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गरीब किसान का जादुई आम का पेड़ | jadui kahaniya | moral story in hindi | moral stories |cartoon story

Champa Toons · 4,527 words · 21 min read

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0:00अरे भाई देखो यह आम कितने खूबसूरत और

0:03रसीले लग रहे हैं। लेकिन हां कोई भी

0:06इन्हें छूना मत गलती से भी नहीं। अगर किसी

0:09ने भी इन्हें हाथ लगाया तो आज उसका आखिरी

0:12दिन होगा। मैं पहले ही बता दिया हूं। हां

0:16तूने बिल्कुल सही कहा हरी। कोई भी इस आम

0:19के नजदीक नहीं जाएगा। सब यहां से दूर रहो।

0:22अरे चलो तुम भी दूर चलो। इसमें जरूर कोई

0:25ना कोई काला जादू है। चलो चलो पीछे हो

0:27जाओ। पीछे हो जाओ। तभी पीछे से एक मासूम

0:31राधा भागते हुए आती है और उन चमकते हुए

0:35आमों को देखकर ललचा जाती है।

0:38अरे वाह कितने खूबसूरत आम हैं। मैं तो यह

0:42सारे आम खाऊंगी।

0:44अरे रुक जाओ राधा रुक जाओ। यह आम छोड़ दो।

0:47तुम इसको नहीं खा सकती हो।

0:50लेकिन राधा झपट कर एक आम उठाती है और जैसे

0:54ही उसे छूती है वो अचानक जोर से चीखने

0:58लगती है। उसका शरीर धीरे-धीरे धुंधला

1:01पड़ने लगता है। नहीं नहीं ये क्या हो रहा

1:05है? मेरा शरीर गायब क्यों हो रहा है?

1:08बचाओ। मुझे बचाओ।

1:11हे भगवान हे भगवान जिसका डर था वही हो

1:15गया।

1:16गांव वाले दहशत में [संगीत] आ जाते हैं और

1:19देखते ही देखते राधा पूरी तरह हवा में

1:22विलीन हो जाती है। सड़क पर [संगीत] बस वो

1:25आम पड़ा रह जाता है। कुछ समय पहले

1:29कुंदनपुर गांव में शिवम [संगीत] अपनी

1:32पत्नी चांदनी के साथ एक टूटी फूटी झोपड़ी

1:35में रहता था। गरीबी और भूख की वजह से

1:39चांदनी [संगीत] दिन प्रतिदिन कमजोर और

1:42बीमार होती जा रही है।

1:44ए चांदनी, ए चांदनी मुझे माफ कर दो। मैं

1:48कैसा नालायक पति हूं कि तुम्हें दो वक्त

1:51की रोटी भी ढंग से नहीं दे पाता। अगर

1:54मैंने ठीक से पैसे कमाए होते तो शायद आज

1:57तुम्हारी यह हालत तो ना होती। मैं क्या

2:00बताऊं?

2:02बुरा मत [संगीत] मानिए जी। भगवान शायद

2:04हमारी परीक्षा ले रहे हैं। पर आप चिंता मत

2:08करना। एक ना एक दिन हमारे यह दिन जरूर

2:11बदलेंगे।

2:12दोनों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। शिवम

2:16अपनी [संगीत] पत्नी की हालत देखकर अंदर से

2:19टूट जाता है और एक [संगीत] बड़ा फैसला

2:21लेता है।

2:23बस बहुत हो गया चांदनी। तुम्हारी यह

2:26बीमारी और शरीर की कमजोरी अब अब मैं और

2:29नहीं देख सकता। मैं तुम्हें ठीक करके

2:32रहूंगा चांदनी। तुम तुम बिल्कुल चिंता मत

2:34करो। मैं तुम्हें ठीक करके रहूंगा। हां।

2:37शिवम काम [संगीत] की तलाश में घर से निकल

2:40पड़ता है और अपने पड़ोसी हरी का दरवाजा

2:44पीटने लगता है।

2:46अरे अरे अरे अरे अरे क्या बात है भाई?

2:49दरवाजा इस तरह से काहे पीट रहे हो? क्या

2:51आफातान पड़ी है? हैं?

2:54हरी भाई हरी भाई मुझे कोई भी काम दे दो।

2:56मेरी पत्नी कई दिनों से भूखी है। मैं मैं

2:58अब उसका यह हाल नहीं देख सकता। बेचारी की

3:01हालत खराब है। बीमार है। कोई तो काम दे दो

3:03मुझे। कोई भी काम [संगीत] दे दो। हरी भाई

3:05हरी भाई। ए क्या हरी भाई हरी भाई। अरे मैं

3:10तुझ जैसे मनहूस को भला कौन सा काम दे दूं।

3:13अरे तू जिसके यहां भी काम करता है ना

3:15ससुरा अब शगुन हो जाता है। इसीलिए तुझे तो

3:18कोई भी काम नहीं देने वाला। हां, चल भाग

3:22यहां से। बड़ा आया काम दे दो।

3:24हरी भाई, हरी भाई, ऐसा मत करिए। मेरी

3:26पत्नी बहुत बीमार है। अगर मैंने आज कुछ

3:28पैसों का इंतजाम नहीं किया तो वो मर

3:30जाएगी। मेरी बात सुनिए, सुनिए, सुनिए।

3:32शिवम सुबह से लेकर शाम तक पूरे गांव में

3:36एक-एक दरवाजे पर जाता है। पर हर कोई उसे

3:40दुत्कार कर भगा देता है। हारकर वो परेशान

3:44हाल में घने जंगलों की तरफ निकल जाता है।

3:48शिवम थक हार कर जंगल के एक वीराने में बैठ

3:51जाता है। वो चारों तरफ सूखी लकड़ियां

3:55तलाशता है ताकि उन्हें बेचकर चांदनी के

3:58लिए दवा और रोटी का इंतजाम कर [संगीत]

4:01सके। पर उसे दूर-दूर तक कुछ नहीं मिलता।

4:06यहां तो एक भी सूखी लकड़ी तक नहीं है।

4:09गांव वाले तो पत्थर दिल हो ही गए थे। अब

4:11लगता है यह कुदरत भी मेरी मदद नहीं करना

4:13चाहती। हे भगवान इतनी गरीबी और कष्ट देने

4:17से तो अच्छा है कि तू मुझे उठा ही लेता।

4:20मेरी किस्मत ही खराब है। उठा ले भगवान उठा

4:25ले। उठा ले। शिवम अपनी किस्मत को कोस ही

4:29रहा होता है कि तभी झाड़ियों के पीछे से

4:32एक रहस्यमई बूढ़ी औरत उसके सामने आ जाती

4:36है।

4:37बेटा तू बहुत परेशान दिख रहा है। क्या बात

4:40है?

4:41मां जी मेरी परेशानी इतनी बड़ी है कि मैं

4:45आपसे कह भी नहीं सकता।

4:48लेकिन यह बताइए आप इस घने जंगल में अकेली

4:50क्या कर रही हैं?

4:52मेरा काम [संगीत] तो बस मदद करना है बेटा।

4:55यह देख मैं तेरी किस्मत बदलने वाला एक बीज

4:59लेकर आई हूं। इसे ले जाकर [संगीत]

5:02अपने आंगन में बो देना। फिर देखना तेरी

5:06किस्मत कैसे पलटती है।

5:08आखिर इस मामूली से बीच में ऐसा क्या है

5:12मां जी।

5:13बस इतना समझ ले कि सब कुछ बदल जाएगा। जो

5:18दिखेगा वो सच नहीं होगा। और जो सच होगा वो

5:23कभी दिखेगा नहीं।

5:26[हंसी]

5:29बूढ़ी औरत एक डरावनी [संगीत]

5:32और रहस्यमई हंसी-हंसती है और वो बीज शिवम

5:36[संगीत] के हाथ में थमाकर पलक झपकते ही

5:38गायब हो जाती है। शिवम कुछ समझ नहीं पाता

5:42और वह बीज लेकर चुपचाप घर आ जाता है। शिवम

5:47अपने आंगन की मिट्टी खोदकर वह बीज बो देता

5:50है और घर के अंदर जाता है। जहां चांदनी

5:54[संगीत] बीमारी की हालत में दर्द से

5:57करवटें बदल रही होती है।

6:00बस कुछ दिन और चांदनी उसके बाद हमारी सारी

6:04तकलीफें दूर हो जाएंगी। हां।

6:08देखते ही देखते [संगीत] मात्र दो-तीन

6:11दिनों के भीतर ही उस आंगन में एक विशाल

6:14[संगीत] आम का पेड़ खड़ा हो जाता है। उसकी

6:17डालियां पके हुए रसीले आमों से लदी हुई

6:21थी। जिन्हें देखकर शिवम [संगीत] की आंखें

6:24फटी की फटी रह जाती हैं।

6:27बाप रे मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक छोटा

6:31सा बीज इतनी जल्दी इतना बड़ा पेड़ बन

6:34जाएगा और इस पर इतने सारे पके हुए आम। सच

6:39में मांजी ने ठीक ही कहा था कि अब हमारी

6:42किस्मत बदल जाएगी। [हंसी]

6:46तभी चांदनी [संगीत]

6:48आंगन में आती है और उस विशाल पेड़ को

6:51देखकर ठिठक जाती है।

6:53अजी ये क्या है? हमारे आंगन में तो कभी

6:57कोई पेड़ था ही नहीं। मैं अपनी बीमारी

6:59[संगीत]

7:00की वजह से बस दो-तीन दिन ही बाहर नहीं

7:03निकल पाई। और इतने में [संगीत] ही इतना

7:06बड़ा आम का पेड़ कैसे आ गया?

7:09अरे भाग्यवान तुम बस आम खाओ गुठलियां

7:13क्यों गिन रही हो? अब तो हमारी किस्मत

7:15बदलने वाली है। अरे देखो तो सही कितने

7:18प्यारे-प्यारे आम हैं। जल्दी से इसमें से

7:21तुम कुछ खा लो और कुछ मैं खा लेता हूं।

7:23अरे कई दिनों से हमने ढंग से खाना भी नहीं

7:26खाया है। [संगीत] इसके बाद जो आम बचेंगे

7:28उन्हें ले जाकर बाजार में बेच दूंगा। फिर

7:31देखना हमारे पास ढेर सारा धन होगा। [हंसी]

7:36अच्छा ठीक है जी। जैसा आपको [संगीत] ठीक

7:39लगे।

7:40शिवम पेड़ के कुछ ताजे आम तोड़कर घर के

7:44अंदर ले जाता है और दोनों मिलकर भरपेट आम

7:48खाते हैं। आम खाने के बाद शिवम बाजार जाने

7:52की [संगीत] तैयारी करने लगा।

7:54हां, देखो चांदनी अब तुम आराम करो। मैं यह

7:58आम बेचकर तुम्हारे लिए अच्छी औषधियां भी

8:01लेकर आऊंगा। ठीक है। चलो आराम करो।

8:04[संगीत]

8:07शिवम के जाने के बाद चांदनी [संगीत] को

8:09अचानक बेचैनी होने लगी। उसे अपने शरीर में

8:13एक अजीब सी हलचल महसूस हुई। मुझे कुछ अजीब

8:17[संगीत] सा लग रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे

8:21कुछ बहुत बड़ा होने वाला है। पर क्या मुझे

8:25कुछ समझ [संगीत] नहीं आ रहा। खैर, कम से

8:28कम इतने दिनों बाद भरपेट खाना तो मिला।

8:31उम्मीद है अब सब [संगीत] ठीक हो जाएगा।

8:35शिवम बाजार पहुंचा और रसीले आमों को देखकर

8:40लोगों की भीड़ लग गई। तभी वहां हरी आता है

8:44और [संगीत] हैरान होकर शिवम को देखता है।

8:47अरे अरे अरे शिवम ए शिवम

8:52तुम्हारे पास तो कल तक खाने को भी नहीं

8:54था। इतने सारे और इतने सुंदर-सुंदर आम

8:57तुम्हारे पास आए कहां से भाई? हैं?

9:01[हंसी]

9:02अरे हरी भाई आम खाओ गुठलियां क्यों गिन

9:06रहे हो? देखो कितने प्यारेप्यारे और

9:08मीठे-मीठे आम हैं। मैं तो बहुत सस्ते में

9:10दे रहा हूं। सिर्फ ₹5 किलो। ₹5 किलो।

9:14सस्ता-सस्ता आम ले लो। ₹5 किलो का। इतना

9:19सस्ता और अच्छा आम तुम्हें पूरे बाजार में

9:21कहीं नहीं मिलेगा। ले लो ले लो। सस्ता

9:24सस्ता आम ले लो। सिर्फ ₹5 किलो का।

9:28अच्छा अच्छा। क्यों नहीं? क्यों नहीं? चलो

9:31एक काम करो मुझे 2 किलो आम दे दो। दिखने

9:34में तो वाकई बहुत बढ़िया लग रहा है।

9:37देखते ही देखते शिवम के सारे [संगीत] आम

9:39बिक गए और उनके पास उम्मीद से कहीं ज्यादा

9:43धन इकट्ठा हो गया। शिवम बहुत खुश हुआ।

9:48[गहरी सांस लेने की आवाज़]

9:49मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन में

9:52इतने पैसे कमा लूंगा। [हंसी]

9:55चलो जल्दी से चांदनी के लिए औषधियां ले

9:58आता हूं। हां।

10:00शिवम [संगीत] वैद के पास से दवाइयां लेकर

10:02जब घर पहुंचता है तो उसकी आंखें फटी

10:05[संगीत] की फटी रह जाती हैं। जिस पेड़ की

10:08सारी डालियां उसने सुबह खाली की थी

10:11[संगीत] वो फिर से फलों से लथ चुका था।

10:15हैं अरे दादा रे ये कैसे हो सकता है? मैं

10:19तो अभी सारे आम तोड़कर बाजार ले गया था।

10:21इतनी जल्दी फिर से इतने सारे आम कैसे लग

10:24गए? ओह! लगता है यह पेड़ वाकई चमत्कारी

10:29है। [हंसी]

10:32शिवम मुस्कुराते हुए [संगीत] घर के अंदर

10:35जाता है। जहां चांदनी उसका इंतजार कर रही

10:39होती है।

10:40क्या [संगीत] हुआ जी? आप आ गए।

10:43अरे चांदनी चांदनी चांदनी। मेरी चांदनी तू

10:48नहीं जानती। हमारी किस्मत पूरी तरह से बदल

10:51गई है। आज हमारे सारे आम बिक गए। और देख

10:56मैं तेरे लिए दवाइयां और ढेर सारा धन भी

10:58लेकर आया हूं। अब हमारे गरीबी के दिन

11:01खत्म। सुख भरे दिन आयो रे। गरीबी के दिन

11:06गयो रे। [हंसी]

11:10चलिए जी। [संगीत] देर से ही सही। लेकिन

11:13हमारे दिन तो अब बदलने वाले हैं।

11:16धीरे-धीरे [संगीत] समय बीतने लगता है।

11:19शिवम रोज आम बेचता है और उसकी आर्थिक

11:22स्थिति सुधरने लगती है। चांदनी भी अब पहले

11:26से ज्यादा [संगीत] स्वस्थ और तरोताजा

11:29दिखने लगती है। सब कुछ ठीक चल रहा था कि

11:33एक रात जब पूरा गांव [संगीत] गहरी नींद

11:35में सोया होता है। शिवम की नींद एक भयानक

11:39आवाज से खुलती है। आओ शिवम मेरे पास

11:44[संगीत] आओ। मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर

11:47रही थी?

11:48ह

11:50[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]

11:51इतनी रात को इतनी रात को भला मुझे कौन

11:54बुला सकता है? यह आवाज ये कोई साधारण आवाज

11:57नहीं लग रही। यह तो [संगीत] यह तो घर के

11:59बाहर से आ रही है।

12:01शिवम घबराकर बिस्तर से उठता है और दबे

12:05पांव घर के बाहर आता है। जैसे ही वो आंगन

12:09में पहुंचता है, उसके सामने का नजारा देख

12:12[संगीत] उसके होश उड़ जाते हैं। शिवम जैसे

12:16ही पेड़ के करीब पहुंचता है, [संगीत]

12:18पत्तों की सरसराहट तेज हो जाती है और हवा

12:22में एक अजीब सी ठंडक घुलने लगती है।

12:26अरे ये पेड़ के अंदर से कैसी आवाज आ रही

12:30है? ऐसा लग रहा है जैसे कोई मुझे इस पेड़

12:33के तने के पीछे से देख रहा है। पर यह कैसे

12:36मुमकिन है? कोई पेड़ के अंदर कैसे हो सकता

12:40है?

12:41शिवम डरते-डरते आगे बढ़ता है और जैसे ही

12:45पेड़ की घनी छांव में खड़ा होता है, उसका

12:48[संगीत] पूरा शरीर बर्फ की तरह ठंडा पड़ने

12:52लगता है।

12:53ये क्या हो रहा है? मेरा

12:57ओ

13:01मेरा शरीर इतना ठंडा इतना ठंडा कैसे जैसे

13:04जम रहा हो। नहीं नहीं ये ठीक नहीं है।

13:08यहां जरूर कुछ ऐसा है जो जो मैं देख नहीं

13:12पा रहा।

13:15तभी शिवम [संगीत] की नजर पेड़ के मोटे तने

13:19पर पड़ी। जहां पर एक बड़ी दरार उभरने लगती

13:22है और उसके अंदर से एक धुंधला सा रास्ता

13:26दिखाई [संगीत] देता है।

13:28अरे यह तो पेड़ के अंदर एक जाता हुआ

13:31रास्ता है। क्या करूं मैं? इसके अंदर जाऊं

13:34या ना जाऊं? नहीं नहीं नहीं नहीं मुझे

13:36जाना होगा। बहुत ठंड लग रही है।

13:39शिवम ना चाहते हुए भी उस दरार [संगीत] के

13:42अंदर कदम रख देता है और देखते ही देखते वो

13:45एक दूसरी ही दुनिया में पहुंच जाता है।

13:48वहां का नजारा अद्भुत है।

13:51[नाक से की जाने वाली आवाज़]

13:51चारों तरफ सिर्फ विशाल [संगीत] आम के पेड़

13:54हैं और जमीन पके हुए सुनहरे आम से पटी

13:58पड़ी है।

13:59अरे जैसे यह तो ये ये कैसी जादुई दुनिया

14:03है। यहां तो चारों तरफ सिर्फ आम ही आम

14:06हैं। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]

14:08इतने सारे पके हुए आम जमीन पर बिखरे पड़े

14:12हैं। आखिर ये सब क्या है?

14:15शिवम हैरानी से इधर-उधर देख [संगीत] ही

14:17रहा था कि उसकी नजर दूर खड़ी एक लड़की पर

14:21पड़ी। वो बिल्कुल स्थिर खड़ी है, ना हिल

14:25रही है और ना ही आगे बढ़ रही है।

14:28यह लड़की यहां क्या कर रही है? और यह

14:31[संगीत] कब से वहां खड़ी है? हिल क्यों

14:34नहीं रही है? मुझे इसके पास जाकर पूछना

14:36चाहिए।

14:37शिवम [संगीत] हिम्मत जुटाकर उस लड़की के

14:40पास पहुंचता है जिसका नाम जुबिया [संगीत]

14:43है।

14:44अरे तुम यहां क्या कर रहे हो? तुम इस

14:47[संगीत] दुनिया में कैसे आए?

14:50मैं मैं अपने आंगन वाले पेड़ की दरार के

14:54रास्ते से यहां पहुंचा हूं। पर तुम यह

14:56बताओ तुम अपनी जगह से हिल क्यों नहीं पा

14:59रही हो? और आखिरकार तुम हो कौन? और इस

15:02वीरान दुनिया में अकेली क्यों खड़ी हो?

15:04मैं बहुत सालों से इसी एक [संगीत] जगह पर

15:08विराजमान हूं। ना मैं कोई मूर्ति हूं और

15:11ना ही एक चलता फिरता [संगीत] इंसान। मैं

15:13बस एक ऐसी छवि बनकर रह गई हूं जो यहां से

15:17सब कुछ देख [संगीत] तो सकती है पर एक कदम

15:20आगे नहीं बढ़ा सकती।

15:22अरे

15:24ये तो तुम्हारे साथ बहुत बुरा हो रहा है।

15:27तुम ये जगह छोड़कर यहां से चली क्यों नहीं

15:29जाती? एक ही जगह पर भला कोई कब तक खड़ा

15:32रहेगा?

15:33शिवम तुम नहीं जानते [संगीत] यहां की

15:35हकीकत। यह जगह छोड़ने वालों को बाहर की

15:39दुनिया अब स्वीकार नहीं करती। देखो उन

15:42लोगों को। शिवम दूर देखता है [संगीत] जहां

15:45कई लोग खड़े हैं। पर सब बिल्कुल शांत और

15:49भावना विहीन है। जैसे [संगीत] उनके अंदर

15:51की आत्मा मर चुकी हो।

15:54यह लोग ऐसे पत्थर की तरह क्यों खड़े हैं?

15:57जैसे इन्होंने अपना सब कुछ खो दिया हो।

15:59आखिर यह जगह है क्या?

16:02यह कोई [संगीत] दूसरी दुनिया नहीं है शिवम

16:05बल्कि हमारी दुनिया की ही एक छुपी हुई परत

16:08है। यहां वही लोग आते हैं जो उस जादुई

16:11[संगीत] पेड़ से जुड़े होते हैं। तुम जिस

16:14आम को बड़े चाव से खाते हो ना, उसका हर एक

16:17निवाला इंसान का एक हिस्सा खींच [संगीत]

16:20कर यहां ले आता है। धीरे-धीरे पूरा इंसान

16:24इसी दुनिया का होकर रह जाता है और बाहर बस

16:28एक चलता [संगीत] फिरता शरीर बचता है।

16:31क्या क्या बात कर रही हो? यानी यानी मैं

16:34और चांदी ने जो आम खाए हैं उससे हमारा

16:37हमारा [संगीत] एक हिस्सा यहां कैद हो गया

16:39है। क्या बात करती हो? मैंने तो गरीबी में

16:42आम खाकर ही गुजारा किया है और चांदी को भी

16:44वही खिलाया है। मतलब

16:46हां शिवम और जो आम तुमने बाजार में बेचे

16:50हैं उन लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा

16:52क्योंकि उनका सारा [संगीत] भुगतान और सजा

16:55तुम्हारे हिस्से से ही कटेगी। तुम उनके

16:58हिस्से की बलि भी खुद ही बनोगे। शिवम घबरा

17:02[संगीत] गया और पागलों की तरह उस दरार से

17:05बाहर की ओर भागता है। वो किसी तरह वापस

17:09[संगीत] अपने आंगन में पहुंचता है जहां

17:11चांदनी उसे ढूंढ रही होती है।

17:14अजी आप [गला साफ़ करने की आवाज़] इतनी रात

17:16को आंगन में क्या कर रहे हैं? और आप इतने

17:19डरे हुए [संगीत] क्यों हैं? आपके पसीने

17:21क्यों छूट रहे हैं? चांदनी चांदनी चांदनी

17:26हमें हमें हमें बर्बाद कर दिया गया है। वो

17:28बुढ़िया कोई फरिश्ता नहीं थी। वो तो काल

17:30थी काल। यह जो पेड़ हमारी आंगन में खड़ा

17:33है ना यह हमारी खुशियों का नहीं बल्कि

17:35हमारी बर्बादी का कारण है चांदनी हमारी

17:38बर्बादी का कारण।

17:40ये आप क्या बहकी बहकी बातें कर रहे हैं।

17:43इसी पेड़ के फल बेचकर तो हमारे घर में

17:46चूल्हा [संगीत] जल रहा है। मेरी बीमारी

17:48ठीक हो रही है और आप इसे बर्बादी कह रहे

17:51हैं। मैं सच कह रहा हूं चांदनी। मैं

17:54अभी-अभी इस पेड़ के अंदर एक दूसरी दुनिया

17:56देखकर आया हूं। जहां लोग जीते जागते पत्थर

17:59के बन चुके हैं। चांदनी पता है हम हम जो

18:02भी आम खाते हैं ना उससे हमारी रूह का एक

18:05हिस्सा इस पेड़ के अंदर कैद हो जाता है।

18:08चांदनी [संगीत] चांदनी कुछ भी हो जाए

18:09हमें। हमें इसे अभी छोड़ना होगा। छोड़ना

18:12होगा इसे। हमें अभी अभी छोड़ना होगा

18:14चांदनी।

18:15बस कीजिए जी। मुझे आपकी [संगीत] इन बातों

18:17पर बिल्कुल विश्वास नहीं है। मुझे लगता है

18:20कि ज्यादा धन [संगीत] आने की वजह से शायद

18:23आपका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। भला कोई

18:26पेड़ इंसान को कैसे निगल सकता [संगीत] है?

18:30अरे चांदनी चांदनी मेरी बात पर यकीन करो

18:33चांदनी। वो तुम्हें पता है वो वो वो वो

18:36जुबिया नाम की लड़की वहां बरसों से कैद है

18:38और अब और अब हमारी बारी है वहां जाने की

18:41हमारी। अब मैं जानी हूं मैं।

18:44नहीं, मैं यह सब नहीं मानती। आप अभी

18:46[संगीत] आराम कीजिए। सुबह सब ठीक हो

18:49जाएगा।

18:51[संगीत]

18:51शिवम बेबस होकर खड़ा रह जाता है। उसे समझ

18:55नहीं आता कि वो चांदनी को कैसे [संगीत]

18:57यकीन दिलाए कि वो एक बहुत बड़े जाल में

19:00फंस चुके हैं।

19:02[नाक से की जाने वाली आवाज़]

19:02धीरे-धीरे [संगीत] दिन बीतते हैं। शिवम का

19:05व्यवहार पूरी तरह बदल चुका है। उसका

19:08[संगीत] शरीर तो घर में है पर वो एक जिंदा

19:11लाश की तरह पत्थर बना बैठा हुआ है। वो

19:15मुस्कुराता तो है [संगीत] पर उसकी आंखों

19:17में कोई चमक नहीं है। अजी आप कुछ बोलते

19:22क्यों नहीं? आप मुझे इस तरह [संगीत] देखकर

19:24बस मुस्कुरा क्यों रहे हैं? क्या जो आपने

19:27उस रात कहा था वो सच था? क्या आप वाकई

19:31किसी मुसीबत में हैं? चांदनी बुरी [संगीत]

19:34तरह घबरा गई। वो पागलपन की हालत में घर से

19:38बाहर निकलती है और उस विशाल आम के पेड़ को

19:41गौर से देखने लगती है। उसे एहसास [संगीत]

19:44होता है कि सारे फसाद की जड़ यही पेड़ है।

19:48तभी एक अजीब [संगीत] सी नीली चिड़िया

19:50उड़ती हुई आती है और पेड़ की डाल पर बैठकर

19:54चांदनी को एक

19:56[संगीत]

19:56टक निहारने लगती है। यह चिड़िया मुझे ऐसे

20:00क्यों देख रही है? जैसे यह मुझे बरसों से

20:02जानती हो। नहीं, यह [संगीत] मेरा भ्रम है।

20:05मुझे यहां से जाना चाहिए। जैसे ही चांदनी

20:09मुड़ती है, वह चिड़िया उड़कर उसके कंधे

20:12[संगीत] पर आ बैठती है। चांदनी सहम जाती

20:15है।

20:16वक्त कम है चांदनी। अगर आज तुमने अपने पति

20:21को नहीं बचाया तो वो हमेशा के लिए [संगीत]

20:25तुमसे छीन जाएंगे।

20:27तुम तुम बोल सकती हो और यह कैसी बकवास

20:31[संगीत] कर रही हो? मेरे पति घर के अंदर

20:33हैं। माना कि वो कुछ बोल नहीं रहे पर वो

20:36मुझे छोड़कर कहीं नहीं गए हैं।

20:39तुम्हारे पास सिर्फ उनका आधा शरीर है

20:43चांदनी। उनकी रूह का आधा हिस्सा तो

20:47[संगीत] किसी और ही काली दुनिया में कैद

20:50हो चुका है।

20:52नहीं, मुझे तुम्हारी बातों पर यकीन नहीं

20:55है। तुम एक साधारण पक्षी होकर मुझे डरा

20:57रही हो। मेरे पति के साथ [संगीत] कुछ अजीब

21:00जरूर हो रहा है। पर मैं तुम्हारी बातों

21:03में नहीं आने वाली।

21:04अगर यकीन नहीं आता तो आज रात ठीक [संगीत]

21:0912:00 बजे इस पेड़ के सामने आकर खड़ी हो

21:13जाना। तुम्हें अपनी आंखों से [संगीत] सच

21:16दिख जाएगा।

21:18आखिर तुम हो कौन? और तुम्हें यह सब कैसे

21:21पता?

21:22मैं वो अभागी रूह हूं जो बरसों पहले इसी

21:26पेड़ [संगीत] का शिकार बनी थी। मैं नहीं

21:29चाहती कि तुम्हारा पति जो तुमसे इतना

21:33प्रेम करता है। उस अंधेरी दुनिया में

21:36हमेशा के लिए दफन हो जाए। इतना कहते

21:40[संगीत] ही एक तेज नीली रोशनी हुई और वो

21:43चिड़िया पलक झपकते ही गायब हो [संगीत] गई।

21:46चांदनी का दिल जोर से धड़कने लगा। वो समझ

21:50गई कि यह कोई साधारण चेतावनी नहीं थी।

21:53[संगीत] वो घर के अंदर गई। चिंता मत कीजिए

21:57जी। मैं आपको ठीक करके रहूंगी। आप बोल

22:00नहीं पा रहे पर मैं आपकी खामोशी [संगीत]

22:03का दर्द समझ रही हूं। रात गहराती है।

22:07चांदनी [संगीत] पेड़ के सामने जाकर खड़ी

22:09हो जाती है। अचानक पेड़ के तने में एक

22:12गहरी दरार उभरती है और उसके अंदर से एक

22:16धुंधला [संगीत] डरावना रास्ता दिखाई देता

22:19है। अरे ये दरार और इसके अंदर इतना अंधेरा

22:23रास्ता [संगीत]

22:24अगर मुझे सच जानना है तो मुझे इसके अंदर

22:27जाना ही होगा। चांदनी हिम्मत जुटाकर उस

22:31दरार के अंदर कदम रखती है। कुछ पल के

22:34अंधेरे के बाद वो एक ऐसी दुनिया में

22:37[संगीत] पहुंचती है जहां चारों तरफ

22:40सन्नाटा है। वहां सिर्फ आम के पेड़ हैं और

22:43जमीन [संगीत] पर अनगिनत सड़े गले आम बिखरे

22:47पड़े हैं। तभी उसकी नजर दूर खड़ी जुबिया

22:51पर पड़ती [संगीत] है और उसे देखकर रहस्यमई

22:54ढंग से मुस्कुरा रही है। यह लड़की [संगीत]

22:57कौन है? और यह मुझे देखकर इस तरह क्यों

23:00मुस्कुरा रही है? मुझे इसके पास जाना

23:03[संगीत] चाहिए। चांदनी तेज कदमों से

23:06जुबिया के पास पहुंची। आओ चांदनी आओ।

23:10[संगीत] मैं जानती थी कि तुम यहां तक जरूर

23:13पहुंचोगी। तुम्हारा इंतजार तो पहले से हो

23:16रहा था। चांदनी सहमी हुई नजरों से उस

23:20रहस्यमई लड़की को देखती है [संगीत] जो

23:22अपनी जगह से 1 इंच भी हिल नहीं रही थी।

23:27तुम कौन हो और तुम मेरा नाम कैसे [संगीत]

23:29जानती हो? मैं इस जादुई दुनिया की मालकिन

23:33हिमानी की बेटी जुबिया हूं। मैंने खुद को

23:37इस कैद से बचाने [संगीत] के लिए अपनी रूह

23:39को इसी एक जगह पर जमा लिया है। पर

23:42तुम्हारा पति वो इतना भाग्यशाली [संगीत]

23:45नहीं है। जुबिया धीरे से अपने हाथ से

23:48सामने की ओर इशारा करती है। चांदनी

23:51[संगीत] की नजरें दूर एक पेड़ के नीचे

23:54जाती है। जहां शिवम एक बेजान बुत की तरह

23:58खड़ा है। उसकी आंखों में कोई चमक नहीं है।

24:02जैसे वो पत्थर का बन चुका है। जी आप यहां

24:08आप यहां क्या कर रहे हैं? चांदनी दौड़कर

24:11शिवम के पास पहुंचती है। जी कुछ तो बोलिए।

24:16मैं आपको लेने आई हूं। चलिए मेरे साथ

24:19हमारा घर हमारी दुनिया [संगीत] आपका

24:21इंतजार कर रही है।

24:23मुझे मुझे यहीं रहना है चांदनी। अब मैं

24:27कहीं नहीं जाना चाहता।

24:29नहीं जी। आप ऐसी बातें कैसे कर सकते हैं?

24:32आप मेरे बिना यहां अकेले कैसे रहेंगे? मैं

24:36आपको यहां इस नर्क में नहीं छोड़ सकती।

24:39तभी जुबिया [संगीत] की भयानक हंसी पूरी

24:42घाटी में गूंज उठी।

24:44[हंसी]

24:47अब तुम्हारा पति कहीं नहीं जाएगा [संगीत]

24:50चांदनी। इसने लालच में आकर इस जादुई पेड़

24:55के फलों का सौदा किया। लोगों को वो आम

24:58[संगीत] खिलाए। अब इसकी सजा यही है कि इसे

25:01इसी दुनिया की मिट्टी का हिस्सा बनना

25:04होगा। नहीं यह अनर्थ है। मेरे पति ने जो

25:08[संगीत] किया वो मेरी जान बचाने के लिए

25:11किया। अगर सजा देनी है तो मुझे दो पर

25:14उन्हें छोड़ दो। मैं उनके बिना जी नहीं

25:17पाऊंगी। इस दुनिया का एक ही नियम है

25:20चांदनी। यहां से एक रूह तभी [संगीत] बाहर

25:23जा सकती है जब उसकी जगह कोई दूसरी रूह

25:27यहां रुकने [संगीत] को तैयार हो। क्या तुम

25:29इसके लिए तैयार हो?

25:31नहीं चांदनी तुम ऐसा नहीं करोगी। तुम वापस

25:35जाओ।

25:36जी। आपके बिना मेरी दुनिया वैसे ही खत्म

25:40हो चुकी है। अगर आपको बचाने [संगीत] के

25:42लिए मुझे यहां पत्थर बनना पड़े तो मुझे

25:45मंजूर है। जैसे ही [संगीत] चांदनी यह शब्द

25:49कहती है एक बहुत तेज नीली रोशनी चारों तरफ

25:53फैल जाती है। शिवम का शरीर अचानक हल्का

25:57होने लगता है और वो हवा में तैरते हुए उस

26:01दरार [संगीत] की ओर खींचने लगता है।

26:04नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं चांदनी तुम

26:06मुझे छोड़कर नहीं जा सकती। मुझे तुम्हारे

26:08साथ रहना है चांदनी। मुझे तुम्हारे साथ

26:10रहना है। चांदनी चांदनी

26:16शिवम की चीखें [संगीत] गूंजती रहती हैं।

26:19पर वो चाहकर भी खुद को रोक नहीं पाता। एक

26:23जोरदार झटके के साथ वो अपने आंगन के पेड़

26:26के बाहर आकर गिरता है।

26:29चांदनी चांदनी चांदनी चांदनी चांदनी

26:33चांदनी बाहर आओ बाहर आओ चांदनी बाहर आओ।

26:37मुझे माफ कर दो। मैं तुम्हें अकेला नहीं

26:40छोड़ सकता। चांदनी बाहर आओ चांदनी

26:43[गाना गाने की आवाज़] बाहर आओ। बाहर आओ।

26:46[हंसी]

26:51[हंसी]

26:56दिन बीतते गए पर शिवम उस पेड़ के नीचे से

27:00नहीं उठा। ना उसने अन्न का [संगीत] दाना

27:02चखा ना पानी की एक बूंद। वो बस फटी आंखों

27:07से पेड़ को देखता रहता। आंगन में पके हुए

27:10रसीले आम गिरकर सड़ने [संगीत] लगे थे। तभी

27:14वहां हरी आया। अरे अरे अरे शिवम ये क्या

27:18हालत बना रखी है भाई। ए देख तो आगर में

27:22सोने जैसे आम गिरे पड़े हैं और तू यहां

27:24बैठे-बैठे रो रहा है। चल चल इनको बाजार

27:27में लेकर चलते हैं। बहुत पैसा मिलेगा।

27:30हां।

27:31शिवम कोई जवाब [संगीत] नहीं देता। वो बस

27:34एक पत्थर की मूरत बन चुका था। उसकी यह

27:38हालत देख पेड़ के अंदर कैद चांदनी का

27:41कलेजा मुंह को आ गया। वो जुबिया के सामने

27:44[संगीत] हाथ जोड़कर खड़ी हो गई।

27:47जुबिया मैं अपने [संगीत] पति को इस हाल

27:50में नहीं देख सकती। जब मैं बीमार थी तो

27:53उन्होंने मेरी जान [संगीत] बचाने के लिए

27:56ही उस बुढ़िया का दिया बीज बोया था। आज

27:59मैं यहां कैद हूं तो वो बाहर घुट-घुट कर

28:02मर रहे हैं। तो तुम क्या चाहती [संगीत] हो

28:05चांदनी? मेरे पति को इस मानसिक तड़प से

28:09आजाद कर दो। उनकी यादों [संगीत] से मेरा

28:12नाम, मेरा चेहरा सब मिटा दो। मैं यहां

28:15पत्थर बनकर रह जाऊंगी। पर उन्हें अपनी

28:18दुनिया में सुकून से जीने दो। जुबिया

28:21मंत्र पढ़ती है और पेड़ से एक ठंडी

28:24[संगीत] जादुई हवा निकलकर शिवम को छूती

28:27है। अचानक शिवम की आंखों के आंसू सूख जाते

28:31हैं। उसका चेहरा शांत [संगीत] हो जाता है।

28:33उसे अब याद ही नहीं कि चांदनी कौन थी।

28:37शिवम उठकर खड़ा होता है। हरी

28:40[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]

28:41भाई बिल्कुल सही कह रहे हो तुम। इतने

28:45कीमती आम यहां सड़ने के लिए थोड़ी हैं।

28:48चलो इन्हें बाजार लेकर चलते हैं। अरे अरे

28:52अरे अरे ए क्या हो गया तुझे शिवम? अभी तू

28:56पागलों की तरह पेड़ को पीट-पीट कर रो रहा

28:59था। अचानक से एकदम शांत। पता नहीं हरी भाई

29:03मुझे याद ही नहीं आ रहा कि मैं यहां क्यों

29:04बैठा था। ऐसा लग रहा है जैसे कोई बुरा

29:06सपना देख रहा था। अरे देखो ना ये आम कितने

29:10कीमती हैं। चलो इन्हें बाजार में लेकर

29:12चलते हैं। बहुत पैसा मिलेगा। चलो। बढ़िया

29:16मीठेमीठे आम। पकेपके सोने जैसे आम। न

29:22पेड़ के अंदर खड़ी [संगीत] चांदनी जुबिया की

29:25तरफ मुड़ी। उसकी आंखों में आंसू हैं। पर

29:28चेहरे पर एक [संगीत] अजीब सा संतोष।

29:32शुक्रिया जुबिया। कम से कम अब वो तड़प तो

29:35नहीं रहे। उनकी यादों से [संगीत] मेरा मिट

29:37जाना ही बेहतर था ताकि वह अपनी नई दुनिया

29:40में सुकून से जी सके।

29:43तुमने बड़ी कीमत [संगीत] चुकाई है चांदनी।

29:45अब वो तुम्हें कभी याद नहीं करेगा। शिवम

29:49अब गांव का [संगीत] सबसे अमीर आदमी बन

29:51चुका है। उसके पास बड़ा घर और नौकर चाकर

29:55हैं।

29:56हां सुन नौकर ये आम के टोकरे संभाल कर

29:59भरो। इनामों ने ही तो मेरी किस्मत बदली

30:02है। सब कुछ कितना सही है मेरी जिंदगी में।

30:05हां, चांदनी पेड़ के अंदर से अपने पति की

30:10समृद्धि देख मुस्कुराती है। दुनिया का

30:13दस्तूर यही है। हर बड़ी कामयाबी एक बड़ी

30:16कीमत मांगती है। शिवम ने गरीबी के नर्क से

30:20निकलने के लिए अपने सबसे कीमती प्रेम की

30:24बलि दे दी। जो दिखता है वह सच नहीं होता

30:28और जो सच है वह कभी किसी को दिखता नहीं।

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