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0:05[संगीत]
0:06महाभारत कोई कोस भर पर एक पेड़ों का झुंड
0:09है वहां बगले भी उड़ रहे हैं वहां जल
0:12अवश्य होगा प्रिय नकुल तनिक जाकर थोड़ा सा
0:16जल ले आओ
0:17जोता यह लो सदेव
0:49ठहरो मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए बिना तुम
0:53यह जल नहीं पी सकते पी लिया तो क्या करोगे
0:56पी कर देखो
1:04[संगीत]
1:07[प्रशंसा]
1:12[संगीत]
1:23सहदेव तनिक तुम जाकर देखो भैया नकुल को अब
1:27तक तो आ जाना चाहिए था जो आया बड़े भैया
1:34[संगीत]
1:47[संगीत]
1:48[प्रशंसा]
1:51सावधान मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए बिना
1:54तुम यह जल नहीं पी सकते
1:56[संगीत]
2:12[संगीत]
2:18[प्रशंसा]
2:20प्रिय अर्जुन जी भ्राता श्री मुझे चिंता
2:23हो रही है तनिक तुम जाकर देखो कहीं कोई
2:26दुर्घटना तो नहीं हो गई आप चिंता ना करें
2:28भता श्री मैं भी जा देखता हूं
2:32[संगीत]
2:34[प्रशंसा]
2:48[संगीत]
3:02[प्रशंसा]
3:03[संगीत]
3:05सदेव सदेव
3:09सदेव टकल
3:17[संगीत]
3:19टकल किसने मारा मेरे भाइयों को किसने मारा
3:23मेरे भाइयों को सामने
3:26आ सामने आ
3:29[संगीत]
3:30[प्रशंसा]
3:31इनकी हत्या मैंने की है द्रोण शिष्य
3:37अर्जुन क्या बिगाड़ा था इन्होने तुम्हारा
3:41यह सरोवर मेरा है और इन दोनों ने मेरे
3:44रोकने के पश्चात भी इस सरोवर का जल पीने
3:47का अपराध किया है यह लोग प्यासे थे प्यासे
3:51होने का अर्थ यह नहीं कि तुम दूसरे का जल
3:54छीन लेने के अधिकारी हो गए यदि तुम्हें जल
3:57चाहिए तो पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर
4:00नहीं तो तुम्हारी भी वही दशा होगी जो
4:02तुम्हारे इन दोनों भाइयों की हुई
4:05है जल और पवन पर हर प्राणी का अधिकार होता
4:09है इसलिए मैं इस सरोवर पर तुम्हारा अधिकार
4:12स्वीकार नहीं
4:13करूंगा और मैं तुम्हारे प्रश्नों के उत्तर
4:15दिए बिना ही स्वयं जल भी पिंगा और साथ ले
4:19भी
4:20जाऊंगा यद तुमने रोकने का प्रयास
4:23किया तो एक वन से सुखा दूंगा इस सरोवर को
4:28सुना तुमने
4:30तुम जल नहीं पी सकते
4:32[संगीत]
4:37अर्जुन मैं फिर कहता हूं द्रोण शिष्य
4:40अर्जुन रुक जाओ मेरे प्रश्नों के उत्तर
4:42दिए बिना कोई भी यह जल नहीं पी सकता
4:49[संगीत]
4:50[प्रशंसा]
4:54[संगीत]
4:57[प्रशंसा]
5:01[संगीत]
5:08[प्रशंसा]
5:12[संगीत]
5:24प्रिय भीम अर्जुन अनुज के साथ नहीं लौटा
5:28मैं अभी देखता हूं बड़े
5:40[संगीत]
5:57भैया सामने आ
6:00[संगीत]
6:05क्या तुम मेरे भाइयों के हत्यारे हो हां
6:09और यदि तुमने भी मेरे प्रश्नों के उत्तर
6:11दिए बिना मेरे जल को हाथ लगाया तो
6:15तुम्हारी भी यही दशा होगी पहले मैं जल
6:18पीकर यह सिद्ध करूंगा कि इस जल पर तेरा
6:21कोई अधिकार नहीं फिर तुम्हें इन हत्याओं
6:25का दंड दूंगा
6:27[संगीत]
6:46[प्रशंसा]
6:54[संगीत]
7:16[प्रशंसा]
7:29ओ
7:32[प्रशंसा]
7:45[संगीत]
8:15किसी घव का निशान भी तो
8:17नहीं तो क्या इस सरोवर का जल ही विषैला
8:21है ऐसा लगता तो
8:24नहीं परंतु गंधा नरेश कोने का क्या ठीक
8:30किंतु इन शरीरों पर विष का कोई प्रभाव भी
8:32तो दिखाई नहीं
8:33देता फिर भी जो कुछ है वह है तो इसी सरोवर
8:38के जल में इस सरोवर के जल में अवश्य कुछ
8:42ना कुछ तो है जिसने मेरे भाइयों की य दशा
8:46की
8:47है
8:50ठहरो जल पीने से
8:53पहले मेरे प्रश्नों के उत्तर
8:57दो आप कृपया मुझे य बताइए कि आप रुद्र वसु
9:03अथवा मरुत आदि प्रधान देवता में से कौन
9:07है मैं यक्ष
9:09हूं और मैंने ही तुम्हारे इन महान तेजस्वी
9:13भाइयों की यह दशा की है मैंने इन सबको
9:16रोका था कि मेरे सरोवर का जल पीने से पहले
9:20मेरे प्रश्नों के उत्तर दो परंतु यह नहीं
9:23माने और मारे गए यदि तुम्हें भी जल पीना
9:27या ले जाना है तो मेरे प्रश्नों के उत्तर
9:31दो प्रयास करूंगा आप प्रश्न कीजिए पृथ्वी
9:35से भारी क्या है माता आकाश से ऊंचा कौन है
9:41पिता पवन से भी अधिक तीव्र गति किसकी है
9:46मनकी संख्या में तिनको से अधिक क्या है
9:50चिंता मृत्यु के समीप हुए पुरुष का मित्र
9:54कौन है दान धर्म यश स्वर्ग अथवा सुख का
10:00मुख्य स्थान क्या है धर्म का मुख्य स्थान
10:03दक्षता है और यश का मुख्य स्थान दान
10:07स्वर्ग का मुख्य स्थान सत्य है और सुख का
10:10मुख्य स्थान शील मनुष्य की आत्मा क्या है
10:15पुत्र जगत को किस वस्तु ने ढक रखा है
10:18अज्ञान ने आलस्य क्या है धर्म ना करना आलस
10:22है सुखी कौन है जो ऋणी ना हो सच्चा स्नान
10:27कौन सा है जो मन का मैल धो दे काजल से भी
10:31अधिक काला क्या है कलंक लोक में श्रेष्ठ
10:35धर्म क्या है दया श्रेष्ठ धर्म है किसको
10:39वश में रखने से शोक नहीं होता मन को वश
10:42में रखने से शोक नहीं होता लज्जा क्या है
10:46ना करने योग्य काम से दूर रहना लज्जा है
10:49दया क्या है सबके सुख की इच्छा करना दया
10:53है राष्ट्र की मृत्यु का कारण क्या होता
10:56है
10:57अराजकता हे राज
10:59वास्तव में ब्राह्मण का प्रमाण क्या है
11:02कुल चरित्र शिक्षा या शास्त्र ज्ञान हे
11:08यक्ष कुल शिक्षा और शास्त्र ज्ञान
11:12ब्राह्मण को सिद्ध नहीं करता ब्राह्मण त्व
11:14का प्रमाण तो निसंदेह चरित्र ही है अच्छे
11:18चरित्र वाला शूद्र उस ब्राह्मण से अच्छा
11:21है जो जन्म से तो ब्राह्मण हो और
11:23शास्त्रों का ज्ञान रखता हो परंतु जिसका
11:26चरित्र अच्छा ना हो धर्म क्या में है
11:31नहीं तो क्या ऋषियों की विचारधारा में है
11:35नहीं क्योंकि किसी एक ऋषि की विचारधारा
11:38दूसरे से नहीं मिलती उनमें मतभेद होता है
11:43किसी ऋषि के पास संपूर्ण सत्य नहीं तो फिर
11:47धर्म का संपूर्ण सत्य कहां है व्यक्ति के
11:50हृदय की गुफा में और सबसे बड़ा आश्चर्य
11:53क्या है सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि हर
11:56व्यक्ति यह जानता है कि मृत्यु जीवन का
11:59अंतिम सत्य है फिर भी यही सोचता है कि
12:03कदाचित उसके जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु
12:06नहीं भरत श्रेष्ठ तुमने मेरे सारे
12:10प्रश्नों के ठीक उत्तर दिए हैं इसलिए इन
12:13चारों भाइयों में से जिस एक को चाहो वह
12:16जीवित हो सकता है यदि इनमें से एक ही
12:19जीवित हो सकता है तो हे यक्ष मैं अपने
12:22प्रिय अनुज महावीर नकुल को जीवित देखना
12:25चाहता हूं हे कुंती नंदन भीम और अर्जुन
12:29जैसे भाइयों को छोड़कर तुमने नकुल के ही
12:32जीवित होने की इच्छा क्यों की मेरे लिए
12:34माता कुंती और माता माद्री में कोई अंत
12:37नहीं मैं दोनों माताओं के प्रति समान भाव
12:40रखता हूं इसलिए यदि मैं भीम या अर्जुन को
12:43जीवित देखना चाहता तो यह माता माद्री के
12:45साथ अन्याय हो जाता अब माता कुंती के तीन
12:49पुत्रों में से तो मैं जीवित हूं ही इसलिए
12:52मैं माता माद्री के भी एक पुत्र को जीवित
12:54देखना चाहता हूं कि माता माद्री यह ना
12:56सोचे कि मैंने उनके साथ न्याय नहीं किया
13:00इसलिए यदि मेरे भाइयों में से केवल एक ही
13:02जीवित हो सकता है तो मैं अपने प्रिय अनुज
13:04नकुल को जीवित देखना चाहता हूं यदि माता
13:07कुंती का एक पुत्र जीवित है तो माता
13:10माद्री के भी कम से कम एक पुत्र को जीवित
13:12रहना चाहिए और यदि मैं यह कहता कि
13:16तुम्हारे दो भाई जीवित हो सकते हैं तब तुम
13:18किनका नाम लेते हे यक्ष तब मैं सहदेव का
13:22नाम लेता क्योंकि वह भीम और अर्जुन दोनों
13:25ही से छोटा है तुम्हारे इस वाक्य ने मुझे
13:29प्रसन्न किया भरत श्रेष्ठ तुम भरत वंश का
13:32गौरव हो तुम्हें अपने सारे भाई जीवित
13:36[संगीत]
13:41मिलेंगे भगवन यक्ष तो आप है नहीं क्योंकि
13:45यक्ष जीवन दान नहीं दे सकते आप तो कोई देव
13:48श्रेष्ठ हो सकते हैं कृपया अपना परिचय
13:52दीजिए
14:02[संगीत]
14:15हे जेष्ठ कुंती पुत्र मैं धर्मराज हूं और
14:19तुम्हें देखने के लिए ही यहां आया था और
14:21हे भरत श्रेष्ठ मैं यह देखकर अति प्रसन्न
14:25हुआ कि शम दम उप्रति तितिक्षा
14:29और समाधान इन पांच साधनों पर तुम्हारी
14:32प्रीति है तथा भूख प्यास शोक मोह और जरा व
14:38मृत्यु इन छह दोषों को तुमने जीत लिया है
14:41तुम्हारा मंगल हो
14:43[संगीत]
14:45[प्रशंसा]
14:51[संगीत]
14:58[प्रशंसा]
15:10पांचाली प्रतीक्षा कर रही होगी आओ चले
15:26[संगीत]
15:30महाभारत
15:33महाभारत
15:36महाभारत
15:38हो महाभारत
15:41[संगीत]