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पांडवों को जल के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ा था?| Mahabharat (महाभारत) Scene| B R Chopra | Pen Bhakti

Pen Bhakti · 1,249 words · 6 min read

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0:05[संगीत]

0:06महाभारत कोई कोस भर पर एक पेड़ों का झुंड

0:09है वहां बगले भी उड़ रहे हैं वहां जल

0:12अवश्य होगा प्रिय नकुल तनिक जाकर थोड़ा सा

0:16जल ले आओ

0:17जोता यह लो सदेव

0:49ठहरो मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए बिना तुम

0:53यह जल नहीं पी सकते पी लिया तो क्या करोगे

0:56पी कर देखो

1:04[संगीत]

1:07[प्रशंसा]

1:12[संगीत]

1:23सहदेव तनिक तुम जाकर देखो भैया नकुल को अब

1:27तक तो आ जाना चाहिए था जो आया बड़े भैया

1:34[संगीत]

1:47[संगीत]

1:48[प्रशंसा]

1:51सावधान मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए बिना

1:54तुम यह जल नहीं पी सकते

1:56[संगीत]

2:12[संगीत]

2:18[प्रशंसा]

2:20प्रिय अर्जुन जी भ्राता श्री मुझे चिंता

2:23हो रही है तनिक तुम जाकर देखो कहीं कोई

2:26दुर्घटना तो नहीं हो गई आप चिंता ना करें

2:28भता श्री मैं भी जा देखता हूं

2:32[संगीत]

2:34[प्रशंसा]

2:48[संगीत]

3:02[प्रशंसा]

3:03[संगीत]

3:05सदेव सदेव

3:09सदेव टकल

3:17[संगीत]

3:19टकल किसने मारा मेरे भाइयों को किसने मारा

3:23मेरे भाइयों को सामने

3:26आ सामने आ

3:29[संगीत]

3:30[प्रशंसा]

3:31इनकी हत्या मैंने की है द्रोण शिष्य

3:37अर्जुन क्या बिगाड़ा था इन्होने तुम्हारा

3:41यह सरोवर मेरा है और इन दोनों ने मेरे

3:44रोकने के पश्चात भी इस सरोवर का जल पीने

3:47का अपराध किया है यह लोग प्यासे थे प्यासे

3:51होने का अर्थ यह नहीं कि तुम दूसरे का जल

3:54छीन लेने के अधिकारी हो गए यदि तुम्हें जल

3:57चाहिए तो पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर

4:00नहीं तो तुम्हारी भी वही दशा होगी जो

4:02तुम्हारे इन दोनों भाइयों की हुई

4:05है जल और पवन पर हर प्राणी का अधिकार होता

4:09है इसलिए मैं इस सरोवर पर तुम्हारा अधिकार

4:12स्वीकार नहीं

4:13करूंगा और मैं तुम्हारे प्रश्नों के उत्तर

4:15दिए बिना ही स्वयं जल भी पिंगा और साथ ले

4:19भी

4:20जाऊंगा यद तुमने रोकने का प्रयास

4:23किया तो एक वन से सुखा दूंगा इस सरोवर को

4:28सुना तुमने

4:30तुम जल नहीं पी सकते

4:32[संगीत]

4:37अर्जुन मैं फिर कहता हूं द्रोण शिष्य

4:40अर्जुन रुक जाओ मेरे प्रश्नों के उत्तर

4:42दिए बिना कोई भी यह जल नहीं पी सकता

4:49[संगीत]

4:50[प्रशंसा]

4:54[संगीत]

4:57[प्रशंसा]

5:01[संगीत]

5:08[प्रशंसा]

5:12[संगीत]

5:24प्रिय भीम अर्जुन अनुज के साथ नहीं लौटा

5:28मैं अभी देखता हूं बड़े

5:40[संगीत]

5:57भैया सामने आ

6:00[संगीत]

6:05क्या तुम मेरे भाइयों के हत्यारे हो हां

6:09और यदि तुमने भी मेरे प्रश्नों के उत्तर

6:11दिए बिना मेरे जल को हाथ लगाया तो

6:15तुम्हारी भी यही दशा होगी पहले मैं जल

6:18पीकर यह सिद्ध करूंगा कि इस जल पर तेरा

6:21कोई अधिकार नहीं फिर तुम्हें इन हत्याओं

6:25का दंड दूंगा

6:27[संगीत]

6:46[प्रशंसा]

6:54[संगीत]

7:16[प्रशंसा]

7:29ओ

7:32[प्रशंसा]

7:45[संगीत]

8:15किसी घव का निशान भी तो

8:17नहीं तो क्या इस सरोवर का जल ही विषैला

8:21है ऐसा लगता तो

8:24नहीं परंतु गंधा नरेश कोने का क्या ठीक

8:30किंतु इन शरीरों पर विष का कोई प्रभाव भी

8:32तो दिखाई नहीं

8:33देता फिर भी जो कुछ है वह है तो इसी सरोवर

8:38के जल में इस सरोवर के जल में अवश्य कुछ

8:42ना कुछ तो है जिसने मेरे भाइयों की य दशा

8:46की

8:47है

8:50ठहरो जल पीने से

8:53पहले मेरे प्रश्नों के उत्तर

8:57दो आप कृपया मुझे य बताइए कि आप रुद्र वसु

9:03अथवा मरुत आदि प्रधान देवता में से कौन

9:07है मैं यक्ष

9:09हूं और मैंने ही तुम्हारे इन महान तेजस्वी

9:13भाइयों की यह दशा की है मैंने इन सबको

9:16रोका था कि मेरे सरोवर का जल पीने से पहले

9:20मेरे प्रश्नों के उत्तर दो परंतु यह नहीं

9:23माने और मारे गए यदि तुम्हें भी जल पीना

9:27या ले जाना है तो मेरे प्रश्नों के उत्तर

9:31दो प्रयास करूंगा आप प्रश्न कीजिए पृथ्वी

9:35से भारी क्या है माता आकाश से ऊंचा कौन है

9:41पिता पवन से भी अधिक तीव्र गति किसकी है

9:46मनकी संख्या में तिनको से अधिक क्या है

9:50चिंता मृत्यु के समीप हुए पुरुष का मित्र

9:54कौन है दान धर्म यश स्वर्ग अथवा सुख का

10:00मुख्य स्थान क्या है धर्म का मुख्य स्थान

10:03दक्षता है और यश का मुख्य स्थान दान

10:07स्वर्ग का मुख्य स्थान सत्य है और सुख का

10:10मुख्य स्थान शील मनुष्य की आत्मा क्या है

10:15पुत्र जगत को किस वस्तु ने ढक रखा है

10:18अज्ञान ने आलस्य क्या है धर्म ना करना आलस

10:22है सुखी कौन है जो ऋणी ना हो सच्चा स्नान

10:27कौन सा है जो मन का मैल धो दे काजल से भी

10:31अधिक काला क्या है कलंक लोक में श्रेष्ठ

10:35धर्म क्या है दया श्रेष्ठ धर्म है किसको

10:39वश में रखने से शोक नहीं होता मन को वश

10:42में रखने से शोक नहीं होता लज्जा क्या है

10:46ना करने योग्य काम से दूर रहना लज्जा है

10:49दया क्या है सबके सुख की इच्छा करना दया

10:53है राष्ट्र की मृत्यु का कारण क्या होता

10:56है

10:57अराजकता हे राज

10:59वास्तव में ब्राह्मण का प्रमाण क्या है

11:02कुल चरित्र शिक्षा या शास्त्र ज्ञान हे

11:08यक्ष कुल शिक्षा और शास्त्र ज्ञान

11:12ब्राह्मण को सिद्ध नहीं करता ब्राह्मण त्व

11:14का प्रमाण तो निसंदेह चरित्र ही है अच्छे

11:18चरित्र वाला शूद्र उस ब्राह्मण से अच्छा

11:21है जो जन्म से तो ब्राह्मण हो और

11:23शास्त्रों का ज्ञान रखता हो परंतु जिसका

11:26चरित्र अच्छा ना हो धर्म क्या में है

11:31नहीं तो क्या ऋषियों की विचारधारा में है

11:35नहीं क्योंकि किसी एक ऋषि की विचारधारा

11:38दूसरे से नहीं मिलती उनमें मतभेद होता है

11:43किसी ऋषि के पास संपूर्ण सत्य नहीं तो फिर

11:47धर्म का संपूर्ण सत्य कहां है व्यक्ति के

11:50हृदय की गुफा में और सबसे बड़ा आश्चर्य

11:53क्या है सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि हर

11:56व्यक्ति यह जानता है कि मृत्यु जीवन का

11:59अंतिम सत्य है फिर भी यही सोचता है कि

12:03कदाचित उसके जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु

12:06नहीं भरत श्रेष्ठ तुमने मेरे सारे

12:10प्रश्नों के ठीक उत्तर दिए हैं इसलिए इन

12:13चारों भाइयों में से जिस एक को चाहो वह

12:16जीवित हो सकता है यदि इनमें से एक ही

12:19जीवित हो सकता है तो हे यक्ष मैं अपने

12:22प्रिय अनुज महावीर नकुल को जीवित देखना

12:25चाहता हूं हे कुंती नंदन भीम और अर्जुन

12:29जैसे भाइयों को छोड़कर तुमने नकुल के ही

12:32जीवित होने की इच्छा क्यों की मेरे लिए

12:34माता कुंती और माता माद्री में कोई अंत

12:37नहीं मैं दोनों माताओं के प्रति समान भाव

12:40रखता हूं इसलिए यदि मैं भीम या अर्जुन को

12:43जीवित देखना चाहता तो यह माता माद्री के

12:45साथ अन्याय हो जाता अब माता कुंती के तीन

12:49पुत्रों में से तो मैं जीवित हूं ही इसलिए

12:52मैं माता माद्री के भी एक पुत्र को जीवित

12:54देखना चाहता हूं कि माता माद्री यह ना

12:56सोचे कि मैंने उनके साथ न्याय नहीं किया

13:00इसलिए यदि मेरे भाइयों में से केवल एक ही

13:02जीवित हो सकता है तो मैं अपने प्रिय अनुज

13:04नकुल को जीवित देखना चाहता हूं यदि माता

13:07कुंती का एक पुत्र जीवित है तो माता

13:10माद्री के भी कम से कम एक पुत्र को जीवित

13:12रहना चाहिए और यदि मैं यह कहता कि

13:16तुम्हारे दो भाई जीवित हो सकते हैं तब तुम

13:18किनका नाम लेते हे यक्ष तब मैं सहदेव का

13:22नाम लेता क्योंकि वह भीम और अर्जुन दोनों

13:25ही से छोटा है तुम्हारे इस वाक्य ने मुझे

13:29प्रसन्न किया भरत श्रेष्ठ तुम भरत वंश का

13:32गौरव हो तुम्हें अपने सारे भाई जीवित

13:36[संगीत]

13:41मिलेंगे भगवन यक्ष तो आप है नहीं क्योंकि

13:45यक्ष जीवन दान नहीं दे सकते आप तो कोई देव

13:48श्रेष्ठ हो सकते हैं कृपया अपना परिचय

13:52दीजिए

14:02[संगीत]

14:15हे जेष्ठ कुंती पुत्र मैं धर्मराज हूं और

14:19तुम्हें देखने के लिए ही यहां आया था और

14:21हे भरत श्रेष्ठ मैं यह देखकर अति प्रसन्न

14:25हुआ कि शम दम उप्रति तितिक्षा

14:29और समाधान इन पांच साधनों पर तुम्हारी

14:32प्रीति है तथा भूख प्यास शोक मोह और जरा व

14:38मृत्यु इन छह दोषों को तुमने जीत लिया है

14:41तुम्हारा मंगल हो

14:43[संगीत]

14:45[प्रशंसा]

14:51[संगीत]

14:58[प्रशंसा]

15:10पांचाली प्रतीक्षा कर रही होगी आओ चले

15:26[संगीत]

15:30महाभारत

15:33महाभारत

15:36महाभारत

15:38हो महाभारत

15:41[संगीत]

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