही हम देखते

1:11:03हैं कि महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण

1:11:05होता है और उसके बाद प्रथम बौद्ध संगीति

1:11:08सामने आती हैं प्राप्त करने गुफा में

1:11:11अध्यक्ष शत्रु के संरक्षण में महाकशप्पा

1:11:15की अध्यक्षता में प्रथम बौद्ध संगीति का

1:11:18आयोजन किया जाता है अजातशत्रु ने महान

1:11:22कूटनीतिकार वक्त प्रकार की सहायता से

1:11:25देखना अजातशत्रु का काफी मतलब हम कहेंगे

1:11:29कि एक तरीके से चाणक के जैसी ही

1:11:31बुद्धिजीविता भी वक्त प्रकार की सहायता से

1:11:35अपने साम्राज्य का विस्तार करता है और वह

1:11:38जी को मदद में मिलाने में वक्त से कार की

1:11:41प्रमुख भूमिका मानी जाती हैं तो वह जी को

1:11:45मदद में मिलाने में वक्त से कार की भूमिका

1:11:48को नकारा नहीं जा सकता और रथ मूसल पत्थर

1:11:52फेकने वाले इस प्रकार किस

1:11:54आप सोचिए कि उस जमाने में भी कई वर्तमान

1:11:57में बारूद और गोले वाले फेकने वाले हमारे

1:12:00पास मशीनें हैं तो पर हैं उस जमाने में

1:12:04पत्थर फेंकने वाली एक मशीन दें व्रथम उसल

1:12:08रथ और मूसल रथ मूसल पत्थर फेकने वाले इस

1:12:14प्रकार की तो और महा शीला महिला मतलब बहुत

1:12:18बड़ा महर्षि लाभ घंटा महिला कंटक दरवाजा

1:12:23तोड़ने के लिए बड़ा पत्थर फेकने वाला

1:12:26छात्र यह अजातशत्रु ने व जी को जीतने के

1:12:30लिए उपयोग किया था खुर्रम उस स्थल और

1:12:34महिला कंटक बाहुबली मूवी देखी होगी तो

1:12:37बाहुबली मूवी में कुछ सीन दिखाए गए सोचिए

1:12:40कि कुछ ऐसी मशीन होगी जो पत्थर को

1:12:43फैक्ट्री होगी दूर तक वजह के विरुद्ध

1:12:46संघर्ष में आजीवक संप्रदाय के संस्थापक

1:12:49मुहम्मद अली पुत्र घोषाल की मृत्यु हो गई

1:12:53तो

1:12:54चीन के विरुद्ध संघर्ष करने के दौरान

1:12:56आजीवक संप्रदाय के जो संस्थापक थे मक्खन

1:13:00अली पुत्र घोषाल इनकी मौत हो जाती है

1:13:03फैक्ट याद रखना तो हम कहेंगे कि जो वजह

1:13:07हैं उस वक्त जी को जीतने का जो बात आती है

1:13:11वह यहीं से आती हैं वह जी को जीतने के बाद

1:13:15जो आती हैं फिर आते हैं उद्यान उदयभद्र

1:13:18उदयभद्र ने पाटलिपुत्र को मगध साम्राज्य

1:13:21की राजधानी बनाया अजातशत्रु ने महत्व समझा

1:13:25लेकिन राजधानी बनाई राजधानी बनाया उदय ही

1:13:29ने राजधानी उदयभद्र ने बनाई पाटलिपुत्र को

1:13:33और जिसके रणनीतिक महत्व को अजातशत्रु ने

1:13:37पहचाना था उदाहरण जैन और बौद्ध धर्म दोनों

1:13:40को समान रूप से मानने वाले शासक थे मतलब

1:13:43दोनों धर्मों का सम्मान करते थे कि शासन

1:13:47द्वारा सर्वप्रथम पाटलिपुत्र का राजधानी

1:13:50के रूप में चयन किया गया तो हम कहेंगे कि

1:13:53उदयवीर

1:13:54कि उदयभद्र उदारमना उदयभद्र ने पाटलिपुत्र

1:13:58को राजधानी के रूप में स्वीकार किया और एक

1:14:02तरीके से मुद्दत के बाद फिर अंतिम रूप में

1:14:04नागदशक जिन्हें दर्शक भी कहते ना बेशक

1:14:07महाजनपद के हर्यक वंश का अंतिम शासक था

1:14:10जिसकी हत्या बनारस के अमात्य बनारस के

1:14:14अमात्य हम आटे का मतलब उपराज्यपाल मंत्री

1:14:17समझ लेना एक तरीके से हम आटे का मतलब

1:14:20उपराज्यपाल शिशुनाग ने कर दी थी शिशु

1:14:23नागवेकर दी और जैसे शिशुनाग ने हत्या कर

1:14:26दी अब उस रात गद्दी पर नया शक नया वंश

1:14:33चलाएगा

1:14:35कि उस राजगद्दी पर नया शासक नया वंश का यह

1:14:39शिशुनाग वंश शिशुनाग वंश के दो ही राजा है

1:14:42शिशुनाग और काला शॉप युक्त वर्ण शिशुनाग

1:14:47वंश का संस्थापक शिशुनाग ने अवंती और

1:14:50वक्तव्य को युद्ध अभियान के द्वारा मगध

1:14:53साम्राज्य में मिला लिया था तो अवंती से

1:14:56युद्ध किया क्योंकि इससे पहले कि

1:14:58पूर्ववर्ती शासकों के द्वारा अंग व जी

1:15:01कौशल को महाजनपद में मिला लिया गया था और

1:15:04शिशु ना के लिए अब मदद का विस्तार करने का

1:15:07मार्ग सफल हो गया था क्योंकि आलरेडी वह

1:15:10तीन महाजनपद अपने कब्जे में कर चुके थे तो

1:15:14हम यह कह सकते हैं कि मदद ने व जी को मिला

1:15:17लिया कोशल को मिला लिया मलिक को मिला लिया

1:15:21अब अवंती पर भी हमला कर दिया वह बच्चे को

1:15:24भी अपने कब्जे में कर लिया अवंती को भी

1:15:27कब्जे में कर लिया वक्त से को भी कब्जे

1:15:29में कर लिया

1:15:31कि इस स्थिति से उल्लेख है कि जब चुनाव का

1:15:34पूरा ध्यान व श्रवंती की ओर केंद्रित वजह

1:15:37के लिए छवि शासकों के द्वारा मदद के

1:15:41विरुद्ध आंतरिक चयनित किए जाने प्रारंभ हो

1:15:43गए तो जो लिच्छवी शासक भय व जी के उनको

1:15:48लगता था कि हमें फिर से अपने महाजनपद को

1:15:51प्राप्त करना है इस स्थिति से निपटने के

1:15:54लिए शिशुनाग ने वैशाली को मदद की दूसरी

1:15:58राजधानी बनाया जो वजह के केंद्र में थी तो

1:16:02वह जी के केंद्र में जो वैशाली हैं उसको

1:16:05दूसरी राजधानी बना कर वहां के षड्यंत्रों

1:16:08को कंट्रोल करने का प्रयास किया फिर काला

1:16:12शोक में वैशाली के मदद की राजधानी के

1:16:14दर्जे को फिर समाप्त करके वापिस

1:16:17पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया केवल

1:16:20पाटलिपुत्र फिर राजधानी रही काला शोक में

1:16:23महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के सौ

1:16:25वर्ष पूरे होने पर वह शैली में सर्व तमिल

1:16:29की अध्यक्षता में दूसरी

1:16:31व्यसन गिप्पी का आयोजन हुआ पहली बौद्ध

1:16:35संगीति अजातशत्रु राजगिरी व दूसरी बौद्ध

1:16:41संगीति काला शो कालाशोक ने महात्मा बुद्ध

1:16:46के शॉप वर्ष पूरे होने पर महापरिनिर्वाण

1:16:50के इस वर्ष पूरे होने पर वैशाली में सर्व

1:16:54तामीर की अध्यक्षता में दूसरी बौद्ध

1:16:56संगीति का आयोजन किया था ख ग

1:17:00यह बिल्कुल वैसी बात है भाई यह क्या है

1:17:02संगति हम लोग नहीं करते कवि सम्मेलन पुण्य

1:17:06तिथि पर या जैसे लोगों को बुलाकर कोई

1:17:09कार्यक्रम कर लेना वैसे ही कार्यक्रम की

1:17:13बात है वह बेसन गिरती तो इतिहास में जो दो

1:17:16बौद्ध संगीति हैं उस पर भी गौर कर लीजिएगा

1:17:19आप लोग तो एक तो है अजातशत्रु के कार्यकाल

1:17:22में दूसरी है काला शोक के कार्यकाल में एक

1:17:25जो रही ओर राजगृह में हो रही हैं और जो

1:17:28दूसरी है वह वैशाली में हो रही हैं अगर हम

1:17:31बात करें तो पहली जो बौद्ध संगीति हैं और

1:17:33जो दूसरी बौद्ध संगीति हैं तो पहली आठवें

1:17:36वर्ष होती हैं उनके अजातशत्रु के कार्यकाल

1:17:40के आठवें वर्ष के बाद और यह सब वर्ष

1:17:42महापरिनिर्वाण के पूरे होने पर होती है तो

1:17:46वैशाली में वैशाली में दूसरी बोध संगीत

1:17:49िबरादरी में पहली वह संधि

1:17:53और सुनाओ व निष्ठा व कौन सा बचा सकता

1:17:56जिसके समय में वैशाली में द्वितीय बौद्ध

1:17:59संगीति का आयोजन किया गया उसे कुंवर ने के

1:18:03नाम से भी जाना जाता है मतलब उत्सव शासक

1:18:06को प्राय वर्णन भी कहते हैं तो वह अपराध व

1:18:09में कोई और नहीं कालाशोक है महानंद चीन

1:18:15द्वारा धोखे से काला शो की हत्या कर दिए

1:18:19जाने पर कोई किसी को छोड़ता नहीं है फिर

1:18:24से अपने पाप लौट कर आते हैं बल्कि कहानी

1:18:27के रूप में तो महानंद सिंह के द्वारा

1:18:30महानंद टीम के द्वारा धोखे से काला शो की

1:18:33हत्या कर दिए जाने पर शिशुनाग वंश का अंत

1:18:36हो गया और महानंद सिंह के नेतृत्व में नंद

1:18:41वंश की स्थापना हुई अब आ गए नंदवंश जिसमें

1:18:45अंतिम आएगा धनानंद बड़ा क्रूर गुरु करने

1:18:49वाला मंगल मदद

1:18:54में मदद

1:18:56की मदद में शासन करने वालों में अब हमारा

1:18:59गए नंदवंशी पर महानंदी महापद्मनंद और

1:19:03घनानंद महानंदी नंद वंश का संस्थापक जैन

1:19:07धर्म का अनुयाई अभी तक बौद्ध धर्म के

1:19:10अनुयाई ज्यादा थी अब जैन धर्म का महानंद

1:19:14सिंह के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं

1:19:16मिलती इसके दासीपुत्र महापदम नंद ने

1:19:19महानंद सिंह की हत्या कर दी और नंद वंश का

1:19:23शासक अगला शासक बन गया तो इसके दासीपुत्र

1:19:27महापदम नंद ने इनकी हत्या कर दी कोई किसी

1:19:31को छोड़ता नहीं है वहीं शक्ति के लड़ाई

1:19:34नंद वंश का संस्थापक कौन था तो नंद वंश का

1:19:37संस्थापक महापदम नंद था एमपी पीएससी का

1:19:42सवाल है महापद्मनंद दूध अपना नाम था सर्व

1:19:46शत्रु संहारक भार्गव प्रो परशुराम एक राठ

1:19:52एकछत्र यह जो राजपूत इतना अलग-अलग नाम

1:19:56कि यदि राजा दित राज राजाधिराज फिर देते

1:20:01हैं वह अंबेडकर है कि हमारे मध्यकाल में

1:20:04जो मुगल राजा होते थे वह नवाब या फिर अकबर

1:20:08इस प्रकार की उपाधियां प्राप्त करवाते थे

1:20:12तो यह उस जमाने में हैं जैसे कई लोग अपने

1:20:16नाम के आगे कुछ लिखना चाहते हैं वैसे ही

1:20:18इन्होंने कई सारी उपाधियां धारण करके रखी

1:20:21थी तो सर्व शत्रु संहारक मतलब इसका अ इनका

1:20:25कहना है कि लपक बहुत शक्तिशाली माना जाता

1:20:27है यह भारी वजन अप्रूव परशुराम परशुराम के

1:20:32अवतार के रूप में दिखाया गया कई कहानियों

1:20:34में ने वर्ष राम के अवतार के रूप में एक

1:20:37राइट एक रात मतलब राष्ट्र का जो प्रमुख

1:20:40होता था उस दौर में एक राइट एकक्षत्र एक

1:20:45अच्छा प्रिंका देवी एक छात्र शासन करेंगे

1:20:47हम लोग तो एक छत्र एक राइट तरफ परशुराम

1:20:52भार्गव सर्वश्रुत महारथी महापद्मनंद

1:20:55ज्योति

1:20:56हैं इनके उपनाम थे महापदम स्वयं को भगवान

1:21:00परशुराम का अवतार मानता था भार्गव भगवान

1:21:03परशुराम का एक अनाम और

1:21:06कि परशुराम अर्थात दूसरा परशुराम सर्व

1:21:09शत्रु संहारक भगवान परशुराम की तरफ सभी

1:21:12क्षत्रियों का संघार करने वाला एक पंडित

1:21:15एक राइट एकक्षत्र सभी दिशाओं को जीतने

1:21:19वाली जैसी उपाधि धारण कर रहा है मतलब अपने

1:21:22आपको परशुराम का अवतार मानते थे अपने आप

1:21:25को मानते थे लोग नहीं मानते इसलिए बाद में

1:21:27फिर इतिहास भुला देता है अगर लोग नहीं

1:21:31मांग रहे तो फिर अपने आप को मानते थे कि

1:21:33सभी क्षत्रियों का संहार रखा है और

1:21:36क्षत्रुओं का संघार मतलब परशुराम के बारे

1:21:38में कहा जाता है कि वह एक ब्राह्मण परिवार

1:21:40से होने के बावजूद क्षत्रियों को जो गलत

1:21:43काम करते तो उनको समाप्त करते थे तो सर्व

1:21:45शत्रु संहारक का नाम भी लिया उन्होंने

1:21:47अपने इसमें एक राइट एकक्षत्र सबसे बड़े

1:21:51भार्गव नाम इसलिए क्योंकि परशुराम का एक

1:21:54और नाम भार्गव भी हैं महापद्म नंद के बारे

1:21:57में कलिंगर के खारवेल अभिलेख में भी

1:21:59जानकारी मिलती है तो किलिंग में अगर आप

1:22:01अभिलेख देखेंगे तो वहां पर एक बार वेल

1:22:04अभिलेख है इस अभिलेख

1:22:06अब एक है कि मगध नरेश महापद्म ने कलिंग पर

1:22:09आक्रमण किया और कलीम की विजय की थी मीणा

1:22:12अशोक के बहुत पहले की बात है सलीम से

1:22:15जिनसे उनकी मूर्ति उठाकर पाटलिपुत्र ले

1:22:17आया महापंकर लिंग में तनाव सुनी ना हम

1:22:21अपने महल का निर्माण किया था तो उस समय

1:22:24वहां पर कृषि कार्य के लिए नहर बनाई गई थी

1:22:26तनसु ली उन्हें यज्ञ किन्नरों के बारे में

1:22:29प्रथम अभिलेखीय प्रमाण कलिंगर ख्याल

1:22:32अभिलेख में मिलती है इंपोर्टेंट पॉइंट है

1:22:34नेहरू के बारे में पानी नामक

1:22:38व्याकरणाचार्य महापद्मानंद के समकालीन थे

1:22:41जिन्हें अष्टाध्याई नामक ग्रंथ की रचना की

1:22:44तो जो पानी में थे पानी नहीं

1:22:47कि यह जो महागायक तरीके से व्याकरण के

1:22:50ज्ञाता माने जाते हैं जब हिंदी व्याकरण

1:22:53पढ़ाया जाता है तो पानी में का नाम बहुत

1:22:55आता है तो पानी में नमक जो व्याकरणाचार्य

1:22:58महापद्म नंद के समकालीन थे जिन्होंने

1:23:01जिन्होंने अष्टाध्याई नामक ग्रंथ की रचना

1:23:04की थी

1:23:05है तो यह कटिंग वाले क्षेत्र को भी अपने

1:23:08कब्जे में कर लिया आ फिर आप घनानंद

1:23:11वास्तविक रूप में हम अगर कहें तो महापद्म

1:23:14नंद फिर घनानंद खनन को धनानंद भी कहते हैं

1:23:18कुछ किताबों में नंद वंश के अंतिम शासक

1:23:22घनानंद के समय ही भारत पर फिक्र अंदर का

1:23:25आक्रमण हुआ था यही वह दौर था जब सिकंदर

1:23:30विश्व विजय के लिए निकला था इसी दौर में

1:23:34माना जाता है कि चाणक केंद्र के पास गए थे

1:23:37और कहा था कि हमें सबको मिलकर इस बाहरी

1:23:42शत्रु का सामना करना चाहिए माना जाता है

1:23:45कि घनानंद बहुत ही क्रूर और घमंडी स्वभाव

1:23:48का था इसलिए चाणक्य का अपमान बहुत बार

1:23:52किया गया था इन के द्वारा और इसीलिए

1:23:55चाणक्य ने इनके समापन के लिए एक तरीके से

1:23:59रणनीति शुरू कर दी थी यूनानी ग्रंथों में

1:24:02भी घनानंद के लिए अग्रणी शब्द का उल्लेख

1:24:05हुआ है

1:24:05मतलब वह यूनानी लोग इन्हें अग्रमि नामक

1:24:09शासक के रूप में जानते हैं घनानंद के

1:24:11दरबार में स्टाइल स्थूलभद्र नामक दो

1:24:14प्रमुख अमात्य मंत्री एक मंत्री एवं

1:24:17आपूर्ति मंत्री और एक सलाहकार थे पिछले

1:24:20सप्ताह मंत्री और स्कूल भद्र इसके अलावा

1:24:24वर्ष उपवंश वृश्चिक कात्यायन जैसे विद्वान

1:24:29घनानंद के समकालीन थे नाम देखिएगा रिसीव

1:24:32के वर्षा उपवर्ष और रुचियों के नाम है तो

1:24:35बाद में आप देखेंगे कि सर यह क्या है

1:24:37वररुचि कात्यायन जैसे विद्वान विद्वान

1:24:41विद्वान बुद्धिजीवी लोग कात्यायन ने

1:24:45वर्तिका नामक ग्रंथ की रचना की तो महापद्म

1:24:49नंद में पानी बीम अपनी उनके दौड़ के घर

1:24:52आनंद के दौर के वर्ष के उपलक्ष मे हर उस

1:24:55चीज थे कात्यायन थे और कात्यायन ने

1:24:59वर्तिका नामक ग्रंथ की रचना की चंद्रगुप्त

1:25:02मौर्य ने चाणक्य की कूटनीतिक सहायता से

1:25:05घना

1:25:05कि उनकी हत्या कर मौर्य वंश की स्थापना की

1:25:10थी पतंजलि की महाराज के पानी ने की

1:25:13अष्टाध्याई कात्यायन की वर्तिका तीनों को

1:25:17संयुक्त रूप से मोहित राय कहा जाता है उस

1:25:21दौर में पतंजलि के महाभाष्य ग्रंथ को पानी

1:25:26के अष्टाध्याई ग्रंथ को और कात्यायन की

1:25:30वर्तिका तीनों को अगर संयुक्त रूप से कुछ

1:25:33नाम दिया जाए तो उसे मुनित्रय कहा जाता है

1:25:37मुनियों के द्वारा बुद्धिजीवियों के

1:25:40द्वारा रचित मुनित्रय निम्नलिखित में से

1:25:43मदद का कौन सा राजा सिकंदर महान का

1:25:46समकालीन था सिकंदर महान का तंकारी मतलब

1:25:49जिसके दौरान सिकंदर ने हमला किया था तू

1:25:52कोई और नहीं था खनन तथा या बिना आनंदधाम

1:25:57तो मदद का उत्कर्ष मदद को मिलने वाले

1:26:01सम्राट मदद को मिलने वाली सारी बातें हम

1:26:04बाकी महाजनपद

1:26:05तुम्हारे में भी संक्षिप्त में कुछ

1:26:07जानकारी जुटा लेते हैं ताकि बाकी के

1:26:10महाजनपदों का भी हम थोड़ा बहुत भ्रमण कर

1:26:13लेते हैं तो यह अपनी टाइम मशीन को लेकर

1:26:16जाते हैं दूसरे महाजनपदों की ओर और ढूंढते

1:26:19हैं कि वहां पर क्या-क्या चीजें चल रही है

1:26:23इस बीच शहर से कहानी की शुरुआत हुई थी और

1:26:28सम्राट अशोक पर खत्म होगी लेकिन अभी हम

1:26:31मौर्य वंश को अलग से पढेंगे क्योंकि मौर्य

1:26:34में जहां पर हमें एक तरीके से चंद्रगुप्त

1:26:38मौर्य मिलेगा बिंदूसार मिलेगा और सम्राट

1:26:42अशोक मिलेंगे तो उनके दर्शन हम थोड़े समय

1:26:45के बाद करेंगे हमने कहा कि चलो अब थोड़े

1:26:47से बाकि महाजनपद के बारे में भी थोड़ी

1:26:49बहुत जानकारी जुटा लेते हैं आइए अपने टाइम

1:26:52मशीन में आप गियर बदलते हैं और दूसरे

1:26:55महाजनपदों की ओर प्रस्थान करते हैं सबसे

1:26:58पहले महाजनपद में हम प्रवेश कर रहे हैं

1:27:01महाजनपदों दौर में दो प्रकार के तेल

1:27:03राज्यतंत्र मतलब राजाओं का तंत्र राजा का

1:27:06पुत्र राजा बनेगा और गणतंत्र याद रखना लिए

1:27:10मैं यहां पर एक बात आपको बता दूं भले ही

1:27:13हाथ में यह जो यूरोपीय इतिहासकारों अपनी

1:27:16पीठ थपथपाते रहे कि लोकतंत्र हमने दिया या

1:27:21अपने आप को कहते रहे कि हमने

1:27:23लोगों को बताया चुनाव गणतंत्र की जैसे

1:27:26विचार और इन्हें हम कहेंगे कि एक बार भारत

1:27:30के इतिहास पर नजर डालना मामला संसद

1:27:34विधायिका न्यायपालिका कार्यपालिका यह

1:27:38संस्था या आज की देन है लेकिन लोकतंत्र और

1:27:42गणतंत्र की जड़ें अगर आप खुद ने निकलोगे

1:27:45तो वह खुद तय हुए भारत तक पहुंचेगी तो

1:27:49हमें गर्व करना चाहिए जो लोकतंत्र का

1:27:52आडंबर करने वाले पश्चिमी देश के इतिहासकार

1:27:55हैं इन हम याद दिलाएं कि जिस दौर में तुम

1:27:58सोच भी नहीं सकते थे उस दौर में गणतंत्र

1:28:01रह चुका है हमारे देश में में

1:28:05लुट राजतंत्र और गणतंत्र राजतंत्र में एक

1:28:08मात्र शासक कृषकों से वसूले गए राजस्व का

1:28:11अधिकारी होता था लेकिन गणतंत्र में राजस्व

1:28:15पर प्रत्येक कबिलाई कुलीन का अधिकार होता

1:28:17था जिसे राजा कहां जाता था राज्यतंत्र शतक

1:28:21के पास एक नियमित व्यवस्था ठीक से ना होती

1:28:24थी गणतंत्र शासक में प्रत्येक राजा अपने

1:28:27सेनापति के अधीन सेना का प्रबंधन करने के

1:28:30लिए स्वतंत्र विधा तो एक तरीके से

1:28:32राज्यतंत्र में एक व्यक्ति पर पूरी शासन

1:28:35व्यवस्था केंद्रित थी तो एक तरीके से आप

1:28:37राजतंत्रको सोचना कि तक एक ही सकता है और

1:28:42गणतंत्र को संघ जैसा सूचना संग जैसा कि एक

1:28:45सप्ताह उसके कई सारे मुख आप सप्ताह की

1:28:48सत्ता के हिस्से भी राजतंत्र में ब्राह्मण

1:28:51प्रभावशाली थे लेकिन प्रारंभिक गणतंत्र

1:28:54में उनके लिए कोई स्थान नहीं था गणतंत्र

1:28:56व्यवस्था में कुलीनों की समिति के अंतर्गत

1:28:59कार्य किया जाता था जबकि राजतंत्र में

1:29:02निर्णय प्रक्रिया केवल एकमात्र शासक तक

1:29:05सीमित थी तो राजतंत्र केंद्रीयकरण का

1:29:08प्रतीक है जहां बुरी शक्तियां एक व्यक्ति

1:29:11के पास है गणतंत्र में शक्ति का बंटवारा

1:29:14है वहां पर राजस्व का बंटवारा है निर्णय

1:29:17लेने में भी कई सारे परिवर्तन आते हैं मल

1:29:21व जी कंबोज कुरु गणतांत्रिक चार महाजनपद

1:29:25प्रणाली पर आधारित है दो

1:29:28को याद कर लीजिए लाल यादव बलवंत जी कंबोज

1:29:32कुरु तो कंबोज उधर चले जाइए

1:29:36अफगानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा पर पूर्व

1:29:39दिल्ली वाला हस्तिनापुर वाला क्षेत्र फिर

1:29:42मल और वह जी मलय जो माल्या वाला हमने कहा

1:29:46था उन्हीं वाला क्षेत्र व दी वहीं पर वह

1:29:49मल्हौर जी गणतंत्र के अंतर्गत कई प्रकार

1:29:52के संख्या-1 बने होते थे जो एक ही महाजनपद

1:29:55के अलग-अलग भागों पर शासन करते थे तो

1:29:58महाजनपद के अंतर्गत शासन करने वाले कई गुण

1:30:01होते थे और लोगों से मिलकर फिर पूरा

1:30:04निर्णय हुआ करता था मल में 2 घंटा व और

1:30:07कुशीनारा थे जैसे कि मतलब अगर हम बात करें

1:30:10तो जिन्हें बाबा केवल और कुशीनारा कि

1:30:14निर्मल ने कहा जाता था वह जिमनास्ट समूह

1:30:18मे है वैशाली के लिच्छवि पूर्ण ग्राम के

1:30:22युक्त रक्त मिथिला के विधिवत राम ग्राम के

1:30:25काव्य क्लियर उग्र हो

1:30:28वो रव्य और इच्छुक तू मतलब यह हुआ करते थे

1:30:33इन दिनों से मिलकर महाजनपद बनता था निर्णय

1:30:36लिए जाते थे तो एक तरीके से गणतंत्रात्मक

1:30:40व्यवस्था भी थी जो कुछ आधुनिक व्यवस्था

1:30:43संघवाद के जैसा दिखती है

1:30:47तो आइए लालियों सबसे उत्तर में जो महाजनपद

1:30:50है वह कंबोज अब से दक्षिण में जो है वह

1:30:53चमक भी कहते हैं और अथक भी कहते हैं अब तक

1:30:56किया लक्ष्मण सबसे पूर्व में है अंगराज

1:31:00कर्ण वाला अंग और सबसे पश्चिम में हम

1:31:03कहेंगे कि गांधार जो गांधार उत्तर के रूप

1:31:06में भी आप कह सकते हैं पर सबसे उत्तर में

1:31:09कंबोज जाएगा वर्तमान भारत की सीमा के बाहर

1:31:12कंबोज और गांधार हैं अफगानिस्तान में

1:31:15कंबोज मिलता है पाकिस्तान में कंबोज और

1:31:17गांधार क्योंकि कंबोज का क्षेत्र क्योंकि

1:31:20वह यह जगत हो रही है वह क्षेत्र हैं तो

1:31:22मान लो अब का निशान में मिलता है यह

1:31:25पाकिस्तान में मिलता है तो कंबोज को

1:31:26पाकिस्तान में भी गिना जाएगा अफगानिस्तान

1:31:29में भी किया जाएगा पाकिस्तान में स्थित

1:31:31महाजनपद में कंबोज और गांधार पूरी तरह से

1:31:34शानदार पाकिस्तान में दक्षिण भारत का

1:31:36एकमात्र महाजनपद अवश्य उपस्थित दोनों नाम

1:31:40ए कई है

1:31:42हैं तो आइए पहले एक आइडिया लेते कंबोज और

1:31:45गांधरा यह टाइम मशीन से अब चलते हैं

1:31:48अफगानिस्तान की सीमा पर आपको लेकर जाते

1:31:50हैं वर्तमान कि अफगानिस्तान में वहां की

1:31:53राजधानी थी हॉट तक या राजेपुर तो कैसे याद

1:31:57रखना है या पैसे रखना भी कंबोज की राजधानी

1:32:01अबू भारत से हट गए हैं भारत से क्या हो गए

1:32:04हैं हट गए हैं तो एक तो है हाथ एक तो है

1:32:09फैट और दूसरा नाम जो उसका रखा गया है

1:32:13राजपुर राजपुर तो आप इसको याद रखिए का

1:32:19यहां तक के साथ रात जयपुर के रूप में मैं

1:32:23इसे राज कपूर कहता हूं राज कपूर याद करने

1:32:26के लिए भी राज कपूर ऐसे याद रखिए कि राज

1:32:29कपूर हॉट तक कंबोज कॉकटेल रिंग

1:32:33की वार्ता शत्रु ईद मतलब जो उस समय और

1:32:38कंबोज के वार्ता शत्रु शिविर आर्मी शासक

1:32:41दिल्ली इस और दारा देखते हैं कि यह सारी

1:32:44चीजें क्या है उस जमाने में वहां पर जो

1:32:47इरानी शासकों के द्वारा हमले हुए गांधार

1:32:50आधुनिक पाकिस्तान में स्थित राजधानी

1:32:54तक्षशिला और पुष्प पुष्प कलावती पुष्प

1:33:00कालावधि शासक थे पुष्कर सारी और यही है

1:33:04चाणक्य और चंद्रगुप्त वाला जो तक्षशिला

1:33:07तक्षशिला महाविद्यालय के बारे में भी आप

1:33:11लोगों ने सुना होगा तो चाणक्य और

1:33:13चंद्रगुप्त की जो बातचीत आपको आती है वह

1:33:16गांधार कि आप यह तो यह गांधार हैं गांधार

1:33:19की राजधानी तक्षशिला मुझे लगता है कि इसको

1:33:22कोई ट्रिक बनाने की जरूरत नहीं या

1:33:24पुष्कलावती फिर आए आश्रम अक्षरा की जगह

1:33:29अधीक्षक कहे दक्षिण भारत में आ जाइए

1:33:32राजधानी

1:33:33तु तिल भी हैं पोत भी हैं पाटन भी है तो

1:33:37कैसे याद रखेंगे चकली महाराष्ट्र में पाटन

1:33:40पाटन क्षेत्र को कहा जाता है जहां से नहर

1:33:44गुजरती है पानी गुजरता है महाराष्ट्र में

1:33:47पाटन का मतलब होता है तो गोदावरी के

1:33:50किनारे वहां पर होने के कारण पाटन पोरट

1:33:53पोरट मतलब नाव के रूप में तो पोर्टल पोतली

1:33:58हमारे देश का बहुत बड़ा बंदरगाह है मुंबई

1:34:00तुम्हारा के रूप में अस्तक को याद रख सकते

1:34:03हैं कि दक्षिण भारत में महाराज में

1:34:05गोदावरी पर तो राजधानी पोरट पोरट लिया अटक

1:34:09नर्मदा और गोदावरी नदी के बीच में गोदावरी

1:34:12नदी के किनारे कही द बहरा से विंध्य पर्वत

1:34:14के दक्षिण में केवल एकमात्र महाजनपद फिर

1:34:18कुरु कुरु राम महाजनपद कि से तो मुझे लगता

1:34:21है कि बताने की जरूरत ही नहीं है महाभारत

1:34:23की पूरी कहानी कौरव पांडवों की हस्तिनापुर

1:34:27राजधानी प्रमुख संरक्षक कोण में पूर्व

1:34:30निवासी अपने शारीरिक बल और मानसिक सु

1:34:33आपके लिए प्रसिद्ध सूरसेन सूरत से मथुरा

1:34:37मथुरा शूरसेन शूरसेन मथुरा प्रमुख शासक

1:34:42अवंतिपुर अवंतिपुर के माध्यम से मथुरा में

1:34:46बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ तो शूरसेन की जो

1:34:50राजधानी व मथुरा शूरसेन भगवान कृष्ण के

1:34:54नाम पर सूर्योदय के वक्त सूर्य व की

1:34:58राजधानी कौशांबी कौशांबी बोद्ध और जैन

1:35:01दोनों धर्मों का प्रमुख केंद्र है व्यक्ति

1:35:04का प्रमुख वंशिता पौरव और वहां का प्रमुख

1:35:07शासक था उदयन तो व जो महाजनपद है कौशांबी

1:35:12वहां की राजधानी है

1:35:15और इसे भी आप अपॉइंट ट्रिक बना सकते हैं

1:35:18कि जैसे वक्तव्य पर

1:35:22को व्हाट्सएप और कौशांबी है

1:35:29हाउ टो वॉच और कौशांबी वंशिका मीनिंग

1:35:33देखते हुए कुछ ट्रिक बन जाए तो देख लीजिए

1:35:35का या फिर अकाउंट की महाजन प्रत्याशी

1:35:38महाजनपद काशी बनारस वाराणसी व्हील पुल

1:35:42काशी वाराणसी वाराणसी के अस्सी घाट वरूनी

1:35:45वहां की नदी वात नहीं मिलती लेकिन अस्सी

1:35:48घाट और वरुडी तो वाराणसी राजधानी प्रसिद्ध

1:35:51राजा ब्रह्मदत्त अक्षय लिए क्यों है भाई

1:35:54जैसे हमने मगध के राजा पढ़ना अलग अलग वैसे

1:35:56वहां के राजाओं के बारे में कुछ चर्चा कर

1:35:59रहे हैं प्रारंभ में काफी सबसे शक्तिशाली

1:36:02महाजनपद था वास्तविक रूप में मदद जप

1:36:06शक्तिशाली नहीं हुआ था तो इस समय सबसे

1:36:08शक्तिशाली काशी माना जाता था उसका बड़ा

1:36:11कारण यह था यह तरीके से बफर स्टेट एक तरफ

1:36:15तो हम कहेंगे कि ऊपर आप देखेंगे कि गुरु

1:36:19राजवंश या फिर महाजन प्रथा और नीचे मदद की

1:36:22बात पिछले बीच में आता था तो इसकी भी

1:36:25शक्ति बड़ी विस्तारित हो रही थी लेकिन

1:36:26धीमें-धीमें है यह कोषाध्यक्ष

1:36:29लुटेरों ने कि किसी को राजस्थानी मिला तो

1:36:32फिर वह विकसित नहीं हो पाए तो इसीलिए

1:36:35अविमुक्त क्षेत्र अभिधान भी कहते हैं मतलब

1:36:38युद्ध के बीच में जो बट दूर होता है

1:36:41अंगराज कर्ण सर्वप्रथम उल्लेख अथर्व वेद

1:36:44में राजधानी चंपा

1:36:47की राजधानी चंपा पण प्रमुख सचिव ब्रह्म

1:36:51दत्त चंपा नदी अंग व मदद के बीच की सीमा

1:36:54बनाती थी पहली जनपथ जिसे मदद ने विजित

1:36:57किया सबसे पहले मदद ने इस अंग को ही जीता

1:37:01था और यहां की जो राजधानी है वह चंपा के

1:37:04रूप में जानी जाती है फिर है पांचाल

1:37:08पांचाल नरेश पांचाली द्रोपदी वाला

1:37:12अहिच्छत्र यात्रा फील इसकी राजधानी दो

1:37:16तिहाई क्षेत्र तथा काम बिल्ली पांचाल

1:37:19महाजनपद दो भागों में बंटा था दोनों को

1:37:21भागीरथी नदी उत्तर और दक्षिण भाग में

1:37:23बांटती थी इसलिए उत्तर और दक्षिण भारतीय

1:37:26अलग अलग राजधानियां थी फिर कौशल श्रावस्ती

1:37:30कुशावती श्रावस्ती का नगर विन्यास अर्द्ध

1:37:33चंद्राकार था और सदा मीरा खंडहर गोमती नदी

1:37:36सई नदी प्रसिद्ध शासक वहां के प्रति जितने

1:37:40नदियां से गुजरती हैं वह जी-8 गणों का संग

1:37:44राजधानी व शालीनता गंगा नदी व जी

1:37:47भगत के बीच में बार सीमा रेखा बनाती है और

1:37:49महावीर व जी गणराज्य के ही राजकुमार थिंग

1:37:54कि महावीर जैन तीर्थ शिरडी ऋग्वेद में

1:37:58उल्लेख है चेदिराज शिशुपाल चंबल और केन

1:38:01नदी के बीच राजधानी शुक्ल मति या शक्ति

1:38:04मति और प्रमुख शासक शिशुपाल अवंती राजधानी

1:38:10उज्जयिनी महिष्मति बाहुबली वाली मूवी याद

1:38:14करिएगा महिष्मति वेत्रवती नदी महिष्मति

1:38:18नदी मदद के अतिरिक्त यही राज्य था जहां

1:38:21लोहे की खाने थी और चंडप्रद्योत यहां के

1:38:25प्रमुख शासक पर जिनको पीलिया हो गया था

1:38:28मत्स्य राजस्थान में चले आइए उपलब्ध

1:38:33उपलब्ध तथा विराटनगर विराटनगर यहां के

1:38:37राजा के नाम पर ही दो राजधानियां पशु पालन

1:38:39किया जाता था गाय के पालने के लिए

1:38:42प्रसिद्ध था मल अंगुत्तर निकाय में उल्लेख

1:38:45राजधानी कुशीनारा अथवा मल नरेश बोद्ध धर्म

1:38:49के विरुद्ध मुख्य अतिथि महावीर और बुद्ध

1:38:50दोनों का महापरिनिर्वाण मलहम हुआ था

1:38:54तो आइए थोड़ा विस्तारपूर्वक देखते हैं एक

1:38:58चीजों को समझते ज्यादा नहीं बताएंगे बस

1:39:01महाजनपदों में थोड़ी बहुत चर्चा इसमें कर

1:39:03लेते हैं उत्तर में जो कंबोज है आप

1:39:08देखिएगा कि हिंदूकुश पर्वत या काराकोरम के

1:39:11आसपास का क्षेत्र जो है वह कंबोज का

1:39:14मिलेगा जो फिर हम कहेंगे

1:39:16अफगानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा में यहां

1:39:18की राजधानी हटक या राजपूर अच्छी नस्ल के

1:39:22घोड़ों के लिए प्रसिद्ध है यहां के जो नगर

1:39:24मे हैं राजपूत थे नंदीपुर ते द्वारका थी

1:39:27कंबोज पहले एक राजतंत्र था किंतु बाद में

1:39:30यहां पर गणतंत्र का विकास हुआ को टिले ने

1:39:34अपने ग्रंथ अर्थशास्त्र में कंबोज के

1:39:36निवासियों को वार्ता स्ट्रोंग GB की

1:39:39संज्ञा दी थी मतलब अर्थशास्त्र जोर लिखा

1:39:42गया कौटिल्य के द्वारा उसमें वहां के

1:39:45निवासियों को उन्होंने नाम दिया है वार्ता

1:39:47शास्त्रों बीवी क्या मतलब होता है वार्ता

1:39:51से तात्पर्य है कृषि पशुपालन

1:39:53व्यापार-वाणिज्य

1:39:54अपने हिसाब देना व्हाट्सएप शब्द बहुत बदल

1:39:57जाता है वार्ता जिसे आम बोल-चाल की भाषा

1:40:00में शब्द करेंगे लेकिन यहां पर वार्ता

1:40:02बोल-चाल नहीं है बातचीत नहीं है बल्कि

1:40:05कृषि पशुपालन व्यापार-वाणिज्य हुए और

1:40:09शत्रु के विकार थे शास्त्रों के माध्यम से

1:40:11आय अर्जित करने से हैं पूर्व दक्षिण और

1:40:15चंद्र वर्धन कंबोज के शासक रहे थे

1:40:18सुदक्षिण और चंद्र वर्धक इरानी शासक

1:40:21दिल्ली ऐश्वर्या द्वारा बखूबी से कहते हैं

1:40:24कंबोज को जीत लिया था खाओ फिर आते हैं

1:40:27गांधार महाजनपद पर पाकिस्तान का गांधार

1:40:31महाजनपद वर्तमान में तक्षशिला राजधानी

1:40:35तक्षशिला पुष्कलावती चारसद्दा कबूल घाटी

1:40:40में तक्षशिला में चाणक्य शिक्षक के रूप

1:40:42में कार्य करता था और यहीं पर चंद्रगुप्त

1:40:45और चाणक्य ने शिक्षित किया तथा आयुक्त

1:40:48भारत की परिकल्पना की तक्षशिला प्रसिद्ध

1:40:51बौद्ध केंद्र भी है जहां विश्व के अन्य

1:40:53देशों से भी लोग

1:40:54निशा के लिए आते थे एक जमाने में नालंदा

1:40:57के जैसे तक्षशिला भी था

1:41:01कि गांधार शासक पुष्कर सारी में वन टी के

1:41:05नरेश चंद्रप्रद्योत को हराया था सोचिए

1:41:08पाकिस्तान से उज्जैन तक आया था ताकि

1:41:11पुष्कर सारी ने मगध नरेश बिंबिसार के साथ

1:41:15मैत्री संबंध आप और बिंबिसार ने पुष्ट

1:41:18अंसार बर्नी के दरबार में दूध भेजा था

1:41:20बिंबिसार ने मित्रता अपना मीटिंग पुष्कर

1:41:23सारणी अपनी त्रि-आयामी कूटनीति के लिए

1:41:25प्रसिद्ध था वहीं त्रि-आयामी कूटनीति जो

1:41:27बिंबिसार अपना था फिर शुरू महाजनपद पूर्व

1:41:32महाजनपद हस्तिनापुर वर्तमान का

1:41:34दिल्ली-मेरठ बानेश्वर प्रमुख शासक कोण

1:41:38महात्मा बुद्ध के समकालीन था यह कोण में

1:41:41वहां पर गुरु निवासी अपने शारीरिक और

1:41:44मानसिक बुद्धि के लिए प्रसिद्ध थे

1:41:46हस्तिनापुर में बाढ़ की समस्या रहती थी

1:41:48जिसके कारण बाद में नी चक्षु नामक शासक

1:41:52में गुरु की राजधानी पोर्शन भी को बनाया

1:41:54था वक्त वाली वस्तुतः या महाजनपदों के

1:41:58विकास से पूर्व काय तथ्य है मतलब माना

1:42:01जाता

1:42:01कि अब बहुत महाजनपद से पहले की बात है पर

1:42:05हस्तिनापुर यहां पर याद रखिएगा सूट से इन

1:42:09मथुरा में भगवान कृष्ण पर याद रख लीजिएगा

1:42:14प्रमुख शासक थे अवंती पुत्र यह भी महात्मा

1:42:18बुद्ध के शिक्षक रहे हैं कई यूनानी ग्रंथ

1:42:21शूरसेन तथा मथुरा का उल्लेख मिलता यूनानी

1:42:23ग्रंथों में भी अवंती पुत्र के माध्यम से

1:42:26मथुरा में बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ

1:42:28क्योंकि अवंतिपुर महात्मा बुद्ध के शिष्य

1:42:30भी मे है फिर वक्त महाजनपद पर आते हैं अगर

1:42:35हम बात करें तो ठीक मथुरा के नीचे कौशांबी

1:42:38राजधानी कौशांबी बोद्ध और जैन दोनों धर्म

1:42:41का प्रमुख केंद्र रही है वह से का प्रमुख

1:42:43वन छिपाव था खुर्रम शासक उदयन था उसका वंश

1:42:47का शासक उदय ने पिंडोला नामक बोध भिक्षु

1:42:50के प्रभाव में बौद्ध धर्म ग्रहण किया था

1:42:53खुद एक बोध भिक्षु पिंडोला उनके संपर्क

1:42:57में आने पर यह ने बौद्ध धर्म को ग्रहण

1:42:59किया था कालिदास

1:43:01आपके स्वप्न वासवदत्ता में उदयन और

1:43:05वासवदत्ता की प्रेम कहानी का उल्लेख मिलता

1:43:07है कालिदास के द्वारा रचित स्वप्न

1:43:11वासवदत्ता वासवदत्ता अवंती नरेश चंद्र

1:43:15प्रदेश की पुत्री थी यह भी एक लंबी प्रेम

1:43:18कहानी है ढाई अक्षर प्रेम के अवंतिका जो

1:43:22शासक था और यह जो ओवर फेंका जा सकता एक

1:43:27दूसरे को पसंद नहीं करते थे पर इन के

1:43:29लड़के और लड़की में प्रेम संबंध थे अवंती

1:43:34नरेशचंद्र पद्धति पुत्री थी और दोनों

1:43:37महाजनपदों में शत्रुता थी

1:43:41और फिर काशी महाजनपद वर्तमान में मथुरा

1:43:44वैसा ही वाराणसी वरुणा और असि नदी असि नदी

1:43:48कुछ जगह अस्सी घाट भी लिखें प्रसिद्ध राजा

1:43:51थे ब्रह्म दत्त सारस्वत इन घाटी की पुष्टि

1:43:54पांचवी शताब्दी में भारत में आने वाले

1:43:57चीनी यात्री फाह्यान के यात्रा विवरण से

1:44:01भी होती है काशी के बारे में हमें यह जो

1:44:03चीनी यात्री पांचवी शताब्दी में आया था

1:44:06उसमें भी मिलती है प्राची की स्थापना

1:44:09पूर्व वंश के राजा क्रश द्वारा की गई जब

1:44:12मदद का विस्तार हुआ तो काशी मदद का हिस्सा

1:44:15बन गया था प्रारंभ में काशी सबसे

1:44:17शक्तिशाली महाजन पत्ता इसका अधिकार कौशल

1:44:20और अंग पर भी था परंतु बाद में योग्य और

1:44:23कुशल उत्तराधिकारियों के अभाव में यहां का

1:44:27जो शक्ति हुआ वह कौशल के आगे समर्पण कर

1:44:29गया और काफी को अविमुक्त क्षेत्र अभी

1:44:32धार्मिक कहां जाता था अविमुक्त क्षेत्र

1:44:34अभिदान मतलब एक तरीके का बफर जोन मगध

1:44:39महाजनपद जिसके बारे में डिटेल

1:44:41कि राष्ट्रपति शक्तिशाली राशि ग्रह

1:44:44विरुद्ध पहली राजधानी थी फिर पाटलिपुत्र

1:44:47पनीर वैशाली बनी फिर पाटलिपुत्र बनी बाद

1:44:50में राजधानी पाटलिपुत्र उसके बाद वैश्यालय

1:44:52और अंत में पाटलिपुत्र बनी चंद्रगुप्त

1:44:55मौर्य ने मदद के माध्यम से समस्त भारत को

1:44:57राजनीति के सूत्र में बांधा था फिर

1:45:00अंग-अंग जो कि वर्तमान में आप देख सकते

1:45:02हैं सबसे पूर्वी महाजनपद दें सर्वप्रथम

1:45:06उल्लेख अथर्ववेद में हैं राजधानी चंपा

1:45:09आधुनिक भागलपुर और मुंगेर जिले में इस

1:45:12प्रमुख शासक वृहद्रथ चंपा नदिया गौर मदद

1:45:15के बीच सीमा का निर्धारण करती है चंपा

1:45:17शिक्षक यदि वहां जैन धर्म का चर्चित

1:45:21अनुपयोगिता चंपा का एक जो शासक यदि वह अ

1:45:24था यदि वाहन तथा जैन धर्म का प्रमुख

1:45:26अनुयाई था मगर नगर नियोजन और वास्तुकार

1:45:29महान गोविंद मेहता अंग पहला जनपद का जिसने

1:45:33मदद से जिसे मदद ने विजित किया था और

1:45:36अंगों को जीतने के बाद ही मदद ने इस बात

1:45:38की प्लानिंग की कि अब पूरे क्षेत्र में

1:45:40हमारा इशा

1:45:41होगा फिर पांचाल

1:45:45कि गुरु के बाद आप देखेंगे कि पांचाल

1:45:49अहिच्छत्र तथा कांपिल्य दो राजधानियां थी

1:45:53आधुनिक रूहेलखंड उत्तरी पांचाल की राजधानी

1:45:56अहिच्छत्र थी और दक्षिणी पांचाल की

1:45:58राजधानी पीले थी क्योंकि भागीरथी नदी

1:46:02गुजरती हैं द्रोपदी का संबंध पांचाल फैसले

1:46:05से पांचाली भी कहा जाता था पांचाल महाजनपद

1:46:07दो भागों में बांटा गया था भागीरथी नदी के

1:46:10द्वारा फिर कौशल महाजनपद की अगर बात करें

1:46:13और वर्तमान में अवध क्षेत्र श्रावस्ती और

1:46:17कुशावती वर्तमान में अगर बात करें तो

1:46:20अच्छी दावती राप्ती नदी के तट पर

1:46:22श्रावस्ती का नगर विन्यास अर्धचंद्राकार

1:46:25था पूछा गया है धुंधला गंडक गोमती नदी

1:46:29सरयू नदी कौशल की सीमा में मिलती हैं

1:46:31सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक यहां का था राजा

1:46:35प्रतिनिधित्व महात्मा बुद्ध ने सर्वाधिक

1:46:37वर्षा व श्रावस्ती में ही किया है

1:46:40श्रावस्ती के प्रमुख शासक रहे कंस

1:46:43कि कंस मामा महाकौशल प्रसनजीत

1:46:48कि प्रसनजीत समकालीन और सामान्य थे है

1:46:52यह प्रश्न जिम के समकालिक और सामान्य थे

1:46:56मतलब उसी समय दौड़ के थे वह जी महाजनपद

1:46:58अवधि गणों का संता जिसमें सबसे प्रमुख

1:47:01लिच्छवी था आठ घरों में भी सबसे बड़ा

1:47:04लिच्छवीगण मतलब एक तरीके से राजा राजाओं

1:47:08से मिलकर महाजनपद लिच्छवी गणराज्य को

1:47:10विश्व का पहला गणतंत्र माना जाता है वह

1:47:14राजधानी वैशाली गंडक नदी के तट पर गंगा

1:47:17नदी व जी और मदद के बीच की सीमा का

1:47:19निर्धारण करती है बिहार का बुद्ध कालीन

1:47:21धनराज जैन महावीर व जी गणराज्य के ही

1:47:24राजकुमार मेहता चड्डी महाजनपद ऋग्वेद में

1:47:28छेदी का उल्लेख मिलता है चंबल और केन नदी

1:47:30मध्य प्रदेश में आ गए हम शक्ति मति शक्ति

1:47:33में अत्याधुनिक बुंदेलखंड प्रमुख शासक

1:47:35शिशुपाल अवंती महाजनपद उज्जैनी राजधानी

1:47:38महिष्मति इन दोनों के बीच वेत्रवती नदी

1:47:42बहती है मदद के तरीके ही राज्य था जहां

1:47:44लोहे की खानी धीणे चंडप्रद्योत जो महावीर

1:47:47और बुद्ध के समकालीन थे उन्हीं को हो गया

1:47:49था पीलिया चीनी यात्री युवानच्वांग

1:47:52रचनाओं में अवंतिका कई बार उल्लेख मिलता

1:47:55है तो चीनी यात्री जो युवानच्वांग आए थे

1:47:58बुद्ध ने प्रचार के लिए अनेक क्षेत्रों की

1:48:00यात्रा की लेकिन कभी व उज्जैन ही नहीं

1:48:02पहुंच पाए लेकिन वह अवंती नहीं पहुंच पाए

1:48:05तो कौन से महाजनपद में कभी नहीं पहुंच पाए

1:48:08बुद्घत्व तो हम कहेंगे कि अवंती में फिर

1:48:13मत्स्य महाजनपद दें राजस्थान का क्षेत्र

1:48:17उपलब्ध विराटनगर वर्तमान राजस्थान राज्य

1:48:20के जयपुर अलवर और भरतपुर जिलों में

1:48:23महाजनपद का नाम इसके संस्थापक विराट के

1:48:25नाम पर पड़ा पशु पालन विशेषकर गायों के

1:48:28पालन के लिए प्रसिद्घ फिर अश्मक महाजनपद

1:48:31जो सबसे अशरफ की जगह अधीक्षक भी कहा जाता

1:48:35है वह चली पोतन नर्मदा गोदावरी के बीच में

1:48:39हम कई गोदावरी के तट पर एक मात्र महाजनपद

1:48:41जो विंध्य पर्वत के दक्षिण में है

1:48:43महाराष्ट्र में था यह एकमात्र जनपथ जो

1:48:46दक्षिण भारत का अवंतिका ने बाग़ में

1:48:48विश्राम किया अशकों को जीत लिया था फिर मल

1:48:51महाजनपद

1:48:52में का उल्लेख अंगुत्तर निकाय में मिलता

1:48:55है अंगुत्तरनिकाय जो बोद्ध धर्म का है

1:48:58राजधानी कुशीनारा और स्वार्थी मल नरेश

1:49:02बोद्ध धर्म के अनुयाई थे महावीर और बुद्ध

1:49:05दोनों ने अपने निर्माण के लिए मल महाजनपद

1:49:07को चुना था तो दोनों का जो महानिर्वाण हुआ

1:49:10था वह मामले में ही हुआ था सबसे उत्तर में

1:49:13कंबोज अस्तक अंग गांधार

1:49:19है तो हमने इसमें देख लिया कि किस तरीके

1:49:21की सारी चीजें थी यह महाजनपद काल महान

1:49:24परिवर्तनों का काल था द्वितीय नगरीकरण

1:49:26महान परिवर्तनों का काल आर्थिक परिवर्तन

1:49:30व्यापार-वाणिज्य का प्रसार हुआ सिक्कों का

1:49:32प्रचलन हुआ राज्य द्वारा व्यापारियों को

1:49:34संरक्षण दिया गया व्यापारियों द्वारा

1:49:37राज्यों की आर्थिक सहायता व्यापारियों के

1:49:39समूचे सृष्टी के बारे में व्यापक जानकारी

1:49:41द्वितीय नगरीकरण कृषि तथा व्यापार के

1:49:44प्रसाद ने स्थायित्व को बढ़ावा दिया लोगों

1:49:47की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के कारण जीवन

1:49:50स्तर में सुधार वर्ण व्यवस्था का कठोर

1:49:53आरक्षण जाति प्रथा का प्रचलन महिलाओं की

1:49:55स्थिति में अत्यंत गिरावट फल स्वरूप इन

1:49:58सामाजिक कर्मियों के विरुद्ध एक सामाजिक

1:50:00प्रतिक्रिया भी प्रारंभ हुई और जिस तरीके

1:50:02से कठोर धार्मिक कर्मकांड अपनाए गए जैन और

1:50:05बौद्ध धर्म का प्रसार इन्हीं कारणों से भी

1:50:08होता है हालांकि सामाजिक प्रतिक्रिया

1:50:11धार्मिक आयोजन में हुई और महिलाओं की

1:50:12स्थिति में सुधार हेतु कोई ठोस प्रयास

1:50:14नहीं किए अर्थात महाजनपद काल में महिलाओं

1:50:17की स्थिति ठीक ही बनी रहे

1:50:19है इसका प्रमुख कारण यह था कि महिलाओं की

1:50:21स्थिति इतनी कमज़ोर और पिछड़ी हुई थी कि

1:50:23महिलाओं द्वारा वैचारिक स्तर पर विधि

1:50:26व्यवस्था के विरुद्ध कोई तीव्र आंदोलन और

1:50:28पहली श्रेणी की कि हम कहते हुए कि अब वह

1:50:31इतने कम दूर कर दिए गए थे इतने इतना उनका

1:50:35शोषण कर लिया गया था कि उनके पास कोई

1:50:37वैचारिक स्तर भी बचाता है कि वह अपने

1:50:40अधिकारों की मांग भी कर सके वैदिक धर्म के

1:50:43प्रति तीव्र विरुद्ध प्रतिक्रिया इस दौरान

1:50:46दिखाई देगी और यही है जो वैदिक

1:50:48प्रतिक्रिया होगी वहीं बोद्ध और जैन धर्म

1:50:50का उत्पत्ति का आधार उत्पन्न करेगी

1:50:53धार्मिक आधार पर भेदभाव के फलस्वरुप जैन

1:50:56और बौद्ध धर्म का उदय होगा तो लालियों

1:50:59मुझे जरूर बताइएगा कि महाजनपद काल आपको

1:51:02कैसा लगा अगली मुलाकात हमारी अब मौर्यकाल

1:51:06में होगी लेकिन उससे पहले हम जैन और बौद्ध

1:51:10धर्म को अ कंप्लीट करेंगे सभी लाभों को

1:51:13मैं बता दूं कि शनिवार के दिन हम एक टेस्ट

1:51:16रख रहे हैं स्पेशल क्लास के ल

1:51:19लाल यू हम एक पेस्ट रख रहे हैं स्पेशल

1:51:22क्लास के रूप में शाम 5 बजे 5 बजे शाम

1:51:26शनिवार को शनिवार को शाम 5 बजे टेस्ट होगा

1:51:31क्या-क्या कवर करेंगे हम इस देश में

1:51:34स्पेशल क्लास वैज्ञानिक Redmi लर्निंग एप

1:51:36पर कंपलीटली फ्री आफ कॉस्ट एस रहेगा हम

1:51:40लगभग दो घंटे का टेस्ट रखेंगे सिंधु घाटी

1:51:44की सभ्यता वैदिक काल मतलब रिग वैदिक काल

1:51:48उत्तर वैदिक काल और महाजनपद का रंग चारों

1:51:52यूनिट के ऑब्जेक्टिव सवाल हल करेंगे तो

1:51:55सभी लोग तैयार रहेगा शनिवार शाम 5 बजे

1:51:59इसका लिंक मैं नीचे अटैच कर दूंगा तो आप

1:52:03उस लिंक पर जाकर क्लास को ज्वाइन कर लीजिए

1:52:06का या शनिवार शाम 5 बजे यह अद्भुत कक्षा

1:52:11रहेगी तो सभी को बेस्ट ऑफ लक कमेंट जरूर

1:52:14करते चलेगा कि क्लास कैसी लगी आप लोगों को

1:52:17क्या जो

1:52:19कि हमने की थी वह पूरी हो पाई या नहीं आप

1:52:21लोगों की बात कि आप लोगों की सजेशन आप

1:52:24लोगों की सिफारिशें हमेशा ही हमारे सभी

1:52:28टीम के द्वारा देखी जाती है समझी जाती है

1:52:33तो जो भी आपको कुछ लगता हो आप सजेशन देखते

1:52:36रहिए का यह सभी को बेस्ट ऑफ लक नेक्स्ट

1:52:39क्लास में देखेंगे इसके आगे की बातचीत कर

1:52:42चार बजे जनरल साइंस क्लास रखी हैं चार बजे

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