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Dua Kese Qabool Ho | دعا کیسے قبول ہو | Emaan Afroz Waqiyat | Molana Muhammad Noman

Molana Muhammad Noman · 6,265 words · 29 min read

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0:00के अधीन लखनऊ गाना सुनाइए

0:04नुव्वु नुव्वु विश्व बंधुत्व कल वाली हूं

0:09कि उन्होंने जो ब्लडी मैरी शुरू हुए अनशन

0:12आवरण से याची जाणीव ना

0:15मैं यहां पर जिला व फलाहार मोबाइल अलावा

0:19मैं यूज लोग फूफा जी को

0:22कि वह शहद व ला इलाहा इल्लल्लाहु वह दहु

0:26ला शरी-क लहू

0:28वाश महत्व अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व

0:31रसूलुहू है

0:33जो मां बापू साहू सुनील एडमिन क्षेत्र

0:36ऑलिव इस मिला ड्रॉप महानगर वासियों को

0:41थे वेदास वेयर लख्यौ

0:45खरीद मुजीब दावत दाणी धुंधली लिस्ट जॉब

0:51लिए मधुमेय 9 ब्लाउज अरशूल है

0:57के मुहल्ला होता है लक्ष्मी मां भावना

0:59स.अ.

1:01कि वह नौकरी लहरी के अनुसार लाल मिर्च है

1:06का पालन अभ्यास सल्लल्लाहओ अलीहे वसल्लम

1:08ने

1:10के अलावा प्रमुख गोलाई बादाम अ

1:13कि वह काले ने भी यूज सल्लल्लाहु अलैहि

1:16वसल्लम अ

1:18को लाइक शेयर और अख्तर मालूम वह मेहनत दुआ

1:21है

1:23कि बुखारी ने भी यूज सल्लल्लाहु अलैहि

1:25वसल्लम

1:27उल्लाह व अनिल तुम मोटी नॉवेलिस्ट ज्यादा

1:31आ

1:32कि इन नमः अलायंस राजीव द्वारा इन अथवा

1:37शीला ही अ

1:39कि व खाने-पीने by सल्लल्लाहु अलैहि

1:41वसल्लम

1:43मंडलम यह सैला है यह जहाज तो

1:48कि बुकानन ने भी यूज सल्लल्लाहो अलेही

1:51वसलम सल्लाहू

1:53शुद्धतावादी नुस्खा ज्यादा बाद उन्हें शक

1:55था कि हिना डावर अतुल वाली दिल्ली वाले जी

1:59व दाम अतुल मुसाफिर यह बदलाव अतुल मशरूम

2:03सदा कलरफुल हंसी थी

2:06कि मेरे जी हां शिवाजी बैलेंस चरम भाग्य

2:09एपिसोड 193 आई हो दोस्तों और बुजुर्गों को

2:14कि मेरे आपके सामने पुरानी क्रीम के दो

2:17आया और नबी अकरम सल्लल्लाहो अलैही व सल्लम

2:20ने ईर्शाद आत्मविश्वास चिन्ह अधीक्षक पड़ी

2:24पुरानी क्रीम की जो आप मैंने आपके सामने

2:27तिलावत की इसमें अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त

2:29इरशाद फरमाते हैं वहीं राज्य अलग था यह

2:33बाजी ने फाइल नेम करें जब मेरे बंदे आपसे

2:38मेरे बारे में पूछें तो उन्हें बता दो कि

2:43यकीनन में अपने वाहनों के खरीदारों को

2:46कि मुझे अवतार धारण इरादा हानि जब भी वह

2:51मुझे पुकार एंगे तो मैं उनकी पुकार को

2:54कुबूल करूंगा जो मुझसे मांगेंगे मैं

2:58उन्हें वर्थ आऊंगा शल्य सचिव व मीनू भी

3:03लाल मिर्च बुद्धिमान उन्हें चाहिए कि वह

3:07मुझे ही पुकारें और मुझ ही से दुआ करें

3:11यकीनन अल्लाह की रहनुमाई करने वाला हूं की

3:14पुरानी क्रीम के शायद में अल्लाह रब्बुल

3:18इज़्ज़त ने तमाम बंदिशों को सितार के

3:21फ़रमाया जब भी तुमने कुछ मांगना हो तो

3:25मुझसे मांगू मैं तुम्हारी पुकार को पूरा

3:28करूंगा तुम जो मांगोगे मैं तुम्हें आता

3:31करूंगा दूसरी आयत मे इरशाद फरमाया वाहन व

3:36करो इलायची महाबलेश्वरी और हम इंसान की

3:40शहर से ज्यादा उसके फरीद है हम इंसान की

3:44शहर से ज्यादा उसके फ्री है तो जब अल्लाह

3:48इतना करीब है तो इंसान को चाहिए कि वह

3:51अपनी हर दुआ था घर बुला आलमीन शेयर करें

3:55रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने

3:57इरशाद फरमाया अब दुआओं में खून इधर आ

4:01की दुआ था इस बातचीत का मकसद

4:04जिस तरह जानवर के जिस्म में महज एक

4:08बुनियादी हैसियत रखता है इंसान के जिस्म

4:12में अकल दिमाग महज एक बुनियादी हैसियत

4:15रखता है खुदा न करे अगर इस विषाणु के पास

4:18अपने दिमाग ना हो तो फिर वह चौपायों के

4:21माने तो होता है उसे मालूम नहीं होता किसी

4:24चीज का अपने नफे-नुकसान का और अच्छे और

4:27बुरे का तो इबादत में यही हैसियत द्वारा

4:31की है जो है सिर्फ इंसान के जिस्म में

4:35इंसान के दिमाग कीजिए

4:37रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो सल्लम ने फ़रमाया

4:40अब द्वारा वह भूल बांधा दुआ ही इबादत से

4:44यही दुआ मुस्तफील इबादत है जैसे इंसान

4:48नमाज़े ज़ोहर तिलावत इबादत है अल्लाह से

4:52मांगना यह भी इबादत चाहिए है रसूलुल्लाह

4:55सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया

4:58मलहम यश तगला हां यह सवाल जो अल्लाह से

5:02नहीं मांगता अल्लाह ऐसे शख्स से नाराज

5:05होता दुनिया में तो इंसान जिससे मांगे वह

5:09नाराज होता है एक दफा देगा दो फायदे का यह

5:13तीसरी डेफिनेशन जाए तो चीनी बजे भी होगा

5:16चेहरे पर ना गंवारी के आसार होंगे लेकिन

5:20अल्लाह फरमाता में उससे नाराज होता हूं जो

5:22मुझे नहीं मांगता था

5:25है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो वसल्लम ने इरशाद

5:27फरमाया सही मुस्लिम की रिवायत है फ़रमाया

5:30कि अगर तमाम बनवाया दम एक मैदान में जमा

5:34हो जाएं अव्वल विशाल फिर भी अगले भी पिछले

5:38भी और सारे इंसान अपनी ड्राई करें तो मैं

5:42सब की दुआओं को कुबूल कर लूंगा और अल्लाह

5:45के फसाने में इतनी भी कमी नहीं होगी जितना

5:48सुई को अगर दरिया में डाला जाए तो सुई के

5:52नाते में जो पानी का खतरा आता है उस पानी

5:55के पत्र से दरिया में कमी नहीं होती तमाम

5:59इंसानों को उनकी मतलब तमाम चीजें मैं फिर

6:03हम करूंगा अल्लाह फरमाता है मेरे फसाने

6:06में कोई कमी नहीं आएगी

6:08मैं इसे खतरे से शायद दरिया में तो कमी आ

6:12जाए लेकिन रब्बुल आलमीन के खजानों में कोई

6:15कमी नहीं आती और उस अल्लाह सल्लल्लाहू

6:18अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि अल्लाह

6:20रावण तुम मोटी हो ना कि जब तुम अल्लाह से

6:25दुआ करो और तो यह प्लेन रखो के अल्लाह

6:28तुम्हारी दुआ कबूल करेगा

6:31कि तुम यकीन रखो के अल्लाह तुम्हारी दुआ

6:33कुबूल करेगा व मोहनलाल यह सब्जी वह द्वारा

6:38इन थे फैला है जान लो के अलावा उस दुआओं

6:42को कुबूल नहीं करता जो हकीकत वाले दिन के

6:46साथ हो

6:47बेपरवाह होकर हो जिसमें इंसान की तरह जीवन

6:51लकी तरफ ना हो पर मैं अल्लाह ऐसी दुआ

6:54कुबूल नहीं करता था

6:56कि आज हम दो बार तो कर रहे होते हैं हाथ

6:58उठाए हैं लेकिन हमारी तो जो कई और होती हम

7:02दुआ करते नहीं है तो आप पढ़ते हैं बस जवान

7:06पर गौर एक कराटे के अल्फाज है वह अल्फाज

7:09दोहरा देते हैं लेकिन हमारा दिल और दिमाग

7:12कमजोर मुतवज्जेह होता है अल्लाह दुआ कुबूल

7:16करता है जिस दुनिया में इंसान अपने

7:18दिलो-दिमाग के साथ अपने तमाशा के साथ

7:22अल्लाह की तरफ़ मुतवज्जेह हो जाए आज इसी

7:25के साथ गुड़गुड़ाते हुए उन नदामत के आंसू

7:29बहाते हुए अन्न से दुआ करें अलग-अलग जरूर

7:33दो आपको Google करता है अव्वल तो आज कल

7:36दुआएं मांगी ही नहीं जाती और अगर कोई दुआ

7:39करता भी है चैनल फाड़ लिए दिलो-दिमाग

7:43मुतवज्जे नहीं होता इसलिए वह दुआ कुबूल

7:46नहीं होती जब भी इंसान संजीत यह के साथ

7:49बाबा कार अंदाज में डुबोकर नदामत के साथ

7:54अल्लाह से मांगे कायल नता प्रश्न 28 फिर

7:57शुरू कबूल करता है दुआ के क़ुबूल 13

8:00सूरतें होती तेरी सूरत यह निशान ने जो

8:04मांगा है अल्लाताला वही इंसान को पता कर

8:08देता नंबर दो बसों का वह चीज करना बंद के

8:13हक में मुफीद नहीं होती क्योंकि अल्लाह

8:16मुस्तक़बिल का इल्म रहता है इंसान के

8:19सब्सक्राइब कर लू की वजह से आने वाली किसी

8:25मुसीबत को बड़ी तकलीफ और आजमाइश को दूर कर

8:29देता है

8:30फोन नंबर 30 शौकत यह दुआ इंसान के आपसी

8:34रिश्तों के लिए जरुर हो जाती है इसलिए जब

8:37वह आखिरत में अपनी दुआओं का बदलाव देखे का

8:40यहां से जो इन एमआर और नियंत्रण मिलेंगी

8:43तो वह कहेगा आकाश दुनिया में मेरी कोई दुआ

8:47कुबूल होती अल्लाह हरिद्वार का बदला आप

8:50मुझे या फिर अपने दे देता तो मुसलमान की

8:53दुआ कुबूल जरूर होती हैं लेकिन उसकी यह

8:56तीन सूरतें होती या अल्लाह वहीं आ कर देता

8:59है या अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त आने वाली

9:02किसी मुसीबत को टर्न देता है और यह नंबर

9:05चाहिए अलार्म पुलिस आयुक्त द्वारा को

9:07इंसान के लिए आख़िरत का जखीरा बना देता है

9:10हजरत ए शब्बीर अली सलातो अस्सलाम जनाब ए

9:14रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू सल्लम हजराते साहब

9:17और सिर्फ उन पर जब भी कोई मुश्किल आती थी

9:20जब भी कोई परेशानी होती तो अल्लाह से दुआ

9:23करते थे और अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त फिर

9:26दुआओं को कुबूल फरमा चाहिए हजरत इब्राहिम

9:29अश्लील ह कि जब इन्होंने और इनके बेटे

9:31हजरत इस्माइल जब उर्मिला ने बैतुल्ला को

9:34तामीर किया तामीर करने के बाद जिधर ही

9:38मैंने सनम ने अल्लाह से दुआ की थी और वह

9:41स्पीड है मसूद व मेल हम

9:45त्यौहार अली मोहम्मद अंकिता

9:47151 क्रिमिनल मिथिला जी0 कि यह लव तो वह

9:53पेज नंबर 90 भेजने वाला है उन्हें हमारी

9:57ही औलाद में मधु शर्मा और वह गंभीर व

10:01लोगों के सामने तिलावत करें लोगों को की

10:04बातें से लोगों को सब्सक्राइब करें उस पर

10:08नंबर को हमारी में वर्मा अल्लाह से दुआ

10:13कुबूल फरमाए और हजरत इब्राहिम के बेटे

10:16हजरत इस्माइल अली सलाम की में रसूल

10:20सल्लल्लाहु है

10:22कि इबादत के बाद दुआ अल्लाह कबूल करता जब

10:26इंसान फर्ज इबादत पैदा करें तिलावत करें

10:29नवाफिल पड़े अल्लाह के नाम पर शपथ लें और

10:33उसके बाद दो बार करें तो अल्लाह रब्बुल

10:35आलमीन उसकी दुआ कुबूल फरमाते इब्राहीम

10:38अलैहिस्सलाम ने जब बेतुल्ला की तामीर की

10:40तो आप फरमाइश वह फ्लैट बुरा ही मुहूर्त भी

10:43ज्यादा बन अगर हमने वह जरूर सुनी वह बनी

10:46या ना भूलें अपना इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने

10:50द्वार की थी के अल्लाह तो इस शहर को

10:52अम्नो-अमान गहरा बना और मेरी लाश को जूतों

10:57की इबादत से त्वचा

10:59इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह ने

11:02फरमाया कि अल्लाह ने शहर के

11:06अलग-अलग इलाकों को भूतों की आदत से भी

11:10किया और वहां फलों की परवाह किए बगैर मौसम

11:16वहां मौजूद होते हैं यह इब्राहिम अली सलाम

11:19दुआ

11:21करता है दुआ कुबूल फरमाते जनावे रसूलल्लाह

11:25सल्लल्लाहु वसल्लम हर मौके पर अल्लाह

11:28रब्बुल इज़्ज़त से मांगते थे वेदर का

11:31तरीका है मुसलमानों की तादाद 313

11:35की तादाद 1000 तमाम असली हत्यारों के पास

11:40मौजूद है

11:44घृत विक्रम विक्रम मुसलमानों के पास बेगम

11:5016 साल के सामने गिड़गिड़ा कर दूं कि आपने

11:55द्वारा किए गए अतिक्रमण को

12:00अगर आज यह मुसलमान शहीद हो गए तो

12:04सब्सक्राइब

12:07सब्सक्राइब

12:09हमारी दुआओं को कुबूल फरमाए आप समझ गए

12:13अल्लाह से मांगो मांगो कि अल्लाह ने फिर

12:17आसमान से तीन हजार फरिश्तों को मदद के लिए

12:21आ

12:23कि मुझे बिल किसान अल्लाह से दुआ करता है

12:25और उनको लाल मिर्च दुआओं को कुबूल करता है

12:28आज हम जितना लोगों से मांगते हैं लोगों के

12:31सामने रोते हैं यह गिर जाते हैं और अपने

12:34आधार पेश करते हैं अलग यह कसम अगर उसका

12:38दसवीं सदी साल इसे मानते अल्लाह इतना

12:41खजाना दे देता है इतना नवाज देता फिर उसे

12:44नस्लों को भी नमस्ते था लेकिन इंसान नादान

12:47है हजारों के मालिक रूप से नहीं पुकारता

12:50जिसे इंसान के पास उस खजाने में से थोड़ा

12:53सामान है उसके सामने आया हो जारी करता नबी

12:57अकरम सल्लल्लाहो सल्लम की आदत अरे जब भी

13:00कोई मौका हुआ अल्लाह से दुआ फ्रॉम थे सही

13:03मुस्लिम की रिवायत है हज़रत अबू हुरैरा

13:05राड़ी अल्लाह तआला ने हुज़ूर के पास आया

13:07था या रसूलल्लाह मेरी मानता है कुछ नजाइत

13:11अली माधवी के देती है आप दुआ करो अल्लाह

13:13उसे विमान की तो फिर आप अल्लाह से दुआ

13:17मांगो वो मुसलमान हो या रसूलल्लाह

13:19सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने द्वारा की

13:21अल्लाहुम्मा धुम कि हो रही रखते अलावा अब

13:25हो रहा की वारदात को हिदायत अता फरमा

13:28सूर्या हाथ उठाएं हम रहते हो रहा था

13:33नियुक्त घर की तरफ जा रहा था कि देखता हूं

13:37मैं सोचता हूं कि यहां पर

13:40हम घर के दरवाजे पर पहुंचे अंदर से पानी

13:45के गिरने की आवाज आ रही थी

13:48करने की चीन ने दस्तक दी

13:53यहां तक कि युसूफ़ और इमाम

13:57हजरत के सामने आई और उसी पेड़ पर पड़ा

14:01मिला वन

14:03[संगीत]

14:04मोहम्मद रसूल हजरत नियुक्त मुसलमान रसूल

14:11सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया था

14:13कि

14:18बुख़ारी और मुस्लिम की

14:2016वें नंबर पर खड़े हैं कि खुद वेरी साद

14:24फरमा रहे हैं एक सहाबी आगे पाया रसूल

14:27अल्लाह दुआ फ़रमाई यह बारिश नहीं हुई

14:30जानवर भूख से मर रहे हैं प्यास से मर रहे

14:33हैं जमीनें बंजर और वीरान हो गई पानी

14:36बिल्कुल मौजूद नहीं आधा फरमाइए अल्लाह

14:39बारिश वर्षाें आप सल्लल्लाहू सल्लम ने हाथ

14:42उठाएं अल्लाह से दुआ मांगी के अलावा तो

14:44बारिश बरसात अभी नमाज खत्म हो कर बाहर

14:47नहीं निकले थे इतनी बारिश बरसना शुरू हो

14:50गई इतनी बारिश एक हफ्ते तक मुसलसल बारिश

14:54बरस्ती रहे यहां तक पानी के नाले में बहने

14:57लगे जहां से कोई आता वह देता खूब बारिश

15:00हुई खूब बारिश हुई अगला हफ्ता या आप

15:03सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुद दे रहे थे

15:06जहां भी आया था या रसूलल्लाह अब द्वारा

15:08फरमाइए बारिश रुक जाए इसलिए बहुत ज्यादा

15:11बारिश हो गई आप समझदार असलम ने द्वापर मे

15:15ज़िला तो इस बारिश को पहाड़ों पर तीर

15:19वाद्यों पर हफ्ते अलार्म मदीना वालों पर

15:22रोक दे दो उम्मीदवार थी और अल्लाह ने

15:24बारिश को रोक दिया हजरत अनस बिन मालिक

15:27कहते हैं मैं देख रहा था आप उंगली से

15:30इशारा करते बादल को के बादल इधर हो जाता

15:32उसे कहते वह बादल उधर हो जाता तो यह बादल

15:36फिर मदीना के अंतराल पर भर से मदीना पर

15:39नहीं बरसे आजम नमाज पढ़ते मस्जिद से निकले

15:42ऐसा लगता था सांस मान ऐसा साफ़ सुथरा था

15:46धूप इतनी शिद्दत से थी लगता था कि कहीं

15:49बारिश हुई ही नहीं हालांकि एक हफ्ते से

15:53बारिश दर्ज की

15:55जो तूने दिया अकरम सल्लल्लाहू अलैहि

15:57वसल्लम के साथ जब भी कोई मौका हुआ अल्लाह

15:59से महान इंसान को जब भी दुआ हो अल्लाह के

16:02सामने गिड़गिड़ाए प्रभुलाल मीणा इंसान के

16:05आंसुओं की बड़ी लार्जर रखता है वह सातों

16:08समुद्रों का पैदा करने वाला है लेकिन

16:10आंसुओं के पत्र से बड़ी मोहब्बत करता जब

16:13इंसान सुबह आगे अलार्म में माजी के गुनाह

16:17माफ फरमा देता हूं सहमत की रिवायत है और

16:20वह बिन अभिजात बार e.t. कहते हैं एक दफा

16:24में हुजूर के पास आया आप सल्लल्लाहो अलैहे

16:27वसल्लम से इन्होंने दुआओं की दरखास्त कि

16:29आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने इनके लिए

16:31तो आप फ़रमावेंगे क्या लगता है तुम्हारी

16:33मां रिश्तों में तुम्हारे रिस्क में बरकत

16:35अता फरमाए और हवाई जहाज कहते हैं वहां से

16:39गया अल्लाह ने ऐसी बरकत दी ऐसी बरकत दी

16:42उधर लौटने से पहले पहले तिजारत में मुझे

16:4640,000 द्वारा हिम का नशा हो गया

16:49में 40,000 इब्राहिम तड़प हो गया घर लौटने

16:53से पहले पहले अल्लाह ने इसी बरकत अता

16:55फरमाए इसलिए इंसान हमेशा जब भी हो और

16:59गुलाल अमीन से दुआ करें हजराते सहावर और

17:02संत की जिंदगी में भी यही बात जी जब भी

17:04कोई मुश्किल ना चाहिए वह फौरन अल्लाह ताला

17:07से दुआ करते थे एक वहां पर नहीं बल्कि

17:09अल्लामा इब्ने असीर जरिए ने उस दुर्गा

17:12बर्फी मार्फत एक्सांपल एक सहाबी थे अब वह

17:15मैं अलग अंसारी रवि बोपारा एक दफा एक जगह

17:19से गुजर रहे थे तो एक Veerana खा इनके पास

17:22सामान भी था अपनी सवारी भी मौजूद थी जो

17:26दायरा और तो सभी था अचानक वर्दियों के

17:29दरमियान में कहीं से कोई लुटेरा डाकू माया

17:31हाथ में तलवार थी और अब वह मैं अलग अंसारी

17:35से वर्मा ने लगा कि मैं तुम्हें कॉल

17:37करूंगा और यह मांग लूंगा उन्होंने का लेना

17:40है तो मान ले लो मुझे छोड़ दो कहा नहीं

17:42मैं दोनों काम करता हूं कत्ल भी करता हूं

17:44मान भी लें तो उन्होंने फरमाया मुझे चार

17:47रकात नमाज पढ़ने की तो मोह श्रवण कहां

17:50पढ़ो इन्होंने चार रकात नमाज पढ़ी अल्लाह

17:53से दुआ की कि ऐ अल्लाह तू मेरी मदद फरमा

17:55इस वीराने में कोई नहीं है जो मेरी मदद

17:58करें इसके पास हथियार मौजूद है मेरे पास

18:01हथियार नहीं दुआ कर रहे थे अचानक कोई शख्स

18:04देखा जिसके फलों का म कौए आसमानों की तरह

18:07भूलन सफेद लिबास में था उसने तलवार लिए और

18:11डाकुओं को विफल कर दिया इन्हें पूछा तुम

18:14कौन हो कहां से आए कहां में चौथे आसमान का

18:17फरिश्ताओं जब तुमने अल्लाह से ऐसे गिरा कर

18:20दूंगा कि मैंने बुलाया जमीन से दुआ की कि

18:23ऐ अल्लाह तू मुझे तौफीक दे और तू मुझे

18:25इजाजत दें इसकी मदद करो अल्लाह ताला ने

18:28मुझे इजाजत दी तो मैं तुम्हारी मदद के लिए

18:30आया मैं तो यार इस कर रहा था दो आने

18:33अल्लाह बड़ी ताकत रखी इंसान जब भी अंदर से

18:36मांगता है रब्बुल आलमीन इंसान की दुआओं को

18:39जरूर कबूल करता हजरत हसन आप की यही आदत थी

18:42जब भी कोई मुश्किल आएगी अगला से मानते

18:45इसीलिए बुजुर्गो ने फरमाया है अगर

18:47तुम्हारे जूते का चश्मा भी टूट जाए वह भी

18:50अल्लाह सलमान जूते का चश्मा एक मामूली चीज

18:53है लेकिन यह इशारा किया मुसलमान की सबसे

18:57पहली नजर अगर वह बाल जमीन पर और हमें

19:00बुलाया हम इन याद आता है सबसे आखिर में

19:02तमाम दुनिया वालों के पास चले जाते हैं

19:05सबसे मांग लेते हैं जब हर धर्म से मायूसी

19:08होती है फिर अल्लाह का दरिया जाता हलवा के

19:11मुसलमान वह है जिसके पर नजर कबूला नवीन पर

19:14वह सबसे पहले आए तो अल्लाह के दरबार में

19:17और अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से मांगे और

19:19अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त फिर दुआओं को कुबूल

19:21करता है हाफिज एक ऐसी रहमत उल्ला ने की

19:24किताब है पर्ल विधायक बनने हाय इसमें

19:27इन्होंने वहां पर लिखा मोहम्मद नाम के 4

19:30मोदी पीछे मोहम्मद बिन नस्सीर वजीर

19:34मोहम्मद भैरूसरी मोहम्मद अल मुंतजिर

19:37मोहम्मद बिलाल शैक्ख मोइन अहमद यह चारों

19:41मोदी सीन है चारों का नाम मोहम्मद था अब

19:44यह लोग एक जगह जमा हुए उस ताकि हम सब

19:47मिलकर आप सल्लल्लाहू सल्लम की हदीसों को

19:49जमा करें और आने वाली उम्मत तक हम इन

19:52हदीसों को पहुंचाएं यह लोग एक घर में जमा

19:55हो गए और हदीसे लिखना इन्होंने शुरू कर दी

19:57उस दौर में लकड़ी के परम होते थे चमड़ों

20:01पर घाटों पर लिखा जाता अच्छा तो अभी यह

20:03लिख रहे चारों मोदी सीन हदीसों को तो खाने

20:07का वक्त हुआ इनके पास खाने के लिए कुछ

20:09नहीं था सोचने लगे अगर हम लोग जरिए मार्च

20:12में लग गए और कारोबार में लगे हैं तो यह

20:15जिसे उम्र तक पहुंचेंगे नहीं यह अपने दौर

20:18के बड़े मोदी सीन से तो इन्होंने का ऐसा

20:21करते हैं एक आदमी हममें से जाए और वह कुछ

20:24कमा कर ले आए और बाकी तीन साथी हदीसे

20:27लिखते रहे दूसरे दिन दूसरा जाएगा तीसरे

20:30दिन तीसरा चौथा क्वेश्चन था तो इस तरह

20:33जरूरत भी पूरी होती रहेगी और हदीसे में हम

20:36लिखकर आने वाली उम्मत तक पहुंचा दीजिए

20:39कि इन्होंने पुरंदा जी की तो नाम निकला

20:42मोहम्मद बिन नस्सीर वजीर अस्मतुल्ला लेता

20:45यह बड़े महत्त्व इनका नाम निकला अब यह चले

20:48गए यह तीनों मोहसीन हदीस लिख रहे हैं उस

20:51मकान में मोहम्मद विनस अरे डायरेक्टेड

20:54मस्जिद दो रकात नमाज पढ़ी और अल्लाह के

20:57सामने बड़े रोए और कहां यह लव हम चाहे तो

21:01हम दुनिया में लग जाएं लेकिन यह हदीस का

21:03काम हमसे रह जाएगा उम्र तक यह दिशेने

21:06पहुंचेंगे यह दुनिया बड़ी लिप पर चीज है

21:09हम नहीं चाहते हमारी जिंदगी इसमें लग जाएं

21:12हमारी जिंदगी दिन में लगे थे अल्लाह

21:14तुम्हें से अशुभ पैदा फ्रॉम थे अल्लाह से

21:17रोक यह दुआ कर रहे हैं उस दौर के मिस्र के

21:21हुक्मरान थे अहमद बिन तूने यह उस दौर के

21:25मिस्र के बादशाह हैं इत्तेफाक से यह उस

21:28वक्त घर में सोए हुए थे और मैं इन्हें

21:31रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहिवसल्लम की

21:32जियारत आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने

21:35फरमाया अमृत बिंदु उठो और फलां जगह पर कि

21:39मोदी से उनका नाम मोहम्मद है और वह चारों

21:43मेरी हदीसों को जमा कर रहे हैं और उनके

21:45पास खाना नहीं है राधे-राधे और क्वेश्चन

21:48है यह जाऊं उनकी मदद के लिए पूछो उसी टाइम

21:52मिले बात से सहमत दिन तू उन घबराकर उसका

21:54मुंह अपने वह जरा को बुलाया काम मैंने इस

21:57तरफ देखा है तो तुम ऐसा करो मुख़्तलिफ़

22:00क़िस्म के खाने बनवाओ चुनांचे बावर्ची और

22:03फैमिली के साथ के रंगारंग शाम के खाने

22:05बनवाएं जब खाने बन गए वो जरा ने अपने

22:09हाथों में खाने की प्लेटें ली है बादशाह

22:11भी इनके साथ हैं जो जगह बताई गई थी वहीं

22:15गए तलाश करते उस जगह पर पहुंच गए

22:18जिन्होंने पूछा मोहम्मद नसीर व जी कौन है

22:21तो उन्होंने कहा वह तो गए हैं बाहिर रोजी

22:25कमाने के लिए रिश्वत के लिए हमें पता नहीं

22:27बादशाह ने अपने नौकरों कारिंदों से का जाओ

22:30उसे तलाश करो तलाश कर रहे थे दाएं-बाएं

22:33इतने में एक मस्जिद से लग गया क्या देखा

22:36मोहम्मद बिलाल सरवरी सजदे में सर रखा है

22:39मैं अल्लाह से दुआ कर रहा है उस शख्स ने

22:42उनके कंधे पर हाथ रखा फरमावे मोहम्मद उठो

22:45तुम्हारी दुआ कुबूल हो गई है और बाद

22:48शाहरुख खान ने लेकर तुम्हारे दरवाजे पर है

22:52कि मोहम्मद मीर व जी उठे और बादशाह ने

22:55इन्हें देखा बादशाह ने का मुझे रूप में

22:58मंजूर की ज्यारत हुई है मुख़्तलिफ़ क़िस्म

23:00के रंगारंग खाने इन को खिलाएं जिस जगह

23:03रहते थे वह जगह खरीद कर इनको दे दिया वह

23:06आप कर दी और कहा जब तक तुम यहां मौजूद हो

23:08तुम हदीसें लिखते रहो तुम्हारा खाना पीना

23:12तुम्हारी जरूर याद तुम्हारा खर्चा सब क सब

23:15मेरे ऊपर होगा वहां जगह खरीद कर उसे सौंप

23:18कर दी और इनके तमाम इस राजावत बादशाह

23:21निर्भर राशि तो अल्लाह इंसान की दुआ के

23:25सर्कुलर करता है अंदाजा करें अल्लाह ने

23:28बादशाह को हित में लगाया वह जरा खाने लेकर

23:31आ रहे हैं सिर्फ एक टाइम का नहीं जिंदगी

23:34भर का सामान और राशन का अलार्म बंद हो बस

23:37करा दिया जगह वक्त हो गई और बादशाह विकसित

23:40मत के लिए पदमों में आ गया इसलिए महसूस कर

23:43रहा था दुआ अल्लाह सल अल्लाह से इंसान

23:46मांगे उल आलमीन इंसान की दुआएं बड़े फूल

23:49करता जब इंसान नदामत के दो कि वह आता है

23:52गिड़गिड़ाकर दुआ करता है हम अल्लाह से

23:56मांगते नहीं है नमाज खत्म होती है फौरन

23:58उठकर भक्ते जैसे जेल में थे और दरवाजा

24:01खुला है तो भाग रहे अल्लाह के बंदे खुदा

24:04के घर में आए प्रभुलाल रवि ने तुझे तौफीक

24:07दे नमाज पढ़ने की नमाज के बाद कुछ अल्लाह

24:10से मांगो फ्राई इसके बाद अल्लाह दुआ कबूल

24:12करता है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि

24:14वसल्लम ने इरशाद फरमाया सुनाने तिर्मीजी

24:17की रिवायत है हजरत निजामुद्दीन जबलपुर

24:19नियमों और प्रावधानों से आप सल्लल्लाहु

24:22अलैहि वसल्लम से पूछा अयोध्या वापस मारो

24:25अल्लाह ताला कौन सी दुआ कुबूल करता है

24:28रसूलल्लाह सल्लल्लाहु वसल्लम ने फरमाया जो

24:30फुल इला फिर वह दूध और स्वाद दिल

24:33मुक्तिबोध फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद की दुआ

24:36और रात के आखिरी पहर की दुआ रात के आखिरी

24:40हिस्से में इंसान तरह झूम उठता है अल्लाह

24:43दुआ क़ुबूल फ़रमाता है और जब इंसान नमाज़

24:46के बाद दुआ करता है अल्लाह दुआ कुबूल करते

24:49इसलिए अल्लाह से मांगने की आदत बनानी

24:51चाहिए विशाल मांगता है अल्लाह दुआ जरूर

24:54कबूल करेगा यह दुनिया में वही चीज दे देगा

24:57या अल्लाह किसी मुसीबत को दूर कर देगा यह

25:00उस धुआं को अल्लाह कयामत के दिन के लिए

25:02जखीरा बनना पड़ेगा दिमाग में बेहद ही

25:05रहमतुल्ला आले निशाना पुलिमैन में और दलों

25:08में एक वाक्य लिखा एक मुजाहिर जिहाद के

25:12सफर के लिए निकले पिन के पास सफर में एक

25:15गंदा था जिस पर इनका सामान भी था ज्यादा

25:17भी चीज अब अपने साथियों के साथ जा रहे हैं

25:21रास्ते में अचानक ऐसा हुआ के ददा नीचे

25:24गिरा और उसमें पावर ग्रिड या

25:26रगड़ते-रगड़ते वह मर गया इस मुजाहिद ने

25:29देखा तो उसे बड़ा अफसोस हुआ था कि ने लगा

25:31भी तो मेरे साथी मुझसे चले जाएंगे यह मेरे

25:33पास तो सवारी कोई नहीं मैंने तो इरादा

25:36किया था मैं जिहाद के लिए जाऊं दो रकअत

25:38नमाज पढ़ी अल्लाह से दुआ करो अल्लाह जिस्म

25:41में रूह भी तू डालता है जिस्म से रूह भी

25:44तू निकालता जिंदगी भी तू देता है मौसमी तू

25:47देते हैं या अल्लाह तेरा हुक्म है हम

25:50मुसलमान है तेरे फैसले पर राजी है लेकिन

25:52अल्लाह में मैदान-ए-जंग तक पहुंच जाऊं तो

25:55वहां के बाद अगर यह मेरा ज्यादा और मेरी

25:57यह सवारी हल्ला हो जाए तो कोई हर्ज नहीं

25:59लेकिन यह ना मुझे हाथ से महरूम न वर्मा

26:02मेरी सवारी को जिंदा वर्मा अब यह दुआ कर

26:05रहे हैं कि क्या देखा वह गधा उठा अपना सर

26:08हिलाने लगा अपने कानों को झड़ने लगा

26:11इन्होंने सामान रखा और आगे का सफर शुरू पर

26:15अल्लाह तो हर चीज पर आते रहे मोड अल्लाह

26:18देता है जिंदगी अल्लाह देता है वहीं मां

26:21के पेट में पानी पर नक्शा बनाता है होलरी

26:24सवेरों फैला रहा में कई फैशन वह जिस तरह

26:28जाता है मां के पेट में इंसान की तस्वीर

26:30बना था दुनिया में कोई मुसव्विर ऐसा ढूंढ

26:33के लाओ जो पानी पर तस्वीर बनाएं अल्लाह

26:36नुस्खे से इंसान को पैदा करता या योग हर

26:39इंसान इंसान तुझे किस चीज ने धोखे में डाल

26:42दिया बाहर रखा Group विकल्प करीब हल देखा

26:45लाख रस हुआ सफेद झलक पियुष में प्रतिमा

26:49शाहरुख अब तेरे रब ने तुझे किस तरफ है कि

26:52कैसे खूबसूरत तेरी तस्वीर बना ए तेरे आज

26:55आपको कितना अत दल के साथ किस तरह तनाव के

26:58साथ बनाया इंसान भी कैसा नादान है 9 महीने

27:02तक जो अल्लाह पेट में बच्चे को इज्जत देता

27:06है तो क्या दुनिया में आने के बाद वन लख

27:08सफल हो जाता फिर अल्लाह को नहीं पुकार पर

27:11कभी एक दरबार कभी दूसरे के पास कभी एक आम

27:14मिल के पास खुदा से नहीं मानते यह सब ने

27:17मां के पेट में इस बच्चे को 9 महीने तक

27:20खिलाया और पिलाया और इसके लिए रास्ता आसान

27:23किया चम्मच सभी यह सारा चार और पांच फॉर्म

27:26के वजनी बच्चे को अल्लाह ने तो वो तारीक़

27:29रास्ते से दुनिया में लाया क्या वह गैरिक

27:32नहीं देगा फिर क्यों इंसान हो से ताल्लुक

27:34कम करता है बबूल जमीन के पास रिसर्च के

27:37खजाने इसलिए रिसर्च के मामले में जो

27:40द्वारा है इंसान अल्लाह से कर दिमाग में

27:42देहाती रखना तुला लेने स्वाभिमान एक वाक्य

27:45लिखा फरमाते हैं कि एक शख्स एक मिक्सचर के

27:48जार में मस्जिद में गया इसके पास 1000

27:51दिरहम थे अपने

27:53मैं इसमें एक सुतून के साथ बुधराम रख दिए

27:56और इसमें अपनी इबादत की नमाज पढ़ी इसे याद

27:59न रहा और यह वहां से चला गया एक साल का

28:02अरसा गुजर गया और उसे याद आया कि फिल्म

28:05मस्जिद में तो मैंने धरा हम रखे थे सुतून

28:07के पास इत्तेफाक से इसका उसी मस्जिद के

28:10पास से गुजर हो रहा था जाता हूं अल्लाह से

28:13दुआ करता हूं शायद मेरे वह लौट आए तो यह

28:16दोबारा उसी मस्जिद पहुंचा और इसमें अल्लाह

28:19रब्बुल आलमीन से दुआ की कि ऐ अल्लाह एक

28:22साल अप्रैल में यहां आया था और मैंने

28:24द्वारा ही वृक्ष से और मैं भूल कर चला गया

28:26पहला तो हर चीज़ पर क़ादिर ने तो मेरे

28:28द्वारा हिम को लौटाकर यह अल्लाह से दुआ कर

28:31रहा है इसलिए मैं बूढ़ी औरत इसके पीछे आकर

28:33बैठ गई इसके द्वारा भी खत्म नहीं हुई उस

28:36बूढ़ी अम्मा ने उसके कंधे पर हाथ रखा का

28:39बेटा क्या दुआ कर रहे हैं हमारे 1000

28:41दिरहम से एक साल खबर मैंने यहां रखे थे

28:44मैं भूल गया था वह मांग रहा हूं कि अल्लाह

28:46मुझे लौटा दें उस अम्मा ने पूछा वह जो जरा

28:50हम जिस थली मे थे उसका रंग के था इसलिए

28:53हथेली यह बताया हथेली को जिस चीज से बांधा

28:56गया था उस रस्सी का इसमें रंग बताया हथेली

28:59में जितने दिन थे उनकी तादाद बढ उसम बने

29:02वह हथेली सब बातें इसकी पुष्टि अम्मा ने

29:05वह हथेली इसको हवाले कर दी तांबे का एक

29:08साथ खबर यह थैली मुझे भी ली थी और मैं एक

29:10साल से तलाश में चीज है यह जिसकी है मैं

29:13उसको लौटा दूं तो अल्लाह बंद है कि दुआ

29:15कैसे फूल करता है एक साल बाद भी अल्लाह ने

29:19उसकी रकम उसको वापिस लौटा

29:21जब मान हलाल का हो और इंसान मुकेश हो

29:25अल्लाह से ताल्लुक मजबूत हो अल्लाह उसके

29:28मालिक को जाया नहीं करता अल्लाह उसके

29:31मालिक को जाया नहीं करता जब कहीं मार

29:33गिराया हो देखना कई माल हराम का तो नहीं

29:36नंबर दो कहीं जिंदगी मैं अखिलेश की कमी तो

29:40नहीं है नंबर 3 दही जकात तो शायद तूने

29:43अदानी कि और नंबर चार किसी के माल पर कहीं

29:46कब्जा तो नहीं किया था अगर यह बातें होंगी

29:49तो माल नसीब नहीं होगा मान जब भी हलाल का

29:52कमाया हुआ हो स्पेशल कहां पैदा किया हो

29:54अल्लाह हर जगह माल की हिफाजत फरमा रे

29:58मुस्लिम भी हो अंग्रेज भी हो अगर वह विमान

30:01का हक दे रहा है अल्लाह और मुस्लिम के माल

30:04की हिफाजत करता है कि हज यात्रियों को

30:06अध्यक्ष मौलाना सक्रिय साथ रहमतुल्ला आले

30:08इनके किताबे आप बीटी अपनी जिंदगी के हालात

30:12इन्होंने लिखे इसी मैंने एक वाक्य लिखा

30:14सहारनपुर शहर का तहां व शहर के अंदर बहुत

30:18से अंग्रेजों के मकानात और कोठियां हुई थी

30:21यह लोग कभी कभी साल में 2 महीने के लिए

30:24वहां आते थे बाकी यह लोग अपने इलाकों में

30:26रहते थे तो उन्होंने अपने मकानात में

30:29मुसलमान चौकीदार रखे हुए होते थे एक दफा

30:32ऐसा हुआ कि वहां करीब में आग लग गई और आप

30:36लगते-लगते मकान आयोजन शुरू हो गए जलते रहे

30:39करीब था के दरमियान में एक अंग्रेज का

30:41मकान था वह भी जल जाए तो जो चौकीदार था

30:44मुसलमान वह दौड़ता हुआ अपने अंग्रेज मालिक

30:47के पास पहुंचा का हजरत मकानों को आग लग गई

30:50है और आप बड़ी तेजी से बढ़ रही है आपका

30:52मकान जल जाएगा जल्दी उठे कोई इंतजाम कीजिए

30:56मकान में साजों सामान मिल जाएगा उस

30:59अंग्रेज ने तवज्जो न फिर उसने उनको हिलाया

31:01हजरत आप को कह रहा हूं आग लग गई है आपके

31:04माल का नुकसान होगा क्वेश्चन तवज्जो ना कि

31:06फिर उसने दोबारा कंधे पर हाथ रखा चौकीदार

31:10ने का हजरत आप बहुत ज्यादा है आपका सामान

31:13मिल जाएगा उठिए उसने कहा नहीं मेरे सामान

31:16को कुछ नहीं होगा मुसलमान चौकीदार ने कहा

31:19क्यों नहीं होगा था मैंने एक मुसलमान

31:21हीलिंग से सुना था जो आदमी अपने माल की

31:24ज़कात निकालता है मान का सही हिसाब करके

31:27अल्लाह के नाम पर देता है अल्लाह उसके माल

31:30की हिफाजत करता काम मैंने जितना हिस्सा

31:33बनता था मैंने जितना निकाल दिया है इसलिए

31:36मेरा मानना या नहीं होगा खुदा तुम्हारा भी

31:38है खुदा में रवि है वह मुसलमान के तने चला

31:42गया मैं जब वहां पहुंचा देखा वाकई पेट के

31:45सारे मां खाना जल गए और उस अंग्रेज गैर

31:47मुस्लिम का मकान ध्यान में मासूस है

31:51की जगह इंसान माल कहां पैदा करता है

31:53अल्लाह माल की हिफाजत फरमा देता है इसलिए

31:56मैं हर उस कर रहा था दुआ सिर बुला ले मींस

31:59हो इंसान अल्लाह से जबकि बढ़ाकर मांगता है

32:02अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त उसके दुआओं को

32:03कुबूल फरमाते हैं और अल्लाह फिर ऐसे अवसर

32:06पैदा वर्मा देता है इंसानी यहां पर भी

32:09हैरान और दंग रह जाती हैं अल्लाह सब कैसे

32:12पैदा करता है मैं माजी करीब एक लाख या

32:14उसको

32:15अरबी के किताब है मां आंसू अतुल यस उसमें

32:19भी है और उर्दू की किताब है दोनों के

32:21कुबूलियत के स्वर लहरियां इसमें इन्होंने

32:23वाक्य लिखा सऊदी अरब के एक मशहूर डॉक्टर

32:26है डॉक्टर अप मत यह हड्डियों के बड़े

32:29स्पेशलिस्ट डॉक्टर थे और अपने मुल्क में

32:32बड़े नाम वर्ष से कोई भी ऑपरेशन करना होता

32:34तो लोग इन के पास बुजुर्ग करते थे एक दफा

32:37ऐसा हुआ कि ने एक इलाके में जाना था और

32:40वहां एक सेमिनार में इन्होंने शिरकत करनी

32:42थी और मखाना पढ़ना था और इन्हें एग्जाम

32:45शुड वहां मिलने की के लोगों ने मुल्क भर

32:47में बड़ी खिदमत की है अब यह कहते हुए दो

32:50जहाज मोड झाल अब तकरीबन पूरा घंटे का सफर

32:54हुआ था अचानक जहाज के अंदर ऐलान हुआ के

32:56जहाज में कोई फनी खराबी आ गई है हम खरीद

32:59के एयरपोर्ट पर उतर रहे हैं फिर दूसरा

33:02मुद्दा बादल जहाज हुआ तो उसमें जाएंगे अब

33:04यह जहाज़ उतर गया अभी गए थे मैं एयरपोर्ट

33:07पर हूं सारे मुसाफिर भी है हम वहां बैठे

33:10हैं अलार्म यह हुआ कि वह बादल जहाज को कोई

33:12नहीं शायद 14 से 15 घंटे लग जाएं उसके बाद

33:15कोई जहाज आएगा इसलिए आप लोग तसल्ली में

33:18डॉक्टर अहमद कहते हैं बड़ा परेशान हुआ 14

33:22घंटे लगेंगे मुझे तो अगले दिन फ्लावर की

33:24सुबह वहां पहुंचना है म काला पड़ जाता है

33:26इन्होंने वहां जाकर कौन से बात की

33:28उन्होंने का हमारे पास कोई मतलब बदल

33:30रास्ता नहीं अलबत्ता तुमने जिस जगह जाना

33:33है वहां का सफर यहां से तकरीबन चार से

33:36साढ़े चार घंटे का इतना लंबा सफ़र नहीं

33:38अगर तुम यहां से गाड़ी में चले जाओ तो तुम

33:40पहुंच जाओगे तुम जहां उसका इंतजार में करो

33:43इन को यह बात समझ आए कि तुम मैंने एक

33:46गाड़ी बुक करवाई और बॉडी में हम बैठे और

33:48सफर शुरू हो का चलते रहे 1 घंटे का सफ़

33:51तथा अचानक तेज बारिश शुरू हो गई आंधी आ गई

33:55बहुत तेज हवाएं चलने लग गई बिल्कुल अंधेरा

33:57छा गया ड्राइवर ने कहा थोड़ी देर कहीं ठहर

34:00जाते हैं रात का अंधेरा भी है जैसे यह अ

34:02फिर सफर करेंगे वरना नुकसान हो जाएगा

34:05डॉक्टर अहमद कहते हैं मैंने बेकार ठीक है

34:07कार्स में हम उसी देहात था हम उसके अंदर

34:11गए को इधर तलाश करने लगे झोपड़ी नजर आए जो

34:14परिव्यय आवाज भी काम ने ठहरना है सुबह हम

34:17आगे जाएंगे अंदर से बूढ़ी अम्मा बाहिर हुए

34:19पूछा बेटा कैसे आना हुआ क्या है इस तरह

34:23जहाज खराब हो गया हम गाड़ी में बैठे थे

34:25लेकिन आगे का सफर मुश्किल है हम ठहरेंगे

34:28फिर आगे चले जाएंगे उस हमने इनको अपनी

34:30झोंपड़ी में बुला दिया जो घर में पका हुआ

34:33था आदत के लोग मेहमान नवाजी इन्हें खाना

34:35खिलाया इस डॉक्टर ने पूछा मेरे मोबाइल में

34:38चार्जिंग नहीं है या आपके पास चार्जिंग हो

34:41गई उसने का यह हमारे यहां बिजली कोई नहीं

34:43तो वह कहती जब उसमें खाना खिलाया तो छोड़

34:46झूला था उसमें बच्चा रोने लग गया बड़ा

34:49दुबला-पतला कमज़ोर सब बच्चा था हो रहा था

34:52इस संबंध में उठाए हुए और यह कहने लगी के

34:54अल्लाह तूने मेरी सब दुआएं कुबूल की एक

34:57दवा है अल्लाह तू मेरे इस बच्चे को सेहत

35:00अता फरमाए दे तू मेरी यह दुआ भी जरूर कबूल

35:02करेगा उस डॉक्टर ने पूछा तेरी कौन सी

35:05दुकान है उस समय एक दुआ यह है यह मेरा जो

35:08बच्चा है यह मेरा पोता है मेरे बेटे का

35:11मेरी बहू का इंतकाल हो गया और उनकी यह एक

35:13निशानी है और यह हड्डियों का बीमार है

35:16हड्डियों का मरीज है मैंने अपने तौर पर

35:19लांच किया कोई गिफ्ट नहीं हुआ मुझे किसी

35:21ने का डॉक्टर अप मदद सउदिया का सबसे बड़ा

35:24स्पेशल झाड़ियों का डॉक्टर है अगर वह

35:26ऑपरेशन करें इसका इलाज करें उम्मीद है

35:29अल्लाह इसको सेहत दे देगा तो इस नंबर ने

35:31कहा मैं अल्लाह से दुआ करती हूं कि अल्लाह

35:33तूने मेरी हर दुआ कुबूल की यह जिंदगी कि

35:36आप श्री दुआ है तो डॉक्टर अहमद को मेरे

35:38पास लिया मैं बच्चा उसके हवाले करूं

35:40ऑपरेशन करें ताकि अल्लाह इसको शहद और वह

35:44अम्मा यह कह रही थी डॉक्टर साहब कहते हैं

35:46मेरी आंखों से आंसू बहने लगे मैंने काम

35:48मैं डॉक्टर अहमद हूं बच्चा मुझे दो मैं

35:51डिप्रेशन करूंगा देखिए अल्लाह ने उस बाप

35:54कैसे बनाएं जहां खराब हुआ उसे जहां से

35:57उतरना पड़ा गाड़ी का सफर शुरू किया रास्ते

36:01में बारिश लग गई तेज हो तो उन हवाएं चलने

36:03लग गई और वह खुद झोंपड़ी में अम्मा के पास

36:06आया और बच्चे को लिया और उसने इलाज किया

36:08ऑपरेशन किया अल्लाह ने बच्चे को सेहत अता

36:11फरमा दी तो जब अल्लाह दुआ कबूल करता है तो

36:14यह अफवाह पैदा करता है

36:16कि मुसलमान मांगे तो सही है न अल्लाह से

36:20जब भी किसी ने मांगा है अल्ला ने जरूर दुआ

36:22कुबूल कीजिए हमारे मांगने में कमी होती है

36:24रब्बुल आलमीन की तरफ से हाथों में कोई कमी

36:27नहीं होती इसी किताब में इन्होंने यहां पर

36:29लिखा एक खातून का अपना जाती मकान नहीं था

36:32मुसलमान खातून त्योहार अब की चार उसके

36:35बच्चे थे तो जब भी इस पारी का टाइम आता तो

36:38यह मां दुआ करती अपने मासूम बच्चों को

36:40कहती तुम भी हां तो उठाओ अल्लाह ताला से

36:42दुआ करो अल्लाह ताला हमें महल दें और उस

36:45महल के सामने नहर भी हो नहर और अल्लाह

36:48हमें खूबसूरत महान और घर आता करें तो यह

36:51माल भिजवा कर दी छोटे मासूम बच्चे भी सारी

36:53के वक्त धुआं करते इसका जो शहर था वह गरीब

36:56तन दस्ता तो वह हंसने लग जाता का अल्लाह

36:59झोपड़ी दे दे बड़ी बात तो अल्लाह से महल

37:02मांगते हैं और महल भी वह जिसके आगे नहर

37:04यहां तो पूरे शहर में नहर ही कोई नहीं

37:07पूरे इलाके में नहर कोई नहीं यह मां

37:09अल्लाह सिर छुपाने की जगह ढेर उसने रानी

37:12अल्लाह हमें जरूर हटा करेगा चंद देने उतरे

37:15थे इस पर शहर के नाम छोड़कर जाने मस्जिद

37:18से आ रहा था वही इलाका करीब में रियाद में

37:21एक बड़ा ही मालदार इंसान था और उसके यह से

37:24मुलाकात हुई पहचानता नहीं था इसको उसने

37:26कहा मेरा एक माहौल है जो मैंने बड़ा

37:28खूबसूरत बनाया था अब मैं दूसरी जगह शिफ्ट

37:31हो रहा हूं एक हिस्से में मेरा बाधित रहता

37:33है बाकी बहुत बड़ी जगह है वह मैं अ दिया

37:36देना चाहता हूं मैंने अल्लाह से दुआ की थी

37:38जिससे पहली मेरी मुलाकात होगी मैं उसको यह

37:41दूंगा मकान के कागजात उसके पास से का यह

37:44दिया है तुम्हारे लिए ले जाओ उसे यकीन

37:47नहीं आ रहा था इतना बड़ा मालदार इंसान और

37:50ऐसा खूबसूरत घर वह दे रहा है उसने गाने

37:52मैं तुम्हें नाव ले लो वह लेकर घर आया तो

37:55बड़ा खुश अपनी घरवाली से कहा तेरी दुआ

37:57कुबूल हो गई अल्लाह या अल्लाह ने हमें

37:59बड़ा खूबसूरत घर आता कर दिया लेकिन तूने

38:02तो दुआओं में यह भी कहा था कि उस घर के

38:04सामने जहर भी हो तो जहर तो नहीं है उसने

38:07कहा यह भी होगी किसी से पूछते हैं यह कहा

38:10लिंक के पास गए तो मेरी बीवी ने दुआ की

38:13ढल्ला ने महल तो दे दिया लेकिन उसमें नहर

38:15भी मांगी थी सामने कि उसने तो तुम्हारे घर

38:18के सामने क्या है का हमारे महल के सामने

38:20बड़ी खूबसूरत मस्जिद है उससे ज्यादा

38:23खूबसूरत मस्जिद पूरे इलाके में कोई नहीं

38:25उसने कहा यही तो नेहरा कह दी इसमें आता है

38:28रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने

38:29फरमाया कि अगर तुममें से किसी के घर के

38:31सामने लहरों और वह पांच मर्तबा उस पर रोशन

38:34करें तो क्या उसके जिस्म पर मेल कुचल बाकी

38:37रहेगी तो साहब ने फरमाया कि नहीं बैठी

38:39रहेगी फरमाया यह मस्जिद है नहर जिसमें

38:42जाने से इंसान के गुना बढ़ जाते हैं ने

38:45किया मिलती हैं तो अल्लाह एक ऐसी दुआ

38:47कुबूल की महल भी फतेह किया और जामे मस्जिद

38:50के करीब था कि तो दवाई तो अल्लाह ही भूल

38:54करता है इसलिए इंसान पर जब कोई परेशानी है

38:56अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाए और मांगे और

38:59गुलाल अमीर इंसान के उठे हुए हाथों को कभी

39:02खाली नहीं लौटता था अल्लाह हम सब को मिल

39:04कर दो

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