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Madain ki Fatah ka Hairan Kun Waqia #moralstory #urdu

Sabar Ka Sila · 500 words · 3 min read

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0:00मदाइयन का शहर फतह करने के इरादे से

0:02[संगीत] जब मुसलमानों का लश्कर तूफान की

0:04तरह लहरें मारता हुआ दरिया-ए-दजला के

0:07किनारे पर पहुंचा तो दरिया का बहाव और

0:09हैबत देखकर लश्कर वहीं का वहीं किनारे पर

0:12ही रुक गया। दरिया के उस पार उस वक्त

0:15दुनिया की सबसे बड़ी [संगीत] ताकत यानी

0:17ईरानी सल्तनत का दारुल हुकूमत मदाइन था।

0:21ईरानी बादशाह यशदगर्द जानता था कि

0:23मुसलमानों को आमने-सामने जंग में हराना

0:26नामुमकिन है। इसलिए उसने मदाइन तक पहुंचने

0:29वाले तमाम पुल तुड़वा दिए और सारी

0:32कश्तियां अपने किनारे पर इकट्ठी करवा ली

0:35थी। दरिया में शदीद मौज [संगीत] थी और

0:37पानी किनारों से बाहर आ रहा था। यस्तगर्द

0:40और उसके जर्नल अपने महफूज़ महलों में

0:42पुरसुकून बैठे [संगीत] सोच रहे थे कि अब

0:44मुसलमान इस खौफनाक दरिया को पार करके कभी

0:47मदाइन तक नहीं पहुंच सकेंगे। लेकिन वह

0:49मुसलमानों के सिपा सलार हजरत साद बिन अबी

0:53[संगीत] वकास के इरादों से ना वाकिफ थे।

0:56हजरत साद बिन अबी वकास ने सूरत ए हाल का

0:59जायजा लिया और अपने करीबी [संगीत] साथी

1:02हजरत सलमान फारसी से मशवरा किया। उसके बाद

1:06उन्होंने पूरी फौज को जमा किया और एक ऐसा

1:08हुक्म दिया जिसे सुनकर दुनिया के

1:10बड़े-बड़े जंगी माहरीन हैरान रह जाते हैं।

1:13उन्होंने फरमाया हमारा दुश्मन दरिया के

1:16पार है और हमारे पास कश्तियां [संगीत]

1:18नहीं है। हम इसी तूफानी दरिया में अपने

1:20घोड़े उतारेंगे। यह कोई आम फैसला नहीं था।

1:23लेकिन मुसलमानों का अपने ज़ब सालार और

1:25अल्लाह पर ऐसा [संगीत] यकीन था कि किसी एक

1:28ने भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। सबसे पहले

1:31हजरत साद बिन अबी वक्कास ने बिस्मिल्लाह

1:34पढ़ी और अपना घोड़ा उस ऐ हैबतनाक दरिया

1:37में डाल [संगीत] दिया। उनके पीछे पूरी

1:39मुस्लिम फौज ने भी अपने घोड़े पानी में

1:41उतार दिए। तारीख के चश्मदीद गवाह बताते

1:44हैं [संगीत] कि दरिया का पानी इतना गहरा

1:46और तेज था कि घोड़ों के पांव जमीन पर नहीं

1:48लग रहे थे। [संगीत] लेकिन वह तैरते हुए

1:50आगे बढ़ रहे थे। सिपाही पानी की लहरों के

1:53बीचों-बीच चलते हुए यूं आपस में बातें कर

1:55रहे थे जैसे [संगीत] वो किसी पुरसुकून

1:57सड़क पर चल रहे हो। अल्लाह की कदरत से उस

2:01पूरी मुहिम में एक भी मुसलमान सिपाही नहीं

2:04डूबा। [संगीत] जब दरिया के पार खड़े ईरानी

2:06पहरेदारों और जर्नलों ने देखा कि मुसलमान

2:08इंसानों की तरह नहीं बल्कि पानी की लहरों

2:11को चीरते हुए किसी गैर मामूली ताकत की

2:12[संगीत] तरह सीधे उनकी तरफ आ रहे हैं तो

2:15उनके होश उड़ गए और वह खौफ से चीखने लग

2:17गए। दीवान आमद दीवान आमदंद जिन्न आ गए

2:21हैं। जिन्न आ गए हैं। ईरानी फौज पर ऐसा

2:25खौफ तारी हुआ कि बादशाह यशदगर्द अपना महल

2:28और दारुल हुकूमत छोड़कर बगैर लड़े ही भाग

2:32निकला। और यूं हजरत साद बिन अबी [संगीत]

2:34वखास की उस बेमिसाल बहादुरी और जंगी

2:37कारनामे के सबब मदाइन जैसा नाकाबिल तस्कीर

2:40शहर बगैर किसी खून खराबे के फतह हो गया।

2:43नतीजा जब इंसान का यकीन कामिल हो और वह

2:47किसी सच्चे मकसद के लिए कदम उठाए तो बड़ी

2:49से बड़ी रुकावटें भी उसका रास्ता नहीं रोक

2:52सकती।

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