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0:01अगर आपको डेली कंफ्यूजन होता है कि आज मैं
0:03बाय करने के ट्रेड्स देखूं या फिर सेल
0:05करने के ट्रेड्स देखूं। क्योंकि देखो एक
0:06चार्ट में ना आपके ऊपर है। आप चाहो तो
0:08बाइंग अपॉर्चुनिटीज भी ढूंढ सकते हो,
0:10सेलिंग अपॉर्चुनिटीज भी ढूंढ सकते हो।
0:12लेकिन सही अपॉर्चुनिटी क्या है? इसके लिए
0:14हमें पहले एक बायस बनाना जरूरी है। और वो
0:16बायस बनाने के आज मैं आपको तीन तरीके
0:18बताने वाला हूं। तो इसमें जो सबसे पहला और
0:20सबसे आसान तरीका होता है वो होता है
0:22प्रीवियस डे की क्लोजिंग के बेसिस पे अपना
0:24बायस बनाना कि आज मैं मार्केट में बाइंग
0:26अपॉर्चुनिटीज़ ढूंढूंगा या फिर मैं सेलिंग
0:28अपॉर्चुनिटीज़ ढूंढूंगा। तो इसके लिए यहां
0:30पर हम आपको एग्जांपल दिखा रहे हैं। तो
0:32जैसे आज मान लो आप इस केस में अपना बायस
0:34बनाना चाहते हैं कि यहां पर आप बाय करेंगे
0:36या फिर सेल करेंगे। तो आपने डेली टाइम
0:37फ्रेम के चार्ट में आप चले गए। उसके बाद
0:39आपने क्या करना है? आपने आज आपकी हो सकता
0:42है यहां पर कुछ ना कुछ चार्ट में बन रहा
0:43होगा। तो इसको तो आप छोटे टाइम फ्रेम में
0:45देख के ट्रेड लेंगे। तो इसको अभी आप ध्यान
0:47मत दीजिए। आप इससे पहले की दो कैंडल पे
0:49ध्यान दीजिए। तो इससे पहले वाली जो कैंडल
0:52है, आपने क्या करना है? जैसे ये कल की
0:53कैंडल होगी, आज आपकी कुछ ना कुछ कैंडल
0:55यहां पे बन रही होगी। तो परसों की कैंडल
0:57का आपने हाई एंड लो को मार्क कर देना है।
1:00जैसे यहां पर हमने लो मार्क किया है। उसके
1:02बाद कल की कैंडल आज तो देखो कैंडल अभी बन
1:04ही रही है। तो ये जो कल की कैंडल है, कल
1:06की कैंडल अगर पिछली कैंडल से नीचे क्लोज
1:09हुई है, तो इसको हम कहते हैं बियरिश
1:11क्लोजिंग। तो अगर कल की कैंडल परसों की
1:13कैंडल के कंपैरिजन में नीचे क्लोज हुई है
1:15तो यह बेयरिश क्लोजिंग है और इसमें हम मान
1:17के चलते हैं कि आज भी मार्केट के बेयरिश
1:20होने के जो चांसेस होंगे वो काफी ज्यादा
1:22होंगे। तो यहां पर हम अपनी शॉर्ट करने की
1:24अपॉर्चुनिटीज ढूंढेंगे। अब मैं आपको एक और
1:26एग्जांपल दिखाता हूं सेम इस जगह पे। अब
1:28देखो ये वाला तो केस हो गया जहां पर मैंने
1:30आपको बेयरिश अपॉर्चुनिटीज दिखा दी कि भाई
1:32बेयरिश अपॉर्चुनिटी हमने ढूंढी और उस दिन
1:34आप देख सकते हो कि जिस दिन के लिए हम ढूंढ
1:36रहे थे उस दिन यहां पर मार्केट गिरा था।
1:39तो यानी यहां पर आपके जो ट्रेड्स होते हैं
1:41वो सही बन जाते। अब मान लो आज के दिन पे
1:43आपने बेयरिश अपॉर्चुनिटी ढूंढनी है तो आप
1:45क्या करेंगे? आप ये वाली जो आपकी कैंडल है
1:48इसके भी हाई एंड लो से लगते हुए कुछ इस
1:50तरीके से लाइन ड्रॉ कर सकते हैं। और यहां
1:52पर आप देख सकते हैं कि जो कैंडल है उसने
1:54इसके नीचे क्लोजिंग दे दी है। तो अब अगले
1:56वाला जो दिन होगा मतलब जिस दिन आप ट्रेड
1:58कर रहे होंगे यहां पर भी कुछ ना कुछ कैंडल
2:00बन रखी होंगी। तो इस दिन पे भी आपका जो
2:02बायस होगा वो बेरिश होगा। तो अगेन आप क्या
2:04करेंगे? आप सेल करने के ट्रेड्स ढूंढेंगे।
2:06जो बाइंग ट्रेड्स आपको दिख भी रहे होंगे
2:08आप उनको इग्नोर करेंगे। अब फिर से देखो
2:10मैं आपको आगे दिखाता हूं आगे क्या होता
2:12है। तो अब देखो हमने यहां पर हाई लो मार्क
2:14किया था। अब इसके बाद क्या हुआ? अगले दिन
2:16भी देखो यहां पर रेड कैंडल बन गई। इसका
2:18मतलब है कि अगले दिन भी जो हमने ट्रेड
2:20देखे होंगे वो सही बने होंगे। तो अब हमने
2:22क्या किया? इससे पहले वाली जो कैंडल है
2:25यहां पर हमने हाई एंड लो को मार्क कर
2:27दिया। अगली कैंडल फिर से उसके नीचे क्लोज
2:29हुई है तो इसके बाद वाला जो दिन जिस दिन
2:31हम ट्रेड करेंगे यहां पर भी हमारा जो बायस
2:33होगा वो बेरिश होगा। तो फिर मैं आपको
2:35दिखाता हूं अगले दिन क्या होता है। तो
2:37यहां पर आप देख सकते हैं उस दिन मार्केट
2:39थोड़ा बहुत साइडवेज रहता है। लेकिन अगर हम
2:41इस कैंडल को देखें तो वो रेड कलर की कैंडल
2:43बनी है जिसमें प्राइस बहुत नीचे तक गई है।
2:45यानी इसमें भी आपको सेलिंग के अच्छे खासे
2:47ट्रेड्स बन गए होते और बाइंग का तो सवाल
2:49यहां पर नहीं बनता है। लेकिन अब मान लो
2:51मुझे अगले दिन अपना बायस बनाना है। तो अब
2:53मैं बायस कैसे बनाऊंगा? तो फिर से देखो
2:55मैंने क्या किया? इससे बाद वाली जो कैंडल
2:57है यानी इस कैंडल के हाई एंड लो से लगते
2:59हुए मार्क कर दिया। अब अगली कैंडल देखो
3:01उतनी अच्छी कैंडल नहीं है। उतनी स्ट्रांग
3:03कैंडल नहीं है जिसके बेसिस पे मैं अपना
3:05शॉर्ट करने का बायस बना सकूं। यानी यहां
3:08पर हो सकता है कि मैं दूसरे तरीके या थर्ड
3:10मेथड का यूज़ करूं। इसके अलावा भी बहुत
3:12सारे मेथड्स होते हैं जिनका हम यूज़ कर
3:14सकते हैं। अब इसकी अगली कैंडल भी मैं आपको
3:16दिखाऊं यानी अगर हम सेम तरीके का भी यूज़
3:18कर रहे होते तो यहां पर आप देखेंगे उसके
3:20अगले दिन भी रेड कलर की कैंडल बनी है।
3:22यानी इतने सारे दिन का मैं आपको बिल्कुल
3:24सीरीज वाइज़ दिखा रहा हूं। सारे दिन आपका
3:26जो बायस होता वो शॉर्ट करने का होता और
3:28लगातार इन सारे दिन में जो मार्केट था वो
3:30नीचे की तरफ गिरा था। यानी आपके ट्रेड्स
3:32के सही निकलने के जो चांसेस होते हैं वो
3:34बहुत ज्यादा बढ़ जाते। अब फिर से मान लो
3:36मैंने 6 जून के लिए अपना बायस बनाना है तो
3:386 जून की कैंडल अभी बनी नहीं होगी क्योंकि
3:40हम डेली टाइम फ्रेम देख रहे हैं। तो यहां
3:42पर हमने क्या किया? हमने अपनी 4 जून की जो
3:44कैंडल है उसके हाई एंड लो को मार्क कर
3:46दिया। इवन एक बार मैं आपको हाई भी मार्क
3:48करके दिखा देता हूं। तो हाई की क्योंकि
3:50जरूरत नहीं पड़ रही है इसलिए मैंने मार्क
3:51नहीं किया था। अदरवाइज आप हर बार हाई एंड
3:53लो मार्क कर सकते हैं। आपने देखा कैंडल ने
3:56इसके नीचे क्लोजिंग दे दी है। यानी फिर से
3:58आपका जो अगली डेट है यानी 6 जून के लिए जो
4:00बायस होगा वो क्या होगा? वो बेयरिश होगा।
4:03फिर से आप देख सकते हैं कि भाई यहां पर
4:05उतना ज्यादा मार्केट नहीं गिरा है। लेकिन
4:07फिर भी आप देख सकते हैं प्राइस तो नीचे गई
4:09थी। यानी यहां पर भी आपका जो बायस था वो
4:11काफी हद तक सही था। अब देखो आपने सिर्फ एक
4:13कांसेप्ट के बेसिस पे अपने 7 दिन के बायस
4:16लगातार आप बनाते हुए चले गए और 7 दिन
4:18लगातार आपके बायस जो थे वो बिल्कुल सही
4:20थे। यानी आपके ट्रेड्स के सही निकलने के
4:22जो चांसेस होते हैं वो बहुत ज्यादा होते
4:24हैं। अब इसके बाद सेम दिन आप अपना
4:25कांसेप्ट अप्लाई करते यानी आप क्या करते?
4:28अब इसके बाद आप 7 तारीख के लिए अपना बायस
4:29बनाना चाहते हो तो आपने 5 तारीख की कैंडल
4:32का हाई एंड लो मार्क कर दिया कुछ इस तरीके
4:35से। बट उसके बाद क्या होता है? इसके अगले
4:37दिन यानी 6 जून के दिन आपको दिखाई देता है
4:39कि जो कैंडल है वो इसके नीचे क्लोजिंग
4:41नहीं देती है। यानी इस दिन हमारा जो बायस
4:44है अब वो बेयरिश नहीं हो सकता है। एटलीस्ट
4:46इस कांसेप्ट के बेसिस पे तो नहीं हो सकता
4:48है। तो अब हम इस दिन अपना बायस बनाना
4:51चाहते हैं तो वो कैसे बनाएंगे? तो इसके
4:53लिए हमें क्या करना है? हम अपने सेकंड
4:55तरीके का यूज़ करेंगे जो कि होता है
4:57लिक्विडिटी बायस। अब हम क्या करेंगे? अब
4:59हम थोड़ा सा वैसे तो यहां पर आप टाइम
5:01फ्रेम भी चेंज कर सकते हैं। आगे जो आपको
5:02एग्जांपल दिखाऊंगा उसमें हम दूसरे टाइम
5:04फ्रेम का ही यूज़ करेंगे। लेकिन यहां पर
5:06मैं आपको क्योंकि सीरीज वाइज एग्जांपल
5:08दिखा रहा हूं तो इस जगह पर हम क्या अप्लाई
5:09करते हैं वो दिखा देता हूं। तो हम क्या
5:11करते हैं? हम यहां से थोड़ा सा पीछे के
5:12चार्ट को देखते हैं और उसके बाद देखते हैं
5:14कि भाई यहां पर जहां तक प्राइस पहुंच गई
5:17है उसके आसपास पे लो कहां पर है? तो हमें
5:19दिखाई दे रहा है कि यहां पर प्राइस ने
5:21अपना लो बना रखा है। इसके बाद तो प्राइस
5:23सीधा बढ़ी थी और दोबारा से प्राइस अभी इस
5:26लेवल के पास पहुंच रखी है। तो हम क्या
5:27करेंगे? जो लो प्राइस ने बनाया था इस लो
5:30से लगते हुए अपनी एक लाइन ड्रॉ कर लेंगे।
5:32तो यहां पर हो गई हमने इस तरीके से अपनी
5:35लाइन ड्रॉ की और जैसे ही मैंने लाइन ड्रॉ
5:37की है तो अब आपको एक चीज दिखाई देती है और
5:39वो चीज बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है। सबसे
5:41पहले तो यहां पर एक चीज मैं आपको बता दूं
5:43कि मार्केट जो था वो 60000 के लेवल के पास
5:46पहुंच गया था। यानी 60000 क्या है? एक
5:48साइकोलॉजिकल लेवल है। अगर कोई कहेगा कि
5:50बिटकॉइन 60000 आ गया है तो सबके दिमाग में
5:53जाएगा अच्छा इतना सस्ता हो गया है। यानी
5:55यहां से लोग बाइंग करना शुरू कर सकते हैं।
5:57लेकिन सिर्फ साइकोलॉजिकल लेवल के बेसिस पे
5:58तो भाई हम अपना ट्रेड प्लान नहीं करेंगे।
6:00मैं आपको सिर्फ थोड़ी सी इंफॉर्मेशन दे
6:02रहा हूं कि हां इस तरीके से भी चीजें काम
6:03करती हैं। लेकिन यहां पर हमें एक चीज
6:05देखने को मिली कि पुराना वाला कांसेप्ट तो
6:07काम नहीं कर रहा था। तो मैंने हाई एंड लो
6:09को हटा दिया। लेकिन मुझे दिखाई दिया कि
6:11भाई प्राइस ने क्या किया है? प्राइस ने
6:13नीचे की लिक्विडिटी को स्वीप किया है।
6:14यानी प्राइस 60 के लेवल के पहले थोड़ा सा
6:17नीचे आए। यहां पर आपको कैंडल्स में दिखाई
6:19दे रहा है और उसके बाद वापस से उसने ऊपर
6:21क्लोजिंग दे दिया है और वो भी डेली टाइम
6:23फ्रेम की कैंडल में ऐसा हुआ है। यानी
6:25प्राइस ने नीचे की लिक्विडिटी को स्वीप
6:27किया है। तो अब शायद यहां से प्राइस के
6:29ऊपर की तरफ जाने के चांसेस हैं। यानी जब
6:31हमें दिखाई देता है कि प्राइस ने किसी
6:34इंपॉर्टेंट लेवल के लो को स्वीप किया है।
6:36मतलब पहले प्राइस उस लेवल के नीचे गई।
6:38वहां पर लोगों के स्टॉप लॉस हिट करवाए और
6:40वापस से उस लेवल के अंदर आके प्राइस ने
6:42क्लोजिंग दे दिया है। तो इसको हम कहते हैं
6:44लिक्विडिटी स्वीप। और जब नीचे का
6:45लिक्विडिटी स्वीप होता है तो प्राइस के
6:47बढ़ने के चांसेस होते हैं। यानी यहां पर
6:49हम अपना जो बायस था वो बुलिश बायस बनाते
6:52हैं। और उसके अगले दिन पे देखो कि क्या
6:54होता है। मैं बिल्कुल सीरीज वाइज आपको
6:56दिखा रहा हूं। तो आप देख सकते हैं अगले
6:57दिन एक बड़ी सी ग्रीन कलर की कैंडल बनी थी
7:00और यहां पर जो प्राइस थी वो अच्छा खासा
7:022000 पॉइंट के आसपास बढ़ी थी। तो यहां पर
7:04आपने अपना बुलिश बायस बनाया होता। आप बाय
7:06करने के ट्रेड्स ढूंढ रहे होते और उसके
7:08बाद प्राइस बढ़ती तो आपके ट्रेड्स के यहां
7:10पर भी सही निकलने के जो चांसेस थे वो काफी
7:12ज्यादा बढ़ जाते। अब इसके बाद मुझे
7:14नेक्स्ट डे के लिए अपना बायस बनाना है। तो
7:16यहां पर मैं क्या करता? मैं इस रेड कैंडल
7:18के हाई एंड लो को मार्क करता। लेकिन उससे
7:20पहले देखो एक बड़ी रेंज मेरे पास ऑलरेडी
7:22यहां पर एग्जिस्ट कर रही है। यानी इससे
7:24पहले की जो कैंडल है वो इस कैंडल के ऊपर
7:27भी है और इस कैंडल के नीचे भी है। तो फिर
7:29इस कैंडल को मार्क करने का कोई फायदा नहीं
7:31है। मैं इससे पहले वाली जो रेड कैंडल है
7:33इसके हाई एंड लो से लगते हुए यहां पर लाइन
7:35ड्रॉ कर देता हूं। मैं इससे पहले वाली
7:36लाइन ना हटा देता हूं ताकि आपको कंफ्यूजन
7:38ना रहे। क्योंकि ये वाला जो मैंने आपको
7:39बायस दिखाया था उसके लिए वो लाइन ड्रॉ की
7:41थी। तो यहां पर हमारी ये जो रेड लाइन थी
7:44हमने इसके हाई एंड लो को इस तरीके से
7:46मार्क कर दिया और उसके बाद इस कैंडल में
7:48हमें क्या दिखाई देता है कि इसका जो हाई
7:50था प्राइस ने उसको स्वीप किया था इस दिन
7:53पे। तो अगर प्राइस ने हाई को स्वीप किया
7:55था तो अगले दिन पे प्राइस के गिरने के जो
7:58चांसेस होंगे वो काफी ज्यादा होंगे और
8:00यहां पर आप देख सकते हैं अगले दिन क्या
8:01होता है एक रेड कलर की छोटी सी कैंडल बनती
8:04है। मार्केट हम कह सकते हैं कि बहुत
8:06ज्यादा रेंज में नहीं था और वो हम समझ भी
8:08सकते हैं। देखो काफी टाइम से मार्केट गिर
8:10रहा था। उसके बाद एक कैंडल बनी है। तो
8:12यहां पर थोड़ा बहुत साइडवेज होगा। लेकिन
8:13फिर भी आप कह सकते हैं कि हां भाई रेड
8:15कैंडल बनी थी। प्राइस थोड़ा नीचे आई थी।
8:17तो आपका बायस काफी हद तक यहां पर भी सही
8:19है। अब मैंने फर्स्ट मेथड के आपको काफी
8:21सारे एग्जांपल दिखा दिए हैं। और जहां पर
8:23हमारे ज्यादातर जो एग्जांपल थे उसमें
8:25हमारा बायस सही निकल कर आ रहा था। लेकिन
8:27देखो कोई भी चीज हमेशा काम नहीं करती है।
8:29कई बार इसके थ्रू आप बायस हो सकता है नहीं
8:31बना पा रहे हो या फिर आपका बायस जो है वो
8:33गलत भी निकल सकता है। तो अब मैं आपको
8:35दूसरा मेथड बताता हूं। अब सेकंड मेथड
8:37बताने से पहले अगर आप बिटकॉइन, इथेरियम या
8:39गोल्ड में इंडिया में रहते हुए लीगली
8:41ट्रेड करना चाहते हैं, तो आप डेल्टा
8:43एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन कर सकते
8:44हैं। यह इंडिया में एफआईयू रजिस्टर्ड है
8:46और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके अपना
8:48अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से
8:49दो बेनिफिट मिलते हैं। पहला तो अधिरा एi
8:51का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन हम देते हैं और
8:53साथ ही हम आपको हमारे प्राइवेट Telegram
8:55ग्रुप में ऐड भी करते हैं। बट उसके लिए जो
8:57हमारा लिंक है उसके थ्रू ही आपने अकाउंट
8:59ओपन करना है और साथ ही नीचे जो Google
9:01फॉर्म दे रखा है उसको जरूर फिल कर लेना
9:03है। क्योंकि Google फॉर्म के थ्रू डिटेल्स
9:04को वेरीफाई करने के बाद ही हम आपको एक्सेस
9:07दे पाएंगे। तो Google फॉर्म को भी जरूर
9:08फिल कर लेना। सारे लिंक आपको डिस्क्रिप्शन
9:10में और पिंड कमेंट में मिल जाएंगे। अब
9:12फर्स्ट मेथड तो आपको समझ आ गया है। तो
9:14सेकंड मेथड हमें क्यों चाहिए? तो वो हमें
9:16इसलिए चाहिए कि कई बार ऐसा हो सकता है कि
9:18मार्केट ने इतनी बड़ी रेंज बना दी है।
9:20देखो हम डेली टाइम फ्रेम को देख रहे हैं
9:22कि उसके बाद कई दिन तक मार्केट उसी रेंज
9:24के अंदर घूम रहा है। जैसे ये आप देख सकते
9:26हैं इस दिन पे अगर हम इस कैंडल का हाई एंड
9:28लो मार्क कर लें तो अगले दिन भी उसका लो
9:30नहीं टूटा। उसके अगले दिन भी नहीं टूटा।
9:32उसके अगले दिन भी ये टूटा, अगले दिन भी ये
9:34टूटा। यानी छ सात दिन तक उसका लो टूटा ही
9:36नहीं है। तो ऐसे में क्या हम ट्रेड नहीं
9:38करेंगे या हम बायस नहीं बनाएंगे? तो हमें
9:40बायस तो तब भी बनाना है क्योंकि अगर अगले
9:42दिन को भी देखोगे तो मूव तो काफी बड़ा था।
9:44यहां पर भी आप देख सकते हो कई हजार पॉइंट
9:46का मूव था। तो अगर हजारों पॉइंट के मूव को
9:48हम छोड़ दें कि हमारा बायस नहीं बन रहा है
9:50तो वो तो बेवकूफी होगी। तो इसके लिए हम
9:52क्या करेंगे? यहां पर अब हम आ जाएंगे छोटे
9:54टाइम फ्रेम में। जैसे कि आप 4 घंटे या 1
9:57घंटे के टाइम फ्रेम में आ सकते हैं। बायस
9:58बनाने के लिए टाइम फ्रेम छोटा ही है। तो
10:00हम एग्जांपल के लिए 1 घंटे के टाइम फ्रेम
10:03में आ गए हैं। अब यहां पर हम अपना बायस
10:05कैसे बना सकते हैं? चलिए समझते हैं। तो अब
10:07जब हम छोटे टाइम फ्रेम में आते हैं तो वही
10:09जो 1 दिन की कैंडल थी 1 घंटे के केस में
10:11वो 24 कैंडलों में टूट चुकी है। तो हमारी
10:13हाई एंड लो रेंज तो आपको दिखाई दे रही है।
10:15ये बड़े टाइम फ्रेम में हमने मार्क कर रखी
10:17थी और हम आ चुके हैं छोटे टाइम फ्रेम में।
10:19मान लेते हैं इस टाइम पे हम चार्ट में आते
10:21हैं। तो हमें क्या करना है? अब छोटे टाइम
10:23फ्रेम में भी इन बड़े लेवल्स को छोड़ के
10:25जहां पर अभी मार्केट चल रहा है हम वहां पर
10:28उन लेवल्स को मार्क करेंगे। जैसे यहां पर
10:30आप देख सकते हो कि मार्केट अभी इस लेवल पे
10:32चल रहा है 80000 के। तो मैं 82,000 का
10:35लेवल अभी देखना उतना ज्यादा इमीडिएटली
10:37मेरे काम नहीं आएगा। आजकल तो मार्केट एकदम
10:39से बहुत ऊपर नीचे जा रहा है तो शायद काम आ
10:41भी जाए। लेकिन अदरवाइज इन जनरल केस में
10:43काम नहीं आएगा। तो जब मुझे पता है कि
10:45मार्केट 80,000 के लेवल पे चल रहा है और
10:47मैं ट्रेड यहां पे प्लान कर रहा हूं तो
10:49मैं क्या करूंगा? इससे आसपास का कोई हाई
10:51मुझे नजर आता है तो मैं उस हाई को मार्क
10:53करूंगा। जैसे यहां पर मुझे हाई नजर आ रहा
10:55था। मैंने इसको मार्क किया। मैं यहां पर
10:57ट्रेड लेने बैठा हूं तो इसको मार्क करके
10:58क्या करूंगा? अगर मार्केट इसके ऊपर या
11:00आसपास आता है तब मैं इसको मार्क करूंगा।
11:02तो मैंने इससे पहले के जो ये हाई नजर आ
11:05रहा था इसको मार्क कर दिया। लो भी मैंने
11:07देखा कि भाई ये एक लो था तो इसको भी मैंने
11:09मार्क किया। दूसरा मुझे ट्रेंड लाइन भी
11:11यहां पर बनती हुई नजर आ रही थी जिसमें उसे
11:12दिखाई दे रहा था कि भाई मार्केट में तो
11:14यहां भी लिक्विडिटी होगी ना। तो मैंने इस
11:16लेवल को भी मार्क कर लिया। अब इसके बाद
11:18क्या होता है? देखो ये हमने अपना हाई
11:19मार्क करके रखा हुआ था। कैंडल क्या करती
11:21है? ये जो ग्रीन वाली कैंडल है ये इसके
11:23ऊपर जाती है और उसके बाद अगली रेड कलर की
11:26कैंडल बनती है जो कि इस रेंज के नीचे
11:28क्लोजिंग दे देती है। देखो यहां पर
11:30क्लोजिंग दिया है। यानी इस जगह पे क्या
11:32हुआ है? इस जगह पर हो चुका है लिक्विडिटी
11:35स्वीप। तो जब लिक्विडिटी स्वीप ऊपर की
11:37साइड पर हुआ है तो यहां से प्राइस के नीचे
11:40जाने के चांसेस हैं। यानी यहां पर हमने
11:42अपना बायस क्या बना लिया कि प्राइस नीचे
11:43गिर सकती है। तो फिर अगेन हम अपनी शॉर्ट
11:46करने की अपॉर्चुनिटीज यहां पर ढूंढ सकते
11:48हैं। तो एक रीज़न तो हमें पता है कि भाई
11:49यहां पर लिक्विडिटी स्वीप हो चुका है।
11:51उतना ही रीज़न बायस बनाने के लिए काफी है।
11:53लेकिन यहां पर हमें और भी चीजें दिख रही
11:55थी। जैसे मार्केट ने ऊपर की तरफ तो
11:57लिक्विडिटी स्वीप की है। लेकिन यहां पर भी
11:59मार्केट में लिक्विडिटी पड़ी है। इसके बाद
12:01यह भी काफी मेजर लिक्विडिटी ज़ोन हमारा
12:03यहां पे पड़ा हुआ है। तो हो सकता है कि
12:05मार्केट अब यहां तक आए। तो इस तरीके से हम
12:07अपने सेकंड मेथड में अपना बायस बना सकते
12:09हैं। और इसके बाद आप देख सकते हैं कि यहां
12:11पर मार्केट एकदम से गिरता है। ये वाली
12:13लिक्विडिटी को लेता है। थोड़ा सा धोखा
12:15देता है और उसके बाद नीचे वाली जो
12:16लिक्विडिटी है मार्केट इस लिक्विडिटी को
12:18भी यहां पर ले लेता है। यानी जैसा हमने
12:20सोचा था बिल्कुल वैसा ही हुआ। प्राइस यहां
12:22से अच्छी खासी गिरी है तो यहां पर भी
12:24हमारा जो ट्रेड होता वो काफी हद तक सही
12:27निकलता। अब इसके बाद मान लो आपने यहां पर
12:29अपना ट्रेड ले लिया होता। अब फिर से आप
12:31यहां पर अपना बायस बनाना चाहते हो। आप
12:32अपना ट्रेड प्लान करना चाहते हो तो आपको
12:34पता है भाई ये सारी चीजें तो हो चुकी है।
12:36मार्केट ने सारी लिक्विडिटी का इस्तेमाल
12:38कर लिया है। तो फिर इसको देख के तो कोई
12:40फायदा नहीं है। लेकिन यहां पर आपको दिखाई
12:42देता है मार्केट ने अपना एक लो बनाया था
12:44और ये मैं 1 घंटे का टाइम फ्रेम देख रहा
12:46हूं। यह भी कोई छोटा टाइम फ्रेम नहीं होता
12:47है। अगर ट्रेड लेना है। बायस बनाने के लिए
12:49हो सकता है कि आपको छोटा लगे। लेकिन ये
12:51गलत टाइम फ्रेम नहीं है जिसमें हम बायस
12:53बनाएं। तो हमने देखा कि भाई मार्केट ने
12:55यहां पर अपना लो बनाया था और उसके बाद ये
12:58जो रेड कैंडल है उसमें मार्केट नीचे गया
13:00और उसके अगली ग्रीन कैंडल में मार्केट ऊपर
13:02चला गया। यानी यहां पर जिस-जिस के स्टॉप
13:04लॉस थे सबको चू चुना लगा दिया। तो अब इसके
13:07बाद हमें पता है कि जब नीचे की लिक्विडिटी
13:09मार्केट खा चुका है और ऊपर यहां पर
13:11लिक्विडिटी है। यहां पर लिक्विडिटी है।
13:13इवन यहां पर भी लिक्विडिटी है तो मार्केट
13:15अब इस लेवल पे आ सकता है। यानी यहां से
13:17प्राइस के बढ़ने के चांसेस हो सकते हैं।
13:19तो हमारा अब बायस क्या बनेगा? हमारा बायस
13:21बनेगा यहां से बुलिश। तो हम यहां पर अपना
13:25बाय करने का ट्रेड प्लान करेंगे। अब इसके
13:27बाद क्या होता है? यहां से जो मार्केट है
13:28वो वापस से ऊपर जाने लगता है और ऊपर
13:31जाते-जाते ये वाला जो हाई है मार्केट इसकी
13:33लिक्विडिटी को भी ले लेता है। यानी यहां
13:35से प्राइस बढ़ी थी मतलब हमारा बायस यहां
13:37पर भी क्लियर था कि भाई प्राइस बढ़ेगी और
13:39एक्चुअल में प्राइस बढ़ी तो हमारा जो
13:41ट्रेड होता वो सही बनता। अब इसके बाद मुझे
13:44यहां पर अगर फिर से बायस बनाना है कि मुझे
13:46कौन सा ट्रेड लेना है। तो मैं क्या करता
13:48मुझे यहां पर एक हाई दिखाई दे रहा है। मैं
13:50इस हाई से लगते हुए यहां पर एक लाइन ड्रॉ
13:52कर देता। मैं आपको एक बार दिखा देता हूं
13:53कि किस तरीके से हम फिर से बायस बना सकते
13:55थे और बिल्कुल कंटिन्यूटी में आपको चीजें
13:57दिखा रहा हूं। देखो यहां पर आपने देखा
13:59मार्केट का हाई था और इस जगह पे दिखाई
14:01देता है कि ग्रीन कैंडल पहले ऊपर गई। यहां
14:03पर जिस-जिस के स्टॉप लॉस रहे होंगे सबको
14:04चूना लगाया। अगली कैंडल में मार्केट नीचे
14:06आ गया। यानी ऊपर की जब लिक्विडिटी स्वीप
14:09कर ली गई है। तो अब इसके बाद क्या है?
14:11यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस हैं और
14:13इस तरीके से मार्केट गिर सकता है। तो अब
14:15देखते हैं इसके बाद क्या होता है। तो यहां
14:17से आप देखेंगे कि मार्केट जो है वो यहां
14:19से नीचे गिरने लग जाता है और इस तरीके से
14:22पूरा नीचे तक जाता है। यानी इस तरीके से
14:25आप देख सकते हैं कि इस बार भी जो हमने
14:26बायस बनाया था वो बहुत हद तक सही था। और
14:29ऐसे ही आप मार्केट में बायस बनाते हैं। ये
14:31था हमारा सेकंड मेथड। अब चलिए अपना थर्ड
14:33मेथड समझते हैं। तो अब जो हमारा तीसरा
14:35तरीका होता है बायस बनाने का वो होता है
14:37सेशंस के बेसिस पे अपना बायस बनाना। अब ये
14:40सेशंस होते क्या हैं? तो देखो ये जो
14:41ग्लोबल मार्केट है ये तीन सेशंस में
14:43डिवाइडेड है। एक है एशिया सेशन, दूसरा है
14:45लंदन सेशन और तीसरा है न्यूयॉर्क सेशन।
14:48एशिया सेशन में क्या होता है? जनरली
14:49मार्केट में उतने बड़े मूव्स देखने को
14:51नहीं मिलते हैं। कई कबभार देखने को मिल
14:53सकते हैं। लेकिन इन जनरल बात कर रहा हूं।
14:55इसके बाद होता है लंदन सेशन। लंदन सेशन
14:57में हमें ठीक-ठाक मूव्स देखने को मिलते
14:59हैं। लेकिन जो सबसे बड़े मूव्स हमें देखने
15:01को मिलते हैं वो मिलते हैं न्यूयॉर्क सेशन
15:02के बेसिस पे। और यहां पर भी मार्केट क्या
15:04करता है? एक दूसरे के सेशंस की लिक्विडिटी
15:06को स्वीप करता है तो उसके बेसिस पे भी हम
15:08अपना बायस बना सकते हैं। अब इन सेशंस को
15:10देखने के लिए या तो आप खुद से टाइम याद कर
15:12सकते हैं। लेकिन अगर वो सब नहीं करना है
15:14तो आपने क्या करना है? आपने यहां पर
15:16इंडिकेटर पे जाना है और उसके बाद सेशंस
15:18लिख के सर्च करना है। तो यहां पर आपको
15:19लक्स एल्गो का एक सेशंस इंडिकेटर नजर आता
15:22है। आपने इस पे क्लिक कर देना है। जैसे ही
15:24आप इस पे क्लिक करते हैं तो आप देखेंगे कि
15:26आपके चार्ट पे ये जो इंडिकेटर है यह प्लॉट
15:28हो जाएगा। थोड़ा सा कई बार टाइम ले सकता
15:30है। जैसे इस केस में अभी थोड़ा सा लोड
15:32होने में टाइम ले रहा है। तो ये इंडिकेटर
15:33कुछ इस तरीके से आपके चार्ट में प्लॉट हो
15:35जाता है। अब जैसे ही आप इस इंडिकेटर को
15:37चार्ट पे प्लॉट कर लेते हैं तो इसके बाद
15:39यहां पर आपको एक सिडनी सेशन भी देखने को
15:42मिलता है। आप क्या कीजिए? इस सिडनी सेशन
15:44को यहां से अनटिक कर दीजिए क्योंकि वो
15:46ऑलमोस्ट टोक्यो सेशन के अंदर ही कवर हो
15:48जाता है। तो वहां पर आपको दो-दो सेशंस
15:50देखने की जरूरत नहीं है। एक के अंदर ही वो
15:52कवर हो रहा है। तो अब आपको मेनली तीन
15:54सेशंस देखने को मिल रहे हैं। एक है टोक्यो
15:56जिसको हम एशिया सेशन बोल रहे हैं। दूसरा
15:57है लंदन और तीसरा है न्यूयॉर्क सेशन। अब
16:00यहां पर अगर आप अपना बायस बनाना चाहते हो
16:02तो वो आप कैसे बनाओगे? जैसे मान लो आप
16:04यहां पर ट्रेड प्लान कर रहे होते और आप
16:06सोचते कि भ एकदम से मार्केट नीचे क्यों
16:08गिर गया? तो आपको अगर इन सेशंस के बारे
16:11में पता होता तो आपको पता चलता कि भाई
16:13यहां से मार्केट तो एक्चुअल में नीचे से
16:14गिर सकता था जो हम पहले से पता कर सकते
16:16थे। वो हुआ क्यों? देखो ये है लंदन सेशन
16:19जो ब्लू कलर में मार्क हो रखा है। इस टाइम
16:21पीरियड में लंदन का मार्केट खुला रहता है।
16:23तो इस वजह से इसे लंदन सेशन कहा जाता है।
16:25यानी वहां के जो ट्रेडर्स होंगे, वहां के
16:27जो फर्म्स होंगी वो ज्यादा एक्टिव होंगी
16:29इस टाइम पर। तो हमने क्या किया? हमने इस
16:31सेशन का जो हाई बना था, लंदन सेशन के टाइम
16:34पर जो भी ग्लोबल चार्ट्स होते हैं, उनका
16:35जो हाई बना था, हमने उस हाई को मार्क कर
16:37दिया। जैसे यहां पर हाई जो था वो इस जगह
16:40पे था। मैंने इससे लगते हुए लाइन ड्रॉ कर
16:41दी। मैं साथ ही जो लो बना होगा इस टाइम
16:43फ्रेम में देखिए ये वाला जो कलर है ये है
16:45लंदन सेशन का। तो ये लो बना है। मैंने इस
16:47लो को भी मार्क कर दिया। अब इसके बाद मान
16:50लो मैं शाम को अपना ट्रेड करने बैठता हूं
16:52और मुझे दिखाई देता है कि भाई ये जो लंदन
16:54सेशन है इसके हाई को न्यूयॉर्क सेशन में
16:56स्वीप कर लिया गया है। अब यहां पर ध्यान
16:58से देखेंगे तो आपको दिखाई देगा ये जो
17:00कैंडल है इसकी वि पूरा ऊपर तक गई। यहां पे
17:03लंदन सेशन के थोड़ा सा ऊपर गई। यहां पर
17:05क्या किया? जिन्होंने भी इस टाइम पर शॉर्ट
17:07कर रखा होगा उनके पहले स्टॉप लॉस हिट
17:09करवाए उसके बाद मार्केट एकदम से नीचे आ
17:11गया। तो जब ऊपर की लिक्विडिटी स्वीप हो
17:13चुकी है तो यहां से प्राइस के गिरने के
17:15चांसेस होते हैं। ये हमें पता है। तो इस
17:17तरीके से भी अब हम अपना बायस बना सकते
17:19हैं। और इस केस में आप 5 मिनट 15 मिनट के
17:22टाइम फ्रेम का भी यूज़ कर सकते हो। तो सबसे
17:23पहले तो मार्केट ने लंदन के हाई को स्वीप
17:26किया। उसके बाद नीचे आया। फिर क्या हुआ?
17:28ये था लंदन का लो जो हमने मार्क करके रखा
17:30था। मार्केट उससे नीचे आ गया। तब तक हमें
17:32कोई फर्क नहीं है जब तक नीचे आया। लेकिन
17:34अगली ही कैंडल में हमें दिखाई देता है कि
17:36वापस से मार्केट इस लंदन की रेंज के अंदर
17:38आ गया है। यानी नीचे इतना बड़ा लिक्विडिटी
17:41स्वीप किया। इतने सारे लोगों का स्टॉप लॉस
17:42हिट करवा दिया। तो इसके बाद यहां से
17:44प्राइस के बढ़ने के चांसेस हैं। ऑलदो उतना
17:46ज्यादा प्राइस नहीं बढ़ी थी लेकिन थोड़ी
17:48बहुत तो बढ़ी थी जिसमें आपके ट्रेड्स बन
17:50सकते थे। और अगर आगे भी देखें तो प्राइस
17:52इससे नीचे नहीं आई थी तो आपका ट्रेड लॉस
17:54में तो नहीं जाता। अब इसके बाद हमने क्या
17:56किया? देखो बाकी दो तरीके भी हैं वो भी
17:58इस्तेमाल कर सकते हो। लेकिन ये तीसरा
18:00तरीका आपको समझा रहा हूं। तो ये भी कई जगह
18:02पे अप्लाई हो सकता है। तो आपने टोक्यो
18:04सेशन यानी जो एशिया सेशन है उसका ये था
18:06हाई ये था लो। इसको भी मार्क कर दिया। अब
18:09इसको जब आपने मार्क कर दिया है तो यहां पर
18:11आपको दिखाई देता है कि लंदन सेशन में
18:12प्राइस इसके ऊपर निकल गई है। जब तक ऊपर है
18:15तब तक आपको मतलब नहीं है। लेकिन थोड़ी देर
18:17बाद आपको दिखाई देता है कि प्राइस वापस से
18:19इसके नीचे आ गई है। तो रेड कैंडल में जैसे
18:21ही ये नीचे आती है तो हमें पता चल गया कि
18:23यहां पर पूरा खेल हुआ था। स्वीप किया गया
18:25था। यानी यहां से प्राइस के गिरने के
18:27चांसेस हैं। और आप देख सकते हैं प्राइस
18:29यहां से अच्छी खासी गिरी थी। आपका ट्रेड
18:31बन गया होता। इसके बाद हम क्या करते हैं?
18:33हम देखते हैं कि भाई हमने तो टोक्यो सेशन
18:35का लो भी मार्क किया था। लो जब हमने मार्क
18:37करके रखा था तो हमें दिखाई देता है कि भाई
18:39जो प्राइस है वो इसके लो को भी यहां पर
18:41स्वीप कर दिया जाता है। पहले थोड़ा सा
18:43स्वीप होता है उसके बाद आप देख सकते हैं
18:45यहां पर स्वीप हुआ था। प्राइस अच्छी खासी
18:47बढ़ गई थी। तो जैसे ही स्वीप हुआ आप यहां
18:49पर अपना बाय करने का ट्रेड प्लान कर सकते
18:51थे और यहां से प्राइस जो थी वो ऊपर गई थी।
18:54ऑलदो इस टाइम पीरियड में काफी ज्यादा
18:55मैनपुलेशन देखने को मिला है। तो उस टाइम
18:57पीरियड पे हो सकता है कोई न्यूज़ हो या कोई
18:59और रीजन हो। तो उन चीजों को भी हमेशा
19:01कंसीडर करना चाहिए। इवन इस एग्जांपल में
19:03देखें तो बाद में इसका हाई भी मार्केट
19:05स्वीप करता है और फिर प्राइस नीचे भी आती
19:07है। यानी ट्रेड्स तो इसमें भी बन रहे थे।
19:10अब इसके बाद यहां पर देखो टोक्यो का हाई
19:12एंड लो मार्क कर दिया। प्राइस ने इस हाई
19:14से पहले ऊपर तक गई लंदन सेशन में फिर इसके
19:16नीचे आ गई। यानी लंदन सेशन में मार्केट ने
19:18ये जो टोक्यो का हाई था इसको स्वीप किया
19:21है। प्राइस पहले ऊपर गई वापस इसके नीचे आ
19:23गई है। यानी गिरने के चांसेस हैं। तो
19:24हमारा बाय शॉर्ट करने का होता। उसके बाद
19:26हमें दिखाई देता है कि यहां तक तो बाय
19:28शॉर्ट करने का था। फिर हमने लो भी मार्क
19:30करके रखा हुआ था। प्राइस पहले थोड़ा सा
19:32नीचे जाती है। वापस ऊपर क्लोजिंग दे देती
19:35है। तो अब हमारा बायस बन जाता है बाय करने
19:37का। उसके बाद आप देख सकते हैं प्राइस
19:38अच्छी खासी बढ़ी है। यानी इस तरीके से भी
19:41आप अपना बायस बना सकते हैं। एंड इवन अगर
19:43मैं आपको अभी जब मैं इस वीडियो को शूट कर
19:45रहा हूं तब का एग्जांपल दिखाऊं तो देखो ये
19:47न्यूयॉर्क सेशन है और ये न्यूयॉर्क सेशन
19:49का हाई है। अब इसके बाद क्या होता है?
19:50न्यूयॉर्क के हाई को मार्केट टोक्यो सेशन
19:52में स्वीप कर देता है। यानी यहां पर आप
19:54देख सकते हैं ऊपर की तरफ स्वीप किया है।
19:56मार्केट नीचे आ गया है। तो अब अगर मुझे
19:58कुछ बायस बनाना होता तो मैं यहां पर शॉर्ट
20:00करने का बायस बनाता। तो इस तरीके से आप
20:02बायस बना सकते हैं और उसके बाद आप उसी
20:04टाइप के ट्रेड्स को ढूंढेंगे तो आपकी जो
20:06एक्यूरेसी होगी वो काफी ज्यादा बढ़ जाएगी।
20:08मैं उम्मीद करता हूं आपको ये वीडियो पसंद
20:09आई होगी। वीडियो पसंद आई है तो वीडियो को
20:11लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर
20:12दीजिएगा। डेल्टा एक्सचेंज का लिंक
20:14डिस्क्रिप्शन में दे रखा है। Google फॉर्म
20:15का लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रखा है।
20:16बिल्कुल बेसिक टू एडवांस ट्रेडिंग सीखना
20:18चाहते हो तो ये वाली प्लेलिस्ट देख लेना।
20:19और अगर एडवांस ट्रेडिंग को बहुत ज्यादा
20:21डीप में सीखना चाहते हो तो ये वाली
20:22प्लेलिस्ट देख लेना। धन्यवाद।