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वाजपेयी ऐय्याश नहीं बल्कि हत्या की साज़िश रचने वाले भी थे, मधोक ने ऐसा क्यों लिखा? | Power Play

Molitics · 8,214 words · 38 min read

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0:00इस किताब से बहुत सारे आरोप लगते हैं अटल

0:02बिहारी वाजपेयी के ऊपर।

0:03आरोप लगते हैं या फैक्ट्स हैं इसमें

0:05दीनदयाल उपाध्याय जी का मर्डर। उसमें यह

0:08किताब कहती है कि सीधा [संगीत] का सीधा ये

0:10और नाना देशमुख शामिल थे। पेज 25 में कहते

0:13हैं वहां नित्य नई-नई लड़कियां आती हैं।

0:15अटल ने इस मकान को व्यभचार का अड्डा बना

0:18रखा है। अय्याशी का अड्डा। अटल बिहारी

0:20वाजपेयी अकेला अय्याश नहीं था वहां पर। सर

0:23सर्वा आरएसएस का बोल रहा है। मुझे भी इन

0:26लोगों की चारित्रिक कमजोरियों की जानकारी

0:28है। परंतु मुझे संगठन चलाना है।

0:30अटल बिहारी वाजपेयी की आलोचना बड़ी कम

0:32होती है। क्या है अटल बिहारी वाजपेयी?

0:34अटल बिहारी वाजपेयी असल में हिंदुत्ववादी

0:37जो ट्रेनिंग कैंप्स हैं उसकी पैदावार हैं।

0:40जैसे मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी अगर उनका

0:43कंपैरिजन होता तो लोग कहते हैं कि नहीं

0:45मोदी बहुत ज्यादा हार्ड लाइनर है। अटल

0:46बिहारी वाजपेयी कम्युनल नहीं थे उस तरह से

0:48जैसा मोदी दिखते हैं।

0:50सबसे पहला बंदा जो यह कहता है कि

0:53मुसलमानों को हमने सिविलाइज बनाना होगा।

0:56उनको इंसान बनाना है।

1:00नमस्कार दोस्तों, बहुत कम राजनेताओं को यह

1:03हासिल होता है कि तमाम विपक्षी पार्टियां

1:06जो हैं, अलग-अलग दल जो हैं, उसके लोग भी

1:08उसकी इज्जत करें। उसके बारे में ठीक-ठीक

1:10बात बोले। आपको खासतौर पे आज आप देखेंगे

1:13वेंडेटा पॉलिटिक्स का जमाना है। तो लोग

1:15अपने विपक्षी को देखना ही नहीं चाहते

1:18लेकिन एक राजनेता है जो पंडित नेहरू के

1:20मरने के बाद कालजई भाषण आप कह सकते हैं

1:23वैसा भाषण देता है। इंदिरा गांधी के

1:25एक्शंस के बाद उन्हें दुर्गा कहता है और

1:28उसके लिए कहा जाता है कि गांधीियन

1:30सोशलिज्म के साथ वो भारतीय जनता पार्टी को

1:33आगे बढ़ा रहा था। चुनावों में जब सफलता

1:35नहीं मिली तो आडवाणी जी को लाया जाता है

1:37कि भाई अब अग्रेसिव आईडियोलॉजी की हमें

1:39जरूरत है। नेता हैं अटल बिहारी वाजपेयी आप

1:41समझ ही गए होंगे। कवि थे, कवि होने के

1:43नाते भी उनकी बड़ी बाइंयां होती हैं, बड़ी

1:45तारीफें होती हैं। लेकिन हम उसी नेता के

1:48दूसरे पहलू को देखते हैं तो जमीन समतल कर

1:50देनी चाहिए वाला भाषण हमें दिखता है। हमें

1:53दिखता है नील्ली नरसंहार से पहले दिया गया

1:55उनका भाषण हमें समझ में आती है या दिखती

1:58है। बलराज मधुक की लिखी हुई किताब जिसमें

2:01बहुत सी ऐसी बातें लिखी हुई हैं जो असहज

2:04करेंगी भारतीय जनता पार्टी के लोगों को या

2:06फिर अटल बिहारी वाजपेयी को पसंद करने वाले

2:09लोगों को। आखिर कैसे अटल बिहारी वाजपेयी

2:11तमाम दलों के लोगों के दिलों में जगह बना

2:13पाते हैं? उनकी राजनीतिक यात्रा रहती कैसे

2:16है? और 1942 भारत छोड़ो आंदोलन उस वक्त तो

2:19जवान थे। कर क्या रहे थे अटल बिहारी

2:21वाजपेयी? एक आरोप जो उनकी जितनी भी आप

2:24तारीफें कर लें या जितने भी लोग तारीफें

2:26कर लें ये एक दाग की तरह है। तो अटल

2:29बिहारी वाजपेयी के बारे में बातचीत करने

2:31के लिए शमशुल इस्लाम सर से हमने रिक्वेस्ट

2:33की और सर ने स्वीकार किया। बहुत-बहुत

2:35स्वागत सर आपका और थैंक यू रिक्वेस्ट

2:37एक्सेप्ट करने के लिए। तो अटल बिहारी

2:39वाजपेयी पे मैं बात करना चाहता हूं। बड़ा

2:42दिलचस्प कैरेक्टर मुझे वह लगते हैं।

2:44अक्रॉस पार्टी लाइंस सर मैं देखूं तो एक

2:46उनकी एक वैलिडेशन है। अटल बिहारी वाजपेयी

2:49की आलोचना बड़ी कम होती है। बहुत कम ऐसे

2:51राजनेता हैं। नेहरू की मौत के बाद उनका

2:54भाषण है। इंदिरा गांधी को दुर्गा कहने की

2:56बात है। राजीव गांधी के लिए बड़े उन्होंने

2:58शब्द बोले प्रशंसा के कि भाई मुझे राजीव

3:01गांधी ने मदद की। तो सबके साथ चलते हुए

3:03दिखते हैं। गांधीन सोशलिज्म को लेकर

3:05भारतीय जनता पार्टी के पहले अध्यक्ष वो

3:07रहे। लेकिन नीली नरसंहार भी दिखता है।

3:10उससे पहले का भाषण बाबरी विध्वंस से पहले

3:13का भाषण ये सब कुछ भी दिख रहा है। क्या है

3:15अटल बिहारी वाजपेय? अगर मैं कहूं आप उनका

3:17चरित्रच चित्रण जैसा कुछ करें पर्सनालिटी

3:22बात यह है कि अटल बिहारी वाजपेई असल में

3:26एक टिपिकल

3:28हिंदुत्ववादी

3:30बौद्धिक जो शिविर हैं जो ट्रेनिंग कैंप्स

3:34हैं उसकी पैदावार हैं। लेकिन वो जो आरएसएस

3:40का जो जूता है या जो साइज है वो उससे

3:44ज्यादा आकांक्षा रखने वाला आदमी है। अच्छा

3:48हां और आरएसएस की प्रॉब्लम हमेशा से है कि

3:53वो वो जो शान शौकत और नाम कमाने वाले

4:00लोगों के चक्कर में जो पड़ता है तो वो

4:03उसको कंट्रोल नहीं कर पाता है। और ये

4:07सावरकर ने अब हम जो लोग राजनीति में भेजते

4:12हैं उसको इंदौर वर्ग जो उनका इंदौर का

4:15सारे इंडिया से आए हुए 1964 या उसके पास

4:18का भाषण है कि हम बहुत सारे लोग राजनीति

4:22में भेजते हैं और उनको नट की तरह से

4:24भूमिका निभानी होती है।

4:27लेकिन

4:29बहुत सारे लोग उससे उस अपनी सीमा को समझते

4:34नहीं है और उससे आगे निकल जाते हैं वो

4:36अच्छा नहीं है।

4:37वो यानी हम कंट्रोल नहीं कर पाते। क्यों

4:40नहीं कंट्रोल कर पाते हैं? आरएसएस क्यों

4:42नहीं कंट्रोल कर पाती है? जो जो आपको

4:44मोल्ड कर देती है जो आपको पूरा एक नया

4:47इंसान बना देती है। नया हिंदू बना देती

4:49है। इंसान तो नहीं नया हिंदू बना देती है।

4:52तो ऐसा ऐसा क्यों होता है? और ये पहली बार

4:54नहीं हो रहा। अटल बिहारी वाजपेयी पहली

4:58मिसाल नहीं है आरएसएस में। अच्छा

5:00कि वो आरएसएस से बड़े बड़ा बन जाते हैं।

5:03मोदी दूसरे हैं। यानी मुझे लग रहा है कि

5:08जो लोग मोदी जो कर रहे हैं आरएसएस के साथ

5:12और अटल बिहारी वाजपेयी ने जो किया वो नहीं

5:17समझते तो वो अटल बिहारी वाजपेयी ने आरएसएस

5:19के साथ जो किया था वो भी उसको उसको एक

5:21अपना हैंडीमैन बना दिया था कि वो जो चाहते

5:25हैं वो आरएसएस वाले करते रहें। तो ये

5:30है और बात यह है कि आप अपनी भाषण से आप

5:36अपनी मुस्कुराहट से आप अपनी कविता से आप

5:40अपने सारे जो आपके जिस्म पर जो है जो उस

5:47तरह की बदनुमा चीजें आप उसको छुपा सकते

5:49हैं। ये

5:51ये तो आज के प्रधानमंत्री

5:53है सांप्रदायिकता भी क्योंकि जब कंपैरिजन

5:55होती है सर तो ऐसा कहते हैं कि नहीं मोदी

5:57जितने हार्ड लाइनर हैं अटल बिहारी वाजपेयी

5:59हार्ड लाइनर नहीं थे सांप्रदायिक नहीं थे

6:01क्या वो सच में सांप्रदायिक नहीं थे या

6:03फिर गठबंधन के साथ

6:04क्या बात कह रहे हैं सांप्रदायिक हो

6:06सांप्रदायिकता हो या दूसरे सवाल हो वो बात

6:10यह है कि दोगलापन जो कैरेक्टर का है वो

6:13इसलिए आपको यानी अगर आप

6:17पाकिस्तान के साथ खड़े हैं और वहां पर

6:19दोस्ती करा रहे हैं तो उसकी तारीफ में आप

6:21जो पुल बांध सकते हैं जब उनके खिलाफ लड़ाई

6:25या उनकी उनके खिलाफ अगर कुछ बोलना है तो

6:28उसमें भी आप उतने ही उतनी ही ज्यादा

6:32यानी इतिहास रच सकते हैं। तो ये आरएसएस के

6:36बौद्धिक शाखाओं से जो चीज पैदा होती है ये

6:39उसका है। जरा एक मिनट जरा एक किताब मैंने

6:41उठानी पड़ेगी सामने से। ये जो अंग्रेजी ये

6:44बीच में अंग्रेजी है हिंदू नेशनलिज्म। जी

6:47हिंदू नेशनलिज्म ये बीच में है भाई

6:50अंग्रेजी की जी हिंदू नेशनलिज्म

6:57जी हां बस वो असल में वो सवाल आपने आप ले

7:03ही आए वो बहुत इंपॉर्टेंट है

7:12जरा आपने एक काम और करना होगा भाई इधर आना

7:15ये नीचे वाली ड्रर में से एक गुलाबी रंग

7:17की फाइल है।

7:20हां ये ये फाइल मुझे दे दीजिए। ये फाइल

7:25जी

7:28ये मेरा खजाना है भाई साहब।

7:49अरे भाई जरा

7:55वो उन्होंने मुसलमानों के बारे में सबसे

7:57पहले जो कहा था ना कि हमने उनको उनको

7:59इंसान बनाना होगा।

8:01अटल वाज

8:02हां जी जी

8:10कोई

8:28नहीं छोड़ दीजिए उसको जी चलिए कहां हमने

8:32छोड़ा था भाई कि हां तो जी तो अ

8:39बात ये है कि आरएसएस

8:42जो है वो मोड़ करती है लेकिन आरएसएस की

8:47क्षमता के बाहर होता है कुछ इतने इतने

8:50इतने तेजतर्रार लोग होते हैं कि वो

8:53वो उसको

8:54आकांक्षाएं बड़ी होती है।

8:55हां आकांक्षाएं बड़ी होती है। और ये

8:57गोलवालकर कह चुका है कि वो लोग आते हैं।

8:59हम कहते हैं हमने कहा कबड्डी तो कबड्डी

9:01खेलो। तो हमने कहा कि फुटबॉल खेलो तो

9:03फुटबॉल खेलना होता है लेकिन वो लोग नहीं

9:05करते हैं।

9:06तो अटल बिहारी उनमें से एक थे और उसके बाद

9:09ये अपना आज के हैं

9:12हम

9:13आज के हैं तो वो ये उस तरह का है और इनका

9:18आरएसएस में खास बात ये भी होती है कि आप

9:21अपने सारी बुराइयों को बहुत लफाजी करके आप

9:26छुपा सकते हैं। यानी और उस पर आप चर्चा

9:29नहीं करेंगे। हम

9:30जैसे आपने बताया कि सन 1942 में जो क्विट

9:34इंडिया मूवमेंट में जो गद्दारी की

9:36उसमें जो भूमिका रही थी 1942 से पहले मैं

9:39एक बात केवल ये जानना चाह रहा था सर कि

9:42जैसे मोदी और

9:44अटल बिहारी वाजपेयी अगर इनका कंपैरिजन

9:46होता तो लोग कहते हैं कि नहीं मोदी बहुत

9:47ज्यादा हार्ड लाइनर हैं। अटल बिहारी

9:49वाजपेयी सहिष्णु आदमी थे। टॉलरेंट आदमी

9:52थे। वो कम्युनल नहीं थे उस तरह से जैसा

9:54मोदी दिखते हैं।

9:56इस बात में कितनी सच्चाई है?

9:58नहीं मुझे नहीं लगता कि वो हार्ड और सॉफ्ट

10:02की बात नहीं है। बात आप एक ही करते हैं।

10:04जैसे अटल बिहारी वाजपेयी आप बाबरी मस्जिद

10:07से पहले और नीली मसेकर को लेके जो रोल है

10:10और उसके बाद सबसे पहला बंदा जो ये कहता है

10:14कि मुसलमानों को हमने सिविलाइज्ड बनाना

10:17होगा। उनको उनको ये ये इसी का हालांकि

10:21उन्होंने बाद में कहा कि मैंने तो ये

10:23मैंने मैंने तो लिख लिखा नहीं। ऑर्गेनाइजर

10:25के अंदर छपा हुआ है।

10:26ठीक।

10:27ऑर्गेनाइजर के अंदर छपा हुआ है। उन्होंने

10:28कहा कि नहीं मैंने तो लिखा ही नहीं।

10:30ये ये ये लोग वो वो कर सकते हैं।

10:33मतलब आईडिया सेम था कम्युनल।

10:34हां। और कई बार ऐसा लगता है कि ये पिनक ये

10:38ये क्या होता है कि आपने लिखा आपने

10:39आर्टिकल लिखा और आप फिर कहेंगे कि हमने

10:42हमने तो हमने तो नहीं किया। है ना? ये

10:45बड़ी अजीबोगरीब बात है।

10:47और आप ये देखिए कि 1942 का

10:511942 में ये अपने

10:55गांव गए हुए थे। वहां गांव पर और वहां भी

10:59ये दो तरह की बातें करते रहे। कभी बोलते

11:02हैं वो एबीपी के मेंबर थे। कभी कहते

11:04एआईएसएफ का मेंबर था। ये भी उन्होंने कई

11:06जगह कहा कि मैंने तो अपना अपना छात्र जीवन

11:09जो है वो कम्युनिस्टों से शुरू किया था।

11:11है ना? तो अब वो कुछ

11:13कहानियों में बड़ा अंतर रहता है। जैसा

11:15मोदी जी की कहानियों में अंतर दिखता है।

11:17जी हां जी। अंतर रहता है। जी। तो ये तो

11:19शाखा से वो सीखते हैं।

11:21आपने कैसे कैसे टोपी

11:24मानी है आपने वो सब बहुत अच्छे तरीके से

11:26जानते हैं।

11:27तो आप देखिए कि ये गए और ये मैं मेरे पास

11:31ओरिजिनल है बॉम्बे बिलिट्स वो हिंदी

11:34अंग्रेजी उर्दू तीनों में छपता था। 26

11:37जनवरी 1974 का है हम

11:40कि कैसे इन लोगों ने ये और इनके भाई साहब

11:43जो हैं ये दोनों दोनों एक जलसे में गए हुए

11:47थे या स्कूल से लौट रहे थे तो कुछ हुआ और

11:50इन्होंने

11:53पहली सितंबर 1942 को वहां इनके गांव की जो

11:58तहसील थी वहां पर जो एक सरेंडर माफीनामा

12:02कहें या जो भी कहें उसको दिया उसमें

12:04उन्होंने बताया कि मेरा नाम अटल बिहारी है

12:05फादर का नाम गौरी शंकर है। मेरी कास

12:08ब्राह्मण है। मेरी ऐज 20 साल है। मैं

12:10स्टूडेंट हूं ग्वालियर कॉलेज में बटेश्वर

12:13पुलिस स्टेशन बा डिस्ट्रिक्ट आगरा बा तो

12:16एक बड़ा स्टेशन है। जी

12:18और उनसे जब ये पूछा गया कि क्या आपने वहां

12:22आग लगाई और नुकसान पहुंचाया संपत्ति को

12:27तो उन्होंने ये स्टेटमेंट दिया।

12:29हम

12:29ये उर्दू का उर्दू का स्टेटमेंट है।

12:32इसको आपने लगाना चाहिए। मैं आपको दे दूंगा

12:34और इसमें उन्होंने कहा कि वो बटेश्वर

12:38बाजार में से

12:40आला के हम गुजर रहे थे तो बटेश्वर बाजार

12:44में अलाउदल गाया जा रहा था।

12:46अला उदल वो अपना वो है।

12:48हां वो जबरदस्त जो अपना पहला जो हिंदू

12:52सम्राट था उसके खिलाफ उसने जो जुल्म किए

12:55थे दो भाइयों पर उसके लिए लिखा था।

12:57के गाता

12:59गाता तो वो इमरजेंसी में हम लोगों ने भी

13:02अलाउदल इंदिरा गांधी के खिलाफ बनाया था और

13:04किसानों के जी खूब गाते थे

13:07तो हम 2:00 बजे हम गुजर रहे थे तो वहां पर

13:12काकुआ जिनका नाम लीलाधर और मोहन आए और

13:18उन्होंने

13:20एक भाषण दिया गरम भाषण और कहा कि जो जंगल

13:23के कानून है उनको तोड़ेंगे हम वहां जंगल

13:26जंगल का इला इलाका है तो 200 लोग गए

13:28फॉरेस्ट ऑफिस मैंने मैं और मेरे भाई ने भी

13:31क्राउड को फॉलो किया और हम बटेश्वर ऑफिस

13:34पहुंच गए हमारे हम दोनों भाई जो थे वो

13:37पीछे रहे ये लोग आगे बढ़ गए हम पीछे रहे

13:40लोग आगे बढ़ गए और उसके बाद मुझे पता नहीं

13:41कि क्या हुआ मैं इन वहां पर सिर्फ दो

13:45लोगों को जानता हूं बहुत सारे लोग थे एक

13:46काकुआ और एक महवान

13:48हम

13:49ये वहां थे मैंने यह भी देखा कि वहां एक

13:54दीवार को तोड़कर उसकी ईंटें गिर गिर रही

13:56थी। कौन दीवार तोड़ रहा था तो यह पता

13:59नहीं। लेकिन दीवार से ईंटें गिर रही थी।

14:01मैं अपने भाई के साथ मैपुरा में

14:05वापस आने के लिए आ गया और क्राउड हमारे

14:08पीछेछे आई।

14:11तो ये जो दोनों लोग हैं ऊपर वाले इन्होंने

14:13एक कैटल पाउंड से एक बाड़ा था। उससे कुछ

14:18वो बकरियां निकाल दी। 10 और 12 पीपल वर इन

14:21द फॉरेस्ट ऑफिस। आई वास अ डिस्टेंस ऑफ़ 100

14:23जब मैं 100 गज की दूरी पर था। मैंने इस

14:26काम में कोई मदद नहीं की।

14:28इन्होंने दो लोगों को आइडेंटिफाई किया।

14:31उसमें जो काकुआ थे उनको तो सजा हुई। इनकी

14:34इनकी उस पर

14:35इनके बयान पर

14:36इनके बयान पर सजा हुई। और हालांकि और और

14:39भी बताया जाता है कुछ और लोगों को एक

14:41वाजपेयी थे उनको भी सजा हुई। पर उसका

14:44डॉक्यूमेंट हमारे पास नहीं है पर वो काफी

14:48है।

14:49अच्छा तो

14:50ये तो सीधे तौर पे मुखबरी हुई ना सर।

14:53हां जी मुखबरी हुई और मुखबरी इस तौर पर कि

14:57इनको इनको छुड़वाने में इनके एक रिश्तेदार

15:01थे जो इंपीरियल काउंसिल के कोई फूफा या

15:04कोई थे वो उसके उसमें भी थे तो उन्होंने

15:06भी मदद की इनको

15:08छुड़वाने में तो ये इन्होंने धोखा किया ये

15:12चुप भी रह सकते थे लेकिन अच्छा ये तो

15:15बच्चे थे ना तो इनको दबाव डलवा कर नाम

15:17लिखवाए गए होंगे इनका नाम लिखो और ये

15:19तैयार हो गए

15:20हां

15:20ये दो ही नाम जो हैं भाई एक छोटी सी जगह

15:24है बेतेश्वर और उसके बा तहसील के अंदर तो

15:27कोई मुश्किल नहीं होता है लोगों को

15:28पहचानना

15:29पर इनसे वह दो लोगों का नाम

15:32लिखवाया गया

15:32लिखवाया गया और ये लिखने को तैयार हो गए

15:35तो इसको ये बड़ा गंभीर मामला था लेकिन इस

15:39पर उन्होंने कभी चर्चा नहीं की इनके भाई

15:42ने मान लिया था कि हां हमारे साथ ये हुआ

15:44था लेकिन ये हमेशा मना करते थे कि नहीं

15:46ऐसा कभी नहीं हुआ था

15:47और अखबार वाले भी इनसे नहीं पूछते थे और

15:50जो भी पूछता था तो उसको आप कम्युनिस्ट या

15:52कुछ भी कह के आप उसको उसको उसको धक्का

15:55दिया करते थे कि वो और मजे की बात यह है

15:59कि इस पर मुकदमा भी चलाया था बिलिट्स पर

16:04अच्छा

16:05नाना देशमुख की तरफ से लेकिन वो कोर्ट ने

16:07उसको डिसमिस कर दिया था जहां तक मेरी

16:10क्योंकि वो फ़क्चुअल बात थी वो

16:11हां वो वो उसको उसको उसको मान लिया गया

16:14था।

16:14अच्छा आपने अभी कहा कि कोई अगर सवाल पूछता

16:16था तो उसे कम्युनिस्ट बता के धकिया दिया

16:19जाता था।

16:20तो ये रवैया था अटल बिहारी वाजपेयी का भी।

16:22बहुत ज्यादा राष्ट्र विरोधी और तुम चीन के

16:24दलाल हो और यह सब वो तो यह तो उनका टसाली

16:27जुबान थी आरएसएस वालों की और और वो वो खुद

16:31भी जो है यानी रूस को लेके और चीन को लेके

16:34वो क्या-क्या क्या-क्या कहते रहते थे वो

16:37तो उनके अगर अब आप भाषण सुनेंगे

16:39और डिपेंड कर रहा है

16:43आप कहां पर भाषण कर रहे हैं

16:45हम

16:46अगर आप जनता में भाषण कर रहे हैं तो आप

16:49कुछ भी बोल सकते हैं कुछ भी कर सकते हैं

16:51लेकिन लेकिन उनको पता है कौन सुनने वाला

16:53है तो

16:54कौन सुनने वाला है तो उस हिसाब से वो भाषण

16:57ये ये उनकी एक खास बात थी जो मोदी की भी

17:00है

17:00कि आपको जो ऑडियंस है उसके हिसाब से आप

17:03आपने करेंगे है ना और आपने अभी दूसरे

17:06दूसरी जगह जो इससे मुख्तलिफ लोग थे वहां

17:10पे जो आपने भाषण किया था वो

17:13अलग है एक्सेप्ट मुसलमान

17:15मुसलमान के लिए वो वो लगभग एक ही भावना

17:19उनकी रह गई

17:20ये इस बंदे बंदे ने आरएसएस की जो सबसे

17:23शमना मुसलमानों के बारे में है कि वो सभ्य

17:26नहीं है। उनको इंसान बनाना है। उनको भारत

17:30के साथ जोड़ना है।

17:31हम

17:32उनको वो सब मुसलमान बनके वो इस सबसे अलग

17:35हो गए। असल में वो इनका लेख है। वो हम डाल

17:39देंगे। मैं आपके आपके जाने से पहले वो मिल

17:42जाएगा तो उसको हम हम डाल देंगे। अच्छा

17:45दूसरी बात यह है कि ये इनका प्रधानमंत्री

17:51बनने से पहले

17:53अ इन्होंने जो जंक्शन संघ और भारतीय जनता

17:57पार्टी

17:59जंक्शन संघ के लिए और भारतीय जनता पार्टी

18:01में जो जो किया उसका तो एक ऐसा सबूत है

18:04जिसको आप किसी को गाली नहीं बख सकते हैं

18:06कि ये तो विरोधी है। ये किताब है

18:09तीसरा भाग बलराज मधु जी की

18:12जी हम

18:13इस किताब के जानिब से बहुत सारे आरोप लगते

18:17हैं अटल बिहारी वाजपेयी के ऊपर

18:19आरोप लगते हैं या फैक्ट्स हैं इसमें आरोप

18:21नहीं है

18:22ये तो

18:22ये तो फैक्ट्स फैक्ट्स पेश कर रहे हैं

18:24तो इसी किताब के हवाले से लोग जो कहते हैं

18:26अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में बहुत सारी

18:27बातें हैं

18:28बहुत सारी बातें और इसको

18:31बलराज माधव को जंक्शन से निकाल दिया गया

18:35बलराज माधव की मेंबरशिप खत्म कर दी गई

18:37लेकिन बल लाज मदोक पर कोई डिफेमेशन का केस

18:39नहीं किया गया। उसने जो कुछ लिखा है।

18:41ये बहुत इंपॉर्टेंट बात है।

18:42राइट?

18:43जी। और इस किताब में जो दो तीन चीजें हैं

18:46देखिए एक तो दीनदयाल उपाध्याय जी का मर्डर

18:49हां

18:50उसमें ये किताब कहती है कि सीधा का सीधा

18:53ये और नाना देशमुख शामिल थे।

18:55ये मतलब अटल बिहारी

18:56अटल बिहारी वाजपेय और हमको मुझे लगता है

18:59कि उसमें से

19:01कुछ सुनना चाहिए इनकी किताब में से। जी

19:04दीनदयाल जी भारतीय जनसंघ के पहले अध्यक्ष

19:07थे जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के

19:09पूर्णकालिक प्रचारक और समर्पित स्वयंसेवक

19:12थे। यह पहला बंदा था जो आरएसएस सीधा

19:14आरएसएस से आया था और ये जनसंघ के पहले

19:17अध्यक्ष बन गए थे। 1953 से जब उन्होंने

19:19भारतीय जनसंघ का महामंत्री का पद संभाला

19:22था। वह जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक के

19:24बीच सबसे मजबूत कड़ी का काम कर रहे थे। जी

19:28जी

19:28वह संघ के जनसघ में आए हुए प्रचारकों,

19:31संगठन मंत्रियों और कार्यकर्ताओं के साथ

19:33अभिन्न रूप से जुड़े हुए थे। इसलिए मेरी

19:35अपेक्षा थी कि जन संघ के अध्यक्ष के नाते

19:37उनको संघ का सर्वाधिक सहयोग और सम्मान

19:39मिलेगा। परंतु मुझे देखकर हैरानी हुई कि

19:42अध्यक्ष के रूप में दिल्ली लौटने पर ना

19:44उनका उचित स्वागत हुआ और ना उनके सम्मान

19:47में कोई सार्वजनिक आयोजन किया गया। हम

19:49देखिए ये वो है जबकि उसको आरएसएस चला रही

19:52थी और हम ये कहते हैं कि आरएसएस कंट्रोल

19:54करती है लेकिन दीनदयाल उपाध्याय जब बने तो

19:57उनको उनको कोई पब्लिक डिसेप्शन

20:00नहीं

20:00भारतीय जनसंघ ने नहीं दिया। फरवरी सन

20:03दोपहर को जब जंक्शन संघ के सदस्य दल की

20:05बैठक हो रही थी अकस्मात सूचना मिली कि

20:08दीनदयाल उपाध्याय नहीं रहे और क्यों उनका

20:10शव मुगलसराय रेलवे यारार्ड में पड़ा मिला

20:12है। जी अटल बिहारी वाजपेयी कार्यकाल कार्य

20:16कार्यालय मंत्री जगदीश प्रसाद माथुर और

20:18मैं लगभग 2:00 बजे वायुसेना विमान से

20:20दिल्ली से निकले और 3:00 बजे के लगभग

20:22वाराणसी पहुंच गए। वाराणसी विमान पतन से

20:25हमें मुगलसराय ले जाने के लिए कार की

20:27व्यवस्था की। कि मुगलसराय में वाराणसी के

20:29जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक पहले ही

20:31पहुंच चुके थे। वह वह वहां हमारी

20:34प्रतीक्षा कर रहे थे। परंतु अटल बिहारी

20:36वाजपेयी और जगदीश प्रसाद मासूर वाराणसी

20:38पहुंचते ही गायब हो गए।

20:40गायब हो गए।

20:41हां देखिए ये बोल रहा है। ये ये बंदा बोल

20:44रहा है।

20:46वह कहां गए ये मैं नहीं जानता। परंतु वह

20:48मुगलसराय नहीं गए। केवल मैं मैं ही वहां

20:50गया। उनका मुगलसराय ना आना मुझे अजीब लगा।

20:53जी जनाब उसके बाद

20:56इनकी जो पुलिस अधीक्षक से बात हुई

20:59मिस्टर मधोक मैं 30 वर्षों के अनुभव वाला

21:01एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हूं। यह मामला

21:03हत्या का है। दुर्घटना का नहीं है। पुलिस

21:05सीनियर पुलिस वाले ने उनको बताया। उसका

21:08नाम भी वो बताते हैं।

21:09उसके बाद इनका जो कहना है

21:12दीनदयाल उपाध्याय चिंतक, विचारक और लेखक

21:15भी थे। उनका यह लगातार प्रयत्न रहता था कि

21:18गंदी छवि वाले लोग जनसंघ में ना आए ना बढ़

21:21पाए ताकि संगठन की छवि खराब ना हो। इस

21:24कारण जन संघ के कुछ चरित्रहीन

21:26महत्वाकांक्षी लोग उन्हें अपनी

21:27महत्वाकांक्षा की पूर्ति के रास्ते में

21:29रुकावट मानने लगे थे। परंतु सर संचालक

21:32श्री गुरु जी के वर्धस्त और संघ जन संघ

21:36जनसंघ के कार्यकर्ताओं के प्रेम और सहयोग

21:38के कारण उन्होंने ऐसे लोगों की कभी परवाह

21:40नहीं की थी। पर आगे चलकर वो कैसे धोखा

21:44दिया इनको?

21:47गोलवलकर ने वो भी वो भी इनके जरिए ही हम

21:49सुनेंगे। दीनदयाल उपाध्याय केवल छ सप्ताह

21:52तक जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। इस

21:54काल में वह विशेष कुछ नहीं कर पाए। परंतु

21:5714 वर्ष तक जन संघ के महामंत्री रहते हुए

21:59उन्होंने अपने व्यक्तित्व कृत से जन संघ

22:02के कार्यकर्ताओं पर जो छाप डाली वो अनिट

22:04और वो अमिट और अमिट रहेगी। उनकी हत्या

22:08क्यों की गई? हत्या का षड्यंत्र किन लोगों

22:10ने किया? ऐसा करने के पीछे उनका हेतु और

22:12प्रयोजन क्या था? इस पर अभी तक रहस्य का

22:15पर्दा पड़ा है। परंतु यह पर्दा हटेगा

22:17अवश्य क्योंकि उनकी हत्या के संबंध में

22:19प्रस्थिगत साक्ष्य काफी मुखर हैं।

22:22डायरेक्ट तो नहीं है।

22:23सरकमस्टेंशियल एविडेंस जो

22:25मुझे इस बात का दुख है कि जिन ईर्षालु और

22:28महत्वाकांक्षी लोगों पर दीनदयाल हत्या की

22:30हत्या करने का षड्यंत्र करने के संबंध में

22:32संदेह की उंगली उठती है। वह उनके नाम का

22:34लाभ तो उठा रहे हैं। परंतु उनकी हत्या के

22:37सत्य को सामने आने देना नहीं चाहते। परंतु

22:40इतिहास के विद्यार्थी होने के नाते मुझे

22:42विश्वास है कि दीनदयाल उपाध्याय का खून भी

22:45सिर पर चढ़कर बोलेगा। इतिहास उनके साथ

22:48न्याय करेगा और उनकी हत्या का षड्यंत्र

22:52करने वालों पर लानत भेजेगी और उसके बाद

22:55अगले चैप्टर में वो हत्या के पीछे कौन एक

22:57गहराता रहस्य में वो सारी चीज बता देते

23:01हैं

23:01और पूरा मतलब बकल बलराज मधु उस हत्या की

23:05पूरी जिम्मेदारी जो है या साजिश रचने वाले

23:07जो थे व अटल बिहारी

23:08वो अभी सुन लीजिए उन उनके मुंह सुन लीजिए

23:11उनके उनकी जुबानी सुन लीजिए

23:13कुछ समय बाद जब मैं वहां अच्छा मुझे

23:17इसके बाद क्या हुआ कि इन्होंने इन्होंने

23:18ये कह दिया कि ये हत्या थी

23:20हम

23:21अटल बिहारी वाजपेयी प्रेस कॉन्फ्रेंस कह

23:23रहे हैं नहीं वो तो

23:24दुर्घटना थी

23:25दुर्घटना थी तो इस पर इनकी इनकी बहस हुई

23:29और इनके साथ एक दो लोग और आरएसएस के अटल

23:33बिहारी वाजपेयी के साथ हो गए और

23:38फिर आगे क्या होता है

23:41ये लोकल पुलिस इस पर बहुत अच्छा काम कर

23:44रही थी क्योंकि उसने बताया भी था लेकिन

23:46लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने क्या किया?

23:47यह इल्जाम लगा रहे हैं कि उसने सीबीआई को

23:50दिलवा दिया।

23:51अच्छा

23:51सीबीआई को और क्यों कैसे दिलवा? कुछ दिन

23:53बाद मुझे पता लगा श्री वाजपेयी के अनुरोध

23:55पर गृह मंत्री श्री चौहान ने दीनदयाल

23:57उपाध्याय की हत्या की जांच का काम सीबीआई

23:59को सौंप दिया। उससे मेरा संदेह और बढ़ा।

24:02उत्तर प्रदेश में उस समय जंग संघ के सहयोग

24:04से बनी संवित सरकार थी जिसके मुख्यमंत्री

24:07चौधरी चरण सिंह और उप मुख्यमंत्री जन संघ

24:09के राम प्रकाश गुप्त थे। वाराणसी के

24:12वरिष्ठ पुलिस अरक्षक अधीक्षक श्री शर्मा

24:14तत्परता से जांच काम में लगे हुए थे और वह

24:16ठीक निशाने पर पहुंचने की दिशा में बढ़

24:18रहे थे। जांच की तत्परता और जांच कर्ताओं

24:22के परिमाणिकता पर किसी को कोई संदेह नहीं

24:24था। उनके हाथ से लेकर जांच सीबीआई को

24:26सुबूर्त करने का कोई तर्कसंगत औचित्य नहीं

24:29था। अच्छा और सीबीआई की रिपोर्ट आ गई।

24:32उसमें उन्होंने बता दिया कि ये किसी चोर

24:35का काम था।

24:36मतलब बताया उन्होंने हत्या ही

24:38जी

24:39नहीं हां हत्या लेकिन वो चोर किसी किसी

24:42चोर का काम था और उसके बाद

24:46ये ये

24:48जो मांग था इसको इस पर बहुत उधम मच गया तो

24:52उसके बाद चंद्रचूद आयोग हमारे जो अभी

24:54चंद्रचूद साहब थे जिन्होंने हमारे देश की

24:56सेवा की जिन्होंने बाबरी मस्जिद का फैसला

24:58ऊपर भगवान से पूछकर किया उनके पिताजी तो

25:00उन्होंने आयोग का काम शुरू किया और

25:03उन्होंने आयोग चंद्रच आयोग बना

25:06मुझे और इन्हें बलराज बदो को गवाह के तौर

25:09पे नहीं जाने दिया। यह अकेला आदमी था

25:11आरएसएस जंग संघ का जो मुगल सराय पर उनकी

25:14लाश देखने गया था

25:15और ये गवाह नहीं थे।

25:16नहीं इनको इनको गवाही अटल बिहारी वाजपेयी

25:18तय कर रहे थे।

25:19वहां कौन-कौन जाएगा और नाना देशमुख

25:21उन्होंने इसको नहीं दिखा। चंद्रचूत आयोग

25:25की रिपोर्ट पढ़ने से भी लगता है कि जन संघ

25:26की ओर से पेश किए गए गवाह और वकीलों का

25:28सारा जोर तथ्यों को छुपाने पर था। उजागर

25:31करने पर नहीं। ठीक है। जी। कुछ वर्ष बाद

25:34केंद्र में जनता सरकार बनने पर दीनदयाल

25:36उपाध्याय की हत्या का मामला फिर उठा।

25:38सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि इस पर आयोग

25:40बिठाया जाए।

25:42जनता पार्टी की सरकार थी। सारे आरएसएस के

25:44मेंबर थे। उसमें नहीं किया गया।

25:48नहीं किया गया। और जंग का राष्ट्रीय

25:52अध्यक्ष बनने की जी एक बात स्पष्ट है

25:55दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के पीछे ना

25:57कम्युनिस्टों का हाथ था ना किसी चोर का।

25:59हम अगर वह चोरी का मामला होता तो चोर कम

26:02से कम उनकी जेब के पैसे और घड़ी तो अवश्य

26:04ले जाता। दीनदयाल उपाध्याय को झगड़ालू

26:07कहना चांद पर थूकना है। ये अटल बिहारी

26:08वाजपेयी कहते थे। अटल बिहारी वाजपेयी ने

26:10इनके साथ बहस में ये कहा कि वो तो झगड़ालू

26:13था। कोई भी उसको हर आदमी से झगड़ा कर देता

26:16था वो।

26:16जी

26:18उनकी हत्या किसी किराए के हत्यारे से कर

26:21करवाई गई। परंतु हत्या करवाने वाले

26:23षड्यंत्रकारी संघ जंग संघ के वह

26:25महत्वाकांक्षी और अपराधी वृत्ति के लोग

26:27थे। उन्हें ही श्री दीनदयाल की हत्या से

26:29सीधा लाभ हुआ। यह बंदा कह रहा है जंग संघ

26:32और आरएसएस के लोगों ने हत्या कराई

26:34और जिन्हें सीधा लाभ पहुंचा है।

26:36जी

26:37दीनदयाल की हत्या के संबंध में प्रमाणिक

26:39और आंखों देखी जानकारी मेरे पास होने और

26:41जंग संघ के वरिष्ठ नेता के रूप में मेरी

26:43जनसाधारण में छवि और विश्वसनीयता के कारण

26:45दीनदयाल उपाध्याय को अपने रास्ते से हटाने

26:48के बाद यह लोग मुंह मुझे अपने रास्ते से

26:50हटाने के काम में जुट गए। वो यह भी जानते

26:53थे कि जनता मेरी बात पर विश्वास करेगी

26:55क्योंकि मेरी सत्य निष्ठा और अंतरात्मा ने

26:58मुझे सत्य मार्ग से विचलित नहीं होने

27:00दिया। इस कारण दीनदयाल की हत्या के बाद

27:02मेरी राजनीतिक हत्या

27:05बाद मेरी राजनीतिक हत्या का षड्यंत्र रचा

27:08गया और वो ये साफ बता रहे हैं कि इस हत्या

27:11को करवाने के अंदर

27:13इसका हाथ था। हम

27:15अटल बिहारी वाजपेयी और इनका हाथ था। अच्छा

27:18उसके बाद एक और ये बात लेकर आते हैं जिस

27:22पर पर्दा ही पड़ा रहा अटल बिहारी वाजपेयी

27:24की जो सबसे दुखती रख थी उस पर किसी ने

27:26चर्चा नहीं की।

27:27ये अपनी किताब के पेज 25 में कहते हैं

27:31मुझे अटल बिहारी वाजपेयी और नाना देशमुख

27:33के चारित्रिक दुर्बलताओं का ज्ञान हो चुका

27:36था। कुछ समय पूर्व जब मैं जंग संघ का

27:37अध्यक्ष था। केंद्रीय कार्य मंत्री जगदीश

27:40प्रसाद माथुर ने जो अटल बिहारी के साथ ही

27:4230 राजेंद्र प्रसाद रोड पर रहता था। यह

27:45रहता था। वही कह रहे हैं। मैं नहीं बोल

27:47रहा हूं। मुझसे शिकायत की थी कि अटल ने इस

27:50मकान को व्यभचार का अड्डा बना रखा है।

27:52अय्याशी का अड्डा

27:53बनाया हुआ है। वहां नित नई-नई लड़कियां

27:55आती हैं। अब सिर पानी से गुजरने लगा है।

27:57इसलिए जंग संघ के वरिष्ठ नेता होने के

27:59नाते यह बात मैंने आपके नोटिस में लाने की

28:02हिम्मत की है।

28:03ये माथुर साहब लिख रहे हैं।

28:04माथुर साहब बोल रहे हैं इनको। जी

28:06हां साहब

28:08जी मुझसे शिकायत की। इन्होंने सीधी शिकायत

28:11की। मुझे अटल के चरित्र के विषय में

28:14जानकारी थी।

28:16मधुक लिख रहे हैं आप।

28:18परंतु स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है यह मैं

28:20नहीं जानता था।

28:22अच्छा एक बात मैं और बताना चाहता हूं कि

28:25मुझे एक दिन बलराज मधु जी ने बुलाया था।

28:29हां जी। उन्होंने तो मुझे इन किताबों के

28:31बारे में बताया। मुझे थोड़ी पता था।

28:33उन्होंने ये सेट मुझे दिया था।

28:35अच्छा।

28:36हां। उन्होंने उन्होंने कहा था वो मेरे

28:39कमीज होने पर दुखी भी थे। हम

28:41और वो सब और

28:44मुस्लिम पहचान होने पर

28:45हां हां वो वो थे लेकिन मेरे मेरा पढ़ते

28:50भी थे वो अखबारों के अंदर मैं लगातार

28:53लिखता था

28:54तो मुझे अटल के चरित्र के विषय में कुछ

28:57जानकारी थी परंतु स्थिति इतनी बिगड़ चुकी

28:59है ये मैं नहीं जानता था। मैंने अटल को

29:01अपने निवास पर बुलाया। कौन कह रहा है जनाब

29:03ये

29:04बलराम

29:08और बंद कमरे में उससे जगदीश प्रसाद माथुर

29:10द्वारा की गई बातों के विषय में पूछा उसने

29:13जो सफाई दी उससे जगदीश प्रसाद माथुर की

29:15बात और साफ हो गई

29:16हम

29:18क्या सफाई थी

29:19तब मैंने उसे सफाई ये दिया कि हां मैं

29:21करता हूं जो तुमको करना है कर लो

29:24भाई तभी तो कह रहे हैं ना कि उससे और बात

29:26साफ हो गई

29:28जी

29:29मैं गलत कर रहा हूं या यह सब है ऐसा तो

29:31कोई चक्कर नहीं है

29:33तब मैंने उसे सुझाव दिया कि वह विवाह कर

29:36ले। हम

29:41अन्यथा वो तो बदनाम होगा ही। जन संघ की

29:43छवि को भी धक्का लगेगा। अब वही व्यक्ति जन

29:46संघ का अध्यक्ष बन चुका था। जन संघ की

29:48प्राथमिक सदस्यता भी हटाने की मांग का

29:50मुझे यह एक कारण लगा। उसे लगा कि यह मेरी

29:52दुर्बलताओं के को जान गया है। उसके बाद

29:55अटल बिहारी वाजपेयी ने बनते ही इनको हटा

29:57दिया था। हटा दिया था। तो

30:00ये ये साब अच्छा उसके बाद जो सबसे भयानक

30:04इसमें चौंकाने वाली चीज है वो है जनाब इस

30:08मामले को ये बंदा ले गया बल्लाज मधुक ले

30:11गए

30:12गुलवलकर

30:12गुलवलकर के पास ले गए जनाब

30:14हम

30:15जी ये

30:16चेंज चल रही है बातचीत हो रही है

30:18हां जी

30:19हम बात

30:20इनके इनके पास शिकायत आती है माथुर साहब

30:22से

30:23फिर ये बात करते हैं अटल बिहारी वाजपेयी

30:25से फिर ले जा रहे हैं गोलबल करके

30:26नहीं इससे पहले बहुत बार कर चुके वो टाइम

30:28नहीं

30:29वह लिखे हैं बीच में कि वह टाइम नहीं मिल

30:31रहा है मुझे। मैं मैं बात करना चाहता हूं

30:33कि बहुत गंभीर हालात है। इनको भी निकाला

30:35गया है। इनको प्रताड़ित भी किया जा रहा

30:37है। यह सब किया जा रहा है। इनके खिलाफ

30:39अंग्रेजी अखबारों में बहुत लिखवाया जा रहा

30:41है। और जो ये कहते हैं कि अटल बिहारी

30:42वाजपेयी और नाना देशमुख लिखवा रहे हैं।

30:46सन 1970 के शुरू में एक दिन पराज श्री चमन

30:49लाल ने दूर भाजपा पर मुझसे संपर्क किया और

30:51कहा कि श्री गोलवर्कर जी जिन्हें जंग संघ

30:54के कार्यकर्ता जिन्हें संघ के कार्यकर्ता

30:56गुरु जी कहकर संबोधित करते ने मुझे याद

30:58किया है और मुझे उन्हें मिलने का निश्चित

31:00समय भी बताया। मैं ठीक समय पर ठीक समय पर

31:03लाला हंसराज गुप्ता के निवास पर पहुंच

31:05गया। लाला हंसराज गुप्ता का निवास जो है

31:07ये इसके पास था। बाराखं रोड पर था।

31:11जी

31:13श्री गुरु जी मेरी प्रतीक्षा कर रहे थे।

31:15उन्होंने मुझसे जंग संघ की अंतर किल और

31:17अटल बिहारी वाजपेयी और नाना देशमुख के साथ

31:19मनमुटाव का कारण पूछा। मैंने उन्हें

31:22दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के संबंध में

31:24अपनी जानकारी और वाजपेयी तथा देशमुख

31:26द्वारा सत्य को दबाने और मुझे जंग संघ से

31:28निकालने के प्रयासों तथा उसके चरित्र और

31:30चिंतन पर विस्तार से प्रकाश डाला। मेरे

31:33द्वारा बताई गई कुछ बातों से वो सर्वथा

31:35अनभिज्ञ थे। उनको पता नहीं था। ठीक है।

31:38मैंने उनसे प्रार्थना की कि वो मेरे

31:40द्वारा दी गई जानकारी की अपने ढंग से जांच

31:43पड़ताल करें और जंग संघ की निर्मल छवि और

31:45वैचारिक आधार को कायम रखने के लिए अपने

31:49प्रभाव का उपयोग करें और सबसे शर्मनाक जो

31:53नैरेटिव है वो अब आता है।

31:55हम

31:56मेरी बातें सुनकर कुछ समय के लिए मौन रहने

31:59के बाद वो बोले। मौन रहने के बाद बोले

32:01उनको कोट किया है इन्होंने बल्ला जी ने।

32:04मुझे भी इन लोगों की चारित्रिक कमजोरियों

32:07की जानकारी है। परंतु मुझे संगठन चलाना

32:09है। हम

32:14सबको साथ लेकर चलना है। इसलिए शिव की तरह

32:17रोज जहर पीता हूं।

32:19गोलगोल करके राम जी

32:20गोलगोल करके

32:21फिर कॉमा बंद होता है। और फिर मुझे सलाह

32:24दी कि जंग संघ के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ता

32:26होने के नाते तुम भी ऐसा ही करो और सबको

32:29साथ लेकर चलने का प्रयत्न करो। उन्होंने

32:31विशेष रूप से नाना देशमुख का नाम लिया और

32:33सुझाव दिया कि मैं उसके विश्वास में लूं

32:36और उसे सहयोग करूं। बताइए

32:39हम

32:42सर सर्वा आरएसएस का बोल रहा है कि ऐसा तुम

32:45एक की बात कर रहे हो। मैं ऐसे सैकड़ों का

32:49जहर पीता हूं।

32:51सुनिए ना ये परंतु मुझे सबको साथ और फिर

32:55मुझे सलाह दी कि जंग संघ के

32:58इसलिए शिव की तरह रोज जहर पीता हूं। हम

33:01कितने लोगों का जहर यानी अटल बिहारी

33:03वाजपेयी अकेला अय्याश नहीं था वहां पर

33:07अटल बिहारी वाजपेयी जो सारी हरकतें कर रहे

33:09हैं और जिस तरह से चंद्रजू आयोग बिठाया

33:13जिस तरह से वो कांग्रेसी चौहान होम

33:16मिनिस्टर से मिल गए ऐसे और लोगों भी हैं

33:19और गोलवलकर निकालने की हिम्मत नहीं रखते

33:23हैं। यह जो आपका पहले वाला सवाल था कि वो

33:25इतने बड़े हो जाते हैं कि पूरा आरएसएस जो

33:28है उसको नतमस्तक हो जाता है।

33:30आपके पास आधार तो कोई है नहीं तो संगठन

33:32चलेगा कैसे जब आधार ना हो केवल नफरत के बल

33:35पे एक नेता आता है वह आपसे बड़ा हो जाता

33:37है फिर वो कुछ भी करे

33:39कोई आदमी ये कहे कि इन्होंने तो छोड़ दिया

33:40था और अलग जंग संघ बना ली थी

33:42इनकी जब डेथ हुई है वो चिट्ठी भी मैं आपको

33:45लगाने के लिए दे दूंगा आरएसएस ने आरएसएस

33:48की तरफ से इनके मरते दम तक आरएसएस का कैडर

33:51रहने की इनको भावनी श्रद्धांजलि दी है।

33:54यानी कोई ऐसा नहीं है कि ये मरते वक्त

33:56आरएसएस के कैडर नहीं थे। हम

33:59मधुक साहब

34:00मधुक साहब वो भी चिट्ठी मैं आपको शेयर कर

34:02दूंगा अगर उसका इस्तेमाल होगा तो ठीक है

34:04और उसके बाद

34:07एल के आडवाणी के बारे में जो ये बात बोली

34:09सर एक चीज एक चीज जरूर पूछना चाहूंगा सर

34:11मैं

34:12के ये जनसंघ के अध्यक्ष थे उसके बाद अटल

34:14बिहारी का राइज होता है जनसंघ के अंदर वो

34:17अध्यक्ष बनते हैं

34:18तो एक नॉर्मल पॉलिटिकल कंपटीशन भी होता है

34:21तो क्या ये किताब उस कंपिटिटिव

34:24चीज को देखते हुए उनके छवि हनन के लिए लिख

34:27दी गई नहीं मैं आपको एक बात बताना चाहता

34:29हूं। बलराज मधुक बहुत ईमानदार आदमी थे।

34:32मतलब मैं मैं जितना उनको जानता हूं मैंने

34:35उनका जो घर देखा

34:38जो उनके देखिए आप उनके कोई परिवार किसी को

34:40राजनीति में नहीं देखते हैं। देखते हैं

34:43कहीं फायदे उठाते हुए कोई

34:48कांटेक्ट लेते हुए या कोई नौकरियां करते

34:49हुए बहुत सादगी का जीवन जीते थे। यानी ये

34:54ये कभी जो कभी सचमुच में कि हमने हिंदुओं

34:59की सेवा करनी है। भाव उनका था। ये भाव

35:01उनका था। ये आनंद मठ वाले हिंदू सेवक नहीं

35:04थे।

35:05मैं मतलब मैं मैं उनको उनकी बहुत

35:08इंडियनाइजेशन की थ्यरी थी। उनका इतनी मेरी

35:10उनकी बहस होती थी। ये सब होता था और एक

35:12बार नहीं मैं कई बार उनके घर पर गया। शायद

35:15सुभाष नगर रहते थे। जहां तक मुझे याद है

35:17क्योंकि

35:18सुभाष नगर वेस्टर्न वेस्टर्न दिल्ली के

35:20अंदर ही रहते थे। परिवार में परिवार में

35:24और लोगों से मैं मिलता था। शायद इनकी बेटी

35:26थी। मुझे पूरा याद नहीं है। तो ये ये वो

35:33ये वो लोग थे जिन्होंने

35:36जंक्शन की जिंदगी जिंदगी। देखिए एबीपी के

35:38संस्थापक हैं ये। ये जंग संघ के संस्थापक

35:41हैं।

35:42ये ये जम्मू कश्मीर को जो भी आरएसएस की जो

35:47भी थी उस उस काम को इन्होंने इन्होंने

35:49किया है।

35:50अच्छा और ये

35:52ये ये बलराज मधु का ही नहीं टूट रहा था।

35:55आपको मैं यह इस किताब के अंदर फिर बाद में

35:58कैसे अटल बिहारी वाजपेयी और नाना देशमुख

36:02ने गद्दारी की और अगला जो अगला जो

36:04गद्दारी कौन सी

36:06इमरजेंसी में

36:07हम वो इमरजेंसी में भूमिका पे बड़े सवाल

36:09उठते हैं

36:10और इतना इतना भयानक है वो तो वो तो पांच

36:14के पांच खत मैंने

36:17किए हैं अपने देश के सामने रखे हैं

36:20क्या थे उन खतों में

36:21नहीं वो वो ये था कि हम आपके 24 प्रोग्राम

36:25में ज्वाइन करना चाहते हैं। मुझे लगता है

36:27कि अभी उसको यहां नहीं करें क्योंकि अलग

36:30करेंगे नहीं तो वो फिर लंबा हो जाएगा। वो

36:32तो वो इस इसमें क्या जिक्र कर रहे हैं वो

36:34जरा सा देख लीजिए 188 पेज पर 188 पेज पर

36:38ये कह रहे हैं और वो वो सारी सारी डिटेल्स

36:40मेरे पास है। इस इनकी किताब देखने के बाद

36:43ही मैंने वो सारे खत जमा किए थे।

36:46188 पेज

36:50संघ के संचालक श्री बाला साहब देवस पूना

36:52के यरदा जेल में मीसा बंदी थे। श्री

36:55गोलवलकर के संघर्षमय और आदर्शवादी जीवन के

36:58विपरीत उनका जीवन सुविधा भोगी था। इसलिए

37:00उन्होंने जेल से इंदिरा गांधी को संघ के

37:02प्रति रुख बदलने और उस पर से प्रतिबंध

37:04हटाने के लिए 208 1975 और

37:0810.11.1.1.1.1.1.1.1.1.1.175 को दो पत्र

37:10लिखे। उन्होंने श्री विनोबा भावे को भी

37:12पत्र लिखकर प्रार्थना की। कि वो इंदिरा

37:13गांधी के मन से संघ के प्रति विरोध का भाव

37:16दूर करने का प्रयत्न करें। वो चिट्ठियां

37:18मेरे पास हैं ओरिजिनल

37:19वो जो है और उसमें हम 20 पॉइंट प्रोग्राम

37:22में होंगे। हम संजय गांधी जो हैं वो बहुत

37:25अच्छा काम कर रहे हैं। हम उनकी मदद करना

37:27चाहते हैं। ये सबों में ये सब उन्होंने

37:30किया है। अच्छा इसमें एल के आडवाणी के

37:32बारे में जो कहते हैं वो जिन्होंने इस देश

37:34का सत्यानाश किया। यानी एक आदमी

37:38जो आरएसएस की पॉलिटिक्स तो और लोग भी करते

37:40थे लेकिन जिसने पूरा इस देश को मतलब इस

37:44देश को जिसने स्लॉटर हाउस में पहुंचा दिया

37:47कि देश अपने आप अपना गर्दन काट ले उसके

37:50बारे में जो लिखा है वो वो भाई वो सुनना

37:53जरा सा

37:54बहुत जरूरी है। अटल बिहारी वाजपेई को और

37:58नाना देशमुख को पूरा बढ़वाने में और

38:03यह एक यह था कि जो मारे मारे गए ना

38:06दीनदयालयाल उपाध्याय वो ये भी था कि वो

38:07अगले सर संचालक बनने बनने जा रहे थे

38:10उनको रास्ते से हटाने के लिए भी उनका

38:12मर्डर कराया गया

38:13अच्छा

38:14जी उनका मर्डर जो है

38:15वो कराया गया ये कहीं पर मैंने कोट किया

38:18है ना कि उनकी मौत के जिम्मेदार ये अटल

38:20बिहारी वाजपेयी और ये थे ये बोला है ना

38:22इन्होंने हां बोल बोल दिया ना वो बात

38:25अच्छा आप सुन लीजिए जरा इसके बारे में।

38:28लालकृष्ण आडवाणी की स्थिति कठपुतली की थी।

38:31वह इस पद का जो उसे जंग संघ के अनेक

38:33वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को ताक पर रखकर दिया

38:35गया था का पात्र नहीं था। मैं अपने अनुभव

38:38के आधार पर जानता था कि वो बिना हड्डी के

38:40चमत्कार बोनलेस बंडर है। वंडर है। उसका

38:43अपना ना कोई मानस है ना कोई मत। परंतु है

38:46वो भाग्यवान। वाजपेई और संघ के अधिकारियों

38:49के प्रसाद से उसे जो पद मिला उसकी गरिमा

38:53के ताक पर रखकर उसने बंधु बंधुआ मजदूर की

38:56तरह जो काम उसने कहा गया था वो उसने किया।

39:00पत्रों की भाषा उसकी

39:03पत्रों की भाषा उसकी थी। भाव उसके आकाओं

39:05के थे।

39:06हम

39:07कौन थे आका? अटल बिहारी वाजपेयी।

39:09बिहारी वाजपेयी।

39:10हां।

39:10अच्छा। और नाना देशमुख आप जानते हैं? नाना

39:13देशमुख कौन आदमी था जिसने बाद में सिखों

39:15के कत्लेआम को जस्टिफाई किया। हम्

39:17अह 8 नवंबर 1984 को सिखों को उसने खत लिखा

39:21कि तुम्हारी तुम्हारी वजह से ही सारा हो

39:23रहा है। 84 पर हमने एक करना है जरूर सिक

39:26पर है ना

39:27जी और उसके बाद इसको भारत रत्न दिया

39:30तो भारत रत्न जो दिया गया तो एक एलके

39:33आडवाणी वो

39:35अटल बिहारी वाजपेयी के पाले हुए एक खास

39:37उनके एक खास जो आदमी था उसको मोदी ने

39:39उसको मोदी ने दिया तो ये जो कथा है लेकिन

39:43ये कथा भी खत्म नहीं होती है

39:45एक और बंदा एक आरएसएस का एक और बंदा जिसने

39:51जिसने तो किताब ही लिखी

39:56द एंड ऑफ अ ड्रीम एंड अवे यह यह किताब है

39:59हेमेंद्रनाथ पंडित जी की हेमेंद्रनाथ

40:02पंडित पंडित कौन थे? ये

40:06अखिल भारत प्रतिनिधित्व सभा के सदस्य थे।

40:08आरएसएस की सबसे हाईएस्ट डिसीजन मेकिंग

40:10बॉडी है। आरएसएस के बंगाली साप्ताहिक

40:14मुखपत्र के संस्थापक संपादक थे।

40:17सन 1950 वो

40:20जवानी से ले वो आरएसएस में थे। सन 1950

40:24में उन्होंने ये किताब लिख दी एंड ऑफ अ

40:27ड्रीम एंड ऑफ अ ड्रीम एन इनसाइड व्यू ऑफ द

40:31आरएसएस टुडे। ठीक है जी। और क्या लिखते

40:35हैं वो गोलवलकर के बारे में? आरएसएस के सर

40:38संचालक के तौर पर अपने कार्यकाल के

40:40शुरुआती सालों में गोलवलकर बहुत सीधे साधे

40:42और विनम्र थे। विनम्र थे। वह लाइमलाइट से

40:46दूर रहते थे। बहुत साधारण कपड़े पहनते थे

40:48और अपने पूर्ववर्ती की तरह हमेशा ट्रेन के

40:51थर्ड क्लास डिब्बे में सफर करते थे।

40:53हालांकि जैसे-जैसे संघ के समर्थकों की

40:55संख्या बढ़ी उनमें धीरे-धीरे बहुत बड़ा

40:57बदलाव आया। आज 45 साल की उम्र में उस वक्त

41:00गोलवर्कर जिंदा थे जब उन्होंने किताब

41:01लिखी। यानी ऐसे नहीं उनके मरने के बाद

41:03लिखी है। आज 45 साल की उम्र में गोलवर्कर

41:06अपनी पतली नाक पर सोने के फ्रेम वाला

41:09चश्मा लगाते हैं। सोने की कलाई घड़ी पहनते

41:12हैं और रेशम के कुर्ते पर सोने के बटन

41:14लगाते हैं। जिन्हें देखकर बड़े-बड़े

41:16जमींदार भी जलते हैं। उनके दाहिने हाथ की

41:19आखिरी तीन उंगलियों में जड़े हुए रत्नों

41:21वाले सोने की तीन अंगूठियां उनकी शोभा

41:23बढ़ाती हैं।

41:25उनकी धोतियां बेहतरीन होती है। जिनमें से

41:27कुछ में ब्रॉकेट ब्रॉकेट का 1 इंच चौड़ा

41:30बॉर्डर होता है। घर से बाहर भी वह अपने

41:32कंधे पर हल्के आसमानी रंग का एक नाजुक एक

41:35बड़ा डेलिकेट तो तौलिया रखते हैं। और उसके

41:38बाद वो बताते हैं

41:41एक बात है जिसने सबसे ज्यादा मेरे इस

41:43साधारण मेरी इस धारणा को कमजोर किया है कि

41:46वो कभी गलत नहीं हो सकते। एक तो इसके

41:49गोलवलकर के बारे में आज भी बताया जाता है

41:51ही कुड नेवर बी रोंग। हम कोई दिव्य हां वो

41:56दिव्य आपने बहुत सही कहा कि वो तो एक जैसे

41:58ये वाले दिव्य हैं

41:59नॉन बायोलॉजिकल

42:00नॉन बायोलॉजिकल है वो भी नॉन बायोलॉजिकल

42:02थे है ना

42:03हां जी

42:05के मेरी मेरी जो बिल्कुल मैं सच उतरा हूं

42:08वो ये है कि ये बंदा जो है इनफेलेबल नहीं

42:11ये इनफेलेबल हो ही नहीं ये गलत हो ही नहीं

42:14सकता था

42:16जी

42:17वह बात यह है कि वो कुछ आवारा मराठी

42:20प्रचारकों को छूट देते रहे हैं जबकि असल

42:22में उनकी की कुछ गलत हरकतों के लिए उन्हें

42:24कड़ी सजा मिलनी चाहिए थी। वो गोलवल करके

42:28पुराने परिचित हैं और इससे नाते उन्हें

42:30ज्यादातर बड़े नेताओं को बहुत करीब से

42:33देखा है। जब उनकी किसी गंभीर गलती को

42:37नजरअंदाज कर दिया जाता है। कौन गरीब सारे

42:40बंगाल के अंदर

42:43महाराष्ट्र के मराठी भेज दिए थे उन्होंने।

42:46हम

42:47होल टाइमर। ये उनकी बात कर रहे हैं।

42:49जी।

42:52जब उनकी किसी गंभीर गलती को नजरअंदाज कर

42:55दिया जाता है तो समझदार लोगों के मन में

42:57यह शक पैदा होता है कि शायद गोलवालकर उनसे

42:59निपटने में बेबस हैं। हम

43:02ठीक वैसे ही जैसे कुछ प्रचारकों में बढ़ते

43:04दिखावे और ऐशो आराम को रोकने के मामले में

43:07वह खुद अपने ही आचरण की वजह से कोई सख्त

43:09कदम उठाने में असमर्थ महसूस करते हैं।

43:11जब खुद ही कर रहे हो तो बोलोगे क्या?

43:13जी। ठीक है। इनकी किताब के अंदर इस बात का

43:19भी जिक्र है कि आरएसएस के वरिष्ठ

43:20कार्यकर्ताओं ने गोलवल करके महिलाओं के

43:23साथ संपर्क रखने पर आपत्ति जताई थी।

43:26उन्होंने कहा कि मैं इस पर ज्यादा नहीं

43:27लिखना चाहता हूं। लेकिन ये भी अटल बिहारी

43:31वाजपेयी के रास्ते पर क्या थे? मधुक लिख

43:33रहे हैं। ये

43:35हेमंत त्रिपाठी

43:37पंडित लिख रहे हैं।

43:38जी

43:41औरतों के साथ संपर्क पर बहुत सवाल उठते

43:43थे। लेकिन सवाल तो पूरे दबा दिए जाते हम

43:47सवालों का कल्चर ही नहीं हम

43:50सवाल तो आप दिमागी वो है ना आप पाकिस्तानी

43:53हैं ये हैं सब हैं

43:55टुकड़े-टुकड़े गैंग अर्बन

43:56तो ये सब जनाब इनकी इनकी कथा है और एक

44:00पर्सनल सिर्फ ये बताना चाहता हूं कि हम

44:04दिल्ली यूनिवर्सिटी में नाटक करने जाते थे

44:08भाषण करने जाते थे लाइब्रेरी जाते थे तो

44:12एक कॉलेज के

44:15टीचर्स फ्लैट के बाहर इनको बहुत सारी बार

44:17आप अटल जी को देख सकते थे।

44:21अच्छा

44:22हम अटल जी को देख सकते थे और वहां पर यह

44:27है कि जिस प्रोफेसर के यहां जाते थे तो वो

44:31प्रोफेसर जो थे उन्होंने एक दिन आत्महत्या

44:33भी की थी। जिनके घर में ही रहते थे ना।

44:35पीएम आवास में भी रही वो प्रोफेसर

44:38राजकुमारी कॉल किया बात।

44:40नहीं मैं पता हां वो मतलब उनके पति ने

44:42आत्महत्या की थी।

44:42जी पति ने आत्महत्या की थी। पीएम आवास में

44:45तो जब प्रधानमंत्री बनते हैं अटल बिहारी

44:47वाजपेई तो राजकुमारी कॉल भी पीएम आवास

44:49रहती हैं और जो मिस्टर कॉल है वो भी पीएम

44:51आवास उनको भी ले जाया जाता है

44:58फिर कॉल साहब ने आत्महत्या कब की

45:01शायद वो नहीं है वहां पर वो वो वहां नहीं

45:04पहुंचते हैं तब तक तो

45:07देखिएगा इसको जरा

45:09पीएम आवास में पहुंचे हैं वो

45:10पीएम आवास में पहुंचे हैं

45:11जी

45:12तो ये तीनों लोग उसी एक जगह पे रहे हैं।

45:16अच्छा हां तो वो जो है तो चलिए एक खूटा एक

45:22खूटे पे बंध गए थे वो तो बुरी बात नहीं थी

45:25हम

45:25है ना

45:27लेकिन आरएसएस उनमें वो वो जो है उनको एक

45:33इंसान बना पाया नहीं बना पाया पता नहीं तो

45:38और उसके बाद बाबरी मस्जिद के गिरने में जो

45:41उनका पूरा रोल है वो सारा का सारा और उसके

45:46बाद

45:48जातिवाद को खत्म कराने में उनका कोई

45:50प्राइवेटाइजेशन इस देश का जो

45:51प्राइवेटाइजेशन का जो तमाम दौर जो चला है

45:54वो इनका इनका बहुत बड़ा रोल है।

45:57जॉब्स खत्म करने में जो इनका

46:00हां और इनका वो दौर है जिसमें इंडियन

46:04गवर्नमेंट का

46:06अंबानी अडानी टेकओवर स्पेशली अंबानी

46:10टेकओवर इंश्योर किया जाता है। अडानी तो उस

46:13वक्त गुजरात में मोदी जी का साथ दे रहे

46:15थे।

46:15जी अंबानी का टेकओवर

46:20है। मेरे मेरे पास

46:23जो इनका जो फ्राइडे मैन था यानी वो जो

46:27सारा काम कराता था वो जिनके जिनके भाई ने

46:31जिनका मर्डर किया था। हां वो सेक्स

46:33मर्डर्स तो इसमें इसमें इतने

46:35महाजन की बात आप कर रहे हैं। प्रमोद महाजन

46:37प्रमोद महाजन प्रमोद महाजन का एक फोटो है

46:41अंबानी के मंत्री हैं वो

46:43अंबानी की जनरल बॉडी मीटिंग में अंबानी के

46:47जो मालिक थे वो क्या नाम था ओरिजिनल

46:49मुकेश धीरू भाई अंबानी

46:50नीरू भाई धीरू भाई अंबानी का सर पर फोटो

46:53रखे हुए जनरल बॉडी मीटिंग के अंदर सर पर

46:56फोटो लगाए हुए

46:57अहमद महाजन का

46:58हां तो इनके जो जो काम है कि यह पूरा

47:03बिजनेस

47:05टेकओवर ऑफ दी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया

47:09टर्न इट इंटू अ बिज़नेस

47:11जी जी

47:11मतलब फर्स्ट टर्न इट इंटू बिज़नेस एंड टेक

47:14ओवर करिए आप वो इनके जमाने

47:16अपने फायदे के लिए चलाइए

47:17हां असल में वो वो शुरू तो हो गया था

47:19नरसिम्हा राव के जमाने से कैपिटलिज्म वो

47:22जो पूंजीपति जो थे उनका वो चलने का और

47:25इसका बड़ा रोल था उसमें जो कांग्रेसी

47:29था

47:29प्रणब मुखर्जी प्रणाम मुखर्जी जी प्रणब

47:32मुखर्जी Reliance के आदमी थे। प्रणब

47:35मुखर्जी जो हैं वो भी इनके ही इनके ही

47:38आदमी थे।

47:39पूंजीपतियों का तो हमेशा से एक धड़ा हर

47:41पार्टी में रहा ही रहा है।

47:42हां नहीं लेकिन मान लीजिए धड़ा रहता था

47:45लेकिन फुल टेकओवर के हम चला रहे हैं। हम

47:47कुछ भी काम करा देंगे।

47:50स्पेशल प्रिविलेज था।

47:52हां।

47:53जी

47:55अजीब तरीके से सरकारें चलती हैं। जहां पर

47:57जिस तरीके से पूंजी इशारा करेगा उस तरीके

48:00से देश चले और कुछ लोग इसमें सहयोगी हो

48:03जाते हैं। जैसे प्रमोद महाजन अगर आप बात

48:05कर रहे हैं जो तस्वीरों का बहरहाल

48:07सांप्रदायिकता जो है वो कभी ऐसे नहीं आती

48:10कि नंगे आ जाए। सांप्रदायिकता आती है

48:12संस्कृति की दुहाई देते हुए कि भाई हम

48:15संस्कृति की रक्षा कर रहे हैं क्योंकि उसे

48:16भी पता है कि उसका चेहरा बड़ा कुत्सित है

48:19और बिना संस्कृति के दुहाई दिए वो नग्न

48:22नाच जो करना चाहती है वो कर नहीं सकती है।

48:24आरएसएस जब कहती है कि वो एक सांस्कृतिक

48:26संगठन है। आरएसएस जब वो कहती है कि हम

48:28संस्कृति की रक्षा कर रहे हैं तो आप समझे

48:31कि दरअसल संस्कृति की पैकेजिंग में

48:33सांप्रदायिकता परोसी जाने वाली है और उसकी

48:36वजह क्या हैं? उस पर हम शमसन सर से पहले

48:38वीडियोस में भी बात कर चुके हैं और

48:40संस्कृति के रक्षकों की जो बात है उसी में

48:43बलराज मधु जब जनसंघ बनती है उसके अध्यक्ष

48:46रहे संस्थापक रहे वो अटल बिहारी वाजपेयी

48:49के बारे में क्या राय रखते हैं और पूरी

48:50फंक्शनिंग आप समझ सकते हैं आरएसएस की किस

48:52तरीके से हो रही थी और किस तरह से

48:54संस्कृति की रक्षा हो रही थी इसलिए हमने

48:56सोचा कि इस बारे में बातचीत की जाए

48:57दी मोस्टेंट आई लॉग ऑफ द आरएसएस वो कह रहा

49:00है कि मैं तो ऐसे लोगों का रोज ज़हर पीता

49:02हूं। रोज ज़हर पीता हूं क्योंकि मुझे संगठन

49:04चलाना है।

49:05तो जो संगठन चरित्रहीन व्यक्तियों का ज़हर

49:08पी के चल रहा हो वह संस्कृति की रक्षा

49:11कैसे करेगा? साधारण

49:12और ये हमारे में से हम में से कोई नहीं कह

49:14रहा है ये बंदा जो आरएसएस के कैडर के तौर

49:17पर मारा गया। यानी इनका इंतकाल जो हुआ

49:20इनका जो मौत हुई और उस पर आरएसएस ने जो

49:22प्रस्ताव पास किया

49:24हम

49:24कि इतना महान इतना महान हमारा कैडर तो ये

49:28उसकी कही हुई बात

49:28उसकी कही हुई बातें हैं। ये बातें हम आप

49:31तक लाए। बातें आपको कैसी लगी यह आपको

49:33बताना है। बताएंगे आप कमेंट सेक्शन में।

49:35बहुत-बहुत शुक्रिया बातचीत सुनने के लिए

49:36और बहुत-बहुत शुक्रिया सर आपका।

49:38क्या बात हमसे बात

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