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0:18ए तुम रुको जरा
0:19जी इधर कैसे आ गए?
0:22खाना खाने आया हूं।
0:23खाना?
0:24जी। यह होटल है। सड़क किनारे का ढाबा
0:27नहीं। मुझे मालूम है। फिर यहां क्यों खड़े
0:31हो? क्योंकि मुझे भूख लगी है। पैसे हैं।
0:35हैं?
0:39कितने?
0:41जितने एक खाना खाने के लिए चाहिए। जेब
0:44दिखाओ। क्या?
0:48मैंने कहा जेब दिखाओ।
0:51आप हर ग्राहक की जेब चेक करते हैं। हर
0:53ग्राहक की नहीं तो मेरी क्यों?
0:56क्योंकि तुम्हें देखकर ग्राहक नहीं लग रहे
0:58हैं। और ग्राहक दिखता कैसा है? अच्छे
1:00कपड़े, अच्छे जूते, ढंग की घड़ी कुछ तो
1:03होना चाहिए। अगर यह सब ना हो तो? फिर होटल
1:07में नहीं आना चाहिए। समझ गया? अब निकलो।
1:12लेकिन मैंने अभी खाना ऑर्डर भी नहीं किया।
1:15तुम्हें खाना नहीं मिलेगा।
1:18क्यों? क्योंकि मुझे नहीं लगता तुम बिल
1:20चुका पाओगे।
1:22अगर मैं बिल चुका दूं तो तब भी। क्यों?
1:26क्योंकि मुझे तुम्हारा चेहरा पसंद नहीं
1:28आया। चेहरा भी देखकर ग्राहक चुने जाते
1:31हैं। यहां मेरे नियम चलते हैं। अच्छा। अब
1:35क्या सोच रहे हो? सोच रहा हूं इंसान को
1:37खाना देने से पहले उसकी औकात पूछना कब से
1:40जरूरी हो गया है। ज्यादा ज्ञान मत दो। मैं
1:43बस पूछ [संगीत] रहा हूं।
1:45रवि इन्हें बाहर छोड़ कर आओ।
1:48लेकिन सर लेकिन क्या? शायद ये सच में
1:51ग्राहक हो।
1:51मैंने कहा ना बाहर छोड़ कर आओ।
1:54जी सर। रहने दो बेटा। जी मैं खुद चला
1:58जाऊंगा। यही अच्छा रहेगा। लेकिन जाने से
2:02पहले एक बात पूछूं? अब क्या? इस होटल का
2:05मालिक कौन है? तुम्हें उससे क्या लेना
2:08देना? बस ऐसे ही नाम जानकर क्या करोगे?
2:14शायद कल उससे मिलूं। पहले अपने कपड़े देखो
2:17फिर मालिक से मिलने का सपना देखना। ठीक
2:20है। और हां
2:23जी दोबारा यहां मत दिखना।
2:26कोशिश करूंगा।
2:29सर
2:30क्या है?
2:32आपने उन्हें खाना क्यों नहीं दिया?
2:35तुम मुझे सिखाओगी?
2:36नहीं सर।
2:37तो अपने काम से काम रखो।
2:39लेकिन उन्होंने पैसे देने की बात कही थी।
2:42पूजा
2:43जी सर।
2:44तुम वेट्रेस हो। ग्राहक चुनना तुम्हारा
2:47काम नहीं है।
2:47जी।
2:48और आज से उस आदमी के बारे में कोई बात
2:50नहीं करेगा।
2:51जी सर।
2:51लेकिन विक्रम साहब अब आप भी शुरू मत हो
2:55जाइए। मैं बस इतना कह रहा था कि भूखे आदमी
2:58को खाना देने से होटल छोटा नहीं होता। और
3:00होटल चलाना आपको आता है? 25 साल से चला
3:04रहा हूं। बावर्ची थे मैनेजर नहीं। सही कहा
3:07आपने। तो फिर वही काम कीजिए।
3:09जी
3:10गोपाल काका रहने दीजिए।
3:12नहीं बेटी कभी-कभी चुप रहना भी गलती होती
3:15है।
3:26मां मैं घर आ गया।
3:27इतनी देर क्यों हुई?
3:30होटल गया था।
3:32फिर
3:32भूखा वापस आया।
3:34क्या?
3:34कुछ नहीं मां।
3:35समर तुमने फिर वही पुराने कपड़े पहनकर
3:38होटल का निरीक्षण किया?
3:40हां।
3:42क्या पता चला?
3:43होटल बहुत खूबसूरत है।
3:45और लोग
3:48इमारत अच्छी है, लेकिन कुछ लोगों के दिल
3:50छोटे हो गए हैं।
3:51किसने कुछ कहा?
3:53मैनेजर ने।
3:54विक्रम ने?
3:56हां।
3:57उसने तुम्हें पहचान लिया?
3:59नहीं।
4:00अच्छा ही हुआ।
4:02मां।
4:04हां।
4:04मुझे लगता है अब सिर्फ मैनेजर की जांच
4:06काफी नहीं है।
4:08क्यों?
4:08क्योंकि समस्या ऊपर से नीचे तक है।
4:10[संगीत]
4:11तुम्हें ऐसा क्यों लगा?
4:12एक वेटर ने मेरी तरफ इंसान की तरह देखा।
4:15बाकी सब ने कपड़ों की तरह।
4:17उस वेटर का नाम?
4:18रवि। [संगीत]
4:20उसे याद रखना।
4:21क्यों?
4:22क्योंकि मुश्किल वक्त में किसी ने तुम्हें
4:24इंसान समझा है तो उसे कभी मत भूलना।
4:28[संगीत]
4:33अगले हफ्ते होटल का ऑडिट है।
4:36कौन आ रहा है?
4:37रीजनल डायरेक्टर अरुण सर।
4:39बस
4:41शायद मालिक की तरफ से कोई प्रतिनिधि भी
4:43आएगा।
4:44मालिक खुद तो नहीं आएगा।
4:46पता नहीं
4:47आने दो।
4:50सर पिछले महीने की कुछ शिकायतें अभी भी
4:53खुली हैं।
4:54कौन [संगीत] सी? स्टाफ के साथ गलत
4:56व्यवहार, टिप का हिसाब, गरीब ग्राहकों को
4:58सीट ना दे।
4:58सब बंद करो।
5:00कैसे?
5:01जिस ग्राहक ने शिकायत की है, उसे फोन करो।
5:04और
5:05कहो कि शिकायत वापस लें।
5:07अगर उसने मना कर दिया
5:10तो उसे समझाओ।
5:12और अगर फिर भी नहीं माना।
5:13नौकरी की जरूरत किसे है? मुझे या उसे?
5:16समझ गई। सर मेरी सैलरी में से फिर पैसे
5:19कटे हैं।
5:20हां।
5:21लेकिन मैंने कोई गलती नहीं की। देर से आई
5:23थी?
5:24सिर्फ 10 मिनट।
5:26होटल में 10 मिनट भी बहुत होते हैं।
5:28लेकिन उस दिन मेरी मां अस्पताल में थी।
5:30मुझे तुम्हारी निजी जिंदगी से मतलब नहीं।
5:33सर।
5:34अगली बार समय पर आना।
5:36जी।
5:39पूजा, तुम ठीक हो?
5:40हां।
5:41झूठ मत बोलो।
5:42सैलरी कट गई है। क्या करूं?
5:47मैं कुछ पैसे दे दूंगा।
5:49नहीं।
5:50क्यों? तुम्हारी खुद की हालत अच्छी नहीं
5:52है।
5:53लेकिन तुम रो रही हो?
5:55रो नहीं रही।
5:57आंखों में पानी है।
5:59बस थक गई हूं।
6:00बेटी एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हें किसी के
6:04सामने हाथ नहीं जोड़ना पड़ेगा।
6:06काका
6:07वो दिन आएगा?
6:08जरूर आएगा।
6:17विक्रम नमस्ते सर। तैयारी कैसी है? सब
6:20शानदार हैं। स्टाफ पूरी तरह तैयार।
6:24शिकायतें मामूली बातें थी। कितनी? कुछ ही।
6:28और यह रिकॉर्ड
6:30सर पिछले 6 महीने में 12 कर्मचारियों ने
6:32तुम्हारे खिलाफ शिकायत की है।
6:34वो लोग कामचोर हैं। 12ों?
6:37जी।
6:38और तीन ग्राहकों ने लिखा कि उन्हें कपड़ों
6:40की वजह से बैठने नहीं दिया गया।
6:41सर होटल की अपनी प्रतिष्ठा होती है।
6:44प्रतिष्ठा?
6:44जी। प्रतिष्ठा कपड़ों से आती है या सेवा
6:47से? दोनों से गलत जवाब।
6:50सर मालिक अगले दो दिनों में यहां आएगा।
6:54जी। और इस बार वो तुम्हें बताए बिना आएगा।
6:58[संगीत] मतलब मतलब तुम नहीं जानोगे कि वो
7:01कौन है।
7:03पूजा।
7:04हां।
7:05बाहर वही आदमी आया है।
7:07कौन?
7:08वही पुराने कपड़ों वाला।
7:10समर?
7:12हां।
7:13उसे अंदर आने दो। लेकिन सर ने मना किया
7:16है।
7:16आज मैं बात करूंगी।
7:19पूजा।
7:20जी सर।
7:21मैंने कहा था उसे अंदर मत आने देना।
7:23सर वो खाना खाने आया है।
7:26फिर बाहर से पैक करवा दो।
7:28क्यों?
7:29क्योंकि वो यहां बैठने लायक नहीं है। कौन
7:32तय करता है कौन बैठने लायक है। तुम फिर आ
7:35गए? हां। मैंने कहा था ना दोबारा मत आना।
7:40मुझे भी लगा था। फिर आज एक सवाल का जवाब
7:43लेने आया हूं। क्या अगर मैं इस होटल का
7:46मालिक होता तो तुम [संगीत] हां तुम मालिक
7:51मान लो तो मैं इस्तीफा दे देता क्यों?
7:54क्योंकि ऐसे मालिक के नीचे काम करना शर्म
7:56की बात होती।
7:57अच्छा
7:59अब रास्ता छोड़ो। ठीक है।
8:02सर रहने दीजिए।
8:04पूजा तुम चुप रहो। नहीं पूजा आज बोलने दो।
8:07तुम दोनों मिलकर मुझे सिखाओगे? नहीं। फिर
8:11पूजा तुम बोलो। क्या मैं सिर्फ देख रहा
8:15हूं कि होटल किसका है और असली मालिक कौन
8:18है। नमस्ते। नमस्ते सर। मालिक आ चुके हैं।
8:23क्या हां कहां है? यहीं [संगीत] कौन जिसे
8:28तुम दो बार होटल से बाहर निकाल चुके हो?
8:31[संगीत]
8:32नहीं। हां। वो आदमी उसका नाम समर अग्रवाल
8:36है।
8:38लेकिन यही होटल नहीं इस पूरे होटल समूह का
8:41मालिक। नहीं वो तो गरीब दिखता है।
8:45जी
8:46यही तुम्हारी सबसे बड़ी समस्या है।
8:49सर मुझे सच में नहीं पता था। मालिक होना
8:52जरूरी नहीं था। मतलब इंसान होना जरूरी था।
8:57विक्रम जी सर। आज पहली बार मेरी तरफ ठीक
9:01से देख रहे हो। सर मुझे माफ कर दीजिए। किस
9:04बात के लिए? मैंने आपको पहचान नहीं पाया।
9:08यही तो बात है सर अगर मैं मालिक नहीं होता
9:12तो मैं जवाब दो मैं गलत था सिर्फ मेरे साथ
9:18नहीं पूजा के साथ हां रवि के साथ हां उन
9:25ग्राहकों के साथ जिन्हें तुमने कपड़ों के
9:27कारण लौटाया हां तो फिर मेरी पहचान सामने
9:30आने से क्या बदल गया सब कुछ नहीं सर कुछ
9:35भी नहीं बदला मैं समझा नहीं तुम्हारा
9:38व्यवहार वही था। सिर्फ तुम्हारा डर बदल
9:41गया है। मुझे बहुत शर्म आ रही है। शर्म
9:45मुझे नहीं चाहिए। फिर [संगीत]
9:48बदलाव चाहिए।
9:51सर
9:52हां पूजा।
9:52क्या आप मुझे याद रखते थे?
9:54हां।
9:55क्यों? [संगीत]
9:56क्योंकि जब बाकी लोग मेरे कपड़े देख रहे
9:57थे। तुमने मेरी आंखों में देखा था।
9:59मैंने तो कुछ खास नहीं किया।
10:00इंसानियत कभी खास काम नहीं लगती जब तक
10:02उसकी जरूरत ना पड़े।
10:03सर मुझे डर था कि अगर मैंने साथ दिया तो
10:04मेरी नौकरी चली जाएगी। अब नहीं जाएगी।
10:07[संगीत]
10:07सच?
10:08आज से तुम होटल की सीनियर गेस्ट रिलेशन
10:10मैनेजर हो।
10:11मैं?
10:12हां।
10:13लेकिन मुझे इतना अनुभव नहीं है।
10:15तुम्हारे पास अनुभव से ज्यादा जरूरी चीज
10:17है।
10:17क्या?
10:18इंसान को इंसान समझने की आदत। [संगीत]
10:22सर, एक मौका दे दीजिए। क्यों? मेरे बच्चे
10:25हैं। मुझे पता है। मेरी नौकरी चली गई तो
10:27तो घर टूट जाएगा। और जिन कर्मचारियों की
10:30तनख्वाह तुमने काटी, मैं गलती सुधार। जिन
10:32ग्राहकों को तुमने अपमानित किया माफी
10:36मांगूंगा। जिन लोगों को तुमने छोटा समझा
10:40क्या तुम सच में बदलना चाहते हो?
10:43हां सर तो नौकरी रहेगी।
10:46सच लेकिन मैनेजर की नहीं। फिर अगले 6
10:50महीने तुम किचन में काम करोगे।
10:52किचन में?
10:53हां। मैं मैनेजर हूं।
10:57था।
10:58सर और एक बात।
11:01जी। हर सुबह होटल खुलने से पहले तुम खुद
11:04दरवाजे पर खड़े होकर हर कर्मचारी का
11:07स्वागत करोगे। जी चाहे वो शेफ हो, सफाई
11:11कर्मचारी हो या वेटर।
11:12जी सर। और हर शाम आखिरी टेबल तुम खुद साफ
11:16करोगे। जी अब समझ आया? शायद [संगीत]
11:20नहीं। क्या
11:23अभी तुम्हें सिर्फ आदेश समझ आया है। सबक
11:27बाद में समझ आएगा।
11:46[संगीत]
11:48विक्रम साहब
11:51जी काका।
11:53यह चाकू ऐसे नहीं पकड़ते।
11:56मुझे पता है। अगर पता होता तो उंगली नहीं
11:59कटती।
12:00दर्द हो रहा है।
12:01अच्छा है।
12:02अच्छा।
12:04अब समझ आएगा कि यहां काम करने वाले हर
12:07इंसान को रोज कितना दर्द सहना पड़ता है।
12:10काका उस दिन मैंने आपको भी बहुत कुछ कहा
12:12था।
12:14याद है? माफ कर दीजिए। माफी चाहिए?
12:18जी।
12:20तो पहले खाना बनाना सीखो। क्यों? क्योंकि
12:23भूखे आदमी की थाली में सम्मान परोसना
12:25सीखोगे तो शायद इंसान समझ आ जाएगा।
12:28समर अब खुश हो?
12:30थोड़ा।
12:31विक्रम को नौकरी से नहीं निकाला।
12:33नहीं।
12:36लोग कहेंगे तुम कमजोर हो।
12:39लोग हमेशा कुछ कहते हैं।
12:41फिर उसे मौका क्यों दिया?
12:43क्योंकि मैं चाहता हूं कि वो सिर्फ सजा ना
12:45पाए।
12:46फिर?
12:47वो समझे।
12:48और अगर नहीं समझा
12:50तब दरवाजा खुला है।
12:52किसका?
12:54होटल का भी और बाहर जाने का भी। [संगीत]
12:58पूजा एक बात कहूं?
12:59कहिए।
13:01उस दिन अगर तुम भी मुझे खुश करने के लिए
13:03जी।
13:04उस आदमी को बाहर निकाल देती तो? [संगीत]
13:06तो शायद आज कुछ नहीं बदलता।
13:09तुमने मेरी बात क्यों नहीं मानी?
13:11क्योंकि मुझे लगा वो भूखा है।
13:13बस?
13:13बस।
13:14तुम जानती थी वो मालिक है।
13:16नहीं।
13:16फिर भी?
13:18फिर भी।
13:20यही फर्क है तुम में और मुझ में।
13:22क्या?
13:24तुमने इंसान देखा।
13:25और आपने
13:28पूजा दीदी।
13:29क्या हुआ?
13:30बाहर एक आदमी आया है।
13:31कौन?
13:32बहुत साधारण कपड़ों में है।
13:34क्या चाहिए उसे?
13:35खाना।
13:38अंदर भेजो।
13:40अगर सर ने पूछा?
13:42अब सर मैं हूं।
13:43लेकिन आप तो
13:45नहीं रवि। [संगीत]
13:48जी
13:49यहां अब कोई किसी को उसके कपड़ों से नहीं
13:51पहचानेगा।
13:56पूजा
13:57जी सर।
13:58आज होटल कैसा लग रहा है?
14:00पहले से अच्छा।
14:01क्यों?
14:03झूमर वहीं है।
14:05फिर
14:06टेबल्स वहीं है।
14:07फिर
14:08[संगीत]
14:09खाना वही है।
14:10तो क्या बदला?
14:12लोगों की नजर।
14:14यही तो मैं चाहता था।
14:16[संगीत]
14:17सर
14:18हां
14:18उस दिन आपने कहा था कि आप देख रहे हैं कि
14:20होटल किसका है और असली मालिक कौन है।
14:23हां
14:25अब जवाब मिला
14:26हां
14:27क्या?
14:29होटल मेरा है।
14:31और असली मालिक
14:32वो नहीं जो बिल्डिंग का मालिक हो।
14:34फिर?
14:35वो जो भूखे आदमी को बिना उसकी औकात पूछे
14:38खाना दे सके।
14:38और अगर कोई गरीब हो
14:40तो पहले खाना देना।
14:42अगर बहुत अमीर हो
14:43तब भी पहले इंसान समझना। पहले इंसान
14:45समझना।
14:47और अगर सामने वाला तुम्हारा मालिक निकले
14:49[संगीत]
14:49तब भी व्यवहार नहीं बदलना चाहिए।
14:51क्यों?
14:52क्योंकि सम्मान किसी पद का गुलाम नहीं
14:54होना चाहिए। [संगीत]
14:58सर।
14:58हां।
14:59आज कोई भूखा आदमी बाहर खड़ा है।
15:01उसे अंदर बुलाओ।
15:03वो बहुत गरीब दिख रहा है।
15:05अच्छा है।
15:06अच्छा?
15:07आज हमारे होटल को फिर से अपनी परीक्षा
15:09देनी है।
15:11और अगर वो सचमुच गरीब हुआ? तो उसे खाना
15:14मिलेगा
15:15और अगर वो अमीर निकला
15:16तो उसे भी
15:18[संगीत]