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जब होटल का मालिक खुद भिखारी बनकर अपने ही होटल में आया… फिर जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया! 😱 | #story

Real Story with jd · 1,897 words · 9 min read

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0:18ए तुम रुको जरा

0:19जी इधर कैसे आ गए?

0:22खाना खाने आया हूं।

0:23खाना?

0:24जी। यह होटल है। सड़क किनारे का ढाबा

0:27नहीं। मुझे मालूम है। फिर यहां क्यों खड़े

0:31हो? क्योंकि मुझे भूख लगी है। पैसे हैं।

0:35हैं?

0:39कितने?

0:41जितने एक खाना खाने के लिए चाहिए। जेब

0:44दिखाओ। क्या?

0:48मैंने कहा जेब दिखाओ।

0:51आप हर ग्राहक की जेब चेक करते हैं। हर

0:53ग्राहक की नहीं तो मेरी क्यों?

0:56क्योंकि तुम्हें देखकर ग्राहक नहीं लग रहे

0:58हैं। और ग्राहक दिखता कैसा है? अच्छे

1:00कपड़े, अच्छे जूते, ढंग की घड़ी कुछ तो

1:03होना चाहिए। अगर यह सब ना हो तो? फिर होटल

1:07में नहीं आना चाहिए। समझ गया? अब निकलो।

1:12लेकिन मैंने अभी खाना ऑर्डर भी नहीं किया।

1:15तुम्हें खाना नहीं मिलेगा।

1:18क्यों? क्योंकि मुझे नहीं लगता तुम बिल

1:20चुका पाओगे।

1:22अगर मैं बिल चुका दूं तो तब भी। क्यों?

1:26क्योंकि मुझे तुम्हारा चेहरा पसंद नहीं

1:28आया। चेहरा भी देखकर ग्राहक चुने जाते

1:31हैं। यहां मेरे नियम चलते हैं। अच्छा। अब

1:35क्या सोच रहे हो? सोच रहा हूं इंसान को

1:37खाना देने से पहले उसकी औकात पूछना कब से

1:40जरूरी हो गया है। ज्यादा ज्ञान मत दो। मैं

1:43बस पूछ [संगीत] रहा हूं।

1:45रवि इन्हें बाहर छोड़ कर आओ।

1:48लेकिन सर लेकिन क्या? शायद ये सच में

1:51ग्राहक हो।

1:51मैंने कहा ना बाहर छोड़ कर आओ।

1:54जी सर। रहने दो बेटा। जी मैं खुद चला

1:58जाऊंगा। यही अच्छा रहेगा। लेकिन जाने से

2:02पहले एक बात पूछूं? अब क्या? इस होटल का

2:05मालिक कौन है? तुम्हें उससे क्या लेना

2:08देना? बस ऐसे ही नाम जानकर क्या करोगे?

2:14शायद कल उससे मिलूं। पहले अपने कपड़े देखो

2:17फिर मालिक से मिलने का सपना देखना। ठीक

2:20है। और हां

2:23जी दोबारा यहां मत दिखना।

2:26कोशिश करूंगा।

2:29सर

2:30क्या है?

2:32आपने उन्हें खाना क्यों नहीं दिया?

2:35तुम मुझे सिखाओगी?

2:36नहीं सर।

2:37तो अपने काम से काम रखो।

2:39लेकिन उन्होंने पैसे देने की बात कही थी।

2:42पूजा

2:43जी सर।

2:44तुम वेट्रेस हो। ग्राहक चुनना तुम्हारा

2:47काम नहीं है।

2:47जी।

2:48और आज से उस आदमी के बारे में कोई बात

2:50नहीं करेगा।

2:51जी सर।

2:51लेकिन विक्रम साहब अब आप भी शुरू मत हो

2:55जाइए। मैं बस इतना कह रहा था कि भूखे आदमी

2:58को खाना देने से होटल छोटा नहीं होता। और

3:00होटल चलाना आपको आता है? 25 साल से चला

3:04रहा हूं। बावर्ची थे मैनेजर नहीं। सही कहा

3:07आपने। तो फिर वही काम कीजिए।

3:09जी

3:10गोपाल काका रहने दीजिए।

3:12नहीं बेटी कभी-कभी चुप रहना भी गलती होती

3:15है।

3:26मां मैं घर आ गया।

3:27इतनी देर क्यों हुई?

3:30होटल गया था।

3:32फिर

3:32भूखा वापस आया।

3:34क्या?

3:34कुछ नहीं मां।

3:35समर तुमने फिर वही पुराने कपड़े पहनकर

3:38होटल का निरीक्षण किया?

3:40हां।

3:42क्या पता चला?

3:43होटल बहुत खूबसूरत है।

3:45और लोग

3:48इमारत अच्छी है, लेकिन कुछ लोगों के दिल

3:50छोटे हो गए हैं।

3:51किसने कुछ कहा?

3:53मैनेजर ने।

3:54विक्रम ने?

3:56हां।

3:57उसने तुम्हें पहचान लिया?

3:59नहीं।

4:00अच्छा ही हुआ।

4:02मां।

4:04हां।

4:04मुझे लगता है अब सिर्फ मैनेजर की जांच

4:06काफी नहीं है।

4:08क्यों?

4:08क्योंकि समस्या ऊपर से नीचे तक है।

4:10[संगीत]

4:11तुम्हें ऐसा क्यों लगा?

4:12एक वेटर ने मेरी तरफ इंसान की तरह देखा।

4:15बाकी सब ने कपड़ों की तरह।

4:17उस वेटर का नाम?

4:18रवि। [संगीत]

4:20उसे याद रखना।

4:21क्यों?

4:22क्योंकि मुश्किल वक्त में किसी ने तुम्हें

4:24इंसान समझा है तो उसे कभी मत भूलना।

4:28[संगीत]

4:33अगले हफ्ते होटल का ऑडिट है।

4:36कौन आ रहा है?

4:37रीजनल डायरेक्टर अरुण सर।

4:39बस

4:41शायद मालिक की तरफ से कोई प्रतिनिधि भी

4:43आएगा।

4:44मालिक खुद तो नहीं आएगा।

4:46पता नहीं

4:47आने दो।

4:50सर पिछले महीने की कुछ शिकायतें अभी भी

4:53खुली हैं।

4:54कौन [संगीत] सी? स्टाफ के साथ गलत

4:56व्यवहार, टिप का हिसाब, गरीब ग्राहकों को

4:58सीट ना दे।

4:58सब बंद करो।

5:00कैसे?

5:01जिस ग्राहक ने शिकायत की है, उसे फोन करो।

5:04और

5:05कहो कि शिकायत वापस लें।

5:07अगर उसने मना कर दिया

5:10तो उसे समझाओ।

5:12और अगर फिर भी नहीं माना।

5:13नौकरी की जरूरत किसे है? मुझे या उसे?

5:16समझ गई। सर मेरी सैलरी में से फिर पैसे

5:19कटे हैं।

5:20हां।

5:21लेकिन मैंने कोई गलती नहीं की। देर से आई

5:23थी?

5:24सिर्फ 10 मिनट।

5:26होटल में 10 मिनट भी बहुत होते हैं।

5:28लेकिन उस दिन मेरी मां अस्पताल में थी।

5:30मुझे तुम्हारी निजी जिंदगी से मतलब नहीं।

5:33सर।

5:34अगली बार समय पर आना।

5:36जी।

5:39पूजा, तुम ठीक हो?

5:40हां।

5:41झूठ मत बोलो।

5:42सैलरी कट गई है। क्या करूं?

5:47मैं कुछ पैसे दे दूंगा।

5:49नहीं।

5:50क्यों? तुम्हारी खुद की हालत अच्छी नहीं

5:52है।

5:53लेकिन तुम रो रही हो?

5:55रो नहीं रही।

5:57आंखों में पानी है।

5:59बस थक गई हूं।

6:00बेटी एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हें किसी के

6:04सामने हाथ नहीं जोड़ना पड़ेगा।

6:06काका

6:07वो दिन आएगा?

6:08जरूर आएगा।

6:17विक्रम नमस्ते सर। तैयारी कैसी है? सब

6:20शानदार हैं। स्टाफ पूरी तरह तैयार।

6:24शिकायतें मामूली बातें थी। कितनी? कुछ ही।

6:28और यह रिकॉर्ड

6:30सर पिछले 6 महीने में 12 कर्मचारियों ने

6:32तुम्हारे खिलाफ शिकायत की है।

6:34वो लोग कामचोर हैं। 12ों?

6:37जी।

6:38और तीन ग्राहकों ने लिखा कि उन्हें कपड़ों

6:40की वजह से बैठने नहीं दिया गया।

6:41सर होटल की अपनी प्रतिष्ठा होती है।

6:44प्रतिष्ठा?

6:44जी। प्रतिष्ठा कपड़ों से आती है या सेवा

6:47से? दोनों से गलत जवाब।

6:50सर मालिक अगले दो दिनों में यहां आएगा।

6:54जी। और इस बार वो तुम्हें बताए बिना आएगा।

6:58[संगीत] मतलब मतलब तुम नहीं जानोगे कि वो

7:01कौन है।

7:03पूजा।

7:04हां।

7:05बाहर वही आदमी आया है।

7:07कौन?

7:08वही पुराने कपड़ों वाला।

7:10समर?

7:12हां।

7:13उसे अंदर आने दो। लेकिन सर ने मना किया

7:16है।

7:16आज मैं बात करूंगी।

7:19पूजा।

7:20जी सर।

7:21मैंने कहा था उसे अंदर मत आने देना।

7:23सर वो खाना खाने आया है।

7:26फिर बाहर से पैक करवा दो।

7:28क्यों?

7:29क्योंकि वो यहां बैठने लायक नहीं है। कौन

7:32तय करता है कौन बैठने लायक है। तुम फिर आ

7:35गए? हां। मैंने कहा था ना दोबारा मत आना।

7:40मुझे भी लगा था। फिर आज एक सवाल का जवाब

7:43लेने आया हूं। क्या अगर मैं इस होटल का

7:46मालिक होता तो तुम [संगीत] हां तुम मालिक

7:51मान लो तो मैं इस्तीफा दे देता क्यों?

7:54क्योंकि ऐसे मालिक के नीचे काम करना शर्म

7:56की बात होती।

7:57अच्छा

7:59अब रास्ता छोड़ो। ठीक है।

8:02सर रहने दीजिए।

8:04पूजा तुम चुप रहो। नहीं पूजा आज बोलने दो।

8:07तुम दोनों मिलकर मुझे सिखाओगे? नहीं। फिर

8:11पूजा तुम बोलो। क्या मैं सिर्फ देख रहा

8:15हूं कि होटल किसका है और असली मालिक कौन

8:18है। नमस्ते। नमस्ते सर। मालिक आ चुके हैं।

8:23क्या हां कहां है? यहीं [संगीत] कौन जिसे

8:28तुम दो बार होटल से बाहर निकाल चुके हो?

8:31[संगीत]

8:32नहीं। हां। वो आदमी उसका नाम समर अग्रवाल

8:36है।

8:38लेकिन यही होटल नहीं इस पूरे होटल समूह का

8:41मालिक। नहीं वो तो गरीब दिखता है।

8:45जी

8:46यही तुम्हारी सबसे बड़ी समस्या है।

8:49सर मुझे सच में नहीं पता था। मालिक होना

8:52जरूरी नहीं था। मतलब इंसान होना जरूरी था।

8:57विक्रम जी सर। आज पहली बार मेरी तरफ ठीक

9:01से देख रहे हो। सर मुझे माफ कर दीजिए। किस

9:04बात के लिए? मैंने आपको पहचान नहीं पाया।

9:08यही तो बात है सर अगर मैं मालिक नहीं होता

9:12तो मैं जवाब दो मैं गलत था सिर्फ मेरे साथ

9:18नहीं पूजा के साथ हां रवि के साथ हां उन

9:25ग्राहकों के साथ जिन्हें तुमने कपड़ों के

9:27कारण लौटाया हां तो फिर मेरी पहचान सामने

9:30आने से क्या बदल गया सब कुछ नहीं सर कुछ

9:35भी नहीं बदला मैं समझा नहीं तुम्हारा

9:38व्यवहार वही था। सिर्फ तुम्हारा डर बदल

9:41गया है। मुझे बहुत शर्म आ रही है। शर्म

9:45मुझे नहीं चाहिए। फिर [संगीत]

9:48बदलाव चाहिए।

9:51सर

9:52हां पूजा।

9:52क्या आप मुझे याद रखते थे?

9:54हां।

9:55क्यों? [संगीत]

9:56क्योंकि जब बाकी लोग मेरे कपड़े देख रहे

9:57थे। तुमने मेरी आंखों में देखा था।

9:59मैंने तो कुछ खास नहीं किया।

10:00इंसानियत कभी खास काम नहीं लगती जब तक

10:02उसकी जरूरत ना पड़े।

10:03सर मुझे डर था कि अगर मैंने साथ दिया तो

10:04मेरी नौकरी चली जाएगी। अब नहीं जाएगी।

10:07[संगीत]

10:07सच?

10:08आज से तुम होटल की सीनियर गेस्ट रिलेशन

10:10मैनेजर हो।

10:11मैं?

10:12हां।

10:13लेकिन मुझे इतना अनुभव नहीं है।

10:15तुम्हारे पास अनुभव से ज्यादा जरूरी चीज

10:17है।

10:17क्या?

10:18इंसान को इंसान समझने की आदत। [संगीत]

10:22सर, एक मौका दे दीजिए। क्यों? मेरे बच्चे

10:25हैं। मुझे पता है। मेरी नौकरी चली गई तो

10:27तो घर टूट जाएगा। और जिन कर्मचारियों की

10:30तनख्वाह तुमने काटी, मैं गलती सुधार। जिन

10:32ग्राहकों को तुमने अपमानित किया माफी

10:36मांगूंगा। जिन लोगों को तुमने छोटा समझा

10:40क्या तुम सच में बदलना चाहते हो?

10:43हां सर तो नौकरी रहेगी।

10:46सच लेकिन मैनेजर की नहीं। फिर अगले 6

10:50महीने तुम किचन में काम करोगे।

10:52किचन में?

10:53हां। मैं मैनेजर हूं।

10:57था।

10:58सर और एक बात।

11:01जी। हर सुबह होटल खुलने से पहले तुम खुद

11:04दरवाजे पर खड़े होकर हर कर्मचारी का

11:07स्वागत करोगे। जी चाहे वो शेफ हो, सफाई

11:11कर्मचारी हो या वेटर।

11:12जी सर। और हर शाम आखिरी टेबल तुम खुद साफ

11:16करोगे। जी अब समझ आया? शायद [संगीत]

11:20नहीं। क्या

11:23अभी तुम्हें सिर्फ आदेश समझ आया है। सबक

11:27बाद में समझ आएगा।

11:46[संगीत]

11:48विक्रम साहब

11:51जी काका।

11:53यह चाकू ऐसे नहीं पकड़ते।

11:56मुझे पता है। अगर पता होता तो उंगली नहीं

11:59कटती।

12:00दर्द हो रहा है।

12:01अच्छा है।

12:02अच्छा।

12:04अब समझ आएगा कि यहां काम करने वाले हर

12:07इंसान को रोज कितना दर्द सहना पड़ता है।

12:10काका उस दिन मैंने आपको भी बहुत कुछ कहा

12:12था।

12:14याद है? माफ कर दीजिए। माफी चाहिए?

12:18जी।

12:20तो पहले खाना बनाना सीखो। क्यों? क्योंकि

12:23भूखे आदमी की थाली में सम्मान परोसना

12:25सीखोगे तो शायद इंसान समझ आ जाएगा।

12:28समर अब खुश हो?

12:30थोड़ा।

12:31विक्रम को नौकरी से नहीं निकाला।

12:33नहीं।

12:36लोग कहेंगे तुम कमजोर हो।

12:39लोग हमेशा कुछ कहते हैं।

12:41फिर उसे मौका क्यों दिया?

12:43क्योंकि मैं चाहता हूं कि वो सिर्फ सजा ना

12:45पाए।

12:46फिर?

12:47वो समझे।

12:48और अगर नहीं समझा

12:50तब दरवाजा खुला है।

12:52किसका?

12:54होटल का भी और बाहर जाने का भी। [संगीत]

12:58पूजा एक बात कहूं?

12:59कहिए।

13:01उस दिन अगर तुम भी मुझे खुश करने के लिए

13:03जी।

13:04उस आदमी को बाहर निकाल देती तो? [संगीत]

13:06तो शायद आज कुछ नहीं बदलता।

13:09तुमने मेरी बात क्यों नहीं मानी?

13:11क्योंकि मुझे लगा वो भूखा है।

13:13बस?

13:13बस।

13:14तुम जानती थी वो मालिक है।

13:16नहीं।

13:16फिर भी?

13:18फिर भी।

13:20यही फर्क है तुम में और मुझ में।

13:22क्या?

13:24तुमने इंसान देखा।

13:25और आपने

13:28पूजा दीदी।

13:29क्या हुआ?

13:30बाहर एक आदमी आया है।

13:31कौन?

13:32बहुत साधारण कपड़ों में है।

13:34क्या चाहिए उसे?

13:35खाना।

13:38अंदर भेजो।

13:40अगर सर ने पूछा?

13:42अब सर मैं हूं।

13:43लेकिन आप तो

13:45नहीं रवि। [संगीत]

13:48जी

13:49यहां अब कोई किसी को उसके कपड़ों से नहीं

13:51पहचानेगा।

13:56पूजा

13:57जी सर।

13:58आज होटल कैसा लग रहा है?

14:00पहले से अच्छा।

14:01क्यों?

14:03झूमर वहीं है।

14:05फिर

14:06टेबल्स वहीं है।

14:07फिर

14:08[संगीत]

14:09खाना वही है।

14:10तो क्या बदला?

14:12लोगों की नजर।

14:14यही तो मैं चाहता था।

14:16[संगीत]

14:17सर

14:18हां

14:18उस दिन आपने कहा था कि आप देख रहे हैं कि

14:20होटल किसका है और असली मालिक कौन है।

14:23हां

14:25अब जवाब मिला

14:26हां

14:27क्या?

14:29होटल मेरा है।

14:31और असली मालिक

14:32वो नहीं जो बिल्डिंग का मालिक हो।

14:34फिर?

14:35वो जो भूखे आदमी को बिना उसकी औकात पूछे

14:38खाना दे सके।

14:38और अगर कोई गरीब हो

14:40तो पहले खाना देना।

14:42अगर बहुत अमीर हो

14:43तब भी पहले इंसान समझना। पहले इंसान

14:45समझना।

14:47और अगर सामने वाला तुम्हारा मालिक निकले

14:49[संगीत]

14:49तब भी व्यवहार नहीं बदलना चाहिए।

14:51क्यों?

14:52क्योंकि सम्मान किसी पद का गुलाम नहीं

14:54होना चाहिए। [संगीत]

14:58सर।

14:58हां।

14:59आज कोई भूखा आदमी बाहर खड़ा है।

15:01उसे अंदर बुलाओ।

15:03वो बहुत गरीब दिख रहा है।

15:05अच्छा है।

15:06अच्छा?

15:07आज हमारे होटल को फिर से अपनी परीक्षा

15:09देनी है।

15:11और अगर वो सचमुच गरीब हुआ? तो उसे खाना

15:14मिलेगा

15:15और अगर वो अमीर निकला

15:16तो उसे भी

15:18[संगीत]

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