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0:02व आपके दरवाजे पर खड़े हैं मगर आप पार्टी
0:05करने चले जाते हैं क्योंकि आप कहते हैं यह
0:07तो रूढ़िवाद है श्राद तो रूढ़िवाद है आप
0:09कुछ भी माने सत्य आपके मानने या मानने से
0:12ऊपर की चीज है जब जब शक्ति अपने शिव से
0:16नहीं मिलती वह विद्रोह करती है उपद्रव
0:19करती है और विनाशकारी होती है शक्ति का
0:22शिव से मिलना आवश्यक है किसी की मृत्यु
0:25हुई दो महीने पहले और उन्होंने तो अब शरीर
0:27नया शरीर पा लिया अब आप पितृ पक्ष में
0:30किसको पूज रहे हैं तो मत्स्य पुराण में 19
0:34अध्याय में यह बात आती है कि जो देह
0:37प्राप्त भी कर चुका है जो आपका अन्न है
0:41उसका रूपांतरण होता है अमृत त्रण भोग वायु
0:47में उसका रूपांतरण होता है जो आप ऑफर कर
0:50रहे हो और वह उस व्यक्ति को प्राप्त हो
0:53जाता है
0:57[संगीत]
1:07कई परिवार में और उनकी पीढ़ियों में एक
1:09कर्स यानी कि श्राप चला आता है यह कर्स
1:12किसी भी रूप में हो सकता है बच्चों की
1:13शादियां नहीं हो रही है हो रही हैं तो टूट
1:15जा रही हैं अर्ली डेथ्स हो रही हैं या फिर
1:18बच्चे नहीं हो रहे हैं टीनेज आगे ही नहीं
1:20बढ़ रहा है कहीं ना कहीं यह कर्ज पित्रों
1:23से जुड़ा हो सकता है तो आज के पॉडकास्ट
1:25में हम इसी पर बात करेंगे साथ ही बात
1:27करेंगे कि दोष निवारण के के लिए पितृ पक्ष
1:30में आप क्या कर सकते हैं पितृ पक्ष ही
1:33क्यों एक ऐसा महीना होता है वो दिन होते
1:35हैं जब इन रेमेडीज के लिए इस पक्ष को चुना
1:39गया नमस्कार इंडिया आप देख रहे हैं
1:41स्पीकिंग ट्री मैं हूं आपके साथ ला
1:42गोस्वामी और आज मेरे साथ बहुत खास मेहमान
1:44जुड़ रही है मनीज आहुजा जी का बहुत-बहुत
1:46स्वागत है मैम बहुत फेमस एस्ट्रोलॉजर हैं
1:49आप स्पिरिचुअल कोच भी हैं मैम पितृ पक्ष
1:52के बारे में थोड़ा सा जानना चाहूंगी कि
1:55क्यों ऐसा कहा जाता है कि भाई गणेश
1:57चतुर्थी में के बाद जब विसर्जन होता है
1:59उसके जस्ट बाद से यह महीना शुरू हो गया यह
2:01दिन शुरू हो गए तो तभी क्यों शुरू हुआ
2:04गणेश जी गौर भैरव है है ना मां पार्वती ये
2:10पुराणों में कथा भी आती है स्नान कर रही
2:12है और गणेश जी बाहर खड़े हैं तो इसका क्या
2:16मतलब है इसको जाने कि कुंडलिनी का जो
2:19द्वारपाल है वह गणेश है वह मां को उठने
2:23नहीं देंगे जब तक गणेश अपने स्थान से
2:26हटेंगे नहीं शक्ति शिव से मिलने जा नहीं
2:29पाएगी
2:30इसका गहरा
2:58एसोटेस्ट ऐ नहीं कि विघ्न विनाशक गणेश जी
3:01की पूजा करें बड़ा कॉस्मिक ट्रुथ है
3:04इसमें कि गणेश जी की जब उपासना की जाती है
3:07इन 10 दिनों में तो हम गणेश जी से बेसिकली
3:10हमारी प्रार्थना यह है कि अपने स्थान से
3:12हटे और शक्ति को अब उधवा मुखी होने दें और
3:15शिव से मिलने दें ये बेसिक कार्य है और यह
3:18कॉस्मस में भी हो रहा है ये ह्यूमन बॉडी
3:20में भी हो रहा है बिकॉज जो मैक्रो कॉस्म
3:24में होता है वही माइक्रो कजम में होता है
3:26यत्र पिंडे तत्र ब्रह्मांडे तो अब गणेश जी
3:29को हम गणेश चतुर्थी पर वशिप करते हैं और
3:3210 दिन उन्हें जो पृथ्वी तत्व पर गणेश जी
3:34हैं उन्हें कहते हैं कि अब गौर भैरव उठे
3:38आप ताकि शक्ति शिव से मिलने को जाए अब जब
3:42आपको हम 10 दिन पूजा अर्चना उपासना करेंगे
3:45तो हम आपको जल तत्व में विलीन करेंगे
3:49पृथ्वी तत्व से ऊपर का जो तत्व है वह जल
3:52है और हम कहते हैं गणेश जी पृथ्वी तत्व से
3:55ऊंचे जल में अपने स्थान से हटे और अब
3:58विलीन हो जाए तत्व में अब जैसे ही वह अपने
4:02स्थान से उठते हैं तो मूलाधार चक्र से जब
4:06वो उठते हैं तो पितृ पित्रों के वशिप का
4:10उसी टाइम तामसिक हो जाता है वातावरण
4:13पृथ्वी की कक्षा में लिंग दे आ जाते हैं
4:16जो आपके पितरों के हैं पृथ्वी के वास्तु
4:20में वह लिंग दे आ जाते हैं
4:23जो आपके पितरों के हैं और क्योंकि यह लिंग
4:28देह य लिंग दे ही क्यों है यह लिंग दे और
4:32यह जो आपके पित्र हैं हम यह कहते हैं कि
4:35जो वासनाम कोष है या जो इच्छाओं का कोश है
4:39वो इस लिंग देय को भारी बनाता है और यह
4:42पितृलोक को पार ही नहीं कर पाते ये
4:45पितृलोक में फसे हुए पित्र हैं आप इस मैं
4:48एक पॉइंट आगे जाक फिर वापस आऊंगी आप अपनी
4:52मंत्र उपासना पूजा अर्चना से बाह्य ऊर्जा
4:56प्रदान करेंगे इन लिंग देहो को ताकि य ने
5:00वासनाम कोष अब वासनाओं का जो कोष है वह
5:03भारी है पाप भूमि से भारी ग्रेविटेशनल पुल
5:07देता है आगे के लोक में जा नहीं
5:10पाते आपकी पूजा अर्चना से बाह्य ऊर्जा
5:14क्रिएट होगी ताकि य लिंग दे पितृलोक से
5:17मुक्त होकर आगे
5:19जाए आपकी अर्चना से यह अपॉर्चुनिटी है
5:22आपके पास अब मैं वापस आती हूं इस बात प जो
5:25आपने जो आपका सवाल था जैसे ही गणेश जी
5:28उठते हैं य लिंग दय पृथ्वी की कक्षा में
5:31आते हैं उससे पहले यह भी नहीं आ सकते
5:34अच्छा अब यहां पर एक और पॉइंट है अब अगर
5:37पृथ्वी तत्व पूर्णत जल तत्व में विलीन
5:40नहीं हुआ जैसे कि अब फाइबर के आप गणेश जी
5:43ले ले और आप बड़े से गणेश जी ले प्लास्टिक
5:45के फूलों से उनका वो करें डेकोरेशन और
5:49जाकर उन्हें ओशन में छोड़ दे तो आप
5:52कॉस्मिकली जो कॉस्मिक ट्रुथ है उसके
5:54विपरीत जा रहे हैं क्योंकि उस ट्रुथ में
5:57तो पृथ्वी विलीन होनी चा चाहिए जल तत्व
6:01में यहां अगर पृथ्वी तत्व विलीन नहीं हुआ
6:05तो वो पृथ्वी का पृथ्वी तत्व ही रह गया वो
6:07विलीन नहीं हुआ इसका मतलब वो ऐसे सब्सटेंस
6:10के गणेश जी होने चाहिए जो पूर्णतया विलीन
6:13हो मिट्टी बिल्कुल अब आप खूबसूरती और
6:18इसमें हम सारे जो तत्वों का जो क्रोनोलॉजी
6:20है और जो कॉस्मिक जो प्रिंसिपल है
6:24प्रेसिपिटेशन ऑफ तत्वास हम उससे आगे जाने
6:26की कोशिश कर रहे हैं और उससे ही इंबैलेंस
6:29में आ जाए सृष्टि इंबैलेंस में आएगी
6:30सृष्टि इंबैलेंस में आई
6:33प्रकृति विद्रोह करेगी उपद्रव करेगी
6:37क्योंकि अगर पृथ्वी तत्व जल तत्व में
6:40विलीन नहीं हुआ शक्ति उठ ना पाई तो हमेशा
6:43यह जानिए जब जब शक्ति अपने शिव से नहीं
6:48मिलती वह विद्रोह करती है उपद्रव करती है
6:51और विनाशकारी होती है शक्ति का शिव से
6:54मिलना आवश्यक है आवश्यक अब प पार बिठा दे
7:00शक्ति को शिव से मिलने ना दे और आज के
7:02समाज में ऐसे बहुत से पहरेदार हैं जो
7:06विवाहित दांपत्य जीवन में भी अड़चन डालते
7:09हैं शक्ति को शिव से मिलने ही नहीं देंगे
7:12वो विध्वंस कारी हो जाएगी ऐसे भी और
7:15कॉस्मिकली
7:16भी पृथ्वी तत्व का विलीन होना जरूरी है
7:19मैं बहुत गहरा प्रिंसिपल पर बात कर रही
7:21हूं बिल्कुल बकुल तो यहां पर यह बात हुई
7:23कि फाइबर ग्लास के ना बनाए प्लीज डोंट कॉज
7:25वाटर पोल्यूशन वो अलग बात है पर क्यों
7:27नहीं करना आपने वो मैं समझा रही हूं हम
7:30जैसे ही पृथ्वी तत्व भैरव गौर भैरव उठते
7:34हैं तो यह सब जो पि लिंग दे हैं यह पृथ्वी
7:40की कक्षा में आ जाते
7:42हैं सूर्य सिद्धांत यह बताता है कि
7:47पितृलोक जो है वह चंद्र लोक के ऊपर का
7:49हिस्सा है ठीक है यह लाजली भू और भूवर लोक
7:53के बीच का हिस्सा होता है और यह क्योंकि
7:57वासनाम कोष इनका होता है तो यह लिंग दे
8:01पितृ लोक को क्रॉस ही नहीं कर पाते पीछे
8:05आप जैसे मैंने कहा भा ऊर्जा आप क्रिएट
8:06करेंगे अब अपनी पूजा अर्चना से और यह
8:09मुक्त हो जाएंगे पित प अब जब यह पितृ पक्ष
8:13आता है और पूर्णिमा का दिन मिलाकर यह 16
8:15दिन होते हैं जब गौर भैरव अब विलीन हो गए
8:19अगले तत्व में पृथ्वी से जल में और जैसे
8:22ही वो उठे तो ये सब आ गए जैसे ही व
8:26उन्होने अपना स्थान छोड़ा तो पहले ये आते
8:28हैं फिर ये शांत करते हैं तो अब जाकर
8:32शक्ति उठती है इसलिए श्राद अमावस्या के
8:36बाद पहला नवरात्र आता है कि अब शक्ति शिव
8:39से मिलने के लिए उधवा गामी होगी यह साधारण
8:43बात ही नहीं है तो यह हुई बात कि कैसे
8:46गणेश चतुर्थी से अनंत चौदस तक हम पृथ्वी
8:51तत्व का वशिप करते हैं वहीं से पित उठते
8:54हैं और उसके बाद शक्ति उर्द आगामी हो जाती
8:57है और उर्द आगामी के बाद होने के बाद
9:01पावरफुल हो जाती हैय शक्ति यह आप जरूर
9:04जाने ये ये प्रोसेस है राइट तो इन दिनों
9:08अब श्रा तो आ ही रहे हैं मगर इन दिनों भी
9:11यह जो चतुर्थी से चौस का पीरियड है इसमें
9:14जरूर आप विघ्न विनाशक गणेश जी की उपासना
9:17करें यह बहुत लोग नहीं जानते मगर 32
9:21प्रकार का आकार है गणेश जी का 32 प्रकार
9:24के गणेश जी हैं किन्नी किनी साउथ इंडियन
9:26टेंपल्स में आपको यह 32 प्रकार दिखेंगे
9:29जैसे कि हे राम गणेश जो कि स्वयं सिंह पर
9:33सवार है देयर इज अ तांत्रिक डायमेंशन
9:35आल्सो टू लॉर्ड गणेशा ठीक है वो कभी फ
9:39अघोर गणपति हां ये भी कभी और बात करेंगे
9:42हां कभी फिर वो मगर ये बहुत मने 32 प्रकार
9:46के गणपति हैं इन दिनों भी यह जो 10 दिन है
9:49इन दिन भी आप संकटनाशक गणेश स्तोत्रम एक
9:53बड़ा ही ब्यूटीफुल स्तोत्रम है या ओम गण
9:56गणपत्य नमः या ओम वक्रतुंड महाकाय सूर्य
10:01कोटि समप्रभ निर्विघ्नम कुरु मेंे देव
10:02सर्व कार्यशु सर्वदा 108 बार इस मंत्र का
10:05जाप करें यह अपने आप में आप समझे गौर भैरव
10:07को हटाएंगे आपके अपनी स्पाइनल कॉर्ड में
10:10शक्ति उधवा मुखी हो
10:12जाएगी तो यह जरूरी है अब जैसा कि मैंने
10:17कहा अब हम श्राद्ध प आ जाते हां श्राद्ध प
10:20आ जाते हैं यह जो पि है जैसा कि मैंने
10:23कहा वासनाम ऊर्जा इच्छाओं की वजह से यह जो
10:28भारीपन है जो ना लोक नहीं छोड़ पाए और कुछ
10:31तो पित्र ऐसे हैं जो अधो योनि में जाते
10:34हैं प्रेत योनि में चले गए
10:38अ पितृलोक भी नहीं पहुंचे और भी नीचे अदम
10:42योनियों में चले गए ऐसे भी हैं तो इसलिए
10:46इस समय जब यह लिंग देह आते हैं तो यह
10:49अपेक्षा करते हैं आपसे कि अब आप इन्हें
10:51अन्न दें तर्पण करें ताकि आप मंत्र उपासना
10:56करें ताकि इनको मिले और ये आगे जाए ओके अब
10:59सनातन संस्कृति में श्राद बस ऐसा रह गया
11:02है कि आज की बात कर रही हूं ऐसी पद्धति
11:07नहीं थी हमारी मगर अब यह बन गया है कि बस
11:08उस दिन एक ब्राह्मण को भोजन कराए और आगे
11:11चले बहुत अच्छी बात है ब्राह्मण को भोजन
11:13कराए और वह तो कराना ही है आपने मगर आप
11:17तर्पण जरूर करें आप कुछ भी अगर नहीं कर
11:21सकते आप डिसाइड करें कि मैं सात हनुमान
11:23चालीसा करूंगा इन 16 दिन करूंगा करूंगा या
11:27करूंगी और अपने पित्रों को मैं अपने
11:30संकल्प से यह मंत्र ऊर्जा रूप में प्रदान
11:34करती हूं आप इसका बेनिफिट नहीं सोच सकते
11:37क्या आएगा आपको चारों तरफ से ब्लेसिंग्स
11:40आएंगी क्योंकि वह मुक्त होंगे तो आपको
11:42ब्लेस
11:44करेंगे तो सिंपल तरीका तो य कि आपने मंत्र
11:47उपासना करनी है यह आप ना भूले कि लेडीज
11:50कहे जी हम तो मेल प्रोज नहीं करें आप
11:53मंत्र कर सकते हैं आप जरूर मंत्र करें आप
11:55क मैं इस कुल में उत्पन्न हुई कन्या हूं
11:58या मैं इस कुल में उत्पन्न हुई स्त्री हूं
12:00या मैं अब विवाहित हूं अब मेरा यह गोत्र
12:02है मैं यह करती हूं कहीं भी कैसे भी आपका
12:06किया गया पुण्य उन आत्माओं को गति प्रदान
12:10करेगा चाहे वो प्रेत योनि में ही क्यों ना
12:12हो देखिए किसी भी योनि में होंगी वो
12:15उठेंगी वहां से अगर प्रेत योनि से उठक वो
12:17पितृलोक में भी चली जाए वो तो तब भी आपको
12:18ब्लेस करेंगी क्योंकि पितृलोक तो इस योनि
12:22से ऊंचा है ना वो तो पहुंच ही नहीं पाई
12:24पितृलोक अब बहुत से लोग मुझसे अक्सर यह
12:28पूछते हैं कि कितनी आत्माएं हैं जो अभी
12:31जिन्होंने शरीर
12:33त्यागा देखिए जब तक शरीर है आप थ्री
12:35डायमेंशन है आपने श्री शरीर त्यागा आप
12:39सूक्ष्म विश्व में विद्यमान हो गए आप टू
12:41डायमेंशन हो गए अब आप अगर समझे कि
12:46जो ज्ञानेंद्रियों को जो सोलर प्लेक्सस की
12:49ज्ञान इंद्री है वह तो आंखें हैं आप कह
12:53रहे जो मेरी आंखों को दिखता है वही सत्य
12:55है जो इसके दूर है या जो इसके परे है वह
12:57सत्य ही नहीं है तो फिर यह आप भूल कर रहे
12:58हैं क्योंकि ऐसी चीजें हैं सूक्ष्म विश्व
13:02शब्द मैं इस्तेमाल कर रही हूं सूक्ष्म
13:04विश्व में तो बहुत कुछ विद्यमान है योगी
13:07अंतरिक्ष में चित्रों को देख लेते हैं कि
13:09क्या-क्या चित्र विद्यमान है किसी व्यक्ति
13:12के भूत भविष्य में के चित्र देख लेते हैं
13:15और वहां से बता देते हैं ऐसा तो सूक्ष्म
13:18विश्व में अनेका अनेक प्रकार
13:20की चीजें हैं एक यंत्र है चित्रलेखा यंत्र
13:25जो आप ही के मस्तिष्क में है आप जो विचार
13:28लेते हैं आप जो विजुअल देखते हैं आप जो
13:31विचारधारा देखते हैं उस चित्र लेखा यंत्र
13:34में रिकॉर्ड होता है यह भी आप जाने इसलिए
13:37आप सोच मानसिक कर्म की कोई वैल्यू नहीं है
13:39बहुत वैल्यू है उसकी भी कई बार उससे रुका
13:42जाना या उसे मगर यह प्रोसेस भी काम करता
13:46है तो आप जब जाते हैं तो आपकी आत्मा मन
13:50बुद्धि अहंकार सब आपके चित्त की स्थिति यह
13:54सब साथ जाती है आप सोचे कि ओहो मैं तो
13:58बहुत पूजा पा करी पर मेरे मन में तो मलिन
14:01होता है मैं लोगों का बुरा चाहता हूं पर
14:03ऊपर से मैं बहुत पूजा गया जैसे कई लोग हैं
14:06आज के आप देखें परिपेक्ष में तो ऐसे लोग
14:09हैं जिनके लोग बहुत कह रहे हैं आप बहुत
14:11बड़े हैं मगर वह अंदर से मलिन होता है
14:15उनके जीवन में तो जब फाइनल जर्नी होगी तो
14:20परसेप्शन के बेसिस पर नहीं होगी कि लोग
14:22आपके बारे में क्या कह रहे थे लोग कह रहे
14:24थे जी आप महान है वो इस बेसिस पर होगी कि
14:26आपकी चित्त की स्थिति क्या है आपके मन की
14:29क्या है आप कहां है वहां से आपकी फाइनल
14:32जर्नी होगी तो आदि दुनिया जो इस बात में
14:34लगी हुई है कि मैं आडंबर से बताऊं कि मैं
14:37बहुत ऊंचा हूं मैं बहुत संस्कारी हूं इससे
14:40होगा कुछ भी नहीं अधो योनि ही प्राप्त
14:42होगी ये एक बात है मैंने यह बोली अब मैं
14:46यहां एक इंटरेस्टिंग पॉइंट शेयर करना
14:47चाहती हूं बहुत से लोग पूछते हैं कि देखिए
14:50कोई दो महीने पहले मरा किसी की मृत्यु हुई
14:53दो महीने पहले और उन्होंने तो अब शरीर नया
14:55शरीर पा लिया अब आप पितृ पक्ष में किसको
14:58पूज फिर क्योंकि वो तो लिंग दे नहीं है वो
15:01तो ऑलरेडी किसी के घर पैदा हो चुके हैं
15:03क्योंकि रिइनकारनेशन की हम तो जानते सनातन
15:06को तो पता है कि पुनर्जन्म है और यह सत्य
15:09है और आयन स्टीवेंसन की आप बुक्स पढ़ेंगे
15:12वॉल्यूम्स करी है उन्होंने रिसर्च की ऑफ
15:14रिइनकारनेशन केसेस राइट या दिस इ सच अ
15:17डिटेल वर्जन पर सनातन तो बहुत पहले से बता
15:21रहा है पुनर्जन्म है तो अब वो कहते हैं कि
15:24जिसका पुनर्जन्म हो चुका है आप अन्नदान से
15:27और तर्पण से उसको कैसे
15:30तो मत्स्य पुराण
15:32में 19वें अध्याय में यह बात आती
15:36है कि जो देह प्राप्त भी कर चुका है जो
15:40आपका अन्न है उसका रूपांतरण होता है अमृत
15:45त्रण भोग वायु
15:48में उसका रूपांतरण होता है जो आप ऑफर कर
15:51रहे हो और वह उस व्यक्ति को प्राप्त हो
15:54जाता है और उसके पापों का भी नाश होता है
15:57यह म से पुराण बता रहा
16:00है तो इन बातों को
16:03बड़ा बड़ा ध्यान से समझना है कि यह जो
16:07लिंग दे अब आ रहे हैं और आपसे अपेक्षा
16:10करते हैं उम्मीद करते हैं कि आप हमें कुछ
16:13खाने को देंगे आप हमें तर्पण करेंगे आप
16:15गीता का पाठ करेंगे हम सुनेंगे और आपके
16:19गीता के पाठ करने से हमारा उद्धार हो
16:21जाएगा वोह आपके दरवाजे पर खड़े हैं मगर आप
16:24पार्टी करने चले जाते हैं क्योंकि आप कहते
16:26हैं ये तो रूढ़िवाद है श्रा तो रूढ़िवाद
16:28है आप कुछ भी माने सत्य आपके मानने या
16:32मानने से ऊपर की चीज है आपने कहा मैम आपके
16:34दरवाजे पर खड़े रहते हैं वाकई में ऐसा
16:36होता है क्या कि वो एनर्जी जो है जो हमारे
16:40पित्र हैं वो हमारे घर इन दिनों में रहते
16:42हैं बिल्कुल आते हैं एक बड़ी पुरानी प्रथा
16:46है और जब मैं छोटी होती थी मेरे आसपास
16:49मेरी दादी आस पड़ोस की दादिया नानिया इस
16:52प्रथा को करती थी कि जब आखिरी मावस होती
16:55थी तो वो एक दिया लेकर अपने घर से निकलती
16:57थी और ऐसे 500 मीटर दूर जाकर उस दिए को
17:00रखती थी और कहती थी हम पितृ विदा कर रहे
17:02हैं क्योंकि अब हम उन्हें कह रहे हैं अब
17:03आपके जाने का समय है अब आप घर पर ना रहे
17:06अब यह दिया हमने वहां दे दिया है अब आप
17:09जाइए नमस्कार हमने पूरा काम किया तो यह
17:12प्रथा ही आपको बता रही है कि वह दरवाजों
17:14पर आ जाते हैं आपके यह मानने से कि ये
17:17रूढ़िवाद है सत्य तो असत्य नहीं बनेगा या
17:20सत्य तो काउच नहीं होगा कवरिंग नहीं आएगी
17:23उसके ऊपर सत्य तो शाश्वत है मैम इस बारे
17:26में भी थोड़ा सा बताइए कि कई पीढ़ियों में
17:29हमने देखा है कि कोई कर्स है कि भाई बच्चे
17:31ही नहीं पैदा हो रहे हैं मतलब कुल आगे
17:33नहीं बढ़ रहा है किसी भी कारण से तो क्या
17:35ये भी कहीं ना कहीं हमारे पित्रों से
17:37कनेक्टेड होता है जी देखिए यह कहा जाता है
17:40कि पितृ शत्रु या बहुत ही प्रिय बांधव ही
17:44आपके घर में पुत्र या पुत्री के रूप से
17:47में जन्म लेते हैं क्यों क्योंकि यह
17:49ऋणानुबंध का प्रिंसिपल है कार्मिक डेट का
17:52प्रिंसिपल है तो जो कहीं फंसे हुए हैं
17:55पहली बात तो वो ब्लेसिंग भी दे सकते हैं
17:57और आपके घर में वैसे ही कोई और उनकी
17:59ब्लेसिंग मात्र से ग्रेस से ही किसी का
18:03जन्म हो सकता है वह स्वयं भी आते हैं
18:05क्योंकि कार्मिक डेट तो पूरी लिनियाज में
18:07चलता है जिन्होंने आपको पाला अब वह कहते
18:10हैं हमें पालो तो वो पैदा हो जाएंगे तो
18:14इसलिए आप कभी देखेंगे कि क्लेश भी बहुत
18:16होता है जब पितृ शांत नहीं होते वह नाराज
18:19हो जाते हैं दरवाजों पर बार-बार आते हैं
18:21आप उन्हें तर्पण नहीं करते अनाज नहीं देते
18:23ब्राह्मण को नहीं पूछते कुछ भी नहीं करते
18:25वो उपद्रव करते हैं फिर क्या होता है कि
18:28ऐसे घरों में जैसे कहते चार लोग बैठे तो ल
18:31लड़कर ही उठेंगे शांत नहीं उठ सकते या
18:35प्रेम पूर्वक बात भी नहीं कर पाएंगे कला
18:37कलेश बैठ ही जाएगा उस स्थान पर जहां पितृ
18:41रुष्ट है इसलिए हम कहते हैं कुल देव और
18:43पितृ रुष्ट नहीं होने चाहिए ये इंपॉर्टेंट
18:46है इसलिए कोई भी हो आप कोई भी हो आप जरूर
18:51कोई मंत्र उपासना इस पीरियड में जरूर करें
18:55जो एक बड़ा ही पावरफुल मंत्र है और सेे ये
18:59स्तोत्र है और इसे सिर्फ आप मैं ये नहीं
19:01कहती हूं सिर्फ पितृ पक्ष में करें पर अगर
19:02आप करके देखें तो आप इसकी आप खुद ही
19:05जानेंगे देखिए जब आप कोई साधना करते हैं
19:07और अपनी साधना किसी और को देते हैं तो आप
19:10खुद ही उसके बाद जब वो समय अमावस जो महालय
19:13की अमावस है जब वो आएगी आपको खुद ही हर्ष
19:16उल्लास महसूस होगा आप लाइटन महसूस होंगे
19:19क्योंकि किसी और की मुक्ति आपके द्वारा हो
19:22गई भगीरथ ने अपने पित्रों को तर्पण करने
19:25के लिए स्वयं गंगा को वो धरती पर ले आए थे
19:28आप कम से कम बैठ के मंत्र उपासना तो कर
19:31सकते हैं पितृ ऋण देव ऋण भूमि ऋण इससे
19:34आपको उर्ण होना ही पड़ेगा आप ये ऋण लेकर
19:38तो ऋण जो है आपको बारबार
19:41इस आवन जावन में लाएगा और क्योंकि जो ऋण
19:46है वो भारी है उसमें ग्रेविटेशनल पुल है
19:49आपको वापस
19:50लागा गजेंद्र मोक्ष एक बड़ा ही ब्यूटीफुल
19:54स्तोत्र है इसका जाप आप नियमित रूप से अगर
19:57एक समय पर ही करें एक समय आप निर्धारित कर
20:00ले और पूर्णिमा से अमावस तक आप गजेंद्र
20:02मोक्ष का जाप करें तो यह आप और आपने
20:06संकल्प करना है मैं अपने पितरों को देता
20:08हूं तो आप खुद ही जान लेंगे आपके भी आसपास
20:12कोई रस्सी बंदी होगी ना तो आप उससे मुक्त
20:14हो जाएंगे पितरों की कृपा होगी आप पर गीता
20:18का जाप गीता के 18 अध्यायों को आप पढ़े आप
20:22कहे चलिए मैं 18 को पढ़ता हूं दिन 16 है
20:24मैं 18 अध्याय पढ़ूंगा और मैं अपने संकल्प
20:27से अपने प को य यह देता हूं इसमें एक और
20:32पद्धति है गीता का जो सातवा अध्याय है
20:35सातवा सेवंथ स्पेसिफिकली कहा गया है
20:38पित्रों पितृ पक्ष में पढ़ने के लिए आप
20:41कहे तो आप सातों दिन सातवा सॉरी 16 दिन आप
20:44सातवा अध्याय पढ़ सकते हैं या पूरी गीता
20:48पढ़े भगवान दत्तात्रेय के मंत्र को किया
20:52जा सकता है दत्तात्रेय स्तोत्रम किया जा
20:54सकता
20:55है दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा
21:00दत्तात्रेय के अनेक अनेक मंत्र है ओम दांग
21:02दत्तात्रेय नमः दत्तात्रेय स्तोत्र कर
21:06सकते हैं
21:08आप दत्तात्रेय सदगुरु
21:11हैं गुरुओं के गुरु हैं जब गुरु भी गलती
21:15करते हैं तो दत्तात्रेय उन्हें टोक हैं और
21:18उन्हें सुधारते हैं य गुरुओं के गुरु हैं
21:21सद्गुरु
21:24हैं देवी अनुसूया के पुत्र हैं
21:30और ब्रह्मा विष्णु महेश का समागम है भगवान
21:34दत्तात्रेय में दत्तात्रेय जी का वशिप इस
21:38समय में किया गया बहुत आपको आपको फल देगा
21:42आप इसको इस साधना को कितना गहरा करते हैं
21:46आप कहते हैं कि मैं तीन माला करूंगा
21:47दत्तात्रेय मंत्र की या दत्तात्रय स्तोत्र
21:50करूंगा यह हनुमान चालीसा सात बार
21:53पढ़ूं गजेंद्र मोक्ष करूं गीता ये आपके
21:56पास विकल्प है आप कर सकते हैं मगर साधना
22:00मंत्र ऊर्जा जरूर क्रिएट करें क्योंकि ऐसी
22:05अपॉर्चुनिटी जिंदगी में बार-बार नहीं आएगी
22:07आपका जीवन कितना है साल में एक बार ही आ
22:09रहा है कोई आपके दरवाजे पर और दरवाजे पर
22:12आए हुए व्यक्ति को खाली हाथ नहीं भेजना
22:15चाहिए कभी भी नहीं भेजना चाहिए और ये तो
22:17आपके पित्र हैं एक और सवाल है खुले दिल से
22:19इनको दें एक और सवाल है मैम मेरा कि हमारे
22:23तो कई पितर होंगे क्या पता दादी दादा उनके
22:27पापा मम्मी बहुत सार पित्र होते हैं तो एक
22:30साधना से क्या सारे पित्रों का कल्याण कर
22:33सकते हैं
22:34यस आपने कहा मैं अपने सर्व पित्रों के लिए
22:38यह करता हूं आप हर रोज बैठ के तर्पण करें
22:42आप अगर चाहे तो हर रोज होम करें 16 के 16
22:46दिन अगर कुछ भी ना हो सके आप महालय अमावस
22:50को सर्व पित अमावस्या जिसे बोलते हैं
22:53जिनका आपको पता नहीं वो कैसे गए क्यों गए
22:56आप उस दिन होम करें आप होम नहीं कर सकते
22:59एक और बात है इसमें आप कहे कि मैं सारे
23:03दिन अगर आप बहुत संस्कृत पढ़ सकते हैं तो
23:05आप क सभी दिन विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ता
23:07हूं आप विष्णु सहस्त्र नाम तो विष्णु
23:11सहस्त्र नाम तो सर्वोपरि है इसका जाप दे
23:13मगर यह जरूर करें क्योंकि आपने शरीर
23:17इसीलिए धारण किया है कि
23:20आप सुकर्म
23:22करें और तो ये मटेरियल जम में आप कितने भी
23:26बैंक बैलेंस आपके बढ़ जाए कुछ भी हो जाए
23:28सब छूट जाएगा मगर आपकी साधना आपके साथ
23:31आपकी पूजा अर्चना उपासना आपके साथ खड़ी है
23:33साथ ही जाएगी आपकी चित्त की स्थिति को बदल
23:35देगी ये आपके साथ ऑटोमेटिक होगी
23:38ट्रांसम्यूट कर जाएगी आप ही को आपकी
23:41स्थिति को सब्लीमेशन कर देगी आपकी चित्त
23:43की स्थिति को सब्लिमिट कर देगी बक मैम मैं
23:46एक्सपर्ट नहीं हूं लेकिन क्यूरियोसिटी
23:48बहुत रहती है मुझे अर तो एक सवाल मेरे मन
23:51में आ रहा है मान लीजिए किसी कोई एक
23:53क्लीने चल रही है उसमें आपके पूर्वज ही
23:56पैदा हो रहे हैं बार-बार और वही लोग जो
23:59पैदा हो रहे हैं वो उन्हीं लोगों के लिए
24:00शाद कर रहे हैं तो यह कुछ मतलब फिर कैसे
24:04चलेगा सिस्टम नहीं देखिए एक पितृ आपके घर
24:08में आए पर पित एक तो नहीं है ना पि तो
24:10अनेकानेक है एक थोड़ी है आपने भी खुद ही
24:13कहा वो तो अनेकानेक है तो करने दीजिए अब
24:16यह नया देह धारण किया ना अब ये नई पोजीशन
24:19आ गई तो उस आत्मा के लिए इस नए देह से मैं
24:23ही अपने लिए मैं अपने लिए तो नहीं मेरे
24:25पास तो और भी बहुत
24:27है देखिए ये मेरा जो ये डीएनए का भी अपना
24:31एक छोटा सा यूनिवर्स है तो बहुतों के लिए
24:33काम हो रहा है तो वो उन लोगों को भी लगेगा
24:35बिल्कुल लगेगा दूसरा सवाल मेरा ये है मैम
24:37कि कई बार ऐसा हम देखते हैं कि जो हमारे
24:40पेरेंट्स हैं उन्होंने श्राद्ध कर दिया
24:43लेकिन जो उनके बच्चे हैं उनकी भी अब अपनी
24:45फैमिली है अपने बच्चे हैं वो लोग नहीं
24:47करते कि मम्मी पापा ने तो कर दिया तो
24:49इसमें भी कहीं कुछ मैं ये कहूंगी कि सबको
24:51मंत्र उपासना तो जरूर करनी चाहिए कुछ और
24:54नहीं तो सर्व पिी अमावस में जाके जरूर
24:57ब्राह्मण
24:58को आप भोजन और जो भी आपने दान करना है वो
25:03जरूर करें क्योंकि कुछ ऋण तो आपके ऊपर भी
25:06है ना आत्मा तो अलग अलग है सब लोग अपने
25:09अलग आते हैं और अलग ही जाते हैं तो आप ही
25:12अपने ऋण से उण हो जाए मुक्त हो अपने ऋण से
25:16कुछ भी नहीं तो आप तो घर बैठे भी उपासना
25:18कर सकते हैं कि मैं इस पितृ पक्ष में यह
25:20करता हूं यह उपासना करके अपने पित्रों को
25:22देता हूं मैं कहती हूं इट सच ब्यूटीफुल
25:24थिंग कि आपने किसी और को अपनी मंत्र ऊर्जा
25:27दी आज आपके पास पास देह है आप मंत्र ऊर्जा
25:30क्रिएट कर सकते हैं कल ये देह ही नहीं
25:32रहेगा तो क्या मंत्र ऊर्जा आप क्रिएट
25:34करेंगे आज अपॉर्चुनिटी है अपॉर्चुनिटी और
25:36चीजों की नहीं है अपॉर्चुनिटी
25:38ये अच्छे कर्म करने की है अच्छा मैम हम
25:42कहते हैं कि जो भी हम इस शरीर से कर्म
25:45करते हैं वो आत्मा के कर्म होते हैं मतलब
25:47आत्मा को लगते हैं आप जैसे कर्म करेंगे
25:50आपकी आत्मा वैसे ही होगी अच्छे कर्म
25:52करेंगे तो एक पवित्र आत्मा होगी बुरे
25:54करेंगे तो एक इविल स्पिरिट रहेगी आपकी
25:56आत्मा दू हो जाएगी तो क्या कई पितृ ऐसे भी
26:00होते हैं जिनकी आत्मा दूषित होती है
26:03बिल्कुल देखिए जो पितृ लोक में फंसे हैं
26:05कुछ तो उनमें भी दोष है मैं दूषित शब्द
26:09नहीं बोलूंगी मैं कहूंगी कुछ तो उनमें दोष
26:10था या ऐसी वासना एं थी ऐसी इच्छाएं थी जो
26:13तृप्त नहीं हुई वो बैठे हैं वहीं पर आगे
26:16नहीं जा सके और जो उनसे भी
26:18लोर अदम अदम योनि में गए जिन्होंने बहुत
26:22ही कुछ बहुत ही किसी की प्रॉपर्टी हड़प ली
26:25किसी का कुछ मेजर गलत कर दिया देखते आज आप
26:28देखें
26:29आप इतने न्यूज में इतने लोग इतना सब कुछ
26:32कर रहे हैं कुकर्म तो उनको तो फिर आप वो
26:35तो अदम योनि में जाएंगे जब उनकी प्रोजन
26:38आगे देखेगी तो वह तो फिर मुश्किल हो जाता
26:42है ना इन लोगों के लिए इन लोगों को शांत
26:45करना आप देखेंगे कई बार बहुत से लोग आपको
26:47कहेंगे कि उनको स्वप्न आया कि जी मुझे
26:50आइसक्रीम खिलानी है किसी को तो वो पित
26:53किसी को जो पसंद था ना खाने में वो आपको
26:55स्वपना आएगा कि यह खिलाओ मैं इन्हीं में आ
26:57रही थी कि क्या कुछ संकेत भी देते हैं
26:59पित्र 100% संकेत होते हैं और ये बात मैं
27:02यहां पर एक बड़ा इंपोर्टेंट बात बोलूंगी
27:04श्राद में आपके घर कोई अकस्मात आ जाए पितृ
27:08लिंग दे किसी भी शरीर को धारण करके आ सकता
27:11है आप वैसे भी अतिथि देवो भव इस समय तो
27:15बिल्कुल अतिथि देवो भवा वैसे भी अतिथि
27:18देवो भव ही है तो आप बड़े अच्छे से सबका
27:23सत्कार करें और खिलाएं क्योंकि कौन किस
27:25शरीर में श्राद में कोई अकस्मात ही आ गया
27:28तो जान ले
27:29कुछ जरूर बड़ा आदर सत्कार जो आपको देना है
27:34खिलाना है बहुत अच्छे से खिला के भेजें
27:36वैसे भी अच्छे से ही खिलाए अगर पितृ
27:39संतुष्ट नहीं है तब भी कोई संकेत देते हैं
27:41क्या देखिए क्लेश जब घरों में होता है तो
27:44ये पित्रों की असंतुष्ट से ही होता है
27:47जैसे मैंने कहा कि चार लोग एक साथ बैठ के
27:49ना खाना खा पाएंगे ना बात कर पाएंगे या
27:51विवाह ही नहीं हो रहे उस घर में किसी का
27:53विवाह नहीं होता जिसका होता है वो टूट
27:55जाता है तो यहां भी एक संकेत है
27:58ठीक है कुंडलियों में भी इसे देखा जाता है
28:01नवम भाव से भी इसको देखते हैं मगर हर बात
28:04पे मैं कहती हूं लोगों में सुपरस्टिशन
28:06नहीं डालना चाहिए आपके तो नवम भाव में कुछ
28:09और भी हो सकता है वो हर बात को आप मैं कह
28:12रही हूं जनरली आप बस एक मंत्र उपासना
28:14तर्पण करके आप नदी में नाभी तक खड़े होकर
28:19आप तर्पण करें तो बड़ा ही मतलब बड़ा ही
28:24शुभ है आप नहीं जा सके आप घर पर भी तर्पण
28:28शिव और मीनाक्षी देवताओं का तत्व है
28:31मीनाक्षी इच्छाओं की पूर्ति की देवी है तो
28:35यहां से तर्पण ऐसे किया जाता है स्टील के
28:37बर्तनों में ना तर्पण करें मिट्टी में कर
28:41सकते हैं पीतल में कर सकते हैं कासे में
28:44कर सकते हैं तांबे में कर सकते हैं स्टील
28:46यह आजकल का खेल है आप अपनी दादी के जमाने
28:49में देखें वह खाना भी नहीं खाती थी स्टील
28:51के बर्तनों में कासा कासा चलता था उस समय
28:54पीतल में भी खाना खाते अब आप सब कुछ स्टील
28:57में कर रहे स्टील है यह बात जाने और स्टील
29:00में आप भगवान भी को भी हम भोग नहीं लगाते
29:03स्टील के बर्तनों में नहीं आइडली नहीं
29:05लगाना चाहिए मिट्टी का पात्र हो सकता है
29:08ज्यादातर मंदिरों में देखा भी है हमने कि
29:10वो भोग का जो उनका कटोरा होता है व तांबे
29:13का होता है या चांदी का होगा पीतल का होगा
29:16चांदी का होगा कुछ भी नहीं है आप मिट्टी
29:19का मिट्टी का पात्र ले मगर स्टील में कहीं
29:22नहीं पर आप तो पद्धति चल प्रचलन है इसका
29:24कि स्टील में ही खाना खिलाएंगे तो शनि है
29:26वो स्टील का चम्मच आप में डाल के खाना खा
29:29रहे हैं तो यह तो मतलब है ही नहीं मतलब यह
29:32तो कहीं हिसाब ही नहीं बैठता इसका एक और
29:35कंफ्यूजन था मैम मेरा कि आपने शाद कर दिया
29:38तर्पण कर दिया पित्रों का मंत्र जाप करके
29:40उनको अपनी साधना का फल भी दे दिया वो पितृ
29:43लोक पहुंच गए या अगर वहां है तो ऊपर उठ गए
29:46कहीं यह उनके कर्मों को डिलीट करने के लिए
29:49तो नहीं होता मतलब उनकी सोल जो कर्म लेके
29:52गई है ऐसा तो नहीं कि ये कर्म भी उनके
29:55खत्म हो जाएंगे वो भी होगा आप ऊर्जा से जो
29:59बाह्य पुण्य आप क्रिएट करेंगे उससे उनको
30:02गति गति मिलेगी इसमें कोई दोराय नहीं है
30:06वो जन्म नहीं लेंगे वह जन्म लेंगे मगर
30:08पितृलोक से बाहर निकल जाएंगे देखिए जिसको
30:11जन्म नहीं लेना वह तो पितृलोक में फसे का
30:13ही नहीं पितृलोक में तो वही फसे जिसकी
30:16प्रॉब्लम जिसके कर्म में या इच्छाएं
30:19अतृप्त रह गई जिसको अभी भी वासना थी जो
30:21कहता है मैं मरना ही नहीं चाहता जिसको अभी
30:23भी मतलब नहीं तो वो तो जिसने आना ही नहीं
30:26है वो तो पितृलोक में फसे का ही नहीं वो
30:29तो फिर आवन जावन की स्थिति को जो पार कर
30:31दे वो तो योगी होता है वो तो कभी कभार कोई
30:33विरला ही आता है मतलब मैं ये नहीं कहती कि
30:35विरला ही आता है मगर कलयुग में तो वो
30:37विरला ही
30:39है है ना तो वो व्यक्ति जो आवन जावन को
30:43पार कर दे वो तो योगी है जो पितृलोक में
30:47फसा है वह तो साधारण मनुष्य है जो अपनी
30:49वासनाओं में फसा हुआ है आपके वशिप से उसका
30:53आवन जावन खत्म हो जाए तो आपके वशिप से वो
30:56व्यक्ति योगी नहीं हो सकता मर पितृ लोक से
30:58मुक्त हो जाएगा यही पूछ रही थी मैं कि
31:00कर्मा डिलीट नहीं कर सकते आप किसी नहीं
31:02कुछ दुष्कर्म तो डिलीट होगा दुष्कर्म
31:04होंगे कुछ डिलीट होगा तभी तो पितृलोक से
31:06उठ जाएगी वो आत्मा ए फिर कहां जाएगी पितृ
31:08लोक से उठकर वो दोबारा आ सकती है वो किसी
31:10और लोक में जा सकती है वो भूलोक में आ
31:13सकती है दैट डिपेंड्स अच्छा कई बार ऐसा
31:16होता है मैम कि हमें पर्टिकुलर पितृ पक्ष
31:19में ही पित्रों के सपने आते हैं हम कभी
31:21अपने किसी दादी बाबा को देख लेते हैं नानी
31:23नाना को देख लेते हैं तो ऐसा क्यों होता
31:25है या फिर ये कहीं सबकॉन्शियस माइंड में
31:27है ये सबकॉन्शियस माइंड में नहीं है मैंने
31:29पहले ही कहा कि लिंग देह पृथ्वी की कक्षा
31:33में और वास्तु में जैसे ही गणेश जी अपना
31:36स्थान छोड़ते हैं पहले यह लोग आते हैं तो
31:38जब यह लोग आएंगे तो स्वप्न में क्योंकि अब
31:40आपके पास आ गए तो आपके स्वप्न में आ सकते
31:43हैं अब ज्यादा आसानी से आपको ऐसे संकेत
31:46मिलेंगे हम कि अभी यहां मत जाओ यहां जाओ
31:49यह नहीं तो कोई आ जाएगा कि मुझे यह खिला
31:52दो आप नहीं सोच रहे होंगे पर आपके हाथ से
31:55हो
31:56जाएगा क्योंकि वह हो कर करा लिया
32:00जाएगा मैम एक सपना जो कई बार कई लोगों को
32:04आता होगा कि उनके कोई पित्र हैं या कोई
32:06उनके पूर्वज हैं वो उनके सपने में आ रहे
32:08हैं और उनको बारबार कोई चीज मांग रहे हैं
32:11उनसे मान लीजिए कोई महिला है तो साड़ी
32:13मांग रहे हैं कुछ खाने की चीज मांग रहे
32:15हैं पैसे मांग रहे हैं जरूर देना चाहिए दे
32:18दो बिल्कुल दो सपने में अगर मांग रहे हैं
32:21तो वो व्यक्ति सामने आ जाएगा नहीं तो
32:23मंदिर में आप दे दे दान कर दान कर दे वो
32:26देना चाहिए बकुल देना चाहिए एक सुपरस्टिशन
32:29ये है मैम कि अगर आपने सपने में पैसे दे
32:31दिए तो मतलब पित्र बुरा करेंगे नहीं नहीं
32:33सपने में आपने पैसे नहीं दिया आपने कुछ
32:35दान एक मंदिर में कर दिया कि जो मैंने
32:37स्वप्न देखा था मैं वो यहां देता
32:39हूं आपने सब कुछ वो वर्चुअल हो रहा है
32:42आपने सब कुछ वर्चुअल नहीं करना आपने अनाज
32:44सचमुच में बनाना है और देना है आपने सचमुच
32:47में तर्पण ऐसे करना है आपने सचमुच में
32:49नाभी में नाभी तक जल में खड़े होना आपने
32:51जाप करना है आपको भगवान ने ये पंच तत्व
32:54आपको प्राण वायु दे रहे हैं आप अपनी ऊर्जा
32:57से मंत्र पढ़ सकते हैं अपनी रीड की हड्डी
33:00सीधी रख के आसन स्थ हो सकते हैं आज आप
33:02थ्री डायमेंशन में हैं
33:05राट अपने आप को उर्ण कर ले किसी को अगर
33:09मैम पैसे की बहुत दिक्कत आ रही है पैसा
33:12कुछ भी कर रहे हैं नहीं आ रहा है या टिक
33:14नहीं रहा है बहुत ज्यादा कर्जा चढ़ा हुआ
33:16है या फिर बीमारी बहुत है हेल्थ खराब चल
33:18रही है करियर रिलेटेड इश्यूज है क्या उसके
33:20लिए यह पितृ पक्ष एक अपॉर्चुनिटी हो सकती
33:23है इन सब परेशानियों को खत्म करना देखिए
33:26कई बार यह जरूरी नहीं हो कि आप पर जो
33:28प्रारब्ध कर्म आया है वो पितरों के
33:31नाराजगी से आया है फिर तो आप कहेंगे मेरी
33:33जिंदगी में जो भी खराबी है वह पितरों के
33:35कारण है ऐसा नहीं है आपका अपना प्रारब्ध
33:37कर्म हो सकता है इसमें ऐसा आप ऐसा कर सकते
33:40हैं कि जैसे लिंगाष्टकम एक ऐसा स्तोत्र है
33:44जब आप कर्जे में डूब जाए आपका पैसा फसा हो
33:47तो लिंगाष्टकम स्तोत्र का जाप उस फसे पैसे
33:51को ले आता है अब इसको आप किसी भी शनिवार
33:55को कर सकते हैं और श्राद पक्ष में जब आप
33:58आप ये नहीं कहेंगे मेरा पैसा आपको तो यह
33:59पित्रों को देना है आपने ये फिर वो इससे
34:03सिर्फ यह नहीं काम होगा और भी बहुत स
34:05चीजों हो जाए आपने तो ऊर्जा दे दी अब
34:07मंत्र ऊर्जा पर पैसा फसा हो आप डेट में हो
34:10तो लिंगाष्टकम इसमें तिल के तेल की धार
34:14महादेव पर शिवलिंग पर छोड़ते हैं
34:16लिंगाष्टकम ऋण मोचन मंगल स्तोत्रम यह पाठ
34:21भी आप कर सकते हैं मगर अपना फायदा नहीं
34:22सोचे इसमें तो आपने पित्रों को ऊर्जा देक
34:26उनको गति देनी है खुश हो गया आपको वो जो
34:29भी वरदान द पर ये वैसे उपाय आप सिर्फ
34:33श्राद्ध के अलावा भी कर सकते हैं ऋणमोचन
34:35मंगल स्तोत्रम लिंगाष्टकम ये ऐसे उपाय हैं
34:39जो फसे पैसे को निकालते हैं एक और आखरी
34:43सवाल मैम पित्र जब तक शरीर में है जब तक
34:46वो एक आत्मा शरीर में है तब तक वो एक
34:49साधारण मनुष्य है वो किसी को वरदान नहीं
34:52दे सकता वो किसी को श्राप नहीं दे सकता
34:54योगियों की बात अलग है लेकिन जैसे ही वो
34:56पितृ बन जाते हैं जैसे ही वो
34:58डेथ हो जाती है और एक आत्मा का स्वरूप ले
35:00लेते हैं तो उनमें ऐसी पावर कहां से आती
35:03है कि वरदान दे सकते हैं नहीं नहीं इसका
35:06मैं इसका मतलब समझाती
35:08हूं ऐसा नहीं है कि वह वरदान दे रहे हैं
35:11या वह जब मृत्यु के के बाद ही वरदान देंगे
35:16इसको ऐसे समझे जब तक आपके पेरेंट जिंदा भी
35:19है अब हर एक प्रकार के लोग हैं दुनिया में
35:23मतलब अगर व दिल से कोई मां कहे कि मैंने
35:26मेरा पुत्र ऐसे उसको आशीर्वाद दे तो वो तो
35:29तब भी लगेगा उसे आप ये नहीं कह सकते ये तो
35:31मृत्यु के उपरांत ही लगेगा वो तो जीवित
35:34होकर भी मां अपने पुत्र को जो प्रार्थना
35:37और जो ब्लेसिंग्स देगी वो कवच का काम कर
35:40जाएंगे पुत्र का उसका अहित नहीं होने
35:42देंगे वो जीवित मां भी वरदान देगी अब यहां
35:46हम कह रहे हैं कि एक आत्मा है आपकी डीएनए
35:49लाइन की वो परेशान हो रही है परेशान है
35:53मैं पितृलोक में फस गई हूं फस गया हूं
35:56फंसी हुई है
35:58अब आप किसी भी फंसे हुए का केज जब खोलते
36:00हैं चाहे वो पक्षी क्यों ना हो वो आपको
36:03थैंक यू बोलता है ना थैंक यू से ऑटम में
36:06आपको दुआ लगती है अगर आप कोई केज पक्षी
36:10पांच तोते खरीद ले और उनका दरवाजा खोल दे
36:12और वो उड़ जाए उनको थैंक यू बोलने की
36:14जरूरत नहीं है आपको ऑटो में दुआ लग जाएगी
36:18ऑटो ऑटो में स्वाभाविक स्वत लगेगी कुछ
36:23करना नहीं पड़ेगा उसको आपकी भाषा भी नहीं
36:24आएगी कुछ भी नहीं वो तो बस उड़ गया पर
36:26उसको वो जो व जो उसको हर्ष हुआ वोह आपको
36:29ट्रांसफर होगा आपका कर्म है ना आपने अपना
36:32पैसा दिया उसको छुटकारा दिया छुटकारा अपने
36:34आप में आपने पुण्य कर्म क्रिएट कर लिया और
36:37अगर प्रेत योनि में फसे पित्र हमें परेशान
36:40करें तब फिर क्या करें देखिए कई बार तो
36:43ऐसे ऐसे केसेस होते हैं जब वह बहुत ही
36:46ज्यादा परेशानी के तो कई बार तो वो आके
36:49मांगते हैं कि जैसे कहते हैं कि यह हमारा
36:51स्थान है या उपद्र फिर वो कई बार तो इसमें
36:55आपको किसी कोई गुरु भी आपकी मदद कर सकते
36:57बड़े गुरु हैं जो आपको गाइड कर सकते हैं
37:00क्या कर जो सिद्ध लोग हैं वो आपको गाइड कर
37:03सकते हैं कि क्या करें पर आप श्राद तो कर
37:06ही दें आपको संकेत आ रहे हैं आप जो वो चाह
37:08रहे हैं वो आप करें और छूटे छूटना है और
37:11उर्द आगामी होना है जीवन का बस यही है आप
37:13वो खाए आप वो पहने आप वो करें जो आपको
37:16उर्द आगामी बनाए फिर वो कुछ भी हो उर्द
37:18आगामी होना है आपको छूटना
37:20है बहुत-बहुत धन्यवाद मैम जुड़ने के लिए
37:23वाकई में श्राद्ध पक्ष के बारे में बहुत
37:25अलग बहुत नई जानकारी थी जी आई होप कि आप
37:28इस शाद पक्ष का पूरी शिद्दत के साथ फायदा
37:31उठाए और अपने पूर्वजों को अपने पित्रों को
37:35एक उर्द गामी प्रोसेस दे और वो ऊपर उठ जाए
37:39जुड़े रहिए स्पीकिंग ट्री के साथ नमस्कार