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0:00मदाइयन का शहर फतह करने के इरादे से
0:02[संगीत] जब मुसलमानों का लश्कर तूफान की
0:04तरह लहरें मारता हुआ दरिया-ए-दजला के
0:07किनारे पर पहुंचा तो दरिया का बहाव और
0:09हैबत देखकर लश्कर वहीं का वहीं किनारे पर
0:12ही रुक गया। दरिया के उस पार उस वक्त
0:15दुनिया की सबसे बड़ी [संगीत] ताकत यानी
0:17ईरानी सल्तनत का दारुल हुकूमत मदाइन था।
0:21ईरानी बादशाह यशदगर्द जानता था कि
0:23मुसलमानों को आमने-सामने जंग में हराना
0:26नामुमकिन है। इसलिए उसने मदाइन तक पहुंचने
0:29वाले तमाम पुल तुड़वा दिए और सारी
0:32कश्तियां अपने किनारे पर इकट्ठी करवा ली
0:35थी। दरिया में शदीद मौज [संगीत] थी और
0:37पानी किनारों से बाहर आ रहा था। यस्तगर्द
0:40और उसके जर्नल अपने महफूज़ महलों में
0:42पुरसुकून बैठे [संगीत] सोच रहे थे कि अब
0:44मुसलमान इस खौफनाक दरिया को पार करके कभी
0:47मदाइन तक नहीं पहुंच सकेंगे। लेकिन वह
0:49मुसलमानों के सिपा सलार हजरत साद बिन अबी
0:53[संगीत] वकास के इरादों से ना वाकिफ थे।
0:56हजरत साद बिन अबी वकास ने सूरत ए हाल का
0:59जायजा लिया और अपने करीबी [संगीत] साथी
1:02हजरत सलमान फारसी से मशवरा किया। उसके बाद
1:06उन्होंने पूरी फौज को जमा किया और एक ऐसा
1:08हुक्म दिया जिसे सुनकर दुनिया के
1:10बड़े-बड़े जंगी माहरीन हैरान रह जाते हैं।
1:13उन्होंने फरमाया हमारा दुश्मन दरिया के
1:16पार है और हमारे पास कश्तियां [संगीत]
1:18नहीं है। हम इसी तूफानी दरिया में अपने
1:20घोड़े उतारेंगे। यह कोई आम फैसला नहीं था।
1:23लेकिन मुसलमानों का अपने ज़ब सालार और
1:25अल्लाह पर ऐसा [संगीत] यकीन था कि किसी एक
1:28ने भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। सबसे पहले
1:31हजरत साद बिन अबी वक्कास ने बिस्मिल्लाह
1:34पढ़ी और अपना घोड़ा उस ऐ हैबतनाक दरिया
1:37में डाल [संगीत] दिया। उनके पीछे पूरी
1:39मुस्लिम फौज ने भी अपने घोड़े पानी में
1:41उतार दिए। तारीख के चश्मदीद गवाह बताते
1:44हैं [संगीत] कि दरिया का पानी इतना गहरा
1:46और तेज था कि घोड़ों के पांव जमीन पर नहीं
1:48लग रहे थे। [संगीत] लेकिन वह तैरते हुए
1:50आगे बढ़ रहे थे। सिपाही पानी की लहरों के
1:53बीचों-बीच चलते हुए यूं आपस में बातें कर
1:55रहे थे जैसे [संगीत] वो किसी पुरसुकून
1:57सड़क पर चल रहे हो। अल्लाह की कदरत से उस
2:01पूरी मुहिम में एक भी मुसलमान सिपाही नहीं
2:04डूबा। [संगीत] जब दरिया के पार खड़े ईरानी
2:06पहरेदारों और जर्नलों ने देखा कि मुसलमान
2:08इंसानों की तरह नहीं बल्कि पानी की लहरों
2:11को चीरते हुए किसी गैर मामूली ताकत की
2:12[संगीत] तरह सीधे उनकी तरफ आ रहे हैं तो
2:15उनके होश उड़ गए और वह खौफ से चीखने लग
2:17गए। दीवान आमद दीवान आमदंद जिन्न आ गए
2:21हैं। जिन्न आ गए हैं। ईरानी फौज पर ऐसा
2:25खौफ तारी हुआ कि बादशाह यशदगर्द अपना महल
2:28और दारुल हुकूमत छोड़कर बगैर लड़े ही भाग
2:32निकला। और यूं हजरत साद बिन अबी [संगीत]
2:34वखास की उस बेमिसाल बहादुरी और जंगी
2:37कारनामे के सबब मदाइन जैसा नाकाबिल तस्कीर
2:40शहर बगैर किसी खून खराबे के फतह हो गया।
2:43नतीजा जब इंसान का यकीन कामिल हो और वह
2:47किसी सच्चे मकसद के लिए कदम उठाए तो बड़ी
2:49से बड़ी रुकावटें भी उसका रास्ता नहीं रोक
2:52सकती।